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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

अब ज़ाहिद जैसे गरम और अपनी बहन की चूत के आशिक़ भाई के लिए एक महीना तो क्या एक दिन भी अब अपनी बहन की चूत से दूर रहना मोहाल था.

इसीलिए अपनी बहन को अपने ही लंड से हमला (प्रेनग्नेंट) करने वाली खबर सुन कर ज़ाहिद को जितना जोश चढ़ा था.

अब अपनी बहन से डॉक्टर की कही हुई हिदायत का सुन कर ज़ाहिद की तबीयत उतनी ही परेशान हो गई थी.

“तु तुम ही बताओ,तुम्हारी चूत के बिना एक महीना में कैसे गुज़ारुँगा मेरी जान” ज़ाहिद ने शाज़िया की शलवार के नाडे को खोलते हुए मासूम अंदाज़ में अपनी बहन से पूछा.

“सबर्र्र्र्र्र्र्र्ररर मेअरयययययययययययी भाईईईईईईईईई सबर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर, इस के अलावा आप कर भी क्या सकते हो अब”शाज़िया ने अपने भाई को तसल्ली दी और अपनी शलवार और कमीज़ उतार कर बिल्कुल नंगी हो गई.

शाज़िया को अपने कपड़े उतारते देख कर ज़ाहिद भी फॉरन नंगा हो गया. और फिर ज़ाहिद ने अपनी बहन के पैरो से ले कर उस के सर के बालों तक शाज़िया के जिस्म के हर हिस्से को चूम चूम कर अपनी बहन से अपनी वलिहाना मोहब्बत का इज़हार किया.

अपनी बहन के नंगे बदन के एक एक हिस्से को चूमने के बाद ज़ाहिद बिस्तर पर नंगी लेटी अपनी बहन शाज़िया की टाँगों के दरमिया आया.

और अपनी बहन की फूली हुई चूत के होंठो पर अपनी गरम ज़ुबान रखते हुए बोला” चलो अगर में अपनी बहन की चूत में अपना लंड नही डाल सकता तो कोई बात नही,में एक महीना यूँ ही अपनी बहन की चूत के पानी को चाट चाट कर ही अपने मुँह और लंड की प्यास बुझाने की कोशिश करूँगा ”

ज्यों ही ज़ाहिद की गरम ज़ुबान उस की बहन की प्यासी चूत से टच हुई. तो शाज़िया अपने भाई की ज़ुबान और होंठो की गर्मी से मस्त होते हुए एक मछली की तरह अपने बिस्तर पर तड़प तड़प कर अपनी चूत का पानी छोड़ने लगी..

जिसे उस की टाँगों के दरमियाँ लेटा हुआ उस का भाई ज़ाहिद लेमन का पानी समझ कर पी पी कर अपने जवान जिस्म की गर्मी को कम करने की कोशिस में मसरूफ़ हो गया.

शाज़िया डॉक्टर से अपने प्रेगनेंट होने की खबर सुन कर तो पहले ही बहुत गरम हो चुकी थी.

और अब उस के भाई ज़ाहिद की उस की चूत पर फिसलती हुई ज़ुबान ने उस की फुद्दि की गरमाइश को अपनी इंतिहा पर पहुँचा दिया था.

इसीलिए ज़ाहिद की सकिंग के चन्द लम्हो बाद ही शाज़िया ने अपनी फुद्दि का गरम और नमकीन पानी अपने भाई के खुले मुँह में उडेल दिया.

“भाई मेने सोचा है कि में एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रह लूँ” जब शाज़िया अपने भाई के मुँह में अपनी फुद्दि का पानी छोड़ चुकी. तो उस ने झटके ख़ाते हुए अपने जींस को संभालने की कोशिश करते हुए ज़ाहिद से कहा.

“अम्मी के कमरे में मगर क्यों” ज़ाहिद ने शाज़िया की चूत के लिप्स से अपना मुँह अलग कर के पास रखे तोलिये से अपना मुँह पोन्छा और शाज़िया से पूछा.

“वो इसीलिए कि अगर मैं पहले की तरह आप के साथ ही सोती रही ,तो मुझे डर है कि आप ने मेरे मना करने के बावजूद एक ना एक दिन अपना लंड मेरी फुद्दि में ज़रूर डाल देना है,इसीलिए अहतियात के तौर पर में अगला एक महीना अम्मी के साथ उन के कमरे में रहना चाहती हूँ” शाज़िया ने खुल कर अपने दिल की बात अपने भाई से कर दी.

“मेरा दिल तो नही मानता लेकिन तुम ये ही चाहती हो तो ठीक है” अपनी बहन की बात ज़ाहिद के ज़हन में असर कर गई.और इसीलिए ना चाहते हुए भी उस ने शाज़िया की बात मान ली.

फिर उसी रात शाज़िया अपने कुछ कपड़े और समान ले कर अपनी अम्मी के कमरे में शिफ्ट हो गई.

वैसे तो कहते हैं अपने शोहर की जुदाई में रात के वक्त एक औरत को उस का अपना बिस्तर काटने को दौड़ता है.

और अपने शोहार के बैगेर एक औरत किस तरह करवट बदल बदल कर अपनी रात बसर करती है. ये बात सिर्फ़ एक औरत ही जान सकती है.

मगर अपनी बहन शाज़िया के बगैर आज ज़ाहिद को अपना बिस्तर सूना सूना लाग रहा था. और अपनी बहन शाज़िया के गुदाज बदन की गैर मौजूदगी में ज़ाहिद का लंड परेशान हो हो कर उस की शलवार में पागलों की तरह इधर उधर गिरता रहता था.

ज़ाहिद ये बात बखूबी जानता था. कि अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाले बिना एक महीना गुज़ारना उस के लिए एक मुश्किल ही नही बल्कि एक ना मुमकिन बात थी.

मगर उसे अपनी बहन की कोख में जनम लेने वाले अपने बच्चे की खातिर डॉक्टर की बात मानते हुए ज़हर का ये घूँट भरना ही था.

इस दौरान तीन दिन गुज़र गये और इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद और शाज़िया अलाग अलग कमरों में ही सोते रहे.

इन तीन दिनो के दौरान ज़ाहिद ने एक आध दफ़ा शाज़िया से उस की मूठ लगाने या फिर उस के लंड की चुसाइ लगाने का भी कहा. मगर शाज़िया ने अपने भाई की बात नही मानी.

क्यों कि शाज़िया को डर था कि अगर एक दफ़ा उस ने अपने भाई के लंड को हाथ लगा लिया.तो फिर ज़ाहिद तो ज़ाहिद खुद उस के लिए अपने आप को रोकना मुश्किल हो जाएगा.इसीलिए शाज़िया ने हर बार अपने भाई ज़ाहिद को ना कर दी.

इस दौरान ज़ाहिद ने एक आध बार सोचा कि काश अगर नीलोफर पाकिस्तान में होती. तो शायद वो शाज़िया से किए हुए अपने वादे को तोड़ कर नीलोफर की फुद्दि से अपने लंड की प्यास बुझा ही लेता.

मगर अब नीलोफर की गैर मौजूदगी में उस के पास एक ही हल रह गया था. कि वो अपने एरिया की किसी गश्ती के पास जा कर अपने गरम जिन्सी जज़्बात की आग को ठंडा कर ले.

लेकिन नीलोफर और फिर अपनी ही बहन की चूत के मज़े ले ले कर ज़ाहिद को अब रंडी औरतों में कोई दिल चस्पी नही रही थी. इसीलिए अब उस के भूके लंड के पास सबर करने के सिवाय कोई चारा नही रहा था.

अपनी बहन की चूत से किनारा करने के चोथे दिन जब ज़ाहिद अपने कमरे में खड़ा पोलीस स्टेशन जाने के लिए तैयार हो रहा था. तो इतने मेंशाज़िया उस के कमरे में दाखिल हुई और बोली “आप आज वापसी पर मेरे लिए बाज़ार से कुछ चीज़े तो लेते आना भाई”.

“अच्छा मुझे फोन पर बता देना क्या लेना है, में वापसी पर लेता आऊँगा” ज़ाहिद जल्दी में था इसीलिए उस ने शाज़िया को फॉरन जवाब दिया.

“मेने चीज़े पेपर पर लिख दीं है,आप लेते आना प्लीज़” शाज़िया ने जब देखा कि ज़ाहिद उस की बात पर गौर नही कर रहा. तो उस ने एक पेपर जल्दी से अपने भाई की शर्ट की पॉकेट में रखते हुए कहा.

साथ ही दोनो बहन भाई एक सही मियाँ बीवी की तरह एक दूसरे को गले मिले.और एक दूसरे के होंठो में लब डाल कर खुदा हाफ़िज़ कहते हुए एक दूसरे को अलविदा किया.

उसी शाम जब ज़ाहिद पोलीस स्टेशन से घर जाने के लिए निकला तो उस के फोन की बेल बजी.

“हेलो” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल पर बैठ कर फोन को ऑन किया.

“बेटा तुम किधर हो इस वक्त” दूसरी तरफ से ज़ाहिद की अम्मी रज़िया बीबी की आवाज़ आई.

“अम्मी में थाने से निकल कर घर आ रहा हूँ” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल को स्टार्ट करते हुए जवाब दिया.

“ज़ाहिद बेटा में अपनी किसी पुरानी जानने वाली औरत की तबीयत का हाल जानने एक हॉस्पिटल में आई हुई हूँ,अगर हो सके तो रास्ते से मुझे भी पिक कर लो” रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद से कहा.

“ठीक है में आता हूँ” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से हॉस्पिटल का नाम पूछा और फिर अपनी अम्मी को लेने उस तरफ चल पड़ा.

 
जिस हॉस्पिटल के बाहर रज़िया बीबी खड़ी अपने बेटे ज़ाहिद का इंतजार कर रही थी. वो हॉस्पिटल बिल्कुल एक मेन रोड के किनारे पर था.

ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के पास आ कर अपनी मोटर साइकल को रोका.तो उस की नज़र हॉस्पिटल के साथ बने हुए एक शॉपिंग स्टोर पर पड़ी.

शॉपिंग स्टोर को देखते ही ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया की सुबह दी हुई लिस्ट ज़हन में आ गई.

जो शाज़िया ने उसे घर से निकलते हुए दी थी कि वो शाम को घर वापिस आते वक्त शाज़िया के लिए शॉपिंग करता आए.

“अम्मी आप इधर की रुकिये में ज़रा स्टोर से शाज़िया के लिए कुछ चीज़े खदीद लूँ” ज़ाहिद ने अपने मोटर साइकल को स्टॅंड पर खड़ा करते हुए रज़िया बीबी से कहा.

“चलो में भी तुम्हारे साथ ही चली चलती हूँ बेटा” रज़िया बीबी ने जवाब दिया और अपने बेटे के साथ साथ चलती स्टोर में आ गई.

स्टोर में आ कर रज़िया बीबी तो औरतों की आदत के मुताबिक इधर इधर की चीज़ो को देखने लगी. जब कि ज़ाहिद ने स्टोर के सेल्स मॅन के पास जा कर अपनी पॉकेट से अपनी बहन का दिया हुआ पेपर निकाला और सेल्स मॅन से कहा कि इस पेपर पर लिखी हुई चीज़े दे दो.

सेल्स मॅन ने ज़ाहिद से पेपर लिया और एक एक कर के शम्पू,कंडीशनर,बॉडी सोप और हेर रिमूविंग क्रीम निकाल कर ज़ाहिद के सामने काउंटर पर रखना शुरू कर दीं.

ज्यों ही सेल्स मॅन ने ये सब चीज़े ज़ाहिद के सामने रखीं तो एक और कस्टमर ने सेल्स मॅन को अपनी तरफ बुलाया.

जिस पर वो सेल्स मॅन ज़ाहिद से एक मिनट में वापिस आने का कह कर दूसरे कस्टमर की तरफ चला गया.

“उफफफफफफफफ्फ़ शाज़िया ने भी ये हेर रिमूविंग क्रीम मुझ से आज इसी वक्त मंगवानी थी,जबकि एम्मी मेरे साथ हैं” आज अपनी अम्मी की मौजूदगी में अपनी बहन की चूत सफाई की क्रीम खरीदते वक्त ना जाने क्यों ज़ाहिद को शरम सी महसूस होने लगी थी.और वो दिल ही दिल में ये दुवा माँगने लगा कि कहीं सेल्स मॅन के वापिस आने तक उस की अम्मी उस की तरफ ना आ जाएँ.

मगर आज शायद ज़ाहिद की दुआ की कबोलियत का दिन नही था.इसीलिए ज्यों ही ज़ाहिद दुआ माँग कर फारिग हुआ तो उसे अपने पीछे से अपनी अम्मी की आवाज़ सुनाई दी “में भी तो ज़ेरा देखूं मेरा बेटा अपनी बहन के लिए क्या शॉपिंग कर रहा है भला”.

“उफफफफफफफफफ्फ़ लो जी अम्मी भी आ ही गई हैं” अपनी अम्मी की आवाज़ सुन कर ज़ाहिद ने अपने दिल में सोचा और उस का दिल शरम के मारे तेज़ी से धक धक करने लगा.

हालाकी ज़ाहिद अपनी अम्मी की रज़ा मंदी से अपनी ही बहन को अपनी बीवी बना कर ना सिर्फ़ अपनी सुहाग रात मना चुका था.

बल्कि उस की अम्मी ने ही तो उसे अपनी ही बहन के बच्चे का बाप बनने की खुस खबरी भी सुनाई थी.

मगर इस के बावजूद अब अपनी अम्मी के सामने अपनी बहन की मोटी फुद्दि का समान लेते वक्त ज़ाहिद को शरम से पसीना आने लगा था.

फिर ज़ाहिद के ना चाहते हुए भी उस की अम्मी की नज़र काउंटर पर रखी हुई शाज़िया की चीज़ो पर पड़ी.

“अच्छा तो मेरा बेटा मेरी बहू के नहाने धोने की आशिया (थिंग्स) खरीद रहा है” रज़िया बीबी ने एक एक कर के सारी चीज़ो को अपने हाथ में उठा कर अपनी आँखो के सामने लाते हुआ कहा.

रज़िया बीबी के ज़हन में ख्याल आया.कि उस के मेरहूम शोहर ने तो कभी अपनी जिंदगी में उस के लिए इस किस्म की चीज़े नही खरीदी थी.

जब कि आज उस का अपन सगा बेटा उस की नज़रों के सामने अपनी ही सग़ी बहन की चूत की शेव के लिए हेर रिमूविंग क्रीम खरीद कर ले जा रहा है. ये सोचते ही रज़िया बीबी की फुद्दि पानी पानी हो गई और उस की चूत में पानी आने लगा.

“जीिइई अम्मी वो शाज़िया ने आज सुबह ये लिस्ट मुझे दी थी कि वापसी पर में उस के लिए ये चीज़े लेता आऊँ” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से हिचकिचाते हुए कहा.

इस से पहले कि रज़िया बीबी और कुछ पूछ पाती.सेल्स मॅन वापिस आ गया और ज़ाहिद से मज़रत करता हुआ सब चीज़े पॅक करने लगा.

ज्यों ही सेल्स मॅन ने क्रीम को हाथ लगाया.तो रज़िया बीबी ने सेल्स मॅन से कहा “बेटा इस क्रीम की जगह वीट क्रीम दे दो”

इस पर सेल्स मॅन ने रज़िया बीबी की हिदायत पर यू क्रीम की जगह वीट हेर रिमूविंग क्रीम पॅक कर दी.

ज़ाहिद को अपनी अम्मी का यूँ शाज़िया की कही हुई क्रीम को चेंज करवाने पर हैरत हुई .

इसी लिए ज्यों ही वो पैसे दे कर स्टोर से बाहर निकलने लगा. तो ज़ाहिद से छुपा ना रह सका और अपनी अम्मी से अचानक ही पूछ बैठा “अम्मी शाज़िया ने तो यू क्रीम लेने का कहा था तो फिर आप ने वीट क्यों ले ली”.

अपनी बेटे के मुँह से निकलता हुआ ये अचानक सवाल सुन कर रज़िया बीबी की पहले से गरम फुददी और बहक उठी.और उस के मुँह से भी एक दम अचानक ही निकल गया “वो इसीलिए कि इस क्रीम से सफाई अच्छी होती है बेटा”.

रज़िया बीबी के मुँह से निकालने वाले ये इलफ़ाज़ इतने खुल्लम खुल्ला और अचानक थे. कि जिन को सुन कर ज़ाहिद एक दम हैरत से अपनी अम्मी का मुँह देखने लगा.

जब कि अपने मुँह से ये इलफ़ाज़ यूँ एक दम अदा करते ही रज़िया बीबी खुद भी शरम से पानी पानी होने लगी.

ज़ाहिद अपनी अम्मी के साथ चलता हुआ स्टोर के बाहर खड़ी हुई अपनी मोटर साइकल तक आया. और मोटर साइकल पर बैठ कर उसे स्टार्ट कर दिया.

अपनी अम्मी के साथ स्टोर में होने वाले इस मोकलमे (डायलॉग) पर ना जाने क्यों ज़ाहिद को आज मज़ा आया था.

जिस वजह से उस के अंडरवेार में सोया हुआ उस का लंड एक भर पूर अंगड़ाई ले कर अपनी नींद से जाग उठा.

ज़ाहिद ने ज्यों ही अपना मोटर साइकल को स्टार्ट किया. तो उस की अम्मी रज़िया बीबी खामोशी से अपने बेटे के पीछे उस की मोटर साइकल पर आन बैठी.

रज़ाई बीबी को वैसे तो मोटर साइकल की सवारी से डर लगता था. इसीलिए वो ज़्यादा तर मोटर साइकल की सवारी से पेरहेज करती थी.

लेकिन आज सुबह से वो अपनी एक पुरानी सहेली की तबीयत की खबर लेने हॉस्पिटल आने की वजह से काफ़ी थक गई थी.

इस वजह से किसी वॅन या रिक्शा में सफ़र करने की बजाय उस ने ज़ाहिद को बुलाना मुनासिब समझा. और अब ना चाहते हुए भी वो अपने बेटे के पीछे मोटर पर बैठ कर अपने घर पहुँचना चाहती थी.

मोटर साइकल पर बैठ कर रज़िया बीबी ने हल्के से अपना एक हाथ अपने बेटे के कंधे पर रख लिया.ताकि उसे अपने बेटे ज़ाहिद के जिस्म का सहारा रहे और वो मोटर साइकल से गिरने से बच जाए.

रज़िया बीबी की गान्ड इतनी मोटी,भारी और चौड़ी थी. कि उस की भारी गान्ड ज़ाहिद की मोटर साइकल की सीट पर नही समा पा रही थी.

जिस वजह से रज़िया बीबी की भारी गान्ड अब आधी मोटर की सीट पर जमी हुई थी. जब कि रज़िया बीबी की आधी चौड़ी गान्ड मोटर साइकल की सीट के पिछले डंडे पर अटकी हुई थी.

रज़िया बीबी ज्यों ही मोटर साइकल पर बैठी. तो उस का एक पावं तो मोटर साइकल के पायदान (फुट रेस्ट) पर पड़ गया. मगर रज़िया बीबी का दूसरा पावं हवा में झूलने लगा.

जिस का हल रज़िया बीबी ने यूँ निकाला कि उस ने बैठते ही अपनी एक टाँग को दूसरी टाँग के ऊपर रख लिया. जिस की वजह से रज़िया बीबी की गान्ड एक तरफ से ऊपर को उठ गई.

रज़िया बीबी ने आज अपनी शलवार के नीचे जो पैंटी पहनी हुई थी. वो पहले से ही काफ़ी तंग थी.

 
रज़िया बीबी ने आज अपनी शलवार के नीचे जो पैंटी पहनी हुई थी. वो पहले से ही काफ़ी तंग थी.

इसीलिए जब रज़िया बीबी अपनी टाँग पे टाँग रख कर मोटर साइकल पर बैठी तो रज़िया बीबी की पैंटी उस की चूत और गान्ड पर मज़ीद कस्ति चली गई.

ज़ाहिद और उस की अम्मी मोटर साइकल पर बैठ कर अभी कुछ दूर ही गये थे. कि मोटर साइकल का टाइयर रोड पर माजूद एक खड़े (होल) में से हो कर गुज़रा.

जिस वजह से मोटर को जम्प लगा. तो रज़िया बीबी की मोटी जांघे आपस में रगड़ खा गईं.

इस जम्प और रज़िया बीबी की गोश्त से भरपूर जाँघो के आपस में रगड़ने की वजह से रज़िया बीबी की टाइट पैंटी में एक खिचाव आया.

जिस की बदोलत रज़िया बीबी की पैंटी की छोटी पट्टी रज़िया बीबी की चूत के मोटे लबो में घुस कर उस की चूत के फूले हुए दाने पर रगड़ खाने लगी .

अपनी पैंटी के कपड़े की इस रगड़ से रज़िया बीबी को अपनी चूत के होंठो में एक अजीब सी सनसनाहट और मज़े दार खिचाव महसूस हुआ. और ना चाहते हुए भी रज़िया बीबी के मुँह से एक “अहह” सी निकल गई.

“अम्मी क्या हुआ” अपनी अम्मी के मुँह के निकलेने वाली आवाज़ सुन कर ज़ाहिद ने एक दम से पूछा.

“वो खड़े रहने की वजह से में थक गई थी बेटा” रज़िया बीबी ने अपने बेटे को जवाब दिया और शरम के मारे अपना दुपट्टा अपने मुँह में रख लिया. ता कि उस के मुँह से बेइख्तियारी में दुबारा ऐसी आवाज़ ना निकल पाए.

अपनी पैंटी के इस खिचाव ने चन्द ही लम्हों में रज़िया बीबी की चूत को पानी पानी कर के रख दिया.

रज़िया बीबी को आज का ये सफ़र बहुत मज़े दार तो लग रहा था. मगर इस के साथ साथ वो अभी तक मोटर साइकल की सवारी से ख़ौफ़जदा भी थी.

इसीलिए अपने घर की तरफ जाते हुए रज़िया बीबी बार बार अपने बेटे ज़ाहिद से कहती जा रही थी “ज़रा अहतियात से बेटा,ज़रा आहिस्ता चलो बेटा”.

अम्मी के बार बार इस तरह की बातें करने पर ज़ाहिद ने महसूस किया कि उस की अम्मी मोटर साइकल पर सफ़र करने से डर रही हैं.

इसीलिए उस ने मोटर साइकल आहिस्ता करते हुए अपनी अम्मी से कहा “अम्मी आप अपने बाज़ू को मेरे कंधे पर रखने की बजाए,अपने हाथ को मेरी कमर के गिर्द लपेट लो,इस तरह आप को नीचे गिरने का डर नही रहे गा”.

“नही बेटा ऐसे ही ठीक है,वैसे भी हम थोड़ी देर में घर पहुँच ही जाएँगे” रज़िया बीबी ने अपने बेटे की ऑफर के जवाब में कहा.

ज़ाहिद और रज़िया बीबी जब अपने घर के आधे रास्ते में पहुँचे. तो एक दम से एक कार ने ज़ाहिद के सामने ब्रेक लगाई. जिस की वजह से ज़ाहिद को भी अचानक ब्रेक लगानी पड़ गई.

इस तरह अचानक ब्रेक लगने से ज़ाहिद के पीछे बैठी रज़िया बीबी घबरा गई.

उस ने एक दम से ज़ाहिद के कंधे पर रखा हुआ हाथ हटाया. और अपने हाथ को ज़ाहिद की कमर के गिर्द ला कर अपने बेटे की कमर के गिर्द लपेट दिया.

रज़िया बीबी के इस तरह अपना हाथ ज़ाहिद के जिस्म के गिर्द लपेटने से रज़िया बीबी का जिस्म पीछे से अपने बेटे की कमर के साथ चिपकता चला गया.

जिस की वजह से रज़िया बीबी के तरबूज़ की मानद बड़े बड़े मम्मे उस के बेटे ज़ाहिद की कमर से लग कर चिपक गये.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी अम्मी का बदन कितना नरम है और उन के जिस्म में कितनी गर्मी भरी हुई है” ज्यों ही रज़िया बीबी पीछे से अपने जवान बेटे की कमर से टकराई. तो ज़ाहिद के दिल में पहली बार अपनी अम्मी के मुतलक इस तरह की बात आई.

“ज़ाहिद कुछ तो शरम कर ये तुम्हारी सग़ी अम्मी हैं बेगैरत” दूसरे ही लम्हेज़हिद की इस गंदी सोच पर उस के ज़मीर ने उसे मलंत किया.

आम हालत में ज़ाहिद अपनी अम्मी के मुतलक इस तरह की बात अपने ज़हन में लेने का तसव्वुर भी नही कर सकता था.

मगर अपनी बहन की चूत से महरूमी की वजह से ज़ाहिद के जिस्म में तो जिन्सी भूक पहले ही काफ़ी भारी हुई थी. और फिर कुछ देर पहले स्टोर में कही हुई अपनी अम्मी की बात ने उस के लंड को उस की पॅंट में खड़ा कर दिया था.

इसीलिए अब जैसे ही ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के बड़े और गुदाज मम्मो को पीछे से अपने जिस्म के साथ छूते और रगड़ खाते हुए महसूस किया.

तो अपनी अम्मी के मोटे जिस्म और उस के भारी मम्मो के असर से ज़ाहिद के जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया. और ज़ाहिद के ना चाहने के बावजूद उस का लंड पहली बार अपनी अम्मी के भारी वजूद के लिए तड़प कर पूरा सख़्त हो गया था.

उधर रज़िया बीबी भी ज्यों ही अपने जवान बेटे की कमर में अपना हाथ डाल उस के साथ पीछे से चिपकी.

तो उसे भी अपने बेटे के जिस्म की मज़बूती और उस के जिस्म में मौजूद जवानी की गर्मी का फॉरन ही अहसास हो गया.

जिस की वजह से रज़िया बीबी की चूत में अपने बेटे के लंड की लगी हुई आग फिर से सुलगने लगी.

अभी दोनो माँ बेटा एक दूसरे के जज़्बात से बे खबर हो कर अपने अपने जिस्मो की आग को संभालने की ना काम कोशिश कर रहे थे. कि इतनी देर वो बहरिया टाउन के अंदर दाखिल हो गये.

बहरिया टाउन की सेक्यूरिटी गेट से ज़ाहिद के घर का फासला कुछ ज़्यादा तो नही था. मगर सोसाइटी की रोड्स पर जगह जगह बने हुए स्पीड ब्रेकर्स की वजह से ज़ाहिद को अपनी मोटर साइकल बहुत ही आहिस्ता स्पीड में चलानी पड़ रही थी.

ज़ाहिद अभी अपनी गली से कुछ दूर ही था. कि उस ज़हन में पोलीस स्टेशन की कोई बात आ गई. जिस की वजह से वो रोड पर माजूद आख़िरी स्पीड ब्रेक पर ध्यान नही दे पाया.

बे शक ज़ाहिद की मोटर साइकल की स्पीड बहुत कम थी.लेकिन इस के बावजूद मोटरो साइकल को एक झटका लगा.

इस अचानक झटके की वजह से अपने बेटे के पीछे सीट पर बैठी रज़िया बीबी एक दम से अनबॅलेन्स हुई.

तो ज़ाहिद की कमर के गिर्द लिपटा हुआ रज़िया बीबी का हाथ एक दम से स्लिप हो हर ज़ाहिद की पॅंट के अंदर उस की टाँगों के दरमियाँ, ज़ाहिद के अभी तक सख़्त और खड़े हुए लंड पर आ पहुँचा.

यूँ अचानक अपने बेटे के लंड से अपना हाथ टच करते ही रज़िया बीबी के होश उड़ गये .और उस ने एक दम से अपने हाथ को पीछे खैंच लिया.

हालाकी रज़िया बीबी के हाथ ने अपने बेटे के जवान लंड को एक ही सेकेंड के लिए यूँ पहली बार छुआ था.

मगर रज़िया बीबी के तजुर्बेकार हाथों ने इस एक ही लम्हे में अपने बेटे के लंड की सख्ती और गर्मी का ब खूबी अंदाज़ा लगा लिया था.

उधर दूसरी तरफ अपनी अम्मी के हाथ का लामास अपने मोटे और बड़े लंड पर महसूस करते ही ज़ाहिद की तो सेती (बेल) ही जैसे एक दम से गुम हो गई. और उस ने भी घबरा कर एक दम से मोटर साइकल का आक्सेलरेटर दबा दिया.

ज़ाहिद का घर चूँकि अगली ही गली में था. इसीलिए दूसरे ही लम्हे दोनो माँ बेटा अपने घर के गेट तक पहुँच गये.

रज़िया बीबी अपने बेटे के लंड से अपने हाथ के यूँ अचानक छू जाने से इतनी शर्मिंदा हुई.कि उस में अपने बेटे से आँख मिलाने की हिम्मत ना रही. और ज्यों ही ज़ाहिद ने घर के बाहर मोटर साइकल को रोका. तो रज़िया बीबी जल्दी से सीट से उतर कर घर के गेट की तरफ चल पड़ी.

 
अपनी अम्मी के घर के अंदर जाने के दौरान ना जाने ज़ाहिद को क्या सूझी. कि रज़िया बीबी की तरह खुद भी अपने घर में जाने की बजाय वो अपनी मोटर साइकल पर बैठ कर पीछे से अपनी अम्मी के भारी वजूद को ललचाई नज़रो से देखने लगा.

ज़ाहिद अपनी अम्मी के जिस्म को देखते हुए सोचने लगा.कि उस की बहन शाज़िया की तरह उस की अम्मी का बदन भी काफ़ी भरा भरा है.

आज अपनी अम्मी के जिस्म का दीदार करते हुए ज़ाहिद की नज़र उस की अम्मी की बड़ी और उभरी हुई मोटी मस्त गान्ड पर गई.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ शाज़िया तो शाज़िया,मेरी अम्मी तो मेरी बहन से भी बढ़ कर एक माल है यार” अपनी अम्मी की हचकोले खाती गान्ड को देखते हुए ज़ाहिद के दिल में ख्याल आया.तो ज़ाहिद का लंड खुद ब खुद उस की पॅंट में खड़े हो कर झटके लेने लगा.

एक पल के लिए ज़ाहिद अपनी नज़रों से दूर होते हुए अपनी अम्मी के शरीर को देख कर बहका.

लेकिन तभी उस के दिल में ख्याल आया कि “बहन चोद अपनी अम्मी से तो बाज़ आ जा” ज़ाहिद ने अपने पॅंट में खड़े हुए लंड को समझाते हुए कहा.

ज़ाहिद अपने लंड को समझाने की कोशिश तो कर रहा था. मगर अभी तक उस की नज़रें अपनी अम्मी के मटकते हुए चुतड़ों पर जमी हुई थी.

मटक मटक कर चलने की वजह से रज़िया बीबी की मोटी गान्ड ज़ाहिद की आँखों का ध्यान अपनी तरफ खैंच रही थी.

जब के ज़ाहिद एक बुत की मानिंद बिल्कुल सख़्त हो कर मोटर साइकल पर बैठा ,शलवार कमीज़ में कसे हुए अपनी अम्मी के भारी चुतड़ों के सही साइज़ का अंदाज़ा लगने की कोशिश में मसरूफ़ था.

जब कि उस की पॅंट में मौजूद उस का लंड जवानी के नशे में बिल्कुल तन गया था .

रज़िया बीबी तो कब की घर के गेट में दाखिल हो चुकी थी.जब कि ज़ाहिद अभी तक घर के बाहर अपनी मोटर साइकल पर बैठा हुआ अपनी अम्मी के बारे में सोच रहा था.

उधर अपने कमरे तक जाते जाते रज़िया बीबी ने महसूस कर लिया. कि अपने बेटे के गरम और सख़्त लंड को पहली बार अंजाने में ही छू लेने की वजह से उस की फुद्दि अब बे तहासा पानी छोड़ रही है.जिस की वजह से उस की पैंटी भी गीली हो चुकी थी.

रज़िया बीबी ने अपने कमरे में जाते ही अपनी अलमारी से अपनी शलवार,कमीज़ और एक नई पैंटी निकाली.और अपने कमरे के अटेच बाथरूम की तरफ जाने लगी.

ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने कमरे के बाथ रूम के दरवाज़े को हाथ लगाया तो वो उसे अंदर से बंद मिला. जिस पर रज़िया बीबी समझ गई की उस की बेटी शाज़िया बाथरूम यूज़ कर रही है.

रज़िया बीबी को अपनी चूत से बहते पानी की वजह से गीली हो जाने वाली पैंटी को पहने हुए अब उलझन हो रही थी.

इसीलिए उस की कॉसिश थी कि वो जितनी जल्दी हो सके अपनी गीली पैंटी को उतार कर धोने वाले कपड़ो की बास्केट में फैंक दे.

रावलपिंडी में किराए वाले इस घर के सिर्फ़ दो ही बाथरूम थे. जिन में से एक अब शाज़िया यूज़ कर रही थी. जब कि दूसरा बाथरूम ज़ाहिद के कमरे में था.

रज़िया बीबी ने सोचा कि ज़ाहिद को मोटर साइकल खड़ी कर के अपने कमरे तक आते आते थोड़ी देर हो जाएगी. तो क्यों ना वो इतनी देर में अपने बेटे ज़ाहिद के कमरे वाले बाथरूम में जा कर उसे यूज़ कर ले.

ये सोच कर रज़िया बीबी जल्दी से आ कर अपने बेटे के बाथरूम में घुसी. और अपनी शलवार कमाीज़ और पैंटी उतार कर अपनी पानी छोड़ती चूत को देखा. तो पता चला कि वाकई ही उस की पच पच करती चूत के पानी ने उस की पैंटी को पूरा भिगो दिया था.

रज़िया बीबी के पास वक्त कम था. इसीलिए उस ने जल्दी से अपनी चूत को बाथरूम के टिश्यू पेपर से सॉफ किया और नई पैंटी पहन कर अपनी नई शलवार कमीज़ ज़बे तन कर ली.

अपने बेटे के लंड को अचानक छूने से रज़िया बीबी अपने दिल में इतनी शरम महसूस कर रही थी. कि वो अपने बेटे ज़ाहिद का सामना करने की अब हिम्मत नही पा रही थी.

इसीलिए उस की ख्वाहिश थी कि वो जितनी जल्दी हो सके अपने बेटे के बाथ रूम से निकल कर अपने कमरे में पहुँच जाए.

इसी जल्दी में अपने कमरे की तरफ जाते हुए रज़िया बीबी ना सिर्फ़ ज़ाहिद के बाथरूम के दरवाज़े के पीछे अपनी पुरानी शलवार को भी लटका छोड़ गई.

बल्कि ज्यों ही रज़िया बीबी बाथरूम से निकल कर ज़ाहिद के कमरे से बाहर जाने लगी. तो जल्दी और अंजाने में उस ने अपनी गीली पैंटी को भी ज़ाहिद के बिस्तर के बिल्कुल नज़दीक गिरा दिया. जो गिरते ही ज़ाहिद के बिस्तर की लंबी चादर के नीचे छुप गई. और रज़िया बीबी को इस वक्त जल्दी में इस बात का बिल्कुल पता ही ना चला.

रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे से बाहर आई.और उस ने अपने पुराने कपड़े धोने के लिए टोकरी में फैंक दिए.

अपनी अम्मी के कमरे से जाने के थोड़ी देर बाद ज़ाहिद अपने कमरे में आया. और अपने कपड़े चेंज कर के फिर किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर निकल गया.

उस रात ज़ाहिद देर गये अपने घर वापिस लौटा. तो उस वक्त तक उस शाज़िया और उस की अम्मी अपने कमरे में जा कर सो चुकी थी.

ज़ाहिद खामोशी से अपने कमरे में गया और जाते ही अपने बिस्तर में घुस गया.

दिन भर का थका होने के बावजूद ज़ाहिद को बिस्तर पर नीद नही आ रही थी. इसीलिए वो बिस्तर पर इधर उधर करवटें बदल रहा था.

थोड़ी देर बाद ज़ाहिद को पेशाब की हजत महसूस हुई. तो वो बिस्तर से उठ कर बाथरूम चला गया.

बाथरूम में जाते वक्त ज़ाहिद ने अपने बाथरूम का दरवाज़ा मुकम्मल बंद नही किया.

ज्यों ही ज़ाहिद कमोड पर बैठ कर पेशाब करने लगा.

तो उस की नज़र दरवाज़े के पीछे टॅंगी हुई अपनी अम्मी की शलवार पर गई.

“ये अम्मी की शलवार इधर क्यूँ और कैसे” ज़ाहिद के ज़हन में सवाल आया.

पेशाब से फारिग होने के कुछ देर बाद जब ज़ाहिद दुबारा अपने कमरे में आया. तो उस की नज़र अपने पलंग के नीचे पड़ी हुई किसी चीज़ पर पड़ी.

 
पेशाब से फारिग होने के कुछ देर बाद जब ज़ाहिद दुबारा अपने कमरे में आया. तो उस की नज़र अपने पलंग के नीचे पड़ी हुई किसी चीज़ पर पड़ी.

“ये मेरे पलंग के नीचे क्या पड़ा है” ज़ाहिद ने झुक कर फर्श से अपने बिस्तर की चादर को हटाया. और पलंग के नीचे पड़ी हुई उस चीज़ को देखने लगा.

ज़ाहिद ने जब देखा कि ये तो एक पैंटी है. तो इस पैंटी अपने पलंग के नीचे पड़ी देख कर उसे बहुत हैरत हुई.

“अगर अम्मी की शलवार बाथरूम के दरवाज़े पर लटकी हुई है,तो यक़ीनन ये पैंटी भी अम्मी की ही है”

ज़ाहिद के दिल में ख्याल आया और उस ने हाथ बढ़ा कर फर्श पर पड़ी अपनी अम्मी की पैंटी को अपने हाथ में उठा लिया.

रज़िया बीबी ने जिस वक्त अपनी पैंटी उतारी थी. उस वक्त तो पैंटी काफ़ी गीली थी.

मगर अब आधी रात के वक्त पैंटी काफ़ी हद तक सूख तो चुकी थी. मगर अब भी पैंटी पर गीले पन के असर देखे और महसूस किया जा सकते थे.

“लगता है अम्मी की चूत बहुत पानी छोड़ती रही है,इसी लिए ये इतनी मैली (डर्टी) है” अपनी अम्मी की पैंटी पर लगे हुए दाग देख कर ज़ाहिद को अंदाज़ा हो गया. कि उस की बहन शाज़िया की तरह उस की अम्मी की चूत भी बहुत ही प्यासी है. इसी वजह से उस की अम्मी रज़िया बीबी की पैंटी इतनी गंदी हालत में थी.

आज दिन के वक्त अपनी अम्मी से स्टोर में होने वाली बात चीत,मोटर साइकल पर अम्मी के मोटे मम्मो का ज़ाहिद की पीठ से टकराना,उस की अम्मी रज़िया बीबी का ज़ाहिद के मोटे लंड पर लगने वाला हाथ और फिर उस की अम्मी की मटकती हुई भारी गान्ड की ताल ने तो पहले ही ज़ाहिद के जिस्म में माजूद उस की जवानी की आग को भड़का दिया था.

मगर अब से पहले तक ज़ाहिद ने हर दफ़ा अपनी पैंट में खड़े हुए लंड को “मालमत” करते हुए ये समझा कर पुरसकून कर दिया था. कि जो भी हो आख़िर कर रज़िया बीबी उस की सग़ी अम्मी है.

ज़ाहिद की आज शाम तक ये ही सोच थी. कि अगर उस ने अपनी ही सग़ी बहन से अपने जिश्मानि ताल्लुक़ात कायम कर के एक गुनाह कर लिया है. तो ये लाज़मी नही कि वो ये ही गुनाह अब दुबारा अपनी सग़ी अम्मी के साथ भी दोहराए.

लेकिन अब अपनी अम्मी की इस्तेमाल शुदा पैंटी को अपने हाथ में थामते ही ज़ाहिद का लंड ज़ाहिद से बग़ावत करते हुए फिर से अकड़ कर उस की शलवार में पूरा अकड़ गया था.

अपनी बहन और बीवी शाज़िया की गरम फुद्दि से कुछ दिनो की महरूमी की वजह से ज़ाहिद के दिमाग़ पर तो पहले ही अपने लंड की मनमानी चढ़ि हुई थी.

इसीलिए आज अपनी अम्मी के अंडर गारमेंट को पहली बार अपने हाथ में ले कर ज़ाहिद के सबर का पैमाना लबरेज हो गया.

“ज़ाना तो ज़ाना है,और गुनाह तो गुनाह है,चाहे वो बहन के साथ हो या माँ के साथ”ज़ाहिद अपने दिमाग़ में आने वाली अपनी गंदी और घटिया सोच को जस्टिफाइ करते हुए अपने बिस्तर पर बैठा. और अपनी शलवार और कमीज़ उतार का बिल्कुल नंगा हो गया.

“पता नही मेरी अम्मी की फुद्दि केसी हो गी” अपनी अम्मी के अंडरवेार पर चूत वाली जगह पर अपनी नज़रें जमा कर ज़ाहिद के जेहन में ख्याल आया. और इस के साथ उस ने अपनी अम्मी की पैंटी को उस की चूत वाली जगह से चूम लिया.

ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की पैंटी को अपनी ज़ुबान से चूमने की खातिर अपने मुँह के नज़दीक किया.

तो रज़िया बीबी की इस्तेमाल शुदा पैंटी से उठने वाली बू (स्मेल) ज़ाहिद की नाक के रास्ते उस के नथुनो में घुस गई.

अपनी सग़ी अम्मी की चूत की महक को पैंटी पर से सूंघ कर ज़ाहिद तो जैसे पागल हो गया.और अपनी माँ की फुद्दि के नशे में टन हो कर ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की पैंटी को को दीवाना वार चूमना और चाट्ना शुरू कर दिया.

अपनी अम्मी की पैंटी को सूंघते सूंघते ज़ाहिद का लंड बुरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया था.

ज़ाहिद ने आज से पहले ना तो कभी अपनी अम्मी के मुतलक इस तरह सोचा था. और ना ही उस ने इस से पहले कभी अपनी अम्मी को बुरी नज़र से देखने की जुर्रत की थी.

लेकिन शाज़िया की चूत से दूरी ने ज़ाहिद की हालत एक ऐसे पागल कुत्ते जैसी कर दी थी. जो हादी (बोने) हासिल करने के लिए कुछ भी करने पर तूल सकता हो.

ज़ाहिद को अपनी बहन शाज़िया की चूत ने वो मज़ा और स्वाद दिया था.

जिसे किसी दूसरी औरत से हासिल करने का ज़ाहिद ने कभी तस्व्वुर भी नही किया था.

इसीलिए अपनी बहन से जहली शादी करने के बाद ज़ाहिद ने किसी और औरत की तरफ देखना तो दर किनार उस ने किसी दूसरी औरत के मुतलक सोचा तक ना था.

इस की वजह ये थी.कि शाज़िया ने ज़ाहिद की बहन से उस की बीवी बनने के बाद अपने भाई के लंड पर अपनी गरम फुद्दि का एक अजीब सा जादू चला दिया था.

शाज़िया ने अपनी प्रेग्नेन्सी से पहले तक अपने भाई ज़ाहिद को अपनी चूत दे दे कर इतना ज़्यादा पूर बाश कर देती थी.कि ज़ाहिद को किसी और की चूत की ख्वाहिश ही नही रहती थी.

मगर ना चाहने के बावजूद आज एक नई चूत के खून का ज़ायक़ा ज़ाहिद के मुँह और लंड को लग गया था.

और ये कोई आम और मामूली चूत नही थी.बल्कि ये तो वो चूत थी जिस चूत से निकल कर ज़ाहिद इस दुनिया में आया था.

ये चूत उस की अम्मी रज़िया बीबी की चूत थी. जिस की सिर्फ़ खूबू को ही सूंघ कर ज़ाहिद के होश उड़ गये थे.

और ज़ाहिद इस सोच से ही पागल होने लगा कि अगर उसे कभी अपनी अम्मी की फुद्दि चोदने को मिल गई तो फिर उस का क्या हाल हो गा.

इस के साथ ही ज़ाहिद ने बिस्तर पर लेटे लेटे अपनी अम्मी की पैंटी को अपने मुँह से हटा कर अपने लंड के उपर लपेटा.

और आँखे बंद कर के अपनी अम्मी के भारी चुतड़ों को याद करते हुए अपने लंड की मूठ लगाने लगा.

अपनी अम्मी की पैंटी को अपनी मोटी टोपी पर महसूस करते ही ज़ाहिद का लंड भी पूरा अकड़ कर सख़्त हो उठा था.

“ओह अम्म्मिईीईईईईईई जीिइईईईईईईईईईईईईईईई”अपने लंड पर अपनी अम्मी की पैंटी का एहसास आज ज़ाहिद को एक अलग ही मज़ा दे रहा था. और उस के मुँह से बार बार अपनी अम्मी का नाम ही निकलने लगा.

“ओह अमिीईईईईईई उउम्म्म्मममममममम अहह क्या ज़ालिम मम्मे है आप के, और क्या ग़ज़ब की गान्ड है आप की अम्म्मिईीईईईई,उफफफफफफफफफ्फ़ कब मेरा लंड को आप की चूत नसीब हो गी अमिीईईईईईईईईईईईईई” ज़ाहिद ज़ोर और जोश से आज पहली बार अपनी ही सग़ी अम्मी के नाम की मूठ लगाने में मसरूफ़ था.

ज़ाहिद अपनी अम्मी की छोटी सी पैंटी को अपने लंड की टोपी पर रख कर रगड़ने लगा.

और फिर कुछ ही देर इस तरह रगड़ते रगड़ते ज़ाहिद के मुँह से निकला “अम्म्मिईीईईईईईई” और ज़ाहिद के मोटे जवान लंड ने अपना गरम और सफेद वीर्य अपनी अम्मी की पैंटी पर उंड़ेल दिया.

आज काफ़ी दिन बाद अपने लंड की मूठ लगा कर जब ज़ाहिद के जिस्म की गर्मी की शिद्दत कुछ कम हुई. तो उस का जिस्म और लंड कुछ पुरसकून हो गया.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मुझे क्या होता जा रहा है,मैं आइन्दा कभी अपनी अम्मी के बारे में कोई घटिया सोच अपने जेहन में नही आने दूँगा””अपने लंड का पानी आज पहली बार अपनी ही अम्मी के नाम पर निकालने के बाद जब ज़ाहिद के जेहन से उस के वीर्य ने खुमार उतारा. तो उसे अपनी आज की इस हरकत पर अब शर्मिंदगी महसूस हुई.

मगर वो कहते हैं ना कि “अब क्या होत,जब चिड़िया चुग गई खैत”

इसीलिए अब जो होना था वो हो चुका था. और अपनी की गई आज की हरकत को ज़ाहिद चाहते हुए भी अब बदल नही सकता था.

फिर अपनी गंदी सोच पर अपने आप को कोसते हुए ज़ाहिद बाथरूम में गया और उधर जा कर अपने लंड को अच्छी तरह सॉफ किया. और वापिस अपने बिस्तर पर आ कर सोने के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं.

उधर दूसरे कमरे में अपने बिस्तर पर लेटी रज़िया बीबी की हालत भी आज अपने बेटे ज़ाहिद से कुछ मुक्तलफ नही थी.

अपने बिस्तर पर पड़ी रज़िया बीबी की आँखे तो ब ज़ाहिर सोने के लिए बंद ही थी. मगर वो अब अपनी बंद आँखों के साथ अपने बेटे के लंड को पहली बार छूने के मंज़र को याद कर कर के बुरी तरह गरम हुए जा रही थी.

रज़िया बीबी को अपने बेटे के जवान,सख़्त और बड़े लंड की गर्मी की तपिश अभी तक अपने हाथ पर महसूस हो रही थी. और इसी लिए अपने बेटे के लंड को याद कर कर के रज़िया बीबी की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

रज़िया बीबी अपनी तपती चूत की गर्मी को दूर तो करना चाहती थी. मगर अपनी बेटी शाज़िया की कमरे में मौजूदगी की वजह से वो अपने बेटे ज़ाहिद के बार अख़्श अपनी चूत से खेल कर अपनी गरम चूत को ठंडा करने से महरूम थी.

रज़िया बीबी ने एक आध बार कोशिश भी की कि वो कमरे की मध्यम रोशनी और अपने जिस्म पर ओडी हुई चादर का फ़ायदा उठा कर अपनी शलवार में अपना हाथ डाले. और अपनी पानी छोड़ती चूत को आहिस्ता आहिस्ता से सकून पहुँचा ले.

लेकिन अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से रज़िया बीबी में ये काम करने की हिम्मत नही हुई.और फिर करवट बदलते बदलते किस वक्त उस की आँख लग गई. इस का खुद रज़िया बीबी को भी पता ना चला.

दूसरी सुबह हुस्बे मामूल रज़िया बीबी अपनी बेटी शाज़िया से पहले उठ कर किचन में चली गई.

रज़िया बीबी का दिल चाह रहा था कि आज अपने बच्चो को अपने हाथों से आलू वाले परान्ठे बना कर खिलाए.

इसीलिए किचन में जाते ही उस ने अपने और अपने बच्चो के लिए सुबह का नाश्ता बनाने की तैयारी शुरू कर दी.

किचन में नाश्ते की तैयारी करते हुए भी रज़िया बीबी के दिमाग़ में एक हलचल मची हुई थी.

एक दिन गुज़र जाने के बावजूद जवान बेटे का बड़ा लंड रज़िया बीबी के होश-ओ-हवास पर छाया हुआ था.

इस दौरान आटे का पैरा बना कर रज़िया बीबी ने ज्यों ही परान्ठे को तवे पर डाला. तो उस के दिमाग़ में फिर से शाज़िया के फोन में देखी हुई अपने बेटे ज़ाहिद की नंगी तस्वीरे उभर आईं.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या मज़े दार लंड है मेरे बेटा का” अपने बेटे ज़ाहिद के लंड का तस्व्वुर जेहन में आते ही रज़िया बीबी की चूत मचल उठी.

रज़िया बीबी के दिमाग़ में इस वक्त बार बार अपने बेटे ज़ाहिद के लंड का ख्याल आ रहा था. और वो अपने बेटे के ख्यालों में गुम होते हुए एक मशीन की तरह साथ ही साथ परान्ठा भी बनाती जा रही थी.

अपने बेटे के नंगे लंड को याद करते हुए रज़िया बीबी को अपनी चूत में खुजली महसूस हुई. तो रज़िया बीबी ने अंजाने में अपनी शलवार के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूत के ऊपर खुजली शुरू कर दी.

“हाईईईईईईईईईई मेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है ज़ाहिद के मोटे लंड के लिए”अपनी चूत पर खुजली करते हुए रज़िया बीबी को अंदाज़ा हुआ कि उस की चूत तो अपने बेटे ज़ाहिद को याद करते करते पानी पानी हो रही है.

रज़िया बीबी की चूत आज इतना पानी छोड़ रही थी. कि उस की चूत के पानी से रज़िया बीबी के हाथ की उंगलियाँ भी भीग गईं.

इतनी देर में तवे पर पड़ा हुआ परान्ठा पक कर तैयार हो गया. तो रज़िया बीबी ने बेध्यानी में अपनी पानी छोड़ती चूत से अपना हाथ हटाया. और एक दम से तवे पर तैयार परान्ठे को उसी हाथ से उतार कर प्लेट में रख दिया.

जिस तरह एक सोलह साला जवान लड़की अपनी जवानी के पहले प्यार में पागल हो कर अपने होश ओ हवाश खो बैठती है.

बिल्कुल इसी तरह रज़िया बीबी आज अपने बेटे के ख्यालों में इतनी मगन थी.कि उसे ये अंदाज़ा ही ना हुआ. कि अपनी इस अचानक हरकत की वजह से वो अपनी चूत के पानी से भीगी हुई उंगलियों के ज़रिए अपनी ही चूत का रस अपने बेटे के लिए बनाए हुए परान्ठे पर भी लगा चुकी है.

इधर अपनी गरम सोचो में डुबी हुई रज़िया बीबी अपने काम में मसरूफ़ थी.

और उधर दूसरी तरफ ज़ाहिद भी सुबह सुबह उठ कर बाथरूम गया. और नहा धो कर अपनी नोकरी पर जाने के लिए तैयार होने लगा.

ज़ाहिद अपने कमरे से तैयार हो कर बाहर आया और किचन की तरफ चल पड़ा.

जहाँ उस की अम्मी उस के लिए नाश्ता बनाने में मसरूफ़ थी.

 
किचन के दरवाज़े के बाहर पहुँच कर ज़ाहिद की नज़र किचन में अपने काम करती हुई अपनी अम्मी पर पड़ी.

रज़िया बीबी की कमर इस वक्त अपने बेटे ज़ाहिद की तरफ थी. जिस वजह से ज़ाहिद ज्यों ही किचन के पास गया तो उस की नज़र सीधी अपनी अम्मी के भारी चुतड़ों पर पड़ी.

रज़िया बीबी ने किचन में अपने काम काज के दौरान दो तीन दफ़ा झुक कर सिंक के नीचे बने हुए हिस्से से आयिल की बॉटल उठाई थी.

इस तरह बार बार झुकने से रज़िया बीबी की कमीज़ पीछे से उस के भारी चुतड़ों में जा कर फँसी गई. जिस का रज़िया बीबी को ज़रा भी एहसास ना हुआ.

रज़िया बीबी की गान्ड में फँसी हुई कमीज़ की वजह से रज़िया बीबी की गान्ड की शेप इतनी वज़िया हो गई थी.के अपनी अम्मी की मोटी गान्ड का ये दिल कश नज़ारा देखते ही ज़ाहिद का दिल में इंडियन मूवी देवदास का ये गाना गूंजने लगा.

“डोला रे डोला रे डोला

अम्मी की गान्ड पे मेरा लंड डोला”

हालाकी रात अपनी अम्मी के नाम की मूठ लगाने के बाद ज़ाहिद ये सोच कर सोया था. कि वो अब कभी दुबारा अपनी अम्मी के मुतलक कोई गंदी बात अपने दिमाग़ में नही ले गा.

मगर अब अपनी अम्मी की भारी गान्ड को देखते ही ज़ाहिद का ईमान दुबारा से डोलने लगा.

जिस वजह से उस का मोटा बड़ा लंड फिर से उस की पॅंट में अपना सर उठाने लगा था.

“काश मैं अपनी अम्मी की इस भारी गान्ड की इन उभरी हुई पहाड़ियों में अपने लंड को डाल सकता”अपनी अम्मी की बड़ी गान्ड को देखते हुए ज़ाहिद के दिल और लंड में दुबारा से एक अजीब सी हलचल मचने लगी. और ज़ाहिद का लंड उस की पॅंट में फनफनाने लगा था.

अब जैसे जैसे रज़िया बीबी किचन में काम के दौरान मूव करती इधर उधर होती. पीछे से उस की गान्ड की मोटी पहाड़ियाँ भी उसी तरह थल थल करती हुई उपर उछल हो रही थी.

अपनी अम्मी की मटकती गान्ड को देख देख कर ज़ाहिद का लंड और सख़्त होने लगा. तो ज़ाहिद ने किचन के बाहर ही खड़े हो कर अपनी अम्मी की गान्ड को देखते हुए अपने लंड को अपनी पॅंट के ऊपर से ही आहिस्ता आहिस्ता मसलना शुरू कर दिया.

ज़ाहिद कुछ देर तो किचन के बाहर खड़ा हो कर अपनी अम्मी के कसे हुए भारी जिस्म को अपनी आँखों से ही चोदता रहा.

फिर जब ज़ाहिद से अपनी अम्मी के जिस्म से दूरी मज़ीद बर्दास्त ना हुई. तो ज़ाहिद आहिस्ता आहिस्ता चलता हुआ किचन में एंटर हुआ. और बगैर कोई आवाज़ किए किचन में आ कर अपनी अम्मी के बिल्कुल पीछे खड़ा हो गया.

रज़िया बीबी आज किचन में इतनी मसरूफ़ थी. कि उसे पता ही ना चला कि उस का बेटा ज़ाहिद उस के पीछे आ कर खड़ा हो चुका है.

“इस से पहले के ज़ाहिद आ जाए मुझे जल्दी से उस के लिए नाश्ता टेबल पर लगा देना चाहिए”ये बात अपने जहाँ में सोचते हुए रज़िया बीबी एक दम से अपने पीछे पड़े हुए टेबल की तरफ मूड गई.

इस तरह एक अचानक और एक दम से मुड़ने की वजह से रज़िया बीबी अपने बिल्कुल पीछे खड़े हुए अपने बेटे ज़ाहिद के जिस्म के साथ टकरा गई.

रज़िया बीबी चूँकि इस बात की तवक्को नही कर रही थी. इसीलिए ज़ाहिद के साथ टकराती ही वो अपना तवज्जो खो बैठी और एक दम से पीछे सिंक की तरफ गिरने लगी.

ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी को यूँ पीछे की तरफ गिरते देखा.तो उस ने फॉरन अपनी अम्मी को सहारा देने के लिए अपना हाथ बढ़ाया. और अपनी अम्मी की मोटी कमर के गिर्द अपने हाथ को लपेट कर अपनी तरफ खैंचा.

ज़ाहिद के हाथ का सहारा मिलते ही रज़िया बीबी का पीछे की तरफ गिरता वजूद एक दम से ऊपर की तरफ उठा. तो इस दफ़ा ना सिर्फ़ दोनो माँ बेटा की छाती एक दूसरे की छाती में पेवस्त होती चली गई.

बल्कि नीचे से भी ज़ाहिद की पॅंट में खड़ा हुआ उस का लंड अपनी अम्मी की शलवार में माजूद रज़िया बीबी की गरम और प्यासी चूत से रगड़ खा गया.

“आज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज अपनी माँ को अपनी इन मज़बूत बाहों में जकड कर मार ही डालो मुझे यययययययययययी बएटााआआआआआआआ” अपने बेटे की सख़्त और जवान छाती से चिपकते ही रज़िया बीबी के दिल में ये ख्वाहिश उमड़ी.

“हाईईईईईईईईईईई आप ने बचपन में मुझे अपने इन मोटे मम्मों का दूध पिला कर मुझे जवान तो कर दिया है ,अब आप कब अपने इस जवान बेटे को अपने इन मम्मो से दुबारा अपना दूध पीने का मोका दोगी अम्मिईीईईईईईईई” अपनी अम्मी की भारी और गुदाज छातियों को यूँ अपनी सख़्त छाती से टकराते हुए महसूस कर के ज़ाहिद के दिल में भी ख्याल आया.

दोनो माँ बेटे के प्यासे वजूद ज्यों ही अचानक आपस में इस तरह टकराई. तो ज़ाहिद और रज़िया बीबी दोनो को ना सिर्फ़ एक दूसरे के जिस्मो में लगी हुई आग का अंदाज़ा हुआ.

बल्कि ज़ाहिद और रज़िया बीबी ने एक दूसरे की बिखरी हुई सांसो को भी अच्छी तरह से सुन लिया था.

 
“इस से पहले कि में अपने जवान बेटे के जिस्म की गर्मी से पिघल कर बहक जाऊं, मुझे अपने बेटे की बाहों से निकल जाना चाहिए” रज़िया बीबी के दिमाग़ में ख्याल आया. और उस ने अपने आप को संभालने हुए अपने वजूद को अपने बेटे की बाहों से आज़ादी दिला दी.

“तुम कब आई,मुझे तो पता ही नही चला बेटा” रज़िया बीबी ने ज़ाहिद की बाहों से निकलते ही पूछा.

“में तो अभी अभी ही किचन में आप को ये बताने आया हूँ, कि मुझे ज़रा जल्दी जाना है, इसीलिए आप आज मेरे लिए नाश्ता मत बनाना अम्मी” ज़ाहिद ने जवाब दिया और साथ ही जल्दी से मूड कर किचन से बाहर निकलने लगा.

“कहाँ जा रहे हो तुम,नाश्ता तैयार है ज़रा ठहरो मैं अभी देती हो बेटा” ज्यों ही “देने" वाली ये ज़ू महनी बात रज़िया बीबी के मुँह से निकली. तो रज़िया बीबी को फॉरन ही अपनी ग़लती का एहसास हुआ.इसीलिए शरम के मारे रज़िया बीबी ने अपना मुँह फॉरन किचन की शेल्फ की तरफ मोड़ लिया.

“अम्मी आप इतने प्यार से दो गी तो कौन कम बख़्त इनकार करे गा, वैसे जितने प्यार से आप देती हैं, उतने प्यार से शाज़िया कभी नही देती अम्मी” अपनी अम्मी के मुँह से इस तरह की बात सुन कर ज़ाहिद का लंड मज़ीद उठने लगा.

और उस ने भी जान बूझ कर ज़ू महनी अंदाज़ में ही अपनी अम्मी को जवाब दिया. और जल्दी से नाश्ते के टेबल पर बैठ गया. कि कहीं उस की अम्मी का ध्यान उस की पॅंट में खड़े हुए उस के लंड पर ना पर जाए.

“हां बेटा शाज़िया चाहे भी तो मेरा मुकाबला नही कर सकती,क्यों कि आख़िर में माँ हूँ तुम्हारी और वो मेरी बेटी,और बेटी कब अपनी माँ का मुकाबला कर सकती है भला”एक बार अंजाने में एक ज़ू महनी लफ़्ज अपने मुँह से निकालने के बाद रज़िया बीबी को शरम तो आई थी. मगर अपने बेटे ज़ाहिद के मुँह से भी इसी तरह का जवाब पा कर अब शायद रज़िया बीबी का होसला बढ़ गया था. इसीलिए वो अब ज़ाहिद से इस तरह की बात चीत में शरम कुछ कम महसूस करने लगी थी.

रज़िया बीबी ने ज़ाहिद के लिए बनाया हुआ परान्ठा और चाय का एक कप ला कर अपने बेटे के सामने टेबल पर रखा और बोली “आज मेने बड़े प्यार से अपने बेटे के लिए आलू का परान्ठा बनाया है”

आलू का परान्ठा देख कर ज़ाहिद की भूक भड़क उठी. और उस ने तेज़ी से परान्ठे का एक नीवाला तोड़ का अपने मुँह में डाला.

“लगता है आज आप ने नमक थोड़ा सा ज़्यादा ही डाल दिया है आटे में अम्मी” ज़ाहिद ने ज्यों ही परान्ठे का टुकड़ा अपने मुँह में डाला. तो उसे परान्ठे का ज़ायक़ा कुछ नमकीन सा महसूस हुआ.

“नही मेने नमक ज़्यादा तो नही डाला,वैसी अगर परान्ठा मज़े दार नही तो मत खाओ बेटा”अपने बेटे की बात सुन कर रज़िया बीबी ने जवाब दिया.मगर इस के साथ ही रज़िया बीबी सोचने लगी कि ज़ाहिद ये क्यों कह रहा है कि परान्ठे में आज नमक थोड़ा ज़्यादा है.

“उफफफफफफफफफ्फ़ परान्ठा बनाते वक्त मेने अपनी पानी छोड़ती चूत में उंगलियाँ डाली थी और फिर बे ध्यानी में उन्ही उंगलियों से परान्ठा तवे से भी उतरा था, लगता है कि इस दौरान मेरी उंगलियों पर लगा हुआ मेरी चूत का पानी ज़ाहिद के परान्ठे पर भी लग गया था,और अब मेरा बेटा परान्ठे के साथ साथ परान्ठे पर लगा हुआ मेरी चूत के पानी का ज़ायक़ा भी चख लिया आज ” ये बात सोचते ही रज़िया बीबी की फुद्दि में फिर से नमी आने लगी.

“अम्मी लगता है आज आप ने कुछ स्पेशल किसम का मक्खन लगाया है इस परान्ठे पर,तभी तो परान्ठा इतना मज़े दार बना है आज” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी को जवाब दिया.और मज़े ले ले कर अपनी अम्मी की चूत के रस से भरपूर परान्ठे को खाने लगा.

“उूुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” अपने बेटे ज़ाहिद को अपनी चूत के पानी से लबरेज परान्ठे को यूँ मज़े ले कर खाते देख कर रज़िया बीबी काँप ही उठी. और उस की चूत से बहता पानी उस के दोनो होंठो पर से बैठा हुआ नीचे को जाने लगा.

ज़ाहिद ने जल्दी से नाश्ता मुकम्मल किया और अपनी बहन के जागने से पहले ही पोलीस स्टेशन की तरफ रवाना हो गया.

ज़ाहिद के जाते ही रज़िया बीबी ने अपनी गरम फुद्दि पर हाथ फेरते हुए उसे तसल्ली दी. और फिर अपना ध्यान अपने बेटे के मोटे लंड से हटाने की खातिर रज़िया बीबी ने अपने आप को घर के काम काज में मसरूफ़ कर लिया.

 
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