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Adultery ऋतू दीदी

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पुरा दिन हम लोग घूमने फ़िरने में बिजी रहे। पूरा दिन मैं परेशान रहा की कल रात तो निरु को नहीं बचा पाया पर आज रात उसको कैसे बचाऊ जब की निरु खुद फसने जा रही थी। रात को हम घर पहुचे और सोने की तयारी कर रहे थे।

जीजाजी: "कल हम गेस्ट रूम में सोये थे, शायद इस वजह से प्रशांत ने दरवाजा नहीं खोला होगा। आज हम तुम्हारे बेडरूम में सोयेंगे निरु"

नीरु: "ठीक हैं, मैं बिस्तर लगा देती हूँ जीजाजी, आप आ जाइए"

नीरु अन्दर चली गयी।

प्रशांत: "यह आप गलत कर रहे हैं जीजाजी। आपने बोला था की बस एक बार ही निरु को चोदना चाहते हो। यह आज रात फिर से क्या हैं?"

जीजाजी: "क्या बताऊ? कल रात डॉगी स्टाइल चोदने में बहुत मजा आया। इसलिए आज रात भी चोदने से रोक नहीं पा रहा हूँ। सोच रहा हूँ आज निरु से खुद को चुदवाउ। वो मेरे ऊपर आकर मुझे चोदेगी तो और मजा आएग। फिर निरु तैयार हैं तो तुम्हे क्या प्रॉब्लम हैं?"

प्रशांत: "आप उस भोलि लड़की को फसा रहे हो।"

जीजाजी: "तो फिर दरवाजा खोलकर अन्दर आ जाना। अगर हम कुछ नहीं कर रहे होगे तो सोच लो, निरु का तुम पर से भरोसा उठ जायेगा"

प्रशांत: "और मैंने आप दोनों को चुदते हुए पकड़ लिया तो?"

जीजाजी: "दरवाजा खोला मतलब तुम्हे उस पर शक़ है। फिर चुदते हुए पकडे जाने के बाद निरु शर्म के मारे तुम्हारे पास कभी नहीं रहेगी"

जीजाजी अब मेरे बेडरूम में चले गए और दरवाजा बंद करते वक़्त अपनी आईब्रो उचकाते हुए मुझे चिढा दिया। मैं एक बार फिर वहीं सोफ़े पर सर पकड़ कर बैठ गया। मैने सोचा इस से अच्छा तो निरु को बुलाना ही नहीं चाहिए था। उसको बुला कर तो मैंने और फसा दिया।

लगभग एक घन्टे तक मैं वह बैठे रहा। पता था की अन्दर क्या हो रहा होगा पर फिर भी दरवाजा खोलने की हिम्मत नहीं हुयी। मैंने सब कुछ निरु पर छोड़ दिया। अगर उसकी इच्छा होगी तो चुदवा लेगी वार्ना नहीं चुदवाएगी।

एक घन्टे बाद दरवाजा खुला। मैं चोकन्ना हो गया। अन्दर लाइट बंद थी और जीजाजी दरवाजा बंद कर बाहर मेरे पास आए।

जीजाजी: "प्रशांत, तुम टेस्ट में पास हो गए। अब तक मैंने जो भी कहा वो झूठ था। मैं नहीं चाहता था की निरु फिर ऐसे आदमी के पास फिर जाए जो उस पर शक़ करता हो। इसलिए इतने सारे टेस्ट लेने पड़े। मेरी निरु पर कोई गन्दी नीयत नहीं हैं"

मै मुँह फाड़े जीजाजी को देख रहा था। मुझे उनकी बातों का यक़ीन नहीं हो रहा था।

जीजाजी : "मैंने जो भी गंदे शब्द निरु के लिए इस्तेमाल किये उसका अफ़सोस हैं, पर तुमको यक़ीन दिलाने के लिए बोलने पड़े। तुम्हारी निरु एकदम पवित्र है। वो सिर्फ तुम्हारी है। जाओ उसके पास। वो अन्दर सो रही हैं"

जीजाजी ने मेरे कंधे पर हाथ रख मुझे भरोसा दिलाने की कोशिश की। मुझे समझ नहीं आया की यह कैसा इंसान है। मेरे साथ इतना गन्दा मजाक किया ताकी मेरा टेस्ट ले पाए।

मै अब अपने बेडरूम में गया। निरु दूसरी तरफ मुँह किये करवट लिए सो रही थी। लाइट बंद थी। मैं निरु के पास जाकर लेट गया। जीजाजी की बातों पर यक़ीन नहीं हो रहा था। मुझे लगा वो अपने पाप कवर करने की कोशिश कर रहे थे। निरु को बिना चोदे वो छोड़ देंगे यह मुमकीन नहीं है। फिर मेरे दिमाग में एक प्लान आया।

जीजाजी उठकर बाहर गए हैं यह बात सोयी हुयी निरु को शायद नहीं पता होगी। अगर अभी मैं निरु के साथ कुछ भी करू तो उसको यही लगेगा की जीजाजी कर रहे है। मुझे कुछ करना चाहिए और निरु के रिएक्शन से पता चलेगा की जीजा-साली के बीचे अभी तक क्या हुआ है।
 
मैने करवट ली और निरु के करीब लेट गया। एक हाथ ले जाकर निरु की कमर पर रख दिया। वो सोयी हुयी थी और कोई रिएक्शन नहीं दिया। मतलब नींद में जीजाजी ने निरु को छुआ तो होगा ही। मैने अब अपना हाथ ले जाकर निरु के हिप्स पर रख दिया। फिर से निरु ने कुछ नहीं कहा।

मैंने अब अपना हाथ उसकी गांड पर फेरना शुरू किया। इस हलचल का पता निरु को चला और उसने मेरा हाथ वह से हटा दिया। नीरु को पता था की जीजाजी ने उसकी गांड पर हाथ फेरा हैं पर फिर भी उसने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया। मैंने अपना बाजू निरु की कमर पर रखते हुए हाथ उसके सीने के आगे ले गया।

मैने फिर धेरे धीरे अपनी हथेली आगे कर उसके बूब्स के एकदम करीब ले गया। अचानक निरु का हाथ आया और मेरी हथेली को उसके बूब्स से चिपका दिया। एक बार तो मैं डर गया। समझ नहीं आया की निरु नींद में यह कर रही हैं या थोड़ा जाग गयी हैं और जीजाजी का हाथ समझ कर उसने मेरा हाथ उसके बूब्स पर रख दिया हैं!

थोड़ी देर मेरा हाथ निरु के बूब्स से चिपका रहा। मैंने फिर अपनी उंगलियो को समेटा जिसकी वजह से मेरी उंगलियो ने निरु के बूब्स को दबोचाना शुरू किया। निरु ने कुछ नहीं बोल। मैंने ५-६ बार उसके बूब्स को दबोचा। मुझे अब बुरा लगने लगा।

जीजाजी ने जरूर निरु के बड़े बूब्स को दबाने के मजे लिए होंगे और निरु ने कुछ नहीं बोला होगा। मैंने फिर अपना हाथ उसकी छाती से हटा लिया। मैने अब उसकी नाइटी को नीचे से ऊपर उठाना शुरू किया और उसके पाँव नंगे होते गए।

निरु बिना हिले लेटी रही। उसकी नाइटी घुटनों तक ही थी तो मैंने जल्दी ही ऊपर से कमर तक हटा दिया। फिर उसकी नंगी जाँघो पर अपनी हथेली रख दी और धीरे धीरे फिराते हुए फील करने लगा। निरु ने कुछ नहीं बोला और शान्ति से सोयी रही। मैंने अगला कदम उठाया और निरु की पैंटी पकड़ कर नीचे करना शुरू किया।

नीरु ने कोई विरोध नहीं किया और उसकी एक गांड का गाल नँगा हो गया था। मैंने अपना हाथ उसकी नंगी गांड के गाल पर फेरया। कुछ ही सेकंड में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और नींद में ही बोली।

नीरु: "परेशान मत करो, सुबह कर लेना, अभी नहीं"

मै थोड़ा कंफ्यूज था। उसने जीजाजी का नाम नहीं लिया था। मैंने उसकी पैंटी फिर ऊपर कर दि। फिर मैंने कमर तक ऊपर हो चुकी उसकी नाइटी के अन्दर हाथ डाला। मेरा हाथ अब नाइटी के अन्दर निरु के मम्मो की तरफ बढ़ा। मेरा हाथ जाकर निरु के ब्रा पर रुका। और मैंने उसके बूब्स को एक बार फिर दबया।

निरु ने नाइटी के बाहर से ही मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने एक बार फिर से उसका बूब्स दबाय और निरु मेरी तरफ पलटते हुए मुझे रुकने को बोली।

नीरु: "रुक जाओ, क्यों कर रहे हो? अभी तो. ."

नीरु की आँखें खुली। मैं उसकी आँखों में देख रहा था।

प्रशांत: "अभी तो क्या?"

नीरु: "अभी तो नहीं कर सकते... प्रशांत, कल कर लेना"

मै सोच में पड़ गया की कहीं वो यह तो नहीं कहना चाहती थी की "अभी तो किया था"। मगर मुझे देख कर बोलते हुए रुक गयी! निरु फिर करवट लेकर सो गयी। या फिर हो सकता हैं की उसको पता था की उसके पास मैं सोया हुआ था। मेरे इस प्लान ने पूरी तरह काम नहीं किया।

सूबह जीजाजी अपने घर चले गए। साथ में एक पहेली छोड़ गए की उनके और निरु के बीच पिछली दो रात में क्या हुआ था। निरु ने नहा लिया था। फिर मेरे पास आकर शरमाते हुए बात करने लगी।
 
नीरु: "रात को मेरे साथ क्या करने की कोशिश कर रहे थे?"

प्रशांत: "वोही जो बहुत दिनों से नहीं हुआ। मगर तुमने रोक दिया!"

नीरु: "मेरे पीरियड चल रहे थे। आज ही ख़त्म हुआ है। अब तुम चाहे तो कर सकते हो"

मेरी जान में जान आई की जीजाजी ने इसका मतलब निरु के साथ कुछ नहीं किया होगा। कल सुबह भी निरु के जल्दी नहाने का कारण यह पीरियड्स थे!

प्रशांत: "जीजाजी ने रात को मुझे कहा की मैं तुम्हारे पास आकर सो जाऊ!"

नीरु: "तुम्हारे टेस्ट के चक्कर में जीजाजी परसो पूरी रात जमीं पर सोये थे। सुबह मैं नहाने गयी तब मैंने उनको बिस्तर पर सोने को बोला था। कल रात भी एक घण्टा वेट किया की तुम दरवाजा खोलोगे पर तुम नहीं आए। मेरी तो आँख लग गयी थी। जीजाजी बैठे रहे और फिर मुझे बोल कर गए थे की वो तुम्हे अन्दर भेज रहे हैं"

अब समझ में आया की निरु को पहले ही पता था की मैं उसके पास लेटा हुआ था। मगर यह भी हो सकता हैं की निरु मुझसे झूठ बोल रही हो ताकी मेरा शक़ मिटा सके।

नीरु: "बहुत दिन हो गए, आज हम कुछ स्पेशल वाली चुदाई करे!"

प्रशांत: "पिछली बार वाली स्पेशल चुदाई याद हैं? मैंने जीजाजी बन कर तुमको चोदा था और तुम्हारी हालत ख़राब हो गयी थी!"

नीरु: "याद हैं! मेरे हाथ पैर काँप गए थे उस दीन। हम दोनों बहुत दिनों बाद चुदाई कर रहे है। आज भी कुछ स्पेशल करो"

प्रशांत: "स्पेशल चुदाई के लिए क्या करू? एक काम करता हूँ, इस टेडी बीयर को कुर्सी पर रखता हूँ और इसको प्रशांत मान लेते हैं और मैं जीजाजी बन कर तुम्हारी चुदाई करता हूँ "

नीरु: "तुम फिर से वोहि खेल खेलकर मुझे जीजाजी बनकर चोदना चाहते हो? तुम्हे पता हैं न की इस तरह की चुदाई के बाद मुझे कितना बुरा लगा था? मुझे नहीं चुदवाना ऐसे"

प्रशांत: "तो फिर थोड़ा चेंज करते है। मैं बन जाता हूँ निरु और तुम बन जाओ जीजाजी और परसो रात वाला नाटक करते है। टेडी बीयर मेरा रोले कर रहा हैं तो इसको कमरे से बाहर बैठते है। और मैं निरु बनकर तुम्हारे साथ अन्दर रहूँगा"

नीरु शक़ की नजरो से मेरी शकल देखने लगी।

नीरु: "तुम करना क्या चाह रहे हो?"

प्रशांत: "थोड़ी मस्ती होगी और मज़ा आएगा। तुम बतओ, यह एक्साइटिंग होगा की नहीं? "

नीरु: "एक्साइटिंग तो हैं, मगर मैं करुँगी क्या?"

प्रशांत: "जो मन में आये वो बोलॉ, जितना मुझे भड़काओगी उतनी अच्छी चुदाई होगी"

मै बेड पर बैठ गया। निरु ने टेडी बीयर को कमरे से बाहर रख दिया और अन्दर आकर दरवाजा बंद कर दिया और कुण्डी लगाने लगी।

मुझे यह देख आश्चर्य हुआ। मैं निरु का रोल कर रहा था तो मैंने सवाल उठया।

प्रशांत: "कुंडी क्यों लगायी जीजाजी? हम तो कुण्डी बिना लगाए सोने वाले थे, ताकी प्रशांत शक़ होने पर अन्दर आ पाए"

नीरु: "हॉ, मगर जीजाजी ने कुण्डी लगायी थी"

प्रशांत: "भूलो मात, तुम खुद जीजाजी बनी हुयी हो अभी!"

नीरु: "ओके ओके मैं जीजाजी का रोल करती हूँ! ... सुन निरु, अगर हमारे सोने के बाद प्रशांत ने दरवाजा खोला तो हमें पता कैसे चलेगा?इसलिए कुण्डी लगायी ताकी दरवजा को धक्का देने पर जोर की आवाज आये और हमें पता चले"

मुझे एक झटका लगा। जीजाजी ने कुण्डी क्यों लगायी होगी? क्या उनकी नीयत सच में खराब थी? मगर जीजाजी तो मुझसे बोल कर गए थे की उनकी नीयत अच्छी हैं और उन्होंने निरु के साथ कुछ नहीं किया, फिर कुण्डी क्यों लगायी थी?

नीरु: "अब हम कुछ ऐसा करते हैं की प्रशांत का ध्यान हमारी तरफ आये और शक़ करे। बोलो कुछ करे निरु?"

प्रशांत: "ऐसा क्या करे जीजाजी?"

नीरु: "तुम आवाज़े निकालो, जैसे यहाँ हम दोनों के बीच कुछ हो रहा हैं"

प्रशांत: "आप भी न जीजाजी। ऐसे कैसे आवजे निकाल दूं। मुझे शर्म आती है। मेरी तो हंसी छूट जाएगी, ऐसे आवाज नहीं नीलकेगी"
 
नीरु: "तुम आवाज़े निकालो, जैसे यहाँ हम दोनों के बीच कुछ हो रहा हैं"

प्रशांत: "आप भी न जीजाजी। ऐसे कैसे आवजे निकाल दूं। मुझे शर्म आती है। मेरी तो हंसी छूट जाएगी, ऐसे आवाज नहीं नीलकेगी"

नीरु: "एक काम करते है। पहले माहौल बनाती है। तुम लेट जाओ"

मै अब निरु बने हुए लेट गया और जीजाजी बनी निरु मेरे पास आकर लेट गयी और मेरे ऊपर हाथ रख दिया।

नीरु: "अभी मूड बना क्या?"

प्रशांत: "नहीं"

नीरु ने फिर अपन पाँव मेरी टाँगो पर रगडना शुरू किया। फिर मुझसे वोहि सवाल दोहराय पर मैंने फिर आवाज निकालने से मना कर दिया।

नीरु: "क्या कर रही हो निरु। ऐसे कैसे चलेगा। एक काम करो तुम आँख बंद करो और मुझे प्रशांत समझ लो"

नीरु बने हुए मैंने अपनी आँख बंद कर ली और तभी निरु का हाथ आकर मेरे लण्ड को लगा और वो मेरा लण्ड रगडने लगी। मैं सोचने लगा की क्या सचमुच जीजाजी ने निरु की आहें निकालने के लिए उसकी चूत को रगड़ा होगा?

नीरु: "क्या हुआ निरु, अब तो आवाज निकालो"

मैने अब हलकी हलकी सिसकिया निकालनी शुरू कर दि। वैसे भी काफी दिनों बाद निरु मेरा लण्ड रगड़ रही थी तो मुझे मजा आ रहा था। कुछ सेकण्ड्स के बाद मेरे पजामा खोल कर निरु ने मेरा नँगा लण्ड रगडना शुरू कर मेरी आहें बढा दी थी। मै उस लण्ड रगड़ाई का मजा ले ही रहा था की निरु ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया और मेरा हाथ अपनी चूत पर रगडने लगी।

नीरु: "चलो निरु, तुम भी मेरे रगडो, दोंनो की सिसकिया निकलेगी तो प्रशांत को शक़ ज्यादा होगा"

मै अब निरु की चूत को कपड़ो के ऊपर से ही रगडने लगा। पर फिर निरु ने अपनी नाइटी ऊपर कर दी और मेरा हाथ अपनी पैंटी में डाल दिया। मैं अब आराम से निरु की बालो भरी चूत को रगडने लगा। थोड़ी देर में निरु की भी सिसकिया निकलने लगी। एक दूसरे के नाजुक अंगो को रगड़ते हुए हम एक दूसरे को मजा दिला रहे थे और एक नशे में खो रहे थे।

प्रशांत: "जीजाजी, अगर प्रशांत ने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो?"

नीरु: "हम कौन सा कुछ गलत कर रहे हैं? आने दो, वो शक़ करते पकड़ा जाएगा"

प्रशांत: "जीजाजी मुझे डर लग रहा है। यह गलत हैं न!"

नीरु: "हम तो सिर्फ प्रशांत का टेस्ट लेने के लिए कर रहे है। चलो कुछ और करते हैं!"

प्रशांत: "क्या करू जीजाजी!"

नीरु: "तुम्हारे कपडे खोल दू? ज्यादा अच्छे से आवाज निकलेगी तो प्रशांत को ज्यादा शक़ होगा"

प्रशांत: "खोल दो, हमें तो वैसे भी प्रशांत का शक़ बढ़ाना है। पर कपडे खोल कर क्या करेंगे?"

नीरु: "वोही जो एक मर्द और औरत करते हैं"

प्रशांत: "क्या जीजाजी?"

नीरु: "नहाते है। तुम्हे क्या लगा निरु?"

प्रशांत: "मुझे लगा ...।"

नीरु: "तुम्हे लगा चु. . .ई तुम मुझसे चुदवाओगी?"

प्रशांत: "क्या बोल रहे हो जीजाजी? बाहर प्रशांत हैं, उसको पता चला तो?"

नीरु: "वो नहीं आएगा निरु, कुण्डी लगा रखी हैं, दरवाजा नहीं खुलेगा"

प्रशांत: "चुदाई की आवाज तो बाहर जाएगी न?"

नीरु: "अच्छा है। आवाज सुनकर अगर प्रशांत ने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो इसका मतलब उसको हम पर शक़ हैं"

प्रशांत: "हां! तो फिर चोद दो मुझे जीजाजी"

नीरु: "तो कपडे खोलो अपने"

प्रशांत: "ठीक हैं"

नीरु: "अपने खुद के कपडे खोलने में क्या मज़ा आएगा। निरु मैं तुम्हारे कपडे खोलूँगा और तुम मेरे"
 
मैने निरु की नाइटी निकालने के बाद उसके ब्रा और पैंटी निकाल कर उसको पूरा नँगा कर दिया। निरु ने फिर मेरे कपडे निकाल कर मुझे नँगा कर दिया। नंगा करते ही उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और हिलाते हुए कड़क करने लगी। लण्ड थोड़ा बड़ा हुआ तो निरु उसको अपने मुँह में लेकर चुसने लगी। इतने दिनों बाद कोई लड़की मेरे लण्ड को चुस रही थी और मैं जैसे हवा में तैरने लगा था और आहें भारत हुआ मजे लेता रहा। जब मेरा पानी निकलने लगा तब जाकर निरु रुकी।

नीरु: "निरु अब तुम्हारी बारी हैं, मेरे लण्ड को चुसने की"

यह कहते हुए निरु बिस्तर पर कोहनी के बल आधा लेट गयी और अपने पाँव चौड़े कर दिए। चुत खुली देखते ही इतने दिन की मेरी तड़प जाग गयी और मैं टूट पद। मैं अब बेतहाशा निरु की चूत को अपनी जुबान से रगड़ रगड़ कर चाट रहा था। उस से भी मन नहीं भरा तो उसकी चूत के होंठों को थोड़ा खोला और फिर अपने मुँह में भर कर किश किया और चुसा। ऐसा करते ही निरु को मजा आया और वो मुझे उत्तेजित करना चालू हो गयी।

नीरु: "वाह निरु, तुम तो बहुत अच्छा लण्ड चाटती और चुसती हो"

प्रशांत: "आपने भी मेरी चूत अच्छे से अपनी जुबान से चोदा हैं"

नीरु अब और नशे में जाने लगी। मैं अपनी जुबान और होंठों से तो कभी ऊँगली का भी सहारा लेकर निरु की चूत में खुजली करते हुए उसको उत्तेजित करता रहा।

प्रशांत: "अब हम रोले रिवर्स करले। मैं जीजाजी और तुम निरु!"

नीरु ने नशे में अपनी गर्दन हिलायी और हां कहा।

प्रशांत: "तो निरु अगर तुम्हे मजा आ रहा हैं तो आवाज नहीं निकालोगी क्या?"

नीरु: "ओह्ह! जीजाजी, क्या मस्त चुसते हो आप. आआह मजा आ रहा हैं ... उह्ह्ह्ह . . उम्मम्मम्म आआह जीजाजी ... चूत में जुबान डाल कर चोदो मुझे ... हम्म्म्म ... हां ऐसे ... जल्दी जल्दी ...आ आ . . ऊवाहः जीजाजी . . मजा आ रहा हैं . . और चोदो"

नीरु के मुँह से जीजाजी का नाम सुनकर बुरा लग रहा था पर निरु को इस तरह काफी दिन बाद मजे लेते देख बहुत खुसी भी मिल रही थी। इसलिए मैं पुरे जोश के साथ अपनी जुबान का खुरदुरा भाग निरु की चूत में रगड़ कर उसको मजे दिलता रहा। इन सब के बीच निरु लगातार मजे के मारे अपना पाँव बिस्तर पर ऊपर नीचे रगड़ कर तड़प रही थी। वो बहुत बुरी तरह आहें भरती रही और लास्ट में वो थोड़ा शांत हुयी।

नीरु: "बस जीजाजी रुक जाओ ... मेरा पूरा पानी निकाल दिया आपने . . आ जाओ . . मेरे मम्मे चुस लो अब . . आपके लिए ही बड़े किये हैं मैंने . . चुस लो सारा दूध इसका"

नीरु खुद मुझे आगे बढ़कर अपने मम्मे चुसने को बोल रही थी। जब की कुछ समय पहले जब हम साथ थे तब उसने मुझे मम्मे चुसने से मना कर दिया था।

शायद इतने दिन की जुदाई का असर था या अगर शक़ की नजर से देखु तो निरु मुझे अपन जीजा समझ कर अपने मम्मे चुसवाने की परमिशन दे रही थी। मैने निरु के बूब्स चूसे पर अब उनमें दूध नहीं था। या तो नैचुरली दूध ख़त्म हो गया था या फिर जीजाजी ने पहले ही पिछली दो रातो में निरु के मम्मो का सारा दूध चुस कर ख़त्म कर दिया था!

नीरु के मम्मे चुसते चुसते मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, शायद मैं निरु से कुछ और सच निकलवा सकता था। मुझे पता था की निरु जब चुदाई के नशे में डूबती हैं तो फिर उसको होश नहीं रहता और बहुत कुछ बोल जाती है। मैं उस वक़्त उसके मुँह से सच्चाई निकलवा सकता हूँ।

मैने निरु को लेटाया और उसकी दोनों टांगो को चौड़ा कर थोड़ा उठाया और अपना लण्ड निरु की चूत में डाल दिया। मेरे लण्ड को चूत की गर्मी में भी थोड़ी ठंडक मिली। एक बार लण्ड अन्दर गया तो मैं बिना धक्के मारे रुक नहीं पाया। मेरे लण्ड के धक्के अपनी चूत में सहते सहते निरु अब सिसकिया भर रही थी।
 
थोड़ी थोड़ी देर में मैं एक गहरा झटका निरु की चूत में मारता और वो तेज चीख के साथ अपनी हालत बयान करति। लगभग १०-१५ मिनट्स तक मैंने निरु को इसी तरह धक्के मारते हुए चोदा। उसका असर जल्दी ही दीखने लगा। शुरुआत में निरु रह रह कर सिसकिया भर रही थी मगर अब वो लगातार सिसकिया मारते हुए अपने बदन को बिस्तर पर रगड़ कर मजे ले रही थी।

प्रशांत: "निरु, मैंने प्रोटेक्शन नहीं पहना हैं"

नीरु: "हम्म . . कोई बात नहीं ...उह्ह्ह्हह्ह चोद दो मुझे . . जीजाजी"

प्रशांत: "बच्चा हो गया तो?"

नीरु: "उम्म्म्म . . मैं इमरजेंसी पिल ले लुंगी ... हाआअह ... चोदते रहो"

प्रशांत: "परसो रात चुदाई के बाद तुम पिल लेना तो नहीं भूल गयी न निरु?"

नीरु: "अह्ह्ह . . परसो कहाँ चुदवाया . . आआआह . . मेरा पीरियड था ..."

प्रशांत: "और कल रात चुदवाया तब?"

नीरु: "उह्ह्ह ... उम्म्म . . नहीं ली . . "

प्रशांत: "कल चुदवाया था या परसो चुदवाया था?"

नीरु: "कल ... उम्म्म्म ... कल चुदवाया था . . ऊऊह्ह्ह"

प्रशांत: "पक्का कल चुदवाया था?"

नीरु: "हाआआ. ."

प्रशांत: "कैसा चोदा?"

नीरु: "अच्छा ... वाला ... चोदा ..."

प्रशांत: "कितना अच्छा?"

नीरु: "हम्म्म्म जोर का . . चोदा . . मजा आ गया ... डॉगी वाला ...आईई . . मुझे कुतिया बना कर ... हाहाहा . . चोदा ... अआपने . . बहुत जोर से मारा ... उम्म्म "

प्रशांत: "तुम्हे तो पीरियड था न? कैसे चुदवाया"

नीरु: "झूठ था . . "

प्रशांत: "तो फिर अपने जीजाजी से परसो रात क्यों नहीं चुदवाया तुमने निरु?"

नीरु: "अह्ह्ह्हह . . आप तो ... मेरे मुँह में ही ... झड गए थे न जीजाजी ...उहःहःहः ... भूल गए ...आह ... मेरे कपडे गंदे किये ...ओहः . . उम्म्म . . जीजाजी ... चोदते रहो ..."

प्रशांत: "तुम तो मुझसे नहीं चुदवाना चाहती थी न?"

नीरु: "हआ . . चाहती थी . . चुदवाना . . पर डारति थी आप थपप्पड़ मार दोगे ... "

प्रशांत: "तो फिर तुम तैयार कैसे हुयी?"

नीरु: "हम्म्म ... उम्म्म . . आपका ... लण्ड कड़क था ... मुझे पीछे मेरी गांड में चुभ रहा था ... आआईए ... लण्ड तभी कड़क होता हैं ...ओहहह ... जब चोदने की इच्छा हो ... मैं समझ गयी ... और पकड़ लिया आपका लण्ड ... "
 
मैने निरु को लेटाया और उसकी दोनों टांगो को चौड़ा कर थोड़ा उठाया और अपना लण्ड निरु की चूत में डाल दिया। मेरे लण्ड को चूत की गर्मी में भी थोड़ी ठंडक मिली। एक बार लण्ड अन्दर गया तो मैं बिना धक्के मारे रुक नहीं पाया। मेरे लण्ड के धक्के अपनी चूत में सहते सहते निरु अब सिसकिया भर रही थी।

थोड़ी थोड़ी देर में मैं एक गहरा झटका निरु की चूत में मारता और वो तेज चीख के साथ अपनी हालत बयान करति। लगभग १०-१५ मिनट्स तक मैंने निरु को इसी तरह धक्के मारते हुए चोदा। उसका असर जल्दी ही दीखने लगा। शुरुआत में निरु रह रह कर सिसकिया भर रही थी मगर अब वो लगातार सिसकिया मारते हुए अपने बदन को बिस्तर पर रगड़ कर मजे ले रही थी।

प्रशांत: "निरु, मैंने प्रोटेक्शन नहीं पहना हैं"

नीरु: "हम्म . . कोई बात नहीं ...उह्ह्ह्हह्ह चोद दो मुझे . . जीजाजी"

प्रशांत: "बच्चा हो गया तो?"

नीरु: "उम्म्म्म . . मैं इमरजेंसी पिल ले लुंगी ... हाआअह ... चोदते रहो"

प्रशांत: "परसो रात चुदाई के बाद तुम पिल लेना तो नहीं भूल गयी न निरु?"

नीरु: "अह्ह्ह . . परसो कहाँ चुदवाया . . आआआह . . मेरा पीरियड था ..."

प्रशांत: "और कल रात चुदवाया तब?"

नीरु: "उह्ह्ह ... उम्म्म . . नहीं ली . . "

प्रशांत: "कल चुदवाया था या परसो चुदवाया था?"

नीरु: "कल ... उम्म्म्म ... कल चुदवाया था . . ऊऊह्ह्ह"

प्रशांत: "पक्का कल चुदवाया था?"

नीरु: "हाआआ. ."

प्रशांत: "कैसा चोदा?"

नीरु: "अच्छा ... वाला ... चोदा ..."

प्रशांत: "कितना अच्छा?"

नीरु: "हम्म्म्म जोर का . . चोदा . . मजा आ गया ... डॉगी वाला ...आईई . . मुझे कुतिया बना कर ... हाहाहा . . चोदा ... अआपने . . बहुत जोर से मारा ... उम्म्म "

प्रशांत: "तुम्हे तो पीरियड था न? कैसे चुदवाया"

नीरु: "झूठ था . . "

प्रशांत: "तो फिर अपने जीजाजी से परसो रात क्यों नहीं चुदवाया तुमने निरु?"

नीरु: "अह्ह्ह्हह . . आप तो ... मेरे मुँह में ही ... झड गए थे न जीजाजी ...उहःहःहः ... भूल गए ...आह ... मेरे कपडे गंदे किये ...ओहः . . उम्म्म . . जीजाजी ... चोदते रहो ..."

प्रशांत: "तुम तो मुझसे नहीं चुदवाना चाहती थी न?"

नीरु: "हआ . . चाहती थी . . चुदवाना . . पर डारति थी आप थपप्पड़ मार दोगे ... "

प्रशांत: "तो फिर तुम तैयार कैसे हुयी?"

नीरु: "हम्म्म ... उम्म्म . . आपका ... लण्ड कड़क था ... मुझे पीछे मेरी गांड में चुभ रहा था ... आआईए ... लण्ड तभी कड़क होता हैं ...ओहहह ... जब चोदने की इच्छा हो ... मैं समझ गयी ... और पकड़ लिया आपका लण्ड ... "

एक बार तो मैंने शॉक के मारे अपनी आँखें बंद कर ली पर मेरे लण्ड के निरु की चूत पर पड़ते धक्को से उसका पूरा बदन हील रहा था और उसके बूब्स जिस तेजी से हिलते हुए नाच रहे थे मैं वो नजारा देखना चाहता था इसलिए आँखें फिर खोल दि।

मै गुस्से में भर गया। मैं अपने शरीर का पूरा जोर लगा दिया और निरु की चूत में अब तक का सबसे तेज झटके मारे। झटका पड़ते ही निरु की जोर की चीख निकलती और फिर वो सिसकिया मारने लगती। मै नहीं रुका, और तेज झटके के साथ निरु को चोदते हुए अपने चरम की तरफ बढ़ने लगा। निरु की भी हालत खराब थी और वो क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रही थी।
 
प्रशांत: "दूसरा बच्चा भी मुझसे चुदवा कर ही पैदा करोगी तुम निरु"

नीरु: "एआई . . हां जीजा जी . ."

प्रशांत: "पहला बच्चा मेरा हैं या प्रशांत का हैं?"

नीरु: "आ आह . . आपका ...ओययी. . जीजाजी आपका ही हैं . ."

प्रशांत: "चल झूठि, मैंने कब चोदा तुम्हे ... तुम्हे तो प्रशांत ने माँ बनाया न?"

नीरु: "आ आह. . जीजाजी ... नहीं ... आपने ही चोदा था. . भूल गए ... एक बार आपने चोदा ...ओअयी. . और दूसरी बार ... ओअईई मा"

प्रशांत: "दूसरी बार क्या?"

नीरु: "अह्ह्ह्ह ... दूसरी बार ...मैं ...आ. . आपके ऊपर चढ़ कर ...हम्म्म्म. . मैंने चोदा था ..."

प्रशांत: "तुम्हारे जीजा ने ही तुम्हे चोद कर पहला बच्चा दिया न निरु?"

नीरु: "हां. . जीजाजी ... हूऊऊऊ. . उउउऊँन. . चोदो. . मेरा होने वाला हैं ... दे दो. . दे दो दूसरा बच्चा मुझे जीजा जी. .अ . .अआह्ह्ह"

मैने अब अब लण्ड का सारा जूस निरु की चूत में छोडना शुरू कर दिया था। अगले ८-१० झटके में मेरे लण्ड के टैंक का पानी ख़त्म हो गया और मैं रुक गया। निरु भी अपना सर पकड़ कर लेटी थी और आहें अब धीमी पड़ गयी थी। मैने अपने लण्ड को निरु की चूत से बाहर निकला। मैंने इतना जबरदस्त चोदा था की निरु की चूत पूरी गन्दी हो चुकी थी। उसका शरीर लाल पड़ चुका था। हम दोनों पीठ के बल लेटे हुए तेज तेज साँसें ले रहे थे। मैंने देखा की निरु के मोटे मम्मे साँस लेने के साथ ऊपर नीचे तेजी से ही रहे थे और बहुत मादक लग रहे थे।

प्रशांत: "तुमने जो बताया उसमे कितना परसेंट सच था, ८०, ९० या १००% सच!"

नीरु ने लेटे लेटे ही मेरी तरफ नजरे घुमायी और मुझे घूरते हुए देख।

नीरु: "तुम मुझ पर अभी भी शक़ कर रहे हो!"

प्रशांत: "तुमने जो चुदाई के दौरान कहा उसके बारे में सच पुछ रहा हूँ"

नीरु अब बिस्तर पर उठकर बैठ गयी और मुझे देखने लगी।

नीरु: "पहले तुमने खेल की आड़ में मेरी मज़बूरी का फायदा उठा कर मुझसे हर कुछ बुलवाने की कोशिश कि, और अब उसका सहारा लेकर मेरे चरित्र पर ऊँगली उठा रहे हो?"

प्रशांत: "कैसी मज़बूरी?"

नीरु: "मैंने इतने टाइम से नहीं चुदवाया और क्लाइमेक्स के करीब आ गयी थी, इसका फायदा उठा कर तुम मुझे ऐसी वैसी चीजें बुलवा रहे थे"

प्रशांत: "मैंने थोड़े ही मजबूर क्या था? तुम खुद बोल रही थी"

नीरु: "पुछ तो तुम ही रहे थे"

प्रशांत: "तो तुम चुप रहती"

नीरु: "अगर मैं ऐसी चीजें नहीं बोलति तो तुम मुझे अच्छे से नहीं चोदते इसलिए मैं जो मुँह में आया वो हर कुछ बोलति गयी। क्यों की तुमने ही चुदाई से पहले बोला था जो मन में आये वो बोलो जिस से तुम उत्तेजित हो"

उसके मुँह से गन्दी बातें सुनकर मुझे दुगुना जोश चढ़ता हैं और मैं जोर से चोदता हूँ, यह बात उसकी सच थी। मगर क्या वो सिर्फ मजे के लिए यह सब बातें बोल रही थी या वो सब सच था?

नीरु: "मैं तो पहले ही इस खेल के लिए ना बोलने वाली थी। पर फिर सोचा तुम अब सुधर गए होगे। कैसे इतने दिन तक मेरे लिए फूल लाकर मेरे ऑफिस के बाहर वेट करते थे। तुम्हे मुझ पर अभी भी शक़ हैं न?"

मैं चुप हो गया। मुझे शक़ तो था, पर निरु को यह सुनकर बुरा भी लगेग। मुझे लगता था की निरु भोलि हैं और जीजाजी उसको बेवकूफ बना कर चोद चुके होंगे। मेरी चुप्पी देख कर निरु को बुरा लगा।

नीरु: "सब समझ गयी मैं, तुम्हे मुझ पर अभी भी शक़ है। मैं हमारे तलाक की अरजी वापिस नहीं लुंगी। अगर तुम इस तरह मुझ पर शक़ करते रहोगे तो साथ रहने का कोई मतलब नहीं हैं"

प्रशांत: "तुमने भले ही नशे की हालत में यह सब कहा हो लेकिन मुझे यही सच लग रहा है। नशे में ही इंसान सच बोलते है। नशे के बाहर आकर तो कोई भी झूठ बोल सकता हैं"

नीरु: "मतलब, मैं जो तुमसे डायरेक्ट बात कर रही हूँ उसकी कोई वैल्यू नहीं हैं और यह सब झूठ है। जब की हमारी चुदाई का मजा बढ़ाने के लिए जो झूठ मैंने बोला वो तुम्हे सच लग रहा हैं! पहले तुम खुद मुझे इन सब में झौंकते हो और फिर उसका गलत मतलब निकालते हो!"

प्रशांत: "मैं अब और बेवकुफ नहीं बनुंगा। पहले मुझे लगा सिर्फ जीजाजी की नीयत गन्दी है। पर अब लगता हैं तुम खुद इसके लिए ज़िम्मेदार हो"
 
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