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Guest
जैसे ही देवा को अपने सख्त लंड के टोपे पर एक गीले स्पर्श का अहसास हुआ उसके मुह से सिर्फ एक चीज निकली…
आह रत्ना……
चूस अपने बेटे के लंड को अंदर तक ले के…
आह…मेरी छिनाल माँ चूस अपने बेटे के लौडे को……
कुछ समय रत्ना उसके टोपे को ऐसे ही चाटते हुए अपने बेटे की बाते सुनती रही…
फिर उसने धीरे से एक ही पल में देवा के लंड की गेंदो पर हाथ रखते हुए अपने मुँह को और खोलते हुए लंड पर झुकने लगी…
देवा: आह्हह माँ अब सदा ऐसी ही झुकी रह कर करते रहना इसकी सेवा…
यह आज से तुम्हारा पर्सनल हथियार है खेलने के लिए…
देवा की बात सुनते ही रत्ना की पकड़ उसके गेंदो से होते हुए ऊपर आने लगी और अगले ही पल उसने अपने सगे बेटे के लंड को अपनी मुँह के अंदर उतारते हुए अपने थूक से पूरी तरह गीला कर दिया…
देवा;आहह्ह्ह मेरी माँ
चूस अपने ही बेट के लंड को…
लंड को मुँह में लेने के बाद रत्न ने धीरे धीरे अपने मुँह को उसके लंड पे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया…
और साथ ही साथ अपने हाथ को भी उसी बहाव में लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगी…
देवा के मुँह से परम सुख की आहे निकल रही थी…
अपनी ही माँ के द्वारा दी जा रही लंड चुसाई से देवा बहुत मजे में था…
2 मिनट बाद ही रत्ना का मुँह अपने बेटे के लंड पर ऊपर नीचे होते हुए अब तेज रफ़्तार हासील कर चुका था…
करीब इसी रफ्तार से रत्ना बिना उसके लंड को अपने मुँह से निकाले कई मिनटो तक चुसती रही…
अब देवा बहुत ज्यादा गरम हो गया था।
देवा; आह्ह्ह्हह रत्ना चुस्ती रह बस अपने बेटा का लंड ऐसे ही एक आदर्श माँ की तरह…
आहह्ह्ह
और यह कहते हुए देवा के हाथ अपने आप अपनी माँ की चूचियों पर चले जाते है और वो उन्हें बेरहमी से कुचलने लगता है…
रत्ना को इस बार कोई असर नहीं होता।
क्यूंकि वो अपने ही सगे बेटे के लंड को चूसने में इतनी उतावली हो गयी थी की उसे कुछ एहसास नही हो रहा था की देवा उसकी चुचियों को बहुत ही बेरहमी से मसल रहा है।
आह रत्ना……
चूस अपने बेटे के लंड को अंदर तक ले के…
आह…मेरी छिनाल माँ चूस अपने बेटे के लौडे को……
कुछ समय रत्ना उसके टोपे को ऐसे ही चाटते हुए अपने बेटे की बाते सुनती रही…
फिर उसने धीरे से एक ही पल में देवा के लंड की गेंदो पर हाथ रखते हुए अपने मुँह को और खोलते हुए लंड पर झुकने लगी…
देवा: आह्हह माँ अब सदा ऐसी ही झुकी रह कर करते रहना इसकी सेवा…
यह आज से तुम्हारा पर्सनल हथियार है खेलने के लिए…
देवा की बात सुनते ही रत्ना की पकड़ उसके गेंदो से होते हुए ऊपर आने लगी और अगले ही पल उसने अपने सगे बेटे के लंड को अपनी मुँह के अंदर उतारते हुए अपने थूक से पूरी तरह गीला कर दिया…
देवा;आहह्ह्ह मेरी माँ
चूस अपने ही बेट के लंड को…
लंड को मुँह में लेने के बाद रत्न ने धीरे धीरे अपने मुँह को उसके लंड पे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया…
और साथ ही साथ अपने हाथ को भी उसी बहाव में लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगी…
देवा के मुँह से परम सुख की आहे निकल रही थी…
अपनी ही माँ के द्वारा दी जा रही लंड चुसाई से देवा बहुत मजे में था…
2 मिनट बाद ही रत्ना का मुँह अपने बेटे के लंड पर ऊपर नीचे होते हुए अब तेज रफ़्तार हासील कर चुका था…
करीब इसी रफ्तार से रत्ना बिना उसके लंड को अपने मुँह से निकाले कई मिनटो तक चुसती रही…
अब देवा बहुत ज्यादा गरम हो गया था।
देवा; आह्ह्ह्हह रत्ना चुस्ती रह बस अपने बेटा का लंड ऐसे ही एक आदर्श माँ की तरह…
आहह्ह्ह
और यह कहते हुए देवा के हाथ अपने आप अपनी माँ की चूचियों पर चले जाते है और वो उन्हें बेरहमी से कुचलने लगता है…
रत्ना को इस बार कोई असर नहीं होता।
क्यूंकि वो अपने ही सगे बेटे के लंड को चूसने में इतनी उतावली हो गयी थी की उसे कुछ एहसास नही हो रहा था की देवा उसकी चुचियों को बहुत ही बेरहमी से मसल रहा है।