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लाइफ हो तो ऐसी complete

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रोहित- “भाई क्या कर रहा हे”?

उसे देख के मैंने बोला सुबह सुबह यहाँ और पता किसने बताय”?

तभी राहुल बोला “और कोण में हूँ ना सब बताने के लिये”.

रजत- “आओ नाश्ता करो”.

राहुल- “रोहित बोल रहा था आज कॉलेज का पता करना है, तो में उसे ले आया”.

रजत- “काया भी रेडी है तीनो चलते हे”.

राहुल- “अब तो नई गाड़ी ले ली है, तो में चलता हूँ कोई प्रॉबलम हो तो कॉल कर

देना”.

राहुल नाश्ता करके चला गया. हम तीनो भी नाश्ता कर के कॉलेज का

पता करने चल पडे.

हम तीनो राहुल के बताये हुये कॉलेज पहुचे वह का माहोल तो सब

से अलग था.

रोहित- “भाई यह तो सब देखो कैसे कैसे कपडे पहन के घूम रहे है”

रजत- “यार यहाँ सब ऐसे ही है”

रोहित- “बहुत सुन्दर सुंदर लड़किया है, कोई पट जाये तो मज़ा आ जाये”.

रजत- “साले चुप कर काया हमारे साथ है”.

हम प्रिन्सीपल के ऑफिस में गये. प्रिंसिपल ने बताया अभी एडमिशन शुरू है तो फॉर्म लेकर भर दो”. हमने फॉर्म लिए. काया डॉक्टर

बनना चाहती थी तो उसे अलग डिपार्टमेंट में भेज दिया. हम दोनों एमबीए का फॉर्म लेकर भरने लगे. हमने फॉर्म भर दिया काया नज़र नहि आ रही थी.

हम उसे ढूँढने लगे. तभी लड़कियो की भीड़ में हमे वो नज़र आई. काया उनको लेकर हमारे पास आई.

काया- “ये मेरी क्लास मेट हे”.

रजत- “चलो अच्छा है”.

काया ने गर्ल्स को बताया ये मेरे भाई है. गर्ल्स हमें देख रही थी. एक बोली “तुम्हारा भाई बहुत हैंडसम है”.

काया- “भाई किसका है”

मैं बोला “चलो काया अब घर चलते है”.

काया- “नहि भाई आज में अपनी फ्रेंड्स को अपना होटल दिखाना चाहती हूँ”.

रोहित- “चलो भाई इस बहाने मैं भी होटल देख लुँगा, उस दिन सही से देखा नहि था”. हम बाहर आये और सब गर्ल्स कार में बैठ गई. हम होटल की तरफ चल पड़े एक लड़की बोली.

“मुझे विश्वास नहि होता तुम उस होटल के मालिक हो”.

रोहित- “चलो सब पता चल जायेगा”.

हम होटल पहुचे गये.

गर्ल्स- “इस होटल में सिटी में सब से ज्यादा महँगा खाना मिलता है”.

रजत- “डोन्ट वरी तुम लोगो से कोई पैसा नहि लेगा”.

हम होटल के गेट पे पहुचे तो दरबान से सैलूट मारा. लड़कियो के आगे अच्छा रोब पड़ रहा था. हमे देख होटल का स्टाफ़ आ गया. मैंनेजर- “सर आप”?

रजत- “मेरे फ्रेंड्स को लंच करना था तो यही ले आया”.

मैंनेजर ने वेटर को बुलाया और ऑर्डर लेने को बोला. वेटर ने उनको मैनु दिया. सब

लोगो ने हलका फूलका खाना ऑर्डर किया. तभी मेरी नज़र एक स्टाफ़ पे पड़ी मैंने उसे बुलाया. मैंने उसके बैच पे उसका नाम पढा रुचिका लिखा था.

रजत- “रुचिका कोई प्रॉबलम हे क्या”?

रुचिका- “नहि बॉस”.

रजत- “फिर उदास क्यों हो”?

रुचिका रोने लगी. काया उठ के उसके पास गई और बोली “चुप हो जाओ क्या हुआ भाई को बताओ भाई तुम्हारी हेल्प करेंगे”.

रुचिका- “मेरे हस्बैंड का लिवर ख़राब हो गया है, ओपरेशन करवाना है मेरे पास उतने पैसे नहि है”.

मैंने मैंनेजर को बुलाया. और पूछा “तुमने इसकी हेल्प करने की सोची क्यों नही? और मुझे बताया भी नहि”?

मैंनेजर- “सर अब हम क्या कर सकते है, हम तो बस १० -२० हज़ार की मदद कर सकते है”

रजत- “रुचिका तुमको कितने रुपयो की जरूरत है”?

रुचिका- “सर ७०००० डॉक्टर बोला है”.

रजत- “मैनेजर इसको पैसे दे दो और थोड़ा थोड़ा करके देती रहेगी ये”.

मैनेजर- “सर आप मालिक हो जैसा बोलेंगे कर दूंगा”.

रजत- “रुचिका जाओ रूपये ले लो और ओपरेशन जल्दी करवा लेना”.

रुचिका मैंनेजर के साथ चलि गई. वेटर हमारा ऑर्डर ले आया.

सब ने भर पेट् खाया. लड़किया बोली “सच में इस होटल के खाने का जवाब नहि”.

रजत- “में इस होटल को कुछ ही दिनों में और भी बढ़िया बना दूँगा बस कुछ आइडिया चाहिये जिसके लिए में दूसरे होटल वालो से मिलना चाहता हूँ, तभी हम अच्छे दोस्त बन सकेंगे, और बिजनेस को आगे बड़ा सकेंगे”. काया- “ये आईडिया बढ़िया है”.

मैंने मैनजर को पूछा “तुम लोगो ने आईडिया सोच लिये”?

मैंनेजर-“जी सर”.
 
सब ने भर पेट् खाया. लड़किया बोली “सच में इस होटल के खाने का जवाब नहि”.

रजत- “में इस होटल को कुछ ही दिनों में और भी बढ़िया बना दूँगा बस कुछ आइडिया चाहिये जिसके लिए में दूसरे होटल वालो से मिलना चाहता हूँ, तभी हम अच्छे दोस्त बन सकेंगे, और बिजनेस को आगे बड़ा सकेंगे”. काया- “ये आईडिया बढ़िया है”.

मैंने मैनजर को पूछा “तुम लोगो ने आईडिया सोच लिये”?

मैंनेजर-“जी सर”.

मैंने गर्ल्स को बोला इंजॉय करो में आता हूँ. में स्टाफ़ के पास खड़ा हो के उनसे बात करने लगा.

मैंनेजर:- “सर हमारे यहाँ ज्यादा तर नॉनवेज बनता हे. पर आगर हम वेज फ़ूड भी बनाने के लिए एक चीफ रख ले तो बहुत बढ़िया होगा”.

रजत:- “तो रख लो”.

मैंनेजर:- “इसके लिए हमे एक ऐड करनी होगी होटल की. और स्टाफ़ चाहता हे इस होटल का नाम चेंज कर दिया जाये. क्यों की सेम नाम के दो और होटल हे”?.

रजत:- “तो कोई नाम सोचा हे आप लोगो ने”?

मैंनेजर:- “क्यों ना, स्टार बीच रिसोर्ट रख ले, और स्टाफ चाहते है आप बीच के पास एक छोटा सा कैफ़े भी खोल दे ताकि कस्टमर कोई कोई प्रॉब्लम ना हो”.

रजत:- “आईडिया अच्छा हे, ऐड के लिए न्यूज़ पेपर और केबल टीवी वालो से बात कर लो में होटल का नाम चेंज करने की तेयारी करता हूँ, होटल को नई लुक देंगे. जो कूल भी लगे. और होटल के रूम में भी बदलाव कर देते है जिस से सब को आराम रहेगा, हो सके तो स्टाफ बढाओ जरुरत के मुताबिक”.

मैनेजर:- “ठीक हे सर”.

रजत:- “कुछ दिन में कोंट्रेक्टर को भेजता हु”

पेंटिंग और निचे का काम करवा लेना,हर सामान अच्छे क्वालिटी का हो”

मैंनेजर:- “ओके सर”.

में रोहित काया के पास आ गया. मैंने अपना

प्लान उनको बताया. उनमे से एक के डैड केबल चैनल के मालिक थे तो उसने

बोला में डैड से बात करुँगी. फिर हम बीच पे घुमने लगे.

गर्ल्स बोली “काया हम चलते हे हमे लेट हो रहा है घर वाले चिंता कर रहे होंगे”?

काया ने सब को बाई बोला मुझे तो वो गर्ल्स बहुत अच्छी लगी सोच रहा था पटा के

इनको यही चोदूंगा.

काया:- “भाई ये जगह कितनी शांत हे ठण्डी हवा भी चलती है”?

रजत:- “हा अब हम भी घर चले रूपा माया दीदी घर में अकेली है”. हम तीनो घर की तरफ चल पड़े. रोहित बिच में उत्तर गया. हम दोनों

घर पहुचे तो माया दी और रूपा टीवी देख रही थी.

हमे देख के माया दी बोली “हो गया एडमिशन”?

रजत:- “हा जी हो गया, बस अब क्लास शुरू करनी हे”.

माया दी बोली “चलो ये ठीक हुआ”.

रूपा हम दोनो के लिए सुप बना के लाई. रूपा:- “टाइम मिला तो माँ की भी हेल्प कर दिया करो अकेले क्या क्या करेंगी”?.

रजत:- “तुम दोनों घर में रहती हो माँ की हेल्प तुम भी तो कर सकती हो”?.

माया:- “भाई में तो पार्लर जाने लगूँगी रूपा ही जाये मोम के साथ, रोज घर में वेसे भी बोर हो जाती हे”?

रूपा:- “ठीक हे कल से में ही माँ की हेल्प कर दूंगी तुम सब बस घुमना”.

हम तीनो हॅसने लगे. मैंने रूपा को अपनी गोद में बैठा लिया.

रजत:- “मेरी प्यारी बीवी क्यों नाराज़ हो रही हो, में तो मजाक कर रहा था, इतना हसीन चहेरा उदास अच्छा नहि लगता और. मैंने रूपा के होठ चूसने शुरू कर दिये.

रूपा:- “छोड़ो भी क्या हर वक़्त मस्ती करते रहते हो”?.

रजत:- “मस्ती की उम्र है, तो मस्ती ही करूँगा”.

मैंने रूपा के सूट में हाथ डाल उसकी चूचि पकड़ ली और दबाने लगा.

रूपा:- “क्या कर रहे हो छोड़ो ना”?

रजत:- “तुमसे शादी छोड़ने के लिए नहि की हे तुमको दिन रात चोदने के लिए की हे”.

रूपा शर्मा के बोली “बस तुम को तो बस यही सूझता हे. तीन तीन बीविया हे कितना चोदोगे, वेसे भी मेरा पीरियड चल रहा है”. रजत:- “तो ठीक है गांड़ ही मारवा लो”?

रूपा:- “प्लीज छोड़ो ना नाईट में कर लेना” तभी मुझे कोमल आंटी का कॉल आया.

मैंने कॉल उठाया आंटी ने घर आने को बोला जरुरी काम हे कोई. मैंने तीनो को बोला रोहित के घर जा रहा हूँ. मैंने बाइक उठाई और चल पड़ा तभी मुझे रोहित की बिल्डिंग में जनि पहचानी सूरत नज़र आई में सोचने लगा आखिर इसे कहा देखा है. तभी याद आया ये तो बुढे की पोती लीना हे. मैंने बाइक पार्क की और लिफ्ट में

घूस गया. मैंने जान बूझ के रोहित के फ्लेट के ऊपर वाला बटन दबा दीया.

रजत- “कया में आप को जनता हूँ”?

लड़की गोर से देख के बोली

“हा आप हमारे नये पडोसी है, उस दिन में आप के घर भी आई थी जब मेरे दादा जी आप के घर आये हुए थे”.
 
लिना एक दम सेक्स बम थी पर ये यहाँ क्या करने आई हे.

रजत- “आप की कोई फ्रैंड यहाँ रहती हे क्या”?.

लीन- “हा मेरी क्लोज फ्रेंड यही रहती हे”.

हम दोनों अपनी मंजिल पे पहुंच गये. लीना उसी रूम के सामने जा के रुकि जिसके सामने बूढा रुका था. में निचे आ गया बेल्ल बजाई तो आंटी ने डोर खोला. उनके साथ एक खूबसूरत ओरत भी थी उम्र होगी कोई २६-२८ बड़ी बड़ी चूचिया. उठि हुई गांड़ रूंग

थोड़ा सांवला था. पर बहुत खूबसूरत लग रही थी.

आंटी- “अंदर आओ रजत”.

में अंदर आ गया.

रजत- “क्या बात हे आंटी मुझे याद किया”? आंटी- “ये मेरी नई फ्रेंड नीलम हे”.

मैंने उसे हाय बोला. फिर आंटी के साथ बैठ गया.

आंटी- “इसके हसबैंड की जॉब चलि गई हे और इसे एक जॉब चाहिए”.

मैंने- “आंटी क्या काम कर सकती हे?

आंटी मुस्कुरा कर बोली “काम तुम दिलवा दो जो बोलोगे मिलेगा”.

आंटी ने मुझे आंख मार के समझा दिया.

रजत- “माया दी के लिए पार्लर खोल रहा हूँ वहा इनको जॉब मिल सकती हे, पर स्टार्ट होने में १५-२० दिन तो लग ही जायेंगे”.

नीलम- “कोई बात नहि में वेट कर लूँगी”.

रजत- “ऐसे नहि में आप को होटल में रूम क्लीनर की जॉब दे सकता हूँ, पर मुझे क्या मिलेगा”?

आंटी ने नीलम को इशारा किया. नीलम उठ के मेरी गोद में बैठ गई.

नीलम- “सर जो मांगोगे दूंगी”.

रजत- “आंटी घर में और कोई तो नहि”? आंटी- “नहि”.

रजत- “नीलम देखो मुझे औरते बहुत पसंद हे और मदमस्त औरते तो मत पुछो, तुम मेरा ख्याल रखोगी तो में तुम्हारा अच्छे से खयाल रखूँगा, तुम्हारे हसबैंड क्या करते हे”?.

नीलम- “एक होटल में शेफ थे”.

रजत- “मुझे के शेफ चाहिए पर मेरा होटल बहुत बड़ा है, और वहा खाना बढ़िया बनाना चाहिए, नाम ख़राब नहि करना चाहता”

नीलम- “मेरा पती पेशेवर बावरची हे, मेरे हिसाब से उस से बढ़िया वेज खाना कोई नहि बना सकता”

रजत- “ठीक हे कल उसे मेरे होटल में भेज देना मे उसका टेस्ट ले लुँगा, अगर पास हो गया तो परमामेंट उसे रख लुँगा, और तुम दोनो एक ही होटल में रहोगे तो टेंशन नहि होगी तुम दोनों को”

आंटी- “काम तो मिल गया अब रजत को इनाम देणे की बारी है”.

रजत- “में अपना इनाम तो ले कर ही रहूँगा”. मैंने नीलम की नरम, नरम चुचीयो पे हाथ रख दिया. नीलम अपनी गांड मेरे लंड पे रगड रही थी.

रजत- “आंटी आप ने मुझे अच्छा ईनाम दिया है, नीलम बहुत सेक्सी लेडी हे इसे चोदने में मज़ा आयेगा”.

आंटी- “मुझे मत भूल जाना”.

रजत- “आंटी आपको कैसे भूल सकता हु? तो मेरी फ़ेवरेट हो”.

आंटी- “तुम दोनों अंदर चले जाओ”.

मैंने नीलम को गोद में उठा लिया और बेड पे लिटा दीया. नीलम मुझे देख रही थी. मैंने अपनी पेण्ट और शर्ट उतार दी. में निकर में

था मेरा लंड एक दम खड़ा हो गया था. नीलम उसे देख और भी उतेजित हो रही थी

मे नीलम के ऊपर लेट गया. उसके होठ चुसने लगा. उसकी नरम नरम चूचिया

दबाते हुए बोला “नीलम कितनो से चुदवाया हे”?.

नीलम- “अब तक दो से”.

रहत- “दो यानि अपने पति और बॉय फ्रेंड से”. नीलम- “नहि पति और अपने बडे भाई से”. रजत- “आज कल सब लड़के बहन चोद बन गये हे”.

नीलम- “तुम भी उनमे से एक हो कोमल ने बताय मुझे”.

रजत- “वो तो हूँ में”.

मैंने नीलम का सूट उतार दिया फिर सलवार भी. नीलम अब पेन्टी और ब्रा में थी में उसकी ब्रा के ऊपर से

उसकी चुचीयो को मसल रहा था. मैं नीलम की चूचियों को दबा दबा के चुस्ने लगा. नीलम मेरे लंड को

सहला रही थी.फिर में लेट गया नीलम मेरे लंड के सामने थी नीलम ने लंड को

मुट्ठी में दबा कर रक्खा था. नीलम ने जीभ निकली और लंड मुण्ड को चाटने लगी.नीलम लोलीपोप की तरह चुस रही थी. नीलम ने लंड को मुह में लेना शुरू कर दिया.

रजत- “ “मज़ा आ रहा हे”.

नीलम- “मुझे तो पता ही नहि था लंड चुस्ने मे इतना मज़ा आता हे”.

मैंने नीलम के मुह में धक्के मारने शुरू कर दिए.

उसके बाल पकड़ के जोर जोर से धक्के मार रहा था. मेरा लंड उसके हल्क में उतरा

जा रहा था. नीलम को साँस लेने में दिक्कत होने लगी फिर में रुक गया. मैंने नीलम

को लिटा दिया और उसकी टाँगे कंधे पर रख के लंड चुत से सटा दिया. नीलम की

चुत गिल्ली हो गई थी. मेरा लंड उसकी चुत के छेद से रगड खा रहा था. नीलम

भी कमर उठा के लंड से चुत रगड रही थी. मैंने उसकी जांघो को जोर से पकड़

लिया क्यों की में जानता था. मेरा लंड चुत में जाते ही नीलम भागने लगेगी. मैंने

लंड चुत पे रख के जोर से धक्का मारा. मेरा लंड नीलम की चुत चिरता हुआ फस गया. नीलम की चीख निकल गई.
 
मैंने नीलम की जांघे छोड़ दी और उसकी

चुचियो को पकड़ लिया और मसलने लगा. नीलम अभी भी दर्द से चीख रही थी.

नीलम की चुत में मेरा आधा लंड फस चुका था. नीलम अपने दोनों हाथो से मुझे

धकेल रही थी. मैंने झुक के उसके होठो को चुसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर

बाद नीलम भी मेरे होठो को चुस्ने लगी. हम दोनों एक दूसरे हे होठ चुस्ने

मे खो गए फिर मैंने धक्के लगाने भी शुरू कर दिए.नीलम की चुत बहुत टाइट थी

एक दम कुवारी लड़की हो जैसे. नीलम की चुत फट गई थी. उस से खून निकलने लगा था. नीलम दर्द से कराहती रही. फिर थोड़ी देर बाद शांत होने लगी. नीलम भी मेरा साथ देणे लगी. मैंने नीलम की एक चूचि को मुह में दाल जोर जोर से धक्के मारने लगा. नीलम भी चीख़ने सिसकिया लेने लगी

"हाय माँ मर गयी…मेरी.. तो.. फट… गयी.... में नीलम की चुत मारता रहा नीलम झड गई.

रजत- “अब में तुझे कतिया की तरह चोदूँगा”. नीलम- “जैसे चोदना हे चोदो राजा बहुत मज़ा आ रहा हे”.

रजत ने नीलम को डॉगी पोज में बेठने को बोला. नीलम उठ के अपनी चुत

देखने लगी. चुत से खून अभी भी निकल रहा था. चुत का मुह खुल गया था.

पहले से ज्यादा बड़ी लग रही थी. नीलम कुतीया की तरह झुक गई. मैंने उसकी गांड़ को देखा बहुत टाइट नज़र आ रही थी.मैंने नीलम की गांड़ में ऊँगली ड़ालना शुरू कर

दिया. नीलम को हल्का दर्द हुआ.

नीलम- “गांड़ मारनी हे तो कुछ लगा लो लंड पे”.

रजत- “मारनी तो है पर गांड़ मारूँगा तो तुम चल भी नहि पाओगी”.

नीलम- “तुम मेर फ़िक्र मत करो तुमको जो अच्छा लगे लगाना”.

रजत- “ठीक हे रुको देखता हूँ कुछ हे यहाँ”. तभी मेरी नजर बॉडी लोशन पे गया. में उसे लेकर आया मैंने लोशन नीलम की गांड़ पे गिरा दिया. फिर उंगली से अंदर करने लगा.

मैंने लोशन फिर अपने लंड पे लगाया.

रजत- “नीलम अपनी गांड़ ऊपर करो अब लंड घुसाने जा रहा हूँ”.

नीलम- “डाल दो राजा इंतजार किस बात का है”.

अपना लंड पकड़ के गांड़ में ढ़केलने लगा. लोशन की वजह से मेरा लंड जैसे

जैसे अंदर जा रहा था नीलम की हालत ख़राब हो रही थी फिर नीलम बोली “बस रुक जाओ बहुत दर्द हो रहा है”.

में रुक गया और नीलम की चुत मसलने लगा. नीलम को भी ऐसा करना पसंद आया. मैंने दो उंगली चुत में दाल दी और चुत में उंगली करने लगा. थोडि देर बाद

नीलम बोली “अब एक ही बार में घूसा दो”. मैंने लंड पीछे किया ओर कमर पकड़ के जोर से धक्का मार दिया. मेरा लंड नीलम की गांड़ में पूरा घुस गया. लंड घुसते ही नीलम बिस्तर पे गिर गई साथ मे मैं भी उसके ऊपर गिर गया.

नीलम एक दम शांत लेटी रही. में नीलम की गांड़ पे बैठ गया और उसकी गांड़

मसलने लगा मैंने नीलम की गांड़ को जोर से दबाया गांड़ लाल होने लगी थोड़ी देर लंड

अंदर बाहर करता रहा धीरे धीरे फिर में नीलम के ऊपर लेट के जोर जोर से धक्के

मारने लगा. नीलम बिस्तर पे अपने हाथ पेर मारने लगी. उसे दर्द हो रहा था पर

अब मुझे उसकी परवाह नहि थी. मैंने गांड़ की जोर दार चुदाई शुरू कर दी. थोड़ी

देर बाद नीलम को खुद ही आराम आ गया. में ऊपर से धक्के मारते मारते थक गया था. मैंने नीलम को अपने ऊपर कर लिया नीलम मेरे ऊपर थी नीलम अपनी गांड़ धीरे धीरे ऊपर निचे कर रही थी. मैंने उसकी गांड़ पे थप्पड़ मारने शुरू कर दिये. मेरे थप्पड़ पड़ने से नीलम समझ गई उसे अब तेज़ तेज़ कूदना होगा लंड पे. नीलम लंड पे कुदने लगी. लंड पे कुदने से थप थप की आवाज आने लगी बेड से. में भी धक्के मारने लगा. नीलम की गांड़ में मक्खन की तरह लंड जा रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही गांड़ मारने के बाद मैंने नीलम को बोला “अब घूम जाओ”

नीलम घूम के मेरे लंड को गांड़ में लेने लगी. पर मैंने उसकी चुत में लंड घुसा दिया और नीलम को अपने ऊपर खीच लिया. में नीलम की चुत मारने लगा.

नीलम भी मेरे लंड पर चुदती रही. मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और चुसने लगा. मेरे धक्कों से नीलम फिर से झड गई. में भी झड़ने वाला था जैसे ही मेरा पाणी निकलने वाला था मैंने नीलम को बेड पे लिटा दिया और लंड निकाल के उसके मुह में डाल दिया. दो तीन धक्कों के बाद में नीलम के मुह में झड़ने लगा. नीलम मेरा

पाणी पिने लगी. नीलम ने बिना गिराये सारा पाणी पि लिया. चुदाई का नशा ऐसा

चढ़ा की नीलम तब तक मेरा लंड चुस्ती रही जब तक मेरा लंड मुर्झा ना गया.

फिर में नीलम के साथ लेट गया.

नीलम- “राजा आज तुम्हने मेरी फाड् दी, आज चुदाई का असली मज़ा आया है, अब में तुमसे चुद्वाती रहूँगी”.

रजत- “जब मन हो बता देना नंगा करके चोद दूंगा”.

फिर मैंने निकर पहनी और बाहर आ गया.

बाहर कोमल आंटी मेरा इंतज़ार कर रही थी. आंटी- “बताओ मज़ा आया”?

मैंने- “बहुत मज़ा आया”.

तभी नीलम कपडे पहन के आ गई. उसको चलने में दिक्कत हो रही थी. नीलम लंगड़ा रही थी.

आंटी- “नीलम ठीक हो ना”?.

नीलम- “राजा जी ने फाड़ दी मेरी चुत मारी तो मारी गांड़ भी फाड् दी अब कुछ दिन आराम करुँगी”.

तभी मुझे लीना के बारे में याद आया

मैंने आंटी को पूछा “ऊपर सेकन्ड रूम में

कौन रहता है”?

नीलम- “वहा एक बूढ़ा रहता है अपनी पोती के साथ कभी कभी आता है”.

रजत- “उसका घर तो मेरे घर के पास ही हे फिर यहाँ क्या करने आता है”?

नीलम- “बूढ़ा ऐयाश हे यहाँ उसने ऐयाशी के लिए रूम ले रखा है, मैंने कई दिन उसे लड़कियो को लेकर आते देखा है”.

रजत- “ऐसी बात फिर तो बुढे को लाइन पे लाना होगा उसकी पोती बहुत हॉट हे”.

नीलम- “बूढ़ा हरामी हे अपनी पोती को भी नही छोड़ा होगा”

फिर मैं उनको बाय बोलकर घर चला आया.
 
देरी के लिये माफी चाहता हु वक्त की कमी के कारण कुछ कहानियों के अपडेट नही दे पा रहा था पर अब अपडेट जल्द से जल्द देने की कोशिश करूंगा. इस कहानी का अपडेट कल दूंगा
 
घर आया तो राहुल आया हुआ था एक कॉन्ट्रेक्टर को लेकर जो १५ दिन

मे सब काम कर के दे सकता था. वो सब गार्डन में बैठे थे. में उनके पास

गया. राहुल बोला रजत “ये कॉन्ट्रेक्टर हे होटल जैसा बोलोगे वैसा कर देंगे”.

मैंने बोला “मुझे कुछ पेंटिंग्स भी चाहिए. हमारे होटल में जी फोटोज हे पुरानी हे, में

चाहत हूँ कोई अच्छा पेंटर हो तो उसे बोलो वो हमारे आर्ट से मेरे होटल का लुक बदल

दे”.

कॉन्ट्रेक्टर बोला “सर आप फिकर मत करो मेरे पास है आप बोलो क्या क्या काम करना है”?

मैंने बोला “में तो जल्दी से जल्दी काम करवाना चाहता हूँ, पैटिंग और निचे एक स्पा बनवाना हे”.

कॉन्ट्रेक्टर बोला “ठीक हे”.

मैंने बोला “रूम में भी पेंटिंग हो जाये तो अच्छा होगा”.

कॉन्ट्रेक्टर बोला “जैसा बोलेंगे आप वैसा बना दूंगा”.

मैं बोला “पैसो की परवाह मत करना आप बस होटल बढ़िया बना देना मेरे कस्टमर को कोई दिक्कत न हो जब में इसे खोलू फिर से”.

कंट्रेक्टर बोला “सर डोन्ट वर्री,सब बड़े होटल का काम हम ही करते हे कोई शिकायत का मोका नहि मिलेगा आप को” फिर राहुल और कॉन्ट्रैक्टर चले गये. सूरज ढल गया था. माँ भी आ गई.

मैंने बोला “मॉम काम कैसा चल रहा हे”? माँ बोली “बहुत ही भीड़ रहती हे मुझे तो लगता है जल्द ही और लोगो को काम पे रखना पड़ेगा और माल भी अब ज्यादा पैमाने पे मंगवाना पड़ेगा”.

मैं बोला “तो मंगवा वो लो दिक्कत क्या है”?

माँ बोली “दिक्कत ये ही हमारे कोंटेक्ट वाले बोल रहे हे यहाँ माल भेजना बहुत ही महंगा पड़ रहा है”

मैं बोला “तो आप बोलो क्या करना हे”? माँ बोली “ट्रांसपोर्ट की जगह शिप से माल मँगवा लेते है, मुंबई और कोलकता के माल की कोई दिक्कत नहि हे वो शिप से भेज देंगे, पर यूपी और दिल्ली से आने वाला माल कैसे मंगवाये”?

मैं बोला “बस इतना आप ऐसा करो उनको बोलो मुंबई माल भेज दे वहा से शिप से मँगवा लेते है”

माँ बोली “हा ये ठीक रहेगा”

माँ बोली “बहुत भूख लगी हे”

मैंने रूपा से पूछा “डिनर रेडी हे क्या”? रूपा बोली “हा जी रेडी हे आप सब हाथ मुह धोलो में डिनर लगाती हूँ”

हम सब हाथ मुह धोके आये. आज सी फ़ूड बना हुआ था.

मैंने पूछा “ये सब कहा से लायी”?

माया दीदी “राहुल आया था वो कुछ फिश और केकडे ले आया था, हमे बनाना नहि आता था, तो ऑनलाइन ही देख के बना दिया खाके बाताओ कैसा बना हे”?

मैंने बोला “मेरी प्यारी बीवियो ने बनाया हे तो बहुत अच्छा बना होगा”.

मैं बोला “तुम दोनों भी आओ खा लो हम सब बैठ गये डिनर बहुत लजीज बना हुआ था.

मैं बोला “वाक़ई बहुत टेस्टी हे”.

माँ बोली “सही में मज़ा आ गया”.

रूपा बोली “माँ आप से अच्छा नहि बनाते हम”.

माँ बोली “कोन कहता हे, मेरी बहुये तो मुझसे अच्छा बनाती है”.

हम सब ने पेट् भर के खाना खाया. रूपा और माया दीदी बर्तन धोने लगी. में उनके पास गया. दोनों ही अब घर में शार्ट पाजामे पहनने लगी थी जिस से उनकी गांड़ और भी मस्त लगती थी. मैंने दोनों की गांड़ के पत्तो को पकड़ के दबा दिया. दोनों मेरी तरफ देख के बोली “क्या कर रहे हो बर्तन धोने दो ना”.

मैंने बोला “तो बर्तन धोती रहो”.

माया दीदी बोली “ऐसे परेशान करोगे तो कैसे काम करेंगे हम”?.

मैंने पाजामे के ऊपर से दोनों की की चुत

पकड़ ली दोनों की सिसकी निकल गई "उई मा...

रूपा बोली “क्या कर रहे हो, छोड़ो भी”

मैंने बोला “काम करो और मुझे करने दो”. मैंने माया दी का पाजामे उतार दिया. माया दी अपनी गांड़ पीछे कर के झुक के बर्तन रखने लगी. मैंने उनकी पेन्टी हटा के गांड़ चाटने लगा. माया दीदी को मज़ा आ रहा था मैंने माया दीदी की टांग खोल पेन्टी हटा के चुत चाटने लगा. माया दीदी सिसकिया लेने लगी. मैंने माया दीदी की चुत में जीभ दाल के चाटने लगा. माया दीदी जोर जोर से सिसकिया लेने लगी.

मैंने माया दीदी की चुत चाट चाट के साफ कर दी थी. मैंने माया दीदी की गांड़ भी चाटी. फिर मैंने रूपा को सीधा कर दिया. उसकी पेन्टी के साथ पाजामे उतार दिया और सीधा उसकी गर्म गर्म चुत पे

अपने होठ रख दिये. मेरे होठ रखते ही रूपा की ऑंखे बंद हो गई.
 
माया दीदी ने सारे बर्तन रख दिये और खड़ी रही. मैंने अपना उंगूठा उसकी गांड़ में दाल दिया

और एक उंगली चुत में और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा. में रूपा की चुत दाँतो से चबा रहा था. दोनों लड़किया मदहोश हो गई थी. थोड़ी देर चुसने के बाद में खड हो गया. मैंने दोनों को लंड चुसने को बोला. दोनों निचे बैठ गई मैंने अपना लंड बाहर निकल दिया रूपा लंड मुह में लेकर चुसने लगी और माया दीदी मेरी गोलियो को चुस रही थी. बहुत ही रोमेंटिक और कामुक अहसास था. में दोनों को चुसवाते रहा.

फिर मैंने दोनों को खड़े होने को बोला फिर दोनों की टीशर्ट के ऊपर से चुचियो को मसलते हुए दोनों के होठ चुसने लगा दोनों मेरे होठो को भी चुस्ती रही. फिर मैंने माया दीदी की टांग उठा ली और रूपा को चुत लंड चुस्ने को बोला रूपा निचे बैठ गई और माया दीदी की चूत चाटने लगी. मैंने अपना लंड भी माया दीदी की चूत से चिपका दिया. रूपा मेरे लंड को भी चाट रही थी. फिर मैंने अपना लंड माया दीदी की चुत में घूसा दिया. रूपा निचे बैठी हुई लंड चुत को चाट रही थी.

लंड अंदर जाते ही माया दीदी को दर्द हुआ उनकी चीख निकल गई

उई...... मा.... भाई.......

धीरे....... धेरे... दर्द हो रहा

है.....

मैंने बोला “जान दर्द में ही तो मज़ा हे”. मैंने रूपा को बोला “दीदी की गांड़ में

दो उंगलिया डाल के अंदर बाहर करो”. रूपा ने अपने मुह में अपनी उंगलिया डाली और माया दीदी की गांड़ में घुसा दी. अब रूपा माया दीदी की गांड़ में उंगली अंदर बाहर कर रही थी और में माया दीदी की चूचि पकड़ के जोर जोर स धक्के मार रहा हूँ ,.

माया दीदी को खड़े खड़े थकन होने लगी उनकी टांगे काप रही थी. मैंने जम के

माया दीदी की चुत मारना शुरू कर दिया. माया दीदी भी कुछ देर बाद साथ देणे

लगी. में माया दीदी की चुत में जब भी लंड घुसाता उनके मुह से ऊई..

आह.... मा.... निकलता. मेरा लंड

माया दीदी के गर्भ से टकराता रहा और

माया दीदी और जोर जोर से चोदने को बोला रही थी. रूपा भी माया

दीदी की गांड़ में उंगलिया डाले जा रही थी.

माया दीदी मुझे बोली “गोद में उठाकर चोदो”.

मैंने माया दीदी को गोद में उठा लिया. मेरा लंड माया दीदी की चुत में

पुरा घुस गया था. रूपा साइड में खड़ी हो गई. में माया दीदी को गोद में उठा के जोर जोर से धक्के मारने लगा. माया दीदी ने मेरे गले में अपना हाथ मजबूती से

डाल रखा था. माया दीदी मेरे होठो को चुसे जा रही है. में माया दीदी की चुत

मारे जा रहा था थप थप थप की आवाज निकलने लगी. माया दीदी को चुत से पाणी

टप टप फ़र्श पे गिर रहा था. माया दीदी झड चुकी थी. मेरा भी पाणी निकलने वाला था मैंने माया दीदी की चुत जोर जोर से चोदने लगा. मेरा पाणी निकलने लगा. मेरे गर्म पाणी के अहसास से माया दीदी और भी उतेजित और कामुक अवाजे निकाल रही थी.

माया दीदी बोली “डालो भाई और डालो आज मुझे प्रेग्नेंट बना दो मुझे तुम्हारा बच्चा चाहिये अपने पेट् में”.

मैंने और जोर जोर से धक्के मार के माया दीदी की चुत भर दी.

मेरा लंड माया दीदी की चुत में था.

थोड़ी देर ऐसे ही गोद में उठाये में सोफ़े पे ले गया माया दीदी को. माया दीदी

मेरी गोद में बैठी हुई मेरे होठ चूम रही थी.

माया दीदी बोल “आई लव यु भाई”

मैं बोला “आई लव यु दीदी”.

रूपा बोली “तुम दोनों पति पत्नी हो फिर भी भाई बहिन ही क्यों बुलाते हो”?

मैंने रूपा को अपनी तरफ खीच के बोला “जान क्यों की बिवी तुम हो मेरी असली” मैंने रूपा के होठो को चूम लिया. रूपा शर्मा गई. माया दीदी मेरी गोद

से उतर गई और सोफ़े पे लेट कर टाँगे उठाने लगी.

मैं बोला “ये क्या कर रही हो”?

माया दीदी बोली “में तेरे बीज़ का एक भी हिस्सा बरबाद नहि करना चाहती. इस लिए ऐसे लेट रही हूँ”

मैं बोला “ये बात हे”.

मेरा लंड एक दम गिला था.

मैं बोला “मेरी प्यारी बीवी मेरे लंड को जरा चाट कर साफ करो तो”.

रूपा मेरी बात सुन के मेरे लंड को मुह में डाल के चुस्ने लगी.

मैं बोला “तुम कितना अच्छा लंड चुस्ती हो सारी थकन ही मीट जाती हे”.

रूपा बोली “आप ने ही तो सिखाया मुझे ये सब”.
 
मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा. रूपा जोर जोर से चुस रही थी.

मैंने रूपा को बोला “सोफ़े पे खड़ी हो जाओ”.

रूपा लंड चुसना छोड़ मेरे सामने सोफ़े पे खड़ी हो गई. मैंने उसकी चुत देखि

बहुत गिल्ली थी मैंने उसकी चुत में उंगली डाल के पाणी को चाट कर बोला “वॉव बहुत टेस्टी है ये तो”

रूपा शर्मा के बोली “आप से टेस्टी नहि हे”.

मैं बोला “नही तुम्हारा टेस्टी है”.

रूपा बोली “आप को मेरा टेस्टी लगता हे पर मुझे दुनिया में सब से ज्यादा आप का टेस्टी लगता है”.

मैंने रुपा की चूत को चूमा एक दम गरम थी.

मैं बोला “अंदर कोई भट्टी लगा रखी हे क्या जो इतनी गरम हे”?

रूपा बोली “आप पास आते हो तो अंदर आग लग जाती हे में क्या करू”.

मैं बोला “कोई बात नहि इस आग को ठण्डा भी में ही करूँगा”.

मैंने रूपा की चुत चाटना शुरू कर दिया. रूपा एक दम पागल हो गई थी मेरे चुत चाटते ही मेरे सर को जोर जोर से दबा के अपनी चुत चटवाने लगी. मैंने भी उसकी चुत की जम के चुसाई की. मैंने उसकी चुत को फैला फैला के चूसा. उंगली डाल डाल के चूसा. चुत का रूंग ही बदलने लगा. मैंने रूपा की चूत चाटना बंद कर दिया मेरा लंड भी एक दम तन गया था. मैंने रूपा को सोफ़े के ऊपर की झुका दिया और अपने लंड पे थुक लगा के सहलाने लगा. में सोफ़े पे चढ़ गया. मैंने लंड पकड़ के रूपा की चुत पे रख दिया. में लंड को रूपा की चुत पे घिस रहा था. रूपा चुदाई की ख़ुमारी में सिसकिया लेने लगी. मैंने अपना लंड उसकी चूत में उतारना शुरू कर दिया. मैंने रूपा की दोनों चुचियो को पकड़ लिया और उसकी चुत में एक ही बार में लंड पूरा घूसा दिया. रूपा तड़प के रह गई.

मैंने रूपा की चुचियो को कस के पकड़ लिया और जोर जोर से धक्के मारने लगा. रूपा सोफ़े को पकड के खड़ी खड़ी चुद्वाती रही. रूपा की सिसकिया बढ़ रही थी

“वुई मा.....

धीरे....धीरे….

मर..... गयी..... माँ प्लीज जान धीरे चोदो बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चुत फट गई मा”

मैंने बोला "जान आज तुम्हारी फटेंगी ही नहीं बल्कि जन्नत पर पहुँचा दूंगा तुमको"

रूपा बोली "पहुंचा दो मुझे जन्नत का सुख दे दो मुझे".

मे रूपा की चुत मारता रहा. फिर मैंने रूपा की कमर कस के पकड़ ली और सोफ़े से निचे उत्तर गया, मेरा लंड अभी भी रूपा की चूत में समाया हुआ था. में रूपा को लेकर जमीन पर लेट गया, मैंने रूपा की एक टांग उठा के धक्के मारना शुरू कर दिया रूपा मेरा हाथ अपनी चूचियों पे दबा रही थी. में जोर जोर से धक्के मार रहा था. तभी रूपा झड़ने लगी. मैंने लंड चुत से निकल लिया. रूपा की चुत से उसका पाणी नीकल रहा था मैंने लंड पे पाणी लगाया और रूपा के मुह में डाल दिया. रूपा मेरे लंड को चुस्ने लगी. रूपा ने लंड चूसना जारी रक्खा मैंने भी झुक के उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया ६९ की पोज मे हम दोनों एक दूसरे को चुस रहे थे. में रूपा के मुह में धक्के मार रहा था, रूपा भी कमर उठा उठा के मुझसे चुत चटवा रही थी. रूपा की बुर फिर से

तय्यार थी चुदने के लिए पर मेरा मन कुछ और करने को था.

मैंने रूपा को बोला “मैं गांड़ मारूँगा अब”. रूपा बोली “जो करना हो कर लिया करो पूछा मत करो”.

मैंने रूपा को चित मुह के बल लिटा दिया और उसकी गांड़ फैला के थूक दिया फिर लंड पे थुक लगा के लंड उसकी गांड़ में घुसाने लगा. मेरा लंड बहुत मुश्किल से गांड़ में घूस पाया. रूपा अपना मुह बंद किये लेटी रही. उसने अपने मुह को अपने हाथ से दबा रखा था. उसने अपने दाँतो से अपने हाथ को काट लिया था मैंने अपना लंड उसकी गांड़ में पूरा घूसा दिया. रूपा को दर्द हो रहा था इस लिए में रुक गया में उसकी चूचियों को दबाने लगा.थोड़ी देर बाद रूपा अपनी गांड़ हिलाने लगी तब में

धीरे धीरे उसकी गांड़ मारने लगा. रूपा भी अब अपनी गांड़ उछाल उछाल के मरवा रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने रूपा को अपने ऊपर आने को बोला. में निचे लेट गया रूपा मेरे ऊपर आ गई मैंने उसकी गांड़ में लंड घूसा के चोदना शरू कर दिया. रूपा भी मेरे लंड पे कुदती रही मैंने फिर लंड गांड़ से निकल के चुत में घूसा दीया. और रूपा की जम के चुदाई शुरू कर दी रूपा जल्द ही झडने लगी में भी झडने वाला हो गया था. माया दीदी हमे देख रही थी. रूपा झड़ना शुरू हो गयी. मैंने रूपा को निचे किया और जोर जोर से धक्के मारना शुरू कर दिया. में भी रूपा की चुत में झड़ने लगा. मैंने अपना सारा बीज़ रूपा की चुत में डाल दिया आज दोनो लड़कियो ने एक बून्द भी निचे नहि गिरने दिया. दोनों माँ बनने को उतावली थी.दोनो की जम के चुदाई के बाद थक गया था. में रूपा और माया दीदी के साथ रूम में गया थोड़ा आराम किया फिर एक एक बार दोनों की चुदाई की ३ बजे तक मैंने दोनो को चोदा और थक के हम तीनो नंगे ही सो गये.
 
सुबह आंख खुली तो में अकेला नंगा बेड पे था. शायद माया दी और रूपा

निचे किचन में थी. मैंने वाच देखि तो ८ बज गए थे. में लेटा लेटा सोच रहा

था क्या करू. यहाँ काम सेट करना थोड़ा मुस्किल हो रहा हे. तभी काया आ गई.

काया ने पजामा और एक पतला कुरता पहना हुआ था. काया सीधा आ के मेरी गोद

मे बैठ गई. और मेरे होठ चुसते हुए बोली गुड मॉर्निंग भाई. मैंने भी उसके

होठ चुमते हुए गुडमोर्निंग बोला. काया मेरी गोद में बैठी हुई बोली

“क्या बात हे भाई कोई परेशानी हे क्या?.

मैंने बोला “हा क्या होटल को नया बनाना हे, कोई आईडिया ही नही मिल रहा क्या करू?.

काया बोली “किसी आर्किटेक्ट से बात कर के देख लो”.

मैंने बोला “हा ये आईडिया सही रहेगा”. काया बोली “मैंने एक आईडिया दिया अब मुझे दो”.

मैंने बोला “कया चाहिए मेरी रानी बहना को”?

काया बोली “भाई आप सब के साथ सोते हो और में तरस्ती रहटी हूँ”.

मैंने बोला “ऐसी बात नहि काया, में तुम सब को तो प्यार करत ही हूँ बारी बरी”. काया बोली “जब से आये हो एक बार ही किया हे मेरे साथ”.

मैंने काया की चूची पकड़ के बोला “तो मेरी साली साहिबा को लंड चाहिये”.

काया बोली “हा जिजु मुझे चोदो, आज मेरी चुत बहुत खुजा रही हे”.

मैंने बोला “साली साहिबा की फरमाइश तो पूरी करणी ही होगी”.

मैंने काया को बिस्तर पे लिटा दिया. काया बिस्तर पे लेटी थी में उसके

उपर आ के उसकी चुचियो को मसलने लगा. मैंने उसके होठो पे होठ रख दिये और चूसने लगा. में काया की चूचियों को जोर जोर से मसल रहा था. काया की सिसकिया बहुत तेज़ निकल रही थी. मैंने

काया के कुरते को पकड़ के फाडना शुरू कर दिया. काया का कुरता फाड़ के अलग कर

दीया. मैंने उसकी चुचियो को पकड़ लिया और मसल के चुसने लगा. काया मेरे सर

को दबा रही थी. मैंने काया के निप्पल को मुह में दाल के खिचना शुरू कर दिया.

दूसरे निप्पल को जोर से मसलने लगा. काया जोर से चीख़ने लगी.

उसके मुह से जिजु सुन के अलग ही नशा सा मुझे हो रहा था. मेरा लंड एक दम खड़ा हो गया था. में उठ के काया के पास गया और लंड उसके मुह में दाल दिया. काया मेरे लंड को मुह

मे दाल के चुसने लगी. काया लंड मुण्ड को लॉली पॉप की तरह चुस रही थी. काया

कभि लंड मुह में लेती कभी लंड चुस्ती. मेरी गोलियो को हाथो से दबाती. गोलियो

को मुह में लेकर चुसती.

मैं काया के मुह में पूरा लंड घूसा दे रहा था.

मैंने बोला “चुस मेरी रंडी साली चुस, तू तो वेश्या की तरह लंड चुस्ती हे”.

काया बोली “आप भी तो रंडी समझ के ही चोदते हो जिजु”.

मैं काया के मुह में धक्के मारने लगा. काया लंड चूस रही थी. बहुत उतेजित हो गया था में सुबह सुबह में जोर जोर से उसका सर पकड़ के धक्के मार रहा था. काया खांसने लगी. में रुक गया.

काया बोली “जिजु जान ही ले लोगे क्या”?

मैंने बोला मरने नहि दूंगा अपनी प्यारी रंडी साली को”.

काया के पजामे के ऊपर से काया की चुत पकड़ ली. काया ने निचे पेन्टी नहि पहनी थी. में काया की चुत मसलने लगा. काया मेरा लंड चुस रही थी. और में काया की चुत मसल रहा था. मेरी उंगलियां पजामे के साथ चुत में घुस रही थी. काया की सिसकिया नहि निकल पा रही थी.

मैंने काया के मुह में धक्के मारने जारी रखा. फिर मैंने काया के मुह से लंड

निकल दिया. और खड़ा हो गया मैंने काया का पाजामा उतार दिया. काया बहुत गरम हो गयी थी.

काया बोली “जिजु छोडो अब नहि रहा जा रहा”.

काया की बुर बहुत पाणी छोड़ रही थी.

उसकी सांसे तेज़ चल रही थी. उसकी चुचिया ठोस हो गई थी. मैंने काया को बोला

“चल मेरी रंडी साली तुझे कुतिया बना के चोदता हूँ”.

काया बोली “जो चाहे बना लो कुतिया तो में हूँ ही बस मुझे चोदो”.

मैंने काया को पलट दिया काया की गांड़ पे हाथ फेरने लगा. मैंने काया की कमर पकड़ के ऊपर उठा ली. काया गांड़ हवा में

कर के बैठ गई. मैंने उसकी चुत से लंड सटा के जोर से धक्का मारा एक ही बार में लंड उसकी बच्चे दानी तक पंहुचा दिया. काया चीख़ने लगी. मैंने उसकी एक न सुनि उसकी गांड़ पे थप्पड़ मार के बोला “साली कुतीया चिल्ला क्यों रही हे”.
 
मैं काया के ऊपर झुक गया उसकी चुचीयों को पकड़ के चोदने लगा. काया थोड़ी देर मे नार्मल हो गई बोलने लगी

"हा मार और जोर से फाड् दो मेरी चुत को"

मैंने काया की चुत में जोर जोर से धक्के मारे काया जल्द ही झड गई मैंने लंड उसकी चुत से निकाला उसकी चुत से पाणी टपकने लगा. मैंने काया की गांड़ पे थप्पड़ मार के बोला

“साली बहुत गर्मी थी इतनी जल्दी झड गई अब तेरी गांड़ मारूँगा”

काया बोली “जिजु जो चाहे मारो सब तुम्हारा ही है”.

मैंने लंड काया की सुखी गांड़ पे रखा और जोर से धक्का मार दिया लंड गांड के कड़े में जा के फस गया. काया की आँखों में आँसू आ गये.

काया बोली “जिजु थुक तो लगा देते गांड़ में”.

मैंने बोला “साली ये तेरी सजा हे मुझे गरम करके खुद थंडी होने की”.

मैंने एक और जोर से धक्का मारा. काया चिखने लगी.

मैं काया की गांड़ में ताबड़ तोड़ ४-५ धक्के मारे लंड पूरा अंदर घुस गया. काया दर्द से तिलमिला रही थी. में काया की गांड़ पे थप्पड़ मार रहा था.

काया की गांड़ थपडो से लाल हो गई थी. मैंने अपना हाथ काया की चुत पे रखा और दो उंगलिया उसकी चुत में घुसाकर धक्के मारने शुरू कर दिये. काया को दर्द हो रहा था. पर वो मज़े ले रही थी अब गांड़ मरवाने का.

५ मिनट्स गांड़ जोर जोर से मारी चुत में उंगली की काया उंगली से फिर से झड गई थी. मैंने लंड गांड़ से निकाल के काया को बिस्तर पे पटक दिया. बेड से निचे उतर के मैंने काया की टांगे पकड़ के उठा लिया और उसकी चुत पे निशाना लगा के लंड अंदर दाल दिया. काया के मुह से आह निकल गई. मैं काया को बेरहमी से चोदता रहा उसकी चूचियों पे थप्पड़ भी मारता रहा. फिर मेरा झड़ने वाला हो गया था,

मैंने काया की एक टांड पकड़ के उसके ऊपर आ गया और जोर जोर से चोदने लगा. काया फिर से झड़ गई में भी झड़ने वाला हो गया था मैंने लंड निकल के काया के मुह में दाल दिया और झड़ने लगा काया मेरा पाणी पिती रही. प्रेशर ज्यादा था काया संभाल नही पायी लंड मुह से बाहर आ गया उसका चेहरा उसकी चुचिया बाल सब भिग गये.

काया बिस्तर पे पसर गयी. में लंड सहला के काया के मुह पे अपना पाणी गिराने.

काया पस्त हो गई थी. में बेड पे बैठ गया और सुस्ताने लगा ५ मिनट बाद मैंने काया को गोद में उठा लिया.

काया बोली “जिजु कहा ले जा रहे हो”?

मैं बोला “निचे चलते है”

काया बोली “जिजु मुह तो साफ करें दो”. मैंने बोला

“कोई जरुरत नहि ऐसे ही हसीन लग रही हो”.

मैं काया को गोद में उठा के निचे लाया. माँ बैठी थी सोफ़े पे उनके पास जा के बैठ गया.

माँ काया की दशा देख के बोली “क्या बेटी सुबह सुबह शुरु हो गई”?

काया बोली “क्या करू सुबह ही जिजु का मूड बन गया था”.

मैंने माँ की चूचि को दबाते हुये बोला

“क्यों सासु माँ आप का मन नहि कर रहा है”.

माँ मुस्कराती और मस्ती में बोली “दामाद जी मन तो कर रहा है पर क्या करू अभी शॉप पे जाना है”

मैंने बोला “कोई बात नहि सासु जी में शॉप पे आकर चोद दूंगा आज ही”.

मैने माँ के होठो को चूम लिया.

माँ बोली “काया जाओ नहा लो”.

काया बोली “जिजु मना किये है”.

तभी माया दीदी और रूपा आ गई.

मैंने बोला “चलो मेरी बीवियो अपनी बहन के मुह पे लगा मेरा पाणी चाटना शुरू कर दो”.

मेरी बात सुन दोनों मुस्करायी और काया पे तूट पड़ी. दोनों काया के चेहरे को चाटने लगी उसकी चुचियो को चूस कर साफ किया. फिर काया को मैंने नहाने को बोला. में भी रेडी होने चला गया.
 
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