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वतन तेरे हम लाडले complete

अभी यह योजना जारी थी कि किसी ने लोकाटी को आकर मेजर राज के बारे में सूचना दी। लोकाटी मेजर राज को जानता तक नहीं था, वह हैरान था कि मेजर राज कौन है और वह उससे मिलने क्यों आया है। फिर उसने सोचा शायद कल वाली घटना से संबंधित बात करने आया हो, लोकाटी ने उसे अंदर बुलाने के लिए कहा। मेजर जो उसकी हवेली के बाहर इंतजार था उसे एक आदमी ने अंदर आने के लिए कहा तो मेजर राज अकेले बिना किसी डर के लोकाटी के सामने जा खड़ा हुआ। लोकाटी ने मेजर की अनदेखी करते हुए उसे बैठने का इशारा किया और फोन पर बातें जारी रखी, लेकिन वह बात इस तरह कर रहा था कि मेजर राज को समझ न लगे कि वह क्या कह रहा है।

कुछ देर बाद फोन से फ्री होकर लोकाटी ने मेजर राज की ओर देखा और बोला हां मेजर बोलो कैसे आना हुआ, मेजर राज सिर झुकाए बैठा था, उसने अपनी टोपी उतारी और सिर ऊपर उठाकर लोकाटी को देखा जो बैठा मुस्कुरा रहा था। लोकाटी ने मेजर राज को देखा तो उसके चेहरे की मुस्कान पहले तो गायब हुई, फिर वहाँ आश्चर्य के आसार दिखने लगे और फिर डर के स्पष्ट लक्षण लोकाटी के चेहरे पर आए। फिर लोकाटी काँपती हुई आवाज़ में बोला, त .. । । त। । । तुम तो। । । । । टी ... टैन ... .राफिया के दोस्त हो न। । । एन ना ....... इस पर मेजर राज ने व्यंग्यात्मक मुस्कान दी और बोला नहीं, मैं इस पवित्र मातृभूमि का पुत्र हूं, जो दुश्मन को गर्दन से पकड़ कर कुचल देने की क्षमता रखता है। और मैं यहाँ तुम्हें वॉर्न करने आया हूँ कि अपनी हरकतों से बाज आ जाओ वरना आज का दिन तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन होगा।

मेजर राज के मुंह से यह शब्द सुनकर लोकाटी बहुत गुस्से की हालत में चिल्लाया और अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि मेजर राज को उठाकर बाहर फेंक दो . मगर वह यह नहीं जानता था कि एक आर्मी ऑफिसर को हाथ लगाने की हिम्मत किसी में नहीं होती, इसलिए उसकी आवाज पर कोई भी आगे नहीं बढ़ा तो मेजर राज खुद अपनी जगह से खड़ा हुआ और लोकाटी को कहा कि सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि वह अंजलि जो तुम्हारे साथ भारत आई और जिसने तुमसे सारे रहस्य उगलवा कर तुम्हारी वीडियो भी बनाई वह भी इसी देश की बेटी है और उसने वह वीडियो मुझे दे दी हैं जो मैं यहाँ की जनता को दिखा दूंगा अगर आपने कर्नल इरफ़ान के साथ अपने संबंधों को अभी और इसी समय ख़त्म ना किया तो। अंजलि का नाम सुनकर लोकाटी को एक और धक्का लगा, वो तो वैसे ही कल से मारिया जो उसके विचार में अंजलि थी उसको ढूंढ रहा था और फग़ान ने उसे बताया था कि वह शाम में एक जीप में एक कर्मचारी के साथ खरीदारी करने गई थी और अभी तक वापस नहीं आई। मगर फग़ान ने अपने बेटे शाह मीर के बारे में कुछ नहीं बताया था, क्योंकि वह नहीं चाहता था इस बारे में किसी को पता लगे। और तब भी फग़ान और फैजल दोनों में से कोई यहां नहीं था कि उन्हें मारिया की असलियत पता लगती जो उसे पाकिस्तानी एजेंट समझ रहे थे और अपने पिता को मारने के लिए भी तैयार थे। यह सब सुनकर लोकाटी एक पल के लिए परेशान हुआ, मगर फिर उसने सोचा कि अगर वास्तव में ऐसा होता तो अब तक तो उसको गिरफ्तार कर लिया जाता , क्योंकि कल रात जो घटना हुई उस पर अगर आर्मी के पास लोकाटी के खिलाफ कोई सबूत होता तो वह उसे वहीं पर मौत के घाट उतार देते देशद्रोह के आरोप में। मगर ऐसा न किए जाने का मतलब था कि मेजर राज उसको ब्लैकमेल करने के लिए तुक्कों से काम ले रहा है, वास्तव में उसके पास कोई सबूत नहीं है।

यह सोच कर लोकाटी ने मेजर राज से कहा, तुम से जो होता है तुम कर लो, लेकिन याद रखना आज शाम के बाद से घाटी भारतीय सेना का कब्रिस्तान साबित होगी, इसलिए बेहतर है कि शाम होने से पहले पहले खुद ही घाटी छोड़ जाओ। यह कह कर लोकाटी ने हिकारत से मेजर राज को देखा और अपने कमरे में जाने के लिए उठ खड़ा हुआ। पीछे से मेजर राज ने जोर कहा कि तुम्हारे इन नापाक इरादों को हुन्डुस्तानी सेना का एक जवान अपना खून देकर विफल कर देगा। यह कह कर मेजर राज उसकी हवेली से वापस निकल आया और अपनी जीप में बैठकर वापस आर्मी कैंप चला गया। जबकि लोकाटी अपने कमरे में बैठ कर सोचने लगा कि उसे क्या करना चाहिए। वह जान गया था कि उसके प्लान के बारे में भारत की सेना को पता लग चुका है, ऐसे में उसकी जान को खतरा था, उसने सभी प्रमुखों को अपनी हवेली में बुला लिया और उन्हें बड़ी-बड़ी लालच देकर पाकिस्तान से संबद्ध समर्थन पर आमादा कर लिया था। वैसे भी लोकाटी का मानना था कि जब साना जावेद की फिल्म इतनी जनता को स्क्रीन पर दिखाई जाएगी तो मेजर राज कितने ही सबूत क्यों न पेश कर ले जनता इतनी भावुक हो चुकी होगी कि वह मेजर की किसी बात को नहीं सुनेगी और लोकाटी की लीडरशिप में भारत से जुदाई के लिए आंदोलन शुरू करके पाकिस्तान में विलय का समर्थन करेंगे। सभी अधिकारियों को इस बात पर मनाने के बाद अब लोकाटी ने फैसला किया कि अपनी हवेली में बैठने की बजाय सभा स्थल चले जाना चाहिए, क्योंकि हवेली में उस पर छिपकर हमला किया जा सकता है मगर सभा स्थल में मीडिया के कैमरे होंगे वहां भारत की आर्मी लोकाटी पर हमला करने के बारे में सोचेगी नहीं।

लोकाटी ने इस बारे में कर्नल इरफ़ान से भी बात की, तो उसने भी लोकाटी बात से सहमत होते हुए उसे सभा स्थल जाने की हिदायत की और उसे बताया कि उसे डरने की जरूरत नहीं वहाँ सादे कपड़ों में उसके लोग होंगे जो उसकी रक्षा करेंगे और मेजर राज से वह बेफिक्र रहे वेवो कभी भी उसकी कोई वीडियो या कोई सबूत जनता के सामने पेश नहीं कर सकेगा उसकी व्यवस्था हो चुकी है।

कर्नल इरफ़ान से सांत्वना मिलने के बाद और विशेष रूप से यह शब्द सुनने के बाद कि मेजर राज की व्यवस्था हो चुकी है लोकाटी संतुष्ट हो गया था। फिर उसने अपने दोनों बेटों को अपने साथ लिया और उन्हें सभा स्थल चलने की हिदायत करते हुए अपने कमरे से साना जावेद की सीडी उठा लाया जो उसे कर्नल इरफ़ान ने एक रात पहले ही प्रदान की थी। वह सीडी अपने साथ लेकर लोकाटी ने अपने एक कर्मचारी को निर्देश दिया कि वह सभा में लाइव प्रदर्शन तैयार करे जहां प्रोजेक्टर के माध्यम से बड़े परदे पर साना जावेद की फिल्म दिखाई जाएगी और जब फिल्म में भारत के सेनाध्यक्ष और युवाओं को घाटी की सड़कों पर घसीटा जाएगा तो हम अलग होने की घोषणा कर देंगे। यह निर्देश करके लोकाटी सभा स्थल पहुंच गया और मंच पर जाकर जनता का लहू गरमाने लगा। जनता भी अपने नेता को अपने सामने देखकर खुश हो गई, और जो लोग अभी तक घरों में बैठे थे कि सम्मेलन स्थल में लोकाटी अंतिम समय में आएगा वह भी घरों से निकलना शुरू हो गए। देखते ही देखते सभा स्थल जनता से खचाखच भर चुका था हर तरफ सिर ही सिर थे और कहीं पैर रखने की जगह नहीं थी। यह दृश्य देखकर लोकाटी काफी संतुष्ट था, वह रहकर रह कर छोटे भाषण दे रहा था जिसमें वह घाटी के वित्तीय संसाधनों में अन्य प्रांतों के कब्जे के बारे में जहर उगल रहा था और जनता भी यह सब सुनकर भावुक हो रही थी कि आखिर उनके हक पर कैसे कोई डाका डाल सकता है।

दूसरी ओर मेजर राज अपना सारा प्लान तैयार कर चुका था वह खुद भी एक सुरक्षित जगह पर सादे कपड़ों में लोकाटी केजलसे में ही था, उसे आज हर मामले में अपने प्लान को कामयाब बनाना था और मातृभूमि की रक्षा की खाई हुई कसम को पूरा करना था। जैसे-जैसे सभा का नियमित प्रारंभ समय करीब आ रहा था मेजर राज के दिल धड़कनें तेज हो रही थीं, जबकि मेजर राज ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ को सीमा से संभावित दुश्मन सेना के हमले से आगाह कर दिया था जिसके लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ने अपने बलों को तैयार रहने का आदेश दिया था ताकि किसी भी संभावित हमले के मामले में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कर्नल इरफ़ान के संकेतों के इंतजार में था कि जैसे ही सीमा पार से कर्नल हमले का संकेत दे तो वह अपनी सेना को भारत पर हमला करने का आदेश जारी कर दे।

यहाँ विभिन्न अधिकारियों द्वारा भाषण जारी था, उनमें से ज्यादातर तो घाटी के विकास और जनता के कल्याण के बारे में थे जबकि कुछ लोग बीच-बीच में भारत के खिलाफ भी जहर उगल रहे थे जिससे वहां मौजूद लोगों का खून खोलने लगा था और उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनके अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है और आज इस उत्पीड़न से मुक्ति का दिन है। उनमें से ज्यादातर बातें तो झूठ पर आधारित थे, लेकिन कुछ बातें सच्ची भी थीं, जहां भारत सरकार दोषी थी, वह कुछ मामलों में वास्तव मे घाटी मे वह अधिकार नहीं दिए थे जिसके वह हकदार थे लेकिन उसका यह अर्थ कदापि नहीं था कि घाटी के लोग राज द्रोह की घोषणा करके पाकिस्तान से जा मिलें जहां पहले ही स्वतंत्रता के बीसियों आंदोलन चल रहे थे और उनको दबाने में पाकिस्तान सरकार बुरी तरह विफल रही थी

आखिरकार वह समय भी आ गया जिसका मेजर राज को उत्सुकता से इंतजार था। ये लोकाटी का भाषण था। मेजर राज नेस्टेज पर अपना एक आदमी बैठा रखा था ताकि अगर लोकाटी कुछ गलत घोषणा करना चाहे तो उसका आदमी फिर उसे अंतिम चेतावनी दे सके। लोकाटी ने भाषण का शुभारंभ किया जिसमें भारत से प्यार कूट कूटकर दिख रहा था, लोकाटी ने 1947 की घटनाओं की शुरूआत की जब घाटी की जनता ने भारत मे विलय का फैसला किया था और एक नए देश के रूप में दुनिया के नक्शे पर भारत उभरा तो इसमें घाटी के प्रमुखों और जनता का नाम रोशन शब्दों के साथ लिखा गया था, फिर विभिन्न अवसरों पर जब जब घाटी के लोगों ने भारत के लिए कुर्बानियां दी इनका उल्लेख था। जिससे ऊपरी तौर पर लग रहा था कि शायद लोकाटी अपना इरादा छोड़ चुका है और अब वह ऐसा कोई घोषणा नहीं करेगा जिससे विद्रोह सिर उठा सके। मगर कहीं न कहीं मेजर राज को विश्वास था कि लोकाटी अपनी असलियत जरूर दिखाएगा, और अंत में वही हुआ जिसका डर था, लोकाटी ने धीरे धीरे अपनी औकात दिखानी शुरू कर दी। उसने अब घाटी के लोगो के साथ होने वाली ज्यादतियों का जिक्र शुरू कर दिया। भारत सरकार ने कैसे घाटी के अधिकारों पर डाका डाला उसके बारे में झूठी कहानियां बना कर बयान करना शुरू कर दी जिससे घाटी की मासूम जनता लोकाटी की बातों में आकर भावनात्मक नारे लगाने लग गई थी। अब मेजर राज को लग रहा था कि किसी भी समय लोकाटी विद्रोह की घोषणा कर सकता है और तब स्थिति को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

 


धीरे धीरे लोकाटी के भाषण में भारत के लिए घृणा बढ़ती जा रही थी, फिर लोकाटी ने कहा कि मैं आपको आज घाटी की एक बहादुर बेटी की कहानी सुनाना चाहता हूँ, और फिर इसी कहानी पर बनने वाली एक फिल्म भी आपको यहाँ दिखाई जाएगी, उसके बाद आप खुद तय करेंगे कि आप भारत के साथ रहना चाहते हैं या फिर स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं ??? यह कह कर लोकाटी ने कहानी सुनाना शुरू की। यह वही कहानी थी जिस पर साना जावेद की फिल्म बनाई गई थी जैसे जैसे लोकाटी कहानी सुनाता जा रहा था जनता का जोश और जुनून बढ़ता जा रहा था। जब लोकाटी कहानी के उस हिस्से में पहुंचा जहां साना जावेद जिसका कहानी में नाम जन्नत था उसको सरे आम सड़क पर अपमानित किया गया उसकी इज़्ज़त की चादर उतारी गई और उसकी इज़्ज़त को तार तार किया गया तो जनता का उत्साह बढ़ गया था और मेजर राज को ऐसा लगने लगा कि अब हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे।

मेजर राज के साथ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी अपने केम्प में बैठकर लाइव सुन रहे थे उन्होंने मेजर राज को अभी कार्रवाई करने से रोक रखा था। यहां तक कि लोकाटी ने अपनी कहानी पूरी कर ली। कहानी के अंत में लोकाटी की आंखों में आंसू थे, अपने नेता को रोता देख कर सामने खड़ी जनता और भी अधिक भावुक हो गई थी। और अब भारत विरोधी नारे लगने शुरू हो गए थे, लोकाटी कुछ देर के लिए अपना भाषण रोक चुका था और उसने घोषणा की थी कि अब कुछ ही देर में इसी कहानी पर आधारित फिल्म भी आपको दिखाई जाएगी।

इस घोषणा के तुरंत बाद मेजर राज ने मंच पर मौजूद अपने खास आदमी को संदेश पहुंचाया कि लोकाटी से कहो कि अगर वह फिल्म चलाई या भारत से विद्रोह का एलान किया तो अभी और इसी समय वह फिल्म चल जाएगी जिसको समीरा के साथ और कर्नल इरफ़ान के साथ के समय में बनाई है। मेजर राज के खास आदमी ने तत्काल यह संदेश लोकाटी को पहुंचाया तो लोकाटी ने मंच से हट कर एक जोरदार ठहाका लगाया और बोला उसको कहो जो करना है कर ले, उसके हाथ में अब कुछ नहीं रहा, यहाँ लाखों की जनता मेरे साथ है और उसको संभालना आसान काम नहीं। मेरे एक आदेश पर यह जनता मेजर राज की धज्जियां उड़ा देंगी। यह कह कर लोकाटी ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया और अपने सामने खड़ी जनता को देखकर अपना हाथ हवा में लहराने लगा। वह फिल्म चलाने से पहले जनता की भावनाओं को और भी उभारना चाहता था इसीलिए अब वो अपने अधिकारों के लिए नारे लगवा रहा था।

तभी मेजर राज ने बौखला कर फैसला कर लिया कि वह लोकाटी की फिल्म यहीं पर चलाएगा उसने लोकाटी के एक खास आदमी को आदेश दिया कि जैसे ही इशारा करे तुम वही सीडी चला देना जो मैंने तुम्हें दी है। यह वही आदमी था जिसको लोकाटी ने साना जावेद की फिल्म चलाने की तैयारी करने को कहा था, किसी तरह मेजर राज को इसके बारे में पता हो गया और मेजर राज ने उसको लोकाटी की असलियत बता कर उसे इस बात पर तैयार कर लिया था कि साना जावेद की फिल्म की बजाय वह उसकी दी हुई सीडी को चलाएगा। और वह व्यक्ति भी राजी हो गया था क्योंकि घाटी की जनता के मन में अपने नेताओं के लिए जितना भी आदर सम्मान और भय हो, मगर वतन के लिए प्यार बहरहाल उनके दिलों में मौजूद था बस समस्या यह थी कि वह अपने नेताओं की कही हुई बातों पर विश्वास कर लेते थे, लेकिन आज जब लोकाटी के इस खास आदमी ने लोकाटी की असलियत देखी तो वह दिल से मेजर राज के साथ हो गया था और उसके एक आदेश पर अपनी जान की बाजी लगाने पर भी तैयार था।

मेजर राज ने उस आदमी को भी विशेष रूप से सुरक्षा दिलवाई थी। उसके चारों ओर बुलेटप्रूफ ग्लास और स्क्रीन काफी ऊंचाई पर बनवाई गई थी उसके सामने भी शीशा लगवा दिया गया था ताकि फिल्म के दौरान कोई भी फायरिंग करके स्क्रीन को खराब न कर सके और न ही उस व्यक्ति को कोई नुकसान पहुंचा सके। बिजली का भी विशेष रूप से प्रावधान किया गया था कि अगर बिजली चली भी जाए तो फिल्म न रुकने पाए। यह सब व्यवस्था वास्तव में मेजर राज के कहने पर की गई थी मगर उनके इंतजामात को करवाने वाला वही व्यक्ति था जिसे लोकाटी की फिल्म चलाने को कहा था और उसने यह सारी व्यवस्था लोकाटी की अनुमति से यह कह कर की थी कि जब यह फिल्म चलाते ही भारत सरकार हमारी बिजली भी बंद कर सकती है इसलिये हमें अलग से बिजली की व्यवस्था करना चाहिए, उसके साथ स्क्रीन को भी सुरक्षा के साथ लगाना होगा ताकि उसको भी कोई नुकसान न पहुंचा सके। उसके साथ ही उसकी अपनी सुरक्षा भी ज़रूरी थी ताकि वो शुरू से अंत तक फिल्म को चला सके, और लोकाटी ने खुद यह व्यवस्था अच्छी तरह से करवाने के आदेश दे दिए थे। और यही अब मेजर राज काम आ रही थी .

इससे पहले कि मेजर राज लोकाटी की सीडी चलाने का संकेत करता उसको अपने मोबाइल पर एक कॉल आया यह कॉल एक अज्ञात नंबर से थी। मेजर राज ने कॉल रिसीव की तो आगे से आवाज आई, क्यों दामाद जी, हमारी बनाई हुई योजना पर मिट्टी डालने का इरादा है क्या आपका ???

मेजर राज को कुछ समझ नहीं आया उसने गरजदार आवाज़ में पूछा क्या मतलब है तुम्हारा? कौन बोल रहे हो ???

उधर से एक जोरदार ठहाका लगाया गया और फिर कर्नल इरफ़ान की गरजदार आवाज सुनाई दी, राफिया के मोबाइल से मुझे आपने ही कॉल की थी न और ससुर जी कह कर बुलाया था, आज अपने ससुर को ही भूल गए क्या ??? मेजर को राफिया का नाम सुनकर समझ आ गई थी कि यह कर्नल इरफ़ान की आवाज़ है।

मेजर राज ने कर्नल इरफ़ान को कहा कर्नल तुम्हारा खेल खत्म हो गया है, अब कुछ ही देर में लोकाटी की असलियत दुनिया के सामने आ जाएगी और फिर घाटी की देशभक्त जनता लोकाटी को यहीं जमीन में दफन कर देगी, न तो तुम्हारी डरपोक सेना में इतनी हिम्मत होगी कि हमारे क्षेत्र पर हमला कर सकें और न ही तुम्हें यहाँ कोई अपना समर्थक मिलेगा, तुम कुत्ते की मौत मारे जाओगे और मैं तुम्हें अपने हाथों से मारूँगा।

उत्तर में कर्नल इरफ़ान ने एक जोरदार लगाया लगाया और बोला, जो जैसा करता है उसके साथ वैसा ही होता है। आपने भी मेरी बेटी को बंदी बनाकर मुझसे अपने साथियों को रिहा करवाया था न तो सुनो, ध्यान से सुनो, तुम्हारी प्यारी सी सुंदर सी, जवान पत्नी इस समय मेरी कब्जे में है, अगर आपने लोकाटी की फिल्म चलाई या मेरे रास्ते में आने की कोशिश की तो तुम्हारी पत्नी और बच्चे दोनों का ही सफाया हो जाएगा अभी और इसी समय।

 
यह सुनकर मेजर के पांव तले जमीन ही न रही, उसे लगा जैसे वह अब अपनी जगह पर गिर जाएगा उसने काँपती हुई आवाज़ में कहा, कहा ....... बच्चा ..... कौन सा बच्चा .... ???

कर्नल इरफ़ान फिर व्यंग्य का ठहाका लगाया और बोला वही बच्चा जो तुम्हारी जवान पत्नी के पेट में पल रहा है, लो अपनी पत्नी से बात करो ... यह कह कर कर्नल इरफ़ान ने फोन रश्मि के कान से लगा दिया जिसके हाथ पांव कर्नल इरफ़ान बाँध चुका था और वह एक अज्ञात जगह पर कैद थी। मेजर राज को रश्मि की आवाज सुनाई दी: हाय राज ???

रश्मि की आवाज सुनकर मेजर के होश खता हो गए, वह वास्तव में कर्नल इरफ़ान जैसे बेरहम और ज़ालिम आदमी के कब्ज़े में थी, लाचार मेजर राज की आंखों से आंसू बहने शुरू हो गए, वह बहुत बहादुर और मज़बूत जिस्म का मालिक था मगर इस समय वह बिल्कुल कमजोर बच्चे की तरह था जिसके हाथ में कुछ भी नहीं था, उसने हकलाती हुई आवाज में कहा, रश्मि तुम कहाँ हो ???

मगर आगे रश्मि की गूँजदार और शांत आवाज सुनाई दी: राज आपने सारा जीवन मेरे साथ रहने का वादा किया था, और मेरी सुरक्षा का मुझे आश्वासन दिया था, और मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम कभी वादा खिलाफी नहीं कर सकते। लेकिन याद रखना एक वादा आपने इस पवित्र भूमि से भी किया था कि अपनी जान पर खेलकर इस देश की एक एक इंच की रक्षा करेंगे। राज आज मैं रहूं या न रहूं, लेकिन तुम्हे मेरी तरह इस मातृभूमि पर, हमारे देश पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए .... रश्मि की इतनी शांत और भावनाओं से भरपूर आवाज सुनकर मेजर राज रो पड़ा था, उसकी आँखों से न केवल आंसू बह थे बल्कि वह बच्चे की तरह बिलबिला कर रो रहा था। उसके भ्रम व गुमान में भी नहीं था कि उसकी वजह से कभी उसकी पत्नी पर इतना बुरा समय आ जाएगा। वह अब भूल चुका था कि वह किस मिशन पर है और लोकाटी जल्द ही कितनी खतरनाक घोषणा करने वाला था, उसके मन में अगर कुछ था तो उसकी पत्नी ........ और उसका बच्चा ... जो अभी इस दुनिया में आया भी नहीं था।

मेजर राज ने रोते हुए कहा रश्मि हमारा बच्चा ...... ????

रश्मि हल्की आवाज में मुस्कुराई और बोली हां हमारे बच्चे को भी अपने पापा पर गर्व होगा और आप को भी अपने बच्चे और अपनी पत्नी पर गर्व होना चाहिए कि वह अपने देश की खातिर अपनी जान का त्याग करने के लिए तैयार हैं,

मेजर राज फिर रोने लगा, नहीं रश्मि नहीं, ऐसा नहीं हो सकता मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। कभी नहीं होने दूंगा। इससे पहले कि रश्मि कुछ और कि पाती, कर्नल इरफ़ान ने उसके कान से फोन निकाल लिया और बोला चल हट, बड़ी आई जान की कुर्बानी देने वाली क्या समझती है तेरी ये बातें भारत को टूटने से बचा लेंगी ? यह कह कर उसने रश्मि के पेट में एक लात मारी जिससे रश्मि की एक दिलख़राश चीख निकली जो मेजर राज के कानों को चीरती हुई खत्म हो गई। मेजर राज समझ गया था कि कर्नल इरफ़ान ने रश्मि पर वार किया है, वह चिल्लाता हुआ कर्नल इरफ़ान से बोला कि खबरदार जो रश्मि को एक खराश तक भी पहुंचाई नहीं तो मैं तेरी बोटी बोटी कर दूंगा।

मगर कर्नल इरफ़ान पर इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ, वह जानता था कि उस समय मेजर राज कुछ नहीं कर सकता। अब मेजर राज को भी अपनी धमकी खोखली महसूस हो रही थी, वह जानता था कि उसके हाथ में कुछ नहीं रहा, खेल खत्म हो चुका है, अब उसे अपनी गलती का तीव्रता से महसूस हो रहा था, जब समीरा ने मेजर राज को इस बात पर उकसाया था कि कर्नल इरफ़ान को राफिया के बारे में बताकर अमजद और उसके साथियों को रिहा करवाए तो एक पल के लिए मेजर राज ने सोचा था कि यह सही नहीं है, अपनी आपस की लड़ाई में किसी की बेटी, किसी की इज्जत से खेलना और उसका लाभ उठाना ठीक नहीं। मगर फिर उसने सोचा कि वह कौन सा वास्तव में राफिया को नुकसान पहुंचाना चाहता है, बस एक धमकी ही देनी है और कर्नल इरफ़ान बेटी के प्यार में उसकी बात मान जाएगा। यही मेजर राज की गलती थी कि उसने एक पिता की भावनाओं का ख्याल नहीं किया, दरअसल उसने राफिया को कुछ नहीं कहा, लेकिन कर्नल इरफ़ान एक बेटी का बाप था, बेटी का सुनकर उसे कैसा महसूस हुआ होगा? वह किस पीड़ा से गुजरा होगा, मेजर राज ने यह सोचा ही नहीं था, और अब उसे इस गलती का अहसास तीव्रता से महसूस हो रहा था।

वह अब फोन पर कर्नल इरफ़ान की मिन्नतें कर रहा था कि भगवान के लिए मेरी पत्नी और बच्चे को छोड़ दो, इनका कोई दोष नहीं, मेरे बच्चा तो अभी इस दुनिया में आया भी नहीं ....

इस पर कर्नल इरफ़ान ने अत्यंत दुख भरे स्वर में कहा, मेरी बेटी राफिया का क्या दोष था ??? तब तुम्हें विचार नहीं आया कि एक पिता के दिल पर क्या गुज़रेगी ???

मेजर राज ने कहा तुम अपनी बेटी से पूछ लो अगर मैंने उसको बाल बराबर भी नुकसान पहुंचाया हो, मैं तो तुम्हें फोन करने के बाद उसका फोन लेकर वहां से चला आया था और वह पूरी तरह आज़ाद थी तुम्हारी बेटी को कोई खतरा नहीं था। ..... प्लीज़ मेरी पत्नी को छोड़ दो ....

मगर कर्नल इरफ़ान कहां सुनने वाला था, उसके दिल में न केवल राफिया का बदला था बल्कि भारत को दो फाड़ करने का मिशन भी था, आखिरकार कर्नल इरफ़ान ने कहा मैं तुम्हारी पत्नी को छोड़ दूँगा, मगर तुम वहाँ से वापस आजाो, और खबरदार, जो तुमने लोकाटी की कोई सीडी वहाँ चलाई। साना जावेद की फिल्म वाली सीडी चलने दो, लोकाटी को विद्रोह की घोषणा करने दो मैं तुमसे वादा करता हूँ, एक आर्मी कर्नल तुम्हें अपना वादा दे रहा है कि मैं तुम्हारी पत्नी को छोड़ दूंगा और फिर विद्रोह को कुचलने के लिए तुम पूरा जोर लगा लेना, फिर युद्ध के मैदान में ही हम दोनों आमने सामने आएंगे, और मेरा तुमसे वादा है तुम्हे तुम्हारी धरती पर ही अपने पैरों से कुचल कर मारूँगा और तुम्हारी पत्नी सारा जीवन शहीद की विधवा बनकर खुशी खुशी जिंदगी बिता लेगी ।

मेजर राज ने फिर कहा, मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूँ, मैं लोकाटी भी कुछ नहीं कहूंगा, मैं उसकी सीडी नहीं चलाउन्गा मगर भगवान के लिए मेरी पत्नी को छोड़ दो। इस पर कर्नल इरफ़ान ने ठहाका लगाया और बोला पहले पहले विद्रोह शुरू तो हो लेने दो फिर तुम्हारी इस सुंदर और जवान पत्नी को छोड़ दूंगा। अभी कर्नल इरफ़ान ने इतना ही कहा था कि मेजर राज के कानों में लोकाटी की आवाज गूंजी, वह एक बार फिर मंच पर खड़ा हो गया था और उसने घोषणा कर दी थी कि अब हम आपको वह फिल्म दिखाएंगे जो कहानी मैंने आपको अभी सुनाई है, अगर हमारी इस बेटी के सिर से उतरती चादर देखकर भी आपका सम्मान नहीं जागता तो लानत भेजूँगा आपकी मर्दानगी को और यहीं इस सभा में अपने आपको गोली मार कर उड़ा दूंगा, कि मैं ऐसे बेगैरत राष्ट्र का नेता नहीं बन सकता जिसकी अपनी बेटी की इज्जत लुटती देखकर भी जमीर ना जागे। और अगर इस फिल्म को देखने के बाद आपका जमीर जाग उठे, आप मेरी एक आवाज पर अपनी जान देने के लिए तैयार हो जाओ, तो मैं वादा करता हूँ कि इस देश की हर बेटी की इज्जत की रक्षा के लिए आपके कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा, अपने खून की आखिरी बूंद तक आपकी बेटियों की इज्जत की रक्षा की खातिर देने के लिए तैयार रहूंगा, भारत की क्रूर सेना के अत्याचार और आपकी बेटियों की इज्जत के बीच में लोहे की दीवार बनकर खड़ा हो जाउन्गा, भारत की सेना पहले मेरी लाश पर से गुज़रेगी तो आपकी बेटियों की इज्जत पर हाथ डालेगी, लेकिन मुझे यकीन है कि मेरे मरने के बाद भी मेरी जगह लेने मेरी प्रजा के बहुत लोग मौजूद होंगे, और स्वतंत्रता की इस लड़ाई को तब तक लड़ेंगे जब तक राष्ट्र का हर आदमी मारा ना जाए, या फिर स्वतंत्रता हासिल न कर लें ...

लोकाटी का इतना कटौती दार भाषण सुनकर वहां मौजूद लोगों की भावनाओं अपने चरम पर पहुँच व्हुकी थी और अब पूरी सभा स्थल में भारत की सेना के खिलाफ नारेबाजी हो रही थी और हर कोई प्रतिज्ञा कर रहा था कि वह अपनी बेटियों की इज्जत की रक्षा की खातिर अपनी गर्दनें कटवाने के लिए तैयार हैं। उधर कर्नल इरफ़ान भी मेजर राज के फोन के माध्यम से यह सारा भाषण सुन रहा था और ठहाके लगा रहा था, उसे विश्वास था कि इस भाषण के बाद कोई भी स्वस्थ युवा बिना कुछ सोचे समझे विद्रोह की घोषणा कर देगा और उसके लिए अपनी जान भी कुर्बान कर देगा। उसने फिर फोन मेजर राज को कहा कि देखो उन भावनाओं को .... क्या तुम उनकी भावनाओं को अपनी गोलियों से रोक सकते हो? तुम उनके सम्मान को समाप्त कर सकते हैं ???? नहीं मेजर नहीं ... तुम हार चुके हो, तुम कुछ नहीं कर सकते, तो भलाई इसी में है कि चुपचाप वहां से वापस आ जाओ और अपनी पत्नी और अपने बच्चे के साथ अपना बाकी जीवन आराम से गुजारो ,

मेजर राज कोई फैसला नहीं कर पा रहा था, तो उसकी नज़र एक साइड पर बुलेटप्रूफ शीशे पर पड़ी जहां लोकाटी का खास आदमी था जिसने फिल्म चलानी थी उसे मेजर राज के इशारे का इंतजार कर रहा था ... तब मेजर राज को होश आया कि वह यहाँ क्यों आया था और उसका मकसद क्या था, उसके मन में एक ओर आर्मी ज्वाइन करते समय खाई गई कसम थीं कि वह अपने देश की खातिर अपना तन मन धन बलिदान कर देगा, तो दूसरी तरफ अपनी प्यार करने वाली पत्नी के साथ बिताए गए वो कुछ क्षण थे जिनके परिणामस्वरूप उसकी पत्नी पेट से थी और उसके बच्चे की मां बनने वाली थी मेजर को फैसला करना मुश्किल हो रहा था, वह अपनी निर्दोष पत्नी और बच्चे का कैसे त्याग कर सकता है ???

मगर फिर लोकाटी आवाज उसके में गूंजी कि फिल्म ड्राइव ............. जैसे ही यह बात मेजर राज के कानों में गूँजी , मेजर राज की नज़रों के सामने वह मासूम बच्चे आने लगे, वह निर्दोष जानें आने लगे, वह मासूम बेटियाँ और इस देश की औरतें आने लगीं जोकि इस विद्रोह के परिणामस्वरूप पाकिस्तानी सैनिकों से हलाक होने वाली थीं ...

एक ओर मेजर राज के सामने अपनी पत्नी के पेट में पलने वाला मासूम बच्चा, और अपनी पाक दामन और निर्दोष पत्नी थी जिसने अब जीवन की खुशियां देखी ही नहीं थी, तो दूसरी ओर अपने लोगों की वह अनगिनत बच्चियां थीं जो पाकिस्तानी सेना के उत्पीड़न का निशाना बनने जा रही थीं, उनके दूसरे देश के मुसलमान सैनिक जो अत्याचार करने वाले थे निर्दोष और मासूम मुसलमानों के साथ उनको उसका पता ही नहीं था ,

 
आख़िरकार मेजर राज ने गहरी साँस ली और अपने साहस को इकट्ठा करने लगा तभी उसके मोबाइल में रश्मि की चीख सुनाई दी, रश्मि पूरी आवाज के साथ चीख कर कह रही थी: राज मेरी जान: पत्नी तो और भी मिल जाएगी, बच्चे भी और मिल जाएंगे, लेकिन अगर आपने अपने देश से गद्दारी की तो तुम्हें यह रश्मि कभी नहीं मिलेगी, और न ही तुम्हारा होने वाला बच्चा तुम्हें कभी माफ करेगा

रश्मि की इस बात ने मेजर राज को वह हौसला दिया जिससे कोई भी सेना के जवान अपने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देता है, अंत में रश्मि की इस बात ने मेजर राज के अंदर वही जोश और उल्लास पैदा कर दिया कि आर्मी ज्वाइन करते समय मेजर के अंदर था, मेजर राज ने बुलेटप्रूफ शीशे में उस आदमी को देखा जो अब तक हसरत भरी निगाहों से मेजर राज के इशारे का इंतजार कर रहा था, थोड़ी देर और हो जाती तो उसे साना जावेद की फिल्म चलानी ही पड़ती मेजर राज ने अपना हाथ ऊपर उठाया, एक नारा जय हिंद का बुलंद किया और उस व्यक्ति को लोकाटी की सीडी चलाने का निर्देश दिया, जैसे ही स्क्रीन चालू हुई उस पर पहला चेहरा लोकाटी का ही नजर आया, जिसे देखकर सभा स्थल में मौजूद लोकाटी के चेहरे पर हवाइयां उड़ गईं क्योंकि उसको कर्नल इरफ़ान ने आश्वासन दिया था कि यह वीडियो सभा में नहीं चलेगी। लोकाटी तब कर्नल इरफ़ान से बातें कर रहा था जिसमें वह घाटी में स्वतंत्रता आंदोलन चलाने के बदले अपनी मांगों को रख रहा था कि उसे पाकिस्तान की खूबसूरत एक्ट्रेस प्रदान की जाएं दिन व दिन एक नई अभिनेत्री के साथ रात बिताएगा .

फिर दूसरे सीन में लोकाटी पाकिस्तान के एक अधिकारी से घाटी में स्वतंत्रता आंदोलन चलाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने के बदले 200 अरब रुपये मांग रहा था। यह वीडियो देखकर सभा स्थल में पूर्ण शांति छा गई थी सब को जैसे सांप सूंघ गया था, इसलिए शांति थी कि सुई गिरने की भी आवाज सुनाई दे, फिर इसी तरह के कुछ और सीन चले जिसमें लोकाटी भारत से गद्दारी के बदले बड़ी बड़ी रकम बटोर रहा था और बदले में पाकिस्तान में विलय का आश्वासन भी करवा रहा था, जबकि इस गद्दार ने अपने लोगों को तो आजादी के सपने दिखाए थे ....

लोकाटी को अपना सब कुछ खत्म होता नजर आने लगा, उसने साथ खड़े सुरक्षा गार्ड से बंदूक पकड़ी और स्क्रीन की तरफ कर गन चलाने लगा, लेकिन वह भूल गया था कि स्क्रीन की सूरक्षा के लिए तो वह खुद उसके सामने बुलेटप्रूफ ग्लास लगवा चुका था, फिर उसने सभा स्थल की बिजली बंद करने का निर्देश दिया, पूरे सभा स्थल की बिजली बंद हो गई मगर स्क्रीन को बिजली शायद कहीं और से मिल रही थी वह बंद नहीं हुई वह चलती रही।

अंततः स्क्रीन पर वह सीन भी चला जब लोकाटी की हालत बुरी हो रही थी, वह बेड पर लेटा हुआ ऊपर नीचे हिल रहा था कैमरा उसके चेहरे पर था, उसके चेहरे से साफ लग रहा था कि वह इस समय बहुत मजे में है, और फिर एक लड़की यानी समीरा की सिसकियों की आवाज आई, और इन्हीं सिसकियों के दौरान समीरा ने पूछा कि घाटी के असरदार भी सरकार में अपना हिस्सा मांगेंगे तो क्या करोगे? तो लोकाटी ने हिकारत से कहा था कि उन पागलों को भला क्या मिलना है? स्वतंत्रता की घोषणा और पाकिस्तान से विलय की घोषणा के बाद जब पाकिस्तानी सेना घाटी में घुस जाएंगी तो पहले इन असरदारों का ही सफ़ाया होगा मैं अपने धन और अपनी सरकार में किसी को शामिल नहीं करूँगा यह लाइन चलने की देर थी कि वहां मौजूद सभी लोग अपने अपने स्थान से खड़े हो गए, और उनको मानने वाली जनता भी गुस्से से पागल हो गई, वे समझ गए थे कि लोकाटी उन्हें स्वतंत्रता के सपने दिखाकर केवल अपना लाभ प्राप्त करना चाहता है ।

इससे पहले कि कोई नेता लोकाटी को मारता है, वहाँ मौजूद लोकाटी बेटे फग़ान ने सोचा कि यही सही मौका है, मारिया बीबी यानी अंजलि ने जो बताया था कि कब लोकाटी कोमारना है यह आपको पता चल जाएगा, उसने अपनी बंदूक निकाली और अपने पिता की ओर लपका, उसने अपने पिता को देशद्रोही कह कर पुकारा और उस पर निशाना तान कर गोली चला दी, उसका विचार था कि उसका प्रांत रहेगा तो भारत के साथ ही, लेकिन अपने विश्वासघाती पिता को मौत की नींद सलाने के बाद उसी की सेना उसी को यहां की सरकार लिये चुन लेगी और जनता भी खुश होगी कि उसने अपने देश की खातिर अपने पिता की जान ले ली, दूसरी ओर फैजल था जो खेल बिगड़ता देख रहा था, वह समझ गया था कि अब कोई स्वतंत्रता नहीं नही सरकार नहीं, मगर जब उसने देखा कि फग़ान ने अपने पिता को मार दिया है तो वह समझ गया कि अगला मुख्यमंत्री अब फग़ान होगा, मगर वह यह कैसे बर्दाश्त कर सकता था, उसने अपनी बंदूक निकाली और अपने भाई को गोलियों से छलनी करने लगा जबकि फग़ान ने भी अंतिम सांसें लेते हुए अपनी बंदूक का रुख फैजल की ओर कर गन में मौजूद शेष गोलियाँ अपने भाई के शरीर में उतार दी .

लोकाटी की चाल समाप्त हो चुकी थी, कर्नल इरफ़ान जो भारत को दो टुकड़े करने की योजना बना बैठा था वह सब मलिया मैट हो चुका था, सीमा पार जो पाकिस्तानी आर्मी भारत पर हमला करने के लिए तैयार बैठी थीं उन तक खबर पहुंच गई थी कि घाटी की जनता पर लोकाटी का विश्वासघात उजागर हो गया है, और अब वहां की जनता अपनी सेना के बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, तो ऐसी स्थिति में भारत पर हमला करने के लिए अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर था। 6 सितंबर 1965 को अभी वह भूले नहीं थे। ऐसे में फिर से इस देश पर हमला करना जहां जनता अपनी सेना के साथ गोलियाँ खाने के लिए अपना सीना तान कर खड़ी हो वहां हमला करना सबसे बड़ी मूर्खता होगी।

मगर दूसरी ओर मेजर राज की दुनिया उजड़ चुकी थी। जब उसने लोकाटी को वीडियो चलाने का आदेश दिया और फोन पर कर्नल इरफ़ान को मालूम हो गया कि मेजर राज ने रश्मि के अंतिम शब्द सुनकर पत्नी और बेटे की बलि देने का सोच लिया है तो वह गुस्से से कांपने लगा था, उसका गुस्सा बढ़ गया था , अब उसके सामने मेजर राज से बदला लेने के लिए एक ही रास्ता था और वह था उसकी पत्नी और पत्नी के पेट में महज 1 से डेढ़ महीने के बच्चे को मौत के घाट उतारना था ताकि मेजर राज सारा जीवन कर्नल इरफ़ान का यह बदला नहीं भूल सके ।

तभी मेजर राज को फोन पर गोली चलने की आवाज सुनाई दी, और रश्मि की एक दिलख़राश चीख मेजर राज के कानों को चीरती हुई चली गई .... मेजर राज के हाथ से मोबाइल गिर चुका था, उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी, उसकी प्यारी पत्नी जिसको अभी उसने जी भर कर प्यार भी नहीं किया था और उसका अजन्मा बेटा उसकी एक छोटी सी गलती के परिणामस्वरूप अपनी जान से हाथ धो बैठे थे। मेजर राज अपनी जगह बैठा ज़ोर से रो रहा था, सभा स्थल में क्या हो रहा था, कब लोकाटी को फग़ान ने मारा, और कब फैजल ने फग़ान को मारा, मेजर राज को उसका कुछ पता नहीं था। अगर उसके मन में कुछ था तो उसकी निर्दोष पत्नी और उसका बेटा जो अभी इस दुनिया में आया ही नहीं था। उसे लग रहा था कि उसकी दुनिया उजड़ गई है, वह अपने आप को अपनी पत्नी और बच्चे का हत्यारा समझ रहा था .... मगर फिर अचानक .......... मेजर राज को एक नयी पहचान मिली .... जब उसके कानों में भारत जिंदाबाद .... भारत जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे ..... पाकिस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे ने मेजर राज को एक नया जीवन दिया और उसे यह एहसास दिलाया कि वो पहले अपने इस लाड़ले वतन का सिपाही है ... उसके सारे रिश्ते सारे नाते बाद में, पहले उसकी मातृभूमि, इस मातृभूमि की रक्षा। वतन है तो सब कुछ है ... स्वदेश नहीं तो कुछ भी नहीं।

मेजर राज ने सिर उठाकर देखा तो सभा स्थल में लोकाटी का शव आग का निशाना बन चुका था, वहां मौजूद लोगों और हाकिमों ने लोकाटी की असलियत जान लेने के बाद उसकी लाश को जला दिया था। और अब सभा स्थल के मंच पर मेजर राज का खास आदमी मौजूद था जो माइक पर रोमांचक आवाज में भारत जिंदाबाद के नारे लगवा रहा था, और उन्हें बता रहा था कि इस गद्दार ने कैसे यहां की जनता को अनपढ़ रखा और उन्हें उनकी बेटियों की इज्जत की कसम देकर अपने नापाक इरादों के लिए इस्तेमाल करना चाहा। घाटी के लोगों के दिल में देश प्रेम मौजूद था, बस उस पर लोकाटी की झूठी कहानियों ने थोड़ी धूल जमा दी थी, वीडियो मे लोकाटी की असलियत देख लेने के बाद यह उड़ गई थी और वही जुनून जो इस देश के आबा-ओ-अजदाद का 1947 में था, आज 6 सितंबर के अवसर पर भी इस देश के बेटों का वही जुनून था और लाखों का मजमा क़यामत तक इस देश की रक्षा और इस देश को लोकाटी जैसे दुष्ट लोगों से बचाने की कसम खा रहा था। यह देखकर मेजर राज अपनी पत्नी और बच्चे की बलि भूल गया था। अब उसे यह महसूस हो रहा था कि वह हारा नहीं, बल्कि वह जीत गया है। कर्नल इरफ़ान की जीवन भर की मेहनत बेकार हो गई थी, उसके नापाक मंसूबे मिट्टी में मिल गए थे और ये प्रांत फिर से तिरंगे झंडे से सज गया था।

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ने मेजर राज को इस बड़ी सफलता पर बधाई दी, प्रधानमंत्री ने भी इस भयानक विद्रोह को कुचलने में मेजर राज को फोन करके बधाई दी और सुसमाचार सुनाया। मेजर राज को अपनी पत्नी और बच्चे को खो देने का गम था, लेकिन अभी वह कमजोर नहीं था, बल्कि वह खुश था कि उसने अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देकर इस देश को बचा लिया था। यही देश के फ़ौजी का मूल धन है। अब उसके मन में केवल एक बात थी। अमजद से किया गया अपना वादा पूरा करना। उसकी बहन समीरा को बा रक्षा उसके घर पहुंचाना

इन्हीं सोचों के साथ मेजर राज वापस पहुंच चुका था। और समीरा को ढूंढना चाहता था, उसने मेजर मिनी को फोन किया और उससे पूछा कि समीरा कहाँ है ??? मेजर मिनी ने मेजर राज को सुसमाचार सुनाया कि मुबारक हो, समीरा मिल गई है, और मैं इस समय समीरा को लेकर तुम्हारे घर पर तुम्हारी माँ के साथ ही हूं आ जाओ तुम भी , तुम्हारी माँ अपने बहादुर बच्चे को देखने के लिए बेचैन हो रही है। माँ का सुनकर मेजर राज शक्तिहीन सा अपने घर की तरफ बढ़ने लगा। घर पहुंचकर मेजर राज ने अपने घर का दरवाजा खोला तो दरवाजे पर ही उसे अपनी माँ दिखाई दी, माँ को देखते ही मेजर राज अपनी माँ से लिपट गया, मेजर राज की आंखों में आंसू थे, बहुत समय बाद वह अपनी मां से मिला जो माँ के चेहरे को रोज देखा करता था आज करीब 2 महीने के बाद वह अपनी माँ से मिल रहा था। मगर इस माँ की आँखों में एक आंसू भी जुदाई का नही था, लेकिन उसकी आंखों में अपने बहादुर बेटे के लिए प्यार ही प्यार था और सीना गर्व से फूला हुआ था और चेहरे पर एक अजीब सा संतोष था कि शायद किस्मत वालों का ही ऐसा नसीब होता है ....

मेजर राज के दिल में कहीं रश्मि का भी ख्याल था कि अगर आज रश्मि भी होती तो वह कितनी खुश होती। मां से मिलने के बाद मेजर राज ने मेजर मिनी को देखा जो गर्व से मेजर राज को देख रही थी, उसने मेजर राज को एक सलयूट और उसे शानदार उपलब्धि पर बधाई दी। मेजर मिनी के पीछे समीरा खड़ी थी, वह भी खुश थी और उसकी आँखों में जहां मेजर राज की सफलता पर खुशी और गर्व था, वहीं शायद एक पीड़ा भी थी, वह जानती थी कि अब इसे मेजर राज से अलग होना है। कुछ दिन मेजर राज के साथ गुजार कर वह उससे प्यार करने लगी थी। और सारी ज़िंदगी उसी के साथ बिताना चाहती थी, लेकिन ऐसा होना संभव नहीं था .....

समीरा अपनी जगह से साइड पर हटी तो उसके पीछे मेजर राज ने जो दृश्य देखा, उसे समझ नहीं आया कि वह खुशी से रोए या चीखें मारे। समीरा केपीछे मेजर राज को रश्मि दिखी थी। उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं आ रहा था। मेजर राज ने एक बार अपनी आँखें मली और उसके बाद फिर से देखा तो रश्मि अब तक अपनी जगह पर मौजूद थी और उसकी आँखें धृड और अपने पति की बहादुरी पर गर्व से झिलमिलाती नजर आ रही थीं। मेजर राज एकदम से आगे बढ़ा और सबके सामने ही अपनी पत्नी को अपने गले से लगा लिया, रश्मि भी अपने पति के सीने से लगकर सारी पीड़ा भूल गई थी जो उसे कर्नल इरफ़ान से मिली थी, या जो जुदाई के दिन उसने हनीमून से ही बिताना शुरू कर दिए थे, पति के सीने से लगकर उसे उसकी दुनिया वापस मिल गई थी, उसका प्यार वापस मिल गया था। मेजर राज को समझ नहीं आया था कि आखिर यह सब कैसे हुआ?

तब मेजर मिनी ने मेजर राज को कहा कि तुम्हें समीरा को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहिए, जिसने कर्नल इरफ़ान की कैद से रश्मि को न केवल बचाया बल्कि उसको इबरत नाक सजा भी दी, और उसकी लाश इस समय पाकिस्तानी बॉर्डर पर पड़ी है, और कोई उसे उठाने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा। मेजर राज ने समीरा देखा और अब की बार आगे बढ़कर उसे भी गले से लगा लिया, और उसका माथा चूम कर उसका बहुत बहुत धन्यवाद।किया .

 
वास्तव में समीरा जब बॉम्बे पहुचने वाली थी तो उसने फग़ान के बेटे शाह मीर को एक छोटे से होटल में कमरा लेकर उसी में ठहरा दिया था जबकि खुद वह एयरपोर्ट चली गई थी क्योंकि मेजर राज ने उसे भी अपने भारत आगमन के बारे में बताया था और वह जानती थी कि मेजर राज एयरपोर्ट पर ही आएगा। उसने अपनी रक्षा हेतु एक छोटी पिस्टल भी अपने साथ रख ली थी जो उसने अपने पास मौजूद छोटे हैंडबैग में छुपा ली थी। एयर पोर्ट पर पहुँच कर वह राज को ढूंढने लगी मगर वहां उसकी नज़र कर्नल इरफ़ान पर पड़ी जो आम कपड़ों में साना जावेद के साथ एक कार में बैठ रहा था, समीरा ने वहीं से टैक्सी में कर्नल इरफ़ान का पीछा शुरू किया जो साना जावेद को एक होटल में ठहरा कर खुद मेजर राज के घर की ओर जा रहा था। समीरा के लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि कर्नल इरफ़ान उसे पहचानता नहीं था, वह इतना तो जानता था कि मेजर राज के साथ कोई समीरा नाम की लड़की भी है, लेकिन वह अभी तक उसको देख नहीं पाया था इसलिए जब कर्नल इरफ़ान मेजर राज घर के पास मौजूद एक शॉपिंग मॉल में गया तो उसने भी बिना हिचक वहां प्रवेश कर लिया और वह 2, 3 बार उसके सामने से भी गुजरी। कर्नल इरफ़ान बार बार अपने फोन पर किसी लड़की की तस्वीर देख रहा था एक बार समीरा ने उसके पास से गुजरते हुए उसकी ओर देखा तो वह अभी भी एक लड़की की तस्वीर देख रहा था, और फिर कुछ ही आगे जाकर समीरा को एक दुकान में वही लड़की दिखी जिसकी तस्वीर कर्नल इरफ़ान के मोबाइल में थी। यह लड़की रश्मि थी जो कुछ दिन पहले ही डॉक्टर के पास होकर आई थी और उसे मालूम हुआ था कि वह मां बनने वाली है, और इसी खुशी में वह अपने होने वाले बच्चे की छोटी छोटी चीजें देखने मॉल में मौजूद थी।

कर्नल इरफ़ान साना जावेद को छोड़ने के बाद मेजर राज की पत्नी का अपहरण करने आया था और यहाँ मौजूद उसके लोगों ने कर्नल को सूचना दी थी कि मेजर की पत्नी रश्मि अभी एक शॉपिंग मॉल में मौजूद है। समीरा अभी रश्मि से मिली नहीं थी वह दूर खड़ी उसे देख रही थी, वह नहीं जानती थी कि यह कौन है। फिर उसे कर्नल इरफ़ान दिखाई दिया जो रश्मि की ओर ही बढ़ रहा था। समीरा दूर खड़ी रश्मि और कर्नल इरफ़ान को देख रही थी, उसका विचार था कि यह वास्तव में कर्नल इरफ़ान की साथी होगी जो उसकी यहाँ मदद करती होगी। इतने में कर्नल इरफ़ान रश्मि के पास जाकर बोला हाय रश्मि मेडम कैसी हैं आप ????

रश्मि ने कर्नल इरफ़ान को देखा और आश्चर्य से उसकी ओर देखते हुए बोली सॉरी मैं आपको पहचाना नहीं ....

कर्नल इरफ़ान ने कहा आप मेजर राज की पत्नी हैं ना ???

इस पर रश्मि ने कहा हां .... मगर आप कौन ???

कर्नल ने बेहद खुश होकर कहा कर्नल हूँ, कर्नल मुश्ताक, राज से आपके बारे में बहुत सुना था, आपकी फोटो भी देखी थी, आज आपसे मुलाकात हो ही गई। फिर रश्मि की खैरियत पूछ कर्नल इरफ़ान वापस शॉपिंग मॉल से वापस चला गया और अपनी कार में बैठकर रश्मि का इंतजार करने लगा। समीरा अब सोच ही रही थी कि उसे क्या करना चाहिए उसने देखा कि रश्मि भी शॉपिंग कर शॉपिंग मॉल से बाहर जा रही थी, समीरा भी उसके पीछे पीछे जाने लगी कि अचानक उसने देखा रश्मि एक काली कार के पास से गुज़री तो गाड़ी का दरवाजा खुला और अंदर एक हाथ निकला जिसने रश्मि कार के अंदर खींच लिया। और कार फर्राटे भर्ती शहर से दूर जाने लगी।

समीरा नहीं जानती थी कि वह लड़की कौन है, वो तो बस कर्नल इरफ़ान से अपनी दुखियारी माँ का बदला लेना चाहती थी। इसीलिए वो कर्नल इरफ़ान पीछा कर रही थी। वह फिर से एक टैक्सी में बैठकर उस कार के पीछे शहर से दूर एक मकान पर पहुँच गई थी जहां दूर काली गाड़ी रुक चुकी थी और एक आदमी रश्मि को गोद में उठाए एक मकान के अंदर ले गया था, जबकि कार सीधी निकल गई थी। रश्मि ने टैक्सी उस घर से दूर रुकवाई और कार वाले को पैसे दिए और घर की ओर चल पड़ी। इस आबादी में आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था उस ने घर की चारों ओर से समीक्षा की और फिर एक छोटी दीवार को देखकर इंतिहाई कौशल के साथ दीवार पर चढ़ घर के अंदर छलांग लगा दी। छलांग लगाते हुए उसने इस बात का ध्यान रखा कि आवाज पैदा न हो और वह इसमें काफी हद तक सफल भी हुई थी, कराटे की ट्रेनिंग तो वह पहले ही ले चुकी थी जब वह पाकिस्तान में थी और अमजद के साथ भी इस तरह के काम उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे।

घर के अंदर जाकर वह बड़ी सावधानी के साथ आगे बढ़ने लगी और उसने अपनी पिस्टल निकाल कर अपने हाथ में पकड़ कर उसे लोड भी कर लिया था और सेफ्टी लॉक भी हटा चुकी थी। तभी उसे एक कमरे के सामने कुछ हलचल दिखाई दी, दरवाजा बाहर खुला था और उसके नीचे से आने वाली रोशनी से अनुमान हो रहा था कि दरवाजे के दूसरी ओर कोई मौजूद है, समीरा बहुत सावधानी के साथ उस कमरे के पास गई तो अंदर कर्नल इरफ़ान के ठहाके सुनाई दिया, और फिर उसे रश्मि की आवाज सुनाई दी जो मेजर राज को फोन पर हौसला दे रही थी और देश की खातिर अपनी पत्नी और होने वाले बच्चे की चिंता न करने की हिदायत कर रही थी। समीरा अपना सिर पकड़ कर बैठ गई। ये तो मेजर राज की पत्नी थी और उम्मीद से थी। उसके पेट में मेजर राज का बच्चा था। और दुराचारी कर्नल इरफ़ान उसे मारने के लिए तैयार बैठा था।

समीरा ने कुछ देर इंतजार किया फिर दबे कदमों के साथ दरवाजे की ओट लेकर अंदर का दृश्य देखने लगी, जहां कर्नल इरफ़ान मेजर राज को समझा रहा था कि लोकाटी का वीडियो न चलाए तो उसकी पत्नी की जान बच जाएगी। समीरा अब अपनी माँ का बदला भूल चुकी थी, उसके पास अब एक देश के लाड़ले सिपाही की पत्नी और उसके होने वाले बच्चे का जीवन था जिनकी परवाह किए बिना वो सैनिक अपने देश को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहा था। फिर जब कर्नल इरफ़ान को फोन पर लोकाटी की वीडियो की सीडी चलने की आवाज आई तो उसने मेजर राज को ललकारा कि तू नहीं माना यह ले तेरे पत्नी और बच्चे गए, फिर कर्नल इरफ़ान ने रश्मि की तरफ अपनी बंदूक का रुख किया और गोली चलने आवाज आई तो रश्मि की एक जोरदार चीख निकली।

यह गोली कर्नल इरफ़ान ने नहीं बल्कि समीरा की पिस्टल से निकली थी जो सीधी कर्नल इरफ़ान के दाहिने कंधे में जाकर लगी थी, रश्मि ने यही समझा कि यह गोली उसके ऊपर चली है जिसकी वजह से उसकी चीख निकल गई थी जबकि कर्नल इरफ़ान के हाथ से रिवॉल्वर गिर गया और दूर जा गिरा, उसने दर्द की तीव्रता से अपना कंधा पकड़ लिया और पीछे मुड़कर देखा जहां एक युवा लड़की उस पर पिस्टल ताने खड़ी थी। कर्नल की आंखों में अब डर था। उसने धीरे धीरे अपनी गिरी हुई बंदूक की तरफ जाना शुरू किया और समीरा से पूछा तुम कौन हो ???

समीरा ने कहा, मैं भी मेजर राज की तरह इस देश की बेटी हूँ। मेरा नाम समीरा है ...

समीरा नाम सुनकर कर्नल इरफ़ान तुरंत समझ गया कि यह अमजद की साथी है। कर्नल इरफ़ान ने कहा मगर तुम्हारे भाई को तो मुक्त कर चुका हूँ तुम अब यहाँ क्या लेने आई हो ???

तो समीरा ने कहा कि इस लड़की को बचाने आई हूँ, यह इस देश के सैनिक का सम्मान है, और तुझ जैसा हैवान इंसान उसकी तरफ बुरी नजर से देखे या उसको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, ऐसा होने नहीं दूँगी। इस दौरान कर्नल इरफ़ान अपनी रिवॉल्वर के करीब पहुंच चुका था, उसने झुक कर अपनी रिवॉल्वर उठानी चाहिए तो समीरा की पिस्टल से एक गोली निकली जो कर्नल इरफ़ान के पैर में लगी और कर्नल इरफ़ान लड़खड़ा गया और जमीन पर आ गिरा और समीरा ने जल्दी से आगे बढ़कर कर्नल इरफ़ान से कुछ दूरी पर पड़ी रिवॉल्वर को अपने पांवों से दूर कर दिया और फिर कर्नल इरफ़ान की तरफ रिवॉल्वर तान कर खड़ी हो गई।

कर्नल इरफ़ान अब जमीन पर लेटा दर्द से कराह रहा था, उसको इस बात की तकलीफ थी कि उसे मारने वाला कोई भारतीय सेना का जवान नहीं बल्कि एक साधारण लड़की है। यह दुख उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था, उसकी मौत उसकी आँखों के सामने थी, वह हमेशा से युद्धक्षेत्र में अपनी टक्कर के आदमी से गोली खाकर मरना चाहता था मगर यहां चूहे की तरह एक मामूली और मासूम लड़की के हाथों मौत उसे किसी स्थिति को स्वीकार नहीं थी . वह पूरे जीवन लड़ा था, मगर उसने यह कभी नहीं सोचा था कि वह एक लड़की के हाथों कुत्ते की मौत मारा जाएगा।

अब समीरा ने कर्नल इरफ़ान को कहा, केवल लड़की को बचाने ही नहीं बल्कि मैं अपनी माँ का बदला लेने भी आई हूँ, आज से 10 साल पहले तूने आज़ादकश्मीर के एक गांव में मेरे पिता और मेरी माँ को मेरी आँखों के सामने मार दिया था, और तुझ जैसे बेगैरत आदमी ने मेरी माँ को मारने से पहले उसकी इज्जत भी तार-तार कर दी थी, तब मैं एक छोटी 10 साल की बच्ची थी जो अपनी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकती थी, तब से मैं अमजद के साथ हूँ, एक ही कारण से, कि अपनी दुखियारी माँ का बदला ले सकूँ और तुझे मौत के घाट उतार कर हजारों मासूम महिलाओं की इज्जत बचा सकूँ .. आज तू मिल ही गया आखिरकार आज तो तुझे मैं नही छोड़ूँगी, यह कह कर समीरा ने एक और गोली चलाई जो कर्नल के हाथ में लगी थी।

फिर समीरा ने रश्मि की ओर बढ़ कर उसके हाथों से रस्सी खोल दी और उसकी टांगों को भी आज़ाद कर दिया, इस दौरान वह पूरी तरह चौकान्नी थी कि कर्नल इरफ़ान अपनी जगह से हिलने न पाए, वह जानती थी कि 3 गोलियां लगने के बावजूद कर्नल किसी भी समय जवाबी हमला कर सकता था, दुश्मन को कमजोर न समझना उसने राज से सीखा था। रश्मि को मुक्त करवाने के बाद समीरा ने कमरे में नज़रें दौड़ाई तो वहाँ उसे एक लोहे का रॉड नजर आया, समीरा ने पहले कर्नल इरफ़ान की गन अपने कब्जे में ली फिर लोहे की रॉड उठाकर कर्नल इरफ़ान की ओर बढ़ी और कर्नल इरफ़ान के दोनों पैरों के बीच समीरा ने एक जोरदार वार किया, लोहे का रॉड सीधा कर्नल के लंड पर जाकर लगा जिससे उसकी दिलख़राश चीखें पूरे कमरे में गूंजने लगीं, फिर समीरा ने उसी स्थान पर एक और वार किया, फिर दूसरा फिर तीसरा ....

लगातार वार कर करके समीरा ने कर्नल की हालत खराब कर दी थी, 3 गोलियां खाने के बाद भी शायद कर्नल इरफ़ान उठकर जवाबी हमला कर सकता था मगर अब जिस जगह पर समीरा ने हमले किए थे अब सवाल ही पैदा नहीं होता था कि कर्नल इरफ़ान उठने की हिम्मत कर सके। फिर समीरा ने रिवॉल्वर उठाई और बोली तू राफिया का बदला इस मासूम से लेना चाहता था न तो सुन मेजर राज एक कर्तव्यनिष्ठ जागरूक सिपाही है, उसने तेरी बेटी को एक खराश तक नहीं पहुंचाई, बस तुझे धमकी दी कि तू हमारे साथियों को छोड़ दे, आज भी तेरी बेटी अपने घर बैठी मेजर राज का इंतजार कर रही होगी, वह तो मेजर से प्यार करने लग गई है, यहाँ का सिपाही हमारे वतन गया तो वहां की बेटी हमारे सिपाही के प्यार में डूब गई और आज भी मेजर को याद करती है और तुझ जैसा बेगैरत व्यक्ति जो पुरुषों की तरह लड़ने की हिम्मत नहीं रखता यहाँ के सिपाहियों की इज्जत पर हाथ डालने चला था ??? मगर यह भूल गया कि राज की साथी भी और यहाँ की बेटी भी किसी सिपाही से कम नहीं, तुझ जैसे पाकिस्तानी चूहों को तो हम अपने पांव तले रौंद देंगी।

यह कह कर समीरा ने कर्नल इरफ़ान के लंड का लक्ष्य लेकर एक और गोली चलाई जिससे कर्नल की चीखें कमरे में गूंजने लगीं। कुछ ही देर में यह चीखें खत्म हो गई थीं कर्नल बेहोश हो चुका था, दर्द की तीव्रता से वह अपने होश और हवास खो चुका था। समीरा कर्नल के लंड पर इसलिए हमला कर रही थी कि इसी लंड ने समीरा की मां की इज्जत लूटी थी। समीरा ने लंड का सिरे से ही सफाया कर दिया था कर्नल को बेहोश हालत में छोड़कर समीरा रश्मि को लेकर उस स्थान से बाहर आ गई, मगर अपनी पिस्टल में एक गोली वह कर्नल के लिए छोड़ आई थी। कर्नल को जब होश आया और उसने देखा कि वह अब नपुंसक हो चुका है, तो उसने पास पड़ी पिस्टल से खुद ही अपने सिर में गोली मार कर अपने जीवन का अंत कर लिया था। एक कायर की तरह आत्महत्या कर कर्नल इरफ़ान ने अपने आपको उस अपमान से तो बचा लिया था जो विफलता की कालिख मुंह पर लिए और ना मरदी का ग़म दिल में लिए वो जीवित अपने देश वापस जाता , मगर एक कायर की तरह आत्महत्या करने का अपमान रहती दुनिया तक उसके लिए बदनामी का कारण बन गया था .

रश्मि को खैरियत से घर पहुंचाने के बाद समीरा जाने लगी तो रश्मि ने उसे रोक लिया और मेजर राज के आने तक रुकने को कहा, समीरा मेजर के आने से पहले पहले चली जाना चाहती थी मगर ऐसा न हो सका रश्मि को वह इनकार ना कर सकी । फिर मेजर मिनी भी वहीं आ गई तो समीरा ने मेजर मिनी को कर्नल इरफ़ान की हालत के बारे में बताया, मेजर मिनी ने सेना के कुछ जवान भेजकर कर्नल इरफ़ान की मौत की पुष्टि करवाई और फिर उसकी लाश का उपहार सीमा पर भिजवा दिया उसकी लाश से निराशा स्पष्ट दिख रही थी और उसकी कनपटी में गोली का निशान इस बात का सबूत था कि इतने बड़े कर्नल ने आत्महत्या कर ली, जो पाकिस्तानी सेना के लिए एक ज़िल्लत से कम नहीं थी।

मेजर राज को यह सब पता चला तो उसने एक बार फिर समीरा का बहुत बहुत धन्यवाद किया और फिर धन्यवाद करने के बाद अपने कमरे में चला गया।

समीरा एक दिन मेजर राज के घर ही रही, तो अगले दिन मेजर राज की पदोन्नति समारोह में भाग लेने के बाद रश्मि और राज ने अपने अधूरे हनीमून को पूरा करने का कार्यक्रम बनाया, लेकिन ये कार्यक्रम अभी घर पर नहीं बल्कि आज़ाद कश्मीर जा कर बनाना था। रश्मि और राज समीरा को साथ लिए आज़ाद कश्मीर चले गए थे जहां लेफ्टिनेंट कर्नल राज ने समीरा को अमजद को सौंप दिया था, अमजद भी लेफ्टिनेंट कर्नल राज को देखकर और उसके कारनामे और रुतबा सुनकर बहुत खुश हुआ साथ ही अपना वादा निभाया और समीरा को सही सलामत वापस उसके घर पहुंचाने में वो लेफ्टिनेंट कर्नल राज का बहुत आभारी था। वापसी से पहले अमजद ने राज को अपनी और समीरा की सेवाओं की पेशकश करते हुए कहा आगे कभी भी तुम्हारे वतन को हमारी जरूरत पड़े तो हमें ज़रूर बताना, तुम्हारे वतन की खातिर जान देनी पड़ी तो हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। यह कह कर अमजद लेफ्टिनेंट कर्नल राज से गले मिली और अपनी बहन समीरा को लेकर वापस चला गया, जबकि राज अपनी नई नवेली दुल्हन, जिसके साथ उसने महज 2 से 3 घंटे ही सुहाग रात पर बिताए थे, लेकर आर्मी के हट में चला गया जो उसने स्पेशल अपने अधूरे हनीमून को पूरा करने के लिए बुक करवाया था। अपने कमरे में जाते ही रश्मि बाथरूम में गई, और जब बाहर निकली तो उसके बदन पर एक सेक्सी नाइटी थी जिसको देखकर लेफ्टिनेंट साहब का 8 इंच लंड अपनी पैंट में सिर उठा चुका था। थोड़ी देर बाद ही वह 8 इंच लंड रश्मि के मुँह में था जिसे वह बहुत मज़े से चूस रही थी और राज सोच रहा था कि जो मज़ा अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने में है वह किसी और के साथ सेक्स करने में नहीं। भौतिक सुख तो शायद कोई और औरत भी दे दे, लेकिन आत्मा को संतोष तभी मिलता है जब प्यार करने वाली पत्नी के साथ सेक्स किया जाए।

आगे लेफ्टिनेंट कर्नल राज ने अपनी पत्नी को कैसे चोदा, कब चोदा, किस किस स्थिति में चोदा, यह बताने की जरूरत यहाँ नहीं है ...

उम्मीद है सभी दोस्तो को मेरी यह कोशिश पसंद आई होगी जिसमें सेक्स के साथ साथ मैं वतन की मोहब्बत को उजागर करने की भी एक नाकाम सी कोशिश की है। अगर पसंद आए तो एक बार जोर से नारे जरूर लगाइयेगा:

जय हिंद .......

<<<<<<<<<<<<<<<<<<< समाप्त >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

 
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