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Adultery प्यास बुझाई नौकर से

रूबी- हाँ शायद।

राम- तो दोस्ती में तो मालेकिन या बीवीजी नहीं बुला सकते ना आपको।

रूबी- तो क्या बुलाओगे?

रामू- रूबी जी।

रूबी मुश्कुराते हुए- “ठीक है पर किसी के सामने नहीं। वरना परेशानी खड़ी हो सकती है.."

राम- हम समझते हैं बीवीजी।

दोनों ऐसी ही नार्मल बातें करते रहे। तभी दीवार की घड़ी की आवाज आई और रूबी ने देखा की रात के 12:00 बज गये हैं। बातों-बातों में पता ही नहीं चला की इतना टाइम भी हो गया है।

इधर राम धीरे-धीरे अपने मकसद की ओर बढ़ने लगा और रूबी से उसकी पर्सनल बातें करने लगा। उधर रूबी सोचती है की रामू खुद ही आगे बढ़ रहा है धीरे-धीरे। वो भी तो यही चाहती थी की रामू खुद ही आगे बढ़े।

रामू- बीवी जी ओहह... माफ करना रूबी जी एक बात पुडूं?

रूबी- हाँ।

राम- आपको अपने पति की याद नहीं आती क्या?

रूबी- क्यों पूछ रहे हो?

राम- वैसे ही। नहीं बताना तो आपकी मर्जी पर नाराज मत होना।

रूबी- नहीं होती नाराज बाबा। आती है याद।

रामू- तो आप क्या करते हो?

रूबी- क्या करते हो मतलब?

राम- मेरा मतलब आपका दिल नहीं करता की आपके साथ हों आपके पति।

रूबी- करता तो है, पर क्या कर सकते हैं?

रामू- एक बात बोलूँ?

रूबी- बोलो।

राम- आप बुरा मन जाओगे। रहने दो।

रूबी- नहीं मानती राम्। बताओ क्या बोलना है?

रामू- नहीं हमें डर है आप कहीं हमारी दोस्ती ना तोड़ दो।

रूबी- नहीं तोड़ती, पूछ लो।

राम- मेरी कसम खाकर बोलो आप नाराज नहीं होंगे और दोस्ती नहीं तोड़ोगे।

रूबी को राम की कसम खाने की बात अपनी शर्म का पर्दा हटाने पे मजबूर कर रही थी, पता नहीं क्या बोलना

था उसने। लेकिन कहा- "नहीं नाराज होती मैं..."

रामू- मेरी कसम खाओ पहले की आप दोस्ती नहीं तोड़ोगे और गुस्सा नहीं करोगे।

रूबी हार मानते हुए- "ठीक है तुम्हारी कसम... ।

रामू- “क्या हम दोनों एक हो सकते हैं?" और रामू ने सीधा ही पूछ लिया था।

रूबी कुछ नहीं बोलती और चुप रहती है।
 
रूबी को राम की कसम खाने की बात अपनी शर्म का पर्दा हटाने पे मजबूर कर रही थी, पता नहीं क्या बोलना

था उसने। लेकिन कहा- "नहीं नाराज होती मैं..."

रामू- मेरी कसम खाओ पहले की आप दोस्ती नहीं तोड़ोगे और गुस्सा नहीं करोगे।

रूबी हार मानते हुए- "ठीक है तुम्हारी कसम... ।

रामू- “क्या हम दोनों एक हो सकते हैं?" और रामू ने सीधा ही पूछ लिया था।

रूबी कुछ नहीं बोलती और चुप रहती है।

रामू- मैंने बोला था रूबी जी आप नाराज नहीं होंगे। प्लीज बताइए ना?

रूबी अभी भी चुप रहती है। वो सोचती है की रामू के इस सीधे सवाल का कैसे जवाव दूं?

राम- हम मानते है की हम अनपढ़ और गँवार है। पर क्या हमें आपसे प्यार करने का हक नहीं है?

रूबी- रामू प्लीज ऐसा मत बोलो। तुम बहुत अच्छे हो।

राम- तो बीवीजी बताओ ना। हमें पता है आप भी हमसे प्रेम करते हो। तो क्या हम दोनों ऐसी ही तड़पते रहेंगे?

रूबी- पता नहीं।

रामू- रूबी जी हम आपसे बहुत प्रेम करते हैं। आप के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अपनी जान भी दे सकते हैं।

रूबी- चुप करो राम्... जान देने की बात मत करो।

रामू- तो बताओ ना रूबी जी। क्या आपको पाने का हमारा सपना इस जनम में पूरा नहीं हो सकता?

रूबी- पता नहीं राम्।

रामू- हमारी कसम खाकर बोलिए रूबी जी आप हमसे प्रेम नहीं करते क्या?

रूबी- रामू अपनी कसम मत खिलवाया करो।

रामू- बताइए ना बीवीजी।

रूबी- करते हैं।

राम- तो फिर हमारी बात का क्योंब नहीं देते?

रूबी- कौन सी बात?

रामू- हमर मिलन कब होगा?

रूबी- क्या यह सब होना जरूरी है हमारे बीच?

राम- रूबी जी प्रेम की आखिरी मंजिल दो जिस्मों का एक होना होता है। और मैं अपनी आखिरी मंजिल पाना चाहता हूँ।

रूबी- जरूरी तो नहीं है ऐसा हो। प्रेम तो दो दिलों का मेल होता है।

राम- दो दिलों का मेल जरूर होता है। लेकिन यह दो दिल मर्द और औरत होते हैं। दोनों के दिल आपस में इसीलिए मिलते हैं ताकी वो अपनी-अपनी मंजिल हासिल कर सकें।

रूबी कुछ देर चुप रहने के बाद- “बातें तो बड़ी ज्ञान वाली करते हो तुम..."

रामू- जो सच है रूबी जी वही बातें करता हूँ। आप अपने मन से पूछिये क्या आप अपनी मंजिल पाने के लिए तड़प नहीं रही?

रूबी को समझ में नहीं आता वो क्या बोले?
 
राम- बताओ ना रूबी जी। हम दोनों अपनी मंजिल कब पा सकते हैं। प्लीज बताओ ना आपको मेरी कसम है।

रूबी- पता नहीं राम। अभी जैसे चलता है चलने दो। मुझे नहीं पता क्या होना है आगे? वैसे भी मम्मीजी घर पे होती हैं तो ऐसा कुछ नहीं हो सकता। मुझे वो कभी भी अकेला नहीं छोड़ती।

रामू- तो इसका मतलब हमारा कभी मिलन नहीं होगा?

रूबी- शायद।

राम- नहीं रूबी जी, मैं अपने प्रेम को ऐसे खतम नहीं होने दे सकता।

रूबी- “रामू, लाइफ में हरेक काम करने को टाइम होता है। जब हमारा टाइम आएगा तब देखेंगे। अभी तो कुछ नहीं हो सकता..."

रामू- अगर कुछ नहीं तो थोड़ा सा तो हो सकता है ना। मैं कल को फिर से सफाई करने घर आ रहा हूँ।

रूबी- नहीं रामू ऐसा मत करो। और थोड़ा सा क्या मतलब? अभी तुम आराम करो।

रामू- नहीं रूबी जी। मैं कल आऊँ और मुझे आपका साथ चाहिए।

....

रूबी- कैसा साथ? प्लीज... ऐसा कोई काम ना करना जिससे मैं किसी मुसीबत मेंस जाऊँ। देखो तुमने प्रामिस किया था और अब तुम इसे तोड़ रहे हो।

राम- घबराइये मत रूबी जी। मैं आपकी मर्जी की बिना कोई ऐसा वैसा काम नहीं करूंगा। बस आप कल सफाई के टाइम हमारा साथ दीजिएगा।

रूबी- ठीक है। अगर तुम अपना वादा कायम रखते हो तो हमें कोई प्राब्लम नहीं है।

रामू- आप बहुत अच्छी हो रूबी जी।

*****

*****
 
रूबी- तुम भी। अच्छा अब मैंने सोना है। मुझे नींद आ रही है।

राम- अच्छा ठीक है सो जाओ। पर एक बात का जवाब दे दो पहले। मेरी तो जान निकल रही है आपके बिना। आपको पता नहीं कैसे नींद आ रही है।

रूबी- क्या पूछना है जल्दी बोलो?

रामू- मालिक का क्या साइज है?

रूबी- साइज? क्या मतलब?

रामू- आपको पता है की मैं क्या पूछ रहा हूँ।

रूबी- सच में नहीं पता। शर्ट की बात कर रहे हो?

रामू- लण्ड की बात कर रहा हूँ। कितना साइज है मालिक का?

रूबी शर्मा जाती है।

रामू- बताओ ना?

रूबी- शट-अप राम्।

राम- रूबी जी यह तो हम दोनों के बीच की बात है। इससे तो आपकी लाइफ में कोई मुश्किल नहीं आएगी।

रूबी- पता नहीं।

राम- बताओ ना रूबी जी। मेरी कसम... मैंने भी सोना है।

रूबी- तुम यह क्यों पूछ रहे हो?

राम- वो इसलिए क्योंकी हरेक तगड़े मोटे लण्ड के मालिक को अपने लण्ड पे मान होता है। वैसे ही मेरे को है।

रूबी हँसते हुए- “तुम्हें क्यों मान है?"

राम- वो इसलिए क्योंकी मुझे नहीं लगता हमारे गाँव में किसी का मेरे साइज का लण्ड होगा।

रूबी- तुम कितनी गंदी बातें करते हो। तुम्हें शर्म नहीं आती एसे शब्द इस्तेमाल करते हुए?

राम- शर्म की क्या बात है? बताओ ना मालिक का क्या साइज है?

रूबी हिचकचाते हुए- “5°s इंच..."

रामू- क्या सिर्फ पाँच इंच?

रूबी- सिर्फ का क्या मतलब?

रामू- “अच्छा हुआ उस दिन आपने मुझे घायल कर दिया। वर्ना उस दिन आपकी सिसकियां पूरे घर में गूंजती.." रामू को अपने लण्ड पे मान महसूस हो रहा था। उसका 9" इंच का लण्ड तो रूबी की चूत को फाड़ ही देगा। अच्छा हुआ उस दिन रूबी को चोद नहीं पाया, वर्ना मुसीबत गले पड़ जाती।

रूबी- ऐसा क्या है जो बोल रहे हो?

रामू- मेरी जान क्या तुम सच में इतनी भोली हो जो तुम्हें कुछ भी नहीं पता है

रूबी रामू के मुँह से जान शब्द सुनकर शर्मा जाती है- “मुझे नहीं पता क्या बोल रहे हो?"

राम- अच्छा यह बताओ उस दिन आपने अपने चूतरों पे मेरे लण्ड को महसूस तो किया ही होगा।

रूबी- हाँ।

राम- तो आपको इसका अंदाजा नहीं है की मेरा साइज आपके पति से बड़ा है?

रूबी- पता नहीं।

रामू- बताओ ना... शर्माओ मत। आपको मेरा लण्ड आपके चूतरों पे महसूस हुआ था ना?

रूबी- हाँ।

रामू- तो आपको क्या साइज लगता है इसका?

रूबी- श-श-शायद 6" इंच।

रामू रूबी की मासूमियत पे हँस पड़ता है- “आपको कुछ नहीं पता.."

रूबी- तो?

राम- तो कुछ नहीं मेरी जान। मेरा लण्ड तो आपके बारे में सोचकर टाइट हो गया है। सच में अगर आपने एक बार इसका स्वाद चख लिया तो कभी इसे भूल नहीं पाओगी।

रूबी- इतना गरूर है अपनी मर्दानगी पे?

रामू- सच में रूबी जी। मर्द हूँ और अपने ऊपर गरूर भी है। जब आप चुदवाओगी तब खुद जान जाओगी। अभी आप पूरी तरह औरत नहीं बनी हो। मैं आपको औरत होने का पूरा एहसास दिलाऊँगा। यह मेरा बचन है।

रूबी- पता नहीं

हवा में बातें करते हो या फिर पक्के खिलाड़ी हो। इससे पहले किसी के साथ किया है क्या?

रामू- सच बताऊँ जा झूठ?

रूबी- एक-दोस्त होने के नाते सच सुनना चाहती हूँ।

राम- मैंने पंजाब में तो नहीं किया कुछ। पर हमारे गाँव में मैंने 12 को भोगा है। जिसमें लड़कियां और भाभियां भी है।
 
राम- मैंने पंजाब में तो नहीं किया कुछ। पर हमारे गाँव में मैंने 12 को भोगा है। जिसमें लड़कियां और भाभियां भी है।

रूबी हैरान होते हुए- “बाप रे... तुमने इतनी लड़कियों से बंध बनाए?

रामू- हाँ। और आज भी जब घर जाता है तो वो दुबारा चुदवाती हैं।

रूबी- इसका मतलब तुम पक्के खिलाड़ी निकले।

राम- आजमा के देख लो।

रूबी- लड़कियां तो मान ली, पर शादीशुदा क्यों? उनके पति भी कही दूर काम करते हैं क्या?

राम- नहीं रूबी जी। उन्हें मेरा पसंद है।

रूबी- तुम्हें कैसे पता?

रामू- वो बार-बार मेरे पास इसीलिए आती है क्योंकी उनके पति उनको संतुष्ट नहीं कर पाते। अगर वो संबंध बनाते हैं तो जल्दी झड़ जाते है 5 मिनट में।

रूबी सोचती है- “लखविंदर भी तो इतना ही टाइम निकाल पता है, तो क्या रामू ज्यादा टाइम निकालता होगा?"

रामू- रूबी जी सच में आप एक बार मुझे मौका दो, आपको निराश नहीं करूंगा। सच में आपकी चूत को अभी तक 5" इंच की आदत होगी। जब मेरा 9" इंच का आपके चूत में जाएगा तब आप पूरी कली से फूल बन जाओगी।

रूबी को अपने कानों पे विश्वाश नहीं होता, जो उसने सुना था। क्या किसी आदमी का 9" इंच का भी हो सकता है? जब लखविंदर का 5" इंच चूत के अंदर गया था तो काफी दर्द हुआ था। अब 9" इंच का उसकी छोटी सी चूत कैसे झेल पाएगी?

दोनों थोड़ी सी और बातें करते हैं। दोनों को एक बात तो पूरी तरह समझ में आ गई थी की दोनों मिलने के लिए तैयार हैं पर टाइम देखना पड़ेगा।

रामू खुश था की आखीरकार, इतना तो पक्का है के रूबी चुदवाने से मना नहीं कर रही। पर बड़ी मालेकिन के कारण अभी उसे खुद भी कंट्रोल करना पड़ेगा। क्योंकी बड़ी मालेकिन के घर में होते हुए रूबी चुदवाने का रिस्क नहीं लेगी। रामू के मन में यह सोचते हए लड्डू फूट रहे थे की उसके लण्ड को पंजाबन जट्टी की टाइट चूत मिलने वाली है। रामू सोच रहा था की रूबी के चूतर कितने विशाल हैं। जब वो चलती है तो दोनों चूतर आपस में रगड़ खाते हैं।

लखविंदर के 5 इंच के लण्ड से रूबी की अंदर की आग शांत कैसे हो पाई होगी? इतनी मोटी गाण्ड के लिए तो उसके जैसे मोटा 9" इंच का लण्ड ही काबू कर सकता है। उसने सोच लिया की जब रूबी उससे पहली बार चुदवाएगी तो वो उसे अच्छी तरह संतुष्ट करेगा। जिससे अगली बार वो खुद उससे चुदवाने को आए। रामू आँखें बंद किए रूबी की टाइट चूत की कल्पना करने लगा और अपने लण्ड को हाथ में लेकर मसलने लगा।
 
उधर रूबी भी पैंटी में हाथ डालकर अपनी चूत का जायजा लेने लगी और सोचने लगी की इतनी छोटी सी चूत में रामू का कैसे झेल पायेगी? साथ ही साथ वो रामू के 9" इंच के लण्ड को इमेजिन करने लगी और उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। रूबी रामू के लण्ड को सोचते-सोचते अपनी चूत की आग ठंडी करने लगी। कुछ देर बाद दोनों को नींद आने लगी और कल एक दूसरे को मिलने का वादा करके सो गये।

रामू अगले दिन सफाई के टाइम पे घर में आ जाता है।

कमलजीत- रामू तू क्यों आया? ठीक हो गया क्या?

राम- हाँ जी बीवीजी। हम ठीक हैं अब।

कमलजीत- अच्छा। देख ना इधर तुम बीमार पड़ गये तो रूबी भी मायके से वापिस आ गई, मेरा हाथ बटाने के लिए। चल अच्छा है अब तू ठीक है तो।

कमलजीत रूबी को आवाज लगाती है और रामू से काम करवाने को बोलती है। काम का तो बहाना था। असल में रूबी और राम तो मिलना चाहते थे। रूबी के दिमाग में था की पता नहीं रामू आज क्या करेगा? दिल तो उसका कर रहा था की रामू उसके होंठों का रस पिए और उभारों को निचोड़ डाले। पर उसे अपनी औरत की मर्यादा का उलंघन नहीं करना था। जो भी करना था राम को ही करना था। वो तो बस उसका मजा लेना चाहती थी। रूबी अपने कमरे से बाहर आती है और रामू से नजरें मिलती है। उसे कल की रामू से की हुए बातें याद आती है और शर्मा जाती है।

राम रूबी को देखता ही रहता है। आखीरकार, इस हसीना को भोगने का मौका काब मिलेगा। मिलेगा तो जरूर बस सबर रखना होगा। जब तक वो दोनों अकेले घर में नहीं होंगे, तब तक तो मुश्किल है।

इधर रूबी राम को काम समझाकर खुद भी जानबूझ के अपने आप को काम में बिजी कर लेती है। उसे लगता है की अगर वो फ्री रही तो कहीं मम्मीजी उसको अपने से बातें करने को ना बुला लें। अगर वो अपने आपको बिजी शो करेगी तो मम्मीजी कभी ना कभी उन दोनों को अकेला छोड़ सकती है। इसलिये रूबी जानबूझ कर अपने कमरे में समान को इधर-उधर करने लगती है।
 
इधर रूबी राम को काम समझाकर खुद भी जानबूझ के अपने आप को काम में बिजी कर लेती है। उसे लगता है की अगर वो फ्री रही तो कहीं मम्मीजी उसको अपने से बातें करने को ना बुला लें। अगर वो अपने आपको बिजी शो करेगी तो मम्मीजी कभी ना कभी उन दोनों को अकेला छोड़ सकती है। इसलिये रूबी जानबूझ कर अपने कमरे में समान को इधर-उधर करने लगती है।

रामू का ध्यान अपने काम में कम और किचेन की तरफ ज्यादा था, जहां पे कमलजीत अपना काम कर रही थी। ना जाने कब कमलजीत उसे मौका देगी रूबी से मिलने का? किचेन का काम खतम करने के बाद आखीरकार, उन दोनों को मौका मिलता है।

कमलजीत- रूबी क्या कर रही हो?

रूबी- कुछ नहीं मम्मीजी, बस कमरे का समान ठीक से रख रही हूँ।

कमलजीत- अच्छा जब फ्री हो गई तो आ जाना। मैं बाहर बैठकर अखबार पढ़ने लगी हैं

रूबी- ठीक है मम्मीजी।

आखीरकार, कमलजीत घर के बाहर बरामदे में बैठकर अखबार पढ़ने लगती है। कमलजीत के जाने के बाद रूबी अब इंतेजार करती है की कब राम उसकी तरफ बढ़ेगा। अपने आपको काम में बिजी शो करती है।

इधर रामू से ज्यादा इंतेजार नहीं होता और कमलजीत के बाहर जाते ही एक-दो मिनट में वो रूबी के कमरे की तरफ दबे पैर बढ़ता है और रूबी के कमरे में दाखिल होता है। रूबी का ध्यान उसकी तरफ ही था और उसे राम के अपने कमरे में दाखिल होने की आहट हो जाती है। राम कुछ देर रूबी को काम करते देखता रहता है। इधर रूबी समझ नहीं पा रही थी के राम अब आगे क्यों नहीं बढ़ रहा। और तभी।

रामू- रूबी जी।

रामू के मुँह से अपना नाम सुनकर रूबी की सांस गले में ही अटक जाती हैं। उधर रामू रूबी के पीछे खड़ा हो जाता है। उन दोनों में बस थोड़ा सा ही फासला होगा।

रामू- रूबी जी।

रूबी को कल की हुई बातें याद आती हैं, और वो रामू का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। उसे शर्म आ रही होती है की कैसे उसने कल उत्तेजित होकर चुदवाने और लण्ड की बातें की थी। रूबी का कोई रेस्पान्स नहीं मिलता देखकर रामू आगे बढ़कर रूबी का हाथ थाम लेता है और उसको अपनी तरफ खींचता है। इस खींचतान में रूबी रामू के बिल्कुल आमने सामने खड़ी हो जाती है। हालांकी उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया हुआ था। रामू समझ जाता है की रूबी शर्मा रही है।

रामू रूबी के चेहरे को थोड़ा ऊपर करता है। रामू इस हसीन चेहरे को देखता ही रह गया। कितना खूबसूरत चेहरा है रूबी का। मोटी आँखें, गुलाबी होंठ। जिनका रामू ने उस दिन रस पिया था। आज वो होंठ उसे फिर से इन्वाइट कर रहे थे। राम आगे बढ़ता है और अपने होंठ रूबी के होंठों पे रखने का प्रयास करता है। तभी रूबी पीछे हट जाती है।

रामू- क्या हुआ रूबी जी?

रूबी कुछ नहीं बोलती बस शर्माकर अपना चेहरे नीचे को ही रखती है।

रामू- कुछ तो बोलिए रूबी जी। उस दिन भी तो हमने किया था, आपको अच्छा नहीं लगा था क्या?

रूबी- नहीं रामू तुमने वादा किया था की मेरी मर्जी के बिना कुछ नहीं करोगे।

रामू- “रूबी जी वो तो चोदने की बात की थी... और रामू जानबूझ के चोदने जैसे शब्द इश्तेमाल करता है। जिससे रूबी धीरे-धीरे उसके साथ खुलना शुरू हो जाए।

उधर रूबी चोदने वाला शब्द सुनकर शर्म से पानी-पानी हो जाती है।

राम- अगर आपको डर है की हम अपने ऊपर काबू नहीं कर पाएंगे तो हम आपकी कसम खाकर बोलते हैं आपको दिक्कत नहीं होने देंगे कोई भी। आपको मेरी कसम कुछ तो बोलिए?
 
रूबी नजरें नीचे झुकाए हुए हिम्मत करके धीरे से बस इतना ही बोलती है- "दा-अ-र-वा-जा...

रामू- क्या रूबी जी?

रूबी- रामू दरवाजा।

राम समझ जाता है की रूबी पहले दरवाजा थोड़ा सा बंद करने को बोल रही है। ताकी अगर कमलजीत घर के अंदर आ जाए तो उसकी नजर उन दोनों पे सीधे ना पड़े। राम झट से दरवाजा थोड़ा सा बंद कर देता है। और वापिस आकर रूबी के चेहरे को अपने हाथों में ले लेता है और ऊपर की ओर उठाता है।

इधर रूबी शर्माकर अपनी आँखें बंद कर लेती है और राम के होंठों का इंतेजार करती है। तभी उसे रामू के गरम होंठों का स्पर्श अपने गुलाबी होंठों पे महसूस होता है। रामू अपने होंठ अच्छे से रूबी के होंठों से चिपका देता है। कुछ सेकेंड दोनों ऐसे ही रहते हैं, और फिर रूबी अपने को रामू से अलग करती है और आँखें खोलती है और रामू की आँखों में देखती है।

रामू रूबी की आँखों में देखते हुए- “कैसा लग रहा है मेरी जान को?"

रूबी जान शब्द सुनकर शर्माकर आँखें नीचे कर लेती है। लेकिन रामू फिर से उसके चेहरे को ऊपर करके अपने होंठ दुबारा उसके होंठों में डाल देता है और धीरे-धीरे रूबी के मीठे होंठों का रस पीने लगता है। रूबी भी धीरे-धीरे उसका साथ देने लगती है। रामू का स्पर्श रूबी पे जादू करने लगा था। वो चाहती थी की रामू उसके होंठों को अच्छी तरह चूस ले। रामू रूबी की गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को प्यार से भोग रहा था। दोनों के जिस्मों में गर्मी बढ़ने लगी थी।

रामू ने धीरे-धीरे अपनी जुबान को रूबी के होंठों के भीतर डाल दिया और रूबी की जुबान से सटा दिया। रूबी रामू के इस कदम से रामू के साथ और खुल गई। दोनों एक दूसरे की लार को भी चाटने लगे थे। अब तो रूबी की झिझक भी धीरे-धीरे खतम होने लगी थी। रामू ने तो उस पे जादू कर दिया था। इधर रामू बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाएं कंट्रोल में कर रहा था। उसका दिल तो कर रहा था की वो अभी इस हसीना को बेड पे लेटा के चोद दे। पर नहीं वो पहले वाली गलती नहीं करेगा। जब तक कमलजीत जा हरदयाल में से कोई एक घर पे है, रूबी को चोदने का जोखिम नहीं ले सकता है।

रूबी की टाइट चूत उसका 9 इंच का लण्ड जल्दी नहीं झेल पाएगी। उसको टाइम लगेगा इसके साइज को अपने अंदर लेने में। और मालेकिन के होते हुए उनके पास टाइम कम था। इधर रूबी को रामू का टाइट लण्ड अपने पेट पे महसूस होता है और वो घबरा जाती है, और रामू से अलग हो जाती है। उसकी नजर रामू के तने हुए पायजामे पे थी। रामू रूबी की इस हरकत पे हैरान रह जाता है। रामू रूबी की हालत समझ जाता है।

राम- रूबी जी क्या हुआ?

रूबी- रामू तुमने कहा था की तुम मेरी मर्जी के वगैर कुछ भी नहीं करोगे।

रामू रूबी की कमर में हाथ डालता है और अपनी तरफ खींचकर कहता है- “अरे मेरी जान मैंने आपकी कसम खाई है। मेरे ऊपर विश्वाश रखो, मैं कुछ नहीं करूंगा। आपकी इज्जत का ख्याल है मुझे..” और फिर से होंठों को रूबी के होंठों में रख देता है और रसपान करने लगता है।

रूबी को राम के दुबारा विश्वाश दिलाने से तसल्ली होती है, और वो भी खुद को राम को समर्पित कर देती है। रामू रूबी के गुलाबी होंठों का भरपूर मजा ले रहा था। रूबी अब और ज्यादा खुलने लगी थी। उसने अपनी बाहें रामू की गर्दन से लपेट ली। रामू रूबी के इस कदम से खुश हो गया। उसे लगा कि यह अच्छा मौका है आगे बढ़ने का और वो अपने एक हाथ को रूबी के चूतड़ों पे ले जाता है और एक चूतर को हथेली में लेकर मसलने लगता है। रूबी रामू के इस वार को सह नहीं पाती और अपने होंठों को राम के होंठों में और धकेलने लगती है। रामू का हाथ रूबी के चूतरों का अच्छे से जायजा ले रहा था।

रूबी की चूत अब पानी छोड़ने लगी थी। रामू के कठोर हाथ रूबी की गाण्ड को अब जोर-जोर से मसलने लगे थे। दोनों बेपरवाही से एक दूसरे का रस पीने में व्यस्त थे। अब रूबी और राम के बीच में से हवा जाने के लिए भी जगह नहीं बची थी। दोनों में से किसी को टाइम का अंदाजा नहीं था। रूबी की चूत में तो मानो आग लगी थी। रूबी अपना कंट्रोल खो देती है और बेतहाशा रामू के होंठों को चूसने लगती है।

रामू अब अपने होंठों को चुसवाने का भरपूर मजा ले रहा था। उसने तो जादू कर दिया था रूबी पे। ऊपर से रूबी होंठों का रस पी रही थी, तो नीचे रामू के हाथ उसके चूतरों पे घूम रहे थे। तभी घर के दरवाजे के खुलने की आवाज आती है। राम रूबी को एक झटके से अपने से अलग करता है।

रूबी रामू की इस हरकत को समझ नहीं पाती। वो तो अपनी चरम सीमा पे पहँचने वाली थी। पर अचानक राम ने खेल को बीच में ही क्यों रोक दिया?
 
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