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Guest
मुझे मेरी गांड पर राजवीर का मोटा लण्ड फनफनाता महसूस हुआ. वह बहुत मोटा और लम्बा था. शायद हरिया से बड़ा और मेरे जीवन का अब तक सबसे विशाल लण्ड था. हम कुछ ज्यादा नहीं कर सकते थे. क्यों की बाजू ओर सामने की सीट बैठे दोस्तों को भनक लग जाती. मैं मेरी गांड से राजवीर के लण्ड को ऊपर से मसल रही थी. मेरी चूत के द्वार पर राजवीर के लण्ड का सूपड़ा दस्तक दे रहा था. मेरी चूत के पानी से उसका लण्ड गिला हो गया था. एक जगह राजवीर ने मेरी गांड पकड़ कर ऊपर उठा दिया और अपने लण्ड को मेरी चूत के ऊपर सटा कर मुझे उसके ऊपर बिठा दिया. उसका लण्ड मेरी गीली चूत मैं अंदर तक घुस गया. इतना मोटा और बड़ा लण्ड.. किसी खूंटी की तरह मेरी चूत में ठूस गया. मैं दर्द से चीखती, उसके पहले ही राजवीर ने एक साथ से मेर मुँह को दबा दिया और चुप करा दिया.
कुछ देर वैसे ही उसके लण्ड पर बैठ कर मेरा दर्द अब कम हो गया था. पर गाड़ी के धक्के के सात-सात , राजवीर मुझे उछाल देता और अपने लण्ड को आगे पीछे धक्का देकर मेरी चूत को चोद देता. राजवीर पीछे से मेरे कानों में गन्दी बातें करके शरारत कर रहा था. शोरगुल मैं किसी को पता नहीं चला. मैं आगे बैठी थी इसलिए कुछ बोल नहीं पा रही थी.
राजवीर: आह. ! संध्या तेरी फुद्दी की भट्टी कितनी गरम है.मेरे लोडे को जला देगी.
राजवीर: संध्या इस मौके का मैं २ साल से इंतजार कर रहा था. तेरी फुद्दी तो मस्त है , गरम पानी का झरना है.
राजवीर: बेहेन की लोड़ी.. तेरी फुद्दी इतनी गरम हैं तो गांड कितनी गरम होगी. तेरी फुद्दी के बाद तेरी गांड भी मरूंगा.
वह मुझे अपने दोनों हाथों से मेरी गांड पकड़ कर गाड़ी के धक्कों के सात मेरी गांड अपने बड़े लोडे पर उछाल रहा था. मुझे उसके गन्दी बातों से और पब्लिक सेक्स से मजा आ रहा था. मेरा उन्माद बढ़ रहा था. मैंने अपने होंठ दबा दिए और ...आगे ले सीट को पकड़ लिया. मैं थर-थरा कर राजवीर के लण्ड पर झड़ गयी. मेरी चूत ने कही बार राजवीर के मोटे लण्ड को कस कर जकड लिया और उसको अपने गरम पानी से भिगो दिया. राजवीर भी मेरी चूत की इस हरकत से सीट पर पीठ दबाकर पीछे बैठ गया और ..उसका लण्ड मेरी चूत मैं फंवारा उड़ने लगा. मुझे मेरी चूत मैं उसके गरम पानी का अहसास हुआ. एक के बाद एक करके अनेक झटके उसके लण्ड ने मेरी चूत के अंदर लगाये. हम बहुत देर तक वैसे ही बैठे रहे. उसका लण्ड अभी भी तना हुआ था. ना उसका लण्ड मेरी चूत से जुदा होना चाहता था , ना मेरी चूत उसके लण्ड से बिछडना चाहती थी.
कॉलेज पहुंचने तक मैं वैसे ही उसके लोडे पर बैठी रही. इस दौरान वह दूसरी बार मेरी चूत में उसका पानी उड़ाकर भिगो चुका था और मैं भी ४ बार झड़ गयी थी.
हॉस्टल पहुँच कर में कमरे में जाकर सो गयी. मेरी रूम पार्टनर अनीता ने पूछा - कैसी रही पिकनिक. उसकी एग्जाम थी, इसलिए वह आ नहीं पायी थी. राजवीर ने भी बड़े सोच समाज कर यह पिकनिक की प्लानिंग की थी. उसने सोचा था पिचकिनीक पर किसी अच्छे सुनसान स्पॉट पर मुझे ले जाकर चोदेगा. उसके हिसब से गाड़ी के अंदर सब दोस्तों की उपस्थिति में सेक्स का अनुभव उसके सोच ओर प्लानिंग से कही गुना अच्छा था. मैंने अनीता से कहा - पिकनिक ठीक थी , तुझे आना चाहिए था. राजवीर को तेरी कमी बहुत खल रही थी. बड़ा उदास था. अनीता को कैसी बताती कि - मैं उसके बॉयफ्रेंड राजवीर से चुदकर आयी हूँ.
मैंने कपडे भी नहीं बदले और वैसे ही सोने लगी. मेरी चूत से अभी भी राजवीर का पानी बह रहा था. मैं सोचनी लगी - यह क्या था ? ना कोई प्यार, ना कोई वादा , वचन, ना कोई चूमा , ना कोई foreplay .. सिर्फ शुद्ध चुदाई .. क्या यह सिर्फ मेरी हवस ओर लालसा थी. ? क्या यह गलत था ?
दूसरे दिन मैं कॉलेज गयी. क्लास में सब लड़के लड़किया आ चुके थे. सर अभी आने के थे. राजवीर मेरे बाजू वाली सीट पर आकर बैठ गया. अनीता मुझे दूर से घूरने लगी. मैंने कहा - मैं तो अच्छी हूँ.. पर तू खुद अपना देख ले..अभी अनीता के पास जाकर बैठ जा. वह मुझे गुस्से से घूर रही है. उसने कहा - तू अनीता की चिंता मत कर. वो रंडी मेरे लण्ड की दीवानी है. रोज कॉलेज की टेरेस पर मुझसे चुदवाती है. आज भी चोद दूंगा उसे..उसकी ख़ुशी उसी में है. मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक !
उस दिन राजवीर पूरा समय मेरे साथ बैठा. जब भी कोई शिक्षक पढ़ाता था, वो मेरी जांघों पर अपना साथ फेर देता था. आज मैंने जीन्स ओर टॉप पहना था. इसलिए उसे खास मजा नहीं मिल रहा था. राजवीर ने कहा - संध्या कल से हम सबसे पीछे वाले बेंच पर बैठेंगे और तू भी रोज स्कर्ट पेहेन कर आना ओर वो भी बिना पैंटी के. मैंने उसे मना कर दिया. उसने कहा - प्लीज संध्या , बहुत मन कर रहा तुझे फिर से चोदने का, तेरी चूत एकदम मस्त रसीली है. मैंने उसे कहा - मुझसे ऐसी बातें मत कर. ऐसे कुछ नहीं होगा अब. कल जो हुआ वह पहली और आखरी बार था. तू जा कर अनीता को चोद. मेरे से कुछ उम्मीद मत रख. .
मैं गुस्से से उठी. और लाइब्रेरी चली गयी. घर जाते वक्त मैंने देखा राजवीर और अनीता सीढ़ियों से टेरेस की तरफ जा रहे थे. राजवीर एक पंजाबी सिख सरदार था. उसके लिए लाइफ बड़ी आसान थी. जो मन में आता वही करता और बोल देता. दिमाग पर जोर नहीं देता. कमीना पर सच्चा और बिंदास था. उसकी यही बातें मुझे अच्छी लगती. कोई दिखावा नहीं, कोई झूट नहीं.. सीधी बात, ना कोई बकवास !
रात को अनीता रूम पर आयी.. मेरे से बात नहीं की. उखड़ी उखड़ी थी.
मैंने पूछा - क्या हुआ अनीता, सब ठीक है ना ?
गुस्से में बोली - तू राजवीर से दूर ही रहा कर.
मैंने कहा - मैं किसी के पास नहीं जाती, वोही मेरे पीछे कुत्ते की तरह घूमता है. तू उसे संभाल नहीं सख़्ती तो मुझे दोष मत दे.
हमारा झगड़ा हो गया.
दूसरे दिन मैं खुद को रोक नहीं पायी और मैंने स्कर्ट पहन ली. रूम से कॉलेज निकलते वक्त मैं आखिर वक्त पर बाथरूम चली गयी और मेरी पैंटी भी निकाल ली. मैं कॉलेज पैदल चल के जाती थी. मुझे खुले स्कर्ट के निचे से मेरी नंगी चूत पर ठंडी हवा लग रही थी. पता नहीं क्यों अच्छा लग रहा था, आजाद लग रहा था, रोज की तरह आज भी मुझे कॉलेज के फर्स्ट ईयर से लेकर फाइनल ईयर के सब लोंडे घूर कर वासना भरी नज़रों से चोद रहे थे. आज मुझे अंदर नंगी होने की वजह से एक अच्छी चुदाई वाली अनुभूति हो रही थी.
मुझे देखकर राजवीर खुश हो गया. वह भी सिर्फ बरमूडा और टी शर्ट में था. मैं आखरी बेंच पर जाकर बैठ गयी. वह मेरे बाजु आकर बैठ गया. कहा - अरे वाह ! संध्या आज गजब की लग रही हो. और थैंक यू .. तू मुझे ऐसे ही सरप्राइज दे देती है.
मैंने पूछा - अनीता क्यों इतनी भड़की है ? मुझसे झगड़ा कर डाला रात को.
राजवीर - छोड़ो उस रंडी को. फ़िक्र मत कर. कल उसको कॉलेज की टेरस पर बहुत चोदा. पर चोदते वक्त मेरे मुँह से गलती से तेरा नाम निकल रहा था.. आह संध्या ! ..क्या मस्त चूत है.. ! संध्या तेरी बड़ी गांड मारनी है !... इस वजह से वह भड़क गयी.
मुझे हंसी आ गयी. हम दोनों हँसने लगे. अनीता दूर से हमें देख रही थी. मनीष सर क्लास में आ गये. मनीष सर बड़े सक्त ओर कठोर अनुशाषण वाले थे , पर उनकी पर्सनालिटी भी बहुत अच्छी थी.. ६ फ़ीट हाइट , लम्बे अमिताभ बच्चन जैसे बाल, ओर बहुत हॉट थे, ४५ साल की उम्र मैं भी वो जवानी के उफान पे थे ओर एकदम जॉन अब्राहम की तरह दिखते थे. वह कपडे भी टाइट पहनते, जिससे उनकी बॉडी, जांघें , गांड ओर लंड का मोटा उभार साफ दीखता था. बहुत सारी कॉलेज की लड़किया उनपर मरती थी ओर रात को सोते वक्त उनको याद करके अपनी चूत मसलती थी. उन्हें शायद यह पता था,इसलिए वह कॉलेज बाद स्टाइल मैं आते..टाइट फिटिंग्स के कपडे ..परफ्यूम लगा कर बड़े बन-ठन कर आते.
मैं पीछे बेंच पर दिवार को लग कर बैठी थी ओर मेरी दायी बाजु राजवीर था. राजवीर ने अपना बाया साथ मेरी जांघों पर रख दिया ओर धीरे से उसका साथ मेरी जांघों के ऊपर फेरने लगा. मैंने भी अपना दाया साथ उसके बालों से भरी जांघों पर रख दिया ओर ऊपर की तरफ सहलाने लगी. राजवीर का काला लंड बरमूडा की बायीं पैर की तरफ से बाहर निकल आया था. मैंने आज पहली बार उसके लंड को देखा था , उस भारीभरकम लण्ड से राजवीर ने दो दिन पहले मेरी मुलायम चिकनी चूत की २ घंटे कुटाई की थी. इतना बड़ा ओर मोटा लंड मैं पहली बार देख रही थी. मुझसे रोका नहीं गया. मैंने उसकी बरमूडा ऊपर उसके जांघों तक कर दी ओर बड़े-बड़े मोटे बालों वाले टट्टे पकड़ लिए. उसके लंड के ऊपर बहुत सारा काले झाटों का जंगल था. इतने झाटों वाला लंड ओर बड़े टट्टे मैंने पहली बार देखा था. मेरे हाथों पर राजवीर का झाटों वाला लंड ओर टट्टे बड़े मस्त लग रहे थे. तब तक राजवीर ने भी अपनी मोटी उंगली मेरी चूत के अंदर डाल दी थी.
मनीष सर क्लास में पढ़ा रहे थे. हम दोनों उनकी तरफ देख कर, चुपके से निचे अपने हाथों से चूत ओर लंड के खेल का मजा ले रहे थे. मैंने मनीष सर के साथ को देखा.. उनकी साथ का पंजा ओर उंगलियां भी बड़ी थी. मुझे एक पल के लिये लगा की मेरी चूत में राजवीर की नहीं , मनीष सर की उंगली है. मनीष सर आदत अनुसार पढ़ाते वक्त क्लास की बिच की जगह से चलकर आखिर बेंच तक आते ओर फिर से आगे ब्लैकबोर्ड की तरफ चले जाते. इस बार वह बहुत देर तक पीछे खड़े रहे.
फिर उन्होंने कहा - राजवीर .. बता मैंने X Y Z .. के बारें मैं क्या पढ़ाया !.
राजवीर हड़बड़ा गया. उसने झट से मेरी चूत ओर स्कर्ट से साथ निकाला ओर मैंने भी उसके लंड पर से साथ निकाल दिया. उसको कुछ जवाब नहीं आ रहा था. पूरी क्लास उसको देख रही थी. वह किताब अपने बरमूडा के आगे साथ में लेकर खड़ा हो गया. उसके लंड ने बरमूडा में बड़ा तम्बू बना दिया था. वो उस तम्बू को किताब आगे पकड़कर छिपाना चाहता था. शुक्र था की मनीष सर ने उसे डांट कर जल्दी बिठा दिया, नहीं तो पूरी क्लास को उसका खड़ा तम्बू दिख जाता. क्या हमारी चोरी पकड़ी गयी थी ?
कुछ देर वैसे ही उसके लण्ड पर बैठ कर मेरा दर्द अब कम हो गया था. पर गाड़ी के धक्के के सात-सात , राजवीर मुझे उछाल देता और अपने लण्ड को आगे पीछे धक्का देकर मेरी चूत को चोद देता. राजवीर पीछे से मेरे कानों में गन्दी बातें करके शरारत कर रहा था. शोरगुल मैं किसी को पता नहीं चला. मैं आगे बैठी थी इसलिए कुछ बोल नहीं पा रही थी.
राजवीर: आह. ! संध्या तेरी फुद्दी की भट्टी कितनी गरम है.मेरे लोडे को जला देगी.
राजवीर: संध्या इस मौके का मैं २ साल से इंतजार कर रहा था. तेरी फुद्दी तो मस्त है , गरम पानी का झरना है.
राजवीर: बेहेन की लोड़ी.. तेरी फुद्दी इतनी गरम हैं तो गांड कितनी गरम होगी. तेरी फुद्दी के बाद तेरी गांड भी मरूंगा.
वह मुझे अपने दोनों हाथों से मेरी गांड पकड़ कर गाड़ी के धक्कों के सात मेरी गांड अपने बड़े लोडे पर उछाल रहा था. मुझे उसके गन्दी बातों से और पब्लिक सेक्स से मजा आ रहा था. मेरा उन्माद बढ़ रहा था. मैंने अपने होंठ दबा दिए और ...आगे ले सीट को पकड़ लिया. मैं थर-थरा कर राजवीर के लण्ड पर झड़ गयी. मेरी चूत ने कही बार राजवीर के मोटे लण्ड को कस कर जकड लिया और उसको अपने गरम पानी से भिगो दिया. राजवीर भी मेरी चूत की इस हरकत से सीट पर पीठ दबाकर पीछे बैठ गया और ..उसका लण्ड मेरी चूत मैं फंवारा उड़ने लगा. मुझे मेरी चूत मैं उसके गरम पानी का अहसास हुआ. एक के बाद एक करके अनेक झटके उसके लण्ड ने मेरी चूत के अंदर लगाये. हम बहुत देर तक वैसे ही बैठे रहे. उसका लण्ड अभी भी तना हुआ था. ना उसका लण्ड मेरी चूत से जुदा होना चाहता था , ना मेरी चूत उसके लण्ड से बिछडना चाहती थी.
कॉलेज पहुंचने तक मैं वैसे ही उसके लोडे पर बैठी रही. इस दौरान वह दूसरी बार मेरी चूत में उसका पानी उड़ाकर भिगो चुका था और मैं भी ४ बार झड़ गयी थी.
हॉस्टल पहुँच कर में कमरे में जाकर सो गयी. मेरी रूम पार्टनर अनीता ने पूछा - कैसी रही पिकनिक. उसकी एग्जाम थी, इसलिए वह आ नहीं पायी थी. राजवीर ने भी बड़े सोच समाज कर यह पिकनिक की प्लानिंग की थी. उसने सोचा था पिचकिनीक पर किसी अच्छे सुनसान स्पॉट पर मुझे ले जाकर चोदेगा. उसके हिसब से गाड़ी के अंदर सब दोस्तों की उपस्थिति में सेक्स का अनुभव उसके सोच ओर प्लानिंग से कही गुना अच्छा था. मैंने अनीता से कहा - पिकनिक ठीक थी , तुझे आना चाहिए था. राजवीर को तेरी कमी बहुत खल रही थी. बड़ा उदास था. अनीता को कैसी बताती कि - मैं उसके बॉयफ्रेंड राजवीर से चुदकर आयी हूँ.
मैंने कपडे भी नहीं बदले और वैसे ही सोने लगी. मेरी चूत से अभी भी राजवीर का पानी बह रहा था. मैं सोचनी लगी - यह क्या था ? ना कोई प्यार, ना कोई वादा , वचन, ना कोई चूमा , ना कोई foreplay .. सिर्फ शुद्ध चुदाई .. क्या यह सिर्फ मेरी हवस ओर लालसा थी. ? क्या यह गलत था ?
दूसरे दिन मैं कॉलेज गयी. क्लास में सब लड़के लड़किया आ चुके थे. सर अभी आने के थे. राजवीर मेरे बाजू वाली सीट पर आकर बैठ गया. अनीता मुझे दूर से घूरने लगी. मैंने कहा - मैं तो अच्छी हूँ.. पर तू खुद अपना देख ले..अभी अनीता के पास जाकर बैठ जा. वह मुझे गुस्से से घूर रही है. उसने कहा - तू अनीता की चिंता मत कर. वो रंडी मेरे लण्ड की दीवानी है. रोज कॉलेज की टेरेस पर मुझसे चुदवाती है. आज भी चोद दूंगा उसे..उसकी ख़ुशी उसी में है. मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक !
उस दिन राजवीर पूरा समय मेरे साथ बैठा. जब भी कोई शिक्षक पढ़ाता था, वो मेरी जांघों पर अपना साथ फेर देता था. आज मैंने जीन्स ओर टॉप पहना था. इसलिए उसे खास मजा नहीं मिल रहा था. राजवीर ने कहा - संध्या कल से हम सबसे पीछे वाले बेंच पर बैठेंगे और तू भी रोज स्कर्ट पेहेन कर आना ओर वो भी बिना पैंटी के. मैंने उसे मना कर दिया. उसने कहा - प्लीज संध्या , बहुत मन कर रहा तुझे फिर से चोदने का, तेरी चूत एकदम मस्त रसीली है. मैंने उसे कहा - मुझसे ऐसी बातें मत कर. ऐसे कुछ नहीं होगा अब. कल जो हुआ वह पहली और आखरी बार था. तू जा कर अनीता को चोद. मेरे से कुछ उम्मीद मत रख. .
मैं गुस्से से उठी. और लाइब्रेरी चली गयी. घर जाते वक्त मैंने देखा राजवीर और अनीता सीढ़ियों से टेरेस की तरफ जा रहे थे. राजवीर एक पंजाबी सिख सरदार था. उसके लिए लाइफ बड़ी आसान थी. जो मन में आता वही करता और बोल देता. दिमाग पर जोर नहीं देता. कमीना पर सच्चा और बिंदास था. उसकी यही बातें मुझे अच्छी लगती. कोई दिखावा नहीं, कोई झूट नहीं.. सीधी बात, ना कोई बकवास !
रात को अनीता रूम पर आयी.. मेरे से बात नहीं की. उखड़ी उखड़ी थी.
मैंने पूछा - क्या हुआ अनीता, सब ठीक है ना ?
गुस्से में बोली - तू राजवीर से दूर ही रहा कर.
मैंने कहा - मैं किसी के पास नहीं जाती, वोही मेरे पीछे कुत्ते की तरह घूमता है. तू उसे संभाल नहीं सख़्ती तो मुझे दोष मत दे.
हमारा झगड़ा हो गया.
दूसरे दिन मैं खुद को रोक नहीं पायी और मैंने स्कर्ट पहन ली. रूम से कॉलेज निकलते वक्त मैं आखिर वक्त पर बाथरूम चली गयी और मेरी पैंटी भी निकाल ली. मैं कॉलेज पैदल चल के जाती थी. मुझे खुले स्कर्ट के निचे से मेरी नंगी चूत पर ठंडी हवा लग रही थी. पता नहीं क्यों अच्छा लग रहा था, आजाद लग रहा था, रोज की तरह आज भी मुझे कॉलेज के फर्स्ट ईयर से लेकर फाइनल ईयर के सब लोंडे घूर कर वासना भरी नज़रों से चोद रहे थे. आज मुझे अंदर नंगी होने की वजह से एक अच्छी चुदाई वाली अनुभूति हो रही थी.
मुझे देखकर राजवीर खुश हो गया. वह भी सिर्फ बरमूडा और टी शर्ट में था. मैं आखरी बेंच पर जाकर बैठ गयी. वह मेरे बाजु आकर बैठ गया. कहा - अरे वाह ! संध्या आज गजब की लग रही हो. और थैंक यू .. तू मुझे ऐसे ही सरप्राइज दे देती है.
मैंने पूछा - अनीता क्यों इतनी भड़की है ? मुझसे झगड़ा कर डाला रात को.
राजवीर - छोड़ो उस रंडी को. फ़िक्र मत कर. कल उसको कॉलेज की टेरस पर बहुत चोदा. पर चोदते वक्त मेरे मुँह से गलती से तेरा नाम निकल रहा था.. आह संध्या ! ..क्या मस्त चूत है.. ! संध्या तेरी बड़ी गांड मारनी है !... इस वजह से वह भड़क गयी.
मुझे हंसी आ गयी. हम दोनों हँसने लगे. अनीता दूर से हमें देख रही थी. मनीष सर क्लास में आ गये. मनीष सर बड़े सक्त ओर कठोर अनुशाषण वाले थे , पर उनकी पर्सनालिटी भी बहुत अच्छी थी.. ६ फ़ीट हाइट , लम्बे अमिताभ बच्चन जैसे बाल, ओर बहुत हॉट थे, ४५ साल की उम्र मैं भी वो जवानी के उफान पे थे ओर एकदम जॉन अब्राहम की तरह दिखते थे. वह कपडे भी टाइट पहनते, जिससे उनकी बॉडी, जांघें , गांड ओर लंड का मोटा उभार साफ दीखता था. बहुत सारी कॉलेज की लड़किया उनपर मरती थी ओर रात को सोते वक्त उनको याद करके अपनी चूत मसलती थी. उन्हें शायद यह पता था,इसलिए वह कॉलेज बाद स्टाइल मैं आते..टाइट फिटिंग्स के कपडे ..परफ्यूम लगा कर बड़े बन-ठन कर आते.
मैं पीछे बेंच पर दिवार को लग कर बैठी थी ओर मेरी दायी बाजु राजवीर था. राजवीर ने अपना बाया साथ मेरी जांघों पर रख दिया ओर धीरे से उसका साथ मेरी जांघों के ऊपर फेरने लगा. मैंने भी अपना दाया साथ उसके बालों से भरी जांघों पर रख दिया ओर ऊपर की तरफ सहलाने लगी. राजवीर का काला लंड बरमूडा की बायीं पैर की तरफ से बाहर निकल आया था. मैंने आज पहली बार उसके लंड को देखा था , उस भारीभरकम लण्ड से राजवीर ने दो दिन पहले मेरी मुलायम चिकनी चूत की २ घंटे कुटाई की थी. इतना बड़ा ओर मोटा लंड मैं पहली बार देख रही थी. मुझसे रोका नहीं गया. मैंने उसकी बरमूडा ऊपर उसके जांघों तक कर दी ओर बड़े-बड़े मोटे बालों वाले टट्टे पकड़ लिए. उसके लंड के ऊपर बहुत सारा काले झाटों का जंगल था. इतने झाटों वाला लंड ओर बड़े टट्टे मैंने पहली बार देखा था. मेरे हाथों पर राजवीर का झाटों वाला लंड ओर टट्टे बड़े मस्त लग रहे थे. तब तक राजवीर ने भी अपनी मोटी उंगली मेरी चूत के अंदर डाल दी थी.
मनीष सर क्लास में पढ़ा रहे थे. हम दोनों उनकी तरफ देख कर, चुपके से निचे अपने हाथों से चूत ओर लंड के खेल का मजा ले रहे थे. मैंने मनीष सर के साथ को देखा.. उनकी साथ का पंजा ओर उंगलियां भी बड़ी थी. मुझे एक पल के लिये लगा की मेरी चूत में राजवीर की नहीं , मनीष सर की उंगली है. मनीष सर आदत अनुसार पढ़ाते वक्त क्लास की बिच की जगह से चलकर आखिर बेंच तक आते ओर फिर से आगे ब्लैकबोर्ड की तरफ चले जाते. इस बार वह बहुत देर तक पीछे खड़े रहे.
फिर उन्होंने कहा - राजवीर .. बता मैंने X Y Z .. के बारें मैं क्या पढ़ाया !.
राजवीर हड़बड़ा गया. उसने झट से मेरी चूत ओर स्कर्ट से साथ निकाला ओर मैंने भी उसके लंड पर से साथ निकाल दिया. उसको कुछ जवाब नहीं आ रहा था. पूरी क्लास उसको देख रही थी. वह किताब अपने बरमूडा के आगे साथ में लेकर खड़ा हो गया. उसके लंड ने बरमूडा में बड़ा तम्बू बना दिया था. वो उस तम्बू को किताब आगे पकड़कर छिपाना चाहता था. शुक्र था की मनीष सर ने उसे डांट कर जल्दी बिठा दिया, नहीं तो पूरी क्लास को उसका खड़ा तम्बू दिख जाता. क्या हमारी चोरी पकड़ी गयी थी ?