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Adultery * * * * *पाप (30 कहानियां) * * * * *

18 पीपल

रेकार्डिंग चेक... रेकार्डिंग चेक... कार्डिंग चेक..

पहले दिन की रेकोडिंग...

मैं आज ही पीपल पहुँचा हूँ और यहीं एक धरामशाला में आकर रुका हुआ हैं। फिलहाल मैं उस पीपल के पेड़ के ठीक नीचे हैं जिसके कारण इस गाँव का इतना नाम है और इस पेड़ की वजह से ही इस गाँव का नाम पीपल पड़ा है।

ये जगह जैसलमेर से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है और इसको देखकर लगता है की वक़्त इस गाँव को बिल्कुल भी छूकर नहीं गुजरा। तकरीबन 200 घरों के इस गाँव में माडर्न फेसिलिटी नाम की कोई चीज नहीं है। कोई टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल तो दूर की बात है, यहाँ बिजली भी पूरे दिन में सिर्फ 3 घंटे आती है। ये इंडियन मूवीस में दिखाए जाने वाले गाँव के जैसा है। चारों तरफ रेत ही रेत और सर पर मटके उठाए पास के कुएं से पानी भरती औरतें।

गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर दूर रेगिस्तान के बीच मौजूद है ये पीपल का पेड़ और यकीन मानें, इस पेड़ के सिवा दूर दूर तक हरियाली का कोई निशान नहीं है, सिर्फ राजस्थान की रेत।

दिस ट्री लुक्स लाइक एनी नार्मल ट्री और बाइ वन लुक, नो वन कैन फिगर आउट द एंटायर मिस्टरी दैट रिवाल्व्स अराउंड दिस ट्री। ये एक बहुत ही आम सा दिखने वाला पेड़ है, जैसा की हर पीपल का पेड़ होता है। इस पेड़ की सबसे अनोखी बात है इसका साइज। इसका तना देखने से ही डायमीटर में कम से कम 5 मीटर का है जबकि एक पीपल के पेड़ों का तना डायमीटर में 3 मीटर तक होता है।

दूसरी बात ये की जिस तरह से यहाँ रेगिस्तान के बीच ये पेड़ फल फूल रहा है, वो अपने आप में एक मिस्टरी है। यहाँ दूर दूर तक पानी का कोई इंतेजाम नहीं है, बारिश भी बहुत कम होती है फिर भी पेड़ पूरी तरह से हरा भरा है।

पेड़ के तने पर लाल रंग के धागे बँधे हुए हैं, नीचे हनुमान जी की एक मूर्ति स्थापित है। आस पास की जगह को देखकर ही इसके धार्मिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पेड़ से थोड़ी दूर ही शिवजी का एक पुराना मंदिर है विच डेटस बैक तो मुगल एरा। ये मंदिर पुराना होने के। कारण एक हिस्टारिकल मान्युमेंट माना जाता है पर हैरत की बात है की इतना बड़ा होने के बाद भी इस मंदिर के निर्माण के बारे में इतिहास में कहीं कोई इन्फार्मेशन नहीं है। कुछ लोग मानते हैं की ये खुद बादशाह अकबर ने बनवाया था और कुछ कहते हैं की उस वक्त के राजपूत शासक ने।

ये पूरा इलाका गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर बाहर है और मेरे साथ मेंइस वक़्त हैं इस गाँव में रहने वाले हेमंत चाचा।।

चाचा आप हमें इस पेड़ और मंदिर के बारे में क्या बता सकते हैं?

चाचा- ये आपके हाथ में क्या है साहब?

ये एक छोटा सा टेप रेकार है चाचा। आप और मैं जो भी बात करेंगे वो इसमें रेकार्ड हो जाएगी।

चाचा- आप इसको रेडियो पर बजाएंगे... सब मेरी आवाज सुनकर हँसी बनाएंगे।

अरे नहीं। मैं इसको अपने साथ ले जाऊँगा और फिर सारी बातें कागज पर बाद में आराम से लिख लूंगा।

चाचा- अखबार में छापेंगे?

हाँन कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। मैं आपके गाँव और इस पेड़ पर एक कहानी लिख रहा हूँ। आपकी और मेरी बातों को मैं वापिस जाकर आराम से सुनँगा और फिर आराम से लिखेंगा।

चाचा- बढ़िया चीज है।

सो तो है। हाँ तो आप हमें गाँव के बारे में क्या बता सकते है... आप हमेशा यहीं रहे हैं?
 
चाचा- हाँ मैं इधर ही पैदा हुआ था और इधर ही सारी जिंदगी गुजरी है।

इस गाँव का नाम पीपल कैसे पड़ा?

चाचा- अब ये तो मेरे पैदा होने से भी पहले की बात है पर जहाँ तक मुझे पता है, पहले गाँव का नाम कुछ और होता था पर बाद में सब इस पीपल के पेड़ की बात करने लगे और धीरे-धीरे सबने गाँव को भी पीपल गाँव बना दिया।

पहले गाँव का क्या नाम था?

चाचा- ये तो मुझे भी नहीं पता। बहुत पुरानी बात है।

खैर... इस पीपल के पेड़ के बारे में क्या बता सकते हैं आप?

चाचा- पवित्र है ये पेड़। बिल्कुल उनके प्रेम की तरह पवित्र।

किसके प्रेम की तरह?

चाचा- राजश्री और अजमल... राजश्री राठौर और शेख अजमल अहमद खान।

कौन थे ये दोनों?

राजश्री तो यहीं की रहने वाली थी जबकि अजमल आगरा से था। कहते हैं की...

एक मिनट चाचा, शायद रेकडिंग रुक गई, नहीं चल रही है। सारी, क्या कह रहे थे आप?

राजश्री यहीं के एक रजवाड़े की बेटी थी और अजमल जो है वो बादशाह अकबर की फौज में एक सिपाही था।

इंट्रेस्टिंग... तो उनका इस पेड़ से क्या ताल्लुक है?

जहाँ ये पेड़ है ना, यहीं पर मरे थे वो दोनों।

मरे थे... मतलब?

मार दिया गया था उन दोनों को यहीं पर।

किसने मारा था?

राजपूतों ने।

क्यों? पूरी बात बताएंगे हमें?

अब मुगलों और राजपूतों के बीच की अनबन को कौन नहीं जानता। उस जमाने में ये सारा इलाका राजपूताना के नाम से जाना जाता था और मुगल चाहते थे की ये इलाका भी उनके राज्य में शामिल हो और यहाँ के राजा उनके आगे सर झुकाएं जो की राजपूतों को बिल्कुल भी गवारा नहीं था।

(हँसने की आवाज) हाँ पढ़ा था स्कूल की किताबों में। फिर?

(चाचा के हँसने की आवाज) अब इस सब नफरत के बीच जाने कैसे पनप गया प्रेम और वो भी दो दुश्मनों के बीच। जब बादशाह अकबर ने राजपूतों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो कुछ ने इनकार किया मगर कुछ ने हाथ थाम लिया और यहाँ पर जी राजपूत राजा का शासन था वो भी उन हाथ मिलने वालों में से एक था।

हम... इंट्रेस्टिंग... आगे?

जब हाथ मिल गये तो यहाँ पर मुगलों का आना जाना बढ़ गया। ऐसे ही एक बार यहाँ पर आया शेख अजमल अहमद खान। वो अकबर की फौज में सिपाही था और फिर भगवान जाने कैसे, उसका राजश्री राठौर से प्रेम हो गया।

राजश्री कौन थी?

राजकुमारी थी यहाँ की। कहते हैं की बहुत सुंदर थी। इतनी सुंदर की उसके बारे में कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने जैसा था। पूरे राजपूतना में उसके रंग रूप का चर्चा थी और हर राज्य का राजकुमार उससे शादी करने को उत्सुक था।

तो अजमल का प्यार एक तरफा था?

नहीं... यही तो कमाल की बात है। प्रेम दोनों तरफ से था। जिस तरह से वो राजश्री को चाहता था वैसे ही वो भी दिल जान से उसपर फिदा थी।

 
एक सिपाही पर?

हाँ... एक राजकुमारी जिसके रास्ते में अच्छे अच्छे राजकुमार अपना दिल थामे खड़े थे, वो एक मुगल फौज के सिपाही से प्रेम कर बैठी।

फिर क्या हुआ?

ये शिवजी का मंदिर जो आप देख रहे हैं, ये अब तो सिर्फ एक खंडहर बनके रह गया है पर उस वक़्त आलीशान होता था। हर पूर्णिमा की रात को यहाँ पर शिवजी की भव्य पूजा होती थी, सब राजे रजवाड़े आते थे।

हम्म्म्म

... फिर?

कहा जाता है की उस प्रेमी जोड़े ने भी इसी जगह और इसी रात को अपने मिलने की जगह बना लिया। राजश्री एक राजकुमारी थी और अजमल एक सिपाही। खुले में दोनों का मिलना नामुमकिन था तो यहाँ चोरी छुपे मिलते थे। हर पूर्णिमा को राजश्री अपने घरवालों के साथ यहाँ पूजा में शामिल होने आती और अजमल एक हिंदू का भेस धरकर आगरा से यहाँ पहुँचता।

वाउ... आगरा से यहाँ वो भी उन दिनों में... कई दिन लग जाते होंगे उसको।

प्रेम का मारा था साहब। अपनी प्रेमिका के लिए हर पूर्णिमा को यहाँ आता और एक हिंदू के भेस में मंदिर पहुँच जाता।

भेस धरके क्यों?

क्योंकी वो एक मुगल था, मुसलमान। अगर ऐसे ही मंदिर आता तो सबसे पहले तो यहाँ के लोगों को शक होता की एक मुस्लिम हर पूजा में शामिल क्यों होता है और दूसरा मुगलों को शक हो जाता की उनका एक सिपाही क्यों यहाँ इतनी दूर आकर हिंदुओं के साथ पूजा में हिस्सा ले रहा है।

सही बात है। फिर?

फिर कोई नहीं जानता के कितने अरसे तक ये सिलसिला चला पर जैसा की देर सवेर होना ही था, उन दोनों का भेद खुल गया।

कैसे?

कौन कह सकता है। और वैसे भी इश्क़ और मुश्क़ छुपाए नहीं छुपते। और वो तो फिर भी एक राजकुमारी थी, कभी ना कभी तो बात खुलनी ही थी। कहते हैं की वो पूजा के बाद दो-तीन दिन मंदिर में रुकती थी, इस बहाने से की वो शिव की बहुत बड़ी भक्त है पर असलियत ये थी की यहाँ रुक कर वो अजमल के साथ वक़्त गुजरती थी।

फिर?

फिर एक दिन दोनों को किसी ने साथ देख लिया और बात पहुँच गई राजश्री के पिता तक। जिसने भी उन्हें देखा, वो अजमल को पहचान गया की वो मुगल है। ये बात उन दिनों की है जब बादशाह अकबर ने महारानी जोधाबाई से शादी की थी। इस बात को लेकर उन दिनों राजपूतों में वैसे ही काफी आक्रोश था। जब ये बात राजश्री के पिता पर खुली, तो पहले से ही गुस्से में बैठा राजा और पगला गया।

(माचिस जलने की आवाज)

एक सिगरेट मुझे भी देना साहब।

हाँ लीजिए (फिर माचिस जलने की आवाज) फिर क्या हुआ?

एक पूर्णिमा की पूजा के दो दिन बाद की बात थी। राजश्री फिर बहाना करके पूजा के बाद मंदिर में ही रुकी हुई थी और अजमल भी यहीं था। उन दोनों को देख लिया गया था और बात राजश्री के पिता तक पहुँच चुकी थी। गुस्से से पागल राजा फौरन अपने कुछ आदमी लेकर मंदिर पहुँच गया।

उसने मार दिया दोनों को?

हाँ... कहते हैं की वो रात के वक़्त यहाँ पहुँचा और जब वो आया तो वो दोनों प्रेमी यहां रेत के टीले पर खुले आसमान के नीचे प्रेम लीला में मगन थे। राजा आया तो अजमल को मारने था पर अपनी बेटी को यूँ बे-लिबास एक मामूली सिपाही की बाहों में देखकर वो अपना आपा खो बैठा और उसी वक़्त उसने अजमल के साथ साथ अपनी बेटी को भी मार डाला।

भयानक... फिर?

बस इतनी ही कहानी है साहब। उसके बाद क्या हुआ किसको पता। वक़्त के साथ सब मिट गया। वो रजवाड़े भी मिट गये और वो मुगल भी मिट गये, बस रह गया ये पीपल का पेड़।

पीपल वाली बात अब भी समझ नहीं आई। इस पूरी कहानी से इस पेड़ का क्या लेना देना?

जहाँ इस पेड़ की जड़ें हैं ना साहब, वहीं उन दोनों प्रेमियों का खून गिरा था। उनके मरने के कुछ दिन बाद जाने कैसे यहाँ रेत में ये पीपल का पेड़ उग आया।

नाउ दैटस आन इंट्रेस्टिंग स्टोरी। तो आपको लगता है की ये पीपल का पेड़ अकबर के जमाने से यहाँ है?

नहीं... ये वाला तो मेरे सामने ही बड़ा हुआ है। जब पुराना पेड़ मरने लगता है तो बिल्कुल उसकी बगल में एक नया पेड़ उगता है और पुरानी पेड़ की जगह ले लेता है।

तो यहाँ पहले एक दूसरा पेड़ था?

 
जी हाँ.. जब मैं छोटा था तब। मेरे सामने ही वो पेड़ खतम हुआ और जैसे अपने आप ही धीरे-धीरे टूट कर बिखर गया। ऐसे झड़ा जैसे मिट्टी का बना हो और धीरे-धीरे मिट्टी गिर रही हो। और जैसे जैसे वो पेड़ खतम हुआ, उसकी जगह ये नया पेड़ उग आया।

पीपल ही क्यों? कोई दूसरा पेड़ क्यों नहीं?

कुदरत की बात है साहब... और दूसरा पेड़ भी क्यों, पीपल क्यों नहीं... अगर बरगद होता तो आप कहते थे आम का पेड़ क्यों नहीं... नीम होता तो कहते के सेब का पेड़ क्यों नहीं... ये तो कुदरत की बात है साहब।

तो गाँव के लोगों का इस पेड़ को लेकर क्या कहना है?

लोगों का मानना है की जिस तरह से ये रेगिस्तान के बीच हरा भरा पेड़ खड़ा है, उसी तरह से ये लोगों की मन्नत पूरी करता है। उनकी परेशानी दूर करके उनकी सूखी जिंदगी को फिर हरा भरा कर देता है।

आप मानते हैं?

बिल्कुल।

तो मतलब राजश्री और अजमल मरने के बाद भी लोगों की मुराद पूरी कर रहे हैं... खुद चले गये और पीछे छोड़ गये एक पीपल का पेड़। चले गये... (हँसने की आवाज) नहीं साहब, वो तो अब भी यहीं हैं।

(टेप-रेकार्डर गिरने की आवाज)

यहीं हैं मतलब?

हर पूर्णिमा की रात वो दोनों यहाँ लौट आते हैं। प्रेम-लीला करते हैं। जहाँ दोनों जिंदा एक ना हो सके, मरने के बाद एक होते हैं।

वाउ... (हँसने की आवाज) और आप मानते हैं ये सब?

बिल्कुल।

आपने देखा उन दोनों को?

नहीं

किसी और ने देखा?

जिसने देखा वो जिंदा बचा नहीं।

मतलब वो दोनों अब भूत बनकर लोगों को मार रहे हैं?

आपको आपकी बीवी के साथ रति-क्रिया करते हुए कोई देखे तो आप क्या करेंगे. उनको उस हालत में देखकर मार दिया गया था।

दूसरे दिन की रेकार्डिंग। अब तक मैंने यहाँ जो देखा सुना है, उससे इस पेड़ के हांटेड यानी भूतिया होने वाली बात ही पता चलती है। कितना सच है कोई नहीं जानता और जिनसे भी मैंने बात की उनमें से किसी ने भी भूतों को देखा नहीं है पर हर कोई दो बातें मानता है।

एक तो ये की अगर सच्चे दिल से कुछ माँग कर पेड़ पर धागा बांधो तो मुराद पूरी होती है।

दूसरा ये की हर पूर्णिमा की रात राजश्री और अजमल रिटर्न फ्रॉम द डेड और दे आक्च्यु यली हव सेक्स अंदर थे ट्री। दिस माइट साउंड रिडिक्युलस और फन्नी।

पर यहाँ रहने वाला हर शख्स ये बात दिल से मानता है। ये लोग इस बात को इस कदर मानते हैं की हर पूर्णिमा की रात अंधेरा होते होते गाँव का हर इंसान अपने अपने घर में चला जाता है और खिड़की दरवाजे सब बंद कर लेता है। वजह यही है की वो दो भूतों को सेक्स करते हुए नहीं देखना चाहते क्योंकी अगर उन्होंने देख लिया तो भूत उनको जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

आई डोंट नो वाट तो बिलीव आर नाट पर इन सबकी बात में कितना दम है ये जाने के लिए मैं आज की रात उस पेड़ के नीचे गुजारने वाला हूँ। आज पूर्णिमा की रात है और अगर लोगों की बात सच है तो मैं आज भूतों

और मेरी किश्मत साथ दे गई तो मैं आज भूतों को सेक्स करते हुए देखूँगा।

(हँसने की आवाज)

और अगर ऐसा हुआ तो मैं दुनिया का पहला इंसान हूँ जो घोस्ट पोर्न देखेगा।

(हँसने की आवाज)

 
मैं बस घर से निकल ही रहा हूँ। अंधेरा हो चुका है और गाँव के सब लोग अपने अपने घरों में घुस चुके हैं। मैं धरमशाला के केरटेकर को बिना बताए चुपके से निकलूंगा क्योंकी मैं नहीं चाहता की गाँव के लोग मेरी बात का बुरा मानें। कैसे भी हो, मेरा वहाँ जाना उनकी मान्यता का मजाक उड़ाना ही है।

(रेकार्डिंग स्टॉप्स)

L

रात के 10:00 बज चुके हैं। मैं इस वक़्त पेड़ के नीचे बैठा हूँ और चारों तरफ चाँद की रोशनी फैली हुई है। बहुत ही खूबसूरत नजारा है। चाँदनी में चमकते रेत के टीले, ठंडी हवा, बीच में खड़ा एक अकेला पेड़ और साथ ही एक पुराना खंडहर मंदिर। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

रात के 12:00 बज चुके हैं। दिन में जितनी गर्मी थी रात में उतनी ही ठंडक है और आई विश की मैं अपनी । जैकेट साथ लाया होता। अब तक ऐसा कुछ नहीं दिखा है जिससे आज रात मुझे भूत देखने का सपना पूरा होता लगे। (कार्डिंग स्टॉप्स)

(तेज कदमों से चलने की आवाज)

मैं इस वक़्त मंदिर की तरफ जा रहा हूँ। पता नहीं ये मेरा भ्रम है या हकीकत पर मुझे खंडहर से किसी के हँसने की आवाज सुनाई दी है। एक लड़की के हँसने की आवाज। (रेकार्डिंग स्टॉप्स) ।

(धीरे से बोलने की आवाज)

ये मेरा भ्रम नहीं था। मेरा अलावा कोई और भी इस वक्त खंडहर में मौजूद है, कोई लड़की... बार बार हँसने की आवाज मुझे सुनाई दे रही है पर समझ नहीं आता की किस तरफ से आ रही है। मैं आवाज की डाइरेक्सन में। जाने की कोशिश करता हूँ तो लगता है जैसे की आवाज हर तरफ से आ रही है। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

(धीरे से बोलने की आवाज)

हँसने के साथ साथ अब किसी के चलने की आवाज भी सुनाई दे रही है। ये बिल्कुल हिन्दी फिल्म्स की हारर स्टोरी जैसा लग रहा है। एक लड़की के हँसने की आवाज और चलते वक़्त पायल बजने की आवाज। क्योंकी मंदिर काफी पुराना और बड़ा है, हँसने की आवाज गूंज रही है जिसकी वजह से मुझे लग रहा था की आवाज हर तरफ से आ रही है। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

(धीरे से बोलने की आवाज)

मुझे अभी अभी एक आदमी के बोलने की आवाज भी सुनाई दी है। लड़की अकेली नहीं है, कोई लड़का भी है। साथ में। अगर मैं गाँव वालों की बात पर यकीन कर लूं तो ये राजश्री और अजमल होने चाहिए। जो भी है, थोड़ी देर में पता चल जाएगा। (कार्डिंग स्टॉप्स)

(धीरे से बोलने की आवाज)

मुझे समझ में नहीं आ रहा की कोई मेरे साथ मजाक कर रहा है या मुझे भ्रम हो रहा है पर 3 आवाजें बार बार सुनाई दे रही हैं। एक लड़की के हँसने और बोलने की आवाज, चलते हुए उसकी पायल की आवाज और तीसरी एक लड़के के हँसने और बोलने की आवाज। मैं खंडहर के अंदर आवाज का पीछा करते हुए चक्कर लगा रहा हूँ। पर अब तक नजर कुछ नहीं आया है। (रकार्डिंग स्टॉप्स)

 
(धीरे से बोलने की आवाज)

मैं इस वक़्त एक दीवार के पीछे छुपा हुआ खड़ा हूँ और मेरे सामने जो दिख रहा है मैं नहीं जानता की मैं वो कैसे बताऊं। सामने मंदिर के बीच बने एक तालाब के किनारे एक लड़का खड़ा है, तकरीबन 6 फुट का कद... दूर होने और रात की वजह से मैं उसका चेहरा तो नहीं देख पा रहा पर उसकी सबसे खास बात है उसका पहनावा।

मैं नहीं जानता की पुराने जमाने में लोग कैसे कपड़े पहनते थे पर जितना मूवीस में देखा है और किताबों में पढ़ा है, इस लड़के का पहनावा बिल्कुल किसी मुगल सिपाही के जैसा है। वो पूल के पास खड़ा आस पास देख रहा है, शायद उस लड़की को ढूँढ़ रहा है। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

(धीरे से बोलने की आवाज)

अगर ये मुझे डराने या धोखा देने की कोशिश है या कोई मेरे साथ मजाक कर रहा है तो इसपर काफी मेहनत की गई है। मैं अब भी छुपा हुआ खड़ा हूँ और अब उस लड़के के साथ वो लड़की भी है। मैं खुल कर उन दोनों को नहीं देख पा रहा हूँ क्योंकी मैं नहीं जानता की मेरे सामने जो हो रहा है वो क्या है.. क्या मुझे ताली बजाते हए बाहर निकलना चाहिए या फिलहाल जो जैसा चल रहा है चलने देना चाहिए, मैं नहीं जानता। मैं उन दोनों का चेहरा अब भी नहीं देख पाया हूँ। चाँदनी रात होने की वजह से उन दोनों के कपड़े तो साफ दिखाई दे रहे हैं। पर चेहरे छूपे हुए हैं। लड़की ने किसी पुरानी राजकुमारी के जैसे कपड़े पहन रखे हैं और इतनी ज्यूयलरी डाली हुई। है की चलते हुए छन छन की आवाज कर रही है। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

(डरी सहमी से बहुत धीमी आवाज)

ओह गाड, ओह गाड। जो मैं देख रहा हूँ जानता नहीं की उसको सच मानू या झूठ। मुझे पहली बार उस लड़के की शकल दिखाई दी। चेहरा अब तक इसलिए साफ नहीं था क्योंकी उसका चेहरा इस तरह से सफेद था जैसा वाइट पैंट कर दिया गया हो। चाँदनी रात होने की वजह से मुझे वो सफेद चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। (रेकार्डिंग स्टॉप्स)

(हाँफने की आवाज)

मुझे उन दोनों ने देख लिया है। मैंने अपने सेल से उनकी तस्वीर लेने की कोशिश की पर फ्लैश आफ करना भूल गया। फ्लैश की वजह से उन दोनों ने मुझे देख लिया था। मैं मंदिर से निकालने की कोशिश कर रहा हूँ।

(चिल्लाने की आवाज)

ओह गाड। (टेप रेकार्डर नीचे गिरने की आवाज)

लिसन इयूड। आई आम सारी। मैं आप दोनों को नहीं देखना चाहता था। प्लीज डोंट कम नियर मी। स्टे अवे।

आई डोंट वांट ट्रबल और आई डोंट वांट तो फाइट।

आहहह..हाँ हाँ... नो नो वाट आर यू... युवर फेस... युवर फेस।

(लड़की के हँसने की आवाज) हे भगवान। प्लीज... जाने दो, कुछ नहीं देखा मैंने।

(रोने की आवाज) दूर रहो मुझसे। मेरे करीब मत आना।

(कुत्ते के जैसे गुर्राने की आवाज) डोंट टच में। स्टे अवे। गो अवे। नो, नो, नो। आअहह...

(दम घुटने की आवाज) प्लीज डोंट... युवर हैंड..सो कोल्ड.. सो कोल्ड। डोंट टच में... सो कोल्ड.. युवर फेस, युवर आइज... (रोने की आवाज)

प्लीज.. लेट में गो। मैंने कुछ नहीं देखा। प्लीज... ओह गाड... हा... नो नो नो...

(धीरे-धीरे दूर होती घसीटने की आवाज, लड़की के हँसने की आवाज, पायल की आवाज, रोने की आवाज)

इसके बाद सब शांत है सर.. ऐकार्डिंग होती रही और टेप खतम हो गई पर कोई आवाज नहीं है..” कान्स्टेबल इनस्पेक्टर की तरफ पलट कर बोला।

हम्म्म्म

...” इनस्पेक्टर उठकर करीब आया।

“उसका मोबाइल भी मिला। उस रात की ये एक तस्वीर है खंडहर की। देखिए.”

कान्स्टेबल ने एक तस्वीर ओपन करके मोबाइल इनस्पेक्टर को थमाया।

कुछ भी तो नहीं दिख रहा...”

वहाँ नहीं सर। ये सामने तालाब के पास देखिए। कोई नहीं खड़ा पर पानी में परछाई देखिए। एक लड़का और एक लड़की। बिल्कुल वैसे जैसा की उसने टेप में बताया है...”

टेप कहाँ मिला?” इनस्पेक्टर ने पूछा...

मंदिर में गिरा मिला सर... और उसकी लाश पीपल के पेड़ के नीचे मिली...”

***** समाप्त *****

***** *****

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 


19 ब्लैकमेल




लाइट्स, कमरा और एक्सन...” पहले आदमी ने कहा- “चलो अब जल्दी से शुरू हो जा मेरी जान..."

फुल बाडी लिया है ना...” दूसरा आदमी बोला।

हाँ.. फुल बाडी है..” पहला आदमी फिर से हैंडीकैम के डिसप्ले पर देखता हुआ बोला।

-

“बस अब तो जानेमन के कपड़े उतरने का इंतेजार है..."

वो चारों शहर के बाहर किसी पुराने खंडहर मकान में थे। रात के दो बज रहे थे और अजय जानता था की वो यहाँ चाहे जितना चिल्लाए, कोई उसकी मदद के लिए नहीं आएगा। दोनों आदमियों ने अपने चेहरे पर रुमाल बाँध रखा था जिससे उनकी शकल देखना नामुमकिन था, सिर्फ आँखें दिखाई दे रही थी। दोनों लंबे चौड़े, हट्टे कट्टे थे जिनपर अजय चाहकर भी अकेला काबू नहीं पा सकता था। और उसपर उनके पास गन थी जो उस वक्त अजय के सर पर लगी हुई थी।

\

चल अब धीरे-धीरे कपड़े उतारना शुरू कर... एक एक करके...” दूसरे आदमी ने शिखा से कहा।\\

अजय ने एक नजर शिखा पर डाली। रो रोकर उसकी आँखें लाल हो चुकी थी और डरी सहमी सी वो ऐसे खड़ी थी जैसे भेड़ियों के बीच किसी बकरी को बाँध दिया गया हो।

चल चल ज्यादा वक़्त नहीं है हमारे पास..." दुसरे आदमी ने फिर शिखा को इशारा किया पर वो फिर भी वैसे ही अपने हाथ अपने सीने पर बाँधे खड़ी रोती रही।

“ये ऐसे नहीं मानेगी..” दूसरा आदमी पहले से बोला- “मार साले लौंडे को गोली..”

अजय को अपने सर पर तनी पिस्टल की नाल और भी शिद्दत से महसूस होने लगी। वो अपने घुटनों पर बैठा था और उसके पीछे पहला आदमी उसके सर पर रिवाल्वर लगाए खड़ा था।

एक... दो...” गिनती शुरू हुई और अजय को जैसे अपनी पूरी जिंदगी अपनी आँखों के सामने घूमती नजर आने लगी।

वो एक अमीर बाप की औलाद था, बेशुमार पैसा, गाड़ियां, ऐयाशी, ये उसकी जिंदगी थी। फिर उसको एक पार्टी में शिखा मिली। पहली मुलाकात के बाद दूसरी, फिर तीसरी और ये सिलसिला धीरे-धीरे प्यार में तब्दील हो । गया। शिखा एक बहुत गरीब घर की लड़की थी इसलिए दोनों जानते थे की अजय का बाप कभी इस शादी के । लिए राजी नहीं होगा इसलिए उन्होंने आसान रास्ता अपनाया और भाग कर अपने घरों से बहुत दूर एक अजनबी शहर में पहुँच गये।

यहाँ पहले ही दिन उनके साथ जो हुआ इसका उन्होंने कभी सपने में भी गुमान नहीं किया था। देर रात को उनकी ट्रेन स्टेशन पर पहुँची थी जहाँ से उन्होंने किसी होटल के लिए टैक्सी की पर टैक्सी वाला एक बंदूक की नोक पर उन्हें यहाँ शहर से बाहर इस खंडहर में ले आया जहाँ अब वो पिस्टल अजय के सर पर लगी हुई थी।

रुको मैं कपड़े उतारती हूँ...” अचानक शिखा की आवाज आई- “प्लीज उसको कुछ मत करना...”

अजय की समझ में नहीं आया की क्या करे। एक तरफ तो उसके सामने वो लड़की खड़ी थी जिससे वो शादी करना चाहता था और जो की इस वक्त दो अजनबी आदमियों के सामने उसकी जान बचाने के लिए नंगी हो रही थी, पर दूसरी तरफ वो ये भी जानता था की इस वक्त कुछ बोला तो उसका भेजा नीचे जमीन पर बिखर जाएगा। और बहुत मुमकिन था की इसके बाद वो शिखा का भी काम तमाम कर देंगे। उसने स्टैंड पर लगे हुए हैंडीकैम को देखा जो शिखा की नंगी फिल्म बना रहा था और चुप रहा।

काँपते हुए हाथों से शिखा ने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए।

“वाउ...” पहला आदमी बोला- “अब हुआ खेल शुरू। धीरे-धीरे खोल जरा। पूरा मजा देते हुए..”

शिखा ने अपनी शर्ट का पहला बटन खोला, फिर दूसरा, फिर तीसरा और एक एक करके सारे बटन खुल गये। वो एक पल के लिए रुकी और अपनी शर्ट को सामने से पकड़कर रोने लगी।

प्लीज ऐसा मत करो...” रोते हुए उसने कहा।

“प्लीज तुम्हें जो चाहिए ले लो पर हमें जाने दो...” अजय ने आगे से कहा।

 
जो हमें चाहिए हम वही ले रहे हैं साले..." दूसरा आदमी हँसते हुए बोला- “चल अब ये शर्ट उतार...”

शिखा भी दिल ही दिल में जानती थी की उसके पास कोई चारा नहीं था। उसने अगर जरा भी ना नुकुर की तो अजय की जान जा सकती थी। इसलिए मजबूर होकर उसके अपनी शर्ट धीरे से उतार कर नीचे जमीन पर गिरा दी। अब वो सिर्फ एक काले रंग की ब्रा और नीली रंग की जीन्स में खड़ी थी।

वाउ...” एक आदमी उसके सीने की तरफ देखते हुए बोला- “हाथ हटा सामने से..."

उसने अपनी छातियां अपने दोनों हाथों से ढक रखी थी। उस आदमी के कहने पर वो एक पल के लिए झिझकी और फिर अपने हाथ साइड में गिरा दिए।

=

मेरी जान...” एक आदमी सीटी मारकर बोला- “क्या बड़े बड़े मम्मे हैं तेरे। ब्रा में फिट ही नहीं हो रहे...”

क्यों बे साले...” दूसरा आदमी अजय के सर पर थप्पड़ मारते हुए बोला- “बड़ी मेहनत की है लगता है तूने। सूखे दबाता है या तेल लगा के मालिश करता है."

शिखा ने फिर अपने हाथों से सीना ढकने की कोशिश की पर एक आदमी के घूर कर देखने पर फिर सीधी खड़ी हो गई।

चल अब जीन्स उतार...”

नहीं प्लीज..” वो रोते हुए बोली।

मारूं गोली तेरे आशिक को?”

नहीं..” वो फौरन चिल्लाई और जीन्स के बटन खोलने शुरू कर दिए।



शाबाश.." पहले आदमी ने फिर से हैंडीकैम को चेक किया की रेकोडिंग सही हो रही है की नहीं।

जीन्स के बटन एक एक करके खुले और फिर वो दो पल के लिए रुकी।

चल उतार जल्दी से अब...” पहला आदमी बोला- “चूत के दर्शन करा दे जल्दी से...”

उसकी मुँह से ऐसी बात सुनकर झिझक रही शिखा सहम कर खड़ी हो गई।

मार दे गोली...” दूसरे ने पहले से कहा ही था के शिखा ने फौरन अपनी जीन्स नीचे खिसकियाई और उतार कर एक तरफ उछल दी। नीचे पैंटी उसने पहन नहीं रखी थी।

जिश्म पर एक काले रंग की ब्रा पहने, आँखों में आँसू लिए वो खड़ी सुबक रही थी।

“क्या मस्त चूत है। एक भी बाल नहीं..” दूरा गौर से उसकी टाँगों के बीच देखता हुआ बोला।

“मुझे तो झांटों वाली ज्यादा पसंद है..." पीछे से पहले की आवाज आई।

गाण्ड भी क्या मस्त है रे बाबा...” दूसरा शिखा के चारों तरफ गोल गोल चक्कर सा लगा रहा था- “मस्त उठी हुई है। क्या बे साले, गाण्ड भी मरता है क्या इसकी..” उसने अजय की तरफ इशारा करते हुए कहा।

“चल जानेमन अब जल्दी से तेरे मम्मे भी दिखा दे..” वो शिखा की तरफ घूमता हुआ बोला।

अजय की नजर भी शिखा की तरफ घूमी। वो अब रो नहीं रही थी। आँसू चेहरे पर सूख चुके थे। नजर झुकाए वो किसी लाश की तरह खड़ी थी।

चल खोल ना...” दूसरा जो उसके नजदीक ही खड़ा था, एक हाथ उसकी गाण्ड पर फेरता हुआ बोला।

“हाथ मत लगाना उसे..” अजय फौरन चिल्लाया।

बैठा रह शांति से वरना गोली भेजे के पार कर दूंगा...” उसके पीछे खड़े आदमी ने उसके बाल पकड़े और बंदूक की नाल उसके मुँह में घुसा दी।

नहीं..” शिखा फौरन चिल्लाई और ब्रा अपने जिश्म से अलग करके एक तरफ उछाल दी।

आअए हाए क्या मम्मे हैं यार... मजा आएगा आज तो..." शिखा के करीब ही खड़ा हुआ आदमी पैंट के ऊपर से अपना लण्ड रगड़ता हुआ बोला।

कम से कम 36" इंच होंगे... है ना साली?” वो शिखा से ही पूछ रहे थे।

अब नहीं रुका जाता। आ जा जल्दी से..” शिखा के करीब खड़े हुए आदमी ने उसका हाथ पकड़कर उसको जमीन की तरफ गिराया।

 
अजय जानता था की आगे क्या होने वाला है। शिखा के साथ बलात्कार। जिस लड़की से वो प्यार करता था, जिससे शादी करना चाहता था, उस लड़की के साथ बलात्कार। एक अजीब सी ताकत के साथ वो पलटा और अपने पीछे खड़े आदमी के शरीर से टकराया।

“बहनचोद..." दर्द से वो आदमी चिल्लाया और लड़खड़ा कर नीचे जा गिरा। उसके हाथ में पकड़ी गन हाथ से छूटी और जमीन पर गिरी। अजय गन की तरफ भगा।

जहाँ हो वहीं रुक जाओ...” अजय गन ऊपर उठता हुआ बोला। उसने गन का रुख उस आदमी की तरफ कर रखा था जो शिखा को नीचे गिराकर उसपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था।

तेरे माँ की..." पहला आदमी जिसके हाथ से अजय ने गन छीनी थी जमीन से उठता हुआ बोला।

वहीं पड़ा रह..” अजय ने इशारा किया।

ना ना ना ना...” आवाज आई तो अजय ने घूम कर शिखा की तरफ देखा- “दूसरा आदमी उसके पीछे खड़ा था और शिखा को आगे कर रखा था। अब अगर गोली चलती, तो शिखा को पहले लगती।

-

हमें यहाँ से जाने दो। हम किसे से कुछ नहीं कहेंगे...” अजय ने एक आखिरी कोशिश की।

नहीं साले.. जो तूने कर दिया है, उसके बाद तो पहले तेरी इस छमिया की चूत का भोसड़ा बनाएंगे, उसके बाद तेरी बोटी बोटी करेंगे...”

अजय की समझ नहीं आ रहा था की क्या करे। उसने एक नजर कमरे की टूटी हुई खिड़की से बाहर डाली।

घुप्प अंधेरा... कुछ नजर नहीं आ रहा था।

यहाँ से बच के निकले भी तो जाएंगे किस तरफ..." एक पल ले लिए अजय के दिमाग में ख्याल आया और फिर जो कुछ भी हुआ, बहुत तेजी के साथ हुआ।

अजय की नजर खिड़की की तरफ देखकर पहले आदमी आगे को लपका। अजय उसको अपनी ओर आता देखकर हड़बड़ा गया और गन का ट्रिगर खींच दिया। गन अब भी शिखा की तरफ ही पायंटेड थी। गोली की आवाज से कमरा गूंज उठा। दूसरी आवाज शिखा के छीखने की थी।

अजय और दोनों आदमी अपनी अपनी जगह पर बुत बनकर खड़े हो गये।

शिखा नीचे जमीन पर गिर चुकी थी। गोली उसके सीने में लगी थी। खून बहकर उसकी लाश के चारों तरफ जमा हो रहा था। आँखें बंद हो चुकी थी।

“वहीं खड़े रहो...” उसने गन दोनों आदमियों की तरफ घुमाते हुए कहा, एक नजर शिखा की नीचे जमीन पर पड़ी लाश पर डाली और खिड़की से बाहर कूद गया।

“पकड़ साले को...” पीछे कमरे से आवाज आई पर अजय को रुक कर सुनने का होश नहीं था। वो बेतहाशा दौड़ रहा था।

उस मकान से दूर...

शिखा की लाश से दूर..

उन दोनों आदमियों से दूर...

उस मनहूस शहर से दूर...

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