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उधर ज़ाहिद भी जब अपने पोलीस स्टेशन पहुँचा. तो उस वक्त तक भी उस का लंड “अम्मी अम्मी” पुकारता हुआ उसे बेचैन किए जा रहा था.
इसीलिए ज़ाहिद ने भी अपनी अम्मी की फुद्दि का ख्याल अपने जहाँ से निकालने के लिए पोलीस स्टेशन आते ही अपने आप को बिजी कर लिया.
उस रात जब ज़ाहिद अपने घर वापिस लोटा तो उस की नज़र टीवी लाउन्ज में बैठी हुई अपनी अम्मी पर पड़ी.
जो उस वक्त टीवी लाउन्ज के स्टूल पर इस हालत में बैठी थी. कि रज़िया बीबी ने उस वक्त अपने भारी सीने पर कोई दुपट्टा नही लिया हुआ था.
जिस वजह से रज़िया बीबी की तंग और कसी हुई कमीज़ में से उस के मोटे मोटे तरबूज़ नुमा मम्मे ज़ाहिद की आँखों को एक दिल कश नज़ारा दे रहे थे.
जब के छोटे से स्टूल पर बैठने से रज़िया बीबी के भारी और बड़े चूतड़ पीछे को लटक रहे थे.
“आ गये बेटा” ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे को घर में आते देखा तो उस ने मुस्करा कर अपने बेटे से पूछा.
रज़िया बीबी अपने जवान बेटे को देख कर ऐसे मुस्कुराइ जैसे कोई जवान माशूका अपने आशिक़ की आमद पर उस का इस्तिकबाल करते हुए अपने महबूब पर अपनी मुस्कुराहट के फूल न्योछावर करती है.
“जी अम्मी ”ज़ाहिद ने अपने बूट उतारते हुए बुलंद आवाज़ में अम्मी को जवाब दिया.
“आ गया हूँ आप के इन मोटे मम्मो और इस बड़ी गान्ड को अपनी आँखों से सेकने अम्मी” साथ ही साथ ज़ाहिद ने अपने दिल में ये बात कही.
अपनी अम्मी के भारी जिस्म को देखते ही ज़ाहिद के जिस्म में लगी हुई जवानी की आग फिर से भड़कने लगी. और उस की पॅंट में माजूद उस का लंड अपनी अम्मी की फुद्दि के लिए फिर से टाइट होने लगा था.
“शाज़िया जल्दी से खाना लगा दो बेटा,तुम्हारा भाई आ गया है” रज़िया बीबी ने किचन में काम करती शाज़िया को आवाज़ दी.
और खुद स्टूल से उठ कर टीवी लाउन्ज के फर्श पर लेट गई.
रज़िया बीबी के फर्श पर एक साइड करवट ले कर लेटने से उस के भारी और गुदाज मम्मे उस के ढीले ब्रेज़ियर में से लटक कर ज़मीन से टच होने लगे.
“आप फर्श पर क्यों लेट गई हैं अम्मी” ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी को यूँ फर्श पर लेटते देखा. तो हैरान होते हुए उस ने अम्मी से पूछा.
“बेटा पता नही क्यों आज मेरा सारा जिस्म दर्द कर रहा है,और इस तरह फर्श पर लेटने से मुझे थोड़ा आराम मिलता है” रज़िया बीबी ने अपने बेटे को जवाब दिया.
रज़िया बीबी ज्यों ही फर्श पर लेटी. तो एक दम उसे यूँ लगा कि जैसे फर्श पर लेटते ही किसी कीड़े ने उस की गान्ड पर काट लिया हो. जिस की वजह से रज़िया बीबी को अपनी गान्ड पर एक दम से खुजली महसूस होने लगी.
ये खुजली इतनी अचानक और शदीद थी. कि रज़िया बीबी को अपने बेटे ज़ाहिद की कमरे में मौजूदगी का एहसास ही ना रहा.
रज़िया बीबी एक दम से अपना एक हाथ अपने पीछे ले गई. और वो बे ध्यानी में अपने हाथ से अपनी चूत और गान्ड के सुराख के दरमियाँ वाली जगह पर खुजाने लगी.
रज़िया बीबी ने इस तरह अचानक अपनी गान्ड को खुजाने के दौरान ना सिर्फ़ अपनी टाँगे एक दम से हवा में उठा कर खोल दीं.
ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपनी टाँगे खोलीं. तो शलवार पहने होने के बावजूद ज़ाहिद को अपनी अम्मी की मोटी फुददी की मामूली से शेप नज़र आ ही गई.
अपनी अम्मी की फुद्दि के भारी होंठो की ये झलक देखते ही ज़ाहिद की तो साँस ही उस के गले में अटक गई.
इस दौरान कमरे में लगे पंखे की तेज हवा से रज़िया बीबी की कमीज़ भी उस के पेट से उठ गई.
जिस वजह से रज़िया बीबी का आधा पेट भी ज़ाहिद की नज़रों के सामने नंगा हो गया.
“उफफफफफफफ्फ़ अगर आप चाहें तो मैं अपनी ज़ुबान और लंड से आप की गान्ड और चूत की खारिश मिटा सकता हूँ अम्म्मिईिइ” अपनी अम्मी को अपनी गान्ड की खुजली करता देख कर ज़ाहिद मचल उठा.और उस ने एक सिसकी भरते हुए अपने दिल ही दिल में सोचा.
आज अपनी अम्मी को यूँ अपनी टाँगें खोल कर अपनी चूत और गान्ड की दरमियानी जगह पर खुजली करते हुए देखना ज़ाहिद के लिए वाकई ही काबले दीद मंज़र था.
ज़ाहिद ने आज तक अपनी अम्मी के जिस्म का कोई हिस्सा कभी नंगा नही देखा था.
इसीलिए ज्यों ही हवा की वजह से उस की अम्मी का पेट नंगा हुआ. तो ज़ाहिद को पहली बार अपनी अम्मी के बड़े और मोटे पेट को अपनी आँखों से देखने का सुनहरी मोका देस्तियाब हो गया.
आज ज़ाहिद अपनी खुली आँखों से अपनी अम्मी का वो मोटा पेट देख रहा था.जिस पेट में पूरे 9 महीने रह कर ज़ाहिद ने इस दुनिया में जनम लिया था.
अपनी अम्मी के नंगे पेट को पहली बार आधा नंगा देख कर ज़ाहिद के तो होश ही उड़ गये थे.
इसीलिए ज़ाहिद ने भी अपनी अम्मी की फुद्दि का ख्याल अपने जहाँ से निकालने के लिए पोलीस स्टेशन आते ही अपने आप को बिजी कर लिया.
उस रात जब ज़ाहिद अपने घर वापिस लोटा तो उस की नज़र टीवी लाउन्ज में बैठी हुई अपनी अम्मी पर पड़ी.
जो उस वक्त टीवी लाउन्ज के स्टूल पर इस हालत में बैठी थी. कि रज़िया बीबी ने उस वक्त अपने भारी सीने पर कोई दुपट्टा नही लिया हुआ था.
जिस वजह से रज़िया बीबी की तंग और कसी हुई कमीज़ में से उस के मोटे मोटे तरबूज़ नुमा मम्मे ज़ाहिद की आँखों को एक दिल कश नज़ारा दे रहे थे.
जब के छोटे से स्टूल पर बैठने से रज़िया बीबी के भारी और बड़े चूतड़ पीछे को लटक रहे थे.
“आ गये बेटा” ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे को घर में आते देखा तो उस ने मुस्करा कर अपने बेटे से पूछा.
रज़िया बीबी अपने जवान बेटे को देख कर ऐसे मुस्कुराइ जैसे कोई जवान माशूका अपने आशिक़ की आमद पर उस का इस्तिकबाल करते हुए अपने महबूब पर अपनी मुस्कुराहट के फूल न्योछावर करती है.
“जी अम्मी ”ज़ाहिद ने अपने बूट उतारते हुए बुलंद आवाज़ में अम्मी को जवाब दिया.
“आ गया हूँ आप के इन मोटे मम्मो और इस बड़ी गान्ड को अपनी आँखों से सेकने अम्मी” साथ ही साथ ज़ाहिद ने अपने दिल में ये बात कही.
अपनी अम्मी के भारी जिस्म को देखते ही ज़ाहिद के जिस्म में लगी हुई जवानी की आग फिर से भड़कने लगी. और उस की पॅंट में माजूद उस का लंड अपनी अम्मी की फुद्दि के लिए फिर से टाइट होने लगा था.
“शाज़िया जल्दी से खाना लगा दो बेटा,तुम्हारा भाई आ गया है” रज़िया बीबी ने किचन में काम करती शाज़िया को आवाज़ दी.
और खुद स्टूल से उठ कर टीवी लाउन्ज के फर्श पर लेट गई.
रज़िया बीबी के फर्श पर एक साइड करवट ले कर लेटने से उस के भारी और गुदाज मम्मे उस के ढीले ब्रेज़ियर में से लटक कर ज़मीन से टच होने लगे.
“आप फर्श पर क्यों लेट गई हैं अम्मी” ज़ाहिद ने जब अपनी अम्मी को यूँ फर्श पर लेटते देखा. तो हैरान होते हुए उस ने अम्मी से पूछा.
“बेटा पता नही क्यों आज मेरा सारा जिस्म दर्द कर रहा है,और इस तरह फर्श पर लेटने से मुझे थोड़ा आराम मिलता है” रज़िया बीबी ने अपने बेटे को जवाब दिया.
रज़िया बीबी ज्यों ही फर्श पर लेटी. तो एक दम उसे यूँ लगा कि जैसे फर्श पर लेटते ही किसी कीड़े ने उस की गान्ड पर काट लिया हो. जिस की वजह से रज़िया बीबी को अपनी गान्ड पर एक दम से खुजली महसूस होने लगी.
ये खुजली इतनी अचानक और शदीद थी. कि रज़िया बीबी को अपने बेटे ज़ाहिद की कमरे में मौजूदगी का एहसास ही ना रहा.
रज़िया बीबी एक दम से अपना एक हाथ अपने पीछे ले गई. और वो बे ध्यानी में अपने हाथ से अपनी चूत और गान्ड के सुराख के दरमियाँ वाली जगह पर खुजाने लगी.
रज़िया बीबी ने इस तरह अचानक अपनी गान्ड को खुजाने के दौरान ना सिर्फ़ अपनी टाँगे एक दम से हवा में उठा कर खोल दीं.
ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपनी टाँगे खोलीं. तो शलवार पहने होने के बावजूद ज़ाहिद को अपनी अम्मी की मोटी फुददी की मामूली से शेप नज़र आ ही गई.
अपनी अम्मी की फुद्दि के भारी होंठो की ये झलक देखते ही ज़ाहिद की तो साँस ही उस के गले में अटक गई.
इस दौरान कमरे में लगे पंखे की तेज हवा से रज़िया बीबी की कमीज़ भी उस के पेट से उठ गई.
जिस वजह से रज़िया बीबी का आधा पेट भी ज़ाहिद की नज़रों के सामने नंगा हो गया.
“उफफफफफफफ्फ़ अगर आप चाहें तो मैं अपनी ज़ुबान और लंड से आप की गान्ड और चूत की खारिश मिटा सकता हूँ अम्म्मिईिइ” अपनी अम्मी को अपनी गान्ड की खुजली करता देख कर ज़ाहिद मचल उठा.और उस ने एक सिसकी भरते हुए अपने दिल ही दिल में सोचा.
आज अपनी अम्मी को यूँ अपनी टाँगें खोल कर अपनी चूत और गान्ड की दरमियानी जगह पर खुजली करते हुए देखना ज़ाहिद के लिए वाकई ही काबले दीद मंज़र था.
ज़ाहिद ने आज तक अपनी अम्मी के जिस्म का कोई हिस्सा कभी नंगा नही देखा था.
इसीलिए ज्यों ही हवा की वजह से उस की अम्मी का पेट नंगा हुआ. तो ज़ाहिद को पहली बार अपनी अम्मी के बड़े और मोटे पेट को अपनी आँखों से देखने का सुनहरी मोका देस्तियाब हो गया.
आज ज़ाहिद अपनी खुली आँखों से अपनी अम्मी का वो मोटा पेट देख रहा था.जिस पेट में पूरे 9 महीने रह कर ज़ाहिद ने इस दुनिया में जनम लिया था.
अपनी अम्मी के नंगे पेट को पहली बार आधा नंगा देख कर ज़ाहिद के तो होश ही उड़ गये थे.