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थोड़ी देर अपने बेटे से अपनी चूत चुदवाने के बाद रज़िया बीबी ने थोड़ा आगे हो कर अपनी टाँगों को मज़ीद चौड़ा किया.
तो पीछे से अपनी अम्मी की चूत में लंड पेलते ज़ाहिद की नज़र फिर से अपनी अम्मी की कंवारी गान्ड के ब्राउन सुराख पर पड़ी.
“हाईईईईईईईईईईईईईईई शाज़िया की तरह अम्मी की गान्ड भी कंवारी है, मगर मुझे नही लगता कि अम्मी मुझे अपनी ये गान्ड चोदने का मोका कभी देगीं” अपनी अम्मी की गान्ड की मोरी को अपने एक हाथ से थोड़ा खोल कर ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की अन चुदि गान्ड को प्यार से देखा.
तो उस के दिल में ख्याल आया.और इस ख्याल के जेहन में आते ही ज़ाहिद का दिल बुझ सा गया.
उधर दूसरी तरफ रज़िया बीबी बे शक ओन्धे मुँह बिस्तर पर लेट कर अपने बेटे ज़ाहिद से अपनी प्यासी चूत की तसल्ली करवा रही थी.
मगर घोड़ी बन कर बिस्तर पर पड़े होने के बावजूद रज़िया बीबी ने अपनी गान्ड की कंवारी मोरी पर अपने बेटे के गरम हाथ की सख्ती और ज़ाहिद की तपती निगाहों की गरमी को बहुत अच्छी तरह महसूस कर लिया था.
“अब वक्त आ गया है कि मुझे खुद अपनी अन्चुदि गान्ड, शादी के तोहफे की सूरत में अपने नये शोहार को पेश कर देनी चाहिए,ताकि ज़ाहिद मेरी गान्ड की सील खोल कर शाज़िया की तरह मुझे भी अपनी मुकम्मल बीवी बना ले” अपनी गान्ड पर अपने बेटे की गरम नज़रों को महसूस कर के रज़िया बीबी ने सोचा.
ये सोचते ही बिस्तर पर घोड़ी बनी रज़िया बीबी ने अपने जिस्म को एक झटका दिया. तो उस की चूत में फँसा हुआ ज़ाहिद का लंड “पच” की आवाज़ से रज़िया बीबी के मोटे फुद्दे से बाहर निकल आया. और रज़िया बीबी का बदन अपने पीछे खड़े ज़ाहिद की गिरफ़्त से निकलता चला गया.
इस से पहले कि ज़ाहिद कुछ समझ पाता. कि इतने में बिस्तर पर अभी तक झुकी रज़िया बीबी ने अपने जिस्म के अगले हिस्से को बिस्तर से बुलंद (उपर) किया.
और अपने दोनो हाथों को पीछे ला कर अपनी गान्ड की मोटी पहाड़ियों को अपने दोनो हाथों से एक दम ज़ाहिद की आँखों के सामने पूरा खोलते हुए अपने नये खाविंद से मुखातिब हुई. “क्या आप को मेरी गान्ड पसंद है जानुउऊुुुउउ ?”.
रज़िया बीबी ने जब अपने दोनो हाथों से अपनी भारी गान्ड को अलग किया.तो रज़िया बीबी की कंवारी गान्ड का मुँह ज़ाहिद की आँखों के सामने ऐसे खुलता चला गया.
जैसे “अली बाबा चालीस चोरों वाली स्टोरी में खुल जा सिम सिम” कहते हुए गार (केव) का मुँह खुल जाता है.
“क्याआआआआ” ज़ाहिद अम्मी से इस किस्म की हरकत और ऐसे सवाल की तोवक्को नही कर रहा था. इसीलिए ये बात सुनते ही वो चौंक गया.
“अपनी गान्ड का पूछ रही हूँ, क्या मेरे जानुउऊ को अपनी नई ज़ोज़ा (बीवी) की गान्ड अच्छी लगती है” रज़िया बीबी ने अपने हाथों से अपनी कंवारी गान्ड की पहाड़ियों को मज़ीद चौड़ा करते हुए अपने बेटे ज़ाहिद से फिर पूछा.
हाआाआआं में तो आशिक़ हूँ तुम्हारी इस मजेयययी दार्रर्र्र्ररर गान्ड का, रज़िया बेगम” अपनी अम्मी की बात सुन कर ज़ाहिद का होसला बढ़ा. और उस ने पीछे से अपनी बेगम की अन्चुदि गान्ड की मोरी पर अपने हाथ की उंगली घुमाते हुए रज़िया बीबी को जवाब दिया.
“मरने से पहले तक तुम्हारे मरहूम अब्बू की ये दिली ख्वाहिश थी कि वो किसी तरह मेरी इस गान्ड की सील खोल ले, मगर मेने कभी उन को इस बात की इजाज़त नही दी, लेकिन अब में खुद चाहती हूँ कि तुम मेरी इस कंवारी बूँद (गान्ड) की सील तोड़ कर मुझे एक हकीकी सुहागन बना दो मेरे सरताज” रज़िया बीबी ने अपनी गान्ड को ज़ोर से पीछे की तरफ हिलाया. तो रज़िया बीबी की गान्ड की मोरी ने अपना मुँह एक दम से खोल दिया,
जिस की वजह से रज़िया बीबी की गान्ड के सुराख पर फिरती हुई ज़ाहिद की उंगली पहली बार उस की अम्मी की कंवारी गान्ड के छेद को खोलते हुए थोड़ी सी गान्ड के अंदर घुस गई.
“ओह” ज्यों ही ज़ाहिद की उंगली उस की अम्मी की गान्ड के थोड़ा अंदर दाखिल हुई. तो दर्द के मारे रज़िया बीबी चीख पड़ी.
“हाईईईईईईईईईईईई मेरी उंगली को गान्ड में ले कर आप की चीख निकल गई है,जब मेरा मोटा लंड आप की गान्ड में घुसे गा, तब तुम क्या करो गी जान” ज़ाहिद ने अपनी उंगली को अपनी अम्मी की गान्ड की मोरी पर हल्का हल्का अंदर बाहर करते हुए कहा.
“हाईईईईईईईईईई ये दर्द की नही बल्कि मज़े की चीख है,आप मेरी चीखों की परवाह ना करो,और खूऊऊऊल भी दो मेरी गान्ड को आज अपने इस ज़ालिम लंड से,मेरी गान्ड के आशिक़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़”जैसे ही ज़ाहिद की उंगली ने अपनी अम्मी की गान्ड में जा कर पहली बार रज़िया बीबी की कुँवारी गान्ड से छेड़ छाड़ शुरू की. तो रज़िया बीबी बे सखता चिल्ला उठी और मज़े के मारे उस के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं.
“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ में तो पिछले कई हफ्तों से आप की इस कयामत खेज गान्ड में अपना लंड डालने के सपने दिल में सजाए फिर रहा हूँ,और आज मेरे बिन कहे आप ने मुझे अपनी ये शानदार गान्ड खुद पेश कर के, मुझे अपना दीवाना बना लिया है बेगम” कहते हुए ज़ाहिद ने अपनी उंगली को अपनी माँ की गान्ड से बाहर निकाल कर अपने मुँह में डाला. और “शाराप शाराप” करते हुए उंगली को ज़ुबान से चाट कर अपनी अम्मी की नमकीन गान्ड का स्वाद चखने लगा.
“कैसाआआआआअ लगा मेरी गान्ड का ज़ायक़ा मेरी जान को” शारप शारप की आवाज़ सुनते ही रज़िया बीबी ने अपना मुँह मोड़ कर पीछे देखा. तो ज़ाहिद को अपनी उंगली चूस्ता देख कर रज़िया बीबी समझ गई. कि ज़ाहिद वो ही उंगली चाट रहा है जो उस ने अभी अभी उस की गान्ड से बाहर निकाली है.
तो पीछे से अपनी अम्मी की चूत में लंड पेलते ज़ाहिद की नज़र फिर से अपनी अम्मी की कंवारी गान्ड के ब्राउन सुराख पर पड़ी.
“हाईईईईईईईईईईईईईईई शाज़िया की तरह अम्मी की गान्ड भी कंवारी है, मगर मुझे नही लगता कि अम्मी मुझे अपनी ये गान्ड चोदने का मोका कभी देगीं” अपनी अम्मी की गान्ड की मोरी को अपने एक हाथ से थोड़ा खोल कर ज़ाहिद ने अपनी अम्मी की अन चुदि गान्ड को प्यार से देखा.
तो उस के दिल में ख्याल आया.और इस ख्याल के जेहन में आते ही ज़ाहिद का दिल बुझ सा गया.
उधर दूसरी तरफ रज़िया बीबी बे शक ओन्धे मुँह बिस्तर पर लेट कर अपने बेटे ज़ाहिद से अपनी प्यासी चूत की तसल्ली करवा रही थी.
मगर घोड़ी बन कर बिस्तर पर पड़े होने के बावजूद रज़िया बीबी ने अपनी गान्ड की कंवारी मोरी पर अपने बेटे के गरम हाथ की सख्ती और ज़ाहिद की तपती निगाहों की गरमी को बहुत अच्छी तरह महसूस कर लिया था.
“अब वक्त आ गया है कि मुझे खुद अपनी अन्चुदि गान्ड, शादी के तोहफे की सूरत में अपने नये शोहार को पेश कर देनी चाहिए,ताकि ज़ाहिद मेरी गान्ड की सील खोल कर शाज़िया की तरह मुझे भी अपनी मुकम्मल बीवी बना ले” अपनी गान्ड पर अपने बेटे की गरम नज़रों को महसूस कर के रज़िया बीबी ने सोचा.
ये सोचते ही बिस्तर पर घोड़ी बनी रज़िया बीबी ने अपने जिस्म को एक झटका दिया. तो उस की चूत में फँसा हुआ ज़ाहिद का लंड “पच” की आवाज़ से रज़िया बीबी के मोटे फुद्दे से बाहर निकल आया. और रज़िया बीबी का बदन अपने पीछे खड़े ज़ाहिद की गिरफ़्त से निकलता चला गया.
इस से पहले कि ज़ाहिद कुछ समझ पाता. कि इतने में बिस्तर पर अभी तक झुकी रज़िया बीबी ने अपने जिस्म के अगले हिस्से को बिस्तर से बुलंद (उपर) किया.
और अपने दोनो हाथों को पीछे ला कर अपनी गान्ड की मोटी पहाड़ियों को अपने दोनो हाथों से एक दम ज़ाहिद की आँखों के सामने पूरा खोलते हुए अपने नये खाविंद से मुखातिब हुई. “क्या आप को मेरी गान्ड पसंद है जानुउऊुुुउउ ?”.
रज़िया बीबी ने जब अपने दोनो हाथों से अपनी भारी गान्ड को अलग किया.तो रज़िया बीबी की कंवारी गान्ड का मुँह ज़ाहिद की आँखों के सामने ऐसे खुलता चला गया.
जैसे “अली बाबा चालीस चोरों वाली स्टोरी में खुल जा सिम सिम” कहते हुए गार (केव) का मुँह खुल जाता है.
“क्याआआआआ” ज़ाहिद अम्मी से इस किस्म की हरकत और ऐसे सवाल की तोवक्को नही कर रहा था. इसीलिए ये बात सुनते ही वो चौंक गया.
“अपनी गान्ड का पूछ रही हूँ, क्या मेरे जानुउऊ को अपनी नई ज़ोज़ा (बीवी) की गान्ड अच्छी लगती है” रज़िया बीबी ने अपने हाथों से अपनी कंवारी गान्ड की पहाड़ियों को मज़ीद चौड़ा करते हुए अपने बेटे ज़ाहिद से फिर पूछा.
हाआाआआं में तो आशिक़ हूँ तुम्हारी इस मजेयययी दार्रर्र्र्ररर गान्ड का, रज़िया बेगम” अपनी अम्मी की बात सुन कर ज़ाहिद का होसला बढ़ा. और उस ने पीछे से अपनी बेगम की अन्चुदि गान्ड की मोरी पर अपने हाथ की उंगली घुमाते हुए रज़िया बीबी को जवाब दिया.
“मरने से पहले तक तुम्हारे मरहूम अब्बू की ये दिली ख्वाहिश थी कि वो किसी तरह मेरी इस गान्ड की सील खोल ले, मगर मेने कभी उन को इस बात की इजाज़त नही दी, लेकिन अब में खुद चाहती हूँ कि तुम मेरी इस कंवारी बूँद (गान्ड) की सील तोड़ कर मुझे एक हकीकी सुहागन बना दो मेरे सरताज” रज़िया बीबी ने अपनी गान्ड को ज़ोर से पीछे की तरफ हिलाया. तो रज़िया बीबी की गान्ड की मोरी ने अपना मुँह एक दम से खोल दिया,
जिस की वजह से रज़िया बीबी की गान्ड के सुराख पर फिरती हुई ज़ाहिद की उंगली पहली बार उस की अम्मी की कंवारी गान्ड के छेद को खोलते हुए थोड़ी सी गान्ड के अंदर घुस गई.
“ओह” ज्यों ही ज़ाहिद की उंगली उस की अम्मी की गान्ड के थोड़ा अंदर दाखिल हुई. तो दर्द के मारे रज़िया बीबी चीख पड़ी.
“हाईईईईईईईईईईईई मेरी उंगली को गान्ड में ले कर आप की चीख निकल गई है,जब मेरा मोटा लंड आप की गान्ड में घुसे गा, तब तुम क्या करो गी जान” ज़ाहिद ने अपनी उंगली को अपनी अम्मी की गान्ड की मोरी पर हल्का हल्का अंदर बाहर करते हुए कहा.
“हाईईईईईईईईईई ये दर्द की नही बल्कि मज़े की चीख है,आप मेरी चीखों की परवाह ना करो,और खूऊऊऊल भी दो मेरी गान्ड को आज अपने इस ज़ालिम लंड से,मेरी गान्ड के आशिक़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़”जैसे ही ज़ाहिद की उंगली ने अपनी अम्मी की गान्ड में जा कर पहली बार रज़िया बीबी की कुँवारी गान्ड से छेड़ छाड़ शुरू की. तो रज़िया बीबी बे सखता चिल्ला उठी और मज़े के मारे उस के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं.
“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ में तो पिछले कई हफ्तों से आप की इस कयामत खेज गान्ड में अपना लंड डालने के सपने दिल में सजाए फिर रहा हूँ,और आज मेरे बिन कहे आप ने मुझे अपनी ये शानदार गान्ड खुद पेश कर के, मुझे अपना दीवाना बना लिया है बेगम” कहते हुए ज़ाहिद ने अपनी उंगली को अपनी माँ की गान्ड से बाहर निकाल कर अपने मुँह में डाला. और “शाराप शाराप” करते हुए उंगली को ज़ुबान से चाट कर अपनी अम्मी की नमकीन गान्ड का स्वाद चखने लगा.
“कैसाआआआआअ लगा मेरी गान्ड का ज़ायक़ा मेरी जान को” शारप शारप की आवाज़ सुनते ही रज़िया बीबी ने अपना मुँह मोड़ कर पीछे देखा. तो ज़ाहिद को अपनी उंगली चूस्ता देख कर रज़िया बीबी समझ गई. कि ज़ाहिद वो ही उंगली चाट रहा है जो उस ने अभी अभी उस की गान्ड से बाहर निकाली है.