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Guest
[SIZE=150%] रोहित ने प्रियम को खाना खिलाया और उसके सोने का इन्तजार किया | अभी कुछ दिन पहले ही रीमा का बर्थडे था, और रोहित ठीक से विश भी नहीं कर पाया था इसलिए उसने सोचा आज उसके घर पर जाकर ही उसको स्पेशल गिफ्ट दू | रीमा का घर रोहित से दो घर छोड़कर था | प्रियम के सोने के बाद रोहित ने फ्रिज से एक शम्पेन निकाली और दबे पाँव घर से निकल गया |
रीमा के चेहरे पर आज एक अलग चमक थी, उसकी स्किन एक अलग ही चमक मार रही थी |
अपने भतीजे के द्वारा मिले ओर्गास्म के कारण रीमा काफी रिलैक्स फील कर रही थी, क्या हुआ जो वो उम्र में इतना छोटा है मै उसके साथ एक खूबसूरत सीक्रेट अफेयर तो रख ही सकती हूँ जिसका किसी को कुछ पता न चलेगा | प्रियम कोई बाहरी थोड़े ही है है तो मेरा सगा भतीजा ही |बहुत दिनों के बाद रीमा ने बाथरूम में काफी टाइम बिताया, उसने अपने पुरे शरीर की वैक्सिंग की, आइब्रो सेट करी, और जांघो के बीच नीचे पूरी तरह से क्लीन सेव किया | उसके बाद उसने अच्छे से मेकअप किया |
इतना प्रॉपर मेकअप किये हुए उसे कई महीने हो गए थे |
मेक अप करने के बाद रीमा ने स्कॉच के दो पैग बनाये और टीवी ऑन करके सोफे पर पसर गयी | टीवी तो उसने चला दिया था, लेकिन उसके दिमाग से प्रियम उतर ही नहीं रहा था | अक्सर वो खिडकियों सड़क पर आते जाते आकर्षक लडको को देखती रहती थी, लेकिन किसी लड़के का जवान होता लंड अपने मुहँ में फील करने का अनुभव बिलकुल अलग था | उसकी याद आते ही रीमा के पुरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया | आखिर अकेली जवान औरत अगर एक जवान होते लड़के को अपना शरीर स्पर्श करने देती है तो इसमे गलत क्या है और अगर गलत है भी तो क्या हुआ उसने कुछ गलत नहीं किया | वो मेरा भतीजा है और उसे पूरा हक़ है मेरे शरीर को स्पर्श करने का | रीमा अभी भी भतीजे का लंड अपने मुहँ में महसूस कर रही थी, उसके अन्दर वासना का ज्वार बढ़ने लगता, कैसे भतीजे की उंगली ने उसके नितम्बो पर से उसका नियंत्रण ख़त्म कर दिया था, उसको अपने ऊपर नीचे उठते गिरते कुल्हे याद आ रहे थे | इतनी संतुष्टि के बाद भी एक बात उसको हैरान कर रही थी की उसके अन्दर कामवासना की लहरे जोरो से हिलोरे मार रही थी शायद उसकी काम वासना को तृप्त करने की बजाय प्रियम ने और बढ़ा दिया था , अब उसे और ज्यादा चाहिए था | उसे पता था कि वो ये नहीं कर सकती, आज नहीं तो कल अगर किसी को पता चल गया तो ये बहुत खतरनाक होगा | यही सब सोचते सोचते रीमा स्कॉच के सिप मारते हुए सोफे पर पसरी थी | तभी अचानक उसके घर के पिछले दरवाजे की डोर बेल बजी | इससे पहले वो कुछ गेस करती, उसके कानो में रोहित की आवाज पड़ी |
रोहित- रीमा मै रोहित, क्या तुम जाग रही हो अभी तक ?
रीमा..ओह नो रोहित इस वक्त यहाँ, कही उसे मेरे और प्रियम के बारे में पता तो नहीं चल गया, क्या प्रियम ने रोहित को जाकर ये बता तो नहीं दिया की मैंने उसका लंड चूसा है और लंड रस भी पी गयी हूँ, अब क्या होगा, रोहित तो मुझे मार ही डालेगा | इतना विचार आते ही रीमा का चेहरा फीका पढ़ गया | फिर पलक झपकते ही उसने रोहित के पुकारने की टोन पर ध्यान दिया वो काफी नार्मल लग रही थी | रीमा ने दरवाजा खोला |
रीमा- अन्दर आ जावो रोहित....
रोहित-मै तुमारे लिए शैम्पेन की बोतल लाया हूँ, मै तुम्हे तुमारे बर्थडे पर कोई गिफ्ट भी नहीं दे सका, इसलिए सोचा आज चलकर तुमारे साथ पार्टी करता हूँ, बशर्ते तुमारा कोई और प्लान न हो और तुम किसी और काम में न बिजी हो |
रोहित रीमा को एकटक देखने लगा, वो बाकि दिनों से आज काफी अलग लग रही थी, सेक्सी, ब्यूटीफुल, रिलैक्स्ड, चेहरे पर संतुष्टि और मुस्कान का सम्मिश्रण | रोहित को थोडा अजीब लगा, लेकिन वो रीमा के सौन्दर्य में ऐसा खोया की उसे कुछ और याद ही नहीं रहा |
रीमा- नहीं कुछ खास नहीं तुम आ गए अच्छा किया, तुम बैठो मै गिलास लेकर आती हूँ |
रोहित को लग रहा था जैसे रीमा को पता हो कि वो आ रहा है और उसके लिए वो पूरी तरह से सज धज के बैठी है | लेकिन रीमा इतनी खूबसूरत तो तब लगा करती थी जब नयी नयी शादी हुई थी | रोहित ने तो महीनो महीनो उसे बिना मेकअप के रूखे बाल और इमोशन लेस चेहरे के साथ देखा है, इसलिए उसको तो यकीन कर पाना बिलकुल मुश्किल हो रहा था
रोहित रीमा को सोफे उठकर जाते हुए देखता रहा, उसके हर कदम के साथ उछलते कुल्हे और चूतडो में संतुष्टि का एक भाव था, चाल में एक मादकता थी |
इतनी सेक्सी और खूबसूरत रीमा को उसने सालो बाद देखा था इसलिए उसके अन्दर की वासना में रीमा की खूबसूरती ने आग में घी वाला काम किया | रोहित ने तय कर लिया था की आज तो वो रीमा की स्कर्ट और पैंटी दोनों उतार कर ही दम लेगा, उसे चाहे जो करना पड़े | वो रीमा को कपडे पहने पहने ही पूरी तरह नंगे इमेजिन कर रहा था | कमर लचकाती, कुल्हे मटकाती मद मस्त चलती रीमा !! आह !!!!!!!! रोहित ने तो उसे बिना कपडे उतारे ही नंगा कर दिया था |
रीमा गिलास लेकर वापस आई और सोफे पर बैठते हुए उसने एक सभ्य औरत की तरह अपने कपड़ो को थोडा ठीक किया ताकि हैण्डसम रोहित के सामने किसी तरह का कुछ अश्लील न लगे | रोहित रीमा की बरसो से फंतासी था लेकिन रीमा ने हमेशा रिश्तो की गरिमा में रहकर ही रोहित से व्यवहार किया | या यु कहे कि कपडे इसलिए ठीक किये थे ताकि वो खुद की वासना के ज्वार पर काबू रख सके | रोहित ने शैम्पेन की बोतल खोली और गिलास में दारू उड़ेलने लगा | रोहित को नहीं पता था की रीमा में ये बदलाव किस वजह से आया है, लेकिन वजह को दरकिनार करते हुए उसे बहुत ख़ुशी थी कि रीमा ने कम से कम खुद के बारे में ख्याल तो किया | उसकी खूबसूरती को बार बार रोहित निहार रहा था और खुश हो रहा था | आज रीमा उसे पहले से कई गुना ज्यादा सेक्सी और आकर्षक लग रही थी |
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रीमा के चेहरे पर आज एक अलग चमक थी, उसकी स्किन एक अलग ही चमक मार रही थी |
अपने भतीजे के द्वारा मिले ओर्गास्म के कारण रीमा काफी रिलैक्स फील कर रही थी, क्या हुआ जो वो उम्र में इतना छोटा है मै उसके साथ एक खूबसूरत सीक्रेट अफेयर तो रख ही सकती हूँ जिसका किसी को कुछ पता न चलेगा | प्रियम कोई बाहरी थोड़े ही है है तो मेरा सगा भतीजा ही |बहुत दिनों के बाद रीमा ने बाथरूम में काफी टाइम बिताया, उसने अपने पुरे शरीर की वैक्सिंग की, आइब्रो सेट करी, और जांघो के बीच नीचे पूरी तरह से क्लीन सेव किया | उसके बाद उसने अच्छे से मेकअप किया |
इतना प्रॉपर मेकअप किये हुए उसे कई महीने हो गए थे |
मेक अप करने के बाद रीमा ने स्कॉच के दो पैग बनाये और टीवी ऑन करके सोफे पर पसर गयी | टीवी तो उसने चला दिया था, लेकिन उसके दिमाग से प्रियम उतर ही नहीं रहा था | अक्सर वो खिडकियों सड़क पर आते जाते आकर्षक लडको को देखती रहती थी, लेकिन किसी लड़के का जवान होता लंड अपने मुहँ में फील करने का अनुभव बिलकुल अलग था | उसकी याद आते ही रीमा के पुरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया | आखिर अकेली जवान औरत अगर एक जवान होते लड़के को अपना शरीर स्पर्श करने देती है तो इसमे गलत क्या है और अगर गलत है भी तो क्या हुआ उसने कुछ गलत नहीं किया | वो मेरा भतीजा है और उसे पूरा हक़ है मेरे शरीर को स्पर्श करने का | रीमा अभी भी भतीजे का लंड अपने मुहँ में महसूस कर रही थी, उसके अन्दर वासना का ज्वार बढ़ने लगता, कैसे भतीजे की उंगली ने उसके नितम्बो पर से उसका नियंत्रण ख़त्म कर दिया था, उसको अपने ऊपर नीचे उठते गिरते कुल्हे याद आ रहे थे | इतनी संतुष्टि के बाद भी एक बात उसको हैरान कर रही थी की उसके अन्दर कामवासना की लहरे जोरो से हिलोरे मार रही थी शायद उसकी काम वासना को तृप्त करने की बजाय प्रियम ने और बढ़ा दिया था , अब उसे और ज्यादा चाहिए था | उसे पता था कि वो ये नहीं कर सकती, आज नहीं तो कल अगर किसी को पता चल गया तो ये बहुत खतरनाक होगा | यही सब सोचते सोचते रीमा स्कॉच के सिप मारते हुए सोफे पर पसरी थी | तभी अचानक उसके घर के पिछले दरवाजे की डोर बेल बजी | इससे पहले वो कुछ गेस करती, उसके कानो में रोहित की आवाज पड़ी |
रोहित- रीमा मै रोहित, क्या तुम जाग रही हो अभी तक ?
रीमा..ओह नो रोहित इस वक्त यहाँ, कही उसे मेरे और प्रियम के बारे में पता तो नहीं चल गया, क्या प्रियम ने रोहित को जाकर ये बता तो नहीं दिया की मैंने उसका लंड चूसा है और लंड रस भी पी गयी हूँ, अब क्या होगा, रोहित तो मुझे मार ही डालेगा | इतना विचार आते ही रीमा का चेहरा फीका पढ़ गया | फिर पलक झपकते ही उसने रोहित के पुकारने की टोन पर ध्यान दिया वो काफी नार्मल लग रही थी | रीमा ने दरवाजा खोला |
रीमा- अन्दर आ जावो रोहित....
रोहित-मै तुमारे लिए शैम्पेन की बोतल लाया हूँ, मै तुम्हे तुमारे बर्थडे पर कोई गिफ्ट भी नहीं दे सका, इसलिए सोचा आज चलकर तुमारे साथ पार्टी करता हूँ, बशर्ते तुमारा कोई और प्लान न हो और तुम किसी और काम में न बिजी हो |
रोहित रीमा को एकटक देखने लगा, वो बाकि दिनों से आज काफी अलग लग रही थी, सेक्सी, ब्यूटीफुल, रिलैक्स्ड, चेहरे पर संतुष्टि और मुस्कान का सम्मिश्रण | रोहित को थोडा अजीब लगा, लेकिन वो रीमा के सौन्दर्य में ऐसा खोया की उसे कुछ और याद ही नहीं रहा |
रीमा- नहीं कुछ खास नहीं तुम आ गए अच्छा किया, तुम बैठो मै गिलास लेकर आती हूँ |
रोहित को लग रहा था जैसे रीमा को पता हो कि वो आ रहा है और उसके लिए वो पूरी तरह से सज धज के बैठी है | लेकिन रीमा इतनी खूबसूरत तो तब लगा करती थी जब नयी नयी शादी हुई थी | रोहित ने तो महीनो महीनो उसे बिना मेकअप के रूखे बाल और इमोशन लेस चेहरे के साथ देखा है, इसलिए उसको तो यकीन कर पाना बिलकुल मुश्किल हो रहा था
रोहित रीमा को सोफे उठकर जाते हुए देखता रहा, उसके हर कदम के साथ उछलते कुल्हे और चूतडो में संतुष्टि का एक भाव था, चाल में एक मादकता थी |
इतनी सेक्सी और खूबसूरत रीमा को उसने सालो बाद देखा था इसलिए उसके अन्दर की वासना में रीमा की खूबसूरती ने आग में घी वाला काम किया | रोहित ने तय कर लिया था की आज तो वो रीमा की स्कर्ट और पैंटी दोनों उतार कर ही दम लेगा, उसे चाहे जो करना पड़े | वो रीमा को कपडे पहने पहने ही पूरी तरह नंगे इमेजिन कर रहा था | कमर लचकाती, कुल्हे मटकाती मद मस्त चलती रीमा !! आह !!!!!!!! रोहित ने तो उसे बिना कपडे उतारे ही नंगा कर दिया था |
रीमा गिलास लेकर वापस आई और सोफे पर बैठते हुए उसने एक सभ्य औरत की तरह अपने कपड़ो को थोडा ठीक किया ताकि हैण्डसम रोहित के सामने किसी तरह का कुछ अश्लील न लगे | रोहित रीमा की बरसो से फंतासी था लेकिन रीमा ने हमेशा रिश्तो की गरिमा में रहकर ही रोहित से व्यवहार किया | या यु कहे कि कपडे इसलिए ठीक किये थे ताकि वो खुद की वासना के ज्वार पर काबू रख सके | रोहित ने शैम्पेन की बोतल खोली और गिलास में दारू उड़ेलने लगा | रोहित को नहीं पता था की रीमा में ये बदलाव किस वजह से आया है, लेकिन वजह को दरकिनार करते हुए उसे बहुत ख़ुशी थी कि रीमा ने कम से कम खुद के बारे में ख्याल तो किया | उसकी खूबसूरती को बार बार रोहित निहार रहा था और खुश हो रहा था | आज रीमा उसे पहले से कई गुना ज्यादा सेक्सी और आकर्षक लग रही थी |
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