नीरु: "रात को मेरे साथ क्या करने की कोशिश कर रहे थे?"
प्रशांत: "वोही जो बहुत दिनों से नहीं हुआ। मगर तुमने रोक दिया!"
नीरु: "मेरे पीरियड चल रहे थे। आज ही ख़त्म हुआ है। अब तुम चाहे तो कर सकते हो"
मेरी जान में जान आई की जीजाजी ने इसका मतलब निरु के साथ कुछ नहीं किया होगा। कल सुबह भी निरु के जल्दी नहाने का कारण यह पीरियड्स थे!
प्रशांत: "जीजाजी ने रात को मुझे कहा की मैं तुम्हारे पास आकर सो जाऊ!"
नीरु: "तुम्हारे टेस्ट के चक्कर में जीजाजी परसो पूरी रात जमीं पर सोये थे। सुबह मैं नहाने गयी तब मैंने उनको बिस्तर पर सोने को बोला था। कल रात भी एक घण्टा वेट किया की तुम दरवाजा खोलोगे पर तुम नहीं आए। मेरी तो आँख लग गयी थी। जीजाजी बैठे रहे और फिर मुझे बोल कर गए थे की वो तुम्हे अन्दर भेज रहे हैं"
अब समझ में आया की निरु को पहले ही पता था की मैं उसके पास लेटा हुआ था। मगर यह भी हो सकता हैं की निरु मुझसे झूठ बोल रही हो ताकी मेरा शक़ मिटा सके।
नीरु: "बहुत दिन हो गए, आज हम कुछ स्पेशल वाली चुदाई करे!"
प्रशांत: "पिछली बार वाली स्पेशल चुदाई याद हैं? मैंने जीजाजी बन कर तुमको चोदा था और तुम्हारी हालत ख़राब हो गयी थी!"
नीरु: "याद हैं! मेरे हाथ पैर काँप गए थे उस दीन। हम दोनों बहुत दिनों बाद चुदाई कर रहे है। आज भी कुछ स्पेशल करो"
प्रशांत: "स्पेशल चुदाई के लिए क्या करू? एक काम करता हूँ, इस टेडी बीयर को कुर्सी पर रखता हूँ और इसको प्रशांत मान लेते हैं और मैं जीजाजी बन कर तुम्हारी चुदाई करता हूँ "
नीरु: "तुम फिर से वोहि खेल खेलकर मुझे जीजाजी बनकर चोदना चाहते हो? तुम्हे पता हैं न की इस तरह की चुदाई के बाद मुझे कितना बुरा लगा था? मुझे नहीं चुदवाना ऐसे"
प्रशांत: "तो फिर थोड़ा चेंज करते है। मैं बन जाता हूँ निरु और तुम बन जाओ जीजाजी और परसो रात वाला नाटक करते है। टेडी बीयर मेरा रोले कर रहा हैं तो इसको कमरे से बाहर बैठते है। और मैं निरु बनकर तुम्हारे साथ अन्दर रहूँगा"
नीरु शक़ की नजरो से मेरी शकल देखने लगी।
नीरु: "तुम करना क्या चाह रहे हो?"
प्रशांत: "थोड़ी मस्ती होगी और मज़ा आएगा। तुम बतओ, यह एक्साइटिंग होगा की नहीं? "
नीरु: "एक्साइटिंग तो हैं, मगर मैं करुँगी क्या?"
प्रशांत: "जो मन में आये वो बोलॉ, जितना मुझे भड़काओगी उतनी अच्छी चुदाई होगी"
मै बेड पर बैठ गया। निरु ने टेडी बीयर को कमरे से बाहर रख दिया और अन्दर आकर दरवाजा बंद कर दिया और कुण्डी लगाने लगी।
मुझे यह देख आश्चर्य हुआ। मैं निरु का रोल कर रहा था तो मैंने सवाल उठया।
प्रशांत: "कुंडी क्यों लगायी जीजाजी? हम तो कुण्डी बिना लगाए सोने वाले थे, ताकी प्रशांत शक़ होने पर अन्दर आ पाए"
नीरु: "हॉ, मगर जीजाजी ने कुण्डी लगायी थी"
प्रशांत: "भूलो मात, तुम खुद जीजाजी बनी हुयी हो अभी!"
नीरु: "ओके ओके मैं जीजाजी का रोल करती हूँ! ... सुन निरु, अगर हमारे सोने के बाद प्रशांत ने दरवाजा खोला तो हमें पता कैसे चलेगा?इसलिए कुण्डी लगायी ताकी दरवजा को धक्का देने पर जोर की आवाज आये और हमें पता चले"
मुझे एक झटका लगा। जीजाजी ने कुण्डी क्यों लगायी होगी? क्या उनकी नीयत सच में खराब थी? मगर जीजाजी तो मुझसे बोल कर गए थे की उनकी नीयत अच्छी हैं और उन्होंने निरु के साथ कुछ नहीं किया, फिर कुण्डी क्यों लगायी थी?
नीरु: "अब हम कुछ ऐसा करते हैं की प्रशांत का ध्यान हमारी तरफ आये और शक़ करे। बोलो कुछ करे निरु?"
प्रशांत: "ऐसा क्या करे जीजाजी?"
नीरु: "तुम आवाज़े निकालो, जैसे यहाँ हम दोनों के बीच कुछ हो रहा हैं"
प्रशांत: "आप भी न जीजाजी। ऐसे कैसे आवजे निकाल दूं। मुझे शर्म आती है। मेरी तो हंसी छूट जाएगी, ऐसे आवाज नहीं नीलकेगी"