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वतन तेरे हम लाडले complete

गेलरी समाप्त हुई तो ऐनी जाफ़री दाईं ओर मुड़ गई और थोड़ी दूर जाकर मेजर राज को रुकने का इशारा किया और खुद थोड़ा आगे जाकर बाईं ओर एक दरवाजे में प्रवेश कर गई कुछ ही सेकंड के बाद ऐनी जाफ़री फिर से दरवाजे से बाहर निकली और मेजर राज को अंदर आने का इशारा किया। मेजर तुरंत उसकी तरफ बढ़ा, लेकिन अंदर जाने से पहले कैप्टन ने जब कमरे का नंबर नोट करने के लिए ऊपर की ओर देखा तो उसे यह देखकर शॉक लगा कि वह कमरा नहीं बल्कि महिलाओं का बाथरूम था . इससे पहले कि राज कुछ सोचता, ऐनी जाफ़री ने उसका हाथ पकड़ा और उसे अंदर खींच लिया। अंदर लाइन में आमने सामने करीब 15 से 16 छोटे दरवाजे थे, ऐनी जाफ़री मेजर राज को खींचती एक दरवाजे के पास जाकर रुकी और दरवाजा खोलकर राज को भी अंदर ले गई और तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। अंदर एक कमोड लगा हुआ था। ऐनी जाफ़री दीवार के साथ लग कर खड़ी हो गई और दरवाजा बंद करते ही राज को कॉलर से पकड़ कर अपने पास खींच कर अपने सीने से लगा लिया और अपने होंठ राज के होंठों पर रख कर उन्हें चूसने लगी

मेजर राज के लिए यह सब कुछ बहुत आश्चर्यजनक और अचानक हुआ था वह कुछ भी समझ नहीं पाया था, उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस हालत मे लेडीज़ बाथरूम में, वो भी जो जनता के लिए हों उसमे किसी लड़की की चूत मारेगा। लेकिन अब ऐसी बातें सोचने का समय नहीं था, अब राज के हाथ भी ऐनी के कमरे के पीछे जा चुके थे और वह ऐनी जाफ़री की नग्न कमर कसकर पकड़ कर उसे अपने और भी करीब कर लिया था और उसके रसीले होंठ चूसने में व्यस्त हो गया था। ऐनी जाफ़री को राज की पेंट में से एक मोटी चीज़ की अपनी चूत पर चुभन महसूस हो रही थी जिससे ऐनी जैसी अनुभवी लड़की समझ लग गई थी कि आज उसे एक तगड़ा लंड चोदने वाला है। मेजर राज अब बहुत देर ऐनी जाफ़री के रसीले होंठों से रस चूसने के मूड में था मगर ऐनी ऐसे स्थानों पर चुदाई की विशेषज्ञ थी, वह जानती थी कि ऐसी जगह पर सेक्स करने के लिए चूमा चाटी की बजाय सीधे लंड योनी का मिलान करके बढ़ना चाहिए और कम से कम समय में अधिक से अधिक लंड का मज़ा ले लेना चाहिए। इसीलिए थोड़ी देर के बाद ही ऐनी जाफ़री ने राज को अपने से दूर किया और राज के सामने बैठ गई और बैठते ही उसने अपना हाथ राज के लंड पर रखा और एक बार नज़रें उठाकर राज की ओर प्रशंसा की दृष्टि से देखकर उसकी बेल्ट खोलने के बाद पेंट की जिप भी खोल दी और फिर पेंट का हुक खोल कर अपना हाथ मेजर राज के अंडर वीयर में डाल कर उसका मोटा और तगड़ा लंड निकाल लिया। ऐनी जाफ़री ने कुछ पल के लिए मेजर राज के लंड को पकड़कर उसको टोपी से लेकर जड़ तक देखा और फिर अपना मुंह खोलकर लंड की टोपी पर रखा और अपने होंठों को टोपी के आसपास गोल गोल घुमाने लगी।

वैसे तो ऐनी जाफ़री ने ऐसे लंबे लंड भी देख रखे थे मगर जब से वह पाकिस्तान आई थी तब से यहाँ कोई इतना लंबा लंड चुदाई को नहीं मिला था इसलिए वह खुश थी कि आज काफी समय बाद कोई तगड़ा लंड उसकी चुदाई करेगा । कुछ देर तक टोपी पर ज़ुबान फेरने के बाद अब ऐनी जाफ़री राज के लंड की चुसाइ लगा कर उसे गीला कर रही थी। और मेजर राज को आज सही मायने में चुसाइ लगवाने का मज़ा आ रहा था। आज एक पेशेवर रंडी उसके लंड की चुसाइ करने में व्यस्त थी इसीलिए राज का मन कर रहा था कि वह देर तक उसके लंड को चूसती रहे मगर कुछ ही देर के बाद ऐनी जाफ़री ने राज के लंड को मुंह से निकाल कर उसके आंडों को हाथ में पकड़ा और फिर उन्हें मुट्ठी में बंद करके थोड़ा आंडों को मुट्ठी से बाहर निकाल कर उन्हें अपनी जीभ से चूसने लगी। राज के लिए यह एक नया अनुभव था और उसे बहुत अच्छा लग रहा था। मेजर राज मुंह ऊपर करके लम्बे सांस ले रहा था और ऐनी की ज़ुबान का मज़ा अपने आंडों पर महसूस कर रहा था कि अचानक उसे सिसकियों की आवाजें आने लगीं।

राज ने मुंह नीचे करके ऐनी जाफ़री को देखा मगर वह तो उसके आँड चूसने में व्यस्त थी। राज ने इधर उधर नज़रें दौड़ाई तो उसने देखा कि साथ वाले किसी बाथरूम से यह किसी लड़की की सिसकियों की आवाजें हैं। राज समझ गया कि साथ वाले बाथरूम में भी यही काम जारी है, मगर उसको इससे क्या, उसके आँड तो उस समय पाकिस्तान की सबसे बड़ी रंडी अपने मुँह में लेकर चूस रही थी तो उसका ध्यान फिर से अपने आंडों की ओर चला गया। कुछ देर आँड चूसने के बाद ऐनी जाफ़री ने एक बार फिर राज के लंड अपने मुंह में डाला और उस पर खूब जोरदार ढंग से चूसने लगी

फिर ऐनी जाफ़री अपनी जगह से खड़ी हुई और अपनी एक टांग उठा कर साथ लगे कमोड पर रख दी और अपना लिबास जो मुश्किल से उसकी थाईज़ तक था उसे ऊपर उठा कर अपने चूतड़ों से भी ऊपर ले गई बल्कि अपनी नाभि तक ऊपर उठा दिया। नीचे से ऐनी जाफ़री ने लाल रंग की सुंदर पैन्टी पहन रखी थी। ऐनी जाफ़री ने अपनी पैन्टी का फ्रंट हिस्सा साइड पर करके अपनी योनी नग्न कर दी। राज की नजरें जैसे ही ऐनी जाफ़री की गुलाबी योनी पर पड़ी वह तुरंत उसे चाटने के लिए नीचे झुकने लगा मगर ऐनी जाफ़री ने उसे पकड़ कर झुकने से मना किया और धीमी आवाज़ में बोली अभी समय नहीं है तुम बस अंदर डालो। यह कह कर ऐनी जाफ़री ने राज का तगड़ा लंड अपने हाथ में पकड़ा और उसे खींच कर अपनी योनी के पास कर लिया। मेजर राज का लंड अब ऐनी जाफ़री की योनी से टकरा रहा था. राज ने इधर उधर देखा और बोला चीख मत मारना मैं अंदर डालने वाला हूँ। ऐनी जाफ़री ने एक मामूली ठहाका लगाया और बोली तुम चिंता मत करो मेरी चीखें निकालना तुम्हारे बस की बात नहीं, तुम बस अंदर डालो और शुरू हो जाओ .

मेजर राज को भी अपनी मूर्खता का एहसास था, भला जो रंडी दिन में 3, 4 लंड अपनी योनी मे पहले सेट करवाती हो उसकी एक लंड से कैसे चीखें निकलेंगी। यह सोच कर राज ने अपने लंड की टोपी ऐनी जाफ़री के योनी छेद पर रखी जहां हल्के हल्के बाल थे। टोपी रखते ही राज को अंदाज़ा हो गया था कि ऐनी जाफ़री की योनी न केवल गर्मी से दहक रही है बल्कि वह गीली भी खूब है। राज ने योनी के छेद पर टोपी रखकर एक जोरदार धक्का लगाया तो राज का 8 इंच का लोड़ा ऐनी जाफ़री की योनी की दीवारों को चीरता हुआ उसकी गहराई तक उतर गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ऐनी जाफ़री की एक भी चीख नहीं निकली बल्कि उसकी आंखों में एक अजीब सा नशा था और होठों पर मुस्कान थी। राज ने यह देखकर बिना रुके ऐनी जाफ़री की योनी में अपने लंड से धक्के लगाने शुरू कर दिए, ऐनी जाफ़री का पैर जो कमोड पर था अब राज ने उसको अपने हाथ पर रख लिया था, ऐनी जाफ़री ने ऊँची एड़ी वाली जूती पहन रखी थी जिसकी वजह से उसकी योनी राज के लंड के बिल्कुल निशाने पर थी और उसको चोदने के लिए मुड़ना नहीं पड़ रहा था वरना आमतौर पर पुरुष को महिला की चुदाई अगर खड़े होकर करनी पड़े तो उसको थोड़ा झुकना पड़ता है जिसकी वजह से चुदाई करने में मुश्किल होती है। मगर यहां लंड और योनी बिल्कुल परफेक्ट स्थिति में थे कि दोनों में से किसी को भी झुकना नहीं पड़ा और लंड और योनी का बा आसानी मिलान हो गया था।

कुछ देर तक राज ऐनी जाफ़री की योनी में धक्के लगाता रहा और धपधुप की हल्की हल्की आह आह ह ह ह ...उफफफ्फ़ एफ। एफ। एफ। एफ की सिसकियां लेती रही, उसके साथ राज ऐनी जाफ़री के रसीले होठों से उनका रस भी चूसता रहा, मगर फिर राज को ऐनी के 38 आकार के पहाड़ जैसे नरम नरम मम्मों का विचार आया तो राज ने ऐनी की गहरे गले वाली कमीज में अपना हाथ डाला और उसका एक मम्मा पकड़ कर कमीज से बाहर निकाल लिया। कमीज की बजाय शर्ट कहना ज्यादा उचित होगा। मम्मा बाहर निकाला तो उस पर मौजूद एक मोटा सा खड़ा निपल देखकर मेजर राज की राल टपकने लगी उसने तुरंत ही ऐनी के मोटे मम्मे को अपने हाथ में पकड़ लिया और अपना चेहरा नीचे करके ऐनी के खड़े हुए निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा। उसके साथ साथ नीचे से धक्के लगाने की प्रक्रिया को भी राज ने जारी रखा।

इस समय लेडीज़ बाथरूम में 2 महिलाओं की चुदाई रही थी, एक तो ऐनी जाफ़री थी जिसकी चिकनी योनी में कैप्टन फ़िरोज़ यानि मेजर राज का 8 इंच शक्तिशाली लंड था जबकि दूसरी ओर कौन लड़की थी और उसकी चूत में किसका लंड उसको सिसकियाँ लेने पर मजबूर कर रहा था इस बात का अब तक पता नहीं चल सका था। राज का ध्यान ऐनी जाफ़री को चोदने के साथ कभी-कभी दूसरी लड़की पर भी जाता कि आखिर पता तो लगे है कौन ?? मगर उसकी सिसकियों और हल्की चीखों से इस बात का अनुमान लगाना संभव नहीं था। कुछ देर बाद राज ने ऐनी जाफ़री का दूसरा मम्मा भी उसकी शर्ट से बाहर निकाल लिया और अब एक हाथ से ऐनी जाफ़री का पैर उठाए उसके मम्मे को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और बाईं मम्मे का निपल्स अपनी उंगलियों में लेकर उसको मसलने लगा। मेजर राज की इस हरकत ने ऐनी जाफ़री की सिसकियों को थोड़ा बढ़ा दिया था, राज का लंड ऐनी जाफ़री के अनुमान से कुछ ज्यादा ही मोटा था यही वजह थी कि उसको काफी दिन के बाद चुदाई का कुछ मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर तक इसी स्थिति में ऐनी जाफ़री को चोदने के बाद राज ने ऐनी का पैर वापस नीचे रखा और फिर उसकी योनी से अपना लंड बाहर निकाल लिया। फिर उसने ऐनी का पैर खोला और अपने दोनों हाथ उसकी टांगों के बीच ले जा कर ऐनी जाफ़री को अपनी गोद में ऊपर उठा लिया, ऐनी जाफ़री की कमर बाथरूम की कमजोर दीवार के साथ लग गई और राज ने अपने एक हाथ से अपना लोड़ा पकड़ कर ऐनी जाफ़री की योनी के ऊपर फिट करके ऐनी का वजन वापस नीचे डाला तो सारा लंड शरप की आवाज के साथ ऐनी जाफ़री की चूत में घुसता चला गया, अब राज ने जोरदार धक्के लगाना शुरू किया तो ऐनी के वजन से बाथरूम की कमजोर दीवार हिलने लगी। यह देखकर राज ने ऐनी की चूत में धक्के रोके और उसे उठा कर दूसरी ओर बाथरूम की एक दीवार के साथ ले गया, जो गत्ता नहीं बल्कि ईंट पत्थर से बनी हुई थी ऐनी की कमर दीवार के साथ लगाकर राज ने फिर से ऐनी की चूत में खुदाई शुरू की, अब की बार ऐनी के दोनों मम्मे राज के मुंह के बिल्कुल सामने थे और वो बहुत ही बेसब्री से उन्हें चूस रहा था, अब मेजर राज के धक्कों की गति पहले की तुलना में बहुत अधिक थी और ऐनी जाफ़री की सिसकियाँ भी अब की बार पहले की तुलना में बहुत तेज थीं।

ओह हु हु ..... फक मी बेबी, कम ऑन, फक मी हार्ड .... आह ह ह ह ह ह फक मी हारडर। । । । .. आह ह ह ह ह बेबी .. । । यस।यस .. । यस। । फक मी लाइक विच । । । आह ह ह ह ह, उफ़ एफ एफ एफ एफ एफ एफ। आह ह ह आह ह ह आह ह ह आह ह ह, ओह माई गॉड, यू आर रियल गुड इन फकिंग बेबी, यू हैव स्ट्रॉंग डिक बेबी। फक मी लाइक ए बिच ... आह आह आह। । ऐनी जाफ़री की आवाज अब निश्चितही बराबर वाले बाथरूम में चुदाई करवाती लड़की के कानों तक भी जा रही थीं तभी उसने भी अब अपनी सिसकियों में वृद्धि कर दी थी और अपनी चुदाई करने वाले पुरुष के लंड की बढ़ाई शुरू कर दी थीं

ऐनी जाफ़री की सिसकियों और सेक्सी आवाजों ने राज को सातवें आसमान तक पहुंचा दिया था। अब वह बहुत जल्दी और बेरहमी से ऐनी जाफ़री की चुदाई कर रहा था जिससे अब वास्तव में ऐनी जाफ़री की चीखें निकलना शुरू हो गईं थीं मगर वह अद्भुत कौशल से अपनी चीखों पर काबू पा रही थी ताकि आवाज कम से कम बाथरूम से बाहर न जाए। मगर कुछ ही देर में ऐनी जाफ़री को लगा कि उसकी चूत की दीवारों में बाढ़ आने वाली है, उसने अपनी चूत को सख्ती से दबा लिया और राज के लंड के लिए रास्ता तंग कर दिया, लेकिन राज के शक्तिशाली लंड के लिए यह बाधा पर्याप्त नहीं थी वह बदस्तूर पहले वाली तेजी केसाथ ही ऐनी की चूत की दीवारों को चीरता हुआ उसकी चूत की गहराई में जाकर वापस आता और फिर एक जोरदार धक्के के परिणामस्वरूप ऐनी चूत में उतर जाता।

कम चलायें बेबी, आईएम कमिंग .... आह ह ह ह फ़ासटर, मोर फास्ट, ,,, हारडर बेबी, आईएम कमिंग ... डांट स्टॉप, कीप फकिंग बेबी, आह आह आह आह ह ह ह और इसके साथ ही ऐनी जाफ़री की चीखें नियंत्रण से बाहर होने लगी और उसने 2, 3 जोरदार चीखों और फिर सिसकियों के साथ अपनी चूत का पानी छोड़ दिया। ऐनी जाफ़री की चूत से बहता पानी राज की पैंट पर गिरा और ऐनी जाफ़री को आराम मिल गया। कुछ झटकों के बाद ऐनी जाफ़री अपने आप को काफी हल्का महसूस कर रही थी। कनाडा से लौटने के बाद काफी समय बाद उसको कोई तगड़ा लंड मिला था जो इतनी जल्दी उसकी चूत का पानी निकलवा दे। वरना ज्यादातर लोड़े तो मात्र 3 मिनट ही उसकी चूत में धक्के लगा पाते थे और फिर ऐनी का पानी निकलवाए बिना ही ऐनी की चूत में थक कर उलटी कर देते थे।

ऐनी जाफ़री का सारा पानी निकल गया तो मेजर राज ने ऐनी जाफ़री को अपनी गोद से उतारा, ऐनी जाफ़री शक्तिहीन सी आगे बढ़ी और राज के होंठ चूसने लगी, उसको कैप्टन पर प्यार आ रहा था जिसने बहुत अच्छे तरीके से उसकी चुदाई की थी और ऐनी जाफ़री जैसी पेशेवर रंडी की भी चीखें निकलवा दी थीं। थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और दूसरी ओर से आने वाली आवाजों को सुनते रहे जिनमें अब कुछ तेजी आ चुकी थी। फिर राज ने ऐनी जाफ़री का मुंह दूसरी तरफ कर के उसकी पीठ अपनी ओर कर ली और उसे झुकने के लिए कहा तो ऐनी कमोड की टंकी का सहारा लेकर झुक गई और अपनी 34 आकार भरी हुई गाण्ड बाहर निकाल दी। राज ने ऐनी के 2 पहाड़ जैसे चूतड़ देखे तो उसका दिल खुश हो गया, उसने ऐनी के चूतड़ों को खोल कर उसकी गाण्ड का छेद देखा जो आम लड़कियों की गांड की तुलना में काफी बड़ा था, राज ने उस पर अपना थूक फेंककर अपनी उंगली से गांड को गीला किया तो ऐनी समझ गई कि अब राज का शक्तिशाली लंड उसकी गाण्ड में जाकर अपना जादू दिखाएगा, ऐनी जाफ़री गाण्ड मरवाने की भी विशेषज्ञ थी इसलिए उसने कोई आपत्ति नहीं की और राज को गाण्ड चिकनी करने की अनुमति दे दी।

कुछ देर तक गाण्ड को चिकना करने के बाद राज ने अपने लंड की टोपी पर भी थूक फेंक कर उस पर अपने हाथ से थूक मसल दिया और फिर अपने लंड की टोपी ऐनी की गाण्ड के छेद पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो राज का आधा लंड ऐनी की चिकनी गाण्ड में जा चुका था। ऐनी जाफ़री ने एक जोरदार चीख भी मारी जिससे पूरा बाथरूम गूंज गया, लेकिन इससे पहले कि ऐनी जाफ़री संभलती राज ने एक बार लंड को बाहर निकाला और केवल अपने लंड की टोपी को ऐनी की गांड के हॉल में रहने दिया, फिर एक और जोरदार धक्का लगाया तो मेजर राज का पूरा लंड ऐनी की गाण्ड में उतर चुका था और ऐनी की गाण्ड फट चुकी थी। ऐनी जाफ़री ने इस बार भी एक चीख मारी, क्योंकि लड़की चाहे कितनी बड़ी रंडी क्यों न, गाण्ड मरवाते हुए उसकी चीखें निकलती ही हैं।

ऐनी जाफ़री की इन चीखों का राज पर कोई असर नही पड़ा और अपने घोड़े जैसे लंड को ऐनी की गाण्ड में दौड़ाने लग गया। राज लगातार ऐनी की गाण्ड में अपने 8 इंच लोहे जैसे लोड़े से खुदाई जारी किए हुए था और हर धक्के के साथ ऐनी जाफ़री केचूतड़ राज की जांघों से टकरा कर धुप्प धुप्प की आवाज पैदा कर रहे थे। अब बाथरूम आह ह ह आह ह ह आह ह ह आह ह ह धुप्प धुप्प आह ह ह ह आह ह ह ह आह ह ह ह धुप्प धुप्प धुप्प उफ़ एफ एफ एफ एफ आह ह ह आ हुह हु हु हु हु धुप्प धुप्प की आवाजों से गूंज रहा था।

ऐनी जाफ़री ने मुंह पीछे कर राज को एक हवाई पप्पी दे डाली, वह पहले चूत मरवा कर खुश थी और अब गाण्ड मरवाने का भी उसे खूब मज़ा आ रहा था। उसका एक हाथ उसकी चूत पर था और वह अपनी चूत को बराबर मसल रही थी ताकि वह दूसरी बार भी अपनी चूत का पानी निकाल सके।ऐनी जाफ़री की सिसकियों और हल्की चीखों का शोर लगातार बढ़ रहा था, और जब उसकी चीखों से पूरा लेडीज़ बाथरूम गूंजने लगा तो साथ वाले बाथरूम से एक कर्कश आवाज़ आई, ओ ऐनी जाफ़री की बच्ची चुप कर नहीं चुदवा सकती क्या? आवाज बंद कर अपनी। ..... ...

यह आवाज सुनकर राज कान एकदम खड़े हो गए, उसे यह आवाज कहीं सुनी हुई लग रही थी। इससे पहले राज कुछ समझता कि यह किसकी आवाज है, ऐनी जाफ़री गाण्ड चुदवाते चुदवाते ही बोली, तुझे क्या तकलीफ है साना ??? खुद भी एंजाय कर और मुझे भी करने दे। ज़्यादा उंगली न कर। आह आह आह ह ह ह ह ह ह .... दूसरी ओर से आवाज़ आई तुझे तो वैसे ही चीखें मारने का शौक है। ऐनी जाफ़री बोली आज इतने दिन के बाद आह ह ह ह इतना जबरदस्त हथियार मिला है मज़ा आ गया है, तू भी ट्राई कर उसको फिर बता चीखें शौक से निकलती हैं या मजे से निकलती हैं। आह ह ह ह ह आह ह ह ह .... फक मी बेबी हारडर, यू आर गुड ... आह ह ह ह ह ... यस बेबी, फक मी .....

 
दोस्तो आज का अपडेट कैसा लगा ज़रूर बताना
 
]राज अब तक समझ नहीं पाया था कि यह किसकी आवाज है, लेकिन ऐनी जाफ़री ने जब साना कह कर उसे संबोधित किया तो उसे लगा कि शायद यह साना जावेद की बात कर रही है। राज ने धीरे से ऐनी जाफ़री से पूछ ही लिया कि ये कौन है जो बोल रही है ??? तो ऐनी जाफ़री ने बताया कि साना जावेद है, यह सुनना था कि राज के लंड में एक नई जान आई। उसकी पसंदीदा हीरोइन उसके साथ वाले बाथरूम में चुदवा रही थी, साथ ही दूसरी तरफ से साना जावेद की चीखों में भी मामूली वृद्धि हुई और फिर एक लम्बी सिसकी के साथ साना जावेद की चूत ने पानी छोड़ दिया। फिर साना जावेद की आवाज़ आई, क्या यार, सारी साड़ी खराब कर दी मेरी। चलो तुम जाओ अब, मैं साड़ी ठीक कर के आती हूँ। उसके बाद आगे चुप्पी छा गई, बस बाथरूम का दरवाजा खुलने और बंद होने की आवाज आई मगर इस ओर राज का लंड अब तूफानी गति से ऐनी की गाण्ड में चुदाई कर रहा था और ऐनी जाफ़री ने चीखें मार मार कर सारा बाथरूम सिर पर उठा रखा था। हक़ीकत में यह था कि ऐनी जाफ़री को चीख़ें मारने का शौक था, वह किसी से भी चुदवाती तो उसको खुश करने के लिए खुद ही चीखें मारती और सेक्सी आवाजें निकालती, लेकिन यह भी एक हक़ीकत ही थी कि आज ऐनी जाफ़री मेजर राज को खुश करने के लिए नहीं चीख रही थी बल्कि राज का 8 इंच लंबा और मोटा लोड़ा जिस गति से उसकी चुदाई कर रहा था, मजे की तीव्रता से ऐनी जाफ़री की चीखें स्वतः ही निकल रही थीं। इन चीखों के दौरान एक बार फिर ऐनी जाफ़री की आवाज़ आई अबे रंडी की बच्ची चुप हो जा मगर इस बार ऐनी जाफ़री ने कोई जवाब नहीं दिया। [IMG]]

लेकिन राज को अब ऐसा लग रहा था कि उसके सामने ऐनी जाफ़री नहीं बल्कि उसकी प्यारी और सेक्सी हीरोइन साना जावेद है जिसको वह सपनों में कई बार चोद चुका था, और अब राज आंखें बंद किए ऐनी की गाण्ड की जगह साना की छोटी मगर सेक्सी गाण्ड की कल्पना कर धक्के पर धक्का मार रहा था। उसे यही लग रहा था अब वह वास्तव में साना जावेद की चुदाई कर रहा है यही कारण था कि उसके धक्कों की गति इस हद तक पहुंच चुकी थी कि ऐनी जाफ़री को भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। उसको लग रहा था कि उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने वाली है, और यही हुआ कुछ ही देर बाद ऐनी जाफ़री ने एक बार फिर सिसकियाँ मार मार कर अपनी चूत का सारा पानी निकाल दिया। जैसे ही ऐनी की चूत ने पानी छोड़ा राज जो पूरी गति के साथ ऐनी जाफ़री की गाण्ड मार रहा था वह बोला कि मेरा भी निकलने वाला है तो ऐनी जाफ़री ने कहा अंदर मत छोडना निकलने लगे तो लंड बाहर निकाल लेना। यह सुनते ही राज ने लंड बाहर निकाल लिया क्योंकि उसका पानी बस अभी निकलने ही वाला था, जैसे ही राज ने लंड बाहर निकाला उसने अपना लंड पकड़ कर मुठ मारनी शुरू कर दी और ऐनी जो कि गाण्ड राज की ओर किए झुकी खड़ी थी तुरंत सीधी हो गई और राज की ओर मुंह करके कमोड पर बैठ गई।

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उसने राज के हाथ से उसका लंड पकड़ लिया और खुद उसकी मुठ मारने लगी, ऐनी जाफ़री किसी भी लंड की पानी निकासी की विशेषज्ञ थी और, उसके हाथों में जादू था, वह महज 4, 5 ही झटके मारे होंगे कि राज के लंड ने वीर्य छोड़ दिया, इस दौरान ऐनी जाफ़री ने राज के लंड को अपने मुँह के बिल्कुल सामने कर मुंह खोल लिया था, जैसे ही राज के लंड से वीर्य की धार निकली, वह सीधी ऐनी जाफ़री के गले तक पहुँच गई मगर उसने अपना मुंह बंद नहीं किया , नहीं तो तीसरी और फिर चौथी धार भी सीधी उसके मुंह में ना गई होती जिससे ऐनी का मुंह भर चुका था मगर राज का लंड अभी और धारें मारने के मूड में था। अब ऐनी जाफ़री ने अपना मुंह बंद करके राज के लंड का रुख अपने मम्मों की ओर कर लिया था। कुछ वीर्य ऐनी जाफ़री के मम्मों पर गिरी। और फिर राज के लंड से वीर्य निकलना बंद हो गया .

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ऐनी जाफ़री ने अपने मुंह में मौजूद वीर्य पी लिया था और अब उसका मुँह खाली था, कुछ वीर्य उसके होठों पर और कुछ ज़ुबान पर जमी हुआ था, अपने मम्मों से वीर्य उंगली से लगाकर ऐनी उसको भी चाट रही थी। फिर ऐनी जाफ़री ने मेजर राज को बाहर निकलने का इशारा किया तो राज शर्मा अपने लंड को बाथरूम में पड़े टिशू पेपर से साफ करके वापस अंडर वेअर में डाल पेंट सही करके बाहर निकल गया, जहां सामने ही वाश बेशन के साथ साना जावेद अपनी साड़ी ठीक कर रही थी। उसको देखते ही राज की तो जैसे बोलती बंद हो गई। साना जावेद ने हमेशा की तरह साड़ी के नीचे सिर्फ एक ब्रा पहन रखा था, उसकी पूरी कमर नंगी थी, और सामने शीशे साना जावेद का सुंदर क्लीवेज़ दिख रहा था जिसको मेजर राज शर्मा देख रहा था। इतनी देर में ऐनी जाफ़री भी बाथरूम से निकल चुकी थी। बाहर निकल कर वह भी सीधी वॉश बेसिन पर गई और अपना हाथ गीला कर अपने सीने से वीर्य साफ किया और अपनी शर्ट फिर से सही कर ली

साना जावेद ने ऐनी जाफ़री को देखा और गुस्से से बोली चुप कर के तेरे से कोई काम नहीं होता ???

इस पर ऐनी जाफ़री ने मुस्कुरा कर साना को देखा और राज की ओर इशारा करते हुए बोली, एक राउंड लगाकर तो देख उसके साथ, फिर मुझे बता कि चुप कर के कोई काम होता है या नहीं। साना जावेद ने हिकारत भरी नज़रों से राज शर्मा की तरफ देखा और फिर उसकी नजरें राज की पेंट की तरफ गई जहां अब कुछ नहीं था, ऐनी जाफ़री की गाण्ड और चूत की शानदार चुदाई के बाद राजक लंड बैठ चुका था। साना जावेद ने कहा क्यों लगाऊ दूसरों के साथ राउंड जब मेरे पास फवाद जैसा मस्त आदमी है। इस पर ऐनी जाफ़री ने ठहाका लगाया और बोली तुझे शायद फवाद ने नहीं बताया होगा कि वह मेरे साथ भी कई बार राउंड लगा चुका है, मगर मैं तुझे बता रही हूँ कि फवाद वास्तव में दबंग है और दबा के मारता है, मगर इस केप्टन की तो बात ही कुछ और है, तू फवाद को भूल जाएगी।

इसके बाद साना जावेद बिना कोई बात किए बाहर चली गई और ऐनी जाफ़री राज को देख कर मुस्कुराने लगी और बोली शानदार हथियार है तुम्हारे पास। आज पहली बार किसी सेना के अधिकारी को दी है और मज़ा आ गया है। इतने में बाहर से क़दमों की आवाज़ आई और कुछ ही देर में अर्मीना ख़ान अंदर आई, मगर ऐनी जावेद और मेजर राज को देखकर थोड़ी घबरा गई और वापस जाने लगी तो ऐनी जाफ़री ने कहा अर्मीना आजा यार, हम फ्री हो गए हैं और वापस जा रहे हैं, तू आराम से अपने प्रेमी के साथ मज़े करना। यह सुनकर अर्मीना निगाहें नीचे कर मुस्कुराई और बाहर खड़े हमज़ा अब्बासी को अंदर आने का इशारा किया, हमज़ा अब्बासी भी पंज़ाई फिल्मों का प्रसिद्ध नायक था, वह काफी बूढ़ा हो चुका था मगर आज भी जवान लड़कियों की चूतों को खूब शांति देता था, अर्मीना ख़ान उसे लेकर सीधी बाथरूम में घुस गई जबकि ऐनी जाफ़री और राज वापस नीचे मंजिल पर मौजूद बड़े हॉल में चले गए जहां साना के डांस की अनाउसमेंट हो रही थी।

साना जावेद ने उसी साड़ी में एक मशहूर हिन्दी गाने पर जबरदस्त डांस किया और वापस एक टेबल पर फवाद ख़ान के पास जाकर बैठ गई। जबकि हाल में शो अपने चरम पर था, एक के बाद एक शानदार नायक और हीरोइन मंच पर आ रहे थे, कुछ तो परफॉर्म कर रहे थे जबकि कुछ चुटकुले सुनाने या पुरस्कार प्राप्त करने आए थे। कुछ ही देर के बाद ऐनी जाफ़री को भी मंच पर बुलाया गया तो वह मंच पर चली गई और इस मौके का फायदा उठाकर कैप्टन राज शर्मा अपनी सीट से उठा और सीधा साना जावेद की ओर जाने लगा। साना जावेद ने राज शर्मा को अपनी ओर आता देखा तो नागवारी से दूसरी ओर देखने लगी। राज साना और फवाद ख़ान के बीच आकर खड़ा हो गया, फवाद ने भी उसको हैरत से देखा कि यह कौन है जो ऐसे हम दोनों के बीच आ गया। कैप्टन ने साना जावेद को देखा और खुशी के साथ अपना हाथ आगे बढ़ाकर हैलो मेडम कहा। मगर साना मेडम को न जाने किस बात का गुस्सा था उसने राज शर्मा को कोई लिफ्ट नहीं करवाई। इस पर फवाद ख़ान ने राज का बढ़ा हुआ हाथ थामा और उसको जोर से दबा कर मगर चेहरे पर कोई भाव लाए बिना बोला, चलो बेटा मेडम आपसे मिलना नहीं चाहती। उत्तर में अब मेजर राज ने जोर लगाया तो फवाद के चेहरे पर एक रंग आया और एक गया उसकी चीख तो नहीं निकली मगर वह जो अपने आप को सबसे शक्तिशाली युवा समझता था आने वाले व्यक्ति की शक्ति देखकर हैरान रह गया था, इससे पहले कि वह कुछ बोलता मेजर राज शर्मा ने फवाद ख़ान से थोड़ा झुक कर कहा मेडम तो मुझे जरूर मिलेंगी, बल्कि आपको छोड़कर मेरे पास आएगी और ये कह कर मेजर ने फवाद ख़ान का हाथ छोड़ा और फिर से साना जावेद की ओर मुड़ा और उसके पास होकर थोड़ा झुका और उसके कान में कहा मेडम मेरा नाम कैप्टन फ़िरोज़ है और मुझे कर्नल इरफ़ान ने भेजा है। आप से निश्चित रूप से काम है, तुम मेरे साथ आओ।

यह कह कर राज बाहर की ओर निकला और साना के चेहरे पर एक रंग आया और एक गया, वह हैरान होकर कैप्टन को देखने लगी, फिर फवाद ख़ान की ओर देखकर बोली, सॉरी डार्लिंग आई हैव टू गो .... बाय। और तुरान कैप्टन फ़िरोज़ के पीछे हॉल से बाहर निकल गई। हॉल से बाहर निकलकर उसने दाँये बाँये देखा तो कैप्टन फ़ीरोज़ बाईं ओर गलियारे में खड़ा साना का इंतजार कर रहा था। साना तेज तेज चलने के साथ केप्टन फ़ीरोज़ तक पहुंची और बोली, कौन हो तुम ??? मैं तुम्हें नहीं जानती और न ही कर्नल ने तुम्हारे बारे में मुझे कुछ बताया है।

कैप्टन फ़ीरोज़ ने कहा मेडम इस तरह की बात यहाँ नहीं दीवारों के भी कान होते हैं। किसी सुरक्षित स्थान पर चलकर बात करते हैं। यह सुनकर साना जावेद बोली चलो फिर ऊपर वाली मंजिल में एक कमरे की चाबी मेरे पास है वहाँ चलते हैं। यह कह कर साना उसी लिफ्ट के माध्यम से राज को लेकर ऊपर वाली मंजिल पर चली गई जिस लिफ्ट में ऐनी जाफ़री गई थी। कुछ ही देर बाद साना जावेद कमरे के दरवाजे के की होल में अपनी ब्रा से एक चाबी निकाल कर घुमाने लगी।

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लोकाटी ने रास्ते में ही यह अंजलि को यह भी बता दिया था कि उसके नाम की उसकी सेकेट्री है, क्योंकि ऐसे में एक जैसे दो नाम जाएँगे जिससे परेशानी होगी, तो उसे अपना नाम बदलना होगा, और फिर उसने खुद ही अंजलि को नया नाम दे दिया । अंजलि का नया नाम मारिया रखा गया। अंजलि को भी इस बात पर कोई आपत्ति नहीं थी। रात लोकाटी का जहां कश्मीर में उतरा जहां से लोकाटी और मारिया एक लैंड क्रूजर में बैठकर लोकाटी के घर चले गए, यह कोई महल नुमा घर था, लोकाटी का यह वैभव देखकर मारिया की आँखें खुली की खुली रह गईं थीं। हर तरफ बंदूक धारी, बड़े बड़े वाहनों की लाईनें और इतना बड़ा महल नुमा घर, अंजलि को अंदाज़ा हो गया था कि जब ऐसे शासक केवल अपनी सुरक्षा और अपनी महिमागान करने में लगे होंगे तो भला वहां की जनता कैसे समृद्ध हो सकती है। एक गलियारे से होकर सामने एक हॉल नुमा कमरे आया जिसमें 2 मध्यम आयु के लोग बैठे थे, उनकी आकृति करीब काफी मिलती थीं लोकाटी को देखते ही दोनों भागते हुए लोकाटी की ओर आए और दोनों ने बारी बारी थोड़ा झुककर लोकाटी को सलाम किया, और उसके हाथ चूमे और फिर एक साइड पर होकर मोदबाना शैली में खड़े गए। यह दोनों लोकाटी के पुत्र थे। एक का नाम फैजल जब कि दूसरे का नाम फग़ान था। लोकाटी ने दोनों की खैरियत की पूछने के बाद उनके साथ मारिया परिचय करवाया कि यह हमारी मेहमान हैं, कुछ दिन हमारे साथ ही रहेंगी। और जल्द ही हमारी शादी हो जाएगी। लोकाटी ने विशेष रूप से यह बात बताई थी ताकि उसके बेटे कहीं मारिया पर बुरी नजर न रखनी शुरू कर दें

अब दोनों लड़के जा चुके थे जबकि लोकाटी मारिया को लेकर अपने कमरे में चला गया था, जहां पर 2 महिलाएँ बैठी लोकाटी का इंतजार कर रही थी। मारिया लोकाटी के पीछे अंदर गई। दोनों महिलाएँ लोकाटी को देखकर तुरंत उसकी ओर भागी आईं और उसका हाथ पकड़ कर चूमा और फिर एक साइड पर खड़ी हो गईं। ये दोनों महिलाएँ जिनकी उम्र लगभग 30 के आसपास होगी लोकाटी की रात की रमणीय करने के लिए थीं। लोकाटी अक्सर उनकी चूत से अपने लंड को शांत करता था। और वह आज भी इसी इंतजार में थी, उन्हें विशेष रूप से तैयार करवाया गया था और कहा गया था कि आज अकबर लोकाटी साहब तशरीफ़ ला रहे हैं तो उनकी राहत के खिलौने के रूप में दोनों महिलाओं को विशेष रूप से तैयार किया जाएं। मगर जब उनकी नज़र लोकाटी के पीछे खड़ी युवा मारिया पर पड़ी तो उन दोनों ने भी थोड़ा आश्चर्य से फटी हुई आँखों से उसे देखा, और जब लोकाटी ने उन दोनों महिलाओं को कमरे से बाहर जाने को कहा और मारिया से मुखातिब होते हुए बोला आओ डार्लिंग, इसे अपना ही कमरा समझो। दूसरी तरफ दोनों महिलाएँ चुप करके कमरे से निकल गईं, वो लोकाटी की पत्नियाँ तो थीं नहीं, बस उसके खेलने का समान थीं, इसलिए उन्हें यह बात कोई ऐसी बुरी भी नहीं लगी थी, और एक तरह से वह खुश भी थीं कि लोकाटी के बूढ़े लंड की बजाय आज वह लोकाटी के बेटों के जवान लंड पर सवारी करेंगी . उनमें से एक महिला एक के पास चली गई जबकि दूसरी कृमि के पास चली गई। वे दोनों भी अचानक सरपराईज़ पर हैरान थे। दोनों ने अपनी-अपनी पत्नियों को सोने के लिए कहा और दूसरी आने वाली औरत को अलग कमरे में ले गए जहां वो रात भर उनके शरीरों से आराम पा सकें।

दोनों महिलाओं के कमरे से जाते ही लोकाटी ने मारिया के शरीर पर प्यार करना शुरू कर दिया और उसको बेड पर लिटा कर खुद उसके ऊपर लेट गया और एक हाथ से मारिया के खूबसूरत गोल 36 आकार के मम्मे दबाने शुरू कर दिए, जबकि दूसरा हाथ मारिया की गर्दन के नीचे रख कर उसके होंठों को चूसने लग गया। मारिया कुछ देर तक चुपचाप उसके चुंबन का जवाब देती रही वह जानती थी कि लोकाटी काफी देर से उसको चोदने के लिए बेताब है, लेकिन मारिया का बिल्कुल भी मन नहीं था फिर से लोकाटी जैसे व्यक्ति के लंड के नीचे आने का। उसने कुछ देर तक लोकाटी को अपना मम्मा भी दबाने दिया और होंठ भी चूसने दिए, मगर फिर अपने चेहरे पर नागवार भाव लाते हुए उसने लोकाटी से कहा, जानू में आज बहुत थक गई हूँ और नींद भी आ रही है, अगर तुम्हें बुरा न लगे तो यह सब हम कल मिलकर करें ??? लोकाटी ने आज तक किसी औरत की इच्छा की चिंता नहीं की थी उसका जब दिल चाहता था औरत को चोद देता था बिना यह विचार किए कि उसका मूड है या नहीं, मगर आज पहली बार मारिया जैसी हसीन और जवान लड़की की बात उसने मान ली थी और मारिया के एक बार कहने पर वह साइड में हो गया था। कुछ ही देर बाद लोकाटी मारिया के साथ लेटा खर्राटे ले रहा था जबकि मारिया भी काफी देर से सोने की एक्टिंग कर रही थी।

जब मारिया को लगा कि लोकाटी अब गहरी नींद सो रहा है वह लोकाटी का हाथ अपने ऊपर से हटा कर बेड से उतर गई और कमरे में इधर उधर टहलने लगी। वह सोच रही थी कि आखिर मैं यहाँ क्या कर सकती हूँ और कैसे मेजर राज की मदद कर सकती हूँ और इंडिया को बड़ी तबाही से बचा सकती हूँ। काफी देर सोचने के बाद भी उसकी समझ में कुछ नहीं आया तो उसने लोकाटी के कमरे की तलाशी लेना शुरू कर दी। मारिया ने इधर उधर कमरे में नज़र दौड़ाई तो एक तरफ कुछ अलमारियाँ मौजूद थीं, मारिया ने वह अलमारी खोली, कुछ में लोकाटी के कपड़े पड़े थे तो कुछ अलमारियों में लड़कियों के अंडर गारमेंट्स आदि और सेक्सी नाइटी पड़ी थीं। लोकाटी रात लड़कियों के साथ मजे करते हुए उन्हें नाईटीज़ और सेक्सी कपड़ों में से अपनी पसंद की नाइटी पहनने के लिए देता था।

एक कोठरी में मारिया ने तलाशी ली तो उसमें एक छोटी अलमारी पड़ी थी। मारिया ने सोचा कि हो न हो उस अलमारी में निश्चित रूप से कोई महत्वपूर्ण चीज़ होगी। मारिया ने तुरंत अलमारी खोलने की कोशिश की जोकि बंद थी अब मारिया ने उसकी चाबी के लिए इधर उधर हाथ मारने शुरू किए मगर कहीं से उसकी चाबी नहीं मिली। फिर मारिया ने साइड टेबल के दराज बहुत सावधानी के साथ खोले तो उनमें से एक दराज में से मारिया को कुछ चाबियाँ मिल गईं, वो बड़ी सावधानी के साथ चाबी उठाकर वापस गुप्त अलमारी के पास आई जो एक और कोठरी के अंदर बनी हुई थी। बारी बारी मारिया उसमें चाबी लगाने लगी तो अचानक एक चाबी इसमें लग गई। मारिया ने वह चाबी घुमाई तो वह बिना आवाज पैदा किए घूम गई और फिर बहुत ही सावधानी के साथ मारिया ने वह अलमारी भी खोल ली। अलमारी में मारिया को एक खाकी रंग का लिफाफा मिला, लिफाफा देखकर अब मारिया दिल धक धक करने लगा था। मारिया ने मुड़ कर एक बार सोए हुए लोकाटी को देखा जिसका मुंह दूसरी तरफ था और उसके ख़र्राटों से कक्ष गूंज रहा था। फिर मारिया फिर से लिफाफे लिए मुड़ी और वह लिफाफा उठाकर फर्श पर बैठ गई। मारिया ने डरते डरते वह लिफाफा खोला कि शायद इसमें उसे कोई काम की चीज मिल जाएगी। मगर मारिया को तब बहुत अफसोस हुआ जब इस लिफाफे में से जमीन के कुछ कागजात निकले जो किसी अनजान व्यक्ति ने अपनी कुछ अच्छी जमीन लोकाटी नाम की थी। इसके अलावा और कोई काम की चीज इस लिफाफे से बरामद नहीं हुई। मारिया ने निराशा का शिकार होकर वह लिफाफा वापस रखकर अलमारी को उसी तरह वापस बंद कर दिया और चाबी भी वापस उसी दराज में रख कर वह दराज भी सावधानी के साथ बंद कर दिया। उसके बाद मारिया ने और कुछ स्थानों की तलाशी ली मगर मारिया को कोई ऐसी चीज नहीं मिली जो उसके किसी काम आ सके।

निराश होकर मारिया फिर से लोकाटी के साथ जा कर लेट गई और न जाने कब उसकी आंख लगी। दिन के 12 बजे मारिया की आंख खुली तो वह कमरे में अकेली ही लेटी थी। लोकाटी शायद कमरे से निकल चुका था। कुछ देर मारिया यूं ही उठ कर बेड पर बैठी रही फिर उठकर बाथरूम चली गई और फ्रेश होकर वापस निकली तो सामने 2 महिलाएं खाना लगा रही थीं। मारिया को बाथरूम से निकलता देखकर दोनों अत्यंत सम्मान के साथ आगे बढ़ी और बारी बारी मारिया का हाथ पकड़कर चूमा। मारिया को यह सब अजीब लगा और उसने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर यह तो यहां की परंपरा थी। इसलिए इन महिलाओं ने मारिया को वैसे ही इज़्ज़त दी जैसे इस क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार दी जाती थी। फिर उन्होंने मारिया को नाश्ते का बताया कि उसका नाश्ता तैयार है। नाश्ते की मेज पर न जाने क्या कुछ मौजूद था मगर मारिया ने इसमें से महज 2 ब्रेड के पीस एक हाफ फ्राई अंडा खाया और एक जूस का गिलास पी कर बाहर चली गई। दोनों औरतें मारिया के पीछे पीछे चलने लगी।मारिया उसी बड़े हाल की ओर बढ़ने लगी तो उन महिलाओं ने मारिया को वहां जाने से मना किया मगर मारिया ने उनकी एक न सुनी और उस हाल में चली गई, मारिया के सिर पर न तो दुपट्टा था और न ही गले में। ऊपर से उसने कमीज भी फिटिंग वाली पहन रखी थी जिसमें उसके सीने के उभार बहुत स्पष्ट नज़र आ रहे थे। हॉल में लोकाटी एक कुर्सी पर बैठा था, उसके दाँये और बाएं उसके पुत्र फैजल और फग़ान बैठे थे जबकि सामने कुछ और लोग मौजूद थे जो शायद घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के एमपी एमएलए आदि थे।

 
दोस्तो आज का अपडेट कैसा रहा ज़रूर बताना
 


मारिया को देखते ही सभी पुरुषों ने अपनी नज़रें झुका लीं मगर उसके सम्मान में खड़े भी हो गए वे जानते थे कि जिस ओर से मारिया आई है वह लोकाटी कक्ष है, और उन तक यह बात पहुंच चुकी थी कि लोकाटी साहब ने एक जवान लड़की से शादी कर ली है। इसलिए वे समझ गए थे कि यह लोकाटी की नई नवेली दुल्हन है जो अनजाने में इस ओर निकल आई है। मारिया पर नज़र पड़ते ही लोकाटी ने क्रोध भरी दृष्टि से मारिया को देखा और बिना कुछ बोले सिर्फ हाथ के इशारे से मारिया को वापस जाने को कहा। मारिया समझ गई थी कि कुछ गड़बड़ है और लोकाटी की नजरें भी ऐसी थीं जैसे वह अभी मारिया को जान से मार देगा, इसलिए मारिया चुपचाप वापस आ गई। वे दोनों महिलाएं भी डरते डरते वापस मारिया के पास पहुंच गई। मारिया ने कमरे में जाकर उनसे पूछा कि यह कौन लोग थे तो उन्होंने काँपती आवाज के साथ मारिया को बताया कि वह प्रांतीय विधानसभा के सदस्य हैं और अपने-अपने क्षेत्रों के प्रधान भी हैं लोकाटी साहब पाकिस्तान से लौटे हैं वह उनका स्वागत करने के लिए मिलने आए हैं। फिर एक महिला ने काँपती हुई आवाज़ में कहा कि बीबी जी, अब हमारी खैर नहीं लोकाटी साहब तो हमें जान से ही मार देंगे। हमें बचा लो किसी तरह। मारिया ने हैरान होकर पूछा क्यों ऐसी क्या बात हुई कि वे तुम्हें मार देंगे ???

महिला ने कहा बीबीजी यहाँ पर्दे का बहुत सख्त प्रतिबंध है, और आप इस स्थिति में गैर मर्दों के सामने चली गईं साहिब जी इस अपमान को सहन नहीं कर सकते वे हमें इस बात पर ...... इससे पहले कि वह स्त्री बात पूरी करती एक विस्फोट से दरवाजा खुला और लोकाटी ने बेहद गुस्से में अंदर प्रवेश किया, अंदर आते ही उसने एक औरत को गर्दन से पकड़ लिया और उसको जोर से दीवार दे मारा। वह स्त्री लड़खड़ाती हुई दीवार से जा लगी और माँफी मांगने लगी, जबकि दूसरी औरत भी भयभीत लोकाटी के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई, फिर लोकाटी उस औरत को एक गंदा सी गाली दी और बोला तुझे पता नहीं हमारे रीति-रिवाजों का? ? ये तो नई है इसको रीति रिवाजों का पता नही तुम लोगों को तो पता है आप मेरी इज्जत को गैर मर्दों के सामने ला खड़ा किया तुम्हारे पूरे परिवार को आग लगा दूंगा। यह कह कर लोकाटी ने अपने एक बेटे को अंदर बुलाया जो शायद बाहर ही खड़ा था। फैजल अंदर दाखिल हुआ तो उसकी नजरें भी झुकी हुई थीं, वो भी शायद मारिया को अपने पिता की पत्नी और उसकी छोटी माँ ही समझ रहा था और इसी तरह सम्मान कर रहा था हालांकि वह खुद उम्र में मारिया से कम से कम भी 20 साल बड़ा था।

फैजल अंदर आया तो लोकाटी ने उसको आज्ञा दी कि इन दोनों महिलाओं के पुरुषों और बच्चों को बीच बाजार लटका कर आग लगा दी जाए। इन्होने हमारे सम्मान को गैर मर्दों के सामने ला खड़ा किया। यह आदेश सुनकर मारिया के पैरों तले जमीन निकल गई थी। इससे पहले कि फैजल लोकाटी को कोई जवाब देता, मारिया ने फैजल को गरजदार आवाज़ में कहा कि तुम अभी बाहर खड़े रहो फिर जब तुम्हारे बाबा बुलाएं तो अंदर आना। यह सुनकर लोकाटी ने मारिया को भी खा जाने वाली नजरों से देखा मगर मारिया ने उसकी नज़रों की परवाह किए बिना फैजल को फिर से बाहर जाने का इशारा किया तो इस बार वो आराम से बाहर चला गया। फिर मारिया ने उन दोनों महिलाओं को भी बाहर जाने के लिए कहा तो वह भी अपनी जान बचाकर बाहर चली गईं मगर लोकाटी अंदर खड़ा गुस्से से हान्फता रहा था और मारिया को खा जाने वाली नजरों से देख रहा था। जब सब लोग चले गए तो मारिया बड़ी नजाकत से चलती लोकाटी की तरफ गई और उसके कंधे पर सिर रख कर बोली सॉरी डार्लिंग, मेरी वजह से तुम्हें आज इतना गुस्सा आ गया, मगर विश्वास करो इसमें उन दोनों की कोई गलती नहीं वह तो मुझे रोक रही थीं मगर जब मेरी आँख खुली और तुम नहीं थे कमरे में तो मैं परेशान हो गई थी, और तुम्हें ढूंढ़ने के लिए बिना कुछ सोचे समझे बाहर आ गई। मेरा तुमसे वादा है कि आगे से ऐसा नहीं होगा, लेकिन आप प्लीज़ इन 2 महिलाओं को माफ कर दो, मैं नहीं चाहती कि यहां के लोग मुझसे नफरत करने लग जाएं। मैं जानती हूँ वो तुम्हारे सामने आंख तक नहीं उठा सकते मगर मेरे आते ही किसी की मेरी वजह से जान ली जाएगी तो लोग भी मुझसे नफरत करेंगे और मुझे खुद को भी अपने आप से नफरत होने लगेगी

एक बार, बस एक बार उन्हें माफ कर दो, फिर तुम्हें कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। अगर आपने उन्हें मेरी वजह से सजा दी, तो मैं समझूँगी कि मैं हूँ ही मनहूस। इतना कहना था कि लोकाटी का दिल पिघल गया। वो कहते हैं ना कि महिला में अगर नजाकत हो तो वह पुरुष से बड़े से बड़ा काम करवा लेती है, और यहाँ तो नजाकत के साथ हुश्न भी था और जवान शरीर भी, और फिर मर्द भी लोकाटी जैसा बूढ़ा जवान शरीर भूखा और ठरकी आदमी, मारिया की जरा सी एक्टिंग से उसका दिल पिघल गया जो कभी लोगों की गर्दनें काट कर भी नहीं पिघला था।लोकाटी ने कहा ठीक है जान, बस तुम्हारे कहने पर मैं आज उन्हें माफ कर रहा हूँ, लेकिन एक शर्त पर .... मारिया खुश होते हुए बोली मुझे तुम्हारी हर शर्त मंजूर है। इस पर लोकाटी ने कहा कि आज रात तुम मुझे मना नहीं करोगी, आज रात में अपनी जान को खूब जी भर मजे करूँगा .

मारिया थोड़ी शर्माने की एक्टिंग करते हुए बोली- आप भी न,,,,, ठीक है मुझे मंजूर है आपकी शर्त लेकिन उस पर मेरी भी एक शर्त होगी। लोकाटी ने खुश होते हुए कहा वह क्या ???

तो मारिया बोली आज रात सेक्स मेरी इच्छा के अनुसार होगा जैसे मैं कहूँगी वैसे ही आप करेंगे। लोकाटी चहकती हुई आवाज़ मे बोला मुझे मंजूर है। इस पर मारिया खुशी से लोकाटी से लिपट गई और अपने तने हुए मम्मों का स्पर्श लोकाटी के सीने पर महसूस करवाते हुए उसकी एक पप्पी ले कर बाहर का दरवाजा खोल दिया जहां फैजल सिर झुकाए खड़ा था और उसके पीछे दोनों महिलाएं भी थीं। मारिया बाहर निकलकर फैजल के पास गई जो दरवाजे से थोड़ा हट कर खड़ा था। मारिया ने फैजल को आवाज दी तो वह बोला जी बीबीजी,

मारिया उसके मुंह से अपने लिए जी बीबीजी सुनकर काफी हैरान हुई और फिर अपनी हँसी रोकते हुए बोली मुझे देखो। फैजल ने डरते डरते नजरें ऊपर की तो मारिया उसे गर्म नज़रों से देखने लगी। फैजल यह देखकर थोड़ा नर्वस हो गया और मारिया को बेचारगी की नज़रों से देखने लगा, क्योंकि फैजल के पास मारिया चाहे उसकी बेटियों के बराबर हो मगर रिश्ते में अब वह उसकी छोटी माँ थी और उनकी परंपराओं के अनुसार माँ का सम्मान इसी तरह होता था। मारिया ने फैजल को मुस्कुराते हुए देखा और थोड़ी धृष्टता से बोली मेरी लोकाटी जी से बात हो गई है, आप इन महिलाओं को कुछ नहीं कहोगे और न उनके घर वालों से बात करोगे। फैजल यह सुनकर हैरान होकर मारिया को देखने लगा क्योंकि आज तक लोकाटी ने कभी अपना फैसला नहीं बदला था। और आज पहली बार किसी को मारने का आदेश दिया लोकाटी ने तो उनको थोड़ी ही देर में माफ कर दिया। फैजल के लिए निश्चित रूप से यह आश्चर्यजनक बात थी मगर वह केवल जी बीबीजी ही कह सका। यह सुनते ही दोनों औरतें भागती हुई आई और मारिया के पांव में बैठ कर उसके पैर पकड़ कर अपने सिर उसके पांव में रखकर उसका धन्यवाद करने लगीं। ये मारिया के लिए काफी अप्रत्याशित था। वह एकदम पीछे हुई और नीचे बैठकर उन स्त्रियों को कंधे से पकड़ कर अपने साथ खड़ा किया और धीरे से बोली- अब तुम लोग जाओ, बाद में बात करते हैं तुम्हारे साहब मेरा इंतजार कर रहे हैं अंदर। यह सुनकर वह औरतें मारिया का धन्यवाद करती हुईं वहां से चली गईं जबकि फैजल वैसे ही खड़ा रहा

मारिया ने फैजल को देखा और बोली अब तुम्हारा भी वापस जाने का इरादा है या लोकाटी और मेरे साथ कमरे में ही रुकने का इरादा है। यह कह कर मारिया हंस पड़ी जबकि फैजल लज्जित होकर बिना कुछ कहे वापस चला गया और मारिया भी अंदर कमरे में चली गई जहां लोकाटी अपने कपड़े बदल चुका था। मारिया ने लोकाटी से पूछा कि कहां की तैयारी है तो उसने कहा काफी दिन बाद वापस आया हूँ तो अपने क्षेत्र का एक चक्कर लगाने जा रहा हूँ, तुम चिंता मत करो जल्दी वापस आ जाउन्गा . मारिया ने कहा लेकिन ऐसे तो मैं ऊब जाउन्गी अकेले। यह सुनकर लोकाटी ने कहा बोर क्यों होगी, तुम अपनी दोनों बहुओं मिलो उनसे गपशप लगाओ। यह सुनकर मारिया और भी हैरान हुई कि उसकी तो अभी शादी नहीं हुई तो उसकी बहू कहां से आ गई, लेकिन फिर वह समझ गई कि लोकाटी फैजल और फग़ान की पत्नियों की बात कर रहा है। यह कह कर लोकाटी कक्ष से जाने लगा तो मारिया ने कहा सुनो तो ..... लोकाटी मारिया की बात सुनकर रुक गया और बोला आप ऐसा करें फैजल को भी इधर ही छोड़ जाएं ताकि मुझे कोई काम हो तो मैं उसे कह सकूँ, और वह मुझे ये हवेली भी दिखा देंगे ... लोकाटी यह सुनकर हंसा और बोला, हाँ हाँ यह हवेली तुम अपनी ही समझो महारानी, मैं फैजल को कह देता हूँ वह उधर ही रुक जाएगा

यह कह कर लोकाटी कमरे से निकल गया और मारिया कुछ देर के बाद फिर से कमरे से बाहर निकली, इस बार कमरे के बाहर एक और औरत खड़ी थी जो मारिया के पीछे पीछे चलती जा रही थी। मारिया ने इससे फैजल के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह अपने कमरे में हैं इस समय। मारिया ने उसे कहा कि वह उसे फैजल के कमरे तक ले जाए। वह औरत मारिया के आगे चलने लगी और विभिन्न रास्तों से होती हुई वह फैजल के कमरे तक चली गई और कमरे के बाहर जा कर रुक गई। मारिया ने एक बार उसे फिर पूछा कि फैजल कक्ष यही है तो उसने हां में सिर हिलाया। मारिया ने दरवाज़े पर हल्का सा दबाव डाला तो वह आराम से खुलता चला गया और मारिया बिना हिचक अंदर चली गई। अंदर गई तो सामने एक बेड पड़ा था जिस पर फैजल लेटा हुआ सुस्ता रहा था, उसके शरीर पर एक सलवार थी और एक बनियान। कमीज उसने नहीं पहन रखी थी। जबकि उसके साथ ही कुर्सी पर शीशे के सामने एक अधेड़ उम्र की औरत थी जो शायद फैजल की पत्नी थी, उसने शीशे में मारिया को यूं कमरे में आते देखा तो एकदम खड़ी हो गई और गुस्से से बोली कौन हो तुम और तुम्हारी मजाल कैसे हुई हमारे कमरे में आने की ???

उसकी गरजदार आवाज सुनकर फैजल की भी आंख खुल गई उसने अपनी आंखों से हाथ हटाया और तुरंत उठ कर बैठ गया, जब उसकी नज़र मारिया पर पड़ी तो वह एकदम बेड से उतर गया और बोला अरे बीबीजी आप ... यह कह कर वह खुद हाथ बांधकर सिर झुकाकर खड़ा हो गया जबकि इसी हालत में खड़े खड़े उसने अपनी पत्नी को संबोधित किया, ज़लीखा माफी मांग बीबीजी से अपनी गुस्ताखी की। तेरी हिम्मत कैसे हुई बीबी जी के सामने जोर से बात करने की, ज़लीखा अब आश्चर्य भरी नज़रों से कभी मारिया और कभी फैजल को देख रही थी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह कौन औरत है जिसके सामने फैजल यूं सम्मान के साथ खड़ा है और उसकी क्लास लेने के बजाय उल्टा अपनी पत्नी को ही माफी मांगने का कह रहा है। इससे पहले कि ज़लीखा कुछ बोलती, मारिया खुद ही बोल पड़ी, अरे नहीं नहीं, माफी तो मुझे मांगनी चाहिए जो इस प्रकार बिना बताए कमरे में आ गई हूँ वह आगे बढ़ी और ज़लीखा को अपने गले से लगा कर उसके सिर पर हाथ रख दिया। मारिया अपनी इस हरकत पर खुद भी हैरान थी कि वह अपने से दोगुनी उम्र की महिला के सिर पर प्यार दे रही थी, शायद इस हवेली की परंपराओं का प्रभाव मारिया पर भी हो गया था और वह भी अपने आप को इस हवेली की मालकिन और लोकाटी के बाद सबसे सम्मानित व्यक्ति समझने लगी थी।

इस दौरान फैजल ने बेड पर पड़ी अपनी कमीज भी पहन ली थी मगर वह अब तक नजरें झुकाए खड़ा था उसने अब अपनी पत्नी ज़लीखा को भी बता दिया था कि यह कोई साधारण महिला नहीं बल्कि बाबा साईं की नई पत्नी हैं, यह सुनते ही ज़लीखा भी सम्मान में मारिया के सामने हाथ बांध कर खड़ी हो गई थी और उसने अपनी गुस्ताख़ी की माफी भी मांग ली थी मगर मारिया ने उसे बड़े प्यार से कहा अरे नहीं कोई बात नहीं। यह कह कर मारिया फैजल की तरफ गई और इसके साथ ही बेड पर बैठ गई तो फैजल साइड पर होकर खड़ा हो गया,

मारिया ने ज़लीखा को भी अपने पास बुला लिया और बातें करने लगी, जबकि फैजल को मारिया ने बता दिया था कि अब वह हवेली देखना चाहती है तो कृपया उसे हवेली दिखाए . फैजल ने शालीनता से जवाब दिया जी बाबा साईं मुझे यह आदेश देकर ही गए हैं। आप चिंता न करें आपको सारी हवेली दिखा दूंगा। फिर मारिया ने ज़लीखा से उसके बच्चों के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी केवल एक ही बेटी है और उसकी उम्र 15 साल है और इस समय वह हवेली में मौजूद स्कूल गई हुई है, जहां विशेष रूप से शिक्षक आकर हवेली की लड़कियों को शिक्षा देते थे। फिर मारिया ने कुछ देर ज़लीखा से इधर उधर की बातें कीं और फिर फैजल को कहा कि चलो तुम मुझे हवेली दिखाओ अब। फैजल ने कहा चलें बीबीजी में आपको हवेली दिखाता हूँ। मारिया ज़लीखा से मिली और कमरे से निकल गई जबकि फैजल उसके पीछे पीछे चलने लगा। अलग रास्तों से होता हुआ फैजल उसी बड़े हाल में आ गया जहां कुछ देर पहले लोकाटी विधानसभा के सदस्यों से मिल रहा था।

फैजल ने मारिया को बताया कि यह हमारा अतिथि ग्रह है , जो भी अतिथि आते हैं वे इसी कमरे में बैठते हैं, जबकि इसके साथ ही एक महिलाओं का भी अतिथिग्रह हैं, महिलाएँ लोकाटी साहब से अलग कमरे में मिलती हैं। फैजल बार बार मारिया को बीबीजी कह कर बुला रहा था जो मारिया को अजीब लग रहा था, मारिया ने फैजल को अब की बार टोक दिया और कहा तुम मुझे बीबीजी नहीं कहोगे बल्कि मारिया कह कर ही बुलाओ, मेरा नाम मारिया है। यह सुनकर फैजल ने कहा नहीं बीबीजी ऐसा कैसे हो सकता है। मारिया ने कहा मैं कह रही हूँ न, तुम मेरा इतनी ही आदर करते हो तो मेरी बात भी मानो, मेरी अभी इतनी उम्र नहीं कि तुम मुझे बीबीजी कहो, बाकी लोगों के सामने तुम बेशक में मुझे बीबीजी कह लो मगर अकेले में मुझे मारिया कह कर ही बुलाओ करो .

अब फैजल ने झिझकते हुए कहा जी ठीक है मारिया जी .... मारिया हंसी और बोली, मारिया जी नहीं, सिर्फ मारिया ...... अब फैजल ने ने फिर कहा जी ठीक है ... मा मा ...... मा क्षार ...... मारी अबकी बार हंसी और फैजल का हाथ पकड़ कर बोली चलो मुझे बाकी हवेली भी दिखाओ, और मेरे साथ ऐसा न फिरो जैसे मैं तुम्हारी मालकिन हूँ, तुम और मैं समझो दोस्त हैं

अब की बार फैजल हकला कर बोला, नहीं मारिया ... ऐसा नहीं हो सकता आप हमारे बाबा साईं का सम्मान हो।तो मारिया ने कहा तो क्या हुआ ??? में कौन सा तुम्हें कह रही हूँ कि तुम मुझ पर बुरी नजर रखो, बस दोस्ती का ही तो कह रही हूँ, ताकि मैं अच्छे से इस हवेली को घूम कर देख सकूँ। अब मारिया ने फैजल की बात नहीं सुनी और उसके हाथ में हाथ डाल कर उसके साथ चलने लगी। फैजल भी चुपचाप ऐसे ही चलने लगा, मगर उसका शरीर कांप रहा था, शायद वह डरा हुआ था बहुत अधिक। मारिया ने यह महसूस किया तो उससे पूछा अरे तुम तो इस हवेली के वारिस हो, तुम क्यों डर रहे हो ???

फैजल अब डरते हुए बोला बारया बीबी आप बाबा साईं का सम्मान हो, अगर किसी ने आपको और मुझे इस तरह देख लिया तो आपकी भी गर्दन उतार दी जाएगी और मुझे भी जीवित नहीं छोड़ा जाएगा। यह सुनते ही मारिया फैजल से थोड़ा दूर हो गई। वह भी डर गई थी, और वैसे भी यह अंदाजा हो गया था कि यहां का माहौल कुछ ज्यादा ही अलग है

अब मारिया फैजल से कुछ दूरी रखे उसके साथ हवेली के विभिन्न हिस्से देख रही थी। यह बहुत बड़ी हवेली थी और पूरी हवेली देखते देखते मारिया को एक घंटा हो चुका था मगर अब तक हवेली खत्म नहीं हुई थी। , अब मारिया और फैजल हवेली की इमारत से बाहर विभिन्न उद्यान देख रहे थे कुछ में सिर्फ फूल दार पौधे थे तो कुछ में फलदार पेड़ भी थे। यहां मारिया फिर फैजल के करीब हो गई थी क्योंकि यहां दूर-दूर तक कोई बंदा नहीं था, मगर फैजल फिर भी घबरा रहा था और मारिया की निकटता से थोड़ा हिचकिचा रहा था। इस दौरान मारिया ने प्रसन्नता से उसकी पत्नी के बारे में बातचीत की और उसके बच्चों के बारे में भी पूछा कि आखिर ऐसा क्यों कि उसकी एक ही बेटी, ज़्यादा बच्चे क्यों नहीं? विशेष रूप से ऐसे बड़े लोगों को तो अपने उत्तराधिकारी की बहुत चिंता रहती है। तो फैजल ने उसको बताया कि ज़लीखा उसकी तीसरी पत्नी है। इससे पहले एक पत्नी से तो औलाद हुई ही नहीं और दूसरी पत्नी से 2 बार संतान हुई मगर वह दुर्भाग्य से एक महीने से अधिक जिंदा नहीं रह सके। फिर तीसरी शादी ज़लीखा से हुई तो उसकी एक बेटी हुई जिसका नाम जन्नत रखा गया और उसके बाद ज़लीखा 2 बार गर्भवती हुई मगर दोनों बार बच्चा पेट में ही बर्बाद हो गया। यह सुनकर मारिया को बहुत दुख हुआ और उसने फैजल को सांत्वना दी

उद्यान से निकलकर जब मारिया वापस हवेली की ओर जाने लगी तो वहाँ कुछ महिलाओं की भीड़ थी, दूर से ही महिलाओं को देखकर फैजल मारिया से कुछ दूर हो गया था और मारिया को भी सतर्क होने का कह दिया था।महिलाओं के पास पहुंचकर फैजल ने गरजदार आवाज़ में पूछा कि वह क्यों आई हैं यहाँ ??? तो उनके साथ खड़े एक व्यक्ति ने अपना सिर झुकाए हुए कहा फैजल साईं इस घोट की औरतें हैं, उनको पता लगा है कि वड्डे साईं जी की बीबी जी आई हैं तो यह उनका दर्शन करने के लिए आई हैं। उस व्यक्ति ने एक पल के लिए भी अपनी आंखें ऊपर नहीं उठाई . जबकि उसके साथ जो औरतें मौजूद थीं उन्होंने भी अपने सिर पर चादरें ओढ़ रखी थीं और घूँघट निकाल रखे थे। इस पर फैजल ने मारिया को देखा और पूछा कि क्या आप उनसे मिलना चाहती हैं ?? तो मारिया ने कहा, हां क्यों नहीं। तो फैजल ने महिलाओं को संबोधित कर कहा कि एक एक औरत आकर बीबीजी मिल ले और जल्दी जल्दी निकलें यहाँ से यह कह कर फैजल भी एक साइड पर जाकर खड़ा हो गया और दूसरे व्यक्ति से बातें करने लगा, जबकि वे औरतें लाइन बनाकर एक एक करके मारिया के पास आती, उसका हाथ पकड़ कर चूमती और उसको देखकर सदके वारी जातीं और उसकी खूबसूरती की प्रशंसा और बड़े साईं जी और बीबी की जोड़ी सही सलामत रहने की प्रार्थना देकर आगे निकल जातीं। जब 6, 7 औरतें ऐसे ही मिलकर गईं तो एक औरत कुछ अजीब ढंग से आगे बढ़ी और मारिया की ओर आते हुए उसने हल्की सी गर्दन घुमा कर फैजल और दूसरे व्यक्ति को देखा और फिर लाइन से हटकर कुछ इस तरह आगे बढ़ी कि उसकी पीठ अब फैजल की ओर थी आगे आते ही उसने अपना घूँघट हल्का सा ऊपर उठाया और मारिया का हाथ चूमने की बजाय अपनी कमीज के गले में हाथ डाल कर अपनी ब्रा से एक कागज का छोटा सा लिफाफा निकाल कर बोली समीरा अपना ख्याल रखना, यह जगह बहुत खतरनाक है। उस महिला के मुंह से अपना नाम सुनकर मारिया एकदम हैरान रह गई, यहां तो सब उसको मारिया के नाम से ही जानते थे तो आखिर यह कौन थी जो उसको समीरा कह कर बुला रही थी। उसने अब मारिया को अपना चेहरा दिखाया और बोली में मेजर मिनी हूँ, और मुझे मेजर राज ने विशेष रूप से तुम्हें संदेश देने के लिए भेजा है, कि उस स्त्री ने अपना हाथ मारिया की कमीज में डाल कर वह लिफाफा उसके ब्रा में फंसा दिया और उसके बाद फिर से अपना घूँघट गिराकर जल्दी जल्दी तेज तेज कदमों से बाहर जाने वाली महिलाओं के पीछे चलदी
 


अब मारिया को काफी सस्पेंस था कि आखिर यह महिला कौन थी ?? क्या उसको वाकई मेजर राज ने भेजा है या यह कोई चक्कर है ??? और जो लिफाफा उसने मारिया की ब्रा में डाल दिया है उस पर क्या संदेश लिखा होगा ???अब मारिया जल्दी जल्दी इन महिलाओं से मिलकर फ्री हुई और फैजल को वापस हवेली चलने को कहा। हवेली में जाते ही मारिया को अब अपने कमरे में जाने की जल्दी थी, लेकिन इससे पहले वह कमरे में जाती, सामने से जन्नत आती दिखाई दी, उसने आते ही अपने बाबा फैजल के हाथ चूमे और फैजल ने उसके सिर पर प्यार दिया फिर उसने मारिया को देखा और ध्यान से देखते हुए बोली, बाबा जानी ये बीबीजी हैं ना ???

फैजल ने कहा हां बेटा यही बीबीजी हैं आपकी। यह सुनते ही जन्नत आगे बढ़ी और मारिया से लिपट गई मारिया ने भी उसको प्यार किया। फिर जन्नत मारिया को खींचती अपने कमरे में ले जाने लगी। फैजल भी उसके साथ कमरे में प्रवेश हो गया .. जन्नत 15 साल की बच्ची थी मगर उसका शरीर कमाल का था। उभरे हुए सीने के उभार से वो कम से कम 18 साल की जवान औरत लगती थी और उसके बाहर निकले हुए चूतड़ किसी भी पुरुष को चोदने का निमंत्रण देने के लिए पर्याप्त थे। मारिया दिल ही दिल में जन्नत के नसवानी हुश्न की सराहना करने के लिए मजबूर हो गई मगर फैजल के सामने वह उसको कुछ कह नहीं सकती थी। जन्नत से कुछ देर बातें करने के बाद फैजल ने जन्नत को कहा कि बीबी जी को बाकी की हवेली दिखा दूँ तुम अपनी अम्मा के कमरे में जाओ

यह सुनकर मारिया ने जन्नत को प्यार किया और उसके कमरे से बाहर निकल आई जबकि फैजल अब मारिया को लिए एक गलियारे से होता हुआ सीढ़ियों पर चढ़ने लगा, मारिया भी उसके पीछे पीछे सीढ़ियों चढ़ती गई, यहां ज्यादा लोग मौजूद नहीं थे बस एक दो नौकर चाकर ही थे जो अपना सिर झुका अपने कामों में व्यस्त थे। यहाँ फैजल ने मारिया को टेरेंस भी दिखाया जहां बंदूक धारी हाथ में बंदूक लिए खड़े थे और इसके अलावा विभिन्न कमरे भी दिखाए और उनके बारे में बताया कि किन लोगों के लिए कौन सा कमरा आरक्षित है। यहाँ एक बड़ा पुस्तकालय भी था जिसमे विभिन्न किताबें और उपन्यास मौजूद थे और एक बड़ा हॉल भी था जिसमें जालियों से नीचे वाला हॉल कक्ष दिखता था जिसमें लोकाटी ने लोगों से मुलाकात की थी जिसको फैजल ने अतिथि ग्रह बताया था। आसपास कोई व्यक्ति न होने की वजह से फैजल अब काफी रिलैक्स था और मारिया से काफी फ्री होकर बात कर रहा था। इस दौरान मारिया ने महसूस किया कि फैजल अपनी नज़रें मारिया के बड़े मम्मों पर गढ़ा देता था और जब मारिया ने फैजल की तरफ देखती तो वो अपनी नज़रें हटा लेता। मारिया ने महसूस किया था कि उसकी टाइट फिटिंग वाली कमीज में उसका फिगर बहुत कयामत ढा रहा था और फैजल को बार बार मजबूर कर रहा था कि वह अपनी नज़रों को मारिया के मम्मों से चकाचौंध करे। मगर मारिया ने फैजल को इस बात से नहीं रोका, बल्कि अब वह जानबूझकर फैजल को अवसर दे रही थी कि वह मारिया के मम्मों को देख सके उसके साथ मारिया फैजल से आगे जाकर अपनी पीठ फैजल की ओर करके एक रेक का सहारा लेकर झुककर भी खड़ी हो गई और टेबल पर पड़ी किताब को उलट पलट कर देखने लगी। इस स्थिति में मारिया के बड़े बड़े नितंब फैजल के लंड को खड़ा होने पर मजबूर कर रहे थे और फैजल की नजरें मारिया की टाइट कमीज से दिखने वाली मारिया के चूतड़ों के बीच की लाइन पर थीं। वह मन ही मन अपने पिता की किस्मत पर रश्क कर रहा था जिसकी किस्मत में इतनी गर्म और सेक्सी लड़की आई थी जबकि फैजल को या तो अपनी 35 वर्षीय पत्नी के शरीर से काम चलाना पड़ता था या फिर जाहिल महिलाओं से काम चलाता था वह कोई इतनी सुंदर नहीं थीं। जबकि उसके पिता को इस उम्र में इतनी हसीन और सेक्सी लड़की मिल गई थी।

मारिया कुछ देर इसी तरह अपनी गाण्ड दिखाने के बाद सीधी खड़ी हुई और फिर से फैजल से बातें करने लगी और हवेली के विभिन्न स्थान देखने लगी इस दौरान वह फैजल के और करीब हो गई थी और कभी कभी दोनों के शरीर आपस में टकराते तो मारिया को एहसास होता कि फैजल का शरीर काफी गर्म है। जबकि फैजल भी मन ही मन सोचता कि इतना गर्म और मुलायम शरीर अगर चोदने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए

पूरी हवेली देख लेने के बाद मारिया ने फैजल को कहा कि वह उसे वापस उसके कमरे में छोड़ आए। तो फैजल न चाहते हुए भी मारिया को उसके कमरे तक छोड़ आया। कमरे में जाते ही मारिया ने दरवाजा बंद कर लिया और फैजल अपना सा मुंह लेकर वापस अपने कमरे में चला गया। मगर वह खुश था कि उसने कुछ देर ही सही मगर इतनी सेक्सी लड़की के शरीर के उभार देख लिए। फैजल के जाते ही मारिया ने कमरे की जाँच की, उसके अलावा कमरे में और कोई नहीं था। अब मारिया ने अपनी कमीज में हाथ डाल कर अपनी ब्रा से कागज का वह लिफाफा निकाला और उसे खोला तो उसमें से 2 प्लास्टिक की छोटी थैलियां निकली और एक छोटी सी पर्ची थी। मारिया ने वह पर्ची खोलकर पढ़ना शुरू किया तो उसमें केवल इतना लिखा था "दोनों सरकार पा शक्तिशाली बनना चाहते हैं, दोनों को शासक के खिलाफ करो

उसके बाद मारिया ने वह छोटी थैलियाँ देखी तो उनमें से एक पर जहर लिखा था जबकि दूसरी में बेहोशी की दवा लिखा था। मारिया समझ गई कि यह जहर मारिया के लिए भेजा गया है कि अगर वह किसी मुश्किल में फंसे तो इन अत्याचारियों का अत्याचार सहन करने की बजाय जहर खा ले। जबकि बेहोशी की दवा उसकी जरूरत के लिए थी कि अगर हवेली में किसी को बेहोश करना हो तो यह दवा मारिया काम आ सके। जबकि दूसरा संदेश भी मारिया समझ गई थी दोनों को दर्शाता लोकाटी के दोनों बेटे थे और मेजर राज ने मारिया को बताया था कि ये दोनों ही किसी न किसी तरह लोकाटी की बजाय स्वशासन प्राप्त करना चाहते हैं और अगर उन्हें लोकाटी के खिलाफ कर दिया जाय तो मेजर राज अपना कोई खेल चला सकता है। मारिया काफी देर कमरे में बैठी रही और सोचती रही कि आखिर कैसे दोनों को उनके पिता के खिलाफ किया जा सकता है और कैसे उन्हें यह आश्वासन दिया जा सकता है कि उन्हें सरकार मिल सकती है।

काफी देर सोचने के बाद मारिया के मन में केवल एक ही बात आई कि हर आदमी औरत के शरीर का प्यासा है, और आज मारिया ने देख भी लिया था कि फैजल जो जाहिरा तौर मारिया की ओर आँख उठा कर नहीं देखता था, अवसर मिलने पर उसकी नज़रें मारिया के मम्मों पर थी जो कमीज में छिपे हुए थे। कमीज में छिपे हुए मम्मों पर फैजल इस तरह मरा जा रहा था तो जब वह उसके मम्मों को अपने सामने देख लेगा तो उसका क्या हाल होगा। मारिया ने अब पूरा प्लान बना लिया था कि उसे क्या करना है। और अब वह अपने प्लान को अमलीजामा पहनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही थी

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साना जावेद ने कमरे के की होल में चाबी घुमाई और हेंडल घुमा कर दरवाजा अंदर धकेला तो दरवाजा खुलता चला गया। साना जावेद ने मेजर राज को अंदर आने का इशारा किया और जैसे ही राज ने अंदर प्रवेश किया साना जावेद ने कमरा पीछे से बंद कर दिया और कुंडी लगाकर रकी ओर बढ़ी। राज के पास जाकर साना जावेद रुक गई और बोली- हाँ अब बताओ कर्नल इरफ़ान ने तुम्हें यहाँ क्यों भेजा है? और तुम कौन हो ??? इस पर मेजर राज ने कहा कि मेरा नाम फ़िरोज़ है और मैं पाकिस्तानी सेना में कैप्टन के पद पर हूँ। और कर्नल इरफ़ान की टीम में बहुत महत्वपूर्ण सेवा में हूँ। कर्नल साहब पिछले काफी दिनों से एक भारतीयमेजर जो इस समय पाकिस्तान में मौजूद है उसको पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब अचानक उनको इंडिया जाना पड़ गया है और वह अपना मेजर राज को पकड़ने का मिशन अधूरा छोड़ गए हैं क्योंकि इंडिया में कुछ ज़्यादा जरूरी काम हैं। और आप को भी कल रात ही इंडिया जाना है तो कर्नल साहब ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि मैं आपके साथ ही इंडिया जाऊंगा।

इस पर साना जावेद ने कहा मगर तुम मेरे साथ कैसे जा सकते हो? मेरी तो सारी तैयारी पूरी है और हमारी फ्लाइट भी फुल है। इस पर मेजर राज ने साना जावेद को कहा मैम आपके साथ आपका एक मेकअप मेन फ़िरोज़ भी जा रहा है। आज रात फ़िरोज़ को अंडर ग्राउंड कर दूंगा और खुद फ़िरोज़ बनकर उसी वीजा और पासपोर्ट पर आपके साथ जाऊंगा

इस पर साना जावेद ने कहा मगर मुझे तो कर्नल इरफ़ान ने ऐसी कोई बात नहीं बताई। कैप्टन ने कहा इसीलिए तो उन्होंने मुझे आपके पास भेजा है, उन्हें अचानक ही इंडिया जाना पड़ गया है, पहले उन्होंने अपना मिशन अगले सप्ताह तक पूरा करना था लेकिन अब उन्होंने अचानक ही फैसला किया है कि मिशन पूरा करने का सही समय आ गया है अब ज़्यादा देर नहीं की जा सकती, इसके साथ साथ आप अपनी फिल्म की एक प्रति भी मुझे देंगी, मैं वह फिल्म खुद भी देखूंगा और आपके साथ इंडिया जाने के बाद आपकी फिल्म जल्दी रिलीज करवाने का काम भी मैं ही कर दूँगा जैसे ही आपकी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी उसी रात कर्नल इरफ़ान इंडिया पर अपना आखिरी वार करेंगे और उसे एक प्रांत से वंचित कर देंगे।

साना जावेद संदिग्ध नजरों से कैप्टन को देख रही थी जैसे उसे उसकी बातों पर विश्वास न हो। कैप्टन ने इस बात को महसूस कर लिया था, कप्तान ने कहा मैम हमारे पास ज्यादा समय नहीं है, कल किसी भी तरह हमें इंडिया जाना है, कर्नल इरफ़ान आपको वहीं मिलेंगे, अगर आप चाहें तो सेना मुख्यालय से कर्नल इरफ़ान के बारे में पता कर सकते हैं कि वह पाकिस्तान में हैं या इंडिया मे . मगर उससे पहले अपनी पहचान अवश्य करवाईएगा अन्यथा सेना मुख्यालय से आपको कभी कोई जानकारी नहीं मिलेंगी। मेजर राज की बातों को देख अब साना जावेद को विश्वास हो चला था कि यह सच कह रहा है। मगर फिर साना जावेद ने हैरान होते हुए पूछा कि अगर इतनी ही आपातकालीन स्थिति है और तुम्हें कर्नल इरफ़ान ने मेरे पास भेजा है तो तुम वहाँ ऐनी जाफ़री के साथ क्या कर रहे थे ???

साना जावेद की यह बात सुनकर मेजर राज मुस्कुराया और बोला आपको काफ़ी देर से ढूंढने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आप नहीं मिल रही थीं, तो नीचे हॉल में ऐनी जी से मुलाकात हो गई, तो आपको तो पता ही है कि, एक तो वह खुद बहुत सेक्सी हैं ऊपर से उनकी ड्रेसिंग ऐसी होती है कि कोई भी पुरुष उनकी ओर खिंचा चला जाता है।बातों बातों में ही उनके अतीत के बारे में भी बात हुई, आपको तो पता ही होगा कि लॉलीवुड से पहले वह कैसी वाहियात फिल्में करती थीं, तो उन्हें जब पता चला कि मैं पाकिस्तानी सेना में हूँ तो उनके अंदर वही पॉर्न स्टार जाग उठी और उन्होंने सोचा कि आज किसी आर्मी वाले के साथ भी सेक्स का मज़ा लिया जाए, तभी किसी ने मुझे बताया कि साना जावेद कुछ देर पहले ऊपर वाली मंजिल पर थीं तभी ऐनी जाफ़री जी मुझे लेकर ऊपर आ गई और बोलीं कि आप बाथरूम में होगी, में बाथरूम तक आपको ढूंढने आया था, मगर आगे ऐनी जी के इरादे कुछ और थे, अब आप तो जानती ही हैं कि अगर कोई महिला खुद ही निश्चय कर ले किसी आदमी से सेक्स करने का तो वो पल आदमी के लिए कितना मुश्किल होता है इनकार कर नही सकता है, और अगर औरत भी ऐनी जाफ़री जी जैसी हो तो तो असंभव है इनकार

कैप्टन की यह बात सुनकर साना जावेद ने बुरा सा मुँह बनाया और बोली- अब ऐसी कोई बात नहीं उस मोटी में। खैर अब बताओ आगे का क्या कार्यक्रम है ???

मेजर राज ने कहा कार्यक्रम वही है कि आप मुझे अपनी फिल्म की कॉपी देंगी, मैं इस फिल्म को देखूँगा और उसके अनुसार कुछ योजना बनाउन्गा और इस फिल्म की कॉपी इंडिया के कुछ नेताओं तक भी आज रात ही पहुंचा दूंगा, और कल शाम को मैं आपके साथ इंडिया जाऊंगा और वहां एयरपोर्ट पर ही हमारी कर्नल इरफ़ान के साथ बैठक होगी। और आगे की योजना हमें कर्नल साहब वहीं बताएंगे।यह सुनकर साना जावेद ने एक लम्बी सी साँस ली ..... और कुछ देर खामोश रही जैसे कुछ सोच रही हो ... इस दौरान कुछ सेकंड के लिए कैप्टन ने महसूस किया कि साना जावेद की नजरें मेजर राज की पैंट पर हैं जहां वो कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही थी, मगर फिर तुरंत ही उसने अपनी नज़रें हटा लीं . फिर साना जावेद ने कहा कि यहां तो मेरे पास फिल्म नहीं है, वह मेरे घर पर है, वहीं चलकर तुम्हें फिल्म दे सकती हूँ। मेजर राज ने कहा कि चलें फिर वहीं चलते हैं। इस पर साना जावेद ने कहा नहीं अभी नहीं जा सकती, अब यहाँ मेरा प्रदर्शन है और पुरस्कार भी मिलना है, यहां से करीब रात के 2 बजे फ्री होउंगी, उसके बाद वैसे तो मुझे फवाद के साथ जाना था मगर वह कार्यक्रम में कैंसिल कर सकती हूँ और 2 बजे के बाद घर चलकर तुम्हें फिल्म दिखा सकती हूँ

मेजर राज ने कहा ठीक है 2 बजे यहां से खाली होकर आप अपने घर चली जाएं। मैं आपको 2 बजे के बाद आपके घर पर ही मिलूँगा। साना जावेद ने कहा, यहां से इकट्ठे जाएंगे हम ??? मेजर राज ने कहा नहीं आप अलग जाएंगी और मैं अलग ही वहाँ पहुँचूँगा, बस यह ध्यान रखें कि मीडिया वालों से बच कर जाना है आपने, कहीं ऐसा न हो कि आप को एक आर्मी कैप्टन के साथ देखकर मीडिया बात फैला दे और इंडिया में भी हमारी योजना की भनक पड़ जाए।साना जावेद ने कहा चलो ठीक है तुम मेरे घर का पता लिख लो ... यह सुनकर मेजर राज हंसने लगा और बोला मेडम आप एक आर्मी कैप्टन के सामने खड़ी हैं, तो चिंता न करें मैं पूरे समय घर पर ही मिलूंगा आपको।साना जावेद ने कहा अब तो मैं जाऊं वापस नीचे ???

मेजर राज ने कहा, हां जी आप चलें, कुछ देर में भी नीचे ही रुकुंगा, उसके बाद में यहां से चला जाऊंगा कुछ जरूरी काम करने हैं और फिर रात को आपके घर पर ही मुलाकात होगी

यह कह कर मेजर राज कमरे से निकल गया और वापस बाथरूम की ओर गया, लेकिन अब की बार वो महिलाओं के बाथरूम की बजाय जेंट्सऊ बाथरूम में ही गया जबकि साना जावेद फिर से वह कमरा बंद करके नीचे हॉल में चली गई जहां इस समय रेशमा खुद के गाए गाने पर परफॉर्म कर रही थी। साना जावेद फिर से जा फवाद ख़ान के साथ बैठ गई और बोली सॉरी डार्लिंग, ज़्यादा देर तो नहीं हुई मुझे? फवाद ख़ान ने कहा कहाँ चली गई थी तुम और वह व्यक्ति कौन था, साना जावेद ने किसी ना किसी तरह उसे टाल दिया और फिर से शो एंजाय करने लगी जबकि फवाद ख़ान भी साना जावेद से अन्य विषयों पर बातें करने लगा

शो खत्म होने के बाद फवाद ख़ान ने साना जावेद को लांग ड्राइव ऑफर की मगर साना जावेद ने तबीयत का झूठा बहाना बनाकर फवाद को टाल दिया और खुद अपनी कार में घर पहुंच गई। घर पहुंची तो रात के 2 बजकर 25 मिनट हो चुके थे। साना जावेद ने घर जाकर कमरे की रोशनी ऑन कीं और इंटरकॉम पर अपने मेकअप मेन फ़िरोज़ को अपने कमरे में आने के लिए कहा ताकि वह उसको आवश्यक निर्देश दे सके। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला तो फ़िरोज़ अंदर आया। साना जावेद ने फ़िरोज़ को कहा कि आप ने जो इंडिया जाने की तैयारी कर रखी थी उसको ऐसे ही छोड़ दो, तुम अब इंडिया नहीं जा रहे हो, कल तुम्हें अंडर ग्राउंड कर दिया जाएगा और तुम्हारी जगह कोई और इंडिया जाएगा।

यह सुनकर फ़िरोज़ बोला मैम ऐसी बातें हर किसी को बताने की नहीं होतीं, यह आर्मी के सीक्रेट हैं, बात फ़िरोज़ के बारे में ही है लेकिन फ़िरोज़ को भी इस बात का पता नहीं लगना चाहिए ?? यह कह कर फ़िरोज़ हंसने लगा .. साना जावेद हैरान होकर उसे देखने लगी, फिर उसे ख्याल आया कि यह आवाज फ़िरोज़ की नहीं बल्कि यह तो कैप्टन फ़िरोज़ की आवाज है जो उसको होटल में मिला था। साना जावेद ने फटी फटी आँखों से फ़िरोज़ को देखा तो वह हंसने लगा और बोला अरे साना जावेद जी में केप्टन फ़िरोज़ हूं, आपके फ़िरोज़ को मैं कब का ठिकाने लगा चुका। देखिए कैसा हुलिया अपनाया है आप भी नहीं पहचान सकीं कि फ़िरोज़ नहीं बल्कि केप्टन फ़िरोज़ हूँ।यह कह कर मेजर राज ने एक और ठहाका लगाया और साना जावेद के पास आकर बोला क्यों साना जावेद जी, कैसी लगी मेरी एक्टिंग ???

साना जावेद ने प्रशंसा भरी नज़रों से मेजर राज को देखा और बोली में भी संदेह में न पड़ती अगर तुम ये बातें नहीं करते फ़िरोज़ के मुंह से आर्मी का सुनकर हैरान हुई वरना मुझे तो पता ही नहीं लगता। साना जावेद की बात के जवाब में मेजर राज ने पाकिस्तान का नारा लगाया और बोला जब तक हम जैसे अधिकारी मौजूद हैंहमारी धरती को कोई विश्वासघाती नुकसान नही पहुँचा सकता है, यह कहते हुए मेजर राज के लहजे में एक विश्वास था क्योंकि वास्तव में तो वह मेजर राज था और वह पाकिस्तान के लिए नहीं बल्कि अपने देश इंडिया के लिए ये शब्द बोल रहा था। अब मेजर राज ने साना जावेद को कहा मैम मुझे अपनी फिल्म की एक कॉपी दें, रात पहले ही बहुत हो गई है मुझे वह फिल्म देखनी भी है

 


इस पर साना जावेद ने कहा, ठहरो में पहले चेंज कर लूं इस ड्रेस में परेशान हूँ। यह कह कर साना जावेद ने साथ वाला दरवाज़ा खोला जो उसके बाथरूम का था और अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया जबकि मेजर राज वहीं पर पड़े एक सोफे पर बैठ गया, कोई आधे घंटे बाद साना जावेद बाहर निकली तो उसका मेकअप आदि बिल्कुल साफ था और टाइट ड्रेस की जगह अब एक ढीली शर्ट और शॉर्ट ने ले ली थी। इस ड्रेसिंग में भी साना जावेद बहुत प्यारी लग रही थी, प्यारी के साथ सेक्सी भी लग रही थी, लेकिन राज को इस समय साना जावेद की मूवी देखने की जल्दी थी। साना जावेद कमरे में आई और अपने एक दराज में से कुछ सीडी निकाल कर उनको चेक करने लगी, फिर एक सीडी कवर से साना जावेद ने सीडी निकाल कर मेजर राज को दी और बोली ये है मेरी फिल्म जिसे इंडिया में चलाया जाएगा। लेकिन याद रखना कि इस फिल्म को अब तक फिल्म की कास्ट स्टाफ और कर्नल इरफ़ान के अलावा किसी ने नहीं देखा, यह लीक नहीं होनी चाहिए। तो राज ने कहा मैम आप चिंता न करें मुझे इस बात का पूरा-पूरा एहसास है। यदि आप का मन नहीं तो मैं यहीं पर यह फिल्म चला सकता हूँ?

साना जावेद ने कहा हां, देखो और अगर मेरे लिए कोई काम नहीं तो मैं सोना चाहती हूँ बहुत थक चुकी हूँ। मेजर राज ने कहा मेडम आप बेफिक्र होकर सोजाएँ बस इस बात का ध्यान रखें कि सुबह जल्दी उठकर आपको अपनी तैयारी करनी है ताकि शाम की फ्लाइट से हम इंडिया रवाना हो सकें। साना जावेद ने कहा, तुम चिंता मत करो मेरी तैयारी पूरी है, यह कह कर साना जावेद बेड पर लेट गई और अपने ऊपर एक हल्की सी चादर ले ली, कमरे में एसी चल रहा था और काफी शांत कमरा था जबकि साना जावेद की ढीली शर्ट और छोटी शॉर्ट में उसके शरीर का अधिकांश हिस्सा नंगा ही था तो उसको थोड़ी ठंड लग रही थी। मेजर राज को फिल्म देखने का कह कर साना जावेद जल्द ही सो गई थी, वह वास्तव में बहुत थक चुकी थी इसलिए उसे बहुत जल्दी नींद आ गई, जबकि मेजर राज सामने पड़े सीडी प्लेयर पर सीडी चलाकर 40 इंच बड़ी एलसीडी पर फिल्म देखने में व्यस्त हो गया था

फिल्म की शुरुआत में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के कुछ दृश्य दिखाए गए थे, उनमें अधिकांश दृश्यों में इंडियन क्षेत्रों से मुस्लिम लोगों को विस्थापित करते दिखाया गया था जिन्हें रास्ते में हिंदुओं ने लूटा, किसी का माल लूटा तो किसी के मवेशी लूटे, और जहाँ कोई जवान लड़की दिखाई दी वहां उनकी इज़्ज़त लूटी यानी इस फिल्म की शुरुआत में ही इंडिया के खिलाफ नफरत फैलानी शुरू कर दी गई थी, जबकि पाकिस्तान की सेना को दिखाया कि वह पूर्वी इंडिया के लोगों की रक्षा की खातिर अपने प्राणों का बलिदान करते रहे

उसके बाद पश्चिमी पाकिस्तान की बरबादी ढाका के बाद के हालात दिखाए गए जहां अश्लीलता और नग्नता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी, जबकि उसके प्रांत के लोग अपनी परंपराओं और मूल्यों को सीने से लगाए हुए थे, यहां भी लोगों के साथ उत्पीड़न दिखाए गए थे। साना जावेद की भूमिका एक धार्मिक परिवार की नेक लड़की की थी जिसे कभी किसी गैर मर्द ने देखा तक नहीं था। घाटी के लोग बहुत मिलनसार और प्यार करने वाले थे, जबकि अपनी परंपराओं की खातिर जान कुर्बान करना भी जानते थे, जबकि दूसरी ओर शेष प्रांत मूल्यों और परंपराओं भूलकर पश्चिमी दुनिया के रंग में रंग गए थे। भारत सरकार और सेना मिलकर घाटी के खजाने पर कब्जा करना चाहते थे, वहाँ मादीनियात से घाटी के लोगों को वंचित रखा जा रहा था वहां पर मौजूद सोने की खदानों से प्राप्त होने वाली आय चुपके दूसरे प्रांतों में लगाई जा रही थी जबकि घाटी के लोगो को बताया जा रहा था कि सोने की खदानों से अब सोना निकालना संभव नहीं

वहां की महिलाओं के साथ भी भारतीय सेना उत्पीड़न कर रही थीं। इन्हीं में साना जावेद ने अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए आवाज उठाई तो भारत के सेनाध्यक्ष ने भरे बाजार में साना जावेद जैसी नेक और शरीफ लड़की को बेज़्जत किया और उसके सिर से दुपट्टा उतारकर उसको घाटी की सड़कों पर बालों से पकड़ कर घसीटा । मगर ये बहादुर लड़की सैनिकों से डरी नहीं और अपने लोगों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करती रही।फिर उसी फिल्म में यह भी दिखाया गया कि इसी बहादुर लड़की को भारतीय सेना के 5 जवानों ने मिलकर रात के अंधेरे में अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके शरीर को नोच नोच कर लहूलुहान कर दिया। सारी रात सेना के जवान बारी बारी उसका बलात्कार करते रहे कभी आगे और कभी पीछे से उसको चोदते रहे। और इस लड़की की दिलख़राश चीखें सुनने के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। उसके बाद उस लड़की ने बदला लेने की ठानी और अपने लोगों में वापस जाकर उनको भारत के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया और पाकिस्तानी सेना से कॉन्टेक्ट शुरू किया, और प्रांत में अलग वतन का आंदोलन शुरू कर दिया फिल्म में कहीं भी इस बात का हिंट तक नहीं दिखाया कि इंडिया से अलग होने के बाद ये प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा, बल्कि फिल्म में छाप दिया जा रहा था कि घाटी का क्षेत्र स्वतंत्रता आंदोलन सफल होने के मामले में एक स्वतंत्र देश की स्थिति दुनिया के नक्शे पर दिखाई देगा

फिर फिल्म के अंत में घाटी के लोगों ने एकजुट होकर सेनाध्यक्ष को इसी बाजार में घसीटा जहां उसने घाटी की बहादुर बेटी यानी साना जावेद को घसीटा था और उनके पांच जवानों की भी गर्दनें अलग करने के बाद घाटी के लोगों ने अपने आप को भारत से अलग घोषित कर दिया जिसे वैश्विक ताकतों ने तत्काल स्वीकार कर लिया और आखिरकार भारत के अत्याचार से तंग आकर संचालित आंदोलन सफल हुआ और होलस्तान एक अलग देश के रूप में दुनिया के नक्शे पर दिखाया। यह फिल्म देखकर मेजर राज को पसीने आ गए थे, इस फिल्म में जो कुछ दिखाया गया था वह निश्चित रूप से वास्तविकता से बहुत दूर और दुश्मन के प्रचार का हिस्सा था। और यह सब कुछ इतना खतरनाक था कि अगर यह फिल्म घाटी के लोग देख लेते तो जहां पहले ही दुश्मन स्वतंत्रता आंदोलन चला रहे थे मासूम लोगों को गुमराह कर वहां तो आग लग जानी थी और लोकाटी जैसे देश विक्रेता एक आवाज पर लोगों ने विद्रोह की घोषणा कर देना था

मेजर राज को आने वाले हालात पर विचार कर पसीने आ रहे थे, वह यहीं साना जावेद के कमरे से ही लैपटॉप के माध्यम से इस फिल्म से ही चयनित दृश्य भारतीय सेना मुख्यालय को भेज दिए थे, मेजर राज साना जावेद के घर आने के बाद उसके कर्मचारी फ़िरोज़ को गायब करते ही लैपटॉप भी ले आया था क्योंकि वह जानता था कि उसे जरूरत होगी और साना जावेद का लैपटॉप इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता था। यह सब काम करके मेजर राज ने कुछ और जानकारी सेना मुख्यालय तक पहुँचाई और उसके बाद अपने आने की सूचना देकर लैपटॉप बंद किया और सोफे पर ही सो गया

दोपहर 11 बजे के करीब साना जावेद ने राज को जगाया, मेजर राज की आंख खुली तो उसकी आंखों के सामने साना जावेद का चेहरा था, मगर वह खासी झुंझलाई हुई लग रही थी। मेजर ने एकदम आँखें खोली और पूछा क्या हुआ ?? तो साना जावेद ने कहा कब से तुम्हें उठा रही हूँ मगर तुम उठ ही नहीं रहे।फ़िरोज़ तो चला गया लेकिन मेरा बाकी स्टाफ कहाँ हैं ??? इस पर मेजर राज मुस्कुराया और बोला उनको भी मैंने कल छुट्टी पर भेज दिया था आपके प्रबंधक से कहलवा दिया था कि मैम ने इंडिया से वापसी तक आप लोगों को छुट्टी दे दी है ताकि किसी को मेरे बारे में शक न हो सके। उसकी बात सुनकर साना जावेद ने कहा तो अब मुझे भूख लगी है, खाना भी नहीं है, मुझे खाना खाना है पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। ये सुनकर मेजर राज सोफे से उठा और बोला फ्रिज में देख लेते हैं कुछ पडा हो भोजन, लेकिन साना जावेद ने कहा, मैं देख चुकी हूँ कुछ नहीं है फ्रिज में।भूख तो राज को भी लग रही थी उसे भी अब लगा कि कुछ खा लेना चाहिए। मेजर राज अब किचन में गया तो वहां डबलरोटी का एक पैकेट पड़ा था साथ ही शेल्फ पर टोस्टर भी था और किचन मे जेम भी मौजूद था, एक दूध का पैकेट था जो मेजर राज ने निकालकर चाय बनाने के लिए इस्तेमाल किया और टोस्टर में कुछ स्लाइस गर्म करने के साथ जेम और चिकन पुलाव ट्रे में रखा, चाय बनाने के साथ ही राज ने 2 अंडे भी हाफ फ्राई कर लिए और ये गरम नाश्ता लेकर वापस कमरे में चला गया जहां साना जावेद बेचैनी से खाने का वेट कर रही थी।

मेजर राज के हाथ में नाश्ते की ट्रे देखकर साना जावेद तुरंत उठी और नाश्ते पर टूट पड़ी, मेजर राज ने भी साना जावेद के साथ ही हल्का नाश्ता किया। चाय पीकर साना जावेद ने राज की प्रशंसा की कि तुम तो मेरी रसोईये से भी अच्छी चाय बना लेते हो। इस पर राज ने कहा बस मैम हम सैनिकों को ऐसे सभी कार्य करने पड़ते हैं क्योंकि ज्यादातर तो हम घर से बाहर ही रहते हैं, और अगर एक मिशन पर हों तो यह सब काम खुद ही करने पड़ते हैं, सेवा के लिए न तो कोई कर्मचारी होता है ना ही जीवन साथी। यह कह कर मेजर राज हंस पड़ा और साना जावेद भी हंसने लगी कि चलो अच्छा हुआ कि तुम्हें कुछ बनाना आता है वरना मेरी तो भूख से जान ही निकली जा रही थी

नाश्ते के बाद साना जावेद अपने कुछ जरूरी कामों में व्यस्त हो गई जबकि मेजर राज घर से बाहर निकल कर सामने बने स्विमिंग पूल में जाकर स्विमिंग करने लग गया। राज ने शर्ट बनियान और पेंट उतार दी थी, नीचे उसने महज एक अंडर वेअर पहन रखा था। काफी देर राज स्विमिंग करता रहा, ठंडे पानी से उसे काफी संतोष मिल रहा था वैसे भी वह एक आर्मी ऑफिसर था और काफी समय से कोई भी व्यायाम का काम नहीं किया था, और स्विमिंग से अच्छा कोई व्यायाम नहीं जिससे न केवल कसरत हो जाती बल्कि ठंडे पानी से शरीर को उर्जा भी मिलती है। साना जावेद अपने ज़रूरी काम निपटा कर बाहर निकली तो उसको मेजर राज स्विमिंग पूल में तैराकी करता नजर आया साना जावेद स्विमिंग पूल के पास मौजूद बेंच पर जाकर बैठ गई और उसे स्विमिंग करते देखने लगी। जब राज वापार आया तो उसकी नज़र साना जावेद पर पड़ी। वह स्विमिंग पूल के किनारे पर आकर रुक गया और किनारे का सहारा लेकर थोड़ा ऊपर उठा, उसका चुस्त सीना और चेहरा साना जावेद को दिख रहा था, छाती पर नज़र डालकर साना जावेद को अंदाज़ा हो गया था कि ये फ़ौजी काफी कसरत का आदी है और उसका कसरती शरीर किसी भी गर्म लड़की को अपनी ओर खींच सकता था। मेजर राज ने साना जावेद से पूछा कि वह क्या देख रही है ?? तो साना जावेद ने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही तुम पर नजर पड़ी तो इधर आकर बैठ गई,

यह सुनकर संराज ने एक क़लाबाज़ी लगाई और फिर से तैराकी शुरू कर दी। जब राज एक किनारे से दूर हुआ तो साना जावेद अपनी जगह से खड़ी हो गई और उसे कौशल के साथ स्विमिंग करते देखने लगी। दूसरे किनारे पर पहुंचकर मेजर राज फिर से तेजी के साथ वापस आया और फिर स्विमिंग पूल में मौजूद सीढ़ियों से चढ़ता हुआ स्विमिंग पूल से बाहर आ गया।

साना जावेद एक पल के लिए तो राज के के शरीर को देखकर आँखें झपकाना ही भूल गया, ऐसा कसरती शरीर तो उसके प्रेमी फवाद का भी नहीं था, 6 पैक बॉडी, तंग छाती, बड़े डोले, थाईज़ कट ऐसे थे जैसे किसी बॉडी बिल्डर के हों और ऊपर से उसके शरीर से टपकता हुआ पानी .... । ग़रज़ उसके शरीर की बनावट हर लिहाज से ऐसी थी जैसी हर लड़की चाहती है कि मजबूत शरीर का लड़का उसका जीवन साथी बने। फिर साना जावेद की नजरें मेजर राज के सफेद रंग के अंडर वेअर पर पड़ी तो वहां उसे कुछ उभार नजर आया, मगर ये उभार इतना नहीं था कि वह यह कह सके कि अंडर वेअर में मौजूद हथियार अपना सिर उठाए हुए है

मेजर राज ने साना जावेद को अपनी ओर यों देखते हुए पाया तो उसे आंखों के इशारे से पूछा तो साना जावेद ने न में सिर हिलाकर कहा नहीं कुछ नही और इधर उधर देखने लगी। राज अब साथ लगे झूले की ओर चला गया, स्विमिंग पूल के साथ ही एक छोटा सा लॉन था जिसमे एक झूला लगा हुआ था, वहीं मेजर के कपड़े भी पड़े थे राज वहां जाकर झूले पर बैठ गया और अपना शरीर सूखने का इंतजार करने लगा। इतने में राज को शड़ाप की आवाज आई जैसे पानी में कोई चीज गिरी हो। राज ने पीछे मुड़ कर देखा तो स्विमिंग पूल के बाहर साना जावेद की शर्ट और सॉर्ट पड़ी दिखी जबकि सामने स्विमिंग पूल में साना जावेद पानी में तैर रही थी राज ने कुछ देर तो साना जावेद को देखा मगर फिर वापस मुड़ कर हल्का हल्का झूला झूलने लगा। वो साथ आने की स्थिति के बारे में सोच रहा था, उसे इंडिया की चिंता हो रही थी साथ ही वह समीरा के बारे में भी सोच रहा था कि न जाने उसका संदेश समीरा तक पहुँच चुका होगा या नहीं और वह अपनी सुरक्षा के साथ साथ वह काम कर पाएगी या नहीं जिसके बारे में उसे गुप्त संदेश में कहा गया था।

 
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