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शाज़िया को भी अपने भाई के प्यार का ये अंदाज़ भाया और उस ने भी खुशी से अपने होंठो को अपने भाई के होंठो से मिला कर उस का साथ देना शुरू कर दिया.
“शाज़िया क्या रात को मुझ से चुदवा कर मज़ा आया मेरी जान को” ज़ाहिद ने अपनी बहन के होंठो को चूमते हुए उस से पूछा.
“भाईईईईईईई बस करो और मुझे उठ कर कपड़े पहने दो ना” शाज़िया ने अपने भाई की बात का जवाब नही दिया. बल्कि उस की कॉसिश थी कि वो अपनी अम्मी के उठने से पहले भाई के कमरे से निकल कर किचन में काम काज में मसरूफ़ हो जाय.
जब ज़ाहिद ने देखा कि शाज़िया उस से अपनी जान छुड़ाने के चक्कर में है और उस के सवाल का जवाब भी नही दे रही.तो उस ने शाज़िया के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भरते हुए दुबारा कहा “ जब तक जवाब नही दो गी मैं तुम को बिस्तर से हिलने भी नही दूँगा ”
“बस ठीक ही था” शाज़िया ने जब देखा कि उस का भाई आसानी से उसे छोड़ने वाला नही. तो अपने भाई को तंग करने के इरादे से जान बूझ कर उस ने ऐसा जवाब दिया.
“अच्छा तो इस का मतलब है कि तुम को मज़ा नही आया मुझ से चुद कर शाज़िया” ज़ाहिद अपनी बहन के जवाब से वाकई ही थोड़ा परेशान हुआ.
“मज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा तो इतना आया है कि पूछो मत,काश मुझे पता होता कि आप के लंड में इतना मज़ा है, तो में अपनी चूत की असल सील भी आप से ही तुड़वाती भाईईईईईईई”.शाज़िया ने जब अपने मज़ाक पर अपने भाई को परेशान होते देखा. तो वो जोश में अपने जिस्म को अपने भाई के नंगे जिस्म से रगड़ते हुए सिसकारी ली.
“उफफफफफफफ्फ़ आइ लव यू वेरी मच मेरी जान, यकीन मानो में तुम से बहुत मोहब्बत करता हूँ मेरी बहन” ज़ाहिद ने जब अपनी बहन का जवाब सुना. तो उस ने भी जोश में अपने बहन के जिस्म को अपनी बाहों में कसते हुए कहा.
अभी दोनो बहन भाई एक दूसरे की बाहों में गुम हो कर एक दूसरे के होंठो और गालों को चूसने में मसरूफ़ ही हुए थे. कि कमरे दरवाज़े पर होने वाली एक “ठक ठक” (दस्तक) ने उन दोनो बहन भाई के रंग में भंग डाल दी.
“कौन” कमरे के दरवाज़े पर ये दुस्तक सुन कर दोनो बहन भाई एक दम से हैरान हो कर एक दूसरे से अलग हुए और फिर ज़ाहिद ने बुलंद आवाज़ में पूछा.
“बेटा में हूँ तुम्हारी अम्मी,दरवाज़ा खोलो में चाय ले कर आई हूँ तुम दोनो के लिए” बाहर से उन की अम्मी रज़िया बीबी की आवाज़ उन दोनो के कानों में पड़ी.
वैसे तो रज़िया बीबी की आँख हर रोज़ सुबह जल्दी ही खुल जाती थी. लेकिन अक्सर नींद से जागने के बावजूद वो देर तक बिस्तर पर लेट कर टीवी पर चलते हुए मॉर्निंग शोस देखती रहती थी.
मगर आज जैसे ही रज़िया बीबी की आँख खुली.तो गुज़री रात अपनी जवानी बेटी की गरम सिसकियाँ को सुन कर उस की चूत में से उठने वाले तूफान का असर अभी तक उस के तन बदन में बाकी था.
इसीलिए अपनी नीद से बे दर होते ही रज़िया बीबी के दिल में उत्सुकता पैदा हुई.कि वो जा कर देखे तो सही कि उस के बेटा और बेटी किस हाल में हैं.
इसी लिए अब अपने बच्चो को चाय देने के बहने वो उन के कमरे तक चली आई थी.
“अच्छा एक मिनट अम्मी” ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी की आवाज़ सुनी.तो उस ने फॉरन अपनी अम्मी की आवाज़ का जवाब देते हुए कहा.
“भाई ये अम्मी को क्या सूझी कि वो चाय ले कर हमारे पास चली आई हैं” शाज़िया ने अपनी अम्मी की उन के कमरे में आमद पर हेरान होते हुए अपने भाई से शरगोशि की.
"उफफफफफफफफफफ्फ़ अम्मी ने भी सुबह सुबह ही चाय पीला देनी है,अभी तो में उन की बेटी का ताज़ा दूध पीने के मूड में था” ज़ाहिद ने अपनी बहन के बड़े मम्मे को अपने हाथ से कसते हुए अपनी बहन के निपल पर तेज़ी से अपनी ज़ुबान फेरते हुए जवाब दिया.
“हाईईईईईईईई भाई छोड़ो मुझे ,मगर अभी दरवाज़ा मत खोलना प्लीज़, मुझे जल्दी से पहले कुछ पहन लेने दो भाई”शाज़िया ने अपने आप को अपने भाई की बाहों से आज़ाद करते हुए बिस्तर से छलाँग लगाई. और ज़ाहिद की अलमारी से अपना एक पुराना शलवार कमीज़ सूट निकाल कर शलवार पहनी.
ये सूट शाज़िया ने कल शाम ही अपने भाई की अलमारी में टांगा था. और फिर वो नंगी हालत में ही जल्दी जल्दी बिस्तर पर पड़े कंबल को ठीक करने लगी.
“भाई खोलो भी दरवाज़ा” बाहर से उन की अम्मी की आवाज़ दुबारा आई. तो शाज़िया ने जल्दी से बिस्तर को उसी हालत में छोड़ कर अपनी कमीज़ भी ज़ेबे तन कर ली.
कपड़े पहनने की जल्दी में शाज़िया के गले से उस का दुपट्टा सरक कर फर्श पर जा गिरा. जिस का ईलम उस वक्त शाज़िया को नही हुआ,
“शाज़िया क्या रात को मुझ से चुदवा कर मज़ा आया मेरी जान को” ज़ाहिद ने अपनी बहन के होंठो को चूमते हुए उस से पूछा.
“भाईईईईईईई बस करो और मुझे उठ कर कपड़े पहने दो ना” शाज़िया ने अपने भाई की बात का जवाब नही दिया. बल्कि उस की कॉसिश थी कि वो अपनी अम्मी के उठने से पहले भाई के कमरे से निकल कर किचन में काम काज में मसरूफ़ हो जाय.
जब ज़ाहिद ने देखा कि शाज़िया उस से अपनी जान छुड़ाने के चक्कर में है और उस के सवाल का जवाब भी नही दे रही.तो उस ने शाज़िया के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भरते हुए दुबारा कहा “ जब तक जवाब नही दो गी मैं तुम को बिस्तर से हिलने भी नही दूँगा ”
“बस ठीक ही था” शाज़िया ने जब देखा कि उस का भाई आसानी से उसे छोड़ने वाला नही. तो अपने भाई को तंग करने के इरादे से जान बूझ कर उस ने ऐसा जवाब दिया.
“अच्छा तो इस का मतलब है कि तुम को मज़ा नही आया मुझ से चुद कर शाज़िया” ज़ाहिद अपनी बहन के जवाब से वाकई ही थोड़ा परेशान हुआ.
“मज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा तो इतना आया है कि पूछो मत,काश मुझे पता होता कि आप के लंड में इतना मज़ा है, तो में अपनी चूत की असल सील भी आप से ही तुड़वाती भाईईईईईईई”.शाज़िया ने जब अपने मज़ाक पर अपने भाई को परेशान होते देखा. तो वो जोश में अपने जिस्म को अपने भाई के नंगे जिस्म से रगड़ते हुए सिसकारी ली.
“उफफफफफफफ्फ़ आइ लव यू वेरी मच मेरी जान, यकीन मानो में तुम से बहुत मोहब्बत करता हूँ मेरी बहन” ज़ाहिद ने जब अपनी बहन का जवाब सुना. तो उस ने भी जोश में अपने बहन के जिस्म को अपनी बाहों में कसते हुए कहा.
अभी दोनो बहन भाई एक दूसरे की बाहों में गुम हो कर एक दूसरे के होंठो और गालों को चूसने में मसरूफ़ ही हुए थे. कि कमरे दरवाज़े पर होने वाली एक “ठक ठक” (दस्तक) ने उन दोनो बहन भाई के रंग में भंग डाल दी.
“कौन” कमरे के दरवाज़े पर ये दुस्तक सुन कर दोनो बहन भाई एक दम से हैरान हो कर एक दूसरे से अलग हुए और फिर ज़ाहिद ने बुलंद आवाज़ में पूछा.
“बेटा में हूँ तुम्हारी अम्मी,दरवाज़ा खोलो में चाय ले कर आई हूँ तुम दोनो के लिए” बाहर से उन की अम्मी रज़िया बीबी की आवाज़ उन दोनो के कानों में पड़ी.
वैसे तो रज़िया बीबी की आँख हर रोज़ सुबह जल्दी ही खुल जाती थी. लेकिन अक्सर नींद से जागने के बावजूद वो देर तक बिस्तर पर लेट कर टीवी पर चलते हुए मॉर्निंग शोस देखती रहती थी.
मगर आज जैसे ही रज़िया बीबी की आँख खुली.तो गुज़री रात अपनी जवानी बेटी की गरम सिसकियाँ को सुन कर उस की चूत में से उठने वाले तूफान का असर अभी तक उस के तन बदन में बाकी था.
इसीलिए अपनी नीद से बे दर होते ही रज़िया बीबी के दिल में उत्सुकता पैदा हुई.कि वो जा कर देखे तो सही कि उस के बेटा और बेटी किस हाल में हैं.
इसी लिए अब अपने बच्चो को चाय देने के बहने वो उन के कमरे तक चली आई थी.
“अच्छा एक मिनट अम्मी” ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी की आवाज़ सुनी.तो उस ने फॉरन अपनी अम्मी की आवाज़ का जवाब देते हुए कहा.
“भाई ये अम्मी को क्या सूझी कि वो चाय ले कर हमारे पास चली आई हैं” शाज़िया ने अपनी अम्मी की उन के कमरे में आमद पर हेरान होते हुए अपने भाई से शरगोशि की.
"उफफफफफफफफफफ्फ़ अम्मी ने भी सुबह सुबह ही चाय पीला देनी है,अभी तो में उन की बेटी का ताज़ा दूध पीने के मूड में था” ज़ाहिद ने अपनी बहन के बड़े मम्मे को अपने हाथ से कसते हुए अपनी बहन के निपल पर तेज़ी से अपनी ज़ुबान फेरते हुए जवाब दिया.
“हाईईईईईईईई भाई छोड़ो मुझे ,मगर अभी दरवाज़ा मत खोलना प्लीज़, मुझे जल्दी से पहले कुछ पहन लेने दो भाई”शाज़िया ने अपने आप को अपने भाई की बाहों से आज़ाद करते हुए बिस्तर से छलाँग लगाई. और ज़ाहिद की अलमारी से अपना एक पुराना शलवार कमीज़ सूट निकाल कर शलवार पहनी.
ये सूट शाज़िया ने कल शाम ही अपने भाई की अलमारी में टांगा था. और फिर वो नंगी हालत में ही जल्दी जल्दी बिस्तर पर पड़े कंबल को ठीक करने लगी.
“भाई खोलो भी दरवाज़ा” बाहर से उन की अम्मी की आवाज़ दुबारा आई. तो शाज़िया ने जल्दी से बिस्तर को उसी हालत में छोड़ कर अपनी कमीज़ भी ज़ेबे तन कर ली.
कपड़े पहनने की जल्दी में शाज़िया के गले से उस का दुपट्टा सरक कर फर्श पर जा गिरा. जिस का ईलम उस वक्त शाज़िया को नही हुआ,