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Guest
दो कमरे खाली थे, उसके बाद की रो का आखरी कमरा.... "आहह ! हियर शी ईज़.... उफ़फ्फ़ क्या सेक्सी लुक मे है, जान ना ले ले".....
अखिल ने डोर नॉक किया... डोर नॉक होते ही काया मुस्कुराने लगी... अपने बिस्तर पे पड़ी गाउन से खुद को कवर की और दरवाजा खोलने चली आई.... जैसे ही दरवाजा खुला, अखिल झट से अंदर घुस गया....
काया.... काफ़ी कूल लग रहे हैं एस.पी सर.... बताइए किस बेचैनी ने आप को यहाँ तक खींच लिया...
अखिल.... थोड़ा सांस तो लेने दो... बहुत मेहाँत कर के आया हूँ काया जी....
काया.... हां-हां सांस लीजिए, बिस्तर पर लेटिये, उधर जूस रखा है उसे भी पी सकते हैं. फ्रिड्ज मे सॉफ्ट ड्रिंक है वो भी ले सकते हैं... 11:45 तक का टाइम आप का है... और बस 5 मिनट बचे हैं...
अखिल.... क्या मतलब 5 मिनट ही बचे हैं.... ये तो चीटिंग है, अभी तो आया हूँ...
काया.... सॉरी सर, आप अभी आएँ या 11:30 पर एंट्री कीजिए. टाइम ईज़ टाइम. मैने भी तो रिस्क लिया है ना...
अखिल.... आप ने कैसा रिस्क काया जी...
काया.... ऊहह.. हूऊ.. बड़े भोले बन रहे हैं... देर रात किसी को अपने कमरे मे बुलाया, और दरवाजा लॉक... सारा रिस्क और बदनामी तो मेरी ही है ना.. आप का क्या जाएगा...
अखिल... ये क्या बात हुई... सुपरिटेंडेंट ऑफ पोलीस की कोई रेप्पो नही क्या... क्या मैं बदनाम नही होऊँगा...
काया.... अच्छा जी, बड़े जल्दी आप के विचार बडाल गये एस.पी सर... कहाँ आज सुबह कह रहे थे पोलीस वैसे भी बदनाम है, और अब कह रहे हैं मैं बदनाम हो जाउन्गा.... थोड़े कन्फ्यूज़ लगते हैं...
अखिल.... हां कह सकती है... चलो ये 5 मिनट भी होने को है.... बाइ बाइ मिस... पर हां एक बात साची कहूँगा... आप को देख कर ही कन्फ्यूज़ हो जाता हूँ.... दिमाग़ के कनेक्षन टूट जाते हैं.... शायद दिल का मामला है... गौर कीजिएगा.... चलता हूँ...
अखिल के जाते ही काया ने दरवाजा बंद किया, और खुद को दरवाजे से टिका कर अखिल का आना, और उसकी बातों को याद कर के मुस्कुराने लगी.... "दम तो है आप मे एस.पी सर, देखते हैं आगे क्या होता है."
इधर अखिल नीचे उतरा तो मिश्रा जी गाड़ी मे बैठ कर पॅक पर पॅक लगाए जा रहे थे...
अखिल.... मिश्रा जी, कहा था अलर्ट रहो और आप हैं कि यहाँ बैठ कर पी रहे हैं...
ड्राइवर.... अर्रे सर पीने के बाद ही तो ज़्यादा अलर्ट होता हूँ.... वैसे आप को देख कर लगता है, मेडम ने भगा दिया... एक पॅक आप भी मारो... आओ गम भुला लो सर जी..
अखिल.... मिश्रा जी....... मैं भी कहाँ किस से किस बारे मे बात करने जा रहा था... रहने दो आप गाड़ी चलाओ...
ड्राइवर.... सर जी, उपर 45 हो गयी तो क्या हमे इश्क़ और माशुका से मिलने की फीलिंग पता ना होगी... जाने दो सर जी, आप तो अभी समझना शुरू किए हैं... और मैं तो गोते लगाए बैठा हूँ...
अखिल.... वाहह ! क्या बात है मिश्रा जी. पहले तो मुझे मंफ़ कीजिए और अब ज़रा उस गोते की कहानी हमे भी सुनाएए...
फिर क्या था.. कुछ मिश्रा जी फरमाते, और कुछ एस.पी साहब अपनी सुनाते.. और जुगलबंदी बनती चली गयी.....
................................
,,,,,,,,,,
कानपुर की सुबह....
ड्रस्टी आज जॉगिंग पर निकलने से पहले अपने अम्मी-अब्बू के कमरे गयी... दोनो ही बैठ कर आपस मे कुछ बातें कर रहे थे... ड्रस्टी को देख कर दोनो मुस्कुराते अपने पास बुलाने लगे...
ड्रस्टी... अब्बू एक बात बहुत दिनो से पुच्छना चाह रही थी...
नवाब... हाँ बेटा पुछो ना..
ड्रस्टी... अब्बू वो लड़का जो उस दिन आया था, उस की कहानी क्या है...
इतने मे ड्रस्टी की अम्मी उसे आँखें दिखाती बोलने लगी.... "जिन मामलों का तुम से कोई लेना देना नही, उसे जान कर क्या करोगी".
नवाब... बेगम, ऐसे बात नही करते... बताता हूँ बेटा. ये कोई मामूली लड़का नही है, ये बहुत बड़े इंडस्ट्राइलिस्ट का बेटा है. कई साल पहले दीवान साहब इसके यहाँ काम करते थे. यूँ समझ लो कि वो उस घर के सब से खास आदमी थे...
ड्रस्टी.... ह्म ! फिर क्या हुआ अब्बू, और ये दीवान अंकल को क्यों ढूंड रहा है...
नबाब.... मुझे भी नही पता बेटा. बस दीवान साहब जब शिमला से यहाँ शिफ्ट हुए तो उन्होने बताया पूर्वी और इस लड़के के बीच का कोई मसला था, और उन्होने इनके यहाँ का काम छोड़ दिया.
ड्रस्टी... ओह्ह्ह ! थॅंक्स अब्बू, अब मैं चलती हूँ....
अखिल ने डोर नॉक किया... डोर नॉक होते ही काया मुस्कुराने लगी... अपने बिस्तर पे पड़ी गाउन से खुद को कवर की और दरवाजा खोलने चली आई.... जैसे ही दरवाजा खुला, अखिल झट से अंदर घुस गया....
काया.... काफ़ी कूल लग रहे हैं एस.पी सर.... बताइए किस बेचैनी ने आप को यहाँ तक खींच लिया...
अखिल.... थोड़ा सांस तो लेने दो... बहुत मेहाँत कर के आया हूँ काया जी....
काया.... हां-हां सांस लीजिए, बिस्तर पर लेटिये, उधर जूस रखा है उसे भी पी सकते हैं. फ्रिड्ज मे सॉफ्ट ड्रिंक है वो भी ले सकते हैं... 11:45 तक का टाइम आप का है... और बस 5 मिनट बचे हैं...
अखिल.... क्या मतलब 5 मिनट ही बचे हैं.... ये तो चीटिंग है, अभी तो आया हूँ...
काया.... सॉरी सर, आप अभी आएँ या 11:30 पर एंट्री कीजिए. टाइम ईज़ टाइम. मैने भी तो रिस्क लिया है ना...
अखिल.... आप ने कैसा रिस्क काया जी...
काया.... ऊहह.. हूऊ.. बड़े भोले बन रहे हैं... देर रात किसी को अपने कमरे मे बुलाया, और दरवाजा लॉक... सारा रिस्क और बदनामी तो मेरी ही है ना.. आप का क्या जाएगा...
अखिल... ये क्या बात हुई... सुपरिटेंडेंट ऑफ पोलीस की कोई रेप्पो नही क्या... क्या मैं बदनाम नही होऊँगा...
काया.... अच्छा जी, बड़े जल्दी आप के विचार बडाल गये एस.पी सर... कहाँ आज सुबह कह रहे थे पोलीस वैसे भी बदनाम है, और अब कह रहे हैं मैं बदनाम हो जाउन्गा.... थोड़े कन्फ्यूज़ लगते हैं...
अखिल.... हां कह सकती है... चलो ये 5 मिनट भी होने को है.... बाइ बाइ मिस... पर हां एक बात साची कहूँगा... आप को देख कर ही कन्फ्यूज़ हो जाता हूँ.... दिमाग़ के कनेक्षन टूट जाते हैं.... शायद दिल का मामला है... गौर कीजिएगा.... चलता हूँ...
अखिल के जाते ही काया ने दरवाजा बंद किया, और खुद को दरवाजे से टिका कर अखिल का आना, और उसकी बातों को याद कर के मुस्कुराने लगी.... "दम तो है आप मे एस.पी सर, देखते हैं आगे क्या होता है."
इधर अखिल नीचे उतरा तो मिश्रा जी गाड़ी मे बैठ कर पॅक पर पॅक लगाए जा रहे थे...
अखिल.... मिश्रा जी, कहा था अलर्ट रहो और आप हैं कि यहाँ बैठ कर पी रहे हैं...
ड्राइवर.... अर्रे सर पीने के बाद ही तो ज़्यादा अलर्ट होता हूँ.... वैसे आप को देख कर लगता है, मेडम ने भगा दिया... एक पॅक आप भी मारो... आओ गम भुला लो सर जी..
अखिल.... मिश्रा जी....... मैं भी कहाँ किस से किस बारे मे बात करने जा रहा था... रहने दो आप गाड़ी चलाओ...
ड्राइवर.... सर जी, उपर 45 हो गयी तो क्या हमे इश्क़ और माशुका से मिलने की फीलिंग पता ना होगी... जाने दो सर जी, आप तो अभी समझना शुरू किए हैं... और मैं तो गोते लगाए बैठा हूँ...
अखिल.... वाहह ! क्या बात है मिश्रा जी. पहले तो मुझे मंफ़ कीजिए और अब ज़रा उस गोते की कहानी हमे भी सुनाएए...
फिर क्या था.. कुछ मिश्रा जी फरमाते, और कुछ एस.पी साहब अपनी सुनाते.. और जुगलबंदी बनती चली गयी.....
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कानपुर की सुबह....
ड्रस्टी आज जॉगिंग पर निकलने से पहले अपने अम्मी-अब्बू के कमरे गयी... दोनो ही बैठ कर आपस मे कुछ बातें कर रहे थे... ड्रस्टी को देख कर दोनो मुस्कुराते अपने पास बुलाने लगे...
ड्रस्टी... अब्बू एक बात बहुत दिनो से पुच्छना चाह रही थी...
नवाब... हाँ बेटा पुछो ना..
ड्रस्टी... अब्बू वो लड़का जो उस दिन आया था, उस की कहानी क्या है...
इतने मे ड्रस्टी की अम्मी उसे आँखें दिखाती बोलने लगी.... "जिन मामलों का तुम से कोई लेना देना नही, उसे जान कर क्या करोगी".
नवाब... बेगम, ऐसे बात नही करते... बताता हूँ बेटा. ये कोई मामूली लड़का नही है, ये बहुत बड़े इंडस्ट्राइलिस्ट का बेटा है. कई साल पहले दीवान साहब इसके यहाँ काम करते थे. यूँ समझ लो कि वो उस घर के सब से खास आदमी थे...
ड्रस्टी.... ह्म ! फिर क्या हुआ अब्बू, और ये दीवान अंकल को क्यों ढूंड रहा है...
नबाब.... मुझे भी नही पता बेटा. बस दीवान साहब जब शिमला से यहाँ शिफ्ट हुए तो उन्होने बताया पूर्वी और इस लड़के के बीच का कोई मसला था, और उन्होने इनके यहाँ का काम छोड़ दिया.
ड्रस्टी... ओह्ह्ह ! थॅंक्स अब्बू, अब मैं चलती हूँ....