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अब ज़ाहिद जैसे गरम और अपनी बहन की चूत के आशिक़ भाई के लिए एक महीना तो क्या एक दिन भी अब अपनी बहन की चूत से दूर रहना मोहाल था.
इसीलिए अपनी बहन को अपने ही लंड से हमला (प्रेनग्नेंट) करने वाली खबर सुन कर ज़ाहिद को जितना जोश चढ़ा था.
अब अपनी बहन से डॉक्टर की कही हुई हिदायत का सुन कर ज़ाहिद की तबीयत उतनी ही परेशान हो गई थी.
“तु तुम ही बताओ,तुम्हारी चूत के बिना एक महीना में कैसे गुज़ारुँगा मेरी जान” ज़ाहिद ने शाज़िया की शलवार के नाडे को खोलते हुए मासूम अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.
“सबर्र्र्र्र्र्र्र्ररर मेअरयययययययययययी भाईईईईईईईईई सबर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर, इस के अलावा आप कर भी क्या सकते हो अब”शाज़िया ने अपने भाई को तसल्ली दी और अपनी शलवार और कमीज़ उतार कर बिल्कुल नंगी हो गई.
शाज़िया को अपने कपड़े उतारते देख कर ज़ाहिद भी फॉरन नंगा हो गया. और फिर ज़ाहिद ने अपनी बहन के पैरो से ले कर उस के सर के बालों तक शाज़िया के जिस्म के हर हिस्से को चूम चूम कर अपनी बहन से अपनी वलिहाना मोहब्बत का इज़हार किया.
अपनी बहन के नंगे बदन के एक एक हिस्से को चूमने के बाद ज़ाहिद बिस्तर पर नंगी लेटी अपनी बहन शाज़िया की टाँगों के दरमिया आया.
और अपनी बहन की फूली हुई चूत के होंठो पर अपनी गरम ज़ुबान रखते हुए बोला” चलो अगर में अपनी बहन की चूत में अपना लंड नही डाल सकता तो कोई बात नही,में एक महीना यूँ ही अपनी बहन की चूत के पानी को चाट चाट कर ही अपने मुँह और लंड की प्यास बुझाने की कोशिश करूँगा ”
ज्यों ही ज़ाहिद की गरम ज़ुबान उस की बहन की प्यासी चूत से टच हुई. तो शाज़िया अपने भाई की ज़ुबान और होंठो की गर्मी से मस्त होते हुए एक मछली की तरह अपने बिस्तर पर तड़प तड़प कर अपनी चूत का पानी छोड़ने लगी..
जिसे उस की टाँगों के दरमियाँ लेटा हुआ उस का भाई ज़ाहिद लेमन का पानी समझ कर पी पी कर अपने जवान जिस्म की गर्मी को कम करने की कोशिस में मसरूफ़ हो गया.
शाज़िया डॉक्टर से अपने प्रेगनेंट होने की खबर सुन कर तो पहले ही बहुत गरम हो चुकी थी.
और अब उस के भाई ज़ाहिद की उस की चूत पर फिसलती हुई ज़ुबान ने उस की फुद्दि की गरमाइश को अपनी इंतिहा पर पहुँचा दिया था.
इसीलिए ज़ाहिद की सकिंग के चन्द लम्हो बाद ही शाज़िया ने अपनी फुद्दि का गरम और नमकीन पानी अपने भाई के खुले मुँह में उडेल दिया.
“भाई मेने सोचा है कि में एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रह लूँ” जब शाज़िया अपने भाई के मुँह में अपनी फुद्दि का पानी छोड़ चुकी. तो उस ने झटके ख़ाते हुए अपने जींस को संभालने की कोशिश करते हुए ज़ाहिद से कहा.
“अम्मी के कमरे में मगर क्यों” ज़ाहिद ने शाज़िया की चूत के लिप्स से अपना मुँह अलग कर के पास रखे तोलिये से अपना मुँह पोन्छा और शाज़िया से पूछा.
“वो इसीलिए कि अगर मैं पहले की तरह आप के साथ ही सोती रही ,तो मुझे डर है कि आप ने मेरे मना करने के बावजूद एक ना एक दिन अपना लंड मेरी फुद्दि में ज़रूर डाल देना है,इसीलिए अहतियात के तौर पर में अगला एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रहना चाहती हूँ” शाज़िया ने खुल कर अपने दिल की बात अपने भाई से कर दी.
“मेरा दिल तो नही मानता लेकिन तुम ये ही चाहती हो तो ठीक है” अपनी बहन की बात ज़ाहिद के ज़हन में असर कर गई.और इसीलिए ना चाहते हुए भी उस ने शाज़िया की बात मान ली.
फिर उसी रात शाज़िया अपने कुछ कपड़े और समान ले कर अपनी अम्मी के कमरे में शिफ्ट हो गई.
वैसे तो कहते हैं अपने शोहर की जुदाई में रात के वक्त एक औरत को उस का अपना बिस्तर काटने को दौड़ता है.
और अपने शोहार के बैगेर एक औरत किस तरह करवट बदल बदल कर अपनी रात बसर करती है. ये बात सिर्फ़ एक औरत ही जान सकती है.
मगर अपनी बहन शाज़िया के बगैर आज ज़ाहिद को अपना बिस्तर सूना सूना लाग रहा था. और अपनी बहन शाज़िया के गुदाज बदन की गैर मौजूदगी में ज़ाहिद का लंड परेशान हो हो कर उस की शलवार में पागलों की तरह इधर उधर गिरता रहता था.
ज़ाहिद ये बात बखूबी जानता था. कि अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाले बिना एक महीना गुज़ारना उस के लिए एक मुश्किल ही नही बल्कि एक ना मुमकिन बात थी.
मगर उसे अपनी बहन की कोख में जनम लेने वाले अपने बच्चे की खातिर डॉक्टर की बात मानते हुए ज़हर का ये घूँट भरना ही था.
इस दौरान तीन दिन गुज़र गये और इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद और शाज़िया अलाग अलग कमरों में ही सोते रहे.
इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद ने एक आध दफ़ा शाज़िया से उस की मूठ लगाने या फिर उस के लंड की चुसाइ लगाने का भी कहा. मगर शाज़िया ने अपने भाई की बात नही मानी.
क्यों कि शाज़िया को डर था कि अगर एक दफ़ा उस ने अपने भाई के लंड को हाथ लगा लिया.तो फिर ज़ाहिद तो ज़ाहिद खुद उस के लिए अपने आप को रोकना मुश्किल हो जाएगा.इसीलिए शाज़िया ने हर बार अपने भाई ज़ाहिद को ना कर दी.
इस दौरान ज़ाहिद ने एक आध बार सोचा कि काश अगर नीलोफर पाकिस्तान में होती. तो शायद वो शाज़िया से किए हुए अपने वादे को तोड़ कर नीलोफर की फुद्दि से अपने लंड की प्यास बुझा ही लेता.
मगर अब नीलोफर की गैर मौजूदगी में उस के पास एक ही हल रह गया था. कि वो अपने एरिया की किसी गश्ती के पास जा कर अपने गरम जिन्सी जज़्बात की आग को ठंडा कर ले.
लेकिन नीलोफर और फिर अपनी ही बहन की चूत के मज़े ले ले कर ज़ाहिद को अब रंडी औरतों में कोई दिल चस्पी नही रही थी. इसीलिए अब उस के भूके लंड के पास सबर करने के सिवाय कोई चारा नही रहा था.
अपनी बहन की चूत से किनारा करने के चोथे दिन जब ज़ाहिद अपने कमरे में खड़ा पोलीस स्टेशन जाने के लिए तैयार हो रहा था. तो इतने मेंशाज़िया उस के कमरे में दाखिल हुई और बोली “आप आज वापसी पर मेरे लिए बाज़ार से कुछ चीज़े तो लेते आना भाई”.
“अच्छा मुझे फोन पर बता देना क्या लेना है, में वापसी पर लेता आऊँगा” ज़ाहिद जल्दी में था इसीलिए उस ने शाज़िया को फॉरन जवाब दिया.
“मेने चीज़े पेपर पर लिख दीं है,आप लेते आना प्लीज़” शाज़िया ने जब देखा कि ज़ाहिद उस की बात पर गौर नही कर रहा. तो उस ने एक पेपर जल्दी से अपने भाई की शर्ट की पॉकेट में रखते हुए कहा.
साथ ही दोनो बहन भाई एक सही मियाँ बीवी की तरह एक दूसरे को गले मिले.और एक दूसरे के होंठो में लब डाल कर खुदा हाफ़िज़ कहते हुए एक दूसरे को अलविदा किया.
उसी शाम जब ज़ाहिद पोलीस स्टेशन से घर जाने के लिए निकला तो उस के फोन की बेल बजी.
“हेलो” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल पर बैठ कर फोन को ऑन किया.
“बेटा तुम किधर हो इस वक्त” दूसरी तरफ से ज़ाहिद की अम्मी रज़िया बीबी की आवाज़ आई.
“अम्मी में थाने से निकल कर घर आ रहा हूँ” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल को स्टार्ट करते हुए जवाब दिया.
“ज़ाहिद बेटा में अपनी किसी पुरानी जानने वाली औरत की तबीयत का हाल जानने एक हॉस्पिटल में आई हुई हूँ,अगर हो सके तो रास्ते से मुझे भी पिक कर लो” रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद से कहा.
“ठीक है में आता हूँ” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से हॉस्पिटल का नाम पूछा और फिर अपनी अम्मी को लेने उस तरफ चल पड़ा.
इसीलिए अपनी बहन को अपने ही लंड से हमला (प्रेनग्नेंट) करने वाली खबर सुन कर ज़ाहिद को जितना जोश चढ़ा था.
अब अपनी बहन से डॉक्टर की कही हुई हिदायत का सुन कर ज़ाहिद की तबीयत उतनी ही परेशान हो गई थी.
“तु तुम ही बताओ,तुम्हारी चूत के बिना एक महीना में कैसे गुज़ारुँगा मेरी जान” ज़ाहिद ने शाज़िया की शलवार के नाडे को खोलते हुए मासूम अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.
“सबर्र्र्र्र्र्र्र्ररर मेअरयययययययययययी भाईईईईईईईईई सबर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर, इस के अलावा आप कर भी क्या सकते हो अब”शाज़िया ने अपने भाई को तसल्ली दी और अपनी शलवार और कमीज़ उतार कर बिल्कुल नंगी हो गई.
शाज़िया को अपने कपड़े उतारते देख कर ज़ाहिद भी फॉरन नंगा हो गया. और फिर ज़ाहिद ने अपनी बहन के पैरो से ले कर उस के सर के बालों तक शाज़िया के जिस्म के हर हिस्से को चूम चूम कर अपनी बहन से अपनी वलिहाना मोहब्बत का इज़हार किया.
अपनी बहन के नंगे बदन के एक एक हिस्से को चूमने के बाद ज़ाहिद बिस्तर पर नंगी लेटी अपनी बहन शाज़िया की टाँगों के दरमिया आया.
और अपनी बहन की फूली हुई चूत के होंठो पर अपनी गरम ज़ुबान रखते हुए बोला” चलो अगर में अपनी बहन की चूत में अपना लंड नही डाल सकता तो कोई बात नही,में एक महीना यूँ ही अपनी बहन की चूत के पानी को चाट चाट कर ही अपने मुँह और लंड की प्यास बुझाने की कोशिश करूँगा ”
ज्यों ही ज़ाहिद की गरम ज़ुबान उस की बहन की प्यासी चूत से टच हुई. तो शाज़िया अपने भाई की ज़ुबान और होंठो की गर्मी से मस्त होते हुए एक मछली की तरह अपने बिस्तर पर तड़प तड़प कर अपनी चूत का पानी छोड़ने लगी..
जिसे उस की टाँगों के दरमियाँ लेटा हुआ उस का भाई ज़ाहिद लेमन का पानी समझ कर पी पी कर अपने जवान जिस्म की गर्मी को कम करने की कोशिस में मसरूफ़ हो गया.
शाज़िया डॉक्टर से अपने प्रेगनेंट होने की खबर सुन कर तो पहले ही बहुत गरम हो चुकी थी.
और अब उस के भाई ज़ाहिद की उस की चूत पर फिसलती हुई ज़ुबान ने उस की फुद्दि की गरमाइश को अपनी इंतिहा पर पहुँचा दिया था.
इसीलिए ज़ाहिद की सकिंग के चन्द लम्हो बाद ही शाज़िया ने अपनी फुद्दि का गरम और नमकीन पानी अपने भाई के खुले मुँह में उडेल दिया.
“भाई मेने सोचा है कि में एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रह लूँ” जब शाज़िया अपने भाई के मुँह में अपनी फुद्दि का पानी छोड़ चुकी. तो उस ने झटके ख़ाते हुए अपने जींस को संभालने की कोशिश करते हुए ज़ाहिद से कहा.
“अम्मी के कमरे में मगर क्यों” ज़ाहिद ने शाज़िया की चूत के लिप्स से अपना मुँह अलग कर के पास रखे तोलिये से अपना मुँह पोन्छा और शाज़िया से पूछा.
“वो इसीलिए कि अगर मैं पहले की तरह आप के साथ ही सोती रही ,तो मुझे डर है कि आप ने मेरे मना करने के बावजूद एक ना एक दिन अपना लंड मेरी फुद्दि में ज़रूर डाल देना है,इसीलिए अहतियात के तौर पर में अगला एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रहना चाहती हूँ” शाज़िया ने खुल कर अपने दिल की बात अपने भाई से कर दी.
“मेरा दिल तो नही मानता लेकिन तुम ये ही चाहती हो तो ठीक है” अपनी बहन की बात ज़ाहिद के ज़हन में असर कर गई.और इसीलिए ना चाहते हुए भी उस ने शाज़िया की बात मान ली.
फिर उसी रात शाज़िया अपने कुछ कपड़े और समान ले कर अपनी अम्मी के कमरे में शिफ्ट हो गई.
वैसे तो कहते हैं अपने शोहर की जुदाई में रात के वक्त एक औरत को उस का अपना बिस्तर काटने को दौड़ता है.
और अपने शोहार के बैगेर एक औरत किस तरह करवट बदल बदल कर अपनी रात बसर करती है. ये बात सिर्फ़ एक औरत ही जान सकती है.
मगर अपनी बहन शाज़िया के बगैर आज ज़ाहिद को अपना बिस्तर सूना सूना लाग रहा था. और अपनी बहन शाज़िया के गुदाज बदन की गैर मौजूदगी में ज़ाहिद का लंड परेशान हो हो कर उस की शलवार में पागलों की तरह इधर उधर गिरता रहता था.
ज़ाहिद ये बात बखूबी जानता था. कि अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाले बिना एक महीना गुज़ारना उस के लिए एक मुश्किल ही नही बल्कि एक ना मुमकिन बात थी.
मगर उसे अपनी बहन की कोख में जनम लेने वाले अपने बच्चे की खातिर डॉक्टर की बात मानते हुए ज़हर का ये घूँट भरना ही था.
इस दौरान तीन दिन गुज़र गये और इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद और शाज़िया अलाग अलग कमरों में ही सोते रहे.
इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद ने एक आध दफ़ा शाज़िया से उस की मूठ लगाने या फिर उस के लंड की चुसाइ लगाने का भी कहा. मगर शाज़िया ने अपने भाई की बात नही मानी.
क्यों कि शाज़िया को डर था कि अगर एक दफ़ा उस ने अपने भाई के लंड को हाथ लगा लिया.तो फिर ज़ाहिद तो ज़ाहिद खुद उस के लिए अपने आप को रोकना मुश्किल हो जाएगा.इसीलिए शाज़िया ने हर बार अपने भाई ज़ाहिद को ना कर दी.
इस दौरान ज़ाहिद ने एक आध बार सोचा कि काश अगर नीलोफर पाकिस्तान में होती. तो शायद वो शाज़िया से किए हुए अपने वादे को तोड़ कर नीलोफर की फुद्दि से अपने लंड की प्यास बुझा ही लेता.
मगर अब नीलोफर की गैर मौजूदगी में उस के पास एक ही हल रह गया था. कि वो अपने एरिया की किसी गश्ती के पास जा कर अपने गरम जिन्सी जज़्बात की आग को ठंडा कर ले.
लेकिन नीलोफर और फिर अपनी ही बहन की चूत के मज़े ले ले कर ज़ाहिद को अब रंडी औरतों में कोई दिल चस्पी नही रही थी. इसीलिए अब उस के भूके लंड के पास सबर करने के सिवाय कोई चारा नही रहा था.
अपनी बहन की चूत से किनारा करने के चोथे दिन जब ज़ाहिद अपने कमरे में खड़ा पोलीस स्टेशन जाने के लिए तैयार हो रहा था. तो इतने मेंशाज़िया उस के कमरे में दाखिल हुई और बोली “आप आज वापसी पर मेरे लिए बाज़ार से कुछ चीज़े तो लेते आना भाई”.
“अच्छा मुझे फोन पर बता देना क्या लेना है, में वापसी पर लेता आऊँगा” ज़ाहिद जल्दी में था इसीलिए उस ने शाज़िया को फॉरन जवाब दिया.
“मेने चीज़े पेपर पर लिख दीं है,आप लेते आना प्लीज़” शाज़िया ने जब देखा कि ज़ाहिद उस की बात पर गौर नही कर रहा. तो उस ने एक पेपर जल्दी से अपने भाई की शर्ट की पॉकेट में रखते हुए कहा.
साथ ही दोनो बहन भाई एक सही मियाँ बीवी की तरह एक दूसरे को गले मिले.और एक दूसरे के होंठो में लब डाल कर खुदा हाफ़िज़ कहते हुए एक दूसरे को अलविदा किया.
उसी शाम जब ज़ाहिद पोलीस स्टेशन से घर जाने के लिए निकला तो उस के फोन की बेल बजी.
“हेलो” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल पर बैठ कर फोन को ऑन किया.
“बेटा तुम किधर हो इस वक्त” दूसरी तरफ से ज़ाहिद की अम्मी रज़िया बीबी की आवाज़ आई.
“अम्मी में थाने से निकल कर घर आ रहा हूँ” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल को स्टार्ट करते हुए जवाब दिया.
“ज़ाहिद बेटा में अपनी किसी पुरानी जानने वाली औरत की तबीयत का हाल जानने एक हॉस्पिटल में आई हुई हूँ,अगर हो सके तो रास्ते से मुझे भी पिक कर लो” रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद से कहा.
“ठीक है में आता हूँ” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से हॉस्पिटल का नाम पूछा और फिर अपनी अम्मी को लेने उस तरफ चल पड़ा.