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उसकी बात सुनकर मिसेज भट्टी थोड़ा नजदीक होकर बैठ गई।
हाउ ओल्ड इस योर सोन... 20 साल?”
*22 साल आक्च्युयली...” आशा ने मुश्कुराते हुए कहा।
कुछ सिखाया की नहीं उसको अब तक?”
आशा चौंक पड़ी।
ओह कम ओन...” उसके चेहरे को देख मिसेज भट्टी ने कहा- “सारी जिंदगी एक ही लण्ड लेकर गुजारेगी क्या? अगर बाहर का नहीं मंजूर तो अपने बेटे का ट्राई कर ले...”
“यू आर जोकिंग, राइट...” नशे में होने के बाद भी आशा का दिमाग ये बात सुनकर घूमने लगा था।
वाइ... इट्स नाट लाइक ही इज एनी डिफरेंट। दे आर आल गाइस। थोड़ी देर के लिए बिस्तर पर एक मर्द समझ ले और फिर बिस्तर से उठके माँ बन जा। हाउ टफ इस तट... टेल मी, हव यू नेवर काट योर सोन टेकिंग आ पीक अट युवर ब्रेस्ट्स आर अट युवर आस.."
मिसेज भट्टी ने पूछा तो आशा का दिमाग सोच में पड़ गया। उसको कई बार ये महसूस हुआ था की सिद्धार्थ उसके जिश्म को घूरता है पर फिर अपना वहम समझ कर उसने बात भुला दी।
लेट मी टेल यू समथिंग...” कहते हुए मिसेज भट्टी ने बोलना शुरू किया और फिर अगले आधे घंटे तक, जब तक की सिद्धार्थ आ नहीं गया, वो आशा के दिमाग में यही गोबर भरती रही की उसका अपने बेटे से जिस्मानी रिश्ता बनाना कोई गलत बात नहीं थी, की अगर आशा को घर के बाहर किसी से अफेयर में बदनामी का डर है। तो घर में मौजूद अपने बेटे से बना ले। घर की बात घर में ही रहेगी।
शराब और ड्रग्स दोनों का नशा आशा के दिमाग पर सावर था। जिस बात पर वो शायद और किसी दिन मिसेज भट्टी को थप्पड़ मार देती, उस बात पर वो उस रात सीरियस्ली सोच रही थी।
एक काम कर..." मिसेज भट्टी ने आगे बढ़कर आशा के ब्लाउज के बटन खोलते हुए कहा था- “इनको थोड़ा दिखा... अगर तेरा बेटा बार बार यहीं देख रहा है, तो समझ जा की वो भी यही चाहता है...”
जब वो रात के दो बजे पार्टी से कार में सिद्धार्थ के साथ निकली तो उसके दिमाग में तब भी मिसेज भट्टी की बातें चल रही थी। उसने एक नजर अपने गिरेबान की तरफ डाली तो मुश्कुरा उठी। ब्लाउज के सारे बटन्स खुले हुए थे, सिर्फ एक नीचे का बटन बंद था। उसकी छोटी छोटी छातियां 70% दिखाई दे रही थी। साइज छोटा होने की वजह से वो अक्सर ब्रा नहीं पहनती थी और आज रात भी नहीं पहन रखा था।
“इफ ही इस लुकिंग अट युवर ब्रेस्ट्स स्वीटी, तो समझ जा की तेरा बेटा भी वही चाहता है जो तू चाहती है...” मिसेज भट्टी की आवाज अब भी उसके कानों में गूंज रही थी।
आशा ने मुश्कुराते हुए एक नजर सिद्धार्थ पर डाली जो उसके दिमाग में चल रही बातों से बेखबर कार चला रहा था। उसको देखकर अचानक आशा के दिमाग में एक आइडिया आया। अपने साड़ी के पल्लू के नीचे हाथ डालकर उसने अपने ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया। अब पल्लू के नीचे उसकी छातियां पूरी तरह नंगी थी। उसने ऐसा दिखाया जैसे की वो बहुत नशे में है और बेखबर सो रही है। कार की खिड़की का शीशा नीचे था और बाहर ठंडी हवा चल रही थी।
आशा ने अपने हाथ थोड़े से फैलाकर साइड में गिरा दिए जिससे पल्लू को कोई सहारा ना मिले। जो उसने सोचा था वही हुआ। खिड़की से आती हवा से पल्लू फौरन सरक कर नीचे जा गिरा। “हम्म्म्म..” ठीक उसी वक़्त उसने मुँह से ऐसी आवाज निकली जैसे नींद में बड़बड़ा रही हो।
उसकी आवाज सुनकर सिद्धार्थ ने सड़क से नजर हटाकर अपनी माँ की तरफ देखा और फिर देखता रह गया। आशा पीछे को सर टिकाए सोने का नाटक कर रही थी। पल्लू सरक कर नीचे गिरा पड़ा था और ब्लाउज पूरी तरह खुला हुआ। उसकी दोनों छातियां खुली हुई सिद्धार्थ के सामने थी। उसने फौरन गाड़ी को ब्रेक लगाए और किनारे लेकर रोकी। जिस जगह वो दोनों उस वक़्त थे वो इलाका रात को सुनसान ही रहता था। रात को ट्रक्स के सिवा वहाँ से कोई नहीं गुजरता था।
आँखें बंद किए हुए भी आशा को एहसास हो गया था की गाड़ी रुकी है और सिद्धार्थ सरक कर उसके नजदीक आया है।
मोम..” आवाज आशा के कानों में पड़ी तो उसने जवाब नहीं दिया। अपनी आँखें बंद ही रखी।
सिद्धार्थ ने उसके बाद दो-तीन बार उसको पुकारा पर आशा ने जवाब नहीं दिया। साड़ी का पल्लू अभी भी सरका हुआ था और हिसाब से सिद्धार्थ को सबसे पहले वो उठाकर सही करना था पर ऐसा हुआ नहीं। उसने आशा का
कंधा हिलाकर उसको जगाने की कोशिश की पर जब वो उठी नहीं तो उसने भी अपना हाथ पीछे खींच लिया। आशा के कानों में गाड़ी के शीशे ऊपर होने की आवाज आई और फिर सब शांत हो गया। कोई दो-तीन मिनट तक वो यूं ही आँखें बंद किए पड़ी रही पर कुछ भी हुआ नहीं। ना तो गाड़ी आगे बढ़ी, ना सिद्धार्थ ने उसको जगाने की कोशिश की और ना ही उसके कपड़े ठीक किए।
हाउ ओल्ड इस योर सोन... 20 साल?”
*22 साल आक्च्युयली...” आशा ने मुश्कुराते हुए कहा।
कुछ सिखाया की नहीं उसको अब तक?”
आशा चौंक पड़ी।
ओह कम ओन...” उसके चेहरे को देख मिसेज भट्टी ने कहा- “सारी जिंदगी एक ही लण्ड लेकर गुजारेगी क्या? अगर बाहर का नहीं मंजूर तो अपने बेटे का ट्राई कर ले...”
“यू आर जोकिंग, राइट...” नशे में होने के बाद भी आशा का दिमाग ये बात सुनकर घूमने लगा था।
वाइ... इट्स नाट लाइक ही इज एनी डिफरेंट। दे आर आल गाइस। थोड़ी देर के लिए बिस्तर पर एक मर्द समझ ले और फिर बिस्तर से उठके माँ बन जा। हाउ टफ इस तट... टेल मी, हव यू नेवर काट योर सोन टेकिंग आ पीक अट युवर ब्रेस्ट्स आर अट युवर आस.."
मिसेज भट्टी ने पूछा तो आशा का दिमाग सोच में पड़ गया। उसको कई बार ये महसूस हुआ था की सिद्धार्थ उसके जिश्म को घूरता है पर फिर अपना वहम समझ कर उसने बात भुला दी।
लेट मी टेल यू समथिंग...” कहते हुए मिसेज भट्टी ने बोलना शुरू किया और फिर अगले आधे घंटे तक, जब तक की सिद्धार्थ आ नहीं गया, वो आशा के दिमाग में यही गोबर भरती रही की उसका अपने बेटे से जिस्मानी रिश्ता बनाना कोई गलत बात नहीं थी, की अगर आशा को घर के बाहर किसी से अफेयर में बदनामी का डर है। तो घर में मौजूद अपने बेटे से बना ले। घर की बात घर में ही रहेगी।
शराब और ड्रग्स दोनों का नशा आशा के दिमाग पर सावर था। जिस बात पर वो शायद और किसी दिन मिसेज भट्टी को थप्पड़ मार देती, उस बात पर वो उस रात सीरियस्ली सोच रही थी।
एक काम कर..." मिसेज भट्टी ने आगे बढ़कर आशा के ब्लाउज के बटन खोलते हुए कहा था- “इनको थोड़ा दिखा... अगर तेरा बेटा बार बार यहीं देख रहा है, तो समझ जा की वो भी यही चाहता है...”
जब वो रात के दो बजे पार्टी से कार में सिद्धार्थ के साथ निकली तो उसके दिमाग में तब भी मिसेज भट्टी की बातें चल रही थी। उसने एक नजर अपने गिरेबान की तरफ डाली तो मुश्कुरा उठी। ब्लाउज के सारे बटन्स खुले हुए थे, सिर्फ एक नीचे का बटन बंद था। उसकी छोटी छोटी छातियां 70% दिखाई दे रही थी। साइज छोटा होने की वजह से वो अक्सर ब्रा नहीं पहनती थी और आज रात भी नहीं पहन रखा था।
“इफ ही इस लुकिंग अट युवर ब्रेस्ट्स स्वीटी, तो समझ जा की तेरा बेटा भी वही चाहता है जो तू चाहती है...” मिसेज भट्टी की आवाज अब भी उसके कानों में गूंज रही थी।
आशा ने मुश्कुराते हुए एक नजर सिद्धार्थ पर डाली जो उसके दिमाग में चल रही बातों से बेखबर कार चला रहा था। उसको देखकर अचानक आशा के दिमाग में एक आइडिया आया। अपने साड़ी के पल्लू के नीचे हाथ डालकर उसने अपने ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया। अब पल्लू के नीचे उसकी छातियां पूरी तरह नंगी थी। उसने ऐसा दिखाया जैसे की वो बहुत नशे में है और बेखबर सो रही है। कार की खिड़की का शीशा नीचे था और बाहर ठंडी हवा चल रही थी।
आशा ने अपने हाथ थोड़े से फैलाकर साइड में गिरा दिए जिससे पल्लू को कोई सहारा ना मिले। जो उसने सोचा था वही हुआ। खिड़की से आती हवा से पल्लू फौरन सरक कर नीचे जा गिरा। “हम्म्म्म..” ठीक उसी वक़्त उसने मुँह से ऐसी आवाज निकली जैसे नींद में बड़बड़ा रही हो।
उसकी आवाज सुनकर सिद्धार्थ ने सड़क से नजर हटाकर अपनी माँ की तरफ देखा और फिर देखता रह गया। आशा पीछे को सर टिकाए सोने का नाटक कर रही थी। पल्लू सरक कर नीचे गिरा पड़ा था और ब्लाउज पूरी तरह खुला हुआ। उसकी दोनों छातियां खुली हुई सिद्धार्थ के सामने थी। उसने फौरन गाड़ी को ब्रेक लगाए और किनारे लेकर रोकी। जिस जगह वो दोनों उस वक़्त थे वो इलाका रात को सुनसान ही रहता था। रात को ट्रक्स के सिवा वहाँ से कोई नहीं गुजरता था।
आँखें बंद किए हुए भी आशा को एहसास हो गया था की गाड़ी रुकी है और सिद्धार्थ सरक कर उसके नजदीक आया है।
मोम..” आवाज आशा के कानों में पड़ी तो उसने जवाब नहीं दिया। अपनी आँखें बंद ही रखी।
सिद्धार्थ ने उसके बाद दो-तीन बार उसको पुकारा पर आशा ने जवाब नहीं दिया। साड़ी का पल्लू अभी भी सरका हुआ था और हिसाब से सिद्धार्थ को सबसे पहले वो उठाकर सही करना था पर ऐसा हुआ नहीं। उसने आशा का
कंधा हिलाकर उसको जगाने की कोशिश की पर जब वो उठी नहीं तो उसने भी अपना हाथ पीछे खींच लिया। आशा के कानों में गाड़ी के शीशे ऊपर होने की आवाज आई और फिर सब शांत हो गया। कोई दो-तीन मिनट तक वो यूं ही आँखें बंद किए पड़ी रही पर कुछ भी हुआ नहीं। ना तो गाड़ी आगे बढ़ी, ना सिद्धार्थ ने उसको जगाने की कोशिश की और ना ही उसके कपड़े ठीक किए।