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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

ज़ाहिद और शाज़िया दोनो के लिए अब मज़ीद सबर करना मुश्किल हो रहा था.इसीलिए ज़ाहिद ने जोश में आते हुए अपनी बहन शाज़िया के मेहन्दी लगे पाँव को अपनी छाती से हटा कर अपनी बहन की टाँगों को अपने हाथो से उठाया. और शाज़िया के घुटनो को मोडते हुए उस की टाँगों को उस की भारी छाती से लगा कर शाज़िया की टांगे खोल दीं.

साथ ही ज़ाहिद ने शाज़िया की गान्ड के नीचे एक तकिया रखा. जिस की वजह से शाज़िया की गुलाबी चूत का मुँह ज़ाहिद की आँखों के सामने खुल गया.

थोड़ी देर तक ज़ाहिद अपनी बहन की टाँग और गीली चूत को देखता रहा. और फिर ज़ाहिद ने अपनी बहन की फूली हुई चूत के छोटे से सुराख पर अपने अपना लोहै की रोड की तरहा सख़्त लंड की टॉप लगा कर उसे शाज़िया की पानी छोड़ती फुद्दि के ऊपर नीचे रगड़ा.

तो ज़ाहिद के लंड की टोपी उस की बहन के चूत के पानी से पूरी तर हो गई.

“ओह भाईईईईईई” शाज़िया अपने भाई की मोटी टोपी अपनी गरम फुद्दि पर रगड़ते हुए पा कर सिसक उठी.

शाज़िया को अब अपने भाई के लंड की गर्माहट बेचैन कर रही थी.

इतने दिनो से अपने भाई के जिस मोटे और बड़े लंड के सपने वो देख रखी थी.

आज उस के भाई का वो हो ही सख़्त और जवान लंड बड़े मज़े से उस की गरम फुद्दि के होंठो के ऊपर नीचे हो रहा था.

अपने भाई के लंड की तपिश को अपनी फुद्दि के लिप्स पर महसूस करते ही शाज़िया भी अपनी गान्ड को हिला हिला कर अपनी चूत उस के लंड की टोपी से रगड़ने लगी.

जिस की वजह से शाज़िया की गुदाज और भारी छातियाँ उस के जवान सीने पर आगे पीछे हिलने लगीं.

शाज़िया की छाती पर उस के हिलती हुई बाहरी छातियों का ये नज़ारा ज़ाहिद के लिए बहुत ही दिल कश था.

फिर ज़ाहिद अपनी बहन की चूत पर अपने लंड इसी तरह रगड़ते हुए थोड़ा से झुका और शाज़िया की कमर में अपने हाथ डालते हुए ज़ाहिद ने एक हल्का सी धक्का मारा.

तो ज़ाहिद के लंड की मोटी टोपी उस की बहन के पानी से तर,गरम और जनम जनम से प्यासी चूत के मोटे लिप्स को खोलती हुई शाज़िया की फुद्दि में दाखिल हो गई.

“अहह भाईईईईईईईई” अपने भाई के मोटी टोपी को अपनी चूत में एंटर होते हुए महसूस कर के मज़े और थोड़ी तकलीफ़ की वजह से शाज़िया के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई.

ज़ाहिद ने अपने लंड को अपनी बहन की फुद्दि में और आगे बढ़ाने के लिए थोड़ा सा ज़ोर लगाया.मगर उस के लंड की टोपी शाज़िया की चूत के तंग सुराख में फँस कर रह गई.

असल में दो साल से तलाक़ याफ़्ता होने की वजह से शाज़िया की चूत को अभी तक किसी मर्द का लंड तो नसीब नही हुआ था.

इसीलिए दो साल में लंड से महरूमी की वजह से शाज़िया की फुद्दि तो सिकुड कर फिर से किसी कंवारी कली की शकल इख्तियार कर चुकी थी.

इसी लिए ज्यों ही ज़ाहिद के लंड का फूला हुआ मोटा टोपा उस की बहन की तंग फुद्दि में दाखिल हुआ.तो ज़ाहिद अपनी बहन की चूत की तंगी और गरमाइश को महसूस करते हुआ चिल्ला उठा ““उफफफफफफफफफफफफ्फ़ शाजिया मेरी जान क्या मज़ा आ रहा है,तुम्हारी चूत तो बहुत ही टाइट है,लगता है तुम्हारे सबका शोहर ने तुम्हारी चूत को जैसे कभी चोदा ही नहीं, तभी तो आज तक मेरी बहन की चूत इतनी तंग है”

ज़ाहिद ने आज तक कितनी ही औरतों की चुतो में अपना लंड डाला था. मगर जितनी गरम और तंग उसे अपनी बहन शाज़िया की फुद्दि लगी थी. इस तरह की फुद्दि उसे आज तक नसीब नही हुई थी.

इस बात के बावजूद कि शाज़िया की चूत ज़ाहिद की सकिंग और फिर अपना ही पानी छोड़ छोड़ कर बे इंतहा स्लिपरी हो चुकी थी.मगर फिर भी ज़ाहिद को अपनी बहन की चूत में अपना लंड डालते वक्त यूँ महसूस हो रहा था. कि जैसे आज वो अपना लंड पहली बार किसी कंवारी फुद्दि में डाल रहा हो.

अपनी ही बहन की फुद्दि में अपना लंड डाल कर जो मज़ा ज़ाहिद को उस वक्त मिला था. उस मज़े और स्वाद का ज़ाहिद ने आज तक तवस्सुर भी नही किया था.

जब कि दूसरी तरफ शाज़िया को भी जब अपने भाई का सख़्त,मोटा और बड़ा लंड अपनी तंग फुद्दि में दाखिल होता हुआ महसूस हुआ.तो शाज़िया को यूँ लगा कि जैसे आज उस की दूसरी सुहाग रात में उस की फुद्दि फिर से कुँवारी चूत का रूप धर चुकी है.और अब उस का भाई ज़ाहिद उस की कुँवारी चूत की सील तोड़ रहा है.

शाज़िया को तो इस लम्हे का पिछले दो साल से शिद्दत से इंतिज़ार था. आज शाज़िया के दिल की मुराद पूरी हो चुकी थी. क्यों कि उस के भाई का जवान,सख़्त और तना हुआ लंड किसी शेष नाग की तरह अपने फन को उठाए उस की चूत के बिल में गुस्से से जा रहा था.

अपने भाई के लंड को अपनी चूत के आगोश में आते हुए पा कर ज़ाहिद की तरह शाज़िया को भी ऐसा मज़ा मिला. ये मज़ा उस ने अपनी असली कंवारी चूत की सील तुड़वाते हुए भी अपने असली शोहर से हासिल नही किया था.

इसीलिए फूलों की पत्तियॉं से सजी अपनी सुहाग की सेज पर लेटी हुई शाज़िया ने अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेते ही शाज़िया के मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई ““उउउइईईईई..मर गेिईई..”आआआः..भाईईईईईईई निकाल लो.. में नही ले पाउन्गी आप का इतना मोटा लंड”

बेशक शाज़िया को अपने भाई का लंड अपनी चूत में ले कर मज़ा तो बहुत आ रहा था.

लेकिन ज़ाहिद का लंड ही इतना बड़ा और मोटा था. कि उस की सख्ती को अपनी पानी पानी होती चूत की दीवारो के ज़रिए महसूस कर के शाज़िया को यूँ लग रहा था.कि जैसे उस की चूत अंदर से फॅट कर फैल रही है.

इसीलिए अपने सगे भाई के लंड का स्वाद पहली दफ़ा पाने के बावजूद शाज़िया का जिस्म और चूत अकड़ से गये तो वो अपने भाई को थोड़ी देर रुकने का कहने लगी थी.

मगर दूसरी तरफ ज़ाहिद तो औरतों के मामले में एक मंझा हुआ खिलाड़ी था. और वो हर किस्म की औरतों को चोद चोद कर अब ये बात अच्छी तरह जान चुका था. कि औरतों को किस तरह हॅंडेल किया जाता है.

 
इसी लिए ज़ाहिद ने अपनी बहन की बात को नज़र अंदाज़ करते हुए अपना मुँह आगे बढ़ाया. और अपनी बहन शाज़िया के एक निपल को अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू किया.

ज़ाहिद ने अपनी बहन के कहने पर अमल करते हुए ज्यों ही शाज़िया की चूत में जाते हुए अपने लंड को थोड़ी देर के लिए रोका. तो शाज़िया की फुद्दि को कुछ सकून मिला और उस ने अपना जिस्म और चूत ढीली छोड़ दी.

उधर ज्यों ही ज़ाहिद ने समझा कि उस की बहन थोड़ी पुर सकून हो चुकी है. तो उस ने मोका देखते ही अपने लंड को शाज़िया की फुद्दि से पूरा बाहर खींचा. और फिर अपनी कमर को सख़्त करते हुए पूरी ताक़त से एक और धक्का लगाया.

जिस से ज़ाहिद का लंड तेज़ी के साथ उस की बहन की चूत के बंद दरवाज़ों को खोलता हुआ जड़ तक पूरे का पूरा शाज़िया की फुद्दि के अंदर तक घुसता चला गया….

“हाईईईईईईईईई भाईईईईईईईईईईई आप ने तो मेरी शादी शुदा चूत को फिर से फाड़ र्र्र्र्ररर दिया है आज्ज्जज्ज्ज्ज्ज” अपने भाई के भरपूर धक्के के साथ भाई के सख़्त लंड को अपनी फुद्दि में जाते हुए महसूस कर के शाज़िया ज़ोर से चिल्ला उठी.

उसे अपने भाई के बहुत ही मोटे और तगडे लंड को अपनी फुद्दि में पा कर वाकई ही ऐसे लगा. जैसे आज उस के भाई ने जिंदगी में दूसरी बार उस की चूत की सील को तोड़ कर अपनी ही बहन की नथ उतार दी हो.

“जान मुझे पता है कि काफ़ी टाइम से कोई लंड ना लेने की वजह से तुम्हारी फुद्दि काफ़ी तंग हो चुकी है,मगर अब वालिमा जायज़ करने के लिए थोड़ी बहुत तकलीफ़ तो उठानी ही पड़े गी,इसीलिए थोड़ा बर्दाश्त करो,अभी कुछ देर में सब ठीक हो जाएगा ” ये कहते हुए ज़ाहिद ने अपने लंड को थोड़ी देर के लिए फिर रोक लिया. ताकि शाज़िया की चूत उस के मोटे और बड़े लंड को अपने अंदर लेने के बाद,ज़ाहिद के बड़े लंड को अपने अंदर आसानी से अड्जस्ट कर ले.

अपने लंड को अपनी बहन की चूत में पेलते ही ज़ाहिद ने जल्दी से अपने मुँह को आगे बढ़ा कर शाज़िया के मुँह पर रखा.

अब उपर से अपनी बहन की छाती से छाती मिलाते हुए ज़ाहिद अपनी बहन की गरम ज़ुबान से अपनी नुकीली ज़ुबान लड़ा रहा था.

जब कि नीचे से ज़ाहिद के ज़ोर दार झटके की वजह से शाज़िया की चूत अपने आप खुलती चली गई.और उस के भाई का लंड अपने आप ही अपना रास्ता बनाता हुआ शाज़िया की तरसती हुई फुद्दि में अपनी जगह बना रहा था.

शाज़िया तो अपने भाई के इस ज़ोर दार झटके की वजह से पूरी आवाज़ में चीखना भी चाहती थी. मगर अपना मुँह अपने भाई के मुँह में दबे होने की वजह से वो ऐसा नही कर पाई.

ज़ाहिद थोड़ी देर ऐसे ही अपनी बहन शाज़िया की छाती पर पड़ा पड़ा अपनी बहन के होंठो का रस पीता रहा.और फिर कुछ देर बाद अपने जिस्म को शाज़िया के जिस्म से थोड़ा ऊपर उठा कर ज़ाहिद ने शाज़िया के मोटे निपल को अपने मुँह में भरते हुए अपनी बहन से कहा “ हाईईईईईईई आज तो मेरे मेरे लंड की तो किस्मत ही खुल गई है मेरी जान.”

“क्यों वो कैसे भाईईईईईईई” अपने भाई के जवान जिस्म के बोझ तले दबी दबी हुई शाज़िया ने अपने भाई से पुछा.

“ क्यों कि ज़िंदगी में आज पहली बार मेरा लंड किसी औरत की चूत में पूरा घुसा है,और खुशी की बात ये है कि वो औरत कोई और नही बल्कि मेरी अपनी सग़ी बहन है” ज़ाहिद ने मस्ती में आते हुए अपनी बहन के निपल पर अपने दाँत गढ़ा दिए.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़,हाईईईईईईईईईईईई क्या आप सच कह रहे हैं भाई” अपने भाई के दाँतों के काटने और उस के लंड की गरमआइश और सख्ती को अपनी फुद्दि में महसूस करते हुए शाज़िया चिल्लाई.”क्या? वाकई ही आप का पूरा लंड मेरी फुद्दि के अंदर चला गया है भाईईईईईई.”

“हां मेरी बहन तुम्हारी चूत मेरा बड़ा और मोटा लंड पूरा का पूरा अपने अंदर निगल चुकी है, 'क़सम से शाज़िया, क्या गरम तंदूर की तरह दहकती हुई फुद्दि है तुम्हारी! तुम्हारी फुद्दि ने मेरे लंड को ऐसे अपने लिप्स में जकड़ा हुआ है जैसे पहली दफ़ा लंड इस में गया हो,हाईईईईईईईईई “ ज़ाहिद ने अपनी बहन की तपती फुद्दि में अपने लंड को प्यार से घुमाते हुए कहा.

 
उधर दूसरी तरफ अपने भाई का लंबा और मोटा लंड अपने अंदर लेते ही शाज़िया की फुद्दि में अजीब सी खारिश शुरू हो गई थी. और शाज़िया को यूँ महसूस हो रहा था कि उस की फुद्दि उस के भाई के लंड के आगे जैसे पिघल ही गई हो.

अब अपने भाई के मुँह से ये गरम कल्मत सुन कर शाज़िया मज़ीद जल उठी.और अब वो भी अपने भाई ज़ाहिद की गर्दन पकड़ अपनी भारी गान्ड को उठा उठा कर अपनी गरम प्यासी चूत को ज़ाहिद के मोटे लंबे लंड पर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे करते हुए कहने लगी.“हाआआआआआआआआआआअहह,कितना गरम लंड है आप का भाई, उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मारो मेरी चूत अपने मोटी लंड से, बहुत प्यासी है तुम्हरी बहन की चूत मेरे भाईईईईईई”.

“मेरी जान मेने अपना पूरा लंड तो डाल दिया है तुम्हारी प्यासी चूत में, अब तुम को चोद चोद कर खूब मज़ा दूँगा में” अपने नीचे लेटी हुई अपनी बहना को इस तरह अपनी गान्ड हिलाते देख कर ज़ाहिद भी मस्ती में आया.

और वो भी शाज़िया के ऊपर उछल उछल कर ज़ोर दार झटके मारते हुए अपनी बहन की गरम फुद्दि को जोश से चोदने लगा.

कमरे में इस वक्त दोनो बहन भाई के जिस्मो के आपस में टकराने की वजह से“थप थप “ और तेज साँसों की आवाज़ें गूँज रही थी.

साथ ही साथ शाज़िया की गरम फुद्दि से लगा तार निकलते हुए पानी, और दोनो जवान और गरम बहन भाई के मोटे और बड़े लंड और प्यासी और गरम चूत के आपस में मिलने की वजह से “पच पुच पक्फह” की आवाज़ आ रही थी.

इस चुदाई के दौरान शाज़िया ने कितनी बार अपनी चूत का पानी छोड़ा और कितना बार वो झडी ये बात वो खुद ही भूल गई थी

शाज़िया की चूत के पानी ने उस की फुद्दि से निकल निकल कर उस के नीचे बिछी हुई बिस्तर की चादर को पूरी तरह से गीला कर दिया था.

जब कि ज़ाहिद का जिस्म उस की भड़क रफ़्तार चुदाई की वजह से पसीने से लत पथ हो रहा था.

अपनी बहन की चूत मारते हुए ज़ाहिद साथ ही साथ आगे झुक कर अपनी बहन के मोटे और भारी मम्मो को अपने हाथों से दबा और चूस भी रहा था.

“व्वाहह,क्या जबर्जस्त मम्मे हैं मेरी बहन तुम्हारे,अब कुछ ही दिनो के बाद इन में दूध भी भर जाएगा ,तो में ज़रूर अपनी बहन के मम्मो से ये दूध पीऊंगा मेरी जान “

" उफफफफफफ्फ़, अच्छा तो इन में ये दूध कैसे भरेगा भाईईईईईई" अपने भाई की बात सुन कर शाज़िया ने सिसकारते हुए पूछा.

"मेरी जान आज की चुदाई की वजह से में तुम्हें प्रेगेनेंट कर के तुम्हारी कोख में हमाल ठहरा दूँगा,और फिर 3-4 महीने बाद तुम्हारे इन मम्मो में दूध भर जाएगा, जिस से तुम्हारे ये मम्मे पहले से भी बड़े हो जाएँगे मेरी बहन " ज़ाहिद ने अपनी थूक भरी ज़ुबान को अपनी बहन की ज़ुबान से मिलाते हुए जवाब दिया.

"ओह तो फिर मेरे पेट में अपना बच्चा डाल कर मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो मेरे भाईईईईईईईईईईई “ज़ाहिद की बात सुन कर शाज़िया ने भी उसी मस्ती में आते हुए अपने भाई से फरमाइश की.

अपनी कोख में अपने ही भाई से अपना हमाल ठहराने वाली बात सुन कर शाज़िया की फुद्दि तो बे इंतिहा गरम हो चुकी थी.

अपनी बहन की बात सुन कर ज़ाहिद ने शाज़िया के जिस्म के गिर्द अपनी बाहें डाल कर उसे कस कर पकड़ा. तो नीचे से शाज़िया ने भी अपने पैर उठा कर अपने भाई की कमर के गिर्द जकड लिए.

फिर ज़ाहिद ने अपने पूरा लंड अपनी बहन की चूत से बाहर खैंच कर 8 10 ज़ोरदार धक्के मारने लगा.

आज अपनी सग़ी बहन से अपनी सुहाग रात मनाते वक्त ज़ाहिद ने अपनी बहन की चूत को सही महीनो में खोल कर रख दिया था.

ज़ाहिद का लंड उस वक्त अपनी बहन की चूत की उन तहों में जा कर ठोकर मार रहा था. जिस जगह शाज़िया के सबका शोहर ने कभी पहुँचाने का तवस्सुर भी नही किया था.

दोनो बहन भाई को अपनी चुदाई के दौरान मज़े से बे हाल होते हुए उस वक्त ऐसा महसूस हो रहा था. जैसे वो दोनो उस वक्त सातवें आसमान पर उड़ रहे हों.

अपनी बहन की चूत में झटके मारते हुए अचानक ज़ाहिद को यूँ लगा जैसे वो अपने लंड का पानी निकलने लगा है. तो उस ने अपनी बहन को चूमते हुए कहा "जानू मेरााआआ पानी निकााअलल्ल्ल रहा है".

“हान्ंनणणन् निकाल दो अपना पनीईईईईइ, उफफफफफफफ्फ़ अपना सारा पानी मेरी चूत के अंदर ही डालना, एक कतरा भी बाहर ना गिरे, क्यों के मेरी चूत कब से तरस रही कि आप के लंड के पानी को अपनी क़ैद में करने के लिए भाईईईईईई” शाज़िया भी ज़ाहिद के जवाब में सिसकी.

फिर थोड़ी देर तक चोदने के बाद ज़ाहिद के लंड ने लैस दार वीर्य ने अपनी ही सग़ी बहन की कोख को भर दिया.

ज़ाहिद के लंड ने आज इतना पानी छोड़ा कि जिस का ज़ाहिद ने आज तक तसव्वुर भी नही किया था.

 
ज़ाहिद के लंड के पानी को अपनी फुद्दि में आते हुए महसूस कर के शाज़िया की बच्चे दानी ने अपने भाई के लंड के जूस के इस्तक्बाल के लिए अपना मुँह खोल दिया .

तो ज़ाहिद की लेस दार पानी उस की बहन की बच्चे दानी में एक तेज फव्वारे की सूरत में गिर कर शाज़िया की दो साला प्यासी चूत की ज़मीन को गीला करते हुए उस में अपने बीज बोने लगा.

जब नीचे से दोनो बहन भाई के पानियों का आपस में मिलाप हुआ.तो ऊपर से दोनो बहन भाई के जिस्म भी एक दूसरे लिपट गये.

अब उन दोनो के जवान बदन पसीने से भीगे हुए थे.

कुछ देर तक अपनी बहन की फुद्दि में अपना लंड डाले और शाज़िया के जिस्म के ऊपर ही ढेर होने के बाद ज़ाहिद अपनी बहन के बदन के ऊपर से उठा. और अपने लंड को अपने लंड के वीर्य से शराबोर अपनी बहन की चूत से बाहर निकाला.

तो शाज़िया की मोटी फुद्दि से “पुक्क्क” की आवाज़ निकल गई.

अपनी बहन की फुद्दि से लंड निकाल कर ज़ाहिद ने शाज़िया की तरफ देखा.

आज इतने साल बाद अपनी फुद्दि की प्यास बुझाने की वजह से शाज़िया का चेहरा एक अलग ही मस्ती की वजह से चमक रहा था.

शाज़िया के खूबसूरत चेहरे पर खुले हुए बालों की लटे पड़ी हुई थी.और उस के रस भरे होन्ट और बड़े बड़े मम्मे अपने भाई के मुँह की थूक से चुमक रहे थे.

जब कि शाज़िया की चूत अपने भाई के मोटे और बड़े लंड की जबर्जस्त चुदाई की वजह से सुर्ख हो कर पहले से ज़्यादा फूल गई थी.

उन दोनो बहन भाई की सुहाग की सेज पर पड़ी फूलों की पत्तियाँ इधर उधर बिखरी पड़ी थी.

जब कि उन के बिस्तर की चादर दोनो बहन भाई की चुदाई के पानी से जगह जगह से भीग कर तर हो चुकी थी.

अगरचे दोनो बहन भाई अपनी इस गरम चुदाई से थक कर चूर हो चुके थे. मगर इस के बावजूद ज़ाहिद जानता था कि “पिक्चर अभी बाकी है दोस्त”.

अपनी बहन की फुद्दि में अपना वीर्य उडेलने के बाद ज़ाहिद बिस्तर से उठ कर कमरे के अटेच बाथ रूम में चला गया.

जबकि दूसरी तरफ शाज़िया अभी तक अपनी टाँगें खोले बिस्तर पर कमर के बल बे सुध पड़ी हुई थी

ज़ाहिद के लंड ने शाज़िया की फुद्दि की वाकई ही आज हालत खराब करके रख दी थी.

आज दो साल बाद अपने ही सगे भाई के लंड से चुदवा कर शाज़िया का प्यासा बदन बहुत ही पूर सकून हो चुका था.

इसीलिए अपनी चूत का पानी छोड़ने के बावजूद शाज़िया अभी तक अपनी बिखरी सांसो को संभालने में लगी हुई थी.

थोड़ी देर बाद अपनी सांसो को काबू करते हुए शाज़िया ने अपनी गान्ड के नीचे रखा हुआ पिल्लो को निकाल कर अपनी गर्दन के नीचे रखा.

तो इतनी देर में ज़ाहिद बाथरूम से फारिग हो कर वापिस कमरे में दाखिल हुआ.

ज़ाहिद ने देखा कि उस की बहन अपने सुहाग के बिस्तर पर बड़े आराम से पैर फैलाए लेटी हुई है.और शाज़िया की गान्ड के नीचे बिच्छी बिस्तर की चादर पर दोनो बहन भाई के लंड और फुद्दि का पानी गिरा हुआ है..

जब कि उस की बहन शाज़िया की फुद्दि ज़ाहिद की जबर्जस्त चुदाई की वजह से पहले सी भी ज़्यादा फूल गई है.

दूसरी तरह बिस्तर पर लेटी शाज़िया ने अपने सर को उठा कर बाथरूम के दरवाज़े पर खड़े हुए अपने भाई ज़ाहिद की तरफ देखा.

ज्यों ही दोनो बहन भाई की अपनी पहली चुदाई के बाद नज़रें मिलीं.तो ज़ाहिद ने बड़े प्यार भरे अंदाज़ में अपनी बहन को हल्की से आँख मारी.

अपने भाई के प्यार से इस अंदाज़ को देख कर शाज़िया ने नकली शरमाते हुए अपनी आँखे फॉरन बंद कर लीं.

ज़ाहिद ने जैसे ही अपनी बहन को इस तरह शरमाते देखा.तो उस ने बड़े धीमे और मस्ती भरे लहजे में अपनी बहन शाज़िया से पूछा”क्यों मेरी जान तुम्हारी गरम और प्यासी चूत की गर्मी कुछ कम हुई है या नही”.

शाज़िया को उस की दूसरी सुहाग रात में जो जिन्सी सकून आज उस के अपने भाई ने दिया था.

वो स्वाद और मज़ा तो शाज़िया को कभी अपने सबका शोहर से अपनी पूरी दो साला जिंदगी में भी हासिल नही हुआ था.

और इस बात का ऐतराफ़ शाज़िया आज अपने मुँह से बोल कर अपने भाई से करना तो चाहती थी. मगर कोशिश के बावजूद उस की ज़ुबान ने उस का साथ ना दिया.

इसीलिए शाज़िया खामोशी से चुप चाप अपनी आँखे बंद किए बिस्तर पर लेटी रही.

इसी दौरान ज़ाहिद आहिस्ता से चलता हुआ अपनी बहन के नज़दीक आया. और बिस्तर के नज़दीक खड़े खड़े अपनी बहन शाज़िया को पुकारा” अब तो हम दोनो एक जिस्म और दो जान हो चुके हैं, तो फिर ये शरमाना कैसा, आँखें खोल कर मेरी तरफ देखो मेरी जान”.

 
ज़ाहिद की कही हुई बात वाकई ही सही थी. क्यों कि अपनी पहली चुदाई के बाद, जब उस के भाई ज़ाहिद के लंड का गाढ़ा वीर्य शाज़िया की चूत में गिर कर अब उस की चूत में जज़ब हो चुका था. तो अब उन दोनो में बहन भाई वाला रिश्ता तब्दील हो कर एक हक़ीक़ी मियाँ बीवी में बदल ही चुका था.

इसीलिए “चॅट में क्या दुनिया दारी,इश्क में केसी मजबूरी” वाले इस शेर की मानिंद शाज़िया ने सोचा कि अब बात बात पर अपने भाई से शरमाना उस के लिए बे कार है.

इसी लिए शाज़िया ने फिर से अपनी आँखे खोलीं और पास खड़े हुए अपने भाई की तरफ देखा.

अपने भाई की तरफ देखते ही शाज़िया की नज़र अपने भाई के लंड पर पड़ी.

शाज़िया ने देखा कि उस के भाई ज़ाहिद का लंड उस वक्त पूरी तरह अपनी बहन की फुद्दि के जूस भीगा हुआ था.

शाज़िया के सबका शोहर के बदकास ज़ाहिद का लंड ना सिर्फ़ एक बार अपनी बहन की फुद्दि में फारिग होने के बावजूद अभी तक ढीला नही पड़ा था.

बल्कि उस के सबका शोहर की मुक़ाबले ज़ाहिद का मोटा लंड अपना पानी निकालने के बावजूद पहले से ज़्यादा सख्ती के साथ अकड़ कर आसमान की तरफ देखते हुए इधर उधर उछल कूद कर रहा था.

ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया का इस तरह अपने लंड की तरफ लालची नज़र से देखना अच्छा लगा.

ज़ाहिद आहिस्ता से अपनी बहन के साथ उस के बिस्तर पर बैठा. और उस ने बड़े प्यार से अपनी बहन के बालों में हाथ डाल के उस का चेहरा अपने करीब किया और शाज़िया के होंठो को बहुत ही कस के चूमा.

साथ ही ज़ाहिद ने अपना हाथ शाज़िया की टाँगों के दरमियाँ ले जा कर अपनी बहन की गरम फुद्दि पर अपना हाथ कर चूत को ज़ोर से मसला.

“हाईईईईईईईईई भाईईईईईईई ऐसेयययी नाआआअ दबूऊऊ दरद हो रही हाईईईईईईईईई” शाज़िया को अपने भाई के लंड से ताज़ा ताज़ा चुदि हुई फुद्दि में वाकई ही थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था. इसीलिए अपने भाई के हाथ की सख्ती को अपनी फुद्दि महसूस कर के शाज़िया चिल्ला उठी.

“तुम कौन सी कुँवारी हो, जो तुम को दर्द हो रहा है मेरी जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन की बात पर हेरान होते हुए पूछा.

“मेरी चूत कंवारी ना होते हुए भी आप के मोटे और बड़े लंड के लिए कंवारी ही है, उफफफ्फ़ मुझे इतनी तकलीफ़ तो पहली दफ़ा चुदवाते वक्त नही हुई थी, जितनी आज रात हुई है भाई” शाज़िया ने जवाब दिया.

“फिकर ना करो अभी तुम्हारी चूत के दर्द को ठीक करता हूँ” ये कहते हुए ज़ाहिद ने अपने आप को अपनी बहन से अलग किया. और बिस्तर पर बिखरी हुए गुलाब के फूल उठा कर कुछ फूल शाज़िया के जिस्म और कुछ अपनी बहन की फुद्दि के ऊपर बिखेर दिए.

“इन फुलो से क्या हो गा भाई” शाज़िया ने अपने भाई की हरकत का मतल्ब ना समझते हुए पूछा.

“ये फूल मेरी बहन की फूल सी चूत का सारा दर्द चूस कर उसे मिटा देंगे मेरी जान”

शाज़िया जानती थी कि उस के भाई की ये हरकत उस के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार के इज़हार के अलावा कुछ नही.

इसी लिए वो अपने भाई की बात पर मुस्कुराइ और बोली “अच्छा अब बस करो मुझे नीद आ रही है”

"रूको अभी तुम्हारी नीद उड़ा देता हूँ जान" ये कहते हुए ज़ाहिद शाज़िया के बराबर लेटा और शाज़िया को खैंच कर अपने सीने से लगा लिया.

फिर ज़ाहिद ने जोश में आते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा कर शाज़िया की फुद्दि पर रखा.और फिर अपनी बहन की चूत के दाने (क्लिट) से खेलने लगा.

ज़ाहिद अपनी बहन की चूत की दरार को छेद रहा था. और साथ साथ शाज़िया की फुद्दि के मोटे दाने को अपने हाथ की उंगलियो से रगड़ भी रहा था.

ज़ाहिद काफ़ी देर तक अपनी बहन की फुद्दि को मसलता रहा.

शाज़िया के होंठ ज़ाहिद के होंठो की गिरफ़्त में थे.

अपनी बहन की चूत के दाने से खेलते खेलते ज़ाहिद ने अपनी बहन की चूत में अपनी दरमियानी उंगली डाली. तो ज़ाहिद की उंगली अपनी बहन की फुद्दि में छोड़े हुए उस के अपने जूस से पूरी की पूरी तर हो गई.

ज़ाहिद ने अपनी कम से तर अपनी उंगली को शाज़िया की फुद्दि से निकाल कर अपनी उंगली अपनी बहन के होंठो पर रखी और बोला” लो आज अपनी ही फुद्दि का पानी पी लो जान”.

“ना करो ना भाई अब सोने दो प्लीज़”. शाज़िया की आँखों में नींद उतरी हुई थी.

“जान अभी मेरी दिल नही भरा,चलो अब मुँह खोलो” ज़ाहिद ने अपनी उंगली का दबाव अपनी बहन के होंठो पर बढ़ाते हुए कहा.

 
शाज़िया को अपने होंठो पर पड़ी भाई की उंगली से थोड़ी स्मेल तो आई. मगर इस के बावजूद उस ने अपना मुँह खोला और बड़े शौक से अपने भाई की उंगली पर लगा अपना और अपने भाई के लंड और चूत का पानी चाटने लगी.

जब शाज़िया ने ज़ाहिद की उंगली को चाट कर सॉफ कर दिया. तो ज़ाहिद ने अपने खड़े लंड की तरफ इशारा करते हुए शाज़िया से पूछा” अब इस के बारे में क्या ख्याल है जानू”.

शाज़िया अपने भाई की बात समझते हुए उठी. और बिस्तर पर लेटे हुए ज़ाहिद के जिस्म के ऊपर आ कर अपना मुँह रुख़ अपने भाई के पैरो की तरफ कर लिया.

अपने भाई के खड़े लंड को देखते ही शाज़िया को अपनी पहली चुदाई याद आई.तो शाज़िया की चूत ने फिर से बग़ावत कर दी.

शाज़िया ने अपने भाई के जिस्म पर खड़े हो कर अपनी गर्दन झुकाई

और अपने भाई के मोटे लंड को मुँह में लेते हुए लंड पर लगे हुए अपनी फुद्दि के जूस को अपनी ज़ुबान से चाट चाट कर सॉफ करने लगी.

शाज़िया के इस तरह से लेटने की वजह से शाज़िया की भारी गान्ड पीछे से ऊपर की तरह उठ गई थी.

शाज़िया की गोल,फर्म, टाइट, भारी और बाहर को निकली हुई गान्ड (बबल बट) किसी भी मर्द को पागल कर देने के लिए काफ़ी थी.

असल में ये ही वो गान्ड थी.जिस की तस्वीर पहली बार नीलोफर ने जब ज़ाहिद को दिखाई थी.तो ज़ाहिद अंजाने में ही अपनी बहन की इस मस्त गान्ड का आशिक़ बन गया था. और आज अपनी सग़ी बहन की इस दिल फरीब और चिकनी को इतने करीब से देखते हुए ज़ाहिद तो जैसे पागल सा हो गया.

अपनी बहन की मोटी बड़ी गान्ड को पीछे से यूँ उठा हुआ देख देख कर हुए ज़ाहिद को बड़ा मज़ा आ रहा था.

बिस्तर पर लेट कर अपनी बहन की गान्ड और उस की चूत के मोटे लिप्स देख कर ज़ाहिद के सबर कर पैमाना लबरेज हो गया.

ज़ाहिद ने अपने जिस्म को थोड़ा से उपर उठा कर शाज़िया की गान्ड की पहाड़ियों पर हाथ रखा. और शाज़िया की गान्ड को नीचे करते हुए अपनी बहन की गरम चूत को अपने मुँह के बिल्कुल ऊपर ले आया.

इस के साथ ज़ाहिद ने अपने मुँह को खोलते हुए अपनी लंबी ज़ुबान निकाल कर नीचे से अपनी बहन की मोटी चूत की दरार को चाटना शुरू कर दिया.

“ओह” अपने भाई की नुकीली ज़ुबान अपनी पिंक चूत के अंदर घूमते हुए महसूस कर के शाज़िया चिल्लाई. और उस ने अपने भाई के मोटे लंड को अपने मुँह में करते हुए गर्मजोशी से भाई की चुसाइ लगाना शुरू कर दिया.

अब दोनो बहन भाई 69 स्टाइल में एक बड़े मज़े और मस्ती से एक दूसरे के लंड और फुद्दि को चूस चूस कर मज़े ले और दे रहे थे.

ज़ाहिद और शाज़िया की गरम सिसकियाँ उन के मुँह से निकल निकल कर कमरे में गूँज रही थी. “ओह,अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाईईईईईईईई उफफफफफफफ्फ़”.

“अच्छा शाज़िया अब तुम मुझ पर चढ़ कर मेरा लंड अपनी फुद्दि में डालो” थोड़ी देर अपनी बहन से लंड चुसवाने और खुद शाज़िया की फुद्दि को चाटने के बाद ज़ाहिद ने शाज़िया को अपने ऊपर से हटाया. और फिर शाज़िया के मुँह को अपने मुँह की तरफ करते हुए अपनी बहन को दुबारा से अपने जिस्म के ऊपर चढ़ा लिया.

फिर ज़ाहिद ने नीचे से अपनी बहन की गीली और गरम चूत के साथ अपना लंड मिला कर शाज़िया को उस की कमर से पकड़ा. और उसे नीचे की तरफ खैंचते हुए खुद अपनी गान्ड को ऊपर की तरफ उठा दिया.

अपने भाई के लौडे की रगद से शाज़िया की चूत दुबारा से बुरी तरह गरम हो रही थी.

अचानक ज़ाहिद बिस्तर से थोड़ा उपर उछला और गुप्प्प्प से शाज़िया की चूत के अंदर आधा लंड घुस गया.

अपनी बहन की कमर को ज़ाहिद ने अपने दोनो हाथों से कस के पकड़ रखा था.

ज़ाहिद ने अपनी बहन के बदन को नीचे की तरफ खैंचा. तो चूत पहले से गीली होने की वजह से ज़ाहिद का लंड फिसलता हुआ शाज़िया की चूत की गहराई में चला गया.

अपने भाई के लंड के पहले धक्के पर शाज़िया के मुँह सिसकारी निकली “आईईईईई…….ऊओीईएईई उफफफफ्फ़

 
अपनी बहन की गरम फुद्दि में लंड डालते ही ज़ाहिद ने अपने हाथ नीचे ले जा कर अपनी बहन की चूत के फूले हुए लिप्स को अपने हाथ में ले कर दबाया. तो शाज़िया की मोटी फुद्दि ने अपने भाई के बड़े लंड को मुकम्मल तौर पर अपनी ग्रिफ्त में ले लिया.

अपनी बहन की चूत के लिप्स को अपने लंड कर इर्द गिर्द ज़ोर से दबाते ज़ाहिद नीचे से अपनी बहन की फुद्दि में हल्के हल्के धक्के लगाने लगा.

अपनी चूत मे अपने भाई के लंड को इस तरह कसा हुआ पा कर शाज़िया के मुँह से सिसकारियो का एक सैलाब उमड़ आया.” हाईईईईईईईईईई ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उफफफफफफफफफ्फ़ भाईईईईईई”.

और शाज़िया खुद लंड के उपर नीचे अपनी गान्ड खुद अपने भाई से अपनी गरम फुद्दि चुदवाने लगी..

"उफफफफफफ्फ़ शाज़िया ऐसे लगता है कि जैसे अब तुम मुझे चोद रही हो.." ज़ाहिद अपनी बहन के इस तरह गान्ड हिलाने से मस्त हो उठा.

"क्या करूँ आप को फारिग कर दूं मुझे सोना भी है,वरना आप तो मुझे पूरी रात नही सोने दोगे भाई.." शाज़िया ने अपने भाई के लंड पर उछलते हुए कहा.

"वो तो मैं वैसे भी आज तुम को सोने नही दूँगा मेरी जान”. ये कहते हुए ज़ाहिद ने नीचे से एक ज़ोर दार झटका दिया . तो उस का पूरा लंड अपनी बहन की फुद्दि के अंदर घुस गया.

ज़ाहिद का बड़ा लंड सीधा अपनी बहन शाज़िया की बच्चादानी से टकराया ."आअहह,माअर डाला, लगता है आज के बाद आप मुझे किसी काम के काबिल नही छोड़ोगे भाई”

ज़ाहिद अब अपनी बहन की कमर पकड़ के नीचे से लंबे लंबे धक्के लगा ने लगा.

अपने भाई के इस जोश से शाज़िया की चूत ने हर मान ली. और वो एक दम अपने भाई के लंड पर ही वो झड़ने लगी."ऊओ चोदो मुझे ,आज फाड़ दो अपनी बहन्णन्न् कीईईई. चूऊऊओत,आ....उउफफफफफफफफफफफफफ्फ़ हाइईइ”.

ज़ाहिद का लंड फ़च फ़चफ़ की आवाज़ के साथ शाज़िया की फुद्दि में अंदर बाहर हो रहा था.

ज़ाहिद ने महसूस किया कि अब उस की बहन शाज़िया की चूत उस के मोटे लंड को अपने अंदर ज़ोर से जकड रही थी.

शाज़िया के इस तरह ज़ाहिद के लंड को अपने अंदर जकड़ने की वजह से पीछे से शाज़िया की भारी गान्ड कभी बंद होती और कभी खुल जाती थी.

ज़ाहिद अपनी बहन की फुद्दि में धक्के मारते मारते अपनी एक उंगली को अपने मुँह में लाया. और अपनी उंगली को थूक से भर लिया.

ज़ाहिद दुबारा से अपने हाथ को नीचे ले गया और अपनी बहन की गान्ड की मोटे चुतड़ों को अपने हाथों से खोलते हुए अपनी थूक भरी उंगली को अपनी बहना की गान्ड के सुराख में डाल दिया.

अपने भाई की उंगली को अपनी कंवारी गान्ड के सुराख में आता पा कर शाज़िया तो जैसे बे होश होने लगी.उसके मुँह से “आह्ह निकला. नही भाई इधर नहियीईईईईईई”.

“क्यों यहाँ क्यों नही मेरी जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन की गान्ड के सुराख से अपना हाथ हटा कर शाज़िया के भारी चूतड़ो पर हाथ फेरते हुए पूछा.

“क्यों कि मुझे ये सब पसंद नही भाई” शाज़िया ने मुक्स्तर सा जवाब दिया.

अपनी बहन का जवाब सुन कर ज़ाहिद भी खामोश तो हो गया.

मगर इस के साथ ही ना जाने ज़ाहिद को क्या सूझी. कि शाज़िया को चोदते चोदते ज़ाहिद अपनी बहन के भारी वजूद को अपनी बाहों में उठाए हुए बिस्तर से उतर कर फर्श पर खड़ा हो गया.

बिस्तर से उठ कर कमरे के फर्श पर खड़े होने के बावजूद ज़ाहिद का मोटा और बड़ा लंड अभी तक उस की बहन की फूली हुई तंग फुद्दि मे जड़ तक ठूँसा हुआ था.

“ये आप क्या कर रहे हो भाई” शाज़िया ने जब अपनी भाई को उसे यूँ अपने हाथों में उठा कर बिस्तर से उठाते देखा तो वो घबरा गई.

क्यों कि शाज़िया को डर था कि उस के जिस्म का वज़न ज़्यादा होने की वजह से उस का भाई कहीं अपना तवज्जो खो ना दे. और इस वजह से दोनो बहन भाई को कोई चोट ना लग जाय.

“शाज़िया फिकर ना करो तुम्हारा ये भाई तुम को कभी गिरने नही देगा जान” ये कहते हुए ज़ाहिद बड़े आहतीमाद से अपनी बहन के भारी वजूद को अपने मज़बूत बाजुओं के ऊपर उछालते हुए अपना तना हुआ लंबा लंड शाज़िया की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

 
अपनी सबका शादी शुदा जिंदगी में शाज़िया के कमज़ोर जिस्म वाले शोहर ने शाज़िया को कभी इस स्टाइल में चोदने की हिम्मत भी नही की थी. इसीलिए शाज़िया के लिए चुदाई का ये अंदाज़ बिल्कुल नया और मज़े दार था.

अपने भाई के प्यार का ये वलिहाना अंदाज़ देख कर शाज़िया ने भी फेरते जज़्बात से अपना एक बाज़ू ज़ाहिद की गर्दन के गिर्द लपेट लिया. जब कि उस का दूसरा हाथ उस के भाई की सख़्त और चौड़ी छाती पर रेंगने लगा.

अपनी बहन को यूँ अपने साथ चिमटा देख कर ज़ाहिद समझ गया कि शाज़िया को चुदाई का ये तरीका अच्छा लगा है.

इसीलिए उस ने मज़ीद जोश में आते हुए अपने दोनो हाथों से अपनी बहन की गुदाज रानों को थाम कर शाज़िया के बाहरी जिस्म को एक मोम की गुड़िया समझ कर हवा में उछाल उछाल कर तेज़ी के साथ उस की फुद्दि में अपना पूरा लंड डालना शुरू कर दिया.

अपने भाई की इस चुदाई से शाज़िया को भी मज़ा आने लगा.और वो भी अपने मोटे मोटे चूतड़ उछाल कर और हिला कर अपने भाई का मोटा लंड अपनी चूत के अंदर बाहर लेने लगी.

शाज़िया की चूत ज़ाहिद की पहली चुदाइ के दौरान छोड़े हुए पानी की वजह से पहले की काफ़ी गीली हो चुकी थी.

इसीलिए उस की फुद्दि अब ज़ाहिद के हर हर धक्के पर फ़च्छाक फ़च्छाक की आवाज़ निकाल कर कमरे के माहौल में एक निहायत माशूक किस्म की मौशिकि (म्यूज़िक) पैदा कर रही थी.

“ऊऊओिईई ज़ाहिद भाई, अह्ह्ह्ह्ह्ह,ऐसा मज़ा तो मुझ है कभी भी नही आया मेरे राजा,अह्ह्ह्ह,मैं शायद छूटने वाली हूँ ज़ाहिद भाई अह्ह्ह्ह” कहते हुए शाज़िया ने अपनी फुद्दि का पानी छोड़ दिया.

ज्यों ही शाज़िया फारिग हुई.तो शाज़िया की गीली चूत से पानी बह बह कर ज़ाहिद के लंड के साथ साथ कमरे के फर्श को भी गीला कर गया.

कोई 15, 20 सेकेंड्स तक शाज़िया के जिस्म को झटके लगते रहे.और फिर वो निढाल हो कर ज़ाहिद के बाजुओं में ही झूल गई.

ज़ाहिद समझ गया कि शाज़िया इस वक़्त चूत (ऑर्गॅज़म) गई है. इसीलिए ज़ाहिद ने आहिस्ता से अपनी बहन को दुबारा बिस्तर पर लिटा दिया. और खुद भी उस के ऊपर ही लेट गया.

ज़ाहिद चूँकि अभी तक फारिग नही हुआ था . इसीलिए उस का लंड अभी भी लोहे की रोड की तरहा शाज़िया की चूत में घुस कर खड़ा था.

ज़ाहिद अपनी बहन के जिस्म के ऊपर लेटा बहुत प्यार से शाज़िया की कमर और चुतड़ों पर अपना हाथ फेर रहा था. जब कि शाज़िया ज़ाहिद के जिस्म के नीचे लेटी हुई गहरे गहरे साँस लेती रही.

थोड़ी देर बाद ज़ाहिद ने शाज़िया की फुद्दि से अपना मोटा और खड़ा हुआ लंड निकला. और अपनी बहन की टाँगों के दरमियाँ अपना मुँह रख कर अपनी बहन की ताज़ा ताज़ा चुदि हुई चूत का बगौर जायज़ा लेने लगा.

ज़ाहिद ने देखा कि उस की बहन शाज़िया की चूत उस की जबर्जस्त चुदाई की वजह से बेशक काफ़ी खुल गई थी.

लेकिन इस के बावजूद उस की बहन की चूत का गुलाबी पन अब तक मंद नही पड़ा था.

शाज़िया की फुद्दि के लब ज़ाहिद के मोटे और बड़े लंड को अपने अंदर लेने की वजह से फैल चुके थे.मगर अभी भी वो उस की चूत के गिर्द बड़ी ही खूबसूरती से फैले हुए थे.

अपनी बहन की फूली हुई चूत को देखते देखते ज़ाहिद ने अपना मुँह आगे बढ़ाया. और शाज़िया की गान्ड के सुराख के सामने अपना मुँह ला कर अपनी बहन की गान्ड से निकलती हुई भीनी भीनी खुशुबू को सूंघने लगा.

अपनी बहन की गान्ड से निकलती हुई महक ने ज़ाहिद के दिल-ओ-दिमाग़ को पागल कर दिया.

"वाह शाज़िया तुम्हारी गान्ड की खुशहू तो बहुत मस्त है मेरी जान" ज़ाहिद ने अपनी बहन की गान्ड की महक को अपनी नाक के रास्ते अपने अंदर खैंचते हुए कहा.

शाज़िया के सबका शोहर ने कभी उस की गान्ड तो क्या चूत की तारीफ भी नही की थी. इसीलिए शाज़िया को अपने भाई के मुँह से अपनी गान्ड की महक की तारीफ सुन कर अच्छा लग रहा था.

कुछ देर तक अपनी बहन की गान्ड की महक सूंघने के बाद ज़ाहिद ने बिस्तर पर सीधी लेटी हुई अपनी बहन शाज़िया को करवट बदल कर लेटने का कहा.

अपने भाई के कहने पर शाज़िया ने ज्यों ही करवट बदली तो उस की भारी गान्ड की बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ पीछे से उठ गईं.

जिस की वजह से शाज़िया की गान्ड में पोषीदा उस की गान्ड का ब्राउन सुराख ज़ाहिद की आँखों के सामने अपनी पूरी आबो-ताब से खुल कर सामने आ गया.

ज़ाहिद थोड़ी देर यूँ की आँखें फाड़ फाड़ कर खामोशी से अपनी बहन की कसी हुई गान्ड का दीदार करता रहा.

जब शाज़िया ने अपने पीछे लेटे हुए भाई की खामोशी को महसूस किया तो वो बोली”“आप इतनी खामोशी से क्या देख रहे हो भाई?”

“कुछ नही मैं बस तुम्हारी चौड़ी बुन्द (गान्ड) की खूबसूरती देख रहा हूँ जान” ज़ाहिद ने अपनी खामोशी तोड़ते हुए शाज़िया को जवाब दिया.

“मेरी गान्ड में ऐसी क्या खास बात है तो आप इतने गौर से उसे देख रहे है भाई” अपने भाई से ये सवाल पूछते हुए शाज़िया मुस्कुरा दी.

“उफफफफफफफफ्फ़ क्या बताऊ शाज़िया ये तुम्हारी मज़े दार गान्ड ही थी, जिस ने मुझे पहली ही नज़र में अपनी ही सग़ी बहन का दीवाना बना दिया था. हाईईईईई ऐसी मक्खन जैसी मुलायम और गदराई हुई गान्ड तो किसी किस्मत वाले मर्द को ही मिलती है” .ये कहते हुए ज़ाहिद अपने हाथ शाज़िया की भारी गान्ड के नीचे ले जा कर शाज़िया की गुदाज बुन्द (गान्ड) की पहाड़ियों को हाथ में ले कर दबाना शुरू कर दिया.

ज़ाहिद ने बड़े प्यार से अपनी बहन की भारी पहाड़ियों को अपने हाथ से पकड़ कर खोला. तो शाज़िया की भारी गान्ड का कंवारा ब्राउन सुराख मज़ीद खुल कर ज़ाहिद की नज़रों के सामने आ गया.

अपनी बहन की गान्ड की इस बुन्द (क्लोज़) सुराख को देखते ही ज़ाहिद की आँखों में चुमक सी आ गई.और उस का लंड अपनी बहन की अन चुदि गान्ड की सील फाड़ ने के लिए बे ताब हो गया.

ज़ाहिद ने अपनी एक उंगली अपने मुँह में डाल कर उसे अपने थूक से अच्छी तरह गीला किया. और फिर अपने थूक से गीली उंगली को अपने मुँह से निकाल कर अपनी बहन की गान्ड के छेद को दुबारा सहलाया.

अपने भाई की उंगली को अपनी भारी और कंवारी गान्ड के सुराख कर महसूस करते ही शाज़िया फिर तड़प उठी.

ज़ाहिद ने अपने हाथ से अपनी बहन की गान्ड की एक पहाड़ियों को हाथ से छेड़ते हुए बहुत आहीस्तगी से थूक से तर अपनी उंगली को अपनी बहन की गान्ड के सुराख में डाल कर हल्का सा पुश किया.

अपने भाई की इस हरकत से शाज़िया तो उछल पड़ी “ हाइी भाई आप को पहले भी कहा है कि यहाँ नही प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज”.

“उधर क्यों नही जान” ज़ाहिद ने अपनी बहन को छेड़ते हुआ पूछा.

“इसीलिए कि मेने कभी इधर कभी नही करवाया भाई” शाज़िया ने अपने हाथ को पीछे ले जा कर अपनी गान्ड के सुराख से ज़ाहिद की उंगली को हटा दिया.

“शाज़िया तुम को पता है कि सुहाग रात में एक शोहर अपनी बीवी से हमेशा उस की कंवारी चूत हासिल करने की तवक्को रखता है, अब तुम्हारी चूत तो कंवारी नही रही, मगर कोई बात नही में आज ज़रूर तुम्हारी कंवारी गान्ड में ही अपना लंड डाल कर सुहाग रात में सील तोड़ने वाली रसम तो पूरा करूँगा जानू” ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए अपने इरादे अपनी बहन के सामने ज़ाहिर कर दिए.

“नही भाई आप जानते हैं कि आप के मोटे लंड ने मेरी पहले से चुदि हुई फुददी की क्या हालत की है.और अब आप मेरी कंवारी गान्ड को भी फाड़ देना चाहते हैं?” अपने भाई की बात सुन कर शाज़िया घबड़ाहट में बोल उठी.

“फिकर ना करो जान मैं तुम को आज तुम्हारी गान्ड मार का वो मज़ा दूँगा जिस का तुम ने कभी जिंदगी में तसव्वुर भी नही किया हो गा” ये कहते हुए ज़ाहिद नीचे झुका. और शाज़िया की गान्ड के पीछे लेट कर अपनी बहन की गुदाज और मोटी गान्ड की पहाड़ियों को अपने होंठो से चूमने और चाटने लगा.

.

“अहह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” अपने भाई की गरम ज़ुबान को अपनी गान्ड की पहाड़ियों पर फिसलता हुआ पा कर शाज़िया के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लग गईं.

ज़ाहिद पागलों की तरह अपनी बहन की गान्ड की पहाड़ियों को अपने दाँतों से काट रहा था.

थोड़ी देर अपनी बहन की गान्ड की पहाड़ियों पर अपनी ज़ुबान फिराने के बाद ज़ाहिद ने शाज़िया को घोड़ी बनने को कहा.

तो शाज़िया अपने भाई की बात पर अमल करते हुए अपनी कोहनियो के बल उल्टी लेट कर घोड़ी बनते हुए बिस्तर पर लेट गई.

शाज़िया के इस तरह लेटने से उस की भारी और चौड़ी गान्ड पीछे से पूरी तरह हवा में उठ गई.

 
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