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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 1057

छोटी चाची 4

नेहा ने पिताजी की बात मान ली

नेहा बड़ी मुश्किल से अवी के सामने आ गयी

नेहा ने जैसे अवी की हालत देखी उसकी आँखो से आसू आ गये

पिताजी जो कह रहे थे वो सच था ,शालिनी भाभी को कैसा लग रहा होगा अवी की हालत देख कर

नेहा को खुद पे बहुत गुस्सा आया

और नेहा ने कसम ली कि वो अवी को ठीक करके शालिनी भाभी की आत्मा को सुकून पहुँचा देगी

नेहा भी सुमन के साथ मिलके अवी का ख़याल रखने लगी

अवी को कुछ आयुर्वैदिक मेडिसिन स्टार्ट की थी

कुछ आयुरवैदिक तेल से अवी की मालिश सुरू कर दी सुमन और नेहा ने

नेहा तो जैसे कोमल और कविता को भूल ही गयी उसे सिर्फ़ अवी दिखाई देने लगा

नेहा का साथ मिलने से सुमन का विश्वास पक्का हो गया

सुमन आयुर्वैदिक के साथ पूजा पाठ भी कर रही थी

रोज सुबह उठ कर मंदिर जाकर अवी के लिए पूजा करती

अवी के पास दोनो मे से कोई ना कोई एक ज़रूर रहता

जैसे नेहा और सुमन ने डिसाइड किया हो कि कब कौन अवी का ख़याल रखेगी

सुमन और नेहा का प्यार देख कर पिताजी अवी के अच्छे होने का इंतज़ार कर रही थी

सीमा मीना नीता पूजा दोनो की मदद करती

सुमन और नेहा जो बोलती वो सब बाकी सब करते

पिताजी सबको साथ देख कर खुश थे

शालिनी और जयसिंघ के बेटे ने बिना कुछ किए सबको साथ लाया है अगर वो ठीक हो गया तो अवी सबको प्यार से बाँध कर रहेगा

कविता कोमल भी अब नीता के घर खेलने की जगह अपने दादाजी के पास आकर खेलती

सुबह का सूरज निकलते ही सब अवी के पास आ जाती

नेहा अपने भैया की नफ़रत को भूलती जा रही थी

नीता ने भी अब कोमल को तंग करना बंद कर दिया पर इस से कोमल खुश नही हुई , कोमल को अंदर ही अंदर अच्छा लगता

सब इसी का इंतज़ार था कि अवी कब ठीक होता है

उधर छोटू ने खेत का काम अच्छे से संभाल लिया था

छोटू फिर भी इस सोच मे डूबा रहता कि मीना को भी बच्चा नही हुआ

पर सुमन सीमा और मीना तो जैसे अवी को अपना बेटा मान लिया था

वो तीनो इसी मे खुश थी

पर छोटू मीना से बच्चा ना मिलने से 4 शादी करने का सोच रहा था , पर जब से अवी इस घर मे आ गया उसने 4 शादी के बारे में सोचा तो

नही पर बच्चे की उम्मीद अभी तक छोड़ी नही थी

पिताजी को उनका पोता मिलते ही छोटू ने बच्चे की उम्मीद छोड़ दी

छोटू ने पिताजी के लिए तीसरी शादी की थी

पिताजी इस बारे में छोटू को कुछ नही कहते थे

पिताजी ये नही चाहते थे कि अब किसी वजह से कुछ प्राब्लम आ जाए इस घर मे

कुछ सालो मे बहुत कुछ झेला है सब ने

छोटू की माँ , जयसिंघ और शालिनी जैसे तीन झटके काफ़ी थे सबके लिए

अगर अब एक और झटका मिला तो नेहा का प्यार पर से विश्वास उठ जाएगा

कितनी मुश्किल से नेहा ने खुद को संभाला है

ऐसे मे एक ग़लत कदम नेहा को वापस पहली वाली नेहा बना सकती है , जो सिर्फ़ नफ़रत करने पे विश्वास रखती थी

छोटू ने 6 महीने मे खेतो मे जो काम किया उसका रिज़ल्ट आ गया था

हर साल के मुक़ाबले इस साल ज़्यादा फसले निकली थी

पिताजी फिर हिसाब देख कर खुश हुए

उनको विश्वास नही हो रहा था कि छोटू ने ये कैसे किया ,

पिताजी ने कितनी मेहनत की पर इतना प्रॉफिट कभी नही हुआ

पर छोटू ने 6 महीने मे 1 साल का प्रॉफिट जितनी कमाई की

पिताजी तो ये देख कर सोचने लगे कि छोटू को घर की ज़िम्मेदारी सोन्पी जा सकती है

पिताजी ने छोटू को कभी इस काबिल नही समझा था कि वो इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी उठा सकता है

पर खेतो मे जो मेहनत की उसकी सफलता देख कर पिताजी छोटू से बात करने लगे

पिताजी- छोटू

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- मेरे पास आकर बैठो

छोटू पिताजी के पास बैठ गया

पिताजी- कल मैं ने हिसाब किताब देखा है ,

छोटू- आप खुश हो मेरे काम से

पिताजी- खुश नही बहुत खुश हूँ , तूने तो कमाल कर दिया , मुझसे आगे निकल गया तू तो

छोटू- मैं ने पूरी मेहनत की ताकि आप खुश कर सकूँ

पिताजी- तेरे काम से तेरी लगन से मैं खुश हूँ , ऐसे काम किया कर ,

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- मुझे पता ही नही था कि मेरा बेटा इतनी मेहनत कर सकता है

छोटू- आपका आशीर्वाद के बिना नही कर पाता

पिताजी- वैसे दीवान जी ने कहा कि तूने नॅचुरल फर्टैज़र की जगह मार्केट से दूसरा फेर्तिलाइजर ईस्तमाल किया

छोटू- हाँ , मैं ने सुना था कि मार्केट वाले फेर्तिलाइजर से फसले अच्छी बनती है

पिताजी- अच्छा सोचा तूने , तेरी मेहनत दिख रही है

छोटू- वैसे पिताजी इस कामयाबी का मैं अकेला हकदार नही हूँ

पिताजी- क्या मतलब

छोटू- मेहनत मेरी थी और दिमाग़ किसी और का था

पिताजी- मतलब तेरा आइडिया नही था मार्केट से फेर्तिलाइजर लेने का

छोटू- वो मीना ने कहा था कि मार्केट के फेर्तिलाइजर से ज़्यादा प्रॉफिट होगा

पिताजी- मीना ने , अपनी बहू ने कहा

छोटू- हाँ ,, वो बोल रही थी कि उसके गाँव मे एक बार कुछ लोग आए थे , सरकार की तरफ से , जो ज़मीन को टेस्ट कर रहे थे और बता रहे थे कि ज़मीन मे क्या कमी है , और फसले बढ़ाने के लिए क्या ज़रूरी है , वही बात मीना ने मुझे बताई और , कहा कि उसपे विश्वास रख कर

एक बार करके देख लो

पिताजी- मीना ने अच्छा सोचा

छोटू- हाँ , और आपने ही कहा था अपनी पत्नी पे विश्वास करना सीखो तो मीना ने विश्वास रखा और रिज़ल्ट आपके सामने है

पिताजी- मीना से बात करनी होंगी , पर तेरी मेहनत के बिना ये नही होता
 
छोटू- मेरी मेहनत और मीना का दिमाग़ , उसीने कहा कि कब पानी देना है कब फेर्तिलाइजर देना है , कब बेचना है मार्केट मे , मीना बोल

रही थी सही समय पे मार्केट मे बेचेंगे तो और ज़्यादा प्रॉफिट होगा

पिताजी- मीना ने सही कहा , तुम ना मीना को पूछ लिया करो , ऐसा मत समझना कि बीज से पूवाई कर खेती कर रहा हूँ ये सोचना की मीना तुम्हारा दिमाग़ है

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- और हाँ , तूने मेरी उम्मीद से अच्छा काम किया , ऐसे काम करता रहना , तुम्हारी माँ देख रही होंगी तो बहुत खुश जाएगी

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- अब सम्मर तक आराम करो , फिर आम का काम करना

छोटू- आराम नही पिताजी , मीना बोल रही थी कि ,कुँआ तो हमारे खेत मे है क्यूँ ना सब्जिया भी लगाई जाए जिस से रोज प्रॉफिट होगा

पिताजी- ठीक है , सब तुम्हारे हाथो मे दिया है जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा करना

छोटू- जी पिताजी

पिताजी- मीना को मेरे पास भेजना

छोटू ने पिताजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया , और मीना को बताने गया कि पिताजी ने उसे बुलाया है

पिताजी मीना के बारे में सोचने लगे

पिताजी को पता था कि मीना का दिमाग़ तेज है

तभी तो छोटू की शादी मीना से करवाई है

पिताजी मीना का इंतज़ार कर रहे थे

पिताजी- आओ मीना डोर के पास खड़ी मत रहो

नेहा - पिताजी मैं नेहा हूँ

पिताजी- नेहा तुम , आओ , वहाँ क्यूँ खड़ी हो

नेहा- आपको देख रही थी आप कुछ सोच रहे थे

पिताजी- कुछ नही , तुम कहो , कैसा है अवी

नेहा- अब अच्छी हालत है अवी की , धीरे धीरे वो ठीक हो रहा है

पिताजी-तुम्हारे आते ही देखो अवी मे कितना बदलाव आ गया

नेहा- हाँ , वैसे पिताजी आपसे एक बात करनी थी

नेहा- पिताजी एक बात कहो

पिताजी- हाँ बोलो

नेहा- आपने छोटू की शादी मीना से कर के अच्छा किया

पिताजी- तुम्हें ऐसा क्यूँ लग रहा है , 1 साल से उपर हो गया अभी तक कोई खुशख़बरी नही मिली

नेहा- वो बात नही है पिताजी , मीना बहुत तेज है

पिताजी- मुझे भी ऐसा ही लगा था तभी तो शादी कर दी छोटू से पर वो तो चुप चाप रहती है , कुछ भी नही बोलती वो , जिस वजह से उसकी शादी करवाई छोटू से वो तो नही हो रहा है

नेहा- बच्चे की बात कर रहे हो तो ऐसा लग रहा है छोटू मे प्राब्लम होंगी

पिताजी- ऐसा दुबारा मत कहना वरना छोटू को बुरा लग जाएगा , क्यूँ कि अब मुझे भी ऐसा ही लग रहा है

नेहा - इसी लिए तो कोई उस से बात नही करता इस बारे में , पर मीना काफ़ी तेज है

पिताजी- तुम्हें ऐसा क्यूँ लगता है

नेहा- सुमन और मैं तो अवी का ख़याल रख रहे है , सीमा का तो आपको पता है , ऐसे मे देखिए घर को किस तरह चला रही है , कभी कोई

शिकायत का मोका नही देती

पिताजी- वो तो है ,

नेहा - और आपको पता है ना कि मीना ने क्या कहा था कि अवी के लिए शहर जैसा कमरा बना दीजिए ताकि उसे घर जैसा लगे

पिताजी- कहा तो था मीना ने , पर हमने मना कर दिया

नेहा- पर बाद मे डॉक्टर ने कहा कि शहर जैसा महॉल बना दिया तो शायद कुछ फरक पड़ सकता है अवी पे

पिताजी- तभी तो उसके लिए नया कमरा बनाया है

नेहा - पर देखिए , जो बात डॉक्टर कहने वाले थे वो मीना ने पहले सोच ली थी ,

पुटजी- तू कह तो सही है , वैसे छोटू भी यही कह रहा था

नेहा- क्या कहा छोटू ने

पिताजी- मुझे लगा कि छोटू की मेहनत की वजह खेतो मे इतना प्रॉफिट हुआ है पर इसमे मेहनत सिर्फ़ छोटू का था दिमाग़ किसी और का था

नेहा - किसका दिमाग़ है

पिताजी- मीना का , मीना ने बताया नये तरीके से खेती कैसे करते है छोटू को

नेहा - मैं ने कहा था ना कि मीना चुप रहती है पर उसके दिमाग़ ने कुछ ना कुछ चलता रहता है

पिटाज़ू- हाँ , मीना काफ़ी समझदार है

नेहा - पिताजी मुझे तो लगता है अवी के बड़ा होने तक इस घर की ज़िम्मेदारी छोटू की जगह मीना को देना

पिताजी- मैं भी वही सोच रहा था , सुमन तो अवी के बारे में सोचती है और सीमा का तो क्या कहना , ऐसे मे मीना ही इस घर का ख़याल रख पाएगी

नेहा- आप उसी को घर की ज़िम्मेदारी देना , हम सब उसकी मदद करेंगे

पिताजी- तुमने कहा और समझो हो गया , मैं मीना से बात करता हूँ

नेहा -पूजा दीदी ने भी यही कहा था कि मीना जैसा काम वो भी नही कर सकती

पिताजी- तुम सब ने डिसाइड किया ना तो यही होगा

औट पिताजी मीना के बारे में सोचने लगे

मीना चुप चाप रहती है , और सही समय का इंतज़ार करके बात करती है

सबकी बात सुनती है फिर बात करती है

शालिनी और जयसिंघ के आक्सिडेंट के समय हर कोई रो रहा था पर मीना की आँख मे आसू नही थे

पिताजी ने तब कुछ नही कहा था

पर आज पिताजी को इस बात का जवाब चाहिए था मीना से
 
फ्लॅशबॅक 1058

छोटी चाची 5

पिताजी को शालिनी जैसी बहू दुबारा मिल जाएगी ऐसी उम्मीद ही नही थी

शालिनी मे इतनी खूबिया थी जितनी किसी मे हो ही नही सकती

पिताजी की बेटियो मे भी नही थी

नेहा क्यूट , प्यारी चंचल थी

नीता मस्ती मज़ाक , सपोरटिव और समझदार थी

पूजा मे लीडर शिप की खूबियो थी जो जयसिंघ के शहर जाते ही पिताजी को दिखाई दी

सुमन भावुक , प्यार और मासूम दिल वाली थी

सीमा की खूबी थी उस हसना और हसाना आता है

और मीना कुछ हद तक शालिनी जैसी थी बस कुछ कामिया थी जो दूर हो गयी तो वो शालिनी जैसी बन सकती है , और कामिया यो वक्त के साथ दूर की जा सकती है

पिताजी ने जो खूबिया मीना मे देखी थी उसकी वजह से छोटू की शादी मीना से करवा दी

सुमन और मीना की खूबिया मिलाई जाए तो शालिनी बन जाएगी

पिताजी ने सोच लिया कि उनको क्या करना है

जो काम शालिनी पूरा करने के इतनी करीब आ गयी थी वो काम शालिनी का बेटा करेगा

शालिनी ने जयसिंघ को गाँव वापस लाया था पर उस आक्सिडेंट की वजह से जयसिंघ नेहा से माफी नही माँग सका

किसी ना किसी को तो नेहा से माफी माँगनी पड़ेगी , जयसिंघ ने जो किया भले उसमे उसकी ग़लती ना थी पर उसके माफी माँगे बिना नेहा उसको माफ़ नही करेगी

जयसिंघ की तरफ से कौन माफी माँगेगा , और कौन , बाप का अधूरा काम बेटे को पूरा करना पड़ता है

जैसे जयसिंघ के करमो की सज़ा नेहा अवी को दे रही है

वैसे उन करमो की माफी अवी को माँगनी पड़ेगी नेहा से

तभी नेहा की नफ़रत हमेशा के लिए ख़तम होंगी

और ये काम अवी से सुमन और मीना करवा सकती है

और अवी को इस काबिल सिर्फ़ इसकी माँ ही बना सकती है

सुमन का अवी के लिए प्यार देख कर ऐसा लग रहा है सुमन अवी धूप मे भी ना जाने देगी ये बोल के कि अवी को धूप लग जाएगी ,

ऐसे मे मीना अवी को वैसा बना सकती है जैसा शालिनी चाहती है

सुमन अवी को प्यार करना सिखाएगी तो मीना अवी को हर पल हर मुसीबत मे गाइड करेगी ताकि अवी कभी मुश्किल मे ना फसे , और अवी

को ये बताती रहेगी कि उसे क्या करना है

मुझे मीना और सुमन दोनो से बात करनी होंगी

सुमन को पता है उसे क्या करना है बस मीना तो बताना होगा

ये मीना कहाँ रह गयी

पिताजी- छोटू छोटू

छोटू- मीना आ रही है पिताजी

शादी के बाद पहली बार मीना अकेले मे वो भी पिताजी के बुलाने पे बात करने आ रही है

मीना फिर भी हिम्मत करके पिताजी जे कमरे मे आ गयी

पिताजी- मीना

मीना- जी पिताजी

पिताजी- डोर अंदर से बंद कर दो

मीना तो शॉक्ड हो गयी ये सुनकर

पिताजी- मीना

मीना-जी पिताजी

और मीना ने डोर बंद कर दिया

पिताजी- यहाँ आकर बैठो

मीना सोचने लगी कि पिताजी करना क्या चाहते है

मीना थोड़ी डरते हुए पिताजी के सामने वाली चेर पे बैठ जाती है

पिताजी- मीना तुम डरो मत , मुझे अपने पिताजी की तरह समझो ,

मीना ने हाँ मे गर्दन घुमा दी

पिताजी- मीना अब तुम इस घर की एक सदस्या बन गयी हो ,

मीना- जी

पिताजी- तुम डर रही हो , जी की जगह पिताजी कहो

मीना- जी पिताजी

पिताजी- सुमन ने तुम्हें बताया होगा कि मैं अपनी बहू को बेटी ही मानता हूँ

मीना- दीदी ने बताया है

पिताजी- फिर तो तुम्हें शालिनी के बारे में बताया होगा , इस घर की बड़ी बहू

मीना- बताया है , पर उनको सब कुछ पता नही था

पिताजी- पता करना है शालिनी के बारे में

मीना- हां

पिताजी- क्यूँ पता करना है

मीना- वो मैं

पिताजी- डर को निकाल दो ,

मीना- मैं ने 6 महीने पहले एक बात नोट की , जयसिंघ भाईसाब इस घर के बेटे है फिर भी सब शालिनी भाभी के जाने से रो रहे थे , बेटे के

जाने का गम था पर बहू के जाने का गम सबसे ज़्यादा था , ये बात मुझे पिछले 6 महीने से परेशान कर रही है

पिताजी- तो अब तक पूछा क्यूँ नही

मीना- सुमन दीदी से पूछा ,

पिताजी- तो क्या पता चला

मीना- कुछ बाते तो पता चली पर मुझे सब कुछ जानना है

पिताजी- क्यूँ सब कुछ जाना है

मीना- एक लड़की जो शादी के बाद बहू बन कर दूसरे घर मे जाने के बजाए बेटी कैसे बन गयी , नेहा अपनी सग़ी बहन पूजा दीदी को जितना नही मानती उतना अपनी भाभी के करीब कैसे आई , एट्सेटरा

पिताजी- तुम्हारे सवाल सुनकर अच्छा लगा मुझे

मीना- जी

पिताजी- पता है , सुमन हो या सीमा दोनो ने कभी मुझे ये नही पूछा , उनको भी मैं अपनी बेटी मानता हूँ फिर भी वो ये सवाल पूछ नही पाई ,

और तुमने 1 साल के अंदर ये सवाल पूछ लिया

मीना- आपने ही कहा कि मैं इस घर की एक मेंबर हूँ , मेरा हक है सुख दुख के बारे में पता करने का ताकि मैं हर चुनोती के लिए तय्यार

रहूं
 
पिताजी- तुम बिल्कुल शालिनी जैसा सोचती हो , शालिनी ने इस घर मे आते मुझसे , नेहा की माँ से , नेहा नीता पूजा सब से इस घर इस

फॅमिली इस गाँव के बारे पूछ लिया था

मीना- सब बाते पता हो तभी घर को टूटने से बचाया जाता है

पिताजी- अच्छी सोच है

मीना- पर आपने अभी तक नही बताया

पिताजी- तुमने भी नही बताया कि तुम्हे क्या क्या पता है

मीना- आप बताइए ,क्यूँ कि जब मैं किसी से कुछ पूछती हूँ तो ऐसे सुनना पसंद करती हूँ कि मुझे कुछ पता नही है

पिताजी- ऐसा क्यूँ

मीना- क्यूँ कि काय्न की 2 बाजू होती है

पिताजी- मैं समझा नही

मीना- आपको कुछ बाते पता होंगी , जो आपने सुमन दीदी को बताई नही

पिताजी- सुमन को कुछ नही बताया मैंने

मीना- और सुमन दीदी ने मुझे जो बताया वो उनको माजी ने बताया है , शायद इस बारे आपको भी पता ना हो

पिताजी- तो सब कुछ पता करना चाहती हो

मीना- हाँ,मैं ने सुमन दीदी को जितना पता था वो सब जान लिया

पिताजी- सुमन ने बता दिया

मीना- बता तो नही रही थी पर मेरे कुछ तरीके है सच जानने के

पिताजी- सुमन ने बता दिया मतलब तुम्हारी सास को जितना पता था वो तुम्हें पता है ,

मीना- हाँ , सुमन दीदी ने कहा कि माजी ने उनको बहुत कुछ बता दिया , मे भी कुछ छिपाया हो जो आपसे पता चलेगा

पिताजी- ठीक है मैं तुम्हें मेरी कहानी बताता हू , ताकि तुम ठाकुर और हमारी फॅमिली के बारे समझ सको ,

मीना- जी

और पिताजी ने अपनी कहानी मीना की बता दी , कुछ नही छुपाया मीना से

मीना को पता चला कि ठाकुर और हमारी फॅमिली का रिस्ता कैसा होना चाहिए

पिताजी- तुम्हें मेरी बात सुनकर बुरा नही लगा

मीना- कैसा बुरा

पिताजी- मैं ने तुम्हें सब कुछ बताया है , यहाँ तक मैं कैसा हूँ वो बाते भी बताई दी , पर तुमने कुछ नही कहा यहाँ तक टोका भी नही

मीना- आपने अपनी मस्ती के बारे में बताया , मतलब कोई तो वजह होंगी जो मुझे ये सब बताया

पिताजी- तू सच मे स्मार्ट हो , इसकी वजह भी बता दूँगा

मीना- और वैसे भी आपने तो मुझे पहले भी आपके और मेरी भाभी के चुदाई की बात बताई थी ,

पिताजी- तो तुम समझ गयी होंगी हमारी फेमिली बारे में

मीना- जी ,पर ऐसा लग रहा है ये सिर्फ़ शुरुआत थी

पिताजी- अच्छा तरीका है सब कुछ जानने का

मीना- अब आप जयसिंघ भाई साब की कहानी बताइए

पिताजी- जयसिंघ के बारे में जानने के लिए तुम्हें तीनो लोगो से पूछना होगा ,एक मैं , दूसरी तुम्हारी सास जिसने सुमन को बताया होगा नही तो वो बात कभी पता नही चलेगी , और 3र्ड है शालिनी जो इस दुनिया मे नही है ,

मीना- सुमन दीदी ने मुझे बहुत कुछ बताया है , और शालिनी दीदी से सपने मे पूछ लूँगी और अब आप बता दीजिए

पिताजी ने जयसिंघ की कहानी बता दी

पिताजी- तुम्हें क्या लगता है जयसिंघ ने जो किया वो सही किया या ग़लत

मीना- " दिल और दिमाग़ के खेल मे किस की ग़लती है ये बताना मुश्किल होता है पर कोई एक हार जाए तो चोट शरीर को लगती है ,

जिसका हिस्सा दिल और दिमाग़ दोनो होते है "

वैसे ही ग़लत आप हो या जयसिंघ भाई साब , इसका असर फॅमिली पे पड़ता है और दर्द इस फॅमिली के हर एक मेंबर को होता है

पिताजी- तुम्हारे जवाब अच्छे लगे मुझे , सही कहा चोट इस फॅमिली को इस घर को लगी है

मीना- पर शालिनी भाभी देवी है जिसने किसी का साथ नही छोड़ा , जयसिंघ भाई साब जे साथ रही लास्ट समय तक और इस घर के साथ रही लास्ट समय तक

पिताजी- अब तुम्हें उसी देवी की कहानी बताता हूँ ,

मीना- जी

और पिताजी ने शालिनी की कहानी बता दी

मीना- जैसा सोचा था उस से बढ़कर पाया था , पिताजी हो तो आपके जैसे और बहू हो तो शालिनी भाभी जैसी और बेटा हो तो जयसिंघ भाई साब जैसा ,

पिताजी- शालिनी जितने समय के लिए हमारे साथ रही उतने समय के लिए हमारे दिलो मे रही और आज भी हमारे दिल मे है

मीना- मेरी किस्मत अच्छी नही है जो शालिनी भाभी को पहली और आख़िरी बार हॉस्पिटल मे उस हालत मे देखना पड़ा

पिताजी- जाने दो , अब नेहा के बारे में सुनो

मीना- उसकी कहानी तो लंबी है

पिताजी- हाँ , मेरी जान है वो , अगर मुझे कुछ हुआ तो तुम्हें उसका ध्यान रखना होगा

मीना- जी

पिताजी ने नेहा की कहानी बता दी

मीना- नेहा जैसा बचपन मुझे मिल जाए और शालिनी भाभी जैसी जवानी तो खुद को किस्मत वाली समझूंगी

पिताजी- नेहा कैसी थी और क्या बन गयी देखा तुमने

मीना- जी

पिताजी- नीता की कहानी बताता हूँ

और पिताजी ने नीता की कहानी बता दी साथ मे पूजा की कहानी भी बता दी

मीना- इस घर मे सबकी कहानी अलग है

पिताजी- सुमन की कहानी तुम्हें सुमन ने बता दी होंगी

मीना- हम दूसरो की कहानी बताते है पर खुद की कहानी हमेशा अधूरी बताते है

पिताजी- सही कहा , मुझे सुमन के पास्ट के बारे में पता है और शादी के बाद क्या हुआ वो भी पता है

और पिताजी ने सुमन की कहानी और सीमा की सबसे छोटी कहानी बता दी

मीना- क्या कहूँ , शालिनी भाभी ने सुमन दीदी को बनाया है

पिताजी- हाँ , मेरी बेटी थी शालिनी

मीना- शालिनी भाभी की जितनी ततीफ़ की जाए उतनी कम है

पिताजी- अब तुम्हें शालिनी बनना है

मीना- मैं जैसी हूँ ठीक हूँ , आपको मुझे ऐसे ही अपनी बेटी बनाना होगा , क्यूँ कि कोई किसी के जैसा नही बन सकती ,

पिताजी- ठीक है , अब सुनो मैं ने तुम्हें ये सब क्यूँ बताया है

मीना- मेरे पति की कहानी आपने नही बताई

पिताजी- छोटू के बारे में सिर्फ़ छोटू जानता है फिर तुम्हारी सास ,

मीना- आप भी कुछ बता दीजिए बाकी मैं खुद पता कर लूँगी

पिताजी ने छोटू के बारे में जो पता था वो बता दिया

मीना- बाकी बाते उनसे पता कर लूँगी

पिताजी- छोटू किसी को कुछ नही बताता है

मीना- मैं पता कर लूँगी ,

पिताजी- तो सब कुछ पता कर लिया

मीना- अभी नही , अभी तो सिर्फ़ आधी बाते पता चली है

पिताजी- मैं ने पूरी बाते तो बता दी है

मीना- ये आपने बताया है , अब मैं नेहा नीता पूजा दीदी से उनकी कहानी सुनूँगी , और बाकी सब से ,

पिताजी- तुम्हें कोई कुछ नही बताएगा

मीना- मुझे पता है कैसे पूछना पड़ता है

पिताजी- वो बाद मे पता करना पहले ये तो सुन लो की मैं ने तुम्हें क्यूँ बताया है ये सब

मीना- बताइए क्या करना है मुझे ,

पिताजी ने जैसे सोचा था वैसा ही पाया

मीना डायरेक्ट पूछ रही है कि उसकी क्या करना है
 
फ्लॅशबॅक 1059

छोटी चाची 6

पिताजी ने इस घर के बारे में

इस फॅमिली के बारे में

इस घर के हर एक मेंबर के बारे में मीना को बता दिया

पिताजी ने ये सब क्यूँ बताया ये भी मीना को पता था

कोई बिना वजह इतना कुछ नही बताएगा

मीना समझ तो गयी कि उसे क्या करना है

पर वो पिताजी के मूह से सुनना चाहती थी कि उसे करना क्या है

.मीना कभी ये नही दिखती की वो स्मार्ट है ,, वो सब कुछ समझने के बात बात कटती है

पिताजी- मीना सच बताना , पूरी कहानी सुनने के बाद तुम्हें या पता चला

मीना- आपको रात भर जागना है तो मैं बता सकती हूँ

पिताजी- तुम बहुत स्मार्ट है , ऐसे जवाब देती हो कि ऐसा लगता है जवाब मिल गया है और तुमने कुछ बताया भी नही

मीना- आप बताइए आपको मुझसे क्या उमीदे है

पिताजी- पहली बात , तुम्हें मुझपे गुस्स आ रहा होगा

मीना- आप पे क्यूँ गुस्सा आएगा

पिताजी- क्यूँ कि मेरी वजह से तुम्हारी ज़िंदगी लहराब हो गयी ,, तुम ने अपने राजकुमार के बारे में कितने सपने देखे होंगे और मेरी वजह से

तुम्हे शादी सुदा आदमी से शादी करनी पड़ी

मीना- जो किस्मत मे लिखा होता है वही होता है , और मेरी शादी करने से सब को खुशी मिली है ,, और इस घर मे आकर मैं भी खुश हूँ

पिताजी- फिर भी कुछ लगता होगा वो बोल दो ,, आज अपने अंदर छिपे हुए गुस्से को बाहर निकाल दो

मीना- मुझे सिर्फ़ एक इंसान पे गुस्सा आ रहा है , वो है मेरी बहन , अगर उसने थोड़ी समझदारी दिखाई होती तो ऐसा कुछ नही होता

पिताजी- तो तुम्हें मुझसे कोई शिकायत नही है

मीना- अब वो आ जाएँगे अगर आपने बताया नही जल्दी तो

पिताजी- देखो तुम्हें क्या करना है वो तुम्हें कहानी सुनकर समझ गयी

मीना- समझ तो गयी पर आप क्लियर कर देते तो अच्छा होता

पिताजी- कुछ बात क्लियर ना हो यही अच्छा होता है

मीना- जी ,

पिताजी- फिर भी कुछ बाते बताता हूँ

मीना- जी

पिताजी- इस घर की परंपरा टूटने मत देना

मीना- मैं पूरी कॉसिश करूँगी

पिताजी- अगले मेले मे पूजा अवी करेगा

मीना- जी

पिताजी- तुम्हें जो करना है तुम कर सकती हो ,

मीना- कुछ भी

पिताजी- अवी इस घर का वारिस है , उसको वारिस बनाने तक तुम जो चाहोगी वो कर सकती हो

मीना- अगर हमे कुछ करना हो तो

पिताजी- हमे ?

मीना- आपकी बेटियाँ और आपकी बहू को मिलके कुछ करना हो तो

पिताजी- ये तो और अच्छा होगा

मीना- और अगर मुझे नेहा को रुलाना पड़े तो

पिताजी- उसकी ख़ुसीया उसे मिल जाए बस इतना चाहता हूँ मैं

मीना- मैं वादा करती हूँ , आपने जो कहा है वो सब पूरा करके दिखाउन्गी

पिताजी- शालिनी ने ऐसा वादा किया था

मीना- पता है मुझे

पिताजी- और कुछ पता करना हो तो ये रही जयसिंघ के घरों की चाबी

मीना- अगर अवी ठीक नही हुआ ओ

पिताजी- ज़रूर होगा ,

मीना- आप बेटी भी बोलते हो और प्राब्लम मे फसा रहे हो

पिताजी- इसी लिए तो तुम्हारी जगह अवी की माँ सुमन बनी है

मीना- समझ गयी , मैं इंतज़ार करूँगी

पिताजी- किस बात का इंतज़ार

मीना- उस समय का जब मैं अपनी चाल चलूंगी

पिताजी- जो करना है करना पर मुझे निराश मत करना

मीना- नही करूँगी और आपने जो सोचा भी नही वो करूँगी अवी के लिए
 
पिताजी- वैसे एक बात कहूँ

मीना- हाँ

पिताजी- तुम्हें किसी ने रोका या कुछ कहा तो मेरा नाम लेना

मीना- क्या मतलब

पिताजी- अगर मैं ना रहा और तुम्हें नेहा ने रोक दिया तो इतना कहना कि पिताजी यही चाहते थे

मीना- वो मैं मनेज कर लूँगी

पिताजी- वैसे तुम उस दिन रोई क्यूँ नही थी

मीना- किस दिन की बात कर रहे आप

पिताजी- आक्सिडेंट वाले दिन की बात कर रहा हूँ

मीना- मैं ने रोना छोड़ दिया है , बचपन से रोती आ रही हूँ

पिताजी- पर सब रो रहे थे फिर भी

मीना- आप क्यूँ नही रोए

पिताजी- मैं रो देता तो बाकियो को कौन संभालता

मीना- घर की बहू रोएगी तो घर को कौन संभालता

पिताजी- सीमा की जगह तुमसे शादी होती और तुम्हारा साथ शालिनी को मिलता तो ये दिन देखना नहीं पड़ता

मीना- मुझे भी शालिनी भाभी के साथ बाते करने का उनके साथ रहने दिख कर रहा है

पिताजी- जाने दो , वैसे छोटू की मदद की है तुमने खेतो के कामो मे

मीना- हाँ वो मुझे थोडा बहुत पता था तो बता दिया

पिताजी- ऐसे सबकी मदद करते रहना और यही बात अवी को सिखा देना ताकि शालिनी जैसा बन सके अवी

मीना- जी

पिताजी- अब तुम बाकियों से पता करो जो पता करना है

मीना- शाम ही गयी

पिताजी- हाँ , कहानी इतनी थी कि समय का पता नही चला

मीना- आप बेफिकर रहिए मैं आपका काम कर दूँगी

पिताजी- अगर मुश्किल लग रहा होगा तो रहने दो

मीना- नही ,, अवी को मैं ने भी अपना बेटा मान लिया है ऐसे मे पीछे हटने का सवाल ही नही आता

पिताजी- ये शालिनी ने सुमन को क्या बताया था 1 महीने मे मुझे भी नही चला पता पर आज सुमन सीमा और तुम्हें साथ साथ देख कर समझ

गया कि शालिनी ने क्या बताया होगा

मीना- शायद अब मुझे जाना चाहिए , वरना वो क्या समझेंगे कि मैं दोपेहर से आपके साथ कमरे मे क्या कर रही हो

पिताजी- तुम्हें क्या लगता है मैं भले मस्ती करता हूँ पर बाहर ही मस्ती करता हूँ , घर पे नही

मीना- मैं मज़ाक कर रही थी ,

पिताजी- जाओ अब , और कभी कुछ पूछना हो तो पूछ लेना , पर मेरे ज़िंदा रहने से पहले

मीना- मेरा ये वादा है कि आप नेहा और अवी को प्यार से रहते हुए देख कर भगवान के पास जाएँगे शालिनी भाभी माजी को ये बताने कि नीचे सब ठीक है

पिताजी- बाते अच्छी करती हो

और पिताजी मीना को बता दिया कि उसे क्या करना है

मीना ने भी बिना कुछ सोचे समझे पिताजी को वादा कर ही दिया

पिताजी मे पता नही कौनसा जादू था जो उनको कोई ना कहता ही नही था

मीना को अब सब कुछ पता चल गया था

मीना ने सही कहा उसको बाकियो से भी पूछना होगा इन सब के बारे में

पिताजी को विश्वास था कि मीना उनकी उम्मीद पे सही साबित होंगी

मीना मे कॉन्फिडेन्स था , उसने कहा कि वो अकेली नही सबके साथ मिलके ये काम करेगी

मीना काम करवा के लेने वालों मे से थी

मीना को काम मिलते ही वो काम मे लग गयी

उसी रात छोटू से उसकी कहानी पता करनी चाही पर ये मुश्किल था

एक पति अपनी पत्नी को सच नही बताता

फिर भी मीना ने हार नही मानी और पता करती गयी

सब से उनके बारे में पता कर लिया सिवाय छोटू के

पिताजी ने सही कहा था कि छोटू किसी को कुछ बताता ही नही है

जयसिंघ और छोटू दोनो एक जैसे थे

जयसिंघ ने तो शालिनी को सब कुछ वता दिया था

पर छोटू ने सुमन को बताया था कि नही ये यो नही पता पर सुमन ने भी मीना को कुछ नही बताया

सुमन और नेहा अवी को ख़याल रखने मे बिज़ी रहती थी

मीना ने घर की ज़िम्मेदारी अपने हाथो मे उठा ली थी

सब कुछ पहले की तरह चलने लगा
 
फ्लॅशबॅक 1060

अवी की हालत मे जल्द से जल्द सुधार लाना चाहते थे पिताजी.

पिताजी ने अवी को ठीक करने के लिए शहर2 को डॉक्टर को दिखाया.

पर हर तरफ से यही सुन ने को मिल रहा था की अवी को प्यार की ज़रूरत है.

सुमन दिन हो रात अवी का पूरा ध्यान राक रही थी.

नेहा भी अवी को देखने के लिए रोज आती थी.

गंतो अवी के पास बैठ कर बाते करती रहती थी. पर अवी के मूह से एक वर्ड भी नही निकलता था.

नेहा और सुमन अवी को इतना प्यार दे रहे थे कि जिसे देख कर पिताजी को लगता कि अवी जल्दी ठीक हो जाएगा .

हर कोई अपने तरफ से पूरी कोशिश कर रहा था.

कोई भगवान से दुआ माँग रहा था तो कोई डॉक्टर के पास जाकर इलाज़ ढूँढ रहा था.

नीता कभी जोकर बनके अवी को हसने की कोशिश करती तो कभी जोक सुनती.

पूजा भी अपने तरफ से जितना हो सके उतना कर रही थी.

अवी के आने से पिताजी ने राज की तरफ ध्यान देना बंद किया तो पूजा उदास हो गयी पर पहले अवी को ठीक करना ज़रूरी था.

पूजा डरा के अवी को ठीक करने की कोशिश कर रही थी तो नीता हसा कर

नेहा शालिनी भाभी के क़िस्से सुनकर अवी को ठीक करना चाहती थी.

सुमन अपने प्यार से अवी को ठीक करना चाहती थी.

मीना घर को देखते हुए अवी का ख़याल रख रही थी. उसके मेडिसिन का ध्यान रख रही थी.

सीमा सुमन की मदद कर रही थी.

पिताजी अवी के लिए बड़ा सा बड़ा डॉक्टर ला रहे थे.

रमेश ने आयुर्वैदिक का आइडिया दिया तो वो भी ट्राइ किया.

सुरेश और जतिन ने भी कुछ आश्रम मे पूछा कि कोई पुरानी ट्रीटमेंट है जो अवी को ठीक कर सकती है.

सब अवी के बारे में सोच रहे थे. ऐसे मे मीना माँ बनी कि नही इस्पे किसी का ध्यान नही था.

छोटू को लग रहा था कि पिताजी को पोता मिल गया .पर खुद बाप ना बन ने से वो अंदर ही अंदर दुखी था.

ऐसे दिन निकलते गये .पिताजी ने हवेली जाना बंद किया और ज़्यादा से ज़्यादा समय घर पे रह कर बिताने लगे.

ऐसे दिन निकलते गये .शालिनी को गये हुए 1 साल हो गया.

ऐसे मे एक दिन बारिश के दिनो मे अवी की हालत बहुत खराब हो गयी , सबको लगा कि अवी को ठंड लग रही है , सुमन और नेहा ने अपने बदन की गर्मी दे कर पूरी रात अवी के साथ सो कर बिताई.

उस दिन सुमन समझ गयी कि नेहा अवी से कितना प्यार करती है. पर वो दिखाने के लिए नफ़रत करती है.

सुमन ने ये बात किसी को नही बताई पर नेहा के साथ अवी को प्यार देने लगी.

ये बात सुमन और नेहा के अलावा किसी को पता नही थी.

उस रात के बाद अवी की हालत मे काफ़ी सुधार आ गया

अवी की हालत अच्छी होते हुए देख कर पिताजी को अच्छा लगने लगा.

अवी की हालत कभी अच्छी तो कभी खराब होने लगी.

सब को लगा कि अब अवी जल्दी ठीक हो जाएगा .

डॉक्टर ने अवी का चेकप किया और बता दिया कि हालत मे सुधार हो रहा है.

सुमन और नेहा ये बात सुनकर खुश हो गयी.

सुमन-नेहा.

नेहा-हाँ

सुमन-कल रात हम ने जो किया.

नेहा-मैं ने क्या किया.

सुमन-हम अवी को गर्मी देने के लिए उसके सोई थी ना

नेहा-कब ,मुझे तो याद नही है

सुमन-तू झूठ क्यूँ बोल रही है.

नेहा-मैं अवी के साथ ऐसा क्यूँ करूँगी. आप कुछ भी बोल रही है. मैं उस से नफ़रत करती हूँ

सुमन-समझ गयी.

नेहा-क्या

सुमन-तू शालिनी भाभी से बहुत प्यार करती है.

नेहा-मैं जा सकती हूँ

सुमन-हाँ, और तेरा सीक्रेट किसी को नही बताउन्गी.

नेहा-कुछ था ही नही तो क्या बताएगी.

अवी को देख कर पिताजी उसको अपने बचपन के किस्से सुना कर उसका दिल बहला रहे थे.

छोटू तो बाप ना बन ने से उदास था .ऐसे मे उसकी बीवी अवी के साथ ज़्यादा समय बिताने लगी.

छोटू ऐसे मे अपने दोस्तो के साथ रहने लगा.

छोटू का दोस्ता भोला नही रहा ऐसे मे छोटू और सरपंच का बेटा जो अब सरपंच बन गया था वो मंगला का ख़याल रखने लगे.

छोटू अपने दोस्त के साथ रह कर अपने गुम को छुपाने लगा.

पिताजी ने खेतो का काम छोटू को दिया था जिस पे मीना भी ध्यान रखने लगी.
 
फ्लश 1061

पिताजी कुछ हद तक नॉर्मल हुए

अवी की हालत मे काफ़ी सुधार आया है

सुमन और नेहा की प्यार अवी को ठीक कर रहा था

पिताजी ने अपनी फॅमिली के बारे में सोचना सुरू किया

अब वो कुछ ऐसा वैसा नही होने देंगे

पर इसी बीच पिताजी को एक ऐसा सच पता चला जिस से पिताजी सोच मे पड़ गये

एक दिन पिताजी अवी के लिए मेडिसिन लाने शहर गये थे

पिताजी मेडिसिन लेने के बाद पिताजी बस स्टॉप गये थे कि उनको एक आदमी ने आवाज़ दी

आदमी- योगेंद्रसिंघ

पिताजी ने पलट कर देखा

एक बूढ़ा आदमी उनको आवाज़ दे रहा था

पिताजी ने कभी उसको देखा नही था जिस से वी आगे जाने लगे

आदमी- योगेंद्रसिंघ ,

पिताजी इस बार रुक गये ,

पिताजी- कौन हो तुम और मेरा नाम क्यूँ ले रहे हो

आदमी- मुझे आप से बात करनी है

पिताजी- क्या मैं आपको जानता हूँ

आदमी- नही ,

पिताजी- तो अपने रास्ते जाओ

आदमी- मुझे आपसे एक बात बतानी है

पिताजी- मेरा दिमाग़ खराब मत करो ,, मुझे अपने गाँव जाना है

अवी की मेडिसिन ले जाना ज़रूरी थी

पिताजी ने उस आदमी को इग्नोर कर दिया

पिताजी अपनी बस की तरफ जाने लगे कि उस आदमी ने फिर से आवाज़ दी ,, इस बार पिताजी के पैर अपना आप रुक गये

आदमी- मुझे जयसिंघ के बारे में बात करनी है

पिताजी रुक कर पलट गये

आदमी- मुझे जयसिंघ के आक्सिडेंट के बारे में बात करनी है

पिताजी - क्या बात करनी है , और वो भी 1 साल बाद

आदमी- मैं बहुत दूर से आया हूँ , क्या हम बैठ कर बात कर सकते है

पिताजी- जो कहना है जल्दी कहो , मुझे मेडिसिन लेकर जाना है

आदमी- अगर आज आपने मेरी बात नही सुनी तो ज़िंदगी भर रोते रहेंगे

फिराजी- क्या बक रहे हो

आदमी- आपके बेटे का आक्सिडेंट नही मर्डर हुआ है

पिताजी ये सुनते ही शॉक्ड हो गये

जयसिंघ और शालिनी का आक्सिडेंट नही मर्डर हुआ था

पिताजी को अपने कानो पे विश्वास नही हो रहा था

पिताजी- मुझे मज़ाक पसंद नही

आदमी- मैं यहाँ जयपुर से आया हूँ , मैं मज़ाक करने तो नही आउन्गा

पिताजी- क्या पता है तुम्हें जयसिंघ के आक्सिडेंट के बारे में

आदमी - क्या हम बैठ कर बाते कर सकते है , मुझसे खड़ा नही रहा जाता , अभी अपनी बीमारी से ठीक हुआ हूँ

पिताजी उस आदमी को लेकर एक कॅंटीन मे चले गये

और 2 टी मॅंगा ली

पिताजी - कहिए क्या कह रहे थे

मुस्कान के पिताजी-मैं कब से आपको मिलना चाहता था

पिताजी - मुझसे मिलना चाहते थे , पर आप है कौन

मुस्कान के पिताजी-मैं जयपुर मे रहता हूँ ,

पिताजी - जयसिंघ भी जयपुर मे रहता था

मुस्कान के पिताजी-मैं सिर्फ़ एक बार आपके बेटे से मिला हूँ

पिताजी - आप जयसिंघ को जानते थे

मुस्कान के पिताजी-नही , जयसिंघ जहाँ रहता था उसके पड़ोसी मेरे पहचान के थे , जयसिंघ और मेरी मुलाकात जयसिंघ के पड़ोसी के यहाँ हुई थी

पिताजी - पर आप है कौन , और ये क्या बोल रहे थे कि जयसिंघ का आक्सिडेंट नही मर्डर हुआ है

मुस्कान के पिताजी-मुझे ऐसा लगता है कि जयसिंघ का मर्डर हुआ है

पिताजी - लगता है , मतलब आप को कुछ पता नही है

मुस्कान के पिताजी-मेरी बात सुनेगे तो आप भी सोचने लग जाएँगे

पिताजी - बताइए क्या कहना है आपको

मुस्कान के पिताजी-मुझे जयसिंघ ने बताया था की कुमार की शादी आपकी बेटी से होने वाली थी , और कुमार ने नेहा के साथ जबेरदास्ती करनी चाहिए

पिताजी - ये सब जयसिंघ ने बताया

मुस्कान के पिताजी-हाँ , पर मेरे सवाल का जवाब दीजिए

पिताजी - हाँ , पर इन बातों को जयसिंघ के आक्सिडेंट से क्या रिश्ता है

मुस्कान के पिताजी-बताता हूँ , कुमार से आपकी बेटी ने शादी करने से क्यूँ मना किया था

पिताजी - कुमार की पहले भी शादी हुई थी

मुस्कान के पिताजी-आपकी बेटी सही थी , मेरी बेटी से कुमार ने धोके से शादी की थी

पिताजी - क्या

मुस्कान के पिताजी-मेरी बेटी से शादी करने के बाद कुमार ने उसे मार दिया था ,, ये बात मैं ने जयसिंघ को बताई थी

पिताजी - कब बताई थी

मुस्कान के पिताजी- जयसिंघ के आक्सिडेंट के एक दिन पहले

पिताजी - तो जयसिंघ आपकी बात सुनकर यहाँ आ रहा था माफी माँगने , मतलब आप उसको कुछ नही बताते तो वो यहाँ नही आता और

एक्सीडेंट नही होता

मुस्कान के पिताजी-आप ग़लत समझ रहे है

पिताजी - तो सच क्या है

मुस्कान के पिताजी-मैं ने अपनी बेटी की कहानी बताई थी जयसिंघ को , और जयसिंघ को पता चला कि कुमार कैसा आदमी है , फिर जयसिंघ

ने कहा था की वो मेरी मदद करेगा मेरी बेटी को इंसाफ़ दिलाने के लिए

पिताजी - ये सब मुझे कुछ पता नही है , मेरे काम की बात बताइए , वरना मैं जा रहा हूँ

मुस्कान के पिताजी-अगर मैं कहूँ की जयसिंघ को कुमार ने मारा है तो

पिताजी - क्या बक रहे हो , कुमार तो फॉरेन मे है

मुस्कान के पिताजी-वो फॉरेन मे था ,

पिताजी - मतलब वो यहाँ है मैं उसे छोड़ूँगा नही नेहा के साथ जो किया उसका हिसाब उस से लेना है

मुस्कान के पिताजी-अब वो वापस विदेश गया है

पिताजी - आप मेरा दिमाग़ खराब कर रहे हो

मुस्कान के पिताजी-मैं सुरू से बताता हूँ

जयसिंघ को मैं ने कुमार का सच बताया ,

जयसिंघ को सच पता चलते ही वो कुमार को सबक सिखाने वाला था

उस दिन के दूसरे दिन ही जयसिंघ इस गाँव आने के लिए निकल पड़ा

और आक्सिडेंट हो गया जयसिंघ का

पिताजी - इस से तो पता चलता है कि जयसिंघ सोच मे डूबा हुआ था और कार चला रहा था कि आक्सिडेंट हो गया

मुस्कान के पिताजी-ये आपका अंदाज़ा है

पिताजी - हाँ

मुस्कान के पिताजी-मेरा अंदाज़ा क्या है सुनना चाहोगे

पिताजी - बताइए

मुस्कान के पिताजी-जयपुर और शहर के बीच मे शहर3 लगता है

पिताजी - हाँ

मुस्कान के पिताजी-कुमार का घर हाइवे पे है

पिताजी - मुझे नही पता

मुस्कान के पिताजी-मुझे पता है , कुमार का घर हाइवे से लग कर है

पिताजी - तो

मुस्कान के पिताजी-जयसिंघ को कुमार का सच पता चला था

पिताजी - आपने बताया था

मुस्कान के पिताजी-जयसिंघ को ये भी पता था कि कुमार वापस आया है

पिताजी - आपने ही बताया की कुमार वापस आया था

मुस्कान के पिताजी-जयसिंघ के आक्सिडेंट के दूसरे दिन ही कुमार वापस विदेश वापस चला गया

पिताजी - तो

मुस्कान के पिताजी-मेरे आदमियो ने बताया कि कुमार विदेश जाने से पहले हॉस्पिटल गया था , अजीत के मूह पर बेनडेज था

पिताजी - मेरी कुछ समझ नही आ रहा है

मुस्कान के पिताजी-जतसिंघ को सच पता चलना , कुमार का जयसिंघ के एक्सीडेंट के दूसरे दिन विदेश जाना , कुमार का डॉक्टर के पास जाना ,आपको शक नही हो रहा है

पिताजी - साफ साफ बताइए

मुस्कान के पिताजी- जयसिंघ को सच पता चला , वो गाँव के लिए निकल पड़ा , कुमार का घर हाइवे पे था तो जयसिंघ वहाँ रुका होगा , जयसिंघ ने कुमार और अजीत की फिराई की , और जयसिंघ गाँव के लिए निकल पड़ा , कुमार ने जयसिंघ से बदला लेने के लिए अपने

आदमियो को जयसिंघ का आक्सिडेंट करने को कहा होगा , जयसिंघ का एक्सीडेंट हो गया है , कुमार वापस विदेश चला गया , क्यूँ कि उसके लिए यही सेफ था ,

पिताजी - आपकी बातों ने मुझे सोचने पे मज़बूर कर दिया है

मुस्कान के पिताजी-मेरा दूसरा अंदाज़ा क्या हो सकता है पता है

पिताजी - बताई

मुस्कान के पिताजी-जयसिंघ को सच पता चला , जयसिंघ गाँव के लिए निकल पड़ा , रास्ते मे कुमार का घर पे रुका , कुमार की कंपनी मे अभी भी जयसिंघ के 40% शेयर है , तोजयसिंघ को सच पता चलते ही कुमार को दर लगने लगा कि जयसिंघ अपना हिस्सा माँग लेगा , जिस से

कुमार ने जयसिंघ का आक्सिडेंट करा दिया , जिसमे उसको भी चोट लगी हो फिर वापस विदेश चला गया

पिताजी - दोनो बाते सही लग रही है

मुस्कान के पिताजी-मैं कुमार को अच्छे से जानता हूँ , जयसिंघ के आक्सिडेंट के पीछे दोनो मे से कोई एक वजह होंगी

पिताजी - ऐसा है तो दोनो केस मे जयसिंघ का आक्सिडेंट नही मर्डर हुआ है

मुस्कान के पिताजी-हाँ

पिताजी - अगर ऐसा है तो कुमार को मैं मार डालूँगा

मुस्कान के पिताजी-पर ये सिर्फ़ अंदाज़ा है

पिताजी - क्या मतलब

मुस्कान के पिताजी-आपजो उस ट्रक ड्राइवर को ढूँढना होगा जिस से आक्सिडेंट हुआ था

पिताजी - उस ट्रक ड्राइवर से सच पता चलेगा , अगर ये सच हुआ तो उसके दूसरे दिन का सूरज नही देख पाएगा कुमार

मुस्कान के पिताजी-मैं तो कुमार को जैल मे डालना चाहता था पर जयसिंघ के मर्डर के

बाद यही चाहूँगा कि कुमार जिंदा ना रहे

पिताजी - अब तक मैं ने पोलीस के उपर छोड़ दिया था उस ट्रक ड्राइवर को ढूँढने का काम , लेकिन अब मैं खुद पता करूँगा , और पता

लगाउन्गा कि हुआ क्या था

मुस्कान के पिताजी-मैं आपके साथ हूँ , कुछ ज़रूरत पड़े तो मुझे याद करना

पिताजी - एक बात पुच्छू

मुस्कान के पिताजी-हाँ पूछिए

पिताजी - जयसिंघ के आक्सिडेंट को 1 साल हो गया और आप आज बताने आए है

मुस्कान के पिताजी-जयसिंघ के मिलने के बाद मुझे हार्ट अटॅक आया मैं बीमार था , जैसे ठीक हुआ तो जयसिंघ से मिलने गया था , पर वहाँ पता चला कि जयसिंघ मर चुका है , पहले तो मैं रिलॅक्स हो गया , पर दिमाग़ पे ज़ोर डालने पे ये दो अंदाज़ा लगा दिया , अब जो है वो आपने सामने है

पिताजी - अब बस उस ट्रकड्राइवर को ढूँढना होगा , मुश्किल है पर नामुमकिन नही है ,और अगर कुमार का हाथ हुआ ऐसा पता चला तो उसको पाताल से ढूँढ निकालूँगा

मुस्कान के पिताजी-उसे छोड़ना मत , मेरी बेटी के साथ उसने बहुत बुरा किया

पिताजी - बुरा ना माने तो आप मुझे बता सकते है कि क्या हुआ था आपकी बेटी के साथ

मुस्कान के पिताजी-इसमे बुरा मानने की क्या बात है

और मुस्कान के पिताजी ने सब कुछ बता दिया

मुस्कान की कहानी सुन कर पिताजी के आँख मे आसू आ गये

अछा हुआ नेहा की शादी कुमार से नही हुई वरना सब कुछ बर्बाद हो जाता

पिताजी ने मुस्कान के पिताजी को वादा किया कि भले ही जयसिंघ के आक्सिडेंट मे कुमार हाथ ना जो पर वो मुस्कान के लिए अपनी बेटी नेहा

के साथ जो किया उसका बदला लेकर रहेंगे ,,

बस उनका पता चले कि कुमार वापस आ गया है

मुस्कान के पिताजी-कुमार जिस दिन वापस आएगा मैं आपको बता दूँगा

इतना बोल कर मुस्कान के पिताजी वापस चले गये

पिताजी सोच मे पड़ गये

अब तो बस ट्रक ड्राइवर का पता लगाना होगा

अब पिताजी को सच जानना ही था ,,

जयसिंघ उनका बेटा था ,, जयसिंघ के गुनहगार को ऐसे छोड़ेंगे नही पिताजी , और कुमार से तो नेहा का बदला भी लेना था

पिताजी ने अपने आदमियो को उस ट्रक ड्राइवर की तलाश मे लगा दिया

पिताजी ने ठाकुर को भी बता दिया मुस्कान के पिताजी की बात

ठाकुरजी को सच पता चलते ही उन्हो ने अपने आदमियो के साथ साथ एंपी से बात करके पोलीस को भी वापस काम पर लगा दिया

अब इतने आदमियो के काम पर लगते ही काम आसान हो गया

पर बात पुरानी थी जिस से थोड़ा टाइम लग रहा था

कुछ महीनो बाद पिताजी को अच्छी खबर सुनाई दी

एक दिन पिताजी को उस ट्रक ड्राइवर के बारे में पता चला जिस ने कार को टक्कर मारी थी.

पिताजी ने उस ड्राइवर को ढूँढने के लिए अपने आदमी लगा दिए.

11/2 साल के बाद उस ड्राइवर का पता चला.

पिताजी ने सुमन को बता दिया कि वो ड्राइवर मिल गया है. जिसने आक्सिडेंट किया था वो उसी ड्राइवर के पास जा रहे है.

सुमन को लगा कि पिताजी ठाकुर के साथ गये होगे पर पिताजी अकेले गये थे.

पिताजी के जाने के 2 घंटे बाद ठाकुर किसी काम से घर आए तो सुमन को पता चला कि पिताजी अकेले गये.

सुमन ने ठाकुर को बता दिया कि पिताजी ट्रक ड्राइवर के पास गये है.

ठाकुर जल्द से जल्द पिताजी के पास जाना चाहते थे.

ठाकुरजी को पता था कि पिताजी उस ट्रक ड्राइवर को मारने गये है

सुमन ने मीना को जाने के लिए कहा

सुमन अवी को अकेला नही छोड़ना चाहती थी.

मीना समझदार थी .वो पिताजी को समझा कर ले आ सकती थी

ठाकुर मीना के साथ पिताजी को ढूँढने के लिए चले गये.
 
फ्लॅशबॅक 1062

मुस्कान के पिताजी ने जब से ये कहा कि जयसिंघ का आक्सिडेंट नही मर्डर हुआ है तब से पिताजी को नींद नही आ रही थी

पिताजी जब सोते तो उनको जयसिंघ का चेहरा दिखाई देता जो कह रहा है कि मेरे हत्यारे को छोड़ना मत

शालिनी कहती कि अवी की ऐसी हालत जिसकी वजह से हुई उसको छोड़ना मत

पिताजी को सोते जागते जयसिंघ और शालिनी के सपने आते

नेहा को देखते तो उस कुमार को मार डालने का दिख करता

पिताजी बहुत टेन्षन मे रहने लगे

पिताजी पहलवान थे , वो बर्दास्त ही नही कर पा रहे थे कि उनके बेटे का हत्यारा आज़ाद घूम रहा है

बस एक बार उस ट्रक ड्राइवर का पता चले

अगर कुमार इस मे शामिल है तो पिताजी उसको छोड़ेंगे नही

पिताजी को बस अब अपने बहू , अपने बेटे , नेहा के आँसुओ का बदला लेना था

जब तक पिताजी बदला नही लेंगे पिताजी को नींद नही आएगी

अब तो पिताजी दिन रात एक कर रहे थे उस ट्रक ड्राइवर की ढूँढने के लिए

इसी बीच मुस्कान के पिताजी ने आकर बताया कि कुमार वापस आ गया है

अजीत ने बताया था कि सब ठीक है यहाँ पर जिस से कुमार वापस आ गया है

कुमार के आने की खबर मिलते और एक खबर पिताजी को मिली

उस ट्रक ड्राइवर का पता चल गया है

पिताजी के आदमियो ने उस ड्राइवर को पकड़ के रखा था

पिताजी उस ड्राइवर के पास पहुँच गये.

पिताजी उस ड्राइवर से पूछने आए थे कि ये उसने किस के कहने पे किया है या अंजाने मे किया है

वो कुछ भी बोलेगा ,, फिर भी उसकी जान तो जानी थी

पिताजी उस ड्राइवर को किस भी कीमत पे छोड़ेंगे नही

हुआ भी ऐसा ही

पिताजी ने ड्राइवर को देखते उसके मूह पे एक जोरदार मुक्का मारा.

पिताजी-तेरी वजह से मेरा बेटा इस दुनिया मे नही रहा.

ड्राइवर-मैं ने जानबूझ कर नही किया, वो तो अचानक हो गया.

पिताजी-तेरी वजह से मेरा घर टूटा है ,तुझे जान से मार दूँगा.

ड्राइवर-मुझे माफ़ कर दो , मेरे बाल बच्चे है

पिताजी-उनके भी थे जिसका तूने आक्सिडेंट किया था.मारो इसे

इस ड्राइवर से कुछ पता नही चला

ऐसे मे पिताजी उस ड्राइवर को सज़ा देने का सोच रहे थे जयसिंघ के आक्सिडेंट की

पिताजी ने अपने आदमियो को उस ड्राइवर को मारने के लिए कहा. पिताजी के आदमी उस ड्राइवर को मारने वाले थे कि

ड्राइवर-मुझे जाने दो ,मैं बता दूँगा कि मुझे किसीने आक्सिडेंट करने को कहा.

पिताजी ये सुनते ही पलट गये .और उस ड्राइवर की गर्दन पकड़ ली .

पिताजी-क्या कहा तूने

ड्राइवर-मैं ने किसी के कहने पे वो आक्सिडेंट किया था.

पिताजी-किस के कहने पे किया था बोल वरना तेरी जान ले लूँगा.

ड्राइवर-कुमार साब के कहने पे किया था.

कुमार का नाम सुनते ही पिताजी गुस्से मे पागल हो गये.

पिताजी-कुमार को मैं जिंदा नही छोड़ूँगा

ड्राइवर-मैं ने बता दिया ,अब मुझे जाने दो

पिताजी ने कुमार का नाम सुनते ही गुस्सा मे थे ऐसे मे जब उनको पता चला कि कुमार ने उनके बेटे और बहू को मारा तब तो पिताजी को इतना समझमे आ रहा था की कुमार को जान से मारना है.

अपने बेटे के खून का बदला लेना. ऐसे मे पिताजी ने उस ड्राइवर को एक लट्ठ मार कर गिरा दिया.

ड्राइवर दर्द से तडप्ने लगा.पिताजी ने एक बड़ा पत्थर उठा कर उस ड्राइवर के चेहरे पे मार कर उसे उसकी ग़लती की सज़ा दी.

पिताजी ने एक पत्थर मे उसकी खोपड़ी तोड़ दी.

वहाँ खड़े पिताजी के आदमी पिताजी का गुस्सा देख कर डर गये.

ड्राइवर को मारते ही पिताजी वहाँ से चले गये .पिताजी के आदमी उस ड्राइवर को ठिकाने लगाने लगे.

पिताजी गुस्से मे थे ऐसे मे उनको रोकना मतलब जान से हाथ धोना था.

पिताजी को खून से लतपथ अपने बेटे और बहू का चेहरा दिखाई दे रहा था .

नेहा के आँसू और माँ की चीख सुनाई दे रही थी.

ऐसे मे पिताजी का खून लावे की तरह उबल रहा था.

पिताजी जब तक कुमार का खून नही देख लेते उनके कलेजे को ठंडक नही मिलेगी.

पिताजी अपने बेटा के खून का हिसाब पूरा करने के लिए शहर3 चले गये.

इधर ठाकुरजी और मीना पिताजी को इधर उधर ढूँढ रहे थे.

पिताजी के गुस्से के बारे में ठाकुरजी को पता था.

पिताजी गुस्से मे किसी की नही सुनते ,उनके गुस्से से पूरा गाँव काप उठता है.

ऐसे मे सिर्फ़ ठाकुरजी थे जो पिताजी का गुस्सा ठंडा कर सकते थे.

पर पहले पिताजी तो मिलने चाहिए.

पिताजी जहाँ जहाँ हो सकते है वहाँ वहाँ ठाकुरजी और मीना ढूँढ ने लगे.

ठाकुरजी को पिताजी का खास आदमी मिल गया जो ड्राइवर को ठिकाने लगा रहा था.

ठाकुरजी-योगेंद्रसिंघ कहाँ है

आदमी-पता नही.यहाँ से वो गुस्से मे गये.

ठाकुरजी-वो ड्राइवर कहाँ है

आदमी-उस ड्राइवर ने जयसिंघ का आक्सिडेंट करवाया था .कुमार के कहने पे

ठाकुरजीजी ने ड्राइवर को देखा. ड्राइवर की हालत देखते ही समझ गये की पिताजी का गुस्सा अपनी लिमिट क्रॉस कर चुका है.

ठाकुर-पूरी बात बताओ

आदमी-कुमार का नाम सुनते ही योगेंद्र सिंग गुस्सा हो गये और इसको मार डाला

ठाकुरजी-कब गया योगेंद्र यहाँ से

आदमी-काफ़ी समय हो गया.

ठाकुरजी समझ गये कि पिताजी कुमार से अपने बेटे का बदला लेने गये है.

पिताजी जो करने गये थे उसमे उनकी जान को भी ख़तरा हो सकता था.

पिताजी को कुमार के पास जाने से रोकना था वरना पिताजी बीच मे आने वाले सब को मार डालेंगे

ठाकुरजी-मीना चलो जल्दी ,हमे योगेंद्र को रोकना होगा.

मीना-पिताजी कहाँ है

ठाकुरजी-उनको पता चल गया है कि जयसिंघ को कुमार ने मारा है.

मीना-क्या

ठाकुरजी-हमे जल्द से जल्द योगेंद्र के पास जाना होगा.

मीना-चलिए जल्दी.

ठाकुरजी और मीना ,पिताजी को रोकने के लिए शहर3 की तरफ जाने लगे.

मीना भगवान से दुआ माँग रही थी कि पिताजी ठीक हों

ठाकुरजी कार को हवा मे उड़ाते हुए जल्द से जल्द पिताजी के पास जाना चाहते थे.
 
फ्लॅशबॅक 1063

इधर पिताजी ने कुमार के घर का पता लगा लिया.

पिताजी कुमार के घर मे गुस्से से जाने लगे थे कि वॉचमन ने उनको रोक दिया.

पिताजी के गुस्से के बारे में उसे पता होता तो वो ऐसा कभी नही करता.

पिताजी ने एक जोरदार मुक्का मार कर वॉचमन को बेहोश कर दिया.

पिताजी को अब तभी शांति मिलेगी जब कुमार का खून देखेंगे

जब कुमार लाश देखेंगे तब पिताजी का गुस्सा ख़तम होगा

पिताजी के रास्ते मे अब जो आएगा उसे पिताजी के गुस्से का सामना करना होगा

चाहे फिर वो कोई भी क्यूँ ना हो

कुमार ने बहुत दर्द दिए है पिताजी को , इस फॅमिली को , उसको अब पिताजी जीने नही देंगे

पिताजी ने वॉचमन को एक मुक्के मे तारे दिखा दिए

और एक जोरदार लात मार कर घर का डोर ओपन किया.

डोर की आवाज़ सुनते ही कुमार और उसकी बीवी ने डोर की तरफ देखा.

डोर पे पिताजी को देखते ही कुमार की पेशाब निकल गयी.

कुमार को पिताजी के गुस्से के बारे में शादी के समय पता चल गया था.

पिताजी के शादी मे मारे हुए थप्पड़ कर दर्द आज भी कुमार महसूस करता था. उस दर्द से कुमार की हालत खराब हो जाती थी

पिताजी को ऐसे गुस्से मे देख कर कुमार समझ गया कि पिताजी को पता चल गया होगा कि जयसिंघ को उसने मारा है

कुमार ने विदेश से वापस आकर ग़लती कर दी

अब तो उसकी लाश जाएगी नरक मे

कुमार को डोर पे पिताजी के रूप मे यमराज दिख रहा था

पिताजी ने कुमार को देखते ही गुस्से से आउट ऑफ कंट्रोल हो गये.

और अपनी कमर मे रखा हुआ चाकू निकाल कर कुमार की तरफ फेक कर मारा.

कुमार ने चाकू से बचने के लिए अपनी बीवी को अपने सामने किया.

चाकू कुमार की बीवी को लगा. कुमार की बीवी के पेट मे चाकू जाते ही वो दर्द से तडपने लगी

कुमार ने अपने बीवी को वही फेक दिया और अपने बेडरूम की तरफ भागने लगा.

कुमार ने अपनी बीवी को सामने करके उसे मार दिया जिस से पिताजी का गुस्सा और बढ़ गया.

पिताजी कुमार की बीवी को मारना नही चाहते थे.

कुमार पे इतना गुस्सा आ रहा था कि पिताजी ने टेबल का ग्लास एक मुक्के मे तोड़ दिया

कुमार की वजह से एक औरत पिताजी के हाथो से मारी गयी

एक पहलवान के लिए ये बहुत बड़ी बात होती है कि उसने एक औरत जो मारा है

पिताजी का गुस्सा अब और बढ़ गया

कुमार ने अपनी बीवी को बीच मे लेकर ग़लती कर दी

और पिताजी उपर कुमार के पास जाने लगे

कुमार अपने कमरे मे गन लेकर पिताजी का इंतज़ार कर रहा था

कुमार ने डर के मारे हाथ पैर काप रहे थे. गन होते हुए उसकी हालत खराब थी.

पिताजी के कमरे मे आते ही कुमार ने पिताजी की तरफ गन कर दी.

कुमार-आगे मत आना वरना मैं गोली मार दूँगा

पिताजी-गोली क्या तुझे मेरे हाथ से आज कोई नही बचा सकता

कुमार-मैं गोली मार दूँगा.चले जाओ यहाँ से

पिताजी-मार ,अगर मैं बच गया तो तू मरेगा ,या फिर मुझे मार कर खुद को बचा.

कुमार-मैं मार दूँगा, मुझे डरपोक मत समझो

पिताजी ने कुमार की तरफ छलाँग लगा दी .और कुमार ने गोली चला दी.

गोली पिताजी के पेट पे लगी. और पिताजी नीचे गिर गये थे

कुमार-मैं ने कहा था. मार दूँगा. जैसे तेरे बेटे को मारा वैसे तुझे मारूँगा.

और कुमार ने पिताजी के पेट पे लात रख कर दूसरी गोली चलाने वाला था कि पिताजी उठ गये.

पिताजी के उठने से कुमार गिर गया और गन उसके हाथ से दूर जाकर गिरी

पिताजी-मेरे बेटे को मारा तूने ,अगर मर्द की तरह मेरे बेटे को सामना करता तो मैं तुम्हें छोड़ देता. पर तूने जयसिंघ की पीठ मे छुरा घुसाया है.इसकी सज़ा तुझे दे के रहूँगा

कुमार-मुझे माफ़ कर दो

कुनार के हाथ मे गन थी तो वो शेर था

गन दूर जाते वो भीगी बिल्ली बन गया

पिताजी से भीक माँगने लगा

पिताजी-तुझे तो सिर्फ़ भगवान माफ़ करेगा. और मैं तुझे उसकी के पास भेजने वाला हूँ

और पिताजी ने कुमार के मूह पे जोरदार लात मारी. पूरी ताक़त लगा कर लात मारी थी जिस से कुमार के दाँत टूट गये.

पित्स्जी-मेरी बेटी पे हँस रहा था ना अब हसके दिया

कुमार तडप ने लगा

कुमार पिताजी से भीक माँगने लगा

कुमार-मुझे माफ़ करदो

पिताजी-इसी हाथ से मेरी नेहा को छुआ था ना, इसी हाथ से जयसिंघ की पीठ मे छुरा घुसाया था ना.

पिताजी ने कुमार का हाथ बेड पे रख कर .हाथ के जॉइंट पर लात मार कर कुमार का हाथ तोड़ दिया.

कुमार की चीख इतनी दर्दनाक थी कि जयसिंघ को भी सुनाई गयी होंगी

दूसरे हाथ को भी उसी तरह तोड़ दिया. कुमार दर्द से चीखने लगा था.

कुमार-बचाओ बचाओ

पिताजी-तुझे आज मुझसे भगवान भी नही बचा सकता.

और पिताजी ने कुमार के पेट पे लात मुक्के मारने सुरू किए.

कुमार अपनी जान की भीख माँगने लगा.

कुमार तडप रहा था दर्द से

कुमार के मूह से निकल रही हर एक एक चीख पिताजी के कलेजे को सुकून दे रही थी

पिताजी-मेरी बेटी पे बुरी नज़र रखी थी ,मेरी बहू को गंदी नज़र से देखता था ना.

और पिताजी ने कुमार की आँख मे अपनी उंगली डाल दी.

2 उंगली कुमार की आँखो मे डाल कर उसकी आँख बाहर निकाल ली.

कुमार दर्द से तड़प रहा था अपने हाथ पैर पटक रहा था

कुमार को इस तरह तडप्ते हुए देख कर पिताजी की आँख जो गुस्से लाल हो चुकी थी उनको कुमार को तडप्ते हुए देख कर सुकून मिल गया.

पिताजी-और चिल्ला ,तेरी आवाज़ मेरे बेटे को सुनाई देनी चाहिए

और पिताजी लगातार कुमार को मार रहे थे

पिताजी ऐसे आसानी से मारने नही आए थे कुमार को

कुमार से हर एक चीज़ का बदला लेना था

नेहा माँ जयसिंघ शालिनी अवी और मुस्कान की मौत का बदला लेना था

कुमार की एक एक चीख सुननी थी पिताजी को

कुमार को इतना दर्द देना था कि उसे पता चले कि उसने क्या किया है

अगला जनम लेने से पहले कुमार दस बार सोचे इतना दर्द दे रहे थे पिताजी

पिताजी-मेरी बेटी के साथ ज़बरदस्ती करना चाहता था ,इस लंड को तो उखाड़ कर फेक दूँगा.

पिताजी ने कुमार के लंड पर इतनी जोरदार लात मारी की कुमार के लंड की जान निकल गयी

कुमार ने कभी सोचा नही था ऐसी मौत उसे मिल रही थी.

कोई कमज़ोर दिल का ये देख ले तो हार्ट अट्क से मार जाए

पिताजी जिन्होने कभी अपनी बेटियो पर हाथ नही उठाया उनकी आँख मे आँसू लाए थे कुमार ने

उस कुमार से एक एक दर्द का बदला ले रहे थे

पिताजी कुमार को तड़फा तडपा के मार रहे थे .जितनी नेहा दर्द मे रोई थी.जितने दिन जयसिंघ सब से दूर रहा

पिताजी ने कुमार की चीखे इतनी निकाली कि सुन ने वाला सुन की शक्ति खो दे .

पिताजी ने कुमार को मरने नही दिया

पिताजी-इस ज़ुबान से मेरी बेटी का नाम लिया था ना.इस गंदी ज़ुबान से

पिताजी ने कुमार की जीभ बाहर निकाल कर नीचे से उसके जबड़े पे वॉर किया कुमार के दाँतों मे उसकी जीभ फस गयी

अब तो कुमार ऐसे तडप रहा था कि उसको जल्दी जान से मार दे

मौत भी नही आ रही थी कुमार को

मौत भी कुमार को दर्द देना चाहती थी

कुमार दर्द से बचने के लिए खुद को जान से मार डालने को भी नही कह सकता था.

पिताजी ने अपना बेल्ट निकाल करकुमार की खाल निकालनी सुरू की.

पिताजी ने कुमार के बदन के हर एक हिस्से से खून निकाला.

पहलवान को गुस्सा दिलाने का यही नतीज़ा होता है

कुमार का खून देख कर पिताजी खुश होकर पागलो की तरह कुमार को बेल्ट से मारते गये

कुमार इतना दर्द झेलने के बाद कैसे जिंदा रह पाता

पिताजी ने कुमार को बेल्ट से मार मार कर उसकी जान निकाल दी

कुमार मर गया फिर भी पिताजी उसको मारते गये

पिताजी पागल हो गये थे.

पिताजी-देखो जयसिंघ मैं ने तुम्हारे हत्यारे को मार डाला.

पिताजी पागलो की तरह हँस रहे थे .और कुमार को मारना बंद नही किया .उसको लगातार बेल्ट से मार रहे थे.

पिताजी-जयसिंघ तेरे हत्यारे को मार दिया ,देख तेरी बहन के गुनहगार को मार डाला.देखो बहू हमारे अवी की ऐसी हालत करने वाले के साथ मैं ने क्या किया

पिताजी इतना कह कर रोने लगे

कुमार मर चुका था.

पिताजी कुमार की मौत पे हंस रहे थे और जयसिंघ के लिए रो रहे थे

पिताजी ने कुमार को मार दिया. और जयसिंघ को बता रहे थे कि उसके हत्यारे को मार डाला है
 
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