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रूबी और रामू घबरा जाते हैं और चुपचाप सुनने की कोशिश करने लगते है की बाहर कौन आया होगा? तभी उनको हरदयाल की आवाज सुनाई पड़ती है। दोनों घबरा जाते है और रामू जल्दी से काकरोच वाली स्प्रे करने लगता है। उधर रूबी अपना टाप पहनती है और अपने कपड़े ठीक करके सफाई में राम का हाथ बटाने लगती है
और मैं घर के आने के दरवाजे को चुपके से खोल देती है।
रूबी और रामू हैरान हैं की हरदयाल इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गया? रामू उनकी बातें ध्यान से सुनने लगता
कमलजीत- इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गये। ट्रैक्टर ठीक हो गया?
हरदयाल- नहीं अभी नहीं। तेल की टंकी में मिट्टी है। कल को मिलेगा। कल जाऊँगा इसी टाइम। तब मिलेगा।
कमलजीत- ठीक है जी।
हरदयाल- तुम बाहर बैठी हूँ। रूबी कहा है?
कमलजीत- वो तो काकरोच वाली स्प्रे कर रही है। आपको तो पता ही है की मुझे अलर्जी है स्प्रे से।
हरदयाल- "ठीक है मैं खुद ही पानी पी लेता हूँ अंदर जाकर..” कहकर हरदयाल अंदर आता है और रामू से बात करता है- "रामू स्प्रे हो गई क्या?"
रामू- बाबूजी, कर तो दी है। पर कल को एक बार फिर से करनी पड़ेगी।
रूबी उनकी बातें ध्यान से सुनती है। उसे समझ में नहीं आता की रामू कल दुबारा करने को क्यों बोल रहा है?
रामू यह सोचकर खुश है की कल भी हरदयाल को शहर जाना पड़ेगा और स्प्रे का बहाना तो उसने बना दिया है। तो कल भी उसे रूबी के जिश्म से खेलने का समय मिलेगा। राम घर की बाकी सफाई करने के बाद अपने रूम में चला जाता है।
इधर रूबी भी अपना काम खतम करने के बाद नहा धोकर कमलजीत के पास आकर बैठ जाती है। कमलजीत से बातें करते-करते उसे पता चलता है की हरदयाल को कल भी शहर जाना पड़ेगा ट्रैक्टर को लाने के लिए। रूबी समझ जाती है की राम ने स्प्रे का बहाना क्यों बनाया होगा? रात को खाना खाने के बाद सभी बैठे टीवी देख रहे होते हैं, और राम फिर से रूबी को मिस काल मार देता है। रूबी अपने कमरे में आ जाती है और बेड पे लेटकर रामू से बातें करने लगती है।
रूबी अंजान बनते हए- "तुमने स्प्रे का बहाना क्यों बनाया कल के लिये। तुम्हें लगता है की कल भी तुम कुछ कर पाओगे?"
रामू- जी रूबी जी।
रूबी- क्यों ऐसे क्यों लगता है?
राम- कल मालिक शहर जा रहे हैं ट्रैक्टर लाने। तो कल भी हमारे पास टाइम होगा।
रूबी- बड़े चालक हो तुम तो राम्। शकल से तो मासूम लगते हो।
रामू- “अपने शैतान बना दिया है मुझे..."
दोनों हँस पड़ते हैं।
राम- रूबी जी अपने तो आज मेरा दिल जीत लिया।
रूबी- वो कैसे?
रामू- आज वासना में डूबे हुए आपने मुझे जान कहकर पुकारा था।
रूबी को कुछ याद नहीं होता। एक उत्तेजना में वो क्या-क्या बोल गई होगी।
रामू- रूबी जी एक बात बोलूँ?
रूबी- हाँ।
राम- आज मुझे यकीन हो गया की संभोग के मामले में आप अभी भी अनाड़ी है।
रूबी- तुम्हें क्यों लगा ऐसे?
राम- अभी तो मैंने अपनी उंगली आपकी चूत में भी नहीं डाली थी और आप झड़ भी गई।
और मैं घर के आने के दरवाजे को चुपके से खोल देती है।
रूबी और रामू हैरान हैं की हरदयाल इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गया? रामू उनकी बातें ध्यान से सुनने लगता
कमलजीत- इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गये। ट्रैक्टर ठीक हो गया?
हरदयाल- नहीं अभी नहीं। तेल की टंकी में मिट्टी है। कल को मिलेगा। कल जाऊँगा इसी टाइम। तब मिलेगा।
कमलजीत- ठीक है जी।
हरदयाल- तुम बाहर बैठी हूँ। रूबी कहा है?
कमलजीत- वो तो काकरोच वाली स्प्रे कर रही है। आपको तो पता ही है की मुझे अलर्जी है स्प्रे से।
हरदयाल- "ठीक है मैं खुद ही पानी पी लेता हूँ अंदर जाकर..” कहकर हरदयाल अंदर आता है और रामू से बात करता है- "रामू स्प्रे हो गई क्या?"
रामू- बाबूजी, कर तो दी है। पर कल को एक बार फिर से करनी पड़ेगी।
रूबी उनकी बातें ध्यान से सुनती है। उसे समझ में नहीं आता की रामू कल दुबारा करने को क्यों बोल रहा है?
रामू यह सोचकर खुश है की कल भी हरदयाल को शहर जाना पड़ेगा और स्प्रे का बहाना तो उसने बना दिया है। तो कल भी उसे रूबी के जिश्म से खेलने का समय मिलेगा। राम घर की बाकी सफाई करने के बाद अपने रूम में चला जाता है।
इधर रूबी भी अपना काम खतम करने के बाद नहा धोकर कमलजीत के पास आकर बैठ जाती है। कमलजीत से बातें करते-करते उसे पता चलता है की हरदयाल को कल भी शहर जाना पड़ेगा ट्रैक्टर को लाने के लिए। रूबी समझ जाती है की राम ने स्प्रे का बहाना क्यों बनाया होगा? रात को खाना खाने के बाद सभी बैठे टीवी देख रहे होते हैं, और राम फिर से रूबी को मिस काल मार देता है। रूबी अपने कमरे में आ जाती है और बेड पे लेटकर रामू से बातें करने लगती है।
रूबी अंजान बनते हए- "तुमने स्प्रे का बहाना क्यों बनाया कल के लिये। तुम्हें लगता है की कल भी तुम कुछ कर पाओगे?"
रामू- जी रूबी जी।
रूबी- क्यों ऐसे क्यों लगता है?
राम- कल मालिक शहर जा रहे हैं ट्रैक्टर लाने। तो कल भी हमारे पास टाइम होगा।
रूबी- बड़े चालक हो तुम तो राम्। शकल से तो मासूम लगते हो।
रामू- “अपने शैतान बना दिया है मुझे..."
दोनों हँस पड़ते हैं।
राम- रूबी जी अपने तो आज मेरा दिल जीत लिया।
रूबी- वो कैसे?
रामू- आज वासना में डूबे हुए आपने मुझे जान कहकर पुकारा था।
रूबी को कुछ याद नहीं होता। एक उत्तेजना में वो क्या-क्या बोल गई होगी।
रामू- रूबी जी एक बात बोलूँ?
रूबी- हाँ।
राम- आज मुझे यकीन हो गया की संभोग के मामले में आप अभी भी अनाड़ी है।
रूबी- तुम्हें क्यों लगा ऐसे?
राम- अभी तो मैंने अपनी उंगली आपकी चूत में भी नहीं डाली थी और आप झड़ भी गई।