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Adultery आशिक परिंदे ( देवर भाभी की दास्ताने आशिकी )

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रिंकी मन मे....ये गन्ना क्या चीज़ है मैं तो तुम्हारे गन्ने के समान लंड को भी संभाल कर पकडूँगी बस सही वक़्त का इंतज़ार है

राज रिंकी को अपनी गोद मे उठाए हुए चल रहा था और उसके चूतड़ राज के लंड के पास रगड़ रहे थे

रिंकी की गाड़ की रगड़ से राज का लंड जो इतनी देर मे बैठ गया था फिर से खड़ा होने लगता है

रिंकी ने भी अपने जिस्म को बिल्कुल ढीला छोड़ दिया था वो जानती थी की ऐसा करने से उसकी गान्ड राज के लंड के बिल्कुल क़रीब पहुँच जाएगी ...और हुआ भी वैसा ही जैसा रिंकी ने सोचा था रिंकी की गान्ड राज के लंड के और क़रीब पहुँच गयी.....नीति के चूतड़ की रगड़ से राज का लंड बिल्कुल खड़ा हो गया

रिंकी की गान्ड की रगड़ से राज को मज़ा तो बहुत आ रहा था...मगर लंड खड़ा होने के कारण राज को चलने मे दिक्कत भी हो रही थी ...मगर फिर भी राज रुका नही और जैसे ही वो भानु सिंग की हवेली के पास पहुँचा उसने रिंकी को अपनी गोद से उतार दिया

रिंकी राज को दिखाने के लिए अपनी एक टाँग पर खड़ी हो होकर मुस्कुराते राज के लंड की तरफ देखने लगी

राज का खड़ा लंड उसकी पेंट के ऊपर से सॉफ नज़र आ रहा था

राज ने रिंकी की तरफ देखा तो पाया की रिंकी उसकी तरफ नही देख रही है और जैसे ही उसने रिंकी की नज़रों का पीछा किया वो समझ गया की रिंकी मुस्कुराते हुए क्या देख रही है

ये देख कर राज झेंप जाता और तेज़ी के साथ वहाँ से निकल जाता है ...राज को तेज़ी से जाते देख रिंकी ज़ोर से हँसने लगती है जो राज को भी सुनाई देती है....

…………………………………..

राज जैसे ही हवेली पहुँचता है तो कमला उसे देखते बोलती है

कमला.....आ गये छोटे मालिक डॉली मालकिन कबसे आपका इंतज़ार कर रही हैं

राज .....क्यूँ

कमला....उन्होने अभी तक खाना नही खाया वो बोल रही थी की राज के आने के बाद ही वो खाना खाएँगी

जैसे ही राज कमला के मूह से ये बात सुनते ही तुरत डॉली के पास उसके रूम मे जाता....मगर ये क्या डॉली तो अपने कमरे मे नही है..राज सोचता है मेरी भाभी शायद किचिन मे होगी

राज जैसे ही किचिन मे जाता है तो क्या देखता है की उसकी भाभी खाना गरम कर रही है

राज डॉली के बिल्कुल पीछे खड़े होकर बहुत प्यार से बोलता है

राज ......भाभी आपने अभी तक खाना क्यूँ नही खाया

डॉली मुस्कुराते हुए

डॉली.....तुमने भी तो अभी तक खाना नही खाया

राज ......अगर मैने खाना नही खाया तो क्या मेरी भाभी भी भूखी रहेगी

डॉली..... इतने प्यारा मेरा देवर है उसके बिना मैं खाना कैसे खा सकती हूँ

डॉली की बात सुनकर राज के चेहरे पर मुस्कान आ गयी....और राज ने डॉली के चेहरे हो अपने हाथों से पकड़ कर डॉली की आँखों मे देखते हुए कहा

राज.......मेरी भाभी मेरी वजह से भूखी रही है इसलिए मैं अपने हाथों से अपनी भाभी को खाना खिलाउन्गा

ये कहते हुए राज ने डॉली के हाथों को पकड़ कर उसको सीट पर बिठा दिया ....और खुद खाना प्लेट मे निकाल कर डॉली को खिलाने लगा दो चम्मच खिलाने के बाद जैसे ही तीसरा चम्मच खाने के लिए डॉली ने मूह खोला तो राज शरारत करते हुए चम्मच को डॉली के चेहरे के ऊपर नीचे करने लगा

डॉली खाने के चम्मच के आगे मूह खोले अपने सिर इधर उधर घुमा रही थी

टीन चार बार चम्मच को आगे पीछे ऊपर नीचे करने के बाद राज ने चम्मच का खाना डॉली को खिलाया

फिर डॉली ने भी हँसते हुए इसी तरह राज को खाना खिलाया खाना खाने के बाद राज ने डॉली से पूछा

राज.....भाभी आपने मेरा इंतज़ार क्यूँ किया आप भैया के साथ खाना खा लेती

जय का नाम सुनते ही डॉली के चेहरे की हसी गायब हो गयी डॉली के चेहरे की मुस्कुराहट गायब होते ही राज ने सोचा कही भैया भाभी के बीच कोई झगड़ा तो नही हो गया

राज.....भाभी आपके और भैया के बीच सब ठीक तो है

डॉली भी समझ गयी की उसके देवर ने उसके चेहरे को देख कर ये बात बोली है

डॉली ने सोचा अगर वो उदास चेहरे के साथ राज से कुछ बोलेगी तो राज यक़ीन नही करेगा.और ये परिवार बिखर जाएगा यही सोच कर...डॉली झूठी मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए बोलती है

डॉली....नही राज ऐसी तो कोई बात नही तुम्हारे भैया मुझसे क्यूँ झगड़ा करेंगे भला....

राज.....भाभी आप सच कह रही हैं या झूठ

डॉली झूठी हसी हँसते हुए

डॉली .....अरे बाबा मैं सच कह रही हूँ

डॉली की बात सुनकर राज आगे बढ़कर उसके माथे को चूम लेता है
 
राज.....मेरी भाभी अगर खुश है तो मैं भी खुश हूँ

डॉली अब थोड़ा सीरियस होते हुए बोली

डॉली......मैं खुश हूँ राज बस तुमसे एक वादा चाहती हूँ

डॉली का सीरियस चेहरा देखते ही राज भी सीरियस्ली बोला

राज.....मैं अपनी भाभी के लिए कोई भी वादा करने के लिए तय्यार हूँ

डॉली......राज जैसे कभी मेरे ऊपर कोई मुसीबत आ गयी या मुझे कोई तकलीफ़ हुई .क्या तब तुम मेरी हर परेशानी मे मेरा साथ दोगे.....और मेरी हर ख़ुसी का ख़याल रक्खोगे

राज.....पहली बात तो ऐसा होगा नही की मेरी भाभी पर कोई मुसीबत या परेशानी आए और मुझसे बच कर चली जाए ...मगर फिर भी आपके ऊपर कोई मुसीबत आती है तो मैं हमेशा आपका साथ दूँगा और आपकी हर खुशी का ख़याल रकखूँगा...ये ठाकुर राज सिंग का वादा है

राज की बात सुनकर डॉली के चेहरे पर मुस्कान सज जाती है.....राज भी डॉली से कुछ मीठी मीठी बातें करने के बाद अपने रूम मे चला जाता है
 
दिन धीरे धीरे बीत रहे थे मगर

जय को अपनी परेशानी का कोई हल नही मिल रहा था

आज 15 दिन बीत चुके थे मगर जय को अपने लंड के इलाज़ के लिए कोई समाधान भानु सिंग से नही मिल रहा था

जय डेली भानु सिंग से मिल रहा था मगर भानु सिंग हर बार उसे एक दिलासा देखार वापस भेज देता

जय का दिमाग़ काम नही कर रहा था की वो क्या करे क्या ना करे उसकी कुछ समझ मे नही आ रहा था

आज भी जय भानु सिंग के सामने बैठा था और उसके सामने सोफे पर भानु सिंग बैठा था

रंगीला भी जय के दाईं ओर बैठा था जो जय को देख कर मुस्कुरा रहा था

बात की शुरुआत जय ने की

जय.....ठाकुर साहब आपने कहा था की आप शादी के बाद मेरा इलाज़ करवा देंगे मगर शादी के बाद मैं जब भी आपसे मिलता हूँ ...तो आप मुझे सिर्फ़ एक दिलासा देते हैं करते कुछ भी नही

भानु सिंग अपना मूह सीरियस बनाते हुए बोलता है

भानु .....देखो जय कुछ निजी कारणों की वजह से मुझे वक़्त ही नही मिल रहा ...और तुम कह रहे की मैं तुमको सिर्फ़ दिलासा दे रहा हूँ

जय झुंझलाते हुए

जय.....हाँ आप मुझे सिर्फ़ दिलासा दे रहे हैं कर कुछ नही रहे ....अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैं पागल हो जाउन्गा

भानु सिंग.....अपनी झुंझलाहट अपने पास रक्खो और तमीज़ से बात करो ...वरना मैं सारे गाओं मे बोल दूँगा की तू नामर्द है ...ज़रा सोच जब गाओं वालों को ये बात पता चलेगी तो क्या होगा ....गाओं वाले तो तुझ पर हँसेंगे ही...तेरा बाप ये सुनते ही तुझे गोली मार देगा

भानु सिंग की बात सुनकर जय डर जाता है और डरते हुए बोलता है

जय....मैं आप पर नही झुंझला रहा हूँ मैं तो बस आपको आपका वादा याद दिला रहा हूँ..

भानु सिंग.....हाँ ये हुई बात अगर मुझसे तमीज़ से बात करोगे तो ही तुम्हारी इज़्ज़त बची रहेगी ..वरना कल तुम इसी गाओं मे अपना मूह छुपाते हुए घुमोगे या फिर अपने बाप की गोली का शिकार बनॉगे

जय.....नही न....नही...ठाकुर साहब मैं आपकी हर बात मानुगा

भानु सिंग.....जय तुमको याद है की मैने तुम्हारी शादी से पहले कहा था की मेरी कुछ शर्तें तुमको माननी पड़ेंगी अगर तुम मेरी बात मानोगे तभी मैं तुम्हारा इलाज़ करवा सकता हूँ ...वरना नही

जय....मैं आपकी हर शर्त मानुगा

जय की बात सुनकर भानु सिंग मुस्कुराने लगता है और मुस्कुराते हुए बोलता है

भानु सिंग.....ठीक है जय मैं तुम्हारा इलाज़ करवा दूँगा ..मगर उससे पहले मुझे तुमसे एक बात पूछनी है

जय....कौन सी बात

भानु सिंग.....यही की जिस लड़की से तुम्हारी शादी हुई है क्या तुम उससे प्यार करते हो...अरे मैं तो भूल ही गया जब लंड ही खड़ा नही होगा तो प्यार कैसे करोगे

जय....मैं उससे प्यार नही करता मैं क्या चाहता ये तो आपको अच्छी तरह पता है...अगर मेरा लंड खड़ा भी होने लगे तो भी मैं उस ग़रीब घर की लड़की से प्यार नही करूँगा...ये सब मेरे बाप की वजह से हो रहा है .....

भानु सिंग......तो अब उस लड़की का क्या होगा जिससे तुमने शादी की है

जय....मुझे कुछ नही पता मैं तो अपने बाप की वजह से चुप हूँ ...वरना मैं आज ही उसे धक्के देकर अपने घर से निकाल देता...

भानु सिंग......तुम्हारी पूरी बात सुनकर मुझे अच्छा लगा ...अब मैं तुमको अपनी शर्त बताता हूँ

जय....हूंम्म

भानु सिंग.....मेरा दिल सुहाग रात मनाने का हो रहा है

जय......तो इसमे मैं क्या कर सकता हूँ

भानु सिंग बेशरमो की तरह हँसते हुए बोलता है

भानु सिंग.....मैं तेरी बीवी के साथ सुहाग रात मनाना चाहता हूँ उसे चोदना चाहता हूँ

भानु सिंग की बात सुनकर जय शोकड रह जाता है

जय...ये आप क्या कह रहे है आपका दिमाग़ तो खराब नही हो गया

भानु सिंग......मेरा गिमाग़ तो ठीक है मगर लगता है तुम्हारे लंड से पहले तुम्हारे दिमाग़ का इलाज़ करना पड़ेगा

ये बात भानु सिंग ने बहुत गुस्से मे कही थी भानु सिंग का गुस्सा देख कर जय डर जाता है और धीमी आवाज़ मे बोलता है

जय.....ज़रा अपनी उमर तो देखिए और उसकी उमर देखिए

भानु सिंग.....अबे इसमे उमर की बात कहाँ से आ गयी ....तू जवान है ना ..तो जा उस लड़की को छोड़ कर दिखा ..तब मैं मान जाउन्गा की तू जवान है

ये बात बोलकर भानु सिंग हँसने लगता है और जय शर्मिंदगी से अपना सिर झुका लेता है वो जाता है की वो किसी लड़की को चोद नही सकता क्यूंकी लड़की को चोद ने के लिए एक खड़ा लंड चाहिए जो उसके पास नही था .....

जय अपना सिर झुकाए चुप चाप बैठा था उसको चुप देख कर भानु सिंग फिर से बोलता है

भानु सिंग.....ऐसे चुप रहने से काम नही चलेगा मुझे मेरी बात का जवाब चाहिए ...

जय.......ये मुझसे नही होगा

जय की ना सुनकर भानु सिंग गुस्से मे बोलता है

भानु सिंग .....क्यूँ नही होगा ...ये तुझे करना ही पड़ेगा ...वरना तू जानता है मैं क्या कर सकता हूँ.... अच्छा एक बात तो बता ...जब तू उस लड़की से प्यार नही करता तो उसको मेरे पास लाने मे क्या दिक्कत है

जय....मगर मैं उससे क्या कहूँगा...और अगर उसने इस बारे मे मेरे बाप को बता दिया तो क्या होगा...मेरा बाप मुझे मार डालेगा ...

भानु सिंग.....तेरा सबसे बड़ा दुश्मन तेरा बाप है ...और तू उसी से इतना डरता है ...अगर इतना डरेगा तो सारी दौलत का मालिक कैसे बनेगा ...इसीलिए तुझसे कहता हूँ अपने डर को अपने दिल से निकाल दे जो मैं कहता हूँ वो कर...

जय......आपने तो बोल दिया की मैं अपने दिल से अपने बाप का डर निकाल दूं कैसे निकाल दूं ये भी बता दीजिए

भानु सिंग .....तेरे डर को ख़तम करने का एक ही तरीका है

जय.....कौन सा तरीका

भानु सिंग.....अपने बाप को मार दे

भानु सिंग की बात सुनकर जय चौंक जाता है

भानु सिंग....ऐसे क्या चौंक रहा है तूने ही कहा है की तेरा बाप ही तेरा सबसे बड़ा दुश्मन है...और दुश्मन को मार देना ही अच्छा होता है..वरना दुश्मन तुमको मार देगा...अगर तूने उसे नही मारा तो कभी भी उस दौलत का मालिक नही बन सकता ...इसीलिए कहता हूँ थोड़ी हिम्मत दिखा और अपने बाप को मार दे...एक यही तरीका है तेरे मालिक बनने का...तेरे बाप के मरते ही ..तेरे बाप के नाम का डर भी मर जाएगा और तू ऐश की जिंदगी जिएगा

जय कुछ देर भानु सिंग की कही हुई बात के बारे मे सोचता है फिर अपने लंड के बारे मे सोचता कर बोलता है

जय.....मगर मेरा इलाज़ कब होगा

भानु सिंग......मैं तेरा इलाज़ 1 दिन बाद ही स्टार्ट करवा दूँगा और तेरा इलाज़ मेरा साला रंगीला करेगा

जय....क्याआ

भानु सिंग....जय शायद तुम नही जानते की मेरा साला डॉक्टर है और ये एक से एक अच्छी दवाई भी बना लेता है

जय.....आपने अभी तक क्यूँ नही बताया था

भानु सिंग.....तुमने भी तो कहाँ पूछा था की मेरा साला क्या करता है..अब जाओ और एक अच्छा सा मौका देख कर उस लड़की से बात करो ...मगर ये काम जल्द बाज़ी से मत करना वरना मामला बिगड़ सकता है....और अपने बाप को मारने का प्लान भी सोच समझ कर बनाना ...क्यूंकी ऐसे काम इतनी आसानी से नही होते ऐसे कामो के लिए लंबी प्लॅनिंग करनी पड़ती है....और तुमको जो भी मदद चाहिए मुझसे बोल देना मैं तुम्हारी हर संभव तुम्हारी मदद करूँगा....

भानु सिंग की बात सुनकर जय चला जाता है

जय के जाते ही रंगीला बोलता है

रंगीला....जीजा जी आप तो जानते हैं की अब उसका इलाज़ नही हो सकता .फिर भी आपने बोल दिया की मैं उसका इलाज़ कर दूँगा ...मैं भला उसका इलाज़ कैसे कर सकता हूँ..जब उसका इलाज़ हो ही नही सकता

भानु सिंग......तुम ये बात पहले भी बता चुके हो मैं तो उसको सिर्फ़ दिलासा दे रहा हूँ

रंगीला.....मगर जब वो 1 दिन बाद आएगा तो मैं क्या करूँगा और कौन सी दवाई उसे दूँगा

भानु सिंग.....अरे कोई भी दवा दे देना उसको क्या पता चलेगा की ये दवा किस बीमारी की है

रंगीला .....वाह जीजा जी आपने तो कमाल का दिमाग़ लगाया है

भानु सिंग.....आज अगर मैं दयाल सिंग से बदला लेने जा रहा हूँ तो अपने दिमाग़ के बल पर...वरना ताक़त के आगे मैं कभी भी दयाल सिंग से जीत नही सकता

ये बोलकर भानु सिंग वहाँ से उठकर अंदर चला जाता है

……………………………….
 
हवेली दयाल सिंग

डॉली किचिन मे काम कर रही थी तभी उसका फोन बजने लगता है

डॉली नंबर देखती है तो खुश हो जाती है और तुरंत कॉल पिक करते हुए बोलती है

डॉली.....तो भूमि मैडम को मेरी याद आ ही गयी

भूमि....याद कैसे नही आएगी आख़िर तू मेरी सबसे अच्छी सहेली है...और बता परिवार मे सब कैसे हैं....और मेरे जीजू कैसे हैं

डॉली भूमि को अपने परिवार के बारे मे बताती है और सबसे ज़्यादा अपने देवर राज के बारे मे बताती है ...मगर अपने पति का नाम तक नही लेती ...उसकी बात सुनकर भूमि हँसते हुए बोली

भूमि ....तू तो अपने देवर की ऐसी तारीफ कर रही जैसे वो तेरा पति हो

डॉली मन मे..काश वो मेरा पति होता तो ये लाइफ कितनी खुश हाल बन जाती

डॉली वैसे भी उदास रहती थी इसलिए उसने भी अपना मन बहलाने के लिए भूमि की टाँग खींचने की सोच ली ...और हँसते हुए भूमि से बोली

डॉली......क्यूँ देवर मे क्या खराबी है क्या एक देवर पति वाला काम नही कर सकता

भूमि.....नही कर सकता एक देवर पति वाला काम नही कर सकता

डॉली......क्यूँ नही कर सकता

भूमि.....डॉली मेरी बन्नो देवर अपनी भाभी की चुदाई नही कर सकता जबकि पति अपनी पत्नी की चुदाई कर सकता है

डॉली वैसे तो खुल कर नही बोलती थी मगर आज उसने भूमि से मज़ा लेने के लिए खुल कर बोलने के बारे मे सोच लिया

डॉली.....क्यूँ नही कर सकता ज़रूर कर सकता है

भूमि ....तू ये क्या कह रही है ..मतलब तूने अपने देवर को फसा लिया है

डॉली.....मैने अपने देवर को नही फसाया बल्कि उसने मुझे फसा लिया है

भूमि.....और तू फस गयी

डॉली.....हाँ मैं फस गयी

भूमि.....हे भगवान ये तूने क्या किया...क्या तू सच कह रही है या मुझे सता रही है....सच बोल तुझे मेरी कसम

डॉली हँसते हुए

डॉली.....मैं मज़ाक़ कर रही थी और तूने मेरी बात को सीरियसली ले लिया

भूमि....मैं भी जानती हूँ तू मज़ाक़ कर रही थी ..क्यूंकी मैं अपनी सहेली को अच्छी तरह से जानती हूँ....और तूने क्या समझा की मैने तेरी बात को सीरियसली ले लिया है

डॉली.....बातों मे मैं तुझसे नही जीत सकती ...तू बहुत बड़ी कमिनी है

भूमि .....वैसे डॉली एक बात तो बता

डॉली....ह्म

भूमि .....मैं जब भी तुझसे चुदाई की बातें करती थी ... तू कुछ नही बोलती थी बस शरमाती रहती थी मगर आज तूने खुल कर बोल दिया

डॉली.....वो तो मैने तुझे सताने के लिए बोल दिया था

भूमि .....मुझे सताने के लिए बोला था...या फिर मेरे जीजा ने तेरी चूत खोलने के साथ तेरा मूह भी खोल दिया

अपने पति यानी जय की बात आते ही डॉली फोन काट देती है और अपना फोन भी ऑफ कर देती है क्यूंकी डॉली को पता था की भूमि उससे जय के बारे मे पूछने के लिए फिर से फोन करेगी इसीलिए उसने अपना ऑफ कर दिया ...और फिर से किचिन मे काम करने लगती है

किचिन मे काम करते हुए डॉली भूमि और अपनी की हुई बातों के बारे मे सोचती है

आज कैसे उसने भूमि से कहा की उसके देवर ने उसे फसा लिया है

क्या सच मे मैं अपने देवर से फस गयी हूँ ....मगर मैं तो मज़ाक़ कर रही थी...फिर मुझे क्यूँ ऐसा लग रहा है.... कहीं मुझे राज से प्यार तो नही हो गया ...नही ऐसा तो नही है मैने तो यूँही भूमि से बोल दिया था की मेरे देवर ने मुझे फसा लिया है ....कहीं मैं सच मे राज से फस तो नही गई ...हे भगवान आज मेरे साथ ये क्या हो रहा है ...

इस भूमि के चक्कर मे ये सब हो रहा है मैने भी क्यूँ मज़ाक़ किया ...सारी ग़लती मेरी है ..ना मैं मज़ाक़ करती ना मेरे मन मे ऐसे उल्टे सीधे विचार आते

फिर डॉली सारे विचारों को अपना सिर झटक कर ...किचिन के काम मे लग जाती है
 
डॉली हवेली के गर्दन मे खड़ी होकर फूलों के पेड़ों को पानी दे रही थी....तभी हवेली का गेट खुलता है... गेट खुलने की आवाज़ सुनकर डॉली गेट की तरफ देखती है....डॉली देखती है की गेट खोलने वाली एक लड़की है

लड़की को देख कर डॉली सोच मे पड़ जाती है ...ये लड़की कौन है..शायद पापा की कोई रिश्तेदार होगी.हाँ ऐसा ही होगा

डॉली उसके कपड़े देख कर सोचती है..मैं जब कॉलेज मे थी तब मैं भी कभी कभी जीन्स शर्ट पहनती..मेरा भी कितना दिल करता है .मगर......

वो लड़की धीरे धीरे चलकर डॉली के पास आकर बोलती है

लड़की ....जी क्या मैं राज से मिल सकती हूँ

डॉली.....राज तो घर पर नही है .वो पापा के साथ गया है...वैसे आप कौन हैं .

लड़की....जी मेरा नाम रिंकी सिंग है..मैं ठाकुर भानु सिंग की बटी हूँ

जी हाँ ये रिंकी थी .जो राज को मिलने आई थी ..खेत मे मिलने के बाद जिस तरह से राज ने उसे अपनी गोद मे उठाया था ..और बिना थके राज ने कैसे उसे अपनी गोद मे उठाए हुए उसकी हवेली तक पहुँचाया था...रिंकी उसकी ताक़त का लोहा मान गयी थी ..और सबसे बड़ी बात राज की पेंट मे खड़ा उसका हथियार..उसके हथियार को पेंट के ऊपर से ही देख कर रिंकी समझ गयी थी की राज के पास एक बड़ा लंड है...रिंकी ने जब उसके हथियार को पेंट के ऊपर से देखा था उसको चैन नही मिल रहा था...वो डेली राज से मिलने का सोच कर खेतों की तरफ जाती ..मगर उसके खेतों की तरफ जाने का कोई फ़ायदा नही हुआ था..इसलिए मजबूर होकर वो हवेली की तरफ आई थी

इतने दिनों मे डॉली को भी गाओं के कुछ लोगों की थोड़ी जान कारी हो गयी थी..

.इतना तो वो समझ गयी थी की ये लड़की पापा की कोई रिश्तेदार नही है..डॉली को कुछ समझ मे नही आया था की ये लड़की राज से क्यूँ मिलने आई है..यही सोच कर डॉली बोलती है

डॉली.....आपको राज से कोई काम था क्या ...आप मुझे बोल दीजिए मैं उसकी भाभी हूँ ..मैं उसको बता दूँगी

अब रिंकी को ये समझ मे नही आ रहा था की वो डॉली की बात का क्या जवाब दे ...फिर कुछ सोचते हुए रिंकी बोलती है

रिंकी....राज मेरा दोस्त है बहुत दिनों से मिला नही इसीलिए मैं खुद उससे मिलने आ गयी

डॉली....अच्छा तो आप राज की दोस्त हैं आप बैठिए मैं आपके लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करती हूँ

रिंकी ....नही..नही..मैं बस राज से मिलने आई थी अब वो नही है ..तो मैं भी चलती हूँ

डॉली.....ऐसे कैसे जा सकती हैं ..आप राज की दोस्त हैं ..अगर मैने आपको ऐसे जाने दिया तो बाद मे मेरा देवर मुझसे शिकायत करेगा

डॉली के इतना ज़िद करने के बाद रिंकी हार मान जाती है

डॉली कमला को बोलकर चाय नाश्ते इंतज़ाम करवाती है

चाय नाश्ता करने के बाद रिंकी चली जाती है...रिंकी के जाते है डॉली सोचती है

जब से मेरी शादी हुई है आज पहली बार कोई लड़की राज से मिलने आई है ....कहीं ऐसा तो नही की राज और इस लड़की का कोई चक्कर चल रहा है...ये बात दिल मे आते ही डॉली के दिल मे एक जलन की भावना उत्पन्न हो जाती है....नही नही...उस लड़की का राज से कोई चक्कर नही चल रहा ...क्यूंकी वो लड़की खुद कह रही थी की वो बहुत दिनों से राज से नही मिली है....अगर उस लड़की का राज से चक्कर होता तो वो राज से डेली मिलती ...क्यूंकी जिनका चक्कर चलता है वो डेली एक दूसरे से मिलते हैं

डॉली के दिल मे ये बात आते ही डॉली मुस्कुराते हुए किचिन मे चली जाती है

रात को खाने की टेबल पर दयाल सिंग बैठे थे और उनके सामने वाली सीट पर जय बैठा था और उनके दाई तरफ डॉली और राज बैठे थे...खाना खाते हुए दयाल सिंग बोलते हैं

दयाल सिंग......जय ये आज कल तुम कहाँ रहते हो मैने सुबह भी तुम्हारे बारे मे बहू से पूछा था

जय अपने मन मे सोचता है ..इनको मेरी क्या ज़रूरत पड़ गयी ..कमीना कहीं का.थोड़े दिन और रुक जा फिर तेरी ज़रूरत भगवान को पड़ने वाली है....जय अपने दिल के गुस्से को दबाते हुए धीमी आवाज़ मे बोलता है

जय.....क्यूँ कोई काम था क्या

दयाल सिंग.....मैं अपनी शुगर मिल चाली करने जा रहा हूँ ..तो उसी सिलसिले मे मुझे तेरी हेल्प की ज़रूरत थी ..तू नही था तो आज मैं अपने साथ राज को ले गया था

जय मन मे...तो बुड्ढे को एक नौकर चाहिए मगर मैं नौकर नही बन सकता ...नौकर बनने के लिए ये कमीना राज ही ठीक है ..और वैसे भी तेरे मरने के बाद इसको नौकर ही बनना है..और अगर इसने प्रॉपर्टी मे हिस्सा माँगा तो मैं इसको भी मार दूँगा ..बस कुछ दिन की बात है फिर मुझे कभी तेरी ये बक बक नही सुननी पड़ेगी

जय....नही मैं अभी कुछ दिन नही आ सकता तब तक आप राज को ही ले जाएँ

दयाल सिंग ....ठीक है मैं कुछ दिन राज को अपने साथ ले जाउन्गा तब तू बहू को कहीं से घुमा ला जब से तेरी शादी हुई है तू कहीं भी बहू को घुमाने नही ले गया

जय चिढ़ते हुए

जय....ये सब कामो के लिए अभी मेरे पास वक़्त नही है

जय की बात सुनकर दयाल सिंग गुस्से से बोलते हैं

दयाल सिंग.....तुझे बात करने की तमीज़ नही क्या...जो ऐसे बोल रहा है

जय....जिसको जहाँ घूमने जाना हो वो जाए मैं कहीं नही जाने वाला

ये कहते हुए जय खाने की टेबल से उठ जाता है ...आज पहली बार जय ने दयाल सिंग से ऐसे बात की थी ..

जय के जाते ही दयाल सिंग बोलते हैं

दयाल सिंग.....इसका तो दिमाग़ खराब हो गया है पता नही कहाँ रहता है और क्या करता है

दयाल सिंग की बात सुनकर राज बोलता है

राज....छोड़िए पापा भैया को कोई काम होगा

दयाल सिंग.....मगर वो क्या काम करता है मुझे भी तो पता चले ....मैने तो इतना ही कहा था की वो बहू को कहीं से घुमा लाए ..मेरी छोटी सी बात सुनकर चिढ़ गया ....मैने सोचा था की बहू भी घर मे बोर हो जाती होगी ..अगर ये कहीं घूमने जाएगी तो इसका भी दिल खुश हो जाएगा

राज.......पापा इसमे कौन सी बड़ी बात है ..कल मैं भाभी को अपने गाओं की सैर करा देता हूँ

दयाल सिंग हँसते हुए

दयाल सिंग.....मैं बहू को कहीं बाहर घूमने के लिए भेजना चाहता था मगर जय ने मेरी बात ही नही ..और तू गाओं की बात कर रहा है...

राज....मैं तो बस बोल रहा था अगर आप नही चाहते तो कोई बात नही

दयाल सिंग.....ऐसा नही है राज की मैं नही चाहता ..चल ठीक है कल तू बहू को अपना गाओं ही दिखा दे कम से कम इसी बहाने इसका भी मन बहाल जाएगा

दयाल सिंग की बात सुनकर डॉली बोलती है

डॉली....पापा मैं भी आपसे कुछ कहना चाहती हूँ

दयाल सिंग......कहो बेटी क्या बात है

डॉली थोड़ा डरते हुए बोलती है

डॉली ....वो ..क्या है पापा जब मैं कॉलेज मे थी तब मैं कभी कभी जीन्स पेंट और शर्ट पहती थी ..मगर....

डॉली की बात सुनकर दयाल सिंग हँसने लगते हैं और हँसते हुए बोलते हैं

दयाल सिंग.....बेटा मेरी एक बात हमेशा याद रखना की लड़की का चरित्र उसके कपड़ों मे नही होता..उसके मन मे होता है अगर लड़की का मन सॉफ है तो वो चाहे जैसे भी कपड़े पहने कोई फ़र्क नही पड़ता..और मैं जानता हूँ की तेरा मन सॉफ है

दयाल सिंग की बात सुनकर डॉली खुश हो जाती है

दयाल सिंग भी खाने की टेबल से उठ कर चले जाते हैं
 
रात को राज अपने रूम लेटे हुए एक किताब पढ़ रहा था ...तभी डॉली राज के रूम मे दूध लेकर जाती है और दूध को एक छोटी सी टेबल पर रख कर मुस्कुराते हुए बोलती है

डॉली....तो जनाब को अब इस हवेली मे लड़की भी मिलने आने लगी

डॉली की बात सुनकर राज चौंक जाता है

राज.....लड़की कौन सी लड़की

डॉली....ज़्यादा नादान मत बनो तुम जानते हो मैं किस लड़की की बात कर रही हूँ

राज .....क्या भाभी आप भी ...मुझे भला कौन सी लड़की मिलने आएगी जबकि मैं तो किसी लड़की को जानता तक नही

डॉली.....झूठ मत बोलो

राज ....मैं सच कह रहा हूँ मैं किसी लड़की को नही जानता

डॉली.....क्या तुम किसी रिंकी नाम की लड़की को नही जानते क्या वो तुम्हारी दोस्त नही है

रिंकी का नाम सुनते ही राज सोच मे पड़ जाता है ...वो मेरे घर मे क्या लेने आई थी ...फिर राज को कुछ याद आता है ..की कैसे उस दिन रिंकी उसके लंड को देख कर हँस रही थी ...और राज फटाफट वहाँ से निकल आया था... कैसे बोल रही थी की मैं तुम्हारे गन्ने को संभाल कर पकडूँगी...

राज को सोचता देख कर डॉली बोलती है

डॉली.....राज ऐसे क्या सोच रहे हो कौन है वो लड़की

फिर राज डॉली को खेत के बारे मे बताता है ...कैसे रिंकी खेत मे गिर गयी थी और उसने उसे गोद मे उठाकर उसकी हवेली तक पहुँचाया था...मगर उसके बाद जो भी हुआ उसके बारे मे राज ने कुछ नही बताया

डॉली रिंकी को गोद मे उठाने वाली बात सुनकर चिढ़ जाती है ..और राज के बेड पर पड़े पिल्लो से उसे मारते हुए बोलती है

डॉली....बेशरम तेरी हिम्मत कैसे हुई उसे गोद मे उठाने की बता मुझे

राज ने सोचा की उसकी भाभी मज़ाक़ कर रही है इसीलिए राज भी अपने सिर के नीचे से पिल्लो को निकाल कर डॉली को मारता है

दोनो एक दूसरे को पिल्लो से मार रहे थे की तभी डॉली का पैर फिसलता है और वो राज के ऊपर गिर जाती है

राज के ऊपर गिरते ही डॉली के दोनो आम राज के सीने मे धँस जाते हैं...अपने सीने डॉली की चूंचियों के एहसास से ही राज के जिस्म मे करेंट सा दौड़ जाता है

राज डॉली को तुरंत पलट देता है और डॉली के ऊपर आ जाता है अब दोनो एक दूसरे के ऊपर पड़े हुए थे

दोनो की गर्म साँसे एक दूसरे से टकरा रही थी

डॉली भी कुछ बोल नही रही थी वो बस राज की आँखों मे देख रही थी .डॉली का जिस्म काँप रहा था उसके होंठ थरथरा रहे थे .

फिर अचानक डॉली राज को धक्का देकर अपने से अलग करती है और राज के रूम से निकल जाती है

राज भी सोचता है की उससे ये क्या हो गया ..मगर फिर सोचता है ये तो सिर्फ़ एक हादसा था ये सोच कर राज नींद की गहराइयों मे चला जाता है
 
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