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रंगीन रातों की कहानियाँ

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प्यासी चाची

दरअसल बात मेरे भइया की शादी से शुरू होती है जो कि जबलपुर में थी। वैसे तो मैं भोपाल शहर का रहने वाला हूँ। पर अपने भाई की शादी होने की वजह से मैं जबलपुर गया था जहाँ हमारे सारे रिश्तेदार आए थे। जिनमें से एक थी सपना चाची। वैसे तो वो मेरी दूर की रिश्तेदार थी पर उनके साथ मैं घुल मिल गया था।

वो दिल्ली की रहने वाली थी, पर उनके पति का देहांत कई सालों पहले हो हो चुका था। सपना चाची की उमर करीब ३०-३२ साल है । पर देखने में वो बला सी खूबसूरत हैं। उनका जिस्म देख के सारे शरीर मैं कंपकपी होने लगती है। उनका फिगर ३६-२४-३६ है। और वो हमेशा थोड़ा पतले कपड़े का बलाउज़ पहनती हैं जिसमें से उनकी ब्रा साफ़ साफ़ दिखती थी।

शादी को अभी २ दिन बाकी थे और घर में भीड़ होने की वजह से कुछ लोगों ने तय किया कि वो छत पे सोयेंगे। उन लोगों में से मैं भी एक था। छत पे हम सिर्फ़ ६ लोग सो रहे थे। जब रात के २ बजे मेरी नींद खुली और मैं दूसरी तरफ़ पेशाब करने गया तो मैंने पाया कि वहां पलंग पे कोई औरत सोई हुई थी जिसका पेटीकोट उसके घुटने के ऊपर तक आ गया था। उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं ख़ुद को उस औरत के पास जाने से रोक नहीं सका। जब मैं उसके नजदीक पहुँचा तो पाया कि वो कोई और नहीं बल्कि सपना चाची थी। उनको देखते ही मेरा लंड मेरे पायजामे में से बाहर आने लगा था। मैंने फैसला कर लिया था कि आज तो मैं इनके बदन को छू के ही रहूँगा।

मैं सबको देख कर आया कि कहीं कोई उठा तो नहीं है। पर सब गहरी नींद में सो रहे थे। शायद सपना चाची भी गहरी नींद में सो रही थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं उनके पलंग के बाजू में जाकर बैठ गया और धीरे धीरे उनके पेटीकोट को ऊपर की तरफ़ सरकाने लगा। थोड़ी ही देर में उनका पेटीकोट बिल्कुल ऊपर तक आ चुका था। शायद वोह चड्डी नही पहनती थीं, जिस कारण उनकी चूत मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी जिस पर हलके से बाल थे।

उनकी चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी जांघ पे धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू कर दिया और उनके जिस्म के भी रोंगटे खड़े हो गए थे, थोड़ी ही देर में उन्होंने करवट ले ली और अब उनकी चूत के दर्शन मुझको साफ़ तरीके से होने लगे थे। तो मैंने भी देर ना करते हुए उनके गड्ढे में अपनी एक ऊँगली डालना शुरू कर दी पर उनकी चूत बहुत ही टाईट थी जिस वजह से मैं और पागल हो चुका था और थोड़ी देर में मैंने एक ऊँगली से दो उँगलियाँ उनकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दी।

मैं इतना जोश मैं आ चुका था कि मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूची को दबाने लगा ऊपर से ही। पर तब तक वो जाग चुकी थी। उनकी आँख खुली देखकर मैं एकदम डर सा गया, चाची ने मुझे एक चांटा लगाया और फ़िर रोने लगी और मुझसे चिपक गई, मुझे भी एक दम से कुछ समझ नहीं आया था पर उनके बदन की गर्मी से मैं पागल हो गया और उनके होंठो को मैंने चूमना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनके दूध दबाने लगा और वो भी मेरा बराबरी से साथ देने लगी जिससे हमारे बीच सेक्स का मज़ा दोगुना हो गया।

अब मैंने पेटीकोट को हटा दिया और उनकी चूत पर अपना मुँह रख दिया जिससे चाची परेशान हो गई और चुदने के लिए अपनी चू्त को उछालने लगी। मैं खीर को धीरे धीरे खाना चाहता था, इस वजह से मैंने उनके छेद में अपनी जीभ डाल के अन्दर बाहर करना शुरू कर दी और उनके झड़ने का इंतज़ार करने लगा।

जैसे ही चाची झड़ने वाली थी मैंने सब कुछ एकदम से रोक दिया जिस वजह से चाची झड़ नहीं पाई और वो और भी ज्यादा गरम हो गई और मुझसे कहने लगी कि आज तक इतना सुखद अनुभव उसको कभी नहीं हुआ, उसके पति के जाने के बाद से वो प्यासी थी, आज मैं उसकी प्यास बुझाऊं।

मैंने भी देरी ना करते हुए अपने ९ इंच का लंड चाची के हाथ में दे दिया और चाची ने भी बुद्धिमानी दिखाते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया और जब मेरी झड़ने की बारी आई तो चाची ने सब रोक दिया जैसा कि मैंने उनके साथ किया था।

अब बारी थी असली मज़ा करने की। मैंने चाची के छेद के ऊपर अपना सु्पाड़ा रखा और थोड़ा सा धक्का लगाया और कुछ ही देर में मेरा लंड उनकी चूत में समां चुका था फ़िर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अन्दर बाहर करने लगा। फ़िर थोड़ी देर के लिए चाची मेरे ऊपर आई और अपने दूध मेरे मुँह के सामने रख दिए तो मैंने भी उसकी चुचियों को अपने दांतों में रख के धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया और अन्दर से उस पे जीभ फेरना भी शुरू कर दिया।

चाची अब पागलों की तरह मेरे पूरे बदन पे हाथ फेरने लगी थी और फ़िर बारी आई चाची को निढाल करने की। तो अब मैंने चाची को अपने ऊपर चढ़ाया और धीरे धीरे उसे ऊपर नीचे होने के लिए कहा। और चाची भी एक्सपर्ट थी जैसा कहा बिल्कुल वैसा ही करती रही और कुछ ही देर में हम दोनों साथ झड़ गए और एक दूसरे की बाहों में करीब ३० मिनट तक लिपटे रहे और मेरा पूरा वीर्य चाची की चूत में ही था। अब सुबह होने को थी तो मैं अपने बिस्तर पे चला गया।

उसके बाद मुझको चाची के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिल पाया। पर हमारी बात होती रहती है और वो मेरे साथ और सेक्स करना चाहती हैं।

अब मैं जून मैं दिल्ली जाऊंगा तब चाची को अपना और करिश्मा दिखाऊंगा।
 
विधवा भाभी

मेरा नाम डॉ ब्लू है और ये कहानी मेरी और मेरे विधवा भाभी की है। जब हमारे घर पर सिर्फ़ हम दोनों ही थे क्योँकि हमारे माता पिता का दो साल पहले ही निधन हो गया था और उस के एक साल के बाद मेरे भाई ने शादी कर ली और हम घर में दो से तीन हो गये। मेरा भाई अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था और लौटने में काफी वक्त लगता था।

मेरी भाभी एक अच्छी और सुशील लड़की थी और उन का फिगर था ३८ २८ ३८ । जब वो चलती थी तो उन की गांड देख कर हर कोई यही चाहता था कि उन की गांड मारे।

शादी के ६ महीने बाद मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया और वो उस एक्सीडेंट में मर गया और उस कारण भाभी थोडी से पागल सी हो गई थी और अब घर की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। मैंने अपनी पढ़ाई छोड़ कर नौकरी करना शुरू किया और देखते ही देखते मैंने भाभी का इलाज कर लिया और वो अब ठीक हो गई थी और फिर भाभी के घर वालों ने भाभी की दूसरी शादी की बात की तो भाभी ने मना कर दिया क्योँकि वो जानती थी कि अगर उन्होंने दूसरी शादी की तो मैं अकेला रह जाउंगा और इस वजह से उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और हम लोग हसी खुशी रहने लगे।

पर एक दिन जब मैं जब काम से लौटा तो मैंने दरवाज़ा खुला पाया और जैसे मैंने अन्दर जाकर देखा तो भाभी कपड़े धो रही थी और उन की साड़ी काफ़ी ऊपर तक उठी हुई है और उन की सारे कपड़े भीग गए थे जिस से उनकी अंदर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी और जैसे ही मैंने उन की ब्रा देखी, मैंने देखा कि भाभी एक दम लो कट ब्लाउज़ पहने है और उनके बूब्स भी दिख रहे है, तो उसी वक्त मेरे लंड खड़ा हो गया

मैंने अपने रूम में जाकर उसे ठीक किया और फिर भाभी को आवाज़ लगा कर कहा कि चलो कहीं घूम कर आते है। वो राजी हो गई। हम लोग ट्रेन से गए।

लौटते समय ट्रेन में काफी भीड़ थी, जिस के कारण मैंने भाभी को सामने किया और मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और कुछ देर बाद मुझे किसी ने धक्का मारा, जिस के कारण मैं उन के करीब हो गया इतना करीब कि मेरा लण्ड उनकी गांड को हौले से टच करने लगा। उन्होंने ये महसूस किया और जैसे ही मेंने पीछे हटने की कोशिश की तो वो भी पीछे हट रही थी।

मेंने सोचा कि शायद भीड़ के कारण वो पीछे हटी होंगी पर जब हम लोग घर पहुंचे तो मैंने महसूस किया कि भाभी का आज रंग कुछ बदला है और उन की चाल भी कुछ बदली हुई है।

और फिर हम लोग खाना खा कर अपने अपने रूम में चले गए पर रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी जिस से मैंने टीवी रूम में बैठ कर टीवी चालू किया और टीवी देखने लगा।

टीवी की आवाज़ सुनकर भाभी भी वहां आ गई और पूछा कि क्या तुम्हे नींद नहीं आ रही है जैसे ही मैंने उन को देखा तो मेरा लण्ड एक खंभे की तरह खड़ा हो गया क्योँकि उन्होंने एक दम मलमल जैसी पतली नाईटी पहन रखी थी जिसमें से उनकी ब्रा और उन की पैन्टी भी एक दम साफ़ दिखाई दे रही थी।

ये देख कर मेरा लण्ड अब फ़ड़फ़ड़ाने लगा था। जैसे ही वो मेरे पास आई और सोफे पर बैठे हुए उन्होंने कहा कि इतनी सर्दी में तुम्हें पसीने छूट रहे हैं तो मैंने डर गया और अपनी नज़र हटा ली।। हाथ मेरे लण्ड पर रख लिए और फिर कुछ नहीं कहा पर मेरी नज़र उनके बूब्स पर ही थी।

कुछ देर बाद भाभी ने मुझे कहा कि उन के सारे बदन में दर्द हो रहा है और उनको मालिश करनी है तो मुझ से पूछा कि क्या कोई है जिसे तुम जानते हो तो मैंने कहा कि नहीं पर मुझे मालिश करनी आती है तो वो पहले मुस्कुराई और कहा कि अच्छा और मेरे करीब आ गई और मुझे कहा कि क्या तुम मेरी मालिश करोगे?

तो मैंने हाँ में सर हिलाया और फिर वो मुझे अपने रूम में ले गई और लेट गई और कहा कि चलो अब मेरी मालिश करो मैंने पहले उन के पैर से शुरू किया ५ मिनट और फिर मैंने उन से कहा कि क्यों न आप अपनी गाऊन उतार दें, तो उन्होंने झट से उसे उतार दिया। अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी और मैंने उन को ऐसे पहली बार देखा था और फिर मैंने तेल की बोटेल ली और उन की पीठ पर लगाना शुरू किया कुछ देर मालिश करने के बाद मेंने भाभी से कहा कि आप की ये ब्रा मुझे चुभ रही है तो उन्होंने कहा कि इसे भी खोल दो, तो मैने उसे भी खोल दिया और फ़िर मैंने भाभी को पीठ के बल लेटने को कहा जैसे ही उन्होंने करवट ली तो उनकी नज़र मेरे तने हुए लण्ड पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि समीर ये क्या है तो मैने कहा कि ये मेरा हथियार है जैसा भाई के पास था बिल्कुल वैसे ही।

तो भाभी ने कहा कि चलो मैं अब अपनी पैंटी उतारती हूं और तुम अपना ये शोर्ट उतारो, तो मैंने पहले मना कर दिया पर भाभी ने कहा कि मैंने तो अपनी ब्रा और पैंटी उतारने में तो कुछ नही कहा और तुम सिर्फ़ अपना शोर्ट उतरने के लिए इतना सोच रहे हो। तो मैंने कहा की आप मेरी भाभी है तो उन्होंने कहा कि चलो आज से तुम मुझे मेरे नाम से बुलाना और उन का नाम पिंकी था और फिर उन के इतना कहने के बाद मैंने अपना शोर्ट उतार दिया।

जैसे ही मैंने अपना शोर्ट उतारा तो वो मेरे लण्ड को देख कर दंग रह गई और कहा कि तुम्हारा लण्ड तो वाकई बहुत बड़ा है उन्होंने पूछा कि ये कितना लंबा है तो मैंने कहा कि ये ९ इंच का है तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे भाई का तो सिर्फ़ ५ इंच का था उन्होंने ख़ुद कहा था।

अब भाभी और मैं एक दम नंगे थे और फिर भाभी मेरे लण्ड को घूर रही थी और मैं उन की चूत को घूर रहा था। फिर भाभी ने कहा कि अब मेरे बूब्स की मालिश करो मैं उनके बूब्स को दबाने लगा था और भाभी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में ले लिया और उस को सहलाने लगी और मुझे भी मज़ा आने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना सारा माल उन के हाथ और उन के बूब्स पर गिरा दिया। मैंने उन को सॉरी कहा पर उन्होंने कुछ नही कहा और जो मेरा माल गिरा था वो उसे चाटने लगी और बड़े मज़े से चाटने लगी।

मेरे सामने ही अपनी चूत में ऊँगली डाल कर रगड़ने करने लगी और मुझे देखने लगी और वो कुछ अजीब सी आवाजें निकल ने लगी आआआआ ऊऊऊओ ईईईईईईईए फिर कुछ देर बाद उन की चूत में से भी पानी निकल गया और वो शांत हो गई।

फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी! मैं सोने जा रहा हूं तो उन्होंने कहा कि मैंने तुम को कहा कि तुम मुझे नाम से बुलाना तो मेंने उनको नाम से बुलाना शुरू किया। फिर मैं अपने रूम में चला गया और जब सुबह को उठा तो मैंने देखा कि रात की उस सेक्स मसाज़ की वजह से मेरा लण्ड काफी बड़ा हो गया था मैंने सोंचा कि चलो अब पिंकी किचन में होगी तो मैंने कुछ नही पहना और किचन की ओर चला गया। देखा तो पिंकी वहीं थी।

जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो कहा कि तेरा लण्ड तो रात से भी ज्यादा बड़ा हो गया है। तो मैंने कहा कि ये सब आप ही मेहरबानी है तो वो हंसने लगी और कहा कि क्या तुम भी वही चाहते हो जो मैं चाहती हूं?

तो मैंने कहा कि इस के बारे में बाद में बात करते हैं और मैं बाथरूम में गया और कुछ देर बाद भाभी को आवाज़ लगाई। मैंने कहा कि पिंकी ज़रा साबुन देना। तो वो समझ गई और अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में आ गई और कहा कि आज हम दोनों मिल कर नहाएंगे।

तो मैंने कहा कि ठीक है और उन्होंने साबुन अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू किया और मैं उनको देखने लगा। उन्होंने पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो? तो मैंने कहा कि मैं आप के…… आप के बूब्स और गाण्ड को देख रहा हूं, मुझे ये बड़े मस्त लगते है। तो उन्होंने कहा कि क्या तुम इन्हे छूना चाहते हो क्या तो मैंने हामी में सर हिलाया और वो मेरे करीब आइ और मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया और मुझे उनके बूब्स को दबाने को कहा।

और मैंने उन के बूब्स को दबाना शुरू किया और उनकी गांड को सहलाना शुरू किया। वाह दोस्तो, क्या गाण्ड एक दम सॉफ्ट। और मैंने देखा उनकी फ़ुद्दी पर एक भी बाल नही था। मेंने उन के बूब्स को मुँह में ले लिया और उन की फ़ुद्दी को अपनी हाथ से रगड़ने लगा और वो जोश में आकर आआआआऊऊश ह्श्श्श्श्श्श्श्श कर ने लगी। तो मैं उन को बेडरूम में ले गया और उनको लिटा दिया और उन के बूब्स को चूसने लगा और उन की फ़ुद्दी को अपनी ऊँगली से चोदने लगा।

फिर उन्होंने कहा कि समीर मेरी चूत को चाटो तो मैंने उनकी फुद्दी को चाटना शुरू किया, वो अभी जोश में आ गई और जोर से कराहने लगी आआऊऊऊऊऊऊऊऊश्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्स् ईईईईईईईईईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ और चाटो और चाटो कह रही थी।

१० मिनट चाटने के बाद उन्होंने कहा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मैंने कहा कि मैं आप का रस पीना चाहता हूं। इतना कहा ही था कि वो झड़ गई और मैंने उनका सारा रस पी लिया और फिर मैंने उनको उठाया और मेरा लण्ड उनके मुँह में दे दिया और उनको चूसने को कहा। उन्होंने खूब चूसा और अच्छा चूसा। १० मिनट के बाद जब मैंने उनसे कहा कि मैं झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मैं भी तुम्हारा वीर्य पीना चाहती हूं और मैंने अपना सारा वीर्य उनके मुँह में झाड दिया और उन्होंने मेरा सारा वीर्य पी लिया और फिर हम एक दूसरे से लिपट कर सोये रहे।

फिर ५ मिनट के बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया और मैंने उन से कहा कि चलो अब मैं तुम्हारी चूत मारता हूं और उन को लिटा दिया और उनकी फ़ुद्दी के द्वार पर मेरा लण्ड रखा और एक धक्का मारा और मेरा आधा लण्ड उनकी फुद्दी में चला गया और वो दर्द के कारण चिल्लाई और मैंने उन से पूछा कि क्या आप को दर्द हो रहा है? तो उनहोने कहा की मेरी फ़ुद्दी ने ७ महीने से लण्ड नही खाया न इसीलिए दर्द हो रहा है। मैंने अपना काम जारी रखा और फिर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उन की चूत में घुस गया और मैंने देखा कि उन की फुद्दी में से खून निकल रहा है तो मैंने कहा कि तु्म्हारी फुद्दी में से खून निकल रहा है तो उन्होंने कहा कि तु्म्हारा लण्ड इतना बड़ा है न।

और फिर मैंने धक्के लगाना चालू किया और कुछ धक्के मरने के बाद उनको भी मजा आने लगा और वो भी अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत मरवा रही थी और फी ऊऊऊऊऊऊऊऊऊ श्श्श्श्श्श्श्श्ह्स म्म्म्म्म्म्म्म्म्म और कह रही थी कि और डालो और डालो और डालो समीर, मेरी फुद्दी को फाड़ दो मेरी फुद्दी को फाड़ दो और हमारी ये चुदाई ४० मिनट तक चलती रही और बाद उन्होंने कहा कि अब बस करो पर मैं कहाँ मानने वाला था फिर उस के १० मिनट के बाद मेंने उन से कहा कि में झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मेरी फुद्दी में झाड दो और मैंने उन की फ़ुद्दी में झड़ गया और उन के ऊपर लेट गया. फिर हम दोनों वैसे ही लेटे रहे और फिर हमने पूरा दिन कम से कम ८ बार चुदाई की और फिर रात को भी हमने चुदाई की। अब भाभी मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है और मैंने उन से शादी कर ली
 
दास्ताँ ऐ बस से लेकर बिस्तर तक !!

मेरी उम्र २५ साल है, पेशे से एक डॉक्टर हूँ। कॉलेज ख़तम किये छः महीने ही हुए हैं। मैंने अपनी डिग्री शिमला से की है। मैं कॉलेज से ही उम्र में बड़ी उम्र की औरतों का बहुत शौकीन हूँ।

एक बार मैं घर से शिमला जा रहा था बस में। रास्ते में एक बहुत खूबसूरत लड़की बस में चढ़ी और मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई। रंग एकदम गोरा और भरी भरी काया ! बस फिर क्या था, मैं सोचने लगा कि कैसे उसके साथ बैठूं !

एक स्टाप पर जाकर जब बस रुकी तो मैं कुछ लेने के बहाने बस से उतरा और उसे कहा कि मेरी सीट का ख्याल रखे। पर जब मैं वापिस चढ़ा तो वहाँ कोई मोटा सा अंकल बैठा हुआ था। बस मैं उसे भला बुरा कहता हुआ उस लड़की के साथ बैठ गया।

अब वो मुझे घूर कर देखने लगी। मैं भी चुपचाप उसे अनदेखा करके बैठ गया। फिर धीरे से उसकी तरफ देखा, उसके स्तन उसके बिन बाजू के ब्लाऊज़ से दिख रहे थे। मैं अपने आप पर काबू न कर पाया और मेरा लण्ड झटके मारने लगा।

पर जैसे उसने मुझे घूर कर देखा, मेरी हिम्मत नहीं हुई दोबारा उसकी आँखों में देखने की।

करीब एक घंटे बाद उसने मुझे खुद बोला- मैंने आपको पहले कहीं देखा है !

मैं सकपका गया। मैंने पूछा- कहाँ?

वो बोली- नहीं जानती, पर देखा ज़रूर है।

मेरे दिल में ख़ुशी के लड्डू फूट रहे थे।

मैंने उसे कहा- शायद आपने मुझे मेडिकल कॉलेज में देखा होगा।

तब वो बोली- हाँ ! मैं अपनी बहन को चेक करवाने आई थी।

बस फिर क्या था, बातों का सिलसिला शुरु हो गया। अब मैं समझा कि वो मुझे घूर कर देख नहीं रही थी बल्कि पहचानने की कोशिश कर रही थी।

जब उसने मुझे बताया कि वो दो बच्चों की अम्मा है तो मैं हक्का-बक्का रह गया।

फिर उसने मुझे अपनी सारी कहानी सुनाई कि कैसे उसकी शादी छोटी उम्र में हो गई और उसका अकेलापन।

जैसे कोई मरीज डॉक्टर से कोई बात नहीं छुपाता वैसे ही वो अपनी हर बात बताती गई!

और मैं भी एक अच्छे डॉक्टर की तरह उसकी हर बात सुनता गया।

जब वो बस से उतरी तो उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और अपने घर की तरफ चली गई और मैं अपने हॉस्टल की तरफ !

तब तक मेरे दिमाग में कुछ भी उल्टा सीधा नहीं था। अब घर से इतने दिनों बाद आया था तो दोस्तों के साथ मिलकर शाम को थोड़ी सी शराब पी ली और फिर अपने कमरे में सोने चला गया। तभी मेरी आँखों के सामने नीरू का चेहरा घूमने लगा (नीरू जो लड़की मुझे बस में मिली) उसके गोल मटोल स्तन, उसकी दिल को चीर देने वाली हँसी, उसका भोला सा चेहरा और उसकी भारी गाण्ड ! यह सब मेरी आँखों के सामने घूमने लगे।

मैंने मोबाइल निकाला और लगा दिया नंबर !

रात के १२ बज रहे थे, मैंने सोचा कि वो सो गई होगी तो मैंने फ़ोन काट दिया।

थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आया और मुझे पूछने लगी कि फ़ोन क्यूँ किया?

मैंने कहा- बस तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए कर लिया। पर सॉरी मुझे समय का ख्याल नहीं रहा !

वो बोली- नहीं ! मैं जाग रही थी !

मैंने पूछा- वो क्यूँ?

वो बोली- बस मुझे भी तुम्हारी याद आ रही थी !

बस मेरा मन खुश हो गया। थोड़ी देर और बातें चली और उसने बताया कि वो अकेली सोती है अपने पति के साथ नहीं।

इस तरह मैंने उसे अगले दिन मिलने के लिए बुला लिया।

वो दूसरे दिन ठीक मेरे बताये हुए समय पर पहुँच गई जब हॉस्पिटल बंद होने का वक़्त होता है।

मैंने उससे पूछा- कहाँ चलें?

वो बोली- तुमने बुलाया है ! तुम हो ले चलो कहीं भी !

मैं अपनी फुद्दुपंथी पे इतना पछताया कि किसी कमरे का इंतजाम भी नहीं किया था मैंने।

मैंने नहीं सोचा था कि वो आते हो मुझसे ऐसे बोलेगी, पर क्या कर सकते थे, मैं उसे हॉस्पिटल के पीछे एक सुनसान जगह पर ले गया और कहा- तुम बहुत खुबसूरत हो नीरू ! मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ !

तो वो यह बात सुन कर डर गई और बोली कि उसके दो बच्चे हैं और वो उनसे बहुत प्यार करती है। वो इन बन्धनों से बंधी हुई है।

पर मेरे उसे समझाने पर कि मैं किसी को नहीं पता लगने दूंगा हमारे बारे में, उसने मुझे चूमने दिया। धीरे धीरे मैं उसके वक्ष को चूमने लगा। मुझे पता हो नहीं चला कब मेरा हाथ उसके पिछवाड़े पर चला गया और वहां उंगली करने लगा।

वो बहुत उत्तेजित हो गई थी। वो मुझसे छिटकते हुए बोली- बस, बहुत हो गया ! तुम हद पार कर रहे हो !

वैसे बात भी सही थी, वहां कोई भी आ सकता था। मैंने उसे जाने दिया और वो भागते हुए वहाँ से चली गई।

फिर रात को मैंने उसे फोन किया और अपने किये पर सॉरी बोला। उसे मिलने के लिए बुलाया फिर से !

पहले तो उसने ना-नुकुर की पर उसके दिल में जो मेरे लण्ड को चखने की चाह थी, शायद वोही खाज उसे मेरे पास मिलने के लिए ले आई।

इस बार मैं पूरी तरह से तैयार रहना चाहता था। वो बुधवार का दिन था और मैं बुधवार को नॉन-वेज़ खा लेता हूँ। वो आई और चुपचाप मेरे साथ चलने लग पड़ी। हम मेरे दोस्त के कमरे पर पहुंचे, हॉस्टल तो ले जा नहीं सकता था नहीं तो बलात्कार हो जाता उसका।

कमरे पर पहुँचते हो मैंने उसका पर्स एक कोने में फ़ेंक दिया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। वो थोड़ा शरमाई।

मैंने पूछा तो बोली- डर लगता है !

मैंने उसे कहा- दो बच्चों की माँ होकर डर लगता है तुझे?

तो बोली- यह बात नहीं है ! डर लगता है कहीं तुमसे प्यार न हो जाए !

मैंने उसे समझाया कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, देख, मैं ठहरा अकेला लोंडा अभी, और कल को मेरी शादी हो जायेगी, और मैं हूँ डॉक्टर तो सोसाइटी में तो कभी नहीं पता लगने दूंगा। बाकी सब तुम पर है कि तुम सुख चाहती हो या नहीं !

वो यह सब सुनते हो मेरी बाँहों में लिपट गई, मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और न जाने कब उसके स्तन मेरे हाथों मैंने आ चुके थे, और मैं पहुँच गया स्वर्ग वाटिका में।

धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके नाड़े की तरफ बढ़ गया। मैंने हलके से उसका नाड़ा खींच दिया। जिस काले सूट की मैं तारीफ कर रहा था वो अब बेडशीट का काम कर रहा था और उसकी लाल कच्छी आवाज़ दे दे कर मुझे बुला रही थी कि आओ और मुझे उधेड़ दो।

मेरे लण्ड का आकार जो कभी ७ इंच से बड़ा नहीं हुआ था, आज १ इंच ज्यादा होने की दौड़ में था।

वो मेरे ऊपर अपने भारी पिछवाड़े को सटा कर बैठी हुई थी। मैंने उसके नंगे स्तन अपने मुँह में लेकर जैसे हो चबाये कि वो सिस्कारियां भरने लगी, उसकी ऐसी आवाजें सुनकर मेरा बुरा हाल हो गया। मेरा लण्ड तो मानो जैसे सुन्न हो गया। बस मुझे तो उसका भरा हुआ शरीर ऐसे लग रहा था कि एक एक हिस्सा खा जाओ।

उसकी मेमने की तरह गदराई हुई फुदी के सुनहरे बाल !

उन्हें अपनी जीभ से सहलाते हुए मैं फुदी के द्वार पर पहुंचा, पर वहीं पर उसने मुझे रोक लिया और वो सी सी सी करती हुई मुझसे लिपट गई, मेरे कान में धीरे से फुसफुसाती हुई बोली- इतनी ख़ुशी इकट्ठी मत दो कि मैं संभाल न पाऊँ !

इससे पहले वो कुछ और बोल पाती उसकी आँखों से आंसू बह निकले, उधर आँखों से आंसू और इधर फुदी से आंसू !

अब मैं समझ नहीं पा रहा था मैं किन आंसुओं पर ध्यान दू.. फिर मैंने चुने फुदी के आंसू और अपनी दो उँगलियों से उसकी फुदी सहलाने लगा और उसे औंधे मुंह लेटा कर अपना लण्ड-बाबा उसकी फुदी पे लगाया। मेरा लण्ड उसके अंदर जाता गया और वो मेरी तरफ धक्के लगाते हुए और अंदर अंदर, बस थोड़ा और, सी सिस इस सी ,, उईईईम उइंमा बस थोड़ा और बस थोड़ा और,,,, आज मुझे मत छोड़ना अधूरी....

मैं बरसों की प्यासी हूँ ! मुझे भर दो अपने गरम लौड़े से...........

इतना कुछ सुनने के बाद भी मेरा लण्ड था कि बस लगा हुआ था बुरी तरह से... तभी नीरू पूरा जोर लगा कर मुझे अपनी और खींचने लगी.... मैं समझ गया कि वो झड़ रही है.... मैंने सोचा फटाफट अपना काम भी निपटा लो वरना फिर उसे पता नहीं कब इतनी पॉवर आये,,,,,, पहले तो मैं उसे खाना चाहता था, पर अब शायद वोही मुझे खा रही थी........उसकी सिस्कारियों के दौरान मेरी चमड़ी पे उसने अपने नाखूनों से कई घाव कर दिए थे, बहुत जंगली थी वो
 
जीजाजी का लौड़ा

मेरा नाम मनिन्दर है पर मुझे प्यार से सब मिन्की कहते हैं। और मैं पंजाब के पटियाला शहर से हूँ, पटियाला मतलब पटोलों का शहर ! मेरी उम्र 19 साल है और मेरे घर में मेरे अलावा दो बहनें हैं, छोटी का नाम दीपा है, उसकी उम्र 16 साल है, मेरे से बड़ी दीदी सुरलीन की शादी हो चुकी है, वह 23 साल की है, मेरे जीजा कपिल चंडीगढ़ में रहते हैं और उनका मोबाइल फोन का बिजनेस है।

यह सच्ची घटना आठ महीने पहले की है। उस रात को मैं कैसे भूला दूँ जब जीजा कपिल ने मेरे कुंवारेपन की झिल्ली फाड़ी थी और अपना मजबूत लौड़ा मेरी चूत में गाड़ दिया था। कभी कभी मैं नींद से जाग जाती हूँ क्यूंकि मुझे आज भी वो लौड़ा याद आता है; लेकिन मज़बूरी है और वो लौड़ा अब मुझे शायद कभी नहीं मिलेगा।

आइये आप को अब उस रात और उसके पहले और बाद की घटना बताती हूँ। मेरी दीदी सुरलीन का एक दिन फोन आया, उसकी आवाज हल्की सी ढीली और जैसे कि वो बीमार हो, ऐसी लग रही थी।

मैंने उसे पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- बहुत बीमार हूँ, मलेरिया हुआ है, बदन में कमजोरी के कारण घर का काम नहीं कर सक रही।

मुझसे यह सुन कर रहा नहीं गया।

मैं- अरे दीदी, अगर आप कहो तो मैं आ जाऊँ? वैसे भी मेरे कॉलेज में 10 दिन की छुट्टी हैं।

सुरलीन- अगर तू आ सकती है तो आ जा ! पर तेरे जीजा के पास काम का अभी बहुत रश है, इसलिए वो लेने नहीं आ सकेंगे !

मैं- कोई बात नहीं दी, मैं पापा के साथ आ जाऊँगी।

सुरलीन- ठीक है, कल ही आ जा !

अगले दिन दोपहर बाद मुझे पापा ने बस में बिठा दिया। मेरी उम्र के हिसाब से मेरा कद और काठी काफी बड़ा है, मैं किसी मॉडल से कम सुंदर नहीं हूँ, बस के अंदर हर एक लौड़ा मुझे देख रहा था पर मेरे मन में इस से गुस्सा नहीं बल्कि घमंड आ रहा था, मेरे मन में तो अपने पति को लेकर बहुत बड़े बड़े सपने थे, मुझे ऐसा पति चाहिए थे जो शाहरुख़ जितना सेक्सी और सलमान जितना चौड़ा हो। चंडीगढ़ पहुंचते ही मैं ऑटो लेकर दीदी के घर चली गई। मैंने देखा कि दीदी बहुत कमजोर हो गई है और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी। मैंने उसे दवाई वगैरह के लिए पूछा तो उसने बताया कि दवाई चल ही रही है।

मैं- जीजाजी कहाँ हैं?

दीदी- अरे अभी आईफोन का 5 नंबर लॉन्च हुआ है उसमें लगे पड़े हैं। उन्होंने तो मुझे कहा कि शोरूम पर नहीं जाता, पर मैंने उन्हें जबरदस्ती से भेज दिया। एक दिन में अभी 20 हजार कमाने का मौका है, वो थोड़े ही बार बार आता है।

मैं- ठीक है दी, अब तू घबरा मत, मैं यही हूँ कुछ दिन ! तेरा और मेरे जीजा का पूरा ख्याल रखूंगी।

दीदी- अच्छा है तू आ गई, कल तो मुझे होटल से खाना मंगवाना पड़ा।

मैं- चल मैं आज तेरी पसंद के राजमा चावल बनाती हूँ।

मैं फ्रेश होकर रसोई में गई और राजमा बनाने लगी। सुरलीन को राजमा पहले से बहुत पसंद हैं। रात के 8 बजे तक मैं खाना बना चुकी थी। खाना बनाने के बाद मैंने कहा- जीजाजी आ जाएँ रो इकट्ठे खाना खाएँगे !

लेकिन सुरलीन ने कहा- उनका अभी कोई ठिकाना नहीं है।

इसलिए हम दोनों बहनों ने खाना खा लिया। सुरलीन को दवाई देकर मैंने सुला दिया और ड्राइंग रूम में जाकर मैं डिस्कवरी चैनल देखने लगी। टीवी देखते देखते दस कब बजे, पता ही नहीं चला।

इतने में घर का मुख्य दरवाजा खुला और जीजाजी अंदर आये, उसने मुझे देखा नहीं और वो फोन पर किसी से लड़ रहे थे।

जीजा- लौड़ा मेरा, साले तुम लोग पार्सल के रेट मन चाहे तरीके से बढ़ा देते हो ! अगर ऐसा ही चला तो मुझे नहीं मंगवाना कुछ भी अब !

उन्होंने मुझे देख कर तुरंत फोन काट दिया और बोले- अरे मिन्की, कब आई तू? मुझे बताया भी नहीं, मैं गाड़ी लेकर आ जाता।

मैं- नहीं जीजाजी, आप बीजी हैं ! दी ने बताया मुझे !

जीजा- अरे साली के लिए क्या बीजी क्या फ्री !

मैंने देखा कि जीजा जी को चलने में तकलीफ हो रही थी, उनके पाँव इधर उधर होने लगे थे। वो शायद शराब पी के आया था और इस बात की पुष्टि तब हुई जब वो मेरे पास आकर सोफे पर बैठे, जीजा फुल टुन्न होकर आया था, उसके मुँह से शराब की मुश्क आ रही थी। उनसे सही बैठे भी नहीं जा रहा था।.

मैंने उनसे खाने के लिए पूछा- जीजा जी खाना लगा लूँ?

जीजा- नहीं, मैं बाहर खाकर आया हूँ, तेरी दीदी जाग रही है?

मैं- नहीं दीदी को सोये तो काफी समय हो गया है।

जीजा- ओके !

उन्होंने अपनी टाँगें सोफे पर फ़ैलाई और आँखें बन्द करके लेट गए। उन्होंने अपने जूते, कपड़े ऐसे ही पहने हुए थे और वो सो गए। मैंने कहा भी यह सब उतारने के लिए लेकिन वो कुछ बोले ही नहीं, वो शायद नशे में सो चुके थे।

मैंने सोचा चलो मैं ही जीजा के जूते उतार देती हूँ। मैंने जीजा के पाँव अपनी गोद में लिए और जूते की डोरी खोल कर उतार फेंके। मैंने देखा कि जीजे की पैंट के ऊपर की बेल्ट बहुत टाईट बंधी हुई थी, मैंने सोचा कि इसे भी खोल दूँ। मैं बेल्ट को खोल रही थी, तभी मेरी नजर उसके नीचे पड़ी जहाँ एक बड़ा पर्वत जैसा आकार बना हुआ था।

क्या जीजा का लौड़ा इतना बड़ा था..!?!

पता नहीं क्यूँ, पर मेरे मन में गुदगुदी होने लगी, मेरा मन कूद रहा था अंदर से ही ! मैंने इससे पहले लौड़ा सिर्फ नंगी मूवीज में ही देखा था लेकिन जीजा का लौड़ा तो पैंट के ऊपर इतना बड़ा आकार बना कर बैठा था कि देख कर ही मुझे ख़ुशी मिल रही थी।

मैंने बेल्ट को खोलने के साथ साथ उनके लौड़े के ऊपर हल्के से अपने हाथ का पीछे वाला हिस्सा लगा दिया। जीजाजी का लौड़ा बहुत सख्त लग रहा था। उनके लौड़े को छूने के बावजूद जीजा हिले नहीं और इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने अब अपना हाथ पूरा रख के लौड़े को अहसास लिया। लौड़ा काफी गरम था और मुझे उसको हाथ लगाते ही चूत के अंदर खुजली होने लगी।

मैं तब तक तो कुंवारी ही थी, मैंने केवल उंगली डाल कर हस्तमैथुन किया था बस !

सच में बड़ा भारी लौड़ा था ! खोल के देख लूँ? जीजा तो नशे में थे !

मेरे मन में लौड़ा देखने के भयानक विचार आने लगे। मैंने सोचा कि जीजा तो वैसे भी नशे में हैं तो पैंट खोली तो उन्हें थोड़े ही पता चलेगा। मैंने धीरे से उनकी ज़िप खोली और देखा कि लौड़ा अंदर अंडरवीयर में छिपा बैठा था। मैंने बटन खोल कर जीजा की पैंट उतार दी।

पता नहीं मुझे क्या हुआ था, मुझे अच्छे बुरे की कोई समझ नहीं रही थी, मैं अपने हाथ को लौड़े के ऊपर रख कर उसे दबाने लगी, फिर मैंने धीरे से अंडरवीयर को खींचा और बालों के गुच्छे के बीच में विराजमान महाराजा को देखा। अच्छा तो यह है लौड़ा !

मैंने पहली बार लाईव लौड़ा देखा था, बिल्कुल मेरी आँखों के सामने जो आधे से भी ज्यादा तना हुआ था। मेरे हाथ रुके नहीं और मेरे दिल में आया कि उसे छू लूँ एक बार !

जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में लिया, जीजा की आँख खुल गई और वो बोले- मिन्की, क्या कर रही है?

मैं- कुछ नहीं जीजा जी, आप के कपड़े खोल रही थी. आप नींद में थे और आपने जूते वगैरह कुछ नहीं उतारे थे।

जीजा- मुझे पता है कि तू क्या कर रही थी। मैं सोया था लेकिन तूने हाथ लगा कर सहलाया तब मेरी नींद उड़ गई थी और फिर मैं सिर्फ आँखें बंद करके लेटा हुआ था।

मैं डर गई कि कहीं जीजा दीदी को ना बता दें।

लेकिन उसके बाद जीजा जो बोले, वो बहुत ही अलग और आश्चर्यजनक था।

जीजा- इतना ही लौड़ा लेने का शौक है तो कपड़े उतार दे देता हूँ।

मैं क्या बोलती, मुझे लौड़ा सिर्फ देखना था लेकिन अब जीजा थोड़े ही मानने वाला था। मुझे कभी ना कभी तो नथ उतरवानी थी, फिर आज क्यों नहीं, मैं कुछ नहीं बोली।

लेकिन जीजा के हाथ अब मेरे चूचों के ऊपर थे और वो उन्हें जोर से दबा रहे थे। मैंने आँखें बंद कर ली।

जीजा सोफे से खड़े हुए और शर्ट उतारने लगे। वो बिल्कुल नंगे हो गए और उसने मुझे कंधे से पकड़ के मेरी नाईटी उतारने के लिए हाथ ऊपर करवा दिए। मैं अगले ही मिनट में उसके सामने नंगी हो गई।

जीजा मेरे चूचों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उनके गरम गरम होंठ का अहसास जान निकाल देने वाला था। मुझे अजीब सी खुमारी छा रही थी। मैंने देखा कि जीजा के हाथ अब कमर के ऊपर होते हुए मेरे चूतड़ों तक पहुँचे और मुझे अपनी तरफ खींचा।

जीजा का लौड़ा मेरी चूत वाले हिस्से के बिल्कुल नजदीक आ गया और मुझे जैसे 1000 वाट का करंट लगा हो। जीजा ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगाये और मेरे मुँह में व्हिस्की की गन्ध भर गई। वो मुझे चूसते हुए सोफे के ऊपर बैठ गये। मैं अब जीजा की दोनों टांगों के बीच में थी, उन्होंने मेरे हाथों को दोनों तरफ से पकड़ा और मेरा चेहरा लौड़े की तरफ ले गया !

मैं प्रश्न के अंदाज से उन्हें देखने लगी। जीजा ने मेरा मुँह अपने सुपाड़े पर लाकर मुझे छोड़ दिया। मैंने लौड़ा हाथ में लिया और उसकी गर्मी का अहसास लेने लगी। जीजा ने पीछे से मुँह को धकेला और मेरे मुँह खोलते ही उसका लौड़ा आधा मेरे मुँह के अंदर चला गया। ओह माय गॉड ! यह तो बिल्कुल मुँह फाड़ रहा था मेरा ! उसकी तीन इंच की मोटाई मेरे मुँह के लिए बहुत ज्यादा थी. लेकिन फिर भी मैंने आधे लौड़े को चूसना चालू कर दिया। जीजा ने लंड के झटके मुँह में देने चाहे लेकिन मैंने उनकी जांघें थामे उन्हें नाकाम कर दिया।

जीजा अब सोफे से उठ खड़े हुए और मेरे मुँह को जोर जोर से चोदना चालू कर दिया।

उनका लौड़ा मेरे मुँह से ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग जैसी आवाजें निकाल रहा था। थोड़़ी देर में मुझे भी लंड चूसने में मजा आने लगा, ऐसे लग रहा था कि चोकलेट वाली आइसक्रीम खा रही थी।

जीजा ने अब मेरे मुँह से लौड़ा बाहर निकाला और मेरी टाँगें फैला कर मुझे सोफे में लिटा दिया, उसके होंठ मेरी चूत के होंठों से लग गए और वो मुझे सीधा स्वर्ग भेजने लगे- आह इह्ह ओह्ह ओह जीजा जी ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. ..!

मेरे लिए यह चुसाई का आनन्द मार देने वाला था। जीजा ने चूत के अंदर एक उंगली डाली और वो चूसने के साथ साथ उंगली से मुझे चोदने लगे- आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह के आवाज के साथ मैं झड़ गई।

जीजा ने अब मुँह हटाया और अपना लौड़ा मेरी चूत के ऊपर टिकाया। चूत काफी गीली थी और मुझे पता था कि अब तो फाईट होगी लौड़े और चूत के बीच ! जीजाजी ने हाथ में थूक लिया और लौड़े के आगे लगा दिया, एक झटका देकर उन्होंने आधा लंड मेरी चूत में दे दिया-

"आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई.. मरर गई रे !"

जीजा ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और एक और जोर का झटका देकर पूरा लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया। मुझे ऐसे लग रहा था कि सारी चमड़ी जल रही हो, मानो किसी ने चूत में लोहे की गरम सलाख घुसा दी हो।

जीजा थोड़़ी देर हिले नहीं पर अब धीरे धीरे से लंड को हिलाना चालू किया। ऐसा अहसास हो रहा था जैसे कि चमड़ी लौड़े के साथ साथ निकल रही थी चूत की !

मेरे आँखों से आँसू की धार निकल कर जीजा के हाथों को लगने लगी। उन्होंने मेरे कान के पास आते हुए कहा- घबरा मत ! अभी ठीक हो जाएगा सब !

और सच में मुझे 2 मिनट के बाद लौड़ा सुखदायी लगने लगा। जीजा के झटकों के ऊपर अब मैं भी अपने कूल्हे हिलाने लगी।

जीजाजी ने हाथ मुँह से हटा कर चूचों पर रख दिया और चूत ठोकने के साथ साथ आगे से चूचे मसल रहा था। मैं सुखसागर पर सवार हो गई थी और लौड़ा मुझे ठक ठक ठोक रहा था। जीजा के झटके दो मिनट में तो बहुत ही तीव्र हो गए और वो एकदम स्पीड से मुझे चोदने लगे।

"आह.. आह.. ओह.. ओह.. ओह !" जीजा कुत्ते के जैसे फास्ट हुआ और मुझे थोड़़ी देर बाद जैसे की मेरी चूत के अंदर उन्होंने पेशाब किया हो, ऐसा लगा लेकिन वो मूत नहीं बल्कि उसका पिंघला हुआ लोहा यानि वीर्य था। उन्होंने लंड को जोर से चूत में दबाया और सारा के सारा पानी अंदर छोड़ दिया।

मैं उनसे लिपट कर लेट गई और मेरी आँख कब लग गई पता ही नहीं चला।

मैं सो गई, लेकिन जब मैंने दीदी की चीखें सुनी तो मेरी आँख खुल गई। मैंने उठ कर देखा कि जीजा कपड़े पहन रहे थे और सुरलीन दीदी उसकी माँ बहन एक कर रही थी।

हम लोग पकड़े गए थे, रात के करीब डेढ़ बजे दीदी पानी पीने के लिए उठी और उसने हमें पकड़ लिया।

काश मैंने दीदी के रूम में पानी की बोतल पहले रख दी होती...!

दीदी जीजा से लड़ रही थी और जैसे उसने मुझे देखा उठते हुए, उसने मेरे पास आके मेरे दोनों गालों पर एक एक तमाचा लगा दिया।

मैं कुछ बोलने की अवस्था में नहीं थी।

दीदी- तू यहाँ बहन बन कर आई थी या सौतन? तेरा जीजा ठरकी बन गया तेरी कुँवारी चूत देख कर लेकिन तू तो उसे रोक सकती थी। लेकिन नहीं ! मैडम पड़ी थी जीजा की बाहों में ! तू मुझे कल इस घर में नहीं दिखनी चाहिए ! तू अभी अपनी बैग उठा और निकल और जिन्दगी में कभी यहाँ मत आना ! अगर तू अभी नहीं निकली तो मैं पापा को फोन करती हूँ।

जीजा ने सुरलीन को समझाने के बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी, वो बोली कि अगर वो कुछ बोले तो वो उससे तलाक ले लेगी। मेरे पास कोई चारा था नहीं ! सुबह होते ही मैंने अपनी सहेली रचना को फोन लगाया जो चण्डीगढ़ में ही रहती थी और उसके घर टेक्सी करके चली गई।

दीदी ने सच में मुझे कभी अपने घर में नहीं आने दिया। कभी कभी हम लोग किसी फंक्शन में मिल जाएँ तो भी वो उखड़ी उखड़ी रहती हैं।

जीजा का लौड़ा मुझे महंगा तो पड़ा लेकिन ऐसा लौड़ा मिलना भी एक बड़ी बात है। अब तो बस एक ख्वाहिश है कि मेरे भावी पति का लौड़ा भी ऐसा तगड़ा ही हो।
 
सन्डे है चुदाई डे

मेरा नाम ललित है, दिल्ली का रहने वाला हूँ।बात उन दिनों की है जब मैं अपने ऑफिस से घर जा रहा था रास्ते में एक आदमी पड़ा हुआ था। मैं हिम्मत कर के उसके पास गया। उसको दमा का दौरा पड़ा था! वो अपनी जेब से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा था! मैंने उसकी जेब से इन्हेलर निकलने में मदद की। इन्हेलर को मुँह में पम्प करने के कुछ देर बाद वो थोड़ा ठीक हुए और मुझे धन्यवाद कहा।

मैंने पूछा- अगर आपको कहीं जाना है तो मैं छोड़ दूँ, आपकी तबियत ठीक नहीं है, कहीं दोबारा से दौरा पड़ा तो कौन संभालेगा !

वो मेरी बात मान गए और मेरे साथ बाइक पर बैठ गए ! कुछ देर में मैं उनको लेकर उनके घर पर पहुंच गया। उन्होंने मुझे घर के अन्दर आने के लिए कहा, अपने परिवार वालों को सारी बात बताई। उनके परिवार वालों ने भी मुझे धन्यवाद कहा। फिर उन्होंने मुझे चाय पिलाई!

चाय उनकी बेटी ले कर आई थी। क्या बला की खूबसूरत थी, जो भी देख ले, बस देखता ही रह जाये ! फिगर 36 28 36 ! कसम से खुदा ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा ! जैसे ही वो मेरी तरफ चाय बढ़ाने के लिए झुकी, मुझे उसके दो बड़े बड़े खरबूजों के दर्शन हुए! मन कर रहा था कि अभी पकड़ कर दबा दूँ ! पर मजबूर था !

अचानक उसके पापा के किसी दोस्त का फ़ोन आ गया, वो फ़ोन पर बात करने के लिए साथ वाले कमरे में चले गए। मुझे भी मौका मिल गया उनकी बेटी से बात करने का !

मैंने उससे पहले उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम पूनम बताया, जैसा रूप-रंग वैसा नाम ! एकदम पूनम का चाँद !

बातों का सिलसिला चल निकला, मैंने उससे उसका मोबाइल नंबर माँगा तो उसने फ़ौरन अपना नंबर मुझे दे दिया और मैंने भी अपना नंबर उसको दे दिया। इतने में उसकी मम्मी ने अन्दर से उसको आवाज दी।

मैंने उसको कहा- मैं तुम्हें कल फ़ोन करूंगा !

फिर मैंने अंकल को कहा- अब मुझे चलना चाहिए, बहुत देर हो गई है। फिर मैं वहाँ से चला आया। सारे रास्ते मैं पूनम के बारे में सोचता रहा कि काश एक बार पूनम की चूत मिल जाये तो मैं निहाल हो जाऊंगा।

घर पर पहुंच कर खाना खाया और सोने चला गया। लेकिन मेरी आँखों में नींद कहाँ ! मुझे तो हर तरफ सिर्फ वो ही नज़र आ रही थी। ख़ैर किसी तरह रात कटी, मैं सुबह जल्दी ऑफिस के लिए निकल गया। ऑफिस से मैंने उसको फ़ोन किया। जैसे ही मैंने हेल्लो कहा, उसने मेरी आवाज़ पहचान ली और कहा- मैं तुम्हारे फ़ोन का ही इंतजार कर रही थी, मुझे पता था कि तुम मुझे आज फ़ोन जरुर करोगे।

उसने कल जो मैंने उसके पापा की मदद की थी उसके लिए मेरा धन्यवाद किया और कहा कि वो अपने पापा से बहुत प्यार करती है।

फिर मैंने भी पूनम से कहा- पूनम, मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ अगर तुम मुझे गलत ना समझो तो कहूँ !

तो वो बोली- ललित जी, आप जो कहना चाहते हो, कह दो !

जैसे कि उसको पता था कि मैं क्या कहना चाहता हूँ ! मैंने कहा- मुझे तुमसे पहली नज़र में प्यार हो गया है, कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई, सारी रात तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा !

उसने मेरी सचाई की कदर करते हुए कहा- ललित, जो हाल तुम्हारा था रात को, वही मेरा था, मैं भी सारी रात सो नहीं सकी, बस तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी! मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है।

मेरे प्यार को जब उसने कबूल किया तो थोड़ी हिम्मत आई मुझमें, वरना उसको अपने प्यार का इज़हार करते वक़्त मेरी गांड फट रही थी। लेकिन अब कोई डर नही था, दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी ! अब तो रोज़ हम दोनों फ़ोन पर बातें करते और जब भी ऑफिस की छुट्टी होती तो मैं उससे मिलने उसको कॉलेज चला जाता ! कभी पिक्चर देखने तो कभी किसी रेस्टोरेंट जाने लगे ! रविवार के दिन हम दोनों ने कहीं बाहर घूमने का कार्यक्रम बनाया।

तय वक्त पर मैं उसको अपनी बाइक पर ले कर लवर्स पार्क में (यानि बुद्धा गार्डन) पहुंचा और एक सुनसान से जगह पर, जहाँ कोई हमें तंग करने वाला नहीं था, बैठ कर बातें करने लगे ! बातों-बातों में मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ गई! धीरे धीरे मैंने उसकी जांघों पर अपना हाथ फेरना शुरू किया। उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की जिससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई !

मैंने उससे पूछा- पूनम, क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ ?

तो उसने मुझे कहा- मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है ललित ! जिसको प्यार करते हैं उससे इजाजत की कोई जरुरत नहीं ! मैं तुम्हें और तुम मुझे प्यार करते हो और अगर तुम्हारा मुझे चूमने का दिल कर रहा है तो कर लो !

फिर क्या था ! हरी झंडी पा कर मैं खुश हो गया और पूनम को चूमने लगा। थोड़ी देर तक उसके होंटों को चूमता रहा और धीरे धीरे उसके स्तन दबाने लगा। फ़िर उसके कुरते में हाथ डालकर, फिर धीरे से उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके चुचूक मसलने लगा। उसका कुरता ऊपर करके उसके पेट पर चूमने लगा। उसने मुझे रोकते हुए कहा- ललित यहाँ नहीं ! यह जगह सुनसान जरुर है पर सुरक्षित नहीं ! किसी ऐसी जगह चलो जहाँ पर तुम्हारे और मेरे अलावा कोई और न हो !

तो मैं उसको अपने ऑफिस ले कर चला आया। रविवार होने की वजह से ऑफिस की छुट्टी थी। मेरे केबिन की चाबी मेरे ही पास थी। ऑफिस जाकर मैंने गार्ड को कहा कि मुझे कुछ जरुरी काम है इसलिए ऑफिस आया हूँ और अन्दर चला गया पीछे के दवाजे से पूनम को भी अन्दर बुला लिया। अपने केबिन को अन्दर से लॉक कर लिया। फिर पूनम को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा, उसके बड़े बड़े दूध दबाने लगा। वो भी पूरी मस्ती में मेरा साथ देने लगी। कभी मेरे होंटों को चूसती तो कभी मेरी जीभ को ! लगता था कि जैसे मुझसे ज्यादा वो प्यासी हो ! मैंने उसको कुरते को उसके शरीर से अलग कर दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे भी उसके जिस्म से जुदा कर दिया। अब वो केवल ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी। मैं उसको चूमता रहा, गर्दन से होते हुए उसकी पीठ पर चूमते हुए मैंने उसकी ब्रा खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दी और उसके दोनों कबूतर आजाद हो कर बाहर निकल आये !

क्या मस्त स्तन थे उसके ! मैं बता नहीं सकता ! गोरे गोरे स्तनों उस पर गुलाबी चुचूक मुझे पागल बना रहे थे।

उसने मुझे कहा- ललित, तुमने मेरे तो सब कपड़े उतार दिए ! क्या अपने कपड़े नहीं उतारोगे ? या मुझसे उतरवाने का इरादा है?

मैंने कहा- अगर तुम उतारना चाहो तो उतार दो ! फिर उसने भी मेरे सब कपड़े उतार कर बगल में अपने कपड़ों के साथ रख दिए। फिर मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी भी उतार दी। उसका एक चूचा मेरे मुँह में था और दूसरे को हाथ में ले कर दबा रहा था। उसकी चूची चूसते हुए मैंने उसको फर्श पर लिटा दिया और उसके पेट पर अपनी जीभ फिरने लगा। फिर मैंने उसकी बालों वाली चूत पर अपना हाथ रख दिया, उसकी चूत से पानी निकल रहा था !

मैंने अपने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी, वो सिसक उठी और पागलों की तरह मेरे बालों को नोचने लगी। मैं अपनी ऊँगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से निकाल कर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। उसने मेरे सर को उसने अपनी चूत पर कस कर दबा लिया और अपने पैरों को मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट लिया और कुछ देर में वो झड़ गई !

मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसके ऐसे मुँह में लिया जैसे कोई आइसक्रीम खा रहा हो। बड़ी मस्ती में वो मेरे लंड को चूस रही थी।

कुछ देर बाद उसने कहा- ललित, अब बर्दाश्त नहीं होता ! फाड़ दो मेरी चूत को !

मैंने उसकी टांगों को थोड़ा सा ऊपर मोड़ कर लंड को निशाने पर लगाकर एक धक्का दिया। लंड करीब एक चौथाई तक उसकी चूत में घुस गया था। वो दर्द से तड़प रही थी। मैं लंड उसकी चूत में डाले उस पर पड़ा रहा। जब उसका दर्द कम हुआ तो एक और धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी चूत में समा चुका था। उसकी चूत से खून निकलने लगा। 15 मिनट तक मैंने धक्के नहीं लगाये, सिर्फ उसके वक्ष को ही मसलता रहा। जब दर्द ख़त्म होने लगा तो लंड महाराज को एक जोरदार धक्के के साथ चूत की जड़ तक पहुंचा दिया। वो दर्द से तड़पने लगी, मुझे लंड बाहर निकलने के लिए बोलने लगी, कहने लगी- बाहर निकालो ! दर्द बहुत हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !

करीब दस मिनट बाद उसका दर्द कम हो गया ओर वो नीचे से अपने चूतड़ हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी। अब मैं और वो पूरे जोश में थे।

वो बोल रही थी- जोर से चोदो मेरे राजा ! निकाल दो कचूमर मेरी चूत का ! बहुत तंग किया है इसने मुझे ! पी जाओ मेरी जवानी का रस ! खूब जोर लगा कर चोदो! जूऊऊऊऊऊ सीईई मीईरीईईए राआअजाआआअ औररररररर जोर सीई मीएरीईई माआआआआआ मैं तो डिसचार्ज होने वाली हूँ !

ये कहते हुए वो झड़ गई लेकिन मैं अभी इतनी जल्दी डिस्चार्ज नहीं होने वाला था। लंड निकाल कर उसकी चूत से मैंने उसके मुँह में दे दिया! वो लंड को चाट-चाट कर मजे ले रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसके मुँह से लंड निकाल कर उसको घोड़ी बना कर उसकी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा। उसको तो पता नहीं पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था! वो भी मजे से अपने चूतड़ आगे पीछे कर के मेरा लंड अपनी चूत में डलवाने लगी।

क्या मस्त चुदाई चल रही थी ! पूरा केबिन फच फच की आवाज से गूंज रहा था। अब मैं भी अपनी चरमसीमा पर आने वाला था तो मैंने उसको सीधा लिटाया और लंड उसकी चूत में डाल कर धक्के लगाने लगा।

उससे मैंने कहा- पूनम, मेरा निकलने वाला है !

तो उसने कहा- आज तो अपनी चूत में तुम्हारा अमृत रस डलवाना है ! अन्दर ही डिस्चार्ज होना ! भर दो अपने अमृत से मेरी चूत को !

और 5-7 धक्कों के बाद मैंने अपने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और कुछ देर उसके ऊपर ही पड़ा रहा ! थोड़ी देर बाद मैं उस पर से हटा तो देखा कि उसकी चूत की सील टूटने से उसकी चूत से खून और वीर्य बह रहा था। हम दोनों सीधे बाथरूम में गए और खुद को साफ़ किया। इसके बाद बाहर आकर मैं उसको और वो मुझे चूमने लगी। किस करते करते हम दोनों में फिर से जोश आ गया और फिर से उसकी चुदाई शुरू कर दी मैंने !

वो मेरा लंड चूस रही थी, मैं उसकी चूत चाटने लगा। 69 की पोजीशन में थे हम दोनों !

अपनी जीभ मैंने उसकी चूत में अन्दर तक डाल दी। वो लंड को बड़े आनंद लेकर चूसती रही, कभी अंडों को चूसती, कभी लंड ! मैंने उसको खड़ा किया और नीचे झुका। उसकी चूत में पीछे से लंड डाल कर चोदने लगा। उस दिन मैंने उसको चर बार चोदा। फिर करीब दो साल तक उसकी चुदाई की उसी के घर पर।

अब उसकी शादी हो चुकी है, शादी के बाद भी मैंने उसको कई बार चोदा
 
सास के साथ मस्ती

मेरा नाम राज है और मैं 28 साल का हूँ, दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरी शादी को हुए दो साल हो गए है, मेरी सास 36 साल की एकदम जवान औरत है, बहुत सेक्सी है, मेरा तो उसे देखते ही खड़ा हो जाता है। मैं हमेशा उसकी फोटो देख के मुठ मारता हूँ, मैं हमेशा उसको देखता रहता था, हमेशा उसको चोदना चाहता था, उसके मुँह पर मुठ मारने का मन करता था।

बात उन दिनों की है जब मेरे सास हमारे यहाँ रहने आई क्योंकि मेरे बीवी की तबीयत ख़राब रहती थी, मैं बहुत खुश हो गया। जब वो नहाने जाती तो नहाने के बाद मैं तुरन्त नहाने चला जाता था ताकि वो आपने कपडे नहीं धो पाए। उसके गीले कपड़ों में मैं ब्रा और पैंटी खोजता और मैं उसकी गीली पैंटी को सूंघता और उसको मुँह में डाल कर चूस लेता। मैं दोनों पर खूब मुठ मरता था, जब वो सोती थी तो अकसर उसकी साड़ी उठ जाती थी और मैं उसकी फोटो ले लेता था। इस तरह मुझे बहुत मजा आने लगा, फिर क्या, मैं उसको चोदना चाहता था।

और आखिर वो दिन आ गया, एक दिन मेरे बीवी अपने छोटे भाई जो सात साल का है उसे लेकर पार्क में घूमने चली गई, मैं और मेरी सास घर पर अकेले थे। मैं बिस्तर पर बैठ कर लैपटॉप पर काम कर रहा था।

इतने में मेरी सास मेरे पास आकर बिस्तर के ऊपर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठा कर मेरे मुँह पर ढक कर बोली- ले चाट ले अपनी सास की बुर ! यही चाहते थे न तुम ?

मेरी कुछ समझ में नहीं आया।

साड़ी के अंदर बिल्कुल अँधेरा था।

वह बोली- क्या मुझे नहीं पता कि तुझे क्या चाहिये !

मैं उठा और अलग हो गया।

वो बोली- क्यों ? अपनी सास की बुर नहीं चाटनी?

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, साड़ी खोल दी और पेटीकोट के अंदर घुस गया। उसकी जाघें बहुत मोटी और मस्त थी।

फिर मैंने उसकी पैंटी सूंघी, क्या खुशबू थी ! फिर मैं उसकी पैंटी को चाटने लगा।

मैंने पूछा- आपको कैसे पता चला कि मुझे क्या चाहिए?

बोली- साले ! हमेशा मुझे घूरते रहते हो ! मेरे नहाने के बाद तुरंत नहाने चले जाते हो ! मेरी पैंटी और ब्रा पर मुठ मारते हो और पूछते हो कैसे पता चला? पैंटी धोते समय मुझे पता चल गया।

बोली- क्या मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूँ?

मैंने कहा- बहुत अच्छी !

चोदना चाहते हो मुझ को?

मैंने कहा- हां ! बहुत दिनों से !

बोली- आजा राजा चोद दे अपनी सास को !

मैं पागल सा हो गया। मैंने पेटीकोट खोल दिया, अब वो सिर्फ पैंटी और ब्लाउज मैं थी, मैंने पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और पैंटी निकाल दी और मुँह में लेकर चूसने लगा।

वह बोली- पैंटी से बहुत खेल चुके ! अब बुर से खेलो !

क्या लाल बुर थी साली की ! और थोड़े थोड़े बाल थे ! मस्त सेक्सी लग रही थी।

मैंने अपना मुँह उसकी बुर पर रख दिया और चाटना शुरु कर दिया। वो सिसकारिययाँ लेने लगी- और चाट साले, पीले अपनी सास की बुर !

मैं लगातार बुर चाटता रहा।

इतने में बोली- मुझे पेशाब करना है !

मैंने कहा- रुको ! मेरे मुँह में करो !

वो बोली- क्यों ?

मैंने कहा- मैं पी लूँगा !

वो बोली- साले, मेरा पेशाब पीयोगे?

मैंने कहा- हाँ, मैं बुर के पास मुँह रखता हूँ, तुम करो !

उसने पेशाब करना शुरु किया, मैं पूरा पेशाब पी गया और कहा- मज़ा आ गया !

वो बोली- कैसा था ?

मैंने कहा- बहुत स्वादिष्ट !

मैंने उसकी बुर चाट कर साफ कर दी और उसमें उंगली डाल कर हिलाने लगा। फिर मैंने उसकी गांड को चाटना शुरु किया। क्या गांड थी साली की ! पर छेद बहुत छोटा था, शायद कोरी गांड थी ! मैंने उसकी गांड पूरी चाट ली।

वो बोली- नीचे ही लगा रहेगा या ऊपर भी आएगा ?

उसके काले ब्लाउज से सफेद ब्रा साफ़ दिख रही थी। मुझे ब्लाउज के ऊपर से ब्रा देखने में बहुत अच्छा लगता है, मैं ब्लाउज के ऊपर से ब्रा छूने लगा और फिर ब्लाउज खोल दिया और ब्रा के ऊपर से चूचियों को दबाने लगा।

क्या बड़ी-बड़ी चूचियाँ थी साली की !

फिर मैंने ब्रा खोल दी और चूचियों को मुँह में ले लिया और खूब चूसा। वो बहुत मज़े ले रही थी मस्त-मस्त गालियाँ दी रही थी।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और जीभ उसके मुँह में डाल दी।

वो बोली- चलो, अब जल्दी से चोद दो !

मैंने कहा- पहले लण्ड तो चूस लो !

बोली- ला दे !

और मेरा लण्ड चूसने लगी। मै अपना लण्ड उसके मुँह में आगे-पीछे करने लगा।

अब मुझे नहीं रहा गया, मेरा लंड साप की तरह फ़ुन्कारें मार रहा था, मैंने लंड उसकी बुर पर रखा और धीरे-धीरे पूरा लण्ड अपनी सास की बुर में पेल दिया।

वो जोर से चीखी और बोली- हरामी, धीरे से !

मैंने अपना लण्ड उसकी बुर में आगे-पीछे करना शुरु किया। वो भी मस्त होकर गाण्ड उठा-उठा कर चुदवा रही थी और गालियाँ दे रही थी- चोद दे हरामी अपनी सास को ! फ़ाड़ दे मेरी बुर !

मैंने स्पीड बढ़ा दी और कहा- कुछ देर में मेरा गिरने वाला है ! जल्दी मुँह खोलो !

और सारा माल मैंने उसके मुँह में डाल दिया और कुछ उसके चेहरे पर फ़ैला दिया और सारा माल पिलाया।

मैंने पूछा- मज़ा आया?

वो बोली- बहुत मज़ा आया !

उसने कहा- मेरे गांड मारेगा ?

मैंने कहा- हाँ !

पर काफी देर हो गई थी, हमें डर था कि कहीं मेरे बीवी न आ जाये !

वो बोली- ठीक है ! अगली बार !

गाण्ड की कहानी अगले भाग में !

अब क्या, जब भी मौका मिलता मैं अपनी सास को खूब चोदता हूँ और वो भी बड़े मज़े से चुदवाती है।
 
बीबी और बहु को चोदा

रात के बारह बज़ चुके थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहुत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब की बस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया की उमर 45 साल की है। और उसकी बीबी की उमर 40 साल की है। हरिया एक गरीब किसान है।

हरिया अपने घर के एक अँधेरी कोठरी में रोज़ की तरह अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल था। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल कर काफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी उत्तेजना के अपने दोनों पैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे कि उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोई तकलीफ़ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर आह आह की आवाज निकल रही थी।

मुन्नी की बुर कब का पानी छोड़ चुकी थी। थोड़ी ही देर में हरिया के लंड से माल निकलने लगा तो उसने भी आह आह कर के मुन्नी की चूची पर अपना मुँह रख दिया। मुन्नी की बेजान चूची को वो मुँह में ले कर चूसने लगा। उसने अपना लंड मुन्नी के बुर से निकाला और मुन्नी के बगल में लेट गया।

उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी ने उसके लटक रहे लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसको खींच-तान करने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साह नही था। वो एक बेजान लता की तरह मुन्नी के हाथों का खिलौना बना हुआ था।

मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?

हरिया ने कहा- क्या?

मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज मैं और मालती ( मुन्नी की बहू) सुबह शौच करने खेत गए । वहाँ हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर पाखाना कर थे....

तभी मैंने देखा कि मालती अपनी बुर में ऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।

मैंने पूछा- यह क्या कर रही है तू?

तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा- जरा उधर तो देखो अम्मा।

मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पर चढ़ा हुआ है।

मैंने कहा- अच्छा, तो यह बात है।

मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।

मैंने कहा- जल्दी कर, घर भी चलना है।

मालती ने कहा- हाँ अम्मा, बस अब निकलने ही वाला है।

और एक मिनट हुआ भी ना होगा कि उसकी बुर से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तक निकलता ही रहा।

मैंने पूछा- क्यों री, कितने दिन का माल जमा कर रखा था?

उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।

मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।

हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नहीं है ना। कमाने के लिए परदेस चला गया। अरे मैं तो मना कर रहा था। तीन महीने भी नहीं हुए उसकी शादी को और अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला, अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चार महीने से आने का नाम ही नहीं है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मी थोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।

हरिया ने मुन्नी से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पाखाना करती हो?

मुन्नी ने कहा- हाँ।

हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे की बुर रोज़ देखती होगी।

मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखी है हम दोनों ने एक दूसरे की। बिल्कुल ही पास बैठ कर पाखाना करते हैं।

हरिया- अच्छा, एक बात तो बता। उसकी बुर तेरी तरह काली है या गोरी?

मुन्नी- पूरी गोरी तो नहीं है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसकी बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं। बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। एक बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।

हरिया- बुर कैसी है उसकी?

मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एक दम फुले फुले लाल लाल।

अचानक मुन्नी ने महसूस किया कि हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई कि हरिया को मज़ा आ रहा है। वो बोली- अच्छा, एक बात तो बताओ।

हरिया बोला- क्या?

मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?

हरिया- यह कैसे हो सकता है?

मुन्नी- क्यों नहीं हो सकता है? वो जवान है । अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्या मुँह दिखायेंगे हम लोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसी दूसरे का मुँह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी के साथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है । फिर हमारा बेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नहीं है।

हरिया- क्या मालती मान जायेगी?

मुन्नी ने कहा- कल रात को मैं उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।

हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया। उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तूने तो मुझे गरम कर दिया रे।

मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और आह आह की आवाज़ निकालने लगी। इस बार वो जोर जोर से आवाज निकाल रही थी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नहीं हो रहा था लेकिन वो जोर जोर से बोलने लगी- आह आह, धीरे धीरे करो ना। दर्द हो रहा है।

यह आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहू मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती की बुर चिपचिपी हो गई। उसने अपने पिया मोहन के लंड को याद करके अपनी बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।

सुबह हुई । दोनों सास-बहू खेत गई। दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पाखाना कर रही थी।

मालती अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सूजी हुई लग रही है।

मुन्नी ने हंसते हुए कहा- यह जो तेरे ससुर जी हैं न, बुढापे में भी नहीं मानते। देख न कल रात को इतना चोदा कि अभी तक दुःख रहा है।

मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?

मुन्नी- हाँ, पूछ न।

मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?

मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है कि अब मेरी बुर तो फट ही जायेगी। एक हाथ बराबर हो जाता है उनका लंड खड़ा हो के।

मुन्नी ने देखा कि मालती ने अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।

मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ ?

मालती बोली- नहीं अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।

मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नहीं करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्यों नहीं निकाल देती?

मालती चौंक कर बोली- यह कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।

मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरत है। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नहीं उसका लाभ उठाया जाए।

मालती का मन अब डोल चुका था, वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो?

मुन्नी बोली- अरे तू रात को उनके पास चले जाना। मैं बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रात के अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना तो तू भूल जायेगी कि तू उनकी बहू है और वो भूल जायेंगे कि वो तुम्हारे ससुर हैं।

यह सुन कर मालती की बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसकी बुर से इतना पानी निकलने लगा कि मुन्नी को लगा कि यह पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।

रात हुई, खाना-वाना ख़त्म कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और बता दिया कि मैं मालती को भेज रही हूँ। उसको भी समझा दिया है। तुम सिर्फ़ थोड़ी पहल करना। वो तो कुत्ते से भी चुदवाने के लिए तैयार बैठी है। तुम तो इंसान ही हों।

कह कर वो बाहर चली आई और जोर से बोली- बहू, ओ बहू, सुन आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तू जरा अपने ससुर जी को तेल तो लगा दे।

फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हो जी, मैं जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहू से तेल लगवा लेना।

मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई, मुन्नी ने उससे धीरे से कहा- देख मैं बहाना बना कर तुम्हें उनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शरमाना नहीं। अगर उनको बुरा लगे तो कह देना कि अंधेरे में दिखा नहीं। अगर कुछ नहीं बोले तो फिर हाथ लगाना। जब देखो कि कुछ नहीं बोल रहे हैं तो समझना कि उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैं चलती हूँ।

कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।

हरिया ने कहा- आजा, वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नहीं थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सा दर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।

मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो की पर्याप्त रोशनी के लिए अनुकूल नहीं थी।

मालती ने कहा- कोई बात नहीं, मैं आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।

हरिया ने कहा- बहू, जरा ये डिबिया बुझा दे क्योंकि मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहन रखी है।

मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हल्की रोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी। मालती की सांसें तेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया की जांघों में तेल लगाने लगी। धीरे से वो जानबूझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नहीं कहा। मालती ने दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया।

हरिया ने कहा- बहू, तुम्हें गर्मी लग रही होगी। तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से साड़ी ख़राब हों सकती है।

मालती ने कहा- बाबूजी, साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। सिर्फ़ पैंटी पहन रखा है। इसलिए मैं साड़ी नहीं खोल सकती।

हरिया ने कहा- तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में मैं तुम्हें देख थोड़े ही पा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?

मालती तो यही चाहती थी, उसने अपनी साड़ी खोल कर एक किनारे रख दी और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी। जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा कि बात लगभग बन चुकी है, उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया, मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरे जब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई।

लंगोट हटने पर मालती पूरी गरम हो गई। अब वो हरिया के लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरिया का लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ, मालती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिससे उसकी कलाई हरिया के लण्ड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ा होने वाला नहीं था, वो बोला- बहू, तू थक गई होगी। आ जरा लेट जा।

उसने लगभग जबरदस्ती बहू को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- इसे खोल दे ! बहुत गर्मी है।

मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग कर दिया और चूची को छूने लगा, बोला- अरे तुमने अन्दर ब्रा नही पहन रखा है? खैर कोई बात नहीं, अब गर्मी तो नहीं लग रही है न?

वो मालती के चूची को मसलने लगा, बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। मैं तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है न?

मालती बोली- नहीं, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।

हरिया ने कहा- शाबाश बहू, यही अच्छी बहू की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?

मालती- बाबूजी, मुझे कुछ नही चाहिए, सिर्फ़ आपका लंड छूना चाहती हूँ।

हरिया- एक शर्त पर। तू भी मुझे अपनी बुर छूने देगी।

मालती ने आव देखा ना ताव, एक झटके में अपना पैन्टी उतार फेंकी। हरिया ने नीचे जा कर मालती की बुर को पहले तो छुआ फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।

मालती बोली- ऐसे मत चूसिये, मैं मर जाऊंगी।

हरिया उठ खड़ा हुआ और मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोई खजाना लग गया हो। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती। काफी देर यह करने के बाद बोली- बाबूजी, इसको मेरी बुर में एक बार डाल दीजिये न।

हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घुसा दिया। मालती की बुर में हरिया का लंड जाते ही फुफकार मारने लगा और मालती की बुर में ही वो खड़ा होने लगा। मालती- बाबूजी ये क्या हो रहा है? जल्दी से निकाल दीजिये।

हरिया- कुछ नहीं होगा बहू।

अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा ही नहीं था कि जिसे वो कमजोर और बूढ़ा लंड समझ रही थी, वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकाय हो जाएगा।

हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजी छोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया ने नहीं सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बाद मालती की बुर थोड़ी ढीली हुई। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालती की जम के चुदाई की। तब जाकर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंड मालती की बुर से निकाल के मालती के मुँह में लगा दिया, बोला - पी जा।

मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्योंही दो-तीन बार चूसा कि हरिया के लंड से तेज़ धार निकली जिससे मालती का पूरा मुँह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गटक लिया।

आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई। उसके बाद वो रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी। हाँ दो-तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबी को चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहू मालती को
 
भाई से चुद गई

मैं अपने घर में एकलौती लड़की हूँ। लाड़ प्यार ने मुझे जिद्दी बना दिया था। बोलने में भी मैं लाड़ के कारण तुतलाती थी। मैं सेक्स के बारे में कम ही जानती थी। पर हां कॉलेज तक आते आते मुझे चूत और लण्ड के बारे में थोड़ा बहुत मालूम हो गया था। मेरी माहवारी के कारण मुझे थोड़ा बहुत चूत के बारे में पता था पर कभी सेक्स की भावना मन में आई ही नहीं। लड़को से भी मैं बातें बेहिचक किया करती थी। पर एक दिन तो मुझे सब मालूम पड़ना ही था।

आज रात को जैसे ही मैंने अपना टीवी बन्द किया, मुझे मम्मी पापा के कमरे से एक अनोखी सी आवाज आई। मैंने बाहर निकल कर अपने से लगे कमरे की तरफ़ देखा तो लाईट जल रही थी पर कमर सब तरफ़ से बन्द था। मैं अपने कमरे में वापस आ गई। मुझे फिर वही आवाज आई। मेरी नजर मेरे कमरे से लगे हुये दरवाजे पर टिक गई। मैंने परदा हटाया तो बन्द दरवाजे में एक छेद नजर आया, जो नीचे था। मैंने झुक के कमरे में देखने की कोशिश की। एक ही नजर में मुझे मम्मी पापा दिख गये। वे नंगे थे और कुछ कर रहे थे।

मैंने तुरन्त कमरे की लाईट बन्द की और फिर उसमें से झांकने लगी। पापा के चमकदार गोल गोल चूतड़ साफ़ नजर आ रहे थे। सामने बड़ी सी उनकी सू सू तनी हुई दिख रही थी। पापा के चूतड़ कितने सुन्दर थे, उनका नंगा शरीर बिल्कुल किसी हीरो ... नहीं ही-मैन ... नहीं सुपरमैन... की तरह था। मैं तो पहली नजर में ही पापा पर मुग्ध हो गई। पापा की सू सू मम्मी के चूतड़ो में घुसी हुई सी नजर आ रही थी। पापा बार बार मम्मी के बोबे दबा रहे थे, मसल रहे थे। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया। झुक कर बस देखती रही... हां, मम्मी को इसमें आनन्द आ रहा था और पापा को भी बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर तक तो मैं देखती रही फिर मैं बिस्तर पर आ कर लेट गई। सुना तो था कि सू सू तो लड़कियों की सू सू में जाती है... ये तो चूतड़ों के बीच में थी। असमन्जस की स्थिति में मैं सो गई।

दूसरे दिन मेरा चचेरा भाई चीकू आ गया। मेरी ही उम्र का था। उसका पलंग मेरे ही कमरे में दूसरी तरफ़ लगा दिया था। सेक्स के मामले में मैं नासमझ थी। पर चीकू सब समझता था। रात को हम दोनों मोबाईल से खेल रहे थे... कि फिर से वही आवाज मुझे सुनाई दी। चीकू किसी काम से बाहर चला गया था। मैंने भाग कर परदा हटा कर छेद में आंख लगा दी। पापा मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे और अपने चूतड़ को आगे पीछे कर के रगड़ रहे थे। इतने में चीकू आ गया...

"क्या कर रही है गौरी... ?" चीकू ने धीरे से पूछा।

"श श ... चुप... आजा ये देख... अन्दर मम्मी पापा क्या कर रहे हैं?" मैंने मासूमियत से कहा।

"हट तो जरा ... देखूँ तो !" और चीकू ने छेद पर अपनी आंख लगा दी। उसे बहुत ही मजा आने लगा था।

"गौरी, ये तो मजे कर रहे हैं ... !" चीकू उत्सुकता से बोला।

पजामे में भी चीकू के चूतड़ भी पापा जैसे ही दिख रहे थे। अनजाने में ही मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर पहुंच गये और सहलाने लगे।

"अरे हट, ये क्या कर रही है... ?" उसने बिना मुड़े छेद में देखते हुये मेरे हाथ को हटाते हुये कहा।

"ये बिल्कुल पापा की तरह गोल गोल मस्त हैं ना... !" मैंने फिर से उसके चूतड़ों पर हाथ फ़ेरा। मैंने अब हाथ नीचे ले जाते हुये पजामें में से उसका लण्ड पकड़ लिया... वो तो बहुत कड़ा था और तना हुआ था... !

"चीकू ये तो पापा की सू सू की तरह सीधा है... !"

वो एक दम उछल सा पड़ा...

"तू ये क्या करने लगी है ... चल हट यहां से... !" उसने मुझे झिड़कते हुये कहा।

पर उसका लण्ड तम्बू की तरह उठा हुआ था। मैंने फिर से भोलेपन में उसका लण्ड पकड़ लिया...

"पापा का भी ऐसा ही है ना मस्त... ?" मैंने जाने किस धुन में कहा। इस बार वो मुस्करा उठा।

"तुझे ये अच्छा लगता है...? " चीकू का मन भी डोलने लगा था।

"आप तो पापा की तरह सुपरमैन हैं ना... ! देखा नहीं पापा क्या कर रहे थे... मम्मी को कितना मजा आ रहा था... ऐसे करने से मजा आता है क्या... " मेरा भोलापन देख कर उसका लण्ड और कड़क गया।

"आजा , वहाँ बिस्तर पर चल... एक एक करके सब बताता हूँ !" चीकू ने लुफ़्त उठाने की गरज से कहा। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गये... उसका लण्ड तना हुआ था।

"इसे पकड़ कर सहला... !" उसने लण्ड की तरफ़ इशारा किया। मैंने बड़ी आसक्ति से उसे देखा और उसका लण्ड एक बार और पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी।

"मजा आ रहा है भैया... ?"

उसने सिसकारी भरते हुये हां में सर हिलाया,"आ अब मैं तेरे ये सहलाता हूँ... देख तुझे भी मजा आयेगा... !" उसने मेरी चूंचियों की तरफ़ इशारा किया।

मैंने अपना सीना बाहर उभार दिया। मेरी छोटी छोटी दोनों चूंचियां और निपल बाहर से ही दिखने लगे।

उसने धीरे से अपना हाथ मेरी चूंचियों पर रखा और दबा दिया। मेरे शरीर में एक लहर सी उठी। अब उसके हाथ मेरी पूरी चूंचियों को दबा रहे थे, मसल रहे थे। मेरे शरीर में वासना भरी गुदगुदी भरने लगी। लग रहा था कि बस दबाते ही रहे। ज्योंही उसने मेरे निपल हल्के से घुमाये, मेरे मुँह से आनन्द भरी सीत्कार निकल गई।

"भैया, इसमें तो बड़ा मजा आता है... !"

"तो मम्मी पापा यूँ ही थोड़े ही कर रहे हैं... ? मजा आयेगा तभी तो करेंगे ना... ?"

"पर पापा मम्मी के साथ पीछे से सू सू घुसा कर कुछ कर रहे थे ना... उसमें भी क्या... ?"

"अरे बहुत मजा आता है ... रुक जा... अभी अपन भी करेंगे... देख कैसा मजा आता है !"

"देखो तो पापा ने अपनी सू सू मेरे में नहीं घुसाई... बड़े खराब हैं ... !"

"ओह हो... चुप हो जा... पापा तेरे साथ ये सब नहीं कर सकते हैं ... हां मैं हूँ ना !"

"क्या... तुझे आता है ये सब... ? फिर ठीक है... !"

"अब मेरे लण्ड को पजामे के अन्दर से पकड़ और फिर जोर से हिला... "

"क्या लण्ड ... ये तो सू सू है ना... लण्ड तो गाली होती है ना ?"

"नहीं गाली नहीं ... सू सू का नाम लण्ड है... और तेरी सू सू को चूत कहते हैं !"

मैं हंस पड़ी ऐसे अजीब नामों को सुनकर। मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और पजामा नीचे करके उसका तन्नाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और कस कर दबा लिया।

"ऊपर नीचे कर ... आह हां ... ऐसे ही... जरा जोर से कर... !"

मैं लण्ड उसके कहे अनुसार मसलती रही... और मुठ मारती रही।

"गौरी, मुझे अपने होंठो पर चूमने दे... !"

उसने अपना चेहरा मेरे होंठो से सटा दिया और बेतहाशा चूमने लगा। उसने मेरा पजामा भी नाड़ा खोल कर ढीला कर दिया... और हाथ अन्दर घुसा दिया। उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया। मेरा सारा जिस्म पत्ते की तरह कांपने लगा था। सारा शरीर एक अद्भुत मिठास से भर गया था। ऐसा महसूस हो रहा था कि अब मेरे साथ कुछ करे। मेरे में समां जाये... ... शायद पापा की तरह लण्ड घुसा दे... ।

उसने जोश में मुझे बिस्तर पर धक्का दे कर लेटा दिया और मेरे शरीर को बुरी तरह से दबाने लगा था। पर मैंने अभी तक उसका लण्ड नहीं छोड़ा था। अब मेरा पजामा भी उतर चुका था। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। पर मस्ती में मुझे यह नहीं मालूम था कि चूत चुदने के लिये तैयार हो चुकी थी। मेरा शरीर लण्ड लेने के लिये मचल रहा था।

अचानक चीकू ने मेरे दोनों हाथ दोनों तरफ़ फ़ैला कर पकड़ लिये और बोला,"गौरी, मस्ती लेनी हो तो अपनी टांगें फ़ैला दे... !"

मुझे तो स्वर्ग जैसा मजा आ रहा था। मैंने अपनी दोनों टांगें खोल दी... उससे चूत खुल गई। चीकू मेरे ऊपर झुक गया और मेरे अधरों को अपने अधर से दबा लिया... उसका लण्ड चूत के द्वार पर ठोकरें मार रहा था। उसके चूतड़ों ने जोर लगाया और लण्ड मेरी चूत के द्वार पर ही अटक कर फ़ंस गया। मेरे मुख से चीख सी निकली पर दब गई। उसने और जोर लगाया और लण्ड करीब चार इंच अन्दर घुस गया। मेरा मुख उसके होंठो से दबा हुआ था। उसने मुझे और जोर से दबा लिया और लण्ड का एक बार फिर से जोर लगा कर धक्का मारा ... लण्ड सब कुछ चीरता हुआ, झिल्ली को फ़ाड़ता हुआ... अन्दर बैठ गया।

मैं तड़प उठी। आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने बिना देरी किये अपना लण्ड चलाना आरम्भ कर दिया। मैं नीचे दबी कसमसाती रही और चुदती रही। कुछ ही देर में चुदते चुदते दर्द कम होने लगा और मीठी मीठी सी कसक शरीर में भरने लगी। चीकू को चोदते चोदते पसीना आ गया था। पर जोश जबरदस्त था। दोनों जवानी के दहलीज़ पर आये ही थे। अब उसके धक्के चलने से मुझे आनन्द आने लगा था। चूत गजब की चिकनी हो उठी थी। अब उसने मेरे हाथ छोड़ दिये थे ... और सिसकारियाँ भर रहा था।

मेरा शरीर भी वासना से भर कर चुदासा हो उठा था। एक एक अंग मसले जाने को बेताब होने लगा था। मुझे मालूम हो गया था कि मम्मी पापा यही आनन्द उठाते हैं। पर पापा यह आनन्द मुझे क्यों नहीं देते। मुझे भी इस तरह से लण्ड को घुसा घुसा कर मस्त कर दें ... । कुछ देर में चीकू मुझसे चिपक गया और उसका वीर्य छूट गया। उसने तेजी से लण्ड बाहर निकाला और चूत के पास दबा दिया। उसका लण्ड अजीब तरीके से सफ़ेद सफ़ेद कुछ निकाल रहा था। मेरा यह पहला अनुभव था। पर मैं उस समय तक नहीं झड़ी थी। मेरी उत्तेजना बरकरार थी।

"कैसा लगा गौरी...? मजा आता है ना चुदने में...? "

"भैया लगती बहुत है... ! आआआआ... ये क्या...?" बिस्तर पर खून पड़ा था।

"ये तो पहली चुदाई का खून है... अब खून नहीं निकलेगा... बस मजा आयेगा... !"

मैं भाग कर गई और अपनी चूत पानी से धो ली... चादर को पानी में भिगो दी। वो अपने बिस्तर में जाकर सो गया पर मेरे मन में आग लगी रही। वासना की गर्मी मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई। रात को मैं उसके बिस्तर पर जाकर उस पर चढ़ गई। उसकी नींद खुल गई...

"भैया मुझे अभी और चोदो... पापा जैसे जोर से चोदो... !"

"मतलब गाण्ड मरवाना है... !"

"छीः भैया, गन्दी बात मत बोलो ... चलो... मैंने अपना पजामा फिर से उतार दिया और मम्मी जैसे गाण्ड चौड़ी करके खड़े हो गई। चीकू उठा और तुरंत क्रीम ले कर आया और मेरी गाण्ड में लगा दी।

"गौरी, गाण्ड को खोलने की कोशिश करना ... नहीं तो लग जायेगी... " मैंने हाँ कर दी।

उसने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद पर लगाया और कहा,"गाण्ड भींचना मत ... ढीली छोड़ देना... " और जोर लगाया।

एक बार तो मेरी गाण्ड कस गई, फिर ढीली हो गई। लण्ड जोर लगाने से अन्दर घुस पड़ा। मुझे हल्का सा दर्द हुआ... उसने फिर जोर लगा कर लण्ड को और अन्दर घुसेड़ा। चिकनाई से मुझे आराम था। लण्ड अन्दर बैठता गया।

"हाय... पूरा घुस गया ना, पापा की तरह... ?" मुझे अब अच्छा लगने लगा था।

"हां गौरी ... पूरा घुस गया... अब धक्के मारता हूँ... मजा आयेगा अब... !"

उसने धक्के मारने शुरू कर दिये, मुझे दर्द सा हुआ पर चुदने लायक थी। कुछ देर तक तो वो गाण्ड में लण्ड चलाता रहा। मुझे कुछ खास नहीं लगा, पर ये सब कुछ मुझे रोमांचित कर रहा था। पर वासना के मारे मेरी चूत चू रही थी।

"चीकू, मुझे जाने कैसा कैसा लग रहा है... मेरी चूत चोद दे यार... !"

चीकू को मेरी टाईट गाण्ड में मजा आ रहा था। पर मेरी बात मान कर उसने लण्ड मेरी चूत में टिका दिया और इस बार मेरी चूत ने लण्ड का प्यार से स्वागत किया। चिकनी चूत में लण्ड उतरता गया। इस बार कोई दर्द नहीं हुआ पर मजा खूब आया। तेज मीठा मीठा सा कसक भारा अनुभव। अब लगा कि वो मुझे जम कर चोदे।

मम्मी इतना मजा लेती हैं और मुझे बताती भी नहीं हैं ... सब स्वार्थी होते हैं ... सब चुपके चुपके मजे लेते रहते हैं ... । मैंने बिस्तर अपने हाथ रख दिये और चूत और उभार दी। अब मैं पीछे से मस्ती से चुद रही थी। मेरी चूत पानी से लबरेज थी। मेरे चूतड़ अपने आप ही उछल उछल कर चुदवाने लगे थे। उसका लण्ड सटासट चल रहा था... और ... और... मेरी मां... ये क्या हुआ... चूत में मस्ती भरी उत्तेजना सी आग भरने लगी और फिर मैं उसे सहन नहीं कर पाई... मेरी चूत मचक उठी... और पानी छोड़ने लगी... झड़ना भी बहुत आनन्द दायक था।

तभी चीकू के लण्ड ने भी फ़ुहार छोड़ दी... और उसका वीर्य उछल पड़ा। लण्ड बाहर निकाल कर वो मेरे साथ साथ ही झड़ता रहा। मुझे एक अजीब सा सुकून मिला। हम दोनों शान्त हो चुके थे।

"चीकू... मजा आ गया यार... अब तो रोज ही ऐसा ही करेंगे ... !" मैंने अपने दिल की बात कह दी।

"गौरी, मेरी मासूम सी गौरी ... कितना मजा आयेगा ना... अपन भी अब ऐसे ही मजे करेंगे... पर किसी को बताना नहीं... वर्ना ये सब बंद तो हो ही जायेगा... पिटाई अलग होगी...!"

"चीकू ... तुम भी मत बताना ... मजा कितना आता है ना, अपन रोज ही मस्ती मारेंगे... " हम दोनों ही अब आगे का कार्यक्रम बनाने लगे।
 
रीना दीदी की घर मे चूत मारी

मेरा नाम विजय है। मैं द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। मैं आपको जो कहानी बताने जा रहा हूँ वह गत वर्ष ग्रीष्मकाल की है।

मैं गर्मी की छुट्टियों में मुम्बई गया था। मुम्बई में मेरी चाची रहती हैं। वह वहाँ पर चेम्बुर में रहती हैं। मैं जब मुम्बई गया था तब चाची के पास मेरी चचेरी बहन भी आई हुई थी। उसका नाम रीना है। उसकी शादी हो चुकी है। उसकी उम्र चौबीस वर्ष की है। वो दिखने में बहुत ही सेक्सी है। उसके कपड़े पहनने के ढंग और रहन-सहन भी बहुत सेक्सी हैं। उसे कोई भी देखे तो उसका लण्ड खड़ा होना ही होना है।

एक दिन चाची को गाँव जाना पड़ा। वह गाँव चली गई। घर पर मैं और रीना दीदी दोनों ही थे। उस दिन शाम को मैं बोर हो गया था, इसलिए मैंने दीदी से कहा,"क्यों ना फिल्म देखने चलते हैं।" वह भी राजी हो गई, और हम फिल्म देखने चले गए। उस दिन हमने मर्डर फिल्म देखी। फिल्म में काफी गरम दृश्य थे। फिल्म देखने के बाद हम घर आए। हमने रात का खाना खाया। रात काफ़ी हो चुकी थी।

आपको तो पता ही होगा, मुम्बई में घर बहुत छोटे होते हैं। उस पर मेरी चाची एक कमरे के घर में रहती हैं। वहाँ सिर्फ एक ही बिस्तर के बाद, थोड़ी और जगह बचती थी। अब हमें सोना था। सो मैंने अपनी लुँगी ली और दीदी के सामने ही अपने कपड़े बदलने लगा। मैंने मेरी शर्ट खोली, बाद में पैन्ट भी। मेरे सामने अब भी मर्डर फिल्म के दृश्य घूम रहे थे, इसलिए मेरे लंड खड़ा था। वो अण्डरवियर में तम्बू बना रहा था। मेरे पैन्ट निकालने के बाद मेरे लण्ड की तरफ़ दीदी की नज़र गई, वह यह देखकर मुस्कुराई। मैंने नीचे देखा तो मेरे अण्डरवियर में बहुत बड़ा टेन्ट बना हुआ था। मैं शरमाया और मैंने मेरा मुँह दूसरी ओर घुमा लिया, फिर लुँगी बाँध ली।

पर लुँगी के बावज़ूद मेरे लंड का आकार नज़र आ रहा था। उस हालत में मैं कुछ भी नहीं कर सकता था। फिर मैंने यह भी सोचा कि दीदी यह सब देखकर मुस्कुरा रही है, उसे शर्म नहीं आ रही है, तो फिर मैं क्यों शरमाऊँ?

मैं बिस्तर पर जाकर सो गया। फिर दीदी ने आलमारी से अपनी नाईटी निकाली और कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया, उसने साड़ी उतारी। वाऊ... क्या बद़न था। वह देखकर तो मैं पागल ही हो गया और मेरा लंड उछाल मारने लगा। उसने अपनी ब्लाऊज़ निकाली और बाद में अपनी पेटीकोट भी निकाल दी।

वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी। उसे उस हालत में देखकर तो मैं पागल ही हो रहा था। लेकिन वह मेरी दीदी थी, इसलिए नियंत्रण कर रहा था। मुझे डर भी लग रहा था कि मैं कुछ कर ना बैठूँ और दीदी को गुस्सा आ गया तो मेरी तो शामत आ जाएगी। उसने नाईटी पहन ली। उसकी नाईटी पारदर्शी थी, जिसमें से उसका सारा जिस्म नज़र आ रहा था।

वह मेरे पास आकर सो गई। हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोए थे। लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे सामने उसका नंगा जिस्म घूम रहा था। और उसके मेरे पास सोने के कारण मेरा तनाव और बढ़ा हुआ था। लेकिन कुछ करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।

आधे घंटे तक तो मैं वैसे ही तड़पता रहा। लेकिन बाद में मैंने सोचा कि ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आने वाला। अगर तूने कुछ नहीं किया तो हाथ से निकल जाएगा। मैंने सोच लिया थोड़ा रिस्क लेने में क्या हर्ज़ है। और मैं थोड़ा सा दीदी की ओर सरक गया। दीदी मेरी विपरीत दिशा में मुँह करके सोई थी। मैंने मेरा हाथ उनके बदन पर डाला। मेरा हाथ दीदी के पेट पर था। मैंने धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके पेट पर घुमाना चालू किया।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उनकी चूचियों पर रखा। उसकी चूचियाँ काफ़ी बड़ी और नरम थीं। मैंने उसकी चूचियाँ धीरे-धीरे दबानी चालू कीं। उसने कुछ भी नहीं कहा, ना ही कोई हरक़त की। मेरी हिम्मत काफ़ी बढ़ गई। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ पर दबाया और उसे अपनी ओर खींचा और फिर धीरे-धीरे मैं अपना लंड उसके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार में दबाने लगा। वह मेरी ओर घूम गई। मेरी तो डर के मारे गाँड ही फट गई।

लेकिन वह भी मेरी ओर सरकी, तो मेरा लंड उसकी चूत पर दब रहा था और उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर। मैं समझ गया कि वह सो नहीं रही थी, बस सोने का नाटक कर रही थी और वह भी चुदवाना चाहती है। अब तो मेरे जोश की कोई सीमा ही नहीं थी। मैंने उसे मेरी ओर फिर से खींचा, तो वह मुझसे थोड़ा दूर सरक गई। मैं डर गया, और चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा।

थोड़ी ही देर बाद उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और मसलने लगी। मैं बहुत खुश हुआ। उसने अपने हाथों से मेरी लुंगी निकाल दी और अण्डरवियर भी, और मेरे लंड को मसलने लगी। फिर उसने मेरे कान में कहा,"वीजू, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। तुम्हारे जीजू का तो बहुत छोटा है।"

मैंने भी दीदी की नाईटी निकाल दी और उनको पूरा नंगा कर दिया। फिर मैं उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगा। मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था। वह सिसकियाँ भर रही थी। मैं उसे चूमते-चूमते उसकी चूत तक चला गया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए। उसके मुँह से सीत्कार निकल गई। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डालनी शुरु की, वह अपने चूतड़ उठाकर मुझे प्रतिक्रिया दे रही थी।

मेरा लंड अब लोहे जैसा गरम हो गया था। मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और मैंने लंड उसके मुँह में डाल दिया। वह भी मेरा लंड बड़े मज़े से चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने बाद में अपना लण्ड उसकी दोनों चूचियों के बीच में डाला और उसे आगे-पीछे करने लगा। वाऊ... क्या चूचियाँ थीं उसकी, मैं तो पागल हुआ जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसने कहा,"वीजू, प्लीज़, अब रहा नहीं जाता, लंड मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोदो।" मैं उसके ऊपर फिर से लेट गया और मैंने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर उसकी चूत के ऊपर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

मैंने दीदी से पूछा,"दीदी, तुम तो कह रही थी कि जीजू का लण्ड मेरे लण्ड से काफी छोटा है, तो तुम्हारी चूत इतनी ढीली? एक ही झटके में आधा लण्ड अन्दर चला गया।"

इस पर वह मुस्कुराई और बोली,"अरे वीजू, तुम्हारे जीजू का लण्ड छोटा तो है, पर मेरी चूत ने अब तक बहुत से लण्ड का पानी चखा है।"

फिर मैंने दूसरा झटका दिया और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। फिर मैंने उसकी चुदाई शुरु कर दी। वह भी अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी. उसके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं। वह कह रही थी,"वीजू... चोदोओओओ... और ज़ोर से चोदोओओओओ... अपनी दीदी की चूत आज फाआआआड़ डालो... ओह.. वीजू... डालो और ज़ोर से और अन्दर डालो..... बहुत मज़ा आ रहा है।"

उसकी ये बातें सुनकर मेरा जोश और भी बढ़ जाता और मेरी रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी। फिर मैं झड़ गया और वैसे ही उसके बदन पर सो गया और उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा। उस रात मैंने दीदी की ख़ूब चुदाई की।
 
भाभी के पैरों का दर्द

दोस्तो ! चुदाई ऐसा मज़ा है कि बार बार लेने का मन करता है। जब तक मोना मेरे साथ रही हमने सेक्स का बहुत मज़ा लिया पर उसके जाने के बाद मुझको नए साथी की तलाश थी, रोज रोज मुठ मार कर कब तक काम चलता !

पापा का ट्रान्सफर होने पर हम लोग नई जगह रहने आ गये। यहाँ पास ही में हमारे दूर के रिश्ते के भईया रहते थे। उनके घर में उनकी पत्नी यानि मेरी भाभी और उनकी दो लड़कियाँ रहती थी। पास रहने से हमारा उनके यहाँ आना जाना हो गया था। भाभी थोड़ी अच्छी सेहत की थी पर दिखने में बहुत सेक्सी थी। भाभी को देख कर मेरा मन उनको चोदने का होता था। भाभी से मेरी खुल कर बात होती थी और कई बार मैं उनको अश्लील चुटकले भी सुनाया करता था पर वो कुछ कहती नहीं थी। मुझको लगता था कि वो कुछ चाहती हैं पर रिश्ते के कारण कहने की हिम्मत नहीं होती थी।

भाभी के पैरों में बहुत दर्द रहता था तो कई बार मुझसे अपने पैर दबवा लेती थी। उनके पैर दबाते वक़्त मैं धीरे धीरे उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर देता था। उनके पैर बहुत गोरे थे तो उनकी तारीफ भी कर देता था। उन्होंने कभी मुझको कुछ नहीं कहा, मेरी हिम्मत बढती गई और एक दिन मैंने सोच लिया कि आज तो उनको अपने मन की बात कहनी ही है।

मैं दिन के वक़्त उनके घर गया, तब भैया ऑफिस गए हुए थे। उन्होंने मुझको अंदर बुलाया और हमने थोड़ी देर बाते की, फिर उन्होंने मुझसे अपने पैर दबाने को कहा। मैं तो इसी मौके की तलाश में था। वो पेट के बल लेट गई और मैं उनके पैर दबाने लगा और धीरे से उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर दी और पैर दबाने की जगह उनको सहलाने लगा। वो कुछ नहीं बोली

तो मैंने पूछा- भाभी, और ऊपर तक दबा दूँ?

उन्होंने कहा- हाँ !

तो मैंने धीरे धीरे उनकी साड़ी और ऊपर कर दी। अब उनकी गोरी-गोरी जांघें मेरे हाथों में थी और मैं उनको सहला रहा था। भाभी वैसे ही लेटी थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई। तब मैंने एक झटके में उनकी साड़ी पूरी ऊपर कर दी। उन्होंने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी और गोरी टांगों पर वो बहुत ही मस्त लग रही थी।

अब भाभी ने थोड़ा सो मुँह घुमा कर मुझको देखा तो मैं डर गया पर वो मुझको देख मुस्कुराई और फिर वैसे ही लेट गई। मैं समझ गया कि लोहा गर्म है। अब मैं धीरे धीरे उनके नितम्ब सहलाने लगा। सच में दोस्तो, उनके नितम्ब कितने चिकने और मुलायम थे आपको क्या बताऊँ !

थोड़ी देर मैं उनके नितम्ब सहलाता रहा और दोनों नितम्बों के बीच की दरार में ऊँगली करता रहा तो वो मुझको बोली- यही करते रहोगे या कुछ और भी करोगे?

अब मुझको कुछ करना था ताकि यह औरत मुझसे चुदने को तैयार हो जाये। सो मैंने उनकी पैंटी उतार दी और अपना मुँह उनकी दरार के बीच ले जाकर जीभ से उनकी गांड चाटने लगा और वो अपने मुँह से अजीब सी आवाजें निकालने लगी जो मुझको बहुत अच्छी लगी। अब मैं भी गर्म हो गया था और मेरा लण्ड पैंट में नहीं समा रहा था सो मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए और वहीं खड़ा हो कर मुठ मारने लगा।

तब भाभी ने मुझको और मेरे लौड़े को देखा और कहने लगी- यह मेरा काम है ! तुम अपना काम करो !

इतना कह कर उन्होंने मेरा लौड़ा अपने मुलायम हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से उसको सहलाने लगी।

उनके सहलाने का अंदाज इतना अच्छा था कि मुझको लगा कि मैं तुरन्त झड़ जाऊँगा।

अब भाभी करवट लेकर पीठ के बल लेट गई। उनकी गुलाबी, बिना बालों की चूत मेरे सामने थी और उनका आंचल भी हट चुका था जिसने आज तक उनके मोटे मोटे स्तनों को मेरी नजरों से छुपाये रखा था। आज मेरी एक और इच्छा पूरी होने वाली थी सो मैंने बिना देर किये अपना मुँह उनकी चूत पर रख दिया और उसको चाटने लगा। मेरे दोनों हाथ उनके वक्ष को दबा रहे थे और वो अपने हाथों से मेरे सर को सहला रही थी।

थोड़ी देर बाद मैं थक कर लेट गया तो वो मेरे ऊपर आई और मेरे पूरे शरीर को चूमने लगी और धीरे धीर उनका मुँह मेरे लंड पर चला गया। उन्होंने मेरे लण्ड को बड़े प्यार से चूमा और मेरा लंड लॉलीपोप की तरह उनके मुँह में उतर गया। वो बहुत देर तक मेरे लंड को चूसती रही। इस वक़्त मुझको उनके स्तनों के जो दर्शन हो रहे थे, क्या बताऊ आपको ! उनके दोनों चूचे बहुत जोर से हिल रहे थे।

थोड़ी देर बाद मैंने उनको बाहों में ले लिया और उनके होठों को चूमने लगा और एक हाथ से उनकी साड़ी उतारने लगा। जल्दी ही भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई। क्या बला की सुंदर लग रही थी वो औरत उस वक़्त !

मैंने उनके स्तन हाथ में ले कर खूब दबाये और जल्द ही उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थी और अब मेरा अपने ऊपर कोई वश नहीं था। शायद वो समझ गई थी, सो उन्होंने अपनी टाँगे चौड़ी कर मुझको अपना लंड डालने का निमंत्रण दे दिया। मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत पर रखा और अपना वजन उन पर डाल दिया। मेरा लंड उनकी चूत में उतर गया। फिर मैंने धीरे धीरे धक्का मारना शुरु किया। वो भी अपने नितम्ब उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। भाभी के साथ सेक्स करके मुझको ऐसा लग रहा था कि मानो मैं स्वर्ग में हूँ। थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए तो उन्होंने मेरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया।

अब बारी उनकी गांड मारने की थी, सो मैंने उनको घोड़ी बनाया और जल्दी से क्रीम लगा कर अपना लंड उनके छेद में डाल दिया। यह काम शायद वो पहली बार करवा रही थी इसलिए हम दोनों को बहुत दर्द हुआ। पर कहते हैं ना कि कुछ पाने के लिए कुछ सहन भी करना पड़ता है।

थोड़ी देर के दर्द के बाद हम लोगों को मज़ा आने लगा। अब मेरा लंड उनकी गांड में और हाथ उनके स्तनों पर थे। थोड़ी देर के बाद मैं झड़ गया और मैंने अपना लावा उनकी गांड में निकाल दिया। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए। उस दिन हमने दो बार और सेक्स किया और हर बार अलग अलग अवस्था में !

फिर तो यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। आज हम वहाँ नहीं रहते पर जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाता हूँ और हम एक दूसरे की दुनिया रंगीन बनाते हैं। अब उनकी बेटियाँ भी जवान हो गई हैं।

आगे क्या होता है ! मैं दुआ करुँगा कि आपको भी ऐसी ही कोई पड़ोसी, भाभी मिले या हो सकता है आपके पड़ोस में ऐसी भाभी हो जिस पर आपकी नज़र नहीं गई हो !
 
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