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सियासत और साजिश complete

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जब जय शर्मा ने अपने घर वालो को सारी बात बताई तो, सब परेशान हो गये…..जय शर्मा ने अपनी सभी रिश्तेदारो को फोन करके मदद करने को कहा….पर हर जगह निराशा ही हाथ लगी….शाम को अमन ने जय शर्मा के घर पर फोन किया…..और उसे पोलीस स्टेशन आने को कहा….जय शर्मा अमन के ऑफीस मे पहुँच गया….जैसे ही जय शर्मा अमन के ऑफीस के अंदर पहुँचा , तो अमन ने जय शर्मा को बैठने को कहा….

अमन: आए बैठिए शर्मा जी…..

ज़य शर्मा: क्या बात है डीएसपी साहिब….मेरे बेटे को कैसे भी कर के इस केस से बचा लीजिए…मे आपका अहसान सारी जिंदगी नही भूलूंगा…..

अमन: देखें शर्मा जी मैने आप को अपनी मजबूरी पहले से ही बता दी है…. वैसे भगवान ने आपके के लिए एक रास्ता खोला है….बस अगर आप चाहें तो.

ज़य शर्मा: (अमन के फेस पर परेशानी के भाव देखते हुए) डीएसपी साहिब जो भी कहना है खुल कर बोलो….मे अपने बेटे के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ…..

अमन: (थोड़ी देर सोचने के बाद) शर्मा जी आप ने राज के बारे मे तो सुना होगा ?

ज़य शर्मा: हां नाम तो बहुत सुना है….पर मैं उन्हे जानता नही हूँ…..

अमन: बात ऐसी है शर्मा जी दिन मेरी वाइफ की बर्थडे पार्टी थी….उस दिन राज भाई मेरे घर आए हुए थे….उन्हे अचानक से कुछ काम पड़ गया था…वहाँ पर आपकी बेटी सुमन भी आपकी वाइफ के साथ आई हुई थी….

ज़य शर्मा: हां मे जानता हूँ….सुमन भी साथ गयी हुई थी…..

अमन: वहाँ पर राज जी ने आपकी बेटी को देखा…..और वो उसे पहली ही नज़र मे पसंद कर बैठे …..वो आपकी बेटी सुमन से शादी करना चाहते हैं…

ज़य शर्मा: (जय शर्मा अमन की बात सुन कर सकते मे आ गया) ये आप क्या बोल रहे है. ये मुनकीन नही है….और और मैने सुना है कि उनकी पहले शादी हो चुकी है…..

अमन: सही सुना है आप ने…..उनकी पहली पत्नी का देहांत हो गया था…अब दूसरी शादी करने मे कोई बुराई तो नही…..

ज़य शर्मा: पर ये कैसे ? उनकी एज और सुमन की एज मे बहुत डिफरेन्स हैं…

अमन: आप कितना जानते हैं राज के बारे मे ?

ज़य शर्मा: कुछ ख़ास नही बस नाम सुना है…..

ज़य शर्मा: उनकी एज अभी सिर्फ़ 33 साल है…..और सुमन 20 की इतना तो हमारे समाज मे आम बात है….फिर आपकी बेटी वहाँ महारानी की तरहा राज करेगी….उनके पास इतनी दौलत है कि, अगर दोनो हाथों से भी लुटाये तो ख़तम ना हो….और फिर उनकी रसूख् और पहुँच बहुत ऊपेर तक है….अगर आप हां कहते हैं तो , आपका बेटा कल ही जैल से बाहर होगा….

ज़य शर्मा: (अमन की बात सुन कर सोच मे पड़ गया) लेकिन मुझे अपने घर वालो से भी पूछना पड़ेगा…मे अकेला इतना बड़ा फैंसला नही ले सकता…

अमन: (चेर से खड़ा होकर जय शर्मा के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए) शर्मा जी मे समझ सकता हूँ….पर यकीन मानिए….मे आपके परिवार के बारे मे ग़लत नही सोच रहा हूँ….राज मे कोई बुराई नही है…. अमीर हैं पैसा है रुतबा है रसूख् है…पढ़े लिखे हैं….इतना तो शायद हमारे इलाक़े मे कोई ना पढ़ा हो…..और उनको भी तो अपनी जिंदगी दुबारा जीने का हक़ है…..

ज़य शर्मा: डीएसपी साहिब कह तो आप सही रहे हैं….पर फिर भी मैं अपने घर वालो और सुमन से पूछे बिना कोई भी फैंसला नही कर सकता….

अमन: ज़रूर सुमन की मर्ज़ी सब से ज़रूरी है….राज भी यही चाहते हैं कि, वो अपनी दौलत और शोहरत का किसी पर असर ना दिखाएँ….आप जाकर घर वालो से बात कर लीजिए…..और शाम तक मुझ फोन करके बता दीजिए…उसके बाद मे ही मे राज जी से बात कर पाउन्गा….

ज़य शर्मा: (चेर से खड़ा होता हुआ) अच्छा डीएसपी साहिब मे जाकर घर वालो से बात करता हूँ, जल्द ही आपको फोन पर बता दूँगा….

अमन: ठीक हैं…पर याद रखिए…….ना तो आपके पास इसके अलावा कोई और रास्ता है….और ना है मेरे पास…..मुझ उम्मीद है कि आप मेरी मजबूरी को समझ रहे होंगे.

ज़य शर्मा निराशा मे डूबा उठ कर बाहर आ गया….सारे रास्ते मे वो यही सोचता रहा कि, आख़िर वो घर वालों के साथ कैसे ये बात करेगा…..

 


अमन शाम तक ऑफीस मे बैठा…जय शर्मा के फोन का इंतजार करता रहा….पर जब उसका फोन नही आया तो, वो घर चला गया….रात को अमन के घर पर जय शर्मा ने फोन किया, और घर वालों के राज और सुमन की शादी के लिए रज़ामंद होने की बात बता दी……

ये सुनते ही अमन के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…..उसने फोन काट कर उसी टाइम राज को फोन मिलाया….और राज को अपना प्लान कामयाब होने की बधाई दी… राज जो चाहता था, आख़िर उसे मिल ही गया…..

अमन: (फोन पर) अब उस अमित का क्या करना है.

राज : उसे सुबह छोड़ दो…..बाकी कल जय शर्मा से बात करके 4 दिन बाद शादी की तैयारी करने के लिए कह देना….मे जल्द से जल्द सुमन से शादी करना चाहता हूँ….

अमन: जी सर…जैसे आप कहें….मे कल सुबह ही अमित को छोड़ कर उसके घर ले जाता हूँ….और जय शर्मा से भी बात कर लेता हूँ….

अगली सुबह अमन जल्दी तैयार होकर पोलीस स्टेशन पहुँच गया….और हवल दार को अमित को लॉक अप से बाहर लाने के लिए कहा….थोड़ी देर मे हवलदार अमित को लेकर अमन के कॅबिन मे आ गया….

अमन: अमित की ओर देखते हुए) देखो अमित मे तुम्हारे पापा की रिक्वेस्ट पर और अपने ज़िम्मे पर छोड़ रहा हूँ….और उम्मीद है कि आगे से तुम ऐसी ग़लती कभी नही करोगे… तुम्हे अब अपना ध्यान पढ़ाई मे लगाना चाहिए….

अमित: जी सर मे आगे से कोई भी ऐसा काम नही करूँगा…..जिससे मेरे घर वालो को परेशानी हो….

अमन: गुड चलो मैं तुम्हे घर तक छोड़ देता हूँ….

और अमन अमित को लेकर उसके घर की तरफ अपनी कार से चल पड़ा…..अमित के घर पहुँच कर अमन ने डोर बेल बजाई….थोड़ी देर बाद जय शर्मा ने गेट खोला…..जय शर्मा की आँखों मे ख़ुसी के मारें आँसू झलक आए….उसने अपनी पत्नी को आवाज़ लगाई….और जय शर्मा की पत्नी और दोनो बेटियाँ बाहर आ गयी…..अमित के माँ अपने बेटे को घर पर देख कर बहुत खुस थे….

अमन: शर्मा जी मुझे आप से कुछ ज़रूरी बात करनी है….

ज़य शर्मा: हां आइए अंदर चल कर बात करते हैं…..

ज़य शर्मा अमन को अपने रूम मे ले गया, और अपनी पत्नी को चाइ लाने के लिए कहा….

ज़य शर्मा: अब बोलिए डीएसपी साहिब क्या बात है….

अमन: शर्मा जी देखिए राज जी ने आप के बेटे को जैल से निकलवा दिया है, अब वो जल्द से जल्द शादी करना चाहते हैं, आप की बेटी से…..और इस सनडे को अगर आप को ऐतराज ना होतो, उनकी छोटी बेहन आपके घर शगुन लेकर आने वाली है….

ज़य शर्मा अमन की बात सुन कर एक दम से सोच मे पड़ गया….

ज़य शर्मा: पर इतनी जल्दी क्यों…..हमे कुछ तो तैयारी का मोका दो….इतनी जल्दी….

अमन: शर्मा जी आप फिकर बिल्कुल ना करे,….राज जी बिल्कुल सिंपल सी मॅरेज चाहते हैं….आप को ज़्यादा खर्चा करने की भी ज़रूरत नही…..शगुन सिर्फ़ उनकी बेहन लेकर आने वाली है…..और कोई नही आएगा…..

ज़य शर्मा: ठीक है डीएसपी साहिब जैसे आप ठीक समझें…..अब तो हमने सब आप के भरोसे पर छोड़ दिया है….

अमन: और मैं आपका विश्वास कभी टूटने नही दूँगा…..आप मेरी बात पर यकीन करे….अच्छा शर्मा जी मैं अब चलता हूँ…..

उसके बाद अमन अपने ऑफीस वापिस आ गया, और राज को फोन करके सारी बात बता दी….राज को अब मंज़िल बेहद नज़दीक नज़र आ रही थी…..अमन के फोन काटते ही, राज ने डॉली को फोन लगाया…..

डॉली: (थोड़ी देर बाद डॉली ने फोन उठाया) हैल्लो जी भैया….आज इतनी सुबह -2 बेहन की कैसे याद आ गयी आप को….

राज : हट पागल कैसी बात करती है….मे तुम्हे और साहिल को कभी भुला हूँ…अच्छा सुन एक खुशी की बात बतानी थी तुम्हे…..

डॉली: क्या भैया जल्दी बताओ

राज : डॉली वो बात ऐसी है…. वो

डॉली; भैया ये वो वो क्या लगा रखा है….मैने कभी आपको झिझकते हुए देखा नही….लगता है बात कुछ ख़ास है…जल्दी बोलो ना…

राज : वो डॉली मे शादी कर रहा हूँ….

डॉली: (राज की बात सुन के ख़ुसी से चोन्कते हुए) क्या कब किस से मुझ बताया भी नही…..

राज : अर्रे वही तो बता रहा हूँ…..तू एक काम कर कल ही साहिल को लेकर यहाँ आ जा,,,,बाकी की बात यहीं पर करेंगे…..

डॉली: ठीक है भैया मैं अभी ये बात मम्मी पापा को बताती हूँ…..और कल ही गाँव पहुँच जाती हूँ…..

ये कह कर डॉली ने फोन रख दिया…..

सुबह के 10 बजे डॉली अपने सास ससुर के साथ बैठ कर नाश्ता कर रही थी….साहिल स्कूल जा चुका था….और रवि किसी काम से बाहर गया हुआ था….

डॉली: पापा आज भैया का फोन आया था, एक बहुत ही खुशी की खबर है,

अजीत शर्मा: हां बेटा बोलो क्या कह रहा था, राज ?

डॉली: पापा भैया शादी कर रहे हैं…उन्होने अपने लिए लड़की पसंद कर ली है.

अजीत शर्मा: अर्रे वाह ये तो बहुत ख़ुसी की बात है, चलो आख़िर उसका भी घर बस जाए… और उसका वंश भी आगे बढ़ जाएगा……कब कर रहा है शादी…..हम सब चलेंगे….

डॉली: ये तो पता नही…पर मुझे कल ही गाँव बुलाया है….इस लिए आप से पूछ रही हूँ…

अजीत शर्मा: हां भाई तुम्हारा जाना तो बहुत ज़रूरी है, एक काम करो, तो कल ही गाँव चली जाओ साहिल को भी साथ मे लेजाना….मे साहिल के प्रिन्सिपल से फोन पर बात कर लूँगा आज ही….

डॉली: ठीक है पापा मे कल ही चली जाउन्गी…..

 


दूसरी तरफ राज के लिए आज का दिन बहुत ही ख़ुसी से भरा हुआ था, उसने अपनी हवेली मे खेतो मे काम करने वाले कुछ मजदूरों को बुलवा लिया था, और हवेली की सॉफ सफाई ज़ोर शॉरों पर चालू हो चुकी थी…..

राज : (हरिया को) काका देखो आज मेरी हवेली को दुल्हन की तरह सज़ा दो….कोई भी कमी नही रहनी चाहिए…हवेली की चकाचोंध आस पास के सभी गाँवो मे फैल जानी चाहिए…..जो भी देखे बस देखता ही रह जाए….पूरी हवेली की अच्छी से सफाई करो….और पैंट भी…..मुझे कोई भी कमी नज़र नही आनी चाहिए…..

हरिया: ठीक है बाबू जी…..बस आप देखते जाओ….

तभी दूसरी तरफ से विशाल राज की तरफ आता हुआ नज़र आया….

विशाल: (राज की और बढ़ते हुए ख़ुसी से चिल्लाते हुए) राज ओ मेरे यार…क्या खबर सुनाई है तूने, दिल ख़ुसी के मारे नाच रहा है…..कसम से सबसे पहले तेरे पास ही चला आ रहा हूँ……….

ये कहते हुए, विशाल राज के पास आया, और उसके गले से लग गया. राज भी विशाल को देख कर और खुस हो गया….

राज : चल आ अंदर चल कर बैठते हैं…..

विशाल: नही यार मुझ बहुत ज़रूरी काम है अभी जाना पड़ेगा….शाम को बैठते है…. और महफ़िल जमाते हैं….

राज : हां यार क्यों नही….चल ठीक है, मे तेरा शाम को इंतजार करूँगा….

विशाल के जाने के बाद राज हवेली के अंदर आ गया, और सीधा किचिन मे चला गया, जहाँ रोमा काम कर रही थी….रोमा का चेहरा राज की शादी की बात सुन कर उतरा हुआ था.

राज : (पीछे से रोमा को अपनी बाहों मे भरते हुए) क्या हुआ तुम नाराज़ हो मुझसे…ऐसे क्यों मुँह फूला कर बैठी हो.

रोमा: हटिए बाबू जी….आप ने तो शादी करने का सोच लिया…..अब आप इस ग़रीब को तो भूल ही जाओगे….

राज : अर्रे ऐसे कैसे भूल जाउन्गा….तू तो मेरी जान है…..

रोमा: हटिए मे सब जानती हूँ…..

रोमा जानती थी कि, राज और उसकी कोई बराबरी नही है, और रोमा और राज के बीच मे जो था, वो दुनिया की नज़रों से दूर रहे यही रोमा के लिए अच्छा था….

राज ने रोमा को छोड़ दिया, और किचिन से बाहर आ गया, हवेली मे चारो तरफ सफाई का काम चल रहा था…..

अगली सुबह डॉली साहिल और रवि के साथ गाँव पहुँच गये…..राज किसी काम से बाहर गया हुआ था…..जब राज वापिस आया तब तक, डॉली साहिल और रवि दोपहर का खाना खा चुके थे……जैसे ही राज हाल के अंदर आया, तो साहिल उसकी तरफ दौड़ता हुआ गया. और राज ने साहिल को अपनी बाहों मे उठा लिया….

साहिल: मामा जी मामा जी आप मेरे लिए नयी मम्मी ला रहे हैं ?

राज : (मुस्कुराते हुए) नही तो तुमसे किसने कहा ?

साहिल: मम्मा ने कहा….

राज : झूट बोल रही है तुम्हारी मम्मा.

साहिल: (चिल्लाते हुए) मम्मा मम्मा देखो ना मामा जी कह रहे हैं कि, आप झूट बोल रही हैं….

डॉली: राज की तरफ आते हुए) नही बेटा जी….मे नही झूठ तो तुम्हारे मामा बोल रहे हैं…..अब उन्हे शरम आ रही है ना……

डॉली राज के गले लग गयी…..

साहिल: नही मामा जी झूट बोल रहे हैं ना.

राज : हां यार मे ही झूट बोल रहा था, बोल कल चलेगा अपनी मम्मी से मिलने के लिए…..

साहिल: हां आप के साथ?

राज : नही यार मे नही जा रहा….तुम अपनी मम्मी के साथ जाओगे ?

साहिल: ये हां मामा जी मे भी जाउन्गा….मम्मी को देखने…..

राज ने साहिल को नीचे उतार दिया….और साहिल खेल मे लग गया….डॉली राज का हाथ पकड़ कर उसे सोफे के पास ले आई….और दोनो सोफे पर बैठ गये….

डॉली: हां तो भैया अब बताइए….भाभी को कहाँ मिली थी…..

राज : (शरमाते हुए) पार्टी मे मिला था…..

डॉली: कैसी है मेरी नयी भाभी सुन्दर है ?

राज : (झेपते हुए) तुम कल खुद ही देख लेना…मुझ नही पता…..

राज उठ कर अपने रूम मे आ गया…..डॉली वहीं सोफे पर बैठ कर मुस्कुराने लगी….और मन मे सोचने लगी….कि उसका भाई कितना शर्मिला है….वो तो एक दम मासूम सा है अभी भी वैसे ही है…..जैसे अपने कॉलेज के दिनो मे था….पर डॉली आज के राज की सच्चाई से अंजान थी…..

अगली सुबह हवेली मे जोरों शॉरो से तैयारी चल रही थी….सब इधर उधर तेज़ी से भागते हुए काम कर रहे थे…..डॉली और साहिल और साथ मे रवि सुमन के घर शगुन लेकर जाने के तैयारी कर रहे थे…..डॉली शगुन का समान पॅक कर रही थी. राज उसके पास आकर बैठ गया…

राज : डॉली

डॉली : जी भैया……

राज : मे तुम्हारे साथ पंडित जी को भी भेज रहा हूँ…..वहाँ जाकर शादी की डेट भी फिक्स कर लेना….

डॉली: (मुस्कुराते हुए) ऊह हो अब जनाब से रहा भी नही जा रहा क्यों इतनी जल्दी क्या है शादी करने की…

राज : अर्रे यार तुम तो पीछे ही पड़ जाती हो….मे तो वैसे ही कह रहा था….

डॉली: अच्छा-2 ठीक है….मे जो भी अच्छी डेट निकलेगी…उसे फिक्स कर दूँगी….

डॉली साहिल और रवि के साथ सुमन के घर के लिए निकल गयी….राज के दिल मे ख़ुसी की उमंगे उठ रही थी….अब सुमन उसकी होने वाली थी….ये सोचते हुए वो मस्ती मे हवेली के अंदर चला गया……राज सुबह से नाहया नही था…. उसने अंदर आकर देखा तो, रोमा उसके रूम की सफाई कर रही थी……

राज ने अपने रूम को अंदर से लॉक किया, और बिना किसी आहट के पीछे जाकर रोमा को अपनी बाहों मे भर लिया….रोमा एक दम से घबरा गयी….

रोमा: (पीछे मूड कर राज की ओर देखते हुए) उफ़फ्फ़ हटिए बाबू जी क्या कर रहे हैं…कोई देख लेगा…..

राज : (रोमा राज की बाहों मे छटपटा रही थी) साली रांड़ मे देख रहा हूँ कि तू आज कल कुछ ज़्यादा ही नखरे करने लगी है…..

ये कहते हुए, राज ने रोमा को बेड पर पटक दिया, और उसकी टाँगों को पकड़ कर थोड़ा सा अपनी तरफ घसीटा….राज बेड के किनारे खड़ा था….जैसे ही रोमा खिसकती हुई बेड के किनारे आई…राज ने उसकी साड़ी और पेटिकोट को एक साथ ऊपेर उठा दिया….और रोमा की टाँगों को मोड़ कर ऊपर उठा कर दोनो ओर फैला दिया… रोमा की झान्टो से भरी चूत देख कर राज का लंड उसके पाजामा मे झटके खाने लगा.

राज : चाल साली अपने हाथों से अपनी चूत को फैला कर रखा….दिखा तेरी चूत मेरा लंड लेने के लिए तैयार है कि नही…..

रोमा राज की तरफ हैरानी से देखते हुए, अपने हाथों को अपनी चूत पर ले आई, और अपनी झान्टो से भरी चूत की फांकों को दोनो हाथों की उंगलियों से फैला लिया…. राज की आँखों मे रोमा की चूत का गुलाबी छेद देख कर चमक आ गयी. उसने जल्दी से अपनी पाजामा और कुर्ता उतार कर फैंक दिया…..और फिर अपने अंडरवेर को भी उतार कर फैंक दिया…….

 
राज का लंड हवा मे झटके खा रहा था…उसके लंड की नसें एक दम फूली हुई थी….और गुलाबी रंग का सुपाडा एक दम फूला हुआ था….जिसे देखते ही रोमा की चूत के छेद मे कुलबुलाहट होने लगी….राज अपने एक हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए, दूसरे हाथ से रोमा की चूत के क्लिट को रगड़ने लगा….रोमा एक दम से मचल उठी…उसके बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….

रोमा उम्ह्ह्ह आह ऑश सीईईईई करते हुए, अपनी मस्ती से भरी आँखों से राज को अपना लंड हिलाते हुए बड़ी हसरत भरी नज़रों से देख रही थी….रोमा की चूत की दीवारो मे सरसराहट बढ़ती जा रही थी….और उसका पूरा बदन मस्ती मे आकर कांप रहा था…जब उससे रहा नही गया तो, उसने राज के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रगड़ना चालू कर दिया…..

रोमा: (राज के लंड के गरम सुपाडे अपनी चूत के छेद पर महसूस करते हुए) आह बाबू जी अब मुझ क्यों तरसा रहे हो….अपनी इस रांड़ को एक बार और चोद दो. फिर तो आप मेरी तरफ देखो गे भी नही….आह बाबू जी जल्दी से घुसाओ ना….मेरी चूत तड़प रही है आपका लंड अपने अंदर लेने के लिए….

राज ने रोमा की दोनो टाँगों को उठा कर अपने कंधों पर रख लिया, और तेज़ी से अपनी कमर को नीचे की तरफ धकेला….राज के लंड का सुपाडा रोमा की चूत के छेद को फैलाता हुआ आधे से ज़्यादा अंदर घुस गया…..अचानक इतने तेज धक्के के कारण रोमा का पूरा बदन अकड़ गया…, और उसने राज के कंधों को कस के पकड़ लिया.

रोमा: ओह्ह्ह उफफफ्फ़ ससीसीईईईीस मार डाला बाबू जीए. धीरीईए ओह

राज के होंठो पर रोमा को यूँ तड़पता देख कर मुस्कान आ गयी….और उसने फिर से अपनी पूरी ताक़त लगा कर ज़ोर दार धक्का मारा…..इस बार लंड पूरा का पूरा रोमा की चूत की गहराइयों मे उतर गया…..रोमा की चूत की दीवारों ने राज के लंड को अपने अंदर निचोड़ना चालू कर दिया….

रोमा: ओह सीईईईई बाबू जीईए आप बहुत जालिम हो….मुझ पर ज़रा भी तरस नही खाते….उफफफफफफ्फ़ फाड़ कर रख दी मेरी चूत……अह्ह्ह्ह अहह अहह ओह बाबू जी धीरीई ओह मारीई रीए….उफफफफफफफफफफ्फ़

राज बिना रुके तेज़ी से अपनी कमर को हिलाते हुए, अपने लंड को रोमा की चूत के अंदर बाहर करने लगा…उसके लंड का सुपाडा रोमा की चूत की दीवारों से तेज़ी से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…और रोमा मस्ती मे अहह ओह सीईईईई जैसी सिसकारियाँ निकाल रही थी….कुछ ही पलों मे उसकी चूत एक दम गीली हो गयी. और राज का लंड चिकना होकर तेज़ी से रोमा की चूत के अंदर बाहर होने लगा….

राज का लंड हर बार अंदर जाकर रोमा की बच्चेदानी से जा टकराया , और रोमा के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती….राज ने रोमा की टाँगों को अपने कंधों से नीचे उतार दिया….और अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल कर रोमा को डॉगी स्टाइल मे आने के लिए कहा…रोमा जल्दी से बेड के किनारे दोनो घुटनो और कोहनियों के बल उल्टी हो गयी…

रोमा ने अपनी जाँघो को फैला लिया, और अपना एक हाथ नीचे से अपनी दोनो जाँघो के बीच से गुज़ार कर अपनी चूत की फांको को पूरा खोल कर राज को अपनी चूत का गुलाबी रस से भरा हुआ छेद दिखाने लगी…..

रोमा: उम्ह्ह बाबू जी अब जल्दी से घुसा दो ना….

राज ने अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर रोमा की चूत के छेद पर टिका दिया, और रोमा के चुतड़ों को दोनो तरफ से पकड़ कर ज़ोर दार धक्का मारा…लंड का सुपाडा एक बार फिर से रोमा की चूत के छेद को फैलाता हुआ, अंदर जाने लगा….रोमा के बदन मे करेंट सा दौड़ गया. उसने बेड शीट को अपने दाँतों मे कस लिया, और तेज़ी से अपनी गान्ड को पीछे की ओर हिलाते हुए, राज के लंड पर अपनी चूत को पटकने लगी…

राज भी रोमा के चुतड़ों को पकड़ कर दोनो तरफ फैलाते हुए, तेज़ी से धक्के लगा कर अपने लंड को, रोमा की चूत के अंदर बाहर करते हुए, रोमा की चूत को चोदने लगा.

रोमा फिर से मस्ती मे आह ओह्ह्ह करने लगी……5 मिनट तक इस पोज़ मे चोदने के बाद दोनो एक साथ झड गये…..राज ने अपने लंड को रोमा की चूत से बाहर निकाला, और उसकी साड़ी से सॉफ करके, उसके चुतड़ों पर एक ज़ोर दार थप्पड़ जड दिया…. रोमा एक दम से चौंक गयी….जब उसने राज की तरफ देखा, तो राज उसकी तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बाथरूम मे चला गया…..

रोमा बेड से उठी, और अपनी साड़ी को ठीक करके, रूम से बाहर चली गयी….उसकी चूत से राज का गाढ़ा वीर्य अभी भी बह कर उसकी जाँघो को चिपा चिपा कर रहा था.

राज बाथरूम मे घुस गया….और नहाने लगा….शाम को जब डॉली साहिल और रवि सुमन के घर से वापिस आए तो, डॉली का फेस एक दम खिला हुआ था. भाई की शादी की ख़ुसी उसके फेस से सॉफ झलक रही थी…..अंदर आते ही वो राज के गले लग गयी….और उसकी आँखे नम हो गयी….जब राज ने उसकी नम को आँखों को देखा, तो उसने डॉली के फेस को अपने हाथों मे भरते हुए, उसके गालों पर बह आए आँसुओं को सॉफ करने लगा………

राज : अर्रे पागल हो क्या, क्यों रो रही हो……

डॉली: भैया ये तो खुशी के आँसू है…..मैं ये दिन देखने के लिए तरस गयी थी… आज फिर से आपकी जिंदगी मे ख़ुसी लॉट कर आई है….सुमन बहुत अच्छी लड़की है….वो आप का पूरा ख़याल रखेगी….और इस घर को अच्छे से संभाल लेगी…..मैने उससे काफ़ी देर बात भी की है…..

राज : अच्छा अब चुप करो…..अब ये तो ख़ुसी का मोका है ना….चलो जाओ फ्रेश हो जाओ….फिर साथ मिल कर खाना खाते हैं…..

 


तभी साहिल भी उधर से दौड़ता हुआ आया, और राज ने उसे उठा लिया…..

साहिल: मामा जी मैने भी नयी मम्मी से बात की, और पता है मम्मी ने मुझे चॉक्लेट भी दी है…..

राज : अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है, फिर बताओ नयी मम्मी कैसे लगी…

साहिल: बहुत अच्छी…..अब मुझे नीचे भी उतारो….मैं कोई बच्चा हूँ…जो बार -2 मुझ गोद मे उठा लेते हो….

साहिल की बात सुन कर राज और डॉली दोनो के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…राज ने साहिल को नीचे उतार दिया….और वो भागता हुआ अपने रूम मे चला गया….

डॉली: अच्छा भैया….वो पंडित जी ने इस सनडे का महूरत निकाला है शादी के लिए… मैने तो हां कर डी…..और सुमन के घर वाले भी तैयार है….पर कह रहे थे, कि वो इतनी जल्दी बहुत ज़्यादा तैयारी नही कर पायंगे…..उन्होने रिक्वेस्ट की है, अगर शादी किसी मंदिर मे कुछ लोगो की मोजूदगी मे हो जाए तो अच्छा है…..

राज : मुझ कोई इतराज नही है…..जैसे चाहते है हम वैसे ही कर लेंगे…..

डॉली: तो ठीक है….आप फिर बात पक्की कर लीजिए….मे फ्रेश होने जा रही हूँ. डॉली अपने रूम मे चली गयी….और राज बाहर आकर हवेली की सफाई कर रहे आदमियों को देखने लगा….तीन दिन बाद राज की शादी थी….डॉली और राज शादी की तैयारियों मे व्यस्त थे….

ये तीन दिन भी कैसे बीत गये….पता नही चला….आज सनडे को राज की शादी का दिन है….हवेली मे चारो तरफ चहल पहल थी.. सब बड़े खुस थे….डॉली के सास ससुर भी आ चुके थे….और विशाल भी अपने परिवार के साथ हवेली पहुँच गया था….

बस यही वो कुछ गिने चुने लोग थे…जो राज के बेहद करीब थे…सब लोग तैयार होकर हवेली के गार्डन मे खड़े थे….राज जब बाहर निकला….तो एक पल के लिए सब की नज़रे उसके ऊपर जम गयी….उसने लाइट गोल्डर कलर की शेरवानी पहनी हुई थी… सब उसकी पर्सनॅलिटी देख कर हैरान थे…..आज राज किसी राजा से कम नही लग रहा था….डॉली दौड़ कर उसके पास गयी….और राज का हाथ पकड़ कर उसे कार की तरफ ले जाने लगी…..

राज ने डॉली के सास ससुर के पावं छुए और कार मे बैठ गया….राज की बारात रवाना हो गयी….सुमन के घर वालों ने शादी का अरेंज्मेंट शहर के ही एक मंदिर मे किया हुआ था….जब राज और बाकी के लोग मंदिर मे पहुँचे तो, वहाँ पर सिर्फ़ अमन और जय शर्मा थे….और एक पंडित बैठा हुआ शादी की तैयारी कर रहा था….जय शर्मा ने आगे बढ़ कर सब का स्वागत किया…..राज ने आँखों के इशारे से अमन से पूछा……….

अमन: आऐए अंदर चले…बस थोड़ी देर मे सब आ जाएँगे….सब लोग मंदिर के परिसर मे आ गये….और सुमन और बाकी के घर वालों का इंतजार करने लगे….थोड़ी देर बाद मंदिर के सामने एक कार आकर रुकी….राज अपने आप को उस तरफ देखने से नही रोक पाया….और फिर रेड कलर का लहंगा पहने हुए सुमन कार से नीचे उतरी…राज की नज़र सुमन पर ही अटक गयी….रेड कलर के लहँगे मे उसके गोरे रंग की रंगत और बढ़ गयी थी…..

राज के पास बैठी हुई, डॉली राज को देख कर मुस्कुरा रही थी….उसने राज को कोहिने से मारा…..जिससे राज का ध्यान टूटा और उसने डॉली की तरफ देखा….डॉली ने उसकी तरफ देखा और उसने शरम कर नज़रें झुका ली….

डॉली: ऐसे क्या देख रहे हो भैया…..नज़र लगाओगे हमारी भाभी को क्या….

सब लोग खड़े हो गये…..सुमन के बाद उसकी छोटी बेहन टीना कार से नीचे उतरी…. राज उसकी खूबसूरती देख कर भी डांग रह गया….येल्लो कलर के सलवार सूट मे वो सब पर कहर ढा रही थी…..भले ही टीना का बदन सुमन जितना भरा हुआ नही था…..पर उसके बदन के कटाव किसी को भी दीवाना बना सकते थे…किसी तरहा से राज ने टीना के ऊपेर से अपना ध्यान हटाया…..

सुमन और राज दोनो वेदी पर बैठ गये…..और पंडित ने मंतर पढ़ने चालू कर दिए….राज के दिल मे आज कई नयी उमंगे उठ रही थी…..जो सपना वो पिछले कुछ दिनो से देख रहा था….आख़िर वो आज सच्चाई मे बदल रहा था….वो मन मे सोच रहा था….कि आख़िर कार अब उसका का भी अपना भरा पूरा परिवार होगा….

आख़िर कार सब विधि पूर्वक सम्पन हुआ, और राज ने सुमन के घरवालो को रात को हवेली मे पार्टी मे आने का न्योता दिया….और बारात सुमन को साथ लेकर हवेली की ओर चल पड़ी…. जब राज की कार हवेली के अंदर पहुँची …..तो विशाल पहले से वहाँ पहुँच कर ढोल और बॅंड वालो के साथ खड़ा था….जैसे ही राज और बाकी के लोग कार से नीचे उतरे…..ढोल और बॅंड के ताल शुरू हो गये. और विशाल ने नाचना शुरू कर दिया…..

पूरा गाँव हवेली से आ रही ढोल और बॅंड की आवाज़ से गूँज उठा….और पूरा गाँव कुछ ही टाइम मे हवेली के परिसर मे इकट्ठा हो गया…..डॉली ने इतनी भीड़ मे भी तेज़ी से अपनी सास के साथ मिलकर सुमन के गृह प्रवेश का इंतज़ाम किया…सुमन का गृह प्रवेश हुआ, और राज घर आए सभी मेहमानों और गाँव वालो के लिए दोपहर के खाने का इंतज़ाम करवाने लगा….हवेली के पीछे की तरफ पूरे गाँव के लिए खाना बन रहा था……

 


धीरे शाम ढलती गयी……गाँव के सभी लोग दोपहर का खाना खा कर जा चुके थे…बाहर हवेली के परिसर मे रात को होने वाली पार्टी की तैयारी जोरों शॉरो से चल रही थी….जैसे शाम ढली हवेली हज़ारों बल्बो की रोशनी से जगमगा उठी….और बाहर डीजे पर म्यूज़िक शुरू हो गया…..और सुमन के घर वाले भी थोड़ी देर मे आ गये…. और पार्टी शुरू हो गयी…..

आज राज की सुहाग रात है…..पर राज के लिए ये कोई नयी बात नही थी…उसकी तो हर रात सुहाग रात होती आई है….पर आज एक ख़ास रात इसीलिए है, कि राज ने जिसे चाहा था, वो उसे मिल गया था…जब राज अपने रूम मे गया तो, सुमन बेड पर रेड कलर की साड़ी पहने हुए बेड पर सहमी सी बैठी हुई थी….राज उसके पास जाकर बैठ गया…..सुमन दिल से इस शादी के लिए बिल्कुल भी राज़ी नही थी….

राज : (थोड़ी देर चुप रहने के बाद) आप ने खाना तो खा लिया ना….

सुमन: (राज की कड़क आवाज़ सुन कर एक दम चोन्कते हुए) जी हां खा लिया….

सुमन से कुछ बोलते नही बन रहा था…..उसके हाथ पैर तो अंजाने डर के मारे वैसे ही कांप रहे थे….राज ने अपना एक हाथ सुमन के हाथ पर रख दिया….सुमन एक दम से सकपका गयी….आने वाले पलों का डर उसके मन मे घर किए हुए था… आख़िर सुमन शादी से पहले एक बार भी राज से नही मिली थी….

और ना ही उसकी कभी राज से फोन पर बात हुई थी….उसने घर वालो की मजबूरी के चलते ऐसे इंसान से शादी कर ली….जिससे वो बिकुल अंज़ान थी….कुछ दिन पहले तक कितने ही हसीन सपने उसकी आँखों मे थे…और उन सपनो को पूरा करने के लिए उसके घर वाले हर कदम पर उसके साथ रहे….पर होनी को शायद यही मंजूर था….

जिसके चलते सुमन को अपने से 12 साल बड़े आदमी से शादी करनी पड़ी…उसके सपने किसी रेत के घर की तरहा ढह गये….सुमन को यूँ गहरी सोच मे डूबा देख, राज ने उससे पूछा क्या बात है, कोई परेशानी है क्या….

सुमन: (चोन्कते हुए) जी जी नही.

राज : तो फिर किस सोच मे डूबी हुई हैं आप ?

सुमन: जी कुछ नही बस ऐसे ही .

राज : ह्म्म मैं जानता हूँ, आपको घर के याद आ रही होगी….कोई बात नही कल मे आप को आपके घर ले चलूँगा….

ये कहते हुए राज ने अपने हाथ से सुमन की चिन को पकड़ कर उसके झुके हुए चेहरे को ऊपेर उठाया….सुमन की आँखों की पलकें धीरे- 2 बंद होने लगी… नज़ाने क्यों वो राज से नज़रें नही मिलाना चाहती थी….उसके होन्ट ऐसे ठहरथरा रहे थी…जैसे कहर की सर्दी पड़ रही हो….

सुमन के लर्जते हुए गुलाबी होंठो को देख कर राज की आँखे वासना से चमक उठी, उसके होंठो पर मुस्कान फैल गयी…राज ने सुमन के गालों को अपने हाथों मे भर लिया….और उसके होंठो की तरफ अपने होंठो को बढाने लगा….जैसे -2 दोनो के बीच के दूरी काम हो रही थी….राज की साँसों की गरमी सुमन अपने फेस और नेक के आसपास सॉफ महसूस करने लगी… और उसके दिल की धड़कन तेज़ी से चलने लगी.

घबराहट के मारे सुमन पसीने से एक दम तरबतर हो चुकी थी…उसके गुलाबी होंठो के पास बहती हुई पसीने के बूँद किसी मोती की तरहा चमक रही थी….सुमन की पलकें जो बंद थी…वो तेज़ी से हिल रही थी…और उसके हाथ अपनी साड़ी के पल्लू को कस के पकड़े हुए थी….

राज ने उसके होंठो के पास आ चुके उस मोती के ऊपर अपने होंठो को रख दिया…और वो छोटी सी बूँद राज के होन्ट पड़ते ही गायब हो गयी….अपने होंठो के इतना पास राज के दहकते होंठो को महसूस करते ही, सुमन के बदन मे करेंट सा दौड़ गया….सुमन बुरी तरहा कांप गयी….जैसे ही उसने थोड़ा सा पीछे हटना चाहा…तो राज ने अपना एक हाथ सुमन की कमर मे और दूसरा हाथ उसके सर के पीछे से ले जाकर उसके सर को जाकड़ लिया…..

नाज़ुक सी सुमन राज की बाहों मे जाकड़ सी गये…वो हिल भी नही पा रही थी. और राज ने बिना कोई देर किए. उसके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया….एक पल के लिए सुमन के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गये….जैसे ही उसके आपस मे सटे हुए होन्ट अलग हुए, सुमन को ऐसे लगा…जैसे उसकी साँस अभी रुक जाएगी….राज के मुँह से आ रही शराब के स्मेल के कारण सुमन की तो जैसे साँस ही अटक गयी….पर अब सुमन के पास चुप रहने के अलावा कोई चारा भी नही था…..

अपने इलाक़े मे राज के चर्चे आम सी बात थी….और सुमन की कॉलेज भी राज के प्रभाव से अंजान नही थी….इसीलिए सुमन अब चाह कर भी कुछ नही कर सकती थी….किसी तरहा उसने अपने होंठो को आपस मे बंद किया….जैसे ही राज ने अपने होंठो को सुमन के होंठो से हटाया. तो सुमन ने राहत की साँस ली…..जब राज ने एक बार फिर से सुमन की ओर देखा, तो सुमन पसीने से भीग चुकी थी….राज ने उठ कर रूम का एसी ऑन क्या…..और टेबल पर पड़ी नाइटी उठा कर सुमन को देते हुए कहा…

राज : ये लो चेंज कर लो…..

सुमन ने अपने काँपते हुए हाथ को आगे बढ़ाया, और राज के हाथ से नाइटी ले ली. और कुछ देर वैसे ही बैठी रही….राज समझ गया…और उसने बाथरूम की तरफ इशरा करते हुए, बाथरूम मे जाकर चेंज करने को कहा….सुमन बेड से उतर कर बाथरूम मे चली गयी….राज बेड पर लेट गया….और सुमन का इंतजार करने लगा….जैसे ही सुमन ने बाथरूम मे जाकर डोर लॉक किया, तो वो दीवार से सट कर खड़ी हो गयी….

उसके हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे….थोड़ी देर साँस लेने के बाद सुमन ने अपनी साड़ी को उतराना चालू किया….जैसे-2 उसके बदन से वो भारी साड़ी अलग हो रही थी…. सुमन को सकुन मिल रहा था….सुमन ने साड़ी और ब्लाउस उतार दिया…अब उसके बदन पर रेड कलर की ब्रा और पैंटी थी…..ब्रा के कप्स का ऊपेरी हिस्सा ट्रॅन्स्परेंट था….सुमन ने नाइटी उठाई और पहनने लगी….जैसे ही उसने नाइटी पहन कर अपने आप को आयने मे देखा….तो वो और घबरा गयी…..

 


नाइटी बूब्स की जगह पर से बिल्कुल ट्रॅन्स्परेंट थी….बस एक रेड कलर का नेट लगा हुआ था….और नीचे से वो मुस्किल से उसकी आधी जाँघो को ढक पा रही थी….वो थोड़ी देर यही सोचाती रही कि वो इस हालत मे कैसे बाहर जाए….भले ही राज अब उसका पति था….पर आज भी वो राज से बिकुल अंजान थी….पर आख़िर उसे बाहर तो जाना ही थी….राज बेड पर लेटा हुआ, सुमन के आने का इंतजार कर रहा था….

थोड़ी देर डोर खुलने की आवाज़ हुई, राज एक दम से बेड पर उठ कर बैठ गया…तभी बाथरूम से सुमन घबराई हुई सी बाहर निकली…उसने अपनी बाहों को अपने बूब्स के आगे कर रखा था….वो सर को झुकाए हुए काँपते पैरो के साथ बेड की तरफ बढ़ रही थी….जैसे ही वो बेड के पास आई….राज ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसका हाथ पकड़ लिया….और उसे बेड के ऊपेर लेटा दिया,…जैसे ही सुमन बेड पर पीठ के बल लेती….राज उस पर किसी जंगली जानवर की तरहा सवार हो गया….

सुमन राज के नीचे दब कर रह गये….उसका पूरा बदन कांप रहा था…राज का कड़ा लंड सुमन की नंगी जाँघो पर पाजामा के अंदर से रगड़ खा रहा था….सुमन के बदन मे झुरजुरी से दौड़ गयी….सुमन ने बेड शीट को कस के दोनो हाथों से पकड़ लिया….

राज आज अपनी किस्मत पर बड़ा इतरा रहा था….आज उसके नीचे एक बहुत ही खूबसूरत कच्ची कली जो लेटी हुई थी…राज के हाथ सुमन के बदन को ऊपेर से नीचे तक नाप रहे थे…..और सुमन के बदन के हर हिसे मे करेंट सा दौड़ जाता..जहाँ पर राज के हाथ लगते…..राज ने एक बार फिर से सुमन के लर्जते हुए होंठो की तरफ देखा, तो उससे रहा नही गया….

अब रूम मे एसी ऑन होने के कारण ठंडक बढ़ गयी थी…राज ने अपने होंठो को फिर से सुमन के होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया…इस बार सुमन इसे अपनी नीयती मान कर बिकुल चुप्पी साधे लेटी हुई थी…जैसे जैसे एक बार फिर राज के होंठ उसके होंठो की तरफ बढ़ रहे थे….उसके गालों और नेक की स्किन मे सरसराहट होने लगी थी….राज ने जैसे ही अपने होंठो को सुमन के होंठो पर रखा….सुमन ने अपनी हाथों से बेड शीट को और कस के पकड़ लिया…..

राज ने इस बार कोई जल्द बाजी नही दिखाई…वो बड़े प्यार से सुमन के होंठो को चूस रहा था….उसे सुमन का होंठो स्वाद ऐसा लग रहा था….मानो जैसे वो शहद चूस रहा हो…राज के हाथ सुमन के बदन को सहलाते हुए, उसके बूब्स की तरफ बढ़ रहे थे…और सुमन के बदन मे सिहरन दौड़ जाती….जब राज के हाथ सुमन की चुचियों पर पहुँचे …तो सुमन का बदन एक दम से अकड़ गया….जैसे ही राज ने सुमन के चुचियों को पकड़ कर दबाया…..

तो राज को ऐसा लगा मानो….उसने रब्बर के सॉफ्ट बॉल पकड़ लिए हो….वो सुमन के दोनो चुचियों को हाथ मे लेकर धीरे-2 दबाते हुए, सुमन के होंठो को चूस रहा था… ना चाहते हुए भी सुमन को अब अपनी चुचियों पर राज के हाथ मस्त किए दे रहे थे…राज ने सुमन के होंठो से अपने होंठो अलग किए…और सुमन की नेक पर अपने होंठो को रगड़ता हुआ, अपने होंठो को सुमन के बूब्स की तरफ ले जाने लगा….

जैसे ही सुमन को अपनी चुचियों के ऊपेरी खुले हिस्से पर राज की गरम साँसों को अहसास हुआ, सुमन के बदन के रोए खड़े हो गये…..वो मस्ती मे एक दम से तिलमिला उठी….चाहे सुमन राज को दिल से पसंद नही करती थी…पर सुमन जवान थी…और उसकी इस जवानी की आग को राज और भड़का रहा था…..

सुमन ने अपना बदन एक दम ढीला छोड़ दिया था….और राज अपनी मन मानी करते हुए, उसके बदन को अपने हाथों से मसल रहा था, और होंठो को उसके बूब्स के ऊपेर आस पास रगड़ रहा था….राज सुमन के ऊपेर से हट गया, और सुमन को कंधों से पकड़ कर बेड पर उठा कर बैठा दिया…सुमन किसी कट्पुतली की तरहा उसके हाथों मे थी….जैसे ही सुमन उठ कर बैठी …राज ने उसकी नाइटी को पकड़ कर ऊपेर उठा कर निकाल दिया….

ये सब राज ने इतनी तेज़ी से किया, कि सुमन को पता चलता उसे पहले सुमन की नाइटी उसके बदन से अलग हो चुकी थी…सुमन शर्म से एक दम लाल हो गयी…उसने अपनी चुचियों के आगे अपनी बाहों को कर लिया….पर अगले ही पल राज ने उसके दोनो हाथों को पकड़ कर उसकी चुचियों के आगे से हटा कर उसे फिर से लेटा दिया….और अपने दहक्ते होंठो को उसकी बलखाती कमर पर रगड़ना चालू कर दिया….

सुमन राज के होंठो को अपने नाभि के पास पेट पर महसूस करके एक दम से मचल उठी….उसके होंठ थोड़ा सा खुल गये…मानो जैसे उसे साँस लेने मे तकलीफ़ हो रही हो….उसके मुँह से मस्ती भरी हुई सीईइ के आवाज़ निकल गयी….सुमन की साँसे उखड रही थी…और राज ने इस बार अपनी जीभ निकाल कर सुमन की नाभि के अंदर तक चाटना शुरू कर दिया….सुमन तो मस्ती मे पागल हो गयी….वो बड़ी मुस्किल से अपनी आवाज़ को दबाए हुए थी….

और तेज़ी से अपने सर को इधर उधर करते हुए….इस मस्ती से भरे पलों को सहन कर रही थी….वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ भरना चाहती थी….पर अपने से 12 साल बड़े आदमी के सामने वो ऐसा नही कर पा रही थी…राज सुमन की नाभि को चाट रहा था…उसके हाथ सुमन के कंधो पर उसके ब्रा स्ट्र्प्स पर आ चुके थे…..और उसने ब्रा स्ट्रॅप्स को पकड़ कर उसके कंधों से सरकाना चालू कर दिया….जैसे ही ब्रा के स्ट्रॅप्स सुमन के कंधों से सरक कर नीचे हुए….

राज उठ कर बैठ गया….और उसने स्ट्रॅप्स को बाहों से निकाल दिया…और उसने अपने हाथों को सुमन की पीठ के नीचे ले जाकर उसकी ब्रा के हुक्स को खोल दिया…ब्रा के स्ट्रॅप पहले से सुमन की बाहों से निकल चुके थे…और फिर राज ने उसकी ब्रा को पकड़ कर ऊपेर से हटा दिया….

सामने सुमन की अनछुइ चुचियों को देख राज की आँखों मे अजीब सी चमक आ गयी…वो भेड़िए की तरहा सुमन की चुचियों पर टूट पड़ा…उसने दोनो हाथों मे सुमन की चुचियों को पकड़ कर मसलते हुए चूसना शुरू कर दिया…सुमन मस्ती और दर्द के मिलजुले असर के कारण बेड पर लेटी हुई मचल रही थी…

फिर राज ने उसकी एक चुचि को आधे से ज़्यादा मुँह मे भर लिया….और चूसने लगा….सुमन के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….उसका पूरा बदन उतेज्ना की आग मे सुलगने लगा…..उसे अपनी पैंटी मे नमी महसूस हो रही थी….राज ने चुचि चूसना छोड़ कर सुमन की पैंटी को दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरका कर निकाल दिया….और फिर से सुमन की जाँघो के बीच मे आकर उसके ऊपेर लेट गया…अब राज का तना हुआ लंड सुमन की चूत के छेद पर रगड़ खा रहा था…

सुमन वासना के सागर मे डूबी जा रही थी….उसकी चूत मे सरसराहट बढ़ती जा रही थी…अब ना चाहते हुए भी उसका दिल कर रहा था, कि राज अपना लंड उसकी चूत मे घुसा कर जल्दी से उसकी चूत की आग को ठंडा कर दे…

जब राज ने सुमन को यूँ मस्ती मे अपने होंठो को अपने दाँतों से काटते हुए देखा, तो राज का जोश और बढ़ गया, और उसने सुमन के होंठो को एक बार फिर से अपने होंठो मे जाकड़ लिया…इस बार सुमन ने भी अपने होंठो को खोल लिया….राज के मुँह से आ रही स्मेल मानो जैसे सुमन को नशा सा कर रही हो….राज ने सुमन के नीचले होन्ट को अपने होंठो मे भर लिया, और ज़ोर ज़ोर से चूसना चालू कर दिया…

सुमन भी अपने होंठो को ढीला छोड़ कर मस्ती मे राज से चुस्वा रही थी…सुमन को भी पता नही चला, कब उसने बेड शीट को छोड़ कर अपनी बाहों को राज की पीठ पर कस लिया….राज से अब रहा नही जा रहा था…राज ने अपना एक हाथ नीचे करके अपने लंड को पकड़ लिया, और सुमन की चूत के छेद पर टिका कर ज़बरदस्त धकका मारा….राज के लंड का मोटा सुपाडा सुमन की टाइट चूत के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुस गया…

 
जैसे ही राज के लंड का सुपाडा सुमन की चूत के छेद अंदर घुसा, सुमन दर्द से बिलबिला उठी…उसकी आँखे फॅट गयी….और आँखों से आँसू बह निकल आए….

सुमन: अहह बहुत दर्द हो रहा है ओह निकालो इसे बाहर….

राज : आहह कोई बात नही जान थोड़ी देर दर्द होगा….फिर ठीक हो जायगा,,,,..

राज ने सुमन के दर्द की परवाह किए बिना फिर से एक और जोरदार धक्का मारा…इस बार राज का आधे से ज़्यादा लंड सुमन की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस्स गया….सुमन दर्द के मारे चिल्ला उठी…उसकी चूत से खून बह कर बेड शीट पर गिर रहा था….उसके गाल उसकी आँखों से निकले आँसुओ से गीले हो चुके थे…

राज ने थोड़ी देर रुक कर उसकी चुचियों को चूसना चालू कर दिया….कुछ ही देर मे सुमन की चुचियों के निपल एक दम तन गये…अब सुमन का दर्द काफ़ी हद तक कम हो चुका था….और उसने रोना बंद कर दिया था…सुमन के बदन मे फिर से एक बार मस्ती छाने लगी थी…..राज ने सुमन की चुचियों को बारी-2 चूस्ते हुए, जितना लंड अंदर घुसा था….उसे धीरे-2 अंदर बाहर करना चालू कर दिया…जैसे ही राज अपना लंड और अंदर घुसाने की कॉसिश करता…सुमन दर्द के मारे चीख उठती…और राज की पीठ पर अपने हाथों को कस लेती….

सुमन की चूत मे आ रहे पानी के कारण राज का लंड एक दम चिकना हो गया. और आसानी से उसकी चूत के दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगा…थोड़ी ही देर मे राज का पूरा लंड सुमन की चूत के अंदर बाहर होने लगा…..

जब राज के लंड का सुपाडा सुमन की टाइट चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होता…सुमन के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती….उसे अपनी चूत की दीवारों पर राज के लंड की रगड़ दर्द के बावजूद मदहोश किए जा रही थी…राज अपने धक्को की रफतार को हर धक्के के साथ बढ़ा रहा था…और सुमन के हाथ तेज़ी से राज की पीठ को सहला रहे थे….

अचानक से सुमन को ऐसा लगा मानो उसकी चूत मे से आग निकलने लगी है….उसके बदन का सारा खून उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा….अब लंड की रगड़ चूत के दीवारों पर होती…तो सुमन मदहोशी से भरी आवाज़ मे सिसका उठती….राज को पता चल गया था, कि सुमन झड़ने के बेहद करीब है….और उसने अपने धक्कों की रफ़्तार को और बढ़ा दिया….

सुमन तेज़ी से अंदर बाहर हो रहे हो राज के लंड के सुपाडे की रगड़ को अपनी चूत पर बर्दास्त नही कर पाई….उसका पूरा बदन एक दम से ऐंठ गया….और उसने अपने होंठो को राज के होंठो की तरफ बढ़ा दिया…राज ने पूरे जोश के साथ अपने लंड से उसकी चूत को चोदना चालू कर दिया….और फिर सुमन की चूत से उसके लावा उगल पड़ा..

सुमन इतनी मस्त हो चुकी थी, कि उसने अपने होंठो मे राज के होंठो को बुरी तरहा से जाकड़ रखा था……और राज भी सुमन की कुँवारी चूत की गर्मी को ज़्यादा ना झेल सका…उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ छूट कर सुमन की चूत की दीवारों पर गिरने लगी….सुमन अपनी चूत की दीवारों पर राज के लंड से निकल रहे गरम वीर्य को महसूस करके मस्ती मे सिसक उठी….अगले ही पल जैसे सुमन को होश सा आया, तो उसने अपने होंठो को राज के होंठो से हटा लिया….और शरमाते हुए दूसरी ओर देखने लगी…..

अगली सुबह जब सुमन उठी….तो उसने अपने आप को राज की बाहों मे नंगा पाया…वो अपनी हालत देख कर एक दम से शरमा गयी….और जल्दी से उठ कर अपने बॅग मे से अपने लिए, एक सलवार कमीज़ निकाल कर बाथरूम मे घुस गयी….उधर डॉली सुबह से उठ चुकी थी….और अपने ससुराल वापिस जाने के तैयारी कर रही थी…उसके सास ससुर पहले से ही जा चुके थे……

दूसरी तरफ सुमन के घर पर अमित और उसकी छोटी बेहन तैयार होकर कॉलेज जाने की तैयारी कर रहे थे….9 बजे दोनो घर से निकल पड़े…..जब दोनो कॉलेज पहुँचे , तो टीना सीधा अपनी क्लास मे चली गयी…पर अमित क्लास मे नही गया, और सीधा पार्क की तरफ चल पड़ा….तभी उसे रघु के गॅंग के कुछ आदमी वहाँ बैठे हुए दिखाई दिए.

जब वो उनकी तरफ बढ़ा तो अमित को ये देख कर बहुत हैरानी हुई, कि सभी के चहरों पर कोई शिकन तक नही है….कुछ दिन पहले उनका माल पकड़ा गया था. और वो लोग बिना किसी डर और खोफ़ के पार्क मे बैठे हुए हंस रहे थे….अमित ने तुरंत अपना इरादा बदल दिया, और उनके पास लगे एक पेड़ के पास जाकर खड़ा हो गया, ताकि उनमे से कोई उसे देख ना सकें…जैसे ही वो वहाँ पेड़ के पीछे छुप कर खड़ा हुआ, तभी उसे सामने से रघु भी आता हुआ दिखाई दिया…..

रघु: और कैसे हो पन्टर लोग…..सब मस्त हैं ना….

आदमी: एक दम मस्त रघु भाई…..पर उस साले का क्या हुआ…

रघु: कल ही पता चला है, उसे छोड़ दिया गया…..भाई जिस काम के लिए उसे अंदर करवाया था, अब वो हो गया है, तो उसे अंदर रख कर कोई फ़ायदा नही था…उसकी बेहन की शादी राज जी से हो गयी है….अब हम लोग ये बेकार के धंधे छोड़ देंगे…और जाकर अपना खुद का बिज्निस करते हैं….राज बाबू जी ने 25 लाख रुपये दिए हैं….

अमित के पैरो के नीचे से मानो जैसे ज़मीन खिसक गयी हो, वो मन मे सोचने लगा…..मे कितना बड़ा बेवकूफ़ था, मेरी वजह से मेरी बेहन की जिंदगी बर्बाद हो रही थी….और मे छी कैसा भाई हूँ मैं…..मुझ ये सारी बात घर जाकर सब को बतानी होगी….हां मुझ बतानी होगी…..मैं अपनी बेहन की लाइफ को ऐसे खराब नही होने दूँगा….इन्होने ने मेरे साथ धोखा किया है….इसकी सज़ा इन्हे भुगतनी पड़ेगी….

अमित ने टीना की पहली क्लास ख़तम होने का इंतजार किया, जैसे ही टीना पहली क्लास ख़तम होते ही बाहर आई. अमित उसके पास गया….

अमित: टीना हमे अभी घर चलना है…कुछ ज़रूरी काम है.

टीना: पर अचानक से क्या….

अमित: तुम चलो तो सही….मे घर चल कर बताता हूँ.

टीना: पर बात क्या है.

अमित: मैने कहा ना पहले घर चलो…

और अमित टीना को लेकर घर आ गया…..जैसे ही वो घर पहुँचा …घर के बाहर राज की कार खड़ी थी…जिसे देख अमित और बौखला गया…वो जल्दी से बाइक से नीचे उतरा, और घर के अंदर जाने लगा…टीना ने जब राज की कार देखे…तो वो एक दम से खुश हो गयी….

 
टीना: भाई लगता है….सुमन दीदी आई हैं….

और टीना भागते हुए अंदर चली गयी….अंदर हाल मे राज और टीना सोफे पर बैठे हुए थी….उनके साथ अजीत शर्मा, बैठा हुआ था…और वीना अंदर किचिन मे थी…सुमन को देखते ही…टीना उसकी तरफ तेज़ी से बढ़ी….और सुमन भी सोफे से खड़ी हो गयी….दोनो बहनें एक दूसरे के गले लगी…टीना की आँखों मे आँसू झलक आए…

सुमन: अर्रे पागल हो क्या, क्यों रो रही हो….

टीना: (मुस्कुरा कर अपने आँसू सॉफ करते हुए) दीदी आपके जाने के बाद ये घर एक दम सूना सा हो गया है…आप की बहुत याद आती है…..

सुमन: मुझ भी आप सब की बहुत याद आती है.

ये कहते हुए सुमन की आँखों मे भी आँसू आ गये….अमित वहाँ दूर खड़ा सब देख रहा था…जब राज ने उसे इस तरहा से देखा तो…उसने अमित से पूछा.

राज : कैसे हो अमित.

अमित: ठीक हूँ…

ये कह कर वो सीधा अपने रूम मे चला गया…..टीना सुमन को साथ लेकर अपने रूम मे आ गयी, और उससे बातें करने लगी….उधर अमित अपने रूम मे तेज़ी से इधर उधर टहल रहा था…उसे कुछ समझ मे नही आ रहा था, कि वो क्या करे …अब बहुत देर हो चुकी थी….और बिना सोचे समझे कुछ भी करना ठीक नही था…तभी उसे टीना के रूम से सुमन और टीना के हँसने की आवाज़ आई….वो सीधा टीना के रूम मे चला गया…

जैसे ही अमित रूम मे आया, तो सुमन खड़ी हो गयी…और अपने भाई के गले लग कर उससे उसका हाल चाल पुन्छने लगी….

सुमन: क्या बात है अमित….मुझसे बात किए बिना ही अंदर चला आया…अपनी दीदी से बात नही करेगा….

अमित: (होंठो पर झूठी मुस्कान लाते हुए) नही दीदी ऐसे बात नही है…दरअसल मेरी तबीयत कुछ ठीक नही थी आज…..आप कैसे हो…

सुमन: मे ठीक हूँ….

अमित: दीदी आप वहाँ खुश तो है ना ?

सुमन: हां मे खुस हूँ….बहुत खुस….

अमित: दीदी मुझ आपसे कुछ बात करनी थी….

सुमन: हां बोल ना क्या बात है…

अमित: दीदी अकले मे….

सुमन: ऐसी क्या बात है जनाब…

अमित: दीदी प्लीज़…

सुमन: अच्छा-2 चल तेरे रूम मे चल कर बात करते हैं….

दोनो अमित के रूम मे आ गये….

सुमन: बेड पर बैठते हुए) हाँ अब बोल क्या बात है.

अमित: वो बात ऐसी है वो मे…

सुमन: ये वाउ ओ क्या कर रहा है….सही से बोल ना क्या कहना चाहता है….

अमित की आँखों मे आँसू आ गये….सुमन जल्दी से खड़ी हुई, और अमित के झुके फेस को अपने हाथों मे भरते हुए, ऊपेर उठा कर उसके आँसुओं को सॉफ किया….

सुमन: पागल लड़कियों की तराहा क्यों रो रहा है…

अमित: मुझ माफ़ कर दो दीदी मुझ से बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है….

सुमन: तू बता तो सही क्या कहना चाहता है…

अमित ने अपने आँसुओं को सॉफ किया, और सुमन को सारी बात बता दी….सुमन के पैरो तले से ज़मीन खिसक गयी….उसकी आँखे खुली की खुली रह गयी….उसे यकीन नही हो रहा था, कि अमित ने जो कहा वो सच है…..अमित की बात सुन कर सुमन की आँखे भी आँसू से भर गये….

अमित: दीदी मुझ लगता है…हमे ये बात मम्मी पापा को बता देनी चाहिए….

सुमन: (जल्दी से अपने आँसुओं को सॉफ करते हुए) नही अमित..ये ठीक नही होगा…वो तो पहले से बहुत दुखी हैं…ऐसे मे अगर उन्हे ये बात पता चली, उनके दिल पर नज़ाने क्या बीते गे….और वैसे भी अब बहुत देर हो चुकी है…तुम ये बात किसी को नही कहोगे…अब यही मेरी जिंदगी की नीयती है…प्लीज़ मम्मी पापा से कुछ ना बोलना…

अमित: पर दीदी ?

सुमन: तुम्हे मेरी कसम अमित. प्लीज़ तुम ये बात किसी को नही बताओगे…

तभी अजीत शर्मा अमित के रूम मे आ गया…..

अजीत शर्मा: अब दोनो भाई बेहन बातें ही करते रहोगे..चलो नीचे नाश्ता तैयार है कर लो….मे टीना को बोल कर आता हूँ…

सुमन बुझी हुई सी नीचे आ गयी….अमित वहीं अपने रूम मे बैठा , अपनी किस्मत को कोस रहा था….अब वो चाह कर भी कुछ नही कर सकता था….भले ही राज का सुमन को पाने का रास्ता ग़लत था….पर उसने सुमन से शादी की थी….वहाँ से चलने के बाद जब राज और सुमन हवेली की ओर जा रहे थे…..तब सुमन का फेस एक दम उतरा हुआ सा था…उसकी तो एक ही पल मे सारी खुशियाँ छीन ली गयी थी…उसे पति तो मिला. पर दौलत के नशे मे उसके पति की आँखे बंद थी….

आज राज की शादी को तीन महीने हो चुके थी….जून का मंथ शुरू ही हुआ था, और साहिल की सम्मर वकेशन स्टार्ट हो चुकी थी….जैसे ही साहिल घर वापिस आया, तो वो डॉली से गाँव जाने की ज़िद्द करने लगा….और आख़िर डॉली ने साहिल की बात मानते हुए, गाँव जाने का फैंसला कर लिया….अगले ही दिन साहिल डॉली और रवि तीनो गाँव पहुँच गये…..राज अपनी बेहन और भानजे को देख कर बहुत खुश हुआ,….

दोस्तो मे आप को यहाँ पर ये बता देना चाहता हूँ, कि ये उस समय की बात है जब मोबाइल फोन की शुरुआत भी नही हुई थी.….और अगर किसी का हाल चाल जानना होता तो लॅंड लाइन के सहारे रहने पड़ता था…जिस दिन डॉली साहिल और रवि गाँव पहुँचे , तो अजीत शर्मा (डॉली का ससुर) गाँव हवेली मे फोन करना भूल गया था, कि डॉली और साहिल ठीक से पहुँचे है कि नही…..

 
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