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Adultery * * * * *पाप (30 कहानियां) * * * * *

आदित्य फिर तहजीब के पास आया।

क्या कह रही है.. शादी करना चाहती है तुमसे..” तहजीब फिर चहकी।

शट उप... कह रही है की डाक्टर को 15-20 मिनट और लगेंगे। तुम बैठो मैं जरा बाथरूम होकर आता हूँ..”

कुछ देर बाद वो डाक्टर के साथ अंदर अकेला बैठा था।

“ये कैसे हो सकता है... इट्स इंपासिबल...”

आप चाहें सर तो किसी और डाक्टर से कन्सल्ट कर सकते हैं पर मुझे यकीन है की सबका जवाब यही होगा। आपकी बीवी के सर पर कुछ अरसा पहले चोट लगी थी जिसकी तरफ इन्होंने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे उनके दिमाग में उस जगह एक ब्लड क्लाट जमा हो गया है जो अब इलाज की हद के बाहर जा चुका है। यही वजह है।

की उनके सर में दर्द रहता है, चक्कर आते हैं, बेहोश हो जाती हैं..." डाक्टर ने कहा।

उस रात एक आदमी ने मेरे सर पर किसी चीज से वार किया था जिसके बाद मैं बेहोश हो गई थी। होश आया तो मेरा घर और मेरे माँ, बाप, भाई, सबको जला दिया गया था। तभी से मेरे सर में हल्की हल्की सी चुभन रहती थी..” आदित्य को तहजीब की कही बात भी याद आ रही थी।

कितना वक्त...” उसने डाक्टर से पूछा।

ऐसे केसेस में शर्तिया तौर कुछ कहा नहीं जा सकता। होने को आज कुछ हो जाए पर ज्यादा से ज्यादा 6 महीने...”

*****

*****

क्या आप सब मेरी बात से सहमति रखते हैं...” देवराज चतुर्वेदी ने हाल में मौजूद तकरीबन 100 लोगों से पूछा।

हाँ.. हम सब सहमत हैं...” जवाब में आवाज आई।

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क्या तू भी अपने बाप की बात से सहमत है आदित्य..." हाल में खड़े निखिल ने अपने साथ खड़े आदित्य से।

पुछा।

आदित्य ने कोई जवाब नहीं दिया।

“सालों तक, सालों तक हमने इनका बोझ सहा है, इनके साथ कंधे से कंधा मिलाने की कोशिश की है पर अब

और नहीं। अब हद हो चुकी है.. देवराज की आवाज फिर पूँजी।।

हद हो चुकी है...” पीछे पीछे सामने खड़े लोगों ने दोहराया।

ये सब हजार साल पहले हमारे देश में आए, हमने दिल से इनका स्वागत किया। अपने यहाँ रहने की जगह दी, खाना दिया, जल दिया, अपनी धरती दी पर बदले में हमें क्या मिला... धोखा...”

“हाँ... हाँ धोखा..” लोगों ने एक जुट कहा।

हाँ.. धोखा ही है ये। इन लोगों को क्या हक बनता था की हमारी भूमि के दो टुकड़े करते... उस भूमि पर जो इनके पूर्वजों की थी ही नहीं... जहाँ ये सब अतिथि के रूप में आए थे... धोखा है ये की इन्होने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। जिस भूमि पर रहे उसी के दो टुकड़े कर डाले। एक देश को दो हिस्सो में बाँट दिया..”

धोखा है ये...” भीड़ फिर चिल्लाई।

पर हमने इनकी बात का सम्मान रखा। इन्होंने अलग देश चाहा तो हमने खुले दिल से वो भी दिया पर फिर उसके बाद क्या? जो दिया उसमें संतुष्ट ना होकर और की उम्मीद... बार बार हमारे देश पर हमला...”

धोखा...” फिर से आवाज गूंजी।

“हमने फिर भी बार बार इन लोगों को माफ किया। फिर खुले दिल से भाई-चारे की बात की पर फिर भी नहीं मानते ये... जानते हैं क्यों?"

क्यों?” फिर आवाज गूंजी।

क्योंकी धोखा इनकी जात में शामिल है। पर अब और नहीं। अब हिन्दुस्तान वो बनेगा जो की उसका नाम है। एक हिंदू राष्ट्र...”

भारत माता की जै...” भीड़ एकजुट चिल्लाई।

अगर यहाँ रहना है तो हिंदू बनकर रहना होगा वरना कोई हक नहीं बनता उन्हें यहाँ रहने का। हम फिर से इस देश को उसका गौरव लौटा कर देंगे। अब वक्त आ गया है बदले का। हर उस आदमी को इस देश से निकाल देने का जो हिंदुत्व का पालन नहीं करता। हर उस चीज को मिटा देने का जो हिंदू धरम के खिलाफ है। क्या

आप सहमत हैं...”

“हाँ..” भीड़ चिल्लाई।

नहीं...” लोगों के बीच से एक और आवाज उठी। लोगों ने हैरानी से आवाज की तरफ देखना शुरू कर दिया।

कौन बोला...” देवराज जोर से चिल्लाया।

“मैं.. आदित्य चतुर्वेदी...” भीड़ के बीच से आवाज आई। लोग एक तरफ होने लगे और देवराज और आदित्य के बीच से हट गये।

तुम कुछ कहना चाहते हो आदित्य.."

एक सवाल पूछना चाहता हूँ.” साथ खड़ा निखिल आदित्य को चुप करने की कोशिश कर रहा था।

पूछो...”

आप इस देश को हिंदू राष्ट्रा बनाना चाहते हैं। यहाँ रहने वाले सबको हिंदू बनाना चाहते हैं। तो ये बताइए चतुर्वेदी साहब के अगर एक खान अपना धरम छोड़कर हिंदू बनता है तो जात क्या देंगे आप उसको... शर्मा, पांडे या दूबे बनाएंगे या कोई हरिजन बनाएंगे..." आदित्य ने सवाल किया।

कहना क्या चाह रहे हो.. कैसा वाहियात सवाल है ये...”

नहीं बिल्कुल वाहियात नहीं है..” आदित्य अपनी बात पर डटा रहा- “अगर कोई दूसरे धरम का आदमी अपना धरम छोड़कर हिंदुत्व में आता है तो जात तो उसको देनी पड़ेगी ना। अब अगर किसी दूसरे धरम के ऊँची जात के आदमी को आपं हिंदू में नीची जात वाला बनाते हैं तो उसके साथ नाइंसाफी होगी। और अगर आप उसको । कोई ऊँची जात देते हैं तो हमारे हरिजन भाइयों के साथ नाइंसाफी होगी क्योंकी ऊँची जात पर पहले हक इनका बनता है जो सारी जिंदगी से हिंदू रहे हैं। ना की उसका जो अभी अभी हिंदू बना है...”

 
चुप हो जाओ..” देवराज जोर से गरजा।

क्यों चुप हो जाऊं... क्योंकी आपके पास जवाब नहीं है इसलिए..”

आदित्यआआअ...”

आप हिंदुत्व की बातें कर रहे हैं... एक वेद शास्त्र उठाकर दिखा दीजिए मुझे जो हिंसा का समर्थन करता हो। नहीं मिलेगा... क्योंकी हिंदू होना भाई-चारे को बढ़ावा देना है। ना की मासूम लोगों की जान लेना, उन्हें मजबूर ।

करना...”

*आदित्यआअ.."

और हमला तो हम पर चाइना ने भी किया था... क्या करेंगे... चाइना से बदला क्यों नहीं लेते आप.. क्यों सारे बुध्दिस्ट्स को हमारे देश से नहीं निकाल देते... या क्यों उनको भी हिंदू नहीं बना देते... खास तौर से तब जबकी महात्मा बुध तो थे भी हमारे देश से ही...”

“चुप हो जाओं आदित्य... देवराज का गुस्सा बढ़ता जा रहा था।

आदित्य चुप हो जा प्लीज। मरवाएगा क्या?” निखिल भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा था की उसका मुँह बंद कर दे।

एक पड़ोसी देश के कारनामों का बदला हम अपने उन भाई-बहनों से नहीं ले सकते जो हमारे अपने हैं। इस देश का एक हिस्सा हैं। इस देश की प्रगती में बराबर के हकदार हैं। इस देश का गौरव जितना हमसे है उतना उनसे भी है...” कहकर आदित्य कमरे से बाहर निकल गया।

* * * * *

* * * * *

सच...” बिस्तर पर लेटी तहजीब ने कमजोर आवाज में कहा।

“हाँ... मैं सच तुमसे शादी करना चाहता हूँ। करोगी मुझसे शादी...”

हाँ..” तहजीब की आँख से आँसू बह चले- “बस जरा मेरी तबीयत ठीक हो जाए, फिर हम निकाह कर लेंगे...”

“नहीं.” आदित्य फौरन उसका हाथ पकड़कर उसके करीब बिस्तर पर बैठ गया।

तुमसे शादी के लिए मैं अब एक पल भी नहीं रुक सकता। डाक्टर से मेरी बात हो गई है। कुछ नहीं हुआ है। तुम्हें, बस यूँ ही थोड़ा वाइरल है। जल्दी ठीक हो जाओगी पर मैं सोच रहा था की हम शादी कल ही कर लें..."

कल..."

“हाँ... कल। एक काम करते हैं। कल निकाह नहीं करते। ना मस्जिद, ना मंदिर, ना कोर्ट। कल चर्च में शादी करते हैं..."

“चर्च में..." तहजीब मुश्किल से बिस्तर पर उठकर बैठ गई



हाँ..." आदित्य उसका हाथ पकड़ता हुआ बोला- “मेरा बड़ा मन था बचपन से की अंग्रेजी स्टाइल में शादी करूं। तो कल हम चर्च में शादी कर लेते हैं और उसके बाद जब तुम अच्छी हो जाओगी तो मेरे पापा को बताकर निकाह पढ़ा लेंगे और धूम धाम वाली शादी करेंगे...”

तुम पागल हो आदिल.." तहजीब हँस पड़ी।

मैं जो तुम्हारे लिए हूँ.” आदित्य उसका माथा चूमते हुए बोला।

उसी शाम आदित्य और निखिल साथ बैठे आदित्य के फ्लैट पर विस्की के पेग लगा रहे थे।

“तूने अब तक उसको नहीं बताया की तू हिंदू है..” निखिल ने पूछा।

नहीं वो अब तक समझती है की मैं आदिल रहमान ही हैं."

“एक तो तेरा बाप वैसे ही तुझपर भड़का हुआ है उस दिन की हरकत को लेकर। उसपर अगर उसे पता चला की तूने एक मुस्लिम लड़की के चक्कर में ये सब किया है तो पता नहीं वो क्या करेगा..."

शायद उसकी नौबत ही ना आए..” आदित्य ने धीरे से कहा।

“मतलब?”

मतलब ये की उस बेचारी के पास इतना वक्त है ही नहीं..." और आदित्य ने निखिल को डाक्टर से हुई अपनी बात के बारे में बताना शुरू कर दिया।

"ओह मैन.." बात खतम होने पर निखिल बोला- “तो क्या सोचा है अब.."

उस बेचारी को तो ये पता भी नहीं की वो मरने वाली है और मैं उसको बताना भी नहीं चाहता। कल उससे शादी कर रहा हूँ...

“शादी..” निखिल जैसे उछल पड़ा।

हाँ... वो मुस्लिम है और मैं हिंदू इसलिए मैंने मंदिर मस्जिद, दोनों को एक तरफ रख दिया। हम एक तीसरे धरम के हिसाब से शादी करेंगे। चर्च में...”

और तू ये मुझे अब बता रहा है."

“सुन ना यार। कल चर्च पहुँच जाना विटनेस बनने के लिए...”

तू कर क्या रहा है आदि...”

मैं उसके जीते जी उसका हर ख्वाब पूरा करना चाहता हूँ। शादी के बाद जब तक वो जिंदा है मैं उसको लेकर दूर निकल जाऊँगा और तब तक सिर्फ उसके साथ रहँगा जब तक की वो जिंदा है। मैं उसका हर सपना पूरा करना चाहता हूँ, हर वो ख्वाब सच करना चाहता हूँ जो उसने देखा है...”

कौन सा ख्वाब...” निखिल ने पूछा तो आदित्य ने उसको तहजीब के सपने के बारे में बताया।

बीच हाउस... वो भी बड़ा सा विद आ प्राइवेट बीच... पैसा कहाँ से लाओगे इतना की जब तक वो जिंदा है तब तक उसकी हर बात पूरी करते रहो...”

आदित्य चुपचाप उठा और ड्रॉयर से कुछ पेपर्स, कुछ मैप्स निकलकर निखिल को थमा दिए जिन्हें निखिल एक एक करके खोलने और देखने लगा।

“तू साले पागल हो गया है... बैंक लूटेगा...” पेपर्स देखकर वो हैरत से चिल्लाया।

मेरे पास वक्त नहीं है यार। इतना पैसा इतनी जल्दी बस एक ही जगह से आ सकता है...” आदित्य शराब का ग्लास हाथ में लिए सोफे पर पसर गया।

बैंक लूटने की क्या जरूरत है बेवकूफ। तू एक बार मुझसे कहता। मैं कहीं ना कहीं से पैसा दिलवा देता तुझे। बहुत कनेक्सन्स हैं मेरे..” निखिल उसके साथ आकर बैठ गया।

*और वापिस कहाँ से करता... इतना बड़ा कर्ज़ ले लेता तो सारी जिंदगी चुका ना पाता...”

“तो सीधा रास्ता निकाला आपने.. की बैंक लूट लो ताकि कभी फिर पैसे वापिस ही ना करने पड़ें किसी को... तुझे

क्या लगता है की पोलीस वाले चुप बैठेगे...”

सारा प्लान सेट है। मैंने आदमी भी उठा लिए हैं साथ देने को। अब सोचने का वक़्त निकल गया है। कल बैंक लूटुंगा, उसके बाद सीधा तहजीब से शादी करने जाऊँगा और उसको लेकर गायब...” आदित्य ने कहा।

मैं तुझे ऐसा करने नहीं दूंगा...” निखिल भी जिद पर अड़ा था- “ऐसा करने के लिए तुझे मेरी लाश के ऊपर से जाना होगा। साले इस वक़्त तुझे अपने बाप के साथ होना चाहिए। संगठन ने पहली बार इतना बड़ा कुछ प्लान किया है। इस वक़्त हम ऐसी कोई हरकत अफोर्ड नहीं कर सकते जिससे पोलीस का ध्यान हमारी तरफ आए...”

बड़ा..” आदित्य ने चौंकते हुए निखिल की तरफ देखा- “क्या बड़ा प्लान हो रहा है...”

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***

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***

अगले दिन तहजीब उठी तो जैसे वो दिन उसकी जिंदगी का सबसे खुशनुमा दिन था। वो बीमार थी और कमजोर थी पर उस दिन कमजोरी तो सारी जैसे हवा हो गई थी। आदित्य ने उसको ठीक दो बजे सीधा चर्च पहुँचने को । कहा था। तहजीब तो चाहती थी की वो उसे घर पर मिले पर वो इसी बात पर अड़ा रहा की तैयार होकर चर्च ही पहुँच जाएगा।

उसने सुबह-सुबह अपनी एक दोस्त को फोन किया और ब्यूटी पार्लर पहुँची। सज-धज कर जब वो निकली तो बीमारी के बाद भी उसका हुस्न बस देखते ही बनता था। सड़क चलता हर आदमी पलट कर उसी को देख रहा था। आदित्य के कहे अनुसार उसने हिन्दुस्तानी दुल्हन वाले कपड़े नहीं पहने बल्कि एक क्रिस्चियन ब्राइड की तरह सफेद कपड़े पहने चर्च पहुँची।

आदित्य के कहने पर ही वो चर्च अकेली आई थी। अपनी दोस्त को उसने लड़ लड़कर घर भेज दिया था। घड़ी में दो बज चुके थे पर अब तक आदित्य का कहीं अता पता नहीं था।

तहजीब..." आवाज आई तो उसने सर उठाकर देखा। सामने फादर खड़े थे।

जी हाँ..” वो भी फौरन उठकर खड़ी हो गई- “आपको कैसे पता?

मुझे कल फोन आ गया था की आप लोग आज शादी के लिए आओगे। आदित्य नहीं आए अब तक..." फादर ने कहा।

“आदित्य... जी नहीं उनका नाम आदिल है...”

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“आदिल.." फादर ने आँखें सिकोड़ते हुए कहा- “मुझे तो फोन किसी आदित्य ने किया था?”

नहीं नहीं उनका नाम आदिल रहमान है.." तहजीब हँसते हुए बोली- “बस आते ही होंगे."

“गाड ब्लेस्स यू बोथ... मैं वहाँ अपने कमरे में हैं। आ जाए तो मुझे आवाज दे देना...”

नाम ही ठीक सुनाई नहीं देता, शादी कैसे कराओगे आप... मालूम पड़ा शादी करनी थी आदिल से, हो गई आदित्य से..” फादर के जाने के बाद तहजीब ने दिल ही दिल में सोचा और हँस पड़ी।

3:00 बज गये पर आदित्य नहीं आया।

फिर 6:00 बजे तक आदित्य का कोई निशान नहीं था।

जब रात के 9:00 बजे फादर चर्च से निकले तो तहजीब दुल्हन के लिबास में अब भी चर्च के बाहर बनी एक बेंच पर बैठी थी।

माइ चाइल्ड.” फादर उसके करीब आते हुए बोले- “तुम्हें अब घर चले जाना चाहिए। वो शायद कहीं काम से अटक गया होगा...”

जब तहजीब ने जवाब नहीं दिया और वैसे ही सर झुकाए बैठी रही तो उन्होंने उसके कंधे पर हाथ रखा- “बेटी...”

हाथ रखते ही उसका जिश्म एक ओर लुढ़का और बेंच से नीचे जा गिरा।

ओह लाई." फादर ने फौरन नीचे झुक कर उसका सर उठाया।

“मी चाइल्ड... आर यू ओके.."

कोई जवाब नहीं। नब्ज़ देखी तो लड़की मर चुकी थी।

अगले दिन के न्यूसपेपर की हेडलाइन्स कुछ इस तरह थी।

देश की बड़ी मजहबी जगहों पर हमले का प्लान नाकाम- पोलीस ने कल एक हिंदू संगठन नाम के गिरोह का परदा-फाश करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया। एक अंजान फोन काल के बताने पर जब पोलीस ने संगठन के अड्डे पर छापा मारा तो कई लोगों के साथ कुछ जरूरी कागजात बरामद किए हैं जिनसे साफ जाहिर है की संगठन मुंबई में हाजी अली और अजमेर में दरगाह शरिफ पर हमले का प्लान बना रहा था। गिरफ्तारी का सिलसिला अब भी जारी है और तकरीबन 75 लोग।

देवराज चतुर्वेदी की हत्या। लाश उनके घर से बरामद- शहर के नामी बिजनेसमैन की कल रात उन्हीं के घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। कहा जा रहा है की देवराज ही वो इंसान थे जिन्होंने हिंदू संगठन की अस्थपना की थी। यही वो संगठन है जिसका...

बैंक लूटने की कोशिश नाकाम- कल सवेरे बैंक आफ.. को लूटने की एक कोशिश को पोलीस ने नाकाम कर दिया। एनकाउंटर में 4 लोग मारे गये जिनमें देवराज चतुर्वेदी का बेटा आदित्य चतुर्वेदी भी शामिल है। माना जा रहा है की आदित्य ही वो शख्स था जिसने कल रात अपने पिता की हत्या की और फिर पोलीस को फोन पर हिंदू संगठन की सूचना दी। बैंक लूटने की कोशिश करते हुए आदित्य मारा तो गया पर पीछे कई सवाल छोड़ गया।

युवक की गोली मारकर हत्या- निखिल शर्मा नाम के एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसकी लाश आदित्य चतुर्वेदी के फ्लैट से बरामद हुई जो कल सवेरे बैंक लूटने की कोशिश में मारा गया। और दूसरे पेज पर एक छोटे से कालम में एक और खबर छपी थी।

चर्च के सामने से लड़की की लाश बरामद- कल शहर के स्ट्रीट चर्च के सामने से एक लड़की की लाश बरामद की गई। डाक्टर्स का मानना है की मौत की वजह ब्रेन ट्यूमर थी जिसने लड़की की जान ली। ये भी माना जा रहा है। की ये लड़की आदित्य चतुर्वेदी नाम के आदमी से शादी करने के लिए चर्च पहुँची थी।

और नीचे एक छोटा सा और कालम भी था- आज की शायरी इल्म वालों को इल्म दे मौला, अकल वालों को अकल दे मौला, धरम वालों को धरम दे मौला, और थोड़ी सी शर्म दे मौला..."

| समाप्त

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
14 दि अदर हाफ

भैय्या प्लीज..” मोहित ने अपने दोनों हाथ मेरे आगे जोड़ दिए।

वो मेरा छोटा भाई था। अपनी पूरी जिंदगी मैंने कभी उसे किसी चीज के लिए मना नहीं किया था पर जो वो अब माँग रहा था वो आगे चलकर एक काफी सीरियस बात बन सकती थी।

मोहित मेरी बात समझ। आई थिंक आई आम नाट द राइट गाइ फार इट। वाइ डोंट यू अस्क समवन एल्स...” मैंने उसे समझने की कोशिश की।

हूँ..” वो हाथ फैलता हुआ बोला।

आई इनो..” मैं भी उसी अंदाज में हाथ हिलाते हुए कहा- “मे बी सम फ्रेंड आफ युवर्ज...”

“आप ये चाहते हैं की मैं बाहर के किसी अंजान आदमी से पूछू... घर की बात को बाहर निकल जाने दें.."

देख मैं समझता हूँ की तुझ पर क्या गुजर रही है पर.."

नहीं भैय्या, आप नहीं जानते की मुझ पर क्या गुजर रही है...” वो फौरन मेरी बात काटकर बोला।

आल राइट फाइन...” मैंने वाइन से भरा ग्लास उठाया- “मैं नहीं जानता की तुझपर क्या गुजर रही है क्योंकी मैं इस सिचुयेशन में नहीं हैं। पर क्या तूने कभी ये सोचा है की ये कदम उठाने के बाद आगे चलकर लाइफ कितनी कांप्लिकेटेड होने वाली है..."

“अब कौन सा लाइफ आसान है भैय्या...” मोहित अपनी बात पर अड़ा रहा- “मेरी शादी को 5 साल हो चुके हैं।

अब तो घरवालों के साथ साथ पड़ोसियों और दोस्तों ने भी पूछना शुरू कर दिया है."

हाउ अबौट अडाप्शन...” मैंने एक आखिरी कोशिश की।

*

और दैट वॉट कांप्लिकेट थिंग्स..” बात तो उसकी सही थी।

सोचके देख..” मैंने फिर कोशिश की।

एक अंजान बच्चे को गोद लँ, पाल पोसकर बड़ा करूँ, अपने घर का हिस्सा बनाऊँ, ये सब आपको सही लग रहा है पर जो मैं कह रहा हूँ वो सही नहीं लग रहा... और वैसे भी, अगर मैं बच्चा गोद लेता हूँ तो ये तो जैसे सबके सामने उनके शक को सही साबित करने जैसा हो जाएगा...”

प्रिया इस बार में क्या कहती है...” प्रिया मोहित की बीवी थी।

उस बारे में अभी मैंने उससे कोई बात नहीं की है...” उसने कहा तो मैं हैरत से उसे देखने लगा।

तू इतना बड़ा कदम उठाने जा रहा है और तूने अपनी बीवी से एक बार बात तक करना जरूरी नहीं समझा..”

वो मान जाएगी भैय्या...” मोहित बोला- “सीधी साधी औरत है बेचारी...”

लाख सीधी सही पर क्या उसको तेरी बात बर्दाश्त होगी..” मैंने कहा।

“आप मेरी बात तो सुनिए। पूरी बात...” मोहित ने दूसरा पेग बनाया

सुना..."

प्रिया को मैं नहीं बताऊँगा के स्पर्म डोनर कौन है। उसे तो ये तक नहीं बताया जाएगा के स्पर्म डोनर भी है। कोई..” मोहित बोला

तो फिर...”

 
मैं उसे ये बताने वाला हूँ की कमी उसमें है, मुझमें नहीं...”

ये बात मुझ पर किसी बाम्ब की तरह गिरी- “दैटस नाट फेयर। वाइ वुड यू इ तट...” मैंने शक भरी निगाहों से मोहित को देखते हुए कहा।

इसलिए की अगर मैंने उसे ये बता दिया की मैं उसे एक बच्चा तक नहीं दे सकता तो फिर शायद सारी जिंदगी उससे नजर नहीं मिला पाऊँगा..."

पर क्या तूने ये सोचा है की इल्ज़ाम उसके सर पर डालने के बाद उसे कैसा लगेगा... क्या वो तुझसे सारी जिंदगी नजर मिला पाएगी...”

एक पहलू और भी है...” उसने मेरी बात का जवाब दिए बिना अपनी बात आगे कही।

*और वो क्या

है?"

वो ये की मैं सारी जिंदगी उसके साथ ये जानते हुए नहीं रह सकता की उसके बच्चों का बाप मैं नहीं हैं। झूठ बोलकर कम से कम मैं ये तो जता ही हूँगा की बच्चे हमारे ही हैं, हम दोनों के.."

तू क्या कह रहा है या क्या कर रहा है मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा मोहित। आई थिंक तू नशे में है और हमें बाद में बात करनी चाहिए.”

कम ओन भैय्या, मैंने मुश्किल से दो पेग लिए है, इतना भी नशे में नहीं हूँ की मुझे पता ना हो की मैं क्या बात कर रहा हूँ। और ये प्लान मैंने अभी यहाँ बैठे बैठे नहीं बनाया, पिछले एक महीने से इस बारे में सोच रहा हूँ। सब प्लानिंग हो चुकी है, सब सेट है, बस आपके हाँ बोलने की देर है." वो कुर्सी से उठकर नीचे मेरे पैरों के पास जमीन पर बैठ गया।

।।



वो मेर छोटा भाई था, माई बेबी ब्रदर जिसकी हर बात को मैंने हमेशा सर आँखों पर रखा था।

हम सिर्फ दो भाई ही थे। मोहित मुझसे डेढ़ साल छोटा था। हम दोनों ने सेम स्कूल और फिर सेम कालेज अटेंड किया और हमेशा एक दूसरे के बेस्ट फ्रेंड्स रहे। मैं उसके साथ हमेशा एक बड़े भाई की तरह कम, एक दोस्त की तरह ज्यादा पेश आया। वैसे भी हम दोनों में उमर का कोई खास फरक नहीं था।

हम दोनों के करीब होने की एक वजह शायद ये भी थी की हम दोनों की पसंद एकदम एक जैसी थी। जो चीज मुझे पसंद थी वही उसे भी पसंद था। स्पोर्ट्स, गेम्स, फ्रेंड्स, गर्ल्स, नावेल्स, कलर्स, फुड, हर मामले में हमारी पसंद एक ही थी। कालेज के बाद मैंने अपना एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया जो ऊपरवाले की मेहरबानी से ठीक ठाक चल पड़ा।

मोहित एक रिप्यूटेड कंपनी में मेकैनिकल इंजिनियर था। घर में पैसे की कोई कमी नहीं थी। बड़ा बंगलो, लंबी गाड़ी, महंगे शौक, ऊपरवाले ने दुनिया की हर खुशी हमें बख्शी थी। और फिर हमें प्यार भी हुआ था एक जैसी लड़कियों से ही। सुधा और प्रिया दोनों सगी बहन थी और शादी के बाद दोनों एक ही घर में यानी हम दोनों भाइयों के घर में आ गई। कुछ वक़्त तक सब ठीक चलता रहा पर फिर मोहित धीरे-धीरे परेशान सा नजर आने लगा। मैं उसे बचपन से जानता था, बहुत अच्छी तरह जानता था और सिर्फ एक नजर से बता सकता था के कोई बात उसे परेशान का रही थी।

मैंने कई बार पूछने की कोशिश की पर वो हर बार टाल जाता था। वो धीरे-धीरे बदल रहा था। हर वक्त परेशान सा नजर आता था, बात बात पर चिढ़ जाता था पर मेरी हजार कोशिशों के बाद भी मैं ये नहीं जान पाया था की उसे क्या बात परेशान कर रही थी। और ऐसा नहीं था की उसकी परेशानी को सिर्फ मैंने ही महसूस किया। हमारे माँ बाप और खुद मेरी बीवी सुधा ने भी मुझसे कई बार इस बारे में बात की थी की मोहित अब बदला बदला। और परेशान सा नजर आने लगा था।

मैंने उसके आफिस में मालूम करने की कोशिश की पर वहाँ सब ठीक था। वो अपने काम में सबसे माहिर था। और कंपनी में एक काफी ऊँची पोस्ट पर था यानी के वहाँ सब ठीक था। बात कुछ और थी। और एक बार फिर शराब के नशे में वो मेरे सामने टूट गया और रोते रोते मुझे सब बता दिया।

आई आम इंपोटेंट भाई...” वो रोते हुए बोला- “बाप बनने की काबलियत नहीं है मुझमें...”

“हाउ कैन दैट बी आई आम श्योर यू आर मिसटेकन...” मैंने उसे समझते हुए कहा।

 
नो आई आम नोट..” वो अपने चेहरे से आँसू पोंछता हुआ बोला- “कम से कम 10 अलग अलग क्लिनिक्स में टेस्ट करा चुका हैं सिर्फ इस उम्मीद में की शायद पहले क्लिनिक की रिपोर्ट गलत हो। पर नहीं, रिपोर्ट्स सबकी सेम हैं और सबकी सही है। मैं बाप नहीं बन सकता."

ओके फाइन बट इट्स नाट समथिंग दैटस गोइंग टू किल यू। इसमें परेशान होने की क्या बात है। इलाज करा सकते हैं...” मैंने उसे समझते हुए कहा।

आपको लगता है के ये ख्याल मुझे नहीं आया था..”

“ओके, और..."

“और ये की इलाज का भी कोई चान्स नहीं है। इट कैंट बी क्योई...”

दैटस इंपासिबल..” मैंने कहा- “आई आम श्योर वी कैन फाइंड आ गुड डाक्टर..”

मेरी बात सुनकर मोहित ऐसे हँसा जैसे अपना ही मजाक बना रहा हो- “दैटस ह्वाट आई थाट, फाइंड आ गुड डाक्टर..” हम दोनों एक बार में बैठे थे। उसने हाथ के इशारे से बारटेंडर को एक पेग और बनाने का इशारा किया

और यू नो वाट आई डिड, आई ट्राईड... आई ट्राईड तो फाइंड आ गुड डाक्टर। मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। भैय्या और पिछले दो साल से मैं यही कोशिश कर रहा हूँ, टु फाइंड आ गुड डाक्टर हू कैन क्योर मी और सेव मी द युमिलियेशन। बट यू नो वाट, आई कुड़ नाट फाइंड वन...”

मे बी नाट इन इंडिया बट...” मैंने कहना चाहा ही था की उसने फिर मेरी बात काट दी।

आपको क्या लगता है की पिछले दो साल में मैंने अमेरिका और यूरोप और जापान के इतने चक्कर किस सिलसिले में लगाए थे...”

हम्म्म्म

और..."

और नो... कॅट बी इन.. आई विल डाई इंपोटेंट.."

अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं था।

और तो और भैय्या जब डाक्टर्स से कुछ नहीं हुआ तो मैंने देसी हकीम और वैद्य ट्राई किए पर नो लक। और फिर मैं झाड़ फेंक करने वाले बाबा लोग के पास भी पहुँच गया पर साली किश्मत ही हो गान्दू तो क्या करे पांडु.”

मुझे समझ नहीं आ रहा था की क्या कहूँ।

वो हमेशा से ऐसा ही था। हर चीज उसे पर्फेक्ट चाहिए थी और अपने बारे में भी हर चीज पर्फेक्ट ही रखता था। कुछ भी ऐसा जो ठीक ना लगे बदल दिया जाता था। कोई ऐसी चीज जिसे गलत कहा जा सके उसे हटा दिया जाता था। कभी कोई ऐसी आदत नहीं रही जो लोग गलत कहें। वो हमेशा से मिस्टर पर्फेक्ट रहना चाहता था। दिखने में खूबसूरत, जिम में बनाया गया कसा हुआ शरीर, बचपन से स्कूल का टापर, फिर कालेज का टापर

और फिर बेस्ट मेकैनिकल इंजिनियर, वो था भी मिस्टर पर्फेक्ट। और फिर कुदरत ने ये मजाक किया। मिस्टर पर्फेक्ट में एक बहुत बड़ी कमी डाल दी जिसको वो चाहकर भी हटा नहीं पा रहा था। और ये बात उसे अंदर ही अंदर से खाए जा रही थी।

ये बिल्कुल ऐसा था जैसे किसी सफाई पसंद आदमी के घर के सफेद मार्बल पर काले रंग का बड़ा सा धब्बा लगा दिया जाए जिसे वो चाह कर भी साफ ना कर सके। फिर वही होगा जो हो रहा था। वो आदमी यही कोशिश करता रहेगा के मार्बल से धब्बा साफ कर दे और जब तक ऐसा करेगा नहीं सुकून से बैठेगा नहीं। और अगर धब्बा ना हटा सके तो मार्बल बदल देगा।

पर कोई क्या करे अगर मार्बल अपना शरीर ही हो तो।

क्या है तेरे दिमाग में...” मैंने पूछा।

प्लान ये है। मैं प्रिया को एक टेस्ट करने के लिए ले जाऊँगा और उसका रिजल्ट ये आएगा के कमी प्रिया में है। वो माँ नहीं बन सकती...” मोहित ने कहा।

आफ कोर्स, वो मिस्टर पर्फेक्ट था। कैसा अपनी बीवी के सामने ये बर्दाश्त करता की उसमें इतनी बड़ी कमी है।

फिर?” मैंने पूछा।

कमी ये बताई जाएगी के उसके यूटरस में प्राब्लम है और वो नेचुरली कन्सीव नहीं कर पा रही है। इलाज एक ही है, आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन। प्रिया को ये बताया जाएगा की मेरे स्पर्म और उसके एग्स को आर्टिफीशियली कन्सीव करके उसके अंदर प्लांट कर दिया जाएगा...”

जबकि स्पर्म किसी और का होगा...” मैंने बात पूरी कर दी।

एग्जैक्ट्ली । प्रिया सारी जिंदगी यही सोचेगी के बच्चे का बाप मैं ही हूँ। हमारा अपना बच्चा है। सब कुछ ठीक रहेगा। मेरी इज्ज़त घरवालों और अपनी बीवी, दोनों के सामने रह जाएगी...”

“हम्म्म्म

..” मैंने सोचते हुए कहा।

प्लीज भैय्या..." वो मेरे घुटनों के पास हाथ जोड़े बैठा था। उसे भला कैसा मना करता मैं।

 
दो हफ्ते बाद मैं एक दूसरे शहर के एक पेरेंटल क्लिनिक में बैठा था। मोहित ने ये क्लिनिक खुद चुना था। एक दूसरे शहर में जहाँ हमें कोई नहीं जानता था। उसके जिद के आगे मैंने घुटने टेक दिए थे।

अब होना ये था की मैंने यहाँ आकर पहले अपना स्पर्म देकर चले जाना था। फिर मोहित प्रिया के एग सँपल्स लेकर यहाँ आएगा, आर्टिफीशियली दोनों को कोन्सीव किया जाएगा और फिर उसके बाद प्रिया के यूटरस में प्लांट कर दिया जाएगा।

इस सारे प्लान को मोहित ने बखूबी प्लान किया था और अगर ठंडे दिमाग से सोचा जाए तो प्लान सही भी था। बच्चा अपने घर का ही होगा, बाहर का नहीं, उसकी अपनी बीवी और घर वालों के सामने इज्ज़त रह जाएगी, उसकी मैरीड लाइफ भी सही रहेगी यानी की विन विन सिचुयेशन पर इस विन विन में एक बहुत बड़ी बात को वो नजर अंदाज कर गया था। और वो बात ये थी की वो बच्चा उसका नहीं मेरा होगा। और फिर इसके बाद सारी जिंदगी मुझे अपना एक बच्चा उसके घर में देखना होगा और चुप रहना होगा।

कौन जाने आगे चल कर ये बात क्या बड़ी प्राब्लम का रूप ले ले।

मैं अभी सोच ही रहा था के एक नर्स ने मेरा नाम पुकारा।

मिस्टर शर्मा...”

एस..” मैं खड़ा होता हुआ बोला।

प्लीज कम इन..” उसने मुझे एक डा. के केबिन की तरफ अंदर जाने का इशारा किया।

कुछ ही देर बाद मैं एक डा. के सामने बैठा कुछ पेपर्स को उलट पुलट कर देख रहा था।

हाउ इस दिस ईवन पासिबल... इट कॅट बी। यू हव मेड आ मिस्टेक..”

“यू कन गेट आ सेकेंड ओपीनियन इफ यू वांट मिस्टर शर्मा बट आई आम श्योर द रिजल्ट विल बी द सेम..”

नो दिस इस नाट राइट। इट कॅट बी...” मैं अपनी बात पर अड़ा हुआ था।

आई आम सारी..” डा. ने फिर अफसोस भरा चेहरा बनाया।

कब से..."

“हमेशा से... यू वर नेवर केपबल आफ बीइंग आ फादर। आप कभी बाप बन ही नहीं सकते थे। हमने आपके दिए हुए स्पर्म सँपल को कई बार टेस्ट किया बट ये कमी आपके अंदर बाइ बर्थ है...”

डा. और भी जाने क्या क्या कह रहा था। वो मुझे ये बताना चाह रहा था की अपने भाई की तरह मैं भी कभी बाप बनने की काबिल ही नहीं था और इन सारी बातों में मुझे मुझे सिर्फ अपनी बीवी का चेहरा अपनी आँखों के

आगे घूमता हुआ दिखाई दे रहा था।

अपनी बीवी का चेहरा।

और अपने दो बच्चों का चेहरा।

***** समाप्त *****

 
* * * * * 15 नाजायज * * * * *

उस सुबह जब नीरज ने आँखें खोली तो सबसे पहली चीज जो उसके हाथ में आई वो उसका मोबाइल फोन था। उसने एक नजर अपनी साइड में सो रही अपनी बीवी पर डाली और बेड से उठकर खिड़की पर खड़ा हो गया।

“वेल..” उसने सेल में एक मेसेज टाइप किया और ईशिता को भेज दिया।

एक मिनट बाद ही ईशिता का जवाब आ गया।

“थे पिल्स दिदन्त वर्क। आई आम स्टिल प्रेग्नेंट..”

नीरज का दिल बैठ गया- “अरे यू शुवर...” उसने फिर मेसेज भेजा।

आफ कोर्स आई आम शुवर..” इंशिता का जवाब आया “ई आम स्टिल प्रेग्नेंट...”

नीरज को जैसे खड़े खड़े चक्कर आने लगे। वो वहीं साइड में रखी कुर्सी पर सहारा लेकर बैठ गया। उसकी सारी दुनिया जैसी इस बात पर टिकी हुई थी की वो गोलियां काम कर जाएंगी पर ऐसा हुआ नहीं था और अब उसको समझ में नहीं आ रहा था के क्या करे।

नीरज शहर के सबसे बड़े कालेज में लेक्चरर था। उमर 35 साल, कद 6 फुट, रंग गोरा, बिल्ट अथटिक। उसके पास वो सब कुछ था जो एक इंसान को अपनी जिंदगी में चाहिए हो सकता था। एक अच्छी नौकरी, एक सुंदर बीवी, एक 5 साल की बेटी, घर, गाड़ी, पैसा सब कुछ। वो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था जिससे की उसने 10 साल के अफेयर के बाद लोव मरेज की थी। वो और उसकी बीवी नेहा एक ही स्कूल में पढ़ते थे और साथसाथ आते जाते थे। वहीं दोनों की बचपन की दोस्ती प्यार में बदली, प्यार 10 साल तक परवान चढ़ा और फिर दोनों ने शादी कर ली।

नीरज की पूरी जिंदगी में नेहा की सिवा और कोई दूसरी लड़की नहीं आई थी और ना ही नीरज को किसी और लड़की की जरूरत पड़ी। नेहा एक बहुत खूबसूरत औरत थी। नेहा वो सब कुछ थी जो एक मर्द को अपनी बीवी में चाहिए हो सकता है। दिन में घर में एक ख्याल रखने वाली माँ, बात करने लिए एक बहुत अच्छी दोस्त और रात को बिस्तर पर पूरी रंडी। यही तो चाहता है हर मर्द एक औरत से और ये सब कुछ नीरज को नेहा से हासिल हो रहा था। वो उसकी लाइफ में पहली लड़की थी और आखिरी भी, ऐसा नीरज ने मान लिया था।

और फिर उसकी पूरी लाइफ को उत्पल पुथल करने के लिए आई ईशिता। वो 1स्ट एअर की स्टूडेंट थी और कालेज का शायद ही कोई लड़का होगा जो उसके पीछे नहीं था। पर वो आकर गिरी नीरज की झोली में, कैसे ये उसे खुद को कभी समझ नहीं आया।

ऐसा नहीं था की वो इस लायक नहीं था, पर वो खुद कैसे ईशिता के चक्कर में पड़ गया, ये उसको समझ नहीं आया।

जब ईशिता ने उसकी तरफ अपना इंटेरेस्ट दिखाया तो ये नीरज के लिए कोई नयी बात नहीं था। वो शकल सूरत से एक बहुत हैंडसम आदमी था और अक्सर उसकी कई स्टूडेंट्स उसको लाइन मारती थी। कुछ उसके प्यार में पड़ जाती थी, कुछ बस उसके साथ घूमना चाहती थी क्योंकी वो बहुत हैंडसम आदमी था और कुछ उसके साथ सिर्फ एग्ज़म में अच्छे नंबर्स हासिल करने के लिए सोना चाहती थी। पर इन सबको नीरज ने कभी कोई लिफ्ट नहीं दी।

और ईशिता के आने के बाद सब बदल गया। वो शहर के एक बहुत बड़े अमीर बाप की औलाद थी पर उसके हाव भाव से ऐसा बिल्कुल नहीं लगता था। वो एक सीधी सादी सी, खामोश सी रहने वाली लड़की थी। ना ज्यादा किसी से बात करती थी, ना ज्यादा किसी के मुँह लगती थी। वो दिन नीरज को आज भी अच्छी तरह से याद था जब उसके और ईशिता के रिश्ते की शुरआत हुई थी। कालेज खतम हो चुका था और सिर्फ कुछ प्रोफेसर्स ही अपने आफिसेस में बच गये थे। नीरज भी अपने आफिस में बैठा काम निपटा रहा था की दरवाजा खुला और ईशिता अंदर आ गई।

ईशिता...” नीरज हैरत से उसको देखता हुआ बोला- “व्हाट आर यू स्टिल इयिंग हियर...”

“नथिंग..” उसने गोल मोल सा जवाब दिया और चलती हुई नीरज के करीब आई- “ई वांटेड तो टाक तो यू...”

वो नीरज के बिल्कुल करीब आकर खड़ी हो गई थी।

“य शुवर...” नीरज भी अपना पेन टेबल पर रखकर उसकी तरफ घूमते हुए बोला- “अबौट वाट.."

और इसके जवाब में उसके करीब ही खड़ी ईशिता एकदम नजदीक आई और झुक कर चेयर पर बैठे हुए नीरज के होंठो को चूम लिया।

“वोओओओ ओ ओ...” नीरज फौरन उठ खड़ा हुआ और ईशिता को दूर करते हुए बोला- “व्हाट आर यू इयिंग..”

वाट..” ईशिता हैरत से उसकी तरफ देखती हुई बोली- “आई लव यू आंड आई वांट यू..”

और उसके बाद अगले दो घंटे तक नीरज उसको यही समझता रहा की ऐसा नहीं हो सकता और की वो शादीशुदा है। उस वक्त तो ईशिता समझ कर वहाँ से चली गई और उस एक किस ने जाने ऐसा क्या किया की फिर नीरज खुद उसकी तरफ झुकता चला गया। वो खुद ईशिता को अपना इंटेरेस्ट दिखाने लगा, खुद धीरे-धीरे उसके करीब आया और जब उसने पहली बार ईशिता को चोदा था तो वो जानता था की वो बिस्तर पर पहली बार । किसी मर्द के साथ आई थी।

 
ईशिता को बिस्तर तक लाने में नीरज को खासी मेहनत करनी पड़ी थी। और शायद यही वजह थी की वो और उसकी तरफ खींचा चला गया। नेहा बिस्तर पर जैसे एक भूखी शेरनी थी जो नीरज के साथ बराबर की जंग लड़ती थी पर ईशिता सबमिसिव टाइप थी। वो उनमें से थी जो बिस्तर पर शर्माती हैं, मर्द के पहेल करने का इंतेजार करती हैं, मर्द को ही बिस्तर पर सब कुछ करने देती हैं पर वो जो भी करना चाहता है, उसके लिए मना भी नहीं करती।

नेहा को भी नीरज शादी से बहुत पहले कालेज में ही चोद चुका था पर वो उसकी कम और नेहा की मर्जी से ज्यादा हुआ था। बहला फुसलाकर एक लड़की को बिस्तर तक लाने का खेल उसके लिए नया था और ईशिता के साथ ये खेल खेलते हुए उसको बहुत मजा आया था।

और यही वो लम्हा था जब की उसने वो भारी भूलकर दी थी।

ईशिता बिस्तर पर आधी नंगी पड़ी थी। नीरज उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी बड़ी बड़ी छातियां चूस रहा था।

कम ओन... करते हैं ना...” वो ईशिता के होंठ चूसते हुए बोला। नीचे से उसने अपने लण्ड से एक हल्का सा धक्का चूत पर लगाया। नीरज पूरी तरह नंगा था जबकि ईशिता ने अपनी कमीज तो उतार दी थी पर सलवार

अब तक पहन रखी थी।

नीरज मुझे डर लगता है...” ईशिता बोली।

इरने की क्या बात है। मैं आराम से करूँगा...” वो धीरे-धीरे अपनी कमर हिला रहा था और अपना लण्ड सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रगड़ रहा था।

“मैं जानती हूँ.. ये दाढ़ी है.. ईशिता बोली।

नहीं, ये दाढ़ी नहीं है.. तुमको पसंद आयेगा..” वो अपने से तकरीबन आधी उमर की लड़की को समझता हुआ बोला।

मुझे शर्म आती है...” ईशिता बोली।

और यहाँ नीरज का पारा चढ़ गया। वो उसके ऊपर से हटकर बिस्तर पर साइड में लेट गया- “अगर शर्म आती है। तो यहाँ एक होटेल के कमरे में मेरे साथ आधी नंगी बिस्तर पे क्या कर रही हो...” उसने गुस्से से कहा।

ईशिता घूम कर उसकी तरफ अपना चेहरा करते हुए बोली- “आई आम सारी नीरू। इट्स जस्ट तट की मुझे शादी से पहले ये ठीक नहीं लगता.."

हम अब करें या शादी के बाद करें क्या फरक पड़ता है ईशिता..." और यहाँ नीरज गलती कर गया।

विल यू मैरी मी..." ईशिता बोली।

एस..."

 
बट हाउ.. यू आरआलरेडी मरीड। वाट अबौट युवर वाइफ..”

“मैं उसको डाइवोर्स दे दूंगा...” चूत में लण्ड घुसाने के लिए मरा जा रहा नीरज उस वक़्त बिना सोचे समझे बोल गया- “ई वाना मरी यू..”

उसके बाद उसने अगले 3 घंटे में इशिता को 3 बार चोदा। नीरज को लगा था की वो पहले से ही चुदी हुई होगी बस उसके साथ थोड़े नखरे कर रही है पर 3 घंटे बाद उसको यकीन हो चुका था के ईशिता ने आज पहली बार किसी मर्द को अपने आपको सौंपा है।

अगले एक साल तक नीरज ने जी भरकर ईशिता को भोगा। वो तकरीबन रोज ही उसको चोदता था। ईशिता सबमिसिव टाइप थी इसलिए खुद तो किसी चीज की पहल नहीं करती थी पर जो कुछ भी नीरज करना चाहता उसके लिए कभी मना भी नहीं करती थी।

नीरज ने उसके साथ वो सब कुछ किया जो वो नेहा से कभी कह भी नहीं पाया। नेहा कभी उसको गाण्ड मारने नहीं देती थी। ईशिता की वो चूत और गाण्ड, दोनों मारता था।

नेहा कभी अपने मुँह में नहीं निकालने देती थी। ईशिता के साथ वो उसके मुँह में, चेहरे पर, जहाँ चाहे झड़ जाता था और ईशिता कभी मना नहीं करती थी। जब उसने ईशिता को स्वैलो करने को कहा तो उसने वो भी कर लिया।

उसके दिल में एक डिजाइर थी की लड़की की चूत से निकाल के उसके मुँह में लण्ड डाले पर नेहा से वो कभी पूछ नहीं पाया था। ये काम उसने ईशिता के साथ किया।

अपने से आधी उमर की उस बच्ची के साथ उसने एक साल तक बंद कमरों में वासना का हर वो खेल खेला जो वो खेलना चाहता था। जब भी ना नुकूर करती, उसे शादी की पट्टी पढ़ा देता और उसके प्यार में वो उसको मना भी नहीं करती थी। नीरज को लगा था की सब ऐसे ही चलता रहेगा और एक दिन ईशिता कालेज पास करके चली जाएगी और ये सब एक भूला किस्सा हो जाएगा। पर जब एक दिन ईशिता ने उसको आकर बताया की वो प्रेग्नेंट है तो नीरज के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई।

प्रेग्नेन्सी कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी। नीरज ये बात संभाल सकता था पर मुशीबत बन गई ईशिता की बच्चा ना गिरने की जिद। वो चाहती थी की नीरज अपनी बीवी को डाइवोर्स दे जो की वो एक साल से कह रहा था और ईशिता से शादी करे। वो चाहती थी की वो ईशिता के घर आए, उसके पिता से मिले, वो दोनों फेरे लें और अपना पहला बच्चा इस दुनिया में लाएं। नीरज जनता था की अगर उसने प्रेग्नेन्सी वाली बात किसी को कह दी तो वो खतम हो जाएगा। उसकी बीवी उसे छोड़ देगी, नौकरी जाएगी और सबसे बड़ी बात, ईशिता का अमीर बाप उसको जिंदा नहीं रहने देगा। वो शहर

की एक जानी मानी हस्ती था।

और फिर वो ईशिता को इस बात के लिए मनाता रहा की अबार्षन हो जाए। जब उसने ये कहा की प्रेग्नेन्सी वाली बात सुनकर शायद इशिता के पिता शादी ना करने दें तो वो मान गई। उसने नीरज की इस बात पर यकीन कर लिया की कौन बाप अपनी बेटी का हाथ ऐसे आदमी के हाथ में देगा जो शादीशुदा होते हुए भी दूसरी लड़की के साथ सो रहा था।

नीरज ने एक झूठा प्लान बताया की पहले वो अपनी बीवी को डाइवोर्स देगा फिर ईशिता के पिता से मिलेगा ताकि उनकी शादी में कोई रुकावट ना आए। वो बेचारी भोली लड़की उसकी बात मानकर अबार्षन के लिए राजी हो गई पर तब तक देर हो चुकी थी।

डाक्टर ने अबार्षन के लिए मना कर दिया। ईशिता को मनाने में बहुत वक़्त निकल गया था। वो अबार्षन की। स्टेज से आगे निकल चुकी थी।

एक आखिरी रास्ता वो गोलियां थी जो नीरज ने कल रात उसको दी थी पर अब जबकि वो गोलियां भी फेल हो गई तो उसको अपनी पूरी जिंदगी बिखरती हुई नजर आ रही थी।

“ओह गोद..” उसने अपना सर पकड़ते हुए सोचा- “काश वो गोलियां जहर की होती तो मनहूस साली मर ही

जाती..." और अचानक उसके दिल में एक ख्याल आया।

नहीं नहीं..” नीरज ने सोचा- “ये गलत है। ऐसा नहीं कर सकता मैं...”

उस दिन वो तैयार होकर कालेज चला तो गया पर दिमाग में डर के सिवा कुछ नहीं था। सिवाय इसके के ईशिता बच्चे को पैदा करे, उनके पास कोई चारा नहीं था। वो कालेज के एक कारिडर में ईशिता से मिला। उन्होंने ऐसे दिखाया की एक स्टूडेंट अपने प्रोफेसर से स्टडीस डिसकस कर रही है पर असल में वहाँ खड़े वो धीरे-धीरे कुछ और ही बात कर रहे थे।

ईशिता के पेट पर अब हल्का हल्का उठान आना शुरू हो गया था। किसी अंजान को अभी भी ये पता नहीं लग सकता था की वो प्रेग्नेंट है पर नीरज ये बात जानता था। कुछ हफ्ते और फिर पूरी दुनिया को दिखाई देगा की ये प्रेग्नेंट है, नीरज ने सोचा।

अब हमारे पास कोई चारा नहीं है। अपनी वाइफ को डाइवोर्स दो जल्दी प्लीज। अब हम ये बात ज्यादा नहीं छुपा सकते..” ईशिता कह रही थी।

“तूने दो महीने पहले मेरी बात मान ली होती तो ऐसा हुआ ही ना होता...” नीरज सोच रहा था। उसको बहुत गुस्सा आ रहा था।

“देखो या तो तुम कुछ करो नहीं तो मुझे कुछ करना पड़ेगा। भगवान की कसम कुछ कर बैठेंगी मैं...” ईशिता ने रोती हुई सी आवाज में कहा और वहाँ से चली गई।

थोड़ी देर बाद अपने आफिस में बैठे हुए नीरज को और कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।

“इसमें मेरी कोई गलती नहीं है.” वो अपने आपसे कह रहा था- “वो खुद मेरे पास आई थी, खुद ही मेरे गले पड़ी

और खुद ही अबार्षन ना करने की जिद। सारी गलती उसकी है और उसकी गलती की कीमत मैं और मेरा परिवार नहीं भरेगा। गलती की है तो भुगते, मरे...”

जब नीरज ने अपना चेहरा आईने में देखा तो खुद को ही पहचान नहीं पाया। कुछ वक्त पहले वो एक कालेज का एक शरीफ प्रोफेसर था पर एक साल में कितना बदल गया था। अपनी बीवी को धोखा, अपने प्रोफेशन को धोखा,

अपनी एक स्टूडेंट को धोखा और अब मर्डर का प्लान। कितना बदल गया था वो।

 
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