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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 870

जयसिंघ और शालिनी की शादी फिक्स हो गयी

सब तैयारी मे लग गये

नेहा नीता छोटू इस शादी से ज़्यादा ही उतेज़ित थे

वो तो अभी से बहुत कुछ सोचने लगे

पिताजी ने पूजा और अपने दामाद को भी बता दिया जयसिंघ के शादी के बारे मे

पूजा को ये पता चलते ही वो बिना एक पल रुके रमेश के साथ गाँव आ गयी

पूजा कैसे रिक्ट करेगी ये पिताजी को पता था

पूजा ने घर मे पैर रखते पिताजी को आवाज़ दी

पूजा- मेरी शादी हो गयी है तो मैं क्या आपकी कुछ नही हूँ

पिताजी- नेहा नीता देखो तुम्हारी दीदी और जीजाजी आए है

पूजा- मैं बस इतना बताने आई हूँ कि मैं शादी मे नही आने वाली

पित्स्जी- दामाद जी तो आएँगे

पूजा- कोई नही आएगा , आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते है

पिताजी- दामाद जी को अंदर तो आने दो

रमेश- पूजा बहुत गुस्से मे है

जयसिंघ- पूजा ,, तुम आ गयी अच्छा हुआ तुम आ गयी , देखो नेहा नीता मुझे कितना परेशान कर रही है

पूजा- आप तो बात ही मत करो

जयसोंघ- क्या हुआ

पूजा- मुझे बिना बताए , बिना मिलाए भाभी से शादी कैसे तय की

जयांघ- मुझे भी नही पता था

पूजा- क्या मतलब आपको भी नही पता

जयसिंघ- मुझे पिताजी ने उल्लू बनाया

नेहा- पूजा दीदी आप भी सुंनेगी तो आप गुस्सा थूक दोगि

नीता- जीजाजी आप वहाँ होते ना तो पेट पकड़ कर हँसते

पूजा- क्या हुआ था

पिताजी- जो घर के अंदर आएगा उसे ही बताएँगे

रमेश- पूजा तुम मत आओ मैं तो घर के अंदर जा रहा हूँ , मुझे सुनना है कि जयसिंघ के साथ क्या हुआ

और रमेश अंदर आ गया

नेहा- जीजाजी लीजिए पानी

रमेश ,- तो नेहा क्या हुआ था

नीता-मैं बताती हूँ जीजा जी को

पिताजी- पूजा सुन ले वरना तू क्या मिस करेगी तू सोच भी नही सकती

पूजा- मुझे कुछ नही सुनना

रमेश- मुझे बताओ फिर मैं भी तुम्हे एक खुशख़बरी बताउन्गा

नेहा- क्या है खुशख़बरी

रमेश- पहले तुम बताओ

नीता- तो शुरू ऐसे हुआ था कि

पूजा - रुक

नेहा- क्या हुआ दीदी

पूजा- मैं भी सुनुगि , फिर वापस चली जाउन्गी

पिताजी- जैसा तुम ठीक समझो

और पूजा अंदर तो आ गयी पर उसका गुस्सा कम नही हुआ

फिर नेहा नीता ने कहानी शुरू की

जैसे जैसे नेहा नीता कहानी बता रही थी पूजा ज़्यादा इंटेरेस्ट ले रही थी

कहानी सुनकर तो रमेश को हँसी आ रही थी

पूजा भी अंदर ही अंदर हंस रही थी

पूरी कहानी सुनने तक पूजा का गुस्सा कम हो गया

नेहा- तो ऐसे मिली हमे भाभी

रमेश- पूजा ये तो हमसे भी अच्छी लव स्टोरी है

पूजा- पिताजी आपने ऐसा क्यूँ किया

पिताजी- सब कुछ बहुत जल्दी मे करना पड़ा

पूजा- बता तो देते

पिताजी- लास्ट दिन तक मुझे खुद नही पता था , और जैसे सब तय हुआ तुम्हे पहले तार किया

पूजा- एक बार तो मिला देते भाभी से

पिताजी- वो शादी के बाद आएगी तो तब मिल लेना

पूजा- मुझे अभी मिलना है

पिताजी- ठीक है , तुम रमेश और जयसिंघ मिल कर आ जाओ

नीता- और हम

नेहा- हम ने तो मिल लिया ना अब दीदी को मिलना है

पिताजी- कल चली जाना

पूजा- दुबारा ऐसा किया तो

पिताजी- नही होगा , अब गुस्सा ख़तम कर दे

रमेश- पूजा अब जाने दे ,

पूजा- कल मैं भाभी से मिलुगी

पिताजी- जयसिंघ कल अपने जीजाजी को लेकर जाना

जयसिंघ- जी पिताजी

नेहा- जीजाजी अब आप खुशख़बरी सुना दीजिए

रमेश- अपने दीदी से पूछ लो

पूजा - तुम मौसी बन ने वाली हो

नेहा- सच

पिताजी- मैं नाना बनूंगा

नीता- माँ जल्दी बाहर आओ

माजी- क्या हुआ

पूजा- माँ आप नानी बनने वाली हो

माजी- सच

पूजा- हाँ

और माँ ने पूजा की नज़र उतार दी

पिताजी- पूजा गुस्सा तो मुझे होना चाहिए तुझ पे कि तूने मुझे बताया नही कि मैं नाना बनने वाला हूँ

पोस्टमॅन- तार है

पूजा- मेरा ही तार होगा ,

नेहा- तार से पहले खबर मिल गयी

पिताजी- जयसिंघ लड्डू लेकर आओ ,,पूरे गाँव मे लड्डू बाटेंगे आज

पूजा- अभी टाइम है

पिताजी- तो क्या हुआ

माजी- शालिनी के इस घर मे आने की बात ही हुई कि ये खुश खबरी मिल गयी ,बहू घर मे आएगी तो खुशिया ही ख़ुसीया आएगी

पूजा- आप तो अभी से भाभी की तारीफ कर रही है

नेहा- दीदी आप मिलेगी ना भाभी से तो हमे भूल जाएगी

पूजा- इतनी अच्छी है भाभी

नीता- मिल तो लो ,

पूजा को तो अब मिलना ही था अपनी भाभी से

पिताजी को एक साथ दो ख़ुसीया मिल गयी

पूजा माँ बनने वाली थी

पिताजी ने गाँव मे लड्डू बाँट दिए और दामाद जी और पूजा को शालिनी से मिलने भेज दिया

जैसा पूजा ने सुना वैसा ही पाया शालिनी को

पूजा की तो बेस्ट फ्रेंड बन गयी एक ही दिन मे

शालिनी को दिल जितना अच्छे से आता था

शालिनी की ये खांसियत थी , सब उसको प्यार करने लग जाते

पूजा को अपनी भाभी बहुत पसंद आई

पूजा तो गयी एक दिन के लिए थी पर 2 दिन रुक कर आई

पूजा और शालिनी सहेली की तरह रही

पूजा अपनी भाभी का नाम ही ले रही थी दिन भर

शालिनी को जो चाहिए था ससुराल मे वो सब मिल रहा था

जितना उसने सोचा था उस से ज़्यादा पाया

शालिनी ने मामी बनाने के लिए पूजा को अच्छा गिफ्ट दिया

अब तो पूजा गाँव मे रहेगी जिस से शालिनी को उसका साथ भी मिल जाएगा

पूजा का गुस्सा ख़तम होते वो भी तैयारी मे लग गयी

जयसिंघ शहर3 को तो भूल गया

कुमार का गुस्सा सातवे आसमान पर चला गया था

पर वो कर भी क्या सकता था

अजीत उधर इस बात का फ़ायदा उठा रहा था और जयसिंघ के बारे मे कुमार के कान भर रहा था

ठाकुर जी की कंपनी को जयसिंघ की कंपनी बता कर अजीत ने कुमार और जयसिंघ के बीच मे आग लगा दी

पर जयसिंघ को इस बात से ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा

जयसिंघ को तो बस शालिनी ही शालिनी दिख रही थी

घर मे तो जयसिंघ के शादी के वजह से दीवाली जैसा महॉल था

नेहा नीता पूजा को फिर से मस्ती करना का मोका मिला

छोटू तो शादी की तय्यारी मे लगा हुआ था

जयसिंघ अपने जीजा के साथ ही रहता

पिताजी ने शादी का सारा काम अपनी बेटियो को दिया

पूजा नेहा नीता ही शादी करवा रही थी

सबको शालिनी के घर मे आने का इंतज़ार था

माँ के कलेजे को जयसिंघ को खुश देख कर सुकून मिला

पूजा के शादी के समय जयसिंघ ने अपने सपने जला दिए थे

अब शालिनी के आने से जयसिंघ उन सपनो को फिर से पूरा कर पाएगा

अब जयसिंघ को शालिनी का साथ मिलेगा

दोनो मिलके इस घर को प्यार से भर देंगे

शालिनी से सबको बहुत उम्मीद थी

पिताजी को सबसे ज़्यादा

उनका वारिश आएगा

माँ को जयसिंघ के लिए जो फिकर थी वो कम हो जाएगी

नेहा नीता को एक बड़ी बहन मिल जाएगी

पूजा को अब नीता के बाद नयी सहेली मिल जाएगी शालिनी

छोटू को माँ की तरह प्यार करने वाली भाभी मिलेगी

सबने अपने अपने लिए कुछ ना कुछ सोच रखा था

शादी की डेट पास आ रही थी

नेहा नीता को सब पर्फेक्ट चाहिए था

नेहा नीता की आवाज़ सुनाई दे रही थी घर मे

पिताजी को यही चाहिए था

शालिनी के आने की खबर के वजह से सब इतने खुश है तो वो जब आएगी तो ख़ुसीया ही ख़ुसीया आएगी इस घर मे

पूरा गाँव योगेंद्रसिंघ की ख़ुसीयो मे शामिल हो रहा था

शालिनी को बहू बनाने मे ठाकुरजी ने सबसे ज़्यादा मेहनत की

बिना सोचा समझे कंपनी खोल दी ,

उधर शालिनी के घर मे भी सब खुश थे

सब खुश तो थे पर सब शालिनी के जाने से रो रहे थे

शालिनी के फॅमिली के साथ साथ पूरा गाँव रो रहा था

शालिनी को सब बहुत याद करेंगे सबकी लाडली जो थी

शालिनी ने पहले सोच रखा था कि शादी के बाद उसका सासुर उसका घर होगा

शालिनी की माँ खुश थी कि शालिनी की शादी हो रही है वरना उनको तो नींद ही नही आ रही थी

पर दुख भी था कि अब कौन उनको कल्लू पहलवान के नाम से चिडाएगा

मोंटू सोनू शालिनी बुआ की शादी से खुश थे पर वो जाने नही देंगे शालिनी को

शालिनी की भाभी अपनी ननद को सपनो का राजकुमार मिलने से खुश थी, शादी मे उनके फॅमिली नही आई क्यू की शालिनी ने रिजेक्ट जो किया था

दोनो गाँव जयसिंघ और शालिनी को आशीर्वाद देने आए थे

शादी नही कोई बड़ा त्योहार हो ऐसा लग रहा था

नेहा नीता तो नाचते हुए अपने भैया को मंडप मे ले आई

छोटू भी कहा पीछे रहता उसने तो सबसे ज़्यादा डॅन्स किया था

शालिनी को दुल्हन के रूप मे देखते ऐसा लगा कि जन्नत की परी आई है

कितनी सुंदर है शालिनी

जयसिंघ तो मूह फाडे देखता रह गया शालिनी को

शादी तो हँसी खुशी हो गयी

.नेहा नीता जहाँ हो वहाँ रोना कम ही होता है

मोंटू सोनू शादी के समय तो खुश थे

पर जैसे शालिनी के जाने का समय आ गया तो दोनो रोने लगे

कितना भी कुछ किया पर दोनो मान ही नही रहे थे

भतीजों का अपने बुआ के लिए प्यार देख कर शालिनी के गुणों का पता चल रहा था

शालिनी ने अपने स्टाइल मे मोंटू सोनू को एक कहानी बता कर चुप किया

ये देख कर पिताजी माँ नेहा नीता पूजा जयसिंघ ,शालिनी की तारीफ किए बिना नही रहे

जो जो रोया सबको शालिनी ने हंसा दिया

.शालिनी रोते हुए अलविदा नही होना चाहती थी

शालिनी ने सबको हंसा ही दिया

और जयसिंघ अपनी दुल्हन को अपने साथ अपने घर ले गया

नेहा नीता तो अपने भैया के साथ उनकी कार मे बैठी

अब तो ये साथ कभी छूटेगा नही

शालिनी अपने नये घर को खुशियो से भरने को तैयार हो गयी
 
फ्लॅशबॅक 871

शालिनी को जयसिंघ शादी करके अपने साथ अपने घर लेकर आ गया

सबने शालिनी का खुशी खुशी स्वागत किया इस फॅमिली मे

इस फॅमिली का हिस्सा बनते ही शालिनी सालो से आ रही परंपरा का हिस्सा बन गयी

अब वो होगी इस घर की परंपरा को आगे चलाने वाली घर की नयी बहू

नेहा नीता ने अपनी भाभी को उनका कमरा दिखाया जहाँ पे उनकी सुहागरात होगी

छोटू का कमरा उस से छीन गया , छोटू को स्टोर वाले कमरे मे शिफ्ट होना पड़ा

छोटू को दुख नही हुआ , वो खुश था अपनी भाभी के लिए

नेहा नीता ने खुद सजाया अपने भाभी का कमरा जिस के लिए शालिनी ने उनको एक एक साड़ी गिफ्ट दी

पर नेहा नीता इतनी आसानी से जयसिंघ और शालिनी का मिलन नही होने देगी

पिताजी और माँ नेहा और नीता से तो दूर ही रहते थे

जयसिंघ तो इस रात का कब से इंतज़ार कर रहा था

शालिनी भी जयसिंघ की होने को तैयार थी

पर नेहा नीता उस कमरे से जाने को तैयार नही हुई

पूजा- नेहा नीता चलो अपने कमरे मे , भाभी को आराम करने दो

नेहा- क्या दीदी आप तो कुछ भी बोल रही है , आज भाभी सोएगी थोड़ी

नेहा की बात सुनते ही पूजा समझ गयी कि नेहा नीता अब छोटी नही रही

पूजा- तुम्हे पता हैना , फिर भाभी को अकेला छोड़ो भैया आते ही होंगे

नीता- भैया को बोल दो कि आज भाभी के साथ हम रहेंगे

शालिनी हँसने लगी

शालिनी- तुम्हारे भैया से पूछो , मुझे तो कोई प्राब्लम नही है

नेहा- भैया हमे कुछ नही कहते

जयसिंघ- तुम सब यही हो , जाओ पिता जी तुम्हे बुला रहे है

नेहा- पिताजी बुला रहे या आपको भाभी के साथ अकेले मे बात करनी है

जयसिंघ- तुम तो समझदार हो , अब मुझे शालिनी से बात करने दो

नीता- आप कल बात करना आज हम बात करेंगे

जयसिंघ- पूजा इनको बाहर निकालो

पूजा- नेहा नीता चलो अपने कमरे मे , भैया को तंग मत करो

नेहा- हम भैया को कहाँ तंग कर रहे है , हम तो भाभी को तंग कर रही है

शालिनी- नेहा आज तुम्हारे भैया से बात करती हूँ फिर कल से तुम्हारे साथ बात करूगी

नेहा-शालिनी के कान मे बात की , सिर्फ़ बात करेगी

शालिनी- नेहा

माजी- नेहा नीता चलो अब , तुम बड़ी हो गयी हो ये बच्पना छोड़ दो

नेहा- माँ आप हमारे बीच मे मत आइए

जयसिंघ- 2 मिनिट मे बाहर नही गयी तो

नीता- तो आप चले जाएँगे हैना

शालिनी-नेहा नीता , मेरी बॅग हॉल मे है उसमे तुम्हारे किए एक गिफ्ट रखा है

नेहा- गिफ्ट

शालिनी,- कमरे मे जाने से रोकते है तो ननद को गिफ्ट देते है

नीता- क्या है भाभी गिफ्ट मे

शालिनी- जाकर खुद देख लो

नेहा- हम अभी जाकर देखते है ,

और जैसे नेहा नीता बाहर गयी जयसिंघ ने कमरे का डोर बंद किया

नेहा नीता समझ गयी कि ये चाल है पर उनको शालिनी का गिफ्ट मिल गया

उस रात तो जयसिंघ ने शालिनी को अपना बना लिया

पिताजी ने भी माँ को प्यार किया

पूजा नेहा नीता को अपने सुहागरात की बाते बतानी लगी

नेहा नीता को भी पता चल गया कि भैया भाभी क्या कर रहे है

रात तो उनकी थी

पर सुबह होते नेहा नीता ने भाभी के डोर का खटखटाया

शालिनी तो उठ गयी पर जयसिंघ को गुस्सा आ रहा था नेहा नीता पे

शालिनी जयसिंघ की हालत देख कर हंस रही थी

पर नेहा नीता को कौन समझाएगा कि नये कपल को अकेला समय देना चाहिए

शालिनी सुबह होते ही अपने काम मे लग गयी

शालिनी ने घर का काम अपने हाथ मे लिया

नेहा नीता तब भी अपनी भाभी के पीछे पीछे रहती

शालिनी उनको बताती कि वो कही नही जा रही है पर दोनो को बस शालिनी से बाते करने मे अच्छा लग रहा था

जयसिंघ तो बस इंतज़ार करता रहता कि कब नेहा नीता शालिनी को अकेला छोड़ देगी

पर शालिनी अपने पति और ननद दोनो को खुश रखती

पूजा और माँ को तो आराम मिल गया , सारा काम शालिनी ही करने लगी

जयसिंघ शालिनी को मंदिर लेकर गया था

शालिनी ने मंदिर मे जाकर पूजा की

नेहा नीता शालिनी को मेले और परंपरा के बारे मे बताने लगी

शालिनी को इस परंपरा का हिस्सा होने की खुशी हुई

शालिनी ज़्यादा से ज़्यादा इसके बारे मे जानना चाहती थी

शालिनी गाँव से आई थी जिस से इन बातों मे ज़्यादा इंटेरेस्ट था

नेहा नीता जिस तरह बता रही थी उस से तो शालिनी का इंटेरेस्ट और बढ़ रहा था

जयसिंघ को तो बस शालिनी को प्यार करना था

जयसिंघ तो शहर3 को भूल गया था

भुला था मतलब वो शालिनी को शहर 3 कैसे लेकर जाए ये सोच रहा था

क्यू कि वो 3 महीने से कंपनी से दूर था

पर जयसिंघ इस के बारे मे ज़्यादा नही सोच रहा था

शालिनी को जयसिंघ का गाँव अपने गाँव से ज़्यादा पसंद आया

इस गाँव की खूबसूरती मे तो जैसे शालिनी सब कुछ भूल गयी

शालिनी को तो अपना गाँव याद ही नही आ रहा था .

नेहा नीता शालिनी को बोर ही नही होने दे रही थी

नेहा नीता के साथ जैसे शालिनी खुद को भूल जाती

नेहा नीता शालिनी के साथ नयी नयी मस्ती करती

शालिनी जब मायके गयी तब जयसिंघ के साथ नेहा नीता भी गयी

नेहा नीता तो शालिनी को अकेला छोड़ती ही नही

पिताजी को तंग करने मे तो शालिनी भी नेहा का साथ देती

पिताजी शालिनी और नेहा का प्यार देख कर टेन्षन फ्री हो गये

पर माँ को तंग करते हुए शालिनी थोड़ी दूर रहती

छोटू तो शालिनी की एक आवाज़ पे भाग कर आ जाता

शालिनी को कुछ भी लगता तो वो जयसिंघ की जगह छोटू को बोलती

शालिनी को छोटू ने पूरा गाँव दिखा दिया

ठाकुरजी ने भी नये कपल को अपने हवेली बुला लिया

शालिनी को हवेली देख कर ज़्यादा खुशी नही हुई

क्यू कि शालिनी को घर बड़ा नही चाहिए , घर मे रहने वालो का दिल बड़ा चाहिए था

हवेली से ज़्यादा मंदिर की बातों पे शालिनी को इंटेरेस्ट था

नेहा - भाभी ये जो मंदिर है इनसे हमारी फॅमिली का बहुत पुराना रिस्ता है

शालिनी- कैसा रिस्ता

नीता- यहाँ पूजा हम करते है

शालिनी -सच

नेहा - यहाँ तो मेला भी होता है

शालिनी- हाँ मैं ने सुना है इस मेले के बारे मे

नीता- उस मेले मे ठाकुरजी के साथ पिताजी पूजा करते है

शालिनी -और क्या होता है

नेहा - मेले का काम ठाकुरजी की फॅमिली और हमारी फॅमिली देखती है

शालिनी- फिर तो बहुत मज़ा आता होगा

नीता- पूछो ही मत , 25 दिन धमाल करते है हम

शालिनी -इस बार मैं भी करूगी

नेहा - आप नही कर पाओगी

शालिनी- क्यूँ?

नीता- इस बार भैया को देने वाले है पिताजी मेले का काम , आप तो उसी मे बिज़ी रहेगी

शालिनी -तुमने तो लड्डू दिखा कर बोल दिया कि मेरा उपवास है

नेहा - क्यू भैया ,

जयसिंघ- मैं नही.लेने वाला वो ज़िम्मेदारी , पिताजी ही ठीक होंगे

शालिनी- आप क्यूँ नही करेंगे पूजा

जयसिंघ- मेरे लिए टाइम है , पिताजी अभी भी वो काम कर सकते है ,

नीता- ये झूठ है

जयसिंघ- मेरे लिए टाइम है , पिताजी अभी भी वो काम कर सकते है ,

नीता- ये झूठ है

जयसिंघ- नीता

शालिनी -आप रुकिये , नीता क्या बात है

नीता - भैया को शहर3 रहना है , गाँव मे रहना पसंद नही है

शालिनी- क्या ?

नीता- भैया यहाँ नही रहते

शालिनी -आप इतने अच्छे गाँव को कैसे छोड़ कर जा सकते है

जयसिंघ- मैं छोड़ कर कहाँ जाता हूँ ,मैं शहर3 और गाँव दोनो जगह रहता हूँ

नेहा - आप शहर3 मे ज़्यादा रहते है

जयसिंघ- तुम अभी बच्ची हो , तुम्हे इस बारे मे कुछ पता नही है

शालिनी- नेहा मैं तो यहीं रहूगी गाँव मे

नीता- सच भाभी

शालिनी -हाँ,

जयसिंघ- शालिनी

शालिनी- कितना प्यारा गाँव है ,मुझे तो यही रहना है

नेहा - फिर तो भैया को भी यही रहना होगा

शालिनी- बिल्कुल

जयसिंघ- हम शहर3 मे रहेंगे

नीता- भैया

शालिनी -अभी तो आप यही हैना

जयसिंघ- कुछ महीने

शालिनी- 6 महीने ना

जयसिंघ- जैसा तुम कहो

नेहा -6महीने के बाद

शालिनी- वो बाद मे देख लेगे हम ,अभी तो मैं तुम्हारे साथ ही रहूगी

नीता- भाभी आप यहीं रहना

शालिनी -एक शरत पे रहूगी

नेहा - क्या?

शालिनी- मुझे मंदिर और मेले के बारे मे और सुनना है

नीता- तो आज रात आप हमारे साथ सो जाना

जयसिंघ- जो बात करनी है वो अभी कर लो

शालिनी -हँसते हुए , चलो मंदिर चलते है वही बात करेंगे

नेहा - मैं भी यही कहने वाली थी

शालिनी- क्यूँ ना आज घर से खाना बना कर मंदिर चलते है , वही पर खाना खाते हुए बात करेंगे

नीता- पिक्निक जैसा

शालिनी -हाँ चलो , पिताजी से पूछते है

जयसिंघ ने इशारा करके शालिनी को रुकने को कहा

शालिनी- तुम दोनो पिताजी से पूछ लो

नेहा नीता बाहर चली गयी

जयसिंघ- क्या कह रही थी तुम

शालिनी- मैं ने क्या कहा

जयसिंघ- हम गाँव मे नही शहर3 मे रहेंगे

शालिनी- जहाँ आप वहाँ मैं

जयसिंघ- हम बस कुछ महीने यहाँ रुक रहे है

शालिनी- ये गाँव बहुत प्यारा है

जयसिंघ- तो हम हमेशा के लिए थोड़ी जा रहे है

शालिनी- तो

जयसिंघ- हम 3 महीने बाद आते रहेंगे

शालिनी- सच

जयसिंघ- मैं तो 6 महीने बाद आता था पर तुम्हारे लिए ऐसा कर रहा हूँ

शालिनी- नेहा नीता इतनी प्यारी है , आप उनके बिना दूर कैसे रहते

जयसिंघ- अब तो मुझे दोनो पे बहुत गुस्सा आता है

शालिनी- वो क्यूँ ?

जयसिंघ- हमे अकेला छोड़ती ही नही

शालिनी- और आप रात मे मुझे क्या कम तंग करते हो जो दिन भी चाहिए आपको

जयसिंघ- मैं तो तुम्हे दिन रात प्यार करना चाहता हूँ

शालिनी- मुझसे नही होगा

जयसिंघ- आज तो जंगल मे प्यार करूँगा अच्छा सोचा तुमने पिक्निक का

शालिनी- बस आपको तो वही दिखता है

जयसिंघ- तुम चलो तो फिर दिखाता हूँ तुम्हे

और जयसिंघ शालिनी से प्यार करने का कोई चान्स नही छोड़ता था

नेहा नीता जयसिंघ को शालिनी के साथ अकेला रहने ही नही देते
 
फ्लॅशबॅक 872

नेहा नीता के वजह से शालिनी का दिल लगा हुआ था

शालिनी को तो अपने मायके की याद भी नही आ रही थी

शालिनी के भैया भाभी अपने बच्चों के साथ मिलने आ गये ,

शालिनी को खुश देख कर वो टेन्षन फ्री हो गये

शालिनी.को जैसा ससुराल चाहिए था वैसा मिल गया

शालिनी इसी मे खुश थी

नेहा नीता के साथ मंदिर जाना

खेतो मे जाकर पिताजी को मदद करना

आम के बगीचे मे समय बिताना

अब तो आम का सेशन भी नही था फिर भी शालीजी अपनी ननद के साथ खेतो मे ज़रूर जाती

पर शालिनी इतने बड़े बगीचे को देख कर सोचने लगी कि इसमे आम लगेंगे तो ये बगीचा कैसा दिखेगा

शालिनी दोपहर मे खेत मे आई तो शाम को शालिनी को घर चलने को बोलना पड़ता

घर मे काम करना , नेहा नीता की मदद मिलने से काम जल्दी हो जाते जिस से शालिनी सब के साथ बात कर लेती

पिताजी जब नीता को मूवी दिखाने को जाते तो जयसिंघ शालिनी को भी ले जाता

जयसिंघ कुछ ना कुछ बहाना करके नेहा नीता से दूर की सीट लेता ताकि शालिनी के साथ मूवी देख सके

पर नेहा भी स्मार्ट थी

जयसिंघ के साथ पिताजी को बैठा देती और खुद अपनी भाभी के साथ मूवी देखती

जयसिंघ तो परेशान हो गया था

नेहा नीता ने नाक मे दम करके रखा था

जयसिंघ सोचता कि शालिनी के साथ घूमने जाए

घूमने का नाम सुनते ही नेहा नीता कपड़े पहन के तैयार होती

जयसिंघ को फिर चुप चाप उनको भी साथ ले जाना पड़ता

पूजा जयसिंघ के शादी के बाद 1 महीना रुकी

फिर वो वापस अपने घर चली गयी

रमेश चाहता था कि डेलिवरी शहर2 मे हो

पिताजी ने पूजा को रोकना चाहा पर पूजा रुक जाती तो रमेश अकेला कैसे रहता

पिताजी ने इजाज़त दे दी

पूजा के जाने से नेहा नीता को ज़्यादा फ़र्क नही पड़ा क्यू कि उनके पास शालिनी भाभी थी

नेहा नीता कॉलेज जाती तो जयसिंघ शालिनी को घुमाने लेकर जाता

पर जैसे नेहा नीता आती तो शालिनी उनके साथ बिज़ी हो जाती

इसी बीच जयसिंघ को तार (खत) आ गये

कुमार अकेले कंपनी को कब तक संभालता

8 महीने हो गये जयसिंघ को दूर हुए कंपनी से

कंपनी लॉस मे चल रही थी

टेंडर जो मिले थे वो समय पे पूरे नही हो पाए जिस से पेमेंट कम हुई और देर से काम होने से अगली बार टेंडर मिलने के चान्स कम थे

जयसिंघ को अब जाना ही होगा शहर3

शहर3 मे उसका घर था

जहाँ शालिनी को ले जाने को जयसिंघ कब से बेताब था

पर शालिनी तो अपनी ननद और देवर के साथ खुश थी

जयसिंघ तो अब मुसीबत मे फस गया था

जयसिंघ कैसे कहेगा अपने माँ से अपने पिताजी से

शालिनी को जयसिंघ की परेशानी का अहसास हो गया

जयसिंघ को समझने वाली शालिनी ही थी

पिताजी भी कभी जयसिंघ के दिल की बाते जान ही नही पाए और जयसिंघ ने भी कभी किसी को कुछ नही बताया ,

इसी लिए पिताजी ने जयसिंघ के लिए शालिनी को सेलेक्ट किया

शालिनी को पिताजी की पसंद नही बल्कि जयसिंघ की पसंद बना कर उसके साथ शादी करवाई ताकि जयसिंघ और शालिनी का रिस्ता मज़बूत बन सके

शालिनी के आते ही जयसिंघ अपने दिल की बाते शालिनी को बताने लगा और शालिनी भी जयसिंघ का पूरा साथ देने लगी

जयसिंघ जो खुद को हमेशा अकेला समझता था आज उसके पास शालिनी थी जिस से वो अपने सपने अपने दिल की बातें शेयर कर सकता था

जयसिंघ का चेहरा पढ़ लेती थी शालिनी

कुमार के यहाँ तार पे तार आ रहे थे

जिस से जयसिंघ टेन्षन मे आ गया ये बात शालिनी ने देख ली

शालिनी- क्या बात है

जयसिंघ- कुछ नही

शालिनी- मैं आपकी बीवी हूँ , आप मुझसे तो झूठ बोलिए ही मत

जयसिंघ- यहाँ ऐसे कब तक रहेंगे

शालिनी- ये आपका घर है

जयसिंघ- पर शहर3 मे भी मेरा घर है

शालिनी- तो आप यहाँ से जाना आना शुरू क्यूँ नही करते , मैं यही रुकती हूँ और आप सनडे सटर्डे को यहण आते जाइए

जयसिंघ- जाने मे एक दिन और आने मे एक दिन लगता है

शालिनी- तो

जयसिंघ- वहाँ कंपनी लॉस मे चल रही है

शालिनी- आपकी कंपनी

जयसिंघ- मेरी मेहनत की कंपनी है

शालिनी- आप क्या चाहते है

जयसिंघ- हम शहर3 चलते है , ,9 महीने से यहाँ हूँ मैं

शालिनी- यहाँ तो मुझे बहुत मज़ा आता है वहाँ तो मुझे अकेले रहना पड़ेगा घर पे

जयसिंघ- जल्दी तुम्हे माँ बना दूँगा

शालिनी- अभी नही

जयसिंघ- चलो ना शहर3

शालिनी- लेकिन मैं वहाँ कैसे रहूं

शालिनी- लेकिन मैं वहाँ कैसे रहूगी

जयसिंघ- इतने प्यार से बोल रहा हूँ वरना गुस्से से कहता तो तुम चुप चाप चलती

शालिनी- आप मुझपे गुस्सा कर ही नही सकते

जयसिंघ- चलो ना , तुम्हे दिखाना है कि मैं ने क्या क्या किया है , तुम्हे ऐशो आराम की ज़िंदगी देना है

शालिनी- हम नेहा नीता को साथ लेकर चलते है

जयसिंघ- वो नही आएगी

शालिनी- मैं कहुगी तो ज़रूर आएँगी

जयसिंघ- तुम अभी तक समझ ही नही पाई नेहा नीता को

शालिनी- क्या मतलब

जयसिंघ- वो पिताजी को छोड़ कर कहीं नही जाएगी , तुम्हारे साथ भी नही

शालिनी- मैं भी नही जाना चाहती पिताजी को छोड़ कर

जयसिंघ- चलो ना , हम 3 महीने बाद 1 हफ्ते के लिए गाँव आया करेंगे

शालिनी- पक्का

जयसिंघ- तुम्हारी कसम

शालिनी- तो बात काजिए पिताजी से

जयसिंघ- तुम करो , तुम्हारी बात मान जाएँगे पिताजी

शालिनी- आप तो बड़े चालू हो मुझे फसा रहे हो

जयसिंघ- मैं माँ से बात करता हूँ

शालिनी- और नेहा नीता का क्या

जयसिंघ- वो समझदार है , समझ जाएगी ,

शालिनी- लेकिन

जयसिंघ- मैं तो उनको शहर3 ले जाकर डॉक्टर बनाना चाहता था

शालिनी- फिर क्यूँ नही बनाया

जयसिंघ- जाने दो उस बात को

शालिनी- बताओ ना

जयसिंघ- शहर3 जाके बताउन्गा

शालिनी- ठीक है, मैं बात करती हूँ

जयसिंघ- ऐसे बात करना कि पिताजी ना नही करे

शालिनी- आप की खुशी के लिए कर रही हूँ , वरना मेरी खुशी तो यही रहने मे है

जयसिंघ- हम दोनो जगह रहेंगे , गाँव और शहर3 मे

शालिनी- और हमारे बच्चे

जयसिंघ- उनका भी प्राब्लम है

शालिनी- अब क्या प्राब्लम हुई

जयसिंघ- वो शहर3 जाकर बताउन्गा

शालिनी- मतलब मुझे अब तक कुछ भी नही बताया है

जयसिंघ- तुम्हे यहाँ आए 6 महीने ही हुए है , धीरे धीरे सब पता चल जाएगा

शालिनी- बात क्या है

जयसिंघ- तुम्हे मैं सब कुछ बता दूँगा तुम बस शहर3 चलना और मेरे साथ रहना

शालिनी- मैं तो आपके साथ ही रहूगी चाहे कुछ भी हो जाए

जयसिंघ- तो तुम अभी बात करो पिताजी से

शालिनी- करती हूँ

जयसिंघ अपनी माँ से बात करने चला गया

और शालिनी पिताजी से बात कर रही थी

जयसिंघ- माँ

माजी- क्या हुआ बेटा

जयसिंघ- माँ 6 महीने हो गये शादी को

माजी- कितने जल्दी दिन बीत जाते है

जयसिंघ- हाँ , आप खुश हो

माजी- तू खुश है तो मैं खुश हूँ

जयसिंघ- माँ वो मैं सोच रहा था

माजी- हाँ बोलना

जयसिंघ- सब कितने खुश है , नेहा नीता छोटू तो अपनी भाभी के साथ कितने खुश रह रहे है

माजी- हाँ शालिनी ने सबका दिल जीत लिया है

जयसिंघ- माँ , वो मैं , कैसे कहूँ समझ नही आ रहा

माजी- बोलना

जयसिंघ- कैसे कहूँ

माजी- तुझे शहर3 जाना है

जयसिंघ- हाँ

माजी- तो जा ना , किसने रोका है

जयसिंघ- मैं शालिनी को भी लेकर जाना चाहता हूँ

माजी- तेरी बीवी है तेरे साथ ही जाएगी ना ,

जयसिंघ- आपको कोई प्राब्लम नही है

माजी- तू एक दिन तो जाने वाला था शालिनी को शहर3 साथ लेकर , तू इतने दिन रुका हमारे लिए , मैं खुश हूँ , मुझे तो लगा तू शादी होते ही चला जाएगा पर तू तो 6 महीने रुका ,

जयसिंघ- मैं जा सकता हूँ

माजी- हाँ ,

जयसिंघ- मैं जा सकता हूँ

माजी- हाँ पर यहाँ आते रहना

जयसिंघ- आप मेरे लिए ऐसा बोल रही हैना

माजी- मैं बस तुझे खुश देखना चाहती हूँ

जयसिंघ- माँ , तुम भी चलो ना शहर हम सब साथ रहेंगे

माजी- तू जहाँ जाएगा शालिनी वहाँ आएगी , वैसे तेरे पिताजी जहाँ रहेंगे मैं वही रहूगी

जयसिंघ- हम बीच बीच मे गाँव आते रहेंगे

माजी- तू शालिनी को लेकर जा , अपना घर बसा ,

जयसिंघ- माँ , मैं आता रहूँगा गाँव , पिछली बार की तरह दीवाली मे नही , हर 3 महीने बाद आ जाउन्गा

माजी- ये तो अच्छी बात है , तुम्हे मेरे बारे मे सोचा इस से मैं खुश हूँ

जयसिंघ- मैं अभी नही जाउन्गा , और 1 महीना रुक कर जाउन्गा ताकि नेहा नीता को ज़्यादा दुख ना हो , वो धीरे धीरे शालिनी के बिना रहना सीख ले

माजी- मेरा बेटा , हमेशा खुद से ज़्यादा हमारे बारे मे सोचता है , जा अपने पिताजी से बात कर

जयसिंघ- पिताजी से शालिनी बात कर रही है

माजी- तू भी कर लेना तेरे पिताजी को अच्छा लगेगा ,

जयसिंघ- जी

जयसिंघ खुश था कि माँ ने इजाज़त दे दी

बस अब शालिनी पिताजी की इजाज़त ले ले

फिर वो शालिनी को शहर3 लेकर जाएगा

वहाँ अपना घर अपनी कंपनी दिखाएगा

शालिनी को जाने का दिल तो नही कर रहा था पर उसे जाना तो पड़ेगा ,

जयसिंघ उसका पति है , जहाँ वो वहाँ शालिनी

.
 
फ्लॅशबॅक 873

शालिनी पिताजी के पास चली गयी

पिताजी कुछ हिसाब किताब कर रहे थे

शालिनी के आते ही पिताजी ने अपना काम रोक दिया

शालिनी- पिताजी

पिताजी -बेटा तुम , क्या बात है

शालिनी- आपसे बात करनी थी

पिताजी -हाँ कहो

शालिनी- कैसे कहूँ समझ नही आ रहा था

पिताजी -क्या बात है शालिनी , जयसिंघ ने कुछ कहा

शालिनी- नही ,

पिताजी -तो बात क्या है जो इतना सोच रही हो

शालिनी- वो बोल रहे थे

पिताजी -तो जयसिंघ ने तुम्हें भेजा है , वो आता तो अच्छा लगता मुझे , कोई बात नही , मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था

शालिनी- आप समझ गये मैं यहाँ क्यूँ आई हूँ

पिताजी -हाँ ,मुझे तो लगा था जयसिंघ पहले ही तुम्हें भेज देगा पर उसने बहुत समय लगा दिया

शालिनी- मैं तो यही रहना चाहती हूँ पर वो कह रहे थे कि

पिताजी -क्या कह रहा था वो

शालिनी- वो यहाँ ऐसे कब तक रहेंगे

पिताजी -मैं यही सोच रहा था कि जयसिंघ ने अब तक जाने की बात क्यूँ नही की

शालिनी- मतलब आपको पता था

पिताजी -मुझे तो लगा शादी होते चला जाएगा , या 1 महीने बाद जाएगा पर वो तो 6 महीने रुका

शालिनी- तो आप

पिताजी -उसे ना मैं ने पहले कभी रोका था और ना आज रोकुंगा , वैसे उसने इतने दिन रुक कर अच्छा किया , मैं खुश हूँ जो तुम्हें इतनी दूं हराम साथ रहने दिया .

शालिनी- आपको पहले से पता था कि मैं यहाँ नही रहूंगी

पिताजी -हाँ , जयसिंघ के सपने बड़े है ,वो अपने सपनो के साथ रहना चाहता है

शालिनी- आपने ये मुझे पहले क्यूँ नही बताया

पिताजी -तुम्हें उसके सपने पूरे करने मे साथ देना होगा ,

शालिनी- पर आपने पहले क्यूँ नही बताया

पिताजी -तुम कही भी रहो पर रहोगी हमारे दिल मे

शालिनी- सपने का क्या चक्कर है

पिताजी -जयसिंघ ने बताया नही तुम्हें

शालिनी- बताया था कि उनके कुछ सपने है , पर क्या है ये नही बताया

पिताजी -शहर3 जाते ही पूछ लेना , और उसका साथ देना सपने पूरे करने मे

शालिनी- आप मुझे रोकने की जगह जाने को बोल रहे है

पिताजी -मैं तो तुम्हें कही जाने ना दूं पर तुम्हें जयसिंघ के साथ जाना होगा , उसके सपने पूरे करने होंगे और उसको वापस गाओं मे लाना होगा

शालिनी- मैं समझी नही

पिताजी -मैं तुम्हें सब कुछ बताता हूँ , कुछ नही छुपाउंगा क्यू कि तुम्हें सब पता होना चाहिए

शालिनी- जी , उनकी बतो से पता चला था की मुझे कुछ पता नही है

पिताजी -मुझे तुमसे बहुत उम्मीद है

शालिनी- कैसी उम्मीद

पिताजी -तुम्हें मेरा एक काम करना है

शालिनी- क्या ,

पिताजी -बताता हूँ , पहले तुम्हें जयसिंघ और इस घर की कहानी बताता हूँ ,

ज्यसिंघ के सपने उसको पूरा करने को क्या क्या किया जयसिंघ ने वो बताता हूँ , क्यूँ जयसिंघ शहर3 रहता है वो बताउन्गा

शालिनी- आप सब कुछ बताना

पिताजी -तुम इस घर की बड़ी बहू हो तुम्हें सब पता होना ज़रूरी है

और पिताजी शालिनी को जयसिंघ की कहानी बताने लगे

कैसे जयसिंघ ने शहर3 जाने के लिए अपने भाई बहनों का साथ छोड़ दिया

अपने भाई बहनों के प्यार को समझा नही

फिर शहर3 जाके कैसे खुद को भूल गया

शहर3 उसको धीरे धीरे खाने लगा

कैसे जयसिंघ ने पिताजी से झूठ कहा

पूजा की शादी मे क्या हुआ था

फिर जयसिंघ ने क्या किया

कैसे पूजा की शादी की

क्यू पिताजी ने जयसिंघ से शादी करवाने का प्रॉमिस लिया

कैसे अपना वारिश शालिनी के बेटों को बनाया

क्यूँ पिताजी ने जयसिंघ से झूठ बोल कर शालिनी के पास भेजा

क्यूँ शालिनी को सेलेक्ट किया

कितनी उम्मीदे है शालिनी से सब कुछ पिताजी ने शालिनी को बता दिया

सारी बातें सुनकर शालिनी के आँखो मे आँसू आ गये

शालिनी- इतना कुछ हो गया

पिताजी -हाँ

शालिनी- आपने मुझे बताया भी नही

पिताजी -तुम अभी तो इस घर मे आई हो अभी कैसे बता देता

शालिनी- आप क्या चाहते हो वो बताइए

पिताजी -मुझे बेटा चाहिए , मुझे मेरा बेटा वापस चाहिए

शालिनी- मैं आपको आपका बेटा वापस लाकर दूँगी

पिताजी -तुम कर लोगि

शालिनी- हाँ , मैं उनको इस गाओं मे वापस लेकर आउन्गि

पिताजी -जयसिंघ को बता कि घर क्या होता है

शालिनी- वो किसे छोड़ कर शहर3 जा रहे है ये मैं उनको समझा दूँगी

पिताजी -तुम्हें जितना समय चाहिए उतना लो पर मुझे बेटा वापस दे

शालिनी- वो तो देना ही होगा , आपने अपने बेटे लिए क्या कुछ नही किया फिर भी आप उन्ही के बारे मे सोचते रहे

पिताजी -वो मेरा बेटा है ,

शालिनी-अब आप बेफिकर रहिए , ये मेरा घर है मैं इस घर की खुशी मे मेरी खुशी है

शालिनी-अब आप बेफिकर रहिए , ये मेरा घर है मैं इस घर की खुशी मे मेरी खुशी है , मैं इस घर की ख़ुसीया वापस लेकर आउन्गि , सबको एक कर दूँगी ,

पिताजी -तुम बस जयसिंघ को गाओं मे वापस ले आओ मैं तुम्हारे अहसान कभी नही भूलूंगा

शालिनी- पिताजी ये मेरा घर है ,इसमे अहसान की बात ही नही आती ,, आपने मुझे पहले बता दिया होता तो मैं उसके बारे मे कब का सोच लेती

पिताजी -तुझे मैं परेशान नही कहना चाहता था

शालिनी- अब आपकी परेशानी मेरी है

पिताजी -इसी लिए मैं ने तुम्हें अपनी बहू नही बेटी बनाया है , ये सिर्फ़ तुम ही कर सकती हो

शालिनी- मैं ज़रूर पूरा करूँगी , आपका भरोशा टूटने नही दूँगी

पिताजी -पर तुम जयसिंघ के सपने भी पूरे करना

शालिनी- क्या मतलब

पिताजी -वो अपने सपने पूरे करेगा तो मुझे ज़्यादा खुशी होंगी

शालिनी- अब भी आप उनके बारे मे सोच रहे है , मैं सबको खुश रहूंगी ,

उनके सपने भी पूरे करूँगी , , उनको गाओं भी लाउन्गी और नेहा नीता छोटू का ध्यान भी रखूँगी

पिताजी -मैं यही सुनना चाहता था

शालनी -मैं अब तक बिना काम के बोर हो रही थी

पिताजी -कब जा रहा है जयसिंघ

शालिनी- पता नही ,

माँ कमरे मे आ गयी

माजी-1 महीने बाद

पिताजी -समझदार हो रहा है जयसिंघ

माजी- बहू का कमाल है

पिताजी -वो तो है „

शालिनु- और वो कह रहे थे कि 3 महीने बाद गाओं आएँगे

पिताजी -काफ़ी समझदार हो गया है

शालिनी- जी

[[[[[[[[[[[[[[[[[ ...........

माजी- आप 10 मिनट के लिए बाहर जाइए मुझे बहू से बात करनी है

पिताजी- तुम भी समझा दो बहू को

और पिताजी बाहर चले गये

शालिनी- उन्होने आपसे बात की

माजी-हाँ

शालिनी- आप खुश है

माजी-बेटे के दूर जाने से कौनसी माँ खुश हो सकती है

शालिनी- आपने तो इजाज़त दी है

माजी-जय की खुशी मे मेरी खुशी है

शालिनी- जी

माजी-तुम्हें पता है काय्न की 2 साइड होती है

शालिनी- हाँ

माजी-वैसे जयसिंघ की कहानी की भी 2 साइड है

शालिनी- क्या मतलब

माजी-एक साइड जो नेहा के पिताजी ने तुम्हें बताई है

शालिनी- समझ गयी , पिताजी को कुछ बातें पता नही है

माजी-मुझे भी कुछ बातें पता नही है

शालिनी- मैं समझी नही

माजी-तुम जय को घर वापस लाना चाहती हो ,तो तुम्हें सब कुछ पता होना चाहिए

शालिनी- हाँ पिताजी ने बताया है

माजी-अब मैं भी तुम्हें कुछ बातें बताउन्गी जो तुम्हारे पिताजी को पता नही है , और कुछ बातें जयसिंघ से पूछना जो हम दोनो को पता नही , तभी तुम जय को घर ला पाओगी

शालिनी- ये आपने बराबर कहा , फ़ैसला तभी लेना चाहिए सब कुछ पता हो ,

माजी-मुझे तो बहुत कम पता है पर जितना पता है तुम्हें बताती हूँ

माँ जयसिंघ के बारे मे शालिनी को बताने लगी

जो बातें पिताजी को पता नही है वो बातें शालिनी को पता होना ज़रूरी है

जयसिंघ के सपने के बारे मे किसी को पता नही है

जयसिंघ ने क्या क्या किया सपने के लिए शहर3 जाने लिए

उसका सच क्या था

क्यूँ पूजा की शादी का विरोध किया

वो एक भाई था

क्या क्या सोचा था उसने , सबको शहर3 लेकर जाएगा , सबको पढ़ाएगा लिखाएगा

फिर सपने को जलाने की बात भी बताई माँ ने

कैसे जयसिंघ रोया था वो भी बताया

फिर भी किस तरह पूजा की शादी की वो बताया

सारी बातें शालिनी को बता दी

माजी-ये है पूरा सच

शालिनी- मुझे लग ही रहा था कि वो ऐसे नही है

माजी-जयसिंघ बुरा नही है , वो दिल का बहुत अच्छा है , बस नेहा के पिताजी की तरह अपने दर्द अपने सपनो को अपने दिल मे छुपा कर रक्ता है

शालिनी- जी

माजी-देखा नही , कैसे नेहा के पिताजी ने कहा कि उसके लिए एक लड़की पसंद है , और उसने तो तुम्हें भूल जाने का भी सोच लिया था , तुम ही बताओ अगेर जयसिंघ मतलबी होता तो ऐसा करता

शालिनी- नही करते

माजी-जे बहुत अच्छा है , बस तुम्हें उसको समझना पड़ेगा , देखना वो खुद तुम्हें कहेगा कि गाओं चलते है

शालिनी- मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है

माजी-क्या करोगी

शालिनी- अब मैं , नेहा से नीता से छोटू से भी सब कुछ पता करूँगी जो उनको पता है बिना उन्हे शक हुए , पूजा से भी पता करूँगी , उनसे भी पूछ लूँगी

माजी-मैं यही सुना चाहती थी

शालिनी- मैं उनका साथ कभी नही छोड़ूँगी , और उनको घर लेकर आउन्गि

माजी-सबसे पहले जय से पूछना

शालिनी- माजी ये सब करने मे समय लगेगा , जल्दी किया तो गड़बड़ हो जाएगी

माजी-तुम उसके साथ रहना , मतलब मैं बेफिकर रह सकती हूँ , तेरे साथ रहेगा तो खुद को भूलेगा नही

पिताजी- हो गयी सास बहू की बातें

माजी-हाँ हो गयी

शालिनी- पिताजी माजी मैं आप दोनो का काम कर दूँगी , ये मेरा वादा है आपसे

.................. ]]]]]]]]]]]]]]

शालिनी -आपका आशीर्वाद रहा तो जल्दी मैं हमेशा के लिए गाओं मे वापस आउन्गि

माजी-हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है

पिताजी- मुझे तुम पर पूरा विश्वास है

शालिनी को सच पता चल गया

अब उसे ये भी पता चल गया कि जयसिंघ कैसा है

अब तो शालिनी का प्यार जयसिंघ और इस घर के लिए और बढ़ गया

अब शालिनी को एक बड़ा काम मिल गया जिसको उसे पूरा करना है

.शालिनी ने जो काम हाथ मे लिया वो पूरा किया है

ये काम थोड़ा डिफिकल्ट है पर नामुमकिन नही है
 
फ्लॅशबॅक 874

शालिनी ने पिताजी और माजी को वादा किया कि वो जयसिंघ को वापस गाओं लेकर आएगी

[[[[[[[[[[[[[………………………

शालिनी ने पिताज़े से वादा किया कि वो उनके बेटे को उनके पास लेकर आएगी

शालिनी ने माँ से वादा किया कि किसी ना किसी तारा से जयसिंघ का सपना ज़रूर पूरा करेगी

शालिनी को अब एक काम मिल गया था

शालिनी अब शहर3 मे बोर नही होंगी

शालिनी पिताजी से बात करके जयसिंघ के पास गयी

शालिनी- मुझे आपसे ये उम्मीद नही थी

जयसिंघ- क्या हुआ क्या कहा पिताजी ने

शालिनी- आप ने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई

जयसिंघ- बात क्या है

शालिनी- आपके सपनो के बारे मे आपने बस इतना कहा कि वो पूरे करने है ये नही बताया कि सपने क्या हैं और उसके लिए आपको क्या क्या सहना पड़ा

जयसिंघ- पिताजी ने बताया तुम्हें

शालिनी- माँ ने बताया

जयसिंघ- मैं तुम्हें बताने वाला था

शालिनी- कब

जयसिंघ- शहर3 जाते ही

शालिनी- पर अभी क्यूँ नही

जयसिंघ- मैं तुम्हें परेशान नही करना चाहता था

शालिनी- शहर3 जाकर बताएँगे

जयसिंघ- हाँ , आज के बाद तुमसे कुछ नही छुपाउंगा

शालिनी- पक्का

जयसिंघ- मुझे तुम्हारे जैसा हमदर्द साथी चाहिए था , मैं तुम्हें सब कुछ बताउन्गा

शालिनी- माफ़ कर दिया आपको

जयसिंघ- पिताजी ने क्या कहा तुमसे

शालिनी- आप पिताजी से डरते है

जयसिंघ- मैं उनको दुखी देखना नही चाहता

शालिनी- फिर आप शहर3 क्यूँ जा रहे है

जयसिंघ- ताकि हम इस दुनिया की रेस मे पीछे ना रहे , तुम ही सोचो अब बदलाव की ज़रूरत हैना

शालिनी- हाँ,

जयसिंघ- दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी , हमे वो सब अपने गाओं मे लाना चाहिए ना

शालिनी- हाँ

जयसिंघ- हल की जगह ट्रॅक्टर ईस्तमाल करने चाहिए

शालिनी- हाँ

जयसिंघ- यहाँ छोटू रहेंगा और मैं शहर3 मे , जिस से हम सब बॅलेन्स कर पाएँगे

शालिनी- अच्छी सोच है आपकी पर आप गाओं मे और छोटू शहर3 मे क्यूँ नही रह सकता

जयसिंघ- छोटू शहर3 मे एक दिन भी ठीक नही पाएगा नही ये तुम भी देख चुकी हो

शालिनी- आपको थोड़ा थोड़ा समझने लगी हूँ ,

जयसिंघ- जल्दी पूरा समझा दूँगा

शालिनी- तो

जयसिंघ- बताओ पिताजी ने क्या कहा

शालिनी- वो खुश है कि आप शादी होते शहर3 ना जाकर कुछ महीने उनके साथ रहे

जयसिंघ- पिताजी खुश है

शालिनी- हाँ , पर आप एक बार बात कर लेना

जयसिंघ- हाँ कर लूँगा , और पता पिताजी क्या कहेंगे

शालिनी- क्या ?

जयसिंघ- जयसिंघ एक बात याद रखना , खुद को कभी भूलना मत कि तुम कौन हो

शालिनी- पिताजी ये क्यूँ कहते है क्या लगता है आपको

जयसिंघ- हाँ ,मेरे अच्छे के लिए

शालिनी- तो

जयसिंघ- तो तुम्हें शहर3 ले जाउन्गा , जहा सिर्फ़ तुम और मैं रहूँगा , फिर तो दिन रात प्यार कोंगा तुम्हें

शालिनी- तो ये प्लान है जनाब का

जयसिंघ- प्लान तो बहुत बड़ा है , तुम्हें रानी बना दूँगा

शालिनी- पर नेहा नीता का क्या

जयसिंघ- हम 1 महीने बाद जाएँगे ताकि उनको धीरे धीरे समझा सके

शालिनी- आप की सोच अच्छी है

जयसिंघ- मेरा बहुत कुछ अच्छा है

शालिनी- किस की बात करे रहे हो

जयसिंघ- वही जिसको रात ने तुम प्यार करती हो

शालिनी- आप भी ना जब देखो तब उसकी बात करते हो , आप बहुत गंदे हो

जयसिंघ- चलो ना आज दिन मे प्यार करते है , देखो मेरी पैंट की तरफ

शालिनी- ये तंबू बन गया

जयसिंघ- आज दिन मे करते है , नेहा नीता भी कॉलेज मे है

शालिनी- ना बाबा , माजी ने आवाज़ दी तो

जयसिंघ- माँ आवाज़ नही देंगी , माँ पिताजी के पास होंगी तो पिताजी भी वही करते है माँ के साथ जो अब मैं तुम्हारे साथ करने वाला हूँ

शालिनी- मैं नही करने वाली

जयसिंघ- मैं ने शर्ट निकाल दिया है

शालिनी- मैं नही देखूँगी

जयसिंघ- पैंट भी निकाला है

शालिनी- आप बहुत गंदे हो , पता नही शहर 3 मे मेरा क्या होगा

जयसिंघ- तुम्हें कपड़े पहनने नही दूँगा

शालिनी- मैं बेशरम नही हूँ

जयसिंघ- मेरी तरह बेशरम बन जाओ देखो कितना मज़ा आता है

शालिनी- मैं ऐसी ही ठीक हूँ

जयसिंघ- बातें बहुत हो गयी अब आक्षन टाइम

और फिर से शालिनी और जयसिंघ प्यार करने लगे

आज दिन मे प्यार करने से दोनो कुछ ज़्यादा ही जोश मे थे

प्यार तो अब चलता रहेगा

इधर जयसिंघ और शालिनी प्यार कर रहे थे उधर पिताजी और माँ जयसिंघ के बारे मे सोच रहे थे

नेहा नीता के आने से पहले एक राउंड हो गया

............]]]]]]]]]]]]]]]]]]]

फिर जयसिंघ बे पिताजी से बात की, पिताजी ने जयसिंघ को वही जीने का मन्त्र दिया

पिताजी को शालिनी पे विश्वास था कि वो अपना काम पूरा कर देगी

जयसिंघ को शालिनी के रूप मे एक बीवी एक हमदर्द साथी मिल गयी

नेहा नीता भाभी की जाने की बात से नाराज़ हुई

पर धीरे धीरे वो अड्जस्ट हो गयी

उसको भी समझ मे आ गया कि भाभी भैया की है

उनको तो जाना ही पड़ेगा भैया के साथ .

नेहा नीता समझ तो गयी पर उनका प्यार कम नही हुआ

छोटू भी अपनी ही दुनिया मे खोया हुआ था

शालिनी के आने के बाद तो पिताजी हवेली गये ही नही

ठाकुरजी अब अकेले पार्टी कर रहे थे

और वो दिन भी आ गया जब जयसिंघ शालिनी को शहर3 लेकर जाने वाला था

भैया के जाने का गम नही था नेहा नीता को

भाभी से दूर होने की वजह से रो रही थी कुछ महीनो मे नेहा नीता और शालिनी मे जो प्यार वाला रिस्ता कायम हुआ था

शालिनी ने जल्दी मिलने का वादा किया

शालिनी ने वादा किया कि वो जल्दी आम तोड़ने आ आएँगी

उनसे आने तक आम ना तोड़ने को कहा

शालिनी जयसिंघ के साथ शहर3 चली गयी
 
चॅप्टर 875

छोटी चाची ने मुझे मेरी माँ और पापा की शादी की कहानी बताई

कैसे माँ और पापा को प्यार हुआ

कैसे दादाजी ने माँ को पसंद किया

किस तरह दादाजी ने माँ और पापा को मिलाया

मेरी माँ को उनके सपनो का राजकुमार मिल गया और मेरे पापा को जिसकी तलाश थी वो उनके दिल की रानी मिल गयी

अपने पसंद के लड़के या लड़की से शादी हो तो फिर क्या कहने

माँ और पापा के प्यार की कोई सीमा नही थी

उनका प्यार हर दिन एक नयी उचाई पर चला जाता

मेरी माँ को सब कितना प्यार करते थे

नेहा बुआ नीता बुआ तो उनको अकेला न ही छोड़ती थी

सुबह होते ही पहले मेरी माँ के पास जाती और देर रात तक बातें करके सो जाती

दादाजी के लिए तो मेरी माँ बहू नही बेटी थी

दादी भी कितना पसंद करती थी माँ को

सबके दिलो मे रहती थी मेरी माँ

जहाँ भी गयी वहाँ सबको अपना बना लिया

मेरे नाना नानी के बारे मे जानकर उनसे मिलने का दिल कर रहा था

मेरे मामा मामी भी है ये सुनकर तो चाची पे गुस्सा आ रहा था कि इतने सालों से मुझे बताया क्यूँ नही

मोंटू सोनू अब कितने बड़े हो गये होंगे ,

मोंटू सोनू जब मुझसे मिलेंगे तो क्या कहेंगे ,

मुझे तो उनसे मिलने का दिल कर रहा था

पर चाची ने गाओं का नाम नही बताया मेरे नाना नानी का

वो मैं पता लगा लूँगा

लेकिन पूजा बुआ की शादी मे हुआ क्या था

कौनसा झगड़ा हुआ था

शायद यही वजह होंगी जिस से हम शहर मे रहते थे

पर उस झगड़े के बाद भी तो मेरे पापा गाओं मे आते थे

ये मामूली झगड़ा होगा जिस से चाची ने मुझे बताया नही

शायद कोई दूसरा झगड़ा हुआ होगा जिस से मेरे पापा कभी गाओं नही आए वापस

मेरे पापा के सपने

सपने क्या थे

पापा ने तो किसी को नही बताया था

माँ को बताया होगा पर तब तो चाची थी नही फिर उनको पता ही नही होगा

कोई दूसरा मुझे कुछ बताएगा नही

मेरे दिमाग़ मे कई सवाल घूम रहे थे

जिसका जवाब सिर्फ़ छोटी चाची को पता था

और वो सही समय पर ही बताएँगी

लेकिन मेरे पापा और माँ के शहर3 जाने के बाद क्या हुआ था

फिर से एक अधूरी कहानी

छोटी चाची ने कहा था कि अधूरी कहानी सिर्फ़ दर्द देती है

फिर छोटी चाची ने आधी अधूरी कहानी क्यूँ बताई

शायद बड़ी चाची की वजह से

बड़ी चाची के सामने छोटी चाची ज़्यादा बोलती नही

बड़ी चाची जो कहती है छोटी चाची वही करती है

बड़ी चाची ने कहा कि मुझे कहानी बताओ तो छोटी चाची ने अपने तरीके से कहानी बताई

अब इस कहानी से जो सवाल पैदा होंगे वो मुझे सोने नही दे रहे है

हर कहानी कितने सवाल पैदा कर देती है

और जवाब कोई बताता नही

छोटी चाची से पूछूँगा तो वो बताएँगी नही

बड़ी चाची के सामने पूछूँगा तो उनको बुरा लगेगा

बड़ी चाची के सामने छोटी चाची को जवाब देना होगा पर वो ग़लत जवाब भी दे सकती है

मुझे जवाब तो मिल जाएगा पर छोटी चाची को इस से बुरा लग जाएगा

जो मैं कभी नही चाहूँगा

अजीब मुशिबत मे फस गया हूँ मैं

क्या मैं खुद पता लगाऊ

पता तो लगा लूँगा ये मेरे लिए कोई बड़ी बात नही पर छोटी चाची को पता चला तो उनको कैसा लगेगा

छोटी चाची क्या सोचेंगी

मुझे उनपे विश्वास नही था

मैं उनके बताने तक रुक नही सका

और जवाब मिल भी गया और वो कुछ ज़्यादा ही दर्द से भरा हुआ तो

अगर मैं उस जवाब का सही मतलब समझ नही पाया तो

छोटी चाची ने कहा था कि एक ग़लत फ़हमी पूरी फॅमिली को दर्द दे सकती है

एक ग़लत कदम नेहा बुआ और मेरे बीच मे दूरिया पैदा कर सकती है

पता नही ऐसे कौनसी बातें है जो मुझसे छुपाई गयी है जिसके बारे मे मुझे बताया नही जा रहा है

ज़रूर कुछ ऐसी बातें होंगी जो एक साथ मैं हजम नही कर पाउन्गा

छोटी चाची किस बात का इंतजार कर रही है

क्यू छोटी चाची मुझे कुछ बताती नही

कभी कभी तो ऐसा लगता है कि मुझे 24 घंटे नज़र रखी जाती है

छोटी चाची के आँख हमेशा मुझे देखती रहती है ऐसा ही लगता है

मैं अपने ही सोच मे डूबा हुआ था

मुझे नींद नही आ रही थी

बड़ी चाची मुझे अपनी आगोश मे लेकर सो रही थी

पर मेरी नींद सवालो की दीवार से टकरा कर वापस जा रही थी

मैं ने छोटी चाची से बोल तो दिया कि मुझे कुछ पूछना नही है

लेकिन इन सवालो की वजह से नींद नही आ रही है

बड़ी चाची और छोटी चाची सो रही थी

मैं उठ कर बाल्कनी मे आ गया

और आसमान मे सितारो मे मेरी माँ और पापा को ढूँढने लगा

अजीब लाइफ बन गयी थी मेरी

कितने सवाल घूम रहे थे मेरे दिमाग़ मे

हर सवाल का जवाब छोटी चाची के दिमाग़ मे था

ऐसा लगता कि छोटी चाची का दिमाग़ चुरा लूँ

कुछ भी सोचूँ , किसी भी तारा से अंदाज़ा लगाऊ तो सब घूम फिर के छोटी चाची पे आ जाता

छोटी चाची मुझे ऐसे कहानी बताई थी कि मैं आगे जा ही नही पाऊ

प्रॉमिस पहले ले लेती है जिस से मैं कुछ कर भी नही सकता

छोटी चाची ने सच कहा था कि आधी अधूरी कहानी मुझे सोने नही देंगी

वही हो रहा है , मुझे नींद ही नही आ रही है

अब अगली बार मैं पूरी कहानी सुनकर ही रहूँगा चाहे कुछ भी हो जाए

छोटी चाची को बताना होगा तो पूरी कहानी बतानी होंगी वरना मैं आधी कहानी नही सुनूँगा

मैं ऐसे आसमान की तरफ देख कर खुद से बातें कर रहा था

छोटी चाची मुझे अच्छे से समझती है

मैं आसमान की तरफ देख कर अपने ख़यालो मे डूबा हुआ था कि किसी ने मेरे कंधे पे हाथ रख दिया

मैं बिना पलटे समझ गया कि ये छोटी चाची होंगी

सी चाची- अवी नींद नही आ रही है

अवी- आप तो सो रही थी

सी चाची- मुझे आज नींद कैसे आती

अवी- क्यूँ ?

सी चाची- क्यूँ कि मैं ने तुम्हें जो कहानी बताई उसके बाद तूने कुछ पूछा ही नही , तेरी खामोशी मुझे सोने कैसे देती

अवी- आपकी कहानी सुनने के बाद जो सवाल पैदा हुए वो मुझे सोने नही दे रहे है

सी चाची- तो पूछो ना जो पूछना है , फिर हम चैन से सो पाएँगे

अवी- क्या पुच्छू क्यूँ कि मुझे जवाब पता है

सी चाची- जवाब पता है तुम्हें

अवी- आप कहेंगी सही समय आने दो

सी चाची- हर सवाल का जवाब यही हो ज़रूरी नही होता , सवाल पूछ लेना चाहिए क्या पता ऐसा कुछ सुनने को मिल जाए जिसकी उम्मीद हो भी या नही भी हो

अवी- क्या मतलब

सी चाची- वो देखो आसमान मे सितारे कैसे चमक रहे है

अवी- उनके बीच मे मैं अपने माँ और पापा को ढूँढ रहा हूँ

सी चाची- देखो यही तो ग़लती करते हो तुम

अवी- क्या मतलब

सी चाची- तुम्हारी माँ तुम्हारे पापा तुम्हारे दिल मे है और तुम हो कि उनको बाहर ढूँढ रहे हो , तुम हो शालिनी भाभी , तुम हो जयसिंघ भाई साब , उनका अंश हो तुम और तुम उनको बाहर ढूँढ रहे हो , वो तुम्हारे अंदर है , वो तुझ मे ज़िंदा है , वो तुम्हारे ज़रिए हमारे साथ है

चाची की बात सुनते ही मैं उनके गले लग गया

सी चाची- अब रोना सुरू मत करना , इतना बड़ा हो गया और छोटी छोटी बातों मे रोता है

अवी- मैं रो नही रहा हूँ अपनी माँ के गले लग खुद को सुकून पहुँचा रहा हूँ

सी चाची- तो बता अपनी माँ को कौन्से सवाल तुझे सोने नही दे रहे है

अवी- सवाल बहुत है

सी चाची- तो पूछ लो ,

अवी- आप जवाब बताएँगी

सी चाची- जवाब तेरे पास है बस तू उसे देख नही पा रहा है

अवी- क्या मतलब

सी चाची- अभी तो बताया तुझे कि शालिनी भाभी और जयसिंघ भाई साब तेरे अंदर है और तू उनको बाहर ढूँढ रहा है , वैसे जवाब तेरे पास है बस तुझे दिखाई नही दे रहे है

अवी- आप रास्ता दिखा दो जवाब तक जाने का

सी चाची- एक साथ चलेगा सभी रास्तों पे

अवी- तो क्या हर सवाल का अलग जवाब है

सी चाची- हाँ , अब तू बता किस रास्ते पे चलना चाहेगा

अवी- सभी सवाल ज़रूरी है और सबके जवाब चाहिए

सी चाची- तो स्टेप बाइ स्टेप चलो , पूछो जो पूछना है

अवी- आपने जो बताया क्या वो सच है

सी चाची- ये कैसा सवाल हुआ , मुझे लगा तू शालिनी भाभी या जयसिंघ भाई साब के बारे मे पूछेगा

अवी- इस एक सवाल से सब जवाब मिल जाएँगे

सी चाची- मैं ने तुम्हें जो बताया वो सब सच है ,दादाजी के शालिनी भाभी को पसंद करने वाली बात , से लेकर शादी तक सब बातें सच थी

अवी- पूजा बुआ की शादी मे क्या हुआ था

सी चाची- एक छोटा झगड़ा हुआ था कि शादी कहाँ होंगी गाओं या शहर मे , पर बाद मे वो सब भूल गये और तेरे पापा ने गाओं मे शहर से अच्छी शादी करवाई

अवी- मुझे लगा ही था कि मामूली झगड़ा हुआ होगा ,

सी चाची- और क्या लगा तुम्हें

अवी- फिर ऐसा क्या हुआ था कि हम शहर3 मे रहते थे गाओं नही आए थे

सी चाची- ये सवाल इस कहानी का नही है

अवी- इसका जवाब कब मिलेगा

सी चाची- जब आगे की कहानी बताउन्गी

अवी- कब

सी चाची- जल्दी , देख पिच्छली कहानी के बाद कितनी जल्दी दूसरी कहानी बताई

अवी- बताई पर वो भी बीच मे छोड़ दी

सी चाची- तुझे कहा था कि सुमन दीदी के सामने ........

अवी- पता है क्या कहा था , ग़लती मेरी है , मैं मानता हूँ कि ग़लती मेरी है पर आपको एक प्रॉमिस करना होगा

सी चाची-पहले बता फिर प्रॉमिस करूँगी

अवी- अगली बार आधी नही पूरी की पूरी कहानी बताएँगी , चाहे कुछ भी हो जाए

सी चाची- कर दिया वादा

अवी- आप इतनी जल्दी मान गयी

सी चाची- फिर तुझे आधी कहानी बताउन्गी तू फिर सोएगा नही उस से अच्छा है एक बार मे ख़तम कर दूं

अवी- थॅंक यू चाची

सी चाची- तो नेक्स्ट टाइम तुझे पूरी कहानी बताउन्गी

अवी- मैं यही सुनना चाहता था

सी चाची- तो हो गये सवाल ख़तम

अवी- अभी तो सुरू हुए है

छोटी चाची ने प्रॉमिस कर दिया कि नेक्स्ट टाइम मुझे सब कुछ बता देंगी

छोटी चाची के इतने जल्दी मान जाने से डर लग रहा था

पर प्रॉमिस किया है चाची ने ,तोड़ेंगी नही
 
चॅप्टर 875A

छोटी चाची ने मुझे मेरे पापा और मेरी माँ के शादी की बात बता दी

पूरी कहानी सुनने के बाद मेरे दिमाग़ मे कई सवाल पैदा हुए

पर मैं ने बड़ी चाची के सामने कुछ नही पूछा

बड़ी चाची को ये दिखाया कि मैं अपने माँ और पापा के शादी के बारे मे सुनकर खुश हूँ

पर छोटी चाची समझ गयी कि मैं ऐसा क्यूँ कर रहा हूँ

कहानी सुनने के बाद मैं बड़ी चाची के साथ सो गया

पर मुझे नींद नही आ रही थी

ऐसे मे मैं बाल्कनी मे जाकर आसमान की तरफ देख कर अपने माँ और पापा को याद करने लगा

मेरी खामोशी छोटी चाची को सोने कैसे देती

छोटी चाची भी मेरे पीछे बाल्कनी मे आ गयी

और फिर सुरू हुआ सवाल जवाब का हमारा खेल जिसमे मुझे पता था कि कुछ भी हो जाए छोटी चाची इस खेल मे मुझे हरा ही देंगी

अब तक जो पूछा उसके जवाब से मैं सॅटिस्फाइड था

और चाची ने प्रॉमिस भी किया कि वो अगली बार पूरी कहानी बताएँगी

सी चाची- और कुछ पूछना है

अवी- मेरे पापा के सपने क्या थे

सी चाची- मुझे क्या पता

अवी- आपको ना पता हो ये हो नही सकता

सी चाची- मज़ाक कर रही थी , थोड़ा हँस भी लिया करो

अवी- बताइए क्या थे सपने

सी चाची- उनका सपना था कि तू सिविल इंजिनियर बन जाए ,

अवी- आप फिर मज़ाक कर रही है

सी चाची- तेरे लिए तो यही सपना देखा था हम सब ने

अवी- मैं पापा के सपने के बारे मे पूछ रहा हूँ

सी चाची- इसका अभी जवाब नही दे सकती पर वादा करती हू अगली बार जब कहानी बताउन्गी तो तुझे इसका जवाब अपने आप मिल जाएगा

अवी- मुझे अभी जवाब चाहिए

सी चाची- कन्सिडर करते है तुझे जवाब पता चल गया तो तू क्या करेगा

अवी- उन सपनो को पूरा करूँगा

सी चाची-तू इतनी टेन्षन क्यूँ ले रहा है मैं बताउन्गी ना जब टाइम आएगा अभी बताया तो तू प्रेसर मे आकर कर नही पाया तो , स्टर्प बाइ स्टेप चलते है

अवी- कुछ हिंट तो दो

सी चाची-हिंट तो कहानी मे छुपी थी तूने पता नही की इसमे मेरी क्या ग़लती है

अवी- क्या थी हिंट

सी चाची- शालिनी भाभी को रानी जैसे रखना, बदलती दुनिया के साथ चलना ,

अवी- समझ गया , मुझे इंतजार करना होगा

सी चाची- और क्या पूछना है

अवी- दादाजी ने माँ से वादा क्यूँ लिया कि वो मेरे पापा को गाओं वापस लाएँगी

सी चाची- तुम्हारे दादाजी को डर था कि कही जयसिंघ शहरी दुनिया मे खो ना जाए , इसी लिए तो शालिनी भाभी को ढूँढ निकाला ताकि जयसिंघ अकेला ना पड़ जाए शहर3 मे , तुम्हारे दादाजी जयसिंघ के बारे मे सोचते थे और जयसिंघ तुम्हारे दादाजी के बारे मे पर दोनो एक दूसरे को कभी समझ ही नही पाए

अवी- मैं भी समझ नही पाया , मेरा मतलब है समझ गया

सी चाची- तुम्हारे दादाजी और जयसिंघ अजीब थे , पर थे एक दूसरे जैसे है बस सोच अलग थी

अवी- तो क्या माँ ,पापा को गाओं लाने मे कामयाब हुई

सी चाची- हाँ

अवी- आप झूठ बोल रही है

सी चाची- मैं सच कह रही हूँ

अवी- हम तो शहर3 मे रहते थे फिर कब माँ कामयाब हुई

सी चाची- तूने बात छेड़ी है इस लिए बताती हूँ

अवी- क्या बात है

सी चाची- तेरी माँ और पापा हमेशा के लिए गाओं आ रहे थे कि उनका आक्सिडेंट हो गया ,

अवी- तो क्या

सी चाची- देख इस बात को यही ख़तम कर वरना तू फिर अपने माँ और पापा को याद करके रोने लग जाएगा

अवी- उस बात को याद करता हूँ तो

सी चाची- अरे तेरे पीछे सुमन दीदी खड़ी है , हम पकड़े गये

मैं ने पीछे पलट कर देखा तो पीछे कोई नही था

अवी- कहाँ है बड़ी चाची

सी चाची- वो सो रही है , अगर वो उठ गयी तो तेरा तो पता नही पर मुझे डाट पड़ जाएगी

अवी- आप इतनी बड़ी हो गयी और बड़ी चाची से डरती है

सी चाची- थोड़ा डर होना चाहिए , तभी हम लिमिट मे रहते है

और छोटी चाची ने बड़ी चालाकी से मेरा ध्यान डाइवर्ट कर दिया

सी चाची- और कुछ पूछना है

अवी- लास्ट सवाल है , ये इम्पोर्टेंट है

सी चाची- पूछ ले

अवी- मेरे नाना नानी मामा मामी कहाँ है , वो मुझसे मिलने क्यूँ नही आते

सी चाची-मुझे लगा था कि तू यही पूछेगा

अवी- इसका जवाब आपको देना पड़ेगा

सी चाची- जवाब तो दूँगी पर अच्छा हुआ तूने ये सुमन दीदी के सामने नही पूछा

अवी- क्यूँ ?

सी चाची- इसका जवाब सिर्फ़ दर्द देता है जिस से सुमन दीदी तुम्हें रोता हुआ देख कर रोने लग जाती

अवी- क्या हुआ नाना नानी को

सी चाची- बताती हूँ लेकिन तू किसी और पूछना मत क्यूँ कि इसके बारे मे किसी को पता नही

अवी- क्या मतलब

सी चाची- सिर्फ़ मुझे और सुमन दीदी को सच पता है

अवी- मुझे सब कुछ जानना है , मेरे नाना नानी के बारे मे , वो मेरी माँ से इतना प्यार करते है तो मुझे मिलने क्यूँ नही आए

सी चाची- हम कमरे से बाहर चलके बात करते है

अवी- चाची बात क्या है

सी चाची- तुझे बताती हूँ चल मेरे साथ

और चाची मुझे कमरे से बाहर लेकर आई

और लॉबी मे बैठ कर मुझे बताने लगी मेरे नाना नानी के बारे मे

अवी- चाची बात क्या है

सी चाची- कमरे मे सुमन दीदी थी जिसकी वजह से यहाँ लेकर आई हूँ

अवी- मुझे आपकी बातों से डर लग रहा है

सी चाची- ये बात तुझे कभी ना कभी बतानी तो थी आज बता ही देती हूँ ,, पर तू रोना मत

अवी- बात क्या है

सी चाची- मैं सुरू से बताती हूँ

बात उस समय की है जब शालिनी भाभी और तेरे पापा का एक्सीडेंट हुआ था

उस आक्सिडेंट मे शालिनी भाभी और जयसिंघ भाई साब बच नही पाए

लेकिन भगवान का चमत्कार ही था कि तुझे ज़्यादा चोट नही आई

पर हम इस बात से अंज़ान थे कि तेरे सर मे अन्द्रुनि चोट लग गयी है

तू अकेला बेटा होने से शालिनी भाभी और जयसिंघ भाई साब की चिता को आग देने के लिए तुम्हें हॉस्पिटल से लाया गया

और वहाँ जैसे ही तूने अपने माँ और पापा को देखा तो उस चोट का असर कुछ ज़्यादा ही हो गया

तू उस दिन जो बेहोश हुआ तो सब कुछ ख़तम.ही हो गया

तू ज़िंदा लाश बन गया

तूने तो जैसे जीने की इच्छा ही छोड़ दी थी

बेड पर लेटा रहता था ना किसी की आवाज़ सुनाई देती और ना किसी की तरफ देखता

पहले हम सबको शालिनी भाभी और जयसिंघ भाई साब के जाने का झटका लगा था और उपर से तुझे ऐसी हालत मे देखते सबके दिल रोने लगे

तेरे दादाजी की हालत तो पूछ ही मत बस रोते रहते थे

किसी को कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करे

सुमन दीदी कितनी बार बेहोश हुई ये उनको भी पता नही होगा

सुमन दीदी सबसे ज़्यादा रोई तुझे उस हालत मे देख कर

तब सुमन दीदी ने ने फ़ैसला लिया

और तुम्हें अपना बेटा बना लिया

और तेरे दादाजी को बोल दिया कि तू उनका बेटा है , वो कुछ भी करेंगी पर तुझे ठीक करके रहेंगी , डॉक्टर ने भी कहा था कि अगर तुम्हें माँ का प्यार मिला तो शायद कुछ बात बन सकती है

सुमन दीदी ने डॉक्टर की बात मानते हुए तेरे दादाजी को कहा कि तू यही रहेंगा , वो तेरी देखभाल करेंगी अपने बेटे जैसा प्यार देंगी

सुमन दीदी की वजह से तेरे दादाजी ने तेरे नानाजी से बात की

सबसे बड़ी प्राब्लम यही थी कि तू रहेगा कहाँ

शालिनी सबको प्यारी थी

अब उसके जाने के बाद सब सोच रहे थे कि तेरा क्या होगा तू अपने दादाजी के साथ रहेगा या तेरे नाना के साथ

पर तेरे नाना से शालिनी भाभी ने ये बात पहले की थी कि तू इसी गाओं मे रहेगा अपने दादाजी के साथ

तेरे दादाजी के कहते कि तू यहाँ रहेगा तेरे नाना ने बात मान ली

शालिनी भाभी के लिए तेरे नाना तुझे यहाँ रखने को तैयार हुए

तू था तो सबका प्यारा

तेरे नानाजी तुझे देखेंगे तो तुझे अपने साथ ले जाने की बात उनके दिमाग़ मे ज़रूर आएगी इस लिए उन्हों ने कहा कि वो यहाँ कभी नही आएँगे

तेरे अच्छे के लिए ये डिसाइड किया तेरे नाना ने

जब तक तू इस काबिल नही होता कि तू अपने माँ और पापा के जाने की बात को मान ले तब तक उनका तुमसे दूर रहना ठीक था

वरना तेरे ठीक होते ही कभी तू यहाँ तो कभी अपने नाना के पास , , इस मे तू पिस जाता ,

तेरे अच्छे के लिए तेरे नाना ने ये डिसाइड किया था

अवी- अब तो.मैं ठीक हो गया हूँ

सी चाची- फिर से तूने पूरी बात नही सुनी

अवी- अब क्या बाकी रह गया

सी चाची- तेरे नाना ने यहाँ आने से मना किया पर

अवी- पर क्या

सी चाची- अब वो यहाँ आ भी नही सकते

अवी- क्या मतलब

सी चाची- वो इस दुनिया मे नही रहे ,

अवी- क्या ?

सी चाची- तेरे नाना नानी इस दुनिया मे नही है

अवी- क्या हुआ था उनको

सी चाची- बताती हूँ , सब कुछ बताती हूँ

अवी- और मेरे मामा मामी

सी चाची- कोई भी इस दुनिया मे नही रहा , ना मोंटू ना सोनू

चाची के मुँह से लास्ट के वर्ड सुनते मेरी आँख मे आँसू आ गये

कोई नही रहा

मोंटू सोनू भी नही

क्या सोचा था मैं ने और क्या हो रहा है

ये कैसे हो सकता है कि कोई नही रहा

क्या हुआ था सबके साथ जो सब मुझे छोड़ कर गये है

अवी- क्या हुआ था चाची

सी चाची- तू रोना बंद कर

अवी- क्या हुआ था नाना नानी के साथ

छोटी चाची ने मेरे सवाल का जवाब नही दिया बल्कि मेरे गले लग कर मुझे चुप कराने लगी

मुझे बताने लगी कि यही सच है और सच को अपनाना चाहिए

मैं चाची के गले लग कर रोने लगा

अपने नाना नानी जिनका चेहरा भी मुझे याद नही है उनको याद करके मैं रो रहा था
 
चॅप्टर 875बी

ये सुनते ही कि मेरे नाना नानी अब इस दुनिया मे नही रहे तो मुझे झटका लग गया

मेरे मामा मामी भी इस दुनिया मे नही रहे ये कैसे हो सकता है

मोंटू सोनू भी

ये सुनकर मैं अपने आँसू रोक ही नही पाया

चाची मुझे चुप करने की कॉसिश कर रही थी

इसी लिए चाची मुझे बाहर लेकर आई ताकि बड़ी चाची मुझे ऐसे ना देख पाए

मैं थोड़ी देर चाची के गले लग कर रोता रहा

फिर मैं ने अपने आँसू पोंछ लिए और चाची की तरफ देखने लगा

अवी- चाची क्या हुआ था नाना नानी के साथ

सी चाची- तेरी हालत देख कर तेरे दादाजी से साथ तेरे नानाजी को भी दुख हुआ

सबका प्यारा था तू

शालिनी भाभी का बेटा था

तेरे नानाजी ने ये वादा तो कर दिया कि अब वो इस गाओं मे कभी नही आएँगे

पर तुझे ठीक करने के लिए वो भी अपनी तरफ से पूरी कॉसिश कर रहे थे

सुमन दीदी डॉक्टर के साथ भगवान के मंदिर भी जाने लगी

ठाकुरजी अपने पहचान के बड़े बड़े डॉक्टर को बुला कर लाते

पर तू था कि ठीक हो ही नही रहा था

ऐसे मे तेरे नानाजी ने एक मंदिर मे जाने का सोचा

तेरे लिए बड़ी पूजा करने का फ़ैसला किया ताकि तू ठीक हो जाए

पूरी फॅमिली भगवान के दर्शन करने और तेरे लिए मन्नत माँगने गये थे

पहले तो सिर्फ़ नाना नानी जाने वाले थे पर बाद मे धीरे धीरे सब तैयार हो गये

फिर क्या था , एक बस बुक कर ली ,

तेरे लिए उस मंदिर मे तेरे नाना ने एक पूजा करवाई ,ग़रीब लोगो को खाना खिलाया

जब वो वापस आ रहे थे कि

जब वो वापस आ रहे थे कि माउंटन से एक बड़ा पत्थर नीचे गिर गया

वो पत्थर नीचे आकर उस बस से टकरा गया जिसमे तेरे नाना नानी मामा मामी थे

पत्थर की वजह से बस सीधी नीचे खाई मे गिर गयी

और उस आक्सिडेंट मे कोई बच नही पाया

उस पूरी बस मे तुम्हारी माँ की फॅमिली थी

एक झटके मे पूरी फॅमिली भगवान के पास चली गयी

देखते ही देखते सब कुछ बिखर गया

कोई नही रहा उस फॅमिली का

तेरी छोटी मामी नही गयी थी क्यूँ कि वो प्रेगनेंट थी , पर वो भी इस झटके को बर्दास्त नही कर पाई और डेलिवरी मे कॉंप्लिकेशन होने से उनकी डेत हो गयी ,, उनको एक बेटी हुई जो अब अपने नाना नानी के साथ अमेरिका मे रहती है

जो दूर के रिस्त्ेदार थे उन्हों ने आग दी सबको

तुझे इस लिए नही बताया क्योंकि तू पहले ही सदमे मे था

फिर तेरे दादाजी की वजह से भी तुझे फिर से झटका लगा था

हम और रिस्क नही लेना चाहते थे जिस से तुझे कभी ये सच बताया ही नही

और कभी बताते भी नही पर मुझे पता था कि तू ये ज़रूर पूछेगा

तू ये सच बर्दास्त ही नही कर पाता

तू अकेला वारिश था इस घर का जिस से मैं ने किसी को नही बताया वरना कोई ना कोई ग़लती से तुझे बता देता तो सब कुछ बिगड़ जाता

सीमा दीदी को भी नही बताया उनको बताती तो वो सबको बता देती

मोंटू सोनू भी नही रहे

जिस घर मे खुशिया ही खुशिया थी वो आज खंडहर बन गया है

अवी- मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हो रहा है

सी चाची- तेरे साथ , तू अकेला नही है , ये हम सब के साथ हो रहा है और हमे मिलके इसका सामना करना है

अवी- पहले माँ और पापा , फिर दादाजी अब नाना नानी ,

सी चाची- तू ये बात तब सुन नही पाता जिस से तुझे सच बताया नही

अवी- मैं नाना के गाओं जाना चाहता हूँ

सी चाची- तू वहाँ जाएगा तो तुझे दर्द के सिवा कुछ नही मिलेगा , तुझे अपने दादाजी से भी दूर रखा क्यूँ कि तू ये बर्दास्त नही कर पाता , और सुमन दीदी को मुझे कितना मनाना पड़ा तुझे यहाँ लाने के लिए तो सोच जब मैं कहूँगी कि तुझे तेरे नाना के घर जाना है तो क्या सुमन दीदी तुम्हें जाने देंगी , नही , उनको पता है तू वहाँ जाकर क्या करेगा

अवी- क्या मतलब

सी चाची- उनकी याद मे तू फिर रोएगा ,, और तू रोएगा तो हम सब भी रोएंगे ,

अवी- मैं बस एक बार देखना चाहता हूँ

सी चाची- अवी तू आज बोल रहा है कि तू बस देखना चाहता है पर बाद मे तू क्या कहेगा मुझे पता है

तू कहेगा कि मैं कुछ दिन यहीं रहना चाहता हूँ और तू फिर से डिप्रेशन मे चला जाएगा , फिर सुमन दीदी का क्या होगा तुझे पता हैना , वो तेरे आँख मे आँसू नही देख सकती वो तुझे परेशान कैसे देख पाएँगी

अवी- आपकी बात भी सही है

सी चाची- जो हो गया वो बदल नही सकते , उनको याद करके रोने से अच्छा है वो क्या चाहते है उसके बारे मे सोचा जाए

अवी- क्या चाहते थे

सी चाची- कि तू ठीक हो जाए और देख तू ठीक हो गया , उनकी दुआ का असर है की ठीक हुआ है , अब क्या तू उनके लिए रोएगा तो क्या उनको अच्छा लगेगा

अवी- नही

सी चाची- तू खुश रहे यही तो वो चाहते थे , अब तू खुद फ़ैसला कर कि तुझे क्या करना है , तुझे जाना है तो मैं इंतज़ाम कर दूँगी , पर तू खुद सोच आज दादाजी से मिलके तू सो नही पाया , तुझे परेशान देख कर सुमन दीदी को क्या अच्छा लगा होगा , तब सोच जब तू अपने नाना को याद करेगा तब तुझे देख कर सुमन दीदी को कैसे लगेगा

सी चाची- तू , अपने बारे मे सोच रहा है , तुझे हम सबके बारे मे भी सोचना चाहिए , तू जब रिज़ल्ट का टेन्षन ले रहा था तब क्या हुआ था पता हैना ,

सी चाची- तू खुद सोच कि तुझे तेरे दादाजी से मिलने क्यूँ नही दिया , और तू मिला भी तो उनके बारे मे ही सोच रहा है , वैसे तू अपने नाना नानी के बारे मे सोचता रहेंगा जिस से ........

अवी- नही जाउन्गा पर

सी चाची- पर क्या

अवी- उनकी फोटो तो मिल सकती हैना

सी चाची- शालिनी भाभी के शादी के समय की है , गाओं जाने दूँगी

अवी- नाना नानी आज ज़िंदा होते तो मुझे मिलने जाते आते हैना चाची

सी चाची- हाँ , ज़रूर आते , तू सबका लाड़ला था

अवी- उनका तो चेहरा भी याद नही मुझे

सी चाची- गाओं जाते ही तुझे फोटो दिखा दूँगी

अवी- इतनी बड़ी बात आपने मुझसे छुपाई थी

सी चाची- तब तू सच सुन ही नही पाता

अवी- और क्या क्या छुपाया है मुझसे

सी चाची- अब कुछ छुपाया नही है , बस सच बताना है

अवी- क्या मतलब

सी चाची- तुझे बताना है कि जयसिंघ भाई साब के शहर जाते ही क्या हुआ था

अवी- कब बताएँगी

सी चाची- जल्दी , चल अब वरना सुमन दीदी की नींद खुल गयी तो गड़बड़ हो जाएगी

अवी- मैं कुछ देर यही रुक जाउ

सी चाची- बिल्कुल नही तू अपने नाना नानी को याद करेगा

अवी- प्लीज़ चाची

सी चाची- समझा कर अवी , सुमन दीदी को मैं ने वादा किया था कि ये बात तुझे कभी नही बताउन्गी , उनको पता चलेगा कि तुझे सच पता है तो मेरा क्या होगा

अवी- चलिए

सी चाची- तू भी अब ज़्यादा मत सोच ,, सोचने के काम मुझ पे छोड़ दे तू बस टूर एंजाय कर

अवी- कॉसिश करूँगा

सी चाची- तुझे करना होगा वरना सुमन दीदी को शक हो जाएगा , और हाँ मुझे पहले वाला अवी चाहिए ,तेरे दादाजी और नानाजी के बारे मे तूने सोचा भी तो मैं तुझसे बात नही करूँगी ,

सी चाची-पहली बार पूरी फॅमिली एक साथ बाहर घूमने आई है ऐसे मे तू उनके लिए अपने चेहरे पे स्माइल लाना , जैसे मैं करती हूँ , ऐसा समझना कि इस रात को मैं कुछ बताया ही नही और तूने कुछ सुना ही नही ,

अवी- जी

सी चाची- चल अब ,, और हाँ कल हम किसी मंदिर जाएँगे वहाँ तू अपने नाना नानी के लिए पूजा कर लेना , तुझे अच्छा लगेगा ,

अवी- जी , ये ठीक रहेगा

सी चाची- और एक बात याद रखना अपनी वजह से दूसरो की खुशी को कुछ ना हो इसका हमेशा ध्यान रखना , सब तुझे प्यार करते है अगेर तू ऐसे अपने दादाजी और नानाजी को याद करता रहेगा तो कोई इस टूर को एंजाय नही करेगा ,

सी चाची- इतने दीनो बाद एक साथ सबके चेहरे पे खुशी देखने को मिलेंगी , उनकी खुशी मे अपनी खुशी ढूँढना , थोड़ा मुश्किल होगा पर मेरा अवी मुश्किल काम आसानी से कर लेता है

अवी- मैं कॉसिश करूँगा कि मेरे वजह से किसी को प्राब्लम ना हो ,

सी चाची- और कुछ भी हुआ तो मेरे पास आना ,

अवी- आज रात की बाकी के बातें हम गाओं जाकर करेंगे , इस रात को अब कुछ दिन के लिए भूल जाता हूँ

सी चाची- ये है मेरा अवी

और चाची ने मुझे थोड़ी देर गले लगाए रखा

फिर हम सोने के लिए अपने कमरे मे जाने लगे

चाची ने मुझे ऐसा सच बताया जो मैं सुनना नही चाहता था

पर सच कितना भी छुपा लो सामने तो आएगा

नाना नानी के बारे मे सुनकर मुझे दुख हुआ

पर उनकी इच्छा थी कि मैं खुश रहूं

उनके लिए उनके प्यार के लिए

कल मंदिर जाते ही पूजा करूँगा

मुझे मेरे सवाल के जवाब तो मिल गये फिर भी मैं चैन से सो नही पाया

नाना नानी को याद करता रहा

उनका चेहरा भी याद नही था पर उनके प्यार को महसूस कर रहा था

उनके प्यार के आगोश मे मेरी आँख लग गयी

मैं रो भी नही सकता था ,, मैं रोउंगा तो सब रोएंगे

मैं अकेला नही था मेरे साथ पूरी फॅमिली थी

खास करके बड़ी चाची

उनके लिए मैं बस नानाजी को याद करता गया

चाची के कहानी बताने से पहले मैं दादाजी को याद कर रहा था

और अब कहानी बताने के बाद नानाजी को याद कर रहा था
 
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