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प्लान उसने साफ साफ बना लिया था और प्लान का हिंट भी ईशिता उसको खुद दे गई थी। अगर उसका मर्डर किया जाए तो बेकार इन्वेस्टिगेशन हो जाएगी। सबको पता चल जाएगा की वो प्रेग्नेंट थी और फिर उसके खुद
के पकड़े जाने के चान्सेस भी थे।
पर अगर ईशिता आत्महत्या कर ले तो... उसने खुद ही कहा था की वो कुछ कर बैठेगी। नीरज को सिर्फ इतना करना था की उस बेवकूफ लड़की को इस हद तक उकसा देना था की वो सच में कुछ कर बैठे। नीरज को सिर्फ उसे आत्महत्या करने का रास्ता दिखना था। इस अंदाज में की ईशिता को यही लगे की उन दोनों के आस अब
कोई चारा नहीं है। जैसा की हिन्दी मूवीस में होता है।
हम जीकर नहीं मिल सकते, अपने प्यार को पाने के लिए हमें मरना पड़ेगा।
जीकर हम मिल नहीं पाए तो क्या, मरकर एक दूसरे के हो जाएंगे।
सिर्फ उस साली बेवकूफ को इस बात पर राजी कर लेना है और स्यूयिसाइड का सामान उसे दे देना है, नीरज ने
सोचा।
नीरज को अब दो काम करने थे और दोनों ही उसको बहुत आसान लग रहे थे। पहला था ईशिता को आत्महत्या के लिए उकसाना। इस बात पर राजी करना की वो दोनों एक साथ सुसाइड कर लें, यही आखिरी रास्ता उनके पास बचा था।
दूसरा, उसको जहर लाकर देना। बहुत आसान काम था। वो एक केमिस्ट्री प्रोफेसर था और ऐसे केमिकल्स की लंबी लिस्ट उसके पास थी जो जहर का काम करते थे।
तीसरा था आत्महत्या नोट, जो की इस अंदाज में लिखवाना था की ईशिता ने ये काम इसलिए किया की वो अपने किए पर शर्मिंदा है और अपने बाप से रिक्वेस्ट कर रही है की उसकी मौत के बाद उसकी प्रेग्नेन्सी की। बात को उछाला ना जाए क्योंकी इससे वो खुद भी मौत के बाद बदनाम होगी और अपने परिवार को भी बदनाम करेगी। अगर ऐसा हो गया तो उसका रसूख वाला बाप कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं होने देगा। आत्महत्या को नार्मल मौत बना दिया जाएगा और कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं होगी।
और नीरज की लाइफ फिर नार्मल हो जाएगी।
यही सब सोचता वो अपने आफिस से निकला और केमिस्ट्री लैब पहुँचा।
एक रैक पर बहुत सारी केमिकल्स की बाटल्स रखी हुई थी पर नीरज जानता था की उसको क्या चाहिए। उसने एक बोतल उठाई और लेबल पढ़ा।
वाइट आरसेनिक (एसओ) ** जहर
थोड़ा सा पाउडर उसने बोतल से निकालकर एक कागज में डालकर पूड़िया सी बना ली और अपनी जेब में रख लिया। वो जनता था की जितना जहर वो ले जा रहा है, इतना एक ईशिता को क्या, 20 लोगों की जान लेने के लिए काफी है। पर वो सारा का सारा ही ईशिता को खिलाने वाला था, जस्ट तो बे ओन द सेफर साइड।
जस्ट तो मेक शुवर की साली रांड जिंदा ना बच जाए, उसने दिल ही दिल में सोचा।
कहीं दिल के किसी कोने में उसको ईशिता पर तरस भी आ रहा था। आखिर वो बेचारी एक कालेज जाने वाली लड़की थी और हर वही अरमान था जो एक आम लड़की के दिल में होता है। कालेज में किसी हैंडसम लड़के से मिले और प्यार हो जाए, फिर उनकी शादी हो, बच्चे हों। उस बेचारी ने गलती ये की की प्यार गलत इंसान से
कर बैठी और उसकी बहुत भारी कीमत चुकाने वाली थी।
नहीं..” नीरज ने फौरन अपने ख्यालों का रुख बदला और अपने दिल को मजबूत किया- “ये सब उसकी गलती थी। पहले जबरदस्ती गले पड़ी और फिर अबार्षन नहीं कराया। गलती उसकी है, गलती की कीमत भी वो ही भरेगी...”
जहर उसके पास आ चुका था। अब ईशिता को आत्महत्या के लिए मनाना है।
बेवकूफ है साली...” उसने दिल में सोचा “बहुत आसानी से मान जाएगी..”
जैसे वो खुद अपने दिल को तसल्ली दे रहा था की ये काम भी आसानी से हो जाएगा। कालेज में काम निपटाकर वो अपने घर के लिए निकला। रास्ते में एक केमिस्ट की दुकान पर रुक कर कुछ खाली जेलेटिन कप्सूल्स ले । लिए जिनमें की जहर भरकर उसने ईशिता को देना था।
पर तकदीर को शायद कुछ और ही मंजूर था।
के पकड़े जाने के चान्सेस भी थे।
पर अगर ईशिता आत्महत्या कर ले तो... उसने खुद ही कहा था की वो कुछ कर बैठेगी। नीरज को सिर्फ इतना करना था की उस बेवकूफ लड़की को इस हद तक उकसा देना था की वो सच में कुछ कर बैठे। नीरज को सिर्फ उसे आत्महत्या करने का रास्ता दिखना था। इस अंदाज में की ईशिता को यही लगे की उन दोनों के आस अब
कोई चारा नहीं है। जैसा की हिन्दी मूवीस में होता है।
हम जीकर नहीं मिल सकते, अपने प्यार को पाने के लिए हमें मरना पड़ेगा।
जीकर हम मिल नहीं पाए तो क्या, मरकर एक दूसरे के हो जाएंगे।
सिर्फ उस साली बेवकूफ को इस बात पर राजी कर लेना है और स्यूयिसाइड का सामान उसे दे देना है, नीरज ने
सोचा।
नीरज को अब दो काम करने थे और दोनों ही उसको बहुत आसान लग रहे थे। पहला था ईशिता को आत्महत्या के लिए उकसाना। इस बात पर राजी करना की वो दोनों एक साथ सुसाइड कर लें, यही आखिरी रास्ता उनके पास बचा था।
दूसरा, उसको जहर लाकर देना। बहुत आसान काम था। वो एक केमिस्ट्री प्रोफेसर था और ऐसे केमिकल्स की लंबी लिस्ट उसके पास थी जो जहर का काम करते थे।
तीसरा था आत्महत्या नोट, जो की इस अंदाज में लिखवाना था की ईशिता ने ये काम इसलिए किया की वो अपने किए पर शर्मिंदा है और अपने बाप से रिक्वेस्ट कर रही है की उसकी मौत के बाद उसकी प्रेग्नेन्सी की। बात को उछाला ना जाए क्योंकी इससे वो खुद भी मौत के बाद बदनाम होगी और अपने परिवार को भी बदनाम करेगी। अगर ऐसा हो गया तो उसका रसूख वाला बाप कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं होने देगा। आत्महत्या को नार्मल मौत बना दिया जाएगा और कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं होगी।
और नीरज की लाइफ फिर नार्मल हो जाएगी।
यही सब सोचता वो अपने आफिस से निकला और केमिस्ट्री लैब पहुँचा।
एक रैक पर बहुत सारी केमिकल्स की बाटल्स रखी हुई थी पर नीरज जानता था की उसको क्या चाहिए। उसने एक बोतल उठाई और लेबल पढ़ा।
वाइट आरसेनिक (एसओ) ** जहर
थोड़ा सा पाउडर उसने बोतल से निकालकर एक कागज में डालकर पूड़िया सी बना ली और अपनी जेब में रख लिया। वो जनता था की जितना जहर वो ले जा रहा है, इतना एक ईशिता को क्या, 20 लोगों की जान लेने के लिए काफी है। पर वो सारा का सारा ही ईशिता को खिलाने वाला था, जस्ट तो बे ओन द सेफर साइड।
जस्ट तो मेक शुवर की साली रांड जिंदा ना बच जाए, उसने दिल ही दिल में सोचा।
कहीं दिल के किसी कोने में उसको ईशिता पर तरस भी आ रहा था। आखिर वो बेचारी एक कालेज जाने वाली लड़की थी और हर वही अरमान था जो एक आम लड़की के दिल में होता है। कालेज में किसी हैंडसम लड़के से मिले और प्यार हो जाए, फिर उनकी शादी हो, बच्चे हों। उस बेचारी ने गलती ये की की प्यार गलत इंसान से
कर बैठी और उसकी बहुत भारी कीमत चुकाने वाली थी।
नहीं..” नीरज ने फौरन अपने ख्यालों का रुख बदला और अपने दिल को मजबूत किया- “ये सब उसकी गलती थी। पहले जबरदस्ती गले पड़ी और फिर अबार्षन नहीं कराया। गलती उसकी है, गलती की कीमत भी वो ही भरेगी...”
जहर उसके पास आ चुका था। अब ईशिता को आत्महत्या के लिए मनाना है।
बेवकूफ है साली...” उसने दिल में सोचा “बहुत आसानी से मान जाएगी..”
जैसे वो खुद अपने दिल को तसल्ली दे रहा था की ये काम भी आसानी से हो जाएगा। कालेज में काम निपटाकर वो अपने घर के लिए निकला। रास्ते में एक केमिस्ट की दुकान पर रुक कर कुछ खाली जेलेटिन कप्सूल्स ले । लिए जिनमें की जहर भरकर उसने ईशिता को देना था।
पर तकदीर को शायद कुछ और ही मंजूर था।