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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

नेहा अब राज के ऊपर आ जाती है, और उसके सफेद बालों से भारी हुई छाती पर अपने कामल गोरे हाथ रखती हैं। नीचे उसकी चूत पर राज का काला लौड़ा दस्तक दे रहा था। उसके लण्ड के अहसास से ही नेहा पागल सी हो रही थी। वो अब धीरे से उसका लण्ड पकड़ती है और उसके ऊपर झुकते हुए अपनी तड़पती हुई चूत पर सेट. करती हैं, और उसपर दबाव डालने लगती है।

राज उसको और तड़पाने के मूड में आ। राज अपना लौड़ा उसकी चूत पर से हटाता है। जिसे महसूस करके नेहा राज की तरफ गुस्से से देखती है। लेकिन राज उसे अपने दाँत दिखाकर स्माइल करता है।

नेहा की हवस अब सिर पर चढ़ चुकी थी। वो अब किसी भी हालत में राज का काला लौड़ा अपनी चूत में लेना चाहती थी। निराशा में वो अब कहती है- "कमीने कही के... क्यों इतना तरसा रहे हो मुझे? बूढ़े तुमको समझ में नहीं आता जो में कह रही हूँ बार-बार। अपनी गर्लफ्रेंड को कोई इतना सताता है क्या?"

राज को मज़ा आ रहा था नेहा की निराशा देखकर। नेहा अपने गुस्से में अब थोड़ा झुक कर राज के हाथ बेड़ से टिका देती हैं और अपनी चूत उसके बड़े काले लौड़े पर सेट करती है, औरर अपनी चूत में अंदर लेने लगती है। लण्ड ऑड़ा चूत में जाते ही उसकी चूत को शांति मिलती है।

नेहा- "अहह... वो पूरी नंगी राज के बूढ़े शरीर पर थी। अब नेहा हल्के-हल्के राज के काले लण्ड पर ऊपर-नीचे होने लगती है- "अहह... अहह... राज को मजा आ रहा था , नेहा की हवस देखकर उसके लण्ड के लिए। नेहा उसके लण्ड पर ऊपर-नीचे हो रही थी।

बहुत हाट दृश्य चल रहा था। एक खूबसूरत जवान औरत एक बदसूरत काले बूढ़े से पागलों की तरह चुदवा रही थी। नेहा ऐसे ही 5 मिनट चुदने के बाद थोड़ा थक जाती है, तो सकती है। वो वैसे ही रुकी हुई थी की तभी उसको पीछे कोई आहट होती है। उसे महसूस होता है की पीछे कोई खड़ा है। नेहा ये नहीं देखती की राज के चेहरे पर एक कमीनी स्माइल आ जाती हैं।

*****

कड़ी_38

नेहा को पसीना आने लगता है डर के मारे की वो पकड़ी गई है एक गंदे बदसूरत बुड्ढे से चुदते हुए। वो भी ऐसे टाइम पर जब वो खुद पागलों की तरह राज के काले लौड़े पर अपनी चूत ऊपर-नीचे कर रही थी। नेहा को पीछे देखने तक हर लग रहा था। वो बस अपनी आँखें बंद कर लेती हैं। वो इस शर्मनाक सिंचयेशन का सामना नहीं करना चाहती थी। करती भी कैसे? क्योंकी वो इस वक्त एक काले गंदे बटे से चुदवा रही थी जैसे वो उसकी पत्नी हो। इतने बड़े घर की खूबसूरत जवान बहू होने का उसको जरा भी खयाल नहीं था ।

कुछ 10 सेसेंड के बाद कुछ ऐसा होता है जिससे नेहा की आँखें बड़ी हो जाती हैं। वो एकदम डर जाती है। एकदम चकित हो जाती है। ऐसी चीज जिसको उसने अपने सबसे बुरे सपने में भी नहीं सोचा था। नेहा को अपनी गाण्ड के छेद पर किसी का लण्ड महसूस होता है। वो डर के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी।

लेकिन अगले ही पल जब राज नीचे से एक धक्का लगाता है तो वो राज की तरफ देखती है। राज उसकी तरफ देखकर अपने पीले दाँत बाहर निकालकर स्माइल कर रहा था। वो कुछ बोलने ही वाली थी के पीछे खड़े आदमी के हाथ उसकी कमर पर आ जाते हैं, और उसके लौड़े का दबाव उसकी गाण्ड पर बढ़ जाता है। वा आदमी अपना लण्ड नेहा की गाण्ड पर घिसने लगता है।

नेहा की चूत में पहले से ही राज का लण्ड था और अब ऊपर से कोई उसकी गाण्ड पर अपना लौड़ा लगाए हुए था। उतने में ही राज फिर से एक धक्का नीचे से लगाता है। नेहा राज की तरफ हैरानी से देखती है। लेकिन राज उसकी फिकर किए बिना अब नेहा को चोदने लगता है। नेहा को समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? वो कुछ सोच पाती तब तक पीछे खड़ा आदमी अपना लौड़ा उसकी गाण्ड के छेद में डालने लगता है। नेहा को इसपर दर्द होने लगता है।

नेहा- अहह... छोड़ो मुझे कमीने... कौन हो तुम्म?

नेहा उतना बोल ही रही थी के वो आदमी एक जोरदार धक्के के साथ अपना लौड़ा उसकी गाण्ड में घुसा देता है। तकरीबन आधा लण्ड अंदर चला जाता है।

नेहा- "अहह.. मर गई मैं अहह.." और नेहा की गाण्ड का छेद उस आदमी के बड़े लण्ड से स्ट्रेच हो रहा था। नेहा दर्द में अब कराहने लगती है।

वो आदमी अब नेहा की पीठ पर अपने हाथ फेरते हुए नेहा को शांत करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन नेहा दर्द के मारे कराह रही थी। नेहा की आँखों से आंसू आने लगते हैं। जिसे देखकर राज उसके चेहरे को पकड़ता है और अपने होंठ चिपका देता है उसके लाल होंठों पर।

पीछे खड़ा आदमी भी अब धीरे-धीरे धक्के लगाने लगता है। नेहा की गाण्ड और चूत में दो बड़े-बड़े लण्ड थे वो

भी दो गंदे से बदसूरत बूढ़ों के। अब दोनों एक साथ चोदने लगते हैं नेहा को।

नेहा- "अहह... इह्ह अहह... अहह... अहह."

थोड़ी देर बाद राज किस तोड़ता है। लेकिन नेहा फिर भी दर्द से कराह रही थी। उसका दर्द कम ही नहीं हो रहा था। राज और वो आदमी बखूबी जानते भी इसकी वजह। नेहा पहली बार ऐसे दो लण्ड एक साथ ले रही थी इसलिए। दोनों के लण्ड थोड़ी देर में एक लय में अंदर-बाहर होने लगते हैं। ऐसे होने से नेहा का दर्द थोड़ा कम हो जाता है, और उसकी चीखें सिसकारियों में बदल जाती हैं।

नेहा- "अहह... अहह... हाय अहह... ही हाँ आहह... आश आहह... आहह... ओहह... अहह.."

पीछे खड़ा आदमी नेहा की गाण्ड मारते हुए थोड़ा झुक कर उसकी चूचियां पकड़कर मसलने लगता है, और नीचे से राज बस अपना लौड़ा नेहा की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। बहुत अजीब सिचुयेशन थी नेहा के लिए। उसकी दो-दो लण्ड से चुदाई हो रहीं औ, लेकिन उसे खुद पता नहीं था कि पीछे से कौन उसकी चुदाई कर रहा है।

नेहा- "अहह... अहह... ही हो अहह.."

राज की नेहा को ऐसा देखकर मजा आ रहा था। इन दोनों को भी अब मजा आ रहा था ऐसे नेहा की चुदाई करने में। नेहा के खूबसूरत चेहरे पर दर्द के अहसास के साथ-साथ अब संतोष का अहसास भी था। पीछे खड़ा आदमी अब नेहा के दोनों हाथ पकड़कर पीछे करता है, और तेज-तेज धक्के लगाने लगता है।

नेहा- "अहह... अहह... अहह.. धीरे: अहह... अहह.. अहह... आह्ह.. मर गई अहह.."

पीछे खड़े आदमी का बड़ा लण्ड नेहा को अपनी गाण्ड में इतना तेज अंदर-बाहर होने से उसे बहुत दर्द हो रहा था।

नेहा- "अहह... अहह... आह्ह... ओहह अहह.."

भले ही नेहा को दर्द हो रहा था, लेकिन उसकी इतने दिनों की प्यास बुझ रही थी। सोचिये की एक बड़े घर की खूबसूरत जवान बहू को दो गंदे बदसूरत लो-क्लास बूढ़े अपने बड़े काले लण्ड से चोद रहे हों।

दोनों ऐसे ही नेहा को 10 मिनट और चोदते हैं। आखिरी वक्त पर पीछे खड़ा आदमी नेहा की गाण्ड में झड़ जाता है। उसके काले लण्ड का रस नेहा की गाण्ड से बहने लगता है। वो आदमी रुकने के बाद नेहा की गाण्ड से अपना लौड़ा बाहर निकालता है। लेकिन नेहा वैसे ही पड़ी हुई थी राज के ऊपर थक कर। राज का लण्ड अभी भी नेहा की चूत में था। नेहा की चूचियां राज की छाती से दबी पड़ी थीं।

नेहा धक गई थी . दो-दो लण्ड से चुदने के बाद।

राज पड़े-बड़े नेहा की पीठ सहलाने लगता है, जिससे नेहा को भी अच्छा लग रहा था। तभी पीछे खड़ा आदमी नेहा की गाण्ड को सहलाता है। जिसके अहसास से ही नेहा झट से बेड पर बैठ जाती है। और जैसे ही उस आदमी की शकल देखती है तो हैरान रह जाती है। वो और कोई नहीं जय था.." ।

नेहा- "तुम्म.." और नेहा अपने मुँह पर हाथ रख लेती है। फिर वो राज की तरफ देखती है।

राज भी उसे देखने लगता है।

नेहा- "क्यों किया ऐसा मेरे साथ राज? मैंने तुम पर इतना भरोसा किया और तुमने मेरे साथ यह सब?" और नेहा की आँखों से आँस आने लगते हैं।

राज अब नेहा की तरफ आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर- "माफ कर दे मेरी जान... में बस तुझे सरप्राइज देना चाहता था.."

नेहा- ऐसा कोई सरप्राइज देता है क्या?

राज नेहा को गले लगाते हुए- "माफ कर दे जान." और नेहा राज के कंधे पर सिर रखता है।

उधर जय पीछे खड़ा अपना लौड़ा हिला रहा था। राज जय की तरफ देखकर स्माइल करता है। उन दोनों

का प्लान कामयाब जो हुआ था।

राज- एक और राउंड हो जाये मेरी जान?

नेहा झट से राज को देखते हुए- “नहीं नहीं और नह... कितना दर्द होता है तुमको पता है क्या?"

राज- "कुछ नहीं होता मेरी बुलबुल..." इतना बोलकर राज नेहा को पीछे घुमाता है।

नेहा की पीठ अब राज की तरफ और फ्रंट साइइ जय की तरफ भी। राज उसको पोजीशन पर लाता है। और नीचे से अपना लौड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर सेट करता है। नेहा को बहुत शर्म आ रही थी , जय के सामने नंगी होने से, वो भी राज की बाहों में। वो जय से नजर नहीं मिला पा रही थी। हालांकी नेहा जानती थी की यह दोनों बड़े एक नम्बर के ठरकी हैं। वो भी एक बड़े खानदान की लड़की है। उसमें उतने मैनर तो थे।
 
अब राज नीचे से एक धक्का लगाता है। जय के बड़े लण्ड ने नेहा की गाण्ड का छेद थोड़ा स्ट्रेच कर दिया था, तो राज का लण्ड थोड़ा आसानी से अंदर चला जाता है।

नेहा- "अहह.." और लण्ड अंदर जाते ही नेहा की मुँह से सिसकारी निकलती हैं।

राज नेहा की कमर पकड़ लेता हैं और नीचे से एक और धक्का लगाता है। इस बार और थोड़ा लण्ड अंदर चला जाता है।

नेहा- "अहह... अहह.. राज.."

आगे खड़े जय के सामने नेहा की चूत भी। वो अपना काला बड़ा सा लौड़ा उसी चूत को देखकर हिला रहा था। नेहा उससे नजर नहीं मिला पा रही थी बिल्कुल भी। लेकिन नीचे से लग रहे राज के धक्के उसको अजीब सा मजा देने लगते हैं।

जय से अब रहा नहीं जा रहा था। वो अब आगे बढ़ता है और नेहा की चूत के पास पहुँचता है। उसका काला बड़ा लौड़ा नेहा की चूत के करीब था। नेहा उसको इतना करीब देखकर दूसरी तरफ देखती है। लेकिन अगले ही पल वो अपना लौड़ा उसकी चूत पर टिका देता है। लण्ड का अहसास अपनी चूत पर होते ही नेहा जय को देखने लगती है। लेकिन कुछ बोलने में शर्मा रही थी। क्या बोलती वो वो इतूने बड़े घर की बहू दो काले बदसूरत बूढ़ों से चुद रही है, वो भी खुद उसके आलीशान रूम में। जय लण्ड का दबाव नेहा की चूत पर डालता है।

नेहा- “आहह....

जय को नेहा को इस तरह सिसकारी लेता देखकर जोश आ जाता है। वो एकदम से जोरदार धक्का लगाता है।

नेहा- "अहह.."

जय का आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चूत में चला जाता है।

नेहा- "आअह्ह... अहह... अहह.."

राज नीचे से लण्ड नेहा की गाण्ड में अंदर-बाहर करने लगता हैं। जिससे आटोमटिकली जय का लण्ड नेहा की चूत में अंदर-बाहर होता है। नेहा की आँखें थोड़ा दर्द और मजे में बंद हो जाती हैं। जय भीड़ झुक जाता है और थोड़ा तेजी से धक्के लगाने लगता है।

नेहा- आह्ह... अहह... अहह...

नेहा अपनी आँखें खोलती है तो जय का बदसूरत चेहरा बिल्कुल उसके सामने था। जय के चेहरे का एक कमानी स्माइल आ जाती है। जय फिर अपने काले भद्दे होठ नेहा के लाल होठों की तरफ बढ़ाता है। लेकिन नेहा जल्दी से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती हैं, जो राज देख लेता है।

राज- "अबे मेरी गर्लफ्रेंड को चूमने की सोचना भी मत."

राज की बात सुनकर जय वापस हो लेता है।

नेहा को राज की बात सुनकर अच्छा लगता है। लेकिन उसे क्या पता की गर्लफ्रेंड गर्लफ्रेंड बोलकर वो कितना कुछ कर चुका हैं उसके साथ, और अब एक और लो क्लास बूढ़ा चोद रहा था। और दोनों एक साथ उसे छोड़ रहे थे। दोनों के धक्कों की स्पीड जैसे ही तेज होने लगती हैं नेहा की चीखें बढ़ने लगती हैं।

नेहा- "अहह... आअहह... अहह... अहह... अहह.." नेहा जय से नजर अब भी नहीं मिला रही थी। जबकी उसका लण्ड नेहा की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था- "आअहह... आहह..

जय चोदते हुए नेहा की चूचियां हिलते हुए देख रहा था। लेकिन उसकी नज़र नेहा के खूबसूरत चेहरे पर थी।

बो देख रहा था की नेहा कैंसे रिएक्ट कर रही हैं चुदाई को लेकर। राज नीचे से तेज धक्के लगा रहा था। जय आगे से नेहा को किस करने वाला मुँह करके दिखाता है। जिसे देखकर नेहा अपना मुँह फेर लेती है। जय स्माइल करता है। ऐसे ही दोनों नेहा को 10 मिनट और चोदते हैं। जय थक कर नेहा के ऊपर गिर जाता है। नेहा उसको हटाने लगती है खुद पर से। दोनों बूढ़ों के लण्ड अभी भी नेहा की चूत और गाण्ड में थे।

नेहा- हटो मेरी ऊपर से।

जय नहीं हटता।

नेहा- राज।

राज- अबे उठ ना। समझता नहीं तू ।

जय इस बार उठता है। लण्ड निकालते ही नेहा की चूत में थोड़ा रस बाहर आता है, जिसे देखकर नेहा शर्म से लाल हो जाती है। जय बेड के साइड में ही नीचे बैठ जाता है। नेहा अब राज के ऊपर से उठकर नंगी ही बाथरूम चली जाती है। राज वहाँ पर पड़ा हुआ था।

जय- यार मजा आ गया इसे चोदने में। क्या चूत है साली की?

राज- हाँ बे मजे कर लिए ना । अब पता है ना जैसे तूने इसे चोदा है वैसे ही मुझे उस रिया को चोदना है।

जय- हाँ हाँ चोद लेना।

दोनों हँसते हैं। थोड़ी देर बाद नेहा बाथरूम से आती है। वो एक नाइटी में थी। मस्त लग रही थी। बेडरूम में दोनों बूढ़े नंगे पड़े थे। जय नेहा को बाथरूम से आते देखकर ही अपना लण्ड हिलाने लगता है।

नेहा राज की तरफ देखती है, और कहती है- "हो गया ना राज अब जाओ..."

राज- "मेरी जान थोड़ा आराम कर लेने दे ना.." नेहा चुप रहती है। उसे कुछ याद आता है, और वो रूम से बाहर जाती है। वो सीढ़ियां उत्तरते हुए किचेन में चली जाती है।

वहीं जाकर वो फ्रिज खोलकर एक सेब निकालकर खाने लगती है। खाने के बाद वो वाटर बोतल निकालकर पानी पीने लगती है। पानी पीते हए वो कुछ सोचने लगती है।

नेहा मन में- "ये में क्या कर रही हूँ । अपने पति को धोखा दे रही हूँ, वो भी किनके साथ। दो बूढो के साथ सेक्स करके। ये मैं क्या से क्या बन गई हूँ । मैं कभी ऐसी नहीं थी। इसमें विशाल की भी गलती है। वो मुझे टाइम देता तो ये सब कभी नहीं होता। न ही राज कभी मेरे करीब आता और ना ही ये सब होता। राज तक तो फिर भी ठीक आ लेकिन अब एक और बूढ़ा। छी.... ये गलत हो रहा है। में कोई सड़क छाप कालगर्ल नहीं हूँ की जिसके साथ जो चाहे सेक्स करके चला जाए।

नेहा यही सब सोच रही थी की तभी उसकी कमर में किसी के हाथ आ जाते हैं। मैं किसी के हाथ के स्पर्श से नेहा की आहह... निकल जाती है। अभी-अभी वो दो बूढ़ों से सेक्स करके आई भी। अभी फिर से कोई उसे उकसा रहा था करने के लिए। वो कोई और नहीं जय था। जय नेहा की कमर में हाथ डालकर उससे सटकर खड़ा हो जाता है। थोड़ी देर पहले चुदाई से उसका मन अभी भी नहीं भरा था।

नेहा को अपनी गाण्ड की दरार में जय का लौड़ा चुभने लगता है। वो नहीं जानती औ को पीछे कौन है लेकिन उसकी तरफ से विरोध भी नहीं हो रहा था। थोड़ी देर पहले दोनों बूढो से चुदने के बाद वो बुरी तरह से थक चुकी थी। जय अपने हाथ नेहा की गोरी कमर में फेरने लगता है।

नेहा- "आअहह.." और नेहा की सिसकारी बता रही थी कि नेहा फिर से गरम हो रही है।

जय का हौसला ये देखकर और बढ़ जाता है। वो अपने हाथ नेहा की चूचियों की ओर बढ़ाता है। लेकिन तभी अचानक नेहा उसके हाथ रोकती है और पीछे घूमती है। जय को पीछे देखकर वो उसे गुस्से से देखती है और वहीं से निकल जाती है।

जय इधर बस अपना लौड़ा मसलता रह जाता है।

उधर राज अभी भी बेड पर पड़ा हुआ था।

नेहा रूम में एंटर होकर. "राज जाओ यहीं से, और इसके बाद मेरे पास कभी मत आला। मैंने तुम पर भरोसा किया और तुमने ये सब किया..."

राज बेड से उतरकर नेहा की पास आता है, और उसका हाथ पकड़कर कहता है- "माफ कर दे ना मेरी जान। गलती हो गई। इसके बाद ऐसा नहीं होगा..."

नेहा- क्या गलती हो गई राज? में कोई बाजारू औरत नहीं हूँ जो हर किसी से ये सब करती फिरती हूँ?"

राज- "में जानता हूँ तू वैसी नहीं है। बस त माफ कर दे मुझे...' बोलकर राज उसको गले लगाता है। नेहा को बहुत का लगा था लेकिन अब राज की इतनी केयरिंग देखकर वो अपना सिर राज के कंधे पर रख देती हैं।

नेहा- तुम्हें पता है। वो तुम्हारा दोस्त नीचे किचेन में फिर से करने की कोशिश कर रहा था।

राज. साले की इतनी हिम्मत? तू फिकर मत कर मैं उसको देखता हूँ ।

नेहा राज की पीठ पर हाथ डालती है। दोनों थोड़ी देर ऐसे करने के बाद नार्मल हो जाते हैं।

राज. चल मैं अब जा रहा हूँ।

नेहा- ठीक है।

फिर राज वहाँ से नौकर क्वार्टर्स में चला जाता है, जहाँ पर जय पहले से था।

***** **
 
राज- अबे साले, तुझे बोला था ना मेरी गर्लफ्रेंड के साथ मेरी मर्जी के बिना मत करना।

जय- छोड़ ना। गलती हो गई। साली है हो वैसी माल।

राज- अबे जो भी है। अगर इसके बाद मेरी इजाजत की बिना किया जा तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा।

जय को राज का गुम्मा देखकर भी थोड़ा अजीब लगता है। राज तो ऐसे बिहेव कर रहा जैसे नेहा उसकी बोबी हो। जय बोला- "अबे बैठ जा... फिर नहीं होगा वैसे..."

राज भी बैठ जाता है। दोनों इधर-उधर की बातें करते हैं।

इधर नेहा अपने रूम में नहाने चली गई थी बाभम। वो शावर के नीचे थी। नेहा सोचती हैं- "ये मुझसे क्या हो गया? मैं क्या से क्या बन गई हूँ? पहले तो राज ने मुझे फंसाया अब और एक बटा भी। में कितनी गिरी हुई हो गई हैं। दो बूढो से चुद चुकी हैं। पता नहीं आगे क्या होगा?" फिर नेहा नहाने लग जाती है।

उधर रिया अपने रूम में बेड पर पड़ी हुई थी। वो भी बहुत प्यासी थी। कहीं ना कहीं वो जय को मिस कर रही थी। ऊपर से उसका पति भी नहीं था।

उधर नेहा की तो दोनों चुदाई कर दी थी। उसकी तो प्यास मिट गई थी। चाहे वो उसके बाद पछता रही थी।

रिया की हालत खराब हो रही थी। गत का वक्त था। उसे अकेले अजीब लगा रहा था। रूम में घुटन सी हो रही

थी। थोड़ी देर बाद वो सहन ना कर पाने की हालत में थी। वो अब मिरर में खुद को एक बार देखती है और फिर दरवाजे से बाहर आती है। उसने एक नाइट गाउन पहना हुआ था जो काफी शार्ट था। वो नेहा के रूम की तरफ जाती है और अंदर झाँक कर देखती है। नेहा अपने बाल सुखा रही थी।

रिया- दीदी इतनी रात को नहाई। लेकिन क्यों?

रिया को अजीब लगा था। लेकिन उसे कहां पता था की थोड़ी देर पहले उसकी नेहा दीदी को दो बटे छोड़कर गये

हैं। रिया अब उधर से निकलकर सीदियों से उतरने लगती है। पता नहीं उसके पैर उसे कहा ले जा रहे थे। वो मुख्य दरवाजा खोलकर इधर-उधर देखती है। फिर घर के पीछे जाने लगती हैं। उसके कदम नौकर क्वार्टर्स के सामने आकर रुक जाते हैं। पता नहीं क्या सोच कर वो आई थी यहाँ? पहली बार वो खुद चलकर यहीं आई थी।

अंदर से आवाज नहीं आ रही थी। रिया अब दरवाजे को हल्का सा धक्का देती है. तो वो खुल जाता है। वो धीरे से अंदर झौंक कर देखती है। अंधेरा था अंदर। रिया को समझ में नहीं आ रहा था क्या करे? अपने जिश्म की प्यास में वो यही आ तो गई थी, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अंदर देखने की। फिर भी वो थोड़ी देर बाद अंदर पैर डालती है। इतूने बड़े घर की बहू इतनी रात में नौकर क्वार्टर्स आई हुई थी अपनी प्यास बुझाने के लिए।

रिया की नजर जय को ट्रॅट रही थी। लेकिन उसे कोई नहीं दिख रहा था। उधर अंधेरा जरूर था लेकिन हल्की हल्की रोशनी आ रही थी। रिया इधर-उधर देख रही थी लेकिन उसे कोई नहीं दिख रहा था।

रिया- "पता नहीं कमीना कहीं चला गया? और मैं क्यों इतना तरस रही हैं उसके लिए। भाड़ में जाए..." कहकर

वो अपने पैर पटकते हुए वहाँ से निकल पड़ती है।

*****

*****
 
उधर रेलवे स्टेशन पर राज और जय ट्रेन के दरवाजे के पास थे।

जय- मैं चलता हैं। पता नहीं कब आना होगा अभी।

राज ठीक है बे फोन करना



जय- हाँ । ‘

ट्रेज जाने के बाद राज भी आने लगता है वापस। असल में जय के गाँव से फोन आया था की उसके बेटे की तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए वो इस वक्त वापस अपने गाँव चला गया था। राज उसे पहुँचाने गया आ। राज आकर सीधा नौकर क्वार्टर्स चला जाता है।

उधर रिया अपने बेडरूम में लेटी हुई सोच में डूबी हुई थी। उसका एक हाथ अपने पैंटी पर था। वो जय के साथ हुई चुदाई को याद कर रही थी। ची कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। तभी तो इतूने बड़े घर की बहू होने के बावजूद वो खुद चलकर नौकर क्वार्टर्स गई थी एक काले बटे से चुदने के लिए। ऐसे ही रात बीत जाती है।

मुबह नेहा के रूम में। उसकी आँख खुलते ही उसे सूना-सूना सा महसूस होने लगता है। रूम में अकेली, पति आउट आफ सिटी। ऐसे में एक ही आदमी था जो उसकी प्यास बुझा सकता था। वो है राज। वो राज के साथ सब कुछ कर चुकी हैं। राज तो उसे अपनी गर्लफ्रेंड तक बोलता है। नेहा के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ जाती है। वो बेड से उतरकर फ्रेश होने चली जाती है।

तभी उसके मोबाइल पर उसके पति का काल आता है।

नेहा- "इतनी सुबह किसने काल किया होगा?" वो बाहर जाकर देखती है तो विशाल का काल आ।

विशाल- गुड मानिंग।

नेहा- गुड़ मानिंग क्या बात है सुबह-सुबह?

विशाल- हाँ सोचा अपनी बीवी को जगा दूं

नेहा- ही ही पता है। काम क्या है बताओ?

विशाल- काम कुछ नहीं ऐसे ही काल किया था। क्या कर रही हो?

नेहा- कुछ नहीं। अभी फ्रेश होकर आई हूँ।

विशाल- अच्छा ठीक हैं। और आज का प्लान कुछ है?

नेहा- खास नहीं। सोच रही हूँ शापिंग हो आऊँ।

विशाल- हाँ तो जाओ किसने रोका है।

नेहा- ठीक हैं चली जाऊँगी। अभी मैं काल रखती हैं। मम्मीजी इंतेजार कर रही होगी नाश्ता करने के लिए।

विशाल- ठीक है। बाइ।

काल खतम करके नेहा मिरर में देखकर बाहर चली जाती है सीढ़ियों से। उसने उस वक्त साड़ी पहनी हुई थी। जिससे उसकी गोरी कमर अच्छी तरह से दिख रही थीर नीचे जाकर वो टेबल पर बैठ जाती है।

नेहा- गुड मानिंग मम्मीजी।

लक्ष्मी- गुड़ मानिंग बहू। अरे नीलू नाश्ता ले आ बहू के लिए।

नेहा- मम्मीजी रिया नहीं आई अभी तक?

लक्ष्मी - वो खाकर चली गई। पता नहीं क्यों चुप-चुप सी थी?

नेहा- अच्छा। मैं देखती है, और मम्मीजी मैं और रिया शापिंग को जाएंगे तो क्या आप ड्राइवर को बोलेंगी।

लक्ष्मी- हाँ बोल देंगी।

नीलू उसकी जाश्ता लाकर देती हैं। नास्ता कर के रिया के रूम में चली जाती है।

रिया- अरे दीदी आप... कुछ काम था?

नेहा- नहीं तो... ऐसे ही आई थी। मम्मीजी बोल रही थी तुम चुप-चुप हो आज।

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रिया- ऐसी कोई बात नहीं है दीदी।

नेहा- ही ही पता हैं। जस्ट सौरभ की याद आ रही होगी।

रिया- "नहीं दीदी। बस ऐसे ही.... अब रिया क्या बोलती की वो जय को मिस कर रही है।

नेहा- अच्छा चल तेरा मुह ठीक करने के लिए मेरे पास एक आइडिया है।

रिया उत्सुक होकर नेहा की तरफ देखती है, और कहती हैं- "क्या दीदी?"

नेहा- क्यों ना हम दोनों शापिंग चलें।

रिया- शापिंग... सच आ गृह आइडिया। ठीक है चलते हैं।

नेहा- ठीक है त तैयार हो जा। मैं भी थोड़ी देर में तैयार होकर आती हैं।

रिया- ठीक है।

फिर नेहा अपने जम चली जाती है और फ्रेश होकर एक साड़ी पहन लेती है, बैंकलेश ब्लाउज़ बाला। उसकी बड़ी बड़ी चूचियों का उभार छुपाए नहीं छप रहा था। उधर रिया भी एक बैंकलेश ब्लाउज़ वाली साड़ी पहनकर तैयार होती है, और बाहर हाल में आकर इंतजार करने लगती है। नेहा भी तैयार होकर सीढ़ियों से आती हैं।

रिया- वाउ दीदी... यू आर लुकिंग प्रेटी। विशाल भैयां यहाँ होते तो घायल हो जाते।

नेहा- थैक्स यू रिया, और तू भी कितनी खूबसूरत लग रही है।

रिया- थैक्स दीदी।

नेहा- "अब चलें। अरे हाँ मम्मीजी ने ड्राइवर को बोला होगा या नहीं?"

रिया को उत्सुकता होने लगी की कौन ड्राइवर है? रिया बोली- "कौन सा ड्राइवर दीदी?"

नेहा- “पता नहीं मम्मीजी किसको बोली है." तभी बाहर मुख्य दरवाजे पर हानं की आवाज होती है।

रिया- लो आ गई गाड़ी।

नेहा- चलो।

दोनों दरवाजे तक चली जाती हैं, और ड्राइवर को देखकर नेहा खुश हो जाती है। क्योंकी राज आ। रिया की नजर भी किसी और को टूट रही थी। वो नौकरी के क्वार्टर्स की तरफ देख रही थी। ]]

राज भी नेहा को देखकर स्माइल करता है।

नेहा- चलो रिया।

रिया दरवाजा खोलकर बैठ जाती हैं। नेहा आगे से होते हुए पीछे आकर बैठ जाती है, जो रिया की अजीब लगा। लेकिन राज को नहीं। नेहा की नजर सामने से जाते हुए राज पर थी। राज फिर कार स्टार्ट करके चलाने लगता है। कार चल रही थी। कार में सन्नाटा था कुछ देर के लिए। तभी नेहा की आवाज आती है।

नेहा- अरे राज। तुम्हारा दोस्त कहां पर है?

राज और रिया यह सवाल सुनकर दोनों हैरान थे। रिया तो हैरान सी नेहा को देख रही थी।

राज- कौन जय?

नेहा- हाँ।

राज- वो तो गाँव चला गया अचानक।

रिया- "क्यों?" और नेहा ओहा हशानी से रिया की तरफ देखती है।

राज- वो उसके बेटे की तबीयत कुछ ठीक नहीं है।

रिया ये सुनकर उदास हो जाती है।

नेहा- ओह।

राज मिरर में से नेहा को देखता है। नेहा की नजर भी उससे मिलती हैं। नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। कुछ देर बाद कार एक बड़े शापिंग माल पहुंच जाती हैं। रिया और नेहा कार से उतार जाती हैं।

नेहा राज से- "तुम यहीं रूको हम जाकर आते हैं... और एक स्माइल राज को देती है। फिर वो दोनों चली जाती हैं।

राज- साली रंडियो में यहाँ रुक कर किसकी गाण्ड मारु ?

रिया और नेहा शापिंग माल में जाकर शापिंग करने लगती हैं। आधे घंटे बाद राज जो बाहर खड़ा-खड़ा परेशान हो गया था अंदर जाने लगता है। वो काफी बड़ा माल आ। लाइटिंग सब एकदम मस्त भी। राज की नजर वहीं पर आई हुई एक से एक हाट औरतों, लड़कियों पर जाने लगी।

राज मन में- "यहाँ तो हरियाली ही हरियाली है। लेकिन मेरी माल कहां है?" और राज नेहा को ढूँढते हुए इधर-उधर जाने लगता है।
 
उधर नेहा और रिया एक कपड़े की दुकान में थी। रिया इस सेलेक्ट कर रही थी खुद के लिए।

नेहा- अरे रिया मुझे एक पफ्यूम लेनी है। तो में एक काम करती हैं। मैं उस शाप में जाकर आती है तब तक तुम सेलेक्ट कर लो इस।

रिया- ठीक है दीदी।

फिर हा वहाँ से पफ्र्युम शाप में चली आती है। वहीं काफी सारे परफ्यूम्स थे। बो एक-एक कर के देखने लगती है- "अरे भैया सबसे अच्छा वाला कौन सा है इसमें?"

मालिक- वो मेडम पुरुश के लिए या औरत के लिये?

नेहा- वो पुरुष के लिए।

मालिक- पुरूष के लिए हैं तो फाग सबसे बेस्ट है। बहुत लोग इस्तेमाल करते हैं।

नेहा- ठीक है वहीं दे दीजिये।

वो फाग की एक बोतल निकालकर पैक करवा देता है। बिल पे करके नेहा शाप से निकलती हैं। वो कपड़े वाली शाप में जा ही रही थी की उसे राज दिख जाता है, जो जवान जवान लड़कियों को घूरते हुए इधर-उधर घूम रहा था। नेहा मन में- "कमीना बूढ़ा देखो, कैसे घूर रहा है सबको। कभी नहीं सुधरेगा... फिर नेहा ना जाने क्यों अब राज की तरफ जाने लगती हैं।

राज नेहा को नहीं देखता। वो तो बस अपनी आँखें ताड़ने में बिजी था। राज एक जगह जहां वाशरूम नजदीक ही था वहीं टहल हो रहा था की नेहा उसे खींचकर अचानक वाशरूम के अंदर ले जाती है।

राज भी डर जाता है एक पल के लिए एक बड़े घर की खूबसूरत बहू एक काले बदसूरत बूढ़े को खींचकर वाशरूम ले गई थी। नेहा के चेहरे पर एक स्माइल भी।

राज- क्या हुआ मेरी जान? इधर क्यों ले आई है? क्या इरादा है?

नेहा- चुप रहो बेशर्म। बाहर क्या कर रहे थे तुम?

राज- क्या कर रहा था?

नेहा- ओहह... अंज्ञान तो ऐसे बन रहे हो जैसे कुछ किया ही नहीं।

राज- क्या बोल रही है तो क्या किया मैंने?

नेहा- तुम उन लड़कियों को घूर घूर कर देख रहे थे।

राज- हाँ तो... तुझे जलन हो रही है क्या?

नेहा- "मुझे क्यों जलन होगी?" नेहा थोड़ा नखरा दिखती हुई बोली।

राज- जलन तो होगी ही मेरी जान तुझे। अपने बायफ्रेंड को किसी और को देखते हुए देखकर।

नेहा- तो क्यों देख रहे थे उनको?

राज- "छोड़ ना वो सब..' बोलकर राज अपने काले होंठ नेहा के गुलाबी होंठों के पास लाने लगता है।

नेहा उसे रोकते हुए "यही नहीं समझे .. और वैसे भी तुम उन लड़कियों के पास जाओ ना?"

राज- हाय मेरी जान को जलन हो रही है।

नेहा- “जल्ले मेरी जूती.. ये लो तुम्हारे लिए." और नेहा रेप किया हुआ पैकेट राज को देती है।

राज- ये क्या है?

नेहा- खुद ही देख लो।

राज खोलकर देखता है और स्प्रे बोतल देखकर कहता है- “ओहह... तो अपने बायफ्रेंड को गिफ्ट दे रही है."

नेहा शर्मा जाती हैं।

राज- इसका क्या करूँ में?

नेहा- क्या करूं मतलब? इसको खुद पर लगाओ रोज। अच्छी खुश्बू आती है इससे।

राज- ओहह... तो इसे लगाकर तेरे पास आऊँ... ऐसा बोल रही है क्या त?

नेहा का चेहरा शर्म से लाल आ- "चुप रहो."

राज अपने काले होंठ फिर से नेहा की तरफ बढ़ाता है। वो पास पहुँचा ही था की नेहा उसे धक्का दे देती है। राज थोड़ा पीछे होता है तभी नेहा जल्दी से दरवाजे तक चली जाती है और एक शरारती स्माइल देकर बाहर चली जाती है।

राज- साली बच गई। बाद में देख लूँगा तुझे।

नेहा रिया के पास चली जाती हैं- "हो गया रिया सेलेक्ट करके?"

रिया- हाँ दीदी। बस पैक करवा रही थी, और आप लेने गई थी ... मिला क्या?

नेहा- " हाँ मिला, और जिसको देना आ उसको दे भी दिया.." और नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं।
 
आधे घंटे और शापिंग करने के बाद रिया और नेहा बाहर आती हैं। कार के पास पहुँचकर वो देखती हैं की राज वहीं पर नहीं है।

रिया- अरे दीदी, वो ड्राइवर कहां चला गया?

नेहा- पता नहीं।

दोनों इधर-उधर देखने लगती हैं। दूर नेहा को राज एक बेंच पर बैठा हुआ दिखता है।

नेहा- "वो रहा। में आती हूँ..." बोल कर वो उधर चली जाती है, और कहती है- "ओई चलना नहीं है? यही क्या कर रहे हो?" और नेहा के चेहरे पास स्माइल थी।

राज- हाँ चल मेरी जान।

नेहा आगे चली जाती हैं। राज भी कार तक पहुँच जाता है। फिर वो वहीं से निकल पड़ते हैं। नेहा कार में बैठी हुई आगे राज की तरफ देख रही थी रिया से छुपकर। हालांकी रिया को पहले से ही पता है की वो वो राज के साथ क्या-क्या कर चुकी है। आज नेहा जलिस मूड में थी। पता नहीं क्यों? घर पहुँच कर बेंगल्स लेकर नेहा और रिया अंदर जाने लगती हैं। रिया थोड़ा आगे जा रही थी। नेहा पीछे थी। वो अंदर जा ही रही थी की राज उसका हाथ पकड़ लेता है। नेहा रुक जाती है। नेहा को डर था की कहीं कोई देख ना ले।

नेहा- क्या कर रहे हो राज? कोई देख लेगा। छोड़ो मुझे।

राज- तो देखने दे। मैं मेरी गर्लफ्रेंड के साथ ही कर रहा हूँ ना?

नेहा- प्लीज... राज छोड़ो कोई देख लेगा।

राज- चल छोड़ देता हूँ। पहले एक किस दे।

नेहा- क्या? नहीं नहीं अभी नहीं।

राज. मुझे चाहिए मतलब चाहिए।

नेहा- प्लीज़... राज समझा करो।

इतनी देर बातें करने से अच्छा था अब तक किस दे देती। नेहा को दूर लग रहा था। वो झुक कर राज के गाल पर एक पप्पी दे देती हैं। जब वो यह कर रही थी तो रिया देख लेती हैं। जो नेहा को लेट होने से वापस आई थी, वो दरवाजा के अंदर ही थी।

रिया मन में- "दीदी भी क्या खुले-आम कर रही हैं इस बूढ़े के साथ। शर्म ही नहीं आती क्या दीदी को? पता नहीं

क्या-क्या करती हैं.." और रिया वहाँ से चली जाती है।

नेहा भी राज का हाथ छुड़ाकर खिलखिलाते हए भाग जाती है उधर से। राज भी अपना लण्ड मसलकर कार पार्क करके नौकर क्वार्टर्स चला जाता है।

नेहा और रिया अपने-अपने रूम में चली जाती हैं। नेहा के चेहरे पर मकान थी। उसे राज के साथ में मजा आ रहा था। जिंदगी में उसे इतना मजा कभी नहीं आया था। भले ही राज बटा हो लेकिन वो नेहा को अजीब सा मजा दे रहा था। इतने बड़े घर में सब कुछ होने के बावजूद भी नेहा को वो खुशी नहीं मिली थी, जो राज से नेहा को मिल रही थी। नेहा बेंगल्स रखकर फ्रेश होने चली जाती है।

उधर रिया फ्रेश होकर बेड पर बैठी थी, और सोच रही थी- "ये दीदी को हो क्या गया है? उस बूढ़े को चूम रही थी। विशाल भैया को पता चला तो क्या होगा। छी..." रिया तो ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे खुद दूध की धूली हो। वो भी तो जय के साथ मजे कर चुकी थी।

दोपहर के खाने के बाद नेहा अपने रूम में बैठी हुई थी। उसे रूम में बोर हो रहा था। वो कुछ सोचकर उठती हैं

और रूम के बाहर जाकर सीढ़ियों से उतरकर मुख्य दरवाजे से बाहर चली जाती है। उसके कदम नौकर क्वार्टर्स की तरफ जा रहे थे। नेहा अब ज्यादा फिकर नहीं कर रही थी। वो तो जैसे खुले आम राज से मिलने जा रही थी। उसे पूछने वाला कोई आ भी नहीं। वो इतने बड़े घर की बहू जो ठहरी। नेहा चलते हुए नौकर क्वाटर्म पहुँचती है। अंदर से दरवाजा लाक था।

नेहा मन में- "ये इसने दरवाजा बंद क्यों किया हैं कमीना.... फिर वो धीरे से- "राज दरवाजा खोल.."

अंदर से कोई जवाब नहीं आता। क्या दृश्य चल रहा है। इस घर की खूबसूरत जवान बहू एक बूढ़े काले ड्राइवर से मिलने के लिए इतना तरस रही थी।

नेहा- "राज..." और इस बार वो दरवाजा खटखटाते हुए बोलती है।

अंदर से कुछ आवाज आती है, और थोड़ी देर में दरवाजा खुलता है, तो सामने राज नंगा सिर्फ लुँगी में खड़ा था।

राज बोला- "क्या है। सोने भी नहीं देगी क्या मुझे?"

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क्या दृश्य है। इस घर का बूढ़ा ड्राइवर इस घर की बहू को उसके पास आने के लिए हॉट रहा है।

नेहा- ओहो... तो मैंने हिस्टर्ब किया क्या तुमको?

राज- "और नहीं तो क्या?"

नेहा राज को धक्का देकर अंदर आने लगती है, और कहती है- "इतना भी क्या थके हो तुम हाँ ?" और राज को धकेलती हुई अंदर ले जाती है।

राज भी थोड़ा हैरान था नेहा का ये रूप देखकर। पीछे चलते हुए राज दीवार से अटक जाता है।

राज मन में- "ये साली दिन-बा-दिन गरम होती जा रही है। इस रंडी को क्या करूँ? खुद भी मरेगी और मुझे

भी मरवाएगी। अभी इधर रंडी की तरह कर रही है."

नेहा- "क्या सोच रहे हो हाँ?" बोलकर नहा राज के बालों वाली छाती पर हाथ रखती है। नेहा को जिम में एक कामुक फीलिंग आ जाती हैं। वो एक बूढ़े के साथ फाइटिंग जो कर रही थी। तभी नेहा अप काले होंठों के पास ले जाने लगती है। ऐसा पहली बार हो रहा था की खुद नेहा किस की शुरुआत कर रही थी। नेहा के होंठ करीब पाहुँचे ही थे की बाहर से आवाज आती हैं।

लक्ष्मी - बहू: ओ बहू।।

नेहा की सास लक्ष्मी बर्मा मेनगेट के पास से नेहा को आवाज लगा रही थी लक्ष्मी को नहीं पता था की नेहा नौकर क्वार्टर्स में है। उसे तो बस लग रहा था की नेहा पीछे गार्डन में गई है। अपनी सास की आवाज सुनते ही नेहा पीछे होती है। नेहा की आँखों में हवस थी। लेकिन अपनी सास कहीं यहाँ ना आ जाए इसलिए राज को स्माइल देती हुई बाहर चली जाती है।

राज- साली एक ना एक दिन हम दोनों को मरवाएगी। लेकिन साली मेरी रंडी तो बन चुकी हैं। साली अब तो

खुद मुझसे चुदवाने यहाँ तक आ रही है। तेरी किश्मत तो खुल गई राज।

नेहा मेनगेट के पास जाकर- "जी मम्मीजी क्या हुआ?"

लक्ष्मी- बह, में और तेरे ससुर एक रिलेटिव के यहीं जा रहे हैं। शायद कल लौटेंगे। या फिर दो दिन बाद। मैंने रिया को बोल दिया है। तुम भी अपना खयाल रखना।

नेहा- लेकिन मम्मीजी अचानक... कुछ बात है क्या?

लक्ष्मी- अरे नहीं बहू तेरे ससुर के खास दोस्त हैं। बस मिलने जा रहे हैं।

नेहा- ठीक है। पापाजी कहां हैं?

लक्ष्मी - वो आ रहे हैं। बहू तू एक काम कर, उस राज को बुला दे। वो हमें एयरपोर्ट छोड़ देगा।

नेहा- "जी मम्मीजी..' बोलकर नेहा नौकर क्वार्टर्स की तरफ चली जाती है।
 
उधर राज फिर से सोने की तैयारी कर रहा था।

नेहा बाहर से ही- "ओए..."

राज आवाज सुनकर बाहर देखता है, और मन में- "ये फिर से आ गई। आज कुछ ज्यादा हो गरम है साली..."

राज दरवाजे के पास आकर नेहा की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचता है, और कहता है- “साली बहुत गर्मी है तेरे में आज... चल सारी गर्मी निकालता हूँ तेरी...'

नेहा- नहीं नहीं। वो मम्मीजी बुला रही हैं तुमको। वो एयरपोर्ट जाना है।

राज- ओह ठीक है। थोड़ी देर मस्ती कर लें।

नेहा भी स्माइल करने लगती हैं- “नहीं जाओ छोड़कर आओ पहले.."

राज- "ठीक है तेरी गर्मी तो आज ऐसा निकालूँगा की देखती रहना." और राज उसे छोड़ देता है।

नेहा वहाँ से चली आती है। लक्ष्मी वहीं खड़ी भी मुख्य दरवाजे के पास। नेहा की धड़कन थोड़ा तेज हो गई थी राज के पास जाकर आने से। जिससे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही औं उसके ब्लाउज में। वहीं खड़ी नेहा की सास ये नोटिस नहीं कर पाती के उसकी बह उस बूढ़े ड्राइवर के साथ क्या रंगरलिया मना रही है। थोड़ी देर बाद रवि वर्मा भी आ जाता है।

रवि - चलो बहू हम चलते हैं।

नेहा- ठीक है पापाजी, अपना खयाल रखना।

रवि. ओके।

इतने में राज भी कार लेकर आ जाता है। वो दोनों बैठ जाते हैं, और कार गेट के बाहर चली जाती हैं।

नेहा की धड़कन तेज थी जब से राज ने बोला था की वो आज उसकी गर्मी ठीक तरह से निकालेगा। नेहा भागकर अपने रूम में चली जाती है। नेहा रूम में आकर जोर-जोर से साँसे लेने लगती है। नेहा को राज के साथ मस्ती करने में मजा आ रहा था। छोटी बच्ची की तरह वो कर रही थी। जैसे उसे मन बहलाने के लिए कुछ खिलौना मिल गया हो। वो बाथरूम में नहाने लगती है।

उधर रिया अपने रूम में थी, बेड पर लेटी हुई। उसे नींद नहीं आ रही थी ठीक से। पता नहीं क्यों? राज और नेहा को उस तरह देखकर उसको कुछ हो रहा था। वो अकेली सी महसूस कर रही थी। उसको बुरा लग रहा था।

रिया मन में- "राज बूढ़ा है तो क्या है? है तो मर्द हो। और नेहा दीदी उसके साथ मजे कर रही हैं और में यहां अकेली हैं। सौरभ को तो मेरी परवाह ही नहीं है। सिर्फ बिजनेस.. बिजनेस ही करना आ तो मुझसे शादी हो क्यों की.." और रिया निराश हो रही थी।

उधर नेहा नहाकर एक साड़ी पहन लेती है। वो खुश लग रही थी। चेहरे पर मुश्कान थी। वो तो राज के लिए पागल लग रही थी अब। एक बड़े घर की जबान खूबसूरत बहू एक बूढ़ेकाले ड्राइवर के लिए पागल थी। नेहा मिर के सामने बैठकर तैयार हो रही थी। मेकप करके वो टीवी ओन करके बैठ जाती है वहीं पर।

दो घंटे बाद राज उनको एयरपोर्ट पहँचा कर वापस आ जाता है, और नौकर क्वार्टर्स चला जाता है। शाम में जोल नौकर क्वार्टर्स में भी। वो और राज बातें कर रहे थे।

जौल- क्या राज आजकल में दिखते ही नहीं। बस नेहा मालकिन के ही पीछे रहते हो।

राज- और क्या कर साली? वो माल ही वैसी है। अब तो साली मरी जा रही है मेरे लिए।

क्या बात है राज... तेरे तो मजे हैं। और आज तो बड़ी मालकिन भी नहीं हैं।

राज- साली को बहुत गर्मी चढ़ी है आज। पूरी निकाल दूँगा आज।

रात में नेहा और रिया खाना खा रहे थे। वहीं सन्नाटा था। लेकिन नेहा का चेहरा खिला-खिला था।

रिया मन में- "दीदी तो पागल सी हो गई हैं। देखो कैसे स्माइल कर रही हैं। मैंने दीदी को इतना खुश कभी नहीं देखा है। विशाल भैय्या के साथ भी नहीं। ऐसा क्या है उस बूढ़े में। बदसूरत भी है कमीना। इतना क्या पसंद आ

गया दीदी को उसमें?"

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नेहा खाना खाने के बाद अपने रूम में चली जाती हैं और रिया अपने।
 
रात में नेहा और रिया खाना खा रहे थे। वहीं सन्नाटा था। लेकिन नेहा का चेहरा खिला-खिला था।

रिया मन में- "दीदी तो पागल सी हो गई हैं। देखो कैसे स्माइल कर रही हैं। मैंने दीदी को इतना खुश कभी नहीं देखा है। विशाल भैय्या के साथ भी नहीं। ऐसा क्या है उस बूढ़े में। बदसूरत भी है कमीना। इतना क्या पसंद आ

गया दीदी को उसमें?"

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नेहा खाना खाने के बाद अपने रूम में चली जाती हैं और रिया अपने।

राज की एंट्री करीब एक घंटे बाद होती हैं मुख्य दरवाजे से। वो अंदर देखता है, तो हर तरफ सन्नाटा था। वो हाल से होते हुए सीढ़ियों से ऊपर जाने लगता है।

रिया अपने रूम में बैठी ही थी की उसे बाहर से कुछ आवाज आती है। वो खिड़की से छुपकर बाहर देखने लगती

है। सीढ़ियों पर राज को देखकर बो थोड़ा चौकन्ना हो जाती है। राज सीढ़ियों से चढ़ते हुए नेहा के कमरे तक पहुँच जाता है।

रिया- "ये बूढ़ा दीदी के रूम के बाहर?" तभी वो देखती है की नेहा के रूम का दरवाजा खुलता है और राज

अंदर चला जाता है। रिया को उत्सुकता होने लगती है। वो भी अपने रूम से बाहर आकर नेहा के रूम की तरफ चली जाती है।

राज नेहा के रूम में जा चुका था। नेहा लेटी हुई थी बेड पर। उसको शायद नींद आ गई थी। राज धीरे-धीरे उसके पास जा रहा था।

इधर रिया राज का पीछा करते हुए दरवाजे तक आ चुकी थी और अंदर देख रही थी छुपकर।

राज बेड के साइड से नेहा के पास चला जाता है। नेहा को जरा भी भनक नहीं थी की राज उसके पास आया हुआ है। नेहा एक नाइट गाउन में लेटी हुई थी। काफी हाट लग रही थी वो उस वक्त। राज अब धीरे से नेहा का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर ले जाता है पैंट के ऊपर से।

रिया के साँसें ये देखकर तेज हो जाती हैं। इस तरह का दृश्य वो पहली बार देख रही थी। वो भी खुद के घर में।

राज नेहा के गोरे हाथ से अपने बड़े लण्ड पर मसलवा रहा था। तभी अचानक राज को महसूस होता है की नेहा का दबाव उसके लण्ड फर बढ़ चुका है। जिससे वो समझ जाता है की नेहा जाग चुकी हैं। लेकिन नेहा की आँखे अभी भी बंद थी। वो बस सोने का नाटक कर रही थी। राज जोश में आ जाता हैं।

राज- साली नाटक कर रही है। आँख खोल।

नेहा ये सुनते ही अपनी आँख खोल देती है। उसके चेहरे पर एक शरारती स्माइल आ जाती हैं। राज का लौड़ा एक झटका खाता है जिसे देखकर नेहा शर्मा जाती है। तभी नेहा अचानक राज का कालर पकड़कर अपनी तरफ खींचती है। दोनों की नजरें आपस में मिल जाती हैं।

रिया बाहर से ये दृश्य देखकर तो एकदम चकित रह जाती है। नेहा को इस तरह खुद राज को अपनी तरफ

खींचता देखकर, उसको यकीन नहीं हो रहा था की बाहर शरीफ सौ ग्रहों वाली नेहा इतनी बेशर्म होकर एक बुड्ढे के साथ मस्ती कर रही थी। रिया तो ये देखकर ही अपने जिम में अजीब सी कामुकका महसूस कर रही थी।
 
उधर नेहा के खींचने पर राज भी थोड़ा हैरान था। लेकिन वो नेहा को खुद पर डामिनेट नहीं होने देना चाहता था। वो अब नेहा से दूर होकर अपनी शर्ट निकालने लगता है। जिसे देखकर नेहा के चेहरे पर एक शरारती स्माइल आ जाती है।

राज- "साली बहुत गर्मी है ना तुझमें आज। सक तुझे आज दिखाता हैं चुदाई क्या होती है?"

नेहा को डर लग रहा था लॉकन वो अंदर से उत्तेजित भी भी राज की रफनेस के लिए। उसका पति विशाल तो साफ्ट सेक्स करता था। जिससे नेहा बोर हो गई थी। राज शर्ट निकालता है तो उसकी काली छाती नेहा के सामने थी। ‘’

रिया भी राज को पहली बार ऐसे देख रही थी। रिया सोचती है- "मुझे यहाँ से जाना चाहिए। दीदी तो पागल हो

गई है इस बूढ़े के पीछे... वो जाना तो चाहती थी लेकिन कुछ था जिसकी वजह से वो जा नहीं रही थी।

इधर राज शार्ट निकालने के बाद अब अब अपनी पैंट निकाल देता है। अब वो सिर्फ एक अंडरवेर में था।

बाहर खड़ी रिया को बहुत घिन आ रहीं भी ऐसे यहाँ रुकने में। वो नेहा को तो बेशर्म बोल रही थी लेकिन खुद यहीं खड़ी रहकर बेशमाँ की तरह इनका कार्यकार्म देख रही थी।

राज अब बेड पर आ जाता है, और नेहा का गाउन उतारने लगता है।

नेहा राज को झिड़कते हुए"क्या कर रहे हो?

"

राज- जो तू चाहती है साली। ‘’

नेहा- मैं क्या चाहती हूँ?

राज- "अभी दिखाता हूँ साली रुक..." और राज अचानक नेहा का गाउन एकदम से फाड़ देता है।

नेहा- "ओह.." और नेहा ये उम्मीद नहीं कर रही थी। नेहा का गाउन फटकर दो टुकड़ों में बंट चुका था।

रिया भी ये देखकर डर जाती हैं- "ओ माई गोड... ये बूढ़े की हिम्मत तो देखो, कैसे दीदी का गाउन फाड़ दिया.."

नेहा जो हैरान भी, कहा- "क्या कर रहे हो राज? कितनी महंगी थी पता है?"

राज- साली चुप रहा तेरी हरकतें रंडियों जैसी हैं। तेरे साथ रंडी जैसे ही बर्ताव करना ठीक रहेगा समझो।

नेहा का चेहरा लाल था राज की बात से। एक बड़ा ड्राइवर उसे रंडी से बोल रहा था। नेहा अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। राज अब नेहा की टाँगों के बीच आ जाता है, और नेहा की पैंटी निकालने लगता हैं।

जिसे देख रिया अब गरम हो रही थी। उसने ऐसा कभी नहीं देखा था। इतनी रफनेस। वो भी एक बूढ़े और एक

जवान औरत के बीच।

अब राज नेहा की पैंटी निकाल देता है। पैटी निकालते ही नेहा की मस्त गोरी चूत राज के सामने थी। नेहा राज का रिएक्सन देखने के लिए उसके मुँह पर देख रही थी।

राज- "साली तेरी चूत तो हमेशा गोली रहती है। साली हमेशा लण्ड चाहिए तुझे तो.."

नेहा- चुप रहो बेशर्म। कुछ भी बोलते हो।

राज अब नेहा की चूत पर अपना मुँह रख देता है।

नेहा- "कब्बवह.." को एक लंबी सिसकारी निकलती हैं नेहा की।

बाहर खड़ी रिया के हाथ भी अचानक अपनी चूचियों पर पहुँच जाते हैं। उसे भी कुछ होश नहीं रहता है की वो

थोड़ी देर पहले बड़ी बेशर्मी की बातें कर रही थी नेहा को देखकर।
 
राज की जुबान नेहा की पूरी चूत पर घूमने लगती है।

नेहा- "आअहह... ओहह.." और नेहा की सिसकारियां भी निकलने लगती हैं।

जिसे सुनकर बाहर रिया गरम हो रही थी।

नेहा बहुत गरम थी। उसे राज का जुबान चाटना उससे रहा नहीं जा रहा था। तभी अचानक नेहा झड़ जाती है, और बहुत सारा रस उसकी चूत से निकलता है।

राज- साली कमीनी, तेरी चूत में बहुत रस है साली।

नेहा शर्म से कुछ नहीं बोल पा रही थी।

राज- आज इतना क्यों गरम है तू?

नेहा- “राज..' थोड़ा नखरा करते हुए वो बोलती है।

राज अब अपना लौड़ा अंडरवेर के ऊपर से सहलाने लगता है। उसकी निगाह नेहा की चूत पर थी।

नेहा- क्या देख रहे हो राज?

राज. साली देख रहा हूँ तेरी इस गरम चूत का आज कितना बुरा हाल है।?

नेहा फिर में शर्मा जाती है।

बाहर खड़ी रिया की तो हालत खराब थी राज की बातें सुनकर। उसके हाथ चूचियों को हल्के-हल्के मसलने लगे थे। उसकी आँखें आधी खुली, आधी बंद भी।

राज अब कमर जाकर नेहा की ब्रा भी निकाल देता है। नेहा की गोरी चूचियां उछलकर बाहर आ जाती हैं। राज एक बार नेहा की आँखों में देखता है फिर टूट पड़ता है चूचियों पर।

नेहा- "ओहह... अहह.."

राज नेहा की चूचियां मुँह में लेकर चूस रहा था।

नेहा की सिसकारियां निकल रही थीं, राज के मोटे होंठों की छुवन अपनी चूचियों पर पाकर- "अहह... अहह..

बाहर रिया का एक हाथ उसके नाइट गाउन के ऊपर से उसकी पैंटी पर भी पहुंच चुका था। रिया बिल्कुल खों चुकी थी । उसे खयाल नहीं था की वो कहां खड़ी है?

राज- साली बहुत दिन हो गये हैं तुझे चोदे हुए, आज जमकर ठुकाई करूँगा तेरी।

नेहा- तो रूके क्यों हो अब तक?

नेहा को मुँह से ऐसी बात सुनकर रिया के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

राज से अब सबर नहीं हो रहा था वो अब नेहा के और अपने कंधे पर रख लेता है उसके ऊपर झुक जाता है।

और अपना लौड़ा नेहा की गुलाबी चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्का लगाता है।

नेहा- "अहह... राज मर गई.."

पहली बार में ही राज का बड़ा काला लौड़ा काफी अंदर तक चला जाता है।

रिया बाहर खड़ी थी। उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है। वो अपनी आँखें बंद कर लेती हैं।

इधर राज रुकने वाला नहीं था। वो जोर-जोर से अपना खंबा नेहा के छेद में डालने लगता है।

नेहा- “आहह... अहह... अहह... अहह.." नेहा की चौखों से राज को कुछ फरक पड़ने वाला नहीं था। उसे तो बस चूत से मतलब था।

राज. “साली बहुत गर्मी है ना तुझ में... अब बात कर..." और जोर-जोर से धक्के लगाने लगता है।

नेहा चुदी जरूरी भी राज से पहले, लेकिन राज का गुस्सा जानती थी वो और उसकी चुदाई भी। वो जानती थी कि ये आदमी चुदाई के वक्त जानवर बन जाता है। चोदते हुए उस रूम में एक लय में आवाज आने लगती है। राज के लौड़े और नेहा की चूत के बीच हो रही लड़ाई की आवाज से फच फच फच फच की। नेहा के चेहरे पर दर्द का अहसास था लेकिन साथ में उसे सुकून भी मिल रहा था। इतने दिनों बाद उसका आशिक उसे चोद रहा था।

थोड़ी देर में नेहा भी साथ देने लगती है। वो भी अपनी गाण्ड ऊपर उछालने की कोशिश कर रही थी लेकिन राज के धक्के इतने तेज थे की उसे कुछ करने का मौका मिल ही नहीं रहा था।

बाहर खड़ी रिया की हालत खराब हो चुकी थी। उसके हाथ उसकी चूत को सहला रहे थे। वो इतना मगन हो चुकी थी की वो भूल गई थी की वो कहां खड़ी हैं। हालांकी घर में था कोई नहीं उसके, नेहा और राज के अलावा लेकिन राज और नेहा तो थे ही।

राज की नजर नेहा को चोदते हर दरवाजा पर पड़ती है तो वो देखता है की कोई दरवाजे के पीछे खड़ा है दूसरी तरफ मुँह करके, और कुछ कर रहा है। उसे समझने में देरी नहीं लगती की वो रिया ही है।

राज मन में- "ओहो.. तो साली छुप-छुपकर देख रही हैं। फिकर मत कर तुझे भी इसी तरह ठोंकूगा। जय तो है नहीं यहाँ। उसकी जगह मैं तुझे चोदूंगा..' राज के दिमाग में एक आइडिया आता है। राज नेहा को चोदते हुए नेहा की आँखों में देखते हुए कहता है।

राज- "साली मजा आ रहा है ना?"

नेहा- “आहह... हाँ राज करते रहो। अहह... उम्म्म... अहह.."

राज- "वैसी साली वो रिया है ना... उसका पति भी तो बाहर हैं। उसे अगर अकेलापन हो रहा है तो बोल उसे में

नेहा समझ जाती है की राज की नजर अब रिया पर है।
 
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