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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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दो कमरे खाली थे, उसके बाद की रो का आखरी कमरा.... "आहह ! हियर शी ईज़.... उफ़फ्फ़ क्या सेक्सी लुक मे है, जान ना ले ले".....

अखिल ने डोर नॉक किया... डोर नॉक होते ही काया मुस्कुराने लगी... अपने बिस्तर पे पड़ी गाउन से खुद को कवर की और दरवाजा खोलने चली आई.... जैसे ही दरवाजा खुला, अखिल झट से अंदर घुस गया....

काया.... काफ़ी कूल लग रहे हैं एस.पी सर.... बताइए किस बेचैनी ने आप को यहाँ तक खींच लिया...

अखिल.... थोड़ा सांस तो लेने दो... बहुत मेहाँत कर के आया हूँ काया जी....

काया.... हां-हां सांस लीजिए, बिस्तर पर लेटिये, उधर जूस रखा है उसे भी पी सकते हैं. फ्रिड्ज मे सॉफ्ट ड्रिंक है वो भी ले सकते हैं... 11:45 तक का टाइम आप का है... और बस 5 मिनट बचे हैं...

अखिल.... क्या मतलब 5 मिनट ही बचे हैं.... ये तो चीटिंग है, अभी तो आया हूँ...

काया.... सॉरी सर, आप अभी आएँ या 11:30 पर एंट्री कीजिए. टाइम ईज़ टाइम. मैने भी तो रिस्क लिया है ना...

अखिल.... आप ने कैसा रिस्क काया जी...

काया.... ऊहह.. हूऊ.. बड़े भोले बन रहे हैं... देर रात किसी को अपने कमरे मे बुलाया, और दरवाजा लॉक... सारा रिस्क और बदनामी तो मेरी ही है ना.. आप का क्या जाएगा...

अखिल... ये क्या बात हुई... सुपरिटेंडेंट ऑफ पोलीस की कोई रेप्पो नही क्या... क्या मैं बदनाम नही होऊँगा...

काया.... अच्छा जी, बड़े जल्दी आप के विचार बडाल गये एस.पी सर... कहाँ आज सुबह कह रहे थे पोलीस वैसे भी बदनाम है, और अब कह रहे हैं मैं बदनाम हो जाउन्गा.... थोड़े कन्फ्यूज़ लगते हैं...

अखिल.... हां कह सकती है... चलो ये 5 मिनट भी होने को है.... बाइ बाइ मिस... पर हां एक बात साची कहूँगा... आप को देख कर ही कन्फ्यूज़ हो जाता हूँ.... दिमाग़ के कनेक्षन टूट जाते हैं.... शायद दिल का मामला है... गौर कीजिएगा.... चलता हूँ...

अखिल के जाते ही काया ने दरवाजा बंद किया, और खुद को दरवाजे से टिका कर अखिल का आना, और उसकी बातों को याद कर के मुस्कुराने लगी.... "दम तो है आप मे एस.पी सर, देखते हैं आगे क्या होता है."

इधर अखिल नीचे उतरा तो मिश्रा जी गाड़ी मे बैठ कर पॅक पर पॅक लगाए जा रहे थे...

अखिल.... मिश्रा जी, कहा था अलर्ट रहो और आप हैं कि यहाँ बैठ कर पी रहे हैं...

ड्राइवर.... अर्रे सर पीने के बाद ही तो ज़्यादा अलर्ट होता हूँ.... वैसे आप को देख कर लगता है, मेडम ने भगा दिया... एक पॅक आप भी मारो... आओ गम भुला लो सर जी..

अखिल.... मिश्रा जी....... मैं भी कहाँ किस से किस बारे मे बात करने जा रहा था... रहने दो आप गाड़ी चलाओ...

ड्राइवर.... सर जी, उपर 45 हो गयी तो क्या हमे इश्क़ और माशुका से मिलने की फीलिंग पता ना होगी... जाने दो सर जी, आप तो अभी समझना शुरू किए हैं... और मैं तो गोते लगाए बैठा हूँ...

अखिल.... वाहह ! क्या बात है मिश्रा जी. पहले तो मुझे मंफ़ कीजिए और अब ज़रा उस गोते की कहानी हमे भी सुनाएए...

फिर क्या था.. कुछ मिश्रा जी फरमाते, और कुछ एस.पी साहब अपनी सुनाते.. और जुगलबंदी बनती चली गयी.....

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कानपुर की सुबह....

ड्रस्टी आज जॉगिंग पर निकलने से पहले अपने अम्मी-अब्बू के कमरे गयी... दोनो ही बैठ कर आपस मे कुछ बातें कर रहे थे... ड्रस्टी को देख कर दोनो मुस्कुराते अपने पास बुलाने लगे...

ड्रस्टी... अब्बू एक बात बहुत दिनो से पुच्छना चाह रही थी...

नवाब... हाँ बेटा पुछो ना..

ड्रस्टी... अब्बू वो लड़का जो उस दिन आया था, उस की कहानी क्या है...

इतने मे ड्रस्टी की अम्मी उसे आँखें दिखाती बोलने लगी.... "जिन मामलों का तुम से कोई लेना देना नही, उसे जान कर क्या करोगी".

नवाब... बेगम, ऐसे बात नही करते... बताता हूँ बेटा. ये कोई मामूली लड़का नही है, ये बहुत बड़े इंडस्ट्राइलिस्ट का बेटा है. कई साल पहले दीवान साहब इसके यहाँ काम करते थे. यूँ समझ लो कि वो उस घर के सब से खास आदमी थे...

ड्रस्टी.... ह्म ! फिर क्या हुआ अब्बू, और ये दीवान अंकल को क्यों ढूंड रहा है...

नबाब.... मुझे भी नही पता बेटा. बस दीवान साहब जब शिमला से यहाँ शिफ्ट हुए तो उन्होने बताया पूर्वी और इस लड़के के बीच का कोई मसला था, और उन्होने इनके यहाँ का काम छोड़ दिया.

ड्रस्टी... ओह्ह्ह ! थॅंक्स अब्बू, अब मैं चलती हूँ....

 


ड्रस्टी जॉगिंग के लिए निकल आई पर सारी बातें उसके दिमाग़ मे नाच रही थी.... वो जॉगिंग करती हुई भी सारी बातों को ही सोच रही थी.... और फिर से आज दोनो एक साथ उसी बेंच पर बैठे थे.....

"अब्बू ने कहा, पूर्वी और इस लड़के का मसला है, तो फिर इन दोनो ने एक दूसरे को पहचाना क्यों नही. और कितनी पुरानी बात है... क्या दोनो किड थे... और दोनो यदि किड होंगे तो दोनो के बीच कैसा मसला हो सकता है... क्या कोई खिलोने को ले कर झगड़ा हुआ था. या बच्चो का कोई झगड़ा... अन्न्ह्ह्ह कुछ समझ मे नही आ रहा. और बात इतनी पुरानी होती तो अब्बू क्यों उस दिन कहे कि ये लड़का पूर्वी के पिछे आया... नही बात उतनी भी पुरानी नही... पर बात है क्या... इसी से पुच्छ लूँ... पूरी कहानी... बगल मे ही तो बैठा है"...

ड्रस्टी के दिमाग़ मे जैसे सारी बातें स्ट्राइक कर रही हो... उसने मानस की ओर देखते हुए धीमे से "हाई" कही... मानस ने सुना भी लेकिन ड्रस्टी की बात को अनसुना कर वो बेंच से टिका रहा... एक-दो बार फिर से वो "हाई" बोली.. इस बार बोलने का वॉल्यूम भी थोडा तेज था, फिर भी मानस ने उसे अनसुना कर दिया...

ड्रस्टी को गुस्सा आया... वो अपने जगह से उठी, और उसके कान का हेड फोन अपने हाथों से उतार कर फेक दी और चिल्ला कर कहने लगी.... "इतनी देर से चिल्ला रही हूँ, हेड फोन लगा कर क्या बहरे ही हो जाते हो"

मानस.... एक्सक्यूस मी, आप है कौन...

ड्रस्टी और भी ज़्यादा गुस्सा दिखाती.... "कोई नही हूँ... पर तुम आज के बाद मेरा पिच्छा किए तो मैं भी तुम्हे दिखा दूँगी"

मानस.... एक्सक्यूस मी...

ड्रस्टी.... एक्सक्यूस मी, एक्सक्यूस मी... क्या दो ही वर्ड्स आता है... हुहह ! कान खोल कर सुन लो मेरा पिच्छा छोड़ दो....

इतना सुना कर ड्रस्टी वापस अपने घर को चल दी... मानस अपना हेड फोन उठा कर फिर से अपने कानो मे लगाया और आँखें मूंद काए खुद से कहने लगा.... "अब मंज़िल दूर नही, अब तो बातें शुरू हो गयी... जल्द ही अब ये मुझे तुम सब तक भी पहुँचा देगी"...

मानस भी बिना ये जाने सोच रहा था कि कल ही उसकी मज़िल उसके सामने थी, और वो उसे पहचान तक नही पाया.

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मनु एमडी तो बन गया था, लेकिन अब उसे खुद को प्रूफ करने की ज़रूरत थी. राह मे काँटे बहुत थे, लेकिन इरादे फौलादी. एक सब से अच्छी बात जो उसके पास थी वो थी मॅन पवर. कंपनी के लगभग हर एम्प्लोयि उसे दिल से चाहते थे, और जब से मनु ने एमडी की पोस्ट संभाली थी, सब की उम्मीदें काफ़ी बढ़ गयी थी.

मनु कंपनी के प्रॉस्पेक्ट मे अपनी पहली सब से बड़ी प्रॉजेक्ट की मीटिंग लेने जा रहा था. सरकार. जो गूड्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट करती है उसके शिप्पिंग का कांट्रॅक्ट एस.एस शिप्पिंग कॉर्पोशन को मिले. एस.एस ग्रूप से कई बार इस कांट्रॅक्ट को पाने के लिए कोसिस की जा चुकी थी, लेकिन आज तक ये कांट्रॅक्ट नही मिला.

मीटिंग हॉल ... और मनु अपना व्यूस देते हुए....

"कंपनी शिप्पिंग कॉर्पोरेशन वैसे तो पहले से काफ़ी स्ट्रॉंग है, लेकिन बात यदि की जाए सरकार. के इस कांट्रॅक्ट की, तो यदि हमे ये मिलता है तो हमारे शिप्पिंग कॉर्पोरेशन को एक नयी उचाई मिलेगी... आप सब के क्या व्यूस हैं"

सभी लोग अपने-अपने विचार एक-एक कर के देने लगे..... लेकिन सभी लोग प्रॉजेक्ट को बढ़िया कहते, पर इस कांट्रॅक्ट को हासिल करना नामुमकिन... क्योंकि हर बार ये कांट्रॅक्ट अग्रॉ इंटरनॅशन ऑफ शिप्पिंग ग्रूप को ही मिलती थी.

नताली (वंश डॉटर).... नतिंग ईज़ इंपॉसिबल. मनु आइ वॉंट टू हॅंडेल दिस प्रॉजेक्ट.

अर्जुन (सेयो) .... इतना बड़ा प्रॉजेक्ट तुम कैसे हॅंडल कर सकती हो. यहाँ मौजूद एक्सपीरियेन्स्ड लोगों से हॅंडल नही हुआ ये प्रॉजेक्ट, फिर तुम अन-एक्सपीरियेन्स्ड कैसे हॅंडल कर लोगि. ये कॉलेज का कोई फंक्षन नही जिसमे जोश के साथ भीड़ जुटाना है.

नताली.... सॉरी, ऐज यू पीपल डिसाइड.... मैं तो बस अपना व्यूस दे रही थी....

मनु.... ह्म ! और किसी को कुछ कहना है....

नेगी (शिप्पिंग कार्पोरेशन का डाइरेक्टर)... सर, हम इस प्रॉजेक्ट के लिए पूरी मेहाँत करेंगे. पूरी शिप्पिंग टीम इस कांट्रॅक्ट को पाने के लिए दिन रात एक कर देगी.

मनु.... थॅंक्स नेगी जी. अर्जुन जी मैं आप की बात से सहमत हूँ, लेकिन जहाँ एक्सपीरियेन्स्ड लोग इतने सालों से नाकामयाब रहे हैं, आज एक फ्रेशर को भी चान्स दे कर देख लीजिए. नताली, दिस प्रॉजेक्ट ईज़ युवर्ज़. नेगी जी की पूरी टीम आज से तुम्हारी. कोई नयी रेक्रूटमेंट चाहिए तो उसके लिए भी तुम फ्री हो... गो अहेड...

 


ऑफीस मे 4/5 ही दिन और नताली को इतना बरा प्रॉजेक्ट मिल गया. सब लोग बहुत खुश थे, सिवाय एक के वो था अर्जुन. उससे ज़रा भी पसंद नही आया कि किसी नये को ये प्रॉजेक्ट मिले... जब कि अर्जुन को ये उम्मीद थी कि मनु उसे ही ये प्रॉजेक्ट हॅंडेल करने के लिए सामने से ऑफर करेगा.....

"कोई बात नही मनु सर, जैसे आप की कंपनी डूबी थी ठीक वैसे ही आप का ये प्रॉजेक्ट भी डूब जाएगा. सो सॉरी बॉस, अब तो दो साल बाद ही इस प्रॉजेक्ट के मिलने के चान्सस बन पाएँगे... फिलहाल तो मैं ही सेंध लगाउन्गा".

जहाँ अर्जुन की ख़टकती आँख नताली के इस प्रॉजेक्ट फेल्यूर पर लगी थी, वहीं स्नेहा मनु को इशारों मे अकेले आने के लिए कहने लगी..... मनु मीटिंग को उसी वक़्त ख़तम कर के सीधा अपने कॅबिन मे पहुँचा.....

मनु.... हाँ स्नेहा कोई खास बात...

स्नेहा, मनु का कॉलर पकड़ कर अपनी ओर खींच ली, और अपने होंठ से मनु के चेहरे को स्पर्श करती हुई कहने लगी.... "क्यों जी, जब मैं सिर्फ़ पीए थी तब तो बहुत रोमॅन्स करते थे, और जब से शादी की अफीशियल अनाउन्स्मेंट हुई है मेरी ओर देखते भी नही.

मनु.... ओह्ह्ह्ह, तो ऐसी बात है... मतलब शादी हो रही है इसलिए तुम्हे मुझ पर हक़ जताना है...

स्नेहा, मनु का मूड देख कर, उस से अलग हो गयी, और एक कदम पीछे हट कर कहने लगी.... "सॉरी मनु"

मनु, अब स्नेहा के गले मे हाथ डाल कर कहने लगा..... "अच्छा जी, जब तक मैं आप का बॉस था, मेरी हर सीरीयस बात को भी मज़ाक बना दिया करती थी, और हक़ से अपनी बात मनवाती थी. जब से शादी की अफीशियल अनाउन्स्मेंट हुई है तो अब मेरा मज़ाक भी सीरीयस लगने लगा".

दोनो ही इस बात पर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे.... मनु, स्नेहा की आखों मे देखकर कहने लगा.... "एक बात सच-सच कहता हूँ स्नेहा... मेरे दिल मे ना तुम्हारे लिए कोई प्यार नही, लेकिन हाँ तुम्हारा होना अच्छा लगता है".

स्नेहा.... ये तो मुझे पता है, कोई नयी बात तो बताओ मनु...

मनु.... नयी बात ये है की आज मेरा मूड हो रहा है.... चलो आज मज़े किए जाए...

स्नेहा.... नोप, बिल्कुल नही मनु... अब जो भी मज़े होंगे वो शादी के बाद... तब तक कंट्रोल करो बेबी.

मनु.... ये भी कोई बात हुई... आज तो मूड नॉटी हुआ जा रहा है... और तुम मना कर रही हो.

स्नेहा... जी नही, कुछ नॉटी और होट नही होने वाला, सो कंट्रोल युवर एमोशन्स... मेरे इनोसेंट हब्बी..... अभी तुम यहाँ का काम देखो, और मैं कुछ दिन की छुट्टी पर जाना चाहती हूँ...

मनु.... छुट्टी किस लिए स्नेहा...

स्नेहा.... मैं चाहती हूँ घर जा कर ही सब को शादी की बात बताऊं....

मनु.... ह्म ठीक है चली जाना...

स्नेहा.... नही, अभी ही जा रही हूँ... मैने सारा काम कर दिया है... अपायंट्मेंट्स और मीटिंग की पूरी डीटेल रिसेप्षनिस्ट के पास है, बाकी फोन तो है ही....

मनु.... ह्म ! ठीक है... सुनो मेरी कार लेती जाओ.... और किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो कॉल करना ...

स्नेहा.... अच्छा जी समझ गयी... अब जाने भी तो दो...

मनु.... हाँ बाबा जाओ ना....

स्नेहा.... क्या, ऐसे कैसे चली जाऊं .... एक किस तो दे दो... हद है सब कुछ मुझे ही सामने से कहना पड़ रहा है... तुम तो ज़रा भी रोमॅंटिक नही मनु...

मनु, स्नेहा के कमर मे हाथ डाल कर उससे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठ से होंठ लगा कर एक जोरदार किस किया.... "सॉरी जी मैं रोमॅंटिक तो नही हूँ, पर आप मुझे सिखाएँगी तो ज़रूर सीख जाउन्गा".

स्नेहा खिल कर मुस्कुराती, मनु से कहने लगी .... "ब्यएबयए स्वीटहार्ट, अपना ख्याल रखना ".

स्नेहा ऐसे प्यार से मुस्कुराइ की मनु का चेहरा भी खिल गया... ऐसा लग रहा था जैसे आज पहली बार मनु ने स्नेहा के अंदर झाँक कर देखा हो.

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श्रेया, सुकन्या की बेटी. एक बला की खूबसूरत बिगड़ी हुई रहीश्जादी. देर रात तक पार्टी करना, खूब पैसे उड़ाना उसका शौक. देल्ही के एक मशहूर बॅंड की डाइरेक्टर थी और एक दिन अपनी माँ जैसा बन'ना उसका सपना था. जब से उसने सुना था उसकी माँ ने अपने सारे शेर्स मनु के नाम कर दिए हैं, उससे भी बरा झटका लगा था.

वो अपने क्र्यू के साथ बैठी बस इसी बात पर सोच रही थी, आख़िर उसकी माँ ऐसा कैसे कर सकती है. तभी उसके क्र्यू के दो-तीन मेंबर उसके पास आए, और उसने श्रेया से कुछ कहा... श्रेया अपने ख्यालों मे इस कदर खोई थी की उसकी बातों को अनसुना कर गयी.

एक दो बार और उन लोगों ने टोका, श्रेया का ध्यान टूटा और वो अचानक से उन पर चिढ़ गयी और चिल्ला कर कहने लगी...... "भागो यहाँ से, मुझे डिस्टर्ब मत करो"

सभी क्र्यू मेंबर मुँह लटकाए वहाँ से वापस लौट आए... और जा कर बॅंड के मुख्य संचालक मॅडी के पास अपना रोना रोने लगे. श्रेया से मिलने से पहले मॅडी का कोई अस्तित्व नही था, एक गली का परफॉर्मर था.

श्रेया ने उसे एक दिन परफॉर्म करते देखा, और वो ऐसी फिदा हुई मॅडी पर की रातों रात पूरा बॅंड तैयार कर दी, और मॅडी को वहीं से पहचान मिल गयी. हाँ बदले मे मॅडी को श्रेया की नखरे भी उठाने पड़े लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है.

मॅडी.... उफफफ्फ़ सो सेक्सी गर्ल इन अपसेट मूड... क्या हुआ श्रेया मैं म...

श्रेया.... मॅडी, आज रात कहाँ की बुकिंग है... बॅंड परफॉर्म करने कहाँ जाएगी...

मॅडी.... आज रात मॅडी-श्रेया प्रेसोनल पर्फोम्स, क्योंकि मालकिन को एंटरटेन करना ही मेरा पहला काम.

श्रेया.... हा, हा, हा.... और मुझे कैसे एंटरटेन करेगा मॅडी, ज़रा मैं भी सुनू...

मॅडी.... पोल डॅन्स कर के मेडम... और आप मुझ पर पैसे लुटाएँगी खुश हो कर...

श्रेया.... स्ट्रीप भी करोगे क्या...

मॅडी.... मैं नही करूँगा तो आप ही कर देना मेडम... हम तो गुलाम है...

श्रेया.... व्हाट... फिर तो आज रात मेरे लिए एंटरटेनमेंट शो का अरेंजमेंट किया जाए.... मैं आज काफ़ी क्रुयेल मूड मे हूँ... बीडीएसएम करूँगी तुम्हारा....

मॅडी.... हा हा हा.... ये हुई ना बात. अब मैं मुद्दे की बात पर आते हैं... मूड क्यों ऑफ है मेडम का.

श्रेया.... मोंम ने अपसेट किया है मॅडी. मेरा ड्रीम मोंम जैसा बन'ना था... और मेरी मोंम ने अपना पूरा शेयर उस कमीने मनु के नाम कर दिया... अब मैं क्या करूँ...

मॅडी कुछ सोचते हुए कहने लगा.... "जानती हो मैने कल पवन कल्याण की एक मूवी देखी. उसमे समानता भी थी"...

श्रेया.... फक ऑफ ! रास्कल.... मैं यहाँ इतनी सीरीयस प्राब्लम बता रही थी, और तुम्हे मूवी की पड़ी है. गेट लॉस्ट.

मॅडी.... हा हा हा... अर्रे हर बात पर गुस्सा... यार मूवी थी ही इतनी मस्त की मैं बताए बिना नही रह पाया. तुम पहले सुन तो लो फिर यदि मेरी बात बकवास लगे तो गोली मार देना...

श्रेया.... जल्दी बको...

मॅडी.... उस मूवी मे ना पवन कल्याण कई हज़ार करोड़ का मालिक रहता है, और किसी फॅमिली मिसडरस्टॅंडिंग की वजह से उसकी बुआ अपनी फॅमिली... यानी पवन कल्याण के डॅड और दादा को छोड़ कर चली जाती है. जानती हो उसकी बुआ का भी एक हिस्सा उस कंपनी मे रहता है जिस पर वो थूकने तक नही जाती...

श्रेया.... ह्म ! इंटरेस्टिंग... फिर क्या हुआ...

मॅडी.... होना क्या था श्रेया... पवन कल्याण अपनी बुआ के यहाँ ड्राइवर बन कर जाता है... उसकी छोटी बेटी को पटाता है... और फॅमिली मॅटर सेटल कर के अपनी बुआ को मना लेता है... और तो और एंडिंग तो उस से भी ज़्यादा मस्त थी...

श्रेया.... हाँ-हाँ बताओ.... क्या थी एंडिंग...

मॅडी.... एंड मे पवन कल्याण के दादा उसे पूरे ग्रूप का एमडी बनाने का प्रपोज़ल रखते हैं, तो बाकी के पार्ट्नर्स और असोसीयेट नही राज़ी होते. और कंपनी मे मेजोरिटी से ही वो एमडी बन सकता था. मेजोरिटी पाने के लिए पवन कल्याण को एक मेजर शेर होल्डर यानी की अपनी बुआ के वोट की ज़रूरत थी जो कई सालों से ऑफीस मे कदम भी नही रखी थी.... पर अचानक से ही बुआ उस मीटिंग मे एंट्री लेती है... अब भला बुआ क्यों ना बनाए पवन कल्याण को एमडी...... पूरे परिवार को मिलाया, उसका होने वाला जमाई भी था... बना दिया उसी को एमडी.

श्रेया..... ह्म ! थॅंक्स मॅडी समझ गयी जो तुम समझाना चाह रहे थे. सिचुयेशन थोड़ी सी डिफ़्फरेंट है पर कंडीशन एक जैसी है". लेकिन तुरंत ही श्रेया अपना छोटा सा मुँह किए...... "पर मनु की तो शादी होने वाली है स्नेहा से"

मॅडी.... भगवान आप के साथ है मैंम... शादी होने वाली है हुई तो नही है.... अभी तो कुछ भी हो सकता है. और देखो तो कहाँ तुम एक कोने की मालकिन बन'ने वाली थी... और अब पूरा ग्रूप तुम्हारे कदमों मे है... अब सोचना तुम्हे है की कैसे तुम स्नेहा को आउट करती हो....

श्रेया खुश होती हुई... मॅडी के गले लग जाती है... और उसे थॅंक्स कहने लगती है.... मॅडी भी हँसते हुए कहता है.... "श्रेया मैंम... सुना है आप बड़े लोग अड्वाइज़ लेने के लिए भी लोगों को हायर करती हैं.... मुझे भी कुछ मेहनताना मिलेगा क्या".

श्रेया.... तुम्हे क्यों दूं मेहनताना. पूरा आइडिया कॉपी था पवन कल्याण का... लेकिन जाओ तुम भी क्या याद करोगे मॅडी किस दिलदार ओनर से पाला पड़ा था.... इस आइडिया को सुनाने के लिए ये बॅंड तुम्हारा हुआ.... कल पेपर वर्क पूरा कल लेना... हाँ लेकिन इसके दो कंडीशन्स है...

मॅडी.... कौन-कौन सी मैंम वो भी ज़रा बताने का कष्ट कीजिए...

श्रेया.... पहले ये की मैने जितने पैसे लगाए हैं, धीरे-धीरे कर के वापस कर दोगे. आंड सेकेंड कंडीशन इस, जब भी मेरा मूड होगा तो मुझे एंटरटेन करने चले आओगे, सारा बुकिंग छोड़ कर...

मॅडी.... मैं सारी कंडीशन्स पर सहमति... वैसे भी मैं तो हमेशा रेडी हूँ आप की सर्विस मे... उफ़फ्फ़ आप को एंटरटेन करना तो इस जहाँ का सब से मज़ेदार काम है...

श्रेया.... हा हा हा... बस-बस.. जाओ अपना काम देखो... आंड थॅंक्स फॉर अड्वाइज़...

श्रेया को अपना बेस्ट वे मिल चुका था. उसने तो अब तय कर ही लिया.... "लेट दा ड्रीम कम ट्रू, एनी हाउ"

दिन के वक़्त एस.पी साहब अपने ऑफीस मे आराम फरमाते, अपने ड्राइवर से पुच्छने लगे.... "मिश्रा जी, क्या काया को भी मुझ मे कोई इंटरेस्ट है. क्या वो भी मुझ मे उतना हे इंटरेस्ट ले रही है, जितना मैं ले रहा हूँ"...

ड्राइवर.... सर आप तो बावरे हुए जा रहे हैं. रात से ले कर अब तक ना जाने कितनी बार यही सवाल पुच्छ चुके हैं. मुझे लगता है आप को एक बार राउंड पर जाना चाहिए.

अखिल.... मैं भला राउंड पर क्यों जाऊ...

ड्राइवर.... तो क्या यहाँ बैठे रहने से काया मेडम आप से मिलने ऑफीस आएगी...

अखिल..... वॉववव मिश्रा जी क्या बात कही है... व्हाट एन आइडिया सर जी... ज़रा फोन की लोकेशन तो ट्रेस करवाओ...

एस.पी की जीप, सायरन बजाती रोड पर निकल गयी.... और सीधा पहुँची उसी शॉपिंग माल मे जहाँ से काया का लोकेशन आ रहा था...

अखिल.... पहुँच गये मिश्रा जी महबूबा की गली...

ड्राइवर... हाँ सर पहुँच ही गये...
 
जैसे ही दोनो शॉपिंग माल के अंदर घुसे बाहर का गार्ड उसे सलाम ठोका और तुरंत माल के मॅनेजर को कॉल लगाया....

मॅनेजर दौड़ता हुआ आया... "सर कोई बात हो गयी जो यहाँ आए हैं"...

ड्राइवर.... तू पसीने-पसीने क्यों हो रहा है बे मॅनेजर... साहब यहाँ रेग्युलर विज़िट पर आए हैं... लॉ आंड ऑर्डर क्या ऑफीस मे बैठ कर मेनटेन होगा, इसलिए राउंड पर निकले हैं. वैसे साला इस माल मे समान इतने महँगे क्यों होते हैं... कल मैं वाइफ के साथ आया था, और वो दाम देख कर ही कुछ खरीद नही पाई.

अखिल.... मिश्रा जी छोड़ो भी उसे...

ड्राइवर.... ओह्ह्ह्ह ! हाँ... तू जा अपना काम कर ... और हमे अपना काम करने दे....

दोनो काया को ढूँढने मे लग गये. अखिल जहाँ-जहाँ जाता, पब्लिक पहले से ही साइड हो जाती.... "ये माल तो किसी ज़िले से कम नही, पता नही यहाँ आ कर आदमी कहाँ गुम हो जाता है"....

अखिल 3र्ड फ्लोर के सेंटर मे खड़ा हो कर चारो ओर देख ही रहा था की पीछे से आवाज़ आई.... "एस.पी सर शॉपिंग करने आए हैं क्या".?

अखिल पीछे मूड कर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.... "नही यहाँ तो बस कुछ अफीशियल काम से आया था.

काया.... ओह्ह्ह्ह ! मतलब आप काम पर हो ... सॉरी आप को डिस्टर्ब किया... आप अपना काम करो सर जी...

अखिल.... नही काम तो ख़तम हो गया, बस निकलने ही वाला था...

काया.... ओह्ह्ह्ह ! जा रहे हैं, ओके ... हॅव आ सेफ जर्नी एस.पी सर.

("हद है, समझती भी नही कि इस से ही मिलने आया हूँ... तब से मुझे भगा ही रही है")... अखिल... लगता है मैं आप को पसंद नही, इसलिए आप आधी बात सुन कर रिएक्ट कर रही हैं... मैं यहाँ काम से आया था, काम हो गया है... अब बस निकलने ही वाला था तो सोचा एक कप कॉफी पीता जाऊ"

काया.... ओह्ह्ह सॉरी... तो यहाँ तब से खड़े हो कर आप कॉफी शॉप ढूँढ रहे थे... कॅफेटीरिया इस रो के लास्ट शॉप के पिछे है....

अखिल.... थॅंक्स.... अर्रे पता बता कर आप कहाँ चली...

काया.... क्या हुआ एस.पी सर...

अखिल..... अब आप को मैं जानता हूँ, और मैं अकेले कॉफी पियूं अच्छा नही लगता ना... आप भी आइए ना..

काया.... कोफ़ी के लिए पूछना है तो सीधा पूछिए ना, ऐसे बहाने क्यों बना रहे हैं सर...

अखिल.... जो समझिए मैं.... ठीक है सीधे पूछता हूँ.... क्या आप मेरे साथ कॉफी पिएंगी...

काया... नो

अखिल.... अब पूछा तो मना कर दी आप.

काया.... आप ने पूछा और मैने मना कर दिया, इसमे अपसेट होने वाली कौन सी बात है....

इतना कह कर काया मूड गयी और हँसने लगी... अखिल उसे जाते हुए देखता रहा. जब वो एक फ्लोर नीचे पहुँची तो पिछे मूडी... अखिल अब भी उसे देख ही रहा था.... काया उसे देख कर हँसने लगी और उंगलियों के इशारों से कॉल करने का इशारा कर के चली गयी....

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सम और रजत की मुलाकात....

सम.... रजत काम हो जाएगा, टोटल 50 लाख लगेंगे... 30 पहले 20 बाद मे....

रजत.... ये लो 50 लाख का चेक. टोटल अमाउंट अभी ही दे रहा हूँ, लेकिन काम हो जाना चाहिए.

सम.... समझो काम हो गया. बस इधर तुम सब फॅमिली हॉलिडे पर निकले और उधर रास्ते मे ही मनु और काया का काम तमाम.

रजत.... ये हुई ना यारों वाली बात... सुन जब ये सारी प्रॉपर्टी मेरी हो जाएगी, तो मैं तुम्हे अपनी कंपनी मे सब से उँची पोस्ट दूँगा...

सम... थॅंक्स यार ... तेरे लिए कुछ भी..... आज रात क्या कर रहा है, बड़े दिन हो गये पार्टी किए...

रजत.... पार्टी आज नही.... सेलेब्रेशन अब तो चौथे के बाद ही होगी... चलता हूँ....

रजत के जाते ही... दीप्ति भी पिछे से निकल आई.... "लूट लिया 50 लाख की लॉटरी... अब क्या इरादे हैं... कतल तो 10लाख मे ही हो जाएगा जो उस रात उसने अड्वान्स किया था.... ये तो तू पूरे प्रॉफिट मे आ गया"

सम.... हां सो तो है, प्रॉफिट तो जोरदार हुआ है लेकिन तेरे से बहुत कम.... एक रात के जलवे मे तूने तो 12 करोड़ का फ्लॅट पचा ली...

दीप्ति.... पर तूने उसका मर्डर करवाया तो सोच ले, एक तो बड़ा मुर्गा हाथ से जाएगा, और फसेगा वो अलग...

सम.... पागल है क्या... मैं क्यों इन मामलों मे फसु... जब तक लूट सकते हो लूटो, फिर खिसक लो...

दीप्ति.... ये तो फाइनल सेटल्मेंट था, अब तू लूटेगा कैसे...

सम.... अर्रे जो मर्डरर है वो क्या कभी जैल नही जाएगा... रोज 3 रुपया खर्च करूँगा न्यूसपेपर पढ़ुंगा........

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मूलचंदानी विला...

हर्षवर्धन.... कोई काम ही नही बचा अमृता तुम्हारे इस फालतू से प्रपोज़ल के बाद...

अमृता.... तुम भी ना हर्ष बहुत ही जल्दी अपना धैर्य खो देते हो... शांति से तमाशा देखते जाओ...

हर्षवर्धन.... कुछ पता भी है, मनु वो शिप्पिंग कांट्रॅक्ट पर पूरा ध्यान लगा रहा है....

अमृता.... हां पता है, और उस प्रॉजेक्ट को नताली हॅंडल कर रही है... डॉन'ट वरी हर्ष... अभी तो हफ्ते भी नही बीते और तुम उतावले हो रहे हो. थोड़ा शांत बैठ जाओ... हमे अभी थोड़े ना कुछ करना है... अभी तो जो भी करेंगे वो राजीव और तनु करेंगे... हम तो बस साइलेंट प्लेयर हैं ....

हर्षवर्धन.... अमृता सेफ खेलने और ज़्यादा लालच के चक्कर मे कहीं ये ना हो कि जो भी है वो भी चला जाए. मनु को तुमअंडरस्टिमेट कर रही हो....

अमृता..... नही, हर्ष तुम मुझे अंडरस्टिमेट कर रहे हो... मनु की क़ाबलियत को देख कर ही ये कदम मैने उठाया है... अब बस दूर बैठ कर तमाशा देखो .....

हर्षवर्धन.... दूर बैठ कर तमाशा क्या देखना है, अब तो सोच रहा हूँ कि एक वकेशन प्लान ही कर लूँ... तुम चल रही हो क्या....

अमृता.... तुम घूम आओ हर्ष मैं तुम्हारे नही आ सकती. सारा खेल शुरू किया हुआ मेरा है, इसलिए मेरा अभी कहीं भी जाना संभव नही....

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राजीव के घर की मीटिंग.....

वंश..... मुझे तो कुछ भी समझ मे नही आ रहा, वो अकेला लड़का हम सब को नचा रहा है.

राजीव.... उसके दिमाग़ मे चल क्या रहा है जो उसने मार्केट मे शेर्स डालने बोला...

तनु.... एग्ज़ॅक्ट्ली वही जो हमारे दिमाग़ मे था...

रौनक.... क्या था तुम सब के दिमाग़ मे...

तनु... कंपनी के शेर मार्केट मे उतारना, और धीरे-धीरे मूलचंदानी एंड कंपनीज का दीवाला निकाल देना ताकि घाटा कंपानसॅट करने के लिए कंपनी के शेर मार्केट मे उतरता रहे. और उन शेर्स को हम मार्केट से खरीद कर कंप्लीट टेक ओवर कर लेंगे.

रौनक.... अभी वो उतना एक्सपीरियेन्स्ड नही, उसने इतना दूर का कभी सोचा भी नही होगा.... यदि मेरी मानो तो हर्ष और सूकन्या की तरह हमे भी शांत बैठ जाना चाहिए.....

वंश.... और वो क्यों भला...

तभी तनु ने इशारे से सब को शांत होने को कहा, और हॉल मे लगे सोफे के पिछे उंगली दिखाती कहने लगी ... "कोई छिप कर हमारी बातें सुन रहा है"

धीमे कदमों से राजीव आगे बढ़ा और सोफे के पिछे देखने लगा.... "कोई भी तो नही यहाँ... लगता है भरम हुआ है"

रौनक.... एग्ज़ॅक्ट्ली, तुम सब को भी भरम सा हुआ है.... मैं एक बात क्लियर कर दूं.. उस लड़के की इंटेन्षन कंपनी को ले कर कभी बुरी नही रही....

तनु, चिढ़ती हुई.... तो क्या करे हम भी अपने शेर्स उसे दे कर तीर्थ पर चले जाए.

रौनक.... मैने ऐसे तो नही कहा... मैं ये कह रहा हूँ जो प्लान तुम सब का था, उसी का प्रपोज़ल मनु ने तुम सब के सामने रखा तो तुम सब भी साइलेंट्ली अपना गेम प्ले करते उसे काम करने दो. उसका पहला काम होगा ग्रूप के पार्ट्नर्स को स्टिस्फाइ करना... क्योंकि उसे भी तो अपनी टेक बनाए रखने के लिए प्रूफ करना होगा... तो क्यों ना उसे हम अपनी कंपनीज के उपर कोन्स्टरेट करने के लिए फोर्स करे....

वंश.... बात मे दम है... मुझे सही लग रही है ये बात...

तनु.... ह्म ! आगे रौनक जी....

रौनक.... अब ध्यान से सुनो.. अभी हम उसके घर की कहानी दिखा कर मनु से एमडी की पोस्ट तो ले लेंगे लेकिन कंपनी से उसकी शेयर और स्ट्रॉंग पोज़िशन नही छीन सकते ना.... थोड़ा दिमाग़ लगाओ... हम अब भी वही फॉलो करेंगे... अपनी कंपनी के बारे-बारे प्रॉजेक्ट मनु से करवाएँगे... अपने कंपनी की पोज़ीशन कन्सॉलिडेट करेंगे... और इधर धीरे-धीरे उसकी कंपनीज मे सेंध मारते चले जाएँगे...

राजीव... आ गयी पूरी कहानी समझ मे... यानी जब वो पूरी तरह कमजोर हो जाए फिर वॉर करना है...

वंश... पर रौनक हम ये सब हम खुद भी तो कर सकते थे... तुम्हारा सुझाव तो बेस्ट है.. पर मनु को हटा कर हम ये सब खुद करे तो उसमे क्या परेशानी थी...

रौनक.... परेशानी थी वंश, क्योंकि मनु को ये पोज़िशन देने वाले खुद भी यही चाहते हैं कि हम ये सब करे...

तनु.... समझी नही... बात ज़रा क्लियर कीजिए....

रौनक.... बात क्लियर ही तो है... शम्षेर और अमृता ने उसे ये पोस्ट और पोज़िशन इसलिए दिया कि हम उसे जब डिस-पोज़िशन करे तो मनु अपना 25% शेर खुशी-खुशी हर्षवर्धन को दे दे, जैसे उन सब ने मनु को दिया... और मेरे दोस्त यदि अमृता अपने 55% के साथ एमडी की पोस्ट पर आई तो तुम सोच भी नही सकते की क्या-क्या हो सकता है.... मनु, वो हर्मफुल नही है.... पर उसके पीछे से गेम खेलने वाले ... उसे तुम सब नही झेल पाओगे...

राजीव... इतना बड़ा गेम... ये शम्षेर आख़िर चीज़ क्या है... बूढ़ा रिटाइर भी हो गया फिर भी मोह-माया उसकी नही गयी.....

रौनक.... यदि मैं तुम्हारे साथ हूँ तो मेरी बात समझने की कोसिस करो .. वरना मैं अपने शेयर और अपनी कंपनी से खुश हूँ... और आने वाला समय पता है मुझे इसलिए मैं जानता हूँ की मुझे क्या करना है...

वंश....नही रौनक... जो भी बात होगी हम आपस मे डिसकस कर लेंगे .. और जैसा तुम चाहोगे वैसा ही होगा...

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कानपुर की सुबह.....

आज फिर मानस और ड्रस्टी एक दूसरे से टकराए.... मानस को देख कर ड्रस्टी जला बुझा सा एक्सप्रेशन दी, लेकिन मानस बिना कुछ रिएक्ट किए जॉगिंग करता रहा.... फिर से दोनो बेंच पर आ कर बैठे और मानस को देख कर ड्रस्टी फिर से जला बुझा सा एक्सप्रेशन देने लगी.

मानस.... आप क्या पागल है, जान ना पहचान कल से देख रहा हूँ, जो मन मे आए बके जा रही हैं. और मुझे देख कर अजीब सा चेहरा बनाए जा रही हैं...

ड्रस्टी.... लड़की देखी नही कि पड़ जाते हैं पिछे, कमीने लड़के....

मानस उसकी बातों पर हंस दिया और कान मे अपना हेडफोन लगा कर बेंच से टिक गया.... "खुद को बड़ा होशियार समझता है.. हुहह ज़ाहील कहीं का".... ड्रस्टी को खुद भी पता नही था कि वो मानस को कोस क्यों रही है, बस चिढ़ि सी थी. उसे कोस्ती ही वो वापस घर लौट आई.

ड्रस्टी आज जब घर से निकली तो पहले ही सोच कर निकली थी चाहे आज कुछ हो जाए वो शेयर ऑटो मे नही बैठेगी. रोड तक आई और अपने कॉलेज जाने के लिए एक ऑटो हाइयर की. जैसे ही ड्रस्टी उस ऑटो मे बैठी मानस भी जल्दी से बैठ गया...

ऑटो वाला.... सर ये रिज़र्व्ड है आप दूसरे ऑटो मे बैठ जएए...

मानस.... किस तरफ जा रहे हो...

ऑटो वाला... जेडी कॉलेज जा रहा हूँ...

मानस.... भाई चल जल्दी, जो पैसा होगा वो मैं पूरा दे दूँगा... पर तू चल जल्दी...

ड्रस्टी घुनघुनाती आवाज़ मे कही.... "ओये ऑटो वाले उतारो इसे, ये मैने रिज़र्व की है"

ऑटो वाला बिना कुछ सुने ऑटो स्टार्ट किया और सीधा चल पड़ा.... "मेडम हमे भी दो पैसे कमाने आए हैं. जाना तो एक ही जगह है ना.... वैसे भी सर काफ़ी शरीफ दिखते हैं .. आप टेन्षन ना लो किसी भी बात की"...

ऑटो वाले की बात पर ड्रस्टी बुद-बुदाती अपना मुँह फेर ली... ऑटो के रुकते ही ड्रस्टी उतर कर भागी... पिछे से ऑटो वाला टोका... "मेडम पैसे तो देती जाओ"

ड्रस्टी.... ज़बरदस्ती लाया है.. पैसे की बात की तो सॅंडल से मारूँगी यहीं...

ड्रस्टी जिस तेज़ी से भाग रही थी.. लग रहा था किसी बात के लिए उसे देर हो रही है... मानस भी दौड़ा-दौड़ा उसके पीछे गया... लेकिन जैसे ही उसे टोका ... ड्रस्टी लगी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने.....

"तुम मेरा पिच्छा क्यों नही छोड़ते... क्यों मेरे पिछे पड़े हो... क्या चाहते हो चैन से ना जियू मैं... सुसाइड कर लूँ... मर जौन"....

ड्रस्टी का चिल्लाना सुन कर वहाँ स्टूडेंट जुटने लगे, और ड्रस्टी फिर मानस को सुना कर चली गयी... मानस, ड्रस्टी के रूप को देख कर हँसता हुआ जल्दी से खिसका. तकरीबन 10 मिनट हुए होंगे, मानस को लगा कि अब सारे लड़के अपने-अपने काम मे लग गये हैं... वो कॉलेज के गेट की ओर बढ़ा...

 
कॉलेज के गेट पर जब मानस पहुँचा तब वहाँ ड्रस्टी बैठ कर रो रही थी... मानस बिना उसे डिस्ट्रब किए, उसकी गोद मे उसका हॅंड बॅग डाल दिया ....

. जो वो ऑटो-रिक्शा मे भूल गयी थी और जिसे देने मानस गया तो उसे खरी खोटी सुन'नी पड़ी थी...

ड्रस्टी ने जैसे ही अपना बॅग अपनी गोद मे देखा, वो नज़र उपर कर के देखने लगी. मानस ने उसे स्माइल का इशारा किया और बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया... ड्रस्टी भी जल्दी मे अपने बॅग से अपना हॉल टिकेट निकाली और एग्ज़ॅम देने के लिए भागी....

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पहला प्रॉजेक्ट और नताली की मीटिंग...

नताली के पास इस प्रॉजेक्ट को हॅंडल करने के लिए ना तो उम्र थी और ना ही तजुर्बा, बस जो कुछ था वो था विस्वास और जोश .... इसलिए वो इस प्रोजेक्ट से जुड़े हर पहलू को समझना चाहती थी....

शिप्पिंग कॉर्पोरेशन को देख रहे डाइरेक्टर के साथ बात-चीत करते हुए नताली पूछने लगी.... "नेगी जी आख़िर क्या कारण था कि हमे अब तक ये प्रॉजेक्ट नही मिला"

नेगी.... मेडम क्या मैं कुछ भी बोलने के लिए फ्री हूँ...

नताली.... हां-हां बिल्कुल आप कह सकते हैं...

नेगी.... मेडम ऊपर मॅनेज्मेंट टीम से कोई अपने टेंडर की क़ुटेशन लीक करता है...

नताली.... नेगी जी आप को कैसे पता क़ुटेशन लीक होती है...

नेगी.... क्योंकि तीन साल पहले मैं ही मनु के सर के अंडर इस प्रॉजेक्ट को हॅंडेल कर रहा था, और मनु सर ने मुझे फ्री किया

था .... डू व्हाटएवर डू ...

नताली.... ह्म ! फिर क्या हुआ....

नेगी.... बहुत मुश्किल से मैने टेंडर पास करने वाले ऑफीसर और परिवहन मंत्रालय को मॅनेज किया था... अंदर से मैने अपोनेंट

का कोटेड रेट निकाला ... पर जब टेंडर खुला तो उनका रेट हमारे रेट से कम था...

नताली.... ह्म ! फिर ये बात मनु को नही बताई...

नेगी.... बताई थी, पर मनु सर तो मनु सर हैं... उन्हे कौन समझाए... उन्होने एक लाइन मे कहा.... "नेगी जी जब गेम मॅनेज की थी तो जैसे आप ने मॅनेज किया वैसे ही उन्होने मॅनेज कर लिया होगा... आइ बिलीव इन माइ पीपल, और मुझे नही लगता किसी ने क़ुटेशन लीक किया है"

नताली.... इंप्रेस्सिव यार ... ये मनु चीज़ क्या है... यहाँ एक प्रॉजेक्ट जाते हैं तो उपर से ले कर नीचे तक की मॅनेज्मेंट चेंज हो जाती है... और इसने तो कोई गद्दार भी हो सकता है इस बात को ही नकार दिया... है क्या ये...

नेगी.... आप भी जान जाएँगी मेडम.. अब तो आप भी टीम मे ही हैं...

नताली.... ह्म ! राइट मिस्टर नेगी... थॅंक्स फॉर इन्फर्मेशन ... आप एक टीम बनाइए और 5 बार की रेट हिस्टरी उठा लाइए.... पूरी टीम से मुझे मिलवाइए ... दिस टाइम हिस्टरी विल चेंज, और ये टेंडर एस.एस शिप्पिंग को ही मिलेगा. और इस जीत का

जश्न हम पूरी टीम के साथ इस बार किसी फॉरिन कंट्री मे मनाएँगे... और हां हर टीममेट्स अपने साथ अपने बेटरहाफ़ को

भी ले जाएगा.... पर उसके लिए पहले .... दिन रात एक कर के इस प्रॉजेक्ट को पाना है ....

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