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मिसेज ठाकुर ने चेहरे पर ऐसा मेकअप किया कि देखने में वह अपनी उम्र से दस साल छोटी लग रहीं थीं । खूबसूरत साड़ी और कीमती परफ्यूम की खुशबु में वह और भी जलवागीर बन गई थीं ।
उसने अपने आपको दर्पण में देखा और मुस्करा दीं ।
फिर वह कोठी से बाहर निकली और अपनी कार निकालने की बजाय एक टैक्सी में सवार होकर चल पड़ी । शीघ्र ही टैक्सी शहर के एक बदनाम होटल के सामने रुक गई ।
मिसेज ठाकुर ने टैक्सी का किराया अदा किया और होटल में प्रविष्ट हो गई । होटल डार्लिंग जैसी बदनाम जगह आने वाली औरतों के बारे में कोई अच्छी राय कायम नहीं की जा सकती थी ।
देवकाय शरीर का स्वामी डार्लिंग उसे अपने कमरे की खिड़की से देख रहा था । डार्लिंग खुद इस होटल का मालिक था । उसे देखते ही डार्लिंग ने घण्टी के बटन पर उँगली रख दी । एक खतरनाक शक्ल का नौजवान उसके पास पहुँच गया ।
“इस तरफ देखा ?” डार्लिंग बोला ।
“देखा बॉस ।”
“कौन है ?”
“नयी....बिल्कुल नयी बॉस ।”
“बुलाओ ।” डार्लिंग ने कहा और नौजवान ने गर्दन हिला दी ।
थोड़ी देर बाद वह मिसेज ठाकुर के पास पहुँच गया ।
“उठो ।” उसने सर्द स्वर में कहा और मिसेज ठाकुर चौंककर उसे देखने लगी ।
“क्या बात है ?”
“तकदीर बन रही है – देर न करो – उस्ताद डार्लिंग को जानती हो ?”
“नाम सुना है ।”
“देख भी – लो बुला रहा है तुम्हें, जल्दी चलो – देर हो गई तो वह क्रोध से भड़क जायेगा ।” नौजवान ने कहा और मिसेज ठाकुर एक गहरी साँस लेकर रह गई ।
वह नौजवान के पीछे-पीछे चल पड़ी ।
थोड़ी देर बाद सीढ़ियां तय करके वह ऊपर पहुँची और फिर एक कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर नौजवान ने कहा – जाओ – अंदर चली जाओ और सुनो – उससे सहयोग की जिंदगी की जमानत है और असहयोग...” उसने वाक्य अधूरा ही छोड़ दिया ।
मिसेज ठाकुर दरवाजा खोलकर अंदर चली गई । उसने देवकाय व्यक्ति को देखकर बड़ी अदा से निगाहें झुका लीं ।
देवकाय व्यक्ति की दृष्टि मिसेज ठाकुर के चेहरे पर जम गई । चंद क्षण उसे घूरता रहा – फिर उसके होंठों पर मुस्कुराहट फैल गई ।
“वाह ! बहुत ही अच्छा मेकअप किया है तुमने । पता है अपनी उम्र से दस साल छोटी लग रही हो । कारोबार करने निकली हो ?” डार्लिंग ने पूछा ।
“नहीं डार्लिंग ! जिस कारोबार के बारे में तुम पूछ रहे हो, वह नहीं ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया ।
“खूब...खूब...फिर डार्लिंग का रुख कैसे हुआ ?”
“तुमसे मिलना चाहती थी ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया । और डार्लिंग संभलकर बैठ गया ।
“गोया – गोया तुम इस बात का इंतजार कर रही थीं कि मैं तुम्हें बुलाऊँ ।” उसने धीमे स्वर में कहा, लेकिन उसके स्वर में छिपी गुर्राहट मिसेज ठाकुर से छिपी न रह सकी ।
“नहीं ऐसा भी नहीं डार्लिंग ! यह बात मुझे मालूम नहीं थी कि तुम खुद ही मुझे तलब कर लोगे । बस – यहाँ बैठकर मैं किसी वेटर से तुम्हारे बारे में जानकारी प्राप्त करती और यह इच्छा प्रकट करती कि मुझे किसी तरह डार्लिंग से मिला दिया जाये ।”
“हूं – बात समझ में आने वाली है –क्यों मिलना चाहती थीं तुम मुझसे ?”
“क्या इतनी सी देर में यह सारी बातें कर लेना जरूरी है डार्लिंग ? अगर तुम मेरे साथ भद्र व्यवहार करना चाहते हो तो पहले मुझे कुछ पिलाओ – इस दरमियान बातें भी होती रहेंगी ।”
“क्या मँगवाऊं ?” डार्लिंग ने बटन पर हाथ रखते हुए पूछा ।
“शीरी – मेरे लिए शीरी ही ठीक है, और तुम जो उचित समझो ।”
“हश....बेवकूफ –- शीरी भी कोई पीने की चीज है ।” डार्लिंग ने कहा ।
वही नौजवान अंदर प्रविष्ट हुआ । डार्लिंग ने उसे व्हिस्की लाने का हुक्म दिया और मिसेज ठाकुर गहरी साँस लेकर खामोश हो गई ।
फिर उसने चंद क्षण बाद धीरे से कहा – “व्हिस्की पीने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है–बस तुम्हारा साथ देने के लिए थोड़ी दी पियूँगी – इतनी शक्तिशाली नहीं हूँ कि व्हिस्की के दो या तीन पैग से अधिक बर्दाश्त कर सकूँ ।”
शक्तिवान तो काफी नजर आती हो, और जो कुछ तुमने अपने चेहरे पर किया हुआ है उसने भी मुझे काफी प्रभावित किया है । बड़ा बेहतरीन मेकअप किया हुआ है और मुझे सलीकेमंद महिलाएं बहुत पसंद हैं – बहरहाल अपनी कहो कि डार्लिंग की क्या आवश्यकता पड़ गई । मेरे पास दो ही किस्म की औरतें आती हैं ।”
“कौन-कौन सी किस्म की ?”
“नम्बर एक जरूरतमंद और नम्बर दो भी जरूरतमंद । बस यूँ ही समझो कि नम्बर एक और नम्बर दो दोनों जरूरतें भिन्न होती हैं । होती यह दोनों ही जरूरतमंद हैं, कुछ दौलत की और कुछ किसी और सिलसिले में, विवरण सहित नहीं जाऊँगा ।” डार्लिंग ने मुस्कराते हुए कहा । उसकी मुस्कुराहट भी बेहद खतरनाक थी । मोटे होंठ के नीचे उसके भयानक दांतो की कतार झांक रही थी ।
मिसेज ठाकुर ने मुस्कराकर कहा – “बस यूँ समझ लो कि जरूरत नम्बर दो मुझे यहाँ ले आई है ।”
“तो तुम अपनी जरूरत से यहाँ आई हो ।”
“हाँ – यही समझ लो ।”
“कोई काम है क्या ?”
“हाँ डार्लिंग ।”
“लेकिन तुम्हें यह मालूम है कि...किस नाम से पुकारूँ तुम्हें ?”
“मोहिनी ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया ।
“तुम्हें यह मालूम है मोहिनी कि डार्लिंग अपनी दुनिया से अलग आदमी है । सिर्फ अपने लिए काम करता है । किसी और के लिए नहीं – विशेष रूप से पैसा लेकर, और फिर कोई उसे प्रभावित कर जाये तो दूसरी बात है – दौलत उसे प्रभावित नहीं करती –लेकिन खैर तुम इस योग्य हो कि तुम्हारे लिए कुछ किया जा सकता है, थोड़ी देर खामोश रहो –मेरा आदमी आ रहा है ।”
मिसेज ठाकुर चौंककर उसे देखने लगी । उसे कोई अंदाजा नहीं हो रहा था कि कोई आ रहा है, लेकिन चंद क्षणों बाद डार्लिंग का वही नौकर शराब के बर्तन उठाये प्रविष्ट हो गया । इस बात से मिसेज ठाकुर ने अनुमान लगाया कि डार्लिंग की श्रवण शक्ति बहुत तेज है और वह किसी चीते की तरह चौकन्ना भी रहता है ।
बर्तन रखकर वह व्यक्ति चला गया और डार्लिंग ने दो पैग तैयार किये । मिसेज ठाकुर ने अपना पैग उठाया और दोनों ने जाम टकराकर पैग अपने होंठों से लगा लिए ।
पहली चुस्की लगाने के बाद वह बोला – “अब शुरू हो जाओ, क्या समस्या है ?”
“एक व्यक्ति के विरुद्ध काम करना है डार्लिंग ।”
“क्या काम है ?”
“बस वह खुद को बेहद चालाक समझता है – हालाँकि नौजवान छोकरा है । मेरे मुकाबले पर आने की कोशिश की है उस हरामी पिल्ले ने – और यह नहीं जानता कि मैं क्या चीज हूँ । डार्लिंग ! मैं तुम्हें बताने में कोई खतरा नहीं समझती कि मैं एक ब्लैकमेलर हूँ ।”
“अवश्य होगी । मुझे तुम्हारी आँखों में जो खतरनाक बात नजर आती है वह यही संकेत करती है कि तुम ब्लैकमेलिंग करती होगी – बेशक तुम अपने आर्ट में माहिर होगी – किस तरह के लोगों को ब्लैकमेल करती हो ?”
“बस जो भी हाथ आ जाये – लेकिन इस योग्य हो कि मुझे कुछ दे सके । व्यर्थ लोगों पर हाथ डालना पसन्द नहीं करती ।”
“पसंद आ रही हो –पसंद आ रही हो – आगे बोलो ।” डार्लिंग ने दूसरा जाम भरते हुए कहा ।
मिसेज ठाकुर भी जाम की चुस्कियां ले रही थीं ।
“उसने धोखा देकर वह कागजात हासिल कर लिए जिनमें ब्लैकमेलिंग का स्टंट मौजूद था और उसके बाद उस हराम के जने ने मुझे ही ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया । बड़ा अपमानजनक व्यवहार किया उसने मेरे साथ । कहने लगा कि उसकी मातहत बनकर काम करूँ, वरना जिंदगी से महरूम कर दी जाऊँगी ।”
“बात दरअसल यह है डार्लिंग ।” वह जाम खाली करते हुए फिर बोली – “मैंने जिंदगी को बेहद करीब से देखा है । बहुत कठिन जिंदगी गुजारी है मैंने । तुम्हारे सामने मैं बयान नहीं कर सकती । इस तल्ख और कठिन जिंदगी के बाद जो कुछ मैंने हासिल किया उससे अपने भविष्य के सम्बंध में फैसला कर लिया । मर जाना पसंद करती हूँ लेकिन इस तरह अपमानित होकर, किसी की मातहती स्वीकार नहीं कर सकती । मैंने बहुत दौलत कमाई है डार्लिंग । लाखों रुपया का बैंक बैलेंस है मेरा । दौलत की इतनी हवस नहीं है मुझे ।”
“ओह – बस इतनी सी बात ।” डार्लिंग ने हँसते हुए कहा और मिसेज ठाकुर का दूसरा जाम भर गया ।
“पियो और पीती रहो । परेशान होने की जरूरत नहीं, यह समझो वह मर चुका है । अब उसका अस्तित्व शेष नहीं है । और यह बात डार्लिंग शराब के नशे में नहीं कह रहा है – यकीनन तुम इस बारे में जानकारी प्राप्त करके ही पहुँची होगी ।”
“ हाँ डार्लिंग ! यह सच है कि मैं तुम्हारे बारे में जानकारी प्राप्त करके ही यहाँ पहुँची हूँ और यह मेरा सौभाग्य है कि तुमने मेरा हाथ थाम लिया ।”
उसने अपने आपको दर्पण में देखा और मुस्करा दीं ।
फिर वह कोठी से बाहर निकली और अपनी कार निकालने की बजाय एक टैक्सी में सवार होकर चल पड़ी । शीघ्र ही टैक्सी शहर के एक बदनाम होटल के सामने रुक गई ।
मिसेज ठाकुर ने टैक्सी का किराया अदा किया और होटल में प्रविष्ट हो गई । होटल डार्लिंग जैसी बदनाम जगह आने वाली औरतों के बारे में कोई अच्छी राय कायम नहीं की जा सकती थी ।
देवकाय शरीर का स्वामी डार्लिंग उसे अपने कमरे की खिड़की से देख रहा था । डार्लिंग खुद इस होटल का मालिक था । उसे देखते ही डार्लिंग ने घण्टी के बटन पर उँगली रख दी । एक खतरनाक शक्ल का नौजवान उसके पास पहुँच गया ।
“इस तरफ देखा ?” डार्लिंग बोला ।
“देखा बॉस ।”
“कौन है ?”
“नयी....बिल्कुल नयी बॉस ।”
“बुलाओ ।” डार्लिंग ने कहा और नौजवान ने गर्दन हिला दी ।
थोड़ी देर बाद वह मिसेज ठाकुर के पास पहुँच गया ।
“उठो ।” उसने सर्द स्वर में कहा और मिसेज ठाकुर चौंककर उसे देखने लगी ।
“क्या बात है ?”
“तकदीर बन रही है – देर न करो – उस्ताद डार्लिंग को जानती हो ?”
“नाम सुना है ।”
“देख भी – लो बुला रहा है तुम्हें, जल्दी चलो – देर हो गई तो वह क्रोध से भड़क जायेगा ।” नौजवान ने कहा और मिसेज ठाकुर एक गहरी साँस लेकर रह गई ।
वह नौजवान के पीछे-पीछे चल पड़ी ।
थोड़ी देर बाद सीढ़ियां तय करके वह ऊपर पहुँची और फिर एक कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर नौजवान ने कहा – जाओ – अंदर चली जाओ और सुनो – उससे सहयोग की जिंदगी की जमानत है और असहयोग...” उसने वाक्य अधूरा ही छोड़ दिया ।
मिसेज ठाकुर दरवाजा खोलकर अंदर चली गई । उसने देवकाय व्यक्ति को देखकर बड़ी अदा से निगाहें झुका लीं ।
देवकाय व्यक्ति की दृष्टि मिसेज ठाकुर के चेहरे पर जम गई । चंद क्षण उसे घूरता रहा – फिर उसके होंठों पर मुस्कुराहट फैल गई ।
“वाह ! बहुत ही अच्छा मेकअप किया है तुमने । पता है अपनी उम्र से दस साल छोटी लग रही हो । कारोबार करने निकली हो ?” डार्लिंग ने पूछा ।
“नहीं डार्लिंग ! जिस कारोबार के बारे में तुम पूछ रहे हो, वह नहीं ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया ।
“खूब...खूब...फिर डार्लिंग का रुख कैसे हुआ ?”
“तुमसे मिलना चाहती थी ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया । और डार्लिंग संभलकर बैठ गया ।
“गोया – गोया तुम इस बात का इंतजार कर रही थीं कि मैं तुम्हें बुलाऊँ ।” उसने धीमे स्वर में कहा, लेकिन उसके स्वर में छिपी गुर्राहट मिसेज ठाकुर से छिपी न रह सकी ।
“नहीं ऐसा भी नहीं डार्लिंग ! यह बात मुझे मालूम नहीं थी कि तुम खुद ही मुझे तलब कर लोगे । बस – यहाँ बैठकर मैं किसी वेटर से तुम्हारे बारे में जानकारी प्राप्त करती और यह इच्छा प्रकट करती कि मुझे किसी तरह डार्लिंग से मिला दिया जाये ।”
“हूं – बात समझ में आने वाली है –क्यों मिलना चाहती थीं तुम मुझसे ?”
“क्या इतनी सी देर में यह सारी बातें कर लेना जरूरी है डार्लिंग ? अगर तुम मेरे साथ भद्र व्यवहार करना चाहते हो तो पहले मुझे कुछ पिलाओ – इस दरमियान बातें भी होती रहेंगी ।”
“क्या मँगवाऊं ?” डार्लिंग ने बटन पर हाथ रखते हुए पूछा ।
“शीरी – मेरे लिए शीरी ही ठीक है, और तुम जो उचित समझो ।”
“हश....बेवकूफ –- शीरी भी कोई पीने की चीज है ।” डार्लिंग ने कहा ।
वही नौजवान अंदर प्रविष्ट हुआ । डार्लिंग ने उसे व्हिस्की लाने का हुक्म दिया और मिसेज ठाकुर गहरी साँस लेकर खामोश हो गई ।
फिर उसने चंद क्षण बाद धीरे से कहा – “व्हिस्की पीने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है–बस तुम्हारा साथ देने के लिए थोड़ी दी पियूँगी – इतनी शक्तिशाली नहीं हूँ कि व्हिस्की के दो या तीन पैग से अधिक बर्दाश्त कर सकूँ ।”
शक्तिवान तो काफी नजर आती हो, और जो कुछ तुमने अपने चेहरे पर किया हुआ है उसने भी मुझे काफी प्रभावित किया है । बड़ा बेहतरीन मेकअप किया हुआ है और मुझे सलीकेमंद महिलाएं बहुत पसंद हैं – बहरहाल अपनी कहो कि डार्लिंग की क्या आवश्यकता पड़ गई । मेरे पास दो ही किस्म की औरतें आती हैं ।”
“कौन-कौन सी किस्म की ?”
“नम्बर एक जरूरतमंद और नम्बर दो भी जरूरतमंद । बस यूँ ही समझो कि नम्बर एक और नम्बर दो दोनों जरूरतें भिन्न होती हैं । होती यह दोनों ही जरूरतमंद हैं, कुछ दौलत की और कुछ किसी और सिलसिले में, विवरण सहित नहीं जाऊँगा ।” डार्लिंग ने मुस्कराते हुए कहा । उसकी मुस्कुराहट भी बेहद खतरनाक थी । मोटे होंठ के नीचे उसके भयानक दांतो की कतार झांक रही थी ।
मिसेज ठाकुर ने मुस्कराकर कहा – “बस यूँ समझ लो कि जरूरत नम्बर दो मुझे यहाँ ले आई है ।”
“तो तुम अपनी जरूरत से यहाँ आई हो ।”
“हाँ – यही समझ लो ।”
“कोई काम है क्या ?”
“हाँ डार्लिंग ।”
“लेकिन तुम्हें यह मालूम है कि...किस नाम से पुकारूँ तुम्हें ?”
“मोहिनी ।” मिसेज ठाकुर ने जवाब दिया ।
“तुम्हें यह मालूम है मोहिनी कि डार्लिंग अपनी दुनिया से अलग आदमी है । सिर्फ अपने लिए काम करता है । किसी और के लिए नहीं – विशेष रूप से पैसा लेकर, और फिर कोई उसे प्रभावित कर जाये तो दूसरी बात है – दौलत उसे प्रभावित नहीं करती –लेकिन खैर तुम इस योग्य हो कि तुम्हारे लिए कुछ किया जा सकता है, थोड़ी देर खामोश रहो –मेरा आदमी आ रहा है ।”
मिसेज ठाकुर चौंककर उसे देखने लगी । उसे कोई अंदाजा नहीं हो रहा था कि कोई आ रहा है, लेकिन चंद क्षणों बाद डार्लिंग का वही नौकर शराब के बर्तन उठाये प्रविष्ट हो गया । इस बात से मिसेज ठाकुर ने अनुमान लगाया कि डार्लिंग की श्रवण शक्ति बहुत तेज है और वह किसी चीते की तरह चौकन्ना भी रहता है ।
बर्तन रखकर वह व्यक्ति चला गया और डार्लिंग ने दो पैग तैयार किये । मिसेज ठाकुर ने अपना पैग उठाया और दोनों ने जाम टकराकर पैग अपने होंठों से लगा लिए ।
पहली चुस्की लगाने के बाद वह बोला – “अब शुरू हो जाओ, क्या समस्या है ?”
“एक व्यक्ति के विरुद्ध काम करना है डार्लिंग ।”
“क्या काम है ?”
“बस वह खुद को बेहद चालाक समझता है – हालाँकि नौजवान छोकरा है । मेरे मुकाबले पर आने की कोशिश की है उस हरामी पिल्ले ने – और यह नहीं जानता कि मैं क्या चीज हूँ । डार्लिंग ! मैं तुम्हें बताने में कोई खतरा नहीं समझती कि मैं एक ब्लैकमेलर हूँ ।”
“अवश्य होगी । मुझे तुम्हारी आँखों में जो खतरनाक बात नजर आती है वह यही संकेत करती है कि तुम ब्लैकमेलिंग करती होगी – बेशक तुम अपने आर्ट में माहिर होगी – किस तरह के लोगों को ब्लैकमेल करती हो ?”
“बस जो भी हाथ आ जाये – लेकिन इस योग्य हो कि मुझे कुछ दे सके । व्यर्थ लोगों पर हाथ डालना पसन्द नहीं करती ।”
“पसंद आ रही हो –पसंद आ रही हो – आगे बोलो ।” डार्लिंग ने दूसरा जाम भरते हुए कहा ।
मिसेज ठाकुर भी जाम की चुस्कियां ले रही थीं ।
“उसने धोखा देकर वह कागजात हासिल कर लिए जिनमें ब्लैकमेलिंग का स्टंट मौजूद था और उसके बाद उस हराम के जने ने मुझे ही ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया । बड़ा अपमानजनक व्यवहार किया उसने मेरे साथ । कहने लगा कि उसकी मातहत बनकर काम करूँ, वरना जिंदगी से महरूम कर दी जाऊँगी ।”
“बात दरअसल यह है डार्लिंग ।” वह जाम खाली करते हुए फिर बोली – “मैंने जिंदगी को बेहद करीब से देखा है । बहुत कठिन जिंदगी गुजारी है मैंने । तुम्हारे सामने मैं बयान नहीं कर सकती । इस तल्ख और कठिन जिंदगी के बाद जो कुछ मैंने हासिल किया उससे अपने भविष्य के सम्बंध में फैसला कर लिया । मर जाना पसंद करती हूँ लेकिन इस तरह अपमानित होकर, किसी की मातहती स्वीकार नहीं कर सकती । मैंने बहुत दौलत कमाई है डार्लिंग । लाखों रुपया का बैंक बैलेंस है मेरा । दौलत की इतनी हवस नहीं है मुझे ।”
“ओह – बस इतनी सी बात ।” डार्लिंग ने हँसते हुए कहा और मिसेज ठाकुर का दूसरा जाम भर गया ।
“पियो और पीती रहो । परेशान होने की जरूरत नहीं, यह समझो वह मर चुका है । अब उसका अस्तित्व शेष नहीं है । और यह बात डार्लिंग शराब के नशे में नहीं कह रहा है – यकीनन तुम इस बारे में जानकारी प्राप्त करके ही पहुँची होगी ।”
“ हाँ डार्लिंग ! यह सच है कि मैं तुम्हारे बारे में जानकारी प्राप्त करके ही यहाँ पहुँची हूँ और यह मेरा सौभाग्य है कि तुमने मेरा हाथ थाम लिया ।”