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“साले मेरी गाण्ड का मार मार कर भोसड़ा तूने बना दिया है और पूछ उस लौंधे से रहा..." शिखा ने अपने ऊपर चढ़े हुए आदमी से पूछा।
वो उल्टी पड़ी हुई थी और कोहनियों के बल अपना चेहरा उठाकर सिगरेट के कश लगा रही थी। एक आदमी उसके ऊपर चढ़ा हुआ उसकी गाण्ड मार रहा और दूसरा उसके सामने बैठा अपना लण्ड हिला रहा था। तीनों पूरी तरह से नंगे थे।
“क्या करूं जानेमन?” उसके ऊपर चढ़ा हुआ आदमी तेजी से धक्के लगाता हआ बोला- “तेरी गाण्ड है ही इतनी मस्त..."
वैसे एक बात बता... ये साले लौंधे तेरे इश्क़ में इतने बावले हो कैसे जाते हैं की अपना सब कुछ छोड़कर तेरे कहे पर चल देते हैं...” सामने बैठे आदमी ने पूछा
बिस्तर पर जन्नत दिखाती हूँ ना सालों को। और बस.. वहीं मेरे कदमों में बिछ जाते हैं..” शिखा हँसते हुए बोली।
मानना पड़ेगा। ये चौथा था जो तेरे इश्क़ में पागल हो रहा था। इससे पहले के तीन भी साले मरे जा रहे थे तुझे अपनाने को..."
वो दूसरे वाले के पास से पैसे आ गये...” शिखा बोली।
हाँ.. आ गये ना... जितने माँगे थे उतने ही आए। वो तीनों साले सोचते हैं की उनके हाथ से तुझे गोली लगी है। और बचने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं..” सामने बैठा आदमी बोला।
ये अजय नाम के लौंडे के पास भी टेप कल भिजवा दूंगा मैं। फिरौती कितनी मांगू इससे?” शिखा के ऊपर चढ़े हुए आदमी ने जोर से धक्का मारते हुए कहा।
आराम से बहनचोद..” शिखा चिल्लाई- “दर्द होता है। तेरी माँ की गाण्ड नहीं है ये, मेरी है। आराम से मार। और ये चौथा वाला इतना रईस नहीं है। इससे रकम ज्यादा मोटी मत माँगना नहीं तो सारा मामला खराब हो जाएगा। पहली माँग थोड़ी कम ही रखो, अगर साले की जेब से निकल आए तो बाद में देखेंगे...”
वैसे कमाल है तू...” शिखा ने सिगरेट बुझाई तो सामने बैठा आदमी आगे बढ़कर उसके करीब आ गया- “मरने का नाटक ऐसे करती है की अगर हमें पता ना हो के ये सारा बना बनाया खेल है तो हमें भी यही लगेगा की मर गई तू..” उसने आगे बढ़कर अपना लण्ड शिखा के मुँह की तरफ बढ़ाया।
और तू साले...” शिखा इशारा समझते हुए लण्ड मुँह में लेते हुए बोली- “वो रंग थोड़ा कम डालाकर पीछे से। मेरे जिश्म में भी आम इंसानो जितना खून है, कोई 4-5 लीटर ज्यादा नहीं है। इतना रंग बिखेर देता है की देखने। वाले को लगेगा की जैसे कोई भैंस मरी हो यहाँ..."
पहला वाला अब तेजी के साथ उसकी गाण्ड पर धक्के लगा रहा था।
-
गाण्ड में मत झड़ना... बाहर निकालना...” शिखा ने एक पल के लिए लण्ड मुँह से निकालकर कहा।
वैसे एक बात बता...” जिसका लण्ड वो चूस रही थी उस आदमी ने कहा- “इन चारों लौंडों से चुदवाया तूने?”
“हाँ... और क्या यूँ ही मेरे इश्क़ में मरे जा रहे थे ये...” शिखा हँसकर बोली- “इन चारों के हिसाब से ये पहले मर्द थे जिन्होने एक सीधी साधी, पाक शरीफ लड़की के जिश्म को छुआ था..”
तीनों जोर से हँस पड़े।
और गाण्ड... वो भी मरवाई?” जो आदमी गाण्ड मार रहा था उसने पूछा।
नहीं मेरे राजा..” शिखा पीछे हाथ करके उसके चेहरे को थपथपाते हुए बोली- “ये तो सिर्फ तेरी है। बुक करा रखी है ना तूने। पेटेंट है तेरा। ये कोई कैसे मार सकता है...”
तीनों फिर जोर से हँसे।
गाण्ड नहीं मरवाई... वरना फिर सालों को शक हो सकता था की मैं बिस्तर पर खेली खाई हैं। उनके लिए मैं एक मासूम लड़की हूँ जिसकी ज़िंदगी में वो सब पहले मर्द थे।
थोड़ी देर के लिए तीनों चुप हो गये और चुदाई पूरे जोरों पे चल पड़ी। उसके ऊपर चढ़े हुए आदमी ने हाँफना शुरू कर दिया था और पूरी जान से गाण्ड पर धक्के मार रहा था। सामने वाला आदमी अपने घुटनों पर खड़ा शिखा के मुँह में लण्ड अंदर बाहर कर रहा था।
गाण्ड में निकाल दिया क्या साले...” धक्के पड़ने बंद हुए तो शिखा ने चौंक कर पूछा।
नहीं अभी निकाला नहीं है। जरा साँस तो पकड़ लँ...”
अब अगला पड़ाव कहाँ..” सामने वाले आदमी ने पूछा।
फिलहाल तो उस अजय को टेप भिजवाओं और फिर इस शहर से निकलते हैं। देखते हैं अगला शिकार कहाँ मिलता है...” कहकर शिखा फिर लण्ड चूसने लगी।
आज सँडविच स्टाइल हो जाए... चूत और गाण्ड में लण्ड एक साथ..” मुश्कुराते हुए शिखा ने सामने वाले आदमी से कहा और आँख मार दी।
***** समाप्त *****
वो उल्टी पड़ी हुई थी और कोहनियों के बल अपना चेहरा उठाकर सिगरेट के कश लगा रही थी। एक आदमी उसके ऊपर चढ़ा हुआ उसकी गाण्ड मार रहा और दूसरा उसके सामने बैठा अपना लण्ड हिला रहा था। तीनों पूरी तरह से नंगे थे।
“क्या करूं जानेमन?” उसके ऊपर चढ़ा हुआ आदमी तेजी से धक्के लगाता हआ बोला- “तेरी गाण्ड है ही इतनी मस्त..."
वैसे एक बात बता... ये साले लौंधे तेरे इश्क़ में इतने बावले हो कैसे जाते हैं की अपना सब कुछ छोड़कर तेरे कहे पर चल देते हैं...” सामने बैठे आदमी ने पूछा
बिस्तर पर जन्नत दिखाती हूँ ना सालों को। और बस.. वहीं मेरे कदमों में बिछ जाते हैं..” शिखा हँसते हुए बोली।
मानना पड़ेगा। ये चौथा था जो तेरे इश्क़ में पागल हो रहा था। इससे पहले के तीन भी साले मरे जा रहे थे तुझे अपनाने को..."
वो दूसरे वाले के पास से पैसे आ गये...” शिखा बोली।
हाँ.. आ गये ना... जितने माँगे थे उतने ही आए। वो तीनों साले सोचते हैं की उनके हाथ से तुझे गोली लगी है। और बचने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं..” सामने बैठा आदमी बोला।
ये अजय नाम के लौंडे के पास भी टेप कल भिजवा दूंगा मैं। फिरौती कितनी मांगू इससे?” शिखा के ऊपर चढ़े हुए आदमी ने जोर से धक्का मारते हुए कहा।
आराम से बहनचोद..” शिखा चिल्लाई- “दर्द होता है। तेरी माँ की गाण्ड नहीं है ये, मेरी है। आराम से मार। और ये चौथा वाला इतना रईस नहीं है। इससे रकम ज्यादा मोटी मत माँगना नहीं तो सारा मामला खराब हो जाएगा। पहली माँग थोड़ी कम ही रखो, अगर साले की जेब से निकल आए तो बाद में देखेंगे...”
वैसे कमाल है तू...” शिखा ने सिगरेट बुझाई तो सामने बैठा आदमी आगे बढ़कर उसके करीब आ गया- “मरने का नाटक ऐसे करती है की अगर हमें पता ना हो के ये सारा बना बनाया खेल है तो हमें भी यही लगेगा की मर गई तू..” उसने आगे बढ़कर अपना लण्ड शिखा के मुँह की तरफ बढ़ाया।
और तू साले...” शिखा इशारा समझते हुए लण्ड मुँह में लेते हुए बोली- “वो रंग थोड़ा कम डालाकर पीछे से। मेरे जिश्म में भी आम इंसानो जितना खून है, कोई 4-5 लीटर ज्यादा नहीं है। इतना रंग बिखेर देता है की देखने। वाले को लगेगा की जैसे कोई भैंस मरी हो यहाँ..."
पहला वाला अब तेजी के साथ उसकी गाण्ड पर धक्के लगा रहा था।
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गाण्ड में मत झड़ना... बाहर निकालना...” शिखा ने एक पल के लिए लण्ड मुँह से निकालकर कहा।
वैसे एक बात बता...” जिसका लण्ड वो चूस रही थी उस आदमी ने कहा- “इन चारों लौंडों से चुदवाया तूने?”
“हाँ... और क्या यूँ ही मेरे इश्क़ में मरे जा रहे थे ये...” शिखा हँसकर बोली- “इन चारों के हिसाब से ये पहले मर्द थे जिन्होने एक सीधी साधी, पाक शरीफ लड़की के जिश्म को छुआ था..”
तीनों जोर से हँस पड़े।
और गाण्ड... वो भी मरवाई?” जो आदमी गाण्ड मार रहा था उसने पूछा।
नहीं मेरे राजा..” शिखा पीछे हाथ करके उसके चेहरे को थपथपाते हुए बोली- “ये तो सिर्फ तेरी है। बुक करा रखी है ना तूने। पेटेंट है तेरा। ये कोई कैसे मार सकता है...”
तीनों फिर जोर से हँसे।
गाण्ड नहीं मरवाई... वरना फिर सालों को शक हो सकता था की मैं बिस्तर पर खेली खाई हैं। उनके लिए मैं एक मासूम लड़की हूँ जिसकी ज़िंदगी में वो सब पहले मर्द थे।
थोड़ी देर के लिए तीनों चुप हो गये और चुदाई पूरे जोरों पे चल पड़ी। उसके ऊपर चढ़े हुए आदमी ने हाँफना शुरू कर दिया था और पूरी जान से गाण्ड पर धक्के मार रहा था। सामने वाला आदमी अपने घुटनों पर खड़ा शिखा के मुँह में लण्ड अंदर बाहर कर रहा था।
गाण्ड में निकाल दिया क्या साले...” धक्के पड़ने बंद हुए तो शिखा ने चौंक कर पूछा।
नहीं अभी निकाला नहीं है। जरा साँस तो पकड़ लँ...”
अब अगला पड़ाव कहाँ..” सामने वाले आदमी ने पूछा।
फिलहाल तो उस अजय को टेप भिजवाओं और फिर इस शहर से निकलते हैं। देखते हैं अगला शिकार कहाँ मिलता है...” कहकर शिखा फिर लण्ड चूसने लगी।
आज सँडविच स्टाइल हो जाए... चूत और गाण्ड में लण्ड एक साथ..” मुश्कुराते हुए शिखा ने सामने वाले आदमी से कहा और आँख मार दी।
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