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Adultery ऋतू दीदी

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अब तक आपने पढ़ा की नीरू ने बाथरूम मे जीजाजी को “नीरू” नाम लेते हुए ऋतु दीदी को चोदते हुए सुन लिया था. नीरू को यकीन नही हुआ और उसने प्रशांत को कहा की वो खुद जीजाजी के मूह से यह सुनना चाहत हैं की जीजाजी उसको चोदना चाहते हैं.

अब आगे की कहानी प्रशांत की ज़ुबानी जारी हैं…

प्रशांत: “जीजाजी तुम्हारे डर से तुम्हे शायद कभी नही बोलेंगे की वो तुम्हे सच मे चोदना चाहते हैं, वरना अब तक वो बोल चुके होते”

नीरू: “मैं एक बार फिर से वोही ग़लती करूँगी जो पहले की थी. मैं खुद उनको मुझे चोदने को कहूँगी. इस बार वहाँ ना तुम होगे और ना ही ऋतु दीदी. फिर देखती हूँ की जीजाजी मुझे सच मे चोदते हैं या नही”

प्रशांत: “तुम पागल हो क्या! जीजाजी तुम्हे चोद देंगे और तुम कुच्छ नही कर पाओगी”

नीरू: “मुझे बस सच जानना हैं, जीजाजी का सच”

अब मैं टेन्षन मे आ गया. क्या नीरू सच मे यह ख़तरनाक एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं. वो तो चाहती हैं की ऋतु दीदी और मैं भी वहाँ ना रहे. फिर तो पक्का जीजाजी अकेले मे नीरू को चोद ही डालेंगे.

प्रशांत: “मैं तुम्हे इस एक्सपेरिमेंट की पर्मिशन नही दे सकता”

नीरू: “तुम्हारा मुझ पर कोई अधिकार नही हैं. हमारा तलाक़ भी हो चुका हैं. तुम मुझे नही रोक सकते”

प्रशांत: “कम से कम मुझे वहाँ रहने की तो इजाज़त दो. जैसे ही जीजाजी तुम्हारे साथ ग़लत काम करेंगे मैं उन्हे रोक लूँगा”

नीरू: “कोई ज़रूरत नही हैं. मैं अपने आप को संभाल लूँगी. मुझे लगता था की जीजाजी मुझे अपनी बेटी मानते हैं. अगर जीजाजी को मुझे चोदने मे कोई हर्ज नही हैं तो ठीक हैं, मैं भी देखती हूँ की जिसको वो अपनी बेटी मानते हैं उसको कैसे चोदते हैं”

प्रशांत: “देखो जीजाजी मुझे अपने मन की बात पहले ही बता चुके हैं. उनको चोदना होगा तो वो मेरे सामने भी तुम्हे चोद ही देंगे. मेरे वहाँ रहने से उनको कोई फ़र्क नही पड़ेगा. मुझे वहाँ रहने दो प्लीज़”

नीरू: “ठीक हैं, अगर तुम्हे देखना हैं तो देख लेना. मैं भी चाहती हूँ की तुम खुद देखो की तुम जीजाजी के बारे मे कितना ग़लत हो. मगर तुम छूप कर रहोगे, और कुच्छ भी हो जाए बाहर नही निकलोगे”

प्रशांत: “अगर जीजाजी ने तुम्हारे साथ कुच्छ ग़लत किया तो मैं बाहर आउन्गा और उन्हे पीटूँगा”

नीरू: “किस हक़ से? तुम मेरे क्या लगते हो? तुम बीच मे नही आओगे, खाओ मेरी कसम”

प्रशांत: “मगर…”

नीरू: “अगर जीजाजी सच्चे निकले तो मैं तुमसे शादी नही करूँगी, क्यू की तुमने फिर से उन पर शक किया हैं. अगर जीजाजी झूठे निकले और मुझे चोदने की कोशिश की तो फिर तुम्हारी इक्षा की तुम मुझसे फिर से शादी करना चाहोगे या नही”

प्रशांत: “नीरू मुझे पता हैं की क्या होने वाला हैं, इसलिए मुझे उन्हे रोकने की पर्मिशन दे दो”

नीरू: “तुम मेरी कसम खाओ की बीच मे नही आओगे, वरना मैं तुमसे छिपकर यह एक्सपेरिमेंट कर लूँगी”

प्रशांत: “नही. मैं कसम ख़ाता हूँ की मैं बीच मे नही आउन्गा, मगर मुझे वहाँ रहना हैं”

नीरू: “आज शाम को घर पहुच कर मैं जीजाजी को रात को अपने बेडरूम मे बूलौंगी और तुम अटॅच्ड वॉशरूम मे छूपे रहना”

मैने हा में गर्दन हिलाई. मुझे बहुत डर लग रहा था की आज रात पता नही क्या होने वाला था. हम दोनो फिर होटेल रूम मे आ गये तब तक जीजाजी और ऋतु दीदी की चुदाई ख़त्म हो चुकी थी.

ऋतु दीदी को मैने आँखों के इशारे से बता दिया की मैने नीरू को वॉशरूम से आती जीजाजी की आवाज़े सुना दी हैं जैसा की हमने प्लान किया था.

मैने ऋतु दीदी को रात को होने वाले एक्सपेरिमेंट के बारे मे नही बताया. दिन भर हम घूमते रहे और नीरू थोड़ी टेन्षन मे दिखी.

शाम को हम घर पहुचे. जीजाजी और ऋतु दीदी सोने के लिए गेस्ट रूम मे चले गये. मैं और नीरू हमारे बेडरूम मे आ गये.

प्रशांत: “नीरू फिर से सोच लो, कुच्छ ग़लत होने पर मैं तुम्हे बचना चाहता हूँ”

नीरू: “तुम्हे घर से बाहर जाना हैं या यहा बाथरूम मे छूपे रहना हैं? यहा रहना हैं तो तुम जीजाजी के जाने तक बाहर नही आओगे”

मैं चुप हो गया. नीरू ने कुच्छ देर बाद जीजाजी को मेसेज किया की वो हमारे बेडरूम मे आ जाए और ऋतु दीदी को नही बताए.

जीजाजी के आने से पहले मैं जाकर अटॅच्ड वॉशरूम मे छूप गया. जीजाजी कमरे मे आए और नीरू ने दरवाज़ अंदर से लॉक कर दिया.

जीजाजी: “क्या हो गया, सब ठीक तो हैं और प्रशांत कहा हैं?”

नीरू: “वो बाहर गया हैं. आप यह बताओ मैं आपको कैसी लगती हूँ!”

जीजाजी: “यह पूछने के लिए मुझे सोते हुए बुलाया! तुम तो मेरी परी हो. तुमसे सुंदर इस दुनिया मे कोई नही हैं”

जीजाजी ने नीरू के चेहरे पर आती बालो की लत को नीरू के कानो के पीछे अटकाया और फिर अपने हाथो की उंगलियों के पीछे की तरफ से नीरू के गालो पर फिराया.

नीरू: “यह नही पुछा मैने, यह बताओ मैं आपकी कौन हूँ?”

जीजाजी: “यह कैसा सवाल हैं! तुम मेरी इकलौती साली हो”

नीरू: “वो तो दुनिया की नज़रो मे हमारा रिश्ता हैं. आप मुझे क्या समझते हो?”

जीजाजी: “क्या हो गया तुमको आज!”
 
मैं वॉशरूम का हल्का सा दरवाजा खोले एक दरार से यह सब देख रहा था. नीरू और जीजाजी एक दूसरे सामने करीब खड़े थे. नीरू का चेहरा गंभीर था.

जीजाजी ने नीरू का हाथ अपने हाथ मे पकड़ा था और चेहरे पर एक स्माइल थी.

नीरू: “मैने आज सुबह वो सब सुना जो आप वॉशरूम मे ऋतु दीदी को चोदते हुए कह रहे थे”

यह सुनकर जीजाजी दंग रह गये और चेहरे पर से स्माइल गायब हो गयी और उसकी जगह गंभीरता ने ले ली.

नीरू: “बोलिए, आपने ऐसा क्यू किया?”

जीजाजी: “वो … एम्म … मैं …”

नीरू: “सच सच बताओ, आप मेरे बारे मे क्या सोचते हो! क्या आप मुहे चोदना चाहते हो?”

जीजाजी: “नही, ऐसी कोई बात नही हैं नीरू .. .वो तो मैं बस …”

नीरू: “आप मुझे चोदना चाहते हो तो मैं आपको नही रोकूंगी. आपके सामने खड़ी हूँ, जो करना हैं कर लो”

जीजाजी: “क्या कह रही हो! मैं ऐसा नही सोचता …”

नीरू ने अपना टी शर्ट अपने सिर से होकर निकाल दिया और उपर से सिर्फ़ ब्रा मे वहाँ खड़ी थी. जीजाजी बोलते हुए रुक गये और नीरू की छाती को घूर्ने लगे जहा ब्रा के बीच से नीरू के मम्मे दिख रहे थे.

नीरू: “मैं रेडी हूँ, आपसे चुदवाने के लिए. क्या आप मुझे चोदने को रेडी हो?”

नीरू जीजाजी की आँखो मे झाँक रही थी और जीजाजी की नज़र नीरू के आधे नंगे बदन पर टिकी थी.

नीरू आगे बढ़ी और जीजाजी के सीने पर सिर रख कर उनसे चिपक गयी. जीजाजी ने भी उसको अपने बाहों मे भर लिया और नीरू की नंगी बाहो पर हाथ फेरने लगे.

नीरू: “आप मुझे चोदोगे ना?”

जीजाजी ने कोई जवाब नही दिया. पर अब जीजाजी का हाथ नीरू की ब्रा से झाँकति नंगी पीठ और नंगी कमर पर फिर रहा था.

नीरू: “कुच्छ बोलते क्यू नही, क्या आप मुझे चोदोगे!”

जीजाजी: “तुम क्या चाहती हो?”

नीरू: “वोही जो आप चाहते हो. आप मुझे चोदना चाहते हो तो मैं भी आपसे चुदवाना चाहती हूँ”

जीजाजी ने फिर नीरू की पीठ से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. एक झटके मे उस ब्रा की पकड़ नीरू के बदन से ढीली पड़ गयी और नीरू का पूरा शरीर एक झटके मे हिल गया.

शायद नीरू को यह उम्मीद नही थी की जीजाजी उसका ब्रा का हुक खोल लेंगे. नीरू चुप हो गयी थी. मगर नीरू के पीछे से नंगी पीठ और कमर पर उपर से नीचे जीजाजी की उंगलिया घूम रही थी.

अंदर वॉशरूम मे खड़े मेरे हाथ पैर काँप रहे थे की आगे क्या होने वाला था. क्या नीरू के लिए इतना काफ़ी नही हैं जीजाजी की नीयत जानने के लिए!

नीरू जो अब तक जीजाजी के सीने से चिपकी हुई थी अब उसने अपना ब्रा अपनी छाती से चिपकाए थोड़ा जीजाजी से पीछे हटी.

नीरू के चेहरे पर टेन्षन थी पर जीजाजी के चेहरे पर स्माइल लौट चुकी थी. जीजाजी ने ब्रा के स्ट्रॅप नीरू के कंधो से नीचे गिराई, पर नीरू अभी भी ब्रा को छाती से चिपकाए हुई थी और ब्रा गिरने नही दिया और अपने मम्मे भी छिपाए रखे.

जीजाजी ने अपने दोनो हाथ से नीरू के दोनो कंधे पकड़े. दोनो अभी भी एक दूसरे की आँखों मे झाँक रहे थे. नीरू की आँखें गीली हो कर चमक रही थी और एक डर भी था.

नीरू: “आप सच मे मुझे चोदना चाहते हो!”

जीजाजी: “तुम जैसी खूबसूरत लड़की को चोदना तो हर आदमी का सपना होगा”

नीरू: “और आपका भी यही सपना हैं?”

जीजाजी: “मैं भी तो एक आदमी ही हूँ”

नीरू ने अपना हाथ ब्रा से हटा लिया और हाआत नीचे कर दिए. वो ब्रा खिसक कर नीचे गिर गया और नीरू वहाँ टॉपलेस खड़ी थी.

जीजाजी के नज़रे नीरू की छाती पर गयी और इतना तड़पने के बाद पहली बार नीरू के मम्मों को पूरा नंगा देखा और उनके मूह से लज्जा की बजाय तारीफे निकलने लगी.

जीजाजी: “वाउ! नीरू तुम्हारे जैसे खूबसूरत मम्मे मैने कभी नही देखे. यह दुनिया के सबसे खूबसूरत मम्मे हैं”

नीरू का चेहरा बता रहा था की वो पूरी तरह दंग थी. उसको यह उम्मीद नही थी. उसने सोचा था की जीजाजी उसको कपड़े फिर पहना देंगे पर वो तो उसके नंगे बदन की तारीफे कर रहे थे.

नीरू इस सदमे से उभरी भी नही थी की जीजाजी की दोनो हथेलियो ने नीरू के बड़े से मम्मों को पकड़ लिया था और हल्का सा दबा भी लिया था.

नीरू का मूह थोड़ा खुल गया और जीजाजी की स्माइल और बढ़ गयी और डाट दिखने लगे थे. मैं वॉशरूम मे अपनी मुट्ठी भींचे गुस्से मे खड़ा था.

नीरू ने फिर आँखें बंद कर ली थी. जीजाजी ने फ़ायदा उठाया और नीरू के मम्मों से हाथ हटा कर अपने मूह मे नीरू के निपल भर लिए और चूसने लगे.

नीरू की पहली बार सिसकी निकली और चेहरा च्चती की तरफ हो गया और मूह खुला का खुला रह गया.

मैं वॉशरूम मे बैठा मन ही मन नीरू को कह रहा था की अब तो प्लीज़ वो जीजाजी को रोक दे इस से पहले की वो उसका और ज़्यादा फ़ायदा उठा पाए, पर नीरू को जीजाजी की बेशर्मी की लिमिट देखनी थी.

अगले कुच्छ सेकेंड्स तक जीजाजी छपर्र छपर्र करते हुए नीरू के निपल और मम्मों को अपने मूह मे लिए चूस्ते रहे और दबाते रहे.

नीरू ने फिर आँखें खोली और जीजाजी के कंधे पकड़ कर उनको अपने मम्मों से दूर किया. जीजाजी फिर सीधा खड़े हो गये पर चेहरे पर स्माइल थी.

अगले एपिसोड मे पढ़िए जीजाजी की असली गंदी वाली नीयत सामने आने के बाद नीरू का क्या रिक्षन रहेगा.
 
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अब तक आपने पढ़ा की नीरू ने जीजाजी की नीयत जानने के लिए एक एक्सपेरिमेंट किया उनको चोदने का इन्विटेशन दिया. जीजा जी ने नीरू को टॉपलेस देख कर उसके मम्मे दबाए और चूस लिए. फिर नीरू ने जीजाजी को अपने से दूर किया.

अब आगे…

जीजाजी ने बिना समय गवाए नीरू को अपने सीने से फिर चिपका लिया. नीरू के मम्मे जीजाजी के सीने से चिपक कर दब गये थे और जीजाजी ने नीरू की नंगी पीठ और कमर को कस कर पकड़ा हुआ था.

नीरू एक ज़िंदा लाश की तरह चिपकी हुई थी और कोई विरोध नही किया. उसका भरोसा उस आदमी पर से आज टूट गया था जिस पर सबसे ज़्यादा यकीन था.

जीजाजी के हाथ तेज़ी से नीरू की पीठ और कमर के मखमली स्किन पर उत्तेजना के साथ घूम रहे थे और जीजाजी के होंठ नीरू के गर्दन और कंधे पर चूम रहे थे.

कुच्छ सेकेंड्स के बाद जीजाजी ने नीरू को छोड़ा और अपना टी शर्ट निकाल कर टॉपलेस हो गये, नीरू देखती ही रह गयी. जीजाजी जल्दी ही पूरे नंगे नीरू के सामने थे और उनका लंड अब तक कड़क होकर स्टील के पाइप की तरह खड़ा था.

नीरू का ध्यान जीजाजी के लंड पर नही गया था. वो तो अभी भी उनके आँखों मे झाँक रही थी की कोई शर्म बाकी हैं भी या नही.

जीजाजी ने झुक कर नीरू का पाजामा नीचे खिच कर निकाला और फिर पैंटी को भी निकाल दिया. अब नीरू पूरी नंगी खड़ी थी और शून्य मे निहार रही थी.

जीजाजी ने नीरू की कमर मे हाथ डाला और उसको बिस्तर के पास ले आए. मैं वॉशरूम में छूपा हुआ अभी भी मन मे रिक्वेस्ट कर रहा था की नीरू अब तो जीजाजी को रोक ले.

जीजाजी ने नीरू को डॉगी स्टाइल मे बैठा दिया और खुद ने पोज़िशन ले ली नीरू के पिच्छवाड़े. जीजाजी ने नीरू की गोरी गान्ड के उभार पर थोड़ी देर हाथ फिराया और फिर अपना लंड पकड़ कर नीरू की गान्ड की दरार और चूत के बाहर रगड़ा.

मैं अब अपने आप को तैयार करने लगा की मुझे अब अंदर जाकर जीजाजी को रोकना ही होगा. नीरू ने सिर घुमा कर साइड मे देखा जहा वॉशरूम का दरवाजा था.

मेरी नीरू से नज़रे मिली और मैं इशारा किया की मैं बाहर आना चाहता हूँ. नीरू ने अपना सिर हल्का सा घुमाया और आँखो के इशारे से मुझे मना किया. मुझे बहुत गुस्सा आया.

मैं और नीरू आँखो ही आँखो मे बात कर रहे थे की तभी नीरू की एक तेज आह निकली और उसका मूह खुला का खुला रह गया और साथ मे जीजाजी की भी एक राहत भरी आह आई.

जीजाजी का लंड नीरू की चूत मे उतर चुका था और उनका शरीर नीरू की गाअंड से चिपक गया था. एक सेकेंड के लिए मैने आँखें बंद कर ली और एक कड़वा घुट पीकर फिर आँखें खोल ली.

जीजाजी को शायद यकीन नही हो रहा था की उन्होने अपना लंड आख़िरकार नीरू की चूत मे उतार ही दिया हैं. जीजाजी लंबी लंबी साँसें ले रहे थे. नीरू की गान्ड पर पड़े उनके हाथ चुदाई की उत्तेज्नना मे काँप रहे थे.

10 सेकेंड्स के बाद जब उनको यह अहसास हुआ तो उन्होने अपना लंड फिर थोड़ा बाहर खींचा और पूरा बाहर निकालने से पहले ही फिर अंदर धक्का मारते हुए अपना लंड नीरू की चूत मे उतार दिया.

इस बार बड़ी तेज़ी से लंड चूत मे उतरा और नीरू के खुले मूह से एक तेज सिसकी निकल गयी और आँख कुच्छ सेकेंड्स के लिए बंद हो गयी. जीजाजी भी “अया” करते रह गये. यह तो बस एक शुरुआत थी.

जीजाजी फिर नही रुके, उन्होने लगातार धक्के मारते हुए नीरू को चोदना शुरू कर दिया. घोड़ी बनी नीरू का बदन उन धक्को से आगे पीछे हिल रहा था.

जीजाजी ने दोनो हाथो से नीरू की कमर पकड़ी हुई थी और डॉगी स्टाइल मे नीरू को चोदते रहे. नीरू की सिसकिया चालू हो चुकी थी. वो सिसकिया ना तो दर्द भरी थी और ना ही मज़े से भरी.

नीरू की सिसकिया एक टूटे दिल के दर्द की सिसकिया थी. नीरू का चेहरा मेरी तरफ ही था और मैं उसके सिर से लटकी ज़ुल्फो के बीच में से उसकी आँखों से आँसू निकलते देख पा रहा था.

नीरू सिसकियो के बीच मे सूबक भी रही थी पर जीजाजी पर कोई असर नही हुआ और वो मज़े लेते नीरू को चोदते ही रहे. मैं गुस्से में अपनी मुट्ठी भींचे वहाँ खड़ा था और इंतेजार कर रहा था की नीरू एक बार मदद के लिए मुझे बुलाए..

वॉशरूम मे मैं हेल्पलेस सा खड़ा था. इक्षा तो थी की बाहर जाकर जीजाजी को रोक लू, पर किस अधिकार से बाहर जाता. नीरू खुद यह सब करवा रही थी.

अगर मुझे पहले पता होता की मेरे और ऋतु दीदी के प्लान का यह अंजाम होने वाला हैं तो मैं कभी नीरू को वो सब नही सुनाता की जीजाजी “नीरू” नाम लेकर ऋतु दीदी को चोदते हैं.

मगर अब काफ़ी देर हो चुकी थी. नीरू के रोने की आवाज़े अब और भी ज़ोर से आने लगी थी. उसको शायद मदद की ज़रूरत थी. मुझसे फिर रहा नही गया, उसकी रुलाई को मैने मदद की गुहार मान लिया.

मैने तेज़ी से वॉशरूम का दरवाजा गुस्से मे खोला और आवाज़ होते ही जीजाजी का ध्यान मेरी तरफ गया. मगर उनको कोई फ़र्क नही पड़ा और नीरू को चोदते रहे.

नीरू को चोदने का मौका वो भला अपने हाथ से कैसे जाने देते. मुझे देखते ही उनको तो और पंख लग गये. जीजाजी ने झटके मार कर नीरू को चोदना शुरू किया.

उन झटको के दर्द से नीरू की चीख निकल गयी. मैं जीजाजी पर चिल्लाया और आगे आकर उनको धक्का देकर नीरू से दूर किया. जीजाजी मेरे धक्के से अनबॅलेन्स होकर बिस्तर से नीचे चीखते हुए गिर पड़े.

नीरू जो अब तक डॉगी स्टाइल मे बैठी थी, वो अब पेट के बल बिस्तर पर लेट गयी. मैने उसकी नंगी पीठ और सिर पर हाथ फेरा और उसको शान्त्वना दी.

फिर मैं जीजाजी के पास पहुचा जो अब तक खड़े हो चुके थे. मुझे नही पता मैने कितने पुंछ और लाते मारी परंतु उनके मूह से जितनी चीखें निकली उन्होने मुझे विचलित कर दिया.

जीजाजी मुझसे उम्र में बड़े थे और हमेशा आदर दिया था तो उनकी चीख सुनकर आगे और हाथ उतहाने की हिम्मत नही हुई. मैं उन पर बस चिल्लाने लगा.
 
मैने जीजाजी को धक्का दिया और फिर पूरा झकज़ोर दिया था. तभी दरवाजे पर नॉक हुआ और ऋतु दीदी की आवाज़ आई. शायद चिल्लाहट सुनकर वो आ गयी थी. मैने जीजाजी को छोड़ा और दरवाजा खोलकर ऋतु दीदी को अंदर लिया.

ऋतु दीदी ने अपने पति की नंगी हालत देखी. कड़क लंड चिकना था. दूसरी तरफ नीरू बिस्तर पर औंधे मूह नंगी दहाड़ें मारते हुए सूबक रही थी. ऋतु दीदी को पूरा मामला समझ में आ चुका था.

ऋतु दीदी नीरू के पास गये और उसकी पीठ को सहलाते हुए उसको चुप किया. नीरू फिर उठ कर बैठ गयी और ऋतु दीदी के गले लग कर रोने लगी.

उसको कुच्छ सेकेंड लगे अपने आप को शांत करने में. मैं जीजाजी को बीच बीच मे नफ़रत भरी नज़रो से देख रहा था. जो इतना सब कुच्छ होने के बाद अभी भी नंगे खड़े थे.

नीरू अभी भी नंगी थी और साइड से उसके बड़े बूब्स और गठीली जांघे और गान्ड दिख रही थी. शायद इसी का प्रभाव था की जीजाजी का लंड अभी भी कड़क होकर फुदक रहा था.

प्रशांत: “अब तो शर्म कर लो, और अपने कपड़े पहनो. क्या घूर रहे हो नीरू को. ग़लत काम करते शर्म नही आई!”

जीजाजी कभी तरसती निगाहो से नीरू के नंगे बदन को देखते की उनकी चुदाई अधूरी छूट गयी और काश नीरू फिर से चुदवाने को हा बोल दे. फिर जीजाजी मेरे गुस्से भरे चेहरे को देखते और सहम जाते.

नीरू अब तक थोड़ा शांत हो चुकी थी और अपने आँसू पोंछते हुए ऋतु दीदी के सीने से अलग हुई और जीजाजी की तरफ देख कर बोली.

नीरू: “आपने मेरा भरोसा तोड़ दिया जीजाजी. मुझे आपसे यह उम्मीद नही थी”

जीजाजी: “हमको तो यह बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था नीरू, हमको तो देर हो गयी हैं”

प्रशांत: “देखो इस बेशर्म इंसान को! अभी भी अपनी ग़लती मानने को तैयार नही हैं”

ऋतु दीदी: “नीरज, यह क्या कह रहे हो. थोड़ी तो शर्म करो. मेरी छोटी बहन के साथ ऐसी हरकत करते शर्म आनी चाहिए”

जीजाजी: “अच्छा, मुझे शर्म आनी चाहिए. और तुम्हे और इस प्रशांत को शर्म नही आनी चाहिए जब तुम दोनो ने आपस में मूह काला किया था!”

मैं और ऋतु दीदी अब सहम से गये थे. कही जीजाजी नीरू को वो राज ना बता दे की कैसे मैने और ऋतु दीदी ने चुदाई की थी. नीरू आश्चर्य से कभी जीजाजी को तो कभी मुझे और ऋतु दीदी को देख रही थी.

नीरू: “कैसी हरकत?”

जीजाजी: “मैं बताता हूँ, यह दोनो क्या बताएँगे. पिच्छली बार जब हम घूमने आए थे और तुम्हारे पैर मे मोच आई थी. तब दूसरे कमरे मे यह ऋतु और प्रशांत आपस मे चुदाई कर रहे थे”

नीरू अब शक भरी नज़रो से मुझे और फिर ऋतु दीदी को देखने लगी. ऋतु दीदी ने अपनी नज़रे झुका ली थी.

नीरू: “ऋतु दीदी! क्या यह सच हैं?”

ऋतु दीदी ने नज़रे झुकाए रखी और फिर अचानक से फफक फफक कर रोने लगी.

जीजाजी: “अब किस मूह से बोलेगी यह, जब इन दोनो ने आपस मे मूह काला किया था तब इनको शर्म नही आई! आज मुझे लेक्चर दे रहे हैं. क्या ग़लत किया मैने जो नीरू को चोदा. यह दोनो भी तो वोही ग़लती कर चुके हैं”

नीरू उसी नंगी हालत मे उठ कर मेरे पास आई. वो थोड़े आश्चर्य तो थोड़े गुस्से मे भरी थी. चलते वक़्त उसके मम्मे मदमस्त तरीके से उच्छल कर हिल रहे थे.

नीरू: “प्रशांत, तुमने ऋतु दीदी को चोदा था! ग़लती तुमने की और आज तक सिर्फ़ मुझ पर शक करते हुए गंदे इल्ज़ाम लगाते रहे”

प्रशांत: “मैं बताता हूँ की क्या हुआ था, मेरी इसमे कोई ग़लती नही हैं नीरू…”

नीरू: “तुम्हारे और ऋतु दीदी के बीच चुदाई हुई थी या नही?”

प्रशांत: “हा हुई थी मगर …”

नीरू: “बस, और बोलने की ज़रूरत नही हैं. तुम ग़लत नही होते तो तुम खुद मुझे आकर बताते, इस तरह छूपाते नही”

नीरू पलटी और जीजाजी के पास पहुचि.

नीरू: “अब तो मेरा पति और बहन भी मेरे नही रहे, किसके साथ वफ़ा करू! जीजाजी क्या करना हैं आपको मेरे साथ, कर लो अब जो भी करना हैं. वफ़ादारी की कोई कीमत नही रही अब मेरे लिए”

जीजाजी ने नीरू के कंधे पर हाथ रख कर उसको नीचे बैठा दिया और उसके मूह में अपना चिकना लंड डाल दिया और धक्का मारते हुए मूह चोदने लगे.

नीरू चुपचाप बैठी रही. जीजाजी खुश होकर मूह खोले आहें भरने लगे. मैं और ऋतु दीदी आश्चर्य मे उन दोनो को देख रहे थे.

नेक्स्ट एपिसोड मे पढ़िए क्या ऋतु और प्रशांत मिलकर जीजाजी और नीरू को ग़लत काम करने से रोक पाएँगे.
 
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अब तक आपने पढ़ा की जीजाजी ने नीरू को डॉगी स्टाइल मे चोदना शुरू किया मगर प्रशांत ने आकर रोका और ऋतु दीदी भी आ गये.

सबने मिलकर जीजाजी को कॉर्नर करना शुरू किया मगर जीजाजी ने अपने बचाव मे ऋतु और प्रशांत की चुदाई का राज नीरू को बता दिया और टूटे दिल से नीरू ने निराश होकर जीजाजी के सामने हथियार डाल दिए. जीजाजी ने अपने लंड से नीरू के मूह को चोदना शुरू कर दिया.

अब आगे की कहानी प्रशांत की ज़ुबानी जारी हैं…

नीरू का गुस्सा जायज़ था पर इसके लिए उसको जीजाजी का लंड चूसने की क्या ज़रूरत थी! शायद उसको अपना गुस्सा और बदला निकालने का यही तरीका सही लगा.

ऋतु दीदी भी शॉक्ड थे. वो बिस्तर से उठकर रोते हुए कमरे से बाहर चले गये. मैने नीरू को रोकने की कोशिश की.

प्रशांत: “नीरू, ई आम सॉरी. पर मैने कुच्छ नही किया था. वो ऋतु दीदी ने ही ज़बरदस्ती मेरे साथ किया था”

नीरू ने जीजाजी का लंड अपने मूह से निकाल दिया और मेरी तरफ देखा.

नीरू: “तुम कोई छोटे बच्चे थे जो ऋतु दीदी ने तुम्हे चोद दिया और तुम कुच्छ नही कर पाए, तुम उनको रोक भी सकते थे ना!”

प्रशांत: “मैं वो सब नही करना चाहता था, पर ऋतु दीदी को रोक नही पाया. मैं उनकी रेस्पेक्ट करता हूँ”

नीरू: “सच क्यू नही कहते की तुम्हे भी ऋतु दीदी को चोदने के मज़े लेने थे. रेस्पेक्ट की बात कर रहे हो! रेस्पेक्ट तो मैं भी जीजाजी की करती हूँ तो अब मैं भी उनको चोद देती हूँ”

प्रशांत: “नही, प्लीज़ नीरू, ऐसा मत करो”

नीरू उठ गयी और जीजाजी का हाथ पकड़ कर बिस्तर के पास लाई. जीजाजी पीछे मुड़कर मुझे देख रहे थे और स्माइल कर रह थे की उनको फसाने के चक्कर मे मैं खुद फँस चुका था.

जीजाजी बिस्तर पर लेट गये. जीजाजी का लंड कड़क होकर और भी ज़्यादा टन कर खड़ा हो चुका था. नीरू बिस्तर के पास खड़ी मुड़कर मुझे प्यासी निगाहो से देखने लगी. तभी जीजाजी ने नीरू की कलाई पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और नीरू आकर जीजाजी के लंड पर बैठ गयी.

अगले कुच्छ सेकेंड मे नीरू ने जीजाजी के लंड को पकड़े अपनी चूत पर रग़ाद कर अंदर डालने की कॉसिश की. मैं लगातार नीरू को प्लीज़ बोलते हुए गुहार करता रहा की वो ऐसा ना करे. मगर नीरू जितना तड़प रही थी उतना मुझे भी तड़पाना चाहती थी.

मेरी “प्लीज़ प्लीज़” की गुहार तब रुक गयी जब नीरू और जीजाजी की एक साथ अया निकली. नीरू ने जीजाजी का लंड अपनी चूत मे डाल दिया था. मैं निराशा मे अपने मूह पर हाथ फेरता रह गया.

मेरी एक बेवफ़ाई की ग़लती की सज़ा नीरू खुद को दे रही थी. जितना मुझे दुख हो रहा था उतना ही दुख नीरू को भी हो रहा होगा यह मुझे यकीन था और वो उसकी गीली हो चुकी आँखो में दिख रहा था.

नीरू धीमे धीमे उपर नीचे होते हुए चुदाई कर रही थी. मगर हर बार उपर नीचे होने पर जीजाजी एक “आ आ” की आवाज़ निकाल रहे थे.

चुदाई की स्पीड भले ही धीमी थी पर नीरू के बड़े से मम्मे हल्के से उच्छल कर हिल रहे थे जो उस दृश्या को मादक बना रहे थे.

मैने खुद ने काफ़ी समय से चुदाई नही की थी और मेरे सामने एक ऐसी चुदाई चल रही थी जिसको मैं एंजाय भी नही कर सकता था.

मैं बस मूर्ति बने हुए काफ़ी समय बाद नीरू के पुर नंगे बदन को चूड़ते हुए देखने का सुख ले रहा था. मैं यह भूल जाना चाहता था की नीरू उस वक़्त जिजज़ि को चोद रही थी.

जीजाजी ने नीरू की गान्ड को दोनो हाथो से पकड़ लिया था और जैसे नीरू को उपर नीचे तेज उच्छालाने की कॉसिश कर रहे थे. नीरू तेज़ी से नही चोदना चाहती थी.

जीजाजी ने नीरू की कमर को पकड़े उपर नीचे करने की कोशिश की जिस से नीरू को कमर मे खिकाव महसूस हुआ और दर्द भी. उस दर्द से बचने के लिए नीरू ने फिर अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी.

जीजाजी की आहों की आवाज़ और बढ़ गयी थी. नीरू अब अच्च्चे से उच्छल उच्छल कर चुदाई कर रही थी. नीरू के बड़े मम्मे अब काफ़ी तेज़ी से उपर नीचे उच्छल कर नाच रहे थे.

मैने नीरू के मम्मों को इतना उच्छलते हुए कभी नही देखा था. जीजाजी भी अपनी नज़रे नीरू के मम्मों पर गढ़ाए हुए थे.

जीजाजी ने बीच बीच मे अपने हाथ से नीरू के उन दोनो नाचते हुए मम्मों को थोड़ा थोड़ा दबा कर रोका भी. मगर फिर जीजाजी को भी लगा की नाचते हुए मम्मे ज़्यादा आकर्षक हैं तो उन्हे छोड़ दिया.

कुच्छ सेकेंड्स के बाद नीरू की चूत से पूछक्क पूछक की आवाज़े आने लगी थी. उन दोनो मे से किसी एक का या फिर दोनो का पानी च्छुतना शुरू हो गया था जिस से ऐसी आवाज़ आ रही थी.

अब तक नीरू की आँखो में भरा पानी गालो पर बहने लगा था. नीरू अब रुक चुकी थी.

जीजाजी: “हा नीरू … चोदती रह … मज़ा आ रहा हैं नीरू .. और ज़ोर से चोद … ऋतु और प्रशांत ने भी मज़े लेकर छोड़ा था”
 
नीरू नही हिली तो जीजाजी ने ही अपने लंड से ज़ोर के झटके नीरू की चूत में मारा.

नीरू: “आआहह …उम्म्म्म .. जीजाजी … आईई … ऊऊईए माआ … अया अया”

जीजाजी जोश में अपने झटके मारते रहे.

नीरू: “अया जीजाजी … नाअ .. ओह्ह्ह .. ओईए मा … अया आ आ ,. जीजा जी”

जीजाजी: “मज़ा आ रहा हैं ना नीरू … बोल नीरू .. मुझसे चुदवा कर मज़ा आ रहा हैं ना!”

नीरू की आँखें छ्होटी हो गयी थी. मूह थोड़ा खुला था और माथे पर बाल पड़ चुके थे. नीरू ने कोई जवाब नही दिया.

जिस चुदाई का शक और डर मुझे हमेशा से था वो आज हक़ीकत मे मैं अपनी आँखों से देख रहा था और मुझे यकीन नही हो रहा था की यह सच हैं.

हर झटके के साथ ही नीरू चीख पड़ती और आहें भरने लगती.

नीरू: “हाः … हाआह .. आआईय मा … उहह ”

जीजाजी: “नीरू ज़ोर से चोद दे मुझे … तुज्झे मज़ा आ रहा हैं ना! .. मुझे भी आ रहा हैं”

नीरू: “आआहह … उम्म्म्म .. ”

जीजाजी: “मज़ा आ रहा हैं?”

नीरू: “अहह .. ”

जीजाजी: “कितना मज़ा आ रहा हैं?”

नीरू: “अया … ऊऊहह … ”

जीजाजी: “और ज़ोर से छोड़ो नीरू…. और मज़ा आएगा .. कम ओं नीरू चोद दे मुझे”

नीरू: “ऊवू मा . .. ”

जीजाजी: “श नीरू .. चोद दे मुझे … इट्न मज़ा कभी नही आया मुझे … श मेरी जान नीरू … चोद दे मुझे ज़ोर से …अयाया अया नीरू चोद मुझे .. ऊऊहह”

तभी ऋतु दीदी कमरे मे वापिस आ गये. जीजाजी और नीरू को टूट कर इतने अच्च्चे से चुदाई करते देख उनका भी दिमाग़ घूम गया.

ऋतु दीदी: “नीरू, तुझे नीरज ने यह नही बताया की उस वक़्त मैं हयपेर्सेक्श की बीमारी सी जूझ रही थी और मैने वो ग़लती कर दी. हमारे मन मे चोर होता तो हम और भी यह ग़लत काम करते मगर हमने नही किया. उल्टा मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुआ और यह बात मैने खुद नीरज को बता दी थी. मगर तुम जो कर रही हो वो ग़लत हैं. मेरे और प्रशांत के बीच जो हुआ उसमे प्रशांत की कोई ग़लती नही हैं. मेरी तरह तू भी बाद मे पचहताएगी. रुक जा.”

नीरू ने रोटी हुई सूरत से ऋतु दीदी की तरफ देखा. जीजाजी ने इस बीच नीरू की चूत मे झटके मारे और नीरू उच्छल पड़ी.

जीजाजी: “नीरू, तू ऋतु की मत सुन और मुझे चोदती रह. देख हूमें कितना मज़ा आ रहा हैं ना! बोल नीरू … कम ओं चोद दे मुझे पूरा ..नीरू बोल ना ..”

जीजाजी ने एक के बाद एक झटके नीरू की चूत मे मारे पर नीरू ने जवाब नही दिया. नीरू अचानक जीजाजी के उपर से उठ कर साइड मे आ गयी. जीजाजी अपना लंड हवा मे उपर नीचे कर चोदते रह गये.

जीजाजी: “नीरू इनकी बातों मे मत आ. चल फिर से मेरे उपर आकर चोद मुझे. अपने जीजाजी को नही छोड़ेगी नीरू”
 
नीरू ने कुच्छ नही कहा और जीजाजी भी बिस्तर से उठ खड़े हुए और नीरू को पकड़ लिया.

जीजाजी: “तू तक गयी हैं तो मैं तुझे चोद देता हूँ. चल आ..”

जीजाजी ने नीरू को बिस्तर पर लेटाने की कोशिश की पर नीरू ने उनका हाथ हटा दिया और अपने कपड़े लेकर वॉशरूम मे चली गयी. जीजाजी वॉशरूम के दरवाजे पर हाथ मारते हुए पुकारते रह गये.

ऋतु दीदी अपने कमरे मे चले गये. मैं अपना सिर पकड़े खड़ा रहा. थोड़ी देर मे नीरू अपना चेहरा लटकाए वॉशरूम से कपड़े पहने बाहर आई.

जीजाजी अभी भी नंगे खड़े थे. उनका लंड थोड़ा लटक चुका था. जीजाजी ने नीरू को फिर से पकड़ा और उसको चुदाई की सिफारिश की.

जीजाजी: “कपड़े क्यू पहन लिए नीरू, चल मेरा काम अभी पूरा नही हुआ हैं. चल कपड़े खोल .. मेरा लंड चूस ले .. बहुत मज़ा आएगा”

नीरू ने जीजाजी की हाथ झटक दिया. जीजाजी ने गुस्से मे ताक़त लगा कर नीरू के बड़े से मम्मों को अपनी हथेली से दबा दिया और नीरू की एक ज़ोर की चीख निकली और अगले ही पल एक ज़ोर का छाँटा नीरू ने जीजाजी के चहरे पर मार दिया.

जीजाजी दो कदम दूर हट गये. अपने गाल पर हाथ रखे नीरू को आश्चर्य से देखने लगे.

जीजाजी: “नीरू! तूने अपने जीजाजी को छाँटा मारा!”

नीरू: “गेट आउट!”

जीजाजी 2-3 सेकेंड खड़े रहे और फिर अपने कपड़े उतहाए कमरे से बाहर चले गये. नीरू वही बिस्तर मे मूह छिपाए थोड़ी देर सूबकती रही.

जीजाजी और ऋतु दीदी हमारे घर से चले गये. मुझे समझ नही आ रहा था की कैसे रिक्ट करू. हमेशा नीरू पर शक किया की उसने जीजाजी से चुडवाया होगा और आज पहली बार उसने चदूवाया वो भी मेरी आँखों के सामने.

नीरू बाद मे उतही और नहा धो कर तायेयर हो गयी और अपना बाग पॅक करने लगी. मैं कमरे मे गया तो उसने एक नज़र मुझे देखा और फिर कपड़े जमाने लगी.

नीरू: “मैं जा रही हूँ, तुम्हे जो मेरे और जीजाजी के रिश्ते पर शक था वो अब जाकर सच हो चुका हैं. अब शायद तुम्हे मेरे जाने से कोई फ़र्क नही पड़ेगा”

मैं कुच्छ बोल ही नही पाया और नीरू के चेहरे को देखता ही रह गया.

नीरू मेरे घर से बाग लेकर जाने लगी और जाते जाते कहती गयी.

नीरू: “मेरे पेट मे जो बच्चा हैं वो तुम्हारा ही हैं, मैं उसको पैदा करूँगी. चिंता मत करो तुमपे इसका कोई बोझ नही आएगा. और अगर तुम्हे शक हैं की यह बच्चा भी तुम्हारा नही हैं तो कोई बात नही. अब कोई फ़र्क नही पड़ता मुझे”

मैं नीरू को रोकना चाहता था पर आवाज़ ही नही निकली और नीरू मुझे छोड़ कर चली गयी.

ऋतु दीदी और जीजाजी ने समझौता कर लिया क्यू की दोनो ने एक एक ग़लती की थी. वो अभी साथ में ही हैं.

मैने भी एक ग़लती की थी और ऋतु दीदी से चुदवा कर नीरू से बेवफ़ाई की थी. नीरू ने भी निराशा और गुस्से मे एक ग़लती की थी. मुझे लगा की मुझे नीरू को अपनाना चाहिए.

ऋतु दीदी का फोन आता हैं और पुचहते हैं की मैने नीरू को मनाया हैं या नही. उस घटना के बाद से नीरू ने जीजाजी और ऋतु दीदी से भी बात करना बंद कर दिया था.

मैं रोज नीरू के ऑफीस के बाहर शाम को फूओल लेकर पहुच जाता हूँ और उसको मनाने की कॉसिश करता हूँ की वो वापिस मेरे पास आ जाए. उम्मीद हैं की एक ना एक दिन तो वो ज़रूर पिघलेगी और मेरे पास वापिस आएगी.

एंड नोट: “विश्वास की डोर्र एक बार टूट जाए तो फिर जुड़ना मुश्किल होता हैं. प्रशांत ने शक करना नही छोड़ा और नीरू उसकी शिकार बन गयी. प्रशांत ने नीरू को एक बार फिर खो दिया. आशा हैं की अपनी ग़लतियो को पीछे छोड़कर वो दोनो फिर से मिल जाए”

एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड
 
शक का अंजाम

PART 3

UPDATE 01

देरी के लिए माफी चाहता हूं, अपडेट थोडा थोडे समय बाद मिलेगा. लेकिन कहानी जरूरी पूरी होगी। मूल लेखक ने ये स्टोरी जिस जगह समाप्त की है. मेरा प्रयास है कहानी वही से को आगे बढ़ाने का और नए मौलिक अपडेट देने की । एक पाठक (जिन्हो अपना नाम नहीं बताने के लिए अनुरोध किया है) और मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा इस कहानी को और आगे ले कर जाने का . लीजिये पेश है नया भाग 3.

Part-3.

" नया अपडेट"

प्रशांत ने नीरू को एक बार फिर खो दिया था। नीरू से उसका तलाक तो पहले ही हो चुका था लेकिन नीरू को वापस पाने की एक उम्मीद थी अब वो भी नहीं बहुत कम बची थीं। प्रशांत ने नीरू को बहुत बार फोन किया उसके आफिस के नीचे खड़ा हुआ लेकिन इसका कोई फायदा नहीं निकल रहा था।

नीरू उसे देखती और तुरंत ही मुंह घुमा लेती। प्रशांत का फोन तो वो उठाती ही नहीं थी। नीरू ने सिर्फ प्रशांत से ही बात करना बंद नहीं किया था बल्कि वो अपने जीजाजी से भी बात नहीं कर रही थी। नीरज ने भी नीरू को मनाने की कोशिश की थी। नीरज चाहता था कि नीरू के साथ जो रिश्ता एक बार कायम हो गया है वो आगे भी बना रहे। लेकिन नीरू अब अपने जीजाजी की नियत को समझ चुकी थी। इसलिए उसने नीरज से दूरी ही बनाना सही समझा। प्रशांत को नीरू के आफिस के बाहर इंतजार करते करते दो महीने हो गए थे। अब नीरू का पेट भी फूलने लगा था। लेकिन नीरू का गुस्सा प्रशांत के उपर से कम नहीं हो रहा था। इस बीच नीरज का फोन जरूर प्रशांत के पास आ जाता था।

नीरज : अरे प्रशांत क्यो नीरू को परेशान कर रहे हैं।

प्रशांत : में कहा परेशान कर रहा हूं जीजाजी?

नीरज : देखों अब हमारा रिश्ता बदल गया है तुम नीरू के पति नहीं हो इसलिए जीजाजी छोडो नीरज ही बोलो।

प्रशांत : जी नीरज जी

नीरज : देख अब नीरू तेरे पास कभी नहीं आएगी उसका पीछा छोड़ दो।

प्रशांत : देखिए मैं नीरू से बहुत प्यार करता हूं और उसे हासिल करके ही रहूंगा।

नीरज : ये जानते हुए भी कि नीरू को मैं चोद चुका हूं।

प्रशांत : वो गलती थी, और शायद सजा भी जो भूलवश मेरे से हो गया नीरू ने भी गुस्से में कदम उठा लिया था।

नीरज : गुस्से में तो उस दिन उठा लिया था लेकिन उसके बाद तो उसका गुस्सा ठंडा हो गया होगा।

प्रशांत : मतलब आप क्या कहना चाहते हैं।

नीरज : ये ही कि नीरू के साथ उसके बाद चार पांच बार मैं चुदाई और कर चुका हूं।

प्रशांत : मैं ये नहीं मान सकता। नीरू तो आपके घर भी जाना पसंद नहीं करती।

नीरज : अच्छा तो एक काम कर कल तू खुद ही देख लेना। और घर आने की बात कर रहे हो तो कल ही नीरू को मैं अपने घर लेकर आउंगा। अब तू ये बता मैं नीरू को उसके आॅफिस से खुद घर लेकर आउं या फिर उसे बुला लूं।

प्रशांत: नीरू आपके घर नहीं आएगी

नीरज : ठीक है तो कल देख लेते हैं।

प्रशांत को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन वो शांत ही रहा। दूसरे दिन अचानक ही प्रशांत को आफिस जाते समय नीरज मिल जाता है

नीरज : अरे प्रशांत कहां इतनी जल्दी में जा रहे हे

प्रशांत : गुस्से में देखते हुए जी इस समय आफिस जा रहा हूं

नीरज : अच्छा अरे तुमसे मैंने कहा कहा था नीरू को बुलाने के लिए कल में भूल गया। अभी तुम दिख तो ध्यान आ गया उसे फोन कर लेता हूँ और नीरज प्रशांत के सामने फोन निकलता है और नीरू का नाम सर्च कर फोन घुमा देता है. फोन की घंटी बजती है और जैसे ही उधर से फोन उठता है.

नीरज : अरे कहां हो साली साहिबा,..... अरे नहीं आपके चाहने वाले मिल गए थे रास्ते में... अरे मैंने थोडे ही उन्हें रोका.... चलो एक बात सुना आज शाम को तुम मेरे घर पर आ रही हो..... अरे शाम को ऋतु घर पर नहीं होगी.... ऋतु रात 9 बजे तक आएगी..... वैसे जल्दी ही ऋतु को भी मैं अपने रिश्ते के बारे में बता दूंगा... अरे वो तैयार है.... उसी ने हमें दुबारा इतना करीब लाया है.... ठीक है शाम ठीक 6 बजे तुम मेरे घर पहुंच जाना....

और फोन काटने के बाद अच्छा प्रशांत भाई आप आफिस निकलिए मैं भी चलता हूं। वैसे भी अब नीरू के साथ चुदाई तो कर नहीं पाता क्योंकि बच्चे की दिक्कत हो गई है। लेकिन बाकी सब काम तो हो ही जाता है। नीरज तो चला जाता है लेकिन प्रशांत के मन में कई सवाल छोड़ जाता है।

प्रशांत मन ही मन सोचता है क्या ऋतु दीदी भी इस खेल में शामिल हैं. नहीं नहीं उस दिन तो ऋतु दीदी ने नीरू को बचाने की कोशिश की थी उसे समझाने की भी कोशिश की थी। लेकिन नीरज को ऋतु दीदी ने ये क्यों बताया कि हम लोग चुदाई कर चुके हैं. क्या नीरज सही कह रहा है कि ऋतु दीदी ने मुझे फंसाया था. नही नहीं ऋतु दीदी को बीमारी थी. लेकिन यदि उन्हें बीमारी थी तो वो सेक्स तो किसी और से भी कर सकती थी. उन्होंने मुझे ही क्यो चुना और फिर नीरज को भी बता दिया। इसका मतलब ऋतु दीदी ने मुझे फंसाने के लिए ये सब चाल चली थी. लेकिन ऋतु दीदी का फायदा क्या हो सकता है इन सबके पीछे। प्रशांत के मन में सवाल तो बहुत उठ रहे थे लेकिन उसे जवाब नहीं मिल रहा था।

शाम को प्रशांत फिर नीरू के आफिस पहुंचता है आज उसे नीरज की बात का टेस्ट भी लेना था। इसलिए वो नीरू के सामने नहीं आता। नीरू आफिस से निकलती है और चारों ओर देखती है उसे आज प्रशांत दिखाई नहीं देता। नीरू एक बार फिर नजर डालती है लेकिन प्रशांत फिर भी नहीं दिखता। फिर नीरू अचानक एक आटो को रोकने का इशारा करती है और उससे कुछ बात कर ऑटो में बैठ जाती है। प्रशांत थोडा डिस्टेंस बनाकर ऑटो का पीछा करता है प्रशांत आज अपने दोस्त की बाइक लेकर आया ताकि नीरू उसे पहचान न सके।

आटो जैसे ही नीरज के घर की ओर मुढता है प्रशांत के दिल की धड़ने बढ़ जाती है। उसे लगता है कि नीरू प्रशांत के घर ही जा रही है। और प्रशांत के बुलाने पर ही जा रही है। आटो प्रशांत के घर के सामने रूकता है प्रशांत अपने घर की बालकनी से देख रहा था नीरू को उतरते हुए वो देखता है तभी उसकी नजर प्रशांत पर पड़ती है प्रशांत को नीरज उसके कपड़ों से पहचान लेता है और मुस्कुरा देता है।

नीरू ऑटो वाले को पैसे देकर घर के अंदर चली जाती है और प्रशांत भी थोडी देर बाद वहां से चला जाता है।प्रशांत मन ही मन सोचता है: इसका मतलब नीरज सही कह रहा है ऋतु दीदी को सब मालूम है और अब नीरज और नीरू को पास लाने में उन्हीं का हाथ है. लेकिन क्यो ऋतु दीदी का क्या फायदा है?

फिर अचानक प्रशांत के मन में उठ रहे सवालों का जवाब उसे खुद ही मिल जाता है. कही नीरू का बच्चा तो नहीं। नहीं नहीं ऋतु दीदी को एक बच्चा तो दे चुकी है। लेकिन फिर भी। हां ये ही हो सकता है इसलिए ऋतु दीदी ने नीरू को मुझसे अलग करने की योजना बनाई नीरज के साथ मिलकर। और अब मुझसे फोन पर बात कर पता कर रही है कि मैं नीरू को वापस लेने की क्या कोशिश कर रहा हूं। नहीं अब मैं ऋतु दीदी से कभी बात नहीं करूंगा और इसके बाद प्रशांत अपना फोन उठता है और ऋतु का नम्बर ब्लॉक कर देता है।

जारी रहेगी

नीरज अच्छे से शक के बीज को प्रशांत के मन में डालने में कामयाब हो गया था तथा उस शक को साबित करने के लिए उसने अपनी बात को भी साबित कर दिया था जिसका मुख्य कारण था प्रशांत का शक्की स्वभाव का होना ... उसे इसके कारण ठोकर भी लगी थी पर कोई भी आदत चाहे अच्छी हो या बुरी इतनी जल्दी नहीं जाती है।

नीरज ने ऐसी परिस्थिति तैयार कर दी थी की अब शक के बीज प्रशांत के मन में फिर अंकुरित हो गए थे और आँखो से देखते हुए वह दुबारा शक करने पर मजबूर हो गया था। वैसे अब उसका कोई फायदा नहीं था क्योंकि नीरू उससे अलग हो गयी थी और वह पछता भी रहा था और नीरू से मिलने का लगातार प्रयास भी कर रहा था पर नीरू ने कभी भी उसे अब मौका नहीं दिया ।

वो एक काम ज़रूर कर सकता था वह निरु को ख़त भेज सकता था ... पर अब ख़त लिखने का रिवाज़ तो रहा नहीं तो ये आईडिया उसके दिमाग़ में आया ही नहीं.

नीरज के घर में नीरू पहुँच जाती है। नीरू को देखते हुए ऋतु उसके गले मिलती है।

नीरू: हैप्पी बर्थ डे दीदी !

ऋतु: थैक्यू

आज ऋतु का बर्थडे था और उस घटना के करीब दो महीने बाद नीरू पहली बार ऋतु के घर में आई थी। हालाँकि निरु ने उस घटना के बाद से जीजाजी और ऋतु दीदी से भी बात करना बंद कर दिया था। पर आज जन्मदिन पर आने के लिए ऋतु ने उसे बहुत मनाया था।

ऋतु: और कैसा चल रहा है प्रशांत से बात होती है।

नीरू: दीदी उसका तो नाम भी मत लो, पहले तो मैं सिर्फ़ ये मानती थी कि वह मुझ पर शक करता है लेकिन जब ये पता चला कि जो व्यक्ति मेरे उपर शक कर रहा है वह आपके साथ। छी: मुझे तो सोचकर ही र्श्म आती है।

नीरज: चलों उन बातों को भूल जाओ नीरू।

नीरज नीरू को गले लगने के आगे बढता है। लेकिन नीरू नीरज को बीच में ही रोक देती है। ये पहली बार था जब नीरू ने अपने जीजाजी को गले लगने से रोका था, नहीं तो इससे पहले नीरज के एक इशारे पर ही नीरू दौडकर जीजाजी के गले लिपट जाती थी। नीरज भी समझ जाता है कि नीरू अभी भी उससे नाराज है। लेकिन मन ही मन सोचता है कि उसे जल्दी नहीं है जब नीरू को चोदने में उसने वर्षों इंतज़ार किया तो दुबारा चोदने में कुछ समय इंतज़ार और कर लेगा वैसे भी नीरू के पेट में बच्चा पल रहा है तो चुदाई तो वैसे भी नहीं हो पाएगी। लेकिन पहले प्रशांत और ऋतु का कुछ करना होगा। नीरज ऋतु से कहता है कि उसे थोडा बाहर जाना है अभी आ रहा है और नीरज बाहर ऐसी जगह देखता है जहाँ दूर-दूर तक कोई न हो और फिर नीरज फ़ोन लगता है।

नीरज: हाँ प्रशांत कैसे हो

प्रशांत: ठीक हूँ जीजा जी

नीरज: अरे इस समय नीरू मेरे ही घर पर है ऋतु को मैंने पहले ही बाहर भेज दिया था। काश तुम भी यहाँ होते तो देख लेते तेरी बीबी मेरा लंड कैसे चूसती है। लेकिन तुझे मायूस होने की ज़रूरत नहीं है तू बस फ़ोन पर बने रहना कुछ मैं तुझे कुछ सुनाता है। फ़ोन में सोफे पर साइड में रख रहा है ठीक है तू अपनी ओर से कुछ मत बोलना और फिर फ़ोन पर सिर्फ़ नीरज की ओर से आवाजे आती है।

नीरज: नीरू, नीरू यार कितना देर लगाओगी जल्दी आओ ना...आई दो मिनिट रूकिए... वाह क्या जबरदस्त दिखाई दे रही हो ... आप भी ना जीजाजी... अरे यार। अरे ये आप क्या कर रहे है... प्लीज पूरे कपडे मत उतारिए... नहीं नीरू कपडों में मज़ा नहीं आता... अरे सिर्फ़ लंड चूसने की बात हुई थी और आपने इसे साफ़ भी नहीं किया है। पहले साफ़ करके आइए... अरे रूको-रूको और फिर सिसकियों की आवाजें आने लगती है। हाँ नीरू ऐसे ही ऐसे ही। चूसती रहो बस दो मिनिट और । मेरा होने वाला हैं और फिर थोडा गूं-गूं की आवाजेें आती है। जीजाजी आप बहुत बदमाश है मुंह में ही निकाल दिया।

पूरे पांच मिनिट हो गए थे। नीरज फ़ोन की तरफ़ देखता है जो अभी भी कटा नहीं था।

नीरज: प्रशांत सुन लिया तूने। वैसे तुझे भरोसा होगा भी नहीं। लेकिन ये सच है अब ऋतु यहाँ होती तो उसी से पूछवा देता। घर में नीरू छोड और कोई दूसरा हैं नहीं।

प्रशांत: मुझे भरोसा नहीं हो रहा कि नीरू ये कर सकती है और प्रशांत फ़ोन काट देता है।

प्रशांत तुरंत ही ऋतु को फ़ोन लगता है। वैसे प्रशांत ने ऋतु का नम्बर ब्लॉक कर रखा था। लेकिन वह अपनी ओर से तो फ़ोन लगा ही सकता है। थोडी देर बाद ऋतु का फ़ोन रिंग होने लगता है। ऋतु जैसे ही फ़ोन उठाती है तो स्क्रीन पर प्रशांत का नाम लिखा था। ये नीरू और नीरज दोनों ही देख लेते हैं।

ऋतु: अरे प्रशांत इस समय मुझे क्यो फ़ोन कर रहा है। कोई लफडा तो नहीं हुआ।

नीरज: यार मुझे क्या मालूम एक काम करों तुम फ़ोन स्पीकर पर कर लो देखों क्या कह रहा है।

ऋतु: हैलो प्रशांत, अरे तुम हो कहाँ तुम्हें में कुछ दिनों से ट्राई कर रही हूँ लेकिन तुम्हारा फ़ोन ही नहीं लगता।

अब प्रशांत कैसे बताता कि फ़ोन तो उसके ब्लैक लिस्ट में डाल रखा है।

प्रशांत: वह दीदी फ़ोन खराब हो गया था। इस कारण वैसे इस समय आप कहाँ हैं मुझे आपसे मिलना था।

ऋतु: सोच में पड जाती है।

नीरज: यार इस समय नीरू यहाँ हैं यदि प्रशांत यहाँ आएगा तो लफड़ा हो सकता है। तू उसे टरका दे।

ऋतु: अरे इस समय मिलने की क्या हड़बड़ी है। सुबह मिल लेना।

प्रशांत: जी वैसे इस समय आप कहाँ हैं।

ऋतु: वह मैं नीरज के साथ एक रिश्तेदार के घर पर आई हूँ।

प्रशांत: अच्छा नीरज से बात करा देंगी।

ऋतु: अरे क्या हो गया है तुम्हें, तुम तो नीरज से बात करने के नाम पर भागते थे। चलो बता कराती है लेकिन ऋतु देखती है तो नीरज वहाँ नहीं था। वह नीरज को आवाज़ देती है लेकिन नीरज जवाब नहीं देता। अरे नीरज अभी यहीं था लेकिन लगता है कहीं चला गया है। आएगा वैसे ही तुमसे बता करा दूंगी। ठीक है और ऋतु फ़ोन काट देती है।

फोन कटने के बाद प्रशांत को ये भरोसा हो जाता है कि ऋतु उससे झूठ बोल रही है। वह घर पर नहीं है ये तो साफ़ है लेकिन ऋतु को ये कहने की क्या ज़रूरत है कि नीरज भी उसके साथ है। क्या सच में नीरू नीरज का लंड चूस रही थी। ये सोचकर प्रशांत की आंखों में आंसू आ जाते हैं। तभी प्रशांत के कंधे पर एक हाथ आता है वह पलटकर देखता है।

प्रशांत: अरे नीरज जी आप

नीरज: हाँ मैं देख रहा था कि तू बहुत देर से खडा है। कब तक यहाँ खडा रहेगा नीरू आज पूरी रात यहाँ रूकने वाली है। देख अब तू उसे भूल जा इसी में तेरी और नीरू की भलाई है।

प्रशांत: सॉरी जीजा जी, प्लीज जीजाजी एक बार मेरी नीरू से बात करवा दो। बस एक बार!

नीरज: देख वैसे तो मुश्किल है लेकिन फिर भी में कोशिश करूंगा लेकिन तू मेरे और नीरू के बीच में नहीं आएगा।

प्रशांत: देखिए नीरू की जो मर्जी होगी वह उसे करने के लिए आजाद है। वैसे भी अब मेरा उस पर कोई अधिकार नहीं है। आप मेरी बात करा देंगे तो आपका एहसान होगा।

नीरज: ठीक है कोशिश करता हूँ। दो चार दिन में तेरी बात कराने की लेकिन अभी तू यहाँ से जा। क्योंकि यदि नीरू ने देख लिया तो तेरे लिए ही मुश्किल हो जाएगी और हाँ अभी दो चार दिन तू नीरू के सामने मत आना।

इसके बाद प्रशांत चला जाता है। दो तीन दिन प्रशांत नीरू के आफिस नहीं जाता। नीरू समझती है कि प्रशांत यहीं कहीं छिपा होगा। एक ओर प्रशांत का दिल ये मानने को तैयार नहीं था कि नीरू नीरज का लंड चूस रही होगी। दूसरी ओर दिमाग़ कहता था कि जीजाजी ने नीरू के अकेले होने का इस बार ज़रूर फायदा उठाया होगा। उसके पेट में बच्चा है और इस समय नीरू को भावनात्मक रूप से भी किसी के सहारे की ज़रूरत है और इसी का फायदा ऋतु दीदी और जीजाजी ने उठाया होगा।

प्रशांत ये सोच ही रहा था कि उसके फ़ोन की घंटी बजती है। फ़ोन पर नम्बर डिस्प्ले हो रहा है। प्रशांत फ़ोन पर कुछ देर तक बात करता है और उसकी चेहरे पर हल्की-सी ख़ुशी दिखाई देती है। लेकिन साथ ही उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें भी गहरी हो जाती है। प्रशांत मन ही मन सोचता है कि उसका अब नीरू से मिलना बहुत ज़रूरी है। क्योंकि अब भी वह नीरू से बात नहीं कर पाया तो फिर शायद नीरू उसे ज़िन्दगी भर न मिल जाए ये सोचकर प्रशांत अपना मन पक्का कर लेता है।

सात आठ दिन लगातार प्रशांत नीरू के आफिस के बाहर खडा होता है लेकिन नीरू उसे दिखाई नहीं देता। प्रशांत की मायूसी बढती जा रही थी। प्रशांत को ये पता नहीं था कि नीरू की तबीयत खराब होने के कारण वह आफिस नहीं आ रही थी। लेकिन प्रशांत रोज़ शाम के समय ज़रूर नीरू के ऑफिस के बाहर खडा होता था।

प्रशांत मन ही मन यदि आज भी नीरू नहीं आई तो फिर उससे मुलाकात नहीं हो पाएगी। लेकिन वह आफिस क्यों नहीं आ रही है। कहीं उसने अपना ट्रांसफर तो नहीं करा लिया। नहीं-नहीं नीरू इस शहर को छोडने को तैयार नहीं थी तो ट्रांसफर तो नहीं कराया होगा। ज़रूर कोई और बात ही होगी। प्रशांत ये सब सोच रहा था तभी नीरू उसे आफिस से बाहर निकलती दिखाई देती है-प्रशांत तुरंत ही नीरू के पास पहुँच जाता है।

प्रशांत: नीरू मुझे तुमने ज़रूरी बात करनी है।

नीरू: देखों मुझे तुमसे किसी तरह की बात करने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है।

प्रशांत: मैं मानता हूँ ऋतु दीदी के साथ मैंने जो किया वह सही नहीं था। लेकिन उसमें मेरी गलती नहीं थी। मैंने कभी उन्हें उस नज़र से नहीं देखा।

नीरू: मुझे इस मैटर पर अब कोई बात नहीं करनी है।

प्रशांत: प्लीज मेरी बात सुन लो मुझे बस दस मिनिट का समय दे दो।

नीरू: हमारे रास्ते अलग हो चुके हैँ, इसलिए बेहतर है कि तुम अपना समय खराब मत करो।

प्रशांंत नीरू का हाथ पकडते हुए प्लीज नीरू मानता हूँ मुझसे बडी गलती हुई है लेकिन तुमने जो किया

नीरू प्रशांत की ओर गुस्से से देखती है और अपना हाथ झटके से छुडा लेती है। देखो यहाँ यदि तुम तमाशा करना चाहते हो तो कर सकते हैं। लेकिन मैं तुम्हारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हूँ। तुम मुझ पर अपने सभी अधिकार खो चुके हैं। हाँ मेरे पेट में जो बच्चा है उसे ज़रूर मैं तुम्हारा नाम दूँगी। इसके अलावा हमारे रिश्ते में अब कुछ भी नहीं बचा है।

प्रशांत और नीरू के बीच ये सभी बातें सडक पर हो रही थी दोनों के बीच चल रही तकरार को देखते हुए कुछ लोग भी वहाँ एकत्रित होना शुरू हो जाते हैं। ये सब देख एक बुज़ुर्ग आदमी कहता है अरे भाईसाहब क्यो लडकी को छेड रहे हो।

प्रशांत: जी ये मेरी दोस्त है

नीरू: जी नहीं में आपकी दोस्त नहीं हूँ और आपसे कोई बात भी नहीं करना चाहती।

तभी एक और आदमी आता है और प्रशांत को धक्का देते हुए कहता है कि देख शक्ल से तो तू शरीफ लग रहा है लेकिन तेरी नीयत सही नहीं लगा रही तभी एक और आदमी प्रशांत के गाल पर जोरदार तमाचा मार देता है। प्रशांत के गाल पर पडे तमांचे से प्रशांत तो हिलता है साथ ही नीरू भी हैरान हो जाती है। उसे ये उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि ऐसा भी हो सकता है। प्रशांत के गाल लाल हो जाते हैं ये देख नीरू के चेहरे पर परेशानी झलकने लगती है। नीरू कुछ कहती तभी एक गाडी उसके पास में आकर रूकती है। और उसमें से ऋतु और नीरज उतरते हैं।

नीरज : अरे क्या हो रहा है और तुम प्रशांत कितनी बार कहन है कि यहां मत आया करो।

बुजुर्ग : आप जानते हैं इसे

नीरज : हां जानता हूं हमारे परिचित का है और ये लडकी मेरी रिश्तेदार हैं। मेरी साली है।

बुजुर्ग : ठीक है फिर आप ही इसे समझाईए ये लडका इस लडकी को परेशान करन् रहा था।

दूसरी ओर ऋतु नीरू को लेकर गाडी के अंदर बैठ जाती है। नीरज प्रशांत को लेकर थोडी दूर जाता है।

नीरज : देख यदि मैं चाहता तो यहां इन लोगों से तेरी वो हाल करवा सकता था कि तू सोच भी नहीं सकता था। लेकिन नीरू के सामने मैं कोई तमाशा नहीं चाहता। तू ये सोच ले कि तू अपने पैरों पर खडा हुआ है तो इसीलिए कि नीरू यहां हैं। और तुझे अंतिम बार बता रहा हूं। मेरे और नीरू के बीच में अब तू आने की सोच भी मत। नीरू इस बच्चे को जन्म दे दे उसके बाद मैं उसे अपने बच्चे की मां बनाउंगा।

प्रशांत : देखिए जीजाजी

नीरज : जीजाजी नहीं सिर्फ नीरज !

प्रशांत : नीरज जी प्लीज आम समझने की कोशिश कीजिए मैं नीरू के बिना नहीं रह सकता। और मुझे उससे आज मिलना बहुत जरूरी है।

नीरज : अच्छा ऐसा भी क्या है जो तुझे उससे आज मिलना इतना ज्यादा जरूरी है।

प्रशांत : नीरज जी मेरी नौकरी दूसरी कंपनी में लग गई है। कंपनी मुझे डेढ साल के लिए कनाडा भेज रही है। मुझे कल ही निकलना है। मैंने आठ नौ दिन से नीरू से मिलने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन वो आज आफिस आई है। मेरे पास सिर्फ आज का ही समय है।

नीरज : मन में इसे ये पता नहीं है कि नीरू छुटटी पर थी। चलो मेरे लिए तो अच्छा ही है। और अब डेढ साल के लिए ये कांटा निकल रहा है। देखों प्रशांत नीरू मैं और ऋतु सप्ताह भर के लिए घूमने के लिए गए थे। इसलिए वो आफिस नहीं आई थी वैसे हम लोगों ने बहुत मस्ती की थी। नीरू मेरे साथ बहुत खुश है। वो मां बनने वाली है इसलिए में उसे ज्यादा से ज्यादा खुशी देनी की कोशिश कर रहा हूं लेकिन तुम उसे रुला रहे हों। अब मुझे फिर से उसका मूढ सही करना पडेगा।

प्रशांत : जीजाजी सॉरी नीरज जी प्लीज आप मेरी बात तो समझने की कोशिश कीजिए।

नीरज : यार क्या समझू। अब तुम्हारी भलाई इसी में कि तुम यहां से चले जाओ वैसे उस दिन तुमने सुना तो होगा नीरू किस तरह से मेरा लंड चूस रही थी। आज रात को भी इसे अपना लंड चुसवाउंगा। अभी इसे चोद तो नहीं पाउंगा। लेकिन बच्चा हो जाए फिर तुम देखना तुम्हें भी लाइव दिखा दूंगा। वैसे भी नीरू को मुझसे चुदते हुए देखने की तुम्हारी भी इच्छा होती है। और तुम देख भी चुके हो। लेकिन नीरू की चुदाई मैं तुम्हें एक ही शर्त पर दिखांउगा तुम शांति से हमें चुदाई करते हुए देखना यदि बीच में आओगे तो तुम्हें ये मौका में नहीं दे सकता।

प्राांत : प्लीज नीरज जी आप नीरू को छोड दीजिए।

नीरज : नहीं प्रशांत अब नीरू की मुझे आदत हो गई है।

प्रशांत : आपके पास आपकी बीबी है फिर भी आप

नीरज : ठीक है नीरू एक बार मेरा बच्चा अपने पेट में ले ले तो उसके बाद सोचूंगा। और नीरज प्रशांत से विदा होकर अपनी गाडी में बैठता है और नीरू और ऋतु को लेकर निकल जाता है। प्रशांत सड़क पर खडा रह जाता है।

जारी रहेगी
 
लीजिये पेश है भाग 3 Update ( New-3)

प्रशांत को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे कनाडा जाने का मौका छोड दे। या फिर नीरू को भूल जाए। आख़िर उसकी ज़िन्दगी का सवाल था। उसे मालूम था जो मौका आज उसे मिला है वह फिर कभी नहीं मिलेगा। नीरू से उसकी मुलाकात भी नहीं हो पा रही है रोज़ 30-40 बार उसे फ़ोन करता हूँ लेकिन वह फ़ोन नहीं उठाती। बहुत सोचने के बाद प्रशांत तय कर लेता है कि वह कनाडा जाएगा।

कोशिश करेगा कि जाने से पहले कम से कम फ़ोन पर नीरू से बात हो जाए। वैसे भी डेढ साल की बात है। डेढ साल तो यूं ही निकल जाएंगे। लेकिन नीरज का क्या किया जाए। नीरू को इसी ने मुझसे दूर किया और ख़ुद नीरू को चोदने में सफल भी हो गया। अब एक बार ये नीरू के फिर करीब हो गया है। नीरू की डिलेवरी होगी उसके बाद क्या फिर से नीरज नीरू को छोड़ेगा और हो सकता है प्रेगनेंट भी कर देगा। नहीं-नहीं नीरू इसके लिए कभी तैयार नहीं होगी। वह मुझसे तलाक ले चुकी है ऐसे में दूसरी शादी के बिना वह प्रेगनेंट किसी क़ीमत पर नहीं होगी। लेकिन नीरज उसकी चुदाई तो कर ही सकता है। हाँ ये हो सकता है और जिस तरह से आज नीरू नीरज का लंड चूसने को तैयार हो गई है। उससे ये तो साफ़ है कि वह नीरज को तब भी नहीं रोकेगी जब नीरज उसकी चुदाई करेगा।

ऋतु दीदी ने भी हमेशा उन लोगों का साथ दिया। ख़ुद जबरदस्ती मेरे साथ सेक्स किया और फिर नीरज को इसके बारे में बता दिया। मुझसे डबल गेम खेल दिया। अपना घर बचा लिया और नीरज को जो चाहिए था वह दिला दिया। मेरे सामने ऐसा नाटक कर रहीं थी जैसे वह मेरी साइड हों लेकिन जब पूरा गेम सोचो तो साफ़ साफ लग रहा है ऋतु दीदी ने ही मुझे फंसाने का पूरा प्लान बनाया है और जब नीरू, ऋतु और नीरज तीनों ही मेरे खिलाफ है तो मैं यहाँ रहकर भी क्या कर लूंगा।

नीरू तो मुझ से बात ही नहीं करती है और पता नहीं अगर बात भी हो जायेगी तो भी मेरी बात पर यक़ीन करेगी या नहीं। इसकी ही सम्भावना अधिक है की वह अपनी दीदी और जीजाजी की ही बात मानेगी। इससे अच्छा है मैं कनाडा ही चला जाउं क्योंकि जो मौका आज मिला है वह ज़िन्दगी में एक बार ही आता है।

प्रशांत एक बार फिर नीरू को फ़ोन लगता है लेकिन आज भी नीरू प्रशांत का फ़ोन नहीं उठाती। प्रशांत फिर कनाडा चला जाता है। कनाडा पहुँचकर भी प्रशांत लगातार नीरू को फ़ोन करता है। लेकिन नीरू का गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ था।

इस बीच नीरू का आफिस जाना बना हुआ था। नीरू आफिस से निकलते समय एक बार ज़रूर आसपास देखती थी। उसे ये महसूस होता था कि प्रशांत कहीं आसपास छिप कर उसे देख रहा है। नीरू का ये सिर्फ़ भ्रम था क्योंकि प्रशांत तो इंडिया में ही नहीं था। नीरू मन ही मन कहती है प्रशांत मेरे दिमाग़ से खेलने की कोशिश कर रहा है। सोच रहा है कि वह मुझे दिखाई नहीं देगा तो मैं परेशान हो जाउंगी और उसकी बातों में आ जाउंगी। लेकिन ये सब प्रशांत की भूल है। यदि वह मेरे साथ गेम खेल रहा है तो खेलता रहे। उसकी इन्हीं हरकतों के कारण मुझे उससे तलाक लेना पडा है। ऐसे आदमी के साथ तो मैं बात करना भी पसंद नहीं करूंगी।

इस बीच नीरू के डिलेवरी का समय करीब आता जाता है तो ऋतु उसे जबरदस्ती अपने घर पर शिफ्ट होने के लिए मनाने की जुट जाती है। लेकिन नीरज के साथ हुई पुरानी घटना को याद करते हुए नीरू किसी भी क़ीमत पर ऋतु के घर जाने को तैयार नहीं हुई थी। नीरज ने भी नीरू को मनाने की कोशिश तो बहुत की थी। लेकिन नीरू किसी भी क़ीमत पर नीरज के घर जाने को तैयार नहीं थी। कभी कभार ज़्यादा ज़ोर देने पर वह उनके घर चली तो जाती थी लेकिन एक दो घंटे बाद वापस अपने घर आ जाती थी।

नीरू को अभी भी भरोसा नहीं हो रहा था कि नीरज के मन में उसे चोदने की ललक वर्षों से थी। इस बीच नीरज बीच-बीच में प्रशांत से फ़ोन पर बात करता रहता था। कभी-कभी वह नार्मल बात करता तो कभी अपने और नीरू के बीच होने वाले ऑरल सेक्स के बारे बताता। प्रशांत में नीरज की बातों में आकर इस तरह के सीन इमेजिन करने लगा था जिसमें नीरू नीरज का लंड चूस रही हो। इस बीच एक दिन ऋतु नीरू के घर पहुँचती है।

ऋतु: देख नीरू अब तेरे गर्भ को छह महीने हो चुके हैं। तुझे देखभाव की ज़रूरत है यहाँ तू अकेले रहती है। कभी भी डॉक्टर की ज़रूरत पडे तो किससे मदद मांगेगी।

नीरू: नहीं दीदी में सब संभाल लूंगी।

ऋतु: देख अब पुरानी बातें भूल जा, मैं भी भूल चुकी है पुरानी बातों को याद कर अपना ही नुक़सान होता है।

नीरू: कैसे भूल जाउं दीदी, जिस पर भरोसा किया उसी ने धोखा दिया। जीजाजी पर मैं कितना भरोसा करती है अंधा विश्वास करती थी और उन्होंने ही मुझे चोद दिया।

ऋतु: लेकिन ये बता उन्हें कमरे में बुलाया किसने था, उनके सामने कपडे उतारने की शुरूआत किसने की थी? गलती अकेले नीरज की नहीं है तेरी भी है।

नीरू: दीदी मैं तो सिर्फ़ प्रशांत के शक को दूर करने के लिए ये सब कर रही थी। प्रशांत के शक की आदत से मैं परेशान थी। मैंने कभी भी प्रशांत के करेक्टर पर शक नहीं किया। लेकिन वह मेरे करेक्टर पर शक करता था। क्या प्रशांत सही था। जो अपने बीबी पर भरोसा नहीं करता था।

ऋतु: देख मैं ये नहीं कह रही कि नीरज सही है या फिर प्रशांत सही है। कहीं न कहीं दोनों ग़लत थे। लेकिन तू भी सही नहीं थी तुझे नीरज को रोकना चाहिए था।

नीरू: दीदी मैं उस समय समझ ही नहीं पाई थी कि मेरे साथ हो क्या रहा है। जीजाजी वह सब मेरे साथ कर सकते हैं जो उन्हों ने किया। आज भी मुझे भरोसा नहीं हो रहा और फिर जब जीजाजी ने आपकी और प्रशांत की चुदाई की बात बताई तो मैं अपने आपे में नहीं रही।

ऋतु: मैंने तुझसे पहले ही कहा था कि तू जो कर रही है उससे तुझे बाद में पछताना पडेगा। खैर अब जो बीत गया उसे भूल जा और नए सिरे से ज़िन्दगी बिताने की कोशिश करे। वैसे एक बात बता तेरे ऑफिस के सामने झगडा होने की घटना के बाद क्या प्रशांत ने फिर कभी तुझसे मिलने की कोशिश की।

नीरू: दीदी प्रशांत वहाँ आता ज़रूर होगा वह बात अलग है पर अब वह मेरे सामने नहीं आता। उसका फ़ोन तो मेरे पास आता रहता है। लेकिन मैं ही उससे बात नहीं करती। वह आपको भी फ़ोन करता होगा।

ऋतु: नहीं प्रशांत का फ़ोन मेरे पास भी नहीं आता। मैंने कई बार ट्राई किया था। लेकिन प्रशांत ने शायद मेरा फ़ोन ब्लेैक लिस्ट में डाल दिया है।

नीरू: क्या आपका फ़ोन ब्लैक लिस्ट में, उसका दिमाग़ तो खराब तो नहीं हो गया या फिर आप को कोई गलतफहमी हुई है।

ऋतु: नहीं कोई ग़लत फहमी नहीं है एक बार मैंने अपने पडोसी के फ़ोन से प्रशांत को फ़ोन लगाया था। उसने फ़ोन उठाया लेकिन जैसे ही मैंने कहा कि मैं ऋतु बोल रहीं हूँ। उसने ये कहते हुए फ़ोन काट दिया कि उसे मुझसे कोई बात नहीं करनी।

नीरू: लेकिन वह आपसे बात क्यो नहीं करना चाहता। उसका दिमाग़ खराब हो गया है।

ऋतु: नहीं मुझे लगता है कि उसे इस बात का शक है कि मैंने उसकी अपने साथ चुदाई की बात जानबूझकर बताई थी।

नीरू: ये आदमी कभी नहीं भी नहीं सुधर सकता। हमेशा शक करता रहेगा।

ऋतु: चलो जो हुआ उसे भूल जाओ, उसे तो में बाद में समझा दूंगी। लेकिन तू उसे माफ़ कर दे। वैसे गलती तूने भी की है।

नीरू: मैने गलती गुस्से में की थी और जीजाजी ने भी मेरा भरोसा तोडा था। मैं एक बार प्रशांत को माफ़ भी कर सकती हूँ। लेकिन जीजाजी को कभी भी माफ़ नहीं करूंगी।

ऋतु: चलो अब ज़्यादा गुस्सा मत हो और यदि प्रशांत का अब फ़ोन आए तो एक बार उससे बात कर लेना और यदि हो सके तो तू ही अपनी ओर से फ़ोन लगा लेना।

नीरू: क्यो मैं क्यो फ़ोन लगाउं।

ऋतु: देख प्रशांत कितना झुक गया है अपनी गलती पर वह पछता भी रहा है जो उसने तुझ पर शक किया। यदि तुझे उससे बिल्कुल भी प्यार नहीं है तो तू अपनी ओर से फ़ोन मत लगाना। नहीं तो एक बार बात कर ले।

नीरू: ठीक है दीदी यदि आज प्रशांत को फ़ोन नहीं आया तो मैं कल उससे बता करूंगी।

ऋतु और नीरू के बीच बात हो रही थी जिससे एक आदमी परेशानी में दिख रहा था और वह था नीरज जो थोडी देर पहले ही आया था उसने बस इतना सुना था कि यदि आज प्रशांत नीरू को फ़ोन नहीं करता है तो नीरू कल प्रशांत को फ़ोन करेगी। लेकिन फिर अचानक नीरज को एक आइडिया आता है और वह मुस्कराने लगता है नीरज जैसे आया था वैसे ही वापल लौट जाता है। हक़ीक़त में ऋतु ने ही नीरज से कहा था कि वह नीरू के घर जाए और उसे मनाये और नीरज नीरू के घर इसलिए आया था ताकि नीरू को मनाया जा सके।

लेकिन नीरज अपने हरामीपण से बाज नहीं आया है और अब नीरज एक नई चाल चलने के लिए तैयार था और नीरज अपनी गाडी में बैठकर प्रशांत को फ़ोन करता है। पांच छह घंटी जाने के बाद प्रशांत फ़ोन उठता है।

प्रशांत: हाँ नीरज जी कैसे हैं।

नीरज: यार मैं ही तुझे फ़ोन करता हूँ तू कभी भी मुझे फ़ोन नहीं करता।

प्रशांत: जी वह बिजी रहता है और मन ही मन कहता है कि आप भी मुझे फ़ोन मत किया करें।

नीरज: यार देख मुझे अब तुझसे तरस आने लगा है, मैं तेरी मदद करने के लिए तैयार हूँ।

प्रशांत: खुश होते हुए कैसी मदद नीरज जी

नीरज: देख तू नीरू को हासिल करना चाहता है मैं इसमें तेरी मदद करूंगा।

प्रशांत: थैक्यू नीरज जी

नीरज: लेकिन यार एक परेशानी है।

प्रशांत: क्या

नीरज: मैं तीन चार दिन से नीरू पर प्रेशर बना रहा हूँ कि वह तुझे माफ़ कर दे। लेकिन वह तैयार नहीं हो रही।

प्रशांत: हाँ मुझे मालूम है वह बहुत जिद्दी है।

नीरज: लेकिन तू मुझे भी जानता है एक बार जो ठान लेता हूँ वह हासिल कर लेता हूँ। नीरू को ही देख लो एक बार तेरे सामने चोद चुका हूँ और अब अपना लंड कितनी बार चुसा चुका हूँ इसकी तो अब गिनती भी मुझे याद नहीं है।

प्रशांत: ठंंडी आह भरते हुए जी

नीरज: देख नीरज एक शर्त पर तुझे माफ़ करने को तैयार है।

प्रशांत: कैसी शर्त

नीरज: नीरू ने कहा है कि यदि तू मेरे और नीरू के सम्बंधों को स्वीकार कर लेता है तो वह तेरे पास आने को तैयार है। जानता तेरे से बात करने के लिए मुझे अपने घर के बाहर आना पडा है।

प्रशांत: हाँ मुझे गाडियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

नीरज: अब तू इस बात का जबाव नीरू को ही दे देना कि तुझे मेरे और नीरू के सम्बंधों से कोई आपत्ति नहीं हैं। वैसे नीरू तुझे कल फ़ोन करके ये बताएगी। तू अपना फ़ैसला बता देना और हाँ जो भी फ़ैसला हो एक बार नीरू को बता ज़रूर देना और नीरज फ़ोन काट देता है और खुलकर हंसने लगता है।

दूसरी ओर प्रशांत की आंखों में आंसू निकलने लगते हैं। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि नीरज के प्रस्ताव पर वह क्या जबाव दे। नीरज खुलकर प्रशांत से नीरू की चुदाई की अनुमति मांग रहा है। इसके बाद नीरज पहली बार ज़िन्दगी में शराब मंगाता है और पहली ही बार में पूरी बोतल पी जाता है। शराब के नशे में ही वह कब नींद के आगोश में चला जाता है उसे पता ही नहीं चलता।

नीरू को प्रशांत के फ़ोन का इंतज़ार था। लेकिन प्रशांत तो शराब पीकर दूसरी ही दुनिया में था। सुबह प्रशांत उठता है और रोज़ की तरह जिम जाता है और फिर तैयार होकर आफिस चला जाता है। कनाडा में प्रशांत का ये डेली का रूटीन बन गया था वह जिम ज़रूर जाता था। जिस कारण उसका शरीर गठीला बनता जा रहा था। कनाडा में सुबह हो रही थी और इंडिया में उस समय रात का समय था। नीरू को नींद नहीं आ रही थी। वह प्रशांत के फ़ोन का देर रात तक इंतज़ार करती रही और कब उसकी आँख लगी उसे पता भी नहीं चला।

सुबह नीरू आफिस चली गई। उसे पता था आफिस टाइम पर प्रशांत कभी फ़ोन नहीं करता था। इस तरह से वह दिन भी बीत जाता है। रात को 9 बजे के करीब नीरू प्रशांत को फ़ोन करने का फ़ैसला करती है। दूसरी ओर प्रशांत के मन में खलबली मची हुई थी। थोडी देर पहले ही नीरज का फ़ोन आया था और उसने कहा था कि नीरूको उसने फ़ोन करने के लिए तैयार कर लिया है। वह थोडी देर में उससे बात करेगी। लेकिन नीरू ने साफ़ साफ कह दिया है कि तुझे हमारे सम्बंधों को रजामंदी देनी होगी तभी वह आगे बढेगी।

प्रशांत को लग रहा था कि नीरज झूठ बोल रहा है। उसके मजे ले रहा है। कहाँ नीरू चार महीने से उसका फ़ोन नहीं उठा रही है और कहाँ नीरज कह रहा है कि नीरू मुझे फ़ोन करने वाली है। लगता है वह मुझे अभी भी चुतिया ही समझता है। प्रशांत इसी सोच में था कि तभी उसके फ़ोन की घंटी बजती है और जैसे ही उसकी नज़र फ़ोन की स्क्रीन पर पडती है उसकी आंखें चौडी हो जाती है कि क्योंकि ये फ़ोन नीरू का था।

प्रशांत: इसका मतलब नीरज सच कह रहा था। नीरू नीरज के साथ ही रहना चाहती है और नीरज के कहने पर ही वह मुझे फ़ोन कर रही है। ये सोचकर प्रशांत की आंखों में आंसू आ जाते हैं। प्रशांत कांपते हाथों से फ़ोन उठता है और हैलो बोलता है। दूसरी ओर

नीरू: हैलो कैसे हो प्रशांत

प्रशांत: ठीक हूँ।

नीरू: मुझे तुमसे एक बात करनी थी बात बहुत ज़रूरी है। अब समझ नहीं आ रहा कैसे करूंगा। वह उस दिन जीजाजी के साथ नीरू इतना ही कह पाई कि प्रशांत का गुस्सा फुट पड़ा।

प्रशाांत: ये ही तुम अब अपनी जीजाजी के साथ अपने सम्बंध बनाए रखना चाहती है और मुझसे इसकी इजाज़त मांग रही हो।

नीरू: प्रशांत ये तुम क्या बक रहे हो।

प्रशांत: अच्छा मैं बक रहा इस समय भी तुम नीरज के घर पर ही हो और उसका लंड चूस रही हो। उसी के कहने पर मुझसे बात कर रही हो। मैं सच कह रहा हूँ ना।

नीरू: गुस्से में तुम कभी भी नहीं सुधरोगे प्रशांत। मैंने सोचा था कि शक का कीड़ा तुम्हारे दिमाग़ से निकल गया होगा। लेकिन तुम पागल हो चुके हैं। मैं अपने घर पर ही हूँ और जीजाजी अपने घर पर।

प्रशांत: मुझसे क्यो झूठ बोल रही हो। मैंने कई बार तुम्हें जीजाजी के घर जाते देखा है और वह भी उस समय जब ऋतु दीदी घर पर नहीं होती है।

नीरू: गुस्से से पागल हो जाती है और कहती है हाँ जाती हूँ और तुम बोल रहे थे ना उनका लंड चूसती हूँ तो मैं कहती हूँ कि मैं रोज़ उनका लंड चूसती हूँ और इस समय जीजाजी के बेडरूम में ही हूँ।

प्रशांत: हंसते हुए आख़िर सच कबूल कर ही लिया ना। तुम सोच रही हो मुझे कुछ नहीं मालूम मुझे सबकुछ पता है।

इधर नीरू गुस्से में अपना फ़ोन पटक देती है और रोने लगती है। दो दिन नीरू आफिस भी नहीं जाती। इस बीच ऋतु लगातार नीरू को फ़ोन करती है लेकिन नीरू का फ़ोन गिरने के कारण खराब हो गया था। इसलिए फ़ोन लगता नहीं है। वहीं प्रशांत भी सोचता है कि उसने कहीं नीरू से ज़्यादा तो नहीं बोल दिया। वैसे यदि बोल भी दिया हो तो क्या अब मुझे नीरू के साथ वैसे भी रहना नहीं है।

जारी रहेगी
 
लीजिये पेश है भाग 3 Update 40. ) ( New-4)

नीरू को इस समय प्रशांत पर बहुत गुस्सा आ रहा था। नीरू के आंखों में लगातार आंसू बह रहे थे और साथ में वो बडबड़ा रही थी। ये आदमी जिंदगी में कभी भी सुधर नहीं सकता। इसके शक के कारण ही मुझे इससे दूर होने का फैसला करना पड़ा। ये प्रशांत बार बार माफ़ी मांग रहा था लेकिन प्रशांत की आदत आज भी सुधरी नहीं है। यदि मैं आज भी इसके पास होती तो ये आज भी मेरे उपर शक ही करता है। दूसरी ओर प्रशांत भी बेचैन था। लेकिन फिर वो अपने आफिस के काम में जुट जाता है। वैसे भी इंडिया में मध्य रात्रि का समय चल रहा था लेकिन कनाडा में दिन चढा हुआ था।

दो दिन से ऋतु नीरू का फोन ट्राई कर रही थी लेकिन फोन लगातार स्विच ऑफ बता रहा था। जिससे ऋतु की चिंता बढ रही थी और फिर वो नीरज से कहती है।

ऋतु : सुना दो दिन से नीरू का फोन नहीं लग रहा है।

नीरज : यार नेटवर्क बगैरह की प्रोबलम होगी।

ऋतु : नहीं इस समय उसके पास किसी का होना जरूरी है। एक काम करो आप जब काम पर जााओ तो मुझे नीरू के घर छोडते हुए चले जाना।

नीरज : अरे उस समय तुम जाकर क्या करोगी मेरे काम पर जाने और नीरू के आफिस जाने का समय लगभग सेम है। मैं वहां पहुँचूगा तो वो आफिस जाने के लिए तैयार मिलेगी।

ऋतु : तो ऐसा करते है,हम एक घंटे पहले चलते है उसके बाद तुम आफिस चले जाना मैं कैब से घर लौट आउंगी।

नीरज : मन ही मन चलो इस बहाने नीरू के साथ कुछ मौका तो मिलेगा। साली हाथ ही नहीं रखने दे रही है। और ये भी पता करना है इन दोनों के बीच बात क्या हुई। क्योंकि प्रशांत भी फोन नहीं उठा रहा। नीरू तो मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं है। और फिर नीरज और ऋतु तैयार होकर नीरू के फ्लैट पर पहुंच जाते हैं। ऋतु को देखकर नीरू को जितनी खुशी मिलती है नीरज को देख कर उतनी ही निराश भी होती है।

ऋतु : अरे यार तुम्हारा फोन क्यो नहीं लगता कहीं प्रशांत की तरह तुमने भी तो मुझे ब्लॉक नहीं कर दिया है।

नीरू : नहीं दीदी मैं ऐसा कभी भी नहीं करूंगी। आज सिर्फ आप ही तो हो जो मेरे साथ खडी हो।

नीरज : अरे सिर्फ ऋतु ही क्यो मैं भी हर समय तुम्हारे साथ ही हूं।

नीरू : फीकी मुस्कान के साथ हां वो तो है।

ऋतु : अरे आपको जाना नहीं है।

नीरज : हां मैं निकलता हूं और नीरज खडा होता है और घर से बाहर निकल जाता है लेकिन फिर कुछ सोच कर वापस आता है और नीरू के घर के पीछे पहुंच जाता है जहां से उसका ड्रांइग रूम साफ साफ दिख रहा था। नीरज ये सुनना चाहता था कि प्रशांत और नीरू के बीच क्या बात हुई है।

ऋतु : हां अब बता तुम दोनों के बीच क्या बात हुई, तूने प्रशांत को फोन किया था या उसकी का फोन आ गया था।

ऋतु की बात सुनकर नीरू की रुलाई फूट पडती है।

ऋतु घबराते हुए: क्या हुआ कुछ गडबड हो गइ।

नीरू : हां दीदी वो आज भी मुझ पर शक करता है। मैंने फोन लगाया था लेकिन उसने जो जवाब दिया उसे आप भी नहीं सुन पाएगी और नीरू प्रशांत से हुई पूरी बात बताती। ऋतु को भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है। एक और प्रशांत नीरू से मिलने के लिए पागल हुआ जा रहा था। उसके आफिस के चक्कर लगा रहा था और अब इस तरह की बातें कर रहा है। कहीं इसी का चक्कर तो किसी और लडकी से नहीं चलने लगा है। लेकिन फिर ये सोचकर कि नहीं प्रशांत नीरू से बहुत प्यार करता है वो ऐसा नहीं कर सकता।

ऋतु : लेकिन तेरा फोन कहा है

नीरू : प्रशांत की बातों से मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने अपना फोन जमीन पर पटक दिया जिससे वो टूट गया उसका पूरा डिस्प्ले बर्वाद हो गया।

ऋतु : यार तू अपने आप पर कंट्रोल रखा कर। फालतू में ही नुकसान हो गया। अब जल्दी से अपने लिए फोन ले लेना। या फिर इसी को सही करवा ले। मैं नीरज से बोल दूंगी वो तेरे फोन का डिस्प्ले बदलवा देगा।

नीरू : ठीक है दीदी

इन दोनों की बातें सुनकर नीरज बहुत खुश होता है। और सोचता है कि प्रशांत को चुतिया बनाने का एक मौका और हाथ लग गया है। अब तो इसके मन में शक को और मजबूत कर दूंगा। ये अब खुद नीरू को कभी फोन लगाने की हिम्मत नहीं करेगा। इसके बाद नीरज अपने काम पर चला जाता है और नीरू भी अपने आफिस के लिए निकलती है। ऋतु भी वापस घर लौट आती है।

शाम को ऋतु नीरज से कहती है : सुनो वो नीरू का फोन खराब हो गया है उसका डिस्प्ले पूरी तरह से टूट गया है। कोई पहचान का हो तो फोन का डिस्प्ले बदलवा दो।

नीरज : अरे कैसे टूट गया, इतना महंगा फोन है।

ऋतु : नीरू छत पर बात कर रही थी किसी से कि अचानक फोन नीचे गिर गया।

ऋतु नीरज से झूठ बोल देती है। लेकिन नीरज को सबकुछ पहले ही पता था। लेकिन वो कुछ बोलता नहीं है।

नीरज : ठीक है मैं आज नीरू के अफिस से फोन कलेक्ट कर लूँगा और एक दो दिन बाद उसे वापस कर दूंगा।

ऋतु : एक दो दिन लेकिन ये काम तो कुछ घंटों का है।

नीरज : यार देखों पहले तो कंपनी में उसे ठीक करवाना होगा। दूसरा पांच सात घंटे भी लग सकते हैं। इतना समय किसी के पास नहीं है एक दिन उसे संभलने के लिए दे दूंगा और दूसरे दिन उसे उठा लूंगा और नीरू तक पहुंचा भी दूंगा।

ऋतु : ठीक है तो कल ही नीरू का फोन आप उससे आफिस से लेते हुए चले जाना मैं। या एक काम कीजिए सुबह आप नीरू के घर ही चले जाना मालूम पडा आप उसके आफिस जाए और वो फोन लेकर भी न जाए क्योंकि खराब फोन ले जाने का कोई फायदा भी तो नहीं है। और आप नीरू को उसके आफिस भी छोड देना।

नीरज को मालूम था कि यदि वो घर की बात करेगा तो ऋतु अफिस की बोलेगी इसलिए उसने आफिस जाने की बात की थी। और ऋतु उससे कह रही थी कि नीरू के घर ही चले जाना और उसे आफिस छोड़ देना वैसे आफिस का रास्ता सिर्फ दस मिनिट का था। लेकिन नीरज के लिए दस मिनिट बहुत थे। दूसरी दिन नीरज सुबह नीरू के घर पहुंचता है ऋतु आफिस निकलने की तैयारी में थी। लेकिन अचानक नीरज को देखकर चौंक जाती है।

नीरू फीकी मुस्कुकान के साथ : अरे जीजाजी आप दीदी नहीं आईं।

नीरज : नहीं वो ऋतु बता रही थी कि तुम्हारे फोन के डिस्प्ले में कुछ गडबडी है। उसे चेंज कराना है। इसलिए में यहां आया था। एक काम करो अपना फोन मुझे दे दो मैं उसे आज ठीक करवा दूंगा और कल शाम तक तुम्हें लौटा दूंगा।

नीरू : तुरंत ही सेफ में से फोन निकाल नीरज को दे देती है। नीरू जल्दी से जल्दी नीरज को विदा करना चाहती थी इसलिए वो फोन में से न तो सिम निकाल पाती है और न ही कार्ड।

नीरज : चलो मैं तुम्हें तुम्हारे आफिस तक छोड देता हूं।

नीरू : नहीं जीजाजी मैं रिक्शे से चली जाउगी।

नीरज : यार अब गुस्सा थूक दो मैं तुमसे कई बार माफी मांग चुका हूं।

नीरू : देखिए उसके लिए मैं आपको माफ कर चुकी हूं। लेकिन आप परेशान मत होईए मैं रिक्शे से चली जाउंगी।

नीरज नीरू को बहुत मनाता है और आखिरकार नीरू नीरज के साथ चलने को तैयार हो जाती है। रास्ते में नीरज नीरू से बात करने की बहुत कोशिश करता है लेकिन नीरू हा और ना इससे आगे कोई जवाब नहीं देती। नीरज प्रशांत का मामला भी उठाता है और पूछता है कि प्रशांत को कोई फोन आया था। लेकिन नीरू साफ साफ कह देती है कि प्रशांत के मुद्दे पर उसे कोई बात नहीं करनी है। इस बीच नीरू का आफिस आ जाता है और वो नीरज की गाडी से उतरती है और बिना पीछे मुडे आफिस में चली जाती है।

नीरज : मुस्कुराते हुए नीरू मुझे कोई जल्दी नहीं हैं लेकिन हमारे बीच जो एक बार हो चुका है वो फिर शुरू होगा। तुम मुझसे कितना भी बचने की कोशिश कर लो। और प्रशांत आज तू तो गया। आज के बाद तू नीरू से सिर्फ नफरत करेगा। तूने नीरू को बहुत फोन कर लिए। अब तू नीरू को फोन करना भूल जाएगा। इसके बाद नीरज एक आदमी को फोन लगाता है। दूसरी ओर से

सुंदर: हैलो नीरज जी आज कैसे याद किया

नीरज : एक काम है अर्जेंट

सुंदर : हां बोलो भाई

नीरज : मुझे आज रात के लिए काजल चाहिए।

सुंदर : यार पता करना होगा काजल आज रात फ्री है या नहीं।

नीरज : यार जल्दी पता करके बता मुझे किसी भी हाल में वो चाहिए।

सुंदर : ठीक है तू दस मिनिट रूक लेकिन वो एक रात का पांच हजार चार्ज करेगी।

नीरज : ठीक है तू उसे ठीक सात बजे मेरे पास भेज देना।

सुंदर : पहले पता तो कर लूं कि वो खाली है या नहीं

काजल एक कालगर्ल थी जिसे आज रात नीरज ने बुलाया था। काजल को कुछ महीने पहले नीरज ने अपने तीन दोस्तों के साथ चोदा था। नीरज के तीन दोस्त उसके शहर आए थे वो लोग एक एमएनसी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर थे। उसके से एक यूरोप का मार्केटिंग हेड था। लेकिन यहां नीरज के साथ उनकी दोस्ती हो गई थी। नीरज उनके साथ कई बार पार्टी कर चुका था। और उसमें रात को लडकियां भी बुलाई जाती थी। ऐसे ही एक दिन काजल भी बुलाई गई थी। जहां नीरज ने काजल की चुदाई की थी। काजल वैसे तो नीरू के आगे कुछ भी नहीं थी लेकिन नीरू से उसकी कोई चीज मिलती थी तो वो थी उसकी आवाज। और आज नीरज को इसी की जरूरत थी। नीरज मन ही मन दुआ कर रहा था कि काजल आज फ्री हो। तभी सुंदर का फोन उसकेे पास आता है।

सुंदर : हैलो नीरज जी आपका काम हो गया है। काजल ठीक सात बजे आपको जीडी चौक पर मिल जाएगी मैने आपका फोन नम्बर उसे भेज दिया है। आप ठीक सात बजे वहां पहुंच जाना। पैसे मेरा आदमी आपके ऑफिस से दोपहर को ले लेगा।

नीरज : ठीक है सुंदर जी।

सुंदर : वैसे आपने इस बार बहुत दिनों बाद हमें याद किया। पहले तो हफ्ते में तीन चार दिन आपको लडकियों की जरूरत पडती थी।

नीरज : अरे भाई थोडा काम में बिजी हो गया था। सुंदर से बात करने के बाद नीरज ऋतु को फोन करता है।

ऋतु : हैलो नीरू से फोन ले लिया।

नीरज : हा फोन ले लिया है और उसे ठीक करवाने केे लिए देने जा रहा हूं। लेकिन यार मुझे आज रात को जरूरी काम से बाहर जाना है। मैं कल सुबह ही लौट पाउंगा।

ऋतु : कब तक वापस आओगे ।

नीरज : सुबह छह सात बजे तक आ जाउंगा। रात को तुम मेरा इंतजार मत करना वैसे यदि काम हो गया तो रात में भी आ सकता हूं।

ऋतु : नहीं कुछ भी जरूरी काम नहीं है, ठीक है अपना ख्याल रखना ।

इसके बाद नीरज पहले नीरू का फोन रिपेयर के लिए देता है और नीरू की सिम और एचडी कार्ड निकाल लेता है। सबसे पहले नीरज नीरू के कार्ड को अपने फोन में लगाता है और सभी फोल्डर चैक करता है उसमेंं उसे कुछ खास नहीं मिलता सिर्फ नीरू की कुछ फोटो थी। नीरू की शादी के भी फोटो थे कार्ड में सबसे ज्यादा फोटो प्रशांत के थे। जिसे सोचकर नीरज समझ जाता है कि अभी भी नीरू के मन में प्रशांत ही बसा हुआ है। वो थोडा निराश तो होता है लेकिन फिर ये सोचकर मुस्कुराने लगता है कि उसके पास अभी एक साल से भी ज्यादा का वक्त है। इस दौरान वो प्रशांत और नीरू को इतना दूर कर देगा कि वो कभी आपस में मिल भी न सकें।

शाम को ठीक सात बजे नीरज काजल को लेकर एक होटल में पहुंचता है।

नीरज : काजल यार आज मेरी इच्छा है कि तून काजल नहीं नीरू बनकर मुझसे चुदे।

काजल : अरे इसमें क्या बात है आप नीरू समझकर मुझे चोदे या ऐश्वर्या मुझे कोई फर्क नहीं पडता मुझे सिर्फ अपने पैसे से मतलब है जो आप दे चुके हैं।

नीरज : ठीक है तो फिर तुझे एक रोल प्ले करना है। और नीरज काजल को पूरी स्क्रिप्ट समझा देता है।

काजल : देखों सेठ कोई लफड़ा तो नहीं है ना

नीरज : यार कुछ भी नहीं है और तू मेरा नाम तो जानती ही है तू मुझे मेरे नाम से ही बुलाना। दरअसल में अपनी बीबी को जलाना चाहता हूं। उसका किसी और से लफडा चल रहा है। मैंने उसे बहुत समझाया लेकिन वो मानने को तैयार नहीं है। अब जब उसे पता चलेगा कि मैं भी उसी के रास्ते पर चल पड़ा हंू तो शायद उसका दिमाग ठीक हो जाए।

काजल : ठीक है सेठ लेकिन इस काम का मैं दो हजार रुपए एक्सट्रा चार्ज करूंगी और ये बात आप सुंदर को नहीं बनाएंग नहीं तो वो इसमें से भी अपना कमिशन मांग लेगा।

नीरज : ठीक है और अपनी जेब से दो हजार रुपए निकालकर काजल को दे देता है।

जारी रहेगी
 
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