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साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ

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राज की बात सुन कर कुमुद रोते रोते ही बरबस हंस पड़ी और बोली, "राज तुम तो बातों बातों में काफी आगे बढ़ गए! तुमने तो मुझे बगैर पूछे अपनी गर्ल फ्रेंड बना डाला। खैर, जब तुम्हारे भैया को कोई एतराज नहीं तो मुझे क्यों एतराज होगा? लड़की तो मैं हूँ ही और फिर तुम्हारी फ्रेंड भी तो हूँ। मेरी समझ में यह नहीं आता था की मेरे मन की बात मैं किस से करूँ? मैं तुम्हें अपना मानती हूँ और एक राज ही है जिसे मैं अपने मनके राज़ बता सकती हूँ। मैं खुले दिल से आज मेरे मन की उलझन तुम्हें बताना चाहती हूँ। यह बात कमल, मेरे और एक दूसरी स्त्री के शारीरिक सम्बन्ध के बारे में है।"

राज ने धीरे से कहा, "ओह! तो यह बात है! कुमुद शायद तुम जो कहने जा रही हो वह बात जातीय संबंधों और सेक्स को लेकर है। अगर ऐसा है तो फिर हम दोनों के बिच में जो औपचारिकता की दिवार है वह ख़तम होनी चाहिए। क्यूंकि अगर तुम मुझे आप कहके बुलाओगी या फिर हम दोनों के बिच में खुल्लम खुल्ला बात नहीं होगी तो ना तुम मुझे ठीक से बता पाओगी और ना मैं ठीक से समझ पाउँगा। इस लिए क्या हम खुल्लम खुल्ला बात नहीं कर सकते?"

कुमुद ने मुड़कर राज की और देखा और राज का हाथ अपने हाथों में लेती हुई बोली, "ठीक बात है राज। जब हम इतने करीब आ ही गए हैं तो बेहतर है की अपने मन की बात स्पष्ट रूप से कहें। और हाँ, बात सेक्स के बारे में ही है।"

राज ने कुमुद का हाथ अपने हाथों में दबाते हुए कमल का रानी के साथ आजमाया हुआ पेंच कुमुद के साथ आजमाया और कहा, "जब बात सेक्स की ही है तो फिर हमें एक दूसरे से कुछ भी छुपाना नहीं चाहिए और जो बात हो वह खुल्लम खुल्ला स्पष्ट रूप में बोलनी चाहिए। तो फिर क्या इसके लिए तुम्हे सभ्य शब्दों का ही प्रयोग करना जरुरी है? मैं चाहूँगा की तुम मुझसे स्पष्ट बात करो। सेक्स या फिर साथ में सोना की जगह कहो चोदना, पुरुष लिंग की जगह बोलो लण्ड. स्त्री लिंग की जगह बोलो चूत। तब तो बात में कोई असमंजस नहीं रहेगा। क्यों की अगर ऐसे शब्द बोलने में तुम्हें हीचकीचाहट है तो फिर हम खुल्लम खुला बात कैसे कर सकते हैं? मैं कुछ गलत तो नहीं कह रहा?"

राज की बात सुनकर कुमुद एकदम चुप हो गयी और राज की और एक अजीबो गरीब नजर से देखने लगी। शायद कुमुद को राज की बात सुनकर एक झटका सा लगा। राज मन ही मन अफ़सोस करने लगा। वह डर गया की उसकी बात सुनकर कमल की पत्नी जो इतनी रूढ़िवादी थी कहीं उठकर उसे तमाचा ही ना मार दे। उसे लगा की उसने यह अश्लील माने जाने वाले शब्द बोलकर भयंकर भूल कर दी थी। कुमुद के चेहरे का रंग जैसे उड़ सा गया। थोड़ी देर के लिए उसने राज की बात का कोई उत्तर नहीं दिया। शायद कुमुद कोई गंभीर सोच में डूब गयी।

पर थोड़ी देर बाद कुछ हिचकिचाते हुए कुमुद थोड़ी मुस्कुराई और बड़ी ही दबी सी आवाज में बोली, "नहीं राज, तुमने ठीक ही कहा है। मैं और कमल, हम पति पत्नी जब सेक्स के बारेमें बात करते हैं तो थोड़े ही सभ्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? कमल तो खुल्लम खुल्ला ही नंगे शब्दों का ही उपयोग करता है और मुझसे भी वही शब्द बुलवाता है। पर पता नहीं तुम्हारे साथ ऐसे शब्द मैं बोल पाऊँगी या नहीं। पर हाँ कोशिश जरूर करुँगी। तो सुनो। यह बात कहते हुए मुझे डर हैं की कहीं तुम्हारा दिल टूट न जाए। पर खैर अब बात तो करनी ही पड़ेगी। तुम्हारा प्रिय दोस्त, यानी मेरा पति कमल जब मुझसे सेक्स करता है, सॉरी, मुझे चोदता है तो वह हकीकत में तुम्हारी बीबी यानी रानी के सपने देखता है। अपने मन में वह सोचता है की वह मुझसे नहीं रानी से सेक्स, सॉरी मुझ को नहीं रानी को चोद रहा है। यह मुझे तब पता चला जब वह मुझे चोदते एक बार अनजानेमें ही 'रानी डार्लिंग तुम्हारी चूत बड़ी गरम है।' ऐसे ही कुछ बोलने लगा। मैं सोचती हूँ की कहीं ऐसा तो नहीं की मेरे पति और तुम्हारी बीबी के बिच में अवैध सम्बन्ध हों और हमें पता भी ना चले?"

कुमुद की बात सुनकर राज ने चैन की सांस ली। जरूर वह एक कदम आगे बढ़ चुका था और अब उसे कमल की चाणक्य निति की सफलता का पक्का विश्वास हो गया। जाने अनजाने कुमुद भी दोनों पुरुषों की जाल में फंस ने वाली लग रही थी।

राज कुमुद की बात सुनकर ठहाका मार कर हंसने लगा और बोला, "कुमुद डार्लिंग, बस इतनी सी बात? तुम इसके लिए अपने इतने बहुमूल्य आंसू बहा रही थी?"

कुमुद राज की बात सुनकर रिसियाती हुई बोली, "इसमें हंसने की क्या बात है? क्या यह गंभीर मामला नहीं है? क्या तुम्हें यह सब पता है?"

राज अपनी हंसी को नियंत्रित करते हुए बोला, "देखो, मैंने तुम्हें बात बात में कुमुद डार्लिंग कहा। तुमने उस पर ध्यान भी नहीं दिया। जैसे हमारे बिच में एक खुल्लम खुल्ला बात करने का सम्बन्ध है वैसे ही मेरी बीबी रानी और तुम्हारे पति कमल के बीचमें भी यह सम्बन्ध हो सकता है या नहीं? दूसरी बात, कमल भैया के लिए तो मैं अपनी जान देने के लिए भी तैयार हूँ। शायद तुम्हें पता नहीं होगा की हम दोनों तो बचपन में एक ही पत्नी के साथ शादी करने के ख्वाब देख रहे थे। जब थोड़े बड़े हुए तो फिर हमने सोचा की जरूर हम एक दूसरे की पत्नी अगर अच्छी लगी तो मिल बाँट कर भोगेंगे। पर शादी के बाद तो बीबियों की भी सुननी पड़ती है न? खैर, वह अगर रानी को चोदना चाहते हैं और अगर रानी को उसमें कोई एतराज नहीं है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। पर बात चोदने की कहाँ है? कमल भैया तो रानी को चोदने की सिर्फ कल्पना ही तो कर रहे थे? वास्तव में तो वह रानी को चोद नहीं रहे हैं, तो फिर तुम इतनी परेशान क्यूँ हो रही हो?"

 
कुमुद राज की बात सुनकर थोड़ी सहम गयी और थोड़ी देर के लिए रुकी और बोली, "हाँ, तुम्हारी बात तो ठीक है। मैं भी बड़ी बेवकूफ हूँ। कमल रानी को चोदने की सिर्फ कल्पना ही तो कर रहा था! और मैंने तो इस बात पर कमल के साथ हंगामा खड़ा कर दिया।"

फिर कुमुद थोड़ी गंभीर हो गयी और धीरे से बोली, "पर कमल और रानी अगर हकीकत में सेक्स करने लगेंगे तो फिर?"

राज ने कहा, "कुमुद एक बात बताओ, क्या कमल तुमसे प्यार करता है या नहीं? और क्या तुम कमल से प्यार करती हो या नहीं?"

कुमुद बोली, "हाँ, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।"

राज ने पूछा, "दुसरा सवाल, "क्या शादी से पहले तुमने किसी लड़के से एकाध बार सेक्स किया था या नहीं? कॉलेज मैं या स्कूल में या कहीं और किसी भी लड़के के साथ चूत में उंगली डालना, लण्ड हिला देना ऐसी हरकतें हुई थी या नहीं? कुमुद बात छुपाना मत। सच सच बताना।"

कुमुद ने राज को ध्यान से देखते हुए हिचकिचाते स्वर में बोला, "हाँ, थोड़ी बहुत हुई तो थीं।"

राज ने कहा, "तो उसका तुम्हारी शादी या कमल के साथ प्यार पर कोई असर हुआ? नहीं हुआ न?"

कुमुद ने कहा, "नहीं हुआ, पर वह तो शादी के पहले की बात थी। शादी के बाद अब तो हमने एक दूसरे के प्रति पूरी वचनबद्धता की शपथ ली है ना?"

राज ने कहा, "वह बात तो ठीक है, पर शादी के कुछ सालों बाद पति या पत्नी को कोई कोई बार कहीं न कहीं, कभी न कभी विवाहेतर यानी शादी के बाहर सेक्स करने का मन होता है। कई बार जब मौक़ा मिलता है तो वह इसे आजमा भी लेते हैं। सही तो यह होता है की ऐसा होने से पहले पति पत्नी एक दूसरे से मिलकर इस बारे में बात करें। पर हकीकत में ऐसा होता नहीं है। हम एक दूसरे से बात करने में झिझकते हैं। और अगर बात कर ली तो पति अथवा पत्नी एतराज करते हैं, नाराज हो जाते हैं। इस लिए अक्सर ऐसी बातें चोरी छुपी हो जाती हैं।" इतना कह कर राज चुप होगया। वह जानना चाहता था की कुमुद पर उसकी बातों का क्या असर पड़ता है। राज ने कुमुद को देखा तो वह राज को बड़े ध्यान से सुन रही थी।

 
राज ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "यदि पति पत्नी में अच्छा खासा मेल है और एक दूसरे को प्रेम करते हैं, ध्यान रखते हैं तो समझदारी इसी में है की उस बात को ज्यादा तूल न दिया जाये और घर की बात घर में ही रहे। मैं ऐसे कई स्त्री और पुरुष को जानता हूँ जिनका एकाध बार या कुछ समय के लिए परपुरुष या परस्त्री से शारीरिक सम्बन्ध रहा था या कुछ कुछ किस्से में थोड़ा लंबा भी चला। जहां इसको एक आवेग के रूप में समझा जाय और एक दूसरे के साथ एडजस्ट कर लिया जाय वहाँ शादी अच्छी चलती है। जहां कोई ज्यादा आक्रामक रवैया दिखाता है वहाँ दिक्कत हो सकती है। आखिर में आदमी अपनी बीबी के पास और औरत अपने पति के पास ही वापस आते हैं। अपनी पत्नी के साथ ही वह सही आनंद पाते हैं। तो अगर ऐसा कुछ होता है तो ऐसी परिस्थी को शान्ति से सहजता और समझदारी से ही निपटना चाहिए। मैं तो कहता हूँ की ऐसा सहमति से हो तो अच्छा है। बल्कि मैं तो कहता हूँ की अगर ऐसा होता है तो दूसरे पार्टनर को भी इसका फायदा उठाना चाहिए।"

कुमुद ने राज की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखते हुए पूछा, "फायदा? कैसा फायदा? क्या मतलब है तुम्हारा राज?"

राज ने सकुचाते हुए कहा, " अगर ऐसे मामले में पति और पत्नी ऐसे आवेग को सकारात्मक नजरिये से देखें और एक दूसरे को सहयोग दें तो इसमें मजा भी आ सकता है। देखो कुमुद मैं खरी खरी बात कहता हूँ। अगर कमल रानी से सेक्स करने के लिए उत्सुक है और अगर रानी भी कमल से चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है और अगर मौका मिलता है और कमल उसे चोदता है तो हमें उसको नजर अंदाज करना चाहिए। अगर तुम्हें पता चले की कमल रानी को चोद कर आया है तो उससे सवाल जवाब मत करो और ऐसा दिखाओ जैसे तुम उस बात को जानती ही नहीं हो या फिर उस बातको हंसी मजाक में उड़ादो। कमल को पता भी चले की तुम जानती हो पर उसे सीरियसली नहीं लेती तो इससे वह तुम्हारी इज्जत करेगा और एक तरह की गुनाह किया है ऐसी फीलिंग उसे होगी।"

राज ने यह सब बोल तो दिया पर वह डर रहा था की कहीं कुमुद इस बात से नाराज ना हो जाए। कुमुद की प्रतिक्रया जानने के लिए वह रुका। पर कुमुद के चेहरे पर कोई नकारात्मक भाव न देखते ही राज ने फिर बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "अगर कमल तुमसे कहे की उसने रानी को चोदा है तो तुम उस बात को हंसकर उड़ा दो। मैं भी तो उस बात को ज्यादा तूल नहीं दूंगा और मेरी बीबी रानी से लड़ाई झगड़ा नहीं करूँगा। पर हाँ, तुम कमल भैया को और मैं रानी को यह जरूर अच्छी तरह समझा देंगे की अगर हम लोग भी कभी ऐसा कुछ करते हैं तो कमल भैया को और रानी को बुरा नहीं मानना चाहिए। और फिर अगर तुम्हारा मन करे तो तुम भी कोई पर पुरुष से कभी कभार आनंद ले सकती हो।"

कुमुद ने कुछ शर्माते हुए पूछा, "अब मैं तुम्हारा मतलब समझी। तुम भैया का बहाना लेकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हो। राज साफ़ साफ़ बोलो तुम क्या चाहते हो।"

राज ने शर्माते हुए कहा, "मैं अपने मुंह से क्या बोलूं?" राज ने फिर हलके से अपना हाथ कुमुद की कमर पर घुमाया और कुमुद को अपनी और खींचा। कुमुद कुछ पलों तक राज से नजर से नजर मिलाकर देखती रही। फिर कुमुद धीरे से खिसक कर राज के पास आयी तो राज ने अपनी लम्बी बाहों में कुमुद को लपेट लिया और उसे उठा कर अपनी गोद में बिठा कर उसके मुंह पर अपना मुंह रखा। कुमुद ने राज की आँखों से आँखें मिलाकर उसे सरसरी नजर से देखा और बोली, "यह क्या कर रहे हो राज? ऐसा मत करो। मुझे अच्छा नहीं लगता।

 
कुमुद की बात सुनते ही राज को जैसे बिच्छु काटा हो ऐसा झटका लगा। वह एकदम गंभीर हो गया और धीरे से कुमुद से थोड़ा हट कर बैठ गया। उसकी उम्मीदों पर कुमुद ने ठंडा पानी फेर दिया था। जब कुमुद ने राज के चेहरे का भाव देखा तो उस बड़ा दुःख हुआ की उसने राज जैसे सीधे सादे आदमी को क्यों दुखी कर दिया। स्त्री सहज सहानुभूति और करुणा के कारण कुमुद से रहा नहीं गया और वो बोली, "ओ मेरे राज्जा, दुखी हो गए क्या? अपनी गर्ल फ्रेंड से नाराज हो?"

राज ने कुमुद की और देखा पर कुछ ना बोला। कुमुद ने पूछा, "क्या बात है, मुंह क्यों छोटा हो गया?"

राज: "मैं क्यों नाराज होऊं? मेरा आप पर कोई अधिकार थोड़े ही है? मैं यह सोचकर बहक गया था की आपने मुझे अधिकार दिया है। पर मैं ग़लतफ़हमी में था। खैर मुझे मेरी इस हरकत के लिए माफ़ करना। आगे से में ऐसा नहीं करूंगा।" ऐसा बोलते ही राज की आँखें झलझला उठीं। आँखों में पानी आ गया और राज का गला रुँध गया। वह कुछ बोल नहीं पाया।

कुमुद का मन पिघल उठा। उसने राज का हाथ अपने हाथों में लिया तो राज ने हाथ वापस खिंच लिया। कुमुद ने महसूस किया की राज वाकई में बहुत दुखी हो गया था। कुमुद धीरे से उठी और राज का मुंह अपने हाथों में लेकर राज की गोद मैं जा बैठी और अपने होंठ राज के होंठ से मिला दिए। कुमुद को अपनी गोद में पाते ही राज मुस्कराया और उसने कुमुद की पीठ को हलके से सहलाना शुरू किया। फ़ौरन दोनों ही एक गहरे पाश में बांध गए। कुमुद ने फिर धीरे से राज के कानों में कहा, "राज आई एम् सॉरी। मुझे माफ़ करदो।"

राज ने कहा, "पहले धक्का मारकर दूर करती हो फिर माफ़ी मांगती हो?"

उस सुनसान नदी के किनारे काफी लम्बे समय तक दोनोँ एक दूसरे के होंठों का रस पान करते रहे। उनकी गरम गरम साँसों की तेज धड़कन के अलावा दूर से गरबा की धुन की आवाज सुनाई दे रही थी। चुम्बन करते हुए राज का हाथ कुमुद की पीठ को सेहला रहा था। धीरे धीरे उसने कुमुद की ब्लाउज के पीछे के बटनों को जब टटोलना शुरू किया तो कुमुद राज से थोड़ा सा अलग हो कर बोली, "राज, यह तुम क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा।"

राज ने कुमुद को और करीब से कस के पकड़ा और बोला, "यहां कोई भी नहीं है। मैं कितने दिनों से यह करने की लगन लगाकर इंतजार कर रहा हूँ। अब रहा नहीं जाता।" ऐसा कह कर राज ने कस कर कुमुद को अपनी बाहों में लिया और उसे पूरी ताकत और जोश से चुंबन करने में लग गया। उसका एक हाथ कुमुद को जकड़े हुए था और दुसरा हाथ कुमुद की पीठ को सहलाता हुआ कुमुद की कमर के निचे उसकी गांड के फुले हुए गालों को दबा रहा था।

कुमुद की सांस थम गयी। जब वह थोड़ी देर तक सांस न ले पायी तो थोड़ा सा अलग होकर उसने गहरी साँसे ली और फिर राज और कुमुद दुबारा बाहु पाश में बंध गए और फिर एक गहरे चुम्बन में उलझ गए। राज कुमुद के कभी ऊपर के तो कभी निचे के होँठ को बारी बारी से चूस रहा था। पहले तो कुमुद राज को सक्रीय साथ देनेमें झिझक रही थी, पर जब उसने देखा की राज मानने वाला नहीं है तो उसने अपने होठोँ को राज के होठोँ से चिपका दिया और राज के होठोँ को चूमने और चूसने लगी।

कुछ देर बाद कुमुद राज से अपना मुंह हटा कर बोली, "राज, तुम जितने भोले दीखते हो उतने हो नहीं। तुम्हारे भैया तो जैसे हैं वैसे ही दीखते हैं। पर तुम तो छुपी कटार हो। खैर तुम बात सही कर रहे हो।

 
कमल पहले से ही थोड़ा ज्यादा सेक्सुअल है। मैं उसका स्वभाव जान गयी हूँ। मैं जानती हूँ की उसने शादी के पहले और शायद शादी के बाद भी कई औरतों को अपने चंगुल में फंसाया होगा और शायद चोदा भी होगा। पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया और बात वहाँ ही ख़तम हो गयी और हमारा संसार ठीक चलता रहा। पर अब तो बात रानी की आ गयी। इसी लिए मैं थोड़ी ज्यादा दुखी हो गयी थी। पर तुमने ठीक कहा। जहर जहर को मारता है। पर राज, यह बात चुभती है की मैं जिसे अपनी छोटी बहन मानती हूँ वही मेरे पति के साथ ऐश करना, सॉरी मेरे पति से चुदवाना चाहती है। बोलो मैं क्या करूँ? मैं जानती हूँ कमल नहीं सुधरेगा। या तो मैं कमल को छोड़ दूँ, या फिर उसकी यह आवारा गर्दी बर्दाश्त करूँ। मेरी समझ नहीं आता मैं क्या करूँ?"

राज: "मेरे पास इसका सटीक इलाज है। मैं सच सच बताऊँ, तुमको क्या करना चाहिए? पर तुम मेरी बात नहीं मानोगी। वचन दो की मेरी बात मानोगी।"

कुमुद:, "क्यों नहीं मानूंगी? मैं वचन देती हूँ, की मैं तुम्हारी बात मानूंगी।"

राज: "तो फिर तुमने अभी कहा ना? जहर जहर को मरता है। अगर तुम समझती हो की रानी और कमल तुम्हें जहर देरहे हैं तो तुम भी उनको जहर पिलाओ। "

कुमुद:, "क्या मतलब? साफ़ साफ़ कहो, तुम क्या कहना कहते हो।"

राज: "तो आओ, जो खेल रानी और कमल खेलते हैं, वही खेल हम खेलें।"

कुमुद ने राज की और देखा और हंस पड़ी और बोली, "अच्छा मियाँ? तुम अपना उल्लू सीधा करना चाहते हो?"

राज" "जहर जहर को मारता है। देखो मैं तुम्हें कोई तरह से भटका नहीं रहा। मैं मानता हूँ घर की बात घर में ही रहे तो अच्छा है। क्यों तुम इस जिद पर अड़ी हो की तुम ऐसा नहीं होने देगी? अगर मान भी लिया जाय की कमल रानी को चोदता है तो फिर भी रानी बीबी तो मेरी ही रहेगी. कमल फिर भी तुम्हारा पति ही रहेगा। जैसे ही तुम दोनों यहाँ से गए की बात खतम। अब तुम बात का बतंगड़ ना बनाओ यही मेरी तुम से बिनती है।"

कुमुद एकदम सोच में ड़ूब गयी। थोड़ी देर सोचने के बाद बोली, "शायद तुम ठीक ही कह रहे हो। मुझे इस बात को स्वीकार करना चाहिए। धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा। मुझे अब कमल से कोई शिकायत नहीं करनी है। अगर वह रानी से सेक्स भी करता है तो मैं उसे ज्यादा तूल ना देनेकी कोशिश करुँगी। अब मैं चाहती हूँ की कमल और मैं हम दोनों पहले की तरह ही अपना जीवन बिताएं। मेरा मतलब है पहले की तरह ही सेक्स करें और एक दूसरे को शक की नजर से ना देखें। चलो घर चलते हैं। वहीं जा कर एक दूसरे से साफ़ साफ़ बात करते हैं।"

यह कह कर कुमुद ने राज की बांह पकड़ी और अपना सर उसकी बांह से सटाकर चुपचाप बैठ गयी। राज ने भी कुमुद की पीठ सहलाते हुए कुमुद को थोड़ी देर ले लिए बेंच पर शान्ति से बैठ कर चिंतन करने का मौक़ा दिया। ऐसे ही कुछ मिनट बीत गए तब कुमुद उठ खड़ी हुई और राज का हाथ पकड़ कर बोली, "चलो घर चलते हैं। "

राज कुमुद की बात सुनकर दुखी हो गया। वह कुमुद से कुछ देर और प्यार जताना चाहता था। राज का दिमाग कुमुद के इतने करीब बैठने से चकरा रहा था। उसके हाथ कुमुद की छाती पर सैर करने के लिए बेताब हो रहे थे। पतलून में राज का लण्ड भी कड़क हो चुका था। पर राज जानता था की अगर उसने जल्द बाजी की तो थोड़ी बहुत नरम पड़ी हुई कुमुद कहीं फिर से अपना तेवर बदल ना दे। कही बनी बनाई बात पर पानी ना फिर जाय।

राज ने एक नजर कुमुद की और देखा और अपने मन का दुःख अपनी आँखों से जाहिर करने की कोशिश की। शायद कुमुद भी राज के मन की बात समझ गयी थी। कुमुद ने धीरे से राज का हाथ दबाया और शायद धीरज रखने का इशारा किया।

धीरे से राज उठ खड़ा हुआ और आगे बढ़कर उसने एक ऑटो रिक्शा रोका। राज ऑटो रिक्शा में कुमुद से एकदम सटकर बैठा और कुमुद का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे प्यार से सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद राज ने कुमुद की कमर के इर्दगिर्द अपना हाथ घुमा कर उसे अपने सीने से दबा लिया। कुमुद भी अपना सर राज के सीने पर रख कर अपने मन के तरंगों में खो गयी।

##

 
क्यूंकि मोहल्ले में गरबा हो रहा था इसलिए उन्होंने ऑटो रिक्शा घर से थोड़ी दूर पर ही छोड़ दिया। जब राज और कुमुद घर पहुंचे तो उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। घर में कमल और रानी पहुँच चुके थे क्यूंकि घर अंदर से बंद था। बाहर कोई ताला नहीं लगा था। कुमुद ने राज की और देखा। राज ने अपने होंठों पर उंगली रख कर कुमुद को चुप रहने का इशारा किया। राज फिर धीरे से कंपाउंड की लॉन में से होकर अपने बैडरूम की खिड़की के पास दबे पाँव पहुंचा और खिड़की पर कान देकर अंदर की आवाज सुनने की कोशिश करने लगा। वह खिड़की राज के बेडरूम की थी।

अंदर कमल और रानी की आवाजें हलकी सी सुनाई पड़ती थीं। राज ने कुमुद को भी अपने पास बुलाया ताकि अंदर हो रही बात कुमुद भी सुन सके। अँधेरे में कुछ दिखाई तो नहीं पड़ रहा था पर रानी की आवाज राज और कुमुद ने सुनी। रानी की साँसें तेज गति से चल रही थीं। उसकी आवाज रुक रुक कर आ रही थी। रानी कमल से कह रही थी, "कमल, यह हम ठीक नहीं कर रहें हैं। यह तुम क्या कर रहे हो? थोड़ा रुको, देखो कहीं राज और कुमुद आ ना जाए।"

फिर कमल की आवाज, "रानी, मैं कब से तुम्हारे यह गोरे भरे हुए बदन को छूने की कल्पना कर के पागल हो रहा हूँ। तुम भी तो कभी से मचल रही हो। तो क्यों न हम एकदूसरे की इच्छा की आज मन भर कर तृप्ति कर लें? राज और कुमुद को आने में अभी काफी देर है। अगर राज और कुमुद आ भी गए तो मैं उनको उनको कुछ कह कर समझा लूंगा। कह दूंगा की वह दूसरे कमरे में ही चले जाएँ और हमें अकेला छोड़ दें।"

रानी, "पागल हो गए हो? अगर वह आ गए तो आप कुछ मत बोलना, मैं सब सम्हाल लुंगी।"

कमल, "पर अभी तो वह नहीं है ना। तो फिर मान जाओ ना? आ जाओ ना?"

रानी: "अरे कमल प्लीज तुम मान जाओ ना? ऐसा मत करो, प्लीज? देखो, वह दोनों आने वाले ही होंगे।"

कमरे में थोड़ी देर फिर चुप्पी हुई। शायद कमल रानी के कपडे पकड़ कर उसे अपनी और खिंच रहा था। रानी सहम कर बोली, "हे भगवान्! कमल तुम मानोगे नहीं। चलो ठीक है। लो मैं आ गयी, बस? खुश? पर अब कपडे मत निकालो।"

कमल: "प्लीज डार्लिंग! अब थोड़ी देर के लिए ही! मान जाओ न!"

रानी: "अरे समझो भी! पागल मत बनो। बहुत मौके मिलेंगे। अगर वह दोनों आ गए तो कपडे पहनने में समय लगेगा और उनको शक हो जाएगा।...... "

और फिर अंदर बातचीत बंद हो गयी। यह समझना कोई मुश्किल न था की बैडरूम में राज की पत्नी रानी और कुमुद का पति कमल एकदूसरे को गाढ़ आलिंगन कर रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कमल रानी का ब्लाउज खोलकर उसके मम्मे चूस रहा था।

अंदर से चूमने की और रानी की सिसकारोयों की आवाजें आने लगीं।

रानी: " फिर वही जिद? अरे ........ कमल, प्लीज मान जाओ ना? कपडे मत निकालो प्लीज़? इस अंधेरेमें वैसे भी तुम्हें कुछ नहीं दिखेगा। कमल प्लीज यह क्या कर रहे हो? यह ठीक नहीं है। रुको, ऐसे नहीं। मैं ठीक कर देती हूँ। हे भगवान् तुम मानोगे नहीं। आह्हः... आह.... धीरे से कमल धीरे से। दर्द होता है। क्या कर रहे हो? चलो बस अब हो गया। अरे ब्लाउज मत खोलो बाबा। नहीं। रुको, मैं ब्लाउज और ब्रा को थोड़ा खिसका देती हूँ, ठीक है? चलो बाबा कर लो।"

 
अंदर से फिर कुछ कपड़ों को खिंचने की आवाज आयी। बाहर खिड़की में सुन रहे कुमुद और राज एक दूसरे को भौंचक्का सा देखते ही रह गए। कुमुद के मुंह पर अजीबो गरीब भाव नजर आ रहे थे। राज डर गया की कुमुद कहीं कुछ उत्तेजनात्मक काम ना कर बैठे। राज ने धीरे से कुमुद का हाथ दबाया और चुप रहने का इशारा किया। अचानक अंदर का कमरा जगमगा उठा। लगता था जैसे कमल ने बिजली का स्विच चालु कर दिया था। अब राज और कुमुद को अंदर की गतिविधियां साफ़ दिख रही थीं।

रानी की साडी और ब्लाउज गायब थे। रानी कमल के सामने अपनी छाती पर अपने दो हाथों से ब्रा को ढकने का नाकाम प्रयास करते हुए ऊपर ब्रा और निचे घाघरा पहने खड़ी हुई थी। अंदर से रानी की दबी हुई आवाज आयी, "कमल यह क्या कर रहे हो?"

कमल: "तुम कह रही थी ना अन्धेरा है कुछ नहीं दिखेगा। तो चलो अब मैंने बत्ती जलादि। अब तो सब कुछ दिख रहा है न? अब तो मुझे देखने दो, मत रोको, प्लीज ....?"

ऐसे कहते हुए कमल ने फुर्ती से लपक कर रानी को अपनी बाहों में दबोच लिया और पीछे हाथ डाल कर रानी के ब्रा की पट्टी खोलदी। रानी की ब्रा रानी के कन्धों पर असहायता पूर्वक लटक पड़ी। रानी के उन्नत उरोज नंगे हो चुके थे पर फिर भी नहीं दिख रहे थे, क्यूंकि रानी ने अपने हाथों से उसको ढक दिया था। कमल के आहोश में जकड़ी हुई रानी के स्तन कमल की छाती से दबने के कारण फैल गए थे और वह फैलाव नजर आ रहा था।

जैसे ही कमल का एक हाथ रानी के उभरे करारे स्तनों और उसकी फूली हुई निप्पलोँ से खेलने लगा, रानी का अवरोध धीरे धीरे कम होने लगा। रानी की कमल का हाथ हटाने की कमजोर चेष्टा का कमल पर कोई असर नहीं हुआ। कमल का दुसरा हाथ रानी के घाघरे के उपरसे ही रानी की गाँड़ पर रानी को अपने बदन से सटाकर दबाकर रखने में लगा हुआ था। कमल की उंगलियां रानी की गाँड़ को दबा ने में और एक उंगली तो उसकी गाँड़ के गालों के बिच वाली दरार को कुरेद ने की कोशिश में लगी हुई थी।

जैसे ही रानी के कुछ बोलने की चेष्टा की की फ़ौरन कमल ने अपने होंठ रानी के होठों से चिपका दिए और बोला, "रानी, अब कुछ मत बोलो। जो होगा वह होने दो। अब मैं रुकने वाला नहीं। जिस दिन से मैंने तुम्हें पहली बार देखा था उस दिनसे मैं इस दिन का इंतजार कर रहा था।" और बिना समय गँवाए कमल ने अपना हाथ रानी के घाघरे में डाल कर घाघरे का नाडा खोल दिया। देखते ही देखते रानी का फैला हुआ घाघरा फर्श पर जा गिरा।

रानी सिर्फ पेंटी पहने हुए अपने स्तनों को अपने हाथों से छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए खड़ी शर्म के मारे मरी जा रही थी। छोटी पेंटी में से रानी के झांटों के बाल भी दिख रहे थे। रानी की समझ में नहीं आ रहा था की वह हाथों से अपने स्तनों को छुपाये या अपनी चूत को।

राज और कुमुद दोनों रानी के आधे नंगे बदन को बाहर से देखते ही रह गए। यह राज की जिंदगी का पहला मौक़ा था जब राज को अपनी पत्नी रानी के नंगे बदन को अपने ही घर की खिड़की में से देखना पड़ रहा था और वह भी किसी और मर्द की बाहों में। राज का लण्ड उसकी पतलून में फूल गया था और राज से कमल भैया को रानी के नंगे बदन को सहलाते हुए देखकर रहा नहीं जा रहा था। राजने अपनी पतलून में हाथ डाल कर अपने लण्ड को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया और अंदर हो रही गतिविधियों को देखने लगा।

कुमुद ने राज को अपने पेण्ट में हाथ डाल कर अपने लण्ड को सहलाते हुए देखा तो वह देखते ही रह गयी। राज के इस अंदाज को वह समझ नहीं पा रही थी। भला एक आदमी अपनी बीबी की दूसरे मर्द से चुदाई होने वाली है यह देखकर कामोत्तेजित कैसे हो सकता है? कुमुद ने अपने उत्तेजना से कांपते हुए हाथ से राज का हाथ थामा। राज ने कुमुद की और देखा। उसे लगा की कुमुद बड़े असमंजस में है। एक और गुस्सा और दुःख है तो दूसरी और उत्तेजना और रोमांच है। पर कुमुद के चेहरे के भाव देखकर राज ने महसूस किया की गुस्सा शायद रोमांच पर हावी हो रहा था।

राज ने तुरंत ही कुमुद के मुंह पर अपनी हथेली जोरों से दबा दी ताकि वह कुछ भी बोल ना सके और कमल और रानी को पता न चले की राज और कुमुद उन दोनों को खड़की से देख रहे थे। फिर खिड़की से कुमुद को खिंच कर बरामदे में लाया और धीरे से बोला, "कुमुद डार्लिंग, जो होता है उसे होने दो। रानी मेरी पत्नी है और रहेगी। कमल तुम्हारा पति है और रहेगा। हमारे और तुम्हारे दोनों के पत्नी और पति हमारे ही रहेंगे। इस मिलन से उसमें कोई फर्क नहीं पडेगा। प्लीज शांत हो जाओ।"

 
राज ने तुरंत ही कुमुद के मुंह पर अपनी हथेली जोरों से दबा दी ताकि वह कुछ भी बोल ना सके और कमल और रानी को पता न चले की राज और कुमुद उन दोनों को खड़की से देख रहे थे। फिर खिड़की से कुमुद को खिंच कर बरामदे में लाया और धीरे से बोला, "कुमुद डार्लिंग, जो होता है उसे होने दो। रानी मेरी पत्नी है और रहेगी। कमल तुम्हारा पति है और रहेगा। हमारे और तुम्हारे दोनों के पत्नी और पति हमारे ही रहेंगे। इस मिलन से उसमें कोई फर्क नहीं पडेगा। प्लीज शांत हो जाओ।"

राज ने देखा की कुमुद उन दोनों को देखकर बाँवरी सी हो रही थी। राज ने कुमुद को अपनी बाँहों में लिया और उसे शांत करने की कोशिश करते हुए ढाढस देने लगा। पर कुमुद ने राज का हाथ पकड़ कर उसे वहाँ से हटाया और घर के मुख्य द्वार के सामने ले आयी।

बाहर लाउड स्पीकर की वजह से कुछ ज्यादा ही शोर हो रहा था। कुमुद ने राज से रोनी सी आवाज में कहा, "राज अब तुम बताओ, हम क्या करें? मैं तो कहीं की ना रही। मेरा संसार तो तुम्हारी बीबी ने चौपट कर दिया।"

राज ने कुमुद को अपनी बाहों में दबाते हुए ढाढस देते हुए कहा, "कुमुद डार्लिंग, अरे भाई अगर तुम्हारा संसार चौपट हुआ है तो मेरी बीबी की भी तो चुदाई होने वाली है। मेरा तो चौपट नहीं, छौपट ही हो गया। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। कोई आसमान टूट नहीं पड़ा। धीरज रखो और मजे लो। क्या तुम उन दोनों को देख कर उत्तेजित नहीं हुई? सच सच बताओ?"

कुमुद ने राज की और देखा और मुंह बनाते हुए बोली, "मैंने कभी कोई भी स्त्री पुरुष को चोदते हुए अब तक नहीं देखा था। अगर वह दोनों मेरे पति और तुम्हारी पत्नी ना होते तो मैं वास्तव में उनके चोदने का पूरा आनंद लेती।"

राज ने कहा, "तुम चिंता मत करो। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है। हम लोग उनकी ही जबान में उनको जवाब देंगे ना। चलो अब हंस दों। हम उन युगल के रंग में भंग करते हैं और उनकी पूरी फिरकी करते हैं। तुम यह मत जताना की हम ने कुछ भी देखा है।"

राज की बात सुनकर कुमुद उठ खड़ी हुई। राज ने कुमुद का हाथ पकड़ा और उसे वापस दरवाजे पर ले आया। बाहर किसी कारण अचानक लाउड स्पीकर बंद हो गए। तब अंदर से कमल और रानी की आवाजें सुनाई देने लगीं। राज ने कुमुद को चुप रहने का इशारा करते हुए घंटी बजायी। राज और कुमुद ने महसूस किया की अंदर से आवाजें आनी बंद हो गयीं। थोड़ी देर के लिये अचानक सन्नाटा छा गया। काफी समय के बाद अंदर से रानी की आवाज आयी, "रुको, आती हूँ।"

जब दरवाजा खुला तो राज और कुमुद ने देखा की पकडे जाने के डर और शर्म के मारे रानी के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। उसके बाल बिखरे हुए थे और रानी उसे संवारने की कोशिश कर रही थी। रानी अपना ब्लाउज भी ठीक ठाक करने में लगी हुई थी। जैसे ही राज और कुमुद ने घर के अंदर कदम रखा तो कमल को राज के बैडरूम से निकलते हुए देखा। राज और कुमुद का सामना होते ही कमल की नजरें झुक गयीं। वह राज और कुमुद से आँखें नहीं मिला पा रहा था।

राज ने बड़ी ही सरलता से पूछा, "रानी डार्लिंग, दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों हुई? कहीं आप दोनों बिज़ी तो नहीं थे?"

राज का सवाल सुनकर रानी के चेहरे से तो जैसे हवाइयां उड़ने लगीं। वह अपने पति से नजरें नहीं मिला पा रही थीं। रानी की आँखें एकदम सुनी हो गयीं। वह अपने पति की और चेहरे पर एकदम हक्की बक्की भाव शून्य नजर से देखती रह गयी। उसके पास कोई जवाब नहीं था। राज ने रानी को खिंच कर अपनी बाँहों में लिया और बोला, तुम कहीं अपना सपना साकार करने में तो नहीं लगी थीं?"

रानी के हाल ऐसे हो गए की काटो तो खून ना निकले। जब रानी काफी समय तक निरुत्तर रही तो राज कमल की और घुमा और बोला, "भैया, आप और रानी चुप क्यों है? खैर, कोई बात नहीं। पर मुझे आपको एक खुश खबर देनी है। वह आपको कुमुद देगी।"

राज की बात सुनकर कुमुद आगे बढ़ी और रानी की और घूमी। कुमुद रानी के करीब गयी और अपना हाथ उठाकर कुमुद ने रानी के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया और बोली, "क्या गुल खिला रही थी मेरे पति के साथ?"

तमाचा इतना करारा था की रानी के गाल लाल हो गए थे। रानी की आँखों से आंसू टपक ने लगे। पुरे कमरे में सन्नाटा छा गया। सब जमीन पर नजरें गाड़े चुप हो गए। ऐसा कुछ होगा उसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की थी। कमरे में से कोई भी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था।

 
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