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रंगीन रातों की कहानियाँ

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मेरा मूह तकिये मे घुसा हुआ था. राजू ने फिर पुश किया. मुझे साफ लगा कि लंड मेरी गंद मे जा रहा है. पर मैं चिल्लाई न्ही. इसी तरह पुश करते करते 5 मिनिट बाद राजू रुक गया. मेने पूछा क्या हुआ तो उसने मेरा एक हाथ मेरी गंद पर रखवाया . मेने महसूस किया कि राजू का लंड न्ही मिल रहा है. उसके लंड की बाल तो टच हुई पर लंड न्ही मिला.

राजू ने कहा- सायरा,, आज तूने पूरा लंड ले लिया है. सारा तेरी गंद के भीतर है,

मैं- क्या? पूरा 8 इंच चला गया?

राजू- हां सायरा. इतने दिन की मेहनत आज सफल हुई. इसी तरह एक दिन चूत मे भी जाएगा.

मैं- ह्म्‍म्म भैया, अब क्या करना है.

राजू- तुझे कुछ नही करना, मुझे करना है.

कहकर राजू ने मेरी गंद मारनी शुरू की. उसके धक्को से मेरा पूरा सरीर हिल रहा था. 15/20 मिनिट बाद उसने जूस गंद मे निकाला और लंड बाहर खींच लिया. फिर मुझे किस किया और प्यार किया.15/20 दिन बाद तो अब बिना तकलीफ़ के मेरी गंद चुदने लगी, अब तो राजू बैठा रहता और मैं उसके लंड पर बैठ जाती और लंड भीतर चला जाता. खूब चुदाई होती. इस बीच मेरे एग्ज़ॅम हुए, अच्छे नंबर आए. अम्मी बहुत खुस हुई.

राजू को शुक्रिया कहा और मुझे और भी मन लगा कर ट्यूशन करने को कहा. एग्ज़ॅम के बाद छुट्टी हो गयी . विंटर सीज़न था. राजू ने पिक्निक का प्रोग्राम बनाया.अम्मी को बताया कि सब बच्चो को पिक्निक पर ले जाएगा वो. अम्मी राज़ी हो गयी. 40 किमी दूर झरना था, वहाँ जाना था सबको. हमारे यहा टोटल 5 बच्चे थे चाचा ताऊ मिला कर, राजू के पास इडिका कार थी. राजू ने मुझे फ्रॉक पहनने को कहा. फिर हम पिक्निक को निकल पड़े.

कार छ्होटी थी. हम 6 प्लस ड्राइवर. जगह कम लग रही थी. राजू ने मुझे अपनी गोदी मे आने को कहा जिससे सब आराम से बैठ गये.मैं राजू की गोदी मे थी. थोड़ी देर बाद राजू ने मेरी फ्रॉक मे हाथ घुसाया और पैंटी नीचे खिचने लगा. मेने थोड़ा सा उठकर ये होने दिया. राजू ने पॅंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर कर लिया. ठंड थी, हम शॉल ओढ़ के बैठे थे. किसी को कुछ मालूम न्ही क्या हो रहा था मेरे साथ.

राजू की लंड को पकड़ा, एकदम टाइट. थोड़ा सा उठ कर अपनी गंद पर लगाया. धीरे धीरे लंड पूरा गंद मे चला गया.अब मैं राजू के सहारे पीठ लगा कर बैठ गयी. राजू मेरी छाती दबा रहा था अब मेरी छाती पर उभार आने लगा था, राजू वो ही दबा रहा था. अब सफ़र का आनंद आने लगा था. पूरे रास्ते इसी तरह बैठी रही. जब झरना आ गया तो मैं उठी. लंड भी खिचता हुआ बाहर निकल गया, राजू ने उसको ज़िप मे डाला और हम उतर गये.

झरने मे मेरे अलावा सब बच्चे किनारे पर नहाते रहे. मुझे राजू थोड़ा भीतर ले गया. मेने पैंटी तो पहनी न्ही थी. राजू ने भी टवल उतार के अपने गले मे डाल लिया. मेने पानी के भीतर राजू का लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी. वो टाइट हो गया. मेने लंड की तरफ पीठ कर दी. राजू ने मेरी कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी गंद मे घुसा दिया. पानी मे मेरी गंद मारी जा रही थी. किनारे पर मेरी छ्होटी बहन शबनम ने हमे पानी मे देखा.

शबनम- बाजी, वहाँ क्या कर रही हो?

मैं- स्विम्मिंग सीख रही हूँ. राजू भैया सिखा रहे हैं.

शबनम- मुझे भी सीखनी है स्विम्मिंग.

राजू- अभी सायरा को सीखा रहा हूँ. आधा सीखा है इसने.

मैं झूठे ही हाथ चलाने लगी. पीछे राजू दनादन पंपिंग कर रहा था. शबनम को यही लगा होगा कि राजू स्विम्मिंग सीखा रहा हे. अब राजू ने मुझे पानी मे सीधा लिटा दिया. मेरी कमर को पकड़ा. मेरे पैर अपने कंधे पर रखे और चोद्ने लगा. शबनम ने देखा.

शामनाम- बाजी, ये कैसी स्विम्मिंग है?

मैं- क्यू क्या हुआ.

शबनम- तुम सीधी लेटी हुई हो, तुम्हारे पैर भैया के कंधे पर हैं.

मैं- ये नयी स्टाइल की स्विम्मिंग है.

राजू- हां शबनम, ये स्टाइल मे बहुत मज़ा आता है.

शबनम- अच्छा बाजी.

आधे घंटे तक मेरी गंद मारने क बाद जूस निकल गया. हम दोनो अलग हुए, राजू ने टवल लपेट लिया. हम दोनो बाहर आ गये. शबनम ज़िद करने लगी कि उसको भी पानी के बीच जाना है एक बार. राजू उसको मजबूरी मे ले गया. वहाँ राजू ने शबनम को पानी पर उल्टा लेटा दिया और उसके पेट के नीचे हाथ रख कर उसको स्विम्मिंग सिखाने लगा. दूर से तो यही दिख रहा था. शबनम थोड़ी मोटी थी.

मैं अपने कपड़े चेंज करने लगी और नाश्ता लगाने की तैयारी मे लग गयी. राजू ने एक हाथ शबनम की छाती पर और दूसरा उसकी चूत पर रख कर उसको पानी पर टीकाया हुआ था. एक बार शबनम का बॅलेन्स खराब हुआ, वो पानी मे डुबकी लगाने लगी, फिर राजू का सहारा पा कर ठीक हो गयी. पर उसके दोनो हाथ पानी मे थे. आधे घंटे बाद राजू और शबनम बाहर आ गये.

हमने नाश्ता किया. थोड़ा हसी मज़ाक किया. फिर वापस घर को चले. रास्ते मे राजू ने कहा- शबनम की चूत तेरे से ज़्यादा फूली हुई और मोटी है.. मेने पानी मे चेक किया. जब एक बार उसका बॅलेन्स बिगड़ा तो वो मेरे लंड को पकड़ का संभली थी. उसको मालूम न्ही हुआ कि उसने क्या पकड़ा है. वो काफ़ी देर तक उसको पकड़े रही. शायद उसको न्ही मालूम वो क्या पकड़ी थी.

मैं- भैया आज मज़ा बहुत आया, पानी मे काफ़ी अच्छे से गंद मारी आपने.

राजू- एक आध दिन मे मैं तुम्हारी चूत की चुदाई करूँगा.

मैं- क्या??? लंड चला जाएगा उसमे.?

राजू- ट्राइ करेंगे. देखना वहाँ ज़्यादा मज़ा आएगा.

मैं- ह्म्‍म्म, कब करेंगे?

राजू- आज तो शायद टाइम न्ही मिलेगा.. कल तैयार रहना.

मैं- ओके भैया.

नेक्स्ट डे राजू ने मुझे नंगा करके मेरी चूत की खूब मालिश की. खूब फिंगर की. आयिल लगाया. मुझे पीठ के बल लिटा दिया. कमर के नीचे तकिया लगाया. मेरी चूत उपर हो गयी. मेरे दोनो पैरो को फैला कर दूर किया जिससे मेरी चूत फेल गयी. अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा. कहा

राजू- सायरा चिल्लाना नही, दर्द हो तब भी, समझ ले ये तेरा एग्ज़ॅम है.

मैं- ओक भैया, पर कुछ होगा तो नही ?

राजू- नही, बस जैसा मैं कहता जाऊ वेसा करते रहना. देखना पूरा लंड जाएगा भीतर.

राजू मेरे उपर झुका, मेरे कंधे पकड़े और लंड को पुश किया, लंड भीतर घुसा. और पुश, और भीतर. और पुश, मुझे दर्द होने लगा पर मैं चिल्लाई नही. गर्दन उठा कर लंड को धीरे धीरे भीतर घुसते देखती रही. काफ़ी दर्द हुआ. एक वक़्त ऐसा आया कि पूरा 8 इंच लंड भीतर समा गया. अब राजू रुक गया. जब दर्द कम हुआ तो उसने चोद्ना शुरू किया.. थोड़ी

देर बाद रियल मे मज़ा आने लगा.अब तो मैं भी अपनी कमर नीचे से उठा उठा कर लंड भीतर लेने लगी. राजू मेरी कमर पकड़े हुए था और ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था. करीब 25 मिनिट की चुदाई के बाद राजू के लंड ने जूस छोड़ा. बहुत मज़ा आया.

तो दोस्तो ये थी मेरी पहली चुदाई. आशा करती हू कि आपको मेरी चुदाई पसंद आई होगी..

 
मेरी चूत की प्यास बुझाओ



हल्लो दोस्तो कैसे है आप लोग बहुत सारे मैल मिले जिनमे मेरी कहानियों की

तारीफ थी मैं आप सबका खुल्ले दिल और खुल्ली चूत के साथ सुक्रिया अदा करती

हूँ आप सबको पता होना काहिए कि आज मैने अपनी चूत के बॉल सॉफ किए है और अब

फिर से मेरी चूत तनटना गयी है किसी कोरी कमसिन लड़की की तराह हां तो

दोस्तों अब मैं अपनी कहानी सुरू करती हूँ जिसमे एक बार फिर से अब्बू और

भाई ने मुझे चोदा उस दिन हुआ ये था कि मैं बहुत चुदासि थी और अम्मी नानी

के घर गयी हुई थी ये तो आप लोग जानते ही है कि मेरी फ्ली चुदाई भी अब्बू

ने ही की थी और फिर अम्मी ने भाई से भी चुदवाया था और अब.

वो लोग अक्सर मुझे चोदा करते थे मगर इधर बहुत दिन से अब्बू अम्मी की फैली

हुई चूत मे मस्त थे और भाई ने कोई 2सरी ग़/फ फसा ली थी और मुझपे ध्यान

देना छोड़ ही दिया था तब आख़िर अम्मी के बाहर जाते ही मैने सबसे पहले

अपनी झाँते बनाई और रात को अब्बू के रूम मे गयी अब्बू कोई मूवी देख रहे

थे और मुझे देख कर बोले बेटी क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई

तब मैने कहा आप तो अम्मी जान की चूत मे ही फसे रहते है अब आपको मेरा ज़रा

भी ख्याल नही आपने मुझे कितने दिनो से नही चोदा है तब अब्बू ने दुलार

जताते हुए कहा ऊऊओह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा आज तुझे फिर से चोद्ता हूँ

और ये कह कर उन्होने डी.वी.डी चेंज कर दी अब उसमे एक बी/फ चलने लगी जिसमे

एक 14 साल की लड़की को 5 आदमी चोद रहे थे जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ

गयी और मैने अब्बू से कहा अब्बा ये बच्ची इन 5चो को एक साथ झेल रही है और

उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी एज भी अभी ज़्यादा नही 14...15 साल

की होगी तब अब्बू बोले मेरी बच्ची ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते है

साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कैसे मज़े ले..लेकर 5.

5 लंडों का मज़ा एक साथ ले रही है जबकि इसमे एक इसका बाप और एक भाई के

अलावा 3बाहर वाले है अब ये सब देख कर भला मेरी चूत मे ख़ाज़ क्यूँ नही

उठती तब मैने अब्बू से कहा अब्बू मैं तो आप और भाई से ही चुदवा कर पनाह

माँग जाती हूँ तब अब्बू ने कहा जा बगल के रूम से आफ़ाक़ को बुला ला साला

लंड पकड़े सो रहा होगा तब मैं भाई के रूम की तरफ बड़ी और देखा तो सच मे

वो अपने लंड को हाथ मे लेकर सदका मार रहा था मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली

हाय भाय्या क्या ग़ज़ब कर रहे हो भला घर मे इतनी खूबसूरत बहन होते हुए

तुम्हे ये सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पे और मैने झट से उनका लंड

अपने कोमल हाथ मे ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी...जल्दी

हाथ आगे पीछे करने लगी और फिर झट से मूह मे लेकर चूसने लगी और तब भाई का

लंड पूरी औकात मे आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए ज़ोर ज़ोर से

धक्का मारने लगे और फिर जल्दी ही उनका पानी मेरे मूह मे गिरा जिसे मैं

छपार, छपार करते हुए चाट गयी और भाई से बोली चलो अब्बू बुला रहे है आज

फिर से तुम 2नो मुझे चोद्कर मज़ा दो और भाई को नंगा ही उनका लंड पकड़ कर

अब्बू के रूम मे ले आई और भाई को देखते ही अब्बू बोले मैने कहा था साला

मूठ मार रहा होगा तब मैने कहा अब्बू आप बहुत तजुर्बेदार है सच मे भाई

सदका मार रहे थे और फिर मैने अब्बू का लंड अपने मूह मे ले लिया और भाई

पीछे से मेरी गांद पे अपना लंड रगड़ते हुए अंदर डालने की कोसिस करने लगे

तब मैने कहा अब्बू जी मैं भी बी/फ वाली लड़की की तरह 5 जन से एक साथ ही

चुदाना चाहती हूँ तब अब्बा ने कहा बेटी तू नही झेल पाएगी एक साथ 5.को

मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासि हो ही चुकी थी मैने कहा कान खोल के सुन लो

आप 2नो मुझे 5जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है अगर कल आप लोग ने मुझे

5 जान से नही चुदवाया तो बहुत बुरा होगा तब अब्बू ने कहा अच्छा अच्छा

मेरी रानी बेटी मैं तो तेरे भले के लिए ही कह रहा था अगर तेरी चूत फट गयी

तो परेसानि तो हमी लोगों को होगी मगर जब तू नही मान रही तो मेरी बला से

अब चल आज तो हम दोनो से चुदवा ले और ये कह कर उन्होने फिर से अपना मूसद

जैसा लंड मेरे मूह मे जोरदार धक्के के साथ अंदर धकेल दिया और तभी भाई ने

पीछे से मेरी गांद फैलाकर इतनी ज़ोर से धक्का मारा की मुझे नानी याद आ

गयी उउउइई माआअ मर गयी आआहह भाई ज़रा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद

दिला रहा है तब अब्बू ने कहा बेटी चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना

ले तब मैने कहा क्यूँ तब अब्बू बोले तेरी नानी की चूत मैने मारी थी और कई

साल तक मैं उसकी चूत चोद्ता रहा था तब मेरे साथ साथ भाई का मूह भी खुला

रह गया तब भाई ने कहा अब्बू क्या आपने नानी को चोदा है तब अब्बू ने कहा

हां यार साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी

की कम उमर मे शादी हुई थी जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी

अम्मी 16 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 30 साल की थी मगर मेरे ससुर की

उमर करीब 40साल थी वो तुम्हारी नानी को खुस भी नही कर पाता था जाने भी दो

इन बातों को अभी तो फिलहाल चुदाई का मज़ा लो उसकी चुदाई के बारे मे फिर

कभी बताउन्गा और तब भाई पीछे से मेरी गांद मार रहे थे और अब्बू आगे मेरे

मूह मे अपने लंड को धक्के लगा रहे थे अब मुझे भी मस्ती आने लगी.

और मैं अपने मूह और गांद को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब

भाई झाड़ गये थे मगर अब्बू जी अभी भी नही झाडे थे और उन्होने मुझे बेड पे

खड़ा होने को कहा मैं खड़ी हो गयी और तब अब्बू ने मेरे दोनो पैर अपने

कंधे के दाए...बाए करे और मेरी चूत को मूह मे भर कर चूसने लगे मैं बुरी

तरह तप रही थी और अपने अब्बू का मूह ज़ोर... ज़ोर से अपनी चूत पे दबाने

लगी तब ही अब्बू खड़े होने की कोसिस करने लगे और मेरा बॅलेन्स बिगड़ने

लगा तब मैने घबरा कर कहा आआआअहह अब्बू क्या कर रहे है मैं गिर जाउन्गि

मगर अब्बू नही माने और वो मुझे अपने कंधे पे बैठा कर खड़े हो गये अब मैं

अपनी 2नो टांगे उनकी गर्दन मे कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके

मूह से दबाते हुए उनके सिर को भी ज़ोर. ज़ोर से दबा रही थी और भाई आँख

फाडे हुए अब्बू के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमे भी बहुत

आ रहा था इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद

ही मैं ऊऊओ ऊओह आआहह करते हुए झाड़ गयी और अब्बू का रस भी नीचे से

पिचकारी की तराह बह गया और तब अब्बू मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लिटा कर

तुरंत अपने झाडे हुए लंड को मेरे 2नो चूचियों के बीच मे रगड़ने लगे और

मैं उनके नोक की तराह लंड की टोपी को मूह मे लेने की कोसिस कर रही थी पर

अब्बू जल्दी, जल्दी आगे पीछे कर रहे थे तब मैने कहा अब्बू अपना लंड मेरे

मूह मे दीजिए आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है तब अब्बू ने अपने

लंड को 2नो चूची के बीच से मेरे मूह मे डाल दिया और मेरी चूची को दबाने

लगे और इस तराह से उनके लंड से थोड़ा सा रस.

और निकला जिसे मैं चाट गयी और फिर अब्बू ने अपना लंड मेरी गांद मे धासा

दिया और उस दिन अब्बू और भाई 2नो ने मेरी गांद ही मारी थी मेरी बुर के

साथ कोई हरकत नही की थी और फिर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गांद

एक एक बार और मारी अब मेरी गांद परपारा रही थी और सुबह अब्बू ने कहा

क्यों रानी बेटी क्या ख्याल है क्या अब भी 5 जान से चुद्वाओगि तब मैने

गुस्से से कहा साला बेटीचोड़ भोसड़ी वाले कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना

है तब अब्बू मुस्कुरा कर बोले कोई बात नही आज की रात तैयार रहना आज 5

लोगों को लेकर आउन्गा और फिर मुझे अब्बू से नानी की चुदाई की बात भी

जाननी थी आज रात मुझे 5 जान से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर

मुझे अफ़सोस है कि बहुत सारी लड़कियों को शायद आज भी कोई लंड नसीब नही

होगा और उन्हे मोमबत्ती से काम चलाना पड़ेगा क्यों कि हर लड़की मेरी तराह

बाप और भाई से नही चुदवा सकती.

समाप्त




Meri Choot Ki Pyas Bhujao

Hallo dosto kaise hai aap log bahut saare mail mile jinme meri

kahaaniyon ki tareef thi main aap sabka khulle dil aur khulli choot ke

saath sukriya ada karti hoon aap sabko pata hona caahiye ki aaj maine

apni choot ke baal saaf kiye hai aur ab fir se meri choot tantana gayi

hai kisi kori kamsin ladki ki taraah haan to doston ab main apni

kahaani suru karti hoon jisme ek baar fir se abbu aur bhai ne mujhe

choda us din hua ye tha ki main bahut chudaasi thi aur ammi naani ke

ghar gayi hui thi ye to aap log jaante hi hai ki meri phli chudaayi

bhi abbu ne hi ki thi aur fir ammi ne bhai se bhi chudwaaya tha aur

ab.

Wo log aksar mujhe choda karte the magar idhar bahut din se abbu ammi

ki faili hui choot me mast the aur bhai ne koi 2sri g/f fasa li thi

aur mujhpe dhyaan dena chod hi diya tha tab aakhir ammi ke bahar jaate

hi maine sabse phle apni jhaante banaayi aur raat klo abbu ke room me

gayi abbu koi moovie dekh rahe the aur mujhe dekh kar bole beti kya

hua aaj bahut din baad abba ki yaad aayi tab maine kaha aap to ammi

jaan ki choot me hi fase rhte hai ab aapko mera zara bhi khyaal nahi

aapne mujhe kitne dino se nahi choda hai tab abbu ne dulaar jataate

hue kaha ooooohhhh meri pyaari raani beti aaja aaj tujhe fie se chodta

hoon aur ye kh kar unhone d.v.d change kar di ab usme ek b/f chalne

lagi jisme ek 14 saal ki ladki ko 5 aadmi chod rahe the jise dekh kar

meri aankhen bahar aa gayi aur maine abbu se kaha abba ye bachhi in

5cho ko ek saath jhel rahi hai aur usko kitna maza aa raha hai jabki

iski age bhi abhi jyaada nahi 14...15 saal ki hogi tab abbu bole meri

bachhi ye saale angrej log aise hi hote hai saali itni si hai aur tum

khud hi dekho kaise maze le..lekar 5.

5 landon ka maza ek saath le rahi hai jabki isme ek iska baap aur ek

bhai ke alaawa 3bahar waale hai ab ye sab dekh kar bhala meri choot me

khaaz kyoon nahi uthti tab maine abbu se kaha abbu main to aap aur

bhai se hi chudwakar panaah maang jaati hoon tab abbu ne kaha ja bagal

ke room se afaaq ko bula la saala land pakde so raha hoga tab main

bhai ke room ki taraf badi aur dekha to sach me wo apne land ko haath

me lekar sadka maar raha tha main jaldi se badte hue boli haay bhaiyya

kya gazab kar rahe ho bhala ghar me itni khoobsurat bahan hote hue

tumhe ye sab karna pade to laanat hai meri jawaani pe aur maine jhat

se unka land apne komal haath me le liya aur bade pyaar se shlaane

lagi aur jaldi...jaldi haath aagey peeche karne lagi aur fir jhat se

muh me lekar choosne lagiaur tab bhai ka land poori aukaat me aa gaya

aur wo mere baalon ko pakadte hue jor jor se dhakka maarne lage aur

fir jaldi hi unka paani mere muh me gira jise main chapar, chapar

karte hue chaat gayi aur bhai se boli chalo abbu bula rahe hai aaj fir

se tum 2no mujhe chodkar maza do aur bhai ko nanga hi unka land pakad

kar abbu ke room me le aayi aur bhai ko dekhte hi abbu bole maine kaha

tha saala muth maar raha hoga tab maine kaha abbu aap bahut

tajurbedaar hai sach me bhai sadka maar rahe the aur fir maine abbu ka

land apne muh me le liya aur bhai peeche se meri gaand pe apna land

ragadte hue andar daalne ki kosis karne lage tab maine kaha abbu ji

main bhi b/f waali ladki ki tarah 5 jan se ek saath hi chudaana caahti

hoon tab abba ne kha beti tu nahi jhel paayegi ek saath 5.

5 ko magar main to poori tarah se chudaasi ho hi chuki thi maine kaha

kaan khol ke sun lo aap 2no mujhe 5jan se ek saath chudaana hai to

chudaana hai agar kal aap log ne mujhe 5 jan se nahi chudwaaya to

bahut bura hoga tab abbu ne kaha achha achha meri raani beti main to

tere bhale ke liye hi kh raha tha agar teri choot fat gayi to

paresaani to hami logon ko hogi magar jab tu nahi maan rahi to mere

bala se ab chal aaj to hum dono se chudwa le aur ye kh kar unhone fir

se apna moosad aisa land mere muh me jordaar dhakke ke saath andar

dhakel diya aur tabhi bhai ne peeche se meri gaand failakar itni jor

se dhakka maara ki mujhe naani yaad aa gayi uuuiiiii maaaaa mar gayi

aaaahhh bhai jara dheere se dhakka maaro tu to nani yaad dila raha hai

tab abbu ne kaha beti caahe jiska naam le par naani ka naam na le tab

maine kaha kyoon tab abbu bole teri naani ki choot maine maari thi aur

kai saal tak main uski choot chodta raha tha tab mere saath saath bhai

ka muh bhi khula rh gaya tab bhai ne kaha abbu kya aapne nani ko choda

hai tab abbu ne kaha haan yaar saali meri saas bahut mastaani thi

tujhe to pata hi hai ki teri ammi ki kam umar me saadi hui thi jab

meri saadi hui thi main 19 saal ka tha aur teri ammi 16 saal ki thi

aur meri saas sirf 30 saal ki thi magar mere sasur ki umar kareeb

40saal thi wo tumhaari nani ko khus bhi nahi kar paata tha jaane bhi

do in baaton ko abhi to filhaal chudaayi ka maza lo uski chudaayi ke

baare me fir kabhi bataaunga aur tab bhai peeche se meri gaand maar

rahe the aur abbu aagey mere muh me apne land ko dhakke laga rahe the

ab mujhe bhi masti aane lagi.

Aur main apne muh aur gaand ko aagey peeche karte hue dhakke lagaane

lagi thi aur tab bhai jhad gye the magar abbu ji abhi bhi nahi jhade

the aur unhone mujhe bed pe khada hone ko kaha main khadi ho gayi aur

tab abbu ne mere doni pair apne kandhey ke dayn...bayn kare aur meri

choot ko muh me bhar kar choosne lage main buri tarah tap rahi thi aur

apne abbu ka muh jor... Jor se apni choot pe dabaane lagi tab hi abbu

khade hone ki kosis karne lage aur mera balance bigadne laga tab maine

ghabra kar kaha aaaaaaahhhhh abbu kya kar rahe hai main gir jaaungi

magar abbu nahi maane aur wo mujhe apne kandhe pe baitha kar khade ho

gye ab main apni 2no taangey unki gardan me kas kar lapete hue thi aur

apni choot ko unke muh se dabaate hue unke sir ko bhi jor. Jor se daba

rahi thi aur bhai aankh faade hue abbu ke is pose ko dekh raha tha aur

kasam se maza to hame bhi bahut aa raha tha is tarah se koi phli baar

meri choot chaat raha tha aur thodi der baad hi main ooooohhh ooohh

aaaahh karte hue jhad gayi aur abbu ka ras bhi neeche se pichkaari ki

taraah bh gaya aur tab abbu mujhe neeche utaarte hue bed par lithakar

turant apne jhade hue land ko mere 2no choochiyon ke beech me ragadne

lage aur main unke nok ki taraah land ki topi ko muh me lene ki kosis

kar rahi thi par abbu jaldi, jaldi aagey peeche kar rahe the tab maine

kaha abbu apna land mere muh me dijiye aapka saara maal bekaar hi

jaaya ho raha hai tab abbu ne apne land ko 2no choochi ke beech se

mere muh me daal diya aur meri choochi ko dabaane lage aur is taraah

se unke land se thoda sa ras.

Aur nikla jise main chaat gayi aur fir abbu ne apna land meri gaand me

dhaas diya aur us din abbu aur bhai 2no ne meri gaand hi maari thi

meri bur ke saath koi harkat nahi ki thi aur fir raat ko dubaara bhi

un logon ne meri gaand ek ek baar aur maari ab meri gaand parpara rahi

thi aur subha abbu ne kaha kyon raani beti kya khyaal hai kya ab bhi 5

jan se chudwaaogi tab maine gusse se kaha saala betichod bhosdi waale

kaha na chudwaana hai to chudwaana hai tab abbu muskura kar bole koi

baat nahi aaj ki raat taiyaar rhna aaj 5 logon ko lekar aaunga aur fir

mujhe abbu se nani ki chudaayi ki baat bhi jaani thi aaj raat mujhe 5

jan se ek saath chudaayi ka maza aane waala hai magar mujhe afsos hai

ki iss redars ki bahut saari ladkiyon ko saayad aaj bhi koi land

naseeb nahi hoga aur unhe mombatti se kaam chalaana Padega kyon ki har

ladki meri taraah baap aur bhai se nahi chudwa sakti.

samaapt

 
रूपाली की टाइट चूत का बाजा बजाया

एक सच्ची घटना, मेरा नाम रूपाली है और मैं 19 साल की एक कमसिन, अन्छुइ

कली हू. मुझे सेक्स के बारे में सुनना और ब्लू फिल्म देखना अच्छा लगता

था. मैं अपनी सहेली के साथ कई बार ब्लू फिल्म देख चुकी थी और सेक्स की भी

इच्छा होती थी लेकिन अंदर से डर भी लगता था. मैं अभी अभी इंटर स्कूल में

अड्मिशन लिया था और रोजाना घर से लोकल बस पकड़ के स्कूल जाती थी. एक दिन

स्कूल जाने के

लिए भीड़ से भादी बस मे चाड गयी इतनी भीड़ थी कि पुछो मत, स्कूल घर से 15

किमी दूर में था और 1-1.5 घंटे लगते थे. बस एक स्टॉप पर रुकी तभी आवारा

किस्म के 4 लड़के बस में चढ़ गये, और सरकते सरकते मेरे पास आ गये और मुझे

तकरीबन घेर लिया उन चारो ने, दो आगे से दो पिछे से. यानी कि उनकी हर्कतो

को कोई देख ना सके. उस दिन मैं स्कर्ट और शर्ट पहनी हुई थी, मेरे शर्ट

में से मेरी गोल

गोल उभरी हुई चूंचिया बहुत मस्त दिख रही थी यहा तक कि लाल लाल घुंडी भी

सॉफ सॉफ दिखाई दे रही थी. उन चारो लड़को की नियत अच्छी नही लग रही थी,

ड्राइवर जब ब्रेक लगता तो कभी वो मेरी गंद पे हाथ लगाते तो कभी वो अपने

हाथ से मेरी चूंची दबा देते. मैं कसमसाती रही उन चारो के बीच लेकिन उनपेर

कोई असर नही हुआ और मुझ से बदतमीज़ी करते रहे. अब तो उनमे से एक ने मेरी

गांद में उंगली कर दी तभी दूसरे ने चूंची की घुंडी को मसल दिया ऐसा यह

लोग

करते ही रहे, मैं चाह कर भी कुछ नही कर सकी. आहिस्ता आहिस्ता मुझे भी

मज़ा आने लगा आब तो चारो मे बहुत हिम्मत आ गयी क्यूंकी मैं खामोश थी और

यह लोग लगातार मेरी जवानी से खेल रहे थे, अभी भी स्कूल आने में आधा घंटा

और था. मैं सोचने लगी आब इनका विरोध करना बेकार है इसमे बदनामी भी मेरी

ही है और मैं चुपचाप उनलोगो से मज़े लेने लगी.

एक ने मेरे कान में बोला क्या नाम है तुम्हारा, मैं बोली रूपाली, फिर

उसने कहा मैं समीर तुम्हे मज़ा आ रहा है. मैं कुछ नही बोली चुपचाप अपने

चूतर को समीर के लंड से सटा कर खड़ी रही और वो मज़ा लेता रहा. मैं मदहोश

हो चुकी थी आब मन कर रहा था कोई मेरी चूत की जमकर चुदाई कर दे. तभी स्कूल

आ गया, मुझे स्टॉप पे उतरते देखकर वो चारो भी उसी स्टॉप पर उत्तर गये और

मेरे पिछे चलने लगे.अचानक से समीर की आवाज़ मेरे कान में आई रूपाली मैं

पीछे मूडी चारो मुझे घूर रहे थे और मेरे नज़दीक आ गये और मेरा हाथ पकड़

कर साइड में ले गये. उनमे से एक ने बोला कहाँ जा रही है हम लोगो को

प्यासा छोड़ के, आज तुम्हे हम लोगो के साथ चलना पड़ेगा और हम लोगो की

प्यास भुजानी पड़ेगी. मैं घबराई और बोली आज नही फिर कभी, तभी समीर बोला

आज क्यू नही रूपाली रानी आज तो हम सभी तैयार है और ऐसा मौका रोज रोज नही

आता. राजेश का घर यही पर है

और खाली भी उसके घर में कोई भी नही है चलो आज राजेश के घर में मज़ा

लेंगे, क्यू राजेश. राजेश ने तपाक से बोला हां मैं तैयार हूँ. फिर क्या

था

अब आगे की स्टोरी समीर के ज़ुबानी

मैने और राजेश ने रूपाली का हाथ पकड़ा और घर की तरफ चल पड़े. रास्ते में

रूपाली बोली 3 बजे मुझे इसी स्टॉप पर छोड़ देना, हम सभी ने रजा मंदी

दिखाई और रूपाली हम लोगो के साथ चल पड़ी. 5 मिनमें ही हम सभी राजेश के घर

में थे, हम सभी बहुत खुश थे कि आज रूपाली का गॅंग रेप करेंगे कितना मज़ा

आयगा

साली एकदम कुँवारी माल है, मैं तो गांद और बुर दोनो की चुदाई करूँगा जम

कर. हम सभी सोफा पर बैठ गये और अपने आप को इंट्रोड्यूस किया. मैं समीर-20

यर्स, यह राजेश-18 यर्स, आफताब-22 यर्स और प्रकाश-20 यर्स, हम चारो बहुत

ही गहरे दोस्त है. आब तुम अपने बारे में बताओ रूपाली. मैं एक बिंगाली

फॅमिली से बिलॉंग करती हूँ, अभी 19 साल की हूँ, मेरे घर में मेरी एक बड़ी

बेहन ,मा और पिताजी है. हूँ तो 19 साल की पर दिखती हूँ 18-20 की यह साब

ख़ान पान की बजह से है. वैसे भी बिंगाली लौंडिया बहुत सेक्सी और मस्त

होती है, आफताब बोल पड़ा.

अब आगे की कहानी मेरी ज़ुबानी

मैं शरमाई सी इधर उधर देखती रही, अब सभी ने अपने अपने लंड को रगरना सुरू

किया और चारो मिल कर मुझे छेड़ने लगे. समीर बोला, है क्या माल है साली की

आज जम कर चुदाई करेंगे, राजेश और प्रकाश ने अपने लंड को मसल्ते हुए मेरी

गांद पे हाथ लगाया और कहा कि हाई क्या बेंगाली लौंडिया है मा कसम आज तो

बेंगाली गांद और बेंगाली चूत की घमासान चुदाई करूँगा. मैं सोचने लगी कि

रूपाली डार्लिंग आज तो तेरी चूत और गांद की खैर नही, पता नही कौन कौन सी

स्टाइल में चोदेन्गे यह लोग और इन लोगो के लंड का साइज़ भी पता नही आब जो

भी चुदवाना तो पड़ेगा ही.

फिर राजेश ने फ़्रीज़ से शराब की बोतल निकाली और चारो ने 2-2 पेग पिया एक

पेग मुझे भी पिलाई. आब मुझे हल्का सा नशा आने लगा और मुझे चारो दोस्त

छेड़ने लगे, समीर ने मुझे खींच कर बेड पर लेटा दिया, मेरे एक साइड राजेश,

दूसरी तरफ आफताब, पैर की तरफ समीर और प्रकाश. ऐसा लग रहा था कि मेरा

बलात्कार होने वाला है. सभी ने मेरी गदराई और सेक्सी जिस्म को चूमने

चाटने लगे, राजेश ने मेरे शर्ट के बटन को खोल दिया और मेरी कसी कुई चूंची

को हाथो से मसलना सुरू किया इधर आफताब ने मेरी दूसरी चूंची को अपने मुँह

में ले कर चूसना सुरू किया. मेरे पैर के पास समीर और प्रकाश बैठे थे

उन्दोनो ने मेरी स्कर्ट को पैर से खींच कर उतार दिया और मेरी जाँघो को

सहलाना सुरू किया. मेरी चिकनी जाँघो को देख कर दोनो ही पागल हो गये तभी

समीर ने झटके से मेरी पॅंटी को पैरो से खींच कर अलग कर दिया, आब मैं

बिल्कुल ही नंगी उनलोगो के बीच में तड़प रही थी और अपने आप को छुड़ाने का

असफल प्रयास करने लगी. तभी समीर गुस्से से बोला साली चुप चाप पड़ी रह नही

तो तेरी कमसिन चूत का बॅंड बजा दूँगा बगैर तेल के लॉडा घुसेड दूँगा इतना

कहते ही मेरी चूत में अपना एक मोटी सी उंगली घुसेड दी मैं चीख पड़ी. तभी

आफताब और राजेश बोल पड़े साली आज तुझे कुतिया बना के अपने गधे जैसी लंड

से चोदुन्गा. मैं समझ गयी की आब तो मैं फँस चुकी हूँ चाहे जैसे भी हो

चुदवाना तो पड़ेगा वो भी इनलोगो के मुताबिक. आब समीर ने मेरी चूत में

अपनी जीव्ह घुसेड दिया और चाटने लगा मैं तो जन्नत में सैर करने लगी.

राजेश और आफताब मेरी चूंचियो को चूस रहे थे समीर मेरी चूत को और प्रकाश

मेरी चूतरो को सहला रहा था. चूमते चाटते सभी मेरी मदमस्त जवानी की तारीफ

कर

रहे थे, क्या बेंगाली माल है साली की गांद कितनी मस्त है चूत का तो जबाब

ही नही चूंची तो बिल्कुल रसगुल्ले जैसी है कितना मज़ा आयगा जब हम सब लोग

इसकी चुदाई करेंगे. करीब आधे घंटे बाद साभी मुझ से अलग हो गये और चारो ने

अपने कपड़े खोल दिए आब बेड पर हम सभी मदरजात बिल्कुल नंगे थे. बाप रे बाप

क्या लंड है इनलोगो के सबके कम से कम 7-8 इंच लंबे और 2-3 इंच मोटे होगे.

मैं घबरा गई

और बेबस होकर उनलोगो की तरफ देखने लगी, तभी समीर ने बोला रूपाली डार्लिंग

घबराओ मत हम लोग कई लौंदियो को साथ साथ चोद चुके है तुम्हे हम लोग बहुत

प्यार से चोदेन्गे लेकिन हम लोगो की बात नही सुनी तो तेरा बलात्कार

करेंगे और बहुत बुरे तरीके से चोदेन्गे,क्यू दोस्तो सभी ने हां में हां

मिलाई लेकिन चुदाई के पहले तुम्हारे इस मक्खन जैसे बदन , बिना बालो वाली

कली जैसी चूत, मटके समान फूली हुई मदमस्त गांद और कसे हुए लाल लाल

चूंचियो का भरपूर मज़ा लेंगे फिर बारी बारी से तुम्हारी गांद और चूत की

चुदाई करूँगा उसके बाद तुम्हारा गॅंग रेप करूँगा. गॅंग रेप समझती हो

रूपाली डार्लिंग इसका मतलब होता है एक साथ गांद और चूत के छेद में चुदाई

अदल बदल कर यानी कि हर बार एक अलग लॉड से एक साथ चुदाई कसम से बेंगाली

चूत और मतवाली गांद को चोदने में बहुत मज़ा आयगा, तुम्हे भी मज़ा आयगा.

और इस तरह पहले मुझे बेड पर घुटनो के बल खड़ा किया अबताफ़ ने मेरी चूत

में समीर गांद में, राजेश और प्रकाश चूंची और मुँह में लग गये. समीर ने

मेरी बेदाग सी गोल और फूली हुई गांद पेर जीब फिराना सुरू किया और आहिस्ता

आहिस्ता गांद के दोनो भागो को चीर कर गुलाबी छेद में अपना जीभ घुसेड दिया

और कहा रूपाली डार्लिंग बड़ी खूबसूरत गांद है तुम्हारी बिल्कुल डबल रोटी

की तरह एक दम सॉफ्ट है कितना मज़ा आ रहा है गांद चाटने में, मुझे नही पता

था कि बेंगाली गांद इतनी मतवाली होती है आब तो जब भी मौका मिलेगा हम लोग

तुम्हारी चुदाई करेंगे. मैं बेचारी रूपाली चुप चाप आफताब और समीर के जीभ

से अपनी चूत और गांद को चुदवाती रही. आब तक दोनो ही छेद थूक से गीले और

चिकने हो चुके थे और उन चारो के लंड मूसल की तरह कड़क हो गये, तभी राजेश

ने चार टॅबलेट लेकर आया और सभी ने 1-1 गोली खा ली. मैं पूछी कौन सी गोली

थी तो राजेश ने कहा जानेमन सेक्सपवर की गोली थी इसको खाने से लंड 40-45

मिनट तक ऐसे ही तनटना रहेगा ताकि हम लोग तुम्हारी इस मतवाली गांद और

रसीली चूत की चुदाई जबरदस्त तरीके से जाम के कर सके. सभी ने अपने अपने

मूसल जैसे लंड को तेल में चुपोर कर मेरी गदराई सी जवानी को ललचाई नॅज़ारो

से देखने लगे और मुझ से पूछा किसका लंड कौन से छेद में लेगी, तुझे

तुम्हारे मनपसंद लंड से चोदुन्गा. जल्दी बता चूत में किसका लेगी और गांद

में किसका लंड घुस्वाएगी, मैं चारो का लंड हाथ में लेकर देखने लगी और

बोली चूत में आफताब का गांद में समीर का और मुँह में राजेश और प्रकाश का

बारी बारी से. उन चारो ने कहा लेकिन उसके पहले हम सभी लोगो का लंड चूसना

होगा और मैं बारी बारी से

उन चारो का लंड मुँह में लेकर चूसना सुरू किया क्या लंड है एकदम मूसल की

तरह कारक और गधे जैसे तकरीबन 20 मिनट की चुसाइ के बाद सभी लोग काफ़ी खुश

थे मेरे इस जबाब से और तैयारी सुरू हो गयी मेरी चुदाई की. सभी ने अपना

अपना पोज़िशन ले लिया, आफताब ने अपने पॉकेट से एक गेल निकाला और अपने लंड

और रूपाली की छूट में अच्छी तरह से लगाया फिर छूट के छेड़ पेर अपने सुपरे

को घिस्सना सुरू किया और एक

ज़ोर का धक्का मारा लंड फ़चक से अंदर घुस्स गया जेल की वजह से ना तो

ज़्यादा दर्द हुआ ना ही लॉड को घुसने में तकलीफ़ आब ढकधक लंड अंदर बाहर

करने लगा. आब बारी थी समीर की उसने भी ठीक वैसा ही किया जेल को अच्छी तरह

गांद के छेद पर लगाया और अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर गांद के छेद

पे लगा दिया. फिर अपने लॉड के सुपरे को छेद पेर भिड़ा कर एक ही धक्के में

सारा लंड गांद में घुस्सा दिया और इस तरह समीर और आफताब ने गांद और चूत

की चुदाई सुरू के साथ ही साथ मैं लगातार राजेश और प्रकाश का लंड भी चूस

रही थी. फिर चारो ने बारी बारी से मेरी की रसीली चूत और मतवाली गांद को

अदल बदल कर खूब बेरहमी से चोदा मतलब चार बार चार लंड से गांद की चुदाई

फिर चार लंड से चूत की चुदाई साथ ही साथ चार अलग अलग लंड की चुस्साई,

तकरीबन 40 मिनट की चुदाई के

बाद सभी ने मेरी गांद और चूत को पिचकारी की तरह बिर्य से भर दिया. सभी

सांत हो चुके थे मुझे को इस गॅंग चुदाई में खूब मज़ा आया और अब घर जाने

को तैयार थी.

समाप्त
 
ओये बाप रे बाप क्या चुदाई करता है

मैं ऋतु, 32 वर्षीया शादीशुदा औरत हूँ, और घर में मेरी एक 8 साल की बेटी

रूबी, 55 साल के ससुर रामनारायण, मीना मेरी 50 साल की सास, 28 साल की

तलाक़शुदा ननद, राधिका है. मेरा पति दुबई में काम करता है और तीन साल के

बाद छुट्टी पर आता है वो भी एक महीने की. मेरे पति का नाम रघु है.. मेरा

फिगर बहुत ही सेक्सी है, मेरे बूब्स 36 इंच, हिप्स 36 इंच और कमर 30 इंच

हैं, रंग गोरा. मेरे चूतर बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख

ज़यादा ही है. लोग कहते हैं कि मैं अपनी मा की तरह चुड़क्कड़ हूँ. मेरी

मा उमा देवी आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचाती जबकि उस की

उमर 52 साल की हो चुकी है.

जैसा के आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तस्सलिबक्श

चुदाई नसीब नहीं हो पाती. मैं लंड को तरसती रहती हूँ, मेरी ननद राधिका का

तलाक़ हो गया किओं कि उसका पति साला नमार्द था. भोसड़ी का मेरी राधिका को

दोष देता रहता था कि वो बांझ है जब कि वो राधिका को अच्छी तरह से चोद

नहीं सकता था. खैर हम दोनो भाबी ननद लंड की कमी के कारण एक दूसरे के साथ

लेज़्बीयन संबंध बना चुकी थी. राधिका को मेरी चूत का नशा सा था.. वो जब

भी मौका मिलता, मेरे कमरे में आ कर मेरी चुचि चूसने लगती, कभी चूत में

उंगली करती और कभी अपनी मादक चूत को मेरे हवाले कर देती. राधिका का खिला

हुआ यौवन, बड़ी बड़ी 38 इंच की चुचि, गांद भी कम से कम 38 की ही होगी.

उसके चुत्तेर खूब मस्त थे. मैं अपने हाथ उसके चूतरो से दूर नहीं रख पाती.

लेज़्बीयन संबंध तक तो ठीक है लेकिन जब मेरी ननद जोश में आ जाती तो उसकी

कामवासना पर काबू पाना मुश्किल हो जाता और राधिका किसी भी कीमत पर लंड

पाने के लिए बेताब हो जाती.

एक दिन उसने मुझे पुछा कि मेरा पति (यानी कि उसका भाई) कैसी चुदाई करता

है और उसका लंड कितना बड़ा है. मैने उससे बताया के उसके भैया आका लंड 9

इंच का है और ग़ज़ब का कड़क है. जब वो चोद्ता है तो चूत को तारे नज़र आने

लगते हैं. "साला ऐसे पेलता है के चूत की भोसड़ी बना देगा, ऐसे चूत चूस्ता

है के सारा पानी निकाल देता है, वो कहता है के अगर उससे कामवासना का

बुखार चढ़ा हो तो अपनी मा या बेहन को भी चोद डाले, लेकिन मेरी बन्नो मेरी

किस्मत ही ऐसी है के वो तीन साल में एक महीने के लिए ही मुझे चोद सकता है

और मेरी चुदसी चूत को लंड रोज़ चाहिए, राधिका, साली तू ही कोई प्लान बना

ता की हम दोनो ही रोज़ लंड के मज़े ले सकें," मैं बोली. राधिका ने कहा'

भाबी, तुझे तो तीन साल में एक महीने तो लंड मिल जाता है, मुझे तो अभी तक

चुदाई का असली मज़ा नहीं आया, मेरे उस नमार्द पति का तो खड़ा ही नहीं

हुआ, बेह्न्चोद चूत पर रगड़ता था और झाड़ जाता था और मेरी चूत तड़प तड़प

कर आग में जलती रहती, भाबी मैं क्या प्लान करूँ, यह तो तुम्हें ही कोई

प्रबंध करना पड़ेगा, मेरी चूत को भी शांत करवा दो, अगर तेरा कोई यार है

या कोई कज़िन है तो उस से ही चुदवा दो मुझे, देखो भाबी मेरी चूत कैसे

दाहाकति है लंड के बिना,' मैने कहा चलो देखते हैं की क्या हो सकता है.

अगले दिन मैं बाज़ार जा रही थी तो मैने अपने ससुर से पुछा" बाबू जी आपको

क्या मंगवाना है बाज़ार से? जो चाहिए, मैं ला दूँगी, ' मेरे ससुर ने मुझे

ध्यान से देखा और कहा " बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुआरे भी लेते

आना," मैने पुछा" ठीक है लेकिन आपको क्या करनी है यह चीज़ें बाबू जी,'

बाबू जी बोले," बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का

काम करना पड़ता है ना, तेरी सासू को खुश करने के लिए यह चीज़ें चाहिए, इन

से मर्दानगी बढ़ती है, ताक़त आती है बेटी,' कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब

नज़रों से देखा, और मुझे लगा के वो मेरी चूचियो को घूर रहे हैं. जब मैं

बाज़ार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नज़रें मेरे चूतरो का पीछा करती हुई

महसूस हुई. मेरे शरीर में एक सिरहन सी दौर गयी और मेरी चूत में पानी भर

गया.

मैं सारी चीज़ें लेकर आई और बाबूजी की चीज़ें उनको देने गयी. जब बाबू जी

ने चीज़ें पकड़ी तो मेरे हाथों से उनका हाथ अचानक ही छ्छू गया, मेरा पैर

फिसल गया और मेरे ससुर ने मुझे अपनी मज़बूत बाहों में लेकर संभाल लिया.

में उनकी चौड़ी छाती के साथ सॅट गयी. मेरी चुचि उनकी छाती में धस गयी और

मेरे जिस्म में आग दहकने लगी. उनका हाथ बरबस ही मेरे कुल्हों पर रेंग गया

और मैं शर्मा गयी. ' माफ़ करना बाबूजी मेरा पैर फिसल गया था, आप मुझे ना

थाम लेते तो मैं तो गिर ही जाती.' मैने कहा. वो बोले,' बेटी मैं किस लिए

हूँ, अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, मैं अपने

परिवार के लिए सब कुच्छ करने को तय्यार हूँ, मुझ से कभी भी शरमाना नहीं,

मेरी बेटी,' मैने गौर से देखा के उनके पाजामे में उनका लंड सलामी दे रहा

था, मैं मुस्कुराइ और अपने आप से बोली, साली, तू बाहर क्या ढूड़ रही है,

महा लंड तो घर में ही विराजमान हैं, यह साला ससुर मेरे उप्पेर ही नज़रें

लगा कर बैठा है, और मुझे भी तो लंड चाहिए, लेकिन अब साला बूढ़ा नहीं

जानता कि मैं उस के साथ चुदाई तो करूँ गी पर इसकी बेटी को भी इसके लंड से

चुदवाउंगी.

मैं सारी रात अपनी और राधिका की चुदाई का प्लान बनाती रही. जब मैं सारा

काम ख़त्म कर के अपने कमरे में राधिका के पास जा रही थी तो बाबूजी के

कमरे से आवाज़ आ रही थी,' अह्ह्ह्ह मार डाला मेरे रजाअ, आज क्या खा कर आए

हो, मेरी चूत की धज़ियाँ ही उड़ा डालीं, आज तेरा लंड कुच्छ ज़यादा ही

ज़ोर मार रहा है, ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत की कल्पना करके मुझे

चोद रहे हो, मेरे स्वामी मैं आपके हल्लाबी लंड के सामने नहीं टिक सकती,

ये मैं नहीं झेल सकती, जब कल मैं अपने मायके चली जाउन्गी तो शूकर हो गा

कम से कम दो महीने तो आराम से काट लूँगी, और तुम मूठ मार मार के करना

गुज़ारा, ओह्ह्ह्ह मैं झड़ी मेरी चूत का रस निकल गया, निकाल लो अपना लॉडा

मेरी बुर में से मैं तो थक गयी,' बाबूजी बोले" साली मेरा तो झाड़ दे, चूस

के, मूठ मार के या फिर अपनी गांद मे डाल के, मैं इस खंबे जैसे लंड को ले

कर कहा जाऊ, बेह्न्चोद मेरा तो पानी निकाल दो" सासू मा बोली" अपना पानी

आप ही निकाल लो मैं तो सोने लगी हूँ.' मेरा दिल किया के मैं दौड़ के

बाबूजी का लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो जायूं पर एस्सा कर ना सकी.

लेकिन एस्सा कुच्छ ना कर सकी और अपने कमरे जाकर सारी रात बाबूजी के लंड

के सपने देखते हुए जाग कर निकाल दी

सुबह जब मैं उठी तो राधिका मेरे साथ लिपटी हुई थी, उसके हाथ मेरे मम्मों

पर थे जिन्हे वो दबा रही थी. मैं उठ कर बाथरूम होकर आई तो मेरी ननद अपनी

चूत खुज़ला कर बोली,"भाबी अगर तुमने किसी लंड का इंतज़ाम नहीं किया तो

मैं मर जायूंगी, मुझे बचा लो मेरी प्यारी भाबी," मैने मुस्कुरा कर पुछा,

किस का लंड चाहिए. उसने जवाब दिया लंड किसी का भी हो, चलेगा, अब तो चूत

इतनी बेसबरी हो चुकी है की अगर मेरे बाप का भी मिल जाए तो इसकी आग ठंडी

करने के लिए ले लूँगी" मैने कहा" ठीक है अब मुकर मत जाना किओं कि तुझे आज

बाबूजी का लंड ही मिलने वाला है, तू बस ऐसे ही करना जैसे मैं कहती हूँ,"

वो मान गयी. जब वो तय्यार होने चली गयी तो मैं बाबूजी की चाइ लेकर उनके

रूम में चली गयी. मैने जानबूझ कर सारी का पल्लू नीचे गिरा रखा था, जिस

कारण मेरे वक्ष आधे से अधिक नंगे हो रहे थे. सासू मा अपने मायके जाने के

लिए तय्यार हो रही थी.

मैने आगे झुक कर चाइ बाबूजी को दी और अपने कूल्हे इनके हाथ से रगड़ दिए.

मैने देखा कि उनका लंड उठक बैठक करने लगा है. मैने जान बुझ कर उनसे कहा"

बाबूजी, देखो मेरा हाथ दुख रहा है, क्या ये सूज गया है, देखो तो सही,"

इतना कह कर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया, उन्हों ने मेरा हाथ पकड़ लिया

और मलने लगे, मैं उनसे सॅट कर बैठ गयी. मैने नोट किया की बाबूजी मेरा हाथ

सहलाने लगे और उनका लंड पाजामे के अंदर सर उठाने लगा. मैने उनको पूरी तरह

उतेज़ित कर डाला. जब वो मेरे कंधे पर हाथ रखने लगे तो मैं जान बुझ कर

बोली, " अब मैं चलती हूँ माजी का नाश्ता बनाना है,' मैने हाथ छुड़ाया और

चली गयी लेकिन बाबूजी का बुरा हाल था, वो अपने लंड को मसल रहे थे.

मैने राधिका को कहा,' तुम माजी के जाने के बाद, कमर मैं दर्द का नाटक

करना, और बाबूजी को कमर पर इयोडीक्स लगाने के लिए कहना, और धीरे धीरे

नीचे तक उनका हाथ ले जाना, लेकिन ये सब उस वक्त करना जब मैं माजी को बस

स्टॅंड पर छोड़ने जाऊ और घर मैं कोई ना हो. देखना वो तेरे को चोदने को

तय्यार हो जाएँगे, मैने उनकी चाइ में शिलाजीत मिला दी थी, आज तेरी चुदाई

पक्की हो जाएगी मेरी बन्नो, तुम यह निकर और टी शर्ट पहन लो और ब्रा और

पॅंटी मत पहनना, तेरा बाप आज किसी को भी चोदने को तैयार हो जाए गा, तुम

उस पर अपनी जवानी का जादू चला दो मेरी रानी उसके बाद हम दोनो उसके लंड के

मज़े लेंगे, वो भी चूत का भूखा है मेरी जान' वो हैरान हो कर मेरी तरफ

देखने लगी. मैं फिर बाबू जी के कमरे में गयी और उनकी जांघों पर हाथ रख कर

बातें करने लगी, और उनके लंड को भी च्छू लिया. वो बेचैन होने लगे और मैं

मुस्कुरा कर बाहर आ गयी.

मैं थोड़ी देर में वापिस आगाई और राधिका के कमरे में झाँकने लगी. राधिका

ने आवाज़ लगाई" पप्पा ज़रा मेरी कमर पर बल्म लगा देना, मुझे बहुत दर्द हो

रहा है,' उसने ये कहते हुए अपनी टी शर्ट उप्पेर उठा डाली और उस का गोरा

पेट नंगा हो गया, और जब उसने अपनी कनीकेर्स को नीचे कर दिया तो उसकी जाँघ

नज़र आने लगी. मेरी आँख ने देखा कि बाबूजी की नज़र में वासना की चमक उभर

आई. उनकी आँखों में एक लाली नज़र आने लगी. वो अपनी बेटी के नज़दीक आ गये

और वासनात्मक नज़रों से देखते हुए बोले" बेटी क्या हुया, दर्द कहाँ हो

रहा है, और उनका हाथ अपनी बेटी की कमर पर चला गया और उसकी कमर को सहलाने

लगा.

मैने देखा कि अब बाबू जी नहीं बल्कि उनका लंड बोल रहा था. उनकी आवाज़ से

सॉफ ज़ाहिर था के काम वासना में वो बाप बेटी के रिश्ते की पवित्रता को

भूल गये थे. अब कमरे में सिर्फ़ चूत और लंड के मिलन का सीन बना हुआ था.

बाबूजी के हाथ काँप रहे थे जब वो अपनी बेटी की कमर को सहला रहे थे.

राधिका ने अपना सिर बाबूजी की छाती पर टीका दिया. राधिका की साँसें तेज़

हो चुकी थी.

बाबू जी ने इयोडीक्स की शीशी उठाई और कमर पर लगाना शुरू कर दिया. राधिका

की चुचि अब उनके शरीर से सॅट गयी थी और बाबूजी और भी उतेज़ित हाने लगे.

बाबूजी ने अपना एक हाथ उसकी चुचि पर रख दिया और धीरे से दबा दिया." ऑश

पापा धीरे से, मुझे बहुत घबराहट हो रही है, हाए मुझे दर्द हो रहा है,

बल्म मलीए ना, पापा," राधिका बोली और अपने बाप के शरीर से चिपक गयी.

बाबूजी का लंड अब बेकाबू हो चुका था. राधिका ने अपनी निकर्स को और नीचे

कर दिया जिस के साथ ही उसकी जांगेः पूरी तरह नंगी हो गयी. अब उसके कूल्हे

बस उसकी टी शर्ट से ही ढके हुए थे. बाबूजी ने काँपते हाथों से राधिका की

कमर और जांघों पर बॉम लगाना शुरू कर दिया और राधिका और ज़ोर से अपने बाप

के शरीर से चिपकती चली गयी. मैं मतर्मुग्ध हो कर कमरे के अंदर का सीन देख

रही थी और मेरे जिस्म में भी कामग्नी जल रही थी. ' पापा मेरे कूल्हे भी

दर्द कर रहे हैं, प्लीज़ वहाँ भी बॉम लगा दो,' बाबूजी ने बॉम लगाना शुरू

कर दिया और उसकी टी शर्ट को उप्पेर उठा दिया. वो अपनी बेटी के चूतरो पर

बॉम लगाने लगे. राधिका ने अपना हाथ अपने पापा की छाती पर रख दिया और अपने

होठ उनके होंठों पर रख दिए, उसकी साँसें पापा की साँसों से टकरा रहीं थी.

बाबूजी ने बेटी को बाहों मैं भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगे..

राधिका ने नाटक करते हुए अपने आप को छुड़ाने की झूठी सी कोशिश की लेकिन

बाबूजी ने उसे और भी कस कर जाकड़ लिया और अपनी बटी को बेतहाशा चूमने लगे,

उनका लंड राधिका के पेट को टच कर रहा था, बाबूजी ने उसकी चुचि कस कर

दबानी शुरू कर दी और राधिका ने ड्रामा किया" पापा, यह क्या कर रहे हो,

मैं आपकी बेटी हूँ, क्या यह पाप नहीं है, आप मुझे छ्चोड़ दो, हम यह सब

नहीं कर सकते, पापा, मुझे छ्चोड़ दो, प्लीज़," वो भी जानती थी कि अब पापा

वापिस आने के काबिल नही रहे किओं की उनका लंड अब फटने के करीब ही था.

पापा ने अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर रख कर कहा" मेरी बेटी लंड और चूत

का एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का रिश्ता, मेरी प्यारी बेटी,

तुम भी लंड के बिना तड़प रही हो मुझे पता है और साथ ही तेरी भाबी भी

चुदसी है क्योंकि के उसका पति भी उसे चोद नहीं सकता, आ जाओ मैं तेरी चूत

को चोद कर मस्त कर दूँगा, बेटी मेरा लंड कैसे दाहक रहा है, तुम इसको हाथ

में लेकर सहलाओ ज़रा, देखो तुम्हारी चुचि कितनी कड़ी हो गयी है, जल्दी से

अपनी टी शर्ट भी उतार दो मेरा लंड तुझे चोदने को तड़प रहा है," राधिका भी

मस्ती में भर उठी और अपनी टी शर्ट उतार कर पूरी तरह नंगी हो गयी और पापा

के लंड को हाथ में भर के मुठियाने लगी. लंड की आँख से प्री-कम की दो

बूँदें टपक पड़ी और बाबूजी चुदाई की मस्ती में आ गये और ज़ोर ज़ोर से

अपनी बेटी की चुचि को मुह्न मे लेकर चूसने लगे, " बेटी तू कितनी सेक्सी

हो गयी है, मेरा लंड तेरी चूत का प्यासा है, अब मुझे अपनी चूत का स्वाद

दिखाओ, मेरी प्यारी बेटी और मेरे लंड को चूस कर इसका स्वाद देखो, जल्दी

से मैं आज सवेरे से ही चोदने के लिए तड़प रहा हूँ, लाओ अपनी टाँगें खोल

कर अपनी चूत का दीदार तो कर्वाओ," राधिका ने अपनी जांघे खोल दी और उसकी

चूत मुस्कुरा उठी किॉकी वो आज पहली बार किसी असली लंड से चुदाई करने वाली

थी. पापा ने अपना मुह्न उसकी चिकनी चूत में घुस्सा दिया और अपनी जीभ चूत

की फांकों के अंदर डाल दी. " अहह पापा, यह क्या कर दिया मेरी चूत को, यह

तो पानी छ्चोड़ने लगी है, चूस लो मेरी बुर को पापा, यह आज चुदाई के लिए

तड़पति है, लायो मैं आपके लंड को चूस लेती हूँ, मुझे चोद डालो आज, चोद दो

अपनी बेटी को, मेरे पापा,' इसके साथ ही राधिका ने पापा का लंड अपने मुह्न

में ले लिया और लगी चूसने उनके लंड को. लंड आग की तरह दहकने लगा. बाबूजी

अपने चूतर आगे पिछे करने लगे, राधिका बाबूजी के लंड को गले के भीतर तक ले

गयी और करहाने लगी, उधर बाबूजी की जीभ राधिका की चूत में पूरी तरह समा

चुकी थी और उसकी चूत का रस, बाबूजी के मुह्न से बहने लगा, जैसे की उनके

मुह्न से लार टपक रही हो, राधिका की चूत झाड़ रही थी.
 


तभी मैने कमरे मैं एंट्री कर दी और बोली," साले बाबूजी, इतने कामीने

निकले के अपनी ही बेटी को चोदने के लिए तैयार हो गये, बेटीचोड़ साले मैं

क्या मर गयी थी, मुझे कौन चोदे गा बेहन्चोद, तेरा बेटा तो बेहन्चोद मुझे

छ्चोड़ कर चला गया और तू भी साले अपनी बेटी को ही चोद रहा है, मेरा क्या

हो गा, " बाबूजी मुझे देख कर घबरा गये और फिर संभाल कर बोले," बेटी तू भी

आ जा मेरी बेटी, मेरा लंड मेरी बहू और बेटी के लिए काफ़ी है, मैं तुम

दोनो को चोद कर शांत कर दूँगा, आजा मेरी रानी बहू, अगर बेटा चला गया है

तो क्या हुया, बाप तो ज़िंदा है, मेरे पास आ मैं तेरी चुचि को भी चूस्ता

हूँ, आ मेरी बेटी तू भी कोई कम सेक्सी नहीं हो, तेरा जिस्म भी चुदाई की

आग में जल रहा होगा, ला मेरे पास आ मैं तुझे भी तृप्त कर्दून्गा," मैने

फटाफट अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और बिस्तर पर आके बाबूजी के जिस्म

को चाटने लगी और राधिका की चुचि दबाने लगी. बाबूजी ने अपना हाथ मेरी गांद

पर फिराना शुरू कर दिया. मैने बाबूजी का लंड हाथ में ले लिए और उससे

सहलाना शुरू कर दिया. उनका लंड पूरी तरह कड़ा हो चुका था. मैने उसे चाटना

शुरू कर दिया, मेरी चूत भी पनिया गयी थी. मैने कहा " आप पहले राधिका को

चोद कर शांत कर दो, इसकी चूत अभी कुँवारी है, लेकिन ज़रा, प्यार से चोदना

अपनी बिटिया को," ये कहते हुए मैने राधिका की टांगे चौरी कर दी और उसकी

चूत पर बाबूजी का लंड टीका दिया, उनके टट्तों पर हाथ फिराया जिस कारण

बाबूजी के मुह्न से आह निकल गयी, मैने उनका लंड राधिका की चूत पर रगड़ा

जिस में से पहले ही पानी निकल रहा था. उसकी खुजली इतनी बढ़ गयी के वो

अपने आप पर काबू ना रख सकी" पापा अब और मत तद्पाओ, मेरी चूत में आग लगी

हुई है, आप का लंड रगड़ना मुझे पागल बना रहा है, पापा मेरी चूत के अंदर

पेल दो अपना लोड्‍ा, पापा मेरे साथ सुहागरात माना लो, मुझे मम्मी की तरह

चोद डालो मेरे प्यारे पापा, मुझे पेल दो पापा, प्लीएज, भाबी मेरी चूत में

पापा का लंड पेल दो, मेरी प्यारी भाबी, उसके बाद तुम मज़े ले लेना पापा

के लंड के साथ, मैं तेरी विनती करती हूँ, मेरी आग बुझा दो, प्लेआस्ीईए."

बाबू जी का लंड पकड़ कर मैने राधिका की चूत के मुख पर टीकाया और कहा"

बाबूजी पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की बर में, देखो कैसे तड़प रही है

साली, कैसे दाहक रही है इसकी चूत, अब तो इसकी आग आपका लंड ही शत कर सकता

है, उड़ा दो इसकी चूत की धज़ियाँ, पेल दो अपनी बेटी को, डाल दो अपना लंड

रस इस की प्यासी चूत में, " बाबूजी ने देर करना मुनासिब नहीं समझा और

धक्का मार के लंड पेल दिया, और उनका आधा लंड पहले धक्के में चूत में समा

गया. राधिका चिल्लाई" पापा बहुत दर्द हो रहा है, लगता है मेरी सील टूट

गयी है, बाहर निकाल लो अपना लंड, दर्द बर्दाशत नहीं हो रहा पापा,

प्लीज़." लेकिन बाबूजी ने धक्के मारना जारी रखा. उनका लंड अपनी बेटी की

चूत के अंदर बाहर हो रहा था. राधिका की चूत से लहू बहने लगा. बाबूजी भी

पुराने खिलाड़ी थे, " बेटी दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जाएगा, ऋतु, तू

राधिका की चुचि चूसना शुरू कर दो और इस की चूत को भी सहलाओ, साली बहुत

टाइट है इसकी चूत, लेकिन मैं आज इसे चोद कर ठंडी कर दूँगा, ले बेटी ले लो

अपना पापा का लंड अपनी प्यासी बुर में और मिटा दो इसकी प्यास.'

मैने अपनी जीभ से राधिका की चुचि चाटना शुरू कर दिया और अपनी उंगलिओ से

उसकी चूत के आसपास का इलाक़ा उतेज़ित करना शुरू कर दिया. उसका दर्द कम हो

गया और उसे मज़ा आने लगा, और वो चूतर उच्छाल कर बाबूजी के धक्कों का

ज्वाब देने लगी," पापा मेरा दर्द ख़त्म हो गया है, आपके लंड से मुझे

जन्नत का मज़ा आ रहा है, आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग दिखा रहा है, पेलो

अपना लंड मेरी चूत के अंदर, चोद दो अपनी बेटी को, ले लो मेरी कुंवाई चूत

के मज़े, ज़ोर से चोदो मुझे," मैने बाबूजी के लंड पर उंगलियाँ फेरी और

उनके चूतर पर थपकी दी और कहा" बाबूजी, चोदो अपनी हरामी बेटी को साले,

ज़ोर से लगा धक्के बेहन्चोद, देखता क्या है साले तुझे आज अपनी जवान और

कुँवारी बेटी की चूत का मज़ा मिल रहा है, साले बन गया है तू बेटीचोड़ और

थोड़ी देर में बहुचोद भी बन जाएगा, साले चोद डाल इसको, चोद डालो अपनी

बेटी को, वो कब से प्यासी है लंड की, मिटा तो इसकी प्यास, छोड़ दो अपना

पानी इसकी चूत मैं.' बाबूजी भी पागलों की तरह धक्के मारने लगे. कमरे में

घचा घच की आवाज़ें आने लगी, राधिका के मुह्न से अहह, ओह की आवाज़ आ रही

थी.

बाबूजी ने अपनी बेटी के चूतरो को कस के पकड़ रखा था और उसे पेल रहे थे,"

अहह, बेटी मेरा भी टाइम नज़दीक आ रहा है, मैं भी झड़ने वाला हूँ, हां मैं

सच में बेटीचोड़ बन गया हूँ, और मुझे ख़ुसी है के तुमने अपनी कुँवारी चूत

,मेरे लिए संभाल के रखी हुई थी, हाँ बेटी चुदवा ले मुझ से मेरी प्यारी

बेटी, कसम तेरी जवानी की आज तक इतना मज़ा नहीं आया, क्या चूत है तेरी, ले

लो मेरा पानी तेरी चूत में जा रहा है, मेरा पानी तेरी कोख में गिर रहा

है, तेरा बाप झाड़ रहा है, मैं गय्ाआआआ," यह कहते हुए बाबूजी ने पिचकारी

राधिका की चूत में छ्चोड़ दी और उनका लंड छपक की आवाज़ से चूत से बाहर

निकल आया. मैने पहले उनका लंड चूस कर सॉफ किया और फिर अपनी ननद की चूत को

चटा और हम दोनो ही बाबूजी की बगल में लेट गयी. थोड़ी देर बाद बाबूजी ने

मेरी भी चुदाई की और ऐसी चुदाई की की मैं आज भी अपने आपको जन्नत मे महसूस

करती हू

समाप्त.....

 


Oye Baap Re Baap Kia Chudai Karta Hai

Main Ritu, 32 varshiya shadishuda aurat hun, aur ghar mein meri ek 8

saal ki beti Ruby, 55 saal ke sasur Ramnarain, Meena meri 50 saal ki

saas, 28 saal ki talakshuda nanad, Radhika hai. Mera pati Dubai mein

kaam karta hai aur teen saal ke baad chhuti par aata hai vo bhi ek

mahine ki. Mere pati ka nam Raghu hai.. Mera figure bahut hi sexy hai,

mere boobs 36 inch, hips 36 inch aur kamar 30 inch hain, rang gora.

Mere chutter bade hi mast hain aur mere andar sex ki bhookh zayada hi

hai. Log kehte hain ki main apni maa ki tarah chudakad hun. Meri maa

Uma Devi aaj bhi apni chut mein lund lene se nahin hichkichati jabki

us ki umar 52 saal ki ho chuki hai.

Jaisa ke aap jante hi hain, pati Dubai mein hone ke karan mujhe

tassalibaksh chudai nasib nahin ho pati. Main lund ko tarapti rehti

hun, Meri nanad Radhika ka talak ho gaya kion ki uska pati sala namard

tha. Bhosadi ka meri Radhika ko dosh deta rehta tha ki vo baanjh hai

jab ki vo Radhika ko achhi tarah se chod nahin sakta tha. Khair hum

dono bhabi nanad lund ki kami ke karan ek dusre ke saath lesbian

sambandh bana chuki thi. Radhika ko meri choot ka nasha sa tha.. Vo

jab bhi mauka milta, mere kamre mein aa kar meri chuchi chusne lagti,

kabhi chut mein ungli karti aur kabi apni madak chut ko mere hawale

kar deti. Radhika ka khila hua youvan, badi badi 38 inch ki chuchi,

gaand bhi kam se kam 38 ki hi hogi. Uske chutter khub mast thai. Main

apne haath uske chuttron se door nahin rakh pati. Lesbian sambandh tak

to theek hai lekin jab meri nanad josh mein aa jati to uski kaamvasna

par kabu pana mushkil ho jata aur Radhika kissi bhi kimat par lund

pane ke liye betab ho jati.

Ek di usne mujhe puchha ki mera pati (yaani ki uska bhai) kaisi chudai

karta hai aur uska lund kitna bada hai. Maine usse bataya ke uske

bhaiy aka lund 9 inch ka hai aur gazab ka kadak hai. Jab vo chodta hai

to chut ko taare nazar ane lagte hain. "Sala esse pelta hai ke chut ki

bhosadi bana dega, esschut chusta hai ke sara pani nikal deta hai, vo

kehta hai ke agar usse kaamvasna ka bukhar chada ho to apni maa ya

behan ko bhi chod dale, lekin meri banno meri kismat hi essi hai ke vo

teen saal mein ek mahine ke liye hi mujhe chod sakta hai aur meri

chudas chut ko lund roz chahiye, Radhika, sali tu hi koi plan bana ta

ki ham dono hi roz lund ke maze le saken," main boli. Radhika ne kaha'

bhabi, tujhe to teen saal mein ek mahine to lund mil jata hai, mujhe

to abhi tak chudai ka asli maza nahin aya, mere uss namard pati ka to

khada hi nahin hua, behnchod chut par ragadta tha aur jhad jata tha

aur meri chut tadap tadap kar aag mein jalti rehti, bhabi main kaya

plan karun, yeh to tumhen hi koi prabandh karna padega, meri chut ko

bhi shant karwa do, agar tera koi yaar hai ya koi cousin hai to uss se

hi chudwa do mujhe, dekho bhabi meri chut kaise dahakti hai lund ke

bina,' Maine kaha chalo dekhte hain ki kaya ho sakta hai.

Agle din main bazar ja rahi thi to maine apne sasur se puchha" babu ji

apko kaya mangwana hai bazar se? jo chahiye, main la doongi, ' Mere

sasur ne mujhe dhyan se dekha aur kaha " bahu tum shilajeet le aana

aur saath mein chhovare bhi lete aana," Maine puchha" theek hai lekin

aapko kaya karni hai yeh cheezen babu ji,' Babu ji bole," beti tera

pati to Dubai mein baitha hai, lekin mujhe to pati ka kaam karna padta

hai na, teri sasu ko khush karne ke liye yeh cheezen chahiye, in se

mardanagi badhati hai, takat aati hai beti,' kehte huye babuji ne

mujhe ajib nazron se dekha, aur mujhe laga ke vo meri chhation ko ghur

rahe hain. Jab main bazar jaa rahi thi to mujhe babuji ki nazaren mere

chuttron ka peechha karti hui mehsoos hui. Mere sharir mein ek sirhan

si daur gayi aur meri chut mein pani bhar gaya.

Main sari cheezen lekar aayi aur babuji ki cheezen unko dene gayi. Jab

babu ji ne cheezen pakdi to mere haathon se unka haath achanak hi

chhoo gaya, mera pair fisal gaya aur mere sasur ne mujhe apni mazboot

bahon mein lekar sambhal liya. Mein unki chari chhati ke saath sat

gayi. Meri chuchi unki chhhati mein dhas gayi aur mere jism mein aag

dahakne lagi. Unka haath barbas hi mere kulhon par reng gaya aur main

sharma gayi. ' maaf karna bauji mera pair fisal gaya tha, aap mujhe na

tham lete to main to gir hi jaati.' maine kaha. Vo bole,' beti main

kiss liye hoon, agar kissi cheez ki zarurat ho to bejhijhak mere pass

aana, main apne parivar ke liye sab kuchh karne ko tayyar hoon, mujh

se kabhi bhi sharmana nahin, meri beti,' Maine gaur se dekha ke unke

pajame mein unka lund salami de raha tha, Main muskurayi aur apne aap

se boli, sali, tu bahar kaya dhood rahi hai, maha lund to ghar mein hi

virajmaan hain, yeh sala sasur mere upper hi nazaren laga ker baitha

hai, aur mujhe bhi to lund chahiye, lekin ab sala budha nahin janta ki

main uss ke saath chudai to karun gi par isski beti ko bhi isske lund

se chudwaungi.

Main sari raat apni aur Radhika ki chudai ka plan banati rahi. Jab

main sara kaam khatm kar ke apne kamre mein Radhika ke pass ja rahi

thi to babuji ke kamre se awaz aa rahi thi,' ahhhh mar dala mere

rajaaa, aaj kaya kha kar aye ho, meri chut ki dhajian hi udaa dalin,

aaj tera lund kuchh zayada hi jor mar raha hai, aisa lagta hai jaise

kissi jawan aurat ki kalpna karke mujhe chod rahe ho, mere swami main

apke hallabi lund ke samne nahin tik sakyi, ye main nahin jhel sakti,

jab kal mai apne mayake chali jauyingi to shukar ho ga kam se kam do

mahine to aram se kat loongi, aur tum muth mar mar ke karna guzara,

ohhhh main jhadi meri chut ka ras nikal gaya, nikal lo apna lauda meri

bur mein se main to thak gayi,' Babuji bole" sali mera to jhad de,

chus ke, muth mar ke ya fir apni gaand meinchudwa ke, main iss khambe

jaise lund ko le kar kaha jaun, behnchod mera to pani nikal do" Sasu

ma boli" apna pani aap hi nikal lo main to sone lagi hoon.' Mera dil

kiya ke maindaur ke babuji ka lund apni chut mein lekar mast ho jayun

par essa kar na saki. Lekin essa kuchh na kar saki aur apne akmre

jakar sari raat babuji ke lund ke sapne dekhte huye jag kar nikal di

Subah jab main uthi to Radhika mere saath lipti hui thi, uskehaath

mere mammon per thai jinhe vo daba rahi thi. Main uth kar bathroom

hokar aayi to meri nanad apni chut khujla kar boli,"bhabi agar tumne

kissi lund ka intzam nahin kiya to main mar jayungi, mujhe bach lo

meri pyari bhabi," Maine muskura kar puchha, kisska lund chahiye. Usne

jawab diya lund kissika bhi ho, chalega, ab to chut itni besabari ho

chuki hai ki agar mere baap ka bhi mil jaye to iski aag thandi karne

ke liye le loongi" Maine kaha" theek hai ab mukar mat jaana kion ki

tujhe aaj babuji ka lund hi milne wala hai, tu bas essai hi karma

jaise main kehti hun," Vo maan gayi. Jab vo tayyar hone chali gayi to

mai babuji ki chai lekar unke room mein chali gayi. Maine janbujh kar

sari ka pallu niche gira rakha tha, jis karan mere vaksh aadhe se

adhik nange ho rahe thai. Sasu maa apne mayake jaane ke liye tayyar ho

rahi thi.

Maine aage jhuk kar chai babuji ko di aur apne kulhe inke haath se

ragad diye. Maine dekha ki unka lund uthak baithak karne laga hai.

Maine jaan bujh kar unse kaha" babuji, dekhpo mera haath dukh raha

hai, kaya ye sooj gaya hai, dekho to sahi," itna keh kar apna haath

unke haath mein de diya, unhon ne mera haath pakad liya aur malne

lage, main unse sat kar baith gayi. Maine note kiya ki babuji mera

haath sahlane lage aur unka lund pajame ke andar sar uthane laga.

Maine unko puri tarah utejit kar dala. Jab vo mere kandhe par haath

rakhne lage to main jaan bujh kar boli, " ab main chalti hun maaji ka

nashta banana hai,' maine haath chhudaya aur chali gayi lekin babuji

ka bura haal tha, vo apne lund ko masal rahe thai.

Maine Radhika ko kaha,' tum maaji ke jaane ke baad, kamar main dard ka

natak karna, aur babuji ko kamar par iodex lagane ke liye kehna, aur

dheere dheere neeche tak unka haath le jaana, lekin ye sab us wakt

karna jab main maaji ko bus stand par chhodne jayun aur ghar main koi

na ho. Dekhna vo tere ko chodne ko tayyar ho jayenge, maine unki chai

mein shilajeet mila di thi, aaj teri chudai pakki ho jayegi meri

banno, tum yeh knicker aur Tshirt pehn lo air bra aur panty mat

pehnana, tera baap aaj kissi ko bhi chodne ko tayar ho jaye ga, tum us

par apni jawani ka jadu chala do meri rani uske baad hum dono uske

lund ke maze lenge, vo bhi chut ka bhookha hai meri jaan' Vo hairan ho

kar meri taraf dekhne lagi. Main fir babu ji ke kamre mein gayi aur

unki janghon par haath rakh kar baten karne lagi, aur unke lund ko bhi

chhu liya. Vo bechain hone lage aur main muskura kar bahar aa gayi.

Main thodi der mein vapis agayi aur Radhika ke kamre mein jhankne

lagi. Radhika ne awaz lagayi" Pappa zara meri kamar par balm laga

dena, mujhe bahut dard ho raha hai,' usne ye kehte huye apni Tshirt

upper utha dali aur us ka gora pet nanga ho gaya, aur jab usne apni

knikers ko neeche kar diya to uski jaangh nazar aane lagi. Meri aankh

ne dekha ki babuji ki nazar mein vasna ki chamak ubhar aayi. Unki

aankhon mein ek lali nazar aane lagi. Vo apni beti ke nazdeek aa gaye

aur vasnatmak nazaron se dekhte huye bole" beti kaya huya, dard kahan

ho raha hai, aur unka haath apni beti ki kamar par chala gaya aur uski

kamar ko sahlane laga.

Maine dekha ki ab babu ji nahin balki unka lund bol raha tha. Unki

awaz se saaf zahir tha ke kaam vasna mein vo baap beti ke rishte ki

pavitarata ko bhool gaye thai. Ab kamre mein sirf chut aur lund ke

milan ka scene bana huay tha. Babuji ke haath kaamp rahe thai jab vo

apni beti ki kamar ko sahla rahe thai. Radhika ne apna sir babuji ki

chhati par tika diya. Radhika ki sansen tez ho chuki thi.

Babu ji ne iodex ki shishi uthai aur kamar par lagana shuru kar diya.

Radhika ki chuchi ab unke sharir se sat gayi thi aur babuji aur bhi

utejit hane lage. Babuji ne apna ek haath uski chuchi par rakh diya

aur dheere se daba diya." ohhh papa dheere se, mujhe bahut ghabrahat

ho rahi hai, haye mujhe dard ho raha hai, balm maliye na, papa,"

Radhika boli aur apne baap ke sharir se chipak gayi. Babuji ka lund ab

bekabu ho chuka tha. Radhika ne apni knickers ko aur neeche kar diya

jis ke saath hi uski jaangeh puri tarah nangi ho gayi. Ab uske kulhe

bas uski Tshirt se hi dhake huye thai. Babuji ne kaampte haathon se

Radhika ki kamar aur janghon par balm lagana shuru kar diya aur

Radhika aur zor se apne baap ke sharir se chipakati chali gayi. Main

matarmugdh ho kar kamre ke andar ka scene dekh rahi thi aur mere jism

mein bhi kaamagni jal rahi thi. ' Papa mere kulhe bhi dard kar rahe

hain, please vahan bhi balm laga do,' Babuji ne balm lagana shuru kar

diya aur uski Tshirt ko upper utha diya. Vo apni beti ke chuttaron par

balm lagane lage. Radhika ne apna haath apne papa ki chhati par rakh

diya aur apne hoth unke honthon par rakh diye, uski sansen papa ki

sanson se takra rahin thi. Babuji ne beti ko bahon main bhar liya aur

uske honthon ko chumne lage.. Radhika ne natak karte huye apne aap ko

chhudane ki jhuthi si koshish ki lekin babuji ne ussee aur bhi kas kar

jakad liya aur apni bati ko betahash cumne lage, unka lund Radhika ke

pet ko touch kar raha tha, Babuji ne uski chuchi kas kar dabani shuru

kar di aur radhika ne drama kiya" papa, yeh kaya kar rahe ho, main

aapki beti hun, kaya yeh paap nahin hai, aap mujhe chhod do, hum yeh

sab nahin kar sakte, paapa, mujhe chhod do, please," Vo bhi janti thi

ki ab papa vapis aane ke kabilnahin rahe kion ki unka lund ab phatane

ke karib hi tha. Papa ne apni beti ka haath apne lund par rakh kar

kaha" meri beti lund aur chut ka ek hi rishta hota hai aur vo hai

chudai ka rishta, meri pyari beti, tu bhi lund ke bina tadap rahi ho

mujhe pata hai aur saath hi teri bhabi bhi chudasi hai kioke ke uska

pati bhi usse chod nahin sakta, aa jayo main teri chut ko chod kar

mast kar doonga, beti mera lund kaise dahak raha hai, tum isko haath

mein lekar sahlayo zara, dekhotumhari chuchi kitni kadi ho gayi hai,

jaldi se apni Tshirt bhi uttar do mera lund tujhe chodne ko tadap raha

hai," Radhika bhi masti mein bhar uthi aur apni Tshirt utttar kar puri

tarah nangi ho gayi aur papa ke lund ko haath mein bhar ke muthiane

lagi. Lund ki aankh se pre-cum ki do boonden tapak padi aur babuji

chudai ki masti mein aa gaye aur zor zor se apni beti ki chuchi ko

muhn mrin lekar chusne lage, " beti tu kitni sexy ho gayi hai, mera

lund teri chut ka pyasa hai, ab mujhe apni chut ka swad dikhao, meri

pyari beti aur mere lund ko chus kar iska swad dekho, jaldi se main

aaj savere se hi chodne ke liye tadap raha hun, layo apni tangen khol

kar apni chut ka didar to karwayo," Radhika ne apnijanghen khol di aur

uski chut muskura uthi kioki vo aaj pehli baar kissi asli lund se

chudai karane wali thi. Papa ne apna muhn uski chikni chut mein ghussa

diya aur apni jeebh chut ki phankon ke andar dal di. " ahhhhh papa,

yeh kaya kar diya meri chut ko, yeh to pani chhodne lagi hai, chus lo

meri bur ko papa, yeh aaj chudai ke liye tadapti hai, layo main aapke

lund ko chus leti hun, mujhe chod dalo aaj, chod do apni beti ko, mere

papa,' iske saath hi Radhika ne papa ka lund apne muhn mein le liya

aur lagi cusne unke lund ko. Lund aag ki tarah dahakne laga. Babuji

apne chuttar aage pichhe karne lage, Radhika babuji ke lund ko gale ke

bheetar tak le gayi aur karhhane lagi, udhar babuji ki jeebh Radhika

ki chut mein puri tarah sama chuki thi aur uski chut ka ras, babuji ke

muhn se behne laga, jaise ki unke muhn se laar tapak rahi ho, Radhika

ki chut jhad rahi thi.

Tabhi maine kamre main entry kar di aur boli," sale babuji, itne

kamine nikle ke apni hi beti ko chodne ke liye tayar ho gaye, betichod

sale main kaya mar gayi thi, mujhe kaun chode ga behanchod, tera beta

to behanchod mujhe chhod kar chala gaya aur tu bhi sale apni beti ko

hi chod raha hai, mera kaya ho ga, " Babuji mujhe dekh kar ghabra gaye

aur fir sambhal kar bole," beti tu bhi a jayo meri beti, mera lund

meri bahu aur beti ke liye kaafi hai, main tum dono ko chod kar shant

kar doonga, aajoyo meri rani bahu, agar beta chala gaya hai to kaya

huya, baap to zinda hai, mere pass aa main teri chuchi ko bhi chusta

hun, aa meri beti tu bhi koi kam sexy nahin ho, tera jism bhi chudai

ki aag mein jal raha hoga, la mere pass aa main tujhe bhi tript

kardoonga," Maine fatafat apne kapre utarne shuru kar diye aur bistar

par aake babuji ke jism ko chatne lagi aur Radhika ki chuchi dabane

lagi. Babuji ne apna haath meri gaand par firana shuru kar diya. Maine

babuji ka lund haath mein le liye aur usse sahlana shuru kar diya.

Unka lund puri tarah kada ho chuka tha. Maine usse chatna shuru kar

diya, Meri chut bhi paniya gayi thi. Maine kaha " ap pehle Radhika ko

chod kar shant kar do, isski chut abhi kunwari hai, lekin zara, pyar

se chodna apni bitiya ko," ye kehte huye maine Radhika ki tahngen

chauri kar di aur uski chut par babuji ka lund tika diya, unke tatton

par haath firaya jis karan babuji ke muhn se ahhh nikal gayi, maine

unka lund Radhika ki chut par ragada jis mein se pehle hi pani nikal

raha tha. Uski khujli itni badh gayi ke vo apne aap par kabu na rakh

saki" Papa ab aur mat tadpayo, meri chut mein aag lagi hui hai, aap ka

lund ragadna mujhe pagal bana raha hai, papa meri chut ke anadar pel

do apna loda, papa mere saath suhagrat mana lo, mujhe mummy ki tarah

chod dalo mere pyare papa, mujhe pel do papa, pleeeeaseee, bhabi meri

chut mein papa ka lund pel do, meri pyari bhabi, uske baad tum maze

looy lena papa ke lund ke saath, main teri vintee karti hoon, meri aag

bujha do, pleaseeeee."

Babu ji ka lund pakad kar maine Radhika ki chut ke mukh par tikaya aur

kaha" babuji pel do apna lund apni beti ki bur mein, dekho kaise tadap

rahi hai sali, kaise dahak rahi hai iski chut, ab to isski aag apka

lund hi shat kar sakta hai, uda do isski chut ki dhajian, pel do apni

beti ko, dal do apna lund ras is ki pyasi chut mein, " Babuji ne der

karna munasib nahin samjha aur dhaka mar ke lund pel diya, aur unka

adha lund pehle dhakke mein chut mein sama gaya. Radhika chillayi"

papa bahut dard ho raha hai, lagata hai meri seal toot gayi hai, bahar

nikal lo apna lund, dard bardashat nahin ho raha papa, please." Lekin

babuji ne dhake marna jari rakha. Unka lund apni beti li chut ke andar

bahar ho raha tha. Radhika ki chut se lahu bene laga. Babuji bhi

purane khiladi thai, " beti dard thodi der mein khatm ho jayega, Ritu,

tu Radhika ki chuchi chusna shuru kar do aur is ki chut ko bhi

sahlayo, saali bahut tight hai isski chut, lekin main aaj ise chod kar

thandi kar doonga, le beti le lo apna papa ka lund apni pyasi bur mein

aur mita do isski pyas.'

Maine apni jeebh se Radhika ki chuchi chatna shuru kar diya aur apni

unglion se uski chut ke aspas ka ilaka utejit karna shuru akr diya.

Uska dard kam ho gaya aur usse maza aane laga, aur vo chuttar uchhal

kar babuji ke dhakkon ka jwab dene lagi," papa mera dard khatm ho gaya

hai, aapke lund se mujhe jannat ka maza aa raha hai, aapka lund meri

chut ko swarg dikha raha hai, pelo apna lund meri chut ke andar, chod

do apni beti ko, le lo meri kunwai chut ke maze, jor se chodo mujhe,"

Maine babuji ke lund par unglian feri aur unke chuttar par thapki di

aur kaha" babuji, chodao apni harami beti ko sale, jor se laga dhake

behanchod, dekhta kaya hai sale tujhe aaj apni jawan aur kunwari beti

ki chut ka maza mil raha hai, sale ban giya hai tu betichod aur thodi

der mein bahuchod bhi ban jayega, sale chod dal issko, chod dalo apni

beti ko, vo kab se pyasi hai lund ki, mita to isski pyas, chhor do

apna pani iski chut main.' Babuji bhi pagalon ki tarah dhakke marne

lage. Kamre mein ghacha ghach ki awazen aane lagi, Radhika ke muhn se

ahhhhhhhhhh, ohhhhhhhhhhh ki awaz aa rahi thi.

Babuji ne apni beti ke chuttron ko kas ke pakad rakha tha aur usse pel

rahe thai," ahhhhhhhh, beti mera bhi time nazdeek aa raha hai, main

bhi jhadne wala hoon, haan main sach mein betichod ban gaya hoon, aur

mujhe khusi hai ke tumne apni kunwari chut ,ere liye sambhal ke rakhi

hui thi, han beti chudwa le mujh se meri pyari beti, kasam teri jawani

ki aaj tak itna maja nahin ayia, kaya chutr hai teri, le lo mera pani

teri chut mein ja raha hai, mera pani teri kokh mein gir raha hai,

tera baap jhad raha hai, main gayaaaaaaaa," Yeh kehte huye babuji ne

pichkari Radhika ki choot mein chhod di aur unka lund chhapak ki awaz

se chut se bahar nikal aaya. Maine pehle unka lund chus kar saaf kiya

aur fir apni nanad ki chut ko chata aur ham dodno hi babuji ki bagal

mein let gayi.

samaapt.....

 
चुदाई के दिन चुदाई की रातें -1



मेरा नाम सुधा है और मैं बीए मे पढ़ती हूँ. दिखने में सुंदर हूँ लेकिन नेचर शर्मीली है. मेरा फिगर 36-26-36 है और रंग गोरा है. पिच्छले हफ्ते तक मैं कुँवारी थी. मैने राज शर्मा की सेक्सी स्टोरीस पढ़ी थी और ब्लू फिल्म्स भी देखी थी जिस कारण मुझे सेक्स कि समझ तो थी लेकिन किसी ने मुझे कभी चोदा नहीं था. मैं चुदाई की इच्छा के कारण हमेशा अपनी चूत को शेव कर के रखती थी कि ना जाने कब कोई चुदाई करने वाला मिल जाए. लेकिन जैसे कि मैने कहा, मैं डरती थी और किसी को चुदाई के लिए न्योता देने की हिम्मत नहीं पड़ती थी. घर में मेरे सिवा पापा और एक छोटी बेहन नामिता थी. पापा श्री हंस राज एक दुकान मालिक थे और छ्होटी बेहन 12 क्लास में पढ़ती थी. नामिता भी दिखने में बहुत सेक्सी थी. वो अक्सर स्कर्ट्स और टीशर्ट पहनती थी. उसस्की स्कर्ट्स बहुत छ्होटी होती और उसस्के उरोज़ उसस्की टी-शर्ट से बाहर निकलने को तैयार रहते.

एक दिन नामिता की नज़र मेरी पॉर्न बुक्स पर पड़ी और वो बोली,” दीदी, ये क्या बच्चो वाली किताबें पढ़ती हो, मैं तुझे ब्लू फिल्म दिखाती हूँ जिस में हबशी लड़के एक गोरी औरत को आगे पीच्छे से चोद्ते हैं. दीदी आज कल कहानी तो बच्चे पढ़ते हैं. एक बात बतायो, तेरा कोई बाय्फ्रेंड है या नहीं, कभी क़िस्सी ने तेरी चूत का उद्घाटन किया है या नहीं?” मैं अपनी छ्होटी बेहन की बात सुन कर दंग रह गयी. “नामिता क्या बकती हो? तुम अभी बच्ची हो. तुझे अपना मन पढ़ाई में लगाना चाहिए. अगर पापा को तेरी ऐसी बातों का पता चल गया तो मार पड़ेगी. फिर मुझे मत कहना” नामिता हंस पड़ी,”दीदी, जब चूत में जलन होती है तो लंड ही बुझाता है वो आग. तुझे अगर मज़े लेने हैं तो बता देना. मैं स्कीम बना लूँगी. अपने यार से तेरी भी चूत ठंडी करवा दूँगी. और रही पापा की बात, तुम फिकर मत करो. हमारे पापा भी ऐश करते हैं. तू नहीं जानती कि पापा के संबंध उषा मौसी के साथ हैं. पापा मौसी के साथ जो कुच्छ करते हैं, शायद हमारी मा के साथ भी ना किया हो उन्हों ने. दीदी ये दुनिया इतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है”

मेरी मा की मौत के बाद उषा मौसी हमारा ख्याल रखती थी और हमारी गली में ही रहती थी. उषा मौसी के साथ पापा का चक्कर? सोचते ही मेरी चूत गीली हो गयी. मेरी मा की मौत आज से 3 साल पहले हुई थी. नामिता मेरे पास आई और मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे गालों पर हाथ फेर कर बोली,” दीदी, ज़िंदगी मज़े लेने के लिए है. जब पापा मौसी के साथ चुदाई करते हैं तो हम को किस बात की रोक है. हम तो अभी जवान हैं. इस चूत में जो आग लगती है उसस्के लिए भगवान ने लंड नाम की मज़ेदार चीज़ बनाई है. और रही पापा की बात आज रात को तुझे पापा की और मौसी की चुदाई दिखा दूँगी और तू कहे तो कल अपने यार से तुझे भी जवानी के मज़े दिलवा दूँगी. वैसे भी साला तुझे भूखी नज़रों से देखता है वो.” मेरे मन ज़लज़ला उठा खड़ा हुआ और मेरी चूत से पानी आने लगा.

रात को उषा मौसी आई और खाना बनाने लगी. मौसा जी नाइट शिफ्ट में काम करते थे और मौसी हमारे घर ही सो जाती थी. मैने नामिता की बात सुन कर उषा मौसी को गौर से देखा. मौसी की उमर कोई 32 साल की होगी और वो भरे जिस्म की मालिका थी. चूतड़ काफ़ी भारी और चुचि भी बड़ी थी. मौसी ने ग्रीन रंग की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी लेकिन उसस्की चुचि जिस तरह उठक बैठक कर रही थी लगता था उससने ब्रा नहीं पहनी थी. पापा रसोई में चले गये और मैने देखा की पापा का हाथ मौसी के चूतड़ को टटोल रहा था और मौसी शर्मा कर नीचे की तरफ देख रही थी. मैं और नामिता डाइनिंग रूम से ये नज़ारा देख रहे थे. नामिता ने धीरे से कहा,”देखो दीदी, पापा कैसे हाथ फेर रहे हैं मौसी की गांद पर. आज ज़रूर चोदेन्गे मौसी को.” इसके साथ ही नामिता ने मेरे चूतड़ को ज़ोर से मसल दिया,” नामिता, ये क्या करती हो, कितना दर्द होता है मुझे” नामिता मुस्कुरा पड़ी,”दीदी, ये दर्द नहीं है, यही तो मज़ा है. आज दिखाती हूँ तुझे लंड और चूत का मधुर मिलन.”

टेबल पर पापा अपने सामने शराब का ग्लास रखे हुए थे और चुस्की ले रहे थे. आज वो पानी जैसी दिखने वाली शराब पी रहे थे. फिर अचानक पापा ने ग्लास मौसी की तरफ बढ़ा दिया और मौसी ने चुप चाप पी लिया. मैने देखा के पापा ने टेबल के नीचे से अपना हाथ मौसी की जाँघ पर फेरना शुरू कर दिया. पापा और मौसी की आँखों में लाल रंग के डोरे तैरने लगे थे. उनकी साँसों में तेज़ी बता रही थी की दोनो चुदाई करने के लिए बेताब हैं. नामिता और मैने खाना जल्दी से ख़तम किया और अपने अपने कमरे में चली गयी. नामिता ने मुझे आँख मारी और कहा,” दीदी आज तुम मेरे साथ ही सो जाओ, मुझे तुमसे कोई बात करनी है.” मैं उसस्के पीछे चल पड़ी. नामिता के कमरे की दीवार में एक बड़ा सा छेद था जिस में से हम दोनो पापा की चुदाई का खेल देखने वाले थे. नामिता और मैं दोनो ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिस्तर पर चली गयी.

नामिता का जिस्म भी बहुत सेक्सी था. उसस्के चुचक काफ़ी बड़े थे और उससने अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव कर रखा था. मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरी बेहन ने मेरी चुचि को मसल डाला और मेरे होंठों पर किस करने लगी, मेरे चूतड़ को सहलाने लगी, मेरी चूत पर हाथ फेरने लगी,” ओह नामिता….ये क्या कर रही हो….मुझे कुच्छ होता है….मेरे बदन में झूर झूरी सी हो रही है…नामिता…..मेरी चूत में खुजली हो रही है…तुम मुझे किस कैसे कर रही हो….हाई मेरी बेहन मुझे क्या हो रहा है..तेरा आलिंगन मुझे उतेज़ित कर रहा है….तेरे बदन का सपर्श मुझे जला रहा है….मुझे छ्चोड़ दो प्लीज़” मेरे मूह से निकला तो नामिता शरारती तरीके से मुस्कुरा पड़ी और फिर से मेरी गर्दन और कंधों को किस करती रही. नामिता की जीभ से मेरी गर्दन और कंधे गीले हो गये लेकिन मुझे बहुत कामुक आनंद आ रहा था. नामिता का हाथ मेरी चूत को रगड़ने लगा तो चूत रस से उसस्की उंगलियाँ भीग गयी,” सुधा, साली देख तेरी चूत का रस कैसे बह रहा है. तेरी चूत अब चुदाई के लिए तड़प रही है. आज की रात तो मैं तुझे लेज़्बीयन प्यार से खुश करूँगी लेकिन कल तेरी चुदाई का वो बंदोबस्त करूँगी की याद रखोगी सारी उमर भर. नामिता ने अगर आज भी तेरी चूत का पानी ना निकाला तो मेरा नाम बदल देना.”

दूसरे कमरे में भी हुलचूल शुरू हो चुकी थी. नामिता मुझे छेद के पास ले गयी और हम दोनो पापा के कमरे में झाँकने लगे. पापा और मौसी दोनो शराब पी रहे थे और पापा ने मौसी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. मौसी चिहुक कर बोली,” जिज़्जु, अपने पाजामे को भी तो उतारो, अपनी साली को भी तो अपने लोड्‍े के दर्शन करवायो. मेरी बेहन को चोद कर तो दो लड़कियाँ पैदा कर ली हैं तुमने, अब मुझे भी तो एक बच्चे की मा बना दो मेरे जिज़्जु राजा,” मौसी बिस्तर पर टाँगें फैला कर बोल रही थी. मौसी की चूत पर काले काले बाल थे. तभी पापा ने अपना पाजामा खोल दिया और अपना काला लंड मौसी के मूह पर रख दिया और खुद मौसी की चुचि को सहलाने लगे,” उषा, मेरी रानी तेरा पति तुझे बच्चा नहीं देता क्या? अगर तू चाहे तो मैं तुझे मा बना सकता हूँ. मैने तुझे कभी ममता(हमारी मा) से कभी अलग नहीं समझा,” मौसी गुस्से में बोली,” जीजू मेरा पति कुच्छ नहीं कर पाता. साला चूत पर लंड रखते ही झाड़ जाता है और मैं तरसती रह जाती हूँ. इसी लिए तो अपने जिज़्जु के सामने टाँगें खोल देती हूँ, जिज़्जु राजा. लेकिन हर रोज़ चोरी से चुदवाते हुए डर लगता है, कहीं सुधा और नामिता को शक हो गया तो क्या होगा?”

पापा ने अपना लंड अब मौसी के मूह में धकेलते हुए कहा” मेरी दोनो बेटियाँ भी जवान हो चुकी हैं. उनको भी लंड की तलाश होगी. वो अपने पापा की स्थिति को समझ लेंगी. वो समझ लेंगी कि अगर उनका पापा उनकी मौसी को चोद लेता है तो कोई बुरा नहीं करता. ये तो डिमॅंड और सप्लाइ का सिधान्त है. अगर मेरी साली को उसका पति नहीं चोदेगा तो क्या मैं भी छ्चोड़ दूँगा उसको पड़ोसी के लिए? शाबाश मेरी रानी चूस मेरा लंड, चाट ले मेरे अंडकोष. आज की रात मैं तुझे अपने बच्चे की मा बना कर यादगार बना देना चाहता हूँ, ज़ोर से चूस लंड को रानी, काट खायो मेरे लंड को उषा रानी.”

पापा अपनी गांद आगे पीच्छे कर रहे थे और मौसी मज़े से लंड को चूस रही थी. देखते ही देखते पापा भी पलंग पर लेट गये और उन्हों ने अपना मूह मौसी की जांघों के बीच डाल कर मौसी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. तभी नामिता ने मेरे निपल को किस कर के चूसना शुरू कर दिया और बोली,” सुधा, पापा की पोज़िशन को 69 कहते है. बहुत मज़ेदार पोज़िशन होती है जब मर्द औरत की चूत चाटता है और औरत मर्द का लंड चुस्ती है तो उस्स्को 69 कहते हैं. मैं आज तेरी चूत को चाट कर खलास कर दूँगी तो देखना कितना मज़ा आए गा, दीदी. पापा और मौसी तो अपनी मस्ती में खो चुके हैं. तुम मुझे अपने जिस्म के साथ खेलने दो. मुझे तेरी चूत का पानी निकालना है किओं की कल तो तेरी ज़िंदगी का हसीन दिन होगा,”

मैं मंतर मुग्ध हो कर पापा और मौसी का खेल देख रही थी. मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरी चूत के होंठ उतेज्ना से फूल गये हों. मेरा पूरा बदन गान गॅना चुका था. मेरी बेहन के हाथ जब मेरे जिस्म पर चलते तो मैं झुन झुना जाती. मुझे भी इच्छा होती कि मौसी की तरह मुझे भी लंड मिलता जिस्सको मैं चुस्ती और अपनी चूत को चुस्वाति. मौसी के मुख रस से पापा का लंड भीग कर चमक रहा था और दोनो की भारी साँसें चलने की आवाज़ सुन रही थी. उधर नामिता ने मेरे निपल्स को चूसना जारी रखा हुआ था और वो मेरी चूत को सहलाए जा रही थी.” ओह्ह्ह्ह नामिता…मुझ से नहीं रहा जा रहा…मुझे भी पापा जैसा लंड ला दो कहीं से…अपनी बेहन की चूत को मस्त लंड से भर दो…मेरी चूत में आग लगी हुई है मेरी बेहन…मेरी आग बुझा दो नामिता”

दूसरे कमरे में पापा ने मौसी को घोड़ी बना दिया. मौसी अपने घुटने और हाथों के बल झुक चुकी थी और पापा उसस्के चूतड़ को थाम कर अपना लंड उसस्की चूत पर पीच्छे से धकेलने लगे.” रानी, मुझे घोड़ी बना कर चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है. तुझे कैसा लगता है उषा मेरी रानी. तेरे चूतड़ बहुत सेक्सी लगते हैं मुझे. एक दिन तेरी गांद ज़रूर चोदुन्गा. वह कितनी सेक्सी हो तुम मेरी साली.” उषा मौसी नी चे से बोल रही थी,” जिज़्जु तुम चोदना शुरू करो. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मुझे मेरे जिज़्जु चोद्ते हैं. तुम मुझे घोड़ी बनाओ या कुतिया, मुझे बस अपने जिज़्जु का लंड अपनी चूत में चाहिए….चोदो मुझे जिज़्जु राजा….थोक्दो अपना लोड्‍ा मेरी चूत में….चोद लेना मेरी गांद भी जिज़्जु….पेल मुझे”

मेरे बिस्तर पर नामिता ने अब मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल दिया. मेरी बेहन मेरे उप्पेर चढ़ि हुई थी. उसस्की चुचि मेरे वक्ष स्थल पर रगड़ रही थी. मुझे किस करते हुए उसस्के होंठ मेरे निपल्स से होते हुए पेट पर और आख़िर मेरी चूत की त्रिकोण की तरफ बढ़ने लगे. उसस्के होंठ आख़िर मेरी चूत की फांकों को खोलते हुए अपने निशाने पर जा पहुँचे. उसस्की जीभ मेरे क्लाइटॉरिस को चाटने लगी और फिर उससने मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसा दी. मुझे उसस्की ज़ुबान क़िस्सी लंड जैसी लग रही थी. नामिता नेमेरी जांघों को कस कर पकड़ रखा था. उसस्की ज़ुबान मेरी चूत को चोद रही थी. पापा के कमरे में अब मैं देख नहीं सकती थी लेकिन उनकी आवाज़ें सुनाई पड़ रही थी. मुझे नहीं मालूम था की औरत भी दूसरी औरत की जब चूत चाटती है तो इतना मज़ा आता होगा. “हे भगवान, मुझे अपनी बेहन के चूमने चाटने से इतना मज़ा मिल रहा था तो असली लंड से मेरी हालत क्या होगी?

मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और मेरी बेहन मज़े से उस्स्को चाट रही थी. मुझे लगा कि मेरी चूत झड़ने लगी है. मैने अपने चूतड़ उप्पेर उठाने शुरू कर दिए ता कि मैं नामिता की पूरी ज़ुबान को अपनी चूत में घुस्सा कर और मज़ा ले सकूँ,’ आआआअ……ऊऊऊऊ…..आअगग्घह ……हाईईईई….उससिईईईई,,,नामिताआअ….चूस मेरी चूत….मैं गइई,….मेरी चूत से पानी जा रहा है….या मुझे क्या हो गया मेरी बहना…डाल दे अपनी जीभ मेरी फुदी में मैं झदीए”

मैं ना जाने कितनी देर तक बिस्तर पर शरीर एन्थ कर तड़पती रही, मेरी चूत रो रो कर रस छ्चोड़ती रही और मेरी बेहन मेरी चूत का रस चाटती रही. जब नामिता ने चेहरा उठाया तो उसस्के होंठों से चूतरस टपक रहा था. नामिता मेरी बेहन बहुत खूबसूरत लग रही थी. जब उससने मुझे होंठों पर किस किया तो उसस्के मूह से मुझे अपनी चूत के रस का स्वाद मिला. नामिता की आँखें लाल हो चुकी थी और फिर उससने मेरे कानो को चूमा. मैने भी अपनी बेहन को मज़ा देने की सोच ली. मैने भी उस्स्को वैसे ही किस करना शुरू कर दिया जैसे उससने मुझे किया था.. मुझे हैरानी थी कि जो मैं कर रही थी वो लेज़्बीयन सेक्स था लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. नामिता का जिस्म बहुत नमकीन लग रहा था मुझे. मैने उसस्की मस्त चुचि को जब अपने मूह में लिया तो मुझे जन्नत मिल रही थी. नामिता के चुचक बहुत कड़े हो चुके थे. मैने नामिता को पेट के बल उल्टा दिया और फिर उस्स्को गर्दन से चूमना शुरू कर दिया. मेरी बेहन की गांद का उभार बहुत कामुक लग रहा था.

मैने धीरे से नामिता की पीठ को किस करना शुरू कर दिया और उसस्के चूतड़ को सहलाया. मेरी बेहन के चूतड़ की दरार मुझे बहुत सेक्सी लग रही थी. अपना हाथ नीचे ले जा कर मेने उसस्की चूत को सहलाया और पीठ को चूमते हुए अपने होंठ मैने उसस्की गांद की घाटी तक पहुँचा दिए. नामिता अपनी चूत मेरे हाथ पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी और उस पर धक्के मार रही थी. आख़िर मैने अपनी ज़ुबान को नामिता के चूतड़ की दरार में डाल कर चाटना शुरू कर दिया. मुझ पर चुदाई का एक नशा च्छा रहा था. नामिता के चूतड़ का बहुत मज़ेदार स्वाद था और मैने अपनी ज़ुबान उसस्की गांद के छेद में घुसा दी,” ऊऊऊऊ…..आआआअ……दीदी…..चॅटो…बहुत मज़ा आ रहा है…..शाबाश दीदी चाटती जाओ….हाईईईईईई”

नामिता की गांद से नमकीन स्वाद मुझे बहुत सेक्सी लगा और मैने उसस्की गांद को चटाना जारी रखा और उंगली से उसस्की चूत को चोदना जारी रखा. पहले मेरी एक उंगली उसस्की चूत में थी फिर मैने उसकी चूत दो और फिर तीन उंगली डाल कर चुदाई शुरू कर दी. मेरी ज़ुबान उसस्की गांद चोद रही थी और उंगलियाँ उसस्की चूत को चुदाई सुख दे रही थी. मेरा हाथ उसस्की चूत के रस से भीग गया था और वो मेरे हाथ पर अपनी चूत ऐसे चोद रही थी जैसे की क़िस्सी लंड पर पेल रही हो. उससने थोड़ी देर में पानी छ्चोड़ दिया. जब वो झाड़ गयी तो मैने उसस्की चूत को खूब चूसा और चूत का रास्पान कर लिया.” सुधा तू तो बहुत मस्त चुस्ती है. मैं तो तुझे अनारी ही समझ रही थी, तू तो साली मस्त लेज़्बीयन निकली” मैने उसस्के चूतड़ पर काट खाया और बोली,” नामिता जैसी जिसकी बेहन हो वो अनारी कैसे हो सकती है. अब कल की चुदाई को मत भूल जाना”

क्रमशः...............




Chudayi ke Din Chdayi ki Raaten -1

Mera naam Sudha hai aur main BA main padhti hoon. Dikhne mein sunder hoon lekin nature sharmilee hai. Mera figure 36-26-36 hai aur rang gora hai. Pichhle hafte tak main kunwari thee. Maine porn stories padhi thee aur blue films bhi dekhi thee jiss karan mujhe sex ki samajh to thee lekin kissi ne mujeh kabhi choda nahin tha. Main chudayi ki ichha ke karan hamesh apni chut ko shave kar ke rakhti thee ki na jane kab koi chudayi karne wala mil jaye. Lekin jaise ki maine kaha, main darti thee aur kissi ko chudayi ke liye nayota dene ki himmat nahin padti thee. Ghar mein mere siva Papa aur ek choti behan Namita thee. Papa Shri Hans Raj ek dukan malik thay aur chhoti behan 12 class mein padhti thee. Namita bhi dikhne mein bahut sexy thee. Vo aksar skirts aur Tshirts pehnti thee. Usski skirts bahut chhoti hoti aur usske uroz usski Tshirts se bahar nikalne ko taiyar rehte.

Ek din Namita ki nazar meri porn books par padi aur vo boli,” Didi, ye kia bachon wali kitaben padhti ho, main tujhe blue film dikhati hoon jiss mein habshi ladke ek gori aurat ko aage peechhey se chodte hain. Didi aaj kal kahani to bache padhte hain. Ek baat batayo, tera koi boyfriend hai ya nahin, kabhi kissi ne teri chut ka udghatan kia hai ya nahin?” Main apni chhoti behan ki baat sun kar dung reh gayi. “Namita kia bakti ho? Tum abhi bachi ho. Tujhe apna man padhayi mein lagana chahiye. Agar Papa ko teri essi baton ka pata chal gaya to maar padegi. Fir mujhe mat kehna” Namita hans padi,”Didi, jab chut mein jalan hoti hai to lund hi bujhata hai vo aag. Tujhe agar maze lene hain to bata dena. Main sceme bana loongi. Apne yaar se teri bhi chut thandi karwa doongi. Aur rahi papa ki baat, tum fikar mat karo. Hamare papa bhi aish karte hain. Tu nahin janti ki Papa ke sambandh Usha mausi ke saath hain. Papa mausi ke saath jo kuchh karte hain, shayad hamari maa ke saath bhi na kia ho unhon ne. Didi ye duniya itni seedhi nahin hai jitni dikhti hai”

Meri maa ki maut ke baad Usha mausi hamara khyal rakhti thee aur hamari gali mein hi rehti thee. Usha mausi ke saath Papa ka chakar? Sochte hi meri chut geeli ho gayi. Meri maa ki maut aaj se 3 saal pehle hui thee. Namita mere pass aayi aur mujeh apni bahon mein bharte huye mere galon par haath fer kar boli,” Didi, zindagi maze lene ke liye hai. Jab Papa mausi ke saath chudayi karte hain to hum ko kiss baat ki rok hai. Hum to abhi jawan hain. Iss chut mein jo aag lagti hai usske liye bhagwan ne LUND naam ki mazedar cheez banayi hai. Aur rahi Papa ki baat aaj raat ko tujhe Papa ki aur mausi ki chudayi dikha doongi aur tu kahe to kal apne yaar se tujhe bhi jawani ke maze dilwa doongi. Vaise bhi sala tujeh bhukhi nazaron se dekhta hai vo.” Mere man zalazala utha khada hua aur meri chut se pani ebhne laga.

Raat ko Usha mausi aayi aur khana banane lagi. Mausa ji night shift mein kaam karte tahy aur mausi hamare ghar hi so jati thee. Maine Namita ki baat sun kar Usha mausi ko gaur se dekha. Mausi ki umar koi 32 saal ki hogi aur vo bahre jism ki malika thee. Chutad kafi bahri aur chuchi bhi badi thee. Mausi ne green rang ki salwar kamiz pehni hui thee lekin usski chuchi jiss tarah uthak baithak kar rahi thee lagta tha ussne bra nahin pehni thee. Papa rasoi mein chale gaye aur maine dekha ki Papa ka haath mausi ke chutad ko tatol raha tha aur mausi sharma kar neechey ki taraf dekh rahi thee. Main aur Namita dinning roon se ye nazara dekh rahe thay. Namita ne dheere se kaha,”Dekho didi, Papa kaise haath fer rahe hain mausi ki gaand par. Aaj zarur chodenge mausi ko.” Isske saath hi Namita ne mere chutad ko zor se masal diya,” Namita, ye kia karti ho, kitna dard hota hai mujhe” Namita muskura padi,”Didi, ye dard nahin hai, yahi to maza hai. Aaj dikhati hoon tujhe LUND aur CHUT ka madhur milan.”

Table par Papa apne samen sharab ka glass rakhe huye thay aur chuski le rahe thay. Aaj vo pani jaisi dikhne wali sharab pee rahe thay. Fir achanak Papa ne glass mausi ki taraf badha diya aur mausi ne chup chap pee liya. Maine dekha ke Papa ne table ke neechey se apna haath mausi ki jaangh par ferna shuru kar diya. Papa aur mausi ki ankhon mein lal rang ke dore tairne lage thay. Unki sanson mein tezi bata rahi thee ki dono chudayi karne ke liye betab hain. Namita aur maine khana jaldi se khatam kiya aur apne apne kamre mein chali gayi. Namita ne mujeh ankh mari aur kaha,” Didi aaj tum mere saath hi so jayo, mujeh tumse koi baat karni hai.” Main usske peechhey chal padi. Namita ke kamre ki deewar mein ek bada sa chhed tha jiss mein se hum dono papa ki chudayi ka khel dekhne wale thay. Namita aur main dono ne apne sare kapde uttar fenke aur bistar par chali gayi.

Namita ka jism bhi bahut sexy tha. Usske chuchak kafi bade thay aur ussne apni chut ko achhi tarah se shave kar rakha tha. Mujhe apni bahon mein bhar kar meri behan ne meri chuchi ko masal dala aur mere honthon par kiss karne lagi, mere chutad ko sehlane lagi, meri chut par haath ferne lagi,” Ohhhhh Namita….ye kia kar rahi ho….mujhe kuchh hota hai….mere badan mein jhur jhuri see ho rahi hai…Namita…..meri chut mein khujli ho rahi hai…tum mujeh kiss kaise kar rahi ho….hai meri behan mujeh kia ho raha hai..tera alingan mujeh utejit kar raha hai….tere badan ka saparsh mujeh jala raha hai….mujhe chhod do pleaseeeee” mere muh se nikla to Namita shararti tarke se muskura padi aur fir se meri gardan aur kandhon ko kiss karti rahi. Namita ke jeebh se meri gardan aur kandhe geele ho gaye lekin mujhe bahut kamuk anand aa raha tha. Jan Namita ka haath meri chut ko ragadne laga to chut ras se usski unglian bheeg gayi,” Sudha, sali dekh teri chut ka ras kaise beh raha hai. Teri chut ab chudne ke liye tadap rahi hai. Aaj ki raat to main tujeh lesbian pyar se khush karungi lekin kal teri chudayi ka vo bandobast karungi ki yaad rakhogi sari umar bhar. Namita ne agar aaj bhi teri chut ka pani na nikala to mera naam badal dena.”

Dusre kamre mein bhi hulchul shuru ho chuki thee. Namita mujeh chhed ke pass le gayi aur hum dono papa ke kamre mein jhankne lage. Papa aur mausi dono sharab pee rahe thay aur papa ne mausi ke kapde uttarne shuru kar diye. Mausi chihuk kar boli,” Jijju, apne pajame ko bhi to uttaro, apni sali ko bhi to apne lode ke darshan karwayo. Meri behan ko chod kar to do ladkian paida kar lee hain tumne, ab mujeh bhi to ek bache ki maa bana do mere jijju raja,” Mausi bistar par tangen faila kar bol rahi thee. Mausi ki chut par kale kale bal thay. Tabhi papa ne apana pajama khol diya aur apna kala lund mausi ke muh par rakh diya aur khud mausi ke chuchi ko sehlane lage,” Usha, meri rani tera pati tujhe bacha nahin deta kia? Agar tu chahe to main tujhe maa bana sakta hoon. Maine tujeh kabhi Mamta(humari maa) se kabhi alag nahin samjha,” Mausi gussey mein boli,” Jiju mera pati kuchh nahin kar pata. Sala chut par lund rakhte hi jhad jata hai aur main tarasati reh jati hoon. Issi liye to apne jijju ke samne tangen khol deti hoon, jijju raja. Lekin har roz chori se chudwate huye dar lagata hai, kahin Sudha aur Namita ko shak ho gaya to kia hoga?”

Papa ne apna lund ab mausi ke muh mein dhakelte huye kaha” Meri dono betian bhi kawan ho chuki hain. Unko bhi lund ki talash hogi. Vo apne papa ki sathiti ko samajh lengi. Vo samajh lengi ki agar unka papa unki mausi ko chod leta hai to koi bura nahin karta. Ye to demand aur supply ka sidhant hai. Agar meri saali ko usska pati nahin chodega to kia main bhi chhod doonga ussko padosi ke lye? Shabash meri rani chus mera lund, chat le mere andkosh. Aaj ki raat main tujeh apne bache ki maa bana kar yaadgar bana dena chahta hoon, Jor se chus lund ko rani, kaat khayo mere lund ko Usha rani.”

Papa apni gaand aaage peechhey kar rahe thay aur mausi maze se lund ko chus rahi thee. Dekhte hi dekhte papa bhi palang par let gaye aur unhon ne apna muh mausi ki janghon ke beech dal kar mausi ki chut ko chatna shuru kar diya. Tabhi Namita ne mere nipple ko kiss kar ke chusna shuru kar diay aur boli,” Sudha, papa ki position ko 69 kehta hai. Bahut mazedar position hoti hai jab mard aurat ki chut chatata hai aur aurat mard ka lund chusti hai to ussko 69 kehte hain. Main aaj teri chut ko chat kat khalas kar doongi to dekhna kitna maza aye ga, didi. Papa aur mausi to apni masti mein kho chukey hain. Tum mujhe apne jism ke saath khelne do. Mujhe teri chut ka pani nikalna hai kion ki kal to teri zindagi ka haseen din hoga,”

Main mantar mugdh ho kar papa aur mausi ka khel dekh rahi thee. Mujhe mehsoos ho raha tha jaise meri chut ke honth utejna se phul gaye hon. Mera pura badan gan gana chuka tha. Meri behan ke haath jab mere jism par chalte to main jhun jhuna jati. Mujhe bhi ichha hoti ki mausi ki tarah mujeh bhi lund milta jissko main chusti aur apni cchut ko chuswati. Mausi ke mukh ras se papa ka lund bheeg kar chamak raha tha aur dono ki bhari sansen chalne ki awaz sun rahi thee. Udha Namita ne mere nipples ko chusna jari rakha hua tha aur vo meri chut ko sehlaye ja rahi thee.” Ohhhh Namita…mujh se nahin raha ja raha…mujhe bhi papa jaisa lund la do kahin se…apni behan ki chut ko mast lund se bhar do…meri chut mein aag lagi hui hai meri behan…meri aag bujha do Namita”

Dusre kamre mein Papa ne mausi ko ghodi bana diya. Mausi apne ghutne aur haathon ke bal jhuk chuki thee aur papa usske chutad ko thaam kar apna lund usski chut par peechhey se dhakelne lage.” Rani, mujhe ghodi bana kar chudayi karne mein bahut maza aata hai. Tujhe kaisa lagta hai Usha meri rani. Tere chutad bahut sexy lagta hain mujeh. Ek din teri gaand zarur chodunga. Vah kitni sexy ho tum meri sali.” Usha mausi nee chey se bol rahi thee,” Jijju tum chodna shuru karo. Mujhe bahut achha lagta hai jab mujhe mere jijju chodte hain. Tum mujeh ghodi banyo ya kutiya, mujhe bas apne jijju ka lund apni chut mein chahiye….chocd mujhe jijju raja….thokde apna loda meri chut mein….chod lena meri gaand bhi jijju….pel mujhe”

Mere bistar par Namita ne ab mujhe peeth ke bal lita diya aur meri tangon ko khol diya. Meri behan mere upper chadhi hui thee. Usski chuchi mere vaksh sathal par ragad rahi thee. Mujhe kiss karte huye usske honth mere nipples se hote hue pet par aur akhir meri chut ki trikon ki taraf badhne lage. Usske honth akhir meri chut ki faankon ko klholte huye apne nishane par ja pahunchey. Usski jeebh mere clitoris ko chatne lagi aur fir ussne meri chut mein apni zuban ghusa dee. Mujhe usski zuban kissi lund jaisi lag rahi thee. Namita nemeri janghon ko kas kar pakad rakha tha. Usski zuban meri chut ko chod rahi thee. Papa ke kamre mein ab main dekh nahin sakti thee lekin unki awazen sunayi pad rahi thee. Mujhe nahin malum tha ki aurat bhi dusri aurat ki jab chut chatati hai to itna maza aata hoga. “Hey Bhagwan, mujhe apni behan ke chumne chatne se itna maza mil raha tha to asali lund se meri halat kia hogi?

Meri chut se lagatar ras tapak raha tha aur meri behan maze se ussko chat rahi thee. Mujhe laga ki meri chut jhadne lagi hai. Maine apne chutad upper uthane shuru kar diye ta ki main Namita ki puri zuban ko apni chut mein ghussa kar aur maza le sakun,’ aaaaaaa……oooooooo…..

aaaggghhhhh ……haiiiii….ussiiiiii,,,Namitaaaaa….chus meri chut….main gayeeee,….meri chut se pani ja raha hai….ya mujhe kia ho gaya meri behna…dal de apni jeebh meri phudi mein main jhadeee”

Main na jane kitni der tak bistar par sharir enth kar tadapati rahi, meri chut ro ro kar ras chhodti rahi aur meri behan meri chut ka ras chatati rahi. Jab Namita ne chehra uthaya to usske honthon se chutras tapak raha tha. Namita meri behan bahut khubsurat lag rahi thee. Jab ussne mujhe honthon par kiss kiya to usske muh se mujhe apni chut ke ras ka swad mila. Namita ki ankhen laal ho chuki thee aur fir ussne mere kaano ko chuma. Maine bhi apni behan ko maza dene ki soch lee. Maine bhi ussko vaise hi kiss karna shuru kar diya jaise ussne mujeh kia tha.. Mujhe hairani thee ki jo main kar rahi thee vo lesbian sex tha lekin mujhe bajut maza aa raha tha. Namita ka jism bahut namkeen lag raha tha mujhe. Maine usski mast chuchi ko jab apne muh mein lya to mujhe jannat mil rahi thee. Namita ke chuchak bahut kade ho chuke thay. Maine Namita ko pet ke bal lta diya aur fir ussko gardan se chumna shuru kar diya. Meri behan ki gaand ka ubhar bahut kamuk lag raha tha.

Maine dheere se Namita ki peeth ko kiss karna shuru kar diya aur usske chutad ko sehlaya. Meri behan ke chutad ki darar mujhe bahut sexy lag rahi thee. Apna haath neechey le ja kar meine usski chut ko sehlaya aur peeth ko chumte hue apne honth maine usski gaand ki ghati tak pahuncha diye. Namita apni chut mere haath par zor zor se ragad rahi thee aur uss par dhake mar rahi thee. Akhir maine apni zuban ko Namita ke chutad ki darar mein dal kar chatna shuru kar diya. Mujh par chudayi ka ek nasha chha raha tha. namita ke chutad ke bech bahut mazedar swad tha aur main apni zuban usski gaand ke chhed mein ghusa dee,” OOOOOOOO…..AAAAAAA……DIDI…..CHATO…BAHUT MAZA AA RAHA HAI…..SHABASH DIDI CHATATI JAYO….HAIIIIIII”

Namita ki gaand se namkeen swad mujhe bahut sexy laga aur maine usski gaand ko chatana jari rakha aur ungli se usski chut ko chodna jari rakha. Pehle meri ek ungli usski chut mein tyhee fir main ussme do aur fir teen ungli dal kar chudayi shuru kar dee. Meri zuban usski gaand chod rahi thee aur unglian usski chut ko chudayi sukh de rahi thee. Mera haath usski chut ke ras se bheeg gaya tha aur vo mere haath par apni chut essey chod rahi thee jaise ki kissi lund par pel rahi ho. Ussne thodi der mein pani chhod diya. Jab vo jhad gayee to maine usski chut ko khub chusa aur chut ka raspan kar liya.” Sudha tu to bahut mast chusti hai. Main to tujhe anari hi samajh rahi thee, tu to sali mast lesbian nikali” Maine usske chutad par kat khaiya aur boli,” Namita jaisi jisski behan ho vo anari kaise ho sakti hai. Ab kal ki chudayi ko mat bhul jana”

kramashah...............

 
चुदाई के दिन चदाई की रातें 2



गतान्क से आगे......................

मैं सुधा, एक बार फिर से अपनी चुदाई की कहानी जारी रखती हूँ. मेरा रात को पापा के साथ मौसी की चुदाई देख कर उतेज्ना से बुरा हाल हो गया था और फिर मेरी बेहन नामिता ने मुझे जो मज़ा दिया, मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था. मेरी बेहन बेशक मुझ से छ्होटी है, पर चुदाई में मेरी गुरु है. उसस्के भीगे हुए चुंबन ऐसे थे कि मेरी चूत से रस की नदिया बहने लगी थी और जो मज़ा मुझे अपनी बेहन के मुख से और हाथों से मिला, कभी नहीं महसूस हुआ था. उसस्के बाद मैने अपनी बेहन को भी प्यार किया जो एक यादगार लम्हा बन गया मेरी ज़िंदगी का. जब सुबह मेरी आँख खुली तो मेरा जिस्म एक दम हल्का महसूस हो रहा था. नामिता के होंठों के स्पर्श की भावना मुझे आनंदित कर रही थी.

मैं नामिता से लिपट कर नंगी ही लेटी हुई थी. जब मेरी आँख खुली तो नामिता को अपनी बाहों में पाया. हम दोनो बहने एक दूसरे से लिपटी हुई थी. तभी मौसी चाइ ले कर आई.” क्या बात है बेटी, आज उठना नहीं है क्या? अर्रे तुम ने तो कपड़े भी नहीं पहने आज! क्या बात है? बच्चो अब तुम जवान हो चुकी हो, कपड़े पहन कर रखा करो. वाह सुधा, तेरा जिस्म तो भर चुका है. मैं बात करती हूँ जिज़्जु से की तेरी शादी करवा दें जल्दी से. सुधा, ये जवानी चली गयी तो ज़िंदगी में कुच्छ नहीं रहे गा. मज़े ले लो जवानी के जवानी में.” मैं अब मुस्कुरा पड़ी,” मौसी, हम लोगों को भी सीखा देना कि कैसे मज़ा लिया जाता है जवानी का. लगता है तुम को काफ़ी तज़ुर्बा है मज़े लेने का. कहीं तू भी तो हमारे घर में मज़ा लेने ही तो नहीं आती? पापा का ख्याल रखना ज़रा, मम्मी के बाद अकेले हो गये हैं कुच्छ. और वैसे भी जीजा साली का रिश्ता तो होता ही प्यार वाला. है”

मौसी मुस्कुरा पड़ी,” तेरे पापा तो मेरे प्यारे जिज़्जु हैं, मैं उनका ख्याल नहीं रखूँगी तो कौन रखे गा? मैं तो ऐसे ही कह रही थी कि अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो पुच्छ लेना, मेरी बच्चियो. अब मैं निकलती हूँ, तेरे मौसा जी भी लौट आए होंगे. शाम को मिलेंगे” पापा भी तैयार हो कर चले गये. नामिता ने फोन घुमाया और अपने दोस्तों से बातें करने लगी. मैं नहाने चली गयी और जब लौटी तो मेरी बेहन बोली,” सुधा, पहले दौर में मैं तुझे अपने यार करण से चुदवाती हूँ. मैने उसको कहा है कि मैं घर में अकेली हूँ, और वो जल्दी से आ कर मुझे चोद डाले. जब मैं उसके साथ हूँगी तो तुम हम को रंगे हाथ पकड़ लेना और हम को ब्लॅकमेल करके उस से चुदवा लेना, मैं भला ना किओं कहूँगी. एक बार कारण से चुदाई करवा लेना फिर दोपहर को मेरे यारों की मंडली आ जाए गी जो हम दोनो को लंड से हर तरफ से चोद चोद कर कुतिया बना देंगे,”

मैं आने वाले वक्त के बारे सोच कर मुस्कुराने लगी. मेरी चूत चुदाई सुहाने ख्वाब देख कर पानी छ्चोड़ने लगी. नामिता ने एक पाजामा पहन लिया जिसके नीचे उसने कोई पॅंटी नहीं पहनी थी और उप्पेर एक पारदर्शी कुर्ता पहन लिया. मैं एक सेक्सी मागज़िने ले कर अपने कमरे में चली गयी. मैने एक नाइटी पहन रखी थी और कुच्छ भी नहीं. थोड़ी देर में बेल बजी और नामिता डोर खोलने गयी. कुच्छ देर में वो अपने दोस्त कारण को ले कर ड्रॉयिंग रूम में गयी. वो बोल रही थी” करण यार, अब देर मत करो, मैं तेरे लंड को भूखी हूँ, तुम मेरी चूत को ठंडा कर दो इस से पहले कि कोई कबाब में हड्डी आ जाए. ज़रा मेरी चूत पर हाथ रख कर देखो, कैसे जल रही है चुदाई की आग में,” कहते ही नामिता ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. करण ने भी अपनी पॅंट उतारनी शुरू कर दी,” नामिता, साली तेरी चूत है ही इतनी गरम की लंड बिना तो रह नहीं सकती. पहले मैं तेरी चूत को चाट कर ठंडा करूँगा और फिर लोड्‍े से चोद कर, ”

नामिता नंगी हो कर सोफे पर लेट गयी और करण उसस्की जांघों को खोल कर अपना मूह उसस्की चूत पर झुका कर चूमने चाटने लगा. करण काफ़ी बलिश्त जिस्म का मालिक था. उसका लंड कम से कम 7 इंच का होगा और बहुत मोटा भी था,” करण साले मेरी चूत को चॅटो, कब से तरस रही हूँ इस्सको चटवाने के लिए. जल्दी से घुसा दो अपनी ज़ुबान को इससके अंदर, नामिता टाँगें खोले पड़ी है तेरे सामने.” करण बिन बोले चूत में जीभ घुसा कर चाटने लगा,” अहह……आअरररगगगगग…..हह…..म्‍म्म्मममम” नामिता के होंठों से सिसकारियाँ निकलने लगी. मैने भी नाइटी के उप्पेर से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, मुझे उतेज्ना हो रही थी. मेरी चूत को आज तक किस मर्द ने टच भी नहीं किया था, चूमना तो दूर की बात थी. मेरी नाइटी का वो हिस्सा जो मेरी चूत के सामने था, मेरी चूत के रस से भीग गया था. प्लान के मुताबिक, मुझे नामिता और करण को चुदाई के खेल में रंगे हाथों पकड़ कर ब्लॅकमेल करना था.

नामिता की जंघें अब करण की गर्दन के इर्द गिर्द कसी हुई थी. करण के चुटटर दरवाज़े की तरफ थे और उसस्के चुटटर उप्पेर नीचे हो रहे थे जब वो मेरी बेहन की चूत चाट रहा था. मैने कुच्छ इंतज़ार किया और फिर अपनी आवाज़ में में गुस्सा लाती हुई कमरे में दाखिल हुई,” नामिता की बच्ची, ये सब क्या हो रहा है, कुछ शरम नाम की चीज़ तेरे पास है या नहीं? ये लड़का कौन है? मैं पापा को बताती हूँ कि तुम कौन से गुल खिला रही हो” नामिता ने घबराने का नाटक किया और बोली,” दीदी आप यहाँ? आप तो बाहर गयी हुई थी…दीदी मुझे माफ़ कर देना…करण को तो आप जानती हैं…मेरा दोस्त है….मुझ से बहुत प्यार करता है…दीदी प्लीज़ पापा को मत कहना..हम तेरी हर बात मानेगे..प्लीएज” करण बहुत घबरा गया और हड़बड़ा कर नामिता की चूत से अपना मूह अलग करते हुए बोला,”दीदी, हम से ग़लती हो गयी…माफ़ कर दो ना….हम आपकी हर बात मानेगे….ऐसी ग़लती अब फिर नहीं होगी…” मैने देखा कि करणअब डर गया है और नामिता दूसरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी. करण मेरे पैरों पर गिर पड़ा और गिड़गिदने लगा.

“ठीक है…मैं तुमको माफ़ कर सकती हूँ….करण तुम इस्सको ग़लती कहते हो, लेकिन तेरा लंड तो इस्सको ग़लती नहीं मान रहा…देखो कैसे खड़ा है अभी, जैसे कि अभी चुदाई कर देता मेरी बेहन की अगर मैं 5 मिनिट लेट हो जाती…नामिता, सच बतायो कितनी बार चोद चुका है करण तुझे? मुझ से झूठ मत बोलना” नामिता भी घबराहट की आक्टिंग करती हुई बोली,” दीदी ये मुझे कई बार चोद चुका है और बहुत मज़ा देता है मेरी चूत को इसका लंड. करण मेरा पहला यार है जिससने मेरी सील तोड़ी थी” मैने मुस्कुराते हुए करण के लंड पर हाथ फेरते हुए कहा”तो फिर माफी तभी मिल सकती है अगर करण मुझे भी चोद कर वोही मज़ा दे जो इससने तुझे दिया था, बोलो मंज़ूर है?” नामिता और करण एक दूसरे को देखने लगे और फिर कमरे की दूसरी तरफ जा कर बातें करने लगे. जब वो वापिस आए तो करण मेरे पास आ कर बोला,” दीदी हम को मंज़ूर है. मैं आपको चोद लेता हूँ पर आप क़िस्सी को मत बताना हमारी चुदाई की बात.”

मेरी बात बन चुकी थी. मैने हंस कर कहा” करण साले एक तरफ मुझे “दीदी” बोल रहा है और दूसरी तरफ चोदने की बात करता है, क्या बात है राजा?” करण मेरी नाइटी को सिर के उप्पेर उठता हुआ बोला”बहुत लड़कियो को चोदा है, लेकिन क़िस्सी को बेहन बना कर नहीं चोदा है. सोचता हूं के अब अपनी दीदी को भी चोद कर मज़ा ले लूँ. वाह सुधा दीदी, आपकी फिगर तो कमाल की है और आपकी चुचि का तो जवाब ही नहीं है. नामिता, तुमने मुझे बताया ही नहीं कि तेरी बेहन इतनी सेक्सी माल है और वो भी चुदाई की प्यासी है. सुधा दीदी अब तुम घूम जयो और मुझे अपनी गांद के दर्शन करवा दो. मैं गांद का दीवाना हूँ. मुझे बहुत देर इच्छा है की क़िस्सी मस्त गांद को चोदु और आपकी गांद के तो क्या कहने?” उससने मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे चूतड़ पर कस के हाथ फेरना शुरू कर दिया. मेरा रोम रोम रोमांचित हो उठा जब करण के लंड का मोटा सूपड़ा मेरी चूत पर रगड़ने लगा. मैने प्यार से अपने होंठ करण की होंठों पर रख दिए. तभी नामिता बोली,” अच्छा भाई, अब मेरा यहाँ क्या काम? तुम दोनो भाई बेहन मज़े लो मैं चलती हूँ.” मैने कहा,”तुम भी यहीं रूको, तुम कहाँ चली?” नामिता ने कहा” दीदी जिस तरह आपने हम दोनो पर छापा मार दिया था, वैसे कोई आप पर छापा ना मार दे, इस लिए छ्होटी बेहन रखवाली के लिए बाहर बैठ जाए गी”

नामिता के जाते ही करण मुझ पर टूट पड़ा और मुझे बे’तहाशा चूमने चाटने लगा. नंगी तो उसने मुझे कर ही दिया था, अब मेरी चुचि को चाटने लगा, पेट को किस करने लगा, अपने हाथों से मेरे चुटटर मसल्ने लगा.” एम्म्म…..हूंम्म्मम…अहह……

उफफफफफफफ्फ़….आआआ……ओफफफफ्फ़ करण ये क्या कर रहे हो भाई…मेरी चूत जल रही है….मैं मर रही हूँ” करण ने मेरा हाथ अपने तपते हुए लंड पर रखते हुए कहा”दीदी, इस्सको पकडो…इससके साथ खेलो….ये करण भाई का लंड आपको चोदने वाला है..मुझे बहुत उतेज्ना हो रही है जब में आपको दीदी कहता हूँ और आप मुझे भाई कहती हैं…इस पवित्र रिश्ते में चुदाई की मनाही होती है….लेकिन मना होने वाले काम में बहुत मज़ा आता है….आअज मैं अपनी दीदी को चोदने वाला हूँ…..सुधा दीदी, तुम मेरा लंड अपनी चूत पर रगाडो फिर देखना कितना मज़ा आता है…आअज मेरे लंड और आपकी चूत का मिलन होने वाला है”

मुझ पर जैसे कोई नशा चढ़ गया हो. मुझे सब कुच्छ दुन्ध्ला दिखाई दे रहा था. मैने करण के मस्त लंड को हाथों में थाम कर आगे पीच्छे करना शुरू कर दिया. उसस्का लंड और भी मोटा हो गया. उसस्के लंड से एक बूँद रस की टॅपॅक पड़ी. अब मेरे मन में एक नयी बात आई और मैने झुक कर अपना मूह करण के लंड पर रख दिया,” अर्रे सुधा, तू तो अपनी बेहन की तरह रंडी निकली….सच दीदी, नामिता भी लंड चूसने की शौकीन है, तू भी मेरे लंड को मज़े से चूसो, दीदी. मैं भी तेरी चूत को चूसने वाला हूँ….किओं ना हम 69 पोज़िशन पर चले जाएँ मेरी बहना, मैं तेरी चूत चाटूँगा और तुम मेरा केला खा लेना. चलो बिस्तर पर चलते है. वहीं मज़े से चोदुन्गा तुझे मेरी प्यारी दीदी. ” उसने मुझे सिरहाने पर सिर टीका कर लिटा दिया और उल्टा हो कर मेरे मूह में अपना लंड डाल दिया और खुद झुक कर मेरी चूत को चाटने लगा. अब में समझ गयी की 69 पोज़िशन क्या होती है.

मैं मज़े से करण के लंड को चूसने लगी, उसस्के अंडकोष से खेलने लगी. कभी कभी मैं उसस्की गांद को छेड़ देती, उंगली उसस्की गांद में धकेल देती तो वो बेकाबू हो जाता. करण भी पूरा हरामी था. वो मेरे क्लाइटॉरिस को चूस लेता, मेरे चुटटर पर थपकी मारता और यहाँ तक के मेरी गांद के छेद को भी चाट लेता. मेरी चूत लगातार पानी छ्चोड़ रही थी. तभी करण ने मेरी चूत को छ्चोड़ दिया और मुझे बोला,” रानी, फ्रिड्ज में वोड्का की बॉटल पड़ी है, एक एक ग्लास भर लो, मैं भी पीता हूँ तुम भी पी लो. इस से लंड जल्दी नहीं छ्छूतता और मज़े का दौर लंबा हो जाता है और शरम भी ख़तम हो जाती है” मैने बात मान ली और नंगी ही बॉटल उठा लाई. वोड्का पीते ही मेरे बदन में ऐसी आग लगी कि मैं अपने आप करण के लंड को चूमने लगी और करण मेरा जोश देख कर मुस्कुरा उठा.

” सुधा, इस्सको पी कर तो तू बिल्कुल रंडी बन गयी हो और मुझे रंडी औरत बहुत पसंद है.तुझे पता है कि मैं रंडी के साथ कैसा सलूक करता हूँ? मैं उस्स्को बेरेहमी से चोद्ता हून.” उसने मेरे बाल खींचते हुए कहा. मुझे भी लगा कि शराब पी कर मुझे एक नया रोल अदा करना है. मैने उसके अंडकोष कस के पकड़ लिए और उनको खींच लिया,” हां बेह्न्चोद, तेरी दीदी एक रंडी ही तो है जो तुझसे से चुदवा रही है….चोद मुझे हरामज़ादे करण…अपनी बेहन को नंगा तो कर चुके अब चोद भी लो, देख क्या रहे हो…..छ्होटी बेहन को चोद चुके हो अब बड़ी को भी भोग लो साले बेह्न्चोद” मुझे ना जाने क्या हुआ कि मैं इस तरह गालियाँ बकने लगी. करण पर भी नशा चढ़ चुका था. उससने मेरे गालों पर एक थप्पड़ मारा और बोला,” साली चोदुन्गा तुझे भी तेरी बेहन की तरह ही. तुम अब झुक जा और मेरे सामने घोड़ी बन जा. चोदते वक्त मैं तेरी गांद देखना चाहता हूँ. देखना कैसे मेरा लंड तेरी चूत को भोसड़ा बनाता है. दीदी, तुमको पीछे से चुदवाना अच्छा लगता है?”

“बहनचोद, साले तेरी बेहन पहली बार चुदवा रही है और वो भी तुझ से. मुझे अच्छा ही लगे गा चाहे आगे से पेल या पीच्छे से. अपनी बेहन को चाहे घोड़ी बना या कुत्ति, मेरे भाई, पर जल्दी से चोद डाल. मिटा डाल अपनी बेहन की चूत की आग” मैं बोल उठी और करण ने जान लिया के मैं अब लंड की भूखी हूँ. मुझे घोड़ी बना कर वो मेरे पीच्छे चला गया और मेरी गांद को चाटने लगा,” भाई, अब ये क्या करने लगे हो? बहनचोद मेरी चूत में लंड पेल ये कुत्ते की तरह मेरी गांद बाद में चाट लेना. इस लंड को पेलो मेरे भाई अपनी बेहन की चूत में…प्लीज़” करण उठा और अपने लंड के सूपदे को मेरे चूतड़ की दरार से होते हुए मेरी चूत के मुहाने पर टीका दिया. उस बेह्न्चोद का लंड आग के शोले की तरह जल रहा था. फिर उसने कस कर मेरी कमर को जकड़ा और अपना लंड थेल दिया मेरी बुर के अंदर.” उईईईईए….मेरी माआआअ……आआआअ…आगगज्गग” मैं दर्द से बिलख उठी. मुझे क्या पता था कि लंड के घुसने से इतना दर्द होगा. खैर शराब के नशे के कारण पीड़ा जल्द ही ख़तम हो गयी और उतेज्ना की वजह से मुझे मज़ा आने लगा.

करण एक चुड़क्कड़ खिलाड़ी था. उससने धीरे धीरे चुदाई की शुरुआत की, लेकिन जल्द ही स्पीड पकड़ ली. मेरी चोटी को उसने एस्से पकड़ रखा था जैसे क़िस्सी घोड़ी की लगाम हो और और मुझे तेज़ी से हांकने लगा.” वाह मेरी घोड़ी, बहुत मस्त चूत है तेरी, चुदवा मज़े से मेरी बहना. तेरे भाई का लंड आज तेरे पेट के अंदर की तलाशी ले रहा है. कैसे महसूस हो रहा है मेरी रंडी बहन को चुदवाते हुए, सुधा? मैने ही तेरी बेहन नामिता की सील भी तोड़ी थी और आज तेरी भी तोड़ रहा हूँ रानी,” उतेना के कारण मुझे दर्द तो कम हो रहा था लेकिन मेरी जांघों से कुच्छ गीला सा बह रहा था जो कि मुझे बाद में पता चला कि मेरी सील टूटने पर मेरा खून बह निकला था. करण का लंड जैसे कि मेरी चूत में जा कर फैल गया हो किओं की अब वो मेरी चूत को पूरी तरह से भर रहा था. उसके हाथ मेरे चूतड़ पर ज़ोर ज़ोर से चपत मारने लगे और मैं उतेज्ना से पागल हो रही थी.

“चोद मुझे मेरे भाई, ज़ोर ज़ोर से चोद अपनी रंडी को….तेरा लंड मेरी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा है….करण चोद मुझे मदेर्चोद…..यू मुझे अपनी बेहन बोल या रखैल पर अपना लंड पेलते रहो मेरी चूत में……मेरी चूत आज तृप्त हो रही है….कितने बरसों से प्यासी है लंड की…..शाबाश मेरे भाई….चोद अपनी बेहन को…..मैं अब झड़ने को हूँ…करण तेज़ी से चोद मुझे मेरी चूत का पानी निकल रहा है….और तेज़…..और तेज़…चोदो भाई…मैं झडियी…चोदो भाई….मैं……”मेरी चूत से रस बहता रहा और करण अपने लंड से मेरी चूत पर प्रहार करता रहा. फ़चा फ़च चुदाई की आवाज़ आ रही थी और अचानक ही करण का जिस्म भी अकड़ गया.उसस्की साँस तेज़ हो गयी और उसस्के लंड ने गरम रस मेरी चूत में छ्चोड़ दिया. उसस्का लंड रस मेरी चूत से बाहर गिरने लगा और मेरी जांघों से हो कर बिस्तर पर ढेर लग गया. चुदाई से थक कर मैं 2 घंटे सोती रही, नंगी ही अपने करण की बाहों में. तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी बता ना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त




Chudayi ke Din Chdayi ki Raaten 2

gataank se aage......................

Main Sudha, ek bar fir se aoni chudayi ki kahani jari rakhti hoon. Mera raat ko Papa ke saath mausi ki chudayi dekh kar utejna se bura haal ho gaya tha aur fir meri behan Namita ne mujhe jo maza diya, maine kabhi sapne mein bhi nahin socha tha. Meri behan beshak mujh se chhoti hai, par chudayi mein meri guru hai. Usske bheege huye chumban essey thay ki meri chut se ras ki nadiya behne lagi thee aur jo maza mujeh apni behan ke mukh se aur haathon se mila, kabhi nahin mehsoos hua tha. Usske baad maine apni behan ko bhi pyar kiya jo ek yaadgar lamha ban gaya meri zindagi ka. Jab subah meri aankh khuli to mera jism ek dum halka mehsoos ho raha tha. Namita ke honthon ke sparsh ki bhava mujeh anandit kar rahi thee.

Main Namita se lipat kar nangi hee leti hui thee. Jab meri aankh khuli to Namita ko apni bahon mein paya. Hum dono behne ek dusre se lipati hui thee. Tabhi mausi chai le kar aayi.” Kia baat hai beti, aaj uthna nahin hai kia? Arre tum ne to kapde bhi nahin pehne aaj! Kia baat hai? Bacho ab tum jawan ho chuki ho, kapde pehn kar rakha karo. Wah Sudha, tera jism to bhar chuka hai. Main baat karti hoon jijju se ki teri shadi akrwa den jaldi se. Sudha, ye jawani chali gayi to zindagi mein kuchh nahin rahe ga. Maze le lo jawani ke jawani mein.” Main ab muskura padi,” Mausi, hum logon ko bhi sikha dena ki kaise maza liya jata hai jawani ka. Lagta hai tum ko kafi tazurba hai maze lene ka. Kahin tu bhi to hamare ghar mein maza lene hi to nahin aati? Papa ka khyal rakhana zara, mummy ke baad akele ho gaye hain kuchh. Aur vaise bhi jija sali ka rishta to hota hi pyar wala.”

Mausi muskura padi,” Tere papa to mere pyare jijju hain, main unka khyal nahin rakhungi to kaun rakhe ga? Maine to essey hi keh rahi thee ki agar kissi cheez ki zarurat ho to puchh lena, meri bachio. Ab main nikalti hoon, tere mausa ji bhi laut aaye honge. Sham ko milenge” Papa bhi taiyar ho kar chale gaye. Namita ne phone ghumaya aur apen doston se baaten karne lagi. Main nahane chali gayi aur jab lauti to meri behan boli,” Sudha, pehle daur mein main tujeh apne yaar Karan se chudwati hoon. Maine ussko kaha hai ki main ghar mein akeli hoon, aur vo jaldi se aa kar mujhe chod dale. Jab main usske saath hoongi to tum hum ko range haath pakad lena aur hum ko blackmail karke uss se chudwa lena, main bhala na kion kahungi. Ek baar Karan se chudayi karwa lena fir dopahar ko mere yaaron ki mandali aa jaye gi jo hum dono ko lund se har taraf se chod chod kar kuttia bana denge,”

Main aane wale wakt ke bare soch kar muskurane lagi. Meri chut chudayi ke suhane khwab dekh kar pani chhodne lagi. Namita ne ek pajama pehan liya jisske neechey ussne koi panty nahin pehni thee aur upper ek pardarshi kurta pehan liya. Main ek sexy magzine le kar apne kamre mein chali gayi. Maine ek nighty pehan rakhi thee aur kuchh bhi nahin. Thodi der mein bell baji aur Namita door kholne gayi. Kuchh der mein vo apne dost Karan ko le kar drawing room mein gayi. Vo bol rahi thee” Karan yaar, ab der mat karo, main tere lund ko bhukhi hoon, tum meri chut ko thanda kar do iss se pehle ki koi kabab mein haddi aa jaye. Zara meri chut par haath rakh kar dekho, kaise jal rahi hai chudayi ki aag mein,” Kehte hee Namita ne apne kapde uttarne shuru kar diye. Karan ne bhi apni pants uttarni shuru kar dee,” Namita, sali teri chut hai hi itni garam ki lund bina to reh nahin sakti. Pehle main teri chut ko chat kar thanda karunga aur fir lode se chod kar, ”

Namita nangi ho kar sofe par let gayi aur Karan usski janghon ko khol kar apna muh usski chut par jhuka kar chumne chatne laga. Karan kafi balisht jism ka malik tha. Usska lund kam se kam 7 inch ka hoga aur bahut mota bhi tha,” Karan sale meri chut ko chato, kab se paras rahi hoon issko chatwane ke liye. Jaldis e ghusa do apni zuban ko isske andar, Namita tangen khole padi hai tere samne.” Karan bin bole chut mein jeebh ghusa kar chtne laga,” Ahhhhh……aaarrrggggg…..hhhh…..mmmmmmm” Namita ke honthon se siskarian nikalne lagi. Maine bhi nighty ke upper se apni chut ko ragana shuru kar dia, mujhe utejna ho rahi thee. Meri chut ko aaj tak kiss mard ne touch bhi nahin kia tha, chumna to dur ki baat thee. Meri nighty ka vo hissa jo meri chut ke samen tha, meri chut ke ras se bheeg gaya tha. Plan ke mutabik, mujeh Namita aur Karan ko chudayi ke khel mein rabge haathon pakad kar blackmail karna tha.

Namita ki janghen ab Karan ki gardan ke ird gird kasi hui thee. Karan ke chuttar darwaze ki taraf thay aur usske chuttar upper neechey ho rahe thay jab vo meri behan ki chut chat raha tha. Maine kuchh intzar kiya aur fir apni awaz mein mein gussa lati hui kamre mein dakhil hui,” Namita ki bachi, ye sab kia ho raha hai, juchh sharam naam ki cheez tere pass hai ya nahin? Ye ladka kaun hai? Main Papa ko batati hoon ki tum kaun se gul khila rahi ho” Namita ne ghabrane ka natak kia aur boli,” Didi aap yahan? Aap to bahar gayi hui thee…Didi mujhe maaf kar dena…Karan ko to aap janti hain…mera dost hai….mujh se bahut pyar karta hai…didi please papa ko mat kehna..hum teri har baat maanege..pleaseee” Karan bahut ghabra gaya aur hadbada kar Namita ki chut se apna muh alag karte hue bola,”Didi, hum se galti ho gayi…maaf kar do na….hum aapki har baat manege….essi galti ab fir nahin hogi…” Maine dekah ke Karan ab dar gaya hai aur Namita dusri taraf dekh kar muskura rahi thee. Karan mere pairon par gir pada aur gidgidane laga.

“Theek hai…main tumko maaf kar sakti hoon….Karan tum issko galti kehte ho, lekin tera lund to issko galti nahin maan raha…dekho kaise khada hai abhi, jaise ki abhi chudayi kar deta meri behan ki agar main 5 minute let ho jati…Namita, sach batayo kitni baar chod chuka hai Karan tujhe? Mujh se jhuth mat bolna” Namita bhi ghabrahat ki acting karti hui boli,” Didi ye mujhe kai baar chod chuka ahi aur bahut maza deta hai meri chut ko isska lund. Karan mera pehla yaar hai jissne meri seal todi thee” Maine muskurate huye Karan ke lund par haath ferte huye kaha”To fir maafi tabhi mil sakti hai agar Karan mujhe bhi chod kar vohi maza de jo issne tujhe diya tha, bolo manzur hai?” Namita aur Karan ek dusre ko dekhne lage aur fir kamre ki dusri taraf ja kar baaten karne lage. Jab vo vapis aaye to Karan mere pass aa kar bola,” Didi hum ko manzur hai. Main aapko chod leta hoon par aap kissi ko mat batana hamari chudayi ki baat.”

Meri baat ban chuki thee. Maine hans kar kaha” Karan sale ek taraf mujeh “Didi” bol raha hai aur dusri taraf chodne ki baat karta hai, kia baat hai raja?” Karan meri nighty ko sir ke upper uthata hua bola”Bhaut ladkion ko choda hai, lekin kissi ko behan bana kar nahin choda hai. Sochta hoon ke ab apni didi ko bhi chod kar maza le loon. Wah Sudha didi, aapki figure to kamal ki hai aur aapki chuchi ka to jawab hi nahin hai. Namita, tumne mujhe bataya hi nahin ki teri behan itni sexy maal hai aur vo bhi chudayi ki pyasi hai. Sudha didi ab tum ghum jayo aur mujeh apni gaand ke darshan karwa do. Main gaand ka diwana hoon. Mujhe bahut der ichha hai ki kissi mast gaand ko chodun aur aapki gaand ke to kia kehne?” Ussne mujhe apni bahon mein bharte huye mere chutad par kas ke haath ferna shuru kar diya. Mera rom rom romanchit ho utha jab Karan ke lund ka mota supada meri chut per ragadne laga. Maine pyar se apne honth Karan ki honthon par rakh diye. Tabhi Namita boli,” Achha bhai, ab mera yahan kia kaam? Tum dodno bbhai behan maze lo main chalti hoon.” Maine kaha,”Tum bhi yahin ruko, tum kahan chali?” Namita ne kaha” Didi jiss tarah aapne hum dono par chhapa maar diya tha, vaise koi aap par chhapa na mar de, iss liye chhoti behan rakhwali ke liye bahir bait jaye gi”

Namita ke jate hi Karan mujh par toot pada aur mujhe be’tahasha chumne chatne laga. Nangi to ussne mujhe kar hi diya tha, ab meri chuchi ko chatne laga, pet ko kiss karne laga, apne haathon se mere chuttar masalne laga.” Mmmm…..hummmmm…ahhhhhhh……uffffffff….aaaaaa……Offfff Karan ye kia kar rahe ho bhai…meri chut jal rahi hai….main mar rahi hoon” Karan ne mera haath apne tapate huye lund par rakhte huye kaha”Didi, issko pakado…isske saath khelo….ye karan bhai ka lund aapko chodne wala hai..Mujhe bahut utejna ho rahi hai jab mein aapko didi kehta hoon aur aap mujhe bhai kehti hain…Iss pavitar rishte mein chudayi ki manahi hoti hai….lekin mana hone wale kaam mein bahut maza aata hai….aaaj main apni didi ko chodne wala hoon…..Sudha didi, tum mera lund apni chut par ragado fir dekhna kitna maza aata hai…aaaj mere lund aur aapki chut ka milan hone wala hai”

Mujh par jaise koi nasha chadh gaya ho. Mujhe sab kuchh dundhla dikhayi de raha tha. Maine Karan ke mast lund ko haathon mein thaam kar aage peechhey karna shuru kar diya. Usska lund aur bhi mota ho gaya. Usske lund se ek boond ras ki tapaak padi. Ab mere man mein ek nayi baat aayi aur maine jhuk kar apna muhn Karan ke lund par rakh diya,” Arre Sudha, tu to apni behan ki tarah randi nikali….sach didi, Namita bhi lund chusne ki shaukin hai, tu bhi mere lund ko maze se chuso, didi. Main bhi teri chut ko chusne wala hoon….Kion na hum 69 position par chale jayen meri behna, main etri chut chatunga aur tum mera kela kha lena. Chalo bistar per chalte hai. Vahin maze se chodunga tujhe meri pyari didi. ” Ussne mujeh sirhane par sir tika kar lita diya aur ulta ho kar mere muh mein apna lund dal diya aur khud jhuk kar meri chut ko chatne laga. Ab mein samajh gayi ki 69 position kia hoti hai.

Main maze se Karan ke lund ko chusne lagi, usske andkosh se khelne lagi. Kabhi kabhi main usski gaand ko chhed deti, ungli usski gaand mein dhakel deti to vo bekabu ho jata. Karan bhi pura harami tha. Vo mere clitoris ko chus leta, mere chuttar par thapaki marta aur yahan tak ke meri gaand ke chhed ko bhi chat leta. Meri chut lagatar pani chhod rahi thee. Tabhi Karan ne meri chut ko chhod diya aur mujhe bola,” Rani, fridge mein Vodka ki bottle padi hai, ek ek glass bhar lo, main bhi peeta hoon tum bhi pee lo. Iss se lund jaldi nahin chhootata aur maze ka daur lamba ho jata hai aur sharam bhi khatam ho jati hai” Maine baat maan li aur nangi hi bottle utha layi. Vodka peete hi mere badan mein essi aag lagi ki main apne aap Karan ki lund ko chumne lagi aur Karan mera josh dekh kar muskura utha.

” Sudha, issko pee kar to tu bilkul randi ban gayi ho aur mujhe randi aurat bahut pasand hai.Tujhe pata hai ki main randi ke saath kaisa salook karta hoon? Main ussko berehmi se chodta hoon.” Ussne mere bal kheenchate huye kaha. Mujhe bhi laga ki sharab pee kar mujhe ek naya role ada karna hai. Maine usske andkosh kas ke pakad liye aur unko kheench liya,” Haan behnchod, teri didi ek randi hi to hai jo tujkh se chudwa rahi hai….chod mujhe haramzade Karan…apni behan ko nanga to kar chuke ab chod bhi lo, dekh kia rahe ho…..chhoti behan ko chod chuke ho ab badi ko bhi bhog lo sale behnchod” Mujhe na jane kia hua ki main iss tarah galian bakne lagi. Karan par bhi nasha chadh chuka tha. Ussne mere galon par ek thapad mara aur bola,” Sali chodunga tujeh bhi teri behan ki tarah hi. Tum ab jhuk jayo aur mere samen ghodi ban jayo. Chodte wakt main teri gaand dekhna chahta hoon. Dekhna kaise mera lund teri chut ko bhosda banata hai. Didi, tumko peechhey se chudwana achha lagata hai?”

“Behnchod, sale teri behan pehli baar chudwa rahi hai aur vo bhi tujh se. Mujhe achha hi lage ga chahe aage se pel ya peechhey se. Apni behan ko chahe ghodi bana ya kutti, mere bhai, par jaldi se chod dal. Mita dal apni behan ki chut ki aag” Main bol uthi aur Karan ne jaan liya ke main ab lund ki bhookhi hoon. Mujhe ghodi bana kar vo mere peechhey chala gaya aur meri gaand ko chatne laga,” Bhai, ab ye kia karne lage ho? Behnchod meri chut mein lund pel ye kutte ki tarah meri gaand baad mein chat lena. Iss lund ko pelo mere bhai apni behan ki chut mein…pleaseeeee” Karan utha aur apne lund ke supade ko mere chutad ki darar se hote huye meri chut ke muhane par tika diya. Uss behnchod ka lund aag ke shle ki tarah jal raha tha. Fir ussne kas kar meri kamar ko jakda aur apne lund thel diya meri bur ke andar.” Uiiieeeee….meri maaaaaaa……aaaaaaa…aaggggg” main dard se bilakh uthi. Mujhe kia pata tha ki lund ke ghusne se itna dard hoga. Khair sharab ke nashe ke karan peeda jald hi khatam ho gayi aur utejna ki vajah se mujhe maza aane laga.

Karan ek khiladi chudakad tha. Ussne dheere dheere chudayi ki shuruyat ki, lekin jald hi speed pakad li. Meri choti ko ussne essey pakad rakha tha jaise kissi ghodi ki lagam ho aur aur mujhe tezi se haankne laga.” Wah meri ghodi, bahut mast chut hai teri, chudwa maze se meri behna. Tere bhai ka lund aaj tere pet ke andar ki talashi le raha hai. Kaise mehsoos ho raha hai meri randi ebhan ko chudawate huye, Sudha? Maine hi teri behan Namita ki seal bhi todi thee aur aaj teri bhi tod raha hoon rani,” Utena ke akran mujhe dard to kam ho rha tha lekin meri janghon se kuchh geela sa beh raha tha jo ki mujhe baad mein pata chala ki meri seal tootne par mera khoon beh nikla tha. Karan ka lund jaise ki meri choot mein ja kar fail gaya ho kion ki ab vo meri cvhut ko puri tarah se bhar raha tha. Usske haath mere chutad par zor zor se chapat marne lage aur main utejna se pagal ho rahi thee.

“Chod mujhe mere bhai, jor jor se chod apni randi ko….tera lund mere bachedani ko takar mar raha hai….Karan chod mujhe maderchod…..yu mujhe apni behan bol ya rakhail par apna lund pelte raho meri chut mein……meri chut aaj tript ho rahi hai….kitne barson se pyasi hai lund ki…..Shabash mere bhai….chod apni behan ko…..Main ab jhadne ko hoon…Karan tezi se chod mujeh meri chut ka pani nikal raha hai….aur tez…..aur tez…chodo bhai…main jhadeeee…chodo bhai….main……”Meri chut se ras behta raha aur Karan apne lund se meri chut par parhar karta raha. Phacha phach chudayi ki awaz aa rahi thee aur achanak hi Karan ka jism bhi akad gaya.Usski saans tez ho gayi aur usske lund ne garam ras meri chut mein chhod diya. Usska lund ras meri chut se bahar girne laga aur meri janghon se ho kar bistar par dher lag gaya. Chudayi se thak kar main 2 ghante soti rahi, nangi hi apne Karan ki bahon mein.

samaapt

 
शिकस्त--01



दोस्तों, राज शर्मा एक बार फिर हाज़िर है अपनी नई कहानी ले के. थोड़ी लंबी हो गयी है, पर इतमीनान से पूरी पढ़े. तब ही उसका सही स्वाद मिलेगा.

अनुपमा मेरे साथ पढ़ती थी. वो तब बहोट ही खूबसूरत हुआ करती थी. उसने कभी हिस्सा नही लिया, नही तो ब्यूटी क्वीन हो सकती थी. लेकिन उसकी पढ़ाई पूरी नही हो पाई थी. इस के लिए उसका साथ छूट गया था. कई साल बाद मुझे वो रास्ते मे मिल गई. पहले जैसा नूवर नही था. उसकी तबीयत ठीक नही लग रही थी. मैं उसे घर ले गया. वहाँ उसने मुझे जो कहानी बताई उसे मैं अनु की ज़ुबानी पेश कर रहा हू

मैं अनुपमा हू. अभी अभी 24 साल की हुई हू. दस साल पहले मेरी मया का देहांत हो गया. उसके डेढ़ साल बाद पिताजी ने दूसरी शादी कर ली. नई मया ने कुच्छ ही समय मे अपना रंग दिखाया और ढाई साल मे तो मुझे घर छ्चोड़'ने पर मजबूर कर दिया. उस वक्त मैं करीब 18 साल की थी. मुझे पढ़ाई भी छ्चोड़नी पड़ी. मैने वो शहर ही छ्चोड़ दिया.

मैं मुंबई आ गयी. नौकरी की तलाश शुरू की. जहाँ भी गयी, मुझे नौकरी तो टुरट ही ऑफर होती थी, लेकिन वो मेरी खूबसूरती का जादू था. कोई कोई तो पहले ही बेझिझक हो कर प्रपोज़ल रखता था, तो कोई इशारों मे समझाने की कोशिश करता था. लेकिन मतलब एक ही था, मुझे जॉब दे कर वो मेरे रूप को भोगना चाहते थे. ऐसी करीब बीस ऑफर मिले. मैने वो सारी ऑफर ठुकरा दी.

एक जगह जहाँ ऐसी बात नही हुई, तो मैने वो जॉब टुरट ले ली. लेकिन एक ही वीक मे वोही अनुभव हुआ. मैने वो भी छ्चोड़ दिया. एक और मिली तो वहाँ भी बीस दिन ठीक जाने के बाद वही बात हुई. मैने वो भी छ्चोड़ दिया, लेकिन अब मैं दर गयी थी. जान चुकी थी की मेरा ही रूप मेरा बैरी बन चुका है. लोगो पर से और ईश्वर पर से विश्वास उठता जेया रहा था. मान ही मान सोच'ने लगी की शायद यही इस दुनिया का दस्तूर हो. इसे स्वीकार कर'ने के ख़याल भी मान में आने लगे.

लेकिन तब मेरी किस्मत बदलने वाली थी. इत्तेफ़ाक़ से मैं एक ऑफीस मे जेया पहुँची. बड़ी साफ सुथरी ऑफीस थी. मेरा इंटरव्यू खुद बड़े सेठ ने लिया. राजन नाम था उनका. एकदम साफ इंटरव्यू रहा. मेरे रूप की और तो जैसे नज़र ही नही थी. मैं पास हो गयी और मुझे वो जॉब मिल गयी. सॅलरी भी मेरी ख्वाहिश से दुगनी थी. यहाँ कोई आल्टू फालतू बात नही होती थी. बस काम से काम रहता था. मैं राजन सिर की प.आ. थी.

वो करीब 45 की उमरा के थे. उनके तीन बेटे थे, मझला मेरी उमरा का था. सभी भाइयों मे 2 साल का अंतर था. वी पढ़ते थे लेकिन कभी कभी ऑफीस आ जया करते थे किसी काम से. मैं उन सब से परिचित हो गयी थी. राजन सिर की पत्नी पिच्छाले एक साल से बीमार रहा करती थी. उसे ले कर राजन सिर चिंतित भी रहते थे. कभी कभी मेरे पास भी वी अपनी चिंता व्यक्त करते थे. उनकी पत्नी के बच'ने के चान्स कम थे. मुझे राजन सिर से हमदर्दी होने लगी थी और शायद....... प्यार भी. कच्ची उमरा का पक्का प्यार....... आख़िर जीवन मे पहली बार कोई ऐसा आदमी मिला था जो संपूर्णा था, श्रीमंत था, स्वरूपवान था, शिक्षित था, अच्च्चे शरीर सौस्ठव का और बहुत ही अच्च्चे व्यव'हार वाला था. यूँ कह सकती हूँ, चुंबकिया व्यक्तित्वा था उनका. वक्त गुजरता जेया रहा था. यूँ ही चार महीने बीत गये. एक रोज़ शनिवार के दिन दोपहर को वो बोले,

"अनु चलो" ( अब वो मेरा पूरा नाम अनुपमा नही कहते थे, अनु से बुलाते थे). मैने पुचछा,

"कहाँ ?" वो कड़क टोने मे बोल उठे,

"चलो भी" और खुद चल दिए. मैं भी साथ हो गयी. नीचे आ कर वो अपनी नई होंडा क्र्व मे बैठे. मेरे लिए बाजुवाला दरवाज़ा खोल दिया. मैं भी बाजू मे बैठ गयी. पुचचाने की हिम्मत ही नही हुई कहाँ जेया रहे है. कार चल पड़ी और थोड़ी देर मे हम शहर से बाहर आ गये. वो गुमसूँ थे. मैं भी कुच्छ बोली नही. गाड़ी पहाड़ो मे होती हुई खंडाला जेया पहुँची और 'डूक्स' रिट्रीट मे एंट्री ली. बड़ी शानदार जगह थी. उन्हों ने एक सूट ऑफीस से फोन कर के बुक किया हुआ था. यहाँ उन्हे सब जानते थे. काउंटर पर रिसेप्षनिस्ट ने मुस्कराते हुए कहा,

"युवर सूट इस चिल्ड, सिर, आंड मिनी फ्रीज़ इस फुल वित स्टॉक". उसने रूम की की दे दी, राजन सिर ने कार की की वहाँ दे दी और हम अंदर चले गये. सूट आलीशान था और एकदम ठंडा भी. एर-कंडीशनर पहले से ही ओं था. रूम बॉय आ कर कार मे से राजन सिर की छ्होटी सी बाग ला कर रख गया और कार की चाबी छ्चोड़ गया. अंदर पहुँच के उन्होने कोट उतार फैंका और नेक्टिये ढीली करते हुए सोफे मे जेया गिरे, जुटे उतरे और पावं लंबा कर के सेंटर टिपोय पर रखते हुए बोले

" अनु, तुम सोच रही होगी , ये सब मैं क्या कर रहा हूँ, है ना ?" मैने मंडी हिलाई. उन्हों ने पास बैठने का इशारा किया. मैं बाजू मे जेया कर बैठी. उन्हों ने मुझे नज़दीक खींचते हुए कहा (मैं उनके इतने पास कभी नही बैठी थी पहले)

" अनु, आज डॉक्टर ने जवाब दे दिया. संगीता (उनकी पत्नी) अब 20-25 दिन की मेहमान है." गिड़गिड़ती आवाज़ मे आयेज कहा,

"हमारा 23 साल का साथ च्छुत जाएगा, मैं अकेला हो जौंगा". मैने सांत्वना दी,

" ये सब तो उपरवाले के हाथ मे है. लेकिन आप खुद को अकेला ना सम'झे. मैं जो साथ हूँ." वो आयेज झुके और मेरी आँखों मे झाँकते हुए कहा,

"सच ? क्या तुम वाकई मेरे साथ हो ?" मेरी आँखों मे झाँकति हुई उनकी आँखों मे कुच्छ अजीब से भाव मैने महसूस किए पर मैं समझ नही पाई और बोली,

"हन, सिर" उनका दूसरा प्रश्ना पिच्चे ही आया,

"संगीता की तरह ?" मैं चौंकी, पर बोल उठी,

"हन, सिर". वापस सोफे की बॅक का सहारा लेते हुए बोले,

"चलो अच्च्छा है..... ज़रा फ्रीज़ से विस्की और सोडा ला. और तुम भी सफ़र से ताकि होगी. जेया, नहा के फ्रेश हो जेया." मैने उनका पेग भरते हुए कहा,

"मैं तो कपड़ा भी नही लाई. नहा के क्या पहनूँगी ? मुझे नही नहाना." मुस्कराते हुए उन्हों ने अपनी बाग से कुर्ता और लूँगी निकल के फैंकते हुए कहा,

" ले, ये तुझ पर बहोट जाचेगा." मैं ने उसे उठाया और शरमाते हुए बोली,

"लेकिन आप की बाग मे ब्रा और पनटी थोड़ी होगी ?" विस्की की सीप लेते हुए वो बोल उठे,

" अब जेया भी, एक दिन ब्रा-पनटी नही पहनेगी तो नंगी नही दिखेगी" खिल खिल हंसते मैं कपड़े उठा के अंदर चली गयी. बातरूम बड़ा लग्षूरीयस था. पूरे कद का मिरर लगा हुआ था. मैने अपने कपड़े उतरे और अपने ही फिगर को आडमाइर करते हुए देख'टी रही. सोचा, वे सब लोग जो मुझे जॉब देते समय मेरे रूप के पागल होते थे....... आख़िर ग़लत तो नही थे !! मैं हूँ ही ऐसी.

फिर पानी भरे टब मे लेती और आज के बारे मे सोचने लगी. टुरट ख़याल आया, राजन सिर आज कुच्छ बदले बदले लग रहे है. वैसे भी औरत किसी भी मर्द की नियत को जल्दी ही समझ लेती है. मुझे भी वो पल याद आया, जब उन्हों ने मेरी आँखों मे अपनी आँखो से झाँकते हुए कहा था ;

"सच ? क्या तुम वाकई मेरे साथ हो ?" और दूसरा प्रश्ना था,

"संगीता की तरह ?" मुझे बात समझ मे आने लगी. भले ही इतने समय राजन सिर ने नेक व्यवहार किया हो, आज की बात कुच्छ और है. आज वो भी उसी लाइन पर है और मुझे भोगना चाहते है. लेकिन आश्चर्या !!!! पहले जहाँ मैं ऐसे हर मौके पर जॉब ठुकरा के भागी थी, इस बार मान मे कोई विरोध उठना तो दूर रहा, एक मीठी गुदगुदी सी हो रही थी. मैने टब मे अपने ही स्तन को सहलाते हुए अपने मान को टटोला. नतीजा सामने था. इन चार महीनो मे मैं मान ही मान उन्हे पसंद करने लगी थी. और संगीता की जान लेवा बीमारी की बात ने तो ये आशा भी जगाई थी की उसकी मृत्यु के बाद मैं म्र्स. राजन भी बन सकती हू.

ये ख़याल आते ही मान पुलकित हो उठा. फ्रेश हो के बाहर आई तो वो दूसरी ही अनु थी. मैं बाहर आई तो देखा की राजन सिर सोफे से बेड पर आ गये थे, कपड़े बदल के अब सिर्फ़ शॉर्ट्स मे थे. उपर का बदन खुला था, मैं उनके कसे हुए सिने को लोलूपता से देख रही थी. वो दो पेग पी चुके थे. उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो आँखे फाड़ कर देखते ही रह गये. कुर्ता लूँगी मे, बिना ब्रा-पनटी के, मैं बहोट ही सेक्सी लग रही थी. बालों से पानी तपाक रहा था, और मेरे स्तनों के उपर गिर के कुर्ते के उस भाग को गीला कर रहा था.

गीला कुर्ता मेरे स्तनों से चिपक कर , मुझे और सेक्सी लुक दे रहा था. मैं बेड पर उनके बाजू मे बाईं और जेया के लेती और एक गहरी साँस ले के मेरे स्तनों को उभरा. कुर्ते का उपरी बटन भी खुला छ्चोड़ रखा था मैने. मेरी आधी क्लीवेज सॉफ नज़र आ रही थी. उनके दिल मे हल्का सा तूफान तो उठा ही हुआ था. अब मेरी हरकत से उनके दिल मे खलभाली मची. उन्हों ने पेग साइड टेबल पर छ्चोड़ दिया और मेरी और मुड़े.

एक ही झट'के मे उनका डायन पैर मेरी दोनो जाँघो पर आ गया, उनका डायन हाथ मेरे बाएँ मुममे पर आ गया, और उनके होत मेरे दाएँ कान के पास आ गये. वी बिना कुच्छ कहे, जैसे अपना अधिकार समझ कर, शुरू हो गये. मेरे कान की बूट्ती (र्लोबस) को अपने मूह मे ले कर छुआस'ने लगे, साथ ही जो हाथ मेरे मुममे पर था उस से उसे सहलाने लगे और जो पावं मेरी जाँघो पर आ चक्का था उसे उपर नीचे करने लगे.

उनके लिए यह सब नया नही था, सिर्फ़ पात्रा बदल गया था. पर मैं तो जीवन मे पहली बार किसी मर्द का अनुभव कर रही थी. बदन पर एक साथ तीन तीन जगह स्पर्श हो रहा था. कान, मुममे और जाँघ पर. मुममे और जाँघ पर तो कपड़े के उपर से हो रहा था, लेकिन कन-बूट्ती पर तो सीधा ही हो रहा था. एक झंझनाहट सी महसूस हो रही थी. यह कहानी आप याहू ग्रूप्स; देशिरोमंसे में पढ रहें हैं. मैं आँखे मूंद कर पड़ी रही. कान तो एकदम गरम हो रहा था. उतने मे उन्हों ने एक हल्की सी बीते ले ली, रलोब पर. मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी. दर्द हो रहा था... पर अच्च्छा भी लग रहा था.

जाँघो पर उनके वज़नदार पावं उपर नीचे हो रहे थे. उस वजन के नीचे सिल्की लूँगी का मुलायम स्पर्श मेरी लचीली जांघों को उत्तेजित कर रहा था. और साथ ही मेरा मुम्मा पहली बार किसी मर्द के हाथों दबाया जेया रहा था. (वैसे ये अनुभव पूरी तरह से नया नही था. हर लड़की यौवन प्रवेश पर अपने ही हाथों अपने स्तनों को दबा के ये अनुभव ले लेती है. मैने भी लिया था. पर मान'ना पड़ेगा... मर्द के हाथों स्तन दबाने पर जो अनुभव होता है, वो अपने हाथों चाहे कितना ही दबा लो, उस से अलग ही होता है). अब उनका मुँह मेरे कान छ्चोड़ कर गालों पर आ गया. उनकी साँसे मेरे गाल पर टकरा रही थी और उनके होत जो अब गीले हो चुके थे गाल पर किस कर रहे थे.

पूर गाल को चूमते हुए, वो थोड़े उपर उठे और मेरे रसीले होठों पर अपने गरम गीले होत रख दिए. वो पूरी तरह उपर नही उठे थे. सिर्फ़ सीना और मुँह उपर उठाया था. उपर उठ के आने की वजह से अब उनका खुल्ला सीना मेरे दाएँ मुममे को दबा रहा था. स्तनों पर मर्द का वजन कैसा रंगीन लगता है, ये तो लड़कियाँ ही जानती है. साथ ही बायन मुममे जो अब तक सहलाया जेया रहा था, अब मसाला जेया रहा था. जांघों पर पावं की मूव्मेंट भी थोड़ी तेज हो गयी. लूँगी सिल्की थी. इतनी लंबी और अब तो तेज मूव्मेंट से खुल गयी और नीचे की और उतार गयी. मैने आप'नी और से सह'योग देते हुए, अपने पावं चौड़े किए. अब पावं की मूव्मेंट के साथ उनका खुल्ला घुटना मेरी खुली छूट को टच करने लगा. उपर से नीचे तक सब जगह मज़ा आ रहा था....

मेरे कान छ्चोड़ कर गालों पर आ गया. उनकी साँसे मेरे गाल पर टकरा रही थी और उनके होठ जो अब गीले हो चुके थे गाल पर किस कर रहे थे.

पूर गाल को चूमते हुए, वो थोड़े उपर उठे और मेरे रसीले होठों पर अपने गरम गीले होत रख दिए. वो पूरी तरह उपर नही उठे थे. सिर्फ़ सीना और मुँह उपर उठाया था. उपर उठ के आने की वजह से अब उनका खुल्ला सीना मेरे दाएँ मुममे को दबा रहा था. स्तनों पर मर्द का वजन कैसा रंगीन लगता है, ये तो लड़कियाँ ही जानती है. साथ ही बायां मुममे जो अब तक सहलाया जा रहा था, अब मसाला जा रहा था. जांघों पर पावं की मूव्मेंट भी थोड़ी तेज हो गयी. लूँगी सिल्की थी. इतनी लंबी और अब तो तेज मूव्मेंट से खुल गयी और नीचे की और उतार गयी. मैने आप'नी और से सह'योग देते हुए, अपने पावं चौड़े किए. अब पावं की मूव्मेंट के साथ उनका खुल्ला घुटना मेरी खुली चूत को टच करने लगा. उपर से नीचे तक सब जगह मज़ा आ रहा था....

अचानक एक ख़याल मान मे उठा, `ये मैं क्या करने जा रही हू ? क्यों उन्हे रोकती नही हू? ऐसे तो मेरा यौवन भ्रष्टा हो जाएगा.' पर मन की कौन सुनता था ! अब तो दिल ही हावी था !! कहयाल जैसा उठा वैसा ही दफ़न हो गया. मैं वापस मज़ा लेने मे मगन हो गयी... अब उन्हों ने पूरा बदन उठाया और मेरे उपर आ गये. उनका पूरा बदन मेरे बदन पर ही था. मैं उनके भारी वजन के नीचे दबति जा रही थी. क्रश हो रही थी. और क्या मज़ा आ रहा था !! मैने अपने हाथ उनकी खुली पीठ पर फैलाए और पसारने लगी. कभी कभी नीचे शॉर्ट्स के उपर से हिप्स पर भी फिरा लेती थी. वो अब तेझी से मेरे पुर चह'रे पर किस किए जा रहे थे. मैं भी अब उन्हे किस मे साथ दिए जा रही थी. मैने उनके होठों पर मेरे होठ रख दिए और एक लंबी किस शुरू की. दोनो ने होठ थोड़े खोले और मैने अपनी जीभ उनके मुँह के अंदर डाल दी. अंदर चारो और फिरते हुए उनकी जीभ से जीभ टकराई. होठ से होठ तो मिल ही रहे थे.

उनका दायां हाथ जो अब तक मेरे बाएँ मुममे को मसले जा रहा था, तेज़ी से नीचे खिसका और कुर्ते के अंत तक पहुँच कर उस के नीचे घुसा और वापस उपर आ गया. आप को ये पढ़ने मे जितना वक्त लगा , उस से भी कम समय मे एक ही आक्षन मे ये सारा मूव्मेंट हो गया. अब उनका दायां हाथ कुर्ते के अंदर मेरे बाएँ स्तन पर सीधा स्पर्श कर रहा था. पहली बार मेरे मुममे को किसी मर्द ने च्छुआ था. वो तेज़ी से मसालने लगे उसे. अच्च्छा तो लग रहा था, पर कब से ये बायां मुममे ही मसला जा रहा था.... तो मेरे दाएँ मुममे मे भी एक कसक उठी, वो भी दबावाने के लिए बेताब हो उठा.

मैने शर्म छ्चोड़ कर उनका बायां हाथ थमा और उसे मेरे दाए मुममे पर ले गयी. वो समझे, और मुस्कराते हुए दोनो हाथ नीचे ले गये, और कुर्ता उपर की और उठाया. मैं भी सिर के बाल हल्की सी उपर हुई और उन्हों ने कुर्ता मेरे गले तक खिसका लिया. मैने बदन नीचा किया और मंडी उपर उठाई, उन्होने कुर्ता पूरा बाहर निकल दिया और फैंक दिया एक कोने मे. लूँगी तो पहले ही खुल के घुटनो तक उतार चुकी थी. उन्हों ने पावं उपर ले के उस मे उसे फसा के पावं जो नीचे किया तो वो भी मेरे सहयोग के साथ बाहर हो गयी.

अब मैं पूरी नंगी थी और उनके नीचे दबी हुई थी. वापस फेस पर किस करते हुए अब वो दोनो हाथो से मेरे दोनो स्तनों को मसल रहे थे. ऐसा लग रहा था, जीवन भर कोई ऐसे ही मसला करे इन्हे. ! लेकिन थोड़ी ही देर मे मैं बेचैन हो उठी.....!!!

पहले स्तनों को सहलाए जाने का मज़ा लिया, लेकिन फिर दबावाने की इच्च्छा हो रही थी, दबाए गये तो मसले जाने की कसक उठी, अब मसले गये तो चूसाए जाने की चाह उठी. और उसी चाह ने मुझे बेचैन कर दिया था... मैने उनका मुँह - जो मेरे फेस पर किस करने मे लगा हुआ था - पिच्चे से बालों से पकड़ के हल्के से नीचे मेरे स्तनों की और खींचा.

वो तो अनुभवी थे, इशारा समझे और नीचे उतार बाएँ मुममे की और लपके. पर मेरा तो डायन मुम्मा कब से भूखा था. मैने फिर बालों से मुँह को दाएँ मुममे की और खींचा. वो उसको चारो साइड से चूमने लगे. इस खेल के मंजे हुए खिलाड़ी जो थे ! निपल को केन्द्रा बना कर पुर मुममे पर निपल से डोर सर्क्युलर मोशन मे चूम रहे थे. धीरे धीरे सर्कल छ्होटा करते जा रहे थे. मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. निपल मर्द के मुँह मे जाने के लिए उतावला हो रहा था. एक दो बार तो मैने उनका फेस निपल की और घसीटना चाहा. पर वो तो अपनी स्टाइल से ही चूमते रहे. मुझे टीज़ जो कर रहे थे. निपल मोटा और कड़क होता जा रहा था. सर्कल एकदम छ्होटा हो गया तब तो निपल से उनकी गर्म साँसे टकराने लगी, लेकिन उसे तो उनके मुँह का इंतेजार था. जब एकदम छ्होटा हो गया तो उन्हों ने जीभ निकली और अब तक कड़क हो चुके निपल पर टकराई. मेरे मुँह से आ निकल गई.

शरारती नज़र से मेरी और देखते हुए उन्हों ने जीभ झड़प से निपल की चारो और फिरा दी... और फिर लपक के निपल मुँह मे ले ली. मेरी धड़कन तेझ हो गई. जिस के लिए काब्से निपल बेताब हुए जा रहा था, वो अनुभव होना शुरू हो गया. वो मस्ती से उसे चूस रहे थे. आहा ! क्या फीलिंग थी !! निपल से जैसे करेंट बह रहा था और पुर बदन मे फैल रहा था......एक नशा सा च्छा रहा था ! कितना आनंदप्रद अनुभव होता है ये !!

यही सब दूसरे मुममे के साथ भी किया गया. बड़े आराम से वो लगे रहे, दोनो स्तनों पर. एक चूसाते थे तो डुअसरे को मसलते थे. मैं नारी तो जन्मा से थी लेकिन नारितवा आज महसूस कर रही थी. एक अरसे के बाद नशा तोड़ा कम हुआ तो मैने उनकी खुली पीठ पर रखे अपने दोनो हाथ से उन्हे अपनी और दबाते हुए एक आलिंगन दिया. उन्होने भी अपने हाथ मेरे स्तनों से हटा के साइड से होते हुए, मुझे हल्का सा उठाते हुए, मेरे बदन के नीचे पहुँचा दिए.. और आलिंगन दिया. मुझे साथ ले कर रोल ओवर हो के मेरी साइड मे आ गये और आलिंगन पर बड़ा ज़ोर दिया. आहहाअ....... मैं उनकी बाहों मे क्रश हो गयी...... बड़ा सुकून मिल रहा था......... लगता था वक़्त ठहर जाए तो कितना अच्च्छा होता.

उन्हों ने पकड़ ढीली कर के एक हाथ नीचे अपनी एलास्टिक शॉर्ट्स मे सरकया, और उसे नीचे खींचा. मैने देखा तो मैने भी शॉर्ट्स मे पावं फसा के उसे नीचे उतार दिया. पता नही मैने ये क्यों किया. उनका लंड बाहर निकल आया. फिर मुझे आलिंगन मे क्रश कर के वो रोल ओवर होते हुए वो मुझ पर आ गये. लेकिन अब दोनो बिल्कुल नंगे थे. वो पूरी तरह तैयार हो चुके थे. उन्हों ने अपने हिप्स उठाए और लंड को मेरी चूत के मूह पर ले आए. तब मुझे ख़याल आया , क्या होने जा रहा है. एक पल के लिए मैं सहमी और उनको कहा,
 
शिकस्त ---02 लास्ट पार्ट

सर, अब आगे नही. किसी भी मर्द को इस मौके पर रुकावट पसंद नही. वो भी चिड़े हुए स्वर मे बोले

" क्या है". मैने खुलासा किया,

" मैं अभी तक कुँवारी हूँ, सर". झट से जवाब आया,

" हर लऱ'की पह'ले कुँवारी ही होती है और तब तक रह'ती है जब तक कोई मर्द उसे औरत न बना दे. " और बिना मेरे जवाब की दरकार किए , उन्हो ने अपना लंड अंदर घूसा दिया. आगे वही हुआ जो सब जानते है. कुच्छ ही पल मे मैं लड़की से औरत बन गयी.

जब मुझे आहेसास हुआ की क्या हो गया है तो इस तरह अपना कौमार्या खोने पर मैं थोड़ी उदास हो गयी. वो भी मेरे मूड को समझे. शाम हो रही थी. मुझे कहा ,

मैं ज़रा बाहर हो आता हूँ. उनके जाने के बाद मैं गुम सूम लेटी रही और अपने जीवन का मुआयना करती रही. घंटे भर मे वो वापस आए, एक थैली मुझे दी और कहा ये ले, तैयार हो जेया. मैने देखा तो अंदर नया ड्रेस था. चावी वाले पुतले की तरह, बिना कोई भाव'ना के, मैं उठी और ड्रसस पहन लिया. वो मुझे साथ लिए बाहर चल दिए. गाड़ी रुकी तो वो एक सुना मंदिर था. वो दर्शन करने गये, तो मैं भी गयी. दर्शन कर के आँखे खोली तो, ..... आश्चर्य चकित हो गयी. वो हाथ मे मंगल सट्रा लिए खड़े थे. मुझे भीने स्वर मे कहा,

"भगवान को साक्चि मान कर, मैं तुझे अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ". मैं देखती ही रह गयी... कहीं ये सपना तो नही?? उन्हो ने मेरे गले मे वो मंगल सट्रा पहना दिया. मैं खुश हो गयी. उस रात मैने बेड पर तूफान मचा दिया. वो भी पूरी तरह से खिले थे. ना जाने रात भर मे कितनी बार चुदाई हुई. सुबह होते होते नींद लगी और दोपहर को खुली. फिर एक बार हम'ने कामसुख भोगा. जब वापस चले तो हम दोनो पूर्णा टाइया तृप्त थे. मुझे लगा वो बादल है और मैं धरती. बादल रत भर बरसा और पानी बनकर धरती मे समा गया. खुद खाली हो गया और धरती को तृप्त कर दिया. मैं अपने आप को मिसिज. राजन समझने लगी थी. संगीता के बाद मेरा ही तो है सब.

वापस लौट के आने के बाद उन्हों ने मेरे लिए एक फ्लॅट ले लिया और मुझे वहाँ ठहरा दिया. डॉक्टर ने भले ही संगीता को 20-25 दिन की मेहमान होने का कहा था, उस की तबीयत कुच्छ सुध'री और हॉस्पिटल मे ही उसने चार महीने और खींचे. तब तक रोज, राजन सर मेरे फ्लॅट पर आते थे , मुझे भोगते थे और चले जाते थे. मैं कुछ बोल भी नही सकती थी. एक बार आत्म-समर्पण जो कर चुकी थी और उनकी पत्नी बनने के सपने भी देखती थी. संगीता की डेत के बाद वो बोले, हमारे घर्मे एक साल का शोक मानते है. तो एक साल शादी की बात फिर ताल गयी. साल भी बीत गया और दूसरा साल भी आ गया. राजन सर कोई ना कोई बहाना बना कर शादी टाल देते थे, पर मुझे चोदना नही भुलाते थे. मेरी जवानी का और सुंदरता का पूरा पूरा लुत्फ़ (आनंद) उठाया, मज़ा लिया.

मैं भी समझने लगी थी,... की .. पत्नी बनने के चक्कर मे मैं उनकी रखैल बन चुकी हूँ!! फिर अपना बॅकग्राउंड देख कर और जॉब ढूँढने के समय के अनुभवों को याद कर, मान को मनाती रही ; रखैल भी बन गयी तो ठीक ही है. फिर एक दिन एक नई बात बनी. उस रात ऑफीस की और से पार्टी थी. मैं भी तैयार हो के गयी थी और मेहमानों की देख भाल देख रही थी. ये सब मैं पहले भी कई बार कर चुकी थी. सारी व्यवस्था पर नज़र रख रही थी. जब पार्टी ख़त्म होने मे थोड़ी देर बाकी थी, तो राजन सर आए और मुझे एक कोने मे ले जेया के प्यार भरे सुर मे कहा,

" अनु, वो ब्राउन सूट मे मिस्टर. शरमा खड़े है, देख रही हो ?" मैने हामी भारी. आवाज़ और धीमी और गंभीर करते हुए कहा.

"हमारे लिए बहोट इंपॉर्टेंट गेस्ट है. उनसे हमे 25 करोर का कांट्रॅक्ट मिल सकता है. बड़े रंगीन मिज़ाज आदमी है. कांट्रॅक्ट पेपर्स को लड़की के खुले स्तन पर रख के साइन करने का शौक रखते है. तू ही इनको संभाल सकती है. उन को ओबेरोई मे ड्रॉप करने जेया और खुश कर के सुबह लौटना, समझी ??" और मेरे जवाब की परवाह किए बिना ही मुझे ले चले और मिस्टर. शर्मा से इंट्रोडक्षन करवा दिया,

"सर, यह है हमारी हॉट ब्यूटी क्वीन, अनुपमा." आँख विंक करते हुए आड किया,

"`हर काम' मे माहिर है. आप को होटेल पर छ्चोड़ने आ रही है. आप कांट्रॅक्ट पर दस्तख़त ज़रूर कर देना." शर्मा ने लोलुप नज़रों से मेरे स्तनों को देखा और बोला,

"साइन करने की जगह तो सही है" और गंदी तरह से हंस पड़ा. राजन सर भी उसकी हँसी मे शामिल हो गये और मुझे उसकी और पुश करते हुए कहा,

"गुड नाइट तो बोत ऑफ योउ". सब कुच्छ इतना फास्ट हो गया, की बिना कोई प्रतिक्रिया किए मैं ओबेरोई मे शर्मा की बेड पर पहुँच गयी. . मैने सोचा, अब आ ही गयी हूँ तो काम पूरा कर दूं. .. और मैने शर्मा को खुश कर दिया.... सुबह होते उसने कोंटर्कत पेपर्स निकले और मेरे नंगे स्तनों पर रख कर साइन कर दिया. वापस आ के पेपर्स राजन सर को दिए तो बहोट खुश होते हुए कह उठे,

"मैं जनता था, तुम ये काम ज़रूर कर सकती हो". उस के बाद तो ये सिलसिला ही बन गया. मैं रखैल से कब रंडी बन गयी पता ही नही चला. धीरे धीरे राजन सिर का मेरे फ्लॅट पर आना कम हो गया. और एक दिन देखा की उन्हों ने ऑफीस मे एक नई प. ए. भी रख ली थी. अब मेरा ऑफीस मे पहले जैसा रेस्पेक्ट भी नही रहा था. मुझे कहीं भी कुच्छ भी अच्च्छा नही लग रहा था. तो मैने राजन सर को एक दिन अपने फ्लॅट पर बुला लिया. वो आए. मैं साज धज के तैयार हुई थी, उन्हे आकर्षित करने के लिए. उन्हों ने जाम के मेरी चुदाई भी की. जब लगा मुझे की वी संत्ुस्त है तो मैने बात निकली और जो हो रहा था उसके प्रति नाराज़'गी व्यक्त करते हुए कहा,

" सर, आप ने तो मुझे मंदिर मे भगवान को साक्षी मान कर पत्नी बनाया था, फिर आपने पत्नी की जगह रखैल बना दिया, मैने वो भी सह लिया, लेकिन अब तो आपने मुझे रंडी बना दिया है, क्या ये ठीक है?" वो हंसते हुए बोले,

"छ्होटी बच्ची थोड़ी हो की मैं काहु और तुम चली जाओ किसी के साथ सोने के लिए ? तुम्हे भी तो खुजली थी शर्मा से चुदाने की." अब आवाज़ तीखी हुई,

" एक तो रहने को आलीशान फ्लॅट दिया है, पैसे की तकलीफ़ नही है, तुम्हे रोज नई वेराइटी मिलती है, फिर भी नखरे दिखती है ? और तुम्हे क्या फ़र्क पड़ता है, मैं चोदु या कोई और चोदे ? चुदाई तो चुदाई ही है ना ? समाज ले अपना शरीर मुझे ही दिया है."

उनका ये रूप देख कर मैं तो हक्का बक्का रह गयी. थोड़ी देर तो क्या बोलना है, कुच्छ सूझा ही नही. फिर जब संभाली तो मैने भी कसर नही छ्चोड़ी. दोनो गुस्से मे आ गये. बात बिगड़ती गई. बड़ा झगड़ा हो गया. मैने कह दिया,

"राजन, तूने मुझे धोखा दिया है. मैं तुझे नही छ्चोड़ूँगी. देख लूँगी. " इस पर तो वो लाल-पीला हो गया. बड़ी हस्ती थी. उसे कोई ऐसा कह जाए तो कैसे सुन लेता ? वो भी बिगड़ा,

"तू ? तू मुझे देख लेगी ? तेरी हैसियत ही क्या है ? मेरे सामने तेरा क्या वजूद है ? मेरे पास पैसे की ताक़त है, सोशियल स्टेटस है, पोलिटिकल कॉंटॅक्ट है, बड़े बड़े नेता से संबंध है, पोलीस और अंडरवर्ल्ड मे पहेचन है. और तू ? एक रंडी मात्रा !! तेरी क्या औकात है की मुझे देख लेगी ? चल खाली कर ये घर अभी का अभी !!" मेरे पास कोई चारा नही था. लेकिन घर छ्चोड़ते हुए मैने अपनी सारी भादश निकल दी,

"राजन, तू देखना , इन सब के बावजूद मैं तुझे हरा दूँगी, मॅट दे दूँगी !! तुझे ये रंडी शिकस्त देगी, शिकस्त !!! " घर तो छ्चोड़ दिया, पर जिए कैसे... कहाँ जाए.... ये सारे प्रश्ना सामने आ गये. मैने फिर एक बार शहर छ्चोड़ दिया. लेकिन जल्द ही भूख-प्यास से मैं उब गई. रातों को हाइवे पर खड़ी रह के ट्रक द्रिवेरोन के साथ सोई और खनेका पैसा जुटाया. एक भले ड्राइवर ने बताया ,

"देल्ही जितना सेक्स का व्यवसाय कहीं नही होगा अपने देश मे. तू सुंदर है. वहाँ तेरी कदर होगी. मैं देल्ही जेया रहा हूँ ये ट्रक ले के, मैं वहाँ कोठे भी जानता हूँ, बैठ जेया, तुझे वहाँ पहुँचा दूँगा." इस तरह नसीब मुझे देल्ही ले आया. मजबूरी मे मुझे वाकई रंडी ही बनना पड़ा. मैने भी वो कोठा पकड़ लिया. सुंदर तो मैं थी ही. मेरा काम चल पड़ा. बहोट कस्टमर आते थे. एक रात मे दस कस्टमर्स को बैठा लेती थी. कोठे की मेडम भी खुश और मैं भी. अब रहने की और खनेकी चिंता तो ना रही. कुच्छ कस्टमर तो खाश हो गये.

यूँ दिन बीत रहे थे.... कुच्छ साल भी बीत गये. अब पैसे भी बन गये थे. लेकिन मैं राजन को नहीं भूली थी. कैसे उस से बदला लूँ, ये सोचती रहती थी.

[दोस्तों, अनुपमा की ज़िंदगी मे फिर कुच्छ ऐसी बात बनी , जो कहानी के रस को ध्यान मे रखते हुए मैं आगे बताऊँगा. ]

फिर एक दिन कुच्छ ऐसी बात हुई की मुझे मेरा हथियार मिल गय....ऱजन को हराने के लिए. और मैं चल पड़ी वापस मुंबई की और.

मुंबई आ के दो महीने तक मैं उस'से नही मिल पाई, क्यों की वो विदेश गया हुआ था. लेकिन उस समय मे मैने अपना काफ़ी काम कर लिया. अब अंतिम वार करने का समय आ गया. राजन के लौटते ही मैं उसे मिली. सेक्सी ड्रेस मे साज धज के गयी थी. मुझे देख के उसे आश्चर्या हुआ. मुहे उपर से नीचे तक देखते हुए बोला,

"थोड़ी फीकी पद गयी हो" मैने कहा,

"हन, आप के बिना ये हाल हो गया मेरा." उसके चेहरे पर अभिमान भारी मुस्कान च्चाई,

"तो अब तेरी अककाल ठिकाने आ गयी ! चली थी मुझे हराने की चॅलेंज दे कर !! कहाँ पिघल गया तेरा वो सब गुमान ?" विनती भारी आवाज़ मे मैं ने कहा,

" अब भूल भी जाइए वो सब, सर ! मैं लौट आई हूँ हमेशा के लिए आप की होने के लिए. आप जो कहेंगे वो सब मैं करूँगी." गंदा हास्या करते हुए वो बोला,

"तो अब घर, पैसा और सुविधा के लिए तू रंडी बनने को भी तैयार हो गयी." मैं ने एक सेक्सी आवाज़ मे कहा,

"वो तो है ही, पर एक बात और भी है, सर,... जिसने मुझे मजबूर किया है." आचरजभरी निगाह से वो मुझे देखता रह गया, लेकिन जब बात समझ मे नही आई तो पुच्छ बैठा,

" और वो क्या है ? " मैं ने एक सेक्सी अंगड़ाई ली और ड्रेस की स्लिट से पूरी जाँघ उसे दिखाते हुए बोली,

"आप की जैसी चुदाई भी तो कोई नही करता, ना !!, आप मुझे रंडी बनके चाहे जिस'के पास भेजे, लेकिन आप को भी मुझे रोज चोदना होगा ! " वो घमंड से फूला ना समाया. वैसे भी सारे मर्द को यही लगता है की उसके जैसी हार्ड चुदाई कोई नही करता. वह भी खुशी भरा चेहरा ले कर बोला,

" तो ये बात है ! ठीक है, तेरे साथ एक प्रोग्राम बनता हूँ" मैं जेया के उसके लॅप मे बैठी और उसके गले मे हाथ डालते हुए कहा,

" मुझे वहीं ले चलो, जहाँ पहली बार चोदा था." उसे सब याद था, बोल पड़ा,

"तो 'डूक्स' खंडाला मे जाने का इरादा है मेडम का !" मैने मंडी हिला के हन कही और उसके रलोब पर एक गरम किस और बीते दे दी. उसने वीकेंड का प्रोग्रामे बना लिया... और दूसरे दिन शनिवार की दोपहर हम वही सूट मे पहुँच गये.... जहाँ मैने अपना कौमार्या खोया था ! अंदर पहॉंच के मैं उस'से लिपट गयी और उसके गले मे बाहें डालते हुए मेरे होठ उसके होठ पर रख दिए. वो भी शुरू हो गया.

तुरत ही दोनो की जीभ एक दूसरे के मूह मे फिर रही थी... मैने ये चुंबन बहोट लंबा चलाया ..और दोनो के मूह की लार एक दूसरे मे घुलमिल गयी. थोड़ी ही देर मे जब दोनो नंगे हो गये और वो बेड पर लेत तो मैं उसके मूह पर जेया के इस तरह बैठी की मेरी चूत उसके होत पर आ जाए. वो उसे चूमने लगा. मैने सेक्सी आआहएं भारी तो समझा मुझे मज़ा आ रहा है, और चूत को फैला के जीभ अंदर डाल के चाटने लगा. मैं यहाँ भी लंबे समय तक लगी रही. उसे भी मैने पूरा गरम किया और उसने मुझे जाम के चोदा. थोड़ी ही देर मे मैं फिर उठी और उसे कहा,

चलो आज साथ नहाते है. बाथरूम मे फिर एक और रौंद हो गया. रात भर मैं लगी रही. (देल्ही मे दस दस को बैठा के मेरी केपॅसिटी भी तो बन चुकी थी !) सुबह तक में तो मैने उसे निचोड़ ही डाला. सनडे का दिन और रात भी ऐसे ही तूफान भरे बिताए. उसे भी बड़ा असचर्या हो रहा था, मेरा ये रूप देख कर. कुच्छ अजीब भी लग रहा था उसे, मेरा इस तरह अचानक आना और उसे यहाँ ले आना, और उसके बाद इस तरह से चुदते रहना.... पर समझ नही पा रहा था. मंडे की सुबह को लौटने से पहले जब मैने उसे फिर एक बार उकसाया तो आखरी चुदाई करते हुए बोल ही पड़ा,

"अनु, तुम किस बात पर उतार आई हो, समझ मे नही आता !!! ऐसा लग रहा है, कोई राज है !!!" मैने रंग बदलते तीखी आवज़ मे कहा,

"तो मैं समझा देती हू.... की... मैं किस बात पर उतार आई हू ! तू सही कहता है, एक राज है, और ले, वो राज भी मैं खोल देती हू." उसे धक्का दे कर मेरे उपर से हटाया और मेरी पर्स से एक एन्वेलप निकलके उसकी और फैंकते हुए मैने कहा,

" पढ़ इसे, ये तेरी मौत का परवाना है !" वो बिना कुच्छ समझे मेरा मूह ताक'ता रहा. मैने आवाज़ मे सारी नफ़रत घोलते हुए कहा,

" राजन, मुझे एड्स हुआ है !!!!! उसका रिपोर्ट है उस एन्वेलप मे . इतना ही नही, और एक फटल एस टी डी (सेक्षुयली ट्रॅन्स्मिटेड डेसीज़) का भी मैं शिकार हो गयी हू, जो बहोत बहोत ही चेपी (कंटेजियस) है . जो मेरे साथ एक बार भी सोएगा , उसका शिकार हो जाएगा. .डॉक्टर्स ने हाथ उठा लिए है !!! मैं इस धरती पर अब कुच्छ ही महीनों की मेहमान हू !!! और मैने ये दो दिन मे तुझे भी ये रोग लगा दिया है. अब तू भी कुच्छ ही महीने का मेहमान है. इतना ही नही..... जब तुम पिच्छाले दो महीने से विदेश मे था, मैने तेरे तीनो बिटो को भी ये रोग पूरी तरह लगा दिया है. अब तो बड़े लड़'के की पत्नी (एक बेटे की शादी इस दौरान हो गयी थी) भी इसका शिकार हो गयी होगी." दुख, घृणा, संतोष और आनंद मिश्रित स्वर मे मैने कहा,

" राजन, मैने सिर्फ़ तुझे ही नही तेरे सारे खानदान को सत्यानाश कर दिया है !!!!!! अब लगा ले अपनी पैसों की ताक़त ! कर ले उपयोग अपने सोशियल स्टेटस का !! इस्तेमाल कर अपने पोलिटिकल कॉंटॅक्ट्स !!! बुला उन सारे बड़े बड़े नेताजी को !!!! बुला तेरे वो पोलीस वालों को और अंडरवर्ल्ड वालों को !!!!!! किसी तरह बचा ले तुझे !!!!!!!! राजन, इस अकेली औरत ने तेरी उन सारी ताकतों के बावजूद तुझे हरा दिया !!!!!!!! बेवकूफ़, ये दो दिन से तू मुझे यहाँ चोद नही रहा था !!!!!! मैं तुझे शिकस्त दे रही थी, शिकस्त !!!
 
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