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हाय रे ज़ालिम.......complete

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शालु,,,,देवा तू तो बड़ा कमीना निकला। अपनी ही माँ के साथ मजे करता है…और तो और दिवाना भी बना लिया है तूने रत्ना को अपना…रत्ना यह सुन कर किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा जाती है।

उसे शरमाते देख देवा बोलता है,,,लगता तो कुछ ऐसा ही है शालु पर मेरे से ज्यादा मेरी माँ इसकी दीवानी हो गयी है…और उसने अपने लंड की तरफ इशारा करा जो अभी तक खड़ा हुआ था और शालु की तरफ पॉइंट कर रहा था…उसका लंड चमक रहा था।

शालु ने उसके लंड को जब देखा तो उसने सोचा…रत्ना बड़ी भाग्यवान है उसे ऐसा लंड मिला है जो हमेशा उसके आस पास ही रहने वाला है…इसकी तो अब पूरी जिंदगी में चुदाई पक्की ही है…शालू को रत्ना से जलन हो रही थी।

रत्ना देवा के मुँह से अपनी माँ को अपने लंड का दीवाना होने वाली बात सुनके बहुत ज्यादा शर्मा गयी थी और उसने अपने मुह को तकिये के नीचे छुपा लिया…रत्ना को ऐसा करते देख शालु और देवा हँसने लगे।

शालु: अरे रत्ना मेरी जान इतना तो मत शर्मा अब मेरे सामने…देवा बेटा सही ही बोल रहा है…आखिर मैने यह तेरा दिवानापन अपनी आँखों से ही देखा है…यह कहते हुए शालु देवा को एक आँख मारती है…देवा शालु को देखते हुए अपना लंड हाथ में पकड़ कर हिलाने लगता है जिसे देख कर शालु उसे इशारो में कहती है…अभी नही बेटा कुछ टाइम तुम अपनी नयी दुल्हन के साथ ही मजे करो…मैं बाद मे मजे दूंगी…शालू आँख मारती है…रत्ना अब उठ कर बैठ जाती है पर अपने ऊपर से चादर नहीं हटाती और शरमाति हुई नज़रो से देवा को अपने पास नंगा खड़ा देख कर और शर्मा जाती है और बोलती है,,,,कैसा बेशर्म जैसा खड़ा है कपडे तो पहन ले अपनी काकी के सामने…

शालु: अरे कोई बात नही रत्ना,,,मैं वैसे भी जा रही हूँ बस…बेकार में उसे कपडे मत पहना…क्युकी फिर से तो उतारना ही है आखिर मेरे जाते ही…

रत्ना शालु की बात सुन कर शरमाती हुई नज़रो से कहती है…शालू तू वैसे आयी क्यों थी? इस सवाल को सुनकर शालु बोलती है…अरे हाँ मै तो तुम लोगो को ऐसे देख कर ओह भूल ही गयी की मै किस काम से आयी थी…रत्ना जब याद आ जायेगा मै दोबारा आकर बता दूंगी की क्या काम था…तब तक तो मजे कर और बेफिक्र रह मै किसी को कुछ पता नहीं लगने दूंगी। मैं जानती हूँ की तूने कितना दर्द सहा है…तू बिलकुल फिकर मत कर और खुश रह…
 
रत्ना: शुक्रिया मेरी प्रिय सखि तू मुझे अच्छे से समझती है…इस पर शालु बोली,,,चल वह तो मै समझती ही हूँ की तू कितनी बड़ी कमीनी है…लेकिन अब मेरे जाने के बाद यह दरवाजा जरुर बंद कर लेना कहीं कोई और न आ जाये इस बार तुम्हारी मस्ती के बीच…रत्ना यह सुनकर शर्मा जाती है…शालू दोनों को बाय करके घर से निकल जाती है…

रत्ना अपने जिस्म पर लपेटी हुई चादर को पकडे शालु के पीछे जाती है और दरवाजा बंद करके लॉक कर देती है…और कुछ टाइम वहां चादर लपेटे ही दरवाजे के सहारे खड़ी रहती है और सोचने लगती है आज तो बच गए पर अब से सावधानी बरतनी होगी…यह सोचते हुए वह वापस अपने कमरे में चलि जाती है जहाँ उसे देवा बेड पर लेटा हुआ मिलता है।वह अपना लंड हिला रहा था और जोर जोर से चींख रहा था…आह रत्ना मेरी जान तेरी चूत फाड़ दूंगा अपने लंड से……………………आहह रत्ना चूस अपने पति का अपने बेटे का अपने सुहाग का लण्ड…………

मुँह की गहराइयो में ले तू अपने सगे बेटे का लण्ड…………………चूस जोर से खा जा मेरे लंड को…………आहह…………………तेरी गाण्ड माँरू मेरी माँ……………………आह्ह्ह आहह अपनी माँ को चोदता हूँ मैं………………आह्ह्ह्हह्ह।

यह कहते हुए देवा झड जाता है और उसके लंड से लावा फूट पड़ता है जो उडके सीधा उसके पैर पर आ गिरता है…रत्ना यह देख के मुस्कुराती है और अपने बदन से चादर हटा देती है और पूरी की पूरी मादरजात बेशर्म सी नंगी हो जाती है…और दरवाजे पर ही अपनी गांड देवा की तरफ करके पलटकर खड़ी हो जाती है…और बोलति है,,,,,आह्ह बेटा,,,,,,अपनी माँ के बारे में ऐसा सोचना अच्छी बात नही……आह्ह्ह्ह।

और यह कहते हुए हुये मुस्कुराने लगती है।

देवा के कानो में जब रत्ना की आवाज पड़ती है तो वो दरवाजे की तरफ मुडकर देखता है और वो नजारा देख कर अपने चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान ले आता है ।
 
अपडेट 104

देवा ने दरवाजे पर खड़ी अपनी नंगी माँ की आँखों में देखते हुए अपना हाथ अपने मुरझाये हुए लंड पर रखा और जोर से बोला…

आह रत्ना……

तू मेरी माँ है और इतनी गदराये बदन की मालिक है की कौन तेरे लिये ऐसा ना सोचेगा।

आह माँ तेरी चूत का दिवाना हूँ मैं…

तेरी मोटी गांड का मालिक हूँ मैं...

तेरे जिस्म के रोम-रोमं का गुलाम हूँ मैं।

तेरी मक्खन जैसी चूचियों(ब्रेस्टस)के लिये पागल हूँ मैं

भला ऐसी क़यामत ढाने वाले जिस्म के बारे में बेटा नही सोचेगा तो भला कौन सोचेंगा।

अपने सगे बेटे के मुँह से अपने जिस्म की प्रशंसा सुन दरवाजे पर अपने बेटे को अपने पूरे नंगे जिस्म का दीदार कराती एक माँ के मुह से एक जोरदार

”आह”

निकल जाती है और एक माँ अपने सगे बेटे के सामने बेशरम जैसी अपने जिस्म पर हाथ फेरने लगती है……

और अपनी चुचियों को सहलाते हुए देवा के लंड को निहारती हुई अपने मुँह में एक ऊँगली डालकर एक और सेक्सी आहहह निकालती है…

अपनी माँ को ऐसे देख कर देवा अपने लंड पर हाथ चलाने लगता है…

अब उसका लंड फिर से खड़ा होने लगता है…।

रत्ना की नजर अब उसे बता रही थी की देवा चाहे अभी कुछ पल पहले ही झडा था पर अब उसका लंड उसकी माँ के गदराये जिस्म को देख कर फिर से खड़ा हुआ था…

रत्ना यह देख कर बोली…

””आह देवा बेटा तू तो बहुत बड़ा हो गया है…।

अपनी ही माँ को देख कर गर्मं हो रहा है……………

हाय राम कैसा बेटा है मेरा अपनी ही सगी माँ को देख कर अपना लंड हिला रहा है……

गंदा लड़का…

उह्ह्ह्ह।

ये कहते हुए रत्ना का हाथ खुद बा खुद अपनी चूत पर चला जाता है और वो उसी तरह देवा को देखती हुई मुस्कराती हुए अपनी चूत रगड़ने लगती हैं…

देवा यह सीन देख कर बोलता है……

क्या माँ तू भी तो बेशरम सी अपने नंगे बेटे के सामने नंगी खडी हुई अपनी चूत रगड रही है…।

और बिना झिझके हुये अपने सगे बेटे के सामने नंगी ही खडी अपनी मोटी गाँण्ड दिखा रही है।
 
देवा के मुँह से यह बात सुनते ही रत्ना एक हाथ से अपनी चूत रगडने लगती है और दूसरे हाथ से अपने मम्मे को दबाने लगती है…

और बोलती है…

”””आह मेरा बेशरम बेटा तू ही तो पहले मेरे सामने नंगा हुआ था…

मै नही…

और वैसे भी घर पर हम्म्म दोनों के अलावा और कोई है भी नही…

तो मैंने सोचा अपने ही प्यारे जवान बेटे के सामने क्या दिखावा……और क्या....

कपडे पहनना तो एक दिखावा ही है…।

मैं तो आज से ही नंगी रहुंगी पूरे दिन……

जीसे देखना हो देखे और जिसे निचोड़ना है निचोड ले……

आह्ह्ह्हह्ह।

पर मैं आज अपने बदन पर कुछ भी नही पहनने वाली…

ऐसे ही पूरी नंगी घूमूंगी अपने घर में पूरे दिन बस……

जो काम करुँगी नंगी ही रह कर करूंगी……

आह्हह्हह्हह्हह।

अपनी नंगी माँ के मुँह से यह शब्द सुनकर देवा बहुत खुश हो जाता है और बोलता है…

””””आह रत्ना मेरी छिनाल माँ जरूर रह नंगी पूरे दिन पर एक चीज जरुर पहने रहना………

रत्ना: वह क्या मेरे देवा…

देवा: अपने नये पति के नाम का मंगलसूत्र……

बस वह पहने रहना और बाकि कपडे पहनने की कोई जरुरत नही है…

देवा के मुँह से सुनकर रत्ना बोली: आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्

हाँ जरुर पहनूंगी अपने नए पति के नाम का मंगलसूत्र…

और कुछ भी नहीं पहनूँगी……

आज रत्ना पुरी नंगी ही रहेगी सर से लेकर पाँव तक…

चाहे कुछ हो जाये……

पर मेरे पति को भी आज पूरे दिन नंगा ही रहना होगा पूरा…

आह।

रत्ना के मुँह से यह शर्त सुनकर देवा मुस्कुराते हुए कहता है…

देवा:अरे मेरी छिनाल तेरा नया पति तो तेरे हुस्न को देखकर ही नंगा रहेगा…

जब तक तेरे जिस्म पर एक भी कपडा नही आता तब तक तेरे नये पति यानी की…

तेरा सुहाग…

तेरे जिस्म का भूखा जानवर…

तेरा अपना सगा बेटा...

तेरी चूत....

गाँड

बड़ी बड़ी चूचियों

तेरे जीस्म का प्यासा मालिक तेरा देवा भी एक कपडा नही पहनेगा…

और तेरे साथ ही पूरे दिन नंगा रहेगा और तेरी भुख को शांत करेगा…

मेरी रानी…

मेरी माँ……

मेरी रत्ना……

आहहह

रत्ना: आह मेरे बेटे आ अपनी माँ को प्याररर कररर……

मेरी चूत चाट…

आह्ह्ह्हह्ह्ह…

ऐसा कहते हुए रत्ना नंगी ही देवा की तरफ बढ़ने लगती है और देवा भी खड़ा हो जाता है…

रत्ना उसके पास आकर देवा को अपनी बाहों में भर लेती है…
 
देवा का हाथ रत्ना की गांड पर चला जाता है और वह उससे जोर से दबाने लगता है…

रत्ना: आह्ह्ह्ह…देवा……

बेटे……

हलके से दबा.......

मेरी गांड आहह्ह्ह्ह।

फिर देवा उसकी गांड छोडता है और रत्ना उसके सीने से हट कर उसके चेहरे पर चुम्मो की वर्षा कर देती है…

और फिर अपने होठो को उसके होठों पे रख के चूसने लगती है…

देवा भी अपने माँ के होठो को चूसने लगता है…

वह दोनों एक दूसरी को होठो को चुसते हुए एक दूसरे की आँखों में देखने लगते है…

सच्ची अब ये माँ बेटे पूरी तरह बेशरम हो चुके थे…

तभी दोनों अपनी जीभे लडाने लगते है और एक दूसरे की जीभ चूसने लगते है…

देवा लगतार रत्ना की बड़ी बड़ी चुचियों को अपने हाथो में मसल रहा था…

कुछ देर देवा और रत्ना एक दूसरे की जीभ चूसते रहे और रत्ना अपने बेटे से अपना जिस्म भी मसलवाती रही…

फिर देवा अलग हुआ और रत्ना को अपने साथ बिस्तर पर ले आया और उसे लिटा दिया…

देवा: आहह मेरी जान मेरी माँ…

तेरे को तो मै कभी प्यार करना न छोड़ू....

जब भी तुझे चोदता हूँ तो मेरे को एक अलग आनन्द का अहसास होता है…

जब भी मै तेरी चूत या गांड की अपने लंड से धज्जीया उड़ाता हुआ तुझे बेरहमी से चोदता हूँ तब मेरे को एक संतुष्टी की भावना मिलती है…

जब भी मै तेरे मस्त मोटे मोटे मम्मो को मसलता हूँ तो मेरे हाथो को सुकून मिलता है…

जब भी मै तेरे मुह मै अपना लंड ड़ालता हूँ तो मुझे ख़ुशी का एहसास मिलता है…

और जब भी मै तेरे मुँह से एक आह्ह्हह्ह्ह्ह सुनता हूँ। ओह मेरा रोम-रोम दहल उठता है…

हाय मेरी जान.....

मेरी पत्नी…

मेरी छिनाल.....

मेरी अपनी सगी माँ…

तेरे को चोदना अब मेरा मकसद बन चुका है…

ये देवा तेरा सुहाग तेरे जिस्म के लिए हर समय प्यासा ही रहेगा।

और यह कहते हुए देवा उसके मुँह पर चूमने लगता है और रत्ना के रोम रोम में सनसनी फैल जाती है…

और उसके मुँह से एक आह्ह्ह निकल जाती है।

रत्ना: आह्ह्ह मेरी जान लेगा क्या…

बेटे अपनी माँ के साथ ये सब करके तुझे शर्म नही आती क्या?

आहह्ह्ह्ह।

तू तो मुझे दिवाना बना चुका है……

आह…

मेरे बेटा……

मेरी चुत चाट ना बहुत तप रही है।

ठंडा कर दे ना।
 
अपडेट 105

रत्ना की बात सुनकर देवा नीचे जाते हुए अपनी माँ के दोनों चुचियों को अपने हाथो में जकड लेता है और उनको बुरी तरह दबाने लगता है…।

अपने चूचियों पर देवा के सख्त हाथो के मर्दन से रत्ना की आहें निकलने लगती है और वो जोर जोर से आह आह देवा ....आह्ह ..... देवा………मेरे पति आआह।अ…अपनी माँ के चुचियों को प्यारर से दबा अहा……आह…मैं कहीं नहीं जा रही हूँ।…आहह्ह्ह्ह आराम से…कहने लगती है…

अब देवा धीरे धीरे करके अपनी माँ की चुचियों को पकड़ नीचे की तरफ बढ़ने लगता है और उसकी नाभि से खेलते हुए उसके दोनों चूचियों के निप्पल्स को अपनी उँगलियों में पकडे जोर से दबाने लगता है…रत्ना देवा की इस हरकत से जोरदार चीख निकालती है…

आह्ह्ह्ह………।।

क्या कर रहा है।

आह…उई माँ…………………

मत कर आहह्ह्ह्ह

हे भगवान....

आह बेटे…

ओह……………………आह………………नही देवा

आह बहुत दर्द हो रहा है आह छोड़ दे मेरे निप्प्लस आह ओह्ह हाय राम आह…………

बहुत दर्द हो रहा है आहहह देवा छोड दे…

देवा सच्ची बहुत जोर से उसके दोनों निप्पल्स को दो-दो उंगलियो में लिए दबा रहा था जोर से और उसकी नाभि में अपनी जीभ पेल रहा था…

रत्ना लगातार जोर जोर से चीख़ कर देवा को उसके निप्पल छोड़ने के लिए गिडगिडा रही थी पर देवा उसे और भी जोर से दबाने लगा…………

और थोड़ी टाइम बाद उसने जब उसके निप्पल छोड़े तो रत्ना ने एक चैन की साँस ली…

उसके निप्पल बिलकुल सुर्ख लाल हो चुके थे…देवा अब और नीचे बढ़ता है और अब उसका मुह चूत के ठीक ऊपर था…

वह कुछ पल अपनी माँ की चूत को प्यार से देखता हुआ एक ऊँगली उसकी नाभी क छेद में ड़ालने लगता है…

देवा: माँ यही है ना मेरा जन्म स्थान जहाँ से 20 साल पहले मै बाहर निकला था…

यही है न वह जगह जहाँ मेरे पैदा होने से 9 महिने पहले मेरे बापू ने अपना लंड डालकर तुझे चोदा था और अपना पानी छोडकर तुझे गर्भवती किया था??

रत्ना: हाँ मेरे बेटे…

यह वही जगह है जहाँ से मेरा देवा निकला था और जहाँ तेरे बापू ने अपना लंड डालकर मुझे चोद कर गाभिन किया था…

और मेरी कोख भरी थी…
 
यही वो जगह है जिसमे 2 साल बाद दोबारा तेरा बापू जिस मे झडा था और मेरी कोख दोबारा भरी…

यही वो जगह है जहाँ से तेरी छोटी बहन तेरी पहली जान ममता निकली थी 18 साल पहले…

यही वो जगह है जहाँ मै 5 साल से मूली गाजर से काम चला रही हूँ…यही वो जगह है जहाँ से रोज रात आग निकलती रही है पिछले 5 सालो से…

यही वो जन्नत का दरवाजा है जिसे पार करके हर मरद एक औरत को चोदता है…

यही वह जगह है जिसमे तूने कल अपना लंड डाल कर मुझे रात भर चोदा था…

यही वो जगह है जिसे तूने चोदा और “मादरचोद” बना है…

यही वो जगह है जिसे तू आज फिर से कई बार चोदेगा…

यही वह जगह है जिसका तुझे मेरी जिंदगी भर ख्याल रखना है……बेटे…

अब तू ही मेरा पति है…।

तू ही मेरा सुहाग है…।

तु ही मेरी चूत गांड और मम्मो का मालिक है…

अब मेरा रोम रोम तेरा गुलाम है…

इसकी क़द्र करना और मुझे कभी चोदना मत छोडना…।

मै सदा तुझे हर तरह का सुख दूंगी……

अब और मत रुक चाट मेरी चूत को…

खूब चाट…

मेरी गांड को मेरे पूरे जिस्म को…

ये कहते हुए रत्ना देवा की तरफ आशा भरी नजारो से देखने लगती है…

देवा भी अपनी माँ की आँखों में झाँकता हुआ उसकी चूत के ऊपर चूमता है…

और उसे तब अपनी माँ की तपती हुई चूत का एहसास होता है की वाक़ई उसकी माँ की चूत बहुत तड़प रही है…

वह एक बार और चूत के ऊपर चाटता हुआ नीचे बढ़ने लगता है और फिर अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी माँ की चूत के ऊपर फिराने लगता है…

रत्ना आह करते हुए अपने एक निप्पल को अपनी ऊँगली में पकड़ लेती है और देवा की जीभ से चटाई का मजा लेने लगती है…

देवा अपनी जीभ अब उसकी चूत के होठो से ले जाते हुए चूत के दाने के ऊपर फिराने लगता है…

और रत्ना की एक और आह्ह्ह निकल जाती है…

रत्ना: आह देवा.......

मेरे मादरचोद बेटे.......

मेरे पति.........

चाटो मेरी तडपती चूत को घूसा दो अपनी पूरी जीभ उसमे अंदर तक डाल दो अपनी जीभ अपनी माँ की चूत में…

आह्ह्ह्ह।

आह्हह्ह्ह्ह

ऐसे ही……

आहह्ह्ह्ह....

देवा मेरे देवा…

आहह ऐसे ही चूस मेरी चूत को…।।

अपनी रत्ना की चूत को चूस चाट मेरी गांड भी…

आह चुस बेटे.....

रत्ना बिस्तर पर तडपती हुई चूत को अपने बेटे देवा से चुसवा रही थी…

और अपनी चुचियों को अपने हाथो में लिए मसल भी रही थी और कभी कभी अपने देवा के सर पर हाथ रखके उसे अपनी चूत पर दबा रही थी…
 
देवा काफी देर से अपनी माँ की चूत को चूसते हुए रत्ना को मजे दे रहा था।

फिर अचानक ही उसने अपनी जीभ उसकी चूत पर चलाते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में घूसा दी और उसे अंदर बाहर करते हुए अपनी माँ की चूत को चाटने लगा…

रत्ना: आह्ह्ह्ह…

हाय……………बेटा…

हाँ ऐसे ही …………

आहह्ह्ह्ह

और अंदर तक……………

ओह्ह्ह्ह .......उईईईईई माँआआआआआआआ

हा और जोर से......

मेरी जान मेरे देवा……

ऐसे ही चाटो…

उह्ह्ह

और ऊँगली आह्ह्ह अपनी माँ की गांड में……

और जोर जोर से.....

आह......मैं झड़ने वाली हूँ…

आह देवा।

देवा अब भी अपनी जीभ और होठो से रत्ना की चूत का मर्दन करके उसे चाटने में लगा हुआ था…

रत्ना भी पूरी गरम होके अपने हाथो से अपनी चुचियों को मसल रही थी और आह्ह्ह्हह आहह कर रही थी जोर से…

कुछ पलों में ही रत्ना की चूत ने पानी छोडना शुरू कर दिया । जो देवा के मुँह पर आ गिरा…

रत्ना: आह्ह्हहह…

मैं झड रही हूँ………

और काफी पानी देवा ने अपने मुँह में लेकर गटक लिया…

और फिर पूरी चूत को चाटते हुए चूत के पानी की एक एक बूँद को पीने लगा और फिर ऊपर उठ कर रत्ना की तरफ देखा जो अभी आँखे बंद की हुई थी । देवा ने उसके होठो पे अपने होंठ रख दिए और दोनों एक दूसरे के मुँह का सेवन करने लगे…

रत्ना ने देवा के मुँह से थूक अपने मुँह में ले लिया और अपनी चूत के पानी का स्वाद चखा…

दोनो अलग हुए और रत्ना ने एक गटका मारके देवा का थूक निगलते हुए आहह निकाली।
 
अपडेट 106

अपने देवा के मुँह से अपनी ही चूत का पानी पीकर रत्ना बहुत संतुष्ट थी…

उसने पहली बार अपनी ही चूत का पानी चाखा था…

वह भी अपने बेटे के थूक में मिला हुआ…।

और वो भी पहली बार अपने ही सगे बेटे के मुँह को चूसकर…

ये बाते सोचने में ही रत्ना के शरीर में बिजली की लहर दौड़ने लगती है और वो देवा के खड़े लंड को देखने लगती है…

देवा रत्ना से अलग होकर उसकी आँखों में देखता है…

उसे एहसास होता है की उसकी माँ की नजर कहीं और ही है।

तो वो उसकी नज़रो का पीछा करते हुए पाता है की रत्ना की नजर उसके खड़े 9 इंच के मोटे तगडे लंड पर थी…

देवा मुस्कराते हुए कहता है,,,,माँ क्या देख रही हो?

रत्ना:अपने बेटे की लम्बाई को देख रही हूँ मेरे प्यारे देवा।

देव: माँ मेरी लम्बाई?

रत्ना: हाँ तेरी ही लम्बाई देख रही हूँ। बहुत बड़ा होता जा रहा है दिन ब दिन मेरे बेटे का…

मेरा मतलब मेरा बेटा बहुत बड़ा होता जा रहा है…

और रत्ना उसकी तरफ देख कर मुस्कुराती है…

देवा: हाँ माँ आखिर आप की देखभाल जो करनी है…

इसलिये ही तो बड़ा किया है…

मेरा मतलब आप की देखभाल जो करनी है इसलिए बड़ा हो रहा हूँ।

देवा भी रत्ना की शैतानी देखते हुए दोहरी बाते करने लगता है…

और मुस्कराते हुए रत्ना को आँख मारता है…

रत्ना: आह्ह…मेरे देवा.....

अपनी माँ से इतना ज्यादा प्यार करता ही रे तू…

क्या मेरी देखभाल करने के लिये बड़ा कर लिया…

मेरा मतलब…

बड़ा हो गया……

आह…मेरा प्यारा बेटा…

देवा :और क्या मेरी प्यारी सुन्दर माँ…जब माँ की इतनी सुन्दर हो(उसके मम्मो पर हाथ रखते हुए)……

मेरा मतलब जब माँ ही इतनी सुन्दर और प्यार करने वाली हो…।

तो किस बेटे का बड़ा नही होगा…

मेरा मतलब क्यों बेटा बड़ा नही होगा…

और जोर से अपने हाथो में रत्ना की चूचियों को दबाने लगता है…

रत्ना की सिसकिया निकलने लगती है…

आह…………देवा……

आह…कितना प्यार करता है तू अपनी माँ से…

मै भी तुझे बहुत प्यार करुँगी।

यह सुनते ही देवा रत्ना की चुचियों से अपने हाथ हटा लेता है और बिस्तर पर दुबारा लेट जाता है…

देवा का खड़ा मोटा लंड सीधे ऊपर की तरफ पॉइंट करता हुआ रत्ना की आँखों को लुभा रहा था…

रत्ना से रहा नहीं गया और उसका हाथ खुद ब खुद अपने सगे बेटे के लंड पर चला जाता है और अपने आगोश में लेते हुए उसकी गर्मी का एहसास करता है…
 
देवा के लंड की गर्मी को महसूस करके रत्ना के मुँह से एक आह निकलती है और उसके हाथ देवा के लंड की लम्बाई को तराशने लगते है…

देवा: आह्ह्ह्ह

माँ

तुम बहुत ही अच्छी माँ हो……

आह…।

हाँ माँ ऐसे ही…

सहलाओ अपने सुहाग की निशानी को……

ऐसे ही महसूस करो अपनी मरद की मर्दानगी को…

आह……

और ऐसे ही जानो अपने नये पति की ताक़त को……

अपने देवा की लम्बाई को तराशो।

मेरी माँ रत्ना…

और उसे ठण्डा करके अपने देवा को ...अपने सुहाग की आग को ठण्डा करने की कोशिश करो……

आह माँ……

देवा के मुह से प्रेरित करती बातो को सुनकर रत्ना दोबारा गरम होने लगती है।

वह अभी कुछ देर पहले ही झडी थी पर देवा की बाते उसके शरीर में सनसनी फैला देती है…

उसके शरीर में खून तेजी से दौडने लगता है…

जीसकी वजह से उसके हाथ अपने देवा के लंड पर तेजी से चलने लगते है…देवा की आह

निकलने लगती है…

उसकी माँ उसे पहली बार हस्तमैथून जो दे रही थी आखिर……

थोड़ी देर तक देवा आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करते हुए अपने लंड पर अपनी माँ के हाथो के मर्दन को महसूस करते हुए ख़ुशी से आँखे बंद कर लेता है…

यह उसकी जिंदगी की अब तक की सबसे बेहतर हस्तमैथुन जो है…

कुछ टाइम हल्के हाथो से हस्त मैथुन करते हुए रत्ना अब धीरे धीरे अपने हाथो की गती को बढ़ाने लगती है और कुछ ही समय में उसके हाथ काफी तेज चलने लगे थे…

देवा की आह अब और तेज होती जा रही थी…

कुछ देर तक रत्ना अपने बेट के लंड से ऐसे ही खेलते हुए उसे हस्तमैथुन का परम सुख अपने हाथो से देती रही…

पर तभी उसने उसके लंड को छोड दिया…

जीससे देवा की आँखे खुल गयी एक पल में ही…

उसे वह पल बहुत बड़ा लग रहा था।

शायद रत्ना यह नही चाहती थी की उसका बेटा अभी झड जाए इसलिए उसने लंड छोड़ दिया था…।

अगले ही पल रत्ना का हाथ दोबारा देवा के लंड पर चला गया जिसे उसने अपने आग़ोश में ले लिया…

पर इस बार उसने अपने हाथो के बजाए अपनी जीभ निकालकर अपने सगे बेटे के लंड के टोपे को चाटना शुरू कर दिया…
 
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