S
StoryPublisher
Guest
[SIZE=150%] रीमा ने आइस्ते से केले का सिरा अपनी चूत में घुसा दिया | केले का सिरा अभी भी सुखा था, लेकिन गीली चूत ने उसे भिगो दिया | रीमा के मुहँ से फिर आह निकल गयी | चूत कितनी भी गीली हो, चुदाई के बाद उसकी दीवारे कितनी भी नरम हो लेकिन वो कुछ भी आसानी से बिना औरत की आहे कराहे निकाले बिना अपने अन्दर नहीं लेती | रीमा को भी अपनी चूत में केला पेलने के लिए जोर लागना पड़ रहा था | अब तक बेहद सावधानी और नाजुकता से वो अपनी चूत से खेल रही थी लेकिन अब सख्ती से चूत में केला ठेलने का समय आ गया था |
रीमा किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी वो आराम आराम से चूत में पूरा केला घुसेड़ कर अपनी चूत चोदना चाहती थी | लेकिन छुईमुई बनकर भी तो चूत नहीं चोदी जा सकती थी थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी और थोड़ा सा मीठा दर्द भी झेलना पड़ेगा | रीमा ने खुद को मजबूत किया और केले के निचले सिरे को दो इंच ठेलकर अपनी चूत की दीवारों का रिएक्शन महसूस करने लगी | उसे पता था की अब उसकी चूत का मुहँ खुल गया है अब केले के चूत के मुहँ पर फिसलने का कोई चांस नहीं है एक हाथ से भी वो केला अपनी चूत में ठेल सकती है | इसलिए उसने अपना छिला केला उठा लिया और उसे फिर से मुहँ में ले लिया |
अब एक साबुत केला उसकी चूत में था और छिला केला उसके मुहँ में | ये बिलकुल वैसा था जैसे दो लंड किसी औरत को एक साथ चोद रहे हो | एक लंड मुहँ में ठेला जा रहा हो और दूसरा चूत रौंद रहा हो | रीमा शायद यही फंतासी केले की जरिये पूरी कर रही थी | शायद उसकी दो लंड एक साथ लेने की कोई दबी कामना हो, शायद वो मुहँ में प्रियम का चिकना लंड और चूत में रोहित का मुसल मोटा लंड सोच के इस समय केलो को अपने अन्दर ले रही हो | किसी को नहीं पता था की रीमा के दिमाग में क्या है, कई बार तो रीमा को भी नहीं पता होता की उसके इस छिपे चरित्र के हिस्से में क्या क्या छिपा है क्या क्या दबा है | फिलहाल रीमा के दोनों हाथ और उसका सर, अपनी अपनी जगह हिल रहे थे और बीच में मादक कराह उसके मुहँ से निकल रही थी | ऊऊऊह्ह्ह आआआह्ह्ह की आवाजे किचन में गूंज रही थी | आवाजे बेडरूम तक भी जा रही होंगे लेकिन इससे बेखबर रीमा खुद को दो सख्त मोटे केलो से चोदने में लगी थी |
उसने चिली केले को और ज्यादा नीचे तक छील दिया | अब केले का 80 प्रतिशत हिस्सा खुल गया था और पूरा का पूरा छिला केला रीमा मुहँ में घोंट जा रही थी | रोहित का लंड गले के नीचे तक उतारने के बाद रीमा को केले को गले के नीचे तक लेने में कोई बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी | प्रियम के लंड से बड़ा केला पलक झपकते ही रीमा में मुहँ में गायब हो जाता और फिर बाहर आ जाता | केले को मुहँ में तेजी से ले रही थी, जैसे लंड को चरम की तरफ बढ़ते देख औरते उसे जोर जोर से चूसने लगती है, पूरा का पूरा मुहँ के अन्दर घोंट लेती है वैसे ही रीमा भी कर रही थी |
उधर प्रियम के लंड ने जवाब दे दिया और इतनी देर से मुठियाते हुए अब उसका काम तमाम हो गया था | प्रियम ने एक हल्की कराह के साथ अपनी चकारी छोड़ दी | और हांफता हुआ अपनी सांसे काबू करने लगा | प्रियम के सफ़ेद गाढे रस से उसका सुपाडा सन गया था |
पिचकारी छुटते ही प्रियम की वासना का बुखार उतार गया उसके लिए ज्यादा देर रुकना खतरनाक था क्योंकि अगर पडोसी ने पीछे का गेट अन्दर से बंद कर लिया तो उसका फिर घर पंहुचना नामुनकिन हो जायेगा | उसके अपने लंड से टपकती लंड रस की बुँदे निचोड़ी और अपने मुरझाते लंड को अपनी पेंट में घुसेड़ा | अभी उसका और मन था रुकने का लेकिन मजबूर था उसने वहां से न चाहते हुए भी निकलने में भलाई समझी | उसने बेमन एक बार जी भर के किचन बैठी, अपने आस पास से बेपरवाह, अपनी चूत में धकाधक केला ठेल अपनी चूत को मसल रही चोद रही नंगी रीमा को देखकर, आइस्ते से खिड़की बंदकर वहां से छिपते छिपाते निकल गया | हालाँकि रास्ते में जाते समय उसके दिलो दिमाग में रीमा की उभरी छाती के दूध जैसे सफ़ेद गोरे गोरे स्तन, चिकनी जांघे और मांस से भरे नरम नरम चूतड़ ही घूम रहे थे | प्रियम का खेल खतम हो चूका था लेकिन रीमा का गेम तो अभी जारी था | अभी तो उसे काफी देर तक अपनी चूत केले से चोदने थी | यहाँ सबसे अच्छी बात यह थी की रीमा का हर चीज पर पूरा नियंत्रण था और वो खुद की चूत की प्यार बुझाने को किसी मर्द के लंड की मोहताज नहीं थी, न ही लंड से चुदाई करते समय मर्द की हवस पूरी करने की जिम्मेदारी | रीमा की केला चुदाई जारी थी,
साबुत केले ने रीमा की चूत में अच्छी खासी गहराई तक जगह बना ली थी, वहां भी रीमा का हाथ तेजी से हिल रहा था, रीमा का शरीर गरम था, चूत गीली थी, सांसे तेज थी और मुहँ से रुक रुक कर कराहे निकल रही थी | केला भी रीमा के चूत रस से सना था , रीमा को अपनी गुलाबी चूत की दीवारों के बीच साबुत केले का छिलका अगल ही अनुभव दे रहा था | कई बार उसे सख्त छिलके की चुभन महसूस होती जो किसी भी तरह से आनंददायी नहीं थी लेकिन जब तक चूत में चुभन न हो, रगड़न न हो मीठा मीठा हल्का हल्का दर्द न हो, उस दर्द की सिसकारियां न हो तब तक वो चुदाई ही कैसी | मसलना रगड़ना कुचलना और चुदना ही एक औरत के जिस्म और चूत की किस्मत होती है या यूं काहे हसरत भी होती है, कोई उन्हें मसले रगड़े कुचले और चोदे भी लेकिन सब कुछ प्यार से हौले हौले जमकर करे, जब जरुरत हो तब सख्ती भी दिखाए और बेदर्दी भी | रीमा का जिस्म गरम था और चूत भी इसलिए वो बेहरमी से साबुत केले को सख्ती से पकड़कर अपनी गीली गुलाबी चूत में गहराई तक ठेल रही थी |
हर औरत की तमन्ना होती है जब वो चुदे तो अच्छे से चुदे | चूत जब तक अन्दर गहराई तक नहीं रगड़ी जाती, पेली नहीं जाती, तब तक चूत की खुजली मिटती नहीं, फिर चाहे उसे लंड से चुदे या केले से | रीमा को पता था जितना अन्दर तक एक ही झटके में वो केले को अन्दर ठेलेगी, उतना ही उसे मीठे दर्द के साथ मजा भी आएगा, चूत की दीवारों में सनसनाहट होगी, उसकी कमर ने तरंगे उठेगी और कम्पन होगा | तभी उसकी केला से चुदाई से उसकी हवस शांत होगी, झड़ने को तो वो चूत दाना रगड़ कर मसल कर भी झड सकती थी, लेकिन चूत के अन्दर की खुजली मिटाने को तो चूत चोदनी ही पड़ेगी | चूत की गहराई तक मोटा मुसल लेकर चुदने से चूत, कमर , पिंडलियों और जांघो में जो झंकार होती है, उस कम्पन का अनुभव ही अलग होता है | रीमा को वही झंकार महसूस करनी थी वही कम्पन महसूस करना था | वही कम्पन जो उसने रोहित के मुसल लंड के अपने अन्दर जाने पर महसूस किया था | सोचने को आओ तो रीमा के लिए इससे ज्यादा अजीब कुछ नहीं होना चाहिये था, क्योंकि जो रीमा का स्वाभाव था उससे ये बिलकुल विपरीत था लेकिन सच ये भी था की ये वो रीमा भी नहीं थी, कामुकता को सोचने और जीने में जो फर्क है वही फर्क उस और इस रीमा में था | ये रीमा हर सामाजिक मानसिक बंधन से मुक्त कामुकता से भरी, मादकता से मस्त, दुनिया से बेपरवाह खुद के अरमानो को पूरा कर रही थी इसलिए उसके पास ये सब सोचने का वक्त नहीं था | फिलहाल वो किसी तरह के नए रिस्की एडवेंचर की जगह सॉफ्ट प्लेज़र की तलाश में थी | तभी उसके दिमाग में एक और ख्याल आया | उसने अपनी चूत से साबुत केला निकाल लिया | साबुत सख्त केले से रीमा की चूत का गुलाबी छेद पूरी तरह खुल गया था और बाहर से ही अन्दर तक रीमा की चूत रस से सरोबार मखमली गुलाबी सुरंग, और उसकी नाजुक दीवारों की गुलाबी सलवटे साफ़ नजर आ रही थी |
उसने मुहँ से छिला केला निकाल कर अपनी गरम चूत के गीले मुहाने पर टिका दिया | बिना छिले और छिले केले के कड़ेपन में जमीन आसमान का अंतर है | छिला केला आसानी से टूट सकता है अलग हो सकता है, इसलिए रीमा से अपनी चूत के गुलाबी ओंठ थाम लिए और चूत को फैला दिया ताकि केले को सीधे चूत के छेद के मुहँ में सेट करके अन्दर पेला जा सके | चूत अच्छे से गीली थी इसलिए रीमा को लार से सना केला लेने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए |
[/SIZE]
रीमा किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी वो आराम आराम से चूत में पूरा केला घुसेड़ कर अपनी चूत चोदना चाहती थी | लेकिन छुईमुई बनकर भी तो चूत नहीं चोदी जा सकती थी थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी और थोड़ा सा मीठा दर्द भी झेलना पड़ेगा | रीमा ने खुद को मजबूत किया और केले के निचले सिरे को दो इंच ठेलकर अपनी चूत की दीवारों का रिएक्शन महसूस करने लगी | उसे पता था की अब उसकी चूत का मुहँ खुल गया है अब केले के चूत के मुहँ पर फिसलने का कोई चांस नहीं है एक हाथ से भी वो केला अपनी चूत में ठेल सकती है | इसलिए उसने अपना छिला केला उठा लिया और उसे फिर से मुहँ में ले लिया |
अब एक साबुत केला उसकी चूत में था और छिला केला उसके मुहँ में | ये बिलकुल वैसा था जैसे दो लंड किसी औरत को एक साथ चोद रहे हो | एक लंड मुहँ में ठेला जा रहा हो और दूसरा चूत रौंद रहा हो | रीमा शायद यही फंतासी केले की जरिये पूरी कर रही थी | शायद उसकी दो लंड एक साथ लेने की कोई दबी कामना हो, शायद वो मुहँ में प्रियम का चिकना लंड और चूत में रोहित का मुसल मोटा लंड सोच के इस समय केलो को अपने अन्दर ले रही हो | किसी को नहीं पता था की रीमा के दिमाग में क्या है, कई बार तो रीमा को भी नहीं पता होता की उसके इस छिपे चरित्र के हिस्से में क्या क्या छिपा है क्या क्या दबा है | फिलहाल रीमा के दोनों हाथ और उसका सर, अपनी अपनी जगह हिल रहे थे और बीच में मादक कराह उसके मुहँ से निकल रही थी | ऊऊऊह्ह्ह आआआह्ह्ह की आवाजे किचन में गूंज रही थी | आवाजे बेडरूम तक भी जा रही होंगे लेकिन इससे बेखबर रीमा खुद को दो सख्त मोटे केलो से चोदने में लगी थी |
उसने चिली केले को और ज्यादा नीचे तक छील दिया | अब केले का 80 प्रतिशत हिस्सा खुल गया था और पूरा का पूरा छिला केला रीमा मुहँ में घोंट जा रही थी | रोहित का लंड गले के नीचे तक उतारने के बाद रीमा को केले को गले के नीचे तक लेने में कोई बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी | प्रियम के लंड से बड़ा केला पलक झपकते ही रीमा में मुहँ में गायब हो जाता और फिर बाहर आ जाता | केले को मुहँ में तेजी से ले रही थी, जैसे लंड को चरम की तरफ बढ़ते देख औरते उसे जोर जोर से चूसने लगती है, पूरा का पूरा मुहँ के अन्दर घोंट लेती है वैसे ही रीमा भी कर रही थी |
उधर प्रियम के लंड ने जवाब दे दिया और इतनी देर से मुठियाते हुए अब उसका काम तमाम हो गया था | प्रियम ने एक हल्की कराह के साथ अपनी चकारी छोड़ दी | और हांफता हुआ अपनी सांसे काबू करने लगा | प्रियम के सफ़ेद गाढे रस से उसका सुपाडा सन गया था |
पिचकारी छुटते ही प्रियम की वासना का बुखार उतार गया उसके लिए ज्यादा देर रुकना खतरनाक था क्योंकि अगर पडोसी ने पीछे का गेट अन्दर से बंद कर लिया तो उसका फिर घर पंहुचना नामुनकिन हो जायेगा | उसके अपने लंड से टपकती लंड रस की बुँदे निचोड़ी और अपने मुरझाते लंड को अपनी पेंट में घुसेड़ा | अभी उसका और मन था रुकने का लेकिन मजबूर था उसने वहां से न चाहते हुए भी निकलने में भलाई समझी | उसने बेमन एक बार जी भर के किचन बैठी, अपने आस पास से बेपरवाह, अपनी चूत में धकाधक केला ठेल अपनी चूत को मसल रही चोद रही नंगी रीमा को देखकर, आइस्ते से खिड़की बंदकर वहां से छिपते छिपाते निकल गया | हालाँकि रास्ते में जाते समय उसके दिलो दिमाग में रीमा की उभरी छाती के दूध जैसे सफ़ेद गोरे गोरे स्तन, चिकनी जांघे और मांस से भरे नरम नरम चूतड़ ही घूम रहे थे | प्रियम का खेल खतम हो चूका था लेकिन रीमा का गेम तो अभी जारी था | अभी तो उसे काफी देर तक अपनी चूत केले से चोदने थी | यहाँ सबसे अच्छी बात यह थी की रीमा का हर चीज पर पूरा नियंत्रण था और वो खुद की चूत की प्यार बुझाने को किसी मर्द के लंड की मोहताज नहीं थी, न ही लंड से चुदाई करते समय मर्द की हवस पूरी करने की जिम्मेदारी | रीमा की केला चुदाई जारी थी,
साबुत केले ने रीमा की चूत में अच्छी खासी गहराई तक जगह बना ली थी, वहां भी रीमा का हाथ तेजी से हिल रहा था, रीमा का शरीर गरम था, चूत गीली थी, सांसे तेज थी और मुहँ से रुक रुक कर कराहे निकल रही थी | केला भी रीमा के चूत रस से सना था , रीमा को अपनी गुलाबी चूत की दीवारों के बीच साबुत केले का छिलका अगल ही अनुभव दे रहा था | कई बार उसे सख्त छिलके की चुभन महसूस होती जो किसी भी तरह से आनंददायी नहीं थी लेकिन जब तक चूत में चुभन न हो, रगड़न न हो मीठा मीठा हल्का हल्का दर्द न हो, उस दर्द की सिसकारियां न हो तब तक वो चुदाई ही कैसी | मसलना रगड़ना कुचलना और चुदना ही एक औरत के जिस्म और चूत की किस्मत होती है या यूं काहे हसरत भी होती है, कोई उन्हें मसले रगड़े कुचले और चोदे भी लेकिन सब कुछ प्यार से हौले हौले जमकर करे, जब जरुरत हो तब सख्ती भी दिखाए और बेदर्दी भी | रीमा का जिस्म गरम था और चूत भी इसलिए वो बेहरमी से साबुत केले को सख्ती से पकड़कर अपनी गीली गुलाबी चूत में गहराई तक ठेल रही थी |
हर औरत की तमन्ना होती है जब वो चुदे तो अच्छे से चुदे | चूत जब तक अन्दर गहराई तक नहीं रगड़ी जाती, पेली नहीं जाती, तब तक चूत की खुजली मिटती नहीं, फिर चाहे उसे लंड से चुदे या केले से | रीमा को पता था जितना अन्दर तक एक ही झटके में वो केले को अन्दर ठेलेगी, उतना ही उसे मीठे दर्द के साथ मजा भी आएगा, चूत की दीवारों में सनसनाहट होगी, उसकी कमर ने तरंगे उठेगी और कम्पन होगा | तभी उसकी केला से चुदाई से उसकी हवस शांत होगी, झड़ने को तो वो चूत दाना रगड़ कर मसल कर भी झड सकती थी, लेकिन चूत के अन्दर की खुजली मिटाने को तो चूत चोदनी ही पड़ेगी | चूत की गहराई तक मोटा मुसल लेकर चुदने से चूत, कमर , पिंडलियों और जांघो में जो झंकार होती है, उस कम्पन का अनुभव ही अलग होता है | रीमा को वही झंकार महसूस करनी थी वही कम्पन महसूस करना था | वही कम्पन जो उसने रोहित के मुसल लंड के अपने अन्दर जाने पर महसूस किया था | सोचने को आओ तो रीमा के लिए इससे ज्यादा अजीब कुछ नहीं होना चाहिये था, क्योंकि जो रीमा का स्वाभाव था उससे ये बिलकुल विपरीत था लेकिन सच ये भी था की ये वो रीमा भी नहीं थी, कामुकता को सोचने और जीने में जो फर्क है वही फर्क उस और इस रीमा में था | ये रीमा हर सामाजिक मानसिक बंधन से मुक्त कामुकता से भरी, मादकता से मस्त, दुनिया से बेपरवाह खुद के अरमानो को पूरा कर रही थी इसलिए उसके पास ये सब सोचने का वक्त नहीं था | फिलहाल वो किसी तरह के नए रिस्की एडवेंचर की जगह सॉफ्ट प्लेज़र की तलाश में थी | तभी उसके दिमाग में एक और ख्याल आया | उसने अपनी चूत से साबुत केला निकाल लिया | साबुत सख्त केले से रीमा की चूत का गुलाबी छेद पूरी तरह खुल गया था और बाहर से ही अन्दर तक रीमा की चूत रस से सरोबार मखमली गुलाबी सुरंग, और उसकी नाजुक दीवारों की गुलाबी सलवटे साफ़ नजर आ रही थी |
उसने मुहँ से छिला केला निकाल कर अपनी गरम चूत के गीले मुहाने पर टिका दिया | बिना छिले और छिले केले के कड़ेपन में जमीन आसमान का अंतर है | छिला केला आसानी से टूट सकता है अलग हो सकता है, इसलिए रीमा से अपनी चूत के गुलाबी ओंठ थाम लिए और चूत को फैला दिया ताकि केले को सीधे चूत के छेद के मुहँ में सेट करके अन्दर पेला जा सके | चूत अच्छे से गीली थी इसलिए रीमा को लार से सना केला लेने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए |
[/SIZE]