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StoryPublisher
Guest
18 पीपल
रेकार्डिंग चेक... रेकार्डिंग चेक... कार्डिंग चेक..
पहले दिन की रेकोडिंग...
मैं आज ही पीपल पहुँचा हूँ और यहीं एक धरामशाला में आकर रुका हुआ हैं। फिलहाल मैं उस पीपल के पेड़ के ठीक नीचे हैं जिसके कारण इस गाँव का इतना नाम है और इस पेड़ की वजह से ही इस गाँव का नाम पीपल पड़ा है।
ये जगह जैसलमेर से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है और इसको देखकर लगता है की वक़्त इस गाँव को बिल्कुल भी छूकर नहीं गुजरा। तकरीबन 200 घरों के इस गाँव में माडर्न फेसिलिटी नाम की कोई चीज नहीं है। कोई टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल तो दूर की बात है, यहाँ बिजली भी पूरे दिन में सिर्फ 3 घंटे आती है। ये इंडियन मूवीस में दिखाए जाने वाले गाँव के जैसा है। चारों तरफ रेत ही रेत और सर पर मटके उठाए पास के कुएं से पानी भरती औरतें।
गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर दूर रेगिस्तान के बीच मौजूद है ये पीपल का पेड़ और यकीन मानें, इस पेड़ के सिवा दूर दूर तक हरियाली का कोई निशान नहीं है, सिर्फ राजस्थान की रेत।
दिस ट्री लुक्स लाइक एनी नार्मल ट्री और बाइ वन लुक, नो वन कैन फिगर आउट द एंटायर मिस्टरी दैट रिवाल्व्स अराउंड दिस ट्री। ये एक बहुत ही आम सा दिखने वाला पेड़ है, जैसा की हर पीपल का पेड़ होता है। इस पेड़ की सबसे अनोखी बात है इसका साइज। इसका तना देखने से ही डायमीटर में कम से कम 5 मीटर का है जबकि एक पीपल के पेड़ों का तना डायमीटर में 3 मीटर तक होता है।
दूसरी बात ये की जिस तरह से यहाँ रेगिस्तान के बीच ये पेड़ फल फूल रहा है, वो अपने आप में एक मिस्टरी है। यहाँ दूर दूर तक पानी का कोई इंतेजाम नहीं है, बारिश भी बहुत कम होती है फिर भी पेड़ पूरी तरह से हरा भरा है।
पेड़ के तने पर लाल रंग के धागे बँधे हुए हैं, नीचे हनुमान जी की एक मूर्ति स्थापित है। आस पास की जगह को देखकर ही इसके धार्मिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पेड़ से थोड़ी दूर ही शिवजी का एक पुराना मंदिर है विच डेटस बैक तो मुगल एरा। ये मंदिर पुराना होने के। कारण एक हिस्टारिकल मान्युमेंट माना जाता है पर हैरत की बात है की इतना बड़ा होने के बाद भी इस मंदिर के निर्माण के बारे में इतिहास में कहीं कोई इन्फार्मेशन नहीं है। कुछ लोग मानते हैं की ये खुद बादशाह अकबर ने बनवाया था और कुछ कहते हैं की उस वक्त के राजपूत शासक ने।
ये पूरा इलाका गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर बाहर है और मेरे साथ मेंइस वक़्त हैं इस गाँव में रहने वाले हेमंत चाचा।।
चाचा आप हमें इस पेड़ और मंदिर के बारे में क्या बता सकते हैं?
चाचा- ये आपके हाथ में क्या है साहब?
ये एक छोटा सा टेप रेकार है चाचा। आप और मैं जो भी बात करेंगे वो इसमें रेकार्ड हो जाएगी।
चाचा- आप इसको रेडियो पर बजाएंगे... सब मेरी आवाज सुनकर हँसी बनाएंगे।
अरे नहीं। मैं इसको अपने साथ ले जाऊँगा और फिर सारी बातें कागज पर बाद में आराम से लिख लूंगा।
चाचा- अखबार में छापेंगे?
हाँन कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। मैं आपके गाँव और इस पेड़ पर एक कहानी लिख रहा हूँ। आपकी और मेरी बातों को मैं वापिस जाकर आराम से सुनँगा और फिर आराम से लिखेंगा।
चाचा- बढ़िया चीज है।
सो तो है। हाँ तो आप हमें गाँव के बारे में क्या बता सकते है... आप हमेशा यहीं रहे हैं?
रेकार्डिंग चेक... रेकार्डिंग चेक... कार्डिंग चेक..
पहले दिन की रेकोडिंग...
मैं आज ही पीपल पहुँचा हूँ और यहीं एक धरामशाला में आकर रुका हुआ हैं। फिलहाल मैं उस पीपल के पेड़ के ठीक नीचे हैं जिसके कारण इस गाँव का इतना नाम है और इस पेड़ की वजह से ही इस गाँव का नाम पीपल पड़ा है।
ये जगह जैसलमेर से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है और इसको देखकर लगता है की वक़्त इस गाँव को बिल्कुल भी छूकर नहीं गुजरा। तकरीबन 200 घरों के इस गाँव में माडर्न फेसिलिटी नाम की कोई चीज नहीं है। कोई टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल तो दूर की बात है, यहाँ बिजली भी पूरे दिन में सिर्फ 3 घंटे आती है। ये इंडियन मूवीस में दिखाए जाने वाले गाँव के जैसा है। चारों तरफ रेत ही रेत और सर पर मटके उठाए पास के कुएं से पानी भरती औरतें।
गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर दूर रेगिस्तान के बीच मौजूद है ये पीपल का पेड़ और यकीन मानें, इस पेड़ के सिवा दूर दूर तक हरियाली का कोई निशान नहीं है, सिर्फ राजस्थान की रेत।
दिस ट्री लुक्स लाइक एनी नार्मल ट्री और बाइ वन लुक, नो वन कैन फिगर आउट द एंटायर मिस्टरी दैट रिवाल्व्स अराउंड दिस ट्री। ये एक बहुत ही आम सा दिखने वाला पेड़ है, जैसा की हर पीपल का पेड़ होता है। इस पेड़ की सबसे अनोखी बात है इसका साइज। इसका तना देखने से ही डायमीटर में कम से कम 5 मीटर का है जबकि एक पीपल के पेड़ों का तना डायमीटर में 3 मीटर तक होता है।
दूसरी बात ये की जिस तरह से यहाँ रेगिस्तान के बीच ये पेड़ फल फूल रहा है, वो अपने आप में एक मिस्टरी है। यहाँ दूर दूर तक पानी का कोई इंतेजाम नहीं है, बारिश भी बहुत कम होती है फिर भी पेड़ पूरी तरह से हरा भरा है।
पेड़ के तने पर लाल रंग के धागे बँधे हुए हैं, नीचे हनुमान जी की एक मूर्ति स्थापित है। आस पास की जगह को देखकर ही इसके धार्मिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पेड़ से थोड़ी दूर ही शिवजी का एक पुराना मंदिर है विच डेटस बैक तो मुगल एरा। ये मंदिर पुराना होने के। कारण एक हिस्टारिकल मान्युमेंट माना जाता है पर हैरत की बात है की इतना बड़ा होने के बाद भी इस मंदिर के निर्माण के बारे में इतिहास में कहीं कोई इन्फार्मेशन नहीं है। कुछ लोग मानते हैं की ये खुद बादशाह अकबर ने बनवाया था और कुछ कहते हैं की उस वक्त के राजपूत शासक ने।
ये पूरा इलाका गाँव से तकरीबन 3 किलोमीटर बाहर है और मेरे साथ मेंइस वक़्त हैं इस गाँव में रहने वाले हेमंत चाचा।।
चाचा आप हमें इस पेड़ और मंदिर के बारे में क्या बता सकते हैं?
चाचा- ये आपके हाथ में क्या है साहब?
ये एक छोटा सा टेप रेकार है चाचा। आप और मैं जो भी बात करेंगे वो इसमें रेकार्ड हो जाएगी।
चाचा- आप इसको रेडियो पर बजाएंगे... सब मेरी आवाज सुनकर हँसी बनाएंगे।
अरे नहीं। मैं इसको अपने साथ ले जाऊँगा और फिर सारी बातें कागज पर बाद में आराम से लिख लूंगा।
चाचा- अखबार में छापेंगे?
हाँन कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। मैं आपके गाँव और इस पेड़ पर एक कहानी लिख रहा हूँ। आपकी और मेरी बातों को मैं वापिस जाकर आराम से सुनँगा और फिर आराम से लिखेंगा।
चाचा- बढ़िया चीज है।
सो तो है। हाँ तो आप हमें गाँव के बारे में क्या बता सकते है... आप हमेशा यहीं रहे हैं?