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सुबह हो चुकी थी । शोर-शराबा सुनकर बस्ती के अड़ोसी-पड़ोसी घर के आगे एकत्रित हो गए थे । राह चलते लोग ठिठक गए थे– मिसेज ठाकुर बचाओ–बचाओ की आवाजें निकालती बाहर की तरफ भागी ।
अजीब किस्म की बस्ती थी – बंजारों की बस्ती – मिसेज ठाकुर ने कभी यह बस्ती नहीं देखी थी । और न ही वह किसी शक्तिशाली मर्द से लड़ सकती थी । कलुवा ने भागकर उसकी चुटिया पकड़ ली । जूता अब भी उसके हाथ में था ।
उसने सरेआम जूता बजाना शुरू कर दिया ।
कुछ लोगों ने मिसेज ठाकुर की चीख पुकार पर बीच-बचाव कर दिया – वरना मिसेज ठाकुर की न जाने क्या गत बनती ? मिसेज ठाकुर को कुछ औरतें घेरे-घारकर पड़ोस के मकान में ले गई ।
बाहर से अब भी तरह-तरह की आवाजें आ रही थीं ।
“अरे कलुवा समझ से काम ले– बाबा भोपाली ठीक कहता है – तेरी बीवी चन्दा पर ऊपरी असर है । किसी झाड़-फूंक वाले को देखा दे, सब ठीक हो जायेगा । अपनी औरत पर हाथ उठाते हुए मर्द को शोभा नहीं देता ।”
“अरे नहीं काका, कोई भूत-प्रेत नहीं उस पर । नाटक करती है नाटक, हरामजादी मुझे भी पहचानने से इंकार करती है – कोई भगाकर लाया हूँ उसे क्या ? अरे ब्याह की रस्म की है । उसके बीमार बाप को हजार रुपये दिए हैं मैंने । ससुरा मर गया और यह आफत मेरे गले मढ़ गया ।”
इसी तरह की आवाजें थीं ।
मिसेज ठाकुर की कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या तमाशा है । आखिर वह कलुवा देहाती की बीवी कैसे बन गई ।
“देख री चंदा ।” उधर औरतें उसे समझा रही थीं – अरे हम औरतें तो मर्द की जूती होती हैं – अगर तुझ पर दौरा पड़ता है तो अपने खसम को प्यार से समझा-बुझाकर इलाज करा ले – इस तरह कब तक फिरती रहेगी ।”
“मैं चन्दा नहीं हूँ– मेरा नाम मोहिनी है । यह सब क्या चक्कर है ? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता । प्लीज हेल्प मी....आसपास कोई पुलिस स्टेशन हो तो मुझे वहाँ तक पहुंचा दीजिये....मैं तुम लोगों को मालामाल कर दूँगी...बहुत बड़ा कारोबार है मेरा ।”
“हाय दैय्या...क्या हो गया इसे.... ?” एक बोली ।
“अंग्रेजी भी बोलने लगी है ।” दूसरी ने कहा ।
“जरूर किसी चुड़ैल का साया है...” एक बूढ़ी औरत ने कहा – “बाबा भोपाली ठीक ही कहता है, अरी देखना यह हम पर हाथ पैर न फेंकने लगे – पकड़ के रखना इसे ।”
मिसेज ठाकुर उछल पड़ी । वह इन जाहिल औरतों को नहीं समझा सकती थी । और उसका उछलना था कि औरतों ने उसे दबोच लिया । वह हाथ-पांव भी चलाने लगी – गलियां देने लगी– लेकिन देखते-देखते उसके हाथ-पांव भी बांध दिए गए ।
फिर एक औरत भागी-भागी बाहर गई ।
“मोहनी चुड़ैल का भूत है उस पर, अंग्रेजी बोल रही है । हमें भी नहीं पहचानती ।”
मिसेज ठाकुर चीखती रही ।
अड़ोसी-पड़ोसियों की सलाह पर कलुवा किसी तांत्रिक को पकड़ लाया । दोपहर हो गई थी और मिसेज ठाकुर ने कुछ खाया-पिया नहीं था । फिर उसके हाथ-पांव तांत्रिक के सामने ही खोले गए ।
लम्बी-लम्बी जटाओं वाला काला भुजंग देवकाय शरीर वाला तांत्रिक उसे सुर्ख-सुर्ख आँखों से घूर रहा था ।
मिसेज ठाकुर के सामने एक हवन की आग सुलग रही थी । और उसने चारों तरफ आटे की सफेदी का वृत्त खींच दिया था । मिसेज ठाकुर में अब इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि उठ सके ।
फिर तांत्रिक ने हवन में कोई ऐसी चीज फेंकी जिसका तीखा धुआं उठा और मिसेज ठाकुर के नथुनों में घुस गया । वह बुरी तरह खांसने लगी । अब तांत्रिक ने चिमटा उठा लिया ।‘
“बोल....बोल कौन है तू...क्यों तूने इस औरत को पकड़ रखा है... ?”
“म...मैं सच कहती हूँ...म....म....म....मैं ।”
“मोहनी चुड़ैल...काली घाट वाली चुड़ैल...तू यहाँ...देख अब तेरी खैर नहीं.... ।” उसने एक चिमटा मिसेज ठाकुर की कमर पर मारा ।
मिसेज ठाकुर चीख पड़ी ।
अजीब किस्म की बस्ती थी – बंजारों की बस्ती – मिसेज ठाकुर ने कभी यह बस्ती नहीं देखी थी । और न ही वह किसी शक्तिशाली मर्द से लड़ सकती थी । कलुवा ने भागकर उसकी चुटिया पकड़ ली । जूता अब भी उसके हाथ में था ।
उसने सरेआम जूता बजाना शुरू कर दिया ।
कुछ लोगों ने मिसेज ठाकुर की चीख पुकार पर बीच-बचाव कर दिया – वरना मिसेज ठाकुर की न जाने क्या गत बनती ? मिसेज ठाकुर को कुछ औरतें घेरे-घारकर पड़ोस के मकान में ले गई ।
बाहर से अब भी तरह-तरह की आवाजें आ रही थीं ।
“अरे कलुवा समझ से काम ले– बाबा भोपाली ठीक कहता है – तेरी बीवी चन्दा पर ऊपरी असर है । किसी झाड़-फूंक वाले को देखा दे, सब ठीक हो जायेगा । अपनी औरत पर हाथ उठाते हुए मर्द को शोभा नहीं देता ।”
“अरे नहीं काका, कोई भूत-प्रेत नहीं उस पर । नाटक करती है नाटक, हरामजादी मुझे भी पहचानने से इंकार करती है – कोई भगाकर लाया हूँ उसे क्या ? अरे ब्याह की रस्म की है । उसके बीमार बाप को हजार रुपये दिए हैं मैंने । ससुरा मर गया और यह आफत मेरे गले मढ़ गया ।”
इसी तरह की आवाजें थीं ।
मिसेज ठाकुर की कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या तमाशा है । आखिर वह कलुवा देहाती की बीवी कैसे बन गई ।
“देख री चंदा ।” उधर औरतें उसे समझा रही थीं – अरे हम औरतें तो मर्द की जूती होती हैं – अगर तुझ पर दौरा पड़ता है तो अपने खसम को प्यार से समझा-बुझाकर इलाज करा ले – इस तरह कब तक फिरती रहेगी ।”
“मैं चन्दा नहीं हूँ– मेरा नाम मोहिनी है । यह सब क्या चक्कर है ? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता । प्लीज हेल्प मी....आसपास कोई पुलिस स्टेशन हो तो मुझे वहाँ तक पहुंचा दीजिये....मैं तुम लोगों को मालामाल कर दूँगी...बहुत बड़ा कारोबार है मेरा ।”
“हाय दैय्या...क्या हो गया इसे.... ?” एक बोली ।
“अंग्रेजी भी बोलने लगी है ।” दूसरी ने कहा ।
“जरूर किसी चुड़ैल का साया है...” एक बूढ़ी औरत ने कहा – “बाबा भोपाली ठीक ही कहता है, अरी देखना यह हम पर हाथ पैर न फेंकने लगे – पकड़ के रखना इसे ।”
मिसेज ठाकुर उछल पड़ी । वह इन जाहिल औरतों को नहीं समझा सकती थी । और उसका उछलना था कि औरतों ने उसे दबोच लिया । वह हाथ-पांव भी चलाने लगी – गलियां देने लगी– लेकिन देखते-देखते उसके हाथ-पांव भी बांध दिए गए ।
फिर एक औरत भागी-भागी बाहर गई ।
“मोहनी चुड़ैल का भूत है उस पर, अंग्रेजी बोल रही है । हमें भी नहीं पहचानती ।”
मिसेज ठाकुर चीखती रही ।
अड़ोसी-पड़ोसियों की सलाह पर कलुवा किसी तांत्रिक को पकड़ लाया । दोपहर हो गई थी और मिसेज ठाकुर ने कुछ खाया-पिया नहीं था । फिर उसके हाथ-पांव तांत्रिक के सामने ही खोले गए ।
लम्बी-लम्बी जटाओं वाला काला भुजंग देवकाय शरीर वाला तांत्रिक उसे सुर्ख-सुर्ख आँखों से घूर रहा था ।
मिसेज ठाकुर के सामने एक हवन की आग सुलग रही थी । और उसने चारों तरफ आटे की सफेदी का वृत्त खींच दिया था । मिसेज ठाकुर में अब इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि उठ सके ।
फिर तांत्रिक ने हवन में कोई ऐसी चीज फेंकी जिसका तीखा धुआं उठा और मिसेज ठाकुर के नथुनों में घुस गया । वह बुरी तरह खांसने लगी । अब तांत्रिक ने चिमटा उठा लिया ।‘
“बोल....बोल कौन है तू...क्यों तूने इस औरत को पकड़ रखा है... ?”
“म...मैं सच कहती हूँ...म....म....म....मैं ।”
“मोहनी चुड़ैल...काली घाट वाली चुड़ैल...तू यहाँ...देख अब तेरी खैर नहीं.... ।” उसने एक चिमटा मिसेज ठाकुर की कमर पर मारा ।
मिसेज ठाकुर चीख पड़ी ।