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लाइफ हो तो ऐसी complete

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फोटो में जिस बंगले को देखा था वो रियल में और भी खूब सूरत था बंगले के चारो और हरी भरी घास और नरियल के पेड़ थे ये एक फॉर्महॉउस जैसा लग रहा था.

हमने अपना सामान उतार लिया मॉम ने घर को अनलॉक किया अंदर का नजारा

ओर भी मस्त था.

विंडो पर वुडन की कारीगरी की हुई थी अंदर हर सामान वूडन का था

टेबल चेयर विंडो शेड सब कुछ देखनेमे अच्छा लग रहा था एक कोने में छोटा

सा बार भी बना हुआ था जिसे देख के लग रहा था घर का मालिक शराब का अदि था तरह तरह की बोतले रेक में लगी हुई थी निचे दो रूम में और ऊपर चार रूम हे मॉम ने बताया फिर मॉम बोली और सब से ऊपर एक रूम हे जिसमे में रहने वाला था अपनी बीवियो के साथ में रूपा और माया दी ऊपर की तरफ भागी ऊपर जा के देखा था रूम एक दम वाइट कलर का था परदे भी वाइट थे और रूम के बीचो बिच एक किंग साइज का बेड लगा हुआ हे इतना बड़ा बेड था की हम पांचों आराम से सो सकते थे फिर मॉम बोली ये रूम सिर्फ प्यार करने के लिए यूज़ होगा बाकि सब

अपने अपने रूम में ही रहेंगे जैसे रहते थे सबका दिल टूट गया मॉम की बात सुन के तभी किसी ने डोर बेल्ल बजाई हम सब निचे आये तो एक आदमी थी जिसे देख के मॉम बोली.

“गुप्त जी आप कहा रह गये थे”

उसके हाथ में दो पैकेट थे जो मॉम को देते हुए बोला.

“सॉरी मैडम में लेट पंहुचा, आप लोग निकल चुके थे फिर वापसी में सोचा कुछ खाने को लेलु तो वहि पैक करवा के लाया हूँ”

मॉम बोली “थँक्स यु,हम कल ही शॉप ओपनिंग करेंगे, अब और देर नहि कर सकते” गुप्ता जी बाय बोल के चले गये हम सब ने नाश्ता किए और आराम करने लगे नए घर में. तोड़ा अज़ीब लग रहा था पर बहुत बढ़िया भी लग रहा था.

मैंने गोवा पहुच के राहुल को कॉल किया राहुल भी यहाँ पहुच गया था.

मैंने राहुल को एड्रेस बता दिया. दोपहर तक हम लोगो ने रेस्ट की फिर मॉम के

साथ मिल के पुरे घर को साफ किया घर में खाने को कुछ नहि था. तो मॉम बोली

“हमे जा के राशन लाना होगा” मैंने नेट से पता किया तो कोई २ कीलोमिटर पर एक मॉल था अब समय था टैक्सी मँगवाने की हम आने जाने के लिए भी गाड़ी की जरुरत थी मैंने मॉम को बोला

“हमे अपनी कार और बाइक भी ट्रांसफर कर लेनि चाहिए थी”

मॉम बोली “बेटा कोई बात नहि हम यहाँ नई ले लेंगे, एक दो दिन एडजेस्ट कर लो”

हम लोग मॉल जाने के लिए रेडी हो गए थे हम बाहर अपने गार्डन में बैठ के खाने पिने की चीजो की लिस्ट बनाने लगे तभी एक बूढ़ा आदमी हमारी तरफ आता हुआ दिखाइ दिया वो सीधा हमारे पास आ गया.

आदमी हमारे पास आया और बोला, वो पास ही रहता हे हम लोगो को देख के मिलने आया हे उसने बताय वह नेवी का रिटायर ऑफिसर हे यहाँ अपनी पोती के साथ रहता हे उसका बेटा और बहु भी नेवी में हे जो ६ -७ मंथ में मिलने आते रहते है ज्यादा तर वो समुन्दर में रह्ते हे मॉम ने उसे बैठने को बोला. घर में खाने को कुछ नहि था फिर भी मॉम ने सुबह जो ज्यूस लिया था वहि उसे पिने को दिया. मॉम ने उसे बताया ये मेरा बेटा और ये दोनों इसकी बीविया हे मॉम की बात सुन के वो हैरान हो गया. एक लड़के की दो बीविया मॉम ने बताया की ‘माया दी की शादी मुझसे बचपन में हो गई थी. और रूपा से में प्यार करता था, दोनों लड़किया मुझे बहुत प्यार करती थी, तो दोनों ने ही शादी कर ली, और बहनो की तरह रहती हे’

तभी राहुल आ गया राहुल के आने से कही भांडा फ़ुट न जाये, तो मने इशारे से रूपा और माया दी को अंदर जाने को बोला.

राहुल आते ही घुस्से में बोला “जब आ रहे थे तो बताना था”

मॉम बोली “तुम्हारा नंबर तो रोहित ने आने के बाद दिया तब फ़ोन किया”

तभी नेहा भी आ गयी जिसे देख के मुझे बहुत ख़ुशी हुई नेहा मॉम के साथ बाते करने लगी.

मैंने नोटिस किया बूढ़ा मॉम और नेहा को घुर घुर के देख रहा हे दोनों की चुचियो की गोलाई को आँखों से नाप रहा है. राहुल ने बताया की उसकी पोस्टिंग दूसरे एरिया में हे पर कोई काम हो तो बता दिया करू मैंने बोला

“अभी तो एक ही काम हे खाने पिने का समान लेकर आना हे”

तो बूढ़ा बोला “बेटा कहि जाने की जरुरत नहि, बस कॉल करके सारा सामान मँगवा लो”

उसने एक नंबर पे कॉल किया ओर किसी आदमी को आने को बोला.

राहुल बोला “यहाँ आये हो तो शादी की पार्टी भी होनी चाहिये”

मैं बोला “रोहित को आने दो फिर दे दूंगा”

राहुल ने बोला “फिर क्या सोचा? क्या करना हे”?

मैं बोला “हम दोनोंने डिसाइड किया है यहाँ होटल खोलेंगे”

बूढ़ा बोला “अगर ऐसी बात हे तो मेरी जान

पहचानका एक प्रोपर्टी डीलर हे, वो तुमको अच्छी प्रोपर्टी दिखा देगा वो भी सस्ते में”

राहुल बोला “ये तो अच्छी बात हे, वेसे मुझे रोहित ने बताया था, मैंने भी सर्च किया हे कुछ अच्छी जगह देखि हे, समुन्दर के किनारे”

मैंने बोला “ठीक हे कल चल के देख लुँगा, और रोहित से भी पूछ लुँगा”

तभी एक २५ साल की लड़की आई और बुढे से बोली

“दादू आप यह पर हो में आप को ढूंढ रही थी”

बूढ़ा उसे देख के बोला

“आओ बेटी मीलो हमारे नये पड़ोसियो से ये मेरी पोती एलीना हे,यहाँ पर एमबीए फस्ट एअर में इस साल एड़मिशन लिया हे”

मैंने उसे बोला “में भी एमबीए ही करने वाला हूँ”

बूढ़े की पोती देखने में बहुत हॉट थी उसका फीगर बहुत गज़ब का था ३८"२८"३०"

उसकी गांड़ देख के पता चल गया था अभी तो चूदी नहि हे पर दूध को देख के ये

भी पता चल गया की बहुत दबवा चुकी हे. वेसे भी गोवा में सेक्स आम ही होता है. वेस्टन कल्चर हे वहा का.

तभी एक आदमी आया बुढे ने मुझसे खाने पिने की लिस्ट ली और उसे दे दी और बोला की.

“ये सामान जल्दी चाहिये ये लोग नये आये हे और खाने पिने का सामान नहि है”

आदमी बोल “सर १ घंटे में सामान पहुच जायेगा”

फिर राहुल बोला “अच्छा में चलता हु नेहा को शाम को आ कर ले जाउँगा”

मैंने हाथ मिलाया वो चला गया. फिर बुढे की पोती बोली

“दादू में बाहर जा रही हूँ तो आप घर पे ही रहना”

जाते जाते एलीना ने मूड के मुझे देखा. मैंने मन में सोचा “साली तुझे तो कुतिया की तरह चोदूँगा”

बूढ़ा भी चला गया में अंदर आया तो नेहा मॉम से बात कर रही थी.

मे ऊपर रूम में आ गया माया दी और रूपा बैठी थी में दोनों के बिच बैठ गया.

मैंने दोनों की कमर में हाथ दाल के चूचियों को पकड़ लिया मेरे ऐसा करते ही दोनों शर्मा गई. मैं बोला “क्या हुआ”?

दोनों ने ना में सर हिला दिया.

मैं बोला “शर्माओ मत मेरी बिवी हो दोनों, अब आदत डाल लो मेरे साथ ऐसे ही रहने की”

मैंने दोनो के होठो को चूमा दोनों ने मेरे होठो को चूमा फिर शर्मा के भाग गई.
 
आज गोआ में सेकन्ड डे था आंख खुली तो रूम में अकेला था में उठ के

बाथरूम गया तो बाथरूम में कोई था मुझे लगा मॉम ही होंगीं मैंने बोला

मॉम डोर खोलों पर अंदर से रूपा की अवाज आई “में नहा रही हूँ”

रूपा की आवाज सुन के मेरा दिल खुश हो गया मैंने बोला डोर खोलों

रूपा बोली “मुझे नहाने दो, अभी नहि खोल सकती मैंने कुछ नहि पहना हे”

मैं बोला “तुम्हारा पति हु,मुझे क्या पर्दा अब डोर खोलो अंदर आने दो”

रूपा ने डोर खोला.

रूपा : “दूसरे बाथरूम में चले जाओ में नहा रही हु”

रजत : “मुझे भी नहाना है, इस बाथरूम में” रूपा : “मानते क्यों नहि हो तुम”?

रजत : “क्यों मानू”?

रूपा : “जाओ ना क्यों सताते हो”

रजत : “मुझे भी नहाणा है”

और में डोर को धकेलता हुआ अंदर घुस गया रूपा अंदर एक दम नंगी थी. मैंने डोर बंद कर दिया रूपा अपने हाथो से अपने बदन को

छुपाने लगी. में रूपा के पास जाने लगा. रूपा पीछे होने लगी. मैंने रूपा को दीवार से लगा दिया

रूपा : “हटो मुझे नहि नहाना”

और जाने लगी मैंने रूपा की कमर में हाथ दाल दिया और बोला

“अब तो नहाणा ही पड़ेगा”

मैंने निकर पहनी थी मेरा लंड खड़ा होने लगा था.

रूपा : “क्या कर रहे हो, मॉम के साथ जाना है, मुझे देर हो रही हे”

रजत : “इतने दिनों बाद मिली हो ना किस ना कुछ और जाने की बात, ऐसे तो नहि जाने दूंगा”

रूपा : “प्लीज जान, जाने दो ना”

मैंने रूपा की चूचियों को दबाते हुए बोला “बहुत गरम हो तुम आज एक बार ठण्डी तो करूँगा ही”

मैंने अपना हाथ रूपा की चुत पे रख दिया और और उंगलियो को चुत में घूसा दिया. रूपा की सिसकि निकल गई.

“उईईईईई…. माआआआआ….

“क्या कर रहे हो, कोई अपनी बिवी के साथ, ऐसा भी करता है”

मैं बोला “में तो करता हु, रात में एक बिवी को रण्डी की तरह चोदा बहुत मज़ा आया” रूपा शर्मा गई मैंने रूपा को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया.

मैं बोला “रूपा आज बहुत मन हो रहा हे तुम्हारी चुत चाटने का”

रूपा : “सब कुछ तुम्हारा हे में कैसे मना कर सकती हु, जो करना हे प्लीज जल्दी करो”

मैं रूपा की टांगो के पास बैठ गया. मैंने रूपा की एक टांग उठाई और उसकी चुत पे अपने लिप्स रख दिये. रूपा की चुत अभी अभी के नहाने से बहुत सफ़ थी. आज चिकनाइ भी नहि थी मैंने रूपा की चुत चाटना शुरू कर दिया. रूपा कई दीनो बाद मेरे पास आई थी और चुदाई के एहसास ने जल्द ही उसकी चुत गिल्ली कर दी.

में रूपा की चुत की चुस्किया लेने लगा.

में जैसे जैसे रूपा की चुत चाटता रूपा कामुक आवाजे निकालती रही.

मैंने रूपा की चुत फैला फैला के चाटना जारी रक्खा. रूपा भी सिसकिया लेती रही थोड़ी देर

चाटने चूसने के बाद मैं खड हो गया. मैंने अपनी निकर उतार दी मेरा लंड देख कर रूपा शर्मा गई रूपा ने अपनी नज़र निचे कर ली में उसके पास गया मैंने रूपा का हाथ लंड पे रख दिया लंड रूपा के हाथ में जाते ही उछलने लगा.रूपा धीरे से मेरे लंड को दबाने लगी.

मैंने पूछा “रूपा तुमको जल्दी जाना है ना”

रूपा शर्मा के बोली “हा”

मैं बोला “फिर हो जाओ शुरू, जितनी जल्दी में झडुंगा, उतनी जलदी तुम जा सकोंगी, रूपा शरमाती हुये लंड हिलाने लगी.

मैं बोला “ऐसे नहि इसे मुह में लो और चुसो” रूपा मेरे लंड को देख रही थी फिर बैठ गई और लंड के टोपे को मुह में ले लिया. रूपा धीरे धेरे लंड चुस रही थी. उसके लंड चुस्ने से लंड और भी हार्ड हो गया.

मैंने रूपा को बोला “कैसे लग रहा है”?

रूपा लंड मुह से बाहर निकाल कर बोली “जान बहुत दिनों से चाहती थी तुम मेरे पास आओ पर सब के सामने बोल नहि पाती थी” रूपा फिर से लंड चुस्ने लगी.

मैं रूपा को बोला “तुम्हारी इच्छा आज पूरी कर दूंगा”

मैंने रूपा को खड़ा होने को बोला.

रूपा : “जान जल्दी करना”

मैंने बोला “बस १० मिनट और लगेंगे जान तुम्हारा पाणी निकाल देता हूँ, बेशक़ मेरा न निकले”

रूपा : “नहि जानू जब तक तुम नहि झड़ोगे में नहि जाउंगी”

रूपा खड़ी हो गई.

मैंने रूपा को बोला “घूम जाओ”

रूपा : “जान गांड़ मत मारना”

मैं हस्ते हुये बोला “गांड़ मरवाना चाहती हो क्या”?

रूपा ने ना में सर हिला दिया.

मैं बोला “डोन्ट वरी, में चुत ही मारूँगा, गांड़ मेरा गिफ्ट हे, किसी और दीन तसल्ली से मारूंगा”

मैंने लंड पे थुक लगाया और रूपा की चुत पे रगड़ने लगा रूपा भी अपनी गांड़ हिला हिला के लंड से चुत रगड रही थी.

मैं बोला “जान डालने जा रहा हूँ लंड अंदर” रूपा : “जान जल्दी से डालो अब सबर का बांध टुटने वाला है”

मैंने रूपा के कन्धो को पकड़ लिया और लंड चुत पे रख के धक्का मारा.

रूपा की सिसकी निकल गई

“उईईईईईई…..माआआआआ मआआररररर डाललोऊऊऊ गेईईईई क्याआआआ…..जान रुको मत डालो अंदर”

में भी धक्के धीरे धीरे मार रहा था. लंड चुत में पूरा अंदर घुस गया. रूपा लम्बी लम्बी सिसकि ले रही थी उसकी आँखों से ऑंसू भी निकल रहे थे.

रूपा : “जान रुको मत अब जोर जोर से चोदो मुझे, आज ये सुख में भोगना चाहती हूँ”

मैंने रूपा की चूचियों को पकड़ के धक्के मारना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में रूपा भी अपनी गांड़ पीछे को ढ़केलने लगी में रूपा की चुचियो को जोर जोर से दबा रहा था. रूपा की सिसकिया बाथरूम में गुंज रही थी.

रूपा की चुत बहुत पाणी छोड़ रही थी. मेरे धक्को कि मार से रूपा दो बार झड चुकि थी. मैंने रूपा को बोला.

“जान में झड़ने वाला हूँ”

रूपा : “अंदर ही गिरने दो, में महसुस करना चाहती हूँ”

मैंने जोर जोर से धक्के मारना जरी रखा फिर में रूपा की चुत में झड़ने लगा. रूपा एक दम कांप रही थी. में भी ताबड तोड़ चुदाई से थक गया था. मेरा लंड रूपा की चुत से फ़िसल के बाहर आ गया रूपा की चुत से मेरा और रूपा का पाणी रीस रहा था. हम दोनों बाथरूम के फर्श पे बैठ गये.

हम दोनों की धड़कने तेज़ चल रही थी. तभी डोर मॉम ने खटखटाया और बोली.

“तुम दोनों का हो गया हो, तो बाहर आ जाओ, हमे शॉप पे जाना है”

रूपा शर्मा गयी. मैं बोला “मॉम आप रेडी हो जाओ हम आते है”

फिर हम दोनों ने एक दूसरे को

नहलाया और बाहर आ गये. रूपा ने एक साड़ी पहन ली. और में अपने कपडे पहनने

लगा.
 
में और रूपा रेडी हो गए थे. हम दोनों निचे आये तो काया माया और

मों रेडी खड़ी थी. माँ बोली जल्दी चलो हम लेट हो रहे हे. हम सब बाहर

गये तो घर के बाहर एक गाड़ी खड़ी थी. मैंने पूछा माँ ये किसकी हे. माँ बोली

ये तो राहुल ने भेजीं हे. हम सब कार में बैठ के शॉप पे आ गए सब शॉप

ओपेनिंग की तेयारी कर रहे थे. राहुल और नेहा अपने कुछ दोस्तों के साथ आये थे.

ओर राहुल के साथ कॉलेज गर्ल्स भी थी जो ओपनिंग में हमारी हेल्प कर रही थी. राहुल के कहने पर सिटी के कमिशनर शॉप ओपनिंग करने आये थे. उन्हने रिबन काट के शॉप की ओपनिंग कर दी. बहुत लोग आये थे. माँ ने मुझे अपनी शॉप के लोगो से मिलवाया. मैंने बोला माँ यहाँ तो एक से बढ़ कर एक माल हे.

माँ बोली “चुप कर और आज तुझे होटल देखने जाना था उसका क्या हुआ”?

मैंने बोला “राहुल को बोला है वहि लेकर जायेगा”.

तभी राहुल एक आदमी के साथ आया. राहुल को देख के माँ बोली “क्यों राहुल होटल का कुछ पता चला”.

राहुल बोला “वहि काम कर रहा हूँ इनसे मीलो ये राज हे इनके कई होटल हे, अभी इन्होने बाहर कंट्री में अपने होटल खोलने की सोची है, जिसके लिए वो अपना एक होटल बेचने को राजी हुये है होटल काफी अच्छा हे, मैंने देखा है, और समुन्दर के किनारे हे तो टूरिस्ट भी बहुत आते है”.

माँ बोली “ठीक हे आओ ऑफिस में बैठ के बाते करते है हम चारो ऑफिस में जाके बैठ गये.

माँ बोली “तो बोलिये कितना अमाउंट सोचा हे होटल का”

राज बोला “होटल मे ३० रूम है और ये ५ मंजिल का हे, हर रूम का अपना बाथरूम हे, दो पूल हे एक निचे और एक टेरिस पे, होटल में स्टाफ बहुत अच्छा हे और ईमानदार भी, होटल का काफी नाम भी हे”

मैं बोला “हम सोच रहे हे होटल में कस्टमर के लिए एक मसाज सेंटर खोले”.

राज बोला “कोई प्रॉब्लम नहि, हमारे होटल में हॉल के पास एक जगह हे, थोड़ी तोड़ फोड़ करवानी होगी”

मैं बोला “ठीक हे अब पैसो की बात हो जाये”.

राज बोला “मैं घुमा फिरा के बात नहि करना चाहता मार्कीट रेट उसका ८० करोड के पास है, मुझे पैसो की जरुरत हे, तो आप ५० करोर दे दो”

माँ बोली “ठीक हे आप पेपर रेडी करवा लो, हम पैसो का जुगाड़ कर देते हे” राज बोला “एक हफ्ते में सब हो जायेगा”.

माँ बोली हम भी नेक्स्ट वीक तक होटल को अपने नाम करवा लेना चाहते

है,ताकि मेरे बच्चे होटल में काम शुरू कर सके.

राज बोला “मुझे खुद बहुत जल्दी हे डोन्ट वरी”

फिर राज चला गया.

माँ बोली “ये ठीक हुआ एक अच्छा होटल कम दाम में मिल गया”.

राहुल बोला “होटल का नाम चेंज करना हे क्या”?

माँ बोली “होटल का नाम क्या हे”? राहुल बोला “जन्नत होटल हे”.

माँ बोली “अभी जरुरत नहि, जब जरुरत होगी चेंज कर लेंगे”.

दोपहर में माँ बोली “तुम बेटा घर जाओ सब को लेकर, में शाम को आ जाउंगी”. मैं बोला “ठीक हे”.

फिर हम एक कार शोरूम में गये वहा एक कार बुक की जो हमे अच्छी किमत में मिल गई. शोरूम ऑनर ने बोला कल तक आप का ऑर्डर मिल जायेगा”. हम घर आ आगये. हम सब बाहर अपने बग़ीचे में बैठे थे.

तभी बाजू वाले अंकल आये बोले “कैसा चल रहा हे”

मैंने बोल “सब कुछ बढ़िया अंकल”.

अंकल बोले “फिर, कोई होटल देखा”? मैं बोला “जन्नत होटल खरीद लिया हे”. अंकल बोले “वॉव बहुत अच्छा, वो तो सिटी के बेस्ट होटल में से एक है”.

रूपा को दो चाय बनाने को बोला हम दोनों बाते करने लगे रूपा चाय लेकर आई अंकल बोले “ये कोण है”?

मैं बोला “मेरी दूसरी वाइफ हे”.

अंकल सुन के बोले बहुत रगीन मिजाज के लग रहे हो”.

मैंने बोला “ऐसा कुछ नहि मेरी पहली बिवी का कोई था नहि, और बचपन में शादी हुई थी, और इस से मैंने प्यार करके शादी की, दोनों बहनो जैसी रहती हे कोई प्रॉबल्म नहि होता”.

अंकल बोले “ये सिटी थोड़ी रंगीन मिज़ाज की है, तो थोड़ा संभाल के”. तभी राहुल आगया. मैंने राहुल को बठने को बोला.

अंकल ने पूछा “ये कोण”?

मैं बोला “मेरे भाई हे”.

राहुल ने भी हा में सर हिलाया. राहुल बोला “रजत सिटी में क्राइम बहुत होता है, तो कल मैंने दो लड़को को बोला है घर में सीसीटीवी कैमेरे लगवा देंगे, और सेफ्टी के लिए एक गार्ड भी बुलाया है”. मैं बोला “इतना भी क्या डरना, में नहि डरता किसी से”

 
राहुल बोला “जानता हूँ सब में, जो पहली सिटी में हुआ यहाँ मत करना”. मैं बोला “कोई मुझसे पुंगा लेगा तो में नहि छोड़ूँगा उसे”.

राहुल बोला “अब बिवी वाले हो कल बच्चे भी होंगे उनके बारे में सोचा करो”.

अंकल बोले “ये ठीक कह रहा हे लड़ाई झगड़े से कुछ हासील नहि होता”.

मैंने बोला ‘राहुल क्या आप ने रोहित से बात की”

राहुल बोला “रोहित ने ट्रैन पकड़ ली हे दो तीन दन में आ जायेगा”.

मैं बोला “ये ठीक हे उनके फ्लेट को साफ करवा देना”.

राहुल बोला “मैंने पहले ही करवा दिया था, और अब जब तूम दोनो एक साथ काम करने वाले हो तो और भी अच्छा रहेगा, भाई साहब भी यही अपना ट्रांस्फर करवा रहे हे, ताकि अब अपनी फॅमिली के साथ वक्त गुज़ार सके”. फिर राहुल ओर अंकल चले गये.

में अंदर आ गया. मैंने अंदर आते ही देखा मेरी बहने ओर रूपा काम कर रही हे. मैंने मस्ती करने की सोची. मैंने पीछे से जा के रूपा को पकड़ लिया.

रूपा बोली “कुछ चाहिए क्या”?

मैं बोला “मुझे प्यार करना हे”.

रूपा बोली “अभी नहि नाइट में कर लेना”.

मैंने बोला “अभी फिर किसके साथ करू”.

रूपा मुस्कुरा के बोली “अपनी दूसरी बिवी के पास जाओ”.

में माया दी के पास गया उनकी चुचियो को दबाने लगा.

माया दी बोली “भाई छोड़ो काम करने दो”

मैं बोला “मुझे प्यार करना है”.

माया दी बोली “अभी नही नाइट में”.

मैं बोला “फिर में किसके साथ प्यार करू”.

माया दी बोली “अपनी प्यारी साली के पास जाओ”.

मैं मायुस होकर बैठ गया. मुझे यु बैठा देख काया मेरे पास आई.

काया बोली “भाई क्या हुआ”?

मैं बोला “दो दो बीविया हे फिर भी प्यार करने का वक़्त नही उनके पास” काया बोली “रुको में आती हूँ”

में मायुस होकर आंखे बंद करके लेटा हुआ था.

तभी काया बोली “भाई ऑंखे खोलों”. मैंने जैसे ही अंख खोली जो नज़ारा देखा उसे देख के होश मदहोश हो गये. लंड घंटे की तरह बजने लगा. मेरी आंखे खुली की खुली रह गई थी मेरी बहने और रूपा मेरे सामने बस ब्रा और पेन्टी में खड़ी मुस्कुरा रही थी जिसे देख मेरा लंड घंटे की तरह बज उठा था. में तीनो को ऑंखे फाड् फाड् के देख रहा था.

काया बोली “भाई बस देखोगे ही”

में होश में आया.

काया बोली “अब आप जिसे चाहे प्यार करो तीनो तैयार है”.

मैं बोला “में तो तीनो के साथ करूँगा”. काया बोली “भाई इतनी मत चाहत रक्खो”.

मैंने बोला “क्यों ना रक्खूं, जब बाग में फूल होंगे तो भंवरा तो चाहत रक्खेगा ही”.

मैंने काया माया दी का हाथ पकड़ के खीच लिया. दोनों मेरे आज बाजु बैठ गयी मैंने रूपा को गोद में आने का इशारा किया. रूप अपनी गांड़ मटकाती हुई मेरी गोद मे बैठ गई. में काया माया दी की चूचियों को मसलने लगा. रूपा अपनी गांड़ में

मेरा तना हुआ लंड महसूस करके और भी गरम हो गई थी. मेरा लंड उसकी गांड़ मे चुभ रहा था वह बार बार हिल के गांड़ में लंड अडजैस्ट कर रही थी.

मैं बोला आज में तुम तीनो को नंगा करके चोदूँगा. माया दी बोली हा चोद लो बिवी के साथ साली जो मुफ़्त में मिल रही हे. हम चारो हस पड़े. मैंने माया काया की ब्रा को खोल दिया. और रूपा की पीठ पे चूमने लगा. रूपा मदहोश हो गई थी रूपा खड़ी हो गई और मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया. मैंने अपनी बहनों की चूचियों को पकड दबाना शुर कर दिया. दोनों मेरे सीने पे हाथ फेर

रही थी. रूपा ने लंड पजामे से बाहर निकल के चुसना शुरू कर दिया. माया दी ने मुझे लिटा दिया. रूपा लंड को सहलाने लगी. माया दी ने अपनी चूचि का निप्पल मेरे मुह में दाल दिया. काया उठ के रूपा के बगल में बैठ गई. रूपा लंड सहला रही थी. काया ने लंड मुह में दाल लिया. रूपा मेरी गोलियो को चुस्ने लगी. तीनो मेरे पे हावी होना चाहती थी. मैंने काया के मुह में धक्के मारना शुरू कर दिया जीससे से उसको तकलीफ होने लगी. और माया दी की चूचियों को दबा दबा के चुस्ने लगा. तीनो खूब मज़े ले रही थी. अब मैंने सोचा की आज एक की गांड़ फाडूंगा

दो की चुत मार के छोड़ दूंगा. मैंने थोड़ी देर माया दी को चुस्ने के बाद बोला “बस चूसती रहोगी की चुदवाओगी भी. तीनो एक दम से खड़ी हो होगयी. और मेरे सामने गांड़ हिला हिला के अपनी पेन्टी उतारने लगी. तीनो अपनी कमर मटका मटका के पेन्टी उतार रही थी घूम घूम के अपनी गांड़ झुका के दिखाने लगी. तीनो की गहरी गांड़ नज़र आ रही थी. तीनो की गांड़ के साथ थोड़ी चुत भी नज़र आ रही थी तीनो ने पेन्टी उतार दी.

 
तीनो घूमी तो वॉव क्या चिकनी चुते थे. जिनको देख के मुह में पाणी आ गया. वो तीनो खड़ी थी में उनके पास अगया और बारी बारी तीनो की चुत

को होठ लगाया. एक से एक मस्त चुत थी एक डन नमकीन बेमिसाल चुते थे. मैंने बारी बारी तीनो की गांड़ पकड़ के जोर जोर से दबा दबा के उनकी चुत चाटने लगा. तीनो बस टांगे खोल चुत चटवा रही थी. फिर मैं खड़ा हो गया.आज लेट के मेहनत करने का वक़्त नहि था आज तीनो को कुतीया की तरह चोदने का वक़्त था.

मैं बोला “आज तुम तीनो को पुरे घर में घुमा घुमा के चोदूँगा”.

माया दी बोली “हम भी यही चाहते हे”. में तीनो के पीछे गया. और माया दी बिच में थी.

मैंने माया दी की गांड़ को दबाते हुए बोला “आज पहले गांड़ मारूँगा”.

माया दी बोली “पहले चुत की आग बुझा दो फिर जो चाहे करते रहना”.

मैं बोला “देखति जाओ सारी आग आज बुझेगी”.

मैंने काया और रूपा की गांड़ में उंगली ड़ालना शुरू कर दिया. मेरी उंगली

उनकी गांड़ में बहुत टाइट घुस रही थी. मैंने दोनों की चुत में वहि उंगली डाल कर गिला किया और जोर से गांड़ में घूसा दिया दोनों आगे भागने लगी. मैंने अपनी बाकि उंगलिया चुत में घूसा के उनको पकड लिया अब वो भाग भी नहि पा रही थी.

मैं बोला “चलो तीनो बेड से झुक के खड़ी हो जाओ”. तीनो बेड पकडके खड़ी हो गयी मैंने उंगली बाहर निकाली और माया दी की गांड़ में लंड घुसाने लगा. लंड अंदर जाने लगा. माया दी की सांसे चढ़ने लगी. मैंने फिर से उंगली काया और रूपा की गांड़ मे घूसा दी. अब मैं माया दी की गांड़ में जब भी धक्का मारता हाथ की उंगलिया भी

रूपा और काया की गांड़ में घुसाता रहता. तीनो मज़े से अपनी गांड़ हिला रही थी. सब से ज्यादा रूपा को दर्द हो रहा था. काया ने उंगली दाल दाल कर अपनी गांड़ मेरी उंगली के लिए तैयार कर ली थी. १५ मिनट गांड़ मारने के बाद मैंने लंड निकल लिया.

और बोला “चलो निचे चलते हे तीनो मेरे साथ निचे आने लगी तो मैंने सिडियो पे रूपा को पकड़ लिया. में सिडियो पे बैठ गया और माया दी को बोला “लंड चुसो”. और काया को

बोला दिदी की चुत चाटो. दोनों अपने काम में लग गई. फिर मैंने रूपा को पकड़ के गोद में बिठा लिया लंड पकड़ के चुत में घूसा दिया.

मैंने काया को बोला चुत चाटति रहो.. मेरा लंड रूपा की चुत में पूरा दो तीन धक्को में घुस गया.

माया दी और काया सामने आके रूपा की चुत चाटने लगी. मैंने रूपा की चूचियों को पकड़ के जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिये. बिच बिच में माया दी मेरा लंड

भी चुत से निकाल के चुस्ती रही. में रूपा की चुत मारता रहा. रूपा १० मिनट में झड गयी. माया दी और काया ने मिल के उसकी चुत का रस चाट चाट के साफ किया. फिर मैंने रुपा को उठा दिया और हम निचे आ गये. मैंने काया को पकड लिया उसे टेबल पे

सीधा लिटा दिया. माया दी अभी भी मेरा लंड मुह में दाल के चुस्ती रही. मैंने रूपा को बोला काया को अपनी चुत चटवाओ. रूपा टेबल के ऊपर चढ़ के काया के मुह पे अपनी चुत रख के चटवाने लगी. काया भी रूपा की चुत जोर जोरसे से चुस रही थी.

मे भी उसकी चुत जोर जोर से चुस रहा था. माया दी मेरा लंड मुह में लेकर जोर जोर से चुस रही थी.

फिर में खड़ा हो गया मैंने लंड माया दी के मुह से निकला और काया की चुत में घुस दिया. काया की चुत अभी भी बहुत टाइट थी माया दी के मुक़बले.मे उसकी जांघो को पकड़ के जोर जोर से धक्के मारने लगा. काया की सिसकियो और फच फच फच की आवाज से होल गुंज रहा था, काया रूपा की चुत जोर जोर से चुस रही थी और

उतनी रफ्तार से में चोदे जा रहा था काया को. काया भी अपनी कमर उठा उठा के साथ देणे की कोशिश कर रही थी. मेरे झटकों से टेबल हिल रहा था और काया की गांड दुखने लगी थी. मैंने माया दी को काया की चुचियो को मसलने को बोला. क्यों की मेरा हाथ वहा तक नहि पहुच रहा था. माया दी काया की चुचीयों को दबाने और चूसने लगी. काया भी ज्यादा दूर नहि थी और झड़ने लगी. उसके साथ की रूपा भी झड़ने लगी. काया ने सारा पाणी पि लिया. उसका चेहरा बाल चुत रस से भीग गया था, और काया की चुत भी बहुत पाणी छोड़ि थी मैंने माया दी और रूपा को निचे गिरे पाणी को

चाटने को बोला दोनों निचे गिरे पाणी को चाट के साफ करने लगी.

 
दोनों ने जमीन साफ कर दी फिर मेरा लंड चाट के साफ किया. में सोफ़े पे बैठ गया खड़े खड़े थक गया था. अब बारी माया दी की थी, मैंने माया दी को सोफे पे लिटा दीया और बैठे बैठे उनकी चुत में लंड घूसा दिया. काया और रूपा मेरे पास खड़ी थी. मैंने

रूपा को बोला चूचियों को चुसवाओ. रूपा मेरे पास आई. अपनी चूचियों को पकड़ कर चुसवाने लगी. मैंने काया को बोला दी को चुत चटवावो. काया ने माया दी के मुह पे अपनी चुत रख दी. चुदाई शुरू हो गई थी मेरे धक्को से दीदी हिले जा रही थी उसकी चूचिया गेन्द की तरह उछल रही थी माया दी के मुह पे काया अपनी चुत

रगड़ रही थी. हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था. में बिच बिच में रूपा की

चुत को भी मसल देता तीनो की सिसकिया निकलने लगती ऐसा लगा रहा था समा यही ठहर जाये में ऐसे ही तीनो को चोदता रहु. माया दी मेरी चुदाई और धक्को से एक बार झड चुकी थी, में झड़ने वाला हो गया था. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी माया दी ने अपना हाथ उठा के काया की चुत में उंगली दाल दाल चुसना शुरू कर दिया था. काया ने एक लम्बी पिचकारी मारी जो सीधा माया दी के चहेरे से होती हुई

चुचियो पे फैल गई मुह भर गया था चेहरा गिला हो गया था. मैंने रूपा को

चाटने को बोल वो भी माया दी के चेहरे को चाटने लगी. में झड़ने वाला हो गया

था में फुल सपीड में धक्के मार रहा था तीनो की तीनो सोफ़े पे हिल रही थी. में

माया दी की चुत में झड़ने लगा. माया दी भी तभी झड़ने लगी में माया दी के

उपर लेट के आराम करने लगा. मेरे लंड से अभी भी पानी निकल रहा था. माया दी उसे महसूस करके लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी थोड़ी देर हम लेटे रहे फिर हम तीनों नार्मल हो गये. मैंने पूछा “मज़ा आया”. माया दी बोली “मज़ा, मत पूछो कितना आया, आज से पहले इतना मज़ा कभी नहि आया था”. रूपा मेरी गोद में बैठ गई. दोनों बहने मेर आजु बाजु. मैं बोला “ये है परफेक्ट फॅमिली”.

तीनो बोली “अभी कहा, अभी माँ बाकि हे”.

मैं बोला कोई बात नहि एक दिन वो भी हमारे साथ जॉइन करेगी वक़्त ज्यादा दूर नहि वो”.

हम नंगे ही सार दिन रहे. माया दी और रूपा ने नंगे ही सब काम किया. मैंने दोनों की जम के चुदाई कर दी थी. दोनों को चलने में तकलीफ हो रही थी. दोनों ने सब काम किये में और काया दोनों नंगे लेटे टीवी देखते रहे.

दोनो एक दूसरे के बदन से खेलते रहे. माया दी और रूपा ने डिनर रेडी कर

दिया था. हम माँ का इन्त्ज़ार कर रहे थे.

रूपा :- “माँ आने वाली है हमे कपडे पहन लेने चाहिये”.

मैं:- “कोई जरुरत नहि”.

मेरी बात सुन तीनो नंगे ही सोफ़े पे बैठ के टीवी देखने लगे. रात को ११ बजे माँ आई.मेन डोर खुला ही था. माँ सीधा अंदर आ गई. अंदर हमे नंगा देख के मों मुस्कुराने लगी.

माँ:- “तो आज मेरे बच्चों ने खूब मस्ती की हे”.

मैं:- “बस आप की कमी सब को महसूस हो रही थी”.

माया दी मेरे साथ बैठी थी उठ गई. माँ मेरे पास बैठते हुये बोली “आज तो बहुत काम किया थक गई हूँ पूरा बदन दर्द हो रहा हे”.

मैं:- “कोई बात नहि अभी दर्द गायब कर देता हूँ, माँ आज आप की ऐसी मालिश करूँगा की सारा दर्द ग़ायब हो जायेगा”.

मैंने काया माया दी और रूपा को बोला “डिनर बाद में करेंगे, पहले तेल लाओ माँ की मालिश करता हूँ”.

मैंने रूपा को बोला “एक चादर ले आओ यही बिछा के कर देता हूँ माँ की मालिश”.

माँ:- “रहने दे बेटा”.

मैं:- “नही आज तो मालिश होनी है आप की”.

 
रूपा तेल लेने चलि गई. माया दी चादर ले आई काया ने उसको बिछा दिया.

मैं:- “माँ उतार दो कपडे”.

माँ:- “सब के सामने”.

मैं:- “तो क्या हुआ ? यहाँ तुम्हारी बहु और बेटी ही तो है”.

माँ:- “मुझे शर्म आ रही हे”.

मैंने माँ की साड़ी पकड़ के उतारनी शुरू कर दी.

माँ:- “बेटा रूम में कर ले”.

मैं:- “नहि में यही करूँगा बहुत अच्छे से करुन्गा”.

मैंने माँ की साड़ी उतार के फ़ेक दी.

मैंने माँ का पेटिकोट खोलना शुरू कर दिया. पेटी कोट ख़ुलते ही जमीन पे

गीर गया. माँ ने अंदर लाल पेन्टी पहनी हुई थी. माँ ने अपने बलाउज को

अपने हाथो से कवर कर रखा था. मैंने उनकी हाथो को हटा दिया और ब्लाऊज

खोलने लगा. ब्लाउज ख़ुलते ही ब्रा में कसी हुई उनकी चूचिया थोड़ी बाहर आ गयी.. मैंने ब्लाऊज उतार फेका और माँ को बोला “लेट जाओ”.

माँ शरमाती हुई लेट गयी. मैंने काया और माया दी को बोला “माँ के हाथ दबाओ”.

दोनों माँ के हाथों को लेकर दबाने लगी. मैंने रूपा को बोला “माँ के पैरों पे तेल से मालिश करो”. तीनो हाथ पैरों में तेल लगाने लगी.

में:- “माँ मुह खोलों अब आप के मुह की मालिश करनी हे”.

मेरा लंड एक दम खड़ा था. में उसे सहला रहा था.

माँ समझ गई थी में क्या करने वाला हु. माँ ने धीरे से मुह खोला में घुटनों के बल गया और मुह में लंड घूसा के धक्के मारने लगा. रूपा काया माया दी मुझे देख रही थी. माँ को बहुत शर्म आ रही थी.

मैं:- “शर्मा क्यों रही हो अपने पति का लंड चुस रही हो, अच्छे से चुसो”.

माँ ने आँखों से हा में रजामन्दी दी और लंड को चुसने लगी. रूपा माँ की झांघो तक तेल लगा के मालिश कर रही थी. काया माया अदि भी हाथो

की मालिश कर रही थी. थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद मैं बोला

“माँ अब आप के दूध की मालिश करूँगा”.

मैंने माँ के मुह से लंड बाहर निकाल लिया ओर माया काया को माँ की ब्रा खोलने को बोला. काया ने माँ को उठा के बैठा दिया. माया दी ने पीछे से हुक खोल दीया. मैंने माँ को लिटा दिया और ब्रा खोल के बदन से अलग कर दि. ब्रा अलग होते ही माँ की चूचिया अज़ाद हो गयी. चूचियों में फुलावट आने लगी बेचारी सुबह से कसी हुई थी. में फिर माँ के ऊपर आ गया. मैंने माँ को बोला आज लंड से चूचियों की अच्छी मालिश करूँगा. मैंने लंड पे तेल लगाया. और दोनों चूचियों के बिच लंड रख के चुचियो को दबाने लगा. में माँ की चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था. मेरा लंड माँ की चुचियो को चोद रहा था. मैं जोर से चुचियो से लंड

दबा रहा था.माँ की सिसकिया अब निकलनि शुरू हो गई थी. माँ कामुक आवाजे निकाल रही थी. “हाय, मेरा बदन एक दम हलका हो रहा हे”.

मैं:- “माँ अभी क्या अभी तो और भी हल्का करूँगा इतना की आप आसमानो में उड़ोगी”. मैंने तेल लेके माँ की चूचियों पे लगाना शुरु कर दिया. में माँ की चूचियों को दबाने लगा फिर मैंने माँ से बोला “माँ अब आप की गांड़ की भी मालिश कर देता हूँ”.

माँ:- “नहि बेटा वहा रहने दो ना”.

मैं:- “माँ आज तो आप की हर जगह मालिश होगी”.

माँ मना करती रही मैंने माँ को पलट दिया. अब में माँ की गांड़ पे बैठ गया. और तेल लेकर पीठ पे लगाने लगा, माँ की पेन्टी माँ की गांड़ में घुसी जा रही थी और मेरा लंड उनकी गांड़ में घूसने को उतावला हो रहा था. मैंने माँ की पेन्टी पकड़ के निचे खीच दी रूपा ने पेन्टी निकल दी. माँ की चुत गिल्ली थी तो पेन्टी भी आगे से गीली हो गई थी, मैंने तेल लेकर माँ की गांड़ पे गिराया.मैंने माँ की गांड़ के चूतड़ को फैला के छेद में तेल जाने दिया. में

माँ के चूतड़ों को मसलने लगा उनकी पीठ पे अच्छे से तेल लगाया. माया काया

भी माँ की अच्छे से मालिश कर रही थी मैंने लंड पे तेल लगाया और गांड़ में घूसा दिया. माँ की सिसकि निकल गई. माँ को दर्द हो रहा था. में माँ के

उपर लेट गया और धक्के मारने लगा. माँ की पीठ को चूमता हुआ गांड़ में

लंड पेलता रहा. तेल की वजह से माँ की गांड़ में लंड आराम से घुस गया था

ओर बहुत मज़ा आ रहा था रूपा माँ की चुत को सहलाने लगी ये देख माया

काया माँ की चूचियों को मसलने लगी.

माँ की बड़ी बड़ी चूचीयी को जोर जोर

से मसलने लगी निप्पल को दबाने लगी.मे माँ की गांड़ में धक्के मारता रहा माँ की गांड़ से फच फच फच की अवाज आने लगी माँ भी गांड़ उठा उठा के मरवाने लगी. निचे रूपा माँ की चुत मसलती रही. थोड़ी देर जम के गांड़

मारी तो माँ की गांड़ खुल गई और हम दोनों धक्के मारते रहे. फिर मैंने माँ

की गांड़ से लंड निकल लिया और माँ को सीधा कर दिया. मैंने लंड को देखा जो धक्के मारने से लाल हो गया था. माँ की गांड़ भी काफी खुल गई थी. मेरी बहने माँ के सीधा होते ही उनकी चुचियो पे तूट पड़ी दोनों माँ की चुचीयों को जोर जोर से मसल के चुस रही थी. मैंने रूपा के मुह में अपना लंड घूसा

दिया रूपा लंड घूसने लगी. फिर मैंने लंड थोड़ी देर बाद निकाल के माँ की

चुत के पास आ गया. माँ की चुत एक दम गिली थी.मैंने रूपा को चाटने को

बोला रूपा माँ की चुत चाटने लगी. और तभी मैंने भी माँ की चुत में लंड

घूसाने लगा. रूपा माँ के चुत के दाने को चुस रही थी. और में चुत में

लंड घूसा रहा था. माँ को दोहरा मज़ा मिल रहा था. मैंने माँ की चुत

मारनी शुरू कर दि. रूपा की चुचीयो को पकड़ के खीचने लगा दबाने लगा. माँ मज़े ले लेटी लेटी हम चारो को सह रही थी. हम चारो मिल के माँ की अच्छी सेवा कर रहे थे. माँ की चुत बहुत देर से गरम थी थोड़ी देर में पाणी छोड़ दी. में धक्के मारता रहा था, माँ भी साथ देती रही फिर मैंने सब को हटा दिया माँ को गोद में लेकर चोदने लगा. माँ भी लंड पे कूदने लगी. माँ की चुत से पाणी निकल के पैरों पे बह रहा था. हम दोनों ने अपनी स्पीड बढा दी क्यों की दोनों झड़ने वाले थे.

माँ बोली “मैं आरही हु,ओर.... जोर.... से...

फिर हम दोनों झड़ने लगे में माँ की चुत में झड़ने लगा माँ की चुत मेरे पाणी से सरबोर हो गई.

हम दोनों तृप्त हो गये आज मज़ा आ गया था सारा दिन चुदाई करके वो भी फॅमिली में सबके साथ.

माँ बोली बेटा “तूने तो सच में जन्नत दिखा दी”.

फिर हम सब एक दूसरे को चूम के थैंक्स बोलने लगे.

रूपा :-“चलो मेहनत ज्यादा हो गई है खाना खा लेते हे”. हम सब नंगे ही खाना खाने बैठ गये. सब ने नंगे ही खाना खाया और सब से ऊपर के रूम में चले गए एक

साथ सोने के लिये.

कहानी जारी रहेगी

 
एक वीक हमने खूब मस्ती की. मेरा जिस पे दिल आता में उसे चोद देता.

चारो भी खुल के मेरा साथ देती. इस बिच मैंने होटल खरीद लिया. रोहित आज सुबह यहाँ पहुचने वाला था.

में सुबह उठा और माँ को बोला “माँ आज होटल देखने जाना है, और पेपर साइन करने है”.

माँ बोली “ऐसा करो रोहित आने वाला है उसे लेकर जाना”.

मैंने राहुल को कॉल किया राहुल ने बताया वो बस स्टैंड से उनको लेकर फ्लेट पे जा रहा है. में वहि आ जाऊ. में रोहित से मिलने उसके फ्लेट पे गया.

उसकी बिल्डिंग के निचे पहुच के मैंने राहुल को कल किया राहुल ने फ्लेट नंबर बताया जो ५ वी मंजिल पे था. मैंने लिफ्ट से ऊपर जाना की सोची में लिफ्ट की तरफ बढा तो मुझे वहा हमारा पड़ोसी बूढ़ा नज़र आया. में सोचने लगा ये यहाँ क्या कर रहा हे. मुझे देख के बोला “अरे बेटा तूम यहाँ”?मैं बोला “राहुल यही रहता हे तो मिलने आया हूँ”.

मैने उसे ये बताना सही नहि समझा की राहुल की जगह रोहित है यहाँ. क्यों की मेरा आना जाना यहाँ लगा रहेगा. में ५ वी मजिल पे उत्तर गया में देखने लगा की ये कोण सी मंजिल पे जाता हे. मैंने देखा लिफ्ट ६ वी मंजिल पे रुकि है. में जल्दी से सिडियो से

उपर गया. मैंने देखा एक रूम को खोल के वो अंदर चला गया. में सोचने

लगा आखिर यहाँ कोण हे जिस से मिलने आया हे. में सोचते सोचते रोहित के फ्लेट के बाहर पंहुचा. में बेल बजाने वाला था की रोहित ने गेट खोल दिया. मैं बोला “यार तुझे कैसे पता चला में आ गया हूँ”.

राहुल:- “यहाँ के हर डोर पे सेक्युर्टी कैमेरे लगे है”.

में अंदर गया तो एक छोटा सा मॉनीटर भी लगा हुआ था. मैंने बोला बहुत ही अच्छे कैमेरे लगे है यहाँ”. राहुल बोला यहाँ ज्यादा तर अमीर लोग ही है,इस लिए सेक्युर्टी ज्यादा है”. फिर में रोहित को बोला चल जल्दी रेडी हो जा हमे होटल देखने जाना है”.

रोहित:- “भाई में क्या देखु तुमको पसंद है तो मुझे भी है मुझे तो बस वहा काम करना है”.

मैं:- “साले सब में ही करूँगा, और तू आराम करेगा”.

रोहित:- “भाई अभी आया हूँ, थक गया हूँ”.

तभी आंटी आ गई. आंटी मुझे देख के खुश थी. मैंने बोला आंटी सफर कैसा था कोई दिक्कत तो नहि हुई, और अंकल कब आ रहे है”?

आंटी:- “अंकल भी आये हे”.

तभी अंकल बाहर आये मुझे देख के बोले आओ बेटा बैठो. हम सब बैठ गये. अंकल:- “तुमने होटल खरीद लिया मुझे राहुल ने बता दिया हे,और में खुश हूँ की तुम दोनों एक साथ काम करने वाले हो”.

में:-“अंकल मेरा सब से अच्छा दोस्त है ये, और आंख बंद करके भरोसा कर सकता हूँ, इसके जैसा दोस्त नहि मिलने वाला”.

अंकल:- “तो होटल का काम कब से शुरू कर रहे हो”.

मैंने:- “आज साइनिंग हे आज सारे पेपर तैयार हो जायेंगे, ओर आज से वो होटल हमारा हो जायेगा”.

अंकल :- “गुड. फिर अंकल राहुल से बोले “राहुल तुमने भी इन लोगो का बहुत साथ दिया”.

राहुल:- “भाई साहब अब रिश्ते दारिया है तो निभानी पडी, और फिर बड़ी साली साहिबा को कोई टेंशन ना हो नहि तो उनके बच्चे को नुकसान हो सकता है इस लिए सब खुद ही संभाल रहा था, जितना हो सका हेल्प कर दी”.

अंकल:- “गुड”

अंकल:- “रोहित बेटा रजत के साथ जाकर काम आज ही देख लो आराम तो रात मे भी कर सकते हो, में भी आज ही अपना ऑफिस ज्वाइन कर रहा हूँ. तुम दोनों को बहुत मेहनत करनी हे”.

रोहित:- “ठीक हे पापा”.

राहुल रेडी होने चला गया.

मुझे ख़ुशी कही नज़र नहि आ रही थी. मैंने पूछा “अंकल ख़ुशी कहा हे”?. अंकल-“उसके डैड उसे ले गये”.

मैं – “वो तो आप लोगो के साथ ही रहने वाली थी और यही पढने वाली थी तो क्या हुआ जो उसके डैड ले गये”?

आंटी – “उसके डैड बोल रहे थे अब वो अपने मा बाप के साथ रहेगी, और वहि स्टडी करेगी, वो इतनी दूर नहि भेज सकते अपनी बेटी को”.

में मायुस हो गया एक माल हाथ से निकल गया. वो होती तो और मज़ा आता. रोहित रेडी हो के आ गया. राहुल भी हमारे साथ होटल चल रहा था. राहुल और रोहित एक साथ गाड़ी में और में उनके पीछे अपनी बाइक पे जाने वाला था. हम गेट पे पहुचे तो मुझे वह बूढ़ा एक लड़की के साथ नज़र आया वो एक कार में बैठ के चला गया. में सोचने लगा ये बूढ़ा इस लड़की को कहा ले जा रहा है, कोण है ये लड़की? फिर दिल में सोचा होगी कोई इसकी सेटिंग शक्ल से ही ठरकी है. मुझे क्या? हम होटल की तरफ निकल पड़े. थोड़ी देर में हम होटल पहुच गये.
 
हम होटल के अंदर गये राज हमारा ही इंतज़ार कर रहा था. उसने होटल के स्टाफ से मिलवाया और बताया ये अब तुम्हारे मालिक है. सब ने हमे गुड़ मॉर्निंग बोला. फिर हम सब के सामने पेपर साइन किये.

राज – “इस मोके पे शैम्पेन तो होनी चाहिये”. राज ने वाटर से शेम्पियन लाने को बोला वो लेकर आया राज ने बोटल खोली और चार पैग बनाये. हम चारो ने अपना अपना गिलास उठा लिया. जाम से जाम टकराये. एक सिप लेने के बाद राज ने मुझे धीरे से बोला. “दोस्त इस होटल के कुछ स्टाफ खास सर्विस भी देती है”.

मैंने अन्जान बनते हुये बोला “कैसी सर्विस”?

राज – “यार इतने भी भोले नहि हो तुम, कुछ लड़किया जो यहाँ काम करती है पैसे देणे पे ओवर टाइम भी करती है,उस ओवर टाइम में तुम ऐश कर सकते हो”.

मैं उसे बोला “मेरी दो बीविया है,मुझे उनकी जरुरत नहि पड़ेगी”

राज बोला “भाई जरुरत तो सब को पड़ जाती हे”. मैंने बोला “जब पड़ेगी तो देखि जायेगी”.

रोहित- “रजत भाई होटल बहुत अच्छा है”.

मैंने- “में यहाँ माया के लिए ब्यूटीपार्लर खोलने वाला हूँ, जिसमे हम मसाज थेरपी भी करेंगे कस्टमर की”.

राहुल- “ये ठीक आईडिया है इस से तुम लोगो का बिजनेस अच्छा चलेगा,पर भाई इसका लायसेंस ले लेना होटल में इन सब का लायसेन्स लेना पडता हे”. मैं- “तो आप दीलवाओ, आप किस दिन काम आओगे”.

राहुल- “तुम लोग पार्लर की सेटिंग करो तब तक मे लाइसेंस ले लुँगा”

राज ने पेपर हमारे हवाल किये मैंने उसके अकाउंट में ५० करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा दिये. राज चला गया. में होटल देखने लगा. होटल में दीवारों पे पेंटिंग लगी हुई थी. मैंने रोहित को बोला

“थोड़ी यहाँ की सफाई करनी होगी होटेल का कलर मुझे पसंद नहि आया, बहुत ओल्ड फैशन है”.

राहुल- “तुम करवा लो,पर इसके लिए होटल कुछ दिन बंद करना पड़ेगा”?.

मैं – “कोई अच्छा कॉन्ट्रेक्टर हो तो उसे बुला लेना घर पे ही बात कर लेंगे कितने दिन लगेंगे वो भी पता लगा लेंगे, हमे कॉलेज का फॉर्म भी भरना है, अच्छा कॉलेज भी ढूँढना है, अपने ओर अपनी बहन के लिये”.

रोहित – “रूपा स्टडी नहि करेगी क्या”? मैंने – “मुझे नहि पता उस से पूछ्ना होगा”.

फिर रोहित राहुल के साथ घर चला गया बहुत थका हुआ था. में होटल के स्टाफ़ के साथ बाते करने लगा. सबको मैं पसंद आ रहा था.

मैंने सबसे पूछा होटल को बेस्ट बनाने के लिए अपने आयडिया लिख के कल मुझे दे देना.

सब अपने अपने हिसाब से होटल को बेस्ट बनाना चाहते थे. फिर में बाई बोल के घर की तरफ चल पड़ा. घर पंहुचा तो मेरे घर के बाहर एक ब्रैंड न्यू कार खड़ी थी.

माँ और मेरी बहने उसे देख रही थी. में उनके पास पंहुचा तो माँ बोली

“बेटा कार बहुत अच्छी ख़रीदी है, हम सभी इसमें आराम से बैठ सकते हे”. मैंने बोला “आराम के लिये ही तो लिया हूँ”.

रूपा मेरे लिए पाणी लेकर आई. मैंने बोला “क्या यार सिर्फ पाणी कुछ मीठा खिलाओँ”.

रूपा ने मेरे होठो से अपने होठ जोड दिये. हम ३ मिनट तक एक दूसरे को चुमते रहे.

फिर माँ बोली “शर्म कर बाहर खड़े हो”?

मैंने बोला “अपनी बीवी को चूम रहा हूँ, और यहाँ चलता हे”.

मैं सब को लेकर अंदर आ गया. माँ और रूपा किचन में चलि गई.

माया दी मेरे साथ बैठी हुई थी. मैंने काया को अपनी गोद में बिठा लिया. माया दि बोली “कैसा रहा आज का दिन”?

मैं बोला “दिन बहुत बढ़िया गया यहा, मैंने होटेल स्टाफ़ से दोस्ती कर ली है, अब उनको बोला हे की अपनी अपनी राय दे होटल को बढीया बनाने के लिये”. मैंने माया दीदी को बताया “मैंने आप के पार्लर के लिए भी सोच लिया हे, बस काम कुछ दिनों में शुरू कर दूंगा जब अच्छा कॉनट्रेक्टर मिल जायेगा”.

माया दीदी बहुत खुश हो गई. काया बोली “भाई मेरे कॉलेज का क्या होगा”? मैंने बोला “कल चल के हम कॉलेज भी देख लेंगे और एडमिशन भी करवा लेंगे”.

तभी माँ और रूपा भी आ गई.

मैंने रूपा से पूछा उसे आगे स्टडी करनी हे क्या?. रूपा बोली “आगे स्टडी कर के क्या करुँगी”.

माँ- “बेटा अब रजत की बिवी हो, उसके साथ रहा करो, इसका भरोसा नहि, कॉलेज में किसी को पटा लिया तो”? रूपा- “माँ ये बाहर कुछ भी करे आई डोन्ट केअर पर प्यार तो मुझे ही करते है”.

माँ- “तू भोलि है”.

काया- “डोन्ट वरी माँ में हूँ ना भाई की खबर लेने के लिये”.
 
रजत- “माँ क्यों न आज बाहर बीच पे डिनर किया जाये”.

माँ- “ये तो बहुत अच्छी बात हे अब तो हमारे पास गाड़ी भी हे”.

रजत- “ऐसा करते हे कुछ फिश और मटन ले लेंगे वही पर आज आउट डोर कैम्पिंग करते है”.

माँ- “दैट्स गुड सब रेडी हो जाओ”.

रजत- “इसमें रेडी क्या होना जैसे हो वेसे ही चलो”.

माँ- “कोई देखेगा तो क्या सोचेगा”?

रजत- “क्या हुआ अच्छी तो लग रही हो सब”.

माँ- “मुझे देखो मैंने क्या पहना है साड़ी और बच्चियों ने देखो पजामा और टीशर्ट, कम से कम बाहर जाना हे अच्छे कपडे तो पहनने चाहिये”.

रजत- “ठीक हे पहन लो,मुझे तो बिना कपड़ो के ही अच्छी लगती हो”.

माँ- “वह तो हम जानते हे”.

काया- “भाई बाहर क्या जाना डिनर तो बना ही है, ये प्लान किसी और दिन के लिए बचा के रख लेते है”.

रजत- “क्यों”?

माया- “भाई काया ये कहना चाहती है, क्यों ना हम, आज छत पे ही खाना खाये आज चाँद भी पूरा हे बाहर, जायेंगे तो टाइम वेस्ट होगा”.

रजत- (मुस्कुराते हुए) “तो ये बात है,चलो जैसी तुम लोगो की मरजी पर शर्त ये रहेगी की छत पे कोई कपडे नही पहनेंगे”?

माँ- “मुझे पता ही था,अगर बाहर जाते तब भी तुम यही कहते”.

रजत- “माँ आप स्मार्ट हो गई हो”

रूपा- “फिर डिनर ऊपर ले चले”?

रजत- “हा चलो सब डिनर ऊपर ले चलो पर पहले यही कपडे उत्तारो”.

हम लोग अपने अपने कपडे उतार के डिनर लेकर ऊपर चले गये. छत पे भी एक टेबल था और कुर्सी थी हम लोग नंगे ही बैठ के खा रहे थे, चाँद की रौशनी में डिनर का मज़ा ही कुछ और होता है. हम लोगो ने डिनर किया फिर रूपा ने एक बटन दबाया. सामने दिवार पे एक मूवी स्टार्ट हो गई.

रजत- “वॉव प्रोजेक्टर कब लिया”?

माँ- “बस दो दिन पहले लिया,रूपा शॉप पे

आई थी उसे पसंद आया तो ले लिया”.

रजत- “इटस अमेजिंग,इस से बढ़िया

कुछ नही,एक दम थियटर जैसा फील हो रहा है”.

प्रोजेक्टर पे टाइटैनिक मूवी

लगी थी, एच डी मूवी का मज़ा ही कुछ और है, ऐसा लग रहा था हम समुन्दर में है. मैंने अपना सर माँ की गोद में रख दिया और लेट गया. मूवी देखने मे सब खो गये फिर वो सीन आया जब हेरोइन की नंगी पेंटिंग हीरो बनता है.

माँ- “हीरोइन क्या क्या कर लेती है, पैसो के लिये”.

रजत- “माँ ये तो कुछ नहि सनी लियोन तो चुद्वाती थी”.

माँ- “सच में”

रजत- “हा,मैंने बोला मैंने उसकी एक वीडियो देखि है जिसमे वो दो दो लड़को से चुद्वाती है”.

माँ- “पता नहि कैसे लड़किया दो दो लंड ले लेती हे”?

काया- “उसमे कोण सी बडी बात है, में भी ले सकती हूँ”.

रजत- “मेरी बात साफ सुन लो में तुम में

से किसी को शेयर नहि कर सकता, तो ऐसे ख्याल कभी मन में मत लाना,काया की शादी के बाद हम चारो ही खुब मस्ती करेंगे और बच्चों को देखेंगे.. में नहि चाहता,इस सिटी में हम ज्यादा लोगो के टच में रहे”.

माँ- “बेटा डोन्ट वरी हम में से कोई ऐसा नहि चाहता की कोई दूसरा हमे टच भी करे”.

फिर हम पांचों की मस्त चुदाई का दौर चला. में चारो को बारी बारी से चोदता रहा. चारो की गांड़ मारी जम के. चुत की धज्जीया उड़ा दी थक के पांचों वहि सो गये सुबह आंख खुली सूरज की पहली किरण से.

आज सूरज को कितने सालो बाद उगते हुये देखा था जो इतना रोमेंटिक लग रहा था. हम सब उठ गये थे. चारों की अंगडाई देख लंड खड हो गया था. मुझे प्रेशर बहुत तेज आया था. मन तीनो पे मुतना शुरू कर दिया.

माँ- “बेटा ये क्या किया”?.

रजत- “में क्या करता आप सब नंगी अंगडाई ले रही थी प्रेशर कंट्रोल नहि हुआ तो कर दिया. माँ- “कोई बात नहि अब चलो निचे, कोई हमे देख ना ले ऐसे”.

हम सब नीचे आ गये. माँ बोली तुम चारो फ़्रेश हो जाओ मे नाश्ता बनाती हूँ. आज कॉलेज का पता कर लो. हम सब फ्रेश होने चले गये. माँ ने नाश्ता बना दिया था ८ बज गये थे तभी रोहित आ गया.
 
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