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वतन तेरे हम लाडले complete

दोस्तो आज का अपडेट कैसा रहा आपके जवाब के इंतजार में
 
rajsharma wrote: ↑ 11 Aug 2017 15:34


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अमजद के लिए मौत को गले लगाना कोई मुश्किल काम नहीं था, वह बहुत बार मौत के मुंह से बच कर वापस आया था मगर अगली बार वो पहले से ज्यादा मुश्किल और घातक मिशन खुशी से करने के लिए तैयार हो जाता था। लेकिन हर बार वह अपनी जान जोखिम में डाल कर निडर होकर लड़ता था, लेकिन आज पहली बार उसे अपनी मौत का बैठकर इंतजार करना पड़ रहा था जहां वह न तो दुश्मन पर हमला करने की स्थिति में था और न ही अपने बचाव का कोई उपाय कर सकता था, अगर वह कुछ कर सकता था तो वह था सिर्फ मौत का इंतजार। और यही इंतजार उसके लिए भयानक था। अगर कर्नल इरफ़ान उसकी कनपटी पर पिस्टल रख कर उसको कह देता कि मेजर राज का पता बता दो नहीं तो मौत को गले लगा लो तो शायद अमजद खुद ही गोली चला लेता मगर मेजर राज का पता नही बताता, मगर इस तरह असहाय बैठ कर मौत का इंतजार करना बहुत यातनादायक था। कभी वह काशफ के बारे में सोचता तो कभी सरमद के बार में, वह नहीं जानता था कि काशफ ज़िंदा है या फिर कर्नल इरफ़ान ने उसे शहीद कर दिया ??? और सरमद के बारे में भी उसे पता नहीं था कि वह गिरफ्तार हो चुका है या फिर उसने अपने बचाव का कोई उपाय किया है ??

समीरा अमजद को अपनी जान से ज्यादा प्यारी थी, उसने समीरा को अपनी छोटी बहन की तरह पाला था, और वो ऐसे किसी भी मिशन में समीरा को जोड़ते हुए घबराता था, मगर समीरा के अलावा वह किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता था इसीलिए मजबूरन वह समीरा को अपने साथ रखता। लेकिन इस समय वह समीरा से बेफिक्र था क्योंकि वह जानता था कि मेजर राज के साथ समीरा को कोई खतरा नहीं, मेजर राज समीरा की रक्षा कर सकता था, लेकिन सरमद की ओर से वह खासा चिंतित था। कर्नल इरफ़ान कमरे से गए खासी देर हो चुकी थी, शायद पूरा दिन बीत चुका था मगर अमजद को इस बात का राज नहीं था, वह तो बस एक अंधेरे कमरे में कैद था जहां बाहर होने वाले मामलों की उसको पता नहीं था। कुर्सी पर बैठे बैठे अमजद को अब तकलीफ होने लगी थी, ना जाने कब से वह इसी कुर्सी पर बंधा हुआ था और तो और पिछले काफी घंटों से न तो अमजद को पानी पीना नसीब हुआ था और न ही खाने को कुछ मिला था। परेशानी के कारण उसका गला सूख रहा था मगर उसको यहाँ पानी देने वाला कोई नहीं था।

अमजद ने 2, 3 बार चिल्लाकर पानी भी मांगा मगर उत्तर में उसको ना तो कोई आहट सुनाई दी और न ही कोई उसे पानी पिलाने आया। आज अमजद को महसूस हो रहा था कि मौत का इंतजार करना मौत को गले लगाने से कितना मुश्किल काम था। अब काशफ और सरमद के बारे में ही सोच रहा था कि उसको कमरे से बाहर कुछ कदमों की आवाज सुनाई दी। अब अमजद के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई वह समझ गया था कि शहादत का समय अब आ रहा है। इतनी देर से जो वह यातनादायक प्रतीक्षा कर रहा था वह इंतजार खत्म होने को है, कर्नल इरफ़ान की पिस्टल से अब एक गोली चलेगी और अमजद के सीने से पार हो जाएगी, और वह एक सैनिक को बचाने की खातिर अपनी जान की बलि देकर शहादत के रुतबे पर आसीन हो जाएगा। इस सोच ने अमजद के अंदर एक अजीब सी हिम्मत पैदा कर दी थी। अब कर्नल इरफ़ान उसके शरीर के टुकड़े कर डालता तब भी वो उससे कुछ उगलवा नहीं सकता था।

क़दमों की आवाज़ अब खासी करीब आ चुकी थी। कमरे के भीतर ज़ीरो का एक बल्ब जल गया था जिससे कमरे में कुछ प्रकाश पैदा हुआ था, तो कमरे का दरवाजा खुला और रस्सियों में जकड़ा व्यक्ति औंधे मुंह अंदर आ गिरा ... उससे पीछे एक और व्यक्ति था वह भी रस्सियों से बंधा हुआ था और एक आदमी उसे बालों से पकड़कर खींचता हुआ अमजद के पास ले आया था। रस्सियों में जकड़ा यह व्यक्ति अमजद के पास आया तो अमजद ने उसको पहचान लिया था। ये सरमद था जिसके चेहरे पर इस समय अनगिनत घाव थे और उसकी आंखें सूजी हुई थीं मगर आश्चर्यजनक रूप से उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी। अमजद को देखकर उसने बहुत मुश्किल से बोलना शुरू किया और महज इतना ही कहा: कुछ नहीं उगलवा सका यह कुत्ता मेरे मुंह से।

सरमद के मुंह से यह बात सुनकर अमजद के चेहरे पर भी एक विजयी मुस्कान आ गई थी। वह आगे बढ़कर सरमद को गले लगाना चाहता था मगर अफसोस कि अपनी कुर्सी से उठने के लायक नहीं था वह अब अमजद ने नीचे गिरे हुए व्यक्ति को देखा जो अब तक औंधे मुंह पड़ा था अमजद ने ध्यान से उसको देखा तो उसे भी पहचान लिया, यह काशफ था, मगर उसकी हालत बहुत बुरी थी। कर्नल इरफ़ान ने उस उत्पीड़न के पहाड़ तोड़ दिए थे, अमजद की नजर जब काशफ के पैर पर पड़ी तो उसके होश फाख्ता हो गए, उसकी टांग पर बहुत ज्यादा खून जमा हुआ था और अब भी थोड़ा सा खून उसकी टांग से रिस रहा था । उसके साथ कर्नल इरफ़ान खड़ा था जिसके चेहरे पर दुख और गुस्से के स्पष्ट संकेत देखे जा सकते थे। उसको शायद अपनी विफलता का गुस्सा था कि इन तीनों में से किसी से भी वह ये नहीं उगलवा सका था कि आखिर मेजर राज और समीरा इस समय कहाँ है?

कर्नल इरफ़ान के साथ 2 लोग और थे मगर इस बार वह हंटर वाली हसीना कर्नल के साथ नहीं थी कमरे की रोशनी अब कर्नल इरफ़ान के कहने पर ऑन कर दी गई थीं। रोशनी ऑन होने के बाद अमजद ने अब फिर काशफ देखा तो पता चला कि आखिर काशफ के साथ हुआ क्या है। उसकी टांग में ड्रिल मशीन के माध्यम से छेद किया गया था। उसने अपना दाहिना पैर फ़ोल्ड कर रखा था जबकि बाएं पैर को वह धीरे धीरे जमीन पर मार रहा था। मगर उसका बाकी पूरा शरीर स्तब्ध था, उसका चेहरा नीला हो रहा था और उसके कपड़े फटे हुए थे। काशफ की यह हालत देखकर अमजद की आँखों में खून उतर आया था। उसका बस नहीं चल रहा था कि वह अब अपनी जगह से उठे और कर्नल इरफ़ान के टकड़ टुकड़े कर डाले ...... मगर अफसोस कि वह इस समय कुछ नहीं कर सकता था। कर्नल इरफ़ान के साथ आए बाकी दो लोगों ने अब काशफ को जमीन से उठाया और अमजद के साथ एक और कुर्सी पर बिठा दिया जबकि सरमद अब तक खड़ा था मगर वह रस्सियों में जकड़ा हुआ था वह अपनी मर्जी से ज़्यादा हरकत नहीं कर सकता था सिवाय छोटे छोटे कदमों के साथ धीरे धीरे चलना। इसलिए कर्नल इरफ़ान को उससे कोई खास खतरा महसूस नहीं हो रहा था।

कर्नल इरफ़ान ने अभी अमजद से कहा और बोला ये अपने दोस्त की हालत देख रहे हो ??? मुझे सब कुछ सच सच बता दो कि मेजर राज इस समय कहाँ है अन्यथा। । । । । । । । इससे पहले कि कर्नल इरफ़ान का वाक्य पूरा होता अमजद ने एक जोरदार व्यंग्य का ठहाका लगाया तो कर्नल इरफ़ान कुछ गुस्से और कुछ आश्चर्य मिश्रित प्रतिक्रिया के साथ उसे देखने लगा। अमजद बोला कर्नल किस को डरा रहे हो? मेरे दोस्त की हालत तुम्हारे सामने है, जब वह तुम्हारा बर्बर अत्याचार सहन कर गया और तुम उससे कुछ न उगलवा सके तो तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम्हारे अत्याचार को सहन नहीं कर पाउन्गा और तुम्हें कुछ बताऊँगा ....

अमजद की बात सुनकर उसके साथ खड़े सरमद ने भी एक ठहाका लगाया और कुर्सी पर बैठे काशफ ने भी अपनी धीमी और पीड़ा से भरपूर आवाज में एक व्यंग्य का ठहाका लगाया। तीनों को ठहाके लगाते देखकर कर्नल इरफ़ान को अपना अपमान महसूस हो रहा था . वह सोच भी नहीं सकता था कि काशफ को इस हालत में देखने के बाद अमजद में हिम्मत बाकी रहेगी, उसका विचार था कि अमजद सब कुछ उगल देगा काशफ की यह हालत देखकर। मगर यहां तो मामला ही उलट था, वह तीनों तो एक दूसरे को देखकर खुश हो गए थे और उनमें पहले सा साहस आ चुका था, और तो और काशफ जिसके पैर में कर्नल इरफ़ान छेद कर चुका था और उसमें बोलने तक की हिम्मत नहीं थी उसका चेहरा नीला हो रहा था और उसके शरीर से खून निचोड़ लिया गया था वह भी व्यंग्य के ठहाके लगा रहा था।

 
राफिया कुछ देर तक अपने पापा के साथ बैठ कर बातें करती रही, कर्नल इरफ़ान को राफिया की बातों से पता चल गया था कि वह इमरान को बहुत चाहने लग गई है, और उसे अपनाना चाहती है, राफिया ने खुद भी कर्नल को बताया कि वह बहुत होनहार युवा है, उसको बस आपकी मदद की जरूरत है, आप उसे सेना में भर्ती करवा लें और अपने साथ रखें, वह बहुत आगे जाएगा, खासकर कंप्यूटर में वह बहुत माहिर है ... इससे पहले कि राफिया कर्नल को लैपटॉप का पासवर्ड तोड़ने की खबर सुनाती उसको इमरान की कही हुई बात याद आ गई कि यह बात कर्नल इरफ़ान को ना बताए, वो खुद ही अपना कौशल दिखा देंगे अन्यथा कर्नल इरफ़ान गुस्से में उसे सजा भी दिलवा सकता है। यही सोचकर राफिया चुप हो गई और इससे आगे कुछ नही बोली कि वह कंप्यूटर क्षेत्र में बहुत माहिर है। कर्नल ने राफिया से कप्तान फ़ैयाज़ के बारे में भी पूछा तो राफिया ने उसके बारे मे अन्भिग्यता जाहिर की और कहा कि उससे बस कल रात ही बात हुई थी उसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं

कर्नल इरफ़ान समझ गया कि कैप्टन फ़ैयाज़ ने मेजर राज को पकड़ने की कोशिश की होगी और मेजर ने उसको ठिकाने लगा दिया होगा। मगर इस दौरान समीरा का उल्लेख कहीं नहीं आया, उसको समीरा का सौभाग्य ही समझ लीजिये कि राफिया ने कहीं भी अंजलि का उल्लेख नहीं किया और न ही कर्नल इरफ़ान के मन में यह बात आई कि वह मेजर राज की साथी समीरा के बारे में कुछ पूछे, उसके मन में अब सिर्फ यही बात थी कि उसकी बेटी सही सलामत है उसके लिए यही काफी है। बातों बातों में कर्नल इरफ़ान ने राफिया को बताया कि इमरान की वापसी अब 2 दिन तक तो नहीं होगी, तो चलो तुम मेरे साथ वापस लाहौर, जिस पर राफिया राजी हो गई मगर अपने पापा से फोन लेकर अपने नंबर पर फोन करने लगी क्योंकि उसका फोन मेजर राज के पास था। लेकिन नंबर ऑफ जा रहा था, राफिया ने 2, 3 बार कोशिश की मगर नंबर नहीं मिला तो उसने निराश होकर फोन वापस अपने पापा को दे दिया, और कुछ ही देर के बाद दोनों बाप बेटी वापस लाहौर रवाना हो रहे थे।

कर्नल इरफ़ान के मन में एक तरह से मेजर राज के लिए गुस्सा नरम हो गया था कि उसने राफिया को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और कोई तकलीफ नहीं दी। यह तो वह नहीं जानता था कि मेजर राज ने उसकी बेटी की चूत और गाण्ड का क्या हश्र किया था मगर चूत और गाण्ड के अलावा मेजर राज ने किसी भी तरह से राफिया को चोट नहीं दी। इसीलिए कर्नल के मन में अब मेजर राज को पकड़ने का विचार नहीं था बल्कि वह अपने ही मिशन पर विचार कर रहा था कि उसे आगे क्या करना है। अगली सुबह कर्नल इरफ़ान और राफिया वापस अपने घर में मौजूद थे। वापस घर पहुंचकर कर्नल इरफ़ान कुछ देर सुस्ताने के लिए लेट गया था क्योंकि काफी दिनों से उसकी नींद पूरी नहीं हुई थी, मेजर राज को पकड़ने के चक्कर में वह दिन-रात एक कर बैठा था मगर अंत में पता लगा कि मेजर राज उसकी बेटी बैंड बजाता रहा है और उसकी बेटी की टाइट चूत और गाण्ड के मजे लेता रहा और कर्नल इरफ़ान उसे पागलों की तरह ढूंढ ढूंढ कर अपनी गाण्ड में दर्द करवा बैठा था।

दोपहर को जब कर्नल इरफ़ान सो कर उठा तो अब उसका मन काफी फ्रेश था और अब फिर से वो मेजर राज के बारे में सोचने लगा। उसने अपने घर को भी अच्छी तरह से चेक किया खासकर राफिया का कक्ष वो राफिया की ज़ुबानी जान चुका था इमरान ने एक रात उसी के कमरे में बताई थी। बहुत बारीकी से तलाशी लेने के बावजूद भी कर्नल इरफ़ान को कोई खास चीज नहीं मिली जिससे मेजर राज के बारे में कुछ पता लग सके कि उसका आगे का प्लान क्या होगा। अब कर्नल इरफ़ान मेजर राज के बारे में काफी गुस्से में था, रात जो नर्मी उसके दिल में पैदा हुई थी वह अब खत्म हो गई थी, अब उसे इस का एहसास नहीं था कि मेजर राज ने उसकी बेटी को कोई चोट नहीं दी थी अब अगर उसके मन में कुछ था तो वह यह कि मेजर राज ने एक मामूली मेजर होने के बावजूद कर्नल इरफ़ान जैसे वरिष्ठ अधिकारी की रातों की नींद हराम कर दी और उसकी बेटी के बारे में गलत बयानी करके उसे चोट पहुंचाई। अब फिर से वो मेजर राज के खून का प्यासा हो गया था। लेकिन अब की बार कर्नल इरफ़ान ने जो सोचा था वह खतरनाक था। अब कर्नल इरफ़ान मेजर राज को ढूंढने की बजाय वापस इंडिया जाकर अपने मिशन को निचले भाग पूरा तक पहुंचाने की ठान चुका था, यही एक तरीका था मेजर राज से अपने अपमान का बदला लेने का। उसका देश दो हिस्सों में बँटे इससे बेहतर बदला हो ही नहीं सकता था।

यह सोच कर कर्नल इरफ़ान ने अपनी तैयारी की, अपनी टीम को अपने अगले प्लान के बारे में आगाह किया, राफिया की सुरक्षा की विशेष व्यवस्था करने के लिए घर पर सभी सुरक्षा गार्ड को चेंज कर दिया गया ताकि अगर उनमें कोई मेजर राज का जासूस ना हो तो नए सुरक्षा गार्डस को घर पर तैनात किया गया, उसके साथ बहुत उच्च प्रशिक्षित लड़ाकू सैनिकों को पूरी कॉलोनी में फैला दिया गया जो आने वाले किसी भी खतरे से निपटने की क्षमता रखते थे ताकि अगर मेजर राज या उसका कोई साथी राफिया को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे तो ये लड़ाकू युवा उसका सफाया कर सकें। उसके साथ साथ कर्नल इरफ़ान ने अपनी एक विशेष टीम को मुर्री से लाहौर जाने वाले रास्ते पर मेजर राज की खोज के लिए भेज दिया , जहां तक राफिया के मोबाइल के माध्यम से मेजर राज का पता लग सकता था लगाया गया, लेकिन जहां मेजर राज ने मोबाइल बंद किया उसके आगे वह कहाँ गया, इस बात का किसी को कोई पता नहीं था। कर्नल इरफ़ान ने लाहौर में भी विरोधी टेरीरीस्ट टीमों को चौकन्ना कर दिया था ताकि अगर मेजर राज लाहौर में कोई आतंकवादी कार्यवाही करना चाहे तो उसे मुंह की खानी पड़े

यह सभी कदम उठाने के साथ साथ कर्नल इरफ़ान ने अपनी टीम को इंडिया जाने की तैयारी करने के आदेश भी दे दिए थे। लेकिन अब की बार वह समुद्री रास्ते की बजाय जमीनी रास्ते से जाने की तैयारी में था, ताकि जल्द से जल्द इंडिया जाकर वह बड़ा काम कर सके जिसकी हल्की सी भनक समीरा को पड़ चुकी थी और वह उसके बारे में मेजर राज को भी सूचित कर चुकी थी। कर्नल इरफ़ान ने राफिया को भी अपने इस फैसले से अवगत करा दिया था कि वह इंडिया जा रहा है और उसके जाने के बाद राफिया अपना विशेष ध्यान रखे। पाकिस्तान में सभी जरूरी काम निपटाने के बाद अगले दिन कर्नल इरफ़ान अपने कुछ साथियों के साथ सिख श्रद्धालुओं को लाने वाली ट्रेन से इंडिया की ओर रवाना हो गया था जबकि राफिया जो अब तक नहीं जानती थी कि उसका नया प्रेमी इमरान वास्तव में उसके पापा को तिगनी का नाच नचा रहा है और वही मेजर राज है, जिसका वो इंतजार कर रही थी और बार बार अपने नंबर पर कॉल कर रही थी जो लगातार ऑफ जा रहा था। पाकिस्तान की सीक्रेट सर्विस भी पिछले 24 घंटे से मेजर राज को खोजने की कोशिश कर रही थीं मगर अब तक उन्हें कोई पर्याप्त सफलता नहीं मिली थी

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मेजर राज ने जब कर्नल इरफ़ान से फोन पर बात कर ली तो वह वापस कमरे में आया जहां समीरा यानी अंजलि और राफिया दोनों अब तक बिना कपड़ों के ही बेड पर लेटी हुई थीं। इमरान ने पहले अलमारी से अपना एक ट्राउजर निकालकर पहना और फिर ऊपर से शर्ट पहनने के बाद आगे बढ़कर राफिया को प्यार किया और बोला तुम चिंता मत करो मैं जल्द ही वापस आ जाउन्गा उसके बाद वह अंजलि की तरफ बढ़ा और उसके होंठों को चूस कर उसकी प्रशंसा की कि तुम्हें चोदने में बहुत मज़ा आया, अगली बार अगर वो कभी मिले तो तुम्हारी चूत के साथ साथ तुम्हारी गाण्ड की भी चुदाई करूंगा। यह सुनकर अंजलि मुस्कुराई और बोली नहीं मैं कभी गाण्ड नहीं मरवाउन्गी और जो आपने आज राफिया की गाण्ड का हश्र किया है वह देखकर तो मैं कभी भी गाण्ड नहीं मरवाउन्गी, लेकिन तुम्हारा लंड बहुत तगड़ा है तुम बस मेरे उन रिश्तेदारों की मदद कर दो, मैं खुद तुम से एक बार और निश्चित रूप चुदवाउन्गी यह सुनकर इमरान ने एक बार फिर अंजलि के होंठों को चूसा और बाहर निकल गया।

इमरान के जाने के बाद अंजलि कुछ देर राफिया के साथ ही बेड पर लेटी रही, फिर उसने राफिया को देखा और बोली- अब मुझे चलना चाहिए। लोकाटी मेरा इंतज़ार कर रहा होगा। राफिया जो अपनी चूत और गांड से बेहद परेशान थी उसने भी कहा, हां ठीक है तुम जाओ में इमरान का वेट करूंगी इधर ही। अब अंजलि ने राफिया को कहा कि वह तो यहाँ ब्रा और पैन्टी पहन कर ही आई थी और उन्हें भी बाथरूम में उतार दिया, अब साफ नहीं हैं वह।अगर तुम्हें बुरा न लगे तो मुझे अपनी कोई शर्ट और पैंट देदो जो पहन कर यहाँ से जा सकूँ। यह सुनकर राफिया ने अलमारी की ओर इशारा किया और बोली यहाँ देख लो जो तुम्हें फिट आता हो पहन लो . अंजलि ने अलमारी खोली और वहां से एक ढीली शर्ट उठाकर पहन ली। यह सफेद रंग की शर्ट थी और उसके साथ ही एक शॉर्ट निक्कर जो काले रंग का था वह भी पहन लिया। शर्ट के नीचे अंजलि ने ब्रा नहीं पहना था जिसकी वजह से उसके निपल्स का तनाव नजर आ रहा था मगर उसे इस बात की चिंता नहीं थी। कपड़े पहनने के बाद अंजलि राफिया को मिली और एक अच्छा बाय किस कर कमरे से निकल गई

कमरे से निकल कर अंजलि सीधे अपने होटल गई जहां कल रात वह लोकाटी के लंड पर सवारी करती रही थी। होटल पहुँच कर उसने एक बार वही अलमारी खोलकर देखा जिसमें मेजर राज ने कैप्टन फ़ैयाज़ को बांध कर बंद कर दिया था, कप्तान फ़ैयाज़ अब तक बेहोशी की हालत में था, समीरा को लगा कि कहीं वह मर न गया हो, इस ने पल्स चेक की तो वह चल रही थी। यानी कैप्टन केवल बेहोश था मरा नहीं था। उसकी तसल्ली कर समीरा ने फिर से अलमारी को बंद कर दिया और अपने आवश्यक कपड़े निकाल कर अपना बैग तैयार किया। बैग तैयार करने के बाद अंजलि ने फ्रिज से कुछ फल निकाल कर खाए और जूस पिया। मेजर राज से धुँआधार चुदाई करवाने के बाद समीरा थोड़ी थकावट महसूस हो रही थी और उसका शरीर भूख की वजह से हल्का हल्का कांप रहा था। मगर फ्रूट खाने से समीरा को काफी सुधार महसूस हो रहा था और रस पीने से भी समीरा अब काफी बेहतर महसूस कर रही थी। मगर उसके शरीर पर अब तक राफिया की ही शर्ट थी जो उसको काफी फिट आई थी और इसमें न केवल समीरा के मम्मे बहुत टाइट और बड़े दिख रहे थे बल्कि उसके निप्पल भी तने हुए थे और शर्ट के ऊपर से दिख रहे थे। अब समीरा ने अपनी एक छोटी शाल निकाली और अपने कंधों पर डाल आगे से अपना तना हुआ सीना उस शाल से ढक लिया और फिर अपना सामान उठाकर लोकाटी कमरे में चली गई जो उसके कमरे के साथ ही था। लोकाटी के कमरे के बाहर 2 गार्ड खड़े थे, यह वही गार्ड थे जिन्हें कल रात कैप्टन फ़ैयाज़ ने ठुकाई कर बेहोश कर दिया था, मगर उनके गार्ड ने लोकाटी को इस घटना के बारे में कुछ नहीं बताया था क्योंकि इस तरह उनकी नौकरी जा सकती थी।न ही लोकाटी को इस बारे में कुछ पता था क्योंकि सुबह जब वह सो कर उठा तब तक उसके गार्ड फिर से चाक चौबंद कमरे के बाहर खड़े थे।

 
समीरा को देख गार्ड ने अंदर जाने का रास्ता दिया तो समीरा सीधा कमरे में चली गई जहां लोकाटी किसी व्यक्ति के साथ फोन पर बात कर रहा था। समीरा को आता देखकर लोकाटी के चेहरे पर खुशी का काफी प्रभाव देखा जा सकता है। समीरा सीधी लोकाटी के पास गई और उसकी एक टांग पर इस तरह बैठ गयी कि समीरा के दोनों नितंबों लोकाटी की थाई पर थे और उसने अपना एक हाथ फैलाकर लोकाटी की गर्दन में डाल लिया था और हौले से उसके कान के साथ अपने मखमली होठों से एक किस कर ली थी।

लोकाटी ने भी अपना एक हाथ फैलाकर समीरा की पतली कमर के चारों ओर लपेट लिया था। कुछ और बातें करने के बाद लोकाटी ने फोन बंद कर दिया और समीरा को अपनी बाँहों में लेकर अपने सीने से लगा कर उसके होठों को चूसने लगा। समीरा भी लोकाटी का भरपूर साथ दे रही थी। कुछ देर होंठ चूसने के बाद लोकाटी ने समीरा को अपनी गोद से उतार दिया और बोला अंजलि बेबी, पहले ही बहुत देर हो गई है, चलो अब चलें हमारे फ़्लाईट का समय हो रहा है। तुम्हारी यह इच्छा अब मैं इंडिया जाकर ही पूरी करूंगा। अंजलि ने भी एक स्माइल पास की और बोली चलो डार्लिंग, मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ। मगर नीचे रिसेप्शन पर मेरे रूम का बिल लेने वाले रहते हैं। यह सुनते ही लोकाटी ने रिसेप्शन पर कॉल की और उन्हें बताया कि मिस अंजली जिस कमरे में ठहरी थीं उसका बिल लोकाटी के क्रेडिट कार्ड से चार्ज कर लें।

फिर लोकाटी ने अंजलि को चलने का इशारा किया और कमरे से बाहर निकल गया। अंजलि भी लोकाटी के पीछे पीछे कमरे से निकल गई, कमरे से निकलते ही एक गार्ड ने अंजलि के हाथ से उसका माल पकड़ लिया और अंजलि लोकाटी के साथ उसके हाथ में हाथ डाले चलने लगी। जबकि लोकाटी का समान उसके गार्ड और दूसरा दल पीछे ला रहे थे। होटल से निकले तो होटल के बाहर ही एक काले रंग की मर्सिडीज तैयार खड़ी थी, लोकाटी उस मर्सिडीज की ओर बढ़ने लगा। जैसे ही कार के पास पहुंचा चालक ने तुरंत लोकाटी के लिए दरवाजा खोला जबकि अंजलि कार के पीछे से होती हुई घूमकर दूसरी ओर वाले दरवाजे की तरफ गई और इतनी देर में ड्राइवर भागता हुआ उसकी ओर गया और उसके लिए भी दरवाजा खोला। अंजलि कार में बैठ गई। कार में बैठते ही लोकाटी का एक हाथ अंजलि की थाईज़ पर था और कार अब फर्राटे भर्ती हवाई अड्डे की ओर रवाना हो चुकी थी।

लोकाटी हौले हौले अपना हाथ अंजलि की थाईज़ पर मसल कर अपनी ठरकी पूरी कर रहा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी जवान और सेक्सी लड़की यूं उसके साथ जाने के लिए राजी हो गई, मगर फिर उसने मन ही मन सोचा कि पाकिस्तान में लड़कियों के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं। इंडिया में परिवारों की समस्या है, मगर पाकिस्तान में तो लड़कियों को स्वतंत्रता ही महफूज नही है और अंजलि तो एक बड़े बाप की बेटी थी उसके लिए यह फैसला कोई बड़ी बात नहीं थी। लोकाटी अपनी किस्मत पर रश्क करते हुए मन ही मन में अंजलि की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था। कुछ देर बाद जब एयरपोर्ट निकट आ गया तो लोकाटी ने समीरा को कहा कि इंडिया का माहौल थोड़ा अलग है, अगर आप शॉर्ट निक्कर की जगह कुछ और पहनें तो बेहतर रहेगा क्योंकि वहां पर पर्दा प्रथा है। और लोकाटी की होने वाली पत्नी अगर इन कपड़ों में इंडिया जाएगी तो उसकी नाक कट जाएगी। अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा चिंता मत करो जान, मैं एयरपोर्ट पर चेंज कर लूँगी। एयरपोर्ट पर उतर कर अंजलि अपने बैग से एक सलवार कमीज और अपना ब्रा निकालकर बाथरूम चली गई और वहाँ अपने कपड़े बदल लिए। वापसी पर लोकाटी ने अंजलि को एक नकली पासपोर्ट थमाया जो दिखने में बिल्कुल असली था। लोकाटी ने कहा अव्वल तो तुम मेरे साथ जा रही हो कोई तुम्हारा पासपोर्ट चेक नहीं करेगा, लेकिन अगर कोई करे भी सही तो यह अपने बैग में डाल लो जरूरत पड़ने पर दिखा देना। अंजलि ने ठीक है कह कर पासपोर्ट अपने बैग में डाल लिया और आश्चर्यजनक रूप से किसी ने भी अंजली से या किसी और व्यक्ति से वीजा या पासपोर्ट नहीं मांगा। यह काम शायद लोकाटी पहले ही करवा चुका था क्युशन से सभी तैयारी पहले से पूर्ण थी ताकि वीआईपी हस्तियों को इंतजार परेशान न करना पड़े। कुछ ही देर बाद अंजलि लोकाटी के साथ एक छोटे यात्री विमान पर सवार थी जिसमें मुश्किल से 25 लोग सवार होंगे और इन 25 में से भी 10 तो लोकाटी के लोग थे। अंजलि और लोकाटी एक साथ सीट पर बैठे थे, लोकाटी के हाथ यहाँ भी अंजलि की थाईज़ की मालिश कर रहे थे जबकि अंजलि इस बात से बेखबर आसमान की बुलंदियों से नीचे दिखने वाली जमीन का नज़ारा कर रही थी और मन ही मन में अमजद और दूसरे साथियों की खैरियत की दुआ कर रही थी और आने वाले हालात में मेजर राज की सुरक्षा और इंडिया मे उनके देश के दुश्मन धोखेबाज से मुक्ति की प्रार्थना कर रही थी

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अंजलि और राफिया को गुड बाय कह कर मेजर राज हट से निकला और सीधे एक पीसीओ पर जाकर अपने कुछ साथियों को कॉल किया जिनका करीबी रिश्ता था रॉ से। उन्हें फोन करके मेजर राज ने उन्हें हिदायत दी की कि अमजद और उसके साथियों के बारे में पता करें कि कर्नल इरफ़ान ने उन्हें छोड़ा है या नहीं, और वह खुद मेजर राज से संपर्क करने की कोशिश ना करें वो खुद ही संपर्क कर लेगा । मेजर राज के पास राफिया का सेल मौजूद था लेकिन वह इसका इस्तेमाल करके अपने साथियों को मुसीबत में नहीं फंसाना चाहता था इसलिए उसने राफिया के मोबाइल से कॉल नहीं की। राफिया का मोबाइल पास रखने का सिर्फ यही मकसद था कि कर्नल इरफ़ान अगर राफिया के मोबाइल को ट्रैक करे तो वह यही समझे कि मेजर राज उसकी बेटी को लेकर मुर्री से निकल चुका है। ताकि मुर्री में कर्नल इरफ़ान सुरक्षा न लगा दे अपनी बेटी को ढूंढने के लिए और समीरा को मौका मिल सके कि वह आराम के साथ लोकाटी के साथ इंडिया रवाना हो सके। राफिया की कार भी मेजर राज के उपयोग में थी वह मुर्री से लाहौर की ओर कूच कर रहा था क्योंकि उसका अगला लक्ष्य वो बीग्रेड की हीरोइन थी। इससे मिलकर मेजर राज जानना चाहता था कि आखिर इंडिया के खिलाफ कौन सी साजिश हो रही है जिसमें लॉलीवुड की हसीनाएँ भी शामिल हैं।



दोस्तो आज इतना ही
 
Kamini wrote: ↑ 15 Aug 2017 11:34
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करीब 3 घंटे की यात्रा के बाद मेजर राज ने राफिया की कार एक छोटे से गांव में छोड़ दिया था और राफिया का मोबाइल बंद करके उसकी सिम निकालकर उसको भी कार में ही फेंक दिया और खुद एक ग्रामीण का रूप धारण कर लाहौर की ओर रवाना हो चुका था। राफिया की कार छोड़ने के बाद मेजर राज ने कुछ सफ़र एक लोकल बस में तय किया जहां से फिर उसको उसके कुछ साथी मिल गए जो अपनी कार में मेजर राज को लाहौर तक लेकर गए। लाहौर पहुंचने से पहले ही मेजर राज को मालूम हो चुका था कि कर्नल इरफ़ान ने उसको पकड़ने के लिए लाहौर पुलिस को हाई अलर्ट कर दिया था, इसलिए वह लाहौर में प्रवेश करने से पहले ग्रामीण के हुलिए को छोड़कर एक सैनिक का रूप अपना चुका था। सैन्य वर्दी मेजर राज को उसके साथियों ने प्रदान कर दी थी और मेजर राज जानता था कि पुलिस की इतनी हिम्मत नहीं कि वह एक आर्मी ऑफिसर को रोककर उससे पूछताछ कर सकें। यही कारण था कि मेजर राज बहुत ही आसानी से लाहौर शहर में प्रवेश कर गया था। मेजर राज ने रात के पिछले पहर लाहौर में प्रवेश किया तो उसने एक छोटे होटल में रूम लेकर वहां रात बिताई। इस दौरान मेजर राज ने किसी भी साथी से संपर्क करने की कोशिश नहीं की और न ही कर्नल इरफ़ान के बारे में जानने की कोशिश की कि वह इस समय कहाँ है और क्या कर रहा है। आराम से अपनी नींद पूरी करने के बाद अगले दिन मेजर राज ने फिर से अपने साथियों को कॉन्टेक्ट किया जिनके माध्यम से यह पता लगा कि आज रात लाहौर के एक प्रसिद्ध होटल, होटल कामरान में लॉलीवुड के सितारे जलवागर होंगे। जहां लॉलीवुड के नामी हीरो और हीरोइन का एक छोटा सा शो होगा जिसमें लाहौर पुलिस को श्रद्धांजलि दी जाएगी। ये शो लाहौर पुलिस के मनोबल को बढ़ाने के लिए था। इसी शो में साना जावेद भी अपने हुस्न के जलवे दिखाने आ रही थी

मेजर राज ने निश्चय कर लिया था कि वह इस शो में भाग लेगा और साना जावेद से मिलने की भरपूर कोशिश करेगा . पहले मेजर राज ने एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी को अपने साथियों की मदद से काबू किया और उसका हुलिया अपनाकर उसका आईडी कार्ड और पहचान खुद अपना ली। फिर मेजर राज ने अंडरवर्ल्ड के कुछ लोगों से संपर्क किया और उन्हें अपना परिचय कैप्टन फ़िरोज़ के नाम से दिया और उन्हें बताया कि वह होटल कामरान में होने वाले आज के शो में भाग लेना चाहता है तो उसे वहाँ का एक पास चाहिए। और यह भागीदारी उसकी निजी स्थिति में होगी इसलिए वह सेना का प्रभाव उपयोग नहीं करना चाहता।

इसलिए किसी को भी इस बात की भनक नहीं पड़नी चाहिए कि कैप्टन फ़िरोज़ इस शो में भाग ले रहा है। पाकिस्तान में लॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में अंडरवर्ल्ड का प्रभाव कुछ ज़्यादा ही है पाकिस्तान की सरकार फिल्म उद्योग को नियंत्रित नहीं कर सकती बल्कि वहां के अंडरवर्ल्ड के लोग लॉलीवुड के हीरो और तितलियों को अपने इशारों पर नचाते हैं। यही कारण था कि मेजर राज ने अंडरवर्ल्ड के कुछ लोगों की सहायता प्राप्त की और इस शो का पास हासिल कर लिया। नाम वर अंडरवर्ल्ड गैंग से संबंध रखने या उनसे मदद लेने का सबसे बड़ा फायदा ही यह होता है कि वो लोग आपका बड़े से बड़ा अवैध काम भी कर देते हैं और रहस्य भी कभी प्रकट नहीं करते। यह सामान्य बात थी कि सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अंडरवर्ल्ड की मदद से लॉलीवुड की तितलियों को अपने बिस्तर का साथी बनाते थे इसी बात का फायदा मेजर राज को हुआ और उसे बा आसान एक पास मिला जिसके माध्यम से वो होटल कामरान में होने वाले शो में भाग ले सकता था।

रात 9 बजे मेजर राज पेंट शर्ट पहने मगर साथ में कैप्टन फ़िरोज़ का आर्मी टेग लगाए और साथ एक पिस्टल लिए कामरान होटल के सामने पहुंच चुका था जहां आने जाने वालों से न केवल पास चेक किए जा रहे थे बल्कि उनकी तलाशी भी ली जा रही थी। मेजर राज फ़िरोज़ के रूप में सुरक्षाकर्मियों के पास पहुंचा तो एक व्यक्ति उसकी तलाशी लेने के लिए आगे बढ़ा, मेजर राज ने अपना पास दिखाने के बाद जेब में हाथ डाल कर सेना का बैज निकालकर दिखाया तो सुरक्षा गार्ड सलयूट मार साइड मे हो गया और बिना तलाशी लिए फ़िरोज़ को अंदर जाने दिया। होटल के अंदर पहुंचा तो रिसेप्शन पर मौजूद एक सुंदर अंग्रेज लड़की ने कैप्टन फ़िरोज़ का स्वागत किया, लड़की ने गहरे गले वाली शर्ट पहन रखी थी जिसका ऊपर वाला बटन खुला था और लड़की के गोरे गोरे मम्मे निमंत्रण दे रहे थे। लड़की ने कैप्टन फ़िरोज़ को वेलकम कहने के बाद फिर से पास देखने की इच्छा जताई तो कैप्टन ने पास दिखाने की बजाय अपना नाम बताया, नाम सुनते ही वह लड़की एकदम चौकन्ना हो गई और दूसरे आने वाले मेहमानों को छोड़कर कैप्टन फ़िरोज़ को लेकर बड़े हॉल की तरफ बढ़ने लगी। लड़की ने कैप्टन को आगे चलने का इशारा किया और बोली सर में आपको आपकी सेट तक छोड़ आती हूँ। अंग्रेज लड़की के मुंह से उर्दू सुनकर कैप्टन फ़िरोज़ हैरान हुआ, मगर फिर खुशी व्यक्त करते हुए लड़की को आगे चलने का इशारा किया और कहा लेडीज़ फर्स्ट .

लड़की एक स्माइल पास करती हुई गलियारे से होती हुई आगे बढ़ने लगी। मेजर राज भी लड़की के पीछे पीछे उसकी बल खाती ब्लाउज और हर कदम पर बाहर निकलती गाण्ड को देख कर उसके पीछे चल रहा था। कुछ दूर जाकर लड़की ने एक बड़े हॉल कक्ष खोला और थोड़ा झुककर हाथ के इशारे से कैप्टन फ़िरोज़ को अंदर जाने का इशारा किया। कैप्टन ने उसके सुंदर मम्मों पर एक गहरी नजर डाली और थैंक यू बोलकर हॉल नुमा कमरे में प्रवेश हो गया। यह एक बहुत बड़ा हॉल था जिसमे कमोबेश 100 छोटे गोल मेज लगे हुए थे, हर टेबल के साथ 4, 4 कुर्सियों पड़ी थीं।कॉफी टेबल खाली थे, अभी मेहमानों के आने का सिलसिला जारी था। मेजर राज गहरी नज़रों से अंदर मौजूद मेहमानों की समीक्षा करने लगा। हर तरफ से सेंट की खुशबू आ रही थी, जब भी मेजर राज के पास से कोई गुज़रता तो एक नई ही खुशबू उसकी सांसों को महका देती। हर तरफ रंगीन कपड़े पहने फिल्मी सितारे दिखाई दे रहे थे। उनमें से कुछ को तो मेजर राज जानता था जब कि कुछ चेहरे उसके लिए नए थे। मगर उनके कपड़ों से मालूम हो रहा था कि वह भी फिल्म इंडस्ट्री से ही ताल्लुक रखते हैं।

कैप्टन फ़िरोज़ यानी कि मेजर राज कुछ आगे बढ़ा और साना जावेद को ढूंढने की कोशिश करने लगा, लेकिन वह कहीं नजर नहीं आई।कैप्टन के एक हाथ में सिगार था, और सिर पर एक टोपी ले रखी थी जिससे वह किसी पुरानी हिंदी फिल्म का हीरो लग रहा था। अभी कैप्टन इधर उधर देख ही रहा था कि उसके कानों में एक मधुर आवाज ने अपना रस घोल दिया, हैलो सर, आप किसी को देख रहे हैं ???

कैप्टन ने मुड़ कर देखा तो एक युवा लड़की भड़कीले चमकते कपड़े पहने उसके सामने खड़ी थी। लड़की को देखकर कैप्टन ने उसका ऊपर से नीचे तक एक्सरे किया, बिना आस्तीनों के गहरे गले वाली कमीज पहने यह लड़की अपने कमोबेश 36 आकार के मम्मों को मेजर के सामने लिए खड़ी मुस्कुरा रही थी। कैप्टन ने उसकी ओर मुस्कुरा कर देखा और अपना हाथ निकालकर हैलो बोला। लड़की ने भी अपना नरम और नाजुक हाथ मेजर के हाथ में देकर हैलो कहा तो राज ने अपना परिचय केप्टन फ़िरोज़ के रूप मे करवाया। कैप्टन का नाम सुनकर लड़की ने इंपरेस होने वाले अंदाज में एक स्माइल पास की और थोड़ा झुककर कैप्टन का स्वागत किया। कैप्टन फ़िरोज़ ने कहा, मैं तो किसी हसीन चेहरे को ढूंढ रहा था, आपको देखकर लगता है कि मेरी खोज खत्म हो गई है।कैप्टन के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर लड़की खिलखिला कर हंसी और बोली यह तो आपकी जर्रा नवाज़ी है वरना हम इसके लायक कहाँ। कैप्टन ने लड़की का हाथ छोड़ा और बोला- अब तुम बताओ कि हम आपको किस नाम से संबोधित कर सकते हैं ??

लड़की इठलाते हुए बोली वैसे तो मेरा नाम अमीना शेख है, मगर प्यार से लोग मुझे हँसी बुलाते हैं। यह सुनकर कैप्टन फ़िरोज़ ने कहा, लेकिन हम तो आपको प्यार से हनी बुलाएंगे। यह सुनकर अमीना खिलखिला कर हंस पड़ी। और उसकी क्लीवेज़ पहले से भी अधिक स्पष्ट हो गई। अमीना पंजाबी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री थी जो अपने बचपन में रोशन के साथ भी बाल कलाकार के तौर पर काम कर चुकी थी, लेकिन कैप्टन फ़िरोज़ यानी राज ने न कभी उसकी कोई फिल्म देखी थी और न ही उसका नाम सुना था। मगर ऐसी स्थिति में ये कह देना कि मैं आपको नहीं जानता उचित नहीं लगता, इसलिए राज ने स्थिति को बड़े अच्छे तरीके से हैंडल किया और बोला हनी जी अपनी फिल्मों में जितनी सेक्सी लगती हैं उससे कहीं अधिक तो आप वास्तविक जीवन में सेक्सी हैं । प्रशंसा सुनना लड़कियों की कमजोरी होती है, और अमीना भी अपनी तारीफ सुन कर खुश हो गई थी। अब वह कैप्टन फ़िरोज़ से चिपक चिपक कर खड़ी हो रही थी और कैप्टन भी उसके शरीर की नजाकत और खूबसूरती से मजे ले रहा था

कुछ देर अधिक इधर उधर की बातें करने के बाद अमीना को फिल्मों के ही एक नायक ने फोन किया और अपने पास बुलाया तो अमीना ने कैप्टन फ़िरोज़ की जान छोड़ी और फिर मिलने का कह कर वहां से चली गई। अमीना के जाने के बाद मेजर राज फिर से साना जावेद को ढूंढ़ने लगा, इस बीच उसको वहां पर पाकिस्तानी फिल्मों के प्रसिद्ध नायक मोहम्मद अली भी मिले और कैप्टन फ़िरोज़ ने उनके साथ सरसरी चर्चा की। इसी तरह लॉलीवुड के कुछ नामचीन अभिनेताओं से भी कैप्टन फ़िरोज़ यानी मेजर राज की मुलाकात हुई मगर मेजर राज को तो तलाश थी साना जावेद की। जो न केवल उसके मिशन के लिए बहुत जरूरी थी बल्कि उसकी सर्वाधिक पसंदीदा हीरोइन भी थी। राज ने साना जावेद की सभी फिल्में देख रखी थीं और वह उसके शरीर के उभारों से काफी प्रभावित था। खासकर साना जावेद के ब्रा में छिपे हुए बड़े बड़े मम्मे उसे हमेशा मुठ मारने पर मजबूर कर देते थे। लेकिन अफसोस कि मेजर राज को अभी तक साना जावेद की एक झलक तक दिखलाई नहीं दी थी लेकिन वहां मौजूद बाकी अभिनेत्रियों के छोटे कपड़ों से झलकते उनके सेक्सी और गर्म शरीर देखकर राज को अपनी पैंट में हलचल महसूस हो रही थी। प्रत्येक हीरोइन को देखकर लगता था कि इसके मम्मे सबसे बड़े होंगे और उसकी क्लीवेज़ सबसे सेक्सी है, लेकिन जैसे ही वह अगली अभिनेत्री को देखता तो उसे लगता असली मम्मे तो इसके हैं पहले वाले तो कुछ भी नहीं थे। किसी के मम्मे तो किसी की गांड, एक से बढ़कर एक अहसास मिल रहा था मेजर राज को और उसकी पेंट में मौजूद लोड़ा उसे बेचैन किए जा रहा था

फिर अचानक राज की नज़र एक कोने में मौजूद टेबल पर पड़ी जहां एक इंतिहाई सुंदर और सेक्सी अभिनेत्री बैठी थी, और मेजर राज उसे जानता भी था। मगर आश्चर्यजनक रूप से वह बिल्कुल अकेली बैठी थी और उसके साथ न तो कोई अभिनेता था और न ही कोई अभिनेत्री। ऐसी महफ़िल में इतनी सेक्सी लड़की का अकेले बैठना वास्तव में आश्चर्य की बात थी। मेजर राज के कदम स्वतः ही उसकी तरफ बढ़ने लगे, उसके पास जाकर राज ने बेहद विनम्र स्वर में कहा अगर आप बुरा न मानें तो क्या मैं कुछ देर आपके साथ बैठ सकता हूँ?

उस लड़की एक दम चौंक कर कैप्टन की तरफ देखा, इससे पहले कि वह कुछ कहती मेजर राज ने उसके सामने अपना हाथ बढ़ाया और अपना परिचय करवाते हुए अपना नाम केप्टन फ़िरोज़ बताया।कैप्टन का नाम सुनकर लड़की के चेहरे पर मुस्कान आई और वह बोली यस व्हाई नॉट। प्लीज़ बैठिए .

मेजर अब उसके साथ वाली कुर्सी पर बैठ गया और दिल ही दिल में उसके सेक्सी बदन की तारीफ करने लगा। ये अश्लील फिल्म उद्योग की प्रसिद्ध अभिनेत्री ऐनी जाफ़री थी। पाकिस्तानी मूल की अभिनेत्री कनाडा की रहने वाली थी और अश्लील फिल्मों में उल्लेखनीय स्थान रखती थी। हाल ही में उसने पाकिस्तानी फिल्मों में काम करना शुरू किया था और उसकी लॉलीवुड की पहली फिल्म हाल ही में रिलीज हुई थी। उसकी फिल्म तो अच्छा बिजनेस कर रही थी मगर लॉलीवुड में उसे विशेष मान्यता नहीं मिली थी। केवल साथी अभिनेत्रियों का ऐनी जाफ़री को विरोध का सामना पड़ा था क्योंकि उनका मानना था कि अश्लील फिल्म उद्योग से आने वाली अभिनेत्री को लॉलीवुड में जगह नही मिलनी चाहिए, जबकि ऐनी जाफ़री और उसके कुछ चाहने वालों का मानना था कि अगर कोई अभिनेत्री अतीत में गंदी फिल्मों में काम करती रही है और अब यह काम छोड़ चुकी है तो लॉलीवुड में उसको जगह मिलनी चाहिए ताकि वो अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सके। यही वजह थी कि ऐनी जाफ़री इस समय हॉल में अकेली बैठी थी। कुछ अभिनेता उससे जरूर मिलना चाहते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि ऐनी जाफ़री अश्लील स्टार है तो ऐसी लड़की जो फिल्मों में सबके सामने चुदवाने में शर्म महसूस नहीं करती वह ज़रूर उनके बिस्तर को भी खूब गर्म कर सकती है, लेकिन अपनी साथी अभिनेत्रियों की नाराजगी के डर से अभी तक किसी ने ऐनी जाफ़री के पास जाने की हिम्मत नहीं थी। सरसरी बातचीत तो सब कर लेते थे मगर नियमित कंपनी देने के लिए ऐनी जाफ़री के पास कोई नहीं था।

 


मेजर राज ऐनी जाफ़री के पास बैठ कर बहुत खुशी महसूस कर रहा था। कुछ देर दोनों इधर उधर की बातें करते रहे, मेजर राज ने अपना परिचय करवाने के अलावा अपने बारे में और अपनी उपलब्धियों के बारे में ऐनी जाफ़री को बहुत कुछ बताया। जाहिर सी बात है मेजर राज ने जो कुछ कहा वह झूठ पर आधारित था, क्योंकि वह तो वास्तव में इंडियन आर्मी का मेजर राज था, जबकि यहाँ वह पाकिस्तानी सेना के कैप्टन के रूप में ऐनी जाफ़री के सामने बैठा था। मगर ऐनी जाफ़री इन झूठे कारनामों से भी काफी प्रभावित हो गई थी। वैसे भी कोई और तो उसको कंपनी नहीं दे रहा था, ऐसे में एक कैप्टन की कंपनी मिल जाना बड़ी बात थी, ऐनी जाफ़री ने भी सुन रखा था कि लॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में सफल होना है तो आपका अंडरवर्ल्ड का साथ या फिर सेना में अच्छा संबंध होना चाहिए। यही सोच कर ऐनी जाफ़री मेजर राज से बिना हिचक बातचीत कर रही थी

बातें करते करते मेजर राज ने ऐनी जाफ़री को कहा, ऐनी जाफ़री जी आप मेरी पसंदीदा हीरोइन हैं ... मैंने आपकी सब फिल्में देख रखी हैं ... मेजर राज की बात सुनकर ऐनी जाफ़री हैरान हुई और बोली लेकिन मेरी तो अभी तक केवल एक ही फिल्म रिलीज हुई है ... अब की बार मेजर राज थोड़ा संकोच और शर्मा कर बोला, नहीं वास्तव में आप समझी नहीं, वूऊऊओ । । आपकी दूसरी फिल्मों की बात कर रहा हूँ .. यह कहते हुए मेजर राज की नजरें ऐनी जाफ़री के 38 आकार के मम्मों पर थी जो उसकी गहरे गले वाली कमीज फाड़ कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। ऐनी जाफ़री भी समझ गई, मगर बिना हिचके उसने एक ठहाका लगाया और बोली अच्छा, तो वह फिल्म भी देख रखी हैं। और किस किस की फिल्में देखते हैं आप ???

मेजर राज बोला अजी और तो किसी की भी फिल्म मिल जाए देख ही लेता हूँ, मगर आपकी फिल्म तो ज़रूर देखता हूँ। अब की बार ऐनी जाफ़री ने इठलाते हुए पूछा कि आखिर मेरी फिल्में ही क्यों ??? मुझसे भी सुंदर लड़कियाँ इन फिल्मों में काम करती हैं उनकी फिल्में क्यों नहीं इस तरह देखते जिस तरह मेरी हर फिल्म देखते हो ???

इस पर मेजर राज बोला, ऐनी जाफ़री जी एक तो आप अपने ही देश की हो, देसी सौंदर्य की बात ही कुछ और होती है, दूसरी फिल्म में जिस तरह आप सेक्स से भरपूर आवाज निकालती है, वह कोई और नहीं निकालती . आपकी फिल्म देखकर लगता है जैसे वास्तव में आप हमारे सामने ही बिना कपड़ों के सेक्स कर रही हैं। अब की बार ऐनी जाफ़री ने कहा .. वैल ..... मगर फिर भी कोई तो और हीरोइन होगी अश्लील फिल्मों की जो आपको पसंद होगी ?? ऐनी जाफ़री की बात सुनकर राज ने एक गहरी सांस ली और बोला, अगर किसी दूसरी हीरोइन के बारे में जानना चाहती हैं तो मुझे टोरी ब्लैक बहुत पसंद है। ऐनी जाफ़री ने पूछा क्यों वह पसंद है ???

मेजर राज ने कहा कि एक तो उसने दूसरी अश्लील सितारों की तरह अपने बूब्स बड़े नहीं करवाए, उसके बूब्स थोड़े छोटे हैं मगर प्राकृतिक हैं। दूसरी बात उसने अपने आपको बहुत फिट रखा है और तीसरी बात वो भी सेक्स को ठीक उसी तरह एंजाय करती है जैसे आप। यह सुनकर ऐनी जाफ़री खिलखिला कर हंस पड़ी। और बोली अच्छा आपको टोरी ब्लैक का सबसे अच्छा सेक्स सीन कौन सा लगा ??

राज ने फिर से जवाब दिया टोरी ब्लैक मूवी आई वाना बैंग योर सिस्टर में टोरी ब्लैक बहुत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ऐनी जाफ़री ने पूछा और मेरी फिल्म ??? इस पर मेजर राज थोड़ा मुस्कुराया और बोला आपने अमेरीका में आप रीबियका के साथ जो समलैंगिक सेक्स किया उसको देखकर तो मैं बहुत बार बाथरूम में। । । इससे पहले कि मेजर राज अपनी बात पूरी करता ऐनी जाफ़री ने उसे टोक दिया बस बस बस .... मैं समझ गई ... यह कह कर वह हंसी और एक शरमाती हुई बोली, कप्तान साहब आप शादीशुदा हैं ???

यह सवाल सुनकर कैप्टन ने एक ठंडी आह भरी और बोला अभी तो मुझ गरीब के लिए एक लड़की ने भी हाँ नहीं भरी ... शायद कोई मिल जल्द ही .. यह सुनकर सुन ऐनी एक बार फिर से खिलखिला कर हंसी और बोली अच्छा तो ये कारण है कि आप मेरी फिल्में देख देख कर ही गुजारा करते हैं और वो भी बाथरूम में। । । । । । बात पूरी किए बिना ही ऐनी फिर खिलखिला कर हंसने लगी, लेकिन अब की बार मेजर राज थोड़ा अकड़ कर बैठ गया और बोला नहीं जी अब ऐसी कोई बात नहीं, वह तो आपका प्यार है कि मैं आपकी फिल्में देखता हूँ, वरना बिस्तर गर्म करने के लिए लड़कियों की कमी नहीं है। आपको तो पता ही है पाकिस्तान में सेना अधिकारी के लिए तो लड़कियाँ मरी जाती हैं, और सेना अधिकारी से हर लड़की ही दोस्ती करना चाहती है। तो मेरी भी कुछ लड़कियां हैं जो दोस्त भी हैं, और पत्नी की कमी महसूस नहीं होने देतीं। उनके साथ अच्छा समय गुजरता है।

यह सुनकर ऐनी जाफ़री ने कहा वाह, फिर तो खूब मस्त जिंदगी गुजर रही है आपकी। अब मेजर राज ऐनी जाफ़री के और करीब हो गया और बोला ऐनी जाफ़री जी आप बुरा न माने तो एक रहस्य की बात पूछूँ ??

ऐनी जाफ़री ने कहा, हां पूछो ..

मेजर राज बोला ऐनी जाफ़री जी आप की ज्यादातर फिल्में समलैंगिक ही हैं जिन्हें आप किसी दूसरी लड़की के साथ सेक्स करती हैं, या फिर अगर कोई आदमी साथ हो तो उसका डिक तुम सक करती हो मुंह में लेकर। मगर आपकी बहुत ही कम फिल्में हैं जिनमे आपने किसी पुरुष के साथ पूर्ण सेक्स किया हो। ऐसा क्यों? यह सुनकर ऐनी जाफ़री ने कहा कि ऐसी बात नहीं, मेरी ऐसी कई फिल्में हैं, लेकिन इंटरनेट पर ऐसी बहुत कम फिल्में उपलब्ध हैं, ज्यादातर वे हैं जो समलैंगिक सेक्स पर हैं, जिनमें कोई व्यक्ति मुझे चोद ..... .... ओह सॉरी ... मेरा मतलब है जिसमें कोई आदमी मेरे साथ सेक्स कर रहा हो ऐसी फिल्में इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन अगर आप चाहें तो मैं आपको अपनी वो फिल्में भी दे सकती हूं।

ये सुनकर मेजर राज ने एक ठहाका लगाया और बोला जब तक आप से मिले नहीं थे तब तक तो फिल्मों से काम चल जाता था। लेकिन आज जब मिल ही लिया तो फिल्म की बजाय आपको ही बजाएँगे ....... । यह कह कर मेजर राज ने एक शातिर मुस्कान से ऐनी को देखा और अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया। ऐनी जाफ़री भी कैप्टन का मतलब समझ गई थी। वह भी मुस्कुरा दी मगर उसने इस बात का जवाब देना उचित नहीं समझा।

उसके बाद कुछ देर और मेजर राज ऐनी जाफ़री के साथ बातें करता रहा जिसमें उसकी नई आने वाली उर्दू फिल्म चर्चा का विषय रही। इस दौरान कैप्टन की नजरें लगातार साना जावेद को तलाश करती रहीं, लेकिन वो अब तक नजर नहीं आई थी। फिर मेजर राज ने ऐनी जाफ़री से फिर से अश्लील फिल्मों और सेक्स के बारे में बात करना शुरू कर दिया, क्योंकि मेजर राज का लंड ऐनी जाफ़री को अपने सामने देखकर बैठने का नाम नहीं ले रहा था। और जब ऐनी जाफ़री को भी सेक्स पर बात करने से कोई हिचक नहीं थी तो ऐसे में कोई भी आदमी भला कैसे ऐनी जाफ़री के साथ किसी और विषय पर बात कर सकता था। अब की बार मेजर राज ने ऐनी जाफ़री से पूछा कि जिन लोगों के साथ आपने अश्लील फिल्मों में काम किया है, और जिन्होने आप फक किया, क्या वह फिल्म के अलावा भी आपके साथ फकिंग करते हैं या महज फिल्म सीमा तक ही होता है ??

मेजर राज के इस सवाल पर ऐनी हल्का सा मुस्कुराई और बोली मान लीजिए आप मेरे साथ फिल्म में काम कर रहे हैं और फिल्म की शूटिंग के दौरान आपने कैमरामैन, निर्देशक और अन्य स्टाफ के सामने मुझे फक किया, तो क्या आप बिना कैमरे के भी मुझे फक करना पसंद करेंगे ???

इस पर मेजर राज ने तुरंत कहा जी बिल्कुल, भला दूसरे लोगों के सामने फक करने का क्या मजा है, जिसमे बार बार ब्रेक भी लगे, निर्देशक के कहने पर स्थिति भी चेंज करनी पड़े, अपनी कोई इच्छा ही न हो, अगर कैमरा के सामने मैं आपकी लूँगा, तो कैमरे के बिना तो मैं आपकी दबा कर मारूँगा।

कैप्टन के इस बोल्ड जवाब पर ऐनी जाफ़री खिलखिला कर हंसी और बोली बस बाकी जो अश्लील सितारे मेरे साथ काम करते हैं और फिल्म में मुझे फक करते हैं, वे भी फिल्म के अलावा मेरी दबा कर मारते हैं। यह कह कर ऐनी जाफ़री एक बार फिर खिलखिला कर हंस पड़ी।

फिर मेजर राज ने ऐनी से पूछा फिल्म के हीरो के अलावा जो लोग चारों ओर खड़े होते हैं, उनका दिल नहीं करता उस समय सेक्स करने को ??? इस पर ऐनी जाफ़री ने कहा कि वह पहले से ही किसी ना किसी की ले चुके होते हैं, और जो हीरोइन का फक सीन होता है उसको पहले तो निर्देशक खुद नीचे लिटा कर उसकी लेता है तब हीरो को मौका मिलता है कैमरा के सामने उसकी लेने का। इसके अलावा कभी कभी कैमरामैन भी फरमाइश कर देता है तो उसको भी देनी पड़ती है। यह सब तो चलता ही रहता है वहाँ पर। एक लड़की को एक ही दिन में 4 से 5 लोग तो ज़रूर फक करते हैं।

फिर मेजर राज एक मुस्कुराता हुआ बोला कभी किसी आर्मी वाले को भी दी है आपने या बस फिल्म निर्देशकों और हीरो को ही देती रही हैं आज तक ???

अब की बार ऐनी जाफ़री थोड़ी सी आगे झुकी अपनी कोहनी टेबल पर रख कर अपना चेहरा अपने हाथों में रखा और बोली आज तक तो नहीं, लेकिन लगता है कि आज तो देनी ही पड़ेगी आर्मी ऑफिसर को भी। यह कह कर ऐनी जाफ़री ने अपनी एक टांग दूसरे पैर के ऊपर रखी और पैर हल्का सा घुमा कर इस स्थिति में ले आई कि उसके जूते की एड़ी सीधी मेजर राज के दोनों पैरों के बीच मौजूद हथियार पर जाकर लगी। ऐनी जाफ़री की इस अचानक हरकत से मेजर राज एकदम अपनी कुर्सी पर हिल कर रह गया, लेकिन उसके बाद फिर से आराम से बैठ गया और ऐनी जाफ़री की गहरे गले वाली शर्ट से झांकते मम्मों पर नजरें जमा कर बोला फिर क्या कार्यक्रम है ???

कैप्टन की बात सुनकर ऐनी जाफ़री अपनी जगह से खड़ी हुई और मेजर राज की तरफ हाथ बढ़ाकर बोली चलें ... ऐनी जाफ़री की इस अचानक ऑफर से मेजर राज हडबड़ा उठा था, उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि ऐनी जाफ़री यूं एकदम से तैयार हो जाएगी और उसे अपनी चूत देने की पेशकश कर देगी। मगर अब जब कि लड़की खुद ऑफर कर रही थी तो उसको मना करना भला कहां की मर्दानगी थी। मेजर राज ने ऐनी जाफ़री का हाथ थामा और उसके साथ चल दिया। ऐनी जाफ़री बड़े हॉल से निकल कर एक गलियारे से होती हुई सामने लगी लिफ्ट की ओर बढ़ रही थी। उसके शरीर से आने वाली महक मेजर राज को पागल कर रही थी। ऐनी जाफ़री ने अपना एक हाथ मेजर राज के बाजू में डाला हुआ था और उसके साथ लिफ्ट से बढ़ रही थी। राज कभी तो सामने लिफ्ट की तरफ देखता तो कभी उसकी नजरें ऐनी के सीने पर चली जातीं, जहां दोनों मम्मों के मिलान में गहरी क्लीवेज़ निमंत्रण दे रही थी। राज मन ही मन सोच रहा था कि इसके मम्मों के बीच अगर उसका लंड हो और दोनों मम्मों को मिला कर उनकी खूब चुदाई की जाए तो कैसा मज़ा आएगा

लिफ्ट के सामने पहुंचकर ऐनी जाफ़री ने लिफ्ट को ऊपर बुलाया और कुछ ही देर के बाद लिफ्ट का दरवाजा खुला तो अंदर से माया अली और फराद ख़ान निकले। माया अली ने तो ऐनी को देखते ही गुस्सा व्यक्त किया और तुरंत ही सामने देखने लगी, जबकि फराद ख़ान की नज़रों ने ऐनी का एक आकर्षक मुस्कान के साथ स्वागत किया और फिर उसके सीने का निरीक्षण करते हुए माया अली के साथ ही आगे चल निकला । मेजर राज ने माया अली की भी काफी फिल्में देख रखी थीं और आज मेजर राज को वास्तव एहसास हुआ कि माया अली बहुत लंबी लड़की है, वह करीब करीब मेजर राज के बराबर ही थी लंबाई में।

अब ऐनी जाफ़री और मेजर राज लिफ्ट में मौजूद थे और ऐनी ने ऊपर वाली मंजिल का बटन दबाया तो राज ने कहा कि होटल में कोई कमरा रिजर्व है क्या ??? तो ऐनी एकदम से हंसी और बोली नहीं, हम यहाँ मेहमान के रूप में रहने नहीं आए, बस समारोह के लिए हॉल की बुकिंग है उसके अलावा कोई कमरा बुक नहीं। तो मेजर राज ने कहा फिर हम कहां जा रहे हैं

ऐनी जाफ़री मुस्कुराई और बोली लगता है आप कभी पहले ऐसी किसी महफिल में शरीक नहीं हुए, अन्यथा आपको पता होता कि यहां क्या कुछ होता है। मेजर राज अब थोड़ा संकोच के साथ बोला नहीं मैं वास्तव पहले ऐसी किसी पार्टी या समारोह में नहीं आया। ऐनी जाफ़री ने कहा बस फिर जहां जा रही हूँ तुम भी वहीं चलो मेरे साथ तुम्हें लग जाएगा पता। इतने में लिफ्ट फिर से रुक गई और लिफ्ट का दरवाजा खुल गया तो ऐनी जाफ़री एक गलियारे में से गुजरने लगी, मेजर राज भी उसके साथ था। नीचे की मंजिल की तुलना मे यहां भीड़ ना के बराबर थी, गलियारे के दोनों साइड में कमरे थेमगर सब बंद पड़े थे, या तो उन में कोई था नहीं या फिर यह उनके बाहर निकलने का समय नहीं था।

 
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