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सियासत और साजिश complete

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राज : (मन मे सोचता है लगता है इसे चढ़ गयी अब चलना चाहिए नही तो इसका यहीं ड्रामा शुरू हो जाएगा) चल लकी बहुत हो गया अब चलते हैं

लकी: यार तू भी ना अभी एक एक और हो जाए

राज : नही यार कल क्लास मे भी जाना है चल उठ

लकी: (नशे मे) चल यार आज मे तेरी किसी बात को टालूगा नही चल

और दोनो उठ कर होटेल से बाहर आकर कार मे बैठ जाते हैं और फ्लॅट की तरफ चल देते हैं फ्लॅट पहुँच कर दोनो मे से किसी ने खाना नही खाया और वैसे ही सो गये अगली सुबह जब लकी की आँख खुली तो राज जॉगिंग के लिए जा चुका था लकी उठ कर बाथरूम मे चला गया राज यूनिवर्सिटी के ग्राउंड मे जॉगिंग कर रहा था तभी ललिता भी एंटर हुई और जॉगिंग करने लगी राज ललिता के आने से पहले दो राउंड लगा चुका था इसीलिए वो बेंच पर आकर बैठ गया और पानी पीने लगा ग्राउंड मे सुबह -2 जॉगिंग करने वालों की भीड़ थी ग्राउंड बहुत बड़ा था इसीलिए कितने लोग ग्राउंड मे हैं इस बात का अंदाज़ा नही लगाया जा सकता था जब ललिता जॉगिंग करते हुए राज के पास से गुज़री तो राज और ललिता दोनो ने एक दूसरे को देखा दोनो की नज़रें मिली ललिता के होंटो पर राज को देख कर मुस्कान आ गयी ललिता की नज़रें राज से हट नही रही थी ललिता राज के सामने से गुजर गयी ललिता ने एक बार फिर पीछे मूड कर देखा राज भी ललिता को ही देख रहा था बेखयालि मे ललिता का पावं उबड़ खाबड़ ज़मीन पर पड़ गया जिससे उसका पैर मूड गया और वो घास पर गिर गयी और दर्द से चिल्ला उठी ललिता को गिरता देख राज एक दम चोंक गया और बेंच से उठ कर ललिता की तरफ भागा और ललिता के पास जाकर उसे कंधों से पकड़ कर सहारा देकर खड़ा किया

राज : आप ठीक तो हैं ना ज़्यादा तो नही लगी

ललिता: (फेस पर अभी भी दर्द के भाव थे ) हाँ ठीक हूँ लगता हैं मोच आ गयी है (राज ने उसे सहारा देते हुए बेंच पर लाकर बैठा दिया)

राज ने ललिता को पानी दिया और उसके पास बेंच पर बैठ गया

राज : लगता है काफ़ी चोट लगी है आपको

ललिता: नही बस ज़रा सी मोच आ गयी है थॅंक्स फॉर हेल्प

राज : (वैसे तो ललिता का नाम जानता था बात शुरू करने के लिए उसे और कुछ नही सूझा) जी आपका नाम क्या है

ललिता: ललिता

राज : ललिता बहुत ही दिलकश नाम है वैसे मुझ राज कहते हैं

ललिता: जानती हूँ जब आप ने उसे लड़की को उन गुण्डों से छुड़वाया तो मैं भी वहीं थी मेरे दोस्त ने मुझ आप का नाम बताया था

राज : तो आप क्या कर रही हैं मेरे मतलब कॉन सा कोर्स कर रही हैं

ललिता: मैं बी.ए 2न्ड एअर मे हूँ

राज : और मैं फाइनल एअर मे अगर आप को अभी भी तकलीफ़ है तो मे आपको घर छोड़ देता हूँ

ललिता: नही मे ठीक हूँ मे चली जाउन्गी

राज : आर यू स्योर

ललिता ने हां मे सर हिला दिया और जैसे ही वो खड़ी होकर चलने लगी तो उसके पैर मे फिर से तेज दर्द होने लगा और उसका बॅलेन्स बिगड़ गया इससे पहले कि ललिता गिरती राज ने जल्दी से उठ कर उसे सहारा देकर गिरने से बचा लिया और उसे फिर से बेंच पर बैठा दिया

राज : आप कुछ देर के लिए यहीं बैठिए मैं अभी अपनी कार लेकर आता हूँ

ललिता: नही उसकी ज़रूरत नही मे चली जाउन्गी आप क्यों तकलीफ़ कर रहे हैं

राज : कोई बात नही मैं अभी आता हूँ

और ये कह कर राज तेज़ी से अपने फ्लॅट की तरफ भागा ललिता होंटो पर मुस्कान लिए राज को जाते हुए देख रही थी राज फ्लॅट के बाहर पहुँचा और उसने लकी को आवाज़ लगाई आवाज़ सुन कर लकी बाहर आया

लकी: क्या हुआ कहाँ से भागा आ रहा है

राज : वो तुझे मे बाद मे बताता हूँ पहले ज़रा कार की चाबी नीचे फेंक

लकी ने कार की कीज़ उठाई और नीचे फेंक दी राज ने चाबी को लपका और तेज़ी से कार का डोर खोल उसमे बैठ गया और कार को यूनिवार्सिटी की तरफ मोड़ लिया और ग्राउंड के बाहर कार पार्क करके ललिता के पास आ गया राज की साँसे फूली हुई थी जिस देख ललिता के होंटो पर मुस्कान आ गयी

राज : चले आपको छोड़ देता हूँ

और ललिता खड़ी होने लगी पर दर्द अभी भी उसे खड़े होने मे दिक्कत दे रहा था राज ने अपना हाथ उसकी पीठ से लेजा कर उसके कंधे पर रख लिया जैसे उसके गले मे एक आर्म को डाल दिया हो राज ने एक पल के लिए ललिता की तरफ देखा जैसे उसका रियेक्शन जानने की कोशिस कर रहा हो ललिता के होंटो पर मुस्कान और आँखों मे हया देख राज के दिल को तसल्ली हुई और वो ललिता को लेकर कार की तरफ चलने लगा कार के पास पहुँच कर उसने कार का डोर खोला और ललिता को आगे की सीट पर बैठा कर डोर बंद कर दिया और खुद दूसरी तरफ से जाकर कार मे बैठ गया और कार स्टार्ट करके ड्राइव करने लगा

राज : तो ललिता जी आपका घर कहाँ पर है मुझ रास्ता बताते जाइएगा

ललिता: जी

और ललिता उसे रास्ता बताती गयी और कुछ ही मिनिट मे कार ललिता की नानी के घर के बाहर खड़ी थी राज ने कार से निकल कर ललिता को सहारा देकर कार से निकाला और गेट तक ले गया ललिता ने डोर बेल बजाई थोड़ी देर बाद ललिता की नानी ने गेट खोला ललिता को राज का सहारा लिए खड़े देख ललिता की नानी परेशान हो गयी

नानी: ललिता पुतर क्या हो गया चल जल्दी अंदर आ

नानी और राज ललिता को सहारा देकर अंदर ले आए और उसे सोफे पर बैठा दिया

नानी: क्या हुआ मेरे बच्चे (नानी की आँखें नम हो गयी)

ललिता: कुछ नही नानी बस पैर मे ज़रा सी मोच आ गयी है आप यूँ ही फिकर कर रही हो जल्दी ठीक हो जाएगा नानी ये मेरे साथ पढ़ते हैं राज इन्होने आज मेरी बहुत मदद की है

नानी: (राज के सर पर हाथ रखते हुए) जुग जुग जियो बेटे

राज : जी अब मैं चलता हूँ ललिता आज आप रेस्ट कर लीजिएगा कॉलेज से छुट्टी ले लो परसों मिलेंगे

ललिता: जी ज़रूर

और राज बाहर की तरफ जाने लगा

नानी: बेटा बैठो तो सही मैं जूस लेकर आती हूँ

राज : नही आंटी मे लेट हो जाउन्गा अभी तैयार भी होना

और राज वापिस आ गया आज उसके चहरे की रोनक देखने लायक थी जो लकी से छुपी ना रही

लकी: लगता है भाई आज तू कोई किला फ़तह करके आया है

राज : (मुस्कुराते हुए) यार ललिता आज सुबह ग्राउंड मे मिली थी उसके पैर मे मोच आ गयी थी इसे लिए उसे घर छोड़ने गया था

लकी: वाह यार तू तो सीधा उसके घर तक पहुँच गया बहुत जल्दी तरक्की करेगा

राज : क्यों तू खुश नही है

लकी: कैसी बात कर दी यार मुझ से भला और कॉन ज़्यादा खुश होगा

राज : चल तैयार होकर नाश्ता करतें हैं वैसे भी देर हो रही है

और राज और लकी दोनो नाश्ता करके तैयार हो गये और कॉलेज के लिए निकल गये राज कॉलेज मे पहुँच कर सीधा क्लास मे चला गया और लकी सीधा लाइब्ररी मे और वहाँ पहुँच कर गुरमीत के पास जाकर बैठ गया

लकी: (धीरे से) और बेब क्या हाल है

गुरमीत: (लकी को देखते हुए) तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो

लकी: मेरी जान जहाँ होंगी बंदा भी तो वही होगा

गुरमीत: देखो लकी सब देख रहे हैं तुम्हें और कोई काम नही है क्लास मे क्यों नही गये

लकी: अपनी जान को यहाँ अकेला छोड़ कैसे जाता और आज का क्या प्रोग्राम हैं

गुरमीत: कॉन सा प्रोग्राम जाओ यहाँ से वरना मारूँगी हां

लकी: तो फिर बता दो ना आज मिलॉगी कि नही

गुरमीत: नही आज पॉज़िबल नही है माँ घर पर ही है अच्छा अब तुम जाओ यहाँ से

लकी: थोड़ी देर तो अपनी दिल की शज़ादी को देख लूँ फिर चला जाता हूँ

गुरमीत: (होंटो पर मुस्कान आ गयी ) अच्छा ठीक है देखना ही है तो सामने वाले टेबल पर जाकर बैठ जाओ

 


लकी मुस्कुराते हुए उठ कर सामने वाले टेबल पर चला गया और गुरमीत को देखने लगा गुरमीत भी सब से नज़रें चुरा कर लकी को देख रही थी दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे समय इतनी जल्दी बीता कि कुछ पता ही नही चला गुरमीत खड़ी हुई और बाहर की तरफ जाने लगी बाहर जाते हुए उसने लकी को इशारे से बुलाया लकी थोड़ी देर बाद लाइब्ररी से बाहर आ गया और तेज़ी से चलता हुआ गुरमीत के पास आया

लकी: हां क्या बात है

गुरमीत: लकी मैं दो दिन के लिए बाहर जा रही हूँ

लकी: कहाँ यार मे आपके बिना कैसे रहूँगा

गुरमीत: सॉरी लकी पर क्या करूँ कॉलेज वालों ने एलेक्षन मे ड्यूटी लगा दी है मुझ आज दोफर को ही गुरदासपूर के लिए निकलना हो गा

लकी: गुरदास पुर अर्रे मेरा घर भी तो वहीं पर है कहो तो साथ मे चलूं

गुरमीत: हमम्म वेरी स्मार्ट पर मुझ काम करने जाना है

लकी: पर आप वहाँ रूको गी कहाँ

गुरमीत: पता नही कुछ ना कुछ तो अरेंज्मेंट किया होगा उन्होने

लकी; आइ हॅव अ प्लान

गुरमीत:अब क्या शरारत दिमाग़ मे आ रही है

लकी: जैसे कि मेने बताया है कि मेरा घर भी वहाँ हैं मेरे मोम आंड डॅड यूएसए घूमने गये हैं घर पर सिर्फ़ दादी और एक नौकरानी है आप वहाँ रुक सकती हैं कोई प्राब्लम नही होगी

गुरमीत: पर अगर तुम्हारे मोम दाद को पता चला तो

लकी : तुम भरोसा रखो कुछ नही होगा वैसे भी दादी अब बहुत बूढ़ी हो गयी है उनको तो आपकी शकल भी नही दिखेगी बस वो नौकरानी है उसका भी कुछ कर लूँगा आप चिंता ना करो

गुरमीत: ठीक है तुम सच मे बड़े वो हो

लकी: क्या वो

गुरमीत : तुम नही समझो गे (और गुरमीत हँसने लगी)

लकी: तो अपना फाइनल डिसीजन बताओ

गुरमीत: ओके ओके बाबा तुम मुझे 2 बजे बस स्टॉप पर मिलो वहीं से निकलते हैं

लकी: ओके 2 बजे मिलते हैं

जैसे ही कॉलेज ख़तम हुआ लकी और राज फ्लॅट मे पहुँच गये

लकी: यार आज मैं घर जा रहा हूँ दो दिन की छूटी ले ली है

राज : क्या पर अचानक कैसे कोई प्राब्लम है

लकी: अर्रे नही-2 यार वो मोम आंड डॅड यूएसए गये है घूमने और दादी घर पर अकेली हैं इसीलिए जा रहा हूँ

राज : चल ठीक है अगर कोई प्राब्लम है तो बता दे

लकी: यार और कोई बात नही है

राज : अच्छा ठीक है

और लकी अपना बॅग पॅक करने लगा बॅग पॅक करने के बाद

राज :चल तुझे बस स्टॉप तक छोड़ देता हूँ

लकी: नही -2 यार मे चला जाउन्गा

राज : यार अब बस स्टॅंड तक ही जा रहा हूँ वैसे भी मुझ कुछ समान खरीदना हैं

लकी मन मे सोचने लगा अगर इसने वहाँ गुरमीत को देख लिया तो कहीं इसे शक ना हो जाए पर लकी अब कर भी कुछ नही सकता था लकी और राज कुछ ही देर मे बस स्टॅंड के लिए निकल पड़े पर लकी ने कार को बस स्टॅंड के बाहर रोड पर रुकवा दिया

लकी: बस ठीक है तू अब जा मे चला जाउन्गा

राज :अच्छा ठीक है

जैसे ही राज ने कार वापिस मोडी लकी जल्दी से बस स्टॅंड के अंदर आ गया और गुरमीत की बताए हुई जगह पर पहुँच गया पर गुरमीत वहाँ नही थी लकी वहीं खड़ा होकर गुरमीत का इंतजार करने लगा थोड़ी ही देर मे गुरमीत भी वहाँ पहुँच गयी लकी के होंटो पर मुस्कान आ गयी

 
लकी: कहाँ रह गयी थी मैं सोच रहा था कहीं अकेली तो नही चली गयी

गुरमीत: नही बस वो घर पर ही देर हो गयी चलो अब चलते हैं

गुरमीत और लकी दोनो बस मे बैठ गये गुरमीत लकी से एक दम सट कर बैठी थी लकी का हाथ गुरमीत की जाँघो पर आ गया गुरमीत ने लकी के हाथ को पकड़ कर हटा दिया

गुरमीत: क्या कर रहे हो कोई देख लेगा

लकी: अब यहाँ हमे कॉन जानता हैं बेफिकर हो जाओ और आज के इस सफ़र को यादगार बना लो

गुरमीत ने लकी के कंधे पर अपना सर रख दिया दोनो हाथ मे हाथ डाले बैठे थी बस चल पड़ी और करीब 3 घंटे के सफ़र के बाद दोनो गुरदास पुर पहुँच गये

लकी: (दोनो बस से उतर गये थे) तो अब कहाँ चलना है

गुरमीत: मुझ रिपोर्टिंग तो कल ही देनी है तो आज सीधा तुम्हारे घर चलते हैं

लकी: चलो ठीक है घर ही चलते हैं

दोनो ऑटो मे बैठ कर घर की तरफ निकल लिए 15-20 मिनट के सफ़र के बाद लकी का घर आ गया दोनो ऑटो से उतरे और लकी ने ऑटो वाले को पैसे दिए और समान उठा कर गेट के पास आकर डोरबेल बजाई थोड़ी देर बाद एक औरत ने गेट खोला जो लकी को देखते ही बोली

शांति: अर्रे लकी बाबा आप आइए अंदर आइए

गुरमीत और लकी दोनो अंदर आ गये

लकी: दादी कहाँ है

शांति: अपने रूम मे हैं सोई हुई है मैं अभी उनको जगाती हूँ

शांति ने लकी की दादी के रूम मे जाकर दादी को उठा कर लकी के आने की खबर दी लकी की दादी लकी के आने की खबर सुन कर बहुत खुश हुई और बाहर हाल मे आ गयी

दादी: (हाल मे आते हुए) अरे मेरा बच्चा लकी कैसा है (लकी ने अपनी दादी के पैर छुए और दादी ने लकी को गले से लगा लिया)

लकी: मे ठीक हूँ दादी आप कैसे हो

दादी: मे भी ठीक हूँ बेटा तू बता तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है

लकी: बहुत बढ़िया चल रही है दादी. दादी ये मेरी कलाज मे प्रोफेसर हैं मुझ पढ़ाती हैं इनकी यहाँ एलेक्षन्स मे ड्यूटी लगी है इन्हे यहाँ दो दिन का काम है इसे लिए मे इन्हे साथ ले आया ये दो दिन यहीं रहेंगी

दादी: (अपनी आँखों पर लगे मोटे चश्मे को ठीक करके गुरमीत की तरफ देखा कर)कोई बात नही पुतर दो दिन क्या चाहे चार दिन रहे तुम्हारी टीचर हैं

गुरमीत ने आगे बढ़ कर दादी के पैर छुए और दादी ने उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया

दादी: जुग जुग जिओ बेटा देख कितनी पढ़ी लिखी लड़की है पर फिर भी कितने संस्कार हैं इसमे नही तो आज कल की लड़कियाँ हाई हेलो मुझे तो इनका मतलब भी समझ मे नही आता बेटा क्या नाम है तुम्हारा

गुरमीत: जी मेरा नाम गुरमीत है

दादी: सुन लकी जा अपनी मेडम को ऊपेर का रूम दिखा दे और उनका बॅग भी रख आ और हां फ्रेश होकर नीचे आ जाओ मे शांति से कहकर चाइ और कुछ खाने के लिए बनाने के लिए कहती हूँ

लकी: जी दादी (और लकी गुरमीत की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा गुरमीत लकी की मुस्कान के पीछे छुपी शरारत को समझ कर शरमा गयी)

लकी और गुरमीत ऊपेर आ गये लकी एक रूम मे डोर खोल कर अंदर आ गया और गुरमीत भी अंदर आ गयी लकी ने गुरमीत के बॅग्स को रखा गुरमीत रूम देख रही थी उसका ध्यान लकी पर नही था लकी ने पीछे से जाकर गुरमीत को बाहों मे भर लिया

गुरमीत: क्या कर रहे हो लकी कोई आ जाएगा

लकी: अब यहाँ कॉन आएगा

गुरमीत: (मुस्कुरा कर अपना एक हाथ पीछे लेजा कर लकी के गाल पर रखते हुए) तुम्हारी दादी और कॉन

लकी; नही आएँगी वो सीडीया नही चढ़ पाती उनको घुटनो मे तकलीफ़ रहती है

गुरमीत: अच्छा तो अब तुम मुझसे इस रूम का रेंट लोगे

लकी: हां जो भी आप प्यार से दे दें

गुरमीत: (लकी की तरफ पलट कर) लो ले लो जो चाहे गुरमीत तो उसी दिन से तुम्हारी हो गयी जिस दिन तुमने मुझे पूरी औरत होने का अहसास दिलाया और बनाया

लकी ने गुरमीत को अपनी बाहों मे ले लिया और गुरमीत के चुतड़ों पर हाथ रख दिए और टाइट सलवार उसके चुतड़ों पर एक दम कसी हुई थी हाथ लगाने से उसकी पैंटी लाइन का सॉफ-2 अहसास हो रहा था गुरमीत लकी की बाहों मे कसमसाने लगी लकी हाथों से गुरमीत के चुतड़ों को मसल रहा था लकी अपने होंटो को गुरमीत के होंटो के तरफ बढ़ाने लगा गुरमीत के गाल एक दम लाल हो चुके थे गुरमीत ने अपनी आँखें बंद कर ली और लकी ने गुरमीत के होंटो को अपने होंटो मे ले लिया गुरमीत अपने होंटो को लकी से चुस्वा कर मस्त होने लगी लकी का लंड पेंट मे तन कर कुलाँचे भरने लगा और गुरमीत की नाभि के नीचे रगड़ खाने लगा गुरमीत के हाथ लकी की पीठ को सहला रहे थे जब लकी ने गुरमीत के होंटो को अलग किया

गुरमीत: तुम्हारा वो क्या हमेशा ही खड़ा रहता हैं

लकी: मुस्कुराते हुए वो क्या

गुरमीत: (शरमाते हुए) तुम्हारा हथियार

लकी: कॉन सा हथियार नाम लेकर बोलो ना

गुरमीत: ( लकी की छाती पर मुक्का मारते हुए) धत मुझे शरम आती है

लकी: प्लीज़ जान एक बार मेरी खातिर

गुरमीत: अगर मैं बोल दूं तो क्या हो जाएगा

लकी: मुझ अच्छा लगेगा

गुरमीत: (शरमाते हुए) तुम्हारा लौडा (लकी ने गुरमीत के दोनो चुतड़ों को मसल दिया ) ओह्ह लकी क्या कर रहे हो

लकी: तुम्हारी गान्ड को मसल रहा हूँ

गुरमीत: छि कैसे बातें कर रहे हो

लकी: (मुस्कुराते हुए) अच्छा अब फ्रेश होकर नीचे आ जाओ

और लकी रूम से निकल कर अपने रूम मे आ गया और फ्रेश होने बाथरूम मे घुस गया लकी कपड़े चेंज करके जैसे ही गुरमीत के रूम मे पहुँचा तो गुरमीत वहाँ नही थी लकी नीचे आ गया गुरमीत दादी के साथ बैठ कर चाइ पी रही थी और साथ मे बातें कर रही थी लकी को देख गुरमीत के होंटो पर मुस्कान आ गयी

 
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तीनो चाइ पीने लगे और आपस मे बातें कर रहे थे

दादी: अर्रे ओ शांति

शांति: जी आई मा जी (शांति डाइनिंग टेबल के पास आकर दादी से पूछती है)

दादी: शांति ऐसे कर तू रात का खाना भी अभी बना दे और फिर घर चली जाना तू भी दो दिन से अपने घर नही गयी है

शांति: ठीक है माँ जी

और शांति किचन मे जाकर रात के खाने की तैयारी करने लगी चाइ पीकर गुरमीत और लकी अपने -2 रूम मे चले गये गरमी और सफ़र की थकान के कारण उनको काफ़ी थकावट हो गयी थी दोनो थोड़ी देर के लिए सो गये

रात के 9 बजे लकी की आँख खुली उसने घड़ी मे टाइम देखा और जल्दी से बेड से उतर कर नीचे हाल मे आ गया नीचे एक दम सन्नाटा पसरा हुआ था लकी सीधा दादी के रूम मे गया दादी बेड पर लेटी हुई थी

दादी: (लकी को देखते हुए) उठ गया बेटा

लकी: जी दादी आप ने खाना खाया कि नही

दादी: मेने तो खा लिया तुझे तो पता है मुझसे सीडीया नही चढ़ि जाती इसीलिए मे तुम्हें उठाने नही आई मेने गेट लॉक कर दिया अब तू अपना और गुरमीत का खाना ऊपेर ही लेजा

लकी: और शांति कहाँ है

दादी: तेरे सामने तो ही कहा था वो अपने घर गयी हैं दो दिन से नही गयी थी

लकी: ठीक है दादी आप सो जाओ मे खाना खुद ही ले लेता हूँ

और लकी ने किचन मे जाकर अपने और गुरमीत के लिए खाना लिया और ऊपेर आ गया ऊपेर आकर उसने गुरमीत के रूम के डोर को नॉक किया पर कोई जवाब नही आया लकी ने डोर को धकेला तो डोर खुल गया लकी अंदर आ गया गुरमीत बेड पर लेटी हुई थी शायद अभी भी नही जागी थी गुरमीत ने ब्लू कलर की शॉर्ट नाइटी पहनी हुई थी जो उसकी जाँघो को भी छुपा नही पा रही थी लकी ने अंदर से डोर को लॉक किया और खाने की प्लेट को टेबल पर रख दिया और गुरमीत के पास बेड पर जाकर बैठ गया उसकी नज़र गुरमीत के हसीन चहरे से हट नही रही थी लकी गुरमीत के ऊपेर झुक गया और उसको बालों को उसके फेस पर से हटा कर अपने हाथ को गुरमीत के गाल पर रख दिया गुरमीत की नींद टूटी उसने अपनी आँखों को खोला और सामने लकी के चहरे को देख कर मुस्कुराने लगी गुरमीत ने बड़ी अदा से अंगड़ाई ली और लकी के गले मे बाहें डाल दी लकी ने झुक कर उसके होंटो को अपने होंटो मे ले लिया गुरमीत भी अपने होंटो को ढीला छोड़ कर लकी से अपने होंटो को चुसवाने लगी 2 मिनट किस करने के बाद लकी ने गुरमीत को उठा कर बैठा दिया और खाने की प्लेट को बेड पर ले आया गुरमीत लकी को देख कर मुस्कुराए जा रही थी

लकी: क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो

गुरमीत; लकी क्या तुम शादी के बाद भी मेरा ऐसे ही ख़याल रखोगे

लकी: हां क्यूँ नही बस तुम एक बार मेरी दुल्हन बन कर इस घर मे आ जाओ चलो अब खाना खा लो

गुरमीत: नही मुझ भूख नही है

लकी: भूख तो मुझे भी नही पर थोड़ा सा खा लो

दोनो खाने लगे खाने के बाद लकी झूठे बर्तनो को नीचे किचन मे रख कर वापिस आ गया गुरमीत रूम मे एक खिड़की के पास खड़ी हो कर बाहर देख रही थी लकी ने उसे पीछे से आकर बाहों मे भर लिया गुरमीत ने भी लकी के हाथों के ऊपेर अपने हाथ रख दिए

गुरमीत: लकी जब से तुम मेरी जिंदगी मे आए हो मेरी दुनिया रंगीन हो गयी है पहले तो मेरी जिंदगी बेजान सी थी

लकी: (लकी ने खिड़की को बंद किया और गुरमीत को अपनी बाहों मे उठा लिया ) तुम आगे देखते जाओ मैं तुम्हारी जिंदगी मे दुनिया के सारे रंग भर दूँगा (और लकी गुरमीत को अपने बाहों मे उठा कर बेड पर लेटा दिया)

गुरमीत के दिल की धड़कन बढ़ने लगी लकी बेड के पास खड़ा था उसने अपनी शर्ट के बटन खोलने चालू कर दिए गुरमीत लकी को देख कर शरमा रही थी लकी ने एक बाद एक सारे कपड़े उतार दिए अब वो सिर्फ़ अंडरवेर मे था जो आगे से उभरा हुआ था जैसे ही गुरमीत के नज़र लकी के उभरे अंडरवेर पर गई उसके बदन मे सरसराहट होने लगी लकी ने अपना अंडरवेर भी उतार दिया गुरमीत की आँखें लकी के फन्फनाते लंड पर ठहर गयी एक पल देखने के बाद गुरमीत ने शरमा कर अपनी आँखें बंद कर ली लकी बेड पर चढ़ कर गुरमीत की तरफ करवट के बल लेट गया और गुरमीत को अपनी तरफ खींच कर उसे अपने से चिपका लिया और गुरमीत के होंठो पर अपने होंठो को रख दिया गुरमीत मस्त होने लगी लकी ने गुरमीत को अपने ऊपेर खींच लिया अब लकी गुरमीत के नीचे लेटा हुआ था गुरमीत की टाँगें लकी की जाँघो के दोनो तरफ थी लकी ने गुरमीत के होंठो को चूस्ते हुए उसकी शॉर्ट नाइटी को उसकी कमर तक चढ़ा दिया और उसकी पैंटी मे हाथ डाल कर उसके चुतड़ों को पकड़ कर सहलाने लगा गुरमीत के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी उसका पूरा बदन काँपने लगा चूत के फाँकें और छेद फुदकने लगा गुरमीत लकी के छाती से एक दम चिपक गयी लकी ने गुरमीत के दोनो चुतड़ों को पकड़ कर फैला दिया

गुरमीत: (अपने होंठो को लकी के होंठो से अलग करती हुई) ओह लकी क्या कर रहे हो मुझे यूँ शर्मिंदा तो ना करो

लकी ने अपने एक हाथ के उंगली को गुरमीत की गान्ड के छेद पर लगा दिया और रगड़ने लगा जैसे -2 लकी की उंगली गुरमीत की गान्ड के छेड़ पर रगड़ खाती गुरमीत के कमर उसी तरह झटके खाने लगती

गुरमीत: अहह ओह लकी नही आ अहह अहह ओह नहियीई

लकी ने अपने दोनो हाथों को गुरमीत की पैंटी से निकाला और गुरमीत की नाइटी को पकड़ कर ऊपेर करने लगा गुरमीत इस कदर चुदास से भर गयी थी उसने अपनी नाइटी को निकाल कर फर्श पर फेंक दिया

गुरमीत: ओह लकी अब बर्दास्त नही होता (और गुरमीत ने अपने ब्रा के हुक्स को खोल कर ब्रा उतार दी गुरमीत की 38 साइज़ की गोरे रंग की चुचियाँ उछल कर बाहर आ गयी लकी ने उसे अपने ऊपेर खींचा और उसे अपने ऊपेर लिए हुए करवट बदल कर खुद गुरमीत के ऊपेर आ गया )

लकी: बर्दास्त तो मुझसे भी नही हो रहा जान

और लकी गुरमीत को चुचि को मुँह मे ले लिया गुरमीत के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी उसकी चुचियों के निपल एक दम तन चुके थे लकी पूरे ज़ोर से गुरमीत की चुचियों को चूस रहा था गुरमीत की चूत से पानी आने लगा लकी का तना हुआ लंड पैंटी के ऊपेर से गुरमीत की चूत की फांकों पर रगड़ खा रहा था गुरमीत ने लकी को अपनी बाहों मे कसा हुआ था

गुरमीत: लकी ओह्ह्ह्ह हन्ंनणणन् मेरे निपल्स को ऐसे ही चूस्ते रहो ओह बड़ा मज़ा आ रहा है ओह लकी और ज़ोर से चूसो अहह ये सब तुम्हारा ही है लकी अहह

गुरमीत अपने दोनो हाथों को नीचे ले जाकर अपनी पैंटी को उतारने लगी पर वो पैंटी को सिर्फ़ अपने जाँघो तक ही सरका पे क्यों कि लकी उसके ऊपेर लेटा हुआ था लकी ने गुरमीत की चुचि को मुँह से निकाल कर दूसरी चुचि को मुँह मे ले लिया और चूसने लगा गुरमीत ने अपने एक हाथ से लकी लंड को पकड़ और अपनी चूत पर रगड़ने लगी

गुरमीत: अहह ओह लकी जल्दी घुसा ना ओह मुझ रहा नही जा रहा जल्दी घुसाओ अपना लौडा मेरी फुद्दि मे अहह

लकी सीधा ने सीधा होकर जाँघो मे अटकी पैंटी को निकाल दिया और अपने फन्फनाते लंड के सुपाडे को गुरमीत की चूत के छेद पर टिका दिया

लकी: घुसाऊं

गुरमीत ने अपनी आँखें बंद कर ली और अपनी होंठो को अपने दाँतों से काटते हुए हां मे सर हिला दिया लकी गुरमीत की जाँघो को पकड़ कर एक ज़ोर दार झटका मारा लंड गुरमीत के नाज़ुक छूट के दीवारों को फैलता हुआ अंदर घुस्स गया गुरमीत के मुँह से घुटि हुई चीख निकल गयी गुरमीत ने गहरी साँसें लेते हुए अपनी आँखों को खोला और लकी की तरफ देखा

गुरमीत: तुम्हें मुझ पर ज़रा भी तरस नही आता

लकी: इसमे मेरा क्या कसूर है तुम्हारी चूत को देख मेरा लौडा बेकाबू हो जाता है

और लकी गुरमीत के ऊपेर झुक गया और होंठो को चूसने लगा गुरमीत ने अपने बाहों को लकी के गले मे डाल लिया वो लकी के बालों और पीठ को सहला रही थी लकी नीचे धीरे-2 अपनी कमर हिलाने लगा लंड चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगा गुरमीत अपने होंठो को फैला कर लकी से चुस्वा रही थी लकी बारी -2 गुरमीत के दोनो होंठो को अपने होंठो मन लेकर चूस रहा था गुरमीत अब एक दम गरम हो चुकी थी और उसने अपनी टाँगों को फैला कर ऊपेर उठा कर लकी की कमर पर रख लिया लंड जड तक अंदर जाने लगा और गुरमीत की बच्चेदानी पर चूत करने लगा

 
गुरमीत: (जैसे ही लकी ने अपने होंठो को हटाया ) लकी में बता नही सकती मुझ कितना अच्छा लग रहा है दिल चाहता है कि तुम हमेशा मेरे होंठो को यूँ ही चूस्ते रहो जब तुम मेरे होंठो को चूसना बंद कर देते हो तो मेरे होंठो मे सरसराहट होने लगती मन करता है एक बार फिर तुम इन्हे चूसो ओह्ह लकी तुमने मुझे क्या बना दिया है लकी मेरे होंठो के प्यास क्यों नही बुझती इन्हे और चूसो इतना कि ये एक दम बेजान पड़ जाए

लकी ने एक बार फिर से गुरमीत के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया और पूरे जोश और मस्ती से चूसने लगा गुरमीत अपनी कमर को नीचे से ऊपेर की तरह उचाकने लगी गुरमीत के हाथ तेज़ी से लकी की पीठ को सहला रहे थे दोनो तरफ आग बराबर लगी हुई थी लकी अब बीच -2 मे गुरमीत के होंठो को काटने लगा जिसे गुरमीत को दर्द का अहसास होने लगा और उसके मुँह से सीईईईईईई की आवाज़ निकल गयी

लकी: क्या हुआ ज़्यादा ज़ोर से काट गया

गुरमीत ने लकी की आँखों मे देखा गुरमीत की आँखों मे वासना और कामुकता की लहरे हिलोरे ले रही थी मस्ती का नशा उसकी आँखों मे भरा हुआ था गुरमीत ने ना मे सर को हिला दिया और लकी के फेस को पकड़ कर अपने होंठो को फिर से लकी के होंठो के पास ले जाने लगी

गुरमीत: लकी मैने कहा ना ये गुरमीत पूरी की पूरी तुम्हारी है

और दोनो पागलों की तरहा एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे लकी एक हाथ ऊपेर ले जाकर गुरमीत की चुचियों को मसलने लगा अब लकी के अपने धक्कों की रफ़्तार तेज होने लगी थी लंड फॅक-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा गुरमीत भी लकी का लंड अपनी गान्ड उछाल-2 कर ले रही थी दोनो की जाँघो के आपस मे टकरा कर हॅप-2 की आवाज़ कर रही थी

गुरमीत: अहह ओह लकी अहह अहह उंह अहह बहुत्त्त्त मजा एयाया रहा हाईईईई अहह अहह सीईईईईईईईईईई उंगगगगगगगगग अहह मे अब एकक पलल्ल्ल्ल क्ीई लईईए तुम्हारे बिना नही रह पाउन्गी ओह लकी और जोर्र्र्ररर सीईई चोदो ओह्ह्ह लकी मेरी फुदीई मैिईन्न्न्न् पाणिीई आनीई वाला है ओह्ह्ह्ह हाई ओह मररर देताआआ अहह

और गुरमीत की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया लकी ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी गुरमीत का बदन एक दम से ऐंठ गया था लकी भी झड़ने के बिकुल करीब पहुँच गया था और उसके लंड ने वीर्य की बोछार करके गुरमीत की चूत की दीवारों को भीगोना चालू कर दिया वीर्य की हर पिचकारी के साथ गुरमीत की चूत की दीवारें सिकुड और फेल रही थी लकी गुरमीत के ऊपेर निढाल हो कर गिर गया गुरमीत ने लकी के बालों को सहलाते हुए उसके होंठो को चूमना चालू कर दिया गुरमीत के फेस एक्सप्रेशन उसकी संतुष्टि को बयान कर रही थी.. दोनो एक दम नंगे बेड पर एक दूसरे से लिपटे लेटे रहे…

लकी गुरमीत के ऊपेर निढाल हो कर गिर गया गुरमीत ने लकी के बालों को सहलाते हुए उसके होंठो को चूमना चालू कर दिया गुरमीत के फेस एक्सप्रेशन उसकी संतुष्टि को बयान कर रहे थे.. दोनो एक दम नंगे बेड पर एक दूसरे से लिपटे लेटे रहे…

गुरमीत: लकी एक बात बताओ मैं क्यों अब एक पल के लिए भी तुम्हारे बिना नही रह पाती हर वक़्त तुम्हें ही याद करती हूँ

लकी: (हंसते हुए) मुझे या मेरे लंड को

गुरमीत: (लकी की चेस्ट पर हाथ मारते हुए) तुम भी ना

लकी: ओके ओके पर मुझे नही पता मैं भी तो दिन रात तुम्हारे ही ख़यालों मे खोाया रहता हूँ

गुरमीत: झूठ

लकी: नही सच मे सारा टाइम तुम्हारे बारे मे सोचता रहता हूँ

गुरमीत; ओह्ह लकी आइ रीयली लव यू

और लकी गुरमीत के होंठो को अपने होंठो मे ले लेता है और चूसने लगता है लकी ने अपना एक हाथ गुरमीत की छूट के क्लिट पर लगा कर उसे अपने अंगूठे से मसलना चालू कर दिया गुरमीत फिर से मस्त होने लगी

गुरमीत: ऑश लकी वहाँ नही नही मुझ कुछ होता है

लकी: क्या होता है

गुरमीत: आह मुझ नही पता लकी ओह्ह ओह्ह्ह्ह नही लकी बस करो आहह

लकी ने थोड़ा सा नीचे होकर गुरमीत के एक निपल को मुँह मे ले लिया और चूसने लगा गुरमीत मस्ती मे आकर अपने हाथों के नाख़ून से लकी की पीठ को कुरदेने लगी लकी को अपनी पीठ पर कुछ जलन सी महसूस हुई पर दोनो वासना के समुंदर मे इस कदर डूबे हुए थे उन्हे किसी बात की परवाह नही थी लकी बारी-2 दोनो निपल्स को चूस रहा था गुरमीत के निपल्स एक दम तन चुके थे…

गुरमीत: अहह ह अहह लकईयीयैआइ वहाँ से हाथ हटा लू ओह्ह्ह्ह नही लकी आह अह्ह्ह्ह हाए रब्बा ऑश ओह

गुरमीत की चूत मे पानी आने लगा उसकी चूत की खुजली एक बार फिर से बढ़ चुकी थी लकी गुरमीत की चुचियों को नीचे की तरफ होने लगा वो गुरमीत के पेट को चूमता हुआ नीचे आने लगा और अपनी जीभ से गुरमीत की गहरी नाभि को चाटने लगा गुरमीत एक दम मचल उठी उसकी सिसकारियाँ पूरे कमरे मे गूँज रही थी…थोड़ी देर गुरमीत की नाभि को चूमने के बाद लकी और नीचे की तरफ जाने लगा…गुरमीत का दिल आज से पहले इतनी तेज़ी से कभी नही धड़का था….लकी ने गुरमीत की जाँघो को फैला कर घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठा दिया गुरमीत की चूत का छेद लकी की आँखों समें खुल सा गया…जो गुरमीत के काम रस से एक दम भीगा हुआ था…लकी ने अपने हाथों के अंगूठों से गुरमीत की चूत की फांकों को फैला दिया….

गुरमीत: अह्ह्ह्ह अहह लकी क्या कर रहे हो ऐसे ना देखो मुझ शरम आती है…

और गुरमीत अपने दोनो हाथों से अपनी चूत को छुपाने की कॉसिश करने लगी..पर लकी ने गुरमीत के हाथों को हटा दिया …गुरमीत की चूत का छेद लकी की आँखों के सामने सिकुड और फेल रहा था…लकी ने झुक कर अपने होंठो को गुरमीत की चूत की फांकों के बीच मे लगा दिया जैसे ही लकी के होन्ट गुरमीत की चूत के छेद पर लगे तो गुरमीत एक दम से सिहर उठी उसका बदन ऐंठ गया…और उसकी गान्ड गद्दे से 4 इंच ऊपेर हवा मे उठ गयी उसने अपने हाथों से अपने बालों को नोचना शुरू कर दिया… गुरमीत अपने आप काबू ना रखी सकी और ज़ोर ज़ोर से सिसकारिया उसके मुँह से निकलने लगी

गुरमीत: ओह्ह्ह लकी नही नही आह आह अहह ईए लड़काअ आह मुझीए पागल्ल्ल कार्क्ीई अहह अहह अहह नहियीई ओह ओह लकी नही ओह्ह्ह्ह नहिी ओह ओह उंघ उंघह

गुरमीत ने अपने होंठो को अपने दाँतों मे भींच लिया उसकी कमर हवा मे उठी हुई झटके खा रही थी जिससे उसकी चूत का छेद लकी के होंठो पर रगड़ खाने लगा गुरमीत के चूत से पानी आने लगा…पर लकी ने अपने होंठो को वहाँ से नही हटाया …

और थोड़ी देर बाद उसने गुरमीत की चूत की क्लिट को अपने होंठो मे ले लिया और चूसने लगा…गुरमीत से बर्दाश्त करना मुस्किल हो रहा था वो बेड पर छटपटा रही थी उसकी कमर झटके खा रही थी…पर लकी किसी बात पर ध्यान दिए बगैर गुरमीत की चूत की क्लिट को चाट रहा था….गुरमीत इस दौरान एक बार झड चुकी थी…और दुबारा गरम हो चुकी थी …. लकी ने अपने होंठो को उसकी चूत से हटाया और उसकी जाँघो को घुटनो से पकड़ कर अपने लंड के सुपाडे को उसकी चूत के छेद पर टिका दिया… और झुक कर उसके निपल को होंठो मे ले लिया और चूसने लगा…गुरमीत ने अपने होंठो को दाँतों मे भींचे अपनी चूत को ऊपेर की तरफ उछाला लंड चूत के दीवारों को फैलाता हुआ एक ही बार मे अंदर घुस गया…और सीधा गुरमीत की बच्चे दानी के मुँह से जा टकराया गुरमीत के मुँह से आहह निकल गयी वो आह जो किसी प्यासी की प्यास बुझाने के बाद उसके मुँह से निकलती है…गुरमीत ने अपनी बाहें लकी की पीठ पर कस ली…लकी बिना हिले गुरमीत के दोनो निपल्स को बारी-2 चूस रहा था…बाकी काम गुरमीत खुद नीचे लेटे कर रही थी गुरमीत अपनी चूत को ऊपेर की तरफ उछल कर लकी के लंड को अपने चूत मे अंदर बाहर कर रही थी………..

 


गुरमीत: ओह लकी अहह अहह करोनन्न नाआआआ ओह ओह अहह सीईईईईईईईईईई उहह सीईईईईई सीईईईईईईई अहह अहह ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करो ना जल्दी करो

लकी से भी गुरमीत की टाइट चूत की गरमी बर्दास्त नही हुई और वो भी गुरमीत की चूत मे लंड को अंदर बाहर करने लगा पूरे कमरे मे फॅक फॅक और गुरमीत की सिसकारियों ने मोहोल को गरम बना दिया था दोनो अपनी तरफ से अपनी कमर हिला रहे थी लंड अंदर बाहर हो रहा था लकी के लंड के सुपाडे का घर्सन गुरमीत अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके दूसरी बार झड़ने के करीब थी और अपनी चूत को और तेज़ी से लकी के लंड पर पटकने लगी……

गुरमीत: अहह अहह ह अहह लुक्कयययी मेरीए फुडीईई अहह पानी छोड़ने वाली है अहह अहह

लकी: मेरा भी निकलने वाला है अहह

और दोनो कुछ ही धक्कों के बाद झड़ने लगी लकी का वीर्य गुरमीत को अपनी बच्चे दानी मे भरता हुआ महसूस हो रहा था …कुछ देर बाद दोनो शांत पड़ गये

जैसे ही दोनो की साँसे दुरस्त हुई.....दोनो फिर से एक दूसरे को किस करने लगी...

गुरमीत (शरमाते हुए) लकी जिस तरह तुम मुझ रोज चोदने लगे हो...मुझ लगता है...मे जल्दी ही पेट से हो जाउन्गी...

लकी: तो क्या हुआ..जान हम जल्द ही शादी कर लेंगे....मे तुम्हारे बिना अब एक पल भी नही रह सकता

और लकी ने फिर से गुरमीत के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया....लकी का लंड सिकुड कर गुरमीत की चूत से बाहर आ चुका था...दोनो एक दूसरे ऐसे लिपटे हुए थे...जैसे नाग नागिन का जोड़ा हो....

लकी पलट कर गुरमीत की बगल मे आकर लेट गया....गुरमीत ने लकी की तरफ करवट बदल ली...और लकी के हाथ को पकड़ कर अपने तने हुए निपल पर रख दिया...लकी अपनी आँखें बंद किए लेटा हुआ था....

गुरमीत: क्या हुआ नींद आ रही है ?

लकी: हां अब मुझ सोने दो....

गुरमीत: क्या इतनी जल्दी सोना है....

लकी: ओरर क्या करना है तुम्हें.......सारी रात सेक्स के मूड मे हो...

लकी ने अपनी आँखें खोली और, गुरमीत की तरफ देखा.... गुरमीत ने शरमाते हुए हां मे सर हिला दिया...लकी ने गुरमीत को अपनी तरफ खींच कर अपने से सटा लिया...गुरमीत ने अपनी एक टाँग को उठा कर लकी की जाँघ पर रख दिया...

गुरमीत: (शरमाते हुए) नही मे तो वैसे ही मज़ाक कर रही थी...अच्छा अब अच्छे बच्चे की तरह सो जाओ

दोनो एक दूसरे के बाहों मे लपेटे हुए...कब सो गये...दोनो मे से किसी को पता नही चला....

दूसरी तरफ अगले दिन राज सुबह उठ चुका था...आज वो जॉगिंग के लिए नही गया था....क्योंकि उसको नाश्ता आज खुद ही बनाना था....जब राज तैयार हो कर कॉलेज पहुँचा ,तो उसे कॉलेज के कम्पाउन्ड मे ललिता अपनी किसी फ्रेंड के साथ खड़ी हुई दिखाई दी....जब ललिता की नज़र राज पर पड़ी...तो उसके होंठो पर मुस्कान आ गयी...

ललिता: (अपनी फ़्रेंड से) तू रुक मे ज़रा आती हूँ

ललिता'स फ्रेंड्स: पर अब कहाँ जा रही है...क्लास शुरू होने वाली है....

ललिता: ऐसा कर तू क्लास मे चल मैं आती हूँ

राज भी ललिता को ही देख रहा था...ललिता कॉलेज की केफे की तरफ जाने लगी...ललिता ने राज की तरफ देख,और राज ने ललिता की आँखों मे देखा...कोई इशारा नही हुआ, पर राज ललिता की आँखों की बात को समझ गया, और ललिता के पीछे-2 केफे मे आ गया...राज तेज़ी से चलता हुआ ललिता से पहले केफे मे पहुँच गया...और जाकर एक कोने मे लगे टेबल पर जाकर कुर्सी पर बैठ गया...ललिता के होंठो पर मुस्कान आ गयी...ललिता ने इधर उधर देखा...और राज के पास गयी....

राज : (ललिता को देख कर ऐसे बोला जैसे उसने अभी ललिता को देखा हो) अर्रे ललिता जी आप आइए बैठिए

ललिता शरमाते हुए राज के सामने कुर्सी पर बैठ गयी....

राज : अब आपका पैर कैसा है ललिता जी

ललिता: उम्ह्ह अब ठीक है...आज आप सुबह जॉगिंग करने ग्राउंड मे क्यों नही आए....

राज : क्यों आप मेरा इंतजार कर रही थी....

ललिता एक दम से शरमा गयी....ललिता शरमाते हुए और भी सुंदर लग रही थी...ललिता के गाल शरम के मारे लाल हो चुके थे......

ललिता: नही नही वो बात नही है, ऐसे ही पूछ लिया

राज :मे तो मज़ाक कर रहा था....दरअसल वो लकी है ना..जो मेरे साथ मेरे फ्लॅट मे रहता है...वो कल अपने घर गया है....दो दिन बाद आएगा....इसीलिए सुबह टाइम नही मिल पाया...

ललिता: तो आप यहाँ अकेले रहते हैं

राज : जी हां

धीरे-2 दोनो एक दूसरे के बारे मे बातें करने लगे....ललिता अब राज के घरबार के बारे मे जान चुकी थी...ललिता के पिता भी बहुत ही बड़े ज़मींदार थे.....और ललिता भी अलीगढ़ की रहने वाली थी....बातों बातों मे दोनो को टाइम का पता नही चला...उनकी एक क्लास मिस हो चुकी थी...

अचंक राज ने घड़ी मे टाइम देख.....

राज : ओह्ह यार आज की पहली क्लास मिस हो गयी.....

ललिता: ओह्ह नो यार मेरी फ्रेंड क्या सोच रही हो गी....मे उसे 5 मिनट का बोल के आई थी...और 1 घंटा निकल गया.....

राज : ठीक है अब आप अपनी अगली क्लास आटेड कर लो....वैसे भी आज मेरा मूड नही...मे घर वापिस जा रहा हूँ....

ललिता: (एक शरारती मुस्कान होंठो पर लाते हुए) वैसे दिल तो मेरा भी नही क्लास मे जाने का....

राज : तो चलो कहीं घूमने चलते हैं

ललिता: मेने कब कहा कि मे तुम्हारे साथ घूमने चल रही हूँ...वो तो क्लास मे जाने का मन नही है बस

राज : (एक दम से राज का चेहरा उतर गया) चलो ठीक है बाइ मे घर चलता हूँ (और राज उठ कर जाने लगा....राज को यूँ उदास देख कर ललिता के होंठो पर मुसकन आ गयी)

ललिता: राज एक मिनट

राज : जी

ललिता: क्या आप मुझ घर छोड़ देंगे

राज : जी ठीक है....

और दोनो केफे से बाहर आ गये...राज अपनी कार लाने चला गया....जब राज कार लेकर आया..तो ललिता उसका गेट पर खड़ी इंतजार कर रही थी...ललिता राज की कार की आगी वाली सीट पर बैठ गयी....राज का चेहरा उतरा हुआ था....दोनो ने सारे रास्ते मे कोई बात नही की...ललिता का घर आ गया था...

 
ललिता: (कार से उतरते हुए) थॅंक्स

राज : इट्स ओके ललिता

ललिता: क्या हम 1 बजे मूवी देखने चलें

राज : (ललिता की बात सुन कर राज का दिल ख़ुसी से झूम उठा) जी जैसे आप कहें.... मे आप को 12:30 पर पिक करने आ जाउन्गा....

ललिता: ओके ठीक है....मैं वेट करूँगी.... वैसे यहाँ मत आना...मुझ बाहर रोड से पिक कर लेना..

राज : ठीक है फिर तय रहा....मे 12:30 पर आप को लेने आउन्गा

और ललिता ने एक प्यारी सी स्माइल राज को पास की....राज ने कार मोडी...ललिता अपने घर के अंदर चली गयी....उधर राज तेज़ी से कार ड्राइव करके अपने फ्लॅट पर पहुँच गया था....फ्लॅट के अंदर आते ही वो बाथरूम मे घुस्स गया....और नहाने लगा...राज को कभी किसी काम मे इतनी जल्दी नही रहती थी, राज 11 बजे एक दम तैयार हो चुका था...राज ने टाइम देखा अभी सिर्फ़ 11 बज रहे थे....

राज : (अपने आप से) यार ये साला आज टाइम भी बहुत धीरे कट रहा है...क्या करूँ (राज एक दम तैयार हो कर फ्लॅट मे सोफे पर बैठा टाइम होने का इंतजार कर रहा था....आज जो उसके दिल मे बेसब्री थी...आज से पहले कभी नही हुई थी...)

राज टाइम पास करने के लिए कभी टीवी ऑन कर देखने लग जाता...तो कभी को मॅग्जीन उठा कर पढ़ने लग जाता...उसके लिए वक़्त तो मानो जैसे रुक सा गया था...ये डेढ़ घंटा कैसे बीतेगा....खैर किसी तरह 12 बजे...अब राज और वेट ना कर सका....और फ्लॅट से बाहर आकर कार मे बैठ कर कार स्टार्ट की...

कार स्टार्ट करते ही.,वो ललिता के घर की तरफ चल पड़ा....ललिता का घर उसके फ्लॅट से 15 मिनट की ही दूरी पर था...राज 15 मिनट मे ही ललिता की गली बाहर रोड पर पहुँच गया....

राज : (अपने आप से ) यार ये ललिता अभी तक आई क्यों नही (राज ने अपनी घड़ी मे टाइम देखा टाइम 12:15 हो रहा था..राज के होंठो पर मुस्कान आ गयी) यार लकी सही कहता था...ये इश्क़ ना आदमी को किसी काम का ना नही छोड़ता

राज कार मे बैठ आ ललिता के वेट करने लगा...गुज़रता हुआ एक-2 पल उसके सालों जैसे मालूम हो रहा था...राज अपने हाथ मे लगी घड़ी को बार-2 देख रहा था....

किसी तरह 12:30 बजे...राज की नज़रें रोड से अंदर जा रही, गली पर जम गयी....जब डोर से वो किसी भी आती हुई लड़की को देखता...तो ये सोच कर कि ललिता आ रही है...उसका दिल जोरों से धड़कने लग जाता...पर जब वो लड़की कुछ पास आती...तो राज को उसका फेस ठीक से दिखाई देता...तो राज का चेरा उतर जाता...फिर अचानक उसे ललिता आती हुई दिखाई दी...राज के होंठो पर मुस्कान आ गयी....ललिता ने लाइट पिंक कलर का पटियाला सलवार कमीज़ पहना हुआ था...वो बड़ी ही मस्त चाल से चलती हुई..राज की कार की तरफ आ रही थी....राज कार से बाहर निकल आया....

ललिता: (पास आते हुए) सॉरी वो थोड़ा देर हो गयी....आप कब से वेट कर रहे हैं...ज़्यादा वेट तो नही करना पड़ा

राज एक टक ललिता के फेस को घूरे जा रहा था...ललिता के गाल तेज धूप के कारण एक दम लाल हो कर दिख रहे थे...जैसे किसी ने दूध मे केसर मिला दिया हो...

ललिता: हेलो कहाँ खो गये आप (ललिता अपनी आँखों को नचाती हुई बोली)

राज : नही कुछ नही मे अभी पहुँचा ही था.....

राज ने कार का डोर खोला....ललिता कार मे बैठ गयी...राज तेज़ी से दूसरी तरफ से जाकर कार के अंदर बैठ गया...और कार स्टार्ट कर चलने लगा...

राज का ध्यान बार -2 ललिता की तरफ जा रहा था...जो ललिता देख रही थी...और बार-2 शरमा कर मुस्कुरा रही थी....

ललिता: क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो आप....

राज : जी वो आज आप बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं....

ललिता: (शरमाते हुए) थॅंक्स

राज : ललिता मे आप से एक बात कहना चाहता हूँ.....

ललिता का दिल जोरों से धड़कन लगा....वो राज की तरफ देखने लगी....उसके हाथ पैर जैसे सुन्न से पड़ गये थे...

राज : ललिता जी मे आप को बहुत लाइक करता हूँ.....आइ लव यू ललिता

ललिता के दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था....हालाकी ललिता भी राज को पसंद करती थी...पर उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था, कि राज इतनी जल्दी अपने दिल की बात उसे कह देगा.....ललिता को यूँ अपनी तरफ देखता देख राज थोड़ा सा घबरा गया....

राज :देखें ललिता जी मे आप को लाइक करता हूँ...इसका मतलब ये नही है कि मे भी आप से यहीं उम्मीद रखूं कि आप भी मुझ लाइक करती हो....पर अब मेरे दिल पर मेरा काबू नही रहा...इसीलिए मैने अपने दिल की बात आप को बोल दी...अगर आप मेरी बात अच्छी नही लगी....तो प्लीज़ मुझ अपना दोस्त समझ कर माफ़ कर देना....मेरा इरादा आप के दिल को दुखाने का बिल्कुल नही है.....

ललिता: (एक दम से अपने आप को संभालते हुए) नही -2 ऐसी बात नही है....(और ललिता शरमा गये) मैं भी आप को लाइक करती हूँ....

राज ने ललिता की तरफ देखा....दोनो की नज़रें आपस मे मिली और, राज ने अपना एक हाथ ललिता के हाथ पर रख दिया....ललिता एक दम से शरमा गयी...और उसने अपनी नज़रें झुका ली...

.

राज : ललिता आज मे बहुत खुश हूँ...आज मुझे दुनिया की सबसे कीमती चीज़ मिल गयी है...आज अगर भगवान मेरी जान भी लेले तो गुम नही है....

ललिता: नही ऐसा नही बोलते....अभी तो मुझे तुम्हारे साथ अपनी पूरी जिंदगी गुजारनी है...

राज : ओह्ह ललिता...मे तुमसे बहुत प्यार करता हूँ....वादा करो तुम मेरा साथ कभी नही छोड़ो गी...

ललिता ने शरमाते हुए हां मे गर्दन हिला दी....कुछ ही देर मे दोनो थियेटर मे पहुँच गये....राज ने पहले से मॅनेजर से कह कर पूरा हॉल बुक करवा लिया था...दोनो हाल मे पहुँचे....ललिता जैसे ही हॉल मे पहुँची तो उसका दिल जोरों से धड़कने लगा....हॉल बिल्कुल खाली था....

ललिता राज की तरफ घबराई और हैरानी भरी नज़रों से देखती हुई) ये क्या है...यहाँ तो कोई नही है....

राज : (मुस्कुराते हुए) मेने पूरा हॉल बुक करवा लिया था...

ललिता: पर क्यों

राज : क्योंकि मे चाहता था...जो लम्हें मे तुम्हारे साथ गुज़ारू...वो हमेशा मेरी यादों मे बसें रहें...मे तुम्हारे साथ बिताए जाने वाले हर पल को याद गार बना देना चाहता हूँ....

राज ने ललिता को इशारे से बैठ आने को कहा....ललिता घबराई हुई सी राज के साथ बैठ गयी....थोड़ी देर मे लाइट्स ऑफ हो गयी....और मूवी शुरू हो गयी....राज ललिता के चहरे को देख कर समझ गया था...कि ललिता घबरा गयी है....

राज : ललिता अगर तुम्हें सही नही लग रहा....तो हम कहीं और भी चल सकतें हैं...

ललिता: नही-2 ऐसे कोई बात नही है....बस मुझ इस बात का पता नही था...कि हम दोनो अकेले होंगी.....

राज : ऊह अच्छा...देखो घबराओ नही....मे तुम्हें प्यार करता हूँ....ऐसी कोई बात नही है....

 


दोनो आपस मे बातें करने लगे...दोनो मे से किसी का ध्यान मूवी मे नही था...बातों-2 मे राज ने ललिता के हाथ को पकड़ कर अपने हाथ मे ले लिया...ललिता थोड़ा सा कस्मसाइ....पर फिर अपने आप को संभालते हुए...राज से बातें करने लगी....दोनो बातों ही बातों मे आपस मे इतना घुल मिल गये थे... कि ऐसा लग रहा था...जैसे वो बरसों से एक दूसरे को जानते हों...

राज : ललिता मे एक बात कहूँ....

ललिता: जी हां बोलिए....

राज : मे तुमसे शादी करना चाहता हूँ....

ललिता का दिल ख़ुसी के मारें झूम उठा.....

ललिता: आप सच कह रहे हो....

राज : हां बिल्कुल सच कह रहा हूँ...बल्कि मैं तो कहता हूँ...कि मे आज ही मम्मी पापा से बात कर लूँ....और उनको तुम्हारे घर रिस्ते के लिए भेज दूं...

ललिता: (मुस्कुराते हुए) बहुत जल्दी है आप को शादी करने की....

राज : हां और हो भी क्यों ना....शादी के बाद तुम मेरी जोहो जाओगी....

ललिता: क्यों मैं तो आज से ही आप की हो गयी....

राज : नही वो बात नही....मेरा मतलब वो...

और राज बात को पूरा नही कर पाया...और झेंप गया....राज की बात को ललिता समझ चुकी थी....उसने शरम के मारें अपना सर झुका लिया....

राज : (ललिता के फेस को अपने हाथों मे लेते हुए) ललिता मैं अब एक पल भी तुम्हारे बिना नही रह सकता....अगर तुम मेरी ना हुई...तो मे जी नही पाउन्गा...जी नही पाउन्गा...

राज की आँखों मे अपने लिए इतना प्यार देख कर ललिता का मन पिघल गया....राज ने अपने होंठो को ललिता के होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया..ललिता की साँसे तेज हो चली थी....ललिता के दिल की धड़कन 3 गुना बढ़ चुकी थी...

ललिता: तुम मुझे बीच रास्ते मे छोड़ तो नही दोगे...

राज :नही ललिता कभी नही....

और राज ने ललिता के ठहरथरा रहे होंठो पर अपने होंठो रख दिए....ललिता राज की बाहों मे राज के होंठो को अपने होंठो पर महसूस करके तड़प उठी...और राज की चौड़ी छाती से सट गयी....राज ललिता के रसीले और गुलाबी होंठो को चूसने लगा...ललिता के हाथ राज के सर के पीछे पहुँच गये थे...और ललिता अपने हाथ की उंगलियों से राज के बालों को सहला रही थी...

ललिता राज की बाहों मे कसमसा रही थी...ललिता के दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी...ललिता की जवानी की आग उसे मदहोश किए जा रही थी...राज ने अपने होंठो को ललिता के होंठो से अलग किया...और ललिता की आँखों मे देखने लगा.... ललिता ने अपनी वासना और प्यार से भरी हुई आँखों को खोला...और राज की आँखों मे देखा....उसकी आँखे मानो कह रही हों....ओह्ह राज तुमने मेरे होंठो से अपने होंठो को हटा क्यों दिया....मैं कब से इन होंठो के स्पर्श को अपने होंठो पर पाने के लिए तरस रही हूँ...राज ने फिर से ललिता के होंठो पर अपने होंठो को रख दिया...इसबार ललिता ने भी राज का पूरा साथ दिया...और वो राज से चिपक गयी...ललिता की कसी हुई चुचियाँ राज की चौड़ी छाती मे धँस गयी....राज ललिता के गुलाबी होंठो को आज जी भर के चूस लेना चाहता था...ललिता भी अपने होंठो को थोडा सा खोल कर राज से अपने होंठो को चुस्वा के मस्ती के सागर मे तैर रही थी....ललिता अपना आप खोने लगी...उसे पैंटी थोड़ी सी गीली हो चुकी थी...ललिता ने अपने आप को संभालते हुए...राज के होंठो से अपने होंठो को अलग कर दिया....ललिता की साँसें उतेजना के मारे उखड़ी हुई थी.....

ललिता: बस अब और नही....

राज ने ललिता की बात को मानते हुए...अपना एक हाथ उसके गले से डालकर उसके कंधे पर रख दिया....और ललिता ने राज के कंधे पर सर रख दिया....और पूरी मूवी के दौरान दोनो ऐसे ही बैठे रहे....

दूसरी तरफ रात के 8 बजे गुरमीत और लकी दोनो जब लकी के घर पहुँचे तो...उनकी नौकरानी खाना बना कर जा चुकी थी....लकी की दादी हाल मे सोफे पर बैठी लकी और गुरमीत के आने का इंतजार कर रही थी....लकी को देखते हुए...

दादी: आए गया बेटा....चलो जल्दी से फ्रेश हो जाओ....और खाना खा लो....मैने खाना टेबल पर लगवा दिया है....

लकी: जी दादी आप ने खाना खा लिया

दादी: हां बेटा मैने खाना खा लिया....बस तुम लोगों का ही इंतजार कर रही थी....तुम बैठ कर खाना खाओ...मे बाहर मेन गेट बंद करके आती हूँ...

लकी और गुरमीत दोनो हाथ मुँह धोया और खाना खाने बैठ गये....

लकी: (खाना खाते हुए) और फिर आज रात का क्या प्रोग्राम है

गुरमीत: चुप बदमाश दादी सुन लेंगी....

लकी: अर्रे नही सुनेगी....उन्हें वैसे भी अब थोड़ा उँचा ही सुनता है....जल्दी बताओ ना आज रात को क्या प्रोग्राम हैं....

गुरमीत: मैने तुम्हें रास्ते मे बताया था...ना आज मे बहुत थक गयी हूँ....मेरा पूरा बदन दुख रहा है....

लकी: (शरारती अंदाज़ मे) पूरा बदन.....

गुरमीत: (लकी की बात सुन कर झेंप गयी) हां पूरा बदन....

लकी: फिर तो आज तुम्हार बदन की थकावट मे ही उतार स्कता हूँ...

गुरमीत: (लकी की बातों को सुन कर शरमा गयी) अच्छा जी...चुप-चाप खाना खाओ....बड़े आए मेरी थकावट उतारने वाले.....

लकी: एक बार ऊपेर चलो तो सही.....

दोनो ने कुछ ही देर मे खाना खा लिया....और लकी ने झूठे बर्तन को उठा कर किचन मे रख दिया....गुरमीत ऊपेर जा रही थी....लकी भी तेज़ी से बर्तन को रख कर ऊपेर जाने लगा...पर तब तक गुरमीत रूम मे जा चुकी थी....उसने अंदर से रूम बंद कर लिया...लकी ने डोर नॉक किया....

लकी: ये क्या बात हुई...मे बाहर खड़ा हूँ...डोर खोलो....

गुरमीत: नही आज डोर नही खुलेगा...अपने रूम मे जाकर सो जाओ...मुझ नींद आ रही है...

गुरमीत रूम के अंदर डोर के पास खड़ी मुस्कुरा रही थी....वो तो बस लकी को सताने के मूड मे थी...पर जब थोड़ी देर बाद लकी की कोई आवाज़ नही आई....तो गुरमीत अपने कपड़े चेंज करने लगी...उसका मन कह रहा था...कि लकी ज़रूर वापिस आएगा...आख़िर वो भी तो यही चाहती थी....गुरमीत बेड पर लेट गयी...पर जब काफ़ी देर बाद लकी नही आया...तो वो बेचैन हो उठी...और डोर खोल कर बाहर आ गयी....और लकी के रूम की तरफ चली गये...लकी के रूम का डोर खुला हुआ था...जैसे ही गुरमीत ने अंदर झाँक कर देखा...तो लकी बेड पर लेटा हुआ था...वो सिर्फ़ अंडर वेअर पहने हुए था....

लकी: तो और क्या करता तुमने तो डोर लॉक कर लिया था...अब जाकर सो जाओ....

गुरमीत: सॉरी बाबा..वो तो मे मज़ाक कर रही थी...अच्छा अब चलो आज मे यहीं तुम्हारे साथ सो जाती हूँ....

लकी: नही मुझे नही सोने तुम्हारे साथ...जाओ जाकर सो जाओ....

गुरमीत: (बड़ी ही सेक्सी आवाज़ के साथ) देखो ना लकी मेरा हर अंग दुख रहा है...कुछ करो ना....

लकी: मे कोई डॉक्टर हूँ....मे क्या कर सकता हूँ...जाओ सो जाओ..सुबह तक अपने आप ठीक हो जाएगा....

गुरमीत: पर मेरे दर्द को तुम ही ठीक कर सकतें हो....मे बता नही सकती मुझ कहाँ दर्द हो रहा है....

लकी कुछ नही बोला और वैसे ही रूठने का नाटक करते हुए लेटा रहा...

गुरमीत: अच्छा जी अब मुझ से रूठो गे भी...पर मुझ पता है...तुम्हें कैसे मनाना है....

लकी: अच्छा कॉसिश करके देख लो...

गुरमीत ने अपनी मदहोशी से भरी नज़रों से लकी को देखा....और अपने हाथ को लकी के अंडरवेर के ऊपेर रख दिया...लकी लेटा हुआ गुरमीत को देख रहा था...

लकी लंड अभी ठीक से आकड़ा नही था...पर गुरमीत के हाथ पढ़ते ही...लकी के लंड मे तनाव आने लगा....

गुरमीत ने आने सर को लकी के पेट पर रख दिया...लकी गुरमीत के गोरे नरम गालों को अपने पेट महसूस करके गरम होने लगा...गुरमीत लकी के तने हुए लंड को देखते हुए उसे अपने हाथ से सहला रही थी...लकी का लंड कुछ ही पलों मे अकड़ कर अंडरवेर मे झटके खाने लगा...गुरमीत ने अगले ही पल लकी के अंडरवेर को पकड़ कर नीचे खींच दिया...लकी का अंडरवेर अब लकी की जाँघो पर आ गया था....और उसका तना हुआ लंड हवा मे झटके खा रहा था...गुरमीत ने काँपते हुए हाथों से लकी के लंड को हाथ मे ले लिया...उसके हाथ के उंगलियाँ लकी के लंड पर कस गयी...

गुरमीत ने लकी के लंड को मुट्ठी मे पकड़ने के बाद...एक बार लकी की आँखों मे देखा...फिर उसे लकी के लंड को दो तीन बार हिलाया...लकी के मुँह से आह निकल गयी..फिर गुरमीत ने लकी के लंड की चमड़ी को पीछे कर दिया...लकी के लंड का गुलाबी सुपडा गुरमीत की आँखों के सामने आ गया...

 


लकी पीठ के बल लेटा हुआ...गुरमीत को देख रहा था...अचानक गुरमीत लकी के लंड के ऊपेर झुक गयी....और अपना मुँह खोल कर लकी के लंड के सुपाडे को मुँह मे ले लिया...और अपने होंठो को लकी के लंड के सुपाडे पर कस लिया...और धीरे -2 लकी के लंड को अपने मुँह के अंदर बाहर करके चूसने लगी...लकी गुरमीत के होंठो की रगड़ को अपने लंड के सुपाडे पर महसूस करके सिहर उठा...उसे यकीन नही हो रहा था...कि गुरमीत उसके लंड को मुँह मे लेकर चूस रही है...धीरे-2 गुरमीत तेज़ी से लकी के लंड के सुपाडे को चूसने लगी...लकी का लंड अब एक दम तन चुका था...लकी का लंड पच-2 की आवाज़ से गुरमीत के मुँह को चोद रहा था...

थोड़ी देर बाद गुरमीत ने अपने मुँह से लकी के लंड को निकाल दिया....और अपनी नाइटी को एक झटके मे निकाल कर फेंक दिया...गुरमीत ने नीचे कुछ नही पहना था...लकी इससे पहले कुछ करता...गुरमीत लकी के दोनो तरफ अपनी टाँगों को करके लकी के ऊपेर आ गयी....और फिर लकी की आँखों मे वासना भरी नज़रों से लकी की तरफ देखते हुए...एक हाथ से लकी के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा दिया...और अपनी चूत को लकी के लंड पर दबाने लगी...लकी का लंड गुरमीत की चूत के दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया...और सीधा जाकर बच्चेदानी से सट गया...गुरमीत ने मस्ती मे बंद हुई,अपनी आँखों को खोला और लकी की तरफ देखते हुए बोली........

गुरमीत: (मदहोशी से भरी आवाज़ मे) लकी अब मुझसे कभी ना रूठना....तुमने मुझे क्या बना दिया है....मे तुम्हारे बिना एक पल भी नही जी पाउन्गी...तुम्हारी गुरमीत मर जाएगी...तुमसे दूर होकर....

लकी ने गुरमीत को अपने ऊपेर झुका लिया....और उसके होंठो को चूमता हुआ बोला...

लकी: नही जान मे तुम्हें कभी नही छोड़ूँगा....

और लकी ने गुरमीत के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया...और चूसने लगा...दोनो पागलों की तरह एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे...लकी ने अपने हाथों से गुरमीत के चुतड़ों को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया....गुरमीत अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे उछालने लगी.....कुछ ही पलों मे गुरमीत पूरे जोश मे आ चुकी थी...और अपनी गान्ड को तेज़ी से ऊपेर की तरफ उछाल कर फिर नीचे पटक कर लकी के लंड को अपनी चूत मे लेकर चुदाई का मज़ा ले रही थी...

गुरमीत: आहह लकी तुम्हारी लंड्ड मे ऐसीए क्या जादू हाईईईई जूऊओ मेरे फुद्दिईईईईई तुम्हारे लौडे के बिना एक पलल्ल्ल्ल्ल्ल नही रह पतिईईईईई....इश्स फुद्दी की खुजली मिटा दो....और दोनो तेज़ी से अपनी कमर को हिलाने लगे...लंड फॅक-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा..और करीब 10 मिनट की लगातार चुदाई मे दोनो झड कर हाँफने लगे

जैसे ही लकी का लंड सुस्त पड़ा...गुरमीत लकी के ऊपेर से उठ कर उसकी बगल मे लेट गयी....और लकी के फेस को अपने हाथों मे लेटे हुए उसे फ्रेंच किस करने लगी...

गुरमीत: अब तो नाराज़ नही हो ना....

लकी: (मुस्कुराते हुए) भला मे अपनी जान से कैसे नाराज़ हो सकता हूँ...

और लकी गुरमीत के होंठों को अपने होंठो मे लेकर ज़ोर से चूस देता है....दोनो 15 मिनट तक यूँ ही एक दूसरे के बदन को सहलाते हुए...एक दूसेरे के होंठो को चूमते रहते हैं...गुरमीत बेड से उतर कर जाने लगती है....

लकी: (गुरमीत को उठता देख कर) क्या हुआ कहाँ जा रही हो...

गुरमीत: मे अभी बाथरूम जाकर आती हूँ...

और गुरमीत बाथरूम मे घुस्स जाती है....और लकी उठ कर अपने लंड को एक पुराने कपड़े से सॉफ करता है...जैसे ही गुरमीत बाहर आती है...तो वो लकी को अपने लंड को सॉफ करता देख कर उसके पास आ कर नीचे बैठ जाती है.....

लकी: क्या हुआ ऐसे क्यों बैठ गयी....

गुरमीत: (लकी के सिकुडे हुए लंड को अपने हाथ मे लेते हुए)क्यों इसे गंदे कपड़े से सॉफ कर रहे हो....

लकी: तो और किस से करूँ....

गुरमीत लकी को वासना से भरी नज़रों से देखती है...और उसके सिकुडे लंड की चमड़ी को पीछे करके देती है...जिससे उसके लंड का गुलाबी सुपडा बाहर आ जाता है...और बिना देर किए...लकी के सिकुडे हुए लंड को मुँह मे ले लेती है...लकी के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती है....और वो उसके खुले हुए बालों मे अपने हाथ की उंगलियों से सहलाने लगा जाता है...

लकी: अह्ह्ह्ह गुरमीत ऐसे तो तुम मुझ अपना दीवाना बना दोगी....

गुरमीत लकी के लंड को मुँह मे ले लिया...अपनी नज़रों को ऊपेर करके लकी की आँखों मे बड़े ही मादक अंदाज़ मे देखती है...और उसके लंड के सुपाडे को ज़ोर-2 अपने होंठो और जीभ से चाटने लग जाती है...कुछ ही पलों मे लकी का लंड फिर से तन चुका था.....अब लकी की बर्दास्त से बाहर हो रहा था...लकी ने गुरमीत के सर को दोनो हाथों से पकड़ कर...गुरमीत को ऊपेर उठा दिया...और गुरमीत की आँखों मे देखने लगा....

गुरमीत की आँखें वासना के नशे मे डूबी हुई..बंद हुई जा रही थी....उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी...वो लकी की छाती से एक दम चिपक गयी....लकी उसके होंठो को अपने होंठो मे लेकर चूसने लगा...दोनो बिल्कुल एक दम नंगे खड़े एक दूसरे से चिपके हुए थे.....

लकी गुरमीत के होंठो को थोड़ी देर चूसने के बाद...धीरे-2 नीचे आने लगा...वो गुरमीत की नेक और चुचियों के ऊपेर के हिस्से को अपनी जीभ निकाल कर चाट रहा था...गुरमीत की चूत एक बार फिर से गरम हो कर लकी के लंड को लेने के लिए बेताब हुई जा रही थी....जैसे-2 लकी गुरमीत के बदन को चूमता हुआ नीचे आ रहा था...वैसे-2 गुरमीत के निपल तन कर कड़े होते जा रहे थे....

जैसे ही लकी ने गुरमीत की लेफ्ट चुचि के निपल को मुँह मे ले लिया...गुरमीत के बदन मे सिहरन दौड़ गयी...और वो लकी के गले मे दोनो बाहों को डाल कर लकी के फेस को अपनी चुचियों पर दबाने लगी....

लकी किसी भूखे बच्चे की तरह...गुरमीत के कड़े हो चुके गुलाबी निप्पल को चूस रहा था...गुरमीत आह अहह ओह करती हुई...लकी के बालों मे अपनी उंगलियों को घुमा रही थी....

गुरमीत: अहह लकीयी हइईई ओह औरर्र चुस्स्स मेरे ममो को अहह और ज़ोर से चूस.......

लकी ने गुरमीत के लेफ्ट निपल को मुँह से निकाल कर दूसरे निपल को मुँह मे ले लिया...जैसे ही गुरमीत के लेफ्ट निपल लकी के मुँह से बाहर आ आया...तो गुरमीत को अपने लेफ्ट निपल पर सरसराहट सी महसूस होने लगी...गुरमीत अपने एक हाथ से अपने लेफ्ट निपल को अपनी उंगलियों मे लेकर खुद ही मसलने लगी....

गुरमीत के चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया....

गुरमीत: अहह लकाइयियी बसस्सस्स बसस्स्स्सस्स अब जल्दीीईई सीए मेरे फुद्दिईई मेन्णन्न् अपना लौडा डाल कारर्र मुझीई चोद दूओ अहह

लकी ने गुरमीत की बात को मानते हुए...उसे बेड के किनारे पर खड़ा कर के झुका दिया...गुरमीत अपने दोनो घुटनो को बेड के किनारे रख कर आगे की तरफ झुक कर डॉगी स्टाइल मे आ गयी....

डॉगी स्टाइल मे आने के बाद गुरमीत आगे से थोड़ा सा झुक गयी...और अपनी कमर को थोड़ा सा अंदर करके अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ कर लिया....

जिससे गुरमीत की चूत बाहर की तरफ आ गयी....और उसकी चूत का छेद लकी के लंड के ठीक सामने आ चुका था...गुरमीत की चूत का छेद उतेजना के मारें सिकुड और फेल रहा था...जैसे लकी के लंड को अपने अंदर घुसने का निमंत्रण दे रहा हो...लकी गुरमीत के पीछे आ गया...और अपने लंड को पकड़ कर लंड के सुपाडे को गुरमीत की चूत के छेद पर लगा दिया....

जैसे ही लकी के लंड का मोटा गरम सुपाडा गुरमीत की चूत के छेद पर लगा...गुरमीत एक दम से सिहर गयी...उसके पूरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया...और उसने एक मस्ती भरी आह भरते हुए अपने होंठो को दाँतों मे भींच लिया...

लकी ने अपने लंड को धीरे-2 गुरमीत के छेद मे घुसाना चालू कर दिया...जैसे ही लकी के लंड का सुपाडा...गुरमीत की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस्सने लगा....गुरमीत ज़ोर-2 से सिसकारियाँ भरने लगी....

गुरमीत: अहह अहह लुक्कययययी हाआँ घुस्स्स्स दूऊ अपना लनड्ड्ड मेरी फुद्दिईईईई मे अहह माआररररर डी मेरी फुद्दीई अहह लकीयी

लकी का लंड जड तक गुरमीत की चूत मे पूरा समा चुका था...गुरमीत मस्ती मे आकर अपनी गान्ड को आगे पीछे करके....लकी के लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करके अपनी चूत को चुदवाने लगी...लकी ने भी गुरमीत की कमर को दोनो हाथों से थाम कर तेज़ी से धक्के लगाने चालू कर दिए...लंड फॅक-2 की आवाज़ से गुरमीत की चूत के अंदर बाहर होने लगा....

गुरमीत: अहह ओह लकईयीयैआइ और जोर्र्र्र से चोद्द्द्द्द अहह और जोर्र्र्रर सीए जोर्र्र से चोद्द्द्द्द्द

लकी गुरमीत की बातों को सुन कर जोश मे आ आ गया...और गुरमीत की कमर को पकड़ कर ताबड तोड़ धक्के लगाने लगा....दर्द और मज़े मे गुरमीत एक दम गरम हो चुकी थी...पूरे रूम मे फॅक-2 थप-2 और गुरमीत की मस्ती भरी आहहें गूँज रही थी...10 मिनट की ताबड तोड़ चुदाई मे दोनो झड गये....लकी ने अपना लंड गुरमीत की चूत के छेद से बाहर निकाल कर...बेड पर गिर पड़ा ...गुरमीत की चूत से पानी बह कर उसकी जाँघो तक आ रहा था...गुरमीत लकी की छाती पर सर रख कर लेट गयी....और उसके सिर के बालों मे अपनी उंगलियों को फेरने लगी...

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