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वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास ) complete

रज़िया बीबी के जिस्म में एक करंट से दौड़ गया. जिस वजह से ना सिर्फ़ रज़िया बीबी का जिस्म थोड़ा सा कांप गया. बल्कि साथ ही साथ रज़िया बीबी का चेहरा भी शरम से लाल होने लगा.

शाज़िया ने अपनी अम्मी के जिस्म की हालत और उन के चेहरे का बदलता हुआ रंग देख लिया था.

“मुझे चाहिए कि में अम्मी को मोका दूं, ता कि अम्मी तेन्हाई में अपने बेटे ज़ाहिद के हाथों सेलेक्ट किए गये अंडर गारमेंट्स को अच्छी तरह देख कर इस लम्हे को एंजाय कर सके” ये बात सोच कर शाज़िया ने टीवी लाउन्ज से खिसक जाना ही मुनासिब समझा. और “अम्मी मैं ज़रा पानी पी आऊ”कहती हुई किचन की तरफ चल पड़ी.

इतनी देर में रज़िया बीबी का ध्यान शॉपिंग बॅग पर गया. तो उसे महसूस हुआ कि बॅग में कोई चीज़ पड़ी रह गई. जिसे रज़िया बीबी ने अभी तक नही देखा.

रज़िया बीबी ने जल्दी से शॉपिंग बॅग को उल्टाया. तो शाज़िया की खरीदी हुई हेर रिमूविंग क्रीम बॅग से निकल कर टेबल पर गिर पड़ी.

उधर दूसरी तरफ शाज़िया ज्यों ही किचन में जाने के लिए वापिस मूडी. तो उस के कान में अपनी अम्मी की आवाज़ दुबारा से गूँजी “ये हेर रिमूविंग क्रीम तुम्हारी है शाज़िया”.

“ये भी में और ज़ाहिद भाई आप ही के लिए लाए हैं अम्मी” अपनी अम्मी की बात सुन कर शाज़िया के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कराहट फैली. और बहुत सकून से अपनी अम्मी की बात का जवाब देते हुए शाज़िया किचन में दाखिल हो गई.

“ये क्या बकवास कर रही हो तुम शाज़िया” अपनी बेटी का जवाब सुनते ही रज़िया बीबी शाज़िया के पीछे चीखी.

मगर इतनी देर में शाज़िया अंजान बन कर अपनी अम्मी की नज़रों से ओजल हो चुकी थी.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ ये आज हो क्या रहा है इस घर में,मेरे बेटे ने ना सिर्फ़ मेरे लिए आज अपनी पसंद की सेक्सी अंडर गारमेंट्स सेलेक्ट की हैं,बल्कि अपनी अम्मी की चूत के लिए शेविंग क्रीम भी उठा लाया है आज” अपनी बेटी शाज़िया के किचन में जाते ही रज़िया बीबी ने शेविंग क्रीम को अपने हाथ में पकड़े हुआ सोचा.

अपने बेटे ज़ाहिद की अपनी अम्मी के लिए की गई शॉपिंग को देख देख कर रज़िया बीबी बहुत गरम हो चुकी थी.

रज़िया बीबी अभी अपनी सोचो में ही मगन थी. कि इतने में उस के मोबाइल फोन की बेल बज उठी.

अपने हाथ में पकड़ी हुई शेविंग क्रीम को अपने सामने पड़े टेबल पर रख कर रज़िया बीबी अपने सेल फोन की तरफ मुत्वजो हो गई.

ये रज़िया बीबी की कराची वाली बेटी की कॉल थी. जिस ने आज काफ़ी टाइम के बाद अपनी अम्मी को याद किया था.

अपनी कराची वाली बेटी से बातें करने के दौरान ही रज़िया बीबी ने शाज़िया और ज़ाहिद की लाई हुई अंडर गारमेंट्स और शेविंग क्रीम को दुबारा शॉपिंग बाग में रख कर बाग अपने कमरे की अलमारी में रख दिया.

अपने बच्चो की तरफ से की गई इस स्पेशल शॉपिंग को देख कर रज़िया बीबी की चूत गरम तो ज़रूर हुई थी.

मगर अपने घर के काम काज में मसरूफ़ियत की वजह से वो उस दिन अपनी चूत की आग को अपने हाथ से ठंडा ना कर पाई.

इस दौरान रात हो गई तो दोनो माँ बेटी अपने कमरे में जा कर अपने अपने बिस्तर पर सो गईं.

उस रात देर गये ज़ाहिद जब घर वापिस लोटा. तो हुस्बे मामूल शाज़िया और रज़िया बीबी उस वक्त तक सो चुकी थी. इसीलिए ज़ाहिद और रज़िया बीबी का आपस में सामना ना हुआ.

दूसरी सुबह ज़ाहिद अपनी अम्मी और शाज़िया के उठने से पहले की अपने पोलीस स्टेशन चला आया. इसीलिए आज भी ज़ाहिद का अपनी अम्मी रज़िया बीबी से सामना ना हुआ.

उस दिन ज़ाहिद का जन्म दिन था. मगर हर साल की तरह इस साल भी ज़ाहिद को अपना बर्थदे का दिन याद नही था.

चूँके अपनी बहन का शोहर बनने के बाद ये ज़ाहिद की पहली साल गिरह थी.

इसीलिए एक अच्छी और प्यार करने वाली बीवी की तरह शाज़िया को अपने जानू शोहर का ये जनम दिन बहुत अच्छी तरह याद था.

“क्यों ना में शाम से पहले बाज़ार जा कर अपने भाई के लिए गिफ्ट और केक ले आऊँ,और शाम को घर वापसी पर अपनी जान ज़ाहिद को एक सर्प्राइज़ दूं ” अपने घर के काम काज से फारिग हो कर शाज़िया ने सोचा.

ये सोच कर शाज़िया ने दोपहर का खाना बनाया और फिर फारिग हो बाज़ार जाने के लिए तैयार हो गई.

“अम्मी में ज़रा मार्केट तक जा रही हूँ” तैयार हो कर ज्यों ही शाज़िया अपने कमरे से बाहर आई. तो उस ने सामने सोफे पर बैठी अपनी अम्मी से कहा.

“तुम तो कल ही ज़ाहिद के साथ बाज़ार गईं थी,क्या कोई चीज़ रह गई थी जो अब अकेले मार्केट जा रही हो बेटी” रज़िया बीबी ने सोफे पर बैठे बैठे अपनी बेटी से पूछा.

“अच्छा आप को बता देती हूँ,मगर आप को वादा करना हो गा कि आप ज़ाहिद भाई से इस बात का ज़िक्र नही करो गीं” शाज़िया ने अपनी अम्मी से रिक्वेस्ट की.

ऐसी भी कौन सी राज़ की बात है शाज़िया,अच्छा चलो नही बताउन्गी” रज़िया बीबी ने अपनी बेटी से वादा कर लिया.

“वो असल में आज ज़ाहिद भाई की साल गिरह (बर्थ डे) है,इसीलिए में भाई के लिए गिफ्ट और केक लेने जा रही हूँ’ताकि आज शाम को उन्हे सूप्राइज़ दे सकून” शाज़िया ने अपने दिल की बात अपनी अम्मी से कह दी.

“अच्छा जाओ मगर ज़रा जल्दी आ जाना बेटी” रज़िया बीबी ने अपनी बेटी को इजाज़त दे दी. तो शाज़िया टॅक्सी ले कर अपने घर के करीब ही एक शॉपिंग मार्केट में चली गई.

उस रोज़ एक तो गर्मी की शिद्दत और दूसरी लोड शेडिंग की भर मार ने रज़िया बीबी के बहरूनी जिस्म का बुरा हाल किया हुआ था.

और वैसे भी अपने बेटे के लाए हुए स्पेशल गिफ्ट के बारे में सोच सोच कर रज़िया बीबी के जिस्म के अंदूनी हिस्सो में गर्मी की शिद्दत कल से भरी हुई थी.

जिस की वजह से रज़िया बीबी की शलवार में उस की मोटी फुद्दि सारी रात चिप चिप करती रही थी.

“जब तक शाज़िया शॉपिंग कर के वापिस आती है,उस वक्त तक क्यों ना में जल्दी से शवर ले कर अपने अंदर और बाहर की गर्मी को थोड़ा कम कर लूँ” अपनी बेटी शाज़िया के घर से बाहर निकलते ही रज़िया बीबी ने बाथ रूम में जा कर नहाने का सोचा.

ये सोच जेहन में आते ही रज़िया बीबी अपने कमरे में गई.

और अपनी कमीज़ उतार कर बिस्तर पर फैंक दी.

रज़िया बीबी ने अपनी कमीज़ के नीचे हमेशा की तरह आज भी देसी स्टाइल का एक पुराना ब्रेज़ियर ही पहना हुआ था.

अपनी कमीज़ उतार कर ज्यों ही रज़िया बीबी ने कमरे के शीशे के सामने अपने सेरपे का जायज़ा लिया. तो जिंदगी में पहली बार आज रज़िया बीबी को अपना ये देसी स्टाइल का पुराना ब्रेज़ियर अच्छा नही लगा.

“नहाने के बाद क्यों ना में आज अपने बेटे ज़ाहिद का पसंद किया हुआ ब्रेज़ियर और पैंटी पहन लूँ” रज़िया बीबी के जेहन में ख्याल आया.

इस के साथ ही अपने ब्रेजियर को अपने जिस्म से उतारने के इरादे से रज़िया बीबी अपने हाथों को अपनी छातियों पर लाई. और अपनी हाथों से अपने ब्रेज़ियर के कप्स को अपनी छातियों से नीचे किया.

तो रज़िया बीबी के दोनो भारी भारी मम्मे झट से उस के ब्रेज़ियर के कप्स से बाहर निकल आए.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ आआआआ मेरे मम्मों के निपल्स कितने मोटे हो गये हैं” रज़िया बीबी ने अपने मम्मो के ब्राउन निपल्स को अपने हाथों में थामा. तो उस के मुँह से एक गरम सिसकी निकल गई.

 
अभी अपनी सहलवार और ब्रेज़ियर में आधी नंगी रज़िया बीबी शीशे (मिरर) के सामने अपने बड़े बड़े मम्मो का दीदार ही कर रही थी. कि इतने में रज़िया बीबी का बिस्तर पर पड़ा मोबाइल फोन रिंग करने लगा.

“उफफफफफफ्फ़ इस फोन ने भी इसी वक्त बजना था” रज़िया बीबी ने एक चिड चिड़ाहट के साथ अपने हाथों को अपने मम्मो से हटाया. और बिस्तर पर पड़े अपने मोबाइल की तरफ लपकी.

रज़िया बीबी स्क्रीन पर इन कमिंग कॉल का नंबर देखे बिना, उसी तरह ब्रेज़ियर में से झाँकती हुई अपनी पूरी नंगी छातियों के साथ अपने बिस्तर पर नीम दराज़ लेटी.और अपने मोबाइल फोन को अपने कान से लगा कर बोली “हेलो जी कौन”.

“अम्मी में हूँ ज़ाहिद” ज्यों ही ज़ाहिद की आवाज़ फोन के रास्ते रज़िया बीबी के कान (एअर) में गूँजी.

तो रज़िया बीबी को यूँ लगा जैसे ये ज़ाहिद की आवाज़ नही बल्कि उस के बेटे का मोटा सख़्त लंड है. जो कान रास्ते से दाखिल हो कर उस की गरम चूत में समा गया हो.

“हैयय्ाआआआआआआआ बएटााआआआआआआअ” रज़िया बीबी अपने जवान बेटे की रौब भरी मर्दाना आवाज़ सुन कर अपने जज़्बात पर काबू ना पा सकी. और बेइख्तियार उस के मुँह से ये आवाज़ निकल गई.

रज़िया बीबी को एक दम से अपनी इस ग़लती का अहसास हो गया. और वो दिल ही दिल में दुआ करने लगी कि ज़ाहिद अपनी अम्मी इस सिसकी को नज़र आदाज़ कर दे.

उधर ज़ाहिद पोलीस स्टेशन में अपने काम में बिजी होने की वजह से वाकई ही अपनी अम्मी की आवाज़ में छुपी हुई जिन्सी तलब को ना समझ सका.

और वो फोन की दूसरी तरफ से बोला “ अम्मी शाज़िया कहाँ है, में दो तीन दफ़ा उसे फोन कर चुका हूँ,मगर वो फोन का जवाब नही दे रही”

“शाज़िया तो बाथरूम में है,अभी बाहर आती है तो में उसे तुम्हारे फोन का बताती हूँ बेटा” रज़िया बीबी ने अपने बेटे की बात का जवाब दिया.

“अच्छा में शाज़िया के फोन का इंतिज़ार करता हूँ अम्मी” ये कहते हुए ज़ाहिद ने फोन काट दिया.

“शूकर है ज़ाहिद ने मेरी सिसकी नही सुनी” ज़ाहिद की कॉल बंद होते ही रज़िया बीबी ने अपने आप से कहा. और अपनी बेटी शाज़िया को कॉल मिला दी.

शाज़िया ने फोन उठाया तो रज़िया बीबी ने उसे ज़ाहिद की कॉल की इतला दी.

“अच्छा अम्मी में अभी ज़ाहिद भाई को फोन कर लेती हूँ” ये कह कर शाज़िया ने भी जल्दी से फोन बंद कर दिया.

 
“अब मुझे फॉरन घुसल (शवर) ले लेना चाहिए” शाज़िया से बात करने के बाद रज़िया बीबी ये बात सोचती हुई बिस्तर से उठी.और अपनी शलवार उतार कर कमरे में ही पूरी नंगी हो गई.

अपनी शलवार उतारने के दौरान रज़िया बीबी चूँकि अभी तक शीशे के सामने ही खड़ी थी.

इसीलिए नंगा होते ही रज़िया बीबी की नज़र अपनी मोटी टाँगों के दरमियाँ पानी छोड़ती अपनी फुद्दि पर गई.

हालाँकि रज़िया बीबी ने अपनी फुद्दि की शेव चन्द दिन पहले ही की थी.

मगर इस के बावजूद इन चन्द दिनो में ही रज़िया बीबी की चूत की जुवैन (पुबिक हेर) दुबारा से थोड़ी थोड़ी उग आईं थी.

“क्यों ना आज अपने बेटे की खरीदी हुई शेविंग क्रीम से अपनी फुद्दि की शेव करूँ” रज़िया बीबी ने अपनी चूत के थोड़े थोड़े सख़्त बल्लों पर अपना हाथ फेरते हुए सोचा.

ज़ाहिद की लाई हुई हेर रिमूविंग क्रीम से अपनी फुद्दि की शेव करने का ये आइडिया रज़िया बीबी को इतना भाया कि रज़िया बीबी की चूत ने शर शर कर के अपना पानी छोड़ दिया. तो अपनी फुद्दि से बैठे हुए झड़ने (वॉटर फॉल) के पानी ने रज़िया बीबी की उंगलियाँ को भी भिगो दिया.

रज़िया बीबी ने अलमारी में रखे हुए बॅग से हेर रिमूविंग क्रीम निकाली और फिर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई.

उधर दूसरी तरफ अपनी अम्मी की कॉल बंद होने के बाद शाज़िया ने मार्केट में पहुँचते ही अपने भाई ज़ाहिद को फोन किया.

“जी भाई अम्मी ने बताया है कि आप ने कॉल की थी” ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया की कॉल अटेंड की तो शाज़िया ने कहा.

“बस तुम्हारी याद सता रही थी,तो सोचा तुम्हें फोन कर के तुम्हारी प्यारी आवाज़ ही सुन लूँ”ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया से इश्क लड़ाते हुए कहा.

“अच्छा अगर मेरी याद आ रही है,तो फिर पोलीस स्टेशन में क्या कर रहे हैं,आप घर क्यों नही आ जाते” शाज़िया ने भी अपने भाई की प्यार भरी बात का उसी अंदाज़ में जवाब दिया. तो नीचे से शाज़िया की मोटी प्रेगनेंट फुद्दि भी अपने भाई के मोटे लंड के लिए गरम होने लगी.

“दिल तो चाह रहा है कि आ कर अपनी जान के मोटे मम्मो को चाट खाऊ, मगर तुम तो जानती हो कि इस साली पोलीस की नोकरि में क्या मजबूरी होती है, आज भी आधी रात से पहले घर नही आ पाउन्गा” ज़ाहिद ने अपनी बहन शाज़िया से कहा.

“इतना लेट पर क्यों भाई” शाज़िया अपने भाई के आज भी देर से घर आने की बात सुन कर मुरझा गई.

“नोकर क्या और नखरा क्या मेरी जान” ज़ाहिद ने जवाब दिया और फिर चन्द मिनट्स मज़ीद अपनी बहन से बात कर कर ज़ाहिद ने फोन बंद कर दिया.

शाज़िया तो आज अपने भाई को उस का बर्थडे का सर्प्राइज़ देने के मूड में थी. इसीलिए अब ज़ाहिद के घर लेट वापसी का सुन कर उसे गुस्सा तो आया.

मगर ज़ाहिद की नोकरी ही कुछ ऐसी थी. जिस में घर वापसी का कोई टाइम सेट नही था. इसीलिए शाज़िया सिवाय गुस्से के और कुछ कर भी क्या सकती थी.

“अब मार्केट तो में आ ही चुकी हूँ,इसीलिए केक और गिफ्ट ले ही लूँ,इस तरह आज ना सही कल सुबह ज़ाहिद भाई को ये केक और गिफ्ट दे दूँगी” ये ख्याल आते ही शाज़िया ने दोनो चीज़े खरीदी और एक टेक्शी ले कर वापिस घर की तरफ निकल पड़ी.

अगर चे शाज़िया अपने भाई ज़ाहिद की जल्दी घर आमद ना होने की वजह से उदास सी हो गई थी.

मगर इस के बावजूद अपने भाई ज़ाहिद की प्यार भरी बातों ने शाज़िया की फुद्दि को गरमा दिया था.

इसीलिए वो टॅक्सी में अपने घर वापसी के दौरान अपने भाई की जबरदस्त चुदाई को याद कर के अपनी शलवार में ही अपनी फुद्दि का पानी छोड़े जा रही थी.

इधर बाथरूम में शवर लेती रज़िया बीबी ने अपने बेटे ज़ाहिद की दी हुई शेविंग क्रीम से अपनी चूत के बालों को अच्छी तरह सॉफ सुथरा किया. और फिर नहाने के बाद रज़िया बीबी अपने जिस्म पर टॉवल बंद कर वापिस अपने कमरे में आ गई.

अपने कमरे में आ कर रज़िया बीबी ने अलमारी से दुबारा शाज़िया का दिया हुआ शॉपिंग बॅग निकला.

और उस में से एक ब्रेज़ियर और मॅचिंग पैंटी निकाल कर पहन ली.

 


रज़िया बीबी तो आज से पहले तक सारी जिंदगी अपना ब्रेज़ियर और पैंटी अपने मम्मे और चूत को छुपाने के लिए पहना करती थी.

इसीलिए उसे आज तक पुश अप ब्रेज़ियर और थॉंग पैंटी के बारे में कुछ अंदाज़ा नही था. कि इस तरह के अंडर गारमेंट्स पहनने के बाद किसी औरत का जिस्म देखने में कैसा लगता है.

इसीलिए अपने बेटे ज़ाहिद की पसंद की ब्रेज़ियर और पैंटी को पहन कर रज़िया बीबी ने ज्यों ही शीशे के सामने खड़े हो कर अपने वजूद का जायज़ा लिया.

तो आज ज़ाहिद की सेलेक्ट की इंपोर्टेड ब्रेज़ियर और थॉंग नुमा पैंटी में कसे हुए अपने मोटे और भारी वजूद को पहली बार देख कर खुद रज़िया बीबी की अपनी आँखे खुली की खुली रह गईं.

रज़िया बीबी के 42 ड्ड मम्मे तो पहले ही साइज़ में बहुत मोटे और बड़े थे.जिन को रज़िया बीबी ने आज पहली बार एक पुश अप ब्रेज़ियर में क़ैद किया था.

अब शीशे के सामने खड़े हो रज़िया बीबी ने ज्यों ही अपनी छातियों पर निगाह डाली.

तो रज़िया बीबी को अंदाज़ा हो गया कि उस का पुश अप ब्रेज़ियर ने उस के मम्मो को छुपाने की बजाय पहले से मजीद नंगी कर दिया था.

जब कि कुछ इसी तरह की हालत रज़िया बीबी की लंबी और सुडोल टाँगों में मौजूद उस की मोटी फुद्दि की थी.

इस थॉंग पैंटी की सामने वाला कपड़ा बहुत ही छोटा होने की वजह से रज़िया बीबी के मोटे फुडे के अंदर जा कर फँस गया था.

जिस की वजह से रज़िया बीबी की फुद्दी के फूले हुए लॅब इस पैंटी में से सॉफ नज़र आ रहे थे.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इतने सेक्सी और गरम किस्म के अंदर गारमेंट्स तो ज़ाहिद के अब्बू ने भी कभी नही खरीदे थे मेरे लिए”अपनी भारी छातियों और मोटी फुद्दि पर फँसे हुए ब्रेज़ियर और पैंटी को देखते हुए रज़िया बीबी ने सोचा.

“मेरा बेटे ने तो मेरे लिए ये इतने रेवेलिंग किस्म के ब्राज़ीएर्स और पॅंटीस ऐसे पसंद की हैं,जैसे में उस की माँ ना हुई उस की बीवी हो गई”अपने मोटे और आधे नंगे जिस्म का जायज़ा लेते हुए रज़िया बीबी ने सोचा.

“ओह कश्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह में ये कपड़े पहन कर अपने बेटे ज़ाहिद को अपना जिस्म दिखा सकती” अपने जिस्म का जायज़ा लेते हुए दूसरे ही लम्हे रज़िया के दिल में ख्याल आया. तो उस की फुद्दि में लगी आग एक दम से भड़क उठी.

रज़िया बीबी ने थॉंग के ऊपर से अपनी गरम फुद्दि पर अपना हाथ फेरा.

तो रज़िया बीबी को अंदाज़ा हुआ कि अपने बेटे ज़ाहिद के मुतलक सोच कर ही उस की गरम फुद्दि ने नीचे से इतना पानी छोड़ा है. कि रज़िया बीबी की पैंटी उस की अपनी ही चूत के रस से भीग चुकी थी.

रज़िया बीबी को खड़े खड़े थोड़ी थकावट महसूस हुई. तो वो शीशे के सामने से हट कर अपने बिस्तर पर आन बैठी.

अपने बेड पर बैठ कर रज़िया बीबी ने अपनी पैंटी उतारी. तो रज़िया बीबी ने अपनी पैंटी को अपनी चूत के पानी से बिल्कुल गीला पाया.

“शाज़िया के आने में तो अभी देर है, तो इतनी देर में क्यों ना में अपनी फुद्दि की आग को ही ठंडा कर लूँ” ये सोचते हुए रज़िया बीबी अपनी पैंटी उतार कर बिस्तर पर सीधी लेट गई.

बिस्तर पर लेटते ही रज़िया बीबी ने अपने ब्रेज़ियर को खैंच कर नीचे करते हुए ब्रेज़ियर में कसी हुई अपनी भारी छातियों को नंगा किया.

और फिर अपने मोटे मम्मो के ब्राउन निपल्स को अपनी उंगलियों में ले कर अपने मम्मो के ताने हुए निपल्स को मसल्ने लगी.

“हाईईईईईईईईईई अगर कोई मेरी इन छातियों को अपने हाथ में ले कर मसले तो मुझे कितना ज़्यादा मज़ा आए”अपनी छातियों के टाइट हुए निपल्स को अपने हाथ से छेड़ते हुए रज़िया बीबी सिसकारी.

थोड़ी देर अपने निप्पलो को अपने हाथ से छेड़ने के बाद रज़िया बीबी ने अपना एक हाथ अपने एक मम्मे पर ही रहने दिया.

जब कि नीचे से अपने पैरों को चोडा करते हुए रज़िया बीबी अपना ड्सारा हाथ अपनी प्यारी और सॉफ सुथरी चूत पर ले आई.

रज़िया बीबी ने अपने हाथों की दो उंगलियों से अपनी मोटी फुद्दि के फूले हुए होंठो को खोला.और अपनी बीच की उंगली से अपनी गीली चूत के दाने को छुआ.

“ओह हाआआआआआ” अपनी चूत के मोटे दाने को अपनी उंगली से टच करते ही रज़िया बीबी के सबर का पैमाना लबरेज हो गया.

मज़े की शिद्दत से रज़िया बीबी की आँखे खुद ब खुद बंद हो गईं. और वो सिसकियाँ लेते हुए अपनी चूत के छोले (दाने) पर अपनी उंगली की रफ़्तार को बढ़ाने लगी.

अब रज़िया बीबी अपने एक हाथ से अपने मोटे मम्मे के निपल को मसल रही थी.

जब कि दूसरे हाथ की उंगली को अपनी गीली फुद्दि के उपर रगड़ रगड़ कर अपनी गरम और प्यासी फुद्दि में लगी हुई चुदाइ की आग को अपने हाथ से ठंडा करने की कोशिश करने लगी.

अपने जिस्म की जिन्सी भूक के हाथों रज़िया बीबी इतनी मदहोश और मजबूर हो चुकी थी. कि लाख रोकने के बावजूद रज़िया बीबी के मुँह से सिसकारियाँ फूट फूट कर ना सिर्फ़ कमरे में बल्कि पूरे घर में गूंजने लगी थी.

 
अब रज़िया बीबी अपने एक हाथ से अपने मोटे मम्मे के निपल को मसल रही थी.

जब कि दूसरे हाथ की उंगली को अपनी गीली फुद्दि के उपर रगड़ रगड़ कर अपनी गरम और प्यासी फुद्दि में लगी हुई चुदाइ की आग को अपने हाथ से ठंडा करने की कोशिश करने लगी.

अपने जिस्म की जिन्सी भूक के हाथों रज़िया बीबी इतनी मदहोश और मजबूर हो चुकी थी. कि लाख रोकने के बावजूद रज़िया बीबी के मुँह से सिसकारियाँ फूट फूट कर ना सिर्फ़ कमरे में बल्कि पूरे घर में गूंजने लगी थी.

इधर जिस वक्त रज़िया बीबी सब दुनिया से बे खबर अपनी पानी पानी होती चूत की आग को अपने हाथों से ठंडा करने की कोशिश में मसरूफ़ थी.

तो दूसरी तरफ उसी लम्हे शॉपिंग के लिए गई हुई शाज़िया भी अपने घर के सामने टॅक्सी में से उतरी.

शाज़िया के पास घर के दरवाज़े की चाभी थी. जिस को बाहर से भी खोला जा सकता था.

इसीलिए शाज़िया अपने घर के छोटे गेट का दरवाजा खोल कर अपने घर में दाखिल हो गई.

ज्यों ही शाज़िया अपने घर के टीवी लाउन्ज में आई.तो शाज़िया के कानों में किसी औरत की सिसकियों की आवाज़ सुनाई दी.

“कहीं ज़ाहिद भाई तो किसी गैर औरत को चोदने के लिए अपने साथ घर नही ले आए” दो दफ़ा सुहागन बनने की बदोलत शाज़िया इस किस्म की सिसकियो और आवाज़ों को बहुत अच्छी तरह जानती और पहचानती थी.

इस के साथ साथ शाज़िया ये बात अच्छी तरह जानती थी. कि आज कल अपनी बहन शाज़िया की फुद्दि ना मिलने की वजह से उस के भाई ज़ाहिद का लंड “फुद्दि” के लिए बहुत मचल रहा है.

इसीलिए शाज़िया ने ज्यों ही अपने घर के अन्द्रूनि हिस्से में से आती ये आवाज़ें सुनी.

तो बे इख्तियारी में शाज़िया का शक सब से पहले अपने भाई ज़ाहिद की तरफ गया.

ये ख्याल आते ही गुस्से से शाज़िया के दिमाग़ का पारा एक दम चढ़ गया.

शाज़िया ने जल्दी से ज़ाहिद भाई के लिए खरीदा हुआ गिफ्ट और केक टीवी लाउन्ज में ही रखा.और खुद दबे पावं चलते हुए घर के अंदर वाले हिस्से की तरफ चल पड़ी.

गुस्से में भरी हुई शाज़िया ज्यों ही अपनी अम्मी के कमरे के सामने पहुँची.

तो अपनी अम्मी के कमरे के अंदर का मंज़र देख कर शाज़िया के तो जैसे होश ही उड़ गये.

शाज़िया ने देखा कि कमरे के अंदर कोई गैर औरत नही बल्कि उस की अपनी सग़ी अम्मी बिल्कुल बदना (नंगी) हालत में बिस्तर पर पड़ी अपनी मोटी फुद्दि से बिल्कुल उसी तरह खेल रही थी.

जिस तरह अपनी तलाक़ के बाद रात की तेन्हाई में अक्सर शाज़िया अपने जिस्म की गर्मी के हाथों मजबूर हो कर अपनी चूत से खेला करती थी.

शाज़िया तो अपने जेहन में कुछ और ही सोच कर गुस्से की हालत में घर के अंदर की तरफ दौड़ी थी.

मगर अब अपनी अम्मी को इस नंगी हालत में देख कर ना सिर्फ़ शाज़िया के कदम फर्श (फ्लोर) पर जाकर से गये.

बल्कि उस के दिल में जनम लेने वाला गुस्सा भी रफू चक्कर हो गया.

शाज़िया ने देखा कि उस की अम्मी रज़िया बीबी बिस्तर पर कुछ इस हालत में लेटी थी.कि रज़िया बीबी का सर कमरे की दीवार की तरफ था. जब कि रज़िया बीबी के पैर कमरे के दरवाज़े की तरफ थे.

अपनी आँखे बंद कर के बिस्तर पर इस स्टाइल में लेटने की वजह से रज़िया बीबी दरवाज़े पर खड़ी अपनी बेटी शाज़िया को तो नही देख पा रही थी.

मगर कमरे से बाहर खड़ी शाज़िया को अपनी अम्मी के तेरबूज़ की तरह मोटे मोटे मम्मे,अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि और उस पर तेज़ी से चलती हुई रज़िया बीबी की उंगलियाँ बहुत वज़िया नज़र आ रही थी.

शाज़िया अभी अपनी साँसे रोके अपनी अम्मी को अपने मोटे फुद्दे और जिस्म से खेलता देख ही रही थी. कि इतने में शाज़िया के कानों में अपनी अम्मी की आवाज़ पड़ी “ओह्ह्ह ज़ाहिद के अब्बू क्यों छोड़ गये है आप मुझे इस दुनिया में अकेला,अब आप ही बताओ,में अपनी इस प्यासी चूत की आग को कैसे ठंडा करू,मेरी ये प्यासी चूत तो आज भी लंड के लिए तड़प रही है आहह उईईईईई ऊऊओ मेरी माआ”

शाज़िया तो मार्केट में ही अपने भाई ज़ाहिद से बात कर के काफ़ी गरम हो चुकी थी.

और अब अपने घर वापिस आ कर अपनी अम्मी को यूँ पहली बार अपनी आँखों के सामने अपनी फुद्दि से खेलता देखने का ये मंज़र शाज़िया के जिस्म में एक अजीब सी गर्मी पैदा कर चुका था.

इसीलिए शाज़िया ने ज्यों ही अपनी सग़ी अम्मी के मुँह से “लंड और चूत” के इलफ़ाज़ पहली बार निकलते हुए सुने.

तो शाज़िया को भी एक दम जोश आया और उस का अपना हाथ भी खुद ब खुद अपनी प्यासी और गरम “हमला” फुद्दि तक आन पहुँचा.

अपनी अम्मी की देखा देखी शाज़िया ने भी अपनी मोटी फुद्दि को अपने हाथ में जकड़ा और अपनी अम्मी के साथ ताल से ताल मिलाते हुए अपनी शलवार के उपर से अपनी फुद्दि को मसलने लगी.

“हाईईईईईईईईईईईई अम्म्म्ममममममी” ज्यूँ ही शाज़िया की उंगलियाँ उस की गरम फुद्दि पर चलीं. तो अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि पर नज़रें जमाते हुए शाज़िया के मुँह से एक सिसकारी फूटी.

इधर ज्यों ही अपनी अम्मी रज़िया बीबी की तरह शाज़िया भी कमरे के बाहर खड़े हो कर अपनी फुद्दि से खेलने में मसरूफ़ हुई.

तो दूसरी तरफ कमरे में मौजूद रज़िया बीबी अपने मम्मे पर फिसलते हुए हाथ को भी अपनी फुद्दि पर लाई.

और शाज़िया के देखते ही देखते रज़िया बीबी ने अपने दोनो हाथों से अपनी फुद्दि के होंठों को पकड़ कर पूरा खोल दिया.

ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपनी फुद्दि के फूले हुए होंठो को अपने हाथों से पकड़ कर खोला.

तो कमरे के बाहर खड़ी शाज़िया को अपनी सग़ी अम्मी के मोटे और प्यासी फुददी को पूरा अंदर तक देखने का मोका मिल गया.

“ओह मेरी अम्मी की फुद्दि कितनी मज़े दार और प्यारी हाईईईईईईईईईईईई” शाज़िया ने ज्यों ही अपनी अम्मी के मोटे फुद्दे को पहली बार यूँ पहली बार अपनी आँखों के सामने खुलता देखा.

तो अपनी अम्मी की पानी छोड़ती गरम फुद्दि का अन्द्रूनि पिंक हिस्सा देख कर शाज़िया के मुँह में पानी आ गया. और इस के साथ ही बे इख्तियारि में शाज़िया की ज़ुबान उस के अपने होंठो पर फिरने लगी.

आज अपनी अम्मी के मोटे नंगे मम्मो और खास तौर पर अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि को देख कर यूँ एक दम से अपनी चूत का पानी छोड़ने पर शाज़िया खुद भी हैरान थी.

लेकिन शाज़िया का आज अपनी ही अम्मी के लिए यूँ एक दम गरम होने की वजह ये थी.कि एक तो हमाल ठहरने के बाद शाज़िया को अपने भाई ज़ाहिद का लंड मिलना बंद हो गया था.

दूसरी और मेन वजह ये थी. कि अपनी पहली शादी से ले कर अपने पहले शोहर से तलाक़ के बाद तक तो शाज़िया ये ही समझती रही थी.कि सिर्फ़ एक मर्द ही एक औरत को जिन्सी सकून पहुँचा सकता है.

मगर नीलोफर के साथ अपने जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम होने के बाद शाज़िया को भी अंदाज़ हो गया था. कि लिसेबियन चीज़ की कोई बला भी इस दुनिया में मौजूद होती है.

फिर अपने भाई ज़ाहिद के साथ चुदाई से पहले तक नीलोफर ने शाज़िया की चूत को कई बार चाट चाट कर शाज़िया को लज़्जत की उन मंज़िलों तक पहुँचाया था.

जिन तक पहुँचने का शाज़िया ने अपनी पहली शादी शुदा ज़िंदगी में कभी तसव्वुर तक नही किया था.

नीलोफर से अपने जिस्मानी ताल्लुक़ात कायम होने के बाद शाज़िया को शुरू में तो अपनी सहेली की चूत को चाटना पसंद नही आया था.

 
मगर वक्त गुज़रने के साथ साथ शाज़िया की ज़ुबान को भी अपनी सहेली नीलोफर की चूत का कुछ ऐसा नशा चढ़ा. के उस के बाद तो शाज़िया अपनी सहली की फुद्दि की आशिक़ ही बन गई.

अब अपने भाई ज़ाहिद से शादी और फिर नीलोफर के मलेशिया चले जाने के बाद शाज़िया नीलोफर की चूत की खुश्बू,लज़्जत और चूत के नमकीन पानी को बहुत मिस कर रही थी.

इसीलिए आज इतने महीने बाद जब शाज़िया ने अपनी ही सग़ी अम्मी की गरम और मोटी फुद्दि को अपनी आँखों के सामने यूँ खुलता देखा. तो अपनी अम्मी के इस हसीन फुद्दि को देख कर शाज़िया के मुँह मे पानी भर आया.

“मेरे पास लंड तो नही, मगर में अपनी अम्मी की फुद्दि को चाट कर अपनी ज़ुबान से तो अम्मी की चूत को सकून दे ही सकती हूँ ना, और इस तरह अम्मी की फुद्दि के साथ साथ मेरी गरम ज़ुबान भी ठंडी हो जाए गी” अपनी अम्मी की पानी छोड़ती फुद्दि के मोटे और फूले होंठो को देख कर शाज़िया के दिल में ये ख्याल आया.

आज अपनी ही अम्मी के उस मोटी फुददी को देख कर ना सिर्फ़ शाज़िया अपने होश-ओ-हवस खो बैठी.

बल्कि अपनी अम्मी की गरम चूत देख कर शाज़िया के मुँह से राल भी टपकने लग पड़ी थी.

अपनी आँखों के सामने मचलती हुई अपनी अम्मी की चूत को देख कर शाज़िया को अपने उपर कोई कंट्रोल नही रहा. तो फिर बिजली की तेज़ी के साथ शाज़िया ने अपने जिस्म से सारे कपड़े उतार फैंके.

अपने घर के बरांडे में बिल्कुल नंगी होते ही शाज़िया दबे पाँव अपनी अम्मी के कमरे में दाखिल हुई. और आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई बिस्तर पर अपनी आँखे बंद किए पड़ी हुई अपनी अम्मी के पास खड़े हो कर खामोशी से अपनी अम्मी के मोटे और भारी वजूद का करीब से जायज़ा लेने लगी.

रज़िया बीबी अपनी बेटी शाज़िया की कमरे में मौजूदगी से बे नियाज़ अपनी आँखे मून्दे (क्लोज़ किए) अपनी गरम फुद्दि से खेलने में मसरूफ़ थी.

“उफफफफफफफफफ्फ़ मेरी अम्मी के मम्मे तो मुझ से भी बड़े हैं,ओह देखूऊऊओ तो मेरी अम्मी के डार्क ब्राउन निपल्स भी कैसे खड़े हुए हैं,और्र्र्र्ररर सब्बब्बबब से बढ़ कर मेरी अमिीईईईईईई की ये मोटी फुद्दीईईईईई कितनी प्यारी है, जिस की खूबसूरती और ताज़गी तो 5 बच्चे निकालने के बाद भी अभी तक मंद नही पाडिइईईईईईई”. बिस्तर पर लेटी रज़िया बीबी की खुली टाँगों में से अपनी अम्मी के गुदाज और भारी मम्मो और फूले होंठो वाली पानी छोड़ती फुद्दि को देख कर शाजिया ये बात सोचते हुए साथ ही साथ अपनी नंगी चूत में भी उंगली भी मार रही थी.

“हाईईईईईईईईईईईई अम्मी की चूत का पानी तो उन की फुद्दि से बह बह कर बिस्तर पर ज़ाया हो रहा है, मुझे चाहिए कि में आगे बढ़ुँ और अपनी अम्मी की फुद्दि से अपना मुँह लगा कर अपनी अम्मी के इस बहते झरने का सारा पानी अपने अंदर जज़ब कर लूँ” अपनी मोटी फुद्दि पर अपनी उंगली को तेज़ी से रगड़ते हुए शाज़िया ने सोचा.

अभी शाज़िया अपनी इस सोच में ही मगन थी. कि इतने में रज़िया बीबी मज़ीद गरम होते हुए अपने दोनो हाथों को अपने बड़े बड़े चुचों (मम्मो) पर लाई.

और अपने दोनो मोटे और भारी मम्मो को अपने हाथों में ले कर ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगी. इस सारे अमल के दौरान रज़िया बीबी की आँखे बदस्तूर बंद थी.

अब नीचे से रज़िया बीबी की गरम और प्यासी फुद्दि अपनी पूरी आब-ओ-ताब के साथ उस की बेटी शाज़िया की नज़रों के सामने खुली पड़ी थी.

ये शाज़िया के लिए बहुत सुनहरी मोका था. जब वो अपनी अम्मी की प्यासी फुद्दि को अपनी नुकीली ज़ुबान से ठंडा कर सकती थी.

इसीलिए इस मोके को गनीमत जानते हुए शाज़िया नीचे झुकी और बहुत आहिस्ता से अपनी अम्मी की टाँगों के दरमियाँ बैठ कर शाज़िया ने ज्यों ही अपने मुँह को अपनी अम्मी के मोटी फुद्दी के नज़दीक किया. तो रज़िया की पानी छोड़ती मोटी फुद्दी की खुसबू दार महक शाज़िया के नथुनो में समा गई.

“उफफफफफफफ्फ़ अम्मी की चूत की ये खुसबू कितनी मज़ेदार हाईईईईईईईई” अपनी अम्मी की चूत की खुसबू को सूंघते हुए शाज़िया ने अपनी अम्मी की फूली हुई चूत पर हाथ फेरा. और झुक कर एक दम अपनी अम्मी की पानी पानी होती गरम फुद्दी पर अपने गरम होन्ट चिस्पान कर दिए.

शाज़िया के गरम होन्ट ज्यों ही अपनी अम्मी की गीली चूत से टच हुए. तो अपनी अम्मी की चूत के बहते पानी से शाज़िया के होंठ पूरी तरह तर हो गये.

“ओह कूऊऊऊऊओन हो तूमम्म्ममममममममम”ज्यों ही शाज़िया ने अपनी अम्मी की चूत के मोटे लिप्स को अपने मुँह में भरा.

रज़िया बीबी एक दम घबरा कर अपने बिस्तर से एक फुट उपर की तरह उछली.और अपने जिस्म को छुपाने के लिए बिस्तर की चादर को अपने उपर लेने की कोशिश करने लगी.

“शाज़ियास्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ये क्या गंदी हरकत कर रही हो तुम मेरे साथ बेटी” रज़िया बीबी ने ज्यों ही अपना सर उठा कर अपनी टाँगों के दरमियाँ देखा. तो अपनी बेटी शाज़िया को अपनी फुद्दि पर मुँह मारता देख कर रज़िया बीबी ने तो होश ही उड़ गये.

“एक औरत होने के नाते जिस्म की गर्मी को में अच्छी तरह समझती हूँ, इसीलिए आप परेशान ना हों,में अभी कुछ ही देर में आप की प्यासी चूत को ठंडा कर दूंगी अम्मी” शाज़िया ने अपने मुँह को अम्मी की चूत से थोड़ा सा हटाया. और अपने होंठो पर लगे हुए अपनी अम्मी की गरम चूत के नमकीन पानी पर अपनी नुकीली ज़ुबान फेरते हुए बोली.

दूसरे ही लम्हे शाज़िया ने अपनी अम्मी के जिस्म पर पड़ी चादर को अपने हाथ में पकड़ा. और एक ही झटके में अपनी अम्मी के जिस्म से चादर खैंच कर अपनी अम्मी के मोटे जिस्म को दुबारा से पूरा नंगा कर दिया.

“तुम ये सब कयययययययययययययययययाआआआअ कर रही हो मेरे साथ शाज़िया” अपने जिस्म को अपनी बेटी के हाथों दुबारा नंगी पा कर रज़िया बीबी चीखी.

“में जानती हूँ कि जिस तरह मेरी तलाक़ के बाद मेरी ज़िंदगी बे रोनक हो गई थी, इसी तरह अब्बू की मौत के बाद आप की ज़िंदगी और चूत भी खुशक हो गई है अम्मी, आप ने मुझे तो अपने ही भाई की दुल्हन बना कर, मुझे अपने ही भाई के मोटे लंड से मज़ा लेने का मोका अता कर दिया,मगर मेरे बदकास आप अभी तक चुदाई के मज़े से महरूम हैं,इसीलिए आज में खुद अपने हाथों और मुँह से आप को भी चुदाई का मज़ा देना चाहती हूँ अम्मी” शाज़िया इतनी सारी बातें एक ही साँस में अपनी अम्मी से कह गई.

शाज़िया अपनी जिन्सी भूक के हाथों मजबूर हो कर आज एक बार फिर अपने और अपनी अम्मी के दरमिया कायम माँ बेटी के रिश्ते को ना सिर्फ़ बुला बैठी थी.

बल्कि अब एक दफ़ा अपनी ज़ुबान पर अपनी अम्मी की गरम फुद्दि के पानी का नमकीन ज़ायक़ा पाते ही शाज़िया पागल हो के इस तरह की बहकी बहकी बातें करने लगी थी.

 
kunal wrote: ↑ 03 Aug 2017 20:37
अगले अपडेट का शिद्दत से इंतज़ार रहेगा
 


“ये क्या बकवास कर रही हो तुम, जानती हो ना कि में तुम्हारी माँ हूँ शाज़िया” अपनी बेटी शाज़िया को अपने जिस्म की प्यास और चूत की गर्मी के मुतलक पहली बार यूँ खुल्लम खुल्ला बात करते सुन कर रज़िया बीबी सकते में आ गई. और फिर रज़िया बीबी अपना एक हाथ अपने बड़े मम्मे और दूसरे हाथ को अपनी चूत पर रख कर अपने हाथों से अपने मम्मे और फुद्दि को ढँकने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली.

“आप को याद है कि ज़ाहिद भाई से मेरी सुहाग रात के बाद आप ही ने मुझे कहा था कि नीलोफर की तरह में आप को भी एक सहेली ही समझू, इसी लिए में अब आप को एक सहेली की तरह ही तो कह रही हूँ, कि मेरे होते हुए आप को अब यूं तड़पने की ज़रूरत नही है, जिस तरह नीलोफर ने मेरी सहेली बन कर कभी मेरी फुद्दि की प्यास बुझाई थी, उसी तरह में भी आज आप की चूत की आग को अपने हाथों से ठंडा कर दूं गी अम्मी जी” ये कहते हुए शाज़िया ने रज़िया बीबी की चूत पर रखा हुआ हाथ हटाया.

और दुबारा से अपने मुँह को अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि पर रख कर अपनी अम्मी की चूत के मुलायम होंठो के अंदर अपनी गरम ज़ुबान फेरने लगी.

“आआआआआहह हमम्म्ममममममममममम शाज़िया यह बहुत गंदा कम्म्म्ममममममम हाईईईईईई मेरी बचिईीईईईईईईईई.” रज़िया बीबी शाज़िया को रोकने की कोशिश करने के दौरान सिसकारिया भरते हुए कहने लगी.

रज़िया बीबी चूँकि एक पुराने दूर की औरत थी. इसीलिए अपने मरहूम शोहर से शादी के बाद रज़िया बीबी सिर्फ़ ये जानती थी.कि जब भी ज़ाहिद के अब्बू का लंड खड़ा होता. तो वो रात को अपनी बेगम रज़िया बीबी को अक्सर पूरा नंगा किए बगैर सिर्फ़ उस की शलवार ही उतार कर अपना काम पूरा कर लेते. और फिर थोड़ी देर में ही थक कर सो जाते.

ज़ाहिद के अब्बू ने अपनी पूरी ज़िंदगी रज़िया बीबी की चूत में अपनी ज़ुबान फेरना तो दर किनार, काफ़ी दफ़ा तो अपनी उंगली भी रज़िया बीबी की चूत में नही डाली थी.

इसीलिए रज़िया बीबी की ज़िंदगी में ये पहला मोका था. जब कोई मर्द नही बल्कि उस की अपनी सग़ी बेटी शाज़िया अपनी अम्मी की फुद्दि को मज़े ले ले कर चाटने में मसगूल थी.

रज़िया बीबी अपनी ही बेटी को अपनी चूत से चिप्टा देख कर बहुत शरम महसूस कर रही थी. और उस का दिल चाह रहा था कि वो अपनी बेटी शाज़िया को अपनी फुद्दि चाटने से मना कर दे.

मगर शाज़िया की गरम ज़ुबान किसी काले नाग की तरह अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि को इस तेज़ी से डॅंक मार रही थी.कि रज़िया बीबी अपनी बेटी की ज़ुबान और मुँह के आगे अब हर मानने लगी थी.

शाज़िया ने इस से पहले अपनी सहेली नीलोफर की गरम फुद्दि कोई कई बार चूसा और चाटा था.

मगर शाज़िया को इतना मज़ा तो कभी नीलोफर की फुद्दि चाटने में नही आया था.

जितना मज़े उसे आज अपनी ही सग़ी अम्मी की फुद्दि को चाटने में आ रहा था.

इस की वजह शायद ये रही हो गी कि नीलोफर तो सिर्फ़ शाज़िया की सहेली थी.

जब कि शाज़िया आज जिस चूत को चाटने में इतना मज़ा और सवा महसूस कर रही थी. वो कोई आम चूत नही बल्कि उस की अपनी ही सग़ी अम्मी की फुद्दि थी.

शाज़िया ने अपने दोनो हाथो से अपनी अम्मी रज़िया बीबी की चूत को फैलाया.और फिर अपनी अम्मी की चूत की तह में अपनी नुकीली ज़ुबान डाल कर अपनी अम्मी की मोटी फुददी के पानी पीने लगी.

"हाईईईईईईईईईई शाज़ियास्स्स्स्स्स्स्स्साआआआआहह, बेटी मुझे तो आज तक पता ही नही चला कि ये ज़ुबान भी इतने कमाल की चीज़ है, जो मर्द के लंड से ज़्यादा मज़ा दे सकती है, और वो भी तब जब एक औरत दूसरी औरत की चूत को चाट्ती है, ओह चाटो और चाटो म्म्म्म मममममम बहुत मज़ा आ रहा है मुझे " अपनी बेटी शाज़िया को गर्मजोशी के साथ अपनी चूत का पानी पीते देख कर रज़िया बीबी को बहुत मज़ा आ रहा था. और इस मज़े की शिद्दत से वो अपने आप को हवा में उड़ता हुआ महसूस करने लगी थी.

(वैसे ये ज़ालिम चूत चीज़ ही ऐसी है कि इसे लाख अपना हाथ लगाओ कुछ नहीं होता. लेकेन किसी और के जिस्म का कोई भी हिस्सा औरत की चूत को छू जाए.तो उस के पूरे जिस्म में बिजली सी दौड़ जाती है.ये ही हॉल इस वक्त रज़िया बीबी का भी था. जो कि अब अपनी बेटी शाज़िया की गरम ज़ुबान के चाटने की वजह से पागल होने लगी थी.)

 
(वैसे ये ज़ालिम चूत चीज़ ही ऐसी है कि इसे लाख अपना हाथ लगाओ कुछ नहीं होता. लेकेन किसी और के जिस्म का कोई भी हिस्सा औरत की चूत को छू जाए.तो उस के पूरे जिस्म में बिजली सी दौड़ जाती है.ये ही हॉल इस वक्त रज़िया बीबी का भी था. जो कि अब अपनी बेटी शाज़िया की गरम ज़ुबान के चाटने की वजह से पागल होने लगी थी.)

रज़िया बीबी की चूत से उस की फुद्दि का पानी बारिश की बूदों की मानिंद टपक रहा था. और शाज़िया अपनी अम्मी की चूत के नमकीन स्वाद वाले पानी को चाटे जा रही थी.

अपनी अम्मी की मोटी फुद्दि को चाटते चाटते शाज़िया को ना जाने क्या सूझी. कि उस ने एक लम्हे के लिए अपनी अम्मी की फुद्दि से अपना मुँह हटाया.

और फिर अपनी दो उंगलियों को एक साथ जोड़ते हुए दोनो उंगलियाँ एक दम से अपनी अम्मी की मोटी फुद्दी में डाल दीं. और फिर साथ ही अपने दूसरे हाथ को अपनी अम्मी की चूत के मोटे देने पर रख कर अपने हाथ के अंगूठे से अपनी अम्मी की चूत के छोले को मसल्ने लगी.

ज्यों ही शाज़िया की उंगलियाँ रज़िया बीबी की फुद्दि में दाखिल हुईं. तो आज इतने सालों बाद किसी और की उंगलियों को अपनी चूत की गहराई में पा कर मज़े के मारे रज़िया बीबी का मुँह खुल गया और वो चल उठी "आआआआआआअहह ,ओह शाज़ियास्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स”

इस के साथ ही रज़िया बीबी अपने हाथों को अपने मोटे मोटे पुश्ठो (मम्मो) पर ले गई.और उस ने अपने हाथों से अपने ही निपल को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था.

असल में शाज़िया के मुँह और हाथों की हरकतों ने रज़िया बीबी के जिस्म में एक नई किस्म की जिन्सी भूक पेदा कर दी थी.

जिस की वजह से रज़िया बीबी के जिस्म की मस्ती अब अपने पूरे शबाब पर थी.और इस मस्ती की अपनी एक अलग ही दुनिया थी.

शाज़िया ये ही हरकत इस से पहले भी कई बार अपनी सहेली से कर चुकी थी.

मगर आज अपनी ही अम्मी के साथ ये हरकत दोराहने और इस पर अपनी अम्मी का रियेक्शन देख कर शाज़िया की अपनी फुद्दि भी नीचे से पानी छोड़ने लगी.

तो शाज़िया अपनी अम्मी की चूत के दाने पर फिसलते हुए अपने हाथ को अम्मी की चूत से हटा कर अपनी अम्मी की छाती पर ले गई.

और अपनी अम्मी को एक मम्मे को नीचे से पूछ करते अपने हाथ से अपनी अम्मी के मम्मे को अपनी अम्मी के मुँह के बिल्कुल नज़दीक ले गई.

“अम्मी आप अपना मुँह खोल कर अपने मम्मे को मुँह में डालो, और अपनी ज़ुबान के साथ अपने निपल को सक करो” शाज़िया ने अपने हाथ से अपनी अम्मी के गुदाज मम्मे को अपनी अम्मी के मुँह की तरफ देखते हुए रज़िया बीबी से कहा.

रज़िया बीबी तो अपनी चूत की प्यास के हाथों मजबूर हो कर अपनी सूझ बूझ गवाँ बैठी थी. और वो अब अपनी ही बेटी के हाथों में एक खिलोने की तरह खेलने में खुशी महसूस करने लगी थी.

इसीलिए रज़िया बीबी ने बिना कुछ सोचे अपना मुँह खोला. और अपनी लंभी ज़ुबान को अपने मुँह से बाहर निकाल कर अपने भारी मम्मे के तने हुए डार्क पिंक कलर के मोटे निपल को हलका सा छुआ.

“ओह”अपनी ज़ुबान से अपने निपल को छूने में रज़िया बीबी को बे इंतहा मज़ा आया कि वो बे इख्तियार सिसकने लगी.

“शाज़ियास्स्स्स्स्स्स्सस्स तुम ने क्याआआआअ जदूऊऊऊऊ कर दिया है मुझ पर मेरी बचिईीईईईई” रज़िया बीबी को आज अपना ही मम्मा और निपल सक करना इतना अच्छा लगा कि वो मज़े से चिल्ला उठी..

और फिर वो अपने मम्मे को अपने मुँह में भर कर अपनी ज़ुबान से अपना निपल और उस के इर्द गिर्द के गुलाबी हिस्से को पागलों की तरह खुद ही चाटने लगी.

शाज़िया ने ज्यों ही आज अपनी अम्मी को यूँ अपना ही मोटे मम्मे सक करते देखा तो उस ने भी मज़ीद गरम होते हुए अपनी अम्मी की चूत को दाखिल अपनी उंगलियों की स्पीड बढ़ा दी. और अपनी उग्लियों से अपनी ही अम्मी की फुद्दि को ऐसे चोदने लगी. जैसे एक लंड किसी फुद्दि को चोदता है.

इस के साथ ही शाज़िया ने अपना मुँह फिर से आगे किया और अपनी अम्मी की चूत के दाने को फिर से अपने मुँह में भर लिया.

रज़िया बीबी तो अपनी बेटी की ज़ुबान और हाथों की छेड़ छाड़ से पहले ही बहुत गरम हो चुकी थी.

इसीलिए ज्यों ही शाज़िया ने रज़िया बीबी की चूत के छोले को अपने मुँह में भरा. तो रज़िया बीबी की चूत का बाँध टूट गया.

“ओह मेरी बचिईीईईईईईईईईई में फारिग होने लगी हूँ” कहते हुए रज़िया बीबी ने अचानक अपने एक हाथ को नीचे ला कर उसे शाज़िया के सर पर रखा. और शाज़िया के मुँह को अपनी चूत पर ज़ोर से दबा दिया.

इस के साथ ही रज़िया बीबी के जिस्म मे झटके ले लेकर काँपने लगा. और उस ने अपनी चूत का सारा पानी पहली बार अपनी ही बेटी के मुँह में खारिज कर दिया.

“ओह अमिीईईईईईईई आप की चूत तो पूरी झरना (वॉटर फॉल) बन गई है, देखिए कितना रस छोड़ रही है आप की फुद्दिईईईईई.” ज्यों ही शाज़िया ने अपने मुँह में अपनी ही अम्मी की चूत का पानी बारिश के कतरो की तरह बूँद बूँद बन कर आते हुए महसूस किया. तो उस ने भी नीचे से अपना मुँह पूरी तरह खोला. और अपनी अम्मी की चूत का रस चूस चूस कर अपने मुँह में भर लिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ अम्म्मी अपनी फुद्दि का पानी तो शायद (होने) से भी ज़्यादा मीठा और मज़े दार है” ज्यों ही रज़िया बीबी के जिस्म ने झटके लेना बंद किया. तो शाज़िया ने अपनी अम्मी की मोटी थाइस पर अपनी ज़ुबान रगड़ते हुए कहा.

शाज़िया अब अपनी अम्मी की मोटी रानों पर अपनी ज़ुबान को आहिस्ता आहिस्ता घुमाते हुए अपना मुँह अपनी अम्मी के मोटे और थोड़ा सा बाहर को निकले हुए पेट की तरफ ले जाने लगी.

“ओह्ह्ह्ह,हाहहााआअ,शाज़िया ऐसा मत करो,मुझे गुदगुदी हो रही है बेटी” ज्यों ही शाज़िया की गरम ज़ुबान ने अपनी अम्मी के पेट को छुआ. तो रज़िया बीबी को मज़े के साथ साथ एक दम से थोड़ी हँसी भी आ गई.

“हााहह अम्मी मेरा दिल कर रहा है,कि में आज आप के जिस्म के एक एक हिस्से को खा जाऊं” अपनी अम्मी के पेट और खास तौर पर नाफ़ (नेवेल) के आस पास के हिस्से पर अपनी गरम ज़ुबान फेरने के दौरान शाज़िया अपनी अम्मी के मोटे के मोटे गोश्त को अपने दाँतों में ले कर हल्का हल्का काट भी रही थी.

 
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