S
StoryPublisher
Guest
”ऊऊऊऊ…..आआआआहह…….उूुऊउगगगगगघह!!!!!” की आवाज़ें दोनो के हलक से निकल रही थीं. लेकिन ये पता नहीं चल रहा था. कि कौन सी आवाज़ किस की है. और फिर वो दोनो थक कर बिस्तर पर बेसूध और बे जान लेट गईं.
“बहुत मज़ा आया शाज़िया” नीलोफर ने शाज़िया के जिस्म के गिर्द अपनी बाहों का घेरा डालते हुए उस से पूछा.
“उफफफफफफ्फ़….उईई…..आअहह….आाअगगगगगगग!!! नीलोफर …..तुम ठीक कह रही हो, एक औरत ही औरत की प्यास को जान और समझ सकती है. और जो मज़ा एक औरत दूसरी औरत को दे सकती है वो शायद एक मर्द भी नही दे सकता. शाज़िया ने जवाब दिया.
“यार जितनी आग तुम्हारी चूत में दबी हुई है वो कोई औरत कम नही कर सकती, इस आग को ठंडा करने के लिए तुम्हे एक मोटे बड़े और सख़्त जवान लंड की ज़रूरत है. अगर तुम कहो तो में इस लंड का तुम्हारे लिए बंदोबस्त करूँ. यार अगर यह लंड एक दफ़ा तुम अपनी फुद्दि में ले लो गी. तो यकीन मानो तुम मरते दम तक इस लंड का पीछा नही छोड़ो गी” नीलोफर ने टीवी स्क्रीन पर अभी तक अपनी और ज़ाहिद की चलती हुई मूवी की तरफ इशारा किया.
इस सीन में नीलोफर अपने दूसरे आशिक का लंड अपने मुँह में ले कर उस का चुसाइ लगा रही थी.
जिस आदमी के ये लंड था उस का चेहरा तो शाज़िया को नज़र नही आ रहा था. मगर उस आदमी का लंड नीलोफर के पहले आशिक़ के मुक़ाबले में बहुत ज़्यादा बड़ा और मोटा और सख़्त नज़र आ रहा था. और इस शानदार लंड को देख कर शाज़िया फिर बहकने लगी.
शाज़िया: यार सच पूछो तो में भी अपनी जिंदगी का मज़ा लेना चाहती हूँ मगर डर लगता है.
नीलोफर: यार आज से मेरी बात मानो और यह डर वर निकाल कर जवानी का मज़ा लो, और तुम फिकर मत करो, देखना में जल्द ही इस लंड को तुम्हारी फुद्दि में डलवा दूं गी मेरी बानू.
“चलो हटो मुझे शरम आती है” शाज़िया नीलोफर की बात से शरमा गई और उस ने अपने आप को नीलोफर से अलग करते हुआ कहा.
शाम होने को थी. इस लिए शाज़िया ने उठ कर अपने कपड़े पहने और फिर नीलोफर को उसी तरह नंगा छोड़ कर अपने घर वापिस जाने के लिए निकल पड़ी.
नीलोफर के बनाए हुए गरम पकौड़े और चाइ तो टेबल पर पड़ी पड़ी ठंडी हो गईं थीं. मगर नीलोफर ने शाज़िया की प्यासी फुददी में आज एक नई आग लगा कर उसे इतना गरम कर दिया था. कि अब शाज़िया के लिए उसे ठंडा करने के लिए किसी गरम रोड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी.
शाज़िया ने अपने घर वापिस आते ही अपने कमरे में जा कर अपने कपड़े चेंज किए और फिर अपनी अम्मी के साथ घर के काम में उन का हाथ बंटाने लगी.
ज़ाहिद एक हफ्ते से अपनी एक डिपार्ट्मेनल ट्रैनिंग के सिलसिले में झेलम से बाहर था. वो भी उसी शाम ही वापिस अपने घर आया.
ज्यों ही ज़ाहिद अपने घर पहुँचा तो उस की अम्मी ने उस के लिए दरवाज़ा खोला और वो एक हफ्ते की जुदाई के बाद अपने बेटे से मिल कर बहुत खुश हुईं.
“बेटा तुम अंदर टीवी लाउन्ज में बैठो में तुम्हारे लिए पानी ले कर आती हूँ” कहते हुए रज़िया बीबी पानी लेने किचन में चली गई.
ज़ाहिद टीवी लाउन्ज में एंटर हुआ तो शाज़िया को सोफे पर बैठ कर टीवी देखते पाया.
शाज़िया भी अपने भाई ज़ाहिद को इतने दिनो बाद मिल कर बहुत खुश हुई.
अपनी बेहन से सलाम दुआ के बाद ज़ाहिद भी शाज़िया के पास ही सोफे पर बैठ गया.
“बहुत मज़ा आया शाज़िया” नीलोफर ने शाज़िया के जिस्म के गिर्द अपनी बाहों का घेरा डालते हुए उस से पूछा.
“उफफफफफफ्फ़….उईई…..आअहह….आाअगगगगगगग!!! नीलोफर …..तुम ठीक कह रही हो, एक औरत ही औरत की प्यास को जान और समझ सकती है. और जो मज़ा एक औरत दूसरी औरत को दे सकती है वो शायद एक मर्द भी नही दे सकता. शाज़िया ने जवाब दिया.
“यार जितनी आग तुम्हारी चूत में दबी हुई है वो कोई औरत कम नही कर सकती, इस आग को ठंडा करने के लिए तुम्हे एक मोटे बड़े और सख़्त जवान लंड की ज़रूरत है. अगर तुम कहो तो में इस लंड का तुम्हारे लिए बंदोबस्त करूँ. यार अगर यह लंड एक दफ़ा तुम अपनी फुद्दि में ले लो गी. तो यकीन मानो तुम मरते दम तक इस लंड का पीछा नही छोड़ो गी” नीलोफर ने टीवी स्क्रीन पर अभी तक अपनी और ज़ाहिद की चलती हुई मूवी की तरफ इशारा किया.
इस सीन में नीलोफर अपने दूसरे आशिक का लंड अपने मुँह में ले कर उस का चुसाइ लगा रही थी.
जिस आदमी के ये लंड था उस का चेहरा तो शाज़िया को नज़र नही आ रहा था. मगर उस आदमी का लंड नीलोफर के पहले आशिक़ के मुक़ाबले में बहुत ज़्यादा बड़ा और मोटा और सख़्त नज़र आ रहा था. और इस शानदार लंड को देख कर शाज़िया फिर बहकने लगी.
शाज़िया: यार सच पूछो तो में भी अपनी जिंदगी का मज़ा लेना चाहती हूँ मगर डर लगता है.
नीलोफर: यार आज से मेरी बात मानो और यह डर वर निकाल कर जवानी का मज़ा लो, और तुम फिकर मत करो, देखना में जल्द ही इस लंड को तुम्हारी फुद्दि में डलवा दूं गी मेरी बानू.
“चलो हटो मुझे शरम आती है” शाज़िया नीलोफर की बात से शरमा गई और उस ने अपने आप को नीलोफर से अलग करते हुआ कहा.
शाम होने को थी. इस लिए शाज़िया ने उठ कर अपने कपड़े पहने और फिर नीलोफर को उसी तरह नंगा छोड़ कर अपने घर वापिस जाने के लिए निकल पड़ी.
नीलोफर के बनाए हुए गरम पकौड़े और चाइ तो टेबल पर पड़ी पड़ी ठंडी हो गईं थीं. मगर नीलोफर ने शाज़िया की प्यासी फुददी में आज एक नई आग लगा कर उसे इतना गरम कर दिया था. कि अब शाज़िया के लिए उसे ठंडा करने के लिए किसी गरम रोड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी.
शाज़िया ने अपने घर वापिस आते ही अपने कमरे में जा कर अपने कपड़े चेंज किए और फिर अपनी अम्मी के साथ घर के काम में उन का हाथ बंटाने लगी.
ज़ाहिद एक हफ्ते से अपनी एक डिपार्ट्मेनल ट्रैनिंग के सिलसिले में झेलम से बाहर था. वो भी उसी शाम ही वापिस अपने घर आया.
ज्यों ही ज़ाहिद अपने घर पहुँचा तो उस की अम्मी ने उस के लिए दरवाज़ा खोला और वो एक हफ्ते की जुदाई के बाद अपने बेटे से मिल कर बहुत खुश हुईं.
“बेटा तुम अंदर टीवी लाउन्ज में बैठो में तुम्हारे लिए पानी ले कर आती हूँ” कहते हुए रज़िया बीबी पानी लेने किचन में चली गई.
ज़ाहिद टीवी लाउन्ज में एंटर हुआ तो शाज़िया को सोफे पर बैठ कर टीवी देखते पाया.
शाज़िया भी अपने भाई ज़ाहिद को इतने दिनो बाद मिल कर बहुत खुश हुई.
अपनी बेहन से सलाम दुआ के बाद ज़ाहिद भी शाज़िया के पास ही सोफे पर बैठ गया.