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[SIZE=150%] चल फ्रिज में से स्ट्राबेरी और दूध निकाल कर ला | प्रियम आज्ञाकारी बच्चे की तरह दोनों चीजे ले आया | चल स्ट्राबेरी मेरी चूत में घुसेड़, फिर मेरे चूत त्रिकोण पर ट्रायंगल शेप में सजा |
प्रियम कराहते हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए - चाची बहुत दर्द कर रहा है |
रीमा गरजी - करता है या मारू फिर से | इतना कहकर उसने लेडल की ताड़ बतोड़ 5 - 8 जोरदार चपत प्रियम के लंड पर लगा दी | प्रियम कराह कर रह गया | उसकी आँखों से आंसू निकल आये | रीमा के चेरे पर कोई भाव नहीं आये उसने अपनी जांघे हाथों में थामकर सीने से चिपका ली और चूत में स्ट्राबेरी डालने के लिए प्रियम का रास्ता साफ़ कर दिया | खड़े लंड पर हुए प्रहार से दर्द से बिलबिलाता प्रियम स्ट्राबेरी उठाकर रीमा की कसी चूत में घुसाने लगा |
मेरी चूत कौन चाटेगा साले तेरा बाप, उसे बुलाऊ, सुखी स्ट्राबेरी सूखी चूत में घुसेड रहा है | पहले उसे गीली कर फिर चूत को चाट, फिर चूत में डाल, | साले बस औरत को चोदने का ख्वाब देखने लगते है , पता उसकी झांट के एक बाल के बराबर भी नहीं | पहले औरत और उसकी चूत का क ख ग तो सीख लेता, लंड खड़ा होने लगा तो चूत चाहिए तुमारे जैसे चुतियो को | अन्दर तक घुसा स्ट्राबेरी ...... रोहित के कपूत, तुमारी माँ की चूत |
प्रियम ने दो स्ट्राबेरी रीमा की चूत में घुसा दी - बाकि ऊपर झांटो के सफाचट जंगल पर लगा | प्रियम ने इस बार बिना रीमा के टोके ही उस पर स्ट्राबेरी से ट्रायंगल बना दिया |
अब वो दूध की जग उठा और मुझे दे | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया आज तक तूने औरत की चुचियो से ही दूध पिया होगा | तुझे आज मै औरत की चूत से दूध पिलाती हूँ | चल जाकर नीचे चूत के सामने बैठ, और गांड के छेद के पास अपना मुहँ खोलकर बैठ | आज तुझे अपनी चूत का बना स्ट्राबेरी चूत शेक पिलाती हूँ | रीमा ने हलके हलके दूध को खुद पर गिराना शुरू किया, स्ट्राबेरी के बीचे से होता हुआ, रीमा के चूत के कसे गुलाबी ओंठो पर से बहता हुआ दूध नीचे प्रियम के मुहँ में गिरने लगा | जब दूध का आधा जग खाली हो गया तो रीमा ने अपनी चूत पर जोर डाला और पक्क से एक स्ट्राबेरी उसकी चूत से निकल प्रियम के मुहँ में जा गिरी |
रीमा - चल शेक बना अपने मुहँ में चूत दूध और चूत स्ट्राबेरी का और गटक जा, फिर तुझे आगे जन्नत दिखाती हूँ | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया |
रीमा ने धीरे धीरे सारा जग खाली कर दिया, प्रियम भी डर के मारे इतनी सावधानी से बैठा रहा की दूध की एक बूँद भी बाहर नहीं गिरी | दूध की आखिरी बूँद ख़त्म होते ही दूसरी स्ट्राबेरी चूत से निकालकर प्रियम के मुहँ में जा गिरी | प्रियम उसे भी खा गया |
रीमा - चल ये बाकि स्ट्राबेरी उठकर उधर प्लेट में रख और जीतन दूध लगा है चूत के आसपास सब चाट कर जा | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया |
जो भी हो रहा था वो प्रियम की सोच से कही बढ़कर था लेकिन वो इनमे से किसी का भी आनंद नहीं ले सकता था | वो बस एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह ये सब करता जा रहा था | रीमा को भी पता था प्रियम का लंड काफी देर से अकड़ा हुआ है, उसे लगा इतनी सजा काफी इस लड़के को | अपने अन्दर मन से नरमी लाते हुए लेकिन उसी टोन से बोली - इधर आज तेरा खूंटा नरम कर दू नहीं तो तेरी गोटिया फट जाएगी |
प्रियम का लंड अपने हाथ में लेते ही बहुत जोर जोर से मुठ मारने लगी | प्रियम का लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था और सख्त भी फिर भी प्रियम की हालत असल में अब ख़राब होने लगी, इससे अच्छा था की उसकी चाची उसके लंड को हाथ न लगाती | बिलकुल किसी गाड़ी के पिस्टन की तरह रीमा प्रियम के लंड पर हाथ चला रही थी, इस हालत में भी उसके पत्थर जैसे कठोर लंड पर उसे रीमा के जकड़न का दर्द हो रहा था, प्रियम दर्द और वासना से पागल हुआ जा रहा था | प्रियम दर्द से कराह रहा था या वासना से, इस वक्त ये बताना मुश्किल हो गया था | रीमा अपनी फुल स्पीड में उसके लंड पर स्ट्रोक कर रही थी | इसलिए जल्दी ही प्रियम झड़ने की कगार पर पहुच गया | प्रियम की हालत देख रीमा से स्ट्राबेरी से भरी प्लेट उठाई और उसके सामने प्रियम के लंड को जोर जोर से रगड़ने लगी |
प्रियम की पहले सी फूली गोलियां और ज्यादा दबाव सह नहीं पाई और अपना गरम सफ़ेद लावा छोड़ दिया | जो ऊपर की तरफ बहता हुआ उसके लंड के सुपाडे से स्ट्राबेरी पर गिरने लगा |
प्रियम के मुहँ से बस एक आखिरी कराह निकली - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ स्सस्सस्सस्सस्सस्सस ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह |
प्रियम बस दांत भींचे झड रहा था और रीमा उसके अन्दर की एक एक बूँद निचोड़ लेना चाहती थी - चल जब तक एक एक बूँद बाहर न निकल आये हिलाते रह इसको | तब तक मै बाथरूम से आई | रीमा अपने मांसल भरी चूतड़ मटकाती हुई बाथरूम में चली गयी और प्रियम अपने लंड को लगातार हिलाए जा रह था ताकि उसमे का बचा रस भी निचुड़ आये |
प्रियम सोच रहा था कहाँ फंस गया, कहाँ पिछली बार चाची ने कितनी आराम से लंड चूसा था अबकी बार कहाँ फंस गया, आज तो मेरी गांड ही फाड़ के रख दी है, रीमा चाची तो ऐसी नहीं थी | गलती सारी मेरी है मुझे किसी भी कीमत पर घर के अन्दर नहीं आना चाहिए था, बल्कि मुझे यहाँ आना ही नहीं चाहिए था | रीमा चाची से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहिए था, अब तो बस ऊपर वाले का सहारा है,.........यही सोचते सोचते उसका हाथ लंड पर धीमा हो गया | तभी पीछे से उसके सर पर पड़ा तड़ाक..........|
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प्रियम कराहते हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए - चाची बहुत दर्द कर रहा है |
रीमा गरजी - करता है या मारू फिर से | इतना कहकर उसने लेडल की ताड़ बतोड़ 5 - 8 जोरदार चपत प्रियम के लंड पर लगा दी | प्रियम कराह कर रह गया | उसकी आँखों से आंसू निकल आये | रीमा के चेरे पर कोई भाव नहीं आये उसने अपनी जांघे हाथों में थामकर सीने से चिपका ली और चूत में स्ट्राबेरी डालने के लिए प्रियम का रास्ता साफ़ कर दिया | खड़े लंड पर हुए प्रहार से दर्द से बिलबिलाता प्रियम स्ट्राबेरी उठाकर रीमा की कसी चूत में घुसाने लगा |
मेरी चूत कौन चाटेगा साले तेरा बाप, उसे बुलाऊ, सुखी स्ट्राबेरी सूखी चूत में घुसेड रहा है | पहले उसे गीली कर फिर चूत को चाट, फिर चूत में डाल, | साले बस औरत को चोदने का ख्वाब देखने लगते है , पता उसकी झांट के एक बाल के बराबर भी नहीं | पहले औरत और उसकी चूत का क ख ग तो सीख लेता, लंड खड़ा होने लगा तो चूत चाहिए तुमारे जैसे चुतियो को | अन्दर तक घुसा स्ट्राबेरी ...... रोहित के कपूत, तुमारी माँ की चूत |
प्रियम ने दो स्ट्राबेरी रीमा की चूत में घुसा दी - बाकि ऊपर झांटो के सफाचट जंगल पर लगा | प्रियम ने इस बार बिना रीमा के टोके ही उस पर स्ट्राबेरी से ट्रायंगल बना दिया |
अब वो दूध की जग उठा और मुझे दे | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया आज तक तूने औरत की चुचियो से ही दूध पिया होगा | तुझे आज मै औरत की चूत से दूध पिलाती हूँ | चल जाकर नीचे चूत के सामने बैठ, और गांड के छेद के पास अपना मुहँ खोलकर बैठ | आज तुझे अपनी चूत का बना स्ट्राबेरी चूत शेक पिलाती हूँ | रीमा ने हलके हलके दूध को खुद पर गिराना शुरू किया, स्ट्राबेरी के बीचे से होता हुआ, रीमा के चूत के कसे गुलाबी ओंठो पर से बहता हुआ दूध नीचे प्रियम के मुहँ में गिरने लगा | जब दूध का आधा जग खाली हो गया तो रीमा ने अपनी चूत पर जोर डाला और पक्क से एक स्ट्राबेरी उसकी चूत से निकल प्रियम के मुहँ में जा गिरी |
रीमा - चल शेक बना अपने मुहँ में चूत दूध और चूत स्ट्राबेरी का और गटक जा, फिर तुझे आगे जन्नत दिखाती हूँ | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया |
रीमा ने धीरे धीरे सारा जग खाली कर दिया, प्रियम भी डर के मारे इतनी सावधानी से बैठा रहा की दूध की एक बूँद भी बाहर नहीं गिरी | दूध की आखिरी बूँद ख़त्म होते ही दूसरी स्ट्राबेरी चूत से निकालकर प्रियम के मुहँ में जा गिरी | प्रियम उसे भी खा गया |
रीमा - चल ये बाकि स्ट्राबेरी उठकर उधर प्लेट में रख और जीतन दूध लगा है चूत के आसपास सब चाट कर जा | प्रियम ने बिलकुल वैसा ही किया |
जो भी हो रहा था वो प्रियम की सोच से कही बढ़कर था लेकिन वो इनमे से किसी का भी आनंद नहीं ले सकता था | वो बस एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह ये सब करता जा रहा था | रीमा को भी पता था प्रियम का लंड काफी देर से अकड़ा हुआ है, उसे लगा इतनी सजा काफी इस लड़के को | अपने अन्दर मन से नरमी लाते हुए लेकिन उसी टोन से बोली - इधर आज तेरा खूंटा नरम कर दू नहीं तो तेरी गोटिया फट जाएगी |
प्रियम का लंड अपने हाथ में लेते ही बहुत जोर जोर से मुठ मारने लगी | प्रियम का लंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था और सख्त भी फिर भी प्रियम की हालत असल में अब ख़राब होने लगी, इससे अच्छा था की उसकी चाची उसके लंड को हाथ न लगाती | बिलकुल किसी गाड़ी के पिस्टन की तरह रीमा प्रियम के लंड पर हाथ चला रही थी, इस हालत में भी उसके पत्थर जैसे कठोर लंड पर उसे रीमा के जकड़न का दर्द हो रहा था, प्रियम दर्द और वासना से पागल हुआ जा रहा था | प्रियम दर्द से कराह रहा था या वासना से, इस वक्त ये बताना मुश्किल हो गया था | रीमा अपनी फुल स्पीड में उसके लंड पर स्ट्रोक कर रही थी | इसलिए जल्दी ही प्रियम झड़ने की कगार पर पहुच गया | प्रियम की हालत देख रीमा से स्ट्राबेरी से भरी प्लेट उठाई और उसके सामने प्रियम के लंड को जोर जोर से रगड़ने लगी |
प्रियम की पहले सी फूली गोलियां और ज्यादा दबाव सह नहीं पाई और अपना गरम सफ़ेद लावा छोड़ दिया | जो ऊपर की तरफ बहता हुआ उसके लंड के सुपाडे से स्ट्राबेरी पर गिरने लगा |
प्रियम के मुहँ से बस एक आखिरी कराह निकली - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ स्सस्सस्सस्सस्सस्सस ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह |
प्रियम बस दांत भींचे झड रहा था और रीमा उसके अन्दर की एक एक बूँद निचोड़ लेना चाहती थी - चल जब तक एक एक बूँद बाहर न निकल आये हिलाते रह इसको | तब तक मै बाथरूम से आई | रीमा अपने मांसल भरी चूतड़ मटकाती हुई बाथरूम में चली गयी और प्रियम अपने लंड को लगातार हिलाए जा रह था ताकि उसमे का बचा रस भी निचुड़ आये |
प्रियम सोच रहा था कहाँ फंस गया, कहाँ पिछली बार चाची ने कितनी आराम से लंड चूसा था अबकी बार कहाँ फंस गया, आज तो मेरी गांड ही फाड़ के रख दी है, रीमा चाची तो ऐसी नहीं थी | गलती सारी मेरी है मुझे किसी भी कीमत पर घर के अन्दर नहीं आना चाहिए था, बल्कि मुझे यहाँ आना ही नहीं चाहिए था | रीमा चाची से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहिए था, अब तो बस ऊपर वाले का सहारा है,.........यही सोचते सोचते उसका हाथ लंड पर धीमा हो गया | तभी पीछे से उसके सर पर पड़ा तड़ाक..........|
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