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ज़ाहिद अपनी बहन के इस ज़ोरदार धक्के के लिए तैयार नही था. इसीलिए वो अपना बेलेन्स खो बैठा और ज़मीन पर जा गिरा.
ज़ाहिद के ज़मान पर गिरने की देर थी. कि शाज़िया जल्दी से किचन से निकली और उस ने अपने कमरे में जा कर अपने आप को अंदर लॉक कर लिया.
पहली दो दफ़ा की तरह आज शाज़िया अपने कमरे में आ कर रोई तो नही. मगर पहले की तरह उस का दिल आज भी परेशान हुआ कि वो अंजाने में किस मुसीबत में पड़ चुकी है. कि उस का अपना भाई ही उस का आशिक़ बन कर उस के सामने आन खड़ा हुआ है.
वो छाते हुए भी अपनी अम्मी से अपने भाई की हरकतो की शिकायत नही लगा सकती थी. इस की पहली वजह तो ये थी. कि उस की अम्मी ने कभी भी शाज़िया की इस बात का ऐतबार नही करना था. कि उन का अपना सघा बेटा ही उन की बेटी की इज़्ज़त लूटने पर तुला हुआ है.
दूसरा वो अम्मी को अपने भाई की शिकायत लगाती. तो शाज़िया की अपनी ये बात भी उस की अम्मी के सामने ज़ाहिर हो जानी थी.कि कैसे उन की परदा दार और शरीफ बच्ची रात की तन्हाई में एक गैर मर्द से छुप छुप कर ना सिर्फ़ गंदी बातें करती रही है. बल्कि वो अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिए उस के पास भी जा पहुँची थी.
इन सारी बातों को सोच सोच कर शाज़िया के पास सबर के अलावा अभी को चढ़ा नही था.
मगर वो अपने इस इरादे पर अभी तक कायम थी. कि वो जल्द ही शादी कर के इस घर से चली जाएगी. क्यों कि अब उस के पास इस के सिवा कोई दूसरा हल नही था.
उधर दूसरी तरफ शाज़िया के जाने के बाद ज़ाहिद अपने कपड़े झाड़ता फर्श से उठा और मुस्कुराता हुआ घर से बाहर की तरफ चला गया.
उस का दिल और लंड इस बात की तसल्ली मे थे. कि आज उस ने फिर अपनी बहन के जवान प्यासे जिस्म को अपनी ज़ुबान,हाथों और लंड से रगड़ रगड़ कर उस को ये बता दिया है. कि चाहे कुछ भी हो जाए ज़ाहिद अपनी बहन की प्यासी फुद्दि को अपने लंड से भर कर के ही रहे गा.
शाज़िया उस वक्त तक अपने कमरे से बाहर नही निकली.जब तक उसे ये यकीन नही हो गया कि उस की अम्मी बाथरूम से बाहर आ चुकी हैं.
अपने कमरे से बाहर आ कर शाज़िया ने सब से पहले ये देखा कि कहीं उस का भाई घर में तो माजूद नही.
जब उस को इतमीनान हो गया के ज़ाहिद घर से बाहर जा चुका है. तो शाज़िया ने सुख का साँस लिया और अपने घर के काम काज में दुबारा मसरूफ़ हो गई.
उधर दूसरी तरफ ज़ाहिद ने घर से निकल कर खाला गुलशन का फोन नंबर मिलाया. जब गुलशन ने अपने फोन को उठा कर “हेलो” कहा. तो ज़ाहिद ने खाला को अपना तारूफ़ करवा कर उसे सख्ती से मना कर दिया. “कि खबर दार आइन्दा वो उस की बहन के लिए इस किसम का रिश्ता ले कर आई तो ज़ाहिद उस की टाँगे तोड़ देगा ”.
खाला गुलशन जानती थी.कि ज़ाहिद पोलीस में थाने दार है. और वो जो बात कह रहा है,वक्त आने पर उस पर अमल भी कर सकता है.
इसीलिए खाला गुलशन ने ज़ाहिद से वादा कर लिया कि वो दुबारा कभी उस के घर की तरफ रुख़ भी नही करे गी.
कुछ देर बाहर अपने दोस्तों के साथ वक्त गुज़ार कर ज़ाहिद देर गये अपने घर लौटा. उस वक्त तक हस्बे मामूल उस की अम्मी और बहन अपने अपने कमरों में जा चुकी थी.
ज़ाहिद को दूसरे दिन अपनी ड्यूटी पर वापिस जाने से पहले एसपी ऑफीस में रिपोर्ट करना था. इसीलिए वो भी जा कर अपने कमरे में सो गया.
इस के बाद कुछ दिन तक ज़िंदगी अपनी रुटीन पर ही चलती रही.
ज़ाहिद के ज़मान पर गिरने की देर थी. कि शाज़िया जल्दी से किचन से निकली और उस ने अपने कमरे में जा कर अपने आप को अंदर लॉक कर लिया.
पहली दो दफ़ा की तरह आज शाज़िया अपने कमरे में आ कर रोई तो नही. मगर पहले की तरह उस का दिल आज भी परेशान हुआ कि वो अंजाने में किस मुसीबत में पड़ चुकी है. कि उस का अपना भाई ही उस का आशिक़ बन कर उस के सामने आन खड़ा हुआ है.
वो छाते हुए भी अपनी अम्मी से अपने भाई की हरकतो की शिकायत नही लगा सकती थी. इस की पहली वजह तो ये थी. कि उस की अम्मी ने कभी भी शाज़िया की इस बात का ऐतबार नही करना था. कि उन का अपना सघा बेटा ही उन की बेटी की इज़्ज़त लूटने पर तुला हुआ है.
दूसरा वो अम्मी को अपने भाई की शिकायत लगाती. तो शाज़िया की अपनी ये बात भी उस की अम्मी के सामने ज़ाहिर हो जानी थी.कि कैसे उन की परदा दार और शरीफ बच्ची रात की तन्हाई में एक गैर मर्द से छुप छुप कर ना सिर्फ़ गंदी बातें करती रही है. बल्कि वो अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिए उस के पास भी जा पहुँची थी.
इन सारी बातों को सोच सोच कर शाज़िया के पास सबर के अलावा अभी को चढ़ा नही था.
मगर वो अपने इस इरादे पर अभी तक कायम थी. कि वो जल्द ही शादी कर के इस घर से चली जाएगी. क्यों कि अब उस के पास इस के सिवा कोई दूसरा हल नही था.
उधर दूसरी तरफ शाज़िया के जाने के बाद ज़ाहिद अपने कपड़े झाड़ता फर्श से उठा और मुस्कुराता हुआ घर से बाहर की तरफ चला गया.
उस का दिल और लंड इस बात की तसल्ली मे थे. कि आज उस ने फिर अपनी बहन के जवान प्यासे जिस्म को अपनी ज़ुबान,हाथों और लंड से रगड़ रगड़ कर उस को ये बता दिया है. कि चाहे कुछ भी हो जाए ज़ाहिद अपनी बहन की प्यासी फुद्दि को अपने लंड से भर कर के ही रहे गा.
शाज़िया उस वक्त तक अपने कमरे से बाहर नही निकली.जब तक उसे ये यकीन नही हो गया कि उस की अम्मी बाथरूम से बाहर आ चुकी हैं.
अपने कमरे से बाहर आ कर शाज़िया ने सब से पहले ये देखा कि कहीं उस का भाई घर में तो माजूद नही.
जब उस को इतमीनान हो गया के ज़ाहिद घर से बाहर जा चुका है. तो शाज़िया ने सुख का साँस लिया और अपने घर के काम काज में दुबारा मसरूफ़ हो गई.
उधर दूसरी तरफ ज़ाहिद ने घर से निकल कर खाला गुलशन का फोन नंबर मिलाया. जब गुलशन ने अपने फोन को उठा कर “हेलो” कहा. तो ज़ाहिद ने खाला को अपना तारूफ़ करवा कर उसे सख्ती से मना कर दिया. “कि खबर दार आइन्दा वो उस की बहन के लिए इस किसम का रिश्ता ले कर आई तो ज़ाहिद उस की टाँगे तोड़ देगा ”.
खाला गुलशन जानती थी.कि ज़ाहिद पोलीस में थाने दार है. और वो जो बात कह रहा है,वक्त आने पर उस पर अमल भी कर सकता है.
इसीलिए खाला गुलशन ने ज़ाहिद से वादा कर लिया कि वो दुबारा कभी उस के घर की तरफ रुख़ भी नही करे गी.
कुछ देर बाहर अपने दोस्तों के साथ वक्त गुज़ार कर ज़ाहिद देर गये अपने घर लौटा. उस वक्त तक हस्बे मामूल उस की अम्मी और बहन अपने अपने कमरों में जा चुकी थी.
ज़ाहिद को दूसरे दिन अपनी ड्यूटी पर वापिस जाने से पहले एसपी ऑफीस में रिपोर्ट करना था. इसीलिए वो भी जा कर अपने कमरे में सो गया.
इस के बाद कुछ दिन तक ज़िंदगी अपनी रुटीन पर ही चलती रही.