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Adultery मेरी नशीली चितवन

तीन दिन के बाद हम सुबह की फ्लाइट पकड़ कर गोवा पहुँच गए. अनीश ने एक बहुत अच्छा फाइव स्टार रिसोर्ट जो एकदम बागा बीच के पास था वह बुक किया था. रिसोर्ट सीधे बीच के सामने था और अपना स्विमिंग पूल और प्राइवेट बीच था. रिसेप्शन पर हमें कमरे की कार्ड - की मिल गयी और सामान बेल बॉय के साथ भेज देंगे ऐसे बताया.

हम कमरे में गए..कमरा बहुत अच्छा था.. कमरे पर शीशे की खिड़किया थी ..जो कर्टेन से ढकी थी. कर्टेन हटा दिए तो सामने बीच का बहुत ही सुन्दर सा नजारा था. मैं खुश हो गयी.

मैं: अनीश कितना सुन्दर नजारा हैं यहाँ से. बीच बाहत सुंदर हैं.

अनीश: बीच कौन देखने आया हैं जान. . मैं तो तुम्हे देखूंगा - रात - दिन नंगी..तुम तो अप्सरा हो.

मैं - बड़ी शरारत सूझ रही है.. घर पर तो बड़े मासूम बने फिरते हो.

अनीश: घर पर तो तुम भी बड़ी सुन्दर, गुणवान और संस्कारी बहु हो. अब यहाँ तुम भी मेरी तरह शरारती हो जाओ.

अनीश मेरी तरफ आया और खिंच कर मुझे बाँहों में ले लिए. मेरी ओंठों पर होंठ रखकर वह जीभ बाहर निकल कर मेरी ओंठों को चाटने लगा. मैंने भो बेशर्मी से अपने होंठ खोल दिए और उसकी जीभ चूसने की कोशिश की..पर वो उसकी जीभ मेरी मुँह में नहीं डाल रहा था. सिर्फ मेरी होंठ चाट रहा था ओर चूस रहा था.

उसने दूसरा हाथ निचे करके मेरी साडी उपर घुटनो तक कर दी. साथ अंदर डाल कर वो मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत अब गीली हो रही थी. मैंने जोर से अनीश के होंठ छू लिये ओर मेरी जीभ उसकी मुँह में डाल दी. अनीश को यही चाहिए था. उसने प्यार से मेरी जीभ चूसना चालू किया..अपनी जीभ से मेरी जीभ को चाटना चालू कर दिया. मेरी पैंटी के अंदर साथ डाल कर मेरी गीली चूत सहला रहा था और धीरे से उसकी एक ऊँगली चूत के अंदर डाल दी. मैंने भी एक साथ उसके लंड पर रख दिया और सहलाने लगी. वैसे उसने उसकी पैंट पर से उसकी ब्रीफ्स निकाल दी और मेरी हाथों में उसका लंड दे दिया. अनीश अभी भी मुझे चूस रहा था, चुम रहा था, उसकी जीभ अब मेरी मुँह में थी. तभी उसने अपने दूसरे हाथों से मेरी पैंटी निचे खींचकर निकाल दी ओर जमीन पर फेंक दी. उसने अब मुझे बिस्तर पर सुला दिया और मेंरे पर उल्टा लेट कर मेरी चूत चाटने लगा. मैंने भी उसका लंड मेरी तरफ खींच लिया ओर प्यारसे उसके लण्ड के सुपडे को चूसने लगी. हम दोनों ६९ पोजीशन में थे. अनीश बहुत अच्छी से मेरी चूत चाट रहा था..हम दोनों अब पसीना हो गए थे. मैं छटपटा रही थी. मैंने अनीश का सर अपने चूत पर दबा दिया और मेरी चूत उसके ओंठों पर रगड़ने लगी. मैं झड़ने के बहुत करीब थी ... तभी..कमरे की बेल बजी. बाहर से आवाज आयी.

गुड मॉर्निंग ! रूम सर्विस सर.. आपका लगेज ..

अनीश उठा, उसने अपनी ब्रीफ्स - निकर पहन ली. मैंने भी मेरी साडी बिस्तर पर लेटे सीधे कर दी.

अनीश ने वैसे ही सिर्फ अपनी चड्डी पर दरवाजा खोला: कम इन. इधर रख दो सामान.

रूम सर्विस बॉय: सर मेरा नाम अमानुल्लाह हैं..आप मुझे अमन कह सकते हो.

(उसने सामान एक जगह ठीक से रख दिया. मैंने उसको देखा. वह कुछ ४५-५० साल ट्रिम दाढ़ी वाला. कम हाइट वाला - ५-५ पर हट्टा कट्टा पठान आदमी लग रहा था. होटल की ड्रेस उसपर बहुत टाइट लग रही थी. टाइट शर्ट और पैंट में उसके मास-पेशियाँ और मसलदर शरीर का उभार साफ़ दिख रहा था. मैं बिस्तर पर लेटे उसको देख रही थी. उसने देखा अनीश सिर्फ उसकी निकर में हैं ओर मैं बिस्तर पर लेटी हूँ. वो मंद मंद शरारती अंदाज में मुस्करा रहा था)

अमन: सर यह आपके लिए पानी है.. मिनरल वाटर. ..या आपका मिनी फ्रिज हैं.. यह..चाय - कॉफी..के लिए हॉट वाटर केतली..

(वो कमरे में सब सजाने लगा ओर ठीक ढंग से चेक करने लगा)

अमन: सर क्या मैं आपकी रूम ठीक से लगा दू. क्या यह निचे गिरे कपडे अलमारी में रख दू.

अनीश: थैंक यू अमन.. हाँ आप रख सकते हो. (अनीश मेरी बाजु आकर बिस्तर पर लेट गए..उनका एक हाथ मेरी साडी पर मेरी जंघा पर था)

मैं शर्मा गयी. अमन ने पहले मेरी निचे गिरी हुई पैंटी उठाई. फिर अनीश की पैंट.

अमन (मुस्कराकर) : सर लांड्री में नहीं डालना है ना?

अनीश: नहीं..फ्रेश है.. दिखाओ एक मिनट.

अनीश ने अमन के साथ से पैंटी ली ओर जोर से २-३ बार सुंघा..

अनीश; हां फ्रेश हैं..लांड्री की जरुरत नहीं..तुम भी एक बार देख लो..(अनीश ने अमन की मेरी पैंटी फिर से दे दी)

अमन: हां सैर फ्रेश है.. (उसने भी २-३ बार मेरी पैंटी सूंघ ली)

अनीश: अच्छा अमन यह बताओ .. मैंने सुना की यहाँ फेनी बहुत अच्छी मिलती.

अमन वही खड़ा रहा. उसके साथ में अभी भी मेरी पैंटी थी. वह उस पैंटी को दूसरे साथ से सहला रहा था, ओर कभी कभी फिर से सूंघ लेता.

अमन: सर फेनी पीने का मजा बीच पर ही लीजिये. आप जब बीच पर जाओगे तब मुझे बोल देना, मैं फ्रेश फेनी लेकर आ जाऊंगा. क्या मैडम भी लेगी?

अनीश: हाँ मैडम भी सब लेगी. ओर क्या क्या है ?

अमन: सर मसाज भी मिल जायेगा.. आप को जो भी चाहिए..मुझे बोल देना..

(अमन ओर अनीश बात कर रहे थे. अमन अभी भी एक साथ मैं मेरी पैंटी पकड़कर दूसरे साथ से उसको सहला था. कभी कभी बिच में वो मेरी पैंटी फिर से सूंघ लेता ओर कामिनी मुस्कान देकर बात कर रहा था. मैंने देखा अनीश का लंड उसकी ब्रीफ्स में तन कर खड़ा हो गया था..वो मेरी जांघों पर साथ फेर रहा था. मुझे बड़ी शर्म आ रही थी. मेरी चूत बहुत गरम ओर गीली हो गयी थी. अमन का लंड भी उसके टाइट पैंट मैं फुल गया था. उसकी पैंट की एक साइड से उसकी कटे लंड का बड़ा सूपड़ा साफ़ नजर आ रहा था) )

अनीश: अच्छा अमन ..बीच पर कुछ कपड़ों पर या ड्रिंक्स पर प्रतिबन्ध तो नहीं ना.

अमन: सर यह सामने वाला तो होटल का प्राइवेट बीच हैं. यहाँ पर कोई प्रतिबन्ध नहीं. आप चाहे तो मैं आपको अच्छी जगह दिखा सकता हूँ.. जहा आप ओर मैडम दोनों नंगे भी नाहा सकते.

अनीश. अरे वह..यह बात अच्छी होगी. ओर आपके होते हुए हमें डर भी नहीं रहेगा - चोरी का या कपड़ों का..

अमन: ठीक हैं सर..मुझे होटल से कुछ देर तक कस्टमर की सर्विस ओर मदत करने की अनुमती है. आप मुझे इस नंबर पर कॉल कर देना.

अमन ने मेरी पैंटी फोल्ड कर के अलमारी में रख दी. उसके जातें ही मैंने अनीश से गुस्से में कहा..

मैं: अनीश कितने बदमाश हो तुम. मेरी पैंटी उसके साथ में दे दी.

अनीश: तो क्या हुआ जान.. देखा नहीं वह कितनी प्यार से तेरी पैंटी सूंघ कर सहला रहा था. जैसे की पैंटी नहीं, तेरी चूत हो. ओर अनीश जोर जोर से हॅसने लगा.

मैं: बड़े कमीने हो तुम. जैसे की तुम सच में उसको मेरे चूत को सूंघने ओर सहलाने की अनुमती देते.

अनीश: हाँ क्यों नहीं..अगर तू कहती तो दे देता.. ..देखा नहीं उसका लंड कैसे फुफकार रहा था.

अनीश ने मेरी साडी ओर पेटीकोट खींच लिया. चोली निकाल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया ओर फिर से ६९ पोजीशन मैं आ गए.

अनीश: आह ! जानू.. तेरी चूत तो बहुत गरम ओर गीली हो गयी.

मैं: जाओ मैं नहीं बात करती..कुछ भी कहते रहते हो..

अनीश मेरी चूत अपनी जीभ से चाट चाट कर - आह जानू...तेरी चूत आज पहलीबार इतने पास से देख रहा हूँ..कितनी खूबसूरत है..

मैंने भी अनीश का खूबसूरत मोटा लण्ड मुँह में ले लिया ओर चूसने लगी..

अनीश: आह रानी ..कितने प्यार से मेरा लण्ड चूस रही आज.. कही अमन का लण्ड समझ कर नहीं चूस रही ना?

मैं उनका लण्ड का सूपड़ा जीभ से चाटने लगी..अनीश मेरी चूत में अंदर जीभ डाल रहा था..मेरी चूत के अंदर अपनी जीभ डालकर साफ़ कर रहा था..सारा पानी पी रहा था.

अनीश: आह ! जानू..बोलो..किसका लण्ड चूस रही हो..मेरा या अमन का..

अब मैं भी वही बात फिर से सुनकर झल्ला गयी. अब अनीश मेंरे दाणे को चूस रहा था. मैं कांप रही थी.

मैं: उम्....यह तो अमन का लण्ड है....

अनीश: ..आह.. कमीनी ..बोलो ..संध्या..कैसा है अमन का लण्ड.
 
मैं: अनीश का लण्ड जोर से चूसते हुए : उम्... मस्त है..मुल्ले का कटा लण्ड है.. बहुत बड़ा ओर मोटा है..

अनीश: मेंरे से मोटा ओर बड़ा..

मैं: हाँ..आप से बहुत बड़ा ओर मोटा..आपका तो अमन के लण्ड के सामने एकदम छोटा बच्चा है..उसका आधा साइज का भी नहीं हैं...

अनीश: आह...ले ले..अमन का पानी पी ले पूरा..उफ़... (कर के जोर से मेरी मुँह में झड़ने लगा. तभी उसने मेरी दाणे को हलके से काट लिया था..

मैं भी: उफ़..आह..अमन...तेरा लण्ड..आह..तेरा पानी.. कर के उसके मुँह में झड़ने लगी)

अनीश ने ६-७ झटके मर के मेरी मुँह मैं उसका पानी डाल दिया था. मै ने बड़े प्यार से सारा गाढ़ा माल निगल लिया..ओर उसके लण्ड को प्यार से धीरेसे चूसती रही. अनीश भी मेरी चूत को चाट कर साफ कर रहा था.

फिर अनीश उठा..मुझे अपनी बाँहों मैं ले लिया..संध्या..मजा आ गया..अगर सच में अमन का लण्ड तुमको दे दू तुम तो ओर भी मस्त सेक्सी हो जाएगी.

मैं: चुप बदमाश...ओर उसकी छाती पर सर छुपाकर सोने लगी.

कुछ देर आराम करने के बाद हम फ्रेश हो गए...खाना खा लिया. रूम पर आकर मैं अपनी स्विमिंग ड्रेस बाथरूम जाकर पहन ली. वो एक मस्त घुटने तक का हलके गुलाबी रंग का सारोंग था..ओर ऊपर लाल रंग का नाभि के ऊपर का टॉप. मैंने सारोंग (स्कर्ट) के निचे नीले रंग की पैंटी पेहेन ली थी. जैसे मैं बाथरूम से बाहर आयी..अनीश मुझे पागल जैसे देखता रहा..

अनीश: आह मेरी जान..आज तो गोवा की बीच पर कत्ले आम होगा. बहुत सरे मर्दों की दिल टूटेंगे ओर हजारो लण्ड तुझे सलामी देंगे.

मैं: चुप बदमाश कही के..चलो अभी..

अनीश ने भी एक सेक्सी पिले रंग की शॉर्ट्स पहनी थी. शॉर्ट्स बहुत टाइट थी.. ओर ऊपर जांघों तक थी. उनकी मसल जाँघे, सामने लण्ड का उभार ओर गांड का अकार एकदम सेक्सी लग रहा था..एकदम दोस्ताना में जॉन अब्राहम की तरह. दिखने में तो अनीश खूबसूरत थे ही.

निचे हमें लॉबी में अमन मिल गया. वह मुझे घूर- घूर कर देख रहा था. मुझे ऐसे ही बहुत शर्म आ रही थी. सुबह मेरे पैंटी के सात वह बहुत देर तक मेरी सामने खेला था. हमें देखकर वो हमारे पास आ गया.. उसने हमें बीच पर जाने का दरवाजा बताया..ओर कहा..आप जाइये..में अभी टॉवल ओर बाकि सामान लेकर आता हूँ.

हम उस दरवाजे से बीच पर चले गए..बहुत शीतल लहर चल रही थी.. बीच के पीछे साइड में ..बहुत खूबसूरत नारियल के पेड़ थे..वहा बहुत सारी टेबल ओर खुर्चिया..बड़ी बड़ी छत्रियों के निचे लगी थी. २-४ विदेशी कपल के अलावा वहा कोई नहीं था. अनीश ने मेरा साथ पकड़ कर पानी के अंदर ले गया...एक दूसरे पर पानी डाल कर हम भीग गए..मैंने देखा की मेरा स्कर्ट ओर टॉप..गिला होकर पारदर्शी हो गया था. पारदर्शी गुलाबी सारोंग चिपक कर मेरी शरीर पर थी जिस में मेरी नीली पैंटी साफ़ दिखाई दे रही ओर पीछे से खुली मेरी गांड. मेरी मम्मी ओर निप्पल्स भी टॉप से नजर आ आ रहे थे. वही हाल अनीश का था. उसकी छोटी सी शॉर्ट्स..उसके गांड ओर लोडे पर चुपक गयी थी ओर वो करीब-करीब नंगा दिख रहा था. पर वो बहुत खुश हो रहा था..उत्तेजित हो रहा था. वो मेंरे मम्मे, चूत, गांड ओर शरीर का हर अंग मसल रहा था. उसकी शॉर्ट्स पर से उसका लण्ड मुझ पर रगड़ देता..मेरी गांड पर दबा देता.

तभी हमने अमन को आते हुए देखा...उसने अपने सात दो बड़ी बास्केट लाया था. उसने नारियल के पेड़ों के करीब एक टेबल लगा दिया..छाँव के लिए बड़ी छत्री लगा दी. फिर वो हमारे पास आया ओर कहा..सर आपका टेबल रेडी है...मैंने फेनी भी टेबल पर रख दी..वहा बास्केट में टॉवल भी रखा है.

हम टेबल के पास चले गए. टॉवल से खुद को सूखा लिया..ओर खुर्ची पर बैठ गए..अमन ने मुझे फेनी की एक गिलास दी..ओर दूसरी अनीश को. साथ में डिश में कुछ स्नैक्स भी थे.

अनीश: एन्जॉय मेरी जान..चीयर्स..!

में भी : चियर्स कर के हम फेनी का आनंद उठाने लगे.

फेनी गोवा की ट्रेडिशनल ड्रिंक है..जो काजू का फल या नारियल से बनता है. उसमे अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है..

अमन वही रेती में हमारे सामने बैठ गया. मेरे स्कर्ट एक तरफ से खुली थी..जिससे सामने बैठे किसी भी को मेरे पैंटी साफ दिखाई दे रही थी.

अनीश: अरे अमन निचे क्यों बैठे हो. एक चेयर ले लो..ले तू भी एक गिलास ले..

अमन: नहीं सर.. होटेल पॉलीसी के हिसब से में आप के साथ बैठ नहीं सकता हूँ.. मेरी नौकरी चली जाएगी.

अनीश: ठीक हैं..मत बैठो..आजा यहाँ पास छुपकर बैठ जावो..एक गिलास ले लो

अनीश ने जबरदस्ती उसे एक गिलास दिया..वह मेरे खुर्ची के एकदम पास आकर बैठ गया. उसको मेरी जांघें ओर पैंटी एकदम २ फ़ीट की दुरी से दिख रही थी.

अब फेनी पीने से में भी थोड़ी खुल रही थी. अमन डर डर कर थोड़ी सी पि रहा था. अनीश मुझे भी पीला रहा था ओर खुद भी बहुत पी रहा था.

अनीश: अमन..सुबह संध्या की पैंटी फ्रेश थी ना..बदबू तो नहीं थी. (में शर्मा कर लाल हो गयी ओर इधर उधर देखने लगी)

अमन: हाँ सर बहुत फ्रेश थी.. बहुत अच्छी खुश्बू आ रही थी.

अनीश: हाँ बहुत अच्छी खुश्बू थी.. संध्या की.

अमन: हाँ सर ..आप बहुत लकी हो..मैडम बहुत सुन्दर ओर खुश्बुदार है..

तभी मुझे थोड़ा चक्कर जैसे हुआ..

में: उह.....

अनीश: क्या हुआ संध्या...

मुझे थोड़ा अस्वस्थ लग रहा था. थोड़ी से उलटी हो गयी.

अमन : सर लगता है मैडम को नशा हो गया, इसलिए अस्वस्थ लग रहा. इनको थोड़ा आराम की जरुरत है.’

अनीश: हाँ संध्या थोड़ा पानी पी लो. ठीक लगेगा.

अमन: सर मैडम को थोड़ा पैर ऒर शोल्डर की मसाज कर के देता हूँ..थोड़ा ठीक लगेगा.

अनीश: हाँ.. कर दो जल्दी से..कहा करोगे मसाज.

अमन: वहा नारियल के पेड़ के पीछे त्तते की छोटी सी दीवाल लगायी है..कोई देख नहीं पायेगा. मैं वहा पर चटाई और चादर बिछा कर आता हूँ.
 
अनीश मुझे पीठ पर अपने हाथों से सहला रहा था. मुझे अस्वस्थ लग रहा था. मुझे ऒर अनीश को काफी नशा भी हो गया था. तभी अमन आया..चलो मैडम..सब रेडी है..

अनीश मुझे सहारा देकर नशे की हालत में धीरे धीरे नारियल के पेड़ की पीछे ले कर गये. वहा अमन ने निचे बहुत बड़ी चटाई बीघा दी थी ऒर उसपर मोटी चादर ऒर बाजू में कुछ टॉवल ऒर मसाज का तेल रखा था.

मैं उसपर लेट गयी. अमन मेरे पैरों पर तेल लगाकर मालिश करने लगा. मेरे तलवों पर तेल लगाकर अपने बड़े खुरदूरे हाथ से रगड़ने लगा.’’

अमन: सर मैडम की टॉप पर तेल लग जायेगा. क्या इसको निकाल ले.

अनीश: हाँ, निकाल लो. नयी है ख़राब हो जाएगी.

अमन ने मेरा टॉप निकाल लिया ऒर मेरे मम्मों पर टॉवल रख कर ढक दिया.

अनीश: अमन तुम्हारे कपड़ो पर भी तेल लग जायेगा..तुम भी निकाल लो.

अमन : जी सर (अमन ने अपना शर्ट निकाल दिया..उसका गठीला बदन था..ऒर बॉलों वाला शरीर था, उसने पैंट निकाल दी. अब वो सिर्फ उसकी टाइट ब्रीफ्स में था. भरी मासलदार जांघों में उसके लण्ड का उभार बहुत बड़ा था.

अनीश: अमन तेरी बॉडी तो मस्त है.. रोज जिम में जाता है?

अमन: हाँ सर, होटल की जिम है. मेरी शिफ्ट ख़तम होने के बाद रोज २ घंटे कसरत करता हूँ.

अमन ने मेरा एक पैर उठाकर अपनी गोदी में ले लिए ऒर दोनों हाथों से तेल लगाकर मसाज करने लगा. जब भी वह अपने हाथ मेरे घटने से निचे रगड़ता, मेरा पैर उसकी ब्रीफ्स के ऊपर उसके लण्ड को छू जाता. उसके लण्ड के उभार के स्पर्श से मेरे शरीर में करंट दौड़ जाता. अमन ने अब मेरे दूसरा पैर उठा लिया ऒर तेल लगाने लगा.

अनीश: मैडम अब कैसे लग रहा हैं..(मेरा पैर उसके ब्रीफ्स को छू रहा था)

मैं: आह..! बहुत मस्त लग रहा अमन... आपके हाथों में जादू है. (अमन खुश हो गया ..जोर से मेरा पैर निचे की ऒर खिंचा ऒर मेरा पैर उसके गरम, कड़क लण्ड को दबा दिया, मैंने देखा की उसका लण्ड अब ब्रीफ्स में कड़क हो गया था. इधर अनीश का लण्ड भी उसकी ब्रीफ्स में उछल रहा था..बड़ा उभार बन गया था)

फिर अमन उठकर मेरे सर के पास बैठ गया ऒर मेरे कंधो - ऒर गले पर तेल डाल कर मसाज करने लगा. गले से उसका साथ फिसल कर कभी- कभी मेरे मम्मों को छू जाता. मेरी चूचियां अब उसके हाथों के स्पर्श से कड़क हो गयी थी. अब वह मेरे पेट पर बहुत सारा तेल डाल दिया ऒर मसाज करने लगा. उसके कारन उसको मुझ पर झुकना पड़ता ऒर उसकी ब्रीफ्स मेरे चहरे के ऊपर आ जाती. उसकी ब्रीफ्स से मुझे उसके लण्ड ऒर पेशाब की बदबू आ रही थी. एक दो बार उसकी ब्रीफ्स का उभार मेरे ओंठों ऒर चहरे पर फिसल गया.

अनीश सब आंखें फाड़ कर देख रहा था. उसको मजा आ रहा था. वह अपनी शॉर्ट्स के ऊपर से अपना लण्ड सहला रहा था.

आमना: मैडम अब ठीक लग रहा हैं ?

मैं: हाँ अब ठीक लग रहा हैं.

अनीश: ठीक हैं मैडम अब आप पलट कर सो जाओ. सर..आप की फेनी बची हैं..क्या आप उसको ख़तम करना चाहेंगे.

मैं पलटकर सो गयी. अमन फिर से मेरे पैरों के पास आ गया. अमन अब मेरे जांघों पर तेल लगा रहा था. अनीश फेनी पीने अपने टेबल पर चला गया.

अमन: मैडम आपकी स्कर्ट पर तेल लग जायेगा, इसको उतर देता हूँ.

मेरे जवाब की प्रतीक्षा किये बिना, अमन ने मेरा स्कर्ट पकड़ लिया ऒर उसके सात मेरी पैंटी भी निचे खींच ली. मैंने भी गांड ऊपर कर के उसको मेरी पैंटी ऒर स्कर्ट निकालने को आसानी कर दी. अमन ने मेरी गांड पर छोटा सा नैपकिन रख कर ढक दी. अब मैं बिलकुल नंगी सोई थी. अमन मेरी गांड पर तेल डाल कर मेरे नितम्ब दबा रहा था. अमन के मर्दाने साथ मेरे शरीर को अजीब सुख दे रहे थे. मैं अब बहुत गरम हो गयी थी. मैं कमजोर पड़ रही थी. उस स्थिति में अमन मेरे सात कुछ भी करता तो मैं मना नहीं करती. मेरी पीठ को भी अमन ने अच्छी से तेल से रगड़ा ..ऒर फिर से मुझे सीधे सोने को कहा.

अब जब में सीधे सो गयी तो मेरी बूब्स ऒर गांड का नेपकिन साइड में गिर गया. इस बार अमन ने उसे ढका नहीं. मैं उसके सामने पूरी नंगी सोई थी. मैं घूर-घूर कर उसके नंगे बदन को देखती ऒर उसकी ब्रीफ्स को. उसकी ब्रीफ्स..कुछ गीली हो गयी थी - precum के कारन. अब अमन मेरे मम्मे के आजु बाजू मसाज करने लगा. वह मेरे पेट से लेकर जांघों तक अपने साथ लेकर जाता. पर उसने अभी तक ना मेरे निप्पल्स को छुआ था, ना मेरी चूत को. मेरी चूत बहुत गरम हो गयी थी. गीली हो गयी थी.

तभी अनीश वहा पर अपना गिलास लेकर आ गया ऒर मेरे बाजू में बैठ गया.

अनीश: अरे वाह ! अमन तू तो मस्त मसाज दे रहा है. संध्या तेल में चमक रही हैं. बहुत खूबसूरत लग रही हैं. क्या कहते हो अमन?

अमन: हाँ सर , मैडम बहुत खूबसूरत है.. आप बहुत लकी हो. (अमन अब मेरे जांघों के बिच साथ फेर रहा था)

अनीश: हाँ..अच्छी से मसाज करो वहा अमन..देखो..संध्या की चूत कैसे पानी टपका रही हैं.

अमन: जी सर..इतनी खूबसूरत चूत मैंने पहली बार देखी. ऐसी चूत तो यह जो बीच पर विदेशी महिलाये हैं , उनकी भी नहीं होती. मैंने बहुत सारी विदेशी औरतों को मसाज किया ऒर उनकी चूत बहुत पास से देखी हैं, मैडम की चूत बहुत सुन्दर ऒर फूली हुई हैं.

ऒर वह फिर से मेरे जांघों के बिच तेल डाल कर मसाज करने लगा. पर अभी भी उसने मेरी चूत को छुआ नहीं था. मुझे बड़ी शर्म आ रही थी. अपने पति अनीश के सामने में किसी पराये मर्द के सामने पूरी नंगी थी. ऒर वह मेरे शरीर , मेरे आंग को छू रहा था, रगड़ रहा था, मसल रहा था. मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी. अनीश को कभी नशा हो गया था. वह आंखे फाडफाडकर अमन को मुझे रगड़ता देख रहा था. मैंने अनीश का साथ अपने साथ में पकड़ लिया. अनीश ने मुझे देखा..बोले - कुछ सोचो मत, सिर्फ आनंद लो.

अनीश: अमन यह बात अच्छी नहीं. संध्या पूरी नंगी हैं ऒर हम लोग नहीं.हम सब को नंगा हो जाना चाहिए.

ऐसे बोल कर अनीश ने अपनी शॉर्ट्स निकाल दी. शार्ट निकालते जी उसका लण्ड फनफनाकर आसमान को देखने लगा..पूरा १८० डिग्री तन कर खड़ा था. अमन ने भी अपनी ब्रीफ्स निकाल दी. उसका कटा हुआ काला लण्ड - नाग की तरह फुफकार रहा था. उसका लण्ड उसके घुटने तक आ रहा था १०-११ इंच का बड़ा जहरीला अजगर लग रहा था.

अनीश: अमन तेरा लण्ड तो बहुत बड़ा ऒर मोटा है.. संध्या तुम भी देखो..साथ लगा कर .
 
मैंने बेशरम होकर अमन का लण्ड पकड़ लिया..उसका लण्ड मेरे एक साथ में नहीं समां रहा था. उसकी लण्ड के टोपे से precum की शहद जैसे चिपचिपी बुँदे जमा हो गयी थी. अमन अभी भी मेरे जांघों के बीच, मेरी चूत के आजु बाजू तेल लगाकर मसाज कर रहा था. मैंने मेरे दोनों पैर उठाकर अपनी छाती से लगा दिये. इस के कारन मेरी चूत ऊपर खुलकर आ गयी. अनीश ने मेरी चूत पर साथ रखकर सहलाने लगा. अमन ने वैसे उसका साथ निकाल दिया.

अमन: रुको सर..थोड़ा देर..

मैं सिसक रही थी..तड़प रही थी..नशा हो रहा था -- फेनी का ऒर चुदने का ..

मैं: आह..उफ़....अब डाल दो

अमन: कैसे लग रहा मैडम...

मैं: बहुत मस्त..आह....अब अंदर डाल दो..प्लीज..

अमन: क्या डालना हैं मैडम ? अंदर मतलब कहा ..?

मैं: चोद दो मुझे...डाल दो अंदर..

अमन: अंदर मतलब बताओ मैडम.. क्या है?

मैं: मेरी चूत..उसमे डाल दो..आह..उह..

अमन अभी भी मेरी चूत के आजु बाजू तेल से रगड़ रहा था..मेरी चूत गीली हो रही थी. मैं पागलों जैसे छटपटा रही थी.

अमन: क्या डालना है मैडम आपकी चूत में.. ठीक से बता दो..

मैं: लण्ड डाल दो..जल्दी से..मेरी चूत में आग लग गयी हैं..

अमन: किसका लण्ड. डालना है मैडम ,,..साहब का ..या मेरा...

मैं: तेरा डाल से..मेरी चूत की मसाज तेरे लण्ड से कर दे..

मैंने ऐसा कहते ही अमन ने अपना लण्ड मेरी चूत पर रख कर धक्का मार दिया...उसका आधा कटा हुआ लण्ड मेरी चूत में चला गया.

मैं: आह...उफ़...अनीश...

अनीश सिर्फ फटी आँखों से देख रहा था. उसको अपेक्षित नहीं था की उसका खेल यह रंग लाएगा. वह अपने लण्ड को पकड़कर हिला रहा था.

अनीश: अमन चोद दे इसकी चूत..इस रंडी की चुदाई कर दे अच्छी से...

अनीश के मुँह से यह सुन कर मैं हैरान हो गयी. मुझे अंदाजा था की अनीश को मेरा नंगे शरीर का प्रदर्शन कर के अच्छा लगता है..पर उसको ऐसे मुझे पराये मर्द से चुदता देख आनंद आएगा यह मुझे अपेक्षित नहीं था. अमन का कटा हुआ लण्ड मेरे चूत की अंदर की दिवार छू रहा था...ऒर रगड़ रहा था..मैं इस सब घटना से इतनी जोश में आ गयी..मैं अमन के लण्ड पर अपनी चूत का पानी छोड़ने लगी. मैं कांप गयी..वैसे अमन ने मुझे झुक कर .मेरे ओंठों को चूसना शुरू किया.. मैं आह..उफ़..कर के ३-४ मिनट तक उसके लण्ड पर झड़ती रही..ऒर उसका लण्ड अब मेरे चूत के पानी से पूरा गिला ऒर चिकना हो गया था. अमन अब फिर से उठा, मेरे पैर ऊपर अपने कन्धों पर ले लिए ऒर धीरे धीरे अपना लण्ड पूरा अंदर घुसाकर आगे पीछे चोदने लगा. मेरी चूत की चिकनाहट से उसका पूरा ११ इंच का लण्ड मेरी चूत में घुस रहा था.

अमन: कैसे लग रहा मैडम.. कैसा हैं मेरा लण्ड..

मैं: आह अमन..तुम्हारा लण्ड तो बड़ा अजगर हैं..मेरी चूत खा लेगा..

अमन: वाह रानी... तेरी चूत भी बहुत मस्त गरम ऒर कसी हुई हैं. अनीश, मेरा इतना बड़ा ऒर मोटा लण्ड बहुत कम औरतें पूरा चूत के अंदर तक लेती है.. पर तेरी बीवी तो मेरा पूरा लण्ड आसानी से निगल गयी. लगता हैं इसकी चूत बहुत भुकी हैं ऒर इसने बड़े बड़े लण्ड खाये है.

अनीश: हाँ अमन इसकी चूत बहुत भुकी है. पर शादी की पहली रात यह कुंवारी थी. इसकी सील मैंने तोड़ी थी. बहुत खून बहा था.

अमन चूत का खिलाडी था. उसने मेरी चूत को देखकर पहचान लिया था की..लम्बी रेस की घोड़ी है ऒर बहुत सारे लण्ड का स्वाद चख चुकी हैं.’

अमन: बता भुकी चूत.. किसके लण्ड से ज्यादा मजा आता है..मेरे या तेरे पति के..

(अमन मुझे प्यार से चोद रहा था..उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा था)

मैं: आह अमन तेरा लण्ड..अंदर तक जाता है,,

अमन: तेरे पति का लण्ड तो बहुत छोटा है .. बच्चे की तरह.. इतना लण्ड तो मेरा १० साल की उम्र में था..

मैं: हाँ एकदम छोटा सा बच्चे का लण्ड है..’

अमन: बोल किसका लण्ड चाहीये तुझे.. मेरा या अनीश का

(अमन की भाषा अब बदल गयी थी..वो मुझे पहले ही रांड बोल चूका था. अब अनीश भी साहब से सिर्फ अनीश बन गया था. वह हम दोनों पर हावी हो रहा था. उसका प्रभुत्व दिखा रहा था. वह अब लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगा कर मेरी चूत की कुटाई कर रहा था. मेरी चूत उसकी कुटाई से पीस रही थी..गीली हो रही थी. पानी का झरना बहा रही थी )

मैं: तेरा लण्ड अमन..मुझे तेरा लण्ड चाहिए.

अमन: देख अनीश..तेरी बीवी मेरी रांड बन गयी..क्या करू..तू चोदेगा या मैं चोदू.?

अनीश: तू चोद दे उसको..इसकी चूत की आग शांत कर दे..मेरे ६ इंच की नुन्नी से इसकी प्यास नहीं बुझने वाली. तेरा ११ इंच के गधे जैसे लण्ड से इसको चोद दे.

अमन: हाँ पर अगर मैं इसको चोदूँगा तो मेरा माल भी इसकी चूत के अंदर डाल दूंगा. क्या तुझे मुल्ले के कटे हुए लण्ड का पानी तेरी संस्कारी बीवी की चूत में डालना पसंद आएगा.

अनीश: हां अमन..डाल दो ..तेरे कटे लण्ड का पानी इसकी गरम चूत में डाल दे..

अमन अब जोर जोर से मेरी चूत को चोद रहा था..उसकी बड़ी बड़ी लटकी हुई गोटिया..मेरी गांड पर..थप..थप..थप..की आवाज कर रही थी. मैंने अनीश को मेरे तरफ खींच लिया..ऒर उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया .. उसका लण्ड पूरा गले तक चूसने में मजा आता था..छोटा था पर मोटा लोल्लिपोप था. मैं उसकी गोटियां भी चाटने लगी.

अमन: आह..क्या मस्त चूत है..कसी हुई..गरम.. मेरा पानी निकाल जायेगा. अनीश इसकी चूत में पानी गिरा दू.?

अनीश; हाँ डाल दे अमन..इसकी चूत तेरे पानी से गिला कर दे..

अमन: हाँ पर इसकी चूत साफ़ भी तू ही करेगा..चाट कर. तुझे इसकी चूत में से मेरा माल चाटकर साफ़ करना पड़ेगा.

अनीश: हाँ मैं मेरी बीवी की चूत चाट कर साफ कर दूंगा अमन..डाल दे अब इसकी चूत में अपना पानी. इसकी चूत की प्यास बुझा दे..
 
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ.. अनीश सब करने को राजी हो गया था. अमन एक प्रौढ़ परिपक्व ऒर अनुभवी आदमी था. उसने अनीश की मानसिकता ऒर उसकी कमजोरी आसानी से पकड़ ली थी. ऒर मेरी भी.

अमन अब जोर जोर से मुझे चोदने लगा..मैं गरम होकर तड़प रही थी..मैंने कसकर अपने पैरों मैं अमन की गांड जकड ली...ऒर फिर से उसके लण्ड पर झड़ने लगी..अमन भी आह..ले रांड..ले मेरे लण्ड का रस..

तभी अनीश भी..उह...हाँ पीला दे इसको..मुल्ले कटे लण्ड का रस..इसकी चूत भीगा दे..ऒर अनीश मेरे मुँह में झड़ने लगा..

मेरी चूत से बहुत सारा पानी का झरना बहा ऒर अमन के लण्ड को भिगाकर पूरा गिला कर दिया..अमन..ने १०-१५ झटके लगा लगा कर मेरे चूत के अंदर उसके पानी का फंवारा उड़ाया. उसका गरम गाढ़ा पानी मेरे चूत के अंदर तक चला गया.. उसकी गर्माहट मुझे मेरी चूत के अंदर महसूस हुई. अनीश ने भी उसका सारा माल मेरे मुँह में डाल दिया था. मैं बड़े प्यार से उसके लण्ड को चूस रही थी ऒर उसका गाढ़ा वीर्य पी रही थी. अमन वैसे ही कुछ देर तक मेरे ऊपर पड़ा रहा.. फिर उसने धीरे से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया..मेरी चूत से उसका पानी निचे बहने लगा..तभी अनीश वहा आ गया ऒर मेरी चूत चाटने लगा. मेरी चूत को चाट चाट कर वह सारा पानी..मेरी चूत ऒर अमन के लण्ड से निकला हुआ - चाट कर साफ कर दिया. उसने मेरे चूत के अंदर भी जीभ डाल कर उस मुल्ले का सारा पानी पी लिया. अनीश बहुत खुश लग रहा था.

अमन ने गीले टॉवल से मेरा सारा शरीर पोंछ डाला. अमन एक प्रोफेशनल मसाजर था. उसको कहा कैसे बोलना ऒर व्यवहार करना यह ठीक से पता था.

अमन: सर खुश हो ना .. कोई गलती तो नहीं. अगर कोई गलतु हुई होगी तो माफ़ कर देना.मेरा काम बस आप लोगों की सेवा करना है.

अनीश: अमन बहुत मजा आया.. कोई गलती नहीं हुई. सब एकदम ठीक हुआ.

अमन: सर अब सूरज ढलने वाला हैं..आप सनसेट का नजारा देख सकते या बीच पर फिर से एन्जॉय कर सकते हैं.

अनीश: हम बीच पर चले जायेंगे फिर से. संध्या अब तू सिर्फ स्कर्ट पहन लो..पैंटी मत पहनो. अमन तुम संध्या की पैंटी ले कर जाओ ..रूम में रख देना.

अमन खुश हो गया. उसने मेरी पैंटी ख़ुशी से ले ली.

हम धीरे धीरे बीच पर चले गए. सनसेट देखने काफी लोग आ गए थे. सब फिरंगी थे.. ऒर लगभग नंगे या नहीं के बराबर कपडे थे. अनीश मुझे पानी के अंदर..ले गए. अभी भी हम थोड़ा नशे में थे.. उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिए ऒर प्यार करने लगा. पानी में मेरी स्कर्ट ऒर टॉप मेरे अंगों से चिपक गयी. मेरे गीले कपड़ो में मेरा नंगा शरीर पूरा दिख रहा था.

अनीश: संध्या ..तुम खुश हो ना. तुझे बुरा नहीं लगा ना.

मैं: अनीश आप मेरे पति हो. आप बोलो..क्या आप खुश हो

अनीश: हाँ संध्या. मैं बहुत खुश हूँ. तुम्हे ऐसे लोगों के सामने नंगा दिखाने मैं मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है.. तुम इतनी सुन्दर हो. मुझे बहुत गर्व होता है जब कोई दूसरा मर्द तुम्हे लालची नजर से देखता है, या चोदता हैं.

मैं: मुझे यह ठीक नहीं लगता अनीश. पर तुम मेरे पति हो..मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगी.

अनीश ने मेरी स्कर्ट के अंदर साथ डाल कर मेरे चूत के अंदर एक ऊँगली डाल दी. मैं भी उसका लण्ड सहलाने लगी. अनीश का लण्ड अब फिर से तन कर खड़ा हो गया था. तभी हमने देखा..हमारे पास एक बहुत ही सुन्दर ऒर जवान फिरंगी जोड़ा था. वह एक दूसरे को चुम रहे थे. औरत उस आदमी की गर्दन पर लटक रही थी. अपने दोनों पैरों से उस आदमी की कमर को जकड कर बैठी थी ऒर समुद्र के पानी में उसके लण्ड पर बैठ कर उछल रही थी. यह देखकर हम ऒर गरम हो गए. उनको देखकर हम भी एक दूर को चूमने लगे ऒर अनीश ने मेरा पूरा स्कर्ट ऊपर कर दी ...पानी के लहरों में मेरी स्कर्ट ऊपर हो जाती ऒर मेरी खुली गांड ऒर चूत दिख रही थी. मैंने भी अनीश की शॉर्ट्स नीच कर दी ऒर उसके लण्ड को सहलाने लगी.

तभी पानी के लहरों की बहाव से वो जोड़ा हमारे पास आ गया . उनकी उम्र कुछ २०-२१ लग रही थी. दोनों के बाल सुनहरे थे. बहुत सुन्दर कसा हुआ शरीर था. ग्रीक बूत की तरह तराशा संगमरमर का बदन, गहरी नीली-हरी ऑंखें..जैसे स्वर्ग से कोई सुन्दर गन्धर्व ऒर अप्सरा आये हो. उन्होंने मुस्कराकर हमें - हाई किया. हमने भी गर्मजोशी से जवाब दिया.

आदमी: (इंग्लिश मैं) - सनसेट का नजारा बहुत सुन्दर है. आप दोनों बहुत सुन्दर लग रहे हो.

अनीश: हाँ सच मैं बहुत सुन्दर है. आप दोनों भी सुन्दर हो. कहा से हो.

अब वह दोनों हमारे बहुत पास आ गए. वह औरत वैसे ही उस आदमी पर लटक कर उसके लण्ड पर बैठी थी समुद्र की लहरों के साथ वो उसके लण्ड पर ऊपर निचे उछलती.

आदमी ने आगे हाथ बढ़ाया : मेरा नाम बेन हैं ऒर यह मेरी गर्लफ्रेंड सारा हैं. हम दोनों इसराइल से हैं.

अनीश: मेरा नाम अनीश है, यह मेरी पत्नी संध्या हैं. हम बंगलोर से हैं. क्या आप इसी होटल में रुके हैं.

बेन: हाँ हम इसी होटल में हैं. हमारा १५ लोगों का ग्रुप हैं.

तभी एक तेज लहर आयी.. ऒर बेन ने ऊपर उछल कर..सारा की चूत में फिर से अंदर तक अपन लण्ड घुसा दिया.. उसका लण्ड सारा की चूत मैं था, इसलिए लम्बाई पता नहीं चल रही थी पर..बहुत मोटा लग रहा था.

यह देख कर अनीश भी जोश में आ गया..उसने भी मुझे कन्धों तक उठा दिया ऒर मेरे दोनों पैर कमर पर ले लिए ऒर मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया.

यह देखकर बेन ऒर सारा भी बहुत खुश हो गए : उसने अंगूठा दिखा कर - चियर्स ! किया

अब समुद्र के पानी के तेज लहरों में बेन ऒर अनीश दोनों उछल उछल कर आसानी से चुदाई कर रहे थे. बेन ने मुझे देखा. उसकी हरी आँखों में मैं खो गयी. वो चोद सारा को रहा था पर आँखें मुझसे लड़ा रहा था. मैं भी अनीश के लण्ड पर उछल उछल कर चुद रही थी, पर बेन की आँखों से खुद को चुदवा रही थी. उसी मदहोशी में मैं अनीश के लण्ड पर झड़ने लगी..आह..ओह्ह.......ओह अनीश..

उधर सारा भी बेन के लण्ड पर झड़ने लगी..ऒर बेन भी कराहने लगा : ..आह..येह.. फक यू बेबी .. फक योर इंडियन पुस्सी..उसकी चूत में झड़ गया.

सारा तो इस्राइली थी. फिर बेन ने उसको ..फक योर इंडियन पुस्सी .. क्यों कहा..वह यह सब मेरी तरफ देख कर बोल रहा था. क्या उसको मेरी चूत लेनी थी.?

बेन: मजा आ गया अनीश. आप दोनों बहुत सेक्सी ऒर सुन्दर कपल हो.

अनीश: थैंक यू बेन. आप दोनों भी बहुत मस्त हो. तुम दोनों से मिलकर बहुत ख़ुशी हुई.

बेन: हमारा ग्रुप रात को यहाँ पार्टी करने वाले है. क्या आप आयेंगे?

अनीश: अगर आप को कोई दिक्कत नहीं तो जरूर आयेंगे. ऐसे भी हम दोनों अकेले हैं.

बेन खुश हुआ...ओके अनीश एंड संध्या..आपको पार्टी में मिलते है. ऒर हाँ पार्टी ड्रेस कोड सिर्फ स्विमिंग ड्रेस हैं आप दोनों ठीक रात को ९ बजे आ जाना. उन नारियल के पेड़ के पास.

नारियल के पेड़ के जिक्र से मैं शर्मा गयी. मुझे अमन की चुदाई याद आ आयी.
 
हम धीरे धीरे पानी से बाहर आने लगे. बेन की शॉर्ट्स अभी भी निचे घुटने तक थी. उसका पूरा लण्ड दिख गया. सुकड़ कर भी वो अच्छा ६-7 इंच का खूबसूरत मोटा गोरा गुलाबी लण्ड था. उसका लण्ड भी अमन की तरह कटा हुआ था. मुझे देखकर बेन ने आँख मारी ऒर अपनी शॉर्ट्स धीरे से ऊपर कर दी. मैं शर्मा कर मुस्करा दी.

कमरे में जाकर हम थककर सो गए. २ घण्टे का आराम कर के हम उठे..हमें बेन की पार्टी में जाना था. मैं बाथरूम में जाकर तैयार होने लगी. मैंने एक स्विमिंग सूट लाल कलर का फूलों के डिज़ाइन वाला सिलेक्ट किया. एक टाइट बिकिनी और निचे जांघों तक की लोअर शॉर्ट्स पेहेन ली. लाल रंग के ड्रेस मैं मेरा गोरा बदन और भी चमक रहा था. मैंने बाल सवार लिए और हल्का मेक उप कर के बाहर आ गयी.

मुझे देखकर अनीश एकदम चहक उठा और एक बड़ी सिट्टी बजा दी. कहा - वाह जान तू गजब की सेक्सी लग रही है. लगता हैं आज सब इस्राइली मिसाइल्स तुम्हे सलाम कर के गोला-बारूद बरसा देगी.

मैं: चुप..शैतान कही के..कुछ भी कहते हो.’’

अनीश ने मुझे खींचकर बाँहों में जकड लिया.. सच में तुम सुन्दर हो संध्या. और मैंने झूट क्या कहा..बेन तेरी चूत को घूर कर उसकी गर्लफ्रेंड को चोद रहा था. और तू भी तो उसके लण्ड को घूर के देख रही थी.

मैं: चलो ..झूठे..मैंने कुछ नहीं किया . वह तो ऐसे ही उसका लण्ड अलग दिख रहा था इसलिए देख रही थी.

अनीश: अलग मतलब कैसे था बेन का लण्ड ? बताओ न संध्या ?

मैं: मैं नहीं बताती..जाओ बड़े नटखट हो..’

अनीश..नहीं बताना तो पड़ेगा...और अनीश ने उसका हाथ मेरे स्विमिंग कौस्तुम के लोअर में डाल दिया और दूसरा साथ मेरी बिकिनी के अंदर डाल कर मेरी चुचिया मसलने लगा. बेन के लण्ड के विचार से मेरी चूत भी गीली हो गयी थी. अनीश मेरी गीली चूत से खेलने लगा.

अनीश: आह रानी ! बेन के लण्ड के बारे में सोचकर तेरी चूत एकदम गीली हो गयी. बता न कैसे अलग है उसका लण्ड.’’

मैं (शरमाते): वो उसका लण्ड एकदम गोरा है ना ..और आगे का टोपा एकदम गुलाबी लाल.. टमाटर की तरह.. ऐसा लण्ड कभी देखा नहीं.

अनीश:फिर तो तुम्हे उसका लण्ड जरूर चखना चाहिए..ऐसा कहकर अनीश ने मेरी बिकिनी टॉप से मेरे ब्रा निकाल दी..और ..पैंटी भी निचे करके निकाल दी.

मैं..चलो बदमाश..कुछ भी कहते हो..और मेरी पैंटी और ब्रा क्यों निकाल दी आपने..

अनीश: ठीक हैं रानी तैयार होता हूँ.. पैंटी और ब्रा का स्विमिंग costume पार्टी में कोई काम नहीं रहता..तुम ऐसे ही चलो.

हम तैयार होकर बीच की तरफ चलने लगे. नारियल के पेड़ के पास बिच में आग जला कर राखी थीऔर पार्टी-डांस के गाने बज रहे थे. करीब १२-१५ गोरे आदमी और औरतें, जवान से लेकर बूढ़े ..नाच रहे थे..सबके साथ मैं ड्रिंक्स या बियर बोतल थी.. कुछ लोग सिगरेट भी फुक रहे थे. सब नशे में थे. तभी बेन ने हमें देख लिया..वह हमारे पास चलते आ गया..और अनीश को जोर से गले लगा लिया..वेलकम माय फ्रेंड अनीश. फिर उसने मेरी तरफ देख कर कहा .. वाओ संध्या..आप बहुत सुन्दर और आकर्षक लग रही हो.उसने मुझे भी अपने तरफ खींच कर गले लगा लिया और मेरी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर मेरी चूत पर अपने लण्ड को रगड़ दिया. उसने बहुत हल्का, पतला, और छोटा सा शॉर्ट्स , बिना अंडरवियर के पहना था. उसके लण्ड के स्पर्श से मेरी चूत में आग लग गयी..शरीर में करंट दौड़ गया. अनीश देख कर मुस्करा रहा था.. उसकी और बेन की शॉर्ट्स में हल्का सा तम्बू बन गया था.

बेन ने हमें उसके कुछ मित्रों से मिलाया और ड्रिंक्स ऑफर की..तभी वहा एक बहुत लम्बा और हट्टा - कट्टा लगभग ६० साल का गोरा सा आकर्षक बुजुर्ग आया. बेन ने कहा - इनसे मिलो यह मेर दोस्त के पिताजी डेविड है..अभी मिलिट्री से रिटायर हुए है. हमने डेविड से साथ मिलाया. बहुत देर तक डेविड ने मेरा साथ पकड़ कर रखा और बात करते रहा. उसने बहुत ही हलकी और छोटी सी शॉर्ट्स पहनी थी..उसके मोटे लम्बे लण्ड और गोटियों का उभर साफ़ दिख रहा था.. उसकी चौड़ी बालों वाली छाती और महाकाय शरीर देखकर उसके हाथों से मेरी चूत में करेंट लगने लगा और मेरी चूत गीली हो रही थी. उसकी गहरी नली आँखों में मुझे वासना साफ़ दिखाई दे रही थी ओर वह मुझे अपने नजरों से चोदे जा रहा था.

डेविड के कहने पर मैंने एक बियर ले ली. ओर हम सब साथ में डांस कर रहे थे.. सारा भी बड़ी सेक्सी लग रही थी..वो भी अनीश को चिपक कर नाच रही थी. तभी बेन ने मुझे पीछे से पकड़ लिया अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबाकर..मेरी गांड पर अपने कमर से धक्के देकर नाचने लगा..मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था. बियर के कारन ऐसे ही मैं खुल गयी थी. तभी डेविड वहा आया..और उसने एक सिगरेट बेन को दी..ओर उनके भाषा में कुछ कहने लगा. बेन ने डेविड को रुकने कहा..उसने सिगरेट से २-३ चस्के लगाये ओर मुझे पूरा जकड़कर मेरे कानो में पूछा..संध्या डार्लिंग क्या तुम गांजा स्मोक करना चाहोगी.

मैंने कहा: नहीं मुझे पता नहीं कैसे होता है..मैंने कभी किया नहीं.

बेन ने कहा..ठीक है फर्स्ट टाइम कर के देखो..डेविड हेल्प करेगा..

उसने डेविड से कुछ कहा..वैसे डेविड मुस्करा उठा.. उसने सिगरेट से एक बड़ा धुवा अंदर लिया ..ओर मेरे पास आकर मेरे चहरे को पकड़ कर मेरे होंठ पर अपने होंठ रखकर..धुआँ मुँह में छोड़ने लगा.. बेन मुझे वैसे ही पीछे से लिपटकर खड़ा था..उसने कहा..संध्या धुआँ अन्दर खींच लो...ओर फिर से बाहर छोड दो.. ऐसा करने से मुझे सर में सनसनी हो गयी.. डेविड मुझे चूमता, मेरे होंठ चूसता ओर मुँह के अंदर धुआं छोड़ता जा रहा था. मैं उन दोनों मर्दों के बीच बस फिसलते जा रही थी. मेरा सारा शरीर एकदम कामुक हो गया ओर शरीर एकदम नग्न लगने लगा..

पीछे से बेन का मोटा लण्ड..मेरे गांड पर रगड़ रहा था..ओर अब उसका साथ भी मेरे गीली चूत को शॉर्ट्स के अंदर सहला रहा था. डेविड को बहाना मिल गया था..वह अब.. धुआँ से ज्यादा मेरे ओंठों का रसपान कर रहा था..अपनी जीभ अन्दर तक मेरे मुँह में डाल रहा था. अपने हाथों से डेविड मेरे बूब्स..बिकीं के अंदर डाल कर सहला रहा था.. मैं भी नशे के हालत में कुछ कर नहीं प् रही थी..मुझे भी मजा आ रहा था ओर जन्नत दिखाई दे रही थी. मैंने नजर घुमाई. ओर अनीश को ढूंढ़ने लगी. कहा है , क्या कर रहा है .. ? आजु बाजु सब जगह मर्द ओर औरतें एक दूसरे से लिपटे थे, चिपके थे, चूमा-चाटी कर रहे थे. ओर कामुक आनंद ले रहे थे. .. सब लोग लगभग नग्न हो गए थे ओर बहुत खूबसूरत लग रहे थे.. तभी मुझे पास में अनीश - सारा के साथ दिखा..दोनों नग्न अवस्था में निचे रेत पर लेटे थे ओर सारा अनीश का लण्ड चूस रही थी.. ओर अनीश उसकी चूत.. बिच में अनीश मुझे भी घूर कर देख रहा था.. जैसे हमारी नजर मिली.. अनीश ने मुझे आँख मार दी..ओर अंगूठा दिखा कर..चियर्स किया..ओर फिर से अपना चेहरा सारा की चूत पर दबा दिया..

अब नशे के हालत में मैं भी निचे बैठ कर लेट गयी...वैसे डेविड भी निचे बैठ गया ओर मेरा सर अपनी जंघा पर ले लिया. बेन मेरे पैरों के पास बैठ गया ओर मेरे पैर अपनी गोदी में ले लिए. डेविड ने झुककर मेरी बिकिनी टॉप निकाल दी ओर मेरे बूब्स आजाद कर दिए.. ऐसे करते वक्त उसकी जांघों पर मेरा मुँह उसके लण्ड पर घिस गया.. उसका १० इंच का गोरा मोटा लण्ड...फनफना रहा था. उसने अपनी शॉर्ट्स निचे कर दी ओर अपना लण्ड का टोपा मेरे मुँह मैं घुसेड़ दिया. वहा बेन ने भी मेरी लोअर शॉर्ट्स निचे खिसका कर निकाल दी.. ओर वह मेरी चूत को देखकर चहक उठा..आह..हॉट इंडियन पुसी.. ओर मेरी चूत चाटने लगा. अब में दो गोरे लोगों के बीच एकदम नंगी सोई थी. एक मेरे मुँह को अपने भारी भरकम मोटे पके लण्ड से चोद रहा था ओर दूसरा मेरी नंगी चूत को चाट चाट कर रसपान कर रहा था.

६० साल के आदमी का लुण्ड..मुझे किसी पके हुए केले जैसे लगा रहा था... मीठा ओर स्वाद भरा..! तभी मैंने देखा की अनीश भी मेरे पास आकर बैठ गया.. ओर सारा उसकी गोदी में बैठ गयी थी... अनीश की जांघों पर उछल उछल कर वो अपनी चूत, अनीश के मोटे लण्ड से चुदवा रही थी. पर अनीश की नजर सारा वक्त मेरे ऊपर थी. अपने पति अनीश को किसी दूसरी औरत को चोदते देख में भी तमतमा गयी.. मैं प्यार से डेविड का मोटा लण्ड अपने दोनों हाथों से पकड़ कर चूसने लगी..ओर धीरे धीरे कर के पूरा लण्ड अंदर बाहर मेरे गले तक चूस लेती.

डेविड बहुत खुश हो गया..वह.. मेरी चूचिया दबाने लगा..ओर आहे भरने लगा.. तभी बेन ने मेरे दोनों पैर अपने हाथों से उठाये ..ओर मेरी छाती पर मोड़कर रख दिए..मेरी चूत अब खुलकर बाहर आ गयी.. तभी मैंने सुना - वाओ..इंडियन औरतों की चूत बहुत खूबसूरत ओर फूली हुई होती हैं.. हम लोग नसीबवाले है..हमको यह खूबसूरत औरत मील गयी. मैंने देखा की बेन के दो ओर दोस्त अब पास आकर बैठ गए ओर देख रहे थे..दोनों नंगे थे..ओर उनके लण्ड भी बड़े ओर खड़े थे..ओर गोरे गुलाबी थे. मैंने देखा बेन का बड़ा ८ इंच का मोटा गुलाबी लण्ड..मेरी चूत की प्रवेशद्वार पर दस्तक दे रहा था...मेरी चूत भी उसके लण्ड का आदर-सत्कार करने गीली होकर पानी बहा रही थी..तभी बेन ने एक झटका लगाया ओर उसका पूरा लण्ड ...मेरी चूत की दीवाल को फाड़ता...अंदर तक चला गया...में नशे की हालत में आनंद से चहक उठी..ओर उसकी कमर पर से अपने दोनों पैर ऊपर कर के उसकी गांड को कस के अपनी चूत पर जकड लिया.

वैसे बेन..आह मेरी रंडी...क्या गरम मसालेदार भारतीय चूत है...ओर धीरे धीरे मेरे चूत पर लण्ड आगे पीछे कर के धक्के मार कर चोदने लगा. अब में दोनों तरफ से चुद रही थी.. मेरी चूत ओर मेरा मुँह..मुझे बहुत मजा आ रहा था..मैं परमांनद की सेर कर रही थी..तड़प रही थी..तिलमिला रही थी.. मैंने देखा..अनीश मुझे घूर घूर कर देखे जा रहा था.. ओर सारा की चुदाई कर रहा था..वह बड़बड़ा रहा था..हां..चोद डालो उसको.. मेरी बीवी को सब चोद डालो..उसको रंडी बना दो.. उसकी चूत में सब लोग अपना पानी छोड दो..’

यह सुनका में बहुत उत्तेजित हो गयी..ओर जोर से झड़ने लगी..ओर चिल्ला उठी.. आह..उह बेन..डेविड...ओर मेरी चूत ने गरम पानी का झरना बहा दिया...मेरे पानी से बेन का लण्ड ओर भी चिकना हो गया ओर वह मुझे जोर जोर से चोदने लगा.. डेविड का लण्ड भी पूरा गले तक मेरे मुँह में था.. वह भो जोर से धक्के मार के उसका लण्ड अंदर बाहर करके मेरे मुँह को चोदने लगा.. मेरे चीखने ओर चिल्लाने की आवाज से हमारे आजु बाजु बेन के जो दोस्त यह सब देख रहे थे ..वह पास आकर खड़े हो गए ओर अपना लण्ड मेरी चुदाई देखकर हिलाने लगे. उधर अनीश नशे के हालत में उनको कह रहा था..तुम सब मेरी बीवी को चोद दो..वह लण्ड की भुकी हैं..उसकी प्यास बुझा दो..!

सब जगह सेक्स की आग लगी थी...तभी बेन ओर डेविड आहे भर के लगभग एक साथ ही अपना फनवारा मेरी चूत ओर मुँह में उड़ाने लगे. नशे के हालत मैं.. डेविड का पानी किसी अमृत की तरह मीठा लग रहा था..बेन के गरम ओर गाड़े वीर्य से मेरे चूत भर गयी..ओर उसका सब पानी बाहर बहाने लगा..

मैं अभी भी नशे के हालत में थी.. डेविड ने मेरे मुँह से अपना लण्ड बाहर निकाला.. वो अभी भी सख्त था.. मैंने उसका सारा पानी प्यार से निगल लिया था.. उसने मेरा सर उसके जांघों पर रख दिया..मेरा चहेरा उसके लण्ड पर चंघों पर रगड़ रहा था..मुझे उसकी लण्ड ओर गोटियों की महक से ओर भी नशा चढ़ रहा था ..मैं उसकी गोटियों को पागलो की तरह चाटने लगी..चूमने लगी. डेविड ने फिर से सिगरेट जलाई.. ओर धुआँ ..उड़ाने लगा ..फिर से मुझे चूमने लगा.. मुझे फिर से नशा बढ़ने लगा. बेन ने धीरे से अपना मोटा लण्ड मेरी चूत से निकाला .. ओर कहा..अनीश मेरे दोस्त..अपनी बीवी की चूत चाट कर साफ़ कर दो..मेरे दोस्त भी इसकी चूत को चोदेंगे ... यह सुनकर..अनीश ख़ुशी से मेरे पैरों के पास आ गया..ओर कुत्ते जैसे जीभ बाहर निकाल कर...मेरी चूत चाटने लगा.. मेरी चूत चाट चाट कर उसने बेन का सारा पानी चाट लिया..

तभी बेन का एक दोस्त डेविड की जगह बैठ गया..ओर उसका गुलाबी लण्ड मेरे मुँह में ठुस दिया.. ओर दूसरा दोस्त मेरे पैरों के बीच आकार अपना मोटा मुसल मेरे चूत में डाल कर चोदने लगा..डेविड मुझे चुम रहा था..ओर नशे का धुआँ ओर धूम्रपान करवा रहा था. नशे के हालत में मुझे धुन्दला दिखाई दे रहा था..पर बहुत आनंद आ रहा था..मैं सेक्स का आनंद उठाते रही.. रातभर..बिना होश के बिना सोचे समजे...कोण आया कोण गया..कोई हिसाब नहीं था.
 
आँख खुली तो देखा की मैं डेविड ओर बेन के बीच सोई थी. वह भी घोड़े बेचकर सो रहे थे. डेविड ने मुझे पीछे से कस कर पकड़ रखा था..ओर उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में घुसा था. मुझसे उठा नहीं जा रहा था..मैं उठाने लगी.. वैसे डेविड ने नींद में ही मुझे कस के पकड़ लिया ओर अपना लण्ड मेरी चूत में आगे पीछे करने लगा. वह सोते सोते ही मुझे चोदे जा रहा था.. उसका बड़ा मोटा लण्ड मेरी चूत की कुटाई कर रहा था..मैं उसको रोकना चाहती थी पर कुछ कर नहीं पा रही थी.

कामिनी चूत भी जवाब दे दी ओर पानी बहाने लगी. मेरी चूत डेविड के लण्ड को जकड कर प्यार करने लगी.. अपने पानी से उसको नहलाने लगी..डेविड सोते सोते मुझे चोदे जा रहा था.. आह संध्या.. क्या गरम पणीदार चूत है..ऐसे बाद बड़ा रहा था.. पता नहीं इस कमीने ने रातभर मेरी चूत कितनी बार चोदी hogi. मुझे कुछ भी होश नहीं था. डेविड रुकने का naam नहीं ले रहा था.. मेरी चूत कसमसाने लगी.. डेविड का बड़ा मोटा लण्ड मेरी चूत को जन्नत दिखा रहा था..फड़फड़ाते हुए मेरी चूत ने अपना पानी चोद दिया ओर मैं आवाज करके करहाने लगी..उह डेविड..मार डाला..कमीने..कितना चोदेगा..! पर डेविड बस चोदे जा रहा था..

बहुत थकान महसूस हो रही थी. धुन्दला नजर आ रहा था.. मेरा पूरा शरीर वीर्य से भरा था..चिपचिपा हो गया था.. बाजू में अनीश भी नंगा पड़ा था. आधे लोग नंगे पड़े सो रहे थे..आधे लोग चले गए थे.. तभी मुझे अमन दिखा..वो वहा साफ़ सफाई कर रहा था. मेरी आवाज सुन कर वो वहा आ गया.. अरे मैडम आप यहाँ इन गोरे लोगों से चुदवा रही हो..आप ठीक हो..?

डेविड की चुदाई चालू थी.. अमन के सामने नंगी होकर डेविड से छुड़वाकर मुझे शर्म भी महसूस हो रही थी ओर.. अच्छा भी लग रहा था. मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी..

मैं; आह...उम्..अमन... हाँ...

अमन: क्या हुआ मैडम..? आप ठीक से चुदवा लो..में बाद में आता हु..?

मैं: नहीं अमन...रुको..ाः..उफ़ डेविड..क्या लण्ड है..आह...

अमन: क्या हुआ मैडम...रुक जाऊ ? आप मुझसे छुड़वाना चाहती है?

मैं: उम्..हां...आह.....! मेरी मदत करो..

अमन: सॉरी मैडम..मैं इस होटल का नौकर हु..ऐसे सबके सामने आपको नहीं चोद सकता...अकेले में चोदूूँगा ..

मैं: नहीं अमन रुको.. ओह... आह...डेविड....उम्

डेविड मुझे जोर जोर से चोदे जा रहा था.. मेरा अब दूसरे बार पानी निकलने के करीब था. मुझसे उठा नहीं जा रहा था. मैं अमन से मदत लेना चाहती थी.. उठकर अपने कमरे में जाना चाहती. पर डेविड की चुदाई की छटपटाहट से कुछ बोल नहीं पा रही थी. तभी डेविड ने मुझे कस के पकड़ लिया..आह...उह..संध्या...करके मेरे चूत में अपना गरम लावा उड़ा दिया. मैं भी कांपकर रह गयी ओर जोर से डेविड के लण्ड पर फिर से दुबारा झड़ने लगी. १० -१५ झटके देकर डेविड का गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर तक चला गया. अमन हमें देख रहा था. अपनी पंत पर से अपना लण्ड सहला रहा था.. झटकों के बाद डेविड की पकड़ मुझपर से काम हो गयी. मैंने भी खुदको संभाला ओर कहां - अमन ..मुझे रूम ले चलो..मदत करो.

अमन ने मुझे मेरे कपडे पहनाये..ओर उठाया..पर मुझसे चला नहीं जा रहा था.. उसने मुझे गोदी में उठा लिया ओर होटल रूम पर ले गया.. मेरे पुरे शरीर पर मर्दों का पसीना ओर वीर्य लगा था. मेरे पुरे शरीर से पसीने ओर वीर्य की महक आ रही थी.

अमन ने कहा..मैडम आप को नहाने की जरुरत है..मैं आपको नहला देता हूँ..अमन मुझे नहलाने बाथरूम में लेकर गया..
 
अमन मुझे बाथरूम ले गया और शावर के निचे खड़े कर के शॉवर चालू कर के चला गया.. मेरे शरीर पर शॉवर के गरम पानी से कुछ रहत आयी.. कुछ देर में अमन भी बाथरूम के अंदर आ गया ..वो पूरा नंगा था. होटल का ड्रेस वो बाहर निकाल कर आया था. वो मेरे पास आया और मेरे पुरे शरीर पर साबुन रगड़-रगड़ कर लगाने लगा. उसने मेरे मम्मे पकड़ कर ...

बहुत देर तक साबुन रगड़ा और उसपर लगे वीर्य और पसीना साफ़ किया. इस कारन मेरे चूचिया साफ़ हो गयी और कड़क भी.. उसने मेरी चूचिया चूसने शुरू की.. मेरे मम्मों पर बहुत सारे काटने के निशान थे..और लाल हो गए थे.. पता नहीं रातभर किन किन कमीनो ने उनको चूसा और काटा था .. फिर अमन नीचे बैठ गया.. मेरी जंघा फैला कर वह मेरी चूत साबुन से धोने लगा... मेरी चूत पूरी गीली थी और डेविड के वीर्य से भरी थी..अमन ने मेरी चूत में ऊँगली डाल कर पूरी साफ़ की. फिर उसने मुझे पीछे पलट ने को कहा और मेरी गांड साफ़ करने लगा.. उसने मेरी गांड की छेद पर साबुन लगाया वैसे मुझे थोड़ा दर्द हुआ..

अमन: मैडम आपकी गांड भी लाल है.. गोरो ने रात भर आपकी गांड भी मारी है ... इसलिए आपसे चलना नहीं हो रहा था.

मैंने कुछ नहीं कहा... वैसे अमन ने साबुन लगाकर एक ऊँगली मेरी गांड में घुसा दी..

अमन : मैडम आपकी गांड अंदर से एकदम चिकनी और चिप-चिपि हो गयी.. लगता है बहुत सारे मर्दों ने उनका वीर्य आपकी गांड में अंदर डाल दिया है.

मैं चुप रही.. ..अमन का काला कलूटा कटा हुआ लण्ड अब फनफना रहा था..और पूरा १० इंच का हो गया था..मैंने देखा वो अपने लण्ड पर साबुन लगा रहा था.. वह उठकर खड़ा हो गया और मेरी गांड की दरार पर अपना मोटा लण्ड रगड़ने लगा. उसने मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया और मेरे मम्मे दबाने लगा. उसका लण्ड का सूपड़ा अब मेरी गांड की छेद पर कुटाई कर रहा था. उसने दूसरा हाट निचे किया और मेरी चूत को रगड़ने लगा मेरी चूत कसमसाने लगी और फिर से पानी बहाने लगी.. साबुन लगाने से उसका लण्ड जल्दी मेरी गांड की छेद के अंदर चीरता हुआ फिसल गया..

रात भर की चुदाई से, या नशे के प्रभाव से मुझे दर्द नहीं हुआ.. और आनंद आ रहा था. अमन मेरी गांड जोर जोर से चोदने लगा..और मेरे मम्मे दबाने लगा.

अमन: रंडी..तेरी गांड तो बहुत कासी हुई..मस्त गरम है.. रात भर गोरे लोग तेरी गांड और चूत मारते रहे..

मैं; उम् अमन... कुछ भी मत कहो...

अमन: रंडी..मैंने खुद देखा..रात भर ..तू रांड बन कर सब से चुदवा रही थी.. करीब १० - १२ मर्दों ने कल रात को कई बार तेरी चूत और गांड मारी..

मैं: आह..अमन..उम् (अमन जोर जोर से मेरी गांड मार रहा था) ..धीरे...अमन कुछ भी मत कहो...मुझे याद नहीं..

अमन: उफ़..तेरी गांड कितनी गरम है.. कामिनी तुझे कैसे याद रहेगा.. तू डेविड के सात चूमा-चाटी कर के नशे में थी.. मैंने सब देखा..तुझे वही चोदने की इच्छा हो रही थी..पर कुछ कर नहीं सकता था..होटल के नियम के कारन में ग्राहक लोगों से हिल-मिल नहीं सकता ..नहीं तो नौकरी चली जाएगी..

मै: आह.. (अमन अब पूरा लण्ड बाहर निकल कर फिर से मेरी गांड में डाल रहा था..पूरा लम्बा बड़ा स्ट्रोक लगा कर मेरी गांड चोद रहा था) तुम झूट बोलते हो तुम..अनीश ने मेरा ख्याल रखा होगा..

अमन जोर जोर से मेरी गांड मार रहा था.

अमन: अरे रंडी तुझे कुछ याद नहीं..उल्टा तेरा पति अनीश .. भड़वा है एक नंबर का.. एक एक फिरंगी को बुला कर तुझे चुदवा रहा था.. और तेरी चूत चाट - चाट कर साफ़ कर रहा था.''

मैं: मुझे रो सिर्फ डेविड और बेन याद है ..'

अमन: हाँ बाद में उन दोनों ने साथ मिलकर तेरी चुदाई की.. डेविड तेरी चूत मर रहा था और बेन तेरी गांड मार रहा था.. और उनके दोस्त तेरा मुँह चोद रहे थे..तू उनका पानी मजे से पी रही थी..हर आदमी ने कल तुझे चोदा होगा..और तूने भी हर आदमी का लण्ड का स्वाद चूस चूस कर लिया..

मैं..आह..मेरी चूत अब कसमसा रही थी.. गरम होकर पानी बहा रहे थी..

अमन ने एक साथ निचे कर के ..मेरी चूत का दाना रगड़ दिया.. वैसे ही मैं...आह.........उफ़..कर के जोर से झड़ने लगी. झड़ने के कारन मेरी गांड थरथरा गयी और अमन के लण्ड को कस के जकड लिया. वैसे अमन भी आह..कराहकर मेरी गांड में झड़ गया.. मेरी गांड के अन्दर अमन के गरम पानी का अहसाह हुआ..'

मैं थक गयी थी. बाथरूम की दीवाल को पकड़ कर खड़ी हो गयी..अमन का लण्ड भी मेरी गांड से बाहर निकल गया.. वैसे उसने मुझे फिर से साबुन लगा कर साफ़ किया..

फिर मुझे टॉवल से सुखाया और अपने गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया. मुझे नींद आ रही थी.. मैंने अमन को मेरे ऊपर खींच लिया.. उसकी बाँहों में कसके पकड़ कर में सो गयी.

अमन के शरीर की गर्मी से मुझे सकून मिला और मैं थककर उसकी बाँहों में सो गयी..

थोड़ी देर में जब मेरी आँख खुली ..अमन मेरे लिए नाश्ता लाया था.. मुझे भूक लगी थी..मैंने पेट भर के खाया.. तभी अनीश भी रूम पर आ गया..

अनीश: आह..तुम यहाँ हो..अच्छा हुआ.. मुझे लगा डेविड के कमरे में तो नहीं चली गयी..

मैं: झूठे गुस्से में - कुछ भी..उसकी रूम में क्यों जाने लगी?

अनीश: रात भर उसको चूमती रही..मजा आया न..मस्त पार्टी रही.

मैं: हां मस्त पार्टी थी...पहले आप नहा लो..

अनीश नहाने चला गया.. मुझे अभी भी थोड़ा अस्वस्त लग रहा था. अनीश नहा कर बाहर आये..

मैं: पता नहीं अभी भी थोड़ा चक्कर और भारीपन लग रहा सर में ..

अनीश; तुम रात भर डेविड को चूमती रही..और नशा करती रही..शायद इसलिए..

तभी मुझे फिर से उलटी जैसे होने लगा ..मैं बाथरूम चली गयी..

दोपहर को खाना खाने के बाद हम सोते रही.. थक गए थे.आराम की जरुरत थी.. शाम को फिर से आस पास घूमने गए. मुझे अभी भी भारीपन महसूस हो रहा था. रस्ते में एक अस्पताल आया, वैसे अनीश ने कहा..चलो संध्या..डॉक्टर को दिखा देते है..मैं तुमसे बहुत प्यार करता हू..तुम्हारी तबियत को लेकर कोई रिस्क नहीं लूंगा.

वह एक लेडी डॉक्टर थी..उसने मेरा चेक उप किया. डॉक्टर ने कहा..डरने की कोई बात नहीं है.. आप माँ बनने वाली हो. उन्होंने कुछ दवाई दी..और क्या क्या परहेज करना होगा, यह भी बताया.

मैं सुन कर सुन्न रह गयी.. पर अनीश कदम खुश हो गए.. उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.. थैंक यू संध्या..तुमने इतनी जल्दी मुझे बच्चा दे दिया..आज तो मैं बहुत खुश हूँ..

हम होटल आ गए.. अनीश बहुत खुश थे.. उन्होंने यह खुशखबर सब को घरवालों को सुनाई.. सब मुझे बधाई दे रहे थे..

मेरे मन में कश्मकश चल रही थी.. मेरे मासिक माहवारी से पहले मुझे सिर्फ दो लोगो ने चोदा था.. अनीश ने और बंटी ने.. पर अनीश का पानी तो मेरी चूत के अंदर पूरा गया भी नहीं था..न मुझे महसूस हुआ था.. फिर यह बच्चा किस का हो सकता है ? बंटी का ?

हे भगवन..! मुझे शादी से २ दिन पहले का किस्सा याद आ गया..बंटी के सात होटल में बिताये वो पल याद आ गये..उसका वह कहना ..याद आ गया.. पूरा दृश्य मेरी आँखों के सामने आ गया !

" बंटी: - ऐसे मत कहो संध्या.. हमारा प्यार अमर रहेगा..!

मैं: बंटी मुझे वचन दो..तुम खुश रहोगे..मेरे लिये दुखी नहीं रहोगे. तू खुश तो मैं भी खुश रहूंगी. तुझे दुःख देकर मैं कभी सुखी नहीं रह पाऊँगी.

बंटी: हाँ संध्या..मैं खुश रहूँगा ओर तुझे भी खुश रखूँगा.

आह....उह....आहे भरके बंटी मेरी चूत चोद रहा था... मेरी चूत भी अब गीली हो गयी थी.. बंटी का बड़ा मोटा केला मेरी चूत को हर जगह से घिसता था, आनंद देता था. मैंने जोर से बंटी को कसमसा के पकड़ लिया...ओर उसके लण्ड पर झड़ने लगी. बंटी ने भी उसका सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर तक ड़ाल दिया..

मेरी चूत के गहराइयों तक उसका गरम पानी चला गया था.""
 
सच में मेरा और बंटी का प्यार अमर था..मैं उसके बच्चे की माँ बनने वाली हू.. यह बात अब सिर्फ मुझे पता थी. मुझे यह सब छिपाना होगा.. किसी से नहीं कहना होगा.

मैंने अनीश से कहा - अब मुझे खुद का ख्याल रखना पड़ेगा..आपको भी मेरा ख्याल रखना होगा..यह सब चुदाई और बिंदास खेल अब रोकना होगा.

अनीश ने कहा: हाँ संध्या में तुम्हारा पूरा ख्याल रखूँगा.. पर डॉक्टर ने कहा है की ७ वे महीने तक.. सेफ और हल्का सेक्स कर सकते है..

मैं: आप भी न..सब सेक्स घुसा है दिमाग में.. पर सिर्फ आपके सात. .

उन्होंने मुझे प्यार से बाँहों में ले लिया..हां सिर्फ मेरे सात..

उस रात सोते वक्त बिस्तर पर उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया ओरअपनी बाँहों में सुला लिया..वह सारी रात सिर्फ मुझे चाटते रहते..चूमते रहे..वो बहुत खुश थे..मेरी चूत मुँह में ले कर चूमते रहे..मैं २ बार झड़ गयी.. मैंने भी उनका लण्ड मुँह के अंदर तक निगल लिया ..और वह मेरे मुँह मैं झड़ गए.. मुझे उनके वीर्य का स्वाद बहुत पसंद आया मैं बहुत खुश हो गयी..

अनीश: क्या हुआ संध्या ..बहुत खुश हो

मैं; हाँ आप इतना प्यार करते हो मुझसे..खुश ही रहूंगी..और प्रेगनेंसी की वजह से पता नहीं..मुझे आपके पानी का सव्वद बहुत अच्छा लग रहा..

अनीश खुश हो गए. अगर ऐसी बात है तो मैं तुम्हे दिन रात अपना पानी पिलाऊंगा ..जब तक तुम्हारा मन नहीं भरता..

मैं भी खुश हो गयी..और फिर से अनीश का मोटा लण्ड चूसने लगी.. छोटे लण्ड चूसने का भी अपना आनंद होता है..पूरा मुँह में लेकर अच्छी से चूस सकते है..ना मुँह फाड़ना पड़ता है..ना गला.. !

हम हनीमून से वापस घर आये. सब लोग बहुत खुश थे. मेरा देवर आकाश जो की इंजीनियरिंग की फर्स्ट साल में था, मुझसे बहुत मजाक करता. क्या भाभी.. भैय्या ने तो हनीमून पर ही चौका मार दिया. गए थे २ लोग ओर तीन वापस आ गए. में शर्मा जाती. में रोज २-३ बार अनीश का लण्ड चूसकर उसका वीर्य पीती थी. मुझे शायद प्रेगनेंसी की क्रेविंग्स हो गयी थी.. ओर वीर्य का स्वाद पसंद आने लगा था..बिना उसके लण्ड का पानी चखे संतुष्टि नहीं मिलती. अनीश को तो अच्छा ही हो गया था..वोः बहुत खुश था ओर मेरी मज़बूरी का फ़ायदा लेकर बड़े नखरे कर के अपना लण्ड मेरे मुँह में देता.

इसी ख़ुशी में पम्मी मौसी ओर धर्मेश अंकल ने उनके घर दावत राखी. धर्मेश अंकल के बारे में में पहले ही बता चुकी हूँ. धर्मेश अंकल बहुत आवारा ओर लफड़ेबाज़ किसम का आदमी है. धर्मेश दिखने में बहुत सुन्दर ओर खूबसूरत है. बॉलवुड स्टार धर्मेंद्र की तरह. उसी का वो फ़ायदा उठाता हैं. कॉलेज के दिन अपने कमरे में लड़किया बुलाता था. २-३ बार हॉस्टल में नंगी लड़कियों के साथ पकड़ा गया ओर निकाला गया.

कोई भी सुन्दर औरत को आसानी से पटा लेता है. पम्मी मौसी को भी वैसे ही पटा लिया था. रिश्ते ओर आस पड़ोस की काफी औरतों से सम्बन्ध है. अपनी मीठी बातें, प्यार, या ब्लैकमेल, या खूबसूरती से आसानी से हर औरत को फंसा लेता है. धर्मेश अंकल की पर्सनालिटी एकदम मस्त थी..एक गोरा, एकदम फिट, ५० -५५ की उम्र वाला आदमी था, नीली गहरी आंखें, एकदम कबीर बेदी जैसी, हट्टा-कट्टा पहलवान जैसे शरीर. सच में कुछ तो बात थी धर्मेश में. सबको आकर्षित कर लेते थे.

चुकि अब मेरा तीसरा महीना हो गया, मैंने लूज़ गाउन पेहन लिया ताकि बार बार बाथरूम जाने में आसानी रहे. . मुझे बार बार पेशाब होती थी. मेरे पास एक नीले रंग का बहुत सुन्दर लेग कट गाउन था. वही पहना था. वजन बढ़ने के कारन वोः मुझे काफी टाइट हो रहा था ओर मेरे बुब्स ओर गांड उसमे एकदम निखर के आ रहे थे. पम्मी मौसी ने बहुत प्यार से स्वागत किया.

हम सवेरे ही चले गए थे ताकि शाम तक उनके सात टाइम स्पेंट करे ओर वापस आये. धर्मेश अंकल मुझे आंखें फाडफाडकर देख रहे थे. उनकी वासना भरी नजर से मेरा बदन सीहर गया. सुबह जल्दी निकलने के फ़िराक में मुझे अनीश के लण्ड को चूसकर उसका वीर्य पीने का समय नहीं मिला. धर्मेश अंकल मुझे प्यासी नजर से देखते. मेरी वीर्य पीने की क्रेविंग / लालसा बढ़ गयी. बड़ा अस्वस्थ लग रहे था. धर्मेश अंकल - क्या हुआ संध्या ? सब ठीक है ना? तबियत ठीक है? उन्होंने मेरी अस्वस्थता भांप ली थी शायद.

मैंने कहा - कुछ नहीं अंकल .. मुझे टॉयलेट जाना है.. उन्होंने मुझे टॉयलेट दिखाया ..

पम्मी मौसी ने कहा - संध्या ऐसी अस्वस्थ में बार बार पेशाब लगती है.. तुम कोई भी टॉयलेट यूज़ करो..उन्होंने उनकी बैडरूम की टॉयलेट भी मुझे दिखा दी.

धर्मेश अंकल अनीश को गेस्ट रूम ले कर गए ओर वो दोनों बातें करने लगे. कुछ देर बाद मुझे फिर से पेशाब लगी, मेँ कॉमन टॉयलेट गयी , वो बंद था. फिर मे पम्मी मौसी के बैडरूम के टॉयलेट की तरफ चली गयी. मुझे बड़ी जोर से पेशाब लगी थी. में टॉयलेट के अंदर गयी ओर पैंटी निचे कर के गाउन ऊपर कर दिया ओर टॉयलेट सीट पर मुतने बैठ गयी. तभी टॉयलेट का दरवाजा खुला, शायद मैंने लॉक नहीं किया था, ओर धर्मेश अंकल अंदर आ गए. उनके पजामा का नाडा खुला था, अंडर वियर निचे थी ओर उनका मोटा गोरा बड़ा लण्ड उनके साथ में था.

धर्मेश अंकल: ओह सॉरी संध्या मुझे नहीं पता था तुम अंदर हो. मै पेशाब करने अंदर आया था.

मैंने कहा : कोई बात नहीं धर्मेश अंकल..मैंने भी शायद दरवाजा लॉक नहीं किया था.

धर्मेश अंकल: सच में सॉरी संध्या ..
 
उनका लण्ड अभी भी उनके साथ में था. वो उसको अंदर पजामा में नहीं डाले थे . उनका लण्ड उनके साथ में फूलकर लम्बा मोटा हो रहा था. वोः मेरी आँखों में देख रहे थे. में भी उनकी नजरों से मोहित होकर उन्हें देख रही थी. उनको मेरी साफ़ ओर बिना बालों वाली फूली चूत साफ़ दिख रही थी. उनकी नजर अब निचे मेरी चूत पर थी.

मैंने कहा : तिस्क हैदाहरमेश अंकल.. गलती हो जाती है.

धर्मेश अंकल: हाँ ओर इस बाथरूम के दरवाजे का लॉक भी ठीक नहीं है.

धर्मेश अंकल का पजामा पूरा निचे गिर गया था ओर उन्होंने धीरे से उनकी अंडरवियर निचे खिसका दी.

मैंने कहा: इसमें आपकी कोई गलती नहीं है.

धर्मेश अंकल: वाह ! .. बहुत सुन्दर

मैंने पूछा : क्या धर्मेश अंकल ?

धर्मेश अंकल: तुम्हारी चूत बहुत सुन्दर हैं संध्या

मेँ शर्मा गयी. मैंने गाउन ओर ऊपर उठा लिया. इसके कारन अब में निचे से धर्मेश अंकल के सामने एकदम नंगी थी. धर्मेश अंकल ने अपना पजामा पूरा निचे गिरा दिया. अंडरवियर भी निकाल दी. वोह अब सिर्फ एक टाइट टी शर्ट में थे. इस उम्र में भी उनका लण्ड बहुत सुन्दर था. शायद इतना सुन्दर लण्ड मैंने कभी नहीं देखा. पूरा १० इंच का , काला लण्ड, लाल टोपा ओर फुला हुआ. में उनके रूप से मोहित हो गयी.

मैंने शर्मा कर कहा : कुछ भी धर्मेश अंकल..आप बड़े शरारती हो.

धर्मेश अंकल: में झूठ नहीं बोलता..तेरी कसम संध्या..इतनी सुन्दर बुर मैंने आज तक नहीं देखी.

मैंने भी शरारती अंदाज में पूछा: अच्छा ! ऐसी कितनी बुर देखी होंगी आपने आजतक..

धर्मेश अंकल: सच में..पिछले ३० सालों में कम से काम ढाई हजार बुर तो देखी है..पर तेरी जैसे सुन्दर चूत कभी नहीं देखी..कितनी मास्ट चिकनी, साफ़, फूली हुई, टमाटर की तरह लाल - गुलाबी..वाह यह जन्नत है..

में शर्मा गयी.. मेरी चूत गीली हो गयी..ओर मे्रे पानी से चमकने लगी.. मैंने कहा = चलो झूठे..

धर्मेश अंकल: आह ! संध्या..तेरी चूत तो पानी बहा रही..चमक रही है..

उन्होंने अपना साथ आगे कर के मेरी चूत पर रख दिया ओर प्यार से सहलाने लगे. मुझे भी अभी वीर्य के स्वाद की क्रेविंग्स हो रही थी. में सिर्फ उनकी वासना भरी आँखों में टक लगा कर देख रही थी. इसी बीच उन्होंने आगे बढ़कर अपने लण्ड का मोटा गोल सूपड़ा मेरे ओंठों पर लगा दिया. मुझे उनके लण्ड की खुसबू से क्रेविंग्स बढ़ गयी. मैंने उनका सूपड़ा मुँह मेँ लिया ओर लॉलीपॉप की तरह प्यार से जोर जोर से चूसने लगी. उनका मोटा लण्ड काले नाग जैसे फुफकार रहा था.

में बस उनको देखकर अपने दोनों हाथों से उनका लण्ड पकड़कर चूस रही थी. वो मेरी चूत सहला रहे थे.

धर्मेश अंकल: आह.. संध्या इतनी सुन्दर चूत मैंने मेरी लाइफ मेँ कभी नहीं देखि. मुझे इसकी ठुकाई करनी है.

मैंने कहा: प्लीज धर्मेश अंकल अभी नहीं..में प्रेग्नेंट हूँ... मुझे जाने दो

धर्मेश अंकल...फिर मुझे बस थोड़ी देर तेरी चूत चाटने दो..

में मान गयी..मैंने मेरे पैर फैला दिए.. धर्मेश अंकल अपना लण्ड हिलाते हुए निचे बैठे ओर मेरी चूत चाटने लगे. उनकी जीभ इतनी मोटी, लम्बी ओर खुरदुरी थी..मुझे लग रहे था जैसे कोई लण्ड हो. उन्होंने मेरा दाणा चूस लिया ओर अपने दातों से धीरे से काटा. मैंने उनका सर अपनी चूत पर जोर से दबा दिया..ओर आह..उम्..करके मेरा पानी निकाल गया. वो बड़े प्यार से मेरी चूत का पानी चाटने लगे..ओर फिर से मेरी चूत का दाणा चूसने लगे. में फिर से गरम हो गयी.

धर्मेश अंकल मेरी आँखों में आंखें डाल कर मनाने लगे : प्लीज संध्या..सिर्फ थोड़ा सा ऊपर ऊपर से चोदूूँगा तेरी चूत. मना मत कर

मैंने कहा .. नहीं अंकल .कोई आ जायेगा..बड़ी बेज्जती होगी..प्लीज जाने दो..

वोह उठकर खड़े हो गये ओर बोले: . ठीक है..सिर्फ एकबार मे्रे लण्ड को किश कर दो..फिर चली जाना..'

'

मैंने उनका लण्ड अपनी दोनों हाथों में पकड़ लिया..ओर उनके लण्ड के टोपे पर जीभ फिर दी. वैसे ही उनके लण्ड की महक मे्रे नाक को महसूस हुई. उनके लण्ड को चाटकर उसका स्वाद मुझे किसी अमृत की तरह लगा. में खुद को रोक नहीं पायी. धीरे धीरे मैंने उनके लण्ड का पूरा टोपा अपने मुँह में ठूस लिया. उन्होंने झट से उनका लण्ड मे्रे मुँह से निकाला ओर कहा - ठीक है..थैंक यू संध्या..तू अब जा सकती हो.

मैंने हैरानी से देखने लगी. उनको मेरी कमजोरी पता चल गयी थी. मेरी वीर्य के स्वाद ओर महक की लालसा बढ़ रही थी. में अपनी जगह बैठे रही ओर भुकी नजरों से उनके लण्ड को देखती रही. मुझसे रहा नहीं गया..में उनके लण्ड पर झपट गयी ओर फिर से अपने मुँह में ले लिया..

वैसे अंकल ने फिर से उनका लण्ड मे्रे मुँह से बाहर निकाल दिया ओर बड़े प्यार से मे्रे गालों पर साथ फेर के बोले..प्लीज संध्या सिर्फ एक बार..चोदने दो. बस ऊपर - ऊपर ही छोडूंगा.. सिर्फ एक - दो इंच लण्ड अंदर डालूंगा ओर तेरी चूत के पानी में भिगोकर बाहर निकाल लूंगा. मे्रे पर यकीन करो. मैंने शर्मा के चेहरा निचे कर दिया.

उन्होंमे मे्रे पैर ऊपर उठाये ओर अपने मोटे लण्ड का टोपा मेरी चूत की द्वार पर रख दिया. में मना नहीं कर पायी. मेरी चूत ऐसी ही गीली थी. बड़े प्यार से धिरे से उन्होंमे ३ इंच लण्ड का लाल टोपा मेरी चूत में अंदर डाल दिया. उनके लण्ड का टॉप इतना गोल-मोटा था .. जैसे कोई बड़ी मुसल. मेरी चूत को अंदर से रगड़ रगड़ कर ठुकाई कर रहे थे. इसी बीच में जोर से आँहे लेने लगी..ओर उनके लण्ड पर झड़ने लगी..उम्..आह..धर्मेश अंकल..मर जाउंगी/.. आपकी मुसल ..

धर्मेश अंकल; आह संध्या ..तेरी चूत कितनी कसी हुई है..लगता है अनीश का लण्ड बहुत छोटा है.. मेरा लण्ड कैसे लगा रानी ? खुश हो ना?

मैंने कहा : उम् .. आपका लण्ड बहुत बड़ा है धर्मेश अंकल.. बहुत अच्छा लग रहा है..पर अब इसे निकाल दो..में प्रेगनेंसी में रिस्क नहीं लेना चाहती

धर्मेश अंकल : में समाज सकता हूँ संध्या.. जब तुम्हारा बच्चा हो जायेगा उसके बाद फुर्सत से तेरी रात भर चुदाई करूँगा.. पर अब तू मेरा लण्ड चूस के पानी निकाल दे.

में वही चाहती थी. मुझे वीर्य के स्वाद का क्रेविंग्स / चस्का लगा था. धर्मेश अंकल ने धीरे से उनका लण्ड मेरी चूत से बाहर निकला ओर मे्रे ओंठों पर रख दिया.
 
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