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***** 12 डेरा *****
आफ सीजन की वजह से उस छोटे सी जगह पर टूरिस्ट के नाम पर शायद एक हम ही थे।
सीजन के टाइम पर यहाँ टूरिस्ट वगैरह कैसे रहते हैं...” मैंने चाय रखने आए होटल के केयरटेकर से पूछा।
उस वक़्त तो ये पूरा भरा होता है साहब... वो चाय की ट्रे टेबल पर रखता हुआ बोला- “आप लोग अभी आफ सीजन में आए हैं इसलिए कोई खाली पड़ा है..."
-
“आप रहने दीजिए, मैं बना लूंगी...” वो चाय कप्स में डालने लगा तो आगे बढ़कर मेरी बीवी ने उसे रोक दिया।
“कहाँ से आए हैं आप लोग?"
देल्ही से..." मेरे से पहले मुकेश ने जवाब दिया।
सीजन के टाइम पर आना चाहिए था आपको साहब। दिल लगता है यहाँ पर..” केयरटेकर ने जवाब दिया- “मेला सा लग जाता है...”
गर्मियों में...” मेरी बीवी संध्या ने चाय का एक कप मेरी तरफ बढ़ते हुए पूछा।
नहीं सर्दियों में..." हम बातें कर ही रहे थे तो वो बुड्ढा वहीं एक चेयर पर हमारे साथ ही बैठ गया- “वैसे तो गर्मियों में भी लोग आते हैं यहाँ पर, गर्मी से बचने के लिए, पर ज्यादा भीड़ दिसेंबर और जनवरी के महीने में होती है...”
उस वक़्त तो काफी सदी होती होगी यहाँ..” मैंने पूछा।
हाँ.. पूरी सर्दी होती है। जमके बरफ पड़ती है। 0° डिग्री से नीचे ही रहता है टेंपरेचर.." केयरटेकर ने जवाब दिया।
फिर भी लोग आते हैं?" संध्या बोली।
“स्की करने आते होंगे...” मैंने गेस किया।
जी हाँ...” केयरटेकर बोला- “दो महीने जमके स्की होती है। सब होटेल्स भरे रहते हैं। आने से पहले अड्वान्स में बुकिंग करनी पड़ती है वरना रुकने को जगह नहीं मिलती...”
और गर्मियों में?” मुकेश ने पूछा।
“गर्मी में भी खासी भीड़ रहती है पर आप लोग अभी बरसात के मौसम में आए हैं तो खाली पड़ा है। अभी यहाँ बारिश ही इतनी होती है। रोज पानी बरसता है तो ऐसे में कहीं घूम फिर भी नहीं सकते.”
सही बात है...” मैंने हामी भारी
वैसे आप लोग टीवी वाले हैं क्या?” केयरटेकर ने सवाल किया। मैं समझ गया की उसने हमारा बड़ा सा कैमरा देख लिया होगा इसलिए पूछ रहा था।
मैं और मुकेश दोनों ही नेशनल जियोग्राफिक के लिए काम करते थे। मैं हिन्दुस्तान में पाए जाने वाले अलग अलग किश्म के इन्सेक्ट्स और बग्स पर एक डाक्युमेंटरी बना रहा था और मुकेश मेरा कैमरा-मैन था।
आफ सीजन की वजह से उस छोटे सी जगह पर टूरिस्ट के नाम पर शायद एक हम ही थे।
सीजन के टाइम पर यहाँ टूरिस्ट वगैरह कैसे रहते हैं...” मैंने चाय रखने आए होटल के केयरटेकर से पूछा।
उस वक़्त तो ये पूरा भरा होता है साहब... वो चाय की ट्रे टेबल पर रखता हुआ बोला- “आप लोग अभी आफ सीजन में आए हैं इसलिए कोई खाली पड़ा है..."
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“आप रहने दीजिए, मैं बना लूंगी...” वो चाय कप्स में डालने लगा तो आगे बढ़कर मेरी बीवी ने उसे रोक दिया।
“कहाँ से आए हैं आप लोग?"
देल्ही से..." मेरे से पहले मुकेश ने जवाब दिया।
सीजन के टाइम पर आना चाहिए था आपको साहब। दिल लगता है यहाँ पर..” केयरटेकर ने जवाब दिया- “मेला सा लग जाता है...”
गर्मियों में...” मेरी बीवी संध्या ने चाय का एक कप मेरी तरफ बढ़ते हुए पूछा।
नहीं सर्दियों में..." हम बातें कर ही रहे थे तो वो बुड्ढा वहीं एक चेयर पर हमारे साथ ही बैठ गया- “वैसे तो गर्मियों में भी लोग आते हैं यहाँ पर, गर्मी से बचने के लिए, पर ज्यादा भीड़ दिसेंबर और जनवरी के महीने में होती है...”
उस वक़्त तो काफी सदी होती होगी यहाँ..” मैंने पूछा।
हाँ.. पूरी सर्दी होती है। जमके बरफ पड़ती है। 0° डिग्री से नीचे ही रहता है टेंपरेचर.." केयरटेकर ने जवाब दिया।
फिर भी लोग आते हैं?" संध्या बोली।
“स्की करने आते होंगे...” मैंने गेस किया।
जी हाँ...” केयरटेकर बोला- “दो महीने जमके स्की होती है। सब होटेल्स भरे रहते हैं। आने से पहले अड्वान्स में बुकिंग करनी पड़ती है वरना रुकने को जगह नहीं मिलती...”
और गर्मियों में?” मुकेश ने पूछा।
“गर्मी में भी खासी भीड़ रहती है पर आप लोग अभी बरसात के मौसम में आए हैं तो खाली पड़ा है। अभी यहाँ बारिश ही इतनी होती है। रोज पानी बरसता है तो ऐसे में कहीं घूम फिर भी नहीं सकते.”
सही बात है...” मैंने हामी भारी
वैसे आप लोग टीवी वाले हैं क्या?” केयरटेकर ने सवाल किया। मैं समझ गया की उसने हमारा बड़ा सा कैमरा देख लिया होगा इसलिए पूछ रहा था।
मैं और मुकेश दोनों ही नेशनल जियोग्राफिक के लिए काम करते थे। मैं हिन्दुस्तान में पाए जाने वाले अलग अलग किश्म के इन्सेक्ट्स और बग्स पर एक डाक्युमेंटरी बना रहा था और मुकेश मेरा कैमरा-मैन था।