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रज़िया बीबी की आँख ने ज्यों ही बाथरूम के अंदर का मंज़र देखा.तो बाथरूम का का नज़ारा देख कर रज़िया बीबी की साँसें उस के गले में अटकने लगीं.
रज़िया बीबी की सांस उस के गले में अटकने की वजह से रज़िया बीबी की भारी छातियाँ भी उस की बिखरी सांसो के साथ ताल से ताल मिलाते हुए उपर नीचे होने लगी.
रज़िया बीबी ने देखा कि बाथरूम में उस का बेटा ज़ाहिद उस वक्त अपने लंड पर साबुन (सोप) लगा कर नहाते वक्त साथ ही साथ अपने लंड से भी खेल रहा था.
ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद को नहाने के दौरान यूँ अपने मोटे और बड़े लंड से खेलते देखा.
तो अपनी उपर नीचे होने वाली सांसो के साथ रज़िया बीबी भी दरवाज़े के बाहर खड़े हो कर अपनी शलवार के उपर से ही अपनी फुद्दि पर अपना हाथ फेरने लगी.
“काश मेरा बेटा मुझे भी एक दिन अपने लंड से यूँ खेलने का मोका दे” अपने बेटे ज़ाहिद के लंड को हसरत भरी निगाहों से देखते हुए रज़िया बीबी का दिल कर रहा था. कि वो अपना हाथ बढ़ा कर अपने बेटे के तगड़े लंड को अपने काबू में कर ले.
मगर रज़िया बीबी जानती थी कि ये उस की एक ऐसी ख्वाहिश है. जो शायद कभी पूरी ना हो सकेगी.
इसीलिए अपनी तमन्नाओ को अपने दिल में ही मार कर रज़िया बीबी खामोशी से अपने बेटे को अपना लंड रगड़ता देखती रही. और साथ साथ अपनी फुद्दि को भी अपने हाथ से छेड़ती रही.
उधर उस दिन ज़ाहिद को चूँकि आज एक केस के सिलसिले में कोर्ट में हाज़िरी देनी थी. इसीलिए उस के पास सुबह सुबह अपने लंड की मूठ लगाने का भी टाइम नही था.
इसीलिए ज़ाहिद ने जल्दी से अपना शवर बंद किया. और अपने जिस्म को तोलिये से सॉफ करने लगा.
अपने जिस्म को खुश्क कर के ज्यों ही ज़ाहिद ने अपने जींस के गिर्द अपनी कमर पर टवल लपेटा.तो रज़िया बीबी समझ गई कि अब ज़ाहिद किसी भी वक्त बाथरूम से बाहर निकल सकता है.
इसीलिए रज़िया बीबी जल्दी से पलटी और कमरे के बाहर निकलने लगी. मगर इस जल्दी के दौरान रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे का दरवाजा खुला छोड़ गई.
ज्यों ही रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे से बाहर आई.तो उसे अपने पीछे अपने बेटे ज़ाहिद के बाथ रूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ सुनाई दी.
“कहीं ज़ाहिद ने मेरी चोरी पकड़ ना ली हो” रज़िया बीबी के ज़हन में ना जाने क्यों ये डर बैठ गया. और इसी डर के मारे उसे पता नही किया सूझा कि रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे के सामने बने हुए एक छोटे से कमरे नुमा स्टोर में जा घुसी.
स्टोर में जाते ही रज़िया बीबी की नज़र सामने बनी हुई कपड़ों की अलमारी पर पड़ी. इस अलमारी में कपड़े गुंजाइश से ज़्यादा होने की वजह से अलमारी का दरवाजा ठीक से बंद नही हुआ था.
रज़िया बीबी को जल्दी में कुछ और ना सूझा तो वो कपड़े की अलमारी के खुले हुए दरवाज़े को ज़ोर से बंद करने लगी.
इधर बाथरूम से बाहर निकलते ही ज़ाहिद ने देखा कि उस के कमरे का दरवाजा खुला हुआ है.
“ये मेरे कमरे का दरवाजा किस ने खोल दिया है.”अपने कमरे के खुले दरवाज़े को देख कर ज़ाहिद ने सोचा.
इस के साथ ही ज़ाहिद की नज़र अपने बिस्तर के साइड टेबल पर पड़े हुए “चाय” के कप पर पड़ी.
“ओह्ह्ह्ह अच्छा लगता है कि अम्मी या शाज़िया चाय का कप रखने के बाद दरवाजा खुला छोड़ गईं हैं” साइड टेबल पर रखे हुए कप को देखते ही ज़ाहिद ने दुबारा सोचा.
इस के साथ ही ज़ाहिद अपनी अलमारी की तरफ गया.और अलमारी में से अपनी एक पॅंट निकाल कर पहन ली.
अपनी पॅंट पहन कर ज़ाहिद ने टेबल पर पड़ा हुआ चाय का कप अपने हाथ में उठाया.तो उस की नज़र अपने कमरे के खुले दरवाज़े से सामने के कमरे में जा कर अपनी अम्मी रज़िया बीबी पर पड़ी.
जो उस वक्त कपड़ों वाली अलमारी के सामने खड़ी हो कर उस अलमारी को बंद करने की कॉसिश कर रही थी.
अलमारी को बंद करने के दोरान रज़िया बीबी का मुँह तो अलमारी की तरफ था. जब कि उस की पीठ अपने बेटे ज़ाहिद की तरफ थी.
स्टोर की अलमारी को बंद करने की गर्ज से रज़िया बीबी को चूँकि अलमारी के दरवाज़े पर अपना पूरा ज़ोर लगाना पड़ रहा था.
इस अमल के दौरान रज़िया बीबी आगे को झुकी हुई थी, जिस वजह से रज़िया बीबी की मोटी और भारी गान्ड पीछे से उपर की तरफ उठ गई थी.
रज़िया बीबी की सांस उस के गले में अटकने की वजह से रज़िया बीबी की भारी छातियाँ भी उस की बिखरी सांसो के साथ ताल से ताल मिलाते हुए उपर नीचे होने लगी.
रज़िया बीबी ने देखा कि बाथरूम में उस का बेटा ज़ाहिद उस वक्त अपने लंड पर साबुन (सोप) लगा कर नहाते वक्त साथ ही साथ अपने लंड से भी खेल रहा था.
ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद को नहाने के दौरान यूँ अपने मोटे और बड़े लंड से खेलते देखा.
तो अपनी उपर नीचे होने वाली सांसो के साथ रज़िया बीबी भी दरवाज़े के बाहर खड़े हो कर अपनी शलवार के उपर से ही अपनी फुद्दि पर अपना हाथ फेरने लगी.
“काश मेरा बेटा मुझे भी एक दिन अपने लंड से यूँ खेलने का मोका दे” अपने बेटे ज़ाहिद के लंड को हसरत भरी निगाहों से देखते हुए रज़िया बीबी का दिल कर रहा था. कि वो अपना हाथ बढ़ा कर अपने बेटे के तगड़े लंड को अपने काबू में कर ले.
मगर रज़िया बीबी जानती थी कि ये उस की एक ऐसी ख्वाहिश है. जो शायद कभी पूरी ना हो सकेगी.
इसीलिए अपनी तमन्नाओ को अपने दिल में ही मार कर रज़िया बीबी खामोशी से अपने बेटे को अपना लंड रगड़ता देखती रही. और साथ साथ अपनी फुद्दि को भी अपने हाथ से छेड़ती रही.
उधर उस दिन ज़ाहिद को चूँकि आज एक केस के सिलसिले में कोर्ट में हाज़िरी देनी थी. इसीलिए उस के पास सुबह सुबह अपने लंड की मूठ लगाने का भी टाइम नही था.
इसीलिए ज़ाहिद ने जल्दी से अपना शवर बंद किया. और अपने जिस्म को तोलिये से सॉफ करने लगा.
अपने जिस्म को खुश्क कर के ज्यों ही ज़ाहिद ने अपने जींस के गिर्द अपनी कमर पर टवल लपेटा.तो रज़िया बीबी समझ गई कि अब ज़ाहिद किसी भी वक्त बाथरूम से बाहर निकल सकता है.
इसीलिए रज़िया बीबी जल्दी से पलटी और कमरे के बाहर निकलने लगी. मगर इस जल्दी के दौरान रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे का दरवाजा खुला छोड़ गई.
ज्यों ही रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे से बाहर आई.तो उसे अपने पीछे अपने बेटे ज़ाहिद के बाथ रूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ सुनाई दी.
“कहीं ज़ाहिद ने मेरी चोरी पकड़ ना ली हो” रज़िया बीबी के ज़हन में ना जाने क्यों ये डर बैठ गया. और इसी डर के मारे उसे पता नही किया सूझा कि रज़िया बीबी ज़ाहिद के कमरे के सामने बने हुए एक छोटे से कमरे नुमा स्टोर में जा घुसी.
स्टोर में जाते ही रज़िया बीबी की नज़र सामने बनी हुई कपड़ों की अलमारी पर पड़ी. इस अलमारी में कपड़े गुंजाइश से ज़्यादा होने की वजह से अलमारी का दरवाजा ठीक से बंद नही हुआ था.
रज़िया बीबी को जल्दी में कुछ और ना सूझा तो वो कपड़े की अलमारी के खुले हुए दरवाज़े को ज़ोर से बंद करने लगी.
इधर बाथरूम से बाहर निकलते ही ज़ाहिद ने देखा कि उस के कमरे का दरवाजा खुला हुआ है.
“ये मेरे कमरे का दरवाजा किस ने खोल दिया है.”अपने कमरे के खुले दरवाज़े को देख कर ज़ाहिद ने सोचा.
इस के साथ ही ज़ाहिद की नज़र अपने बिस्तर के साइड टेबल पर पड़े हुए “चाय” के कप पर पड़ी.
“ओह्ह्ह्ह अच्छा लगता है कि अम्मी या शाज़िया चाय का कप रखने के बाद दरवाजा खुला छोड़ गईं हैं” साइड टेबल पर रखे हुए कप को देखते ही ज़ाहिद ने दुबारा सोचा.
इस के साथ ही ज़ाहिद अपनी अलमारी की तरफ गया.और अलमारी में से अपनी एक पॅंट निकाल कर पहन ली.
अपनी पॅंट पहन कर ज़ाहिद ने टेबल पर पड़ा हुआ चाय का कप अपने हाथ में उठाया.तो उस की नज़र अपने कमरे के खुले दरवाज़े से सामने के कमरे में जा कर अपनी अम्मी रज़िया बीबी पर पड़ी.
जो उस वक्त कपड़ों वाली अलमारी के सामने खड़ी हो कर उस अलमारी को बंद करने की कॉसिश कर रही थी.
अलमारी को बंद करने के दोरान रज़िया बीबी का मुँह तो अलमारी की तरफ था. जब कि उस की पीठ अपने बेटे ज़ाहिद की तरफ थी.
स्टोर की अलमारी को बंद करने की गर्ज से रज़िया बीबी को चूँकि अलमारी के दरवाज़े पर अपना पूरा ज़ोर लगाना पड़ रहा था.
इस अमल के दौरान रज़िया बीबी आगे को झुकी हुई थी, जिस वजह से रज़िया बीबी की मोटी और भारी गान्ड पीछे से उपर की तरफ उठ गई थी.