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लाइफ हो तो ऐसी complete

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धन्यवाद दोस्तो अपडेट दे दिया है आंनद ले लीजिये
 
अपडेट 102

रजत अपनी कार लेकर घर की तरफ निकाल जाता हे घर पहुच कर देखता हे माँ और मामा भी आ चुके होते हे सब बैठ कर बातें कर रहे होते हे .

रेखा -दीदी अब तो माया की उम्र शादी की हो गई हे कोई लड़का देखा हे की नहि .

रजत की माँ-“अभी कहा उम्र हुई हे मेरी बच्ची की”.

रेखा –“दीदी कहा बच्ची हे आप से भी लम्बी हो गई हे” ..

मीना-“ओह भाभी आप फ़िक्र मत करो माया जब बोलेगी शादी कर दूंगी”.

रजत-“सही कहा माँ दीदी के लिए में लड़का ढूंढूंगा डोन्ट वरि” .

रजत पूछता हे काया कहा हे .

माया बोलती हे “ऊपर पता नहि क्यों नाराज हे, बैठी हुई हे अपने रूम में” .

रजत बोलता हे “ओके में जा कर देख लेता हूँ उसे क्या हुआ”

रजत काया के रूम का डोर खोलता हे ..सामने का नजारा देख के दंग रह जाता हे .काया बिलकुल नंगी हो कर आइने के सामने खडी हे .

उसकी गांड देख के रजत का लंड खड़ा हो जाता हे .

रजत डोर बंद करता हे और पीछे से काया की कमर पकड़ लेता हे.

काया चौक कर पलट जाती हे .

काया की ऑंखे एक दम नम थी रजत ने उसकी आँखों में देखा तो उसका दिल पसीज गया .

उसने काया की चुचिओ को देखा तो उसे खुद पर बहुत घुस्सा आया .

रजत काया को बेड पर बैठाता हे और उसके घुटनों के पास बैठ कर बोलता हे काया माफ् कर दे प्लीज् मुझे नहि पता था तुझे सच में दर्द हो रहा हे .

काया कुछ नहि बोलती बस चुप चाप अपनी नम आँखों से रजत को देखति हे .

रजत से काया की ख़ामोशी बर्दाश्त नहि होती और पास पड़े कांच के फूलदान पर अपना हाथ जोर से मारता हे फूलदान टुकडे टुकडे हो जाता हे .

ये देख के काया चीख उठती हे रजत का हाथ लहू लुहान हो जाता हे .

काया रजत के हाथ को अपनी गोद में रख कर खून साफ करती हे

रजत के दर्द के आगे काया अपना दर्द भूल जाती हे .

रजत अपना हाथ खीचने लगता हे काया बोलती हे “चुप चाप बैठे रहो वरना दो लगाउंगी तुमको आज” .

रजत काया को गले लगा लेता हे .

सिने से लगते ही काया को दर्द की तेज़ लहर उठती हे वो काप जाती हे .

तभी रजत को मेहसुस होता हे की काया रो रही हे वो तुरंत काया से अलग हो जाता हे .

रजत काया को लिटा देता हे और बोलता हे रुको में तुम्हारी तेल से मालिश कर देता हूँ दर्द कम हो जायेगा .

काया हा में सर हिला देती हे रजत का हाथ जख्मी था वो बाहर नहि जा सकता था सब घर वाले परेशान हो जाते .

रजत अपनी माँ को फोन लगाता हे और बोलता हे माँ में काया के साथ रूम में हूँ क्या आप थोड़ा गर्म तेल लाओगी .

मीना पूछती हे “क्या हुआ कुछ प्रॉब्लम हे”? .

रजत सारी बात बता देता हे .

मीना बोलती हे “वहि रुको में आती हूँ लेकर” .

ठोड़ी देर बाद मीना तेल लेकर ऊपर पहुचती हे रजत डोर पर खड़ा वेट कर रहा होता हे .

मीना से तेल लेकर रजत अपनी माँ को निचे सब को ऊपर आने से रोकने को बोलता हे मीना चलि जाती हे .

रजत तेल लेकर काया के पास पहुचता हे.

रजत काया को बोलता हे “काया ऐसा कर तू पहले बैक से मालिश करवा फिर आगे से ऐसा करने से तुझे ज्यादा आराम मिलेगा” .

काया अपनी चुचिओ को एक पिलो का सहारा लेकर दबा लेती हे और लेट जाती हे रजत तेल काया की पीठ पर ड़ालता हे .

तेल थोड़ा गरम था पर इतना भी नहि की की जल जाये .

रजत अपने दोनों हाथो से तेल को फैला कर पीठ पर लगाता हे .

काया के कंधों को पकड़ कर अच्छे से दबा दबा के मालिश करता हे .

कभी कन्धो से गांड तक तो कभी गांड से कन्धो तक तेल लेकर जाता हे .

काया को सच में राहत मिलने लगती हे .

थोड़ी देर बाद रजत काया की गांड पर तेल लगाता हे दोनों पहाडो को पकड़ कर जोर जोर से दबाता हे गांड के छेद में तेल ड़ालता हे उंगली से .

जांघो को फैला कर बुर पर भी तेल लगाता हे .

कभी बुर में उंगली करता हे तो कभी गांड में .

काया दर्द को भूल कर मस्ती में सरबोर होने लगती हे उसकी उतेजना बढ़ने लगती हे .

रजत गांड और बुर पर अच्छे से तेल लगाता हे .

थोड़ी देर गांड बुर को तेल लगाने के बाद रजत काया की एक टांग अपने कंधे पर रख लेता हे और तेल लेकर जांघो को अच्छे से मालिश करने लगता हे काया मस्त हो जाती हे जहा थोड़ी देर पहले दर्द से ऑंखे नम थी वहि अब चुदाई की हवस की वजह से उसकी ऑंखे सुर्ख़ लाल हो चुकी थी .

रजत काया की झांघो को अच्छे से मालिश करता हे .

रजत का भी बुरा हाल था .

काया रजत को बोलती हे भाई तुम भी कपडे उतार दो तुम्हारे कपडे गंदे हो रहे हे .

रजत काया की बात सुन कर बोलता हे

“ दे तेरे दर्द के आगे न मेरे कपडे क़ीमती हे न में” .

काया रजत से जिद करती हे रजत मान जाता हे और कपडे उतार देता हे .

रजत अपने हाथ को देखता हे जो काया के दर्द की वजह से भूल चुका था की चोट खाया हुआ हे .

रजत का हाथ कई जगह से कट चुका था पर तेल की वजह से उन जख्मो में अब खून नहि निकल रहा था रजत नंगा हो कर काया के सामने खड़ा हो जाता हे .

ओर जांघो को फैला कर अपना काम करने लगता हे .

काया मालिश से राहत महसुस करती हे .

रजत काया की पीछे से सारे बदन पर मालिश करता हे पैरो को उँगलियों से लेकर कन्धो तक बार बार तेल लगाता हे .

रजत काया को बोलता हे अब तू सीधी हो जा तेरी सामने से भी मसाज कर दू .

काया सीधी हो जाती हे रजत काया की आँखों में चुदाई की उतेजना भांप लेता हे और काया की जांघो को फैला कर उसकी टांगो के बिच आ जाता हे .

काया समझ जाती हे क्या होने वाला हे .

रजत का लंड सीधा काया की बुर पर धावा बोलता हे .

काया की बुर के दरवाजे पर दस्तक देणे लगता हे ..रजत तेल काया की नाभि पर गिराने लगता हे और तेल को फैला कर धीरे धीरे चुचिओ की तरफ बढ़ता है

काया ऑंखे बंद कर लेती हे मस्ती में रजत हलके हाथ से चुचिओ पर मालिश करता हे .

काया के जख्म तेल लगने से साफ नजर आने लगते हे .

रजत बोलता हे “काया दर्द तो नहि”

काया कुछ नहि बोलती बस लेटी रहती हे और खुद रजत के लंड पर अपनी बुर रगड देती हे .

रजत चुचिओ को मुठी में पकड़ कर तेल लगाता हे .

काया अपनी कमर को आगे धक्का मारती हे रजत का लंड दरवाजा तोड़ता हुआ अंदर घूसने लगता हे .

 
अपडेट 103

रजत भी एक जोर दार धक्का मारता हे लंड काया की बच्चेदानी से जा टकराता हे

और काया उठ कर रजत को गले लगा लेती हे रजत भी एक और धक्का मारता हे

और काया रजत को जोर से पकड लेती हे

रजत भी काया को जोर से पकड़ लेता हे

दोनों ऐसे चिपक जाते हे जैसे नाग नागिन एक दूसरे से चिपक जाते हे

दोनों एक दूसरे को नहि छोड़ते पर दोनों एक दूसरे को धक्के मारते रह्ते हे.

थोड़ी देर बाद रजत काया को अलग करता हे उसकी चूचि को मुह में लेकर चोदता रहता हे काया भी उछल उछल कर रजत का साथ देती हे.

दोनो चरम आनंद में डूब जाते हे .

काया रजत के लंड पर कुदती रहती हे उसकी चूचिया ऊपर निचे होती रहती हे .

रजत भी जोर जोर से धक्के मारते रहता हे .

काया का पाणी निकलने लगता हे वो रजत को पकड़ कर लेट जाती हे रजत समझ जाता हे की काया झड चुकी हे .

रजत अपना लंड निकाल देता हे काया बोलती हे भाई गांड मार लो .

रजत बोलता हे मेरी फ़िक्र मत कर घर में और भी मेरी चाहने वालिया है तू आराम कर में दवा भी भिजवा दूंगा खाने के टाइम .

रजत अपने हाथ पर रुमाल बाँध कर निचे आ जाता हे.

रेखा पूछती हे “काया को क्या हुआ”?

रजत बोलता हे “कुछ नहि मामि बस थकन हे उसे आराम करेगी तो ठीक हो जायेगी” .

रजत माया को इशारा करता हे माया बोलती हे

“माँ मुझे एक काम याद आ गया भाई तुम बाहर चल रहे हो क्या”? रजत बोलता हे है “चल तो रहा हूँ चलो दी साथ ही चलते हे”.

माया और रजत दोनों बाहर चले जाते हे .बाहर आ कर माया पूछती हे “क्या हुआ क्यों बुलाये हो बाहर”...

रजत बोलता हे दी

“मैंने काया की चुचिओ को जोर से दबा दिया था वह लाल हो गई थी अभी मालिश करके आ रहा हूँ”

रजत आगे बोलता माया बोलती हे

“चुदाई भी की होगी”.

रजत बोलता है दी चोदा पर में प्यासा हूँ इस लिए तुमको याद किया. माया बोलती हे “तो चलो पार्लर वहि पर कर लो जो करना हे,आज वेसे भी कोई नहि आया हे छुट्टी हे”.

रजत कार निकालता हे माया बैठ जाती हे दोनों कुछ ही देर में पार्लर पहुच जाते हे .

पार्लर के बाहर एक एक्टिवा खड़ी थी रजत पूछता हे दी ये एक्टिवा किसकी हे .माया बोलती हे पता नहि .

आज तो छुट्टी हे कोण आया हुआ हे अंदर .रजत और माया दोनों अपनी चाभी से दूर खोलते हे और अंदर घुस जाते हे .

अंदर जाते ही माया देखति हे उसकी सहेली बेड पर लेती हुई हे वो भी आधी नंगी जिसे देख कर रजत बोलता हे

“दी माल तो अच्छा हे मिलेगा क्या”? .

माया बोलती हे “मेरे भाई को न मिले ऐसा कोई माल नहि आओ अभी दिलवाती है”.

माया की सहेली बैठ जाती हे माया बोलती हे “तू यहाँ कब आई स्नेहा” स्नेहा बोलती हे “घर में सब परेशान कर रहे थे तो यही आ कर सो गई” .

स्नेहा बोलती हे “ये कोण”? माया कुछ बोलती उस से पहले रजत बोलता है “में इनका बॉयफ्रेंड हूँ” .

स्नेहा चौक जाती हे और बोलती हे

“कभी माया ने बताया नहि उसका कोई बॉयफ्रेंड हे वो भी इतना हैंडसम” .

रजत बोलता हे “थैंक्स तारीफ के लिए वेसे आप को कोण परेशान कर रहा था और क्यु”

स्नेहा बोलती हे “मेरे माँ बाप तो हे नहि अब जवान हो गई हूँ तो मेरे चाचा लोग मेरे साथ मस्ती करना चाहते हे”.

मे ये नहि कहती वो बुरे हे पर में पहली चुदाई किसी दमदार मर्द के साथ करवाना चाहती हूँ .

बहुत बॉयफ्रेंड बनाये मुठ उनकी मारी तो १ या २ मिनट ही टिके इस लिए उनसे चुदवाया नहि”.

माया बोलती हे

“मेरा बॉयफ्रेंड तो बहुत दमदार हे अभी एक को चोद कर आया, उसका पाणी निकल गया तो उसे छोड़ दिया, और मेरे पास भागता हुआ आ गया”.

हम लोग यहाँ चुदाई करने आते हे बस.

स्नेहा बोलती हे “तो करो में भी देखु पट्ठे में कितना दम हे जो एक चुत से मन नहि भरा तो दूसरी मारने आ गया” .

माया अपने कपड़े उतारने लगती हे .

रजत भी अपने कपड़े उतार देता है .

रजत का 9 इंच का लंड देख के स्नेहा के मुह में पाणी आ जाता हे .

माया रजत के लंड को पकड़ के चुस्ने लगती हे .

रजत माया के बालो को पकड़ कर मुह चोदने लगता हे तक़रीबन ५ मिनट बाद माया रजत को रुकने को बोलती हे.

स्नेहा रजत का दम देख चुकी थी अब उसका मन भी चुदवाने का हो रहा था पर वो अभी आगे देखना चाहती थी .

रजत माया को उठा कर बेड पर लिटा देता हे और उसकी चुचिओ को पकड़ कर दबाने लगता हे .

माया की निप्पल को दातो में दबा कर खींचता हे .

माया दर्द से सिसकिया लेने लगती हे .

रजत माया के सामने खड़ा हो जाता हे माया को पकड़ का पलट देता हे उसकी कमर पकड़ के ऊपर उसकी गांड उठा देता हे और चाटने लगता हे स्नेहा ने ब्लू फिल्म में तो ये सब देखा था पर रियल में देखने का अलग ही मज़ा उसे आ रहा था वो बैठी बैठी अपनी चुचिओ को दबाती और चुत को मसलि रहती हे .

रजत माया की चुत और गांड दोनों चाटता रहता हे .

माया के फांको को फैला कर जीभ बुर में पेलने लगता हे .

माया उतेजना और मस्ती में आहे भरती हे सिसकिया लेती हे .

रजत बेड पर चढ़ जाता हे और माया की गांड फैला कर अपना लंड घूसा देता हे.

माया की चीख निकल जाती हे एक ही बार में पूरा लंड घूसा देता हे माया बेड पर गिर जाती हे ..

रजत का लंड बाहर निकल जाता हे .

रजत माया के ऊपर लेट कर गांड में लंड घुसाने लगता हे.

माया की गांड में लंड घुस जाता हे .

रजत माया को पकड़ कर बैठता हे गांड में लंड घूसा हुआ हे रजत माया को लेकर खड़ा हो जाता हे माया की गांड को खड़े खड़े मारने लगता हे माया की चुचियो को पकड़ कर मसलता हे.

तभी स्नेहा उठती हे और माया की बुर चुस्ने लगती हे .

 
अपडेट 104

रजत जोर जोर से धक्के मारता हे माया की बुर के पाणी से स्नेहा का चहेरा भिग जाता हे .

रजत लंड बाहर निकालता हे और स्नेहा के सामने कर देता हे स्नेहा भी बिना कोई सवाल किये लंड मुह में ले लेती हे .

रजत का लंड मोटा और लम्बा था उसने कभी मुह में लिया भी नहि था कुछ ही देर में स्नेहा लंड मुह से बाहर निकाल देती हे .

रजत माया को सीधे बेड पर लिटाता हे और उसकी बुर में लंड घूसा देता हे .

स्नेहा माया के मुह के ऊपर बैठ जाती हे .

माया भी उसकी बुर चूसने चाटने लगती हे .

रजत के धक्कों को माया भी संभल नहि पाती हे .

दर्द और सिसकियो से उसका बुरा हाल होने लगता हे रजत के पंजो से चूचिया भी दर्द करने लगती हे रजत जांघो को पकड़ कर धक्के पे धक्का मारता रहता हे .

उधर बुर चटवाने से स्नेहा का पाणी निकल जाता हे और बेड पर बैठ जाती हे रजत माया की लिप्स को चूसता हुआ चोदता रहता हे .

माया की चुदाई को अब एक घंटा होने वाला था इस बिच माया चार बार झड चुकी थी .रजत झड़ने का नाम नहि ले रहा था .

कुछ देर ऐसे ही पेला पेली करने के बाद रजत भी झड़ने वाला हो जाता हे .

जैसे ही झड़ने वाला होता हे माया और स्नेहा के बालो से पकड़ कर उनके चहेरे मुह पर पिचारिया मारने लगता हे दोनों भीग जाती हे रजत के वीर्य से .

रजत झड़ता रहता हे दोनों बारी बारी लंड चुस्ती हे और रजत बेड पर लेट जाता हे माया और स्नेहा एक दूसरे के चहेरे से रजत का वीर्य चाट कर साफ करने लगती हे .

स्नेहा बोलती हे "सच में तेरा बॉयफ्रेंड बहुत दमदार हे" .

माया बोलती हे "ये मेरा बॉयफ्रेंड जरूर हे पर ये मेरा भाई और फ्रेंड हे" .

स्नेहा सुन कर चौक जाती हे .

माया बोलती हे "हम दोनों बहने अपने भाई से चुद्वाती हे, क्यों की हम इससे प्यार करती हे, और वो भी हमे प्यार करता हे" .

स्नेहा बोलती हे "पर यार वो तेरा भाई हे" .

माया बोलती हे "तो क्या हुआ एक दमदार मर्द भी हे, नहि तो तेरी तरह प्यासी मर जाती में".

स्नेहा बोलती हे "तेरी माँ को पता चल गया तो" .

माया बोलती हे "डार्लिंग मेरे भाई ने माँ को भी पटा रखा हे कभी कभी उनको भी चोद देता हे, एक नंबर का ठरकी हे, जिस पर दिल आता हे चोद देता हे,

अभी तक न जाने कितनी कुवारी चुत का उध्घाटन कर चुका हे, अपने लंड से,

जो लड़की एक बार चुद्वाती हे वो तो इसकी रखेल भी बनने को तैयार हो जाती हे" .

स्नेहा बोलती हे "मुझे भी चुदवा दे अपने भाई से" .

माया बोलती हे "डेट तू बता चुदवा में दूंगी, अभी तो तू मेरे भाई का लंड देखि हे, उसकी चुदाई देखेंगी तो मेरे घर में आ कर चुदवायेगी मेरे भाई से" .

स्नेहा बोलती हे "वो तो में देख ही ली कितना दमदार हे तेरा भाई" .

रजत लेटा लेटा दोनों की बाते सुनता हे रजत स्नेहा के पास जा कर उसकी चुचिओ को दबाते हुए बोलता हे "इतने खूबसुरत बदन के सेवा का मोका कभी हमे भी दो" .

स्नेहा बोलती हे "ये खुबसुरती आप के लिए ही हे, जब बोलो सेवा का मोका दे दू"

रजत बोलता हे "अभी तो दो की चुदाई कर चुका हूँ, और अगर तुम्हारी भी करने लगा तो तुम्हारा बुरा हाल हो जायेगा, मोका देख कर में दी को बोल दूंगा वो तुमको बुला लेगी फिर ऐसी चुदाई करूँगा की जिंदगी भर याद करोगी" .

तिनो कपडे पहन लेते हे और बाते करने लगते है

रजत और माया बोलते है कि "स्नेहा तुम दो दिन बाद कॉल करना तब तुम्हे भी खुश कर देंगे" .

स्नेहा थैंक्स यु बोलती है .

ओर तीनो अपने अपने घर की तरफ निकल पड़ते हे रस्ते में रजत मैडीकल स्टोर से पेनकिलर लेता हे ..

माया बोलती हे "भाई थोड़ा घुमा भी दिया करो, मुझे भी अपनी कार में क्यों घर लेकर जा रहे हो" .

रजत कार को घुमा लेता हे .

रास्ते में उसे काजल के घर के थोड़ी दूर कुछ पुलिस वाले नजर आते हे .

रजत की कार को देख कर वो लोग अपना मुह घुमा लेते हे .रजत माया को बोलता हे "ये पुलिस वाले मुझे देख कर अपना मुह क्यों घुमा लिए" .

माया बोलती हे "भाई ऐसी कोई बात नहि" .

तभी रजत को काजल के घर के अंदर से एक इंस्पेक्टर निकालता नजर आता हे .

रजत अपनी कार उसके सामने से निकाल लेता हे.

रजत सोचता हे कुछ तो गड़बड़ घोटाला हो रहा हे काजल के घर में पास और अंदर पुलिस पता लगाना होगा .

रजत राहुल को फ़ोन लगता हे.

राहुल पूछता हे “क्या बात हे भाई बड़े दिनों बाद याद किया” ..

रजत बोलता हे “राहुल सर ये काजल को जानते हो”.

राहुल बोलता हे “कोण काजल भाई में किसी काजल को नहि जानता” .

रजत बोलता हे “मेरे कॉलेज में नई आई हे और टीचर हे शायद किसी पुलिस वाले के साथ चक्कर हे”.

राहुल बोलता हे “भाई फ़िक्र किस बातकी हे वो बताओ”.

रजत बोलता हे “कुछ नहि भाई ऐसे ही पूछा देखने में तो शरीफ लगती हे,.छोड़ो आप अपना काम करो बाई” बोल कर रजत फ़ोन काट देता हे..

माया पूछती हे “भाई क्यों टेंशन में हो”? .

रजत बोलता हे “शायद ये कोई पुलिस की एजेंट हे”.

माया बोलती हे “ऐसी कोई बात न हो अगर हो तो भी क्या फर्क पडता हे हमने कोण सा जुर्म किया हे” .

रजत बोलता हे “पुलिस वालो को शक हे की हम लोगो ने उन लड़को को मारा हे” .

माया बोलती हे “पुलिस वाले कभी साबित नहि कर पाएंगे चाहे सीबीआई हमारे पीछे लगा दे” .

माया रजत की टेंशन कम करने के लिए उसे कॉफी शॉप ले जाती हे .

दोनो शॉप में जाते हे .

माया दो कॉफी मंगाती हे तभी रानी आ जाती है और बोलती हे

"दो नहि तीन मंगवाओ" .

रजत बोलता हे “तुम यहाँ कैसे और रिद्धि कैसी हे”? .

रानी बोलती हे "भाभी ठीक हे बस तुमको याद कर रही थी,

वो अब इस सिटी में रहेंगी दो दिन बाद वो शिफ़्ट हो जाएँगी" .

रजत बोलता हे “ये तो अच्छी बात हे”

रानी बताती हे “और एक गुड न्यूज़ हे तुम्हारे लिए सिद्धि भी स्टडी के लिए यहाँ आ रही हे” ..

माया पूछती हे ये रिद्धि सिद्धि कोण हे”? .

रजत बताता हे “वो मौसी की ननद हे उनकी ही शादी में शिमला गया था”.

माया रजत के कान में बोलती हे “इन दोनों बहेनो का फ़ाटक भी तुमने ही खोला था क्या”?.

रजत स्माइल कर देता हे.

रानी रजत को बोलती हे “आज कल तो बिज़ी रह्ते हो कभी मिल भी लिया करो में भी इसे शहर में रहती हु”.

रजत बोलता हे “क्या करू इतनी हसीनायें हे किस किस को मिलु” .

रजत का मतलब रानी और माया दोनों समझ जाती हे .

रजत दोनों की झांघो सहला देता हे तबी वेटर कॉफी लेकर आ जाता हे .

तीनो कॉफी पिते हे और बाते करते हे .

रजत रानी से पूछता हे “कोई नया बॉयफ्रेंड बनाया की नहि”? .

रनी बोलती हे “अब बॉयफ्रेंड की क्या जरुरत हे तुम जैसा दोस्त जो मिल गया इस शहर में” .

रजत बोलता हे “सोच लो कही में पीछे पड़ गया तो क्या करोगी रानी बोलती हे तुम एक अच्छे इंसान और बहुत अच्छे दोस्त हो, पीछे पड़ भी गए तो मुझे कोई अतराज नहि”.

तीनो कॉफी ख़तम करते हे रानी बोलती हे

“ओके मुझे थोड़ा काम हे बाद में मिलेंगे” रानी चलि जाती हे जाते जाते रजत के गालो पर किस कर जाती हे .

माया बोलती है ”भाई कितनी गर्ल्स फसा रखी हे तुमने तुमको तो बुर और गांड की कमी नहि हे”

रजत बोलता हे “माय स्वीट सीस बुर और गांड बहुत मिल जाते हे, पर जो प्यार तुम तीनो से मिलता हे, वो नहि मिलने वाला किसी और से”

 
दोस्तो अब तक आप मेरी कहानियां सलील नाम से पढ़ते रहे थे पर मेरी रिकवेस्ट पर एडमिन जी ने मेरा रियल नाम जो सतीश है बदल दीया है तो दोस्तो आगे सतीश नाम से ही कहानियां पोस्ट करूँगा धन्यवाद आशा करता हु आपका प्यार मिलता रहेगा आपका अपना

........सतीश

 
दोस्तो शायद यह कहानी आपको बोर कर रही है जो इसको मिलने वाले कम विवज से पता चल रहा है तो दोस्तो इस कहानी को अगर आप चाहे तो यही रोक देता हूं और दूसरी नई कहानी स्टार्ट करता हु जैसा आप चाहे अपने अनमोल कमेन्ट और सुझाव दे ताकि कहानी को आगे शुरू रखु या बंद करू आपका अपना

.....सतीश

 
अपडेट 105

डिनर टाइम पर रजत और माया सारा शहर घूम कर घर पहुँचते हे .सब डिनर टेबल पर बैठे बाते कर रहे होते है .

काया भी निचे आ चुकी थी रजत और माया सब को ज्वाइन करते हे .

रेखा और मीना सब के लिए खाना परोसती है हे .

सब खाना खाते हे .

रजत को रेखा बार बार अपनी चुचिअ दीखाती हे .

खना खाने के बाद रेखा बोलती हे

“दीदी मुझे तो रूम में नींद नहि आती आज में छत पर सोउंगी” .

रेखा का पति बोलता हे

“जहा सोना हे सो जाओ में तो चला अपने रूम में सोने” .

मीना रेखा को बोलती हे “स्टोर रूम में बिस्तर हे ले लेना भाभी” .

रजत रेखा की आँखों में पढ़ने की कोशिश करता हे आखिर चाहती क्या हे .

रजत काया को दवा देता हे माया काया अपने रूम में चलि जाती हे .

रेखा ऊपर जाते जाते रजत को ऊपर आने का इशारा कर जाती हे. मीना भी बोल कर चलि जाती हे आज बहुत थक गई हे .

रजत अपने रूम में चला जाता हे रात को १२ बजे रजत उठता हे और सीधा छत पर पहुचता हे वहा जीरो वॉट का बल्ब जाल रहा होता हे और रेखा लेटी हुई होती हे .

रजत उसके पास पहुचता हे रेखा ऑंखे बंद किये लेटी रहती हे .

उसकी बड़ी बड़ी चूचिया आधी और कलेव साफ नजर आते हे .

रजत रेखा के बिस्तर पर लेट जाता हे धीरे धीरे साड़ी हटाने लगता हे रेखा लेटी रहती हे रजत रेखा की नाभि को चूमता हे .ओर

रजत के चुमते ही रेखा की ऑंखे बंद जो थी घुमने लगती हे .

रजत रेखा की नाभि को अपनी जीभ से सहलाता हे .

रेखा की कमर को पकड़ कर दबाता हे .

रेखा ऑंखे बंद कर के लेटी रहती हे उसकी सास रुक जाती हे धड़कन तेज़ हो जाती हे..रजत अपना हाथ रेखा की जांघो पर फेरता हे .

रेखा लम्बी लम्बी सांसे लेती हे .

रजत रेखा की साड़ी को घुटनो के ऊपर उठाने लगता हे .

रेखा चुप चाप रजत का साथ देती हे .

रजत रेखा की साड़ी ऊपर उठा के झांघो को चूमता हे .

रेखा की बुर गीली होना शुरू जाती हे.

रजत रेखा के बगल में लेट जाता हे .

ओर रेखा के चेहरे को सहला कर रेखा को जगाता हे .

पर रेखा शर्म वश ऑंखे नहि खोलती .

रजत रेखा के माथे को चूमता हे .

रेखा की सांसे तेज़ होती जाती हे .रजत आँखों को चूमता हे .

रेखा अपने सुर्ख होठ दबाने लगती हे .

रजत रेखा के होठो पर होठ रख देता हे .

रेखा अपने होठ खोल देती हे रजत रेखा के ऊपर के लिप्स को चुमने और चुस्ने लगता हे .

रजत रेखा की आँखों में देखता हे ऑंखे अभी भी बंद थी .

बदन एका एक ऐठने लगता हे .

रजत रेखा का ब्लाऊज के ऊपर से उसके दुध दबाने लगता हे .

उसके कलेव को चूमता हे चाटता हे .

रेखा काफी गरम हो जाती हे और रजत के सर को अपने दुध पर रघड़ने लगती हे .

रजत भी रेखा के दूध को चूमता दबाता रहता हे .

अखिर में कुछ देर चुमने के बाद रजत रेखा के ब्लाउज को खोल देता हे रेखा ऑंखे खोल कर रजत को देखति हे और बोलती हे

“क्या देख रहा हे आ अब इन स्तनों को चुस ले” .

रजत बोलता हे “इन स्तनों में काफी रस भरा हे आज इनका रस निचोड के रहूँगा” .

रेखा की ब्रा के अंदर से उसकी चुचिया बाहर आने को मचल रही थी रजत ब्रा के ऊपर से निकाल के दांतों तले काटता रहता हे रेखा की सिसकिया निकलने लगती हे .

रजत और जोर जोर से चुचिओ को दबाता और चूसता है.रजत का लंड अब लोवर में पड़ा पड़ा दर्द करने लगा था .

रेखा उसके लोअर में तने लंड को देख कर बोलती हे

“रजत इसको बाहर निकाल दे वरना बेचारा तड़प तड़प के मर जायेगा” .

रजत बोलता हे “फ़िक्र मत करो इसे बाहर निकालूँगा पर एक शर्त पर आप इसे प्यार करोगी” .

रेखा हा में सर हिला देती हे रजत लोअर उतार देता हे उसका लंड उछलता हुआ रेखा के सामने आ जाता हे रेखा बोलती हे

“तू बाहर से तो बच्चा दीखता हे और तेरा ये शैतान जैसा हे” .

रजत बोलता हे

“अभी देखा क्या हे ये शैतान कई औरतो को शांत करता हे आज आप को शांत करेगा” रजत रेखा के मुह के पास लंड पकड़के बोलता हे

“अब इसे प्यार करो”.

रेखा पहले तो हाथो से सहलाती है फिर होठो से चूमती हे जीभ से चाटती हे .

रजत भी मजा लेता हे लंड चुसाई का .

रजत का लंड काफी बड़ा और मोटा था रेखा के पति से .

रजत रेखा के लिप्स पर लंड रगडने लगता हे रेखा समझ जाती हे रजत क्या चाहता हे और रेखा अपना धीरे से मुह खोलति हे और रजत का लंड लोलीपोप की तरह चुस्ने लगती हे रजत खड़ा खड़ा रेख के मुह में धक्के मारता हे .

रेखा भी पुरे जोश से लंड चुस्ती हुई कहती हे “बड़े सालो बाद मुझे आज अच्छा लग रहा हे”

रजत पूछता हे “क्यु?.

रेखा बोलती हे “क्यों की तुम्हारे मामा शुरू शुरू में तो बहुत मज़े करवाते आये मेरे जब में नई नई घर में आई थी पर”? .

रजत बोलता हे “पर क्या? .

रेखा बोलती हे “पर जैसे जैसे वक़्त बिता उनको फुर्सत नहि मिली, तुम्हारे नाना नानी के मरने के बाद तो, वो साल में दो चार बार ही मुझे चोदते थे”.

अपनी मामि के मुह से चोदते वर्ड सुन कर रजत की हसी छूट जाती हे .

रेखा लंड चुसना छोड़ कर पूछती हे

“क्यों क्या हुआ जो हसि आ रही हे”?.

रजत बोलता हे.

“आप ने चोदते वर्ड बोला इस लिए”.

रेखा फिर से लंड चुस्ती हे कभी रजत की गोलिओ को मुह में भर कर चुस्ती हे तो कभी लंड को चुस्ती हे .

रजत रेखा को बोलता हे

“बस करो वरना मुह में झड जाउँगा”.

रेखा बोलती हे “तो झड जाओ”.

रजत बोलता हे “पर में कुछ और चाहता हूँ” .

रेखा पूछती हे “क्या”?.

रजत बोलता हे “में तुमको अपने बच्चे की माँ बनाना चाहता हूँ, ताकि मामु भी खुश रह सके और तुमको भी एक सहारा मिल जायेगा”.

रेखा सुन कर शर्मा जाती हे .

रजत रेखा के मुह से लंड निकाल कर रेखा के सारे कपडे उतार देता हे .

रेखा एक दम नंगी हो जाती हे .

रजत रेखा की बुर देख के चौक जाता हे .

एक दम साफ और छोटी सी .

रजत पूछता हे “आप की बुर इतनी चिकनी और साफ क्यों हे” .

रेखा बोलती हे “मुझे पता था आज तुम आने वाले हो तो सुबह ही साफ की थी, मुझे पता हे मर्दो को साफ सुथरी बुर चोदने में मज़ा आता हे”.

 
अपडेट 106

आपने अबतक पढ़ा किस तरह रजत की मामी रेखा ने इशारे से रजत को छत पर बुलाया और दोनों कामाग्नि में जल रहे बदन को ठंडा कर रहे है

अब आगे-

रजत रेखा की बुर को सहलाता हे टांगों के बिच आ कर उसकी फांको को अलग करता हे.

बुर पूरी गीली हो चुकी थी इस लिए.

बुर के फांको को अलग करते ही लस लसा सा पाणी नजर आता हे दो तीन बुँदे बुर से निकल कर निचे गिरती हे .

रेखा देखना चाहती थी रजत क्या करता हे. रजत रेखाकी बुर के बीचो बिच अपनी जीभ फेरता हे और लसलसा पाणी को चाटता हे .

रेखा की बुर जैसे ही रजत चाटता हे रेखा की धडकने बढ्ने लगती हे सांसे और तेज़ हो जाती हे क्यों की आज तक किसी मर्द ने उसकी बुर को नहि चाटा था .

रजत रेखा की बुर चुस चुस कर साफ करता हे .

रेखा भी रजत के सर को बुर पर दबाती हे .

रजत रेखा की झांघो का वजन अपने कन्धो पर उठा कर बुर चूसता रहता हे

और साथ में रेखा की बड़ी चुचिओ को दबाता रहता हे. रेखा से सबर नहि होता .

वो रजत को बोलती हे

“अब मत तड़पाओ बहुत दिनों की प्यास हे बुझा दो” .

रजत रेखा की बुर चाटना छोड़ देता हे और रेखा की जांघो को फैला कर अपना लंड उस पर रगडता हे .

रेखा अपने मुह में अपनी साड़ी डाल लेती हे ..

रजत रेखा से पूछता हे

“साड़ी क्यों मुह में डाली तुम कोण सी कुवारी हो जो फस्ट बार चोद रहा हु”..

रेखा बोलती हे

“देखते जाओ खुद समझ जाओगे” .

रजत अपने लंड पर थुक लगाता हे और फिर रेखा की बुर पर.

रेखा साड़ी मुँह में दाल लेती हे .

रजत लंड बुर पर रख के धक्का मारता हे पर लंड बुर में न घुस कर साइड में फ़िसल जाता हे .

रजत चौक जाता हे की इतनी बार चूदी बुर में लंड घूसा क्यों नहि .

रेखा बोलती हे “पीछले १० साल में तुम्हारे मामु ने एक बार भी मुझे चोदा नहि और में बाहर के मर्दो पर भरोसा नहि कर सकती थी” .

रजत फिर से ट्राय करता हे बुर पर थुक लगाता हे और लंड को बुर पर रख के जोर से धक्का मारता हे .

रेखा की चीख निकाल जाती हे एक तो रेखा के पति का लंड रजत के लंड से आधा मोटा था और रेखा इतने साल से चूदी भी नहि थी लंड घुसते हि उसे तेज़ दर्द होता हे .

रजत बुर में लंड घुसाता चला जाता हे .

अभी भी रेखा की बुर में आधा लंड घुसा था .

रेखा की आँखों से आँसु निकल जाते हे .

रजत रेखा के ऊपर लेट जाता हे और साडी हटा के लिप्स चुस्ने लगता हे दोनों हाथों से रेखाकी चुचिओ को दबाता रहता हे .

रेखा का दर्द कम हो जाता हे .

रजत दर्द कम होते ही जोर दार तीन चार धक्के मारता हे .

रेखा पस्त हो जाती हे .

बुर में लंड घुस चूका था .

रेखा की बुर फट जाती हे .

बूर से खून निकलने लगता हे.

रजत थोड़ी देर रुक कर चूमता और सहलाता रहता हे .

फिर जब रेखा निचे से धक्के मारने लगती हे तो रजत भी रेखा की बुर पर धक्के मारता हे .

रजत रेखा की चुचिओ को चूमता चूसता और बुर को सहलाता रहता हे .

रेखा का बुरा हाल हो जाता हे वो झड जाती हे जल्दी ही.

रेखा बहुत सालो बाद चुदने के कारण जल्द ही झड जाती हे .

रजत रेखा की बुर में लगातार लंड पेलता रहता हे .

रेखा भी रजत का साथ देती हे .

आधी रात से शुरू हुई चुदाई सुबह तक जारी रहती हे ...

रजत और रेखा कई बार झडते और सारी रात चुदाई में जुटे रह्ते हे .

रजत रेखा को निचोड के रख देता हे .

ओर दोनों थोड़ी देर सो जाते हे चुदाई करके .

सूरज निकलते ही रेखा जग जाती हे अपने पास रजत को लेटा देखती हे . रजत का लंड मुर्झा कर लटक रहा होता हे रेखा की बुर के पाणी के डाग लंड पर साफ नजर आते हे .

रेखा लंड को मुह में डाल कर चुस्ती हे लंड फिर से खड़ा हो जाता हे रजत भी जग जाता हे .

रजत लेटे लेटे रेखा के मुह को चोदने लगता हे .

रेखा मज़े से रजत के धक्कों को सहती हे फिर रजत बैठ जाता हे .

रेखा की चुचिओ को पकड़ कर दबाता रहता हे .

रेखा लंड चुस्ती रहती हे .रजत का पाणी निकलने वाला होता हे .

रजत जोर जोर से धक्के मारता हे और तीन चार पिचकारी गले के अंदर छोड़ देता हे रेखा पि जाती हे .

रजत रेखा को देखता हे रेखा अपने लिप्स को चाटती हे .

रेखा कपडे पहन कर निचे चलि जाती हे .रजत वहि लेटा रहता हे .

थोड़ी देर बाद रजत भी निचे आता हे .

कोइ नहि जगा हुआ था उन दोनों के आलवा .

रजत काया के रूम के डोर को खुला देख कर अंदर चला जाता हे और काया को पकड़ लेता हे .

काया अपने भाई को देख कर बोलती हे

“क्या बात हे आज सुबह सुबह मेरे रूम में कोई देख लेगा तो” .

रजत काया की टीशर्ट उठा कर चुचिओ को चुस्ने लगता है काया भी रजत को मना नहि करती थोड़ी देर बाद रजत काया से लिपट कर सो जाता हे.

काया भी रजत से लिपट कर सोती रहती हे .

 
अपडेट 107

सुबह हो गई थी सब जग गए थे रेखा और मीना नाश्ता बना रही थी .

माया टीवी देख रही थी .रेखा का पति न्यूज़ पेपर पड़ रहा था .

आज माया ने रेखा के अंदर कुछ चेंजेस देखे .

उसका चेहरा पहले से ज्यादा निखरा हुआ था .

ओर वो काफी चुस्त नजर सा रही थी .

माया रेखा से पूछती हे “क्या बात हे मामि आज अलग ही दिख रही हो” .रेखा बोलती हे

“कुछ नहि में तो जैसी थी वैसी ही दिख रही हु”..मीना बोलती हे “हा भाभी आज थोड़ी थोड़ी बदलि हुई दिखाइ दे रही हो” .

रेखा बोलती हे “नहि दीदी शायद ऊपर सोने से ऐसी दिख रही हूँ” .

रेखा का पति बोलता हे

“तो रोज ऊपर सोया करो कम से कम मेरी बहन को काम कम करना पड़ेगा” और सब हॅसने लगते हे .मीना माया को बोलती हे

“जाओ अपने भाई बहन को जगा दो कॉलेज भी जाना हे दोनों ने की नहि” .

माया रजत के रूम में जाती हे .रूम खाली था .

माया सोचती हे शायद भाई बाथरूम में होगा .

चलो भाई को छेडते हे. पर बाथ रूम खाली था .

माया रजत को ढूँढ़ने लगती हे .

जैसे ही काया के रूम की विंडो से अंदर देखति हे .

उसकी साँस में साँस आती हे .

माया अंदर जा कर बोलती हे “गुड मॉर्निंग भाई और काया उठ जाओ” . काया बोलती हे

“में तो उठि हूँ भाई मुझे छोडने को राजि नहि तो में क्या करू” .

माया रजत के गालो को काटती हुई बोलती हे

“उठ जाओ भाई कॉलेज भी जाना हे” .

गाल काटने से रजत जग जाता हे .

रजत माया की चुचिओ को पकड़ लेता हे .

ओर माया रजत के ऊपर गिर जाती हे .

रजत बोलता हे बहुत काटने आता हे अभी बताता हूँ कैसे काटते हे और रजत माया की एक चुचि को कपडे के ऊपर से काटने लगता हे .

माया बोलती हे “सॉरी भाई छोड़ दो दर्द हो रहा हे” .

रजत छोड़ देता हे .माया छुटते ही निचे भाग जाती हे .

काया फ्रेश होने बाथरूम में चलि जाती हे .

रजत भी फ्रेश होने अपने रूम में चला जाता हे .

माया निचे भागति हुई पहुचती हे .

मीना पूछती हे “क्या हुआ बेटा इतना भाग दौड़ क्यों कर रही हो” .

माया मुस्कुराते हुए बोलती हे कुछ नहि माँ भाई को जगाने गई थी उसके गाल काट लिए और वो मेरे भी काटना चाहते थे भाग आई” .

रेखा बोलती हे “बहुत प्यार हे तीनो बच्चों में,अक्सर तो ये होता हे भाई बहनो में बनती नहि” .

तभी काया की आवाज आती हे.

“माँ हम तीनो तीन नहि एक हे तो न बनने का तो सवाल ही नहि उठता” . रजत भी आ जाता हे सब बैठ के नाश्ता करते हे .

रेखा मीना को बोलती हे “दीदी जिस काम के लिए आये हे वो काम कर लेना जरुरी हे जल्दी से” .

मीना बोलती हे “फ़िक्र मत करो भाई की दवा शुरू करवा दी हे मैंने बस दो वीक लगेंगे फिर पक्का तुम माँ बन जोओगी”.

रजत रेखा को देख के आंख मारता हे.

रेखा शर्मा जाती हे सब नाश्ता ख़तम कर लेते हे .

रजत और काया स्कूल और कॉलेज जाने के लिए रेडी हो जाते हे

रजत कार निकालता हे .

काया आगे बैठ जाती हे और बोलती हे भाई अपने पायल से वादा किया हे उसे घर से स्कूल छोडोगे पहले उस के घर चलो .

रजत पायल के घर की तरफ गाड़ी मोड़ लेता हे .

रजत पायल के घर के सामने गाड़ी रोकता हे . काया पायल को बुला कर लती हे . पायल को देख कर रजत की आँखों में वासना जग जाती हे .

पायल ने एक सफ़ेद कलर की टीशर्ट और जीन्स पहन रखी थी .

टी शर्ट के निचे कुछ न पहने होने की वजह से उसकी चुचिया साफ नजर आ रहे थी.

पायल रजत के पास आ कर बोलती हे भाई ऐसे क्या देख रहे हो अच्छी नहि लग रही हूँ क्या . रजत बोलता हे ऐसी बात नहि आज बहुत अच्छी लग रही हो .

पायल रजत का मतलब समझ जाती हे .

रजत सब को गाड़ी में बैठने को बोलता हे .

पायल पीछे बैठ कर बाते करती हे .रजत आईने से उसके चुचे देखता रहता हे .काया रजत की आँखों में पायल की चुचो की प्यास देख लेती हे और बोलती हे भाई प्यास लगी हे तो पि लो . रजत बोलता हे नहि रे .

पायल बोलती हे भाई आप सिर्फ काया का ही ख्याल रखते हो कभी मेरा भी रख लो . काया बोलती हे फ़िक्र मत कर यार भाई जल्द ही तेरा ख्याल रखेंगे

काया का स्कूल आ जाता हे .

काया रजत के लिप्स पर किस करके चलि जाती हे .

पायल रजत को गले लगाती हे रजत का एक हाथ पकड़ कर अपने चूचि पर रख देती हे और लिप्स को किस करने लगती हे .

रजत की तो जैसे मन की पूरी हो जाती हे वो एक बार पायल की चूचि को दबा कर छोड़ देता हे .पायल चलि जाती हे .

रजत भी कॉलेज की तरफ निकल पडता हे रस्ते में काजल उसे खड़ी मिलति हे .

रजत काजल को लिफ्ट के लिये पूछता हे काजल कार मे बैठ जाती है .

काजल ने ब्लैक साड़ी पहन रखी थी जिस में वो बहुत हॉट नजर आ रही थी

पहले पायल और अब काजल को देख कर रजत का पारा ऊपर चड़ने लगता हे .

काजल की चुचिओ को देख कर रजत कार पर से अपना कण्ट्रोल खो देता हे .

काजल के चुचे रजत के कन्धो से टकराते हे .

रजत अपने मन में बोलता हे वॉव मज़ा आ गया इतने नरम हे काश साली चोदने को मिल जाती भोसडी वाली की फाड् के रख देता .

काजल बोलती हे रजत कार सही से चलाओ वरना चोट लग जायेगी किसी को .

रजत फिर मन में बोलता हे मादरजात की जवानी देख के मेरा लंड जो चोट खा रहा हे उसकी इसको फ़िक्र ही नहि .

 
 आपका बहुत बहुत धन्यवाद राणा भाई मुझे आज बहुत खुशी हुई जो आपने पूरी कहानी पढ़कर अपनी राय दी उसका बहोत धन्यवाद आपकी बातों को जरूर ध्यान में रखूंगा और कहानी को और बेहतर बनाने समय समय पर अपनी राय जरूर दे धन्यवाद आपका अपना

सतीश
 
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