वही गीली ऊँगली बाहर निकाल के देवा उसे देवकी के गाण्ड में ड़ालने लगता है।
गाँड के सुराख़ में ऊँगली जाते ही देवकी का मुँह खुल जाता है और लंड मुँह से बाहर निकल जाता है।
देवकी;आहह बड़ा कमीना है तो उन्हह।
देवा;तेरा भांजा हूँ न मामी आज तेरा कोई सुराख़ खाली नहीं रखुंगा।
वो अपनी दूसरी ऊँगली भी पहली वाली के साथ गाण्ड में ड़ालने लगता है।
रामु बहुत कम देवकी की गाण्ड मारता था और ठीक से खुला भी नहीं था।
देवा की उँगलियाँ सटा सट देवकी की गाण्ड में अंदर बाहर होने लगती है जिसकी वजह से देवकी पागल हो जाती है और ये भूल जाती है की पास में नूतन सोई हुई है।
देवकी;उन्हह चाट मेरी चूत और गाण्ड देवा आह्ह्ह्ह्ह्ह।
इधर देवकी अपने मुँह में लंड लेती है और उधर देवा की ज़ुबान देवकी की चूत और गाण्ड चाटने लगते है गलप्प गलप्प।
देवकी की चूत चाट चाट के देवा लाल कर देता है और देवकी का लंड चूत में लेना बहुत जरुरी हो जाता है वो देवा को चोदने के लिए कहती है मगर देवा उसकी चूत और गाण्ड के सुराख़ को चाटते रहता है।
देवकी;आहह अंदर कब डालेगा बेटा आहह देख न कितना पानी निकल रहा है ।
देवा;गलप्प गलप्प बहुत मीठी गाण्ड है तेरी मामी गलप्प गलप्प।
देवकी;उसे चोद बेटा और अच्छी लगेगी तुझे आहह बस डाल भी दे अंदर।
देवा दो तीन थप्पड देवकी की गाण्ड पे मारता है जिसकी गूंज नूतन की कानों में पडते ही उसकी चूत बेचैन हो जाती है।
देवा अपने लंड को उसकी चूत के बजाये गाण्ड पे घीसने लगता है।
देवकी;आहह वहां नहीं चूत में डाल ना बेटा।
देवा;नहीं पहले इस में।
देवकी;घबरा के अपने मुँह पे हाथ रख देती है वो जानती थी देवा का लंड चूत फाड़ देता है तो गाण्ड का वो ज़रूर भुरता बना देगा।
देवकी: बेटा चूत में डाल दे गाण्ड फट जाएँगी मेरी।
देवा;नहीं इसी में डालूँगा और ये कहते हुए वो अपने लंड का सुपाडा गाण्ड के सुराख़ में घुसा देता है।
देवकी;आह्ह्ह्ह्ह्ह।
माँ मुझे मार देगा तेरा लंड बेटा।
देवा;मर जा साली वैसे भी रामु कितना चोदेगा तुझे आह्ह्ह्ह्ह्।
देवकी;नहीं नहीं आहह चीख़ निकलती जाती है जिसे देवकी किसी तरह कमरे के बाहर जाने से तो रोक लेती है मगर नूतन के कानो तक वो सिसकारियां बडी आसानी से पहुँच रही थी।
देवा;का आधे से ज़्यादा लंड देवकी की गाँड में पहुँच जाता है।
और देवा अपने कमर को पीछे ले के एक ज़ोर का धक्का मारकर पूरा का पूरा लंड देवकी की मतवाली गाण्ड में उतार देता है।
देवकी;अपनी मुँह में रज़ाई ठूंस लेती है ।
देवा;अपनी कमर पीछे खीच खीच के सटा सट देवकी की गाण्ड मारने लगता है।
देवकी;उन्ह मेरी गाण्ड आहह मेरी गाण्ड बेटा।
देवकी;नूतन जग जाएगी मामी चिल्ला मत।
देवकी;जग जाएगी तो क्या। इधर मेरी गाण्ड फटी जा रही है आह्ह्ह्ह्ह्ह।
और गाण्ड में डालो तो तेरी फ़टती है । ले साली आज तुझे ऐसा चोदूँगा की दो दिन मेरे सामने नहीं आ पायेंगी आह्ह्ह्ह्ह्।
देवकी;की गाण्ड सच में चीरने लगती है देवा का मुसल लंड उसकी गाण्ड की धज्जियां उड़ा रहा था और बिना रुके वो कमर पे थप्पड मारते हुए बडी बेरहमी के साथ अपनी मामी की गाण्ड में कोहराम मचाने लगता है।
नुतन;अपनी चूत को घीसने लगती है उसकी चूत में जैसे बाढ़ सी आ गई थी पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
देवा;अपनी पूरी ताकत लगा के देवकी की गाण्ड मारे जा रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों का पानी एक साथ निकलने लगता है।
देवकी;अपनी गाण्ड को आगे खीच के लंड बाहर निकाल लेती है और जल्दी से उठके बाथरूम में भागने लगती है।
देवा;कहाँ जा रही हो मामी।
देवकी;मुझे पेशाब करके आने दे।
देवा;देवकी के पीछे पीछे चला जाता है।
देवकी;अब मुतने तो दे मुझे।
देवा;मुझे भी मुतने दे पहले।
देवकी;जल्दी मुत।
आह मेरी गण्ड माँ।
देवा;देवकी को निचे बैठने के लिए कहता है और जैसे ही देवकी नीचे बैठती है देवा उसके जिस्म पे मुतने लगता है।
देवकी;आहह क्या कर रहा है।
पहली बार वो पेशाब से नहा रही थी उसका अंग अंग झूम उठता है।
देवा;देवकी को पूरी तरह अपने पेशाब से नहला देता है।
और थोड़ा बहुत उसके मुँह में भी कर देता है।
खारा खारा पेशाब चाटने के बाद तो देवकी की चूत की दोनों फाँके खील उठती है।
देवकी;उन्हह ममता का नाम सुनते ही तू बड़े कस के चोदने लग गया मुझे उईईईईईई माँ।
और उसे लेने से इन्कार कर रहा है।
देवा;अहह सच कहूं मामी।
देवाकी;उसकी पेठ को सहलाने लगती है।
हाँ बोल मेरे राजा।
देवा;मुझे ममता और माँ बहुत अच्छी लगती है । बहुत मन करता है उन दोनों को एक साथ चोदने को आहह मगर डरता हूँ कही माँ मुझे घर से बाहर ना निकाल दे।
देवकी;उन्हह रत्ना की चूत भी प्यासी है तेरे बापू के बाद किसी ने उसे भोग नहीं लगाये। तू डर मत मै आ गई हूँ न तेरे नीचे एक एक करके सभी को सुला उन्हह दूंगी बेटा।
बस मुझे भूल मत जाना।
देवा;खुश होके सटा सट अपने लंड को और अंदर तक देवकी की चूत में पेलने लगता है।
देवकी;कुत्ते अपनी माँ और बहन का सुनके मेरी चूत फाड़ देंगा क्या आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा;अरे साली कुतिया तेरी चूत दो दो लंड लेने से नहीं फटी तो अब क्या हां फटेगी।
दोनो एक दूसरे को चुमने लगते है।
देवकी;एक बात जान गई थी की देवा अपनी माँ और बहन के बारे में क्या सोच रखता है।
और देवा भी जान गया था की देवकी के सामने नूतन को चोदेगा तो भी वो कुछ नहीं कहेगी।
दोनो एक दूसरे की बाहों में कस के चिपक के अपने लंड और चूत को सुकून देने लगते है।
और नूतन पागल हो जाती है।
उसकी चूत से इतना पानी निकलता है की पूरा बिस्तर जिसपे वो सोई हुई थी गीली हो जाती है।
एक राउंड और चुदाई में आधे घंटे बाद जब देवकी एकदम निढाल हो जाती है तो देवा अपने लंड को उसकी चूत से आज़ाद करके लेट जाता है।
देवकी;बहुत थक चुकी थी । गाण्ड और चूत के खेल में किसकी जीत और किसकी हार हुई थी ये तो पता नहीं। हाँ मगर नूतन की जवान चूत ज़रूर बेचैन हो गई थी।
देवकी;खर्राटे भरने लगती है और देवा उठके नूतन के पास जाके लेट जाता है।
चल जल्दी तैयार हो जा बहुत काम बाकी है शालु के घर तू जायेंगा तो हाथो हाथ जल्दी हो जाएंगे सारे काम।
देवा;शालू की तरफ देख के रत्ना से कहता है।
मुझे कही नहीं जाना मुझे खेत में बहुत काम है।
रत्ना; ये तू कैसी बात कर रहा है देवा तू शालु के घर नहीं जायेगा।
देवा;बोला न नहीं जाऊँगा।
और देवा ये कहके वहां से उठके बाथरूम में घुस जाता है।
रत्ना और शालु एक दूसरे को देखते रह जाते है रत्ना तो नहीं जानती थी हाँ मगर शालु को देवा की ये बात बहुत बुरी लगी थी। उसके दिल में कही न कही दर्द ज़रूर हुआ था।
रत्ना के पास थोडी देर बैठने के बाद शालु उसे घर जल्दी आने को कहके अपने घर चली जाती है।
नुतन ;बिस्तर पे लेटी हुई थी।
उसके कानो में अभी भी देवा के वही शब्द घूम रहे थे की नूतन तू गुलाबी कपडो में बहुत अच्छी लगेगी।
रात की गर्मी अभी पूरी तरह से जिस्म से निकली नहीं थी।
देवकी उसे अपने खयालो में खोई देख उसके पास आके बैठ जाती है।
देवकी भी थोड़ा थोड़ा झिझक रही थी नूतन से बात करने में उसने और देवा ने रात जो काम की थी उसे वो शरमिंदा तो नहीं थी हाँ मगर थोडी परेशान ज़रूर थी। पता नहीं नूतन क्या कह दे।
नुतन अपनी माँ की तरफ देखती है पर कुछ नहीं कहती।
देवकी;अपने बेटी के कमर के थोड़ा ऊपर दोनों हाथों से हलके हलके मालिश करने लगती है।
तू मुझसे नाराज़ है नूतन।
नुतन ;नहीं माँ।
देवकी;सच बता तुझे मेरी कसम।
नुतन;नहीं न माँ सच मै नाराज़ नहीं हूँ।।
देवकी;मुझे पता है जो मै कर रही हूँ वो पाप है मगर ये सब मै तेरे लिए ही तो कर रही हूँ।
नुतन देवकी की तरफ देखती है।
कया मतलब माँ।
देवकी तुझे देवा कैसा लगता है।
नुतन शर्मा जाती है।
देवकी; मैं चाहती हूँ तू इस घर की बहु बने।
नुतन का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है।
उसके होंठ देवकी से कुछ कहना चाहते है मगर मारे ख़ुशी के वो कुछ बोल नहीं पाती और अपनी माँ के गले लग जाती है।
देवकी;बस तू इस घर की बहु बनके यहाँ हमेशा हमेशा के लिए आ जाये समझो मै गंगा नहा ली।
एक तरफ देवकी अपनी बेटी के सुनहरे सपने बून रही थी वहाँ शालु के घर नीलम आईने के सामने खड़ी खुद को देख रही थी।
हल्के गुलाबी चुन्नी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।
जवानी के शबाब खूब चढा था नीलम पे । अपने आप को सिर्फ और सिर्फ देवा के लिए सँभाल के रखने वाली नीलम बहुत बेचैन थी । ये सोच सोच के की जब देवा उसे देखेगा तो क्या होगा।।
मगर देवा तो फैसला कर चुका था की वो शालु के घर नहीं जायेगा । वो नाश्ता करके अपने खेत के तरफ निकलने की तैयारी करता है।
रत्ना देवकी नूतन और ममता सभी बन संवर के तैयार थी ।
सभी एक से बढ़ के एक लग रही थी।
देवा;एक नज़र रत्ना की तरफ देखता है।
कलर के महरून साडी में रत्न बहुत हसीं लग रही थी।
मुस्कराता हुआ चेहरा ऑखों में काजल होठो पे हलकी सी लाली जो उसे ममता ने लगाई थी गोरा मख़मली पेट हुए और बड़े बड़े चूचि जिसे रत्ना ने आँचल से ढक रखी थी उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थे।
देवा इस अंदाज़ में रत्ना को घूरता है की रत्ना को शर्म से आ जाती है।
रत्ना;क्या हुआ देवा।
देवा; कुछ नहीं। तो जा रहे हो तुम सब।
रत्ना;हाँ तू भी चल ना।
देवा;कुछ नहीं कहता और बाहर निकल जाता है।
शालु के घर काफी गहमा गहमी थी।
रश्मी ऑंगन के बीच में बैठी थी और गांव की सभी औरतें उसे हल्दी लगा रही थी।