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आदित्य फिर तहजीब के पास आया।
क्या कह रही है.. शादी करना चाहती है तुमसे..” तहजीब फिर चहकी।
शट उप... कह रही है की डाक्टर को 15-20 मिनट और लगेंगे। तुम बैठो मैं जरा बाथरूम होकर आता हूँ..”
कुछ देर बाद वो डाक्टर के साथ अंदर अकेला बैठा था।
“ये कैसे हो सकता है... इट्स इंपासिबल...”
आप चाहें सर तो किसी और डाक्टर से कन्सल्ट कर सकते हैं पर मुझे यकीन है की सबका जवाब यही होगा। आपकी बीवी के सर पर कुछ अरसा पहले चोट लगी थी जिसकी तरफ इन्होंने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे उनके दिमाग में उस जगह एक ब्लड क्लाट जमा हो गया है जो अब इलाज की हद के बाहर जा चुका है। यही वजह है।
की उनके सर में दर्द रहता है, चक्कर आते हैं, बेहोश हो जाती हैं..." डाक्टर ने कहा।
उस रात एक आदमी ने मेरे सर पर किसी चीज से वार किया था जिसके बाद मैं बेहोश हो गई थी। होश आया तो मेरा घर और मेरे माँ, बाप, भाई, सबको जला दिया गया था। तभी से मेरे सर में हल्की हल्की सी चुभन रहती थी..” आदित्य को तहजीब की कही बात भी याद आ रही थी।
कितना वक्त...” उसने डाक्टर से पूछा।
ऐसे केसेस में शर्तिया तौर कुछ कहा नहीं जा सकता। होने को आज कुछ हो जाए पर ज्यादा से ज्यादा 6 महीने...”
*****
*****
क्या आप सब मेरी बात से सहमति रखते हैं...” देवराज चतुर्वेदी ने हाल में मौजूद तकरीबन 100 लोगों से पूछा।
हाँ.. हम सब सहमत हैं...” जवाब में आवाज आई।
|
||
क्या तू भी अपने बाप की बात से सहमत है आदित्य..." हाल में खड़े निखिल ने अपने साथ खड़े आदित्य से।
पुछा।
आदित्य ने कोई जवाब नहीं दिया।
“सालों तक, सालों तक हमने इनका बोझ सहा है, इनके साथ कंधे से कंधा मिलाने की कोशिश की है पर अब
और नहीं। अब हद हो चुकी है.. देवराज की आवाज फिर पूँजी।।
हद हो चुकी है...” पीछे पीछे सामने खड़े लोगों ने दोहराया।
ये सब हजार साल पहले हमारे देश में आए, हमने दिल से इनका स्वागत किया। अपने यहाँ रहने की जगह दी, खाना दिया, जल दिया, अपनी धरती दी पर बदले में हमें क्या मिला... धोखा...”
“हाँ... हाँ धोखा..” लोगों ने एक जुट कहा।
हाँ.. धोखा ही है ये। इन लोगों को क्या हक बनता था की हमारी भूमि के दो टुकड़े करते... उस भूमि पर जो इनके पूर्वजों की थी ही नहीं... जहाँ ये सब अतिथि के रूप में आए थे... धोखा है ये की इन्होने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। जिस भूमि पर रहे उसी के दो टुकड़े कर डाले। एक देश को दो हिस्सो में बाँट दिया..”
धोखा है ये...” भीड़ फिर चिल्लाई।
पर हमने इनकी बात का सम्मान रखा। इन्होंने अलग देश चाहा तो हमने खुले दिल से वो भी दिया पर फिर उसके बाद क्या? जो दिया उसमें संतुष्ट ना होकर और की उम्मीद... बार बार हमारे देश पर हमला...”
धोखा...” फिर से आवाज गूंजी।
“हमने फिर भी बार बार इन लोगों को माफ किया। फिर खुले दिल से भाई-चारे की बात की पर फिर भी नहीं मानते ये... जानते हैं क्यों?"
क्यों?” फिर आवाज गूंजी।
क्योंकी धोखा इनकी जात में शामिल है। पर अब और नहीं। अब हिन्दुस्तान वो बनेगा जो की उसका नाम है। एक हिंदू राष्ट्र...”
भारत माता की जै...” भीड़ एकजुट चिल्लाई।
अगर यहाँ रहना है तो हिंदू बनकर रहना होगा वरना कोई हक नहीं बनता उन्हें यहाँ रहने का। हम फिर से इस देश को उसका गौरव लौटा कर देंगे। अब वक्त आ गया है बदले का। हर उस आदमी को इस देश से निकाल देने का जो हिंदुत्व का पालन नहीं करता। हर उस चीज को मिटा देने का जो हिंदू धरम के खिलाफ है। क्या
आप सहमत हैं...”
“हाँ..” भीड़ चिल्लाई।
नहीं...” लोगों के बीच से एक और आवाज उठी। लोगों ने हैरानी से आवाज की तरफ देखना शुरू कर दिया।
कौन बोला...” देवराज जोर से चिल्लाया।
“मैं.. आदित्य चतुर्वेदी...” भीड़ के बीच से आवाज आई। लोग एक तरफ होने लगे और देवराज और आदित्य के बीच से हट गये।
तुम कुछ कहना चाहते हो आदित्य.."
एक सवाल पूछना चाहता हूँ.” साथ खड़ा निखिल आदित्य को चुप करने की कोशिश कर रहा था।
पूछो...”
आप इस देश को हिंदू राष्ट्रा बनाना चाहते हैं। यहाँ रहने वाले सबको हिंदू बनाना चाहते हैं। तो ये बताइए चतुर्वेदी साहब के अगर एक खान अपना धरम छोड़कर हिंदू बनता है तो जात क्या देंगे आप उसको... शर्मा, पांडे या दूबे बनाएंगे या कोई हरिजन बनाएंगे..." आदित्य ने सवाल किया।
कहना क्या चाह रहे हो.. कैसा वाहियात सवाल है ये...”
नहीं बिल्कुल वाहियात नहीं है..” आदित्य अपनी बात पर डटा रहा- “अगर कोई दूसरे धरम का आदमी अपना धरम छोड़कर हिंदुत्व में आता है तो जात तो उसको देनी पड़ेगी ना। अब अगर किसी दूसरे धरम के ऊँची जात के आदमी को आपं हिंदू में नीची जात वाला बनाते हैं तो उसके साथ नाइंसाफी होगी। और अगर आप उसको । कोई ऊँची जात देते हैं तो हमारे हरिजन भाइयों के साथ नाइंसाफी होगी क्योंकी ऊँची जात पर पहले हक इनका बनता है जो सारी जिंदगी से हिंदू रहे हैं। ना की उसका जो अभी अभी हिंदू बना है...”
क्या कह रही है.. शादी करना चाहती है तुमसे..” तहजीब फिर चहकी।
शट उप... कह रही है की डाक्टर को 15-20 मिनट और लगेंगे। तुम बैठो मैं जरा बाथरूम होकर आता हूँ..”
कुछ देर बाद वो डाक्टर के साथ अंदर अकेला बैठा था।
“ये कैसे हो सकता है... इट्स इंपासिबल...”
आप चाहें सर तो किसी और डाक्टर से कन्सल्ट कर सकते हैं पर मुझे यकीन है की सबका जवाब यही होगा। आपकी बीवी के सर पर कुछ अरसा पहले चोट लगी थी जिसकी तरफ इन्होंने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे उनके दिमाग में उस जगह एक ब्लड क्लाट जमा हो गया है जो अब इलाज की हद के बाहर जा चुका है। यही वजह है।
की उनके सर में दर्द रहता है, चक्कर आते हैं, बेहोश हो जाती हैं..." डाक्टर ने कहा।
उस रात एक आदमी ने मेरे सर पर किसी चीज से वार किया था जिसके बाद मैं बेहोश हो गई थी। होश आया तो मेरा घर और मेरे माँ, बाप, भाई, सबको जला दिया गया था। तभी से मेरे सर में हल्की हल्की सी चुभन रहती थी..” आदित्य को तहजीब की कही बात भी याद आ रही थी।
कितना वक्त...” उसने डाक्टर से पूछा।
ऐसे केसेस में शर्तिया तौर कुछ कहा नहीं जा सकता। होने को आज कुछ हो जाए पर ज्यादा से ज्यादा 6 महीने...”
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क्या आप सब मेरी बात से सहमति रखते हैं...” देवराज चतुर्वेदी ने हाल में मौजूद तकरीबन 100 लोगों से पूछा।
हाँ.. हम सब सहमत हैं...” जवाब में आवाज आई।
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क्या तू भी अपने बाप की बात से सहमत है आदित्य..." हाल में खड़े निखिल ने अपने साथ खड़े आदित्य से।
पुछा।
आदित्य ने कोई जवाब नहीं दिया।
“सालों तक, सालों तक हमने इनका बोझ सहा है, इनके साथ कंधे से कंधा मिलाने की कोशिश की है पर अब
और नहीं। अब हद हो चुकी है.. देवराज की आवाज फिर पूँजी।।
हद हो चुकी है...” पीछे पीछे सामने खड़े लोगों ने दोहराया।
ये सब हजार साल पहले हमारे देश में आए, हमने दिल से इनका स्वागत किया। अपने यहाँ रहने की जगह दी, खाना दिया, जल दिया, अपनी धरती दी पर बदले में हमें क्या मिला... धोखा...”
“हाँ... हाँ धोखा..” लोगों ने एक जुट कहा।
हाँ.. धोखा ही है ये। इन लोगों को क्या हक बनता था की हमारी भूमि के दो टुकड़े करते... उस भूमि पर जो इनके पूर्वजों की थी ही नहीं... जहाँ ये सब अतिथि के रूप में आए थे... धोखा है ये की इन्होने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। जिस भूमि पर रहे उसी के दो टुकड़े कर डाले। एक देश को दो हिस्सो में बाँट दिया..”
धोखा है ये...” भीड़ फिर चिल्लाई।
पर हमने इनकी बात का सम्मान रखा। इन्होंने अलग देश चाहा तो हमने खुले दिल से वो भी दिया पर फिर उसके बाद क्या? जो दिया उसमें संतुष्ट ना होकर और की उम्मीद... बार बार हमारे देश पर हमला...”
धोखा...” फिर से आवाज गूंजी।
“हमने फिर भी बार बार इन लोगों को माफ किया। फिर खुले दिल से भाई-चारे की बात की पर फिर भी नहीं मानते ये... जानते हैं क्यों?"
क्यों?” फिर आवाज गूंजी।
क्योंकी धोखा इनकी जात में शामिल है। पर अब और नहीं। अब हिन्दुस्तान वो बनेगा जो की उसका नाम है। एक हिंदू राष्ट्र...”
भारत माता की जै...” भीड़ एकजुट चिल्लाई।
अगर यहाँ रहना है तो हिंदू बनकर रहना होगा वरना कोई हक नहीं बनता उन्हें यहाँ रहने का। हम फिर से इस देश को उसका गौरव लौटा कर देंगे। अब वक्त आ गया है बदले का। हर उस आदमी को इस देश से निकाल देने का जो हिंदुत्व का पालन नहीं करता। हर उस चीज को मिटा देने का जो हिंदू धरम के खिलाफ है। क्या
आप सहमत हैं...”
“हाँ..” भीड़ चिल्लाई।
नहीं...” लोगों के बीच से एक और आवाज उठी। लोगों ने हैरानी से आवाज की तरफ देखना शुरू कर दिया।
कौन बोला...” देवराज जोर से चिल्लाया।
“मैं.. आदित्य चतुर्वेदी...” भीड़ के बीच से आवाज आई। लोग एक तरफ होने लगे और देवराज और आदित्य के बीच से हट गये।
तुम कुछ कहना चाहते हो आदित्य.."
एक सवाल पूछना चाहता हूँ.” साथ खड़ा निखिल आदित्य को चुप करने की कोशिश कर रहा था।
पूछो...”
आप इस देश को हिंदू राष्ट्रा बनाना चाहते हैं। यहाँ रहने वाले सबको हिंदू बनाना चाहते हैं। तो ये बताइए चतुर्वेदी साहब के अगर एक खान अपना धरम छोड़कर हिंदू बनता है तो जात क्या देंगे आप उसको... शर्मा, पांडे या दूबे बनाएंगे या कोई हरिजन बनाएंगे..." आदित्य ने सवाल किया।
कहना क्या चाह रहे हो.. कैसा वाहियात सवाल है ये...”
नहीं बिल्कुल वाहियात नहीं है..” आदित्य अपनी बात पर डटा रहा- “अगर कोई दूसरे धरम का आदमी अपना धरम छोड़कर हिंदुत्व में आता है तो जात तो उसको देनी पड़ेगी ना। अब अगर किसी दूसरे धरम के ऊँची जात के आदमी को आपं हिंदू में नीची जात वाला बनाते हैं तो उसके साथ नाइंसाफी होगी। और अगर आप उसको । कोई ऊँची जात देते हैं तो हमारे हरिजन भाइयों के साथ नाइंसाफी होगी क्योंकी ऊँची जात पर पहले हक इनका बनता है जो सारी जिंदगी से हिंदू रहे हैं। ना की उसका जो अभी अभी हिंदू बना है...”