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संक्रांति काल - पाषाण युगीन संघर्ष गाथा

प्रेम की नई कौंपलें

गौरांग एक झटके से उठकर बैठ गया ,सारकी के ठंडे स्पर्श

ने चौंका दिया था उसे । सारकी का सामीप्य हमेशा से उसे गुदगुदाता था ।सारकी को शायद इसका आभास पहले ही

था ।वो जानती थी कि गौरांग दिल मे उसे पसंद करता है बस जादौंग के भय से कभी हाथ नहीं बढ़ाया ।

सारकी इतने समय के साथ मे ये जान चुकी थी की जादौंग अम्बी की जगह किसी को नहीं देगा ,उसने देख लिया था कि किसी से बात ना करने वाला जादौंग अपनी गहरी से गहरी बात अम्बी से साझा करता ही है ।

गौरांग के आने पर सारकी को लगा था कि तीनों का अतीत एक होने की वजह से जादौंग शायद अम्बी को साथ मे नही लेगा ,मगर अब उसे यकीन हो चुका था कि जादौंग भले ही उसकी संतानों का पिता होने का कर्तव्य निभा रहा है और अपने ईमानदार स्वभाव के चलते कभी कभी उसके साथ

सो लेता है और उसे खुश रखने के लिए संसर्ग भी कर लेता है .मगर अम्बी पर जो अधिकारपूर्ण प्रेम है उसका वो कभी किसी और से नहीं बाँटेगा । तभी तो अम्बी कितनी सहजता से ले लेती है जादौंग का उसके पास आना ,उसे स्पर्श करना ।

सारकी तय कर चुकी थी की उसे भी एक ऐसा पुरुष चाहिए जिस पर वो एकाधिकार जता सके । और उसके लिए गौरांग से उपयुक्त पुरुष और कौन होता । गौरांग की निगाहें भी तो

इस चाहत को बल दे रही थी । गौरांग के आने से जादौंग पर एकाधिकार की ना पूरी होने वाली उसकी लालसा क्षीण होकर अब समाप्त हो गई थी।

जब गौरांग को बेसुध हालत मे अम्बी लेकर आई थी तब सारकी को पहली बार गौरांग के प्रति करुणा और आकर्षण के भाव उत्पन्न हुए थे उसे हृदय से चिंता हुई थी गौरांग के लिए ,ऐसे ही तो आँखों से पानी नहीं छलकता ना किसी के लिए , कोई अहसास जरूर होता है ।

और अहसास था कारण भी था उस अहसास का सारकी को गौरांग के द्वारा बिना किसी आशा के निश्छल

मन से उसके साथ खडे रहना याद आया जबकि जादौग

का तो कबीले से निष्कासन हो चुका था। ऐसे में भी मुखिया के विरुद्ध जाकर उसका साथ देने की हिम्मत की गौरांग ने

सारकी और उसकी गर्भस्थ संतान का जीवन भी तो गौराँग की ही देन है। भले ही जारा व साना का जन्म दाता जादौंग है ,मगर जीवनदाता तो गोराँग ही है । निश्छल व भोला गौरांग और उसकी सुरक्षा करने के बावजूद भी कभी अधिकार नहीं जताया अपना और ना ही कभी सारकी के जिस्म से अपनी भूख को शांत करने का प्रयास किया गौरांग ने !

आज जादौंग और अम्बी को एक दूसरे मे समाते देखा तो उनके सहज प्रेम ने उसे अपनी न्यूनता का अहसास करा दिया उसकी अन्तरात्मा उससे सवाल कर रही थी कि

क्यों वो अम्बी से द्वेष करती है जबकि अम्बी ने तो बडी आसानी से उसे और उसकी संतानों को अपनाया था । हाँ, उसका अम्बी के प्रति द्वेष पाप है,और वैसे भी अम्बी ही

सही मायने में जादौंग की मादा है । उसका जादौंग का

रिश्ता तो मात्र आवेगों की उत्पत्ति है ,जो आवेग शांत होते

ही समाप्त हो जाता है ।

प्रेम तो गौरांग ने किया जो बिना किसी अपेक्षा के हमेशा

साथ निभाता रहा ।कभी अनाधिकृत चेष्टा नही की , प्रेम करता रहा पर पाने का प्रयास नहीं किया ।विचार करते

बहुत वक्त निकल गया ,मगर अब सारकी को लेशमात्र

संशय नहीं था कि उसे क्या फैसला लेना है।

गौरांग का ज्वर काबू में आ चुका था पर थोडी कमजोरी नजर आ रही थी शरीर मे। सारकी ने गौरांग के सिर को

सहलाया और अपनी आँखों से उसे आमंत्रण दिया प्रेम

का। गौरांग पर हल्की मदहोशी अब भी छा रही थी

सारकी के आमंत्रण ने मानो उस पर नशा सा चढा दिया

और उसने सारकी का हाथ थाम लिया । सारकी यही तो

चाहती थी,कब से वो अम्बी और जादौंग के एकांत क्षणों

को छिपकर देख रही थी ,उसकी भावनाओं मे मानो ज्वार

आ चुका था ।

प्रकाश के देवता ने अभी क्षितिज से बाहर कदम नहीं रखा था ,अम्बी और जादौंग भी जलाशय की ओर गए थे ,इस एकांत ने सारकी को और पागल कर दिया था।गौरांग तो सोचने समझने की अवस्था से परे हो कर आँखें बंद कर अपनी समस्त जिज्ञासा आज पूर्ण करना चाहता था।

सारकी उसके चेहरे पर उभरे तनाव से उसकी मनोदशा

पढ चुकी थी । गौरांग के चेहरे को उसने अपने सीने से

लगा लिया ।

पहले बुरी तरह कंपकपाता हुआ गौरांग कुछ ही देर मे सामान्य हो गया , समुद्र मे मानो ज्वार आकर अभी शांत

हुआ हो ,दोनों के शरीर निश्चल थे, सारकी के चेहरे पर

संतुष्टि के भाव लिए हल्की मुस्कान नजर आ रही थी

पर गौरांग के चेहरे पर चिंता की रेखाएं थी।

नरपिशाचों का खतरा

गौरांग ,अम्बी ,सारकी ,जादौंग ,साना ,जारा ,पीऊ,मीचेंग , तार्षा,ओमान समेत पुरा परिवार एक साथ गुफा द्वार पर मौजूद था ।सभी को नरपिशाचों के खतरे का ज्ञान हो चुका था जिसका प्रभाव उनके चेहरे पर आए तनाव मे स्पष्ट हो रहा था । योजनानुसार सभी को काम बाँट दिए थे ।

कुछ लड़के गड्ढा खोदने मे लगे थे तो कुछ कांटे दार झाड़ और लकडियाँ एकत्र कर रहे थे ,ओमन ,मीचेंग और साना दानव पशुओं की हड्डियों के अस्त्र तैयार कर रहे थे ,गौरांग उन्हें निर्देश दे रहा था । सारकी और अम्बी उँचे वृक्षों पर मचान तैयार करवा रही थी । परिवार का प्रत्येक सदस्य उद्योगरत था।

दिन ढल रहा था लडकों में जोश और उत्साह अब भी बरकरार था ,सभी अपने कार्य मे तन्मयता से लगे हुए थे अम्बी सारकी और तार्षा साथ मे थी ,कई मचान तैयार कर चुके थे ।

गिले शिकवों का अंत

और अब थक कर थोड़ी देर से बाकि लोगों को काम करता देख रहे थे।अम्बी और सारकी दोनों की नजर ओमन और साना के आपसी बर्ताव पर थी ।ऐसा महसूस हो रहा था

मानो दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे ।ओमन बार

बार किसी बहाने से साना को बुलाता था और साना के हावभाव भी कुछ लजायापन लिए थे । सारकी ने अनायास ही अम्बी को बाहों में भर लिया ,उसकी आँखें छलक आई थीं ,अम्बी ने अचरज भरे भाव से सारकी को देखा ,फिर उनसे छलकते अश्रु जल पर निगाह डाली । निश्छलता छलक रही थी ,सारकी की आँखों से । अम्बी पूरी तरह

आश्वस्त हो चुकी थी, उसने भी अपने हाथों से उसके सर

को सहलाकर ,उसे बाँहों में भर लिया ।

सारकी ने अम्बी को बताया कि वो गौरांग का साथ चाहती है,अम्बी को अचरज तो हुआ पर साथ ही खुशी भी हुई ,उसने सारकी के आँसू पौंछें और उसे भरोसा दिलाया कि वो जादौंग को समझाएगी। सारकी ने अम्बी को और कस के गले लगा लिया ,अम्बी ने सारकी के बर्ताव मे निश्छलता का अनुभव किया और मुस्कुरा गई ।परिवार फिर से जुडने लगा ,साना के भी दिल का मैल एकजुट होकर काम करते हुए स्वाभाविक रूप से धुल गया था ।

अम्बी ने जादौंग को सारकी के मनोभावों से अवगत कराया उस वक्त गौरांग भी उपस्थित था, चेहरे पर परेशानी के भाव स्पष्ट हो रहे थे ।जादौंग ने थोडे तीखे तेवरों से उसकी तरफ देखा,जिससे वो और सहम गया ।अम्बी ने जादौंग के कंधे

पर हाथ रखा तो वह थोडा सहज हो गया ।

गुफा के पास के सभी वृक्षों पर लगभग दस बारह घौंसले नुमा मचान तैयार हो गई थी । बडी खूबी से बनाए इन घौंसलो मे बैठने के बाद इंसान एकाएक नजर में नहीं आ

रहा था । बडे ही कुशल कारीगरी थी यहाँ सारकी की ,बाहर से जितना छोटा दिख रहा था ,लगता नहीं था कि उसमें दो

व्यक्ति के छिपने की जगह हो सकती। पर अंदर बडे आराम से सोने की भी जगह थी ।

हर मचान पर कुछ मध्यम आकार के नुकीले किए हुए पत्थर जमा कर दिए थे और साथ ही गोराँग और सबसे छोटे किरैंग ने सुअर की आँतों को पैड की दो नजदीकी टहनियों से बाँधकर गुलेल नुमा हथियार बनाया था । जब जादौंग को अम्बी ने गोराँग के अविष्कार दिखाया तो उसने बस एक नजर मारकर उपेक्षा से मूँह फेर लिया जिससे गोराँग का मूँह लटक गया था ।

जादौंग को ये हथियार बेकार लग रहा था , वो यही सोच रहा था कि भयानक नरपिशाचों के धातु के बने धारदार अस्त्रों के मुकाबिल क्या इन खिलौनों को रखा जाएगा। तभी जादौंग के बाजू पर बडी तेजी से कोई छोटे पत्थर जैसी वस्तु टकराई ।

दर्द से बिलबिलाते हुए जादौंग ने अपना अस्त्र उठाया और हमले की दिशा मे घूम कर चिल्लाने लगा ।कि तभी उसकी पीठ पर दूसरी दिशा से फिर कुछ आके टकराया और फूट गया जादौंग को फिर घूमना पडा ।

उसने अपनी पीठ को सहलाने के लिए हाथ लगाया तो कुछ गीला महसूस हुआ ,हाथ पर लाल रंग देख एक बार तो वो उसे खून समझने वाला था ,पर अम्बी के चेहरे पर हँसी के भाव देख उसने चाट कर देखा 9 Full stopये उसका पसंदीदा फल था !!

,

"हो..हो..हो..हुर्रररा।।।।।।। "चारों तरफ से बच्चे भाग कर जादौंन को घेरकर खिलखिलाने लगे । जादौंग ने मचान पर दृष्टि डाली तो उसका सबसे छोटा बेटा किरैंग मचान से गुलेल को खींचकर हमले को तैयार खडा था,और जैसे ही जादौंग ने उसको देखा अबकी बार फल सीधे उसके मूँह पर आकर फूटा 9 Full stopजिसे देखकर अब तक चुप खडे सारकी, अम्बी और गोराँग भी हँसी नहीं रोक पाए ।

पूरा वातावरण हँसी से गूँज उठा था, पर जादौंग की आँखो मे क्रोध के भाव देख ,सब चुप हो गए ,मचान पर चढे हुए तीनों बच्चे भी नीचे उतरकर जादौग के पास थोडा सहमते हुए आए , छोटे किरैंग के हाथ मे अब भी एक फल पकडा हुआ था । जादौंग ने आँखें चढाकर उसे देखा तो , उसने झट से अपने हाथ वाला फल जादौंग की ओर बढा दिया , जिसे लेकर जादौंग ने उसी के मूँह पर मसल दिया ,और हँस पडा

माहौल हल्का हो गया ,सभी एक दूसरे के हाथों को पकड़ कर एक घेरा बना कर नृत्य करने लगे ,ओमन और साना

अब भी साथ ही थे ,जिन्हें दिखाने के लिए अम्बी ने जादौंग को कन्धे से मारकर टहोका। जादौंग ने देखा मगर कोई अनुमान ना लगा पाया । हँसते खेलते एक शाम और गुजर गई ।
 
स्वागत की तैयारियां पूर्ण हुईं

पूरे पंद्रह दिन के कठिन मेहनत ,सूझबूझ और प्रयासों का परिणाम था कि, बचाव और आक्रमण दोनो की तैयारी बखूबी हो चुकी थी ।गुफा के चारोँ और जमीन खोदकर

सूखी घास और उसके ऊपर मशाल के काम लिए जाने

वाले सूखे खाल के चरबी मे डूबे टुकडो को जमा दिया ।

गुफा को पूरी तरह घेरता हुआ ये खुदा हुआ हिस्सा इतना गहरा किया था कि अगर पानी भरा हो तो जादौंग जैसा बलिष्ठ भी पुरा उसमें डूब जाए । और चौडाई भी लगभग इतनी ही रखी थी ।

इस गहरे गढ्ढे को गुफा का घेराव करते हुए पचास कदम की परिधि रखकर खोदा गया था और निश्चित तौर पर यह कोई आसान काम तो नहीं था ।यहाँ भी अम्बी की सूझबूझ ही काम आई । हाथों और उपलब्ध औजारों से यह कार्य महीने भर से पहले नहीं हो पाता ।अम्बी ने एक स्लेज को तोडकर एक तरफ से उसपर हड्डियों के दाँते लगा दिए ,जो उल्टा करके चलाने पर मिट्टी बहुत तेजी से और ज्यादा जगह से निकाल पा रहा था ।

जब ऊँट से बाँधकर उसके ऊपर खडी होकर अम्बी ने गुफा परिक्रमण किया तो कम समय मे काफी मिट्टी बाहर आ गई।

आगे की खुदाई बस ओमान और साना ने मिलकर खेल

खेल मे पूरी कर डाली थी । बाहर निकली मिट्टी को गुफा

द्वार के आगे दो बडे टीलो के आकार मे जमा दिया ,जिससे गुफा के द्वार पर सीधे दृष्टि नहीं जा सकती थी ,और वहाँ छिपा व्यक्ति शत्रु की नजर मेंं आए बगैर हमला कर सकता

है । पुनः इसी औजार का प्रयोग सूखी घास एकत्रित करने

मे किया । फिर उसे ऊपर झाडिय़ों से ढंक दिया था ।

रणनीति

मचानों पर बच्चों और मादाओ को अलग रहना था , ताकि अधिक से अधिक दुश्मनों का निशाना लिया जा सके , दिन के वक्त जादौंग, गौरांग ,ओमान और मीचेंग शिकार के लिए जाते थे ।जादौंग ,अम्बी के साथ गुफा के पास ही के क्षेत्र मेंं शिकार करता था,ताकि अगर नरपिशाच दिन मे भी हमला करें तो वह लडने को तत्पर रहे ।

सबसे ऊँची मचान पर सबसे छोटा किरैंग था क्योंकि एक

तो सबसे छोटा होने की वजह से सभी चाहते थे वो सबसे ज्यादा छिपी हुई जगह पर रहे और दूसरा उसकी नजर

सबसे ज्यादा तेज थी तो दुश्मन को दूर से ही देखकर सब

को सतर्क कर सकता था। और गुलेलनुमा अस्त्र का बड़ी

अच्छी तरह प्रयोग करना सीख चुका था मैं ।

एक समस्या तो यह थी कि दिन के समय आक्रमणकारियों

के हमले की दशा मेंं गुफा मेंं बड़े पुरुष सदस्य उपस्थित

ना होने से छोटे सदस्यों व मादाओं पर आपत्ति आ सकती

थी । मगर इसका समाधान गौरांग ने निकाला की जिसे भी हमलावर पहले नजर आए वह छोटी चिडिय़ा की तरह आवाज निकाल कर दूसरो को संदेश पहुँचाएगा । लम्बी ध्वनि का अर्थ खतरा दिखना और छोटी ध्वनि का अर्थ

सब कुशल है था।

दूसरी समस्या थी ऊंटो की सुरक्षा का ,क्योंकि उन्हें छिपाना संभव नहीं था ,कुत्तों की चिंता नहीं थी क्योंकि वे परिवार वालों के इशारे समझते थे ,और दुश्मन पर हमला भी कर लेते ,मगर ऊँट ,जोकि अब दो ऊँटनी और एक शिशु को मिलाकर पूरे छ: थे अभी तक अच्छे वाहक नहीं बने थे ।

बुझे मन से जादौंग और अम्बी उन्हें गहरे वन मे खारी झील के पास छोड आए ।उस क्षेत्र मे उनके खाने योग्य घास प्रचूर मात्रा मे उपलब्ध थी ।

अम्बी को ऊँटों से खासकर बडी वाली मादा ऊँट जो एक शिशु की माँ भी थी गहरा जुडाव हो गया था ,और वो भी अम्बी से बहुत जुडाव रखती थी । जब वो अम्बी के पीछे ही आने लगी ,तब मजबूरी मे अम्बी को उसपर चाबुक से वार करना पडा । बहुत मुश्किल से बाद मे अम्बी उसे लाड दुलार कर वस्तु स्थिति समझा कर रोक पाई ।
 
खतरे की आहट

आज मध्यान्ह से ही वातावरण कुछ भयावहता लिए हुए था ।अजीब सा सन्नाटा छाया था,हवा का तो नामो निशान नजर नहीं आ रहा था । सूरज वक्त से बहुत पहले ही ढला तो नहीं मगर छिपता हुआ नजर आया था सभी को ।

आज से पहले कभी ऐसा नहीं देखा था कि, प्रकाश का देवता क्षितिज के पीछे ना छिपकर आसमान मे ही छिप गया हो । बच्चे बडे सभी शंकित थे ,जादौंग ने सन्नाटा तोडते हुए सब को अपनी अपनी जगह लेने का आदेश दिया ।।

सभी सतर्क थे और आने वाले खतरे का अनुमान लगा रहे थे,मगर अब कोई भयभीत नहीं था छिपा हुआ आग का गोला पुनः बाहर आ चुका था ,और वातावरण भी सामान्य हो गया था ।कुत्ते तेजी से भोंकने लगे जादौंग ने उन्हें शांत करा दिया ।

किरैंग ने खतरे का संकेत दिया जिसे सुनकर सभी की निगाह रेत के तुफान पर गई ,जो अभी धुंधला नजर आ रहा था ,पर कुछ ही पल मे वो बडे साए नजर आए जो ऐसे लग रहा था मानो तूफान को कवच बना कर चल रहे थे ।

सभी अपनी अपनी तय जगह पर छिप गए थे ,पर जादौंग परेशान था ,अम्बी नजर नहीं आ रही थी ।वो अपनी चट्टान

के पीछे अस्त्र लेकर तत्पर ,पर अम्बी को नहीं देख पाने के कारण ,उसकी हिम्मत आधी ही रह गई थी।

वो पिशाच अब स्पष्ट नजर आ रहे थे ,अश्व पर सवार उनकी आकृति भयंकर थी ।अगर गौरांग ने इन नर पिशाचों को पूर्व मे देखा नहीं होता और उनके स्वरूप का वर्णन नही बताया होता ,तो शायद वे उन्हें चार पैर वाला तेज रफ्तार दानव ही समझते ।

जादौंग के परिवार मे पहले किसी ने अश्व नहीं देखा था पर अब उन्हें अनुमान था अश्व के ऊपर आदमकद जीव नर पिशाच हैं ।

काफी नजदीक आ गए थे नरपिशाच । उनके सिर पर सींगों वाला ताज और गले मे लटके मानव अंग ,शीश व हाथ पैर आदि थे ।जो उन्हें भयानक बना रहे थे । उनके अस्त्र पत्थर के नहीं थे बल्कि धातु के थे , बडे चौडे खडग,घन और कुठार धारण किए वो पिशाच ही मालूम पडते थे ।

जादौंग सबसे नजदीक था हमलावरों के ,और दूसरी दिशा मे गौरांग व ओमान । नरपिशाच गुफा से लगभग सौ गज की दूरी पर रुक गए और गुफा के आसपास नजर घुमाकर देखने लगे । शायद वातावरण मे फैला सन्नाटा उन्हें भी

चकित कर रहा था । अजीब सन्नाटा था जैसे हवा मे जीवन ही ना हो, मृत्यु के समान भयावह लग रही थी ये खामोशी ।

पचास पचपन की संख्या होगी नर पिशाचों की ,उनका सरदार जो कि सबसे आगे था , बहुत चीखते हुए अपने

एक साथी की ओर देख कर कुछ बोला

जिसका जवाब उसने डरते हुए दिया था शायद ,क्योंकि उसका स्वर काफी धीमा था । पर इसकी भाषा जादौंग

समझ पा रहा था , हाँ वो तांत्रिक मुखिया ही था जादौंग

ने अगर उसकी आवाज नहीं पहचानी होती तो वह उसे भी नरपिशाच ही मान लेता।

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वो कह रहा था, कि ,"उसकी जानकारी एकदम पक्की है,यहाँ पाँच, छः मादाओं के साथ जादौंग का परिवार रहता है। और वो खुद उन्हें देखकर पुष्टि कर चुका है। अभी वो एकदम से कहाँ गायब हो गए वो नहीं जानता ।

जादौंग का जी कर रहा था कि वो भाले के एक प्रहार मे उसका सर काट दे ,मगर उसने ऐसा नहीं किया । भले ही

जादौंग यह जान चुका था कि ये मानव ही हैं जो भयानक रूप धरकर लोगों की हिम्मत तोड देते हैं ,और आसानी से बस्तियाँ उजाडकर चले जाते हैं । मगर फिर भी वे संख्या

बल मे अधिक थे और उनके धातु के हथियार ज्यादा घातक भी थे ,इसलिए वो कोई भी कदम जल्दबाजी मे नहीं उठाना चाहता था ।

हमलावर अभी तक आपसी बहस मे उलझे हुए थे ,अगर

वे अभी वापस लौट भी जाते तो भी खतरा टलता नहीं क्योंकि वे वापस जरूर आते ये जानता था जादौंग । वो

थोडा अधीर भी हो रहा था हमलावरों को आगे बढता नहीं देखकर।

तभी वातावरण मे भाँऊ की आवाज़ गूँज उठी ,जिसे सुन

कर हमलावरों ने उत्साह का शोर करते हुए उस ओर देखा

तो आँखे चमक उठी उनकी ।

दो मादा परछाई हाथ मे मशाल लिए कुत्तों के साथ खडी दिखाई दी ,जो उन्हें ललकारती हुई प्रतीत हो रही थी।

मानो नरपिशाचों के घातक अस्त्रों का मुकाबला मशालों

से करनेवाली हों

नरपिशाचों की हँसी से पूरा क्षेत्र गूंज उठा बहुत भयानक था अट्टहास और अश्वों की हिनहिनाहट का मिला जुला स्वर सभी पिशाच मशाल लिए खडी मादाओ की ओर लपके

सरदार और तांत्रिक दोनों की आँखें फटी रह गईं ,जब सभी पिशाच और अश्व चीखते हुए जमीन मे समाते दिखे

अभी कुछ समझ पाते उससे पहले ही अम्बी और सारकी दोनों ने अपने हाथ मे पकडी मशालें जमीन के सुपुर्द कर दीं पलक झपकते ही आग की लपटों ने घेरा बना लिया जिसमें से आती चीखें डर पैदा कर रही थीं । हमला करने से

पहले ही नरपिशाच अपनी आधी से ज्यादा सेना खो चुके

थे।

आग की लपटों के पीछे दोनों मादाओं सारकी और अम्बी

के चेहरे कुंदन से दमक रहे थे, जिन्हें देख कर सरदार की कुत्सित लालसाएँ और बलवती हो गई और वह अपने साथियों का राख होना भी भूल गया ।

उसने बेखौफ हो आग के दरिया के ऊपर से छलांग लगा

दी थी,जिसके पीछे पीछे बाकि हमलावरो ने भी छलांग लगाकर गड्ढे को पार कर लिया था ,अम्बी और सारकी

उनके कूदने से पहले ही गुफाद्वार की तरफ दौड लगा चुकी थी। उन्हें हासिल करने के लिए जुनूनी हुआ सरदार और तांत्रिक मुखिया बिना देखे भागे और तैयार किए हुए दूसरे जाल मे आ गए।

सभी घुडसवार घोडो की पीठ से जमीन पर गिर पड़े ।यहाँ मजबूत आँतों की तीन रस्सियाँ दो वृक्षों के मध्य बाड की तरह बाँधी हुई थी । सारे अश्व उसमें उलझ गए और सभी सवार जमीन पर

मुखिया तांत्रिक और पिशाचों के सरदार को समझ आ गया था कि वे अब शिकारी नहीं शिकार बनने वाले है । अब वे पचास से मात्र बीस रह गए थे और बुरी तरह जख्मी भी थे।

अभी तक मात्र दो मादाओं से ही सामना हुआ था उनका ।वे

पिशाच उठकर खडे ही हुए थे की तेज रफ्तार से आता भाला तांत्रिक के छाती मे घुस गया ,और वो वहीं गिरकर ढेर हो गया। जादौंग ने भयंकर रोषपूर्ण नाद से वातावरण गुँजा

दिया ।

नरपिशाचों का सरदार अपना अश्व और सींग वाला ताज

दोनों खो चुका था । उसके भयानक चेहरे पर भी भय की

लकीरें स्पष्ट उतर आई थीं जादौंग की गर्जना सुनकर ।

उसने पास ही पड़े अपने कुठार को सम्हालने के लिए

हाथ बढ़ाया मगर उसका अस्त्र जादौंग के हाथ में देख

कर आँखें फट गई उसकी । उसी के अस्त्र के प्रहार से

उसकी जीवनलीला समाप्त हो गई ।

और फिर अचानक चारों तरफ से पत्थरों की बारिश होने लगी उन बाकी बचे हैवानों पर । देखते ही देखते पूरे पिशाच ढेर होते चले गए ।कुछ मर चुके थे तो कुछ मरणासन्न पडे थे।सभी के अस्त्र गौरांग समेट चुका था और जिनमें कुछ प्राण बाकि थे उन्हें जादौंग ने ठिकाने लगा दिया ।
 
वैसे तो जादौंग अम्बी पर पूरा विश्वास करता था ,उसे यकीन था कि अम्बी की योजना से वे अपना बचाव तो कर ही लेंगे पर ये ना सोचा था कि जिन नरपिशाचों को वो बचपन से अमर मानता आ रहा है ,उन्हें बिना कोई हानि उठाए मार पाएंगे । उसको आग के इस तरह इस्तेमाल का तो कभी कल्पना मे भी खयाल नहीं आया था । आग में जलकर चीखते उन हमलावरों के शोर से वो तो घबरा गया था कि

कहीं ये आग से बाहर ना आ जाएँ ।

अम्बी ने ओमान और मीचेंग को अश्वो को वन मे खदेड़

कर आने के लिए बोला तो ओमान का बिल्कुल भी दिल

नहीं कर रहा था ,उसे अश्व की रफ्तार ने बहुत आकर्षित किया था वह एक अश्व को अपने साथ रखना चाहता था मगर जादौंग ने स्पष्ट मना कर दिया था ।

अम्बी और जादौंग दोनों को डर था कि उनकी सवारी करने की कोशिश मे जख्मी होने का खतरा ज्यादा है । ओमान और मीचेंग अश्वों को गहन वन मे खदेड़ने चले गए ।

सभी मृत हमलावरों की देह को सबने मिलकर देवता के सुपुर्द कर दिया ,और एक और डरावने अध्याय का समापन हुआ ।

दोपहर की धूप आज अच्छी तपन दे रही थी गौरांग को ।

पिशाचों का संकट तो खत्म हो गया था पर वह अब भी एक दूसरे संकट के भय से देवता की पहाड़ी पर ही लेट गया था।

गुफा पर जाकर जादौंग का सामना करने का साहस नहीं

जुटा पा रहा था विचारों मे खोये हुए उसकी आँख

लग गई थी । कंधे पर स्पर्श अनुभव कर एकदम से चौक

कर उठा तो जादौंग था । उसने नजरें नीचे टिका ली ,और जादौंग के चेहरे की ओर देखा ही नहीं ,हाँ जादौंग के पाँव जरूर नजर आ रहे थे, तभी पाँव की दो जोडियां और नजर आई अब उसने निगाह उठा कर देखा ।

सारकी और अम्बी पर नजर पडी ,अम्बी मुस्कुरा रही थी

वहीं सारकी के चेहरे पर लज्जा के भाव थे अब गौरांग

ने जादौंग की ओर देखने का साहस किया ,और उसके

भावों को समझ पाता उससे पहले ही जादौंग ने उसे स्नेह

के साथ गले लगा लिया , !

गौरांग के दिल का भय समाप्त हो गया और दोनों भाईयों की आँखे छलक आईं। जादौंग ने गौरांग को अपने सेे अलग करके उसका हाथ सारकी के कंधे पर रख दिया ,वो अपने फैसले से खुश था ,बहुत खुश । साथ ही खुश थी अम्बी और सारकी और इनकी खुशियों के दरिया मे गोते खा रहा था गौरांग भी भयमुक्त और प्रसन्न ।

चारों ने हाथ पकड़ कर श्रँखला बनाई और नृत्य कर देवता को धन्यवाद किया । कूछ देर मे उन तीनो को वहींछोडकर जादौंग गुफा की ओर चल पडा ,क्योंकि अब जो रस्म थी उसमे उसका कार्य नहीं था ।

अम्बी को अपने और जादौंग का प्रथम मिलन याद हो आया
 
ओमान घोडे पर बैठा अंदाज से साना के करीब आकर गोल गोल चक्कर काट रहा है,जो उसे देख कर हँस रही है ।

जादौंग ने अम्बी को आलिंगन मे बाँध रक्खा है और दोनों

की निगाहें ओमान और साना पर ही टिकी हैं युवा प्रेम का उदय हो रहा है एक नई कहानी बनाने के लिए

...................................

जादौंग और अम्बी के परिवार मे और वृद्धि हुई और धीरे धीरे वे बस्तियाँ बसाकर रहने लगे । गौरांग और सारकी ने भी कई संतान उत्पन्न की पर इनके परिवार एक इकाई की तरह ही रहे ,अम्बी व जादौंग के जीवन काल मे परिवार मे द्वेष नहीं उत्पन्न हुआ ।

ओमान और साना भी प्रणय सूत्र मे बंध गए ,एक नए युग का

प्रारम्भ करने के लिए । बाद में जारा भी ओमान के प्रणय में

पड़ गई ,जो कि आगे चलकर श्रेष्ठ मुखिया और योद्धा बना ।

samapt
 
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